আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম
8788 - أخبرني محمد بن المؤمَّل بن الحسن، حدثنا الفضل بن محمد الشَّعْراني، حدثنا نُعَيم بن حمّاد، حدثنا بَقِيَّة بن الوليد، عن يزيد بن عبد الله الجُهَني، عن أنس بن مالك قال: دخلتُ على عائشةَ ورجلٌ معها، فقال الرجل: يا أمَّ المؤمنين، حدِّثينا عن الزَّلزلة، فأعرَضَت عنه بوجهِها، قال أنس: فقلت لها: حدِّثينا يا أمَّ المؤمنين عن الزَّلزلة، فقالت: يا أنسُ، إن حدَّثتُكَ عنها عشتَ حزينًا، وبُعِثْتَ حين تُبعَثُ وذلك الحُزْنُ في قلبك، فقلت: يا أُمَّاه، حدَّثينا، فقالت: إنَّ المرأةَ إذا خَلَعَت ثيابَها في غير بيتِ زوجِها، هَتَكَت ما بينَها وبينَ الله عز وجل من حِجابٍ، وإنْ تطيَّبَت لغير زوجِها كان عليها نارًا وشَنَارًا، فإذا استَحلُّوا الزِّنى وشربوا الخمور بعدَ هذا، وضربوا المعازفَ، غارَ اللهُ في سمائِه فقال: تَزلزَلي بهم، فإن تابوا ونَزَعُوا وإلَّا هَدَمَها عليهم، فقال أنس: عقوبةً لهم؟ قالت: رحمةً وبركةً وموعظةً للمؤمنين، ونَكالًا وسَخْطةً وعذابًا للكافرين، قال أنس: فما سمعتُ بعدَ رسول الله صلى الله عليه وسلم حديثًا أنا أشدُّ به فرحًا مني بهذا الحديث، بل أعيشُ فَرِحًا، وأُبعَثُ حين أُبعَثُ وذلك الفرحُ في قلبي.أو قال: في نَفْسي [1].هذا حديث صحيح على شرط مسلم، ولم يُخرجاه.
আনাস ইবনে মালেক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে গেলাম, যখন তাঁর সাথে একজন লোক ছিল। লোকটি বলল: হে উম্মুল মু'মিনীন, আমাদের ভূমিকম্প সম্পর্কে বলুন। তখন তিনি তার দিক থেকে মুখ ফিরিয়ে নিলেন। আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন: তখন আমি তাঁকে বললাম: হে উম্মুল মু'মিনীন, আমাদের ভূমিকম্প সম্পর্কে বলুন। তিনি বললেন: হে আনাস, আমি যদি তোমাকে এই সম্পর্কে বলি, তাহলে তুমি দুঃখী হয়ে জীবন কাটাবে, আর যখন তোমাকে পুনরুত্থিত করা হবে, তখন সেই দুঃখ তোমার অন্তরে থাকবে। আমি বললাম: হে আমার মাতা, আমাদের বলুন। তিনি বললেন: নিশ্চয়ই কোনো নারী যখন তার স্বামীর ঘর ব্যতীত অন্য কোথাও পোশাক খুলে ফেলে, তখন সে তার ও আল্লাহ আযযা ওয়া জাল্লার মাঝের পর্দা ছিঁড়ে ফেলে। আর যদি সে তার স্বামী ব্যতীত অন্য কারো জন্য সুগন্ধি ব্যবহার করে, তবে তা তার জন্য আগুন ও কলঙ্ক হয়ে দাঁড়ায়। এরপর যখন তারা ব্যভিচারকে বৈধ মনে করবে, মদ্যপান করবে এবং বাদ্যযন্ত্র বাজাবে, তখন আল্লাহ তাঁর আসমানে (আকাশে) ঈর্ষান্বিত (ক্রুদ্ধ) হয়ে বলবেন: এদেরকে কম্পিত করো। এরপর তারা যদি তাওবা করে এবং বিরত হয় (ভালো), অন্যথায় তিনি তাদের ওপর তা (পৃথিবী/ঘর) ধ্বংস করে দেবেন। আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: এটি কি তাদের জন্য শাস্তি? তিনি বললেন: (হ্যাঁ, কিন্তু) মুমিনদের জন্য এটি রহমত, বরকত ও উপদেশ, আর কাফিরদের জন্য তা হলো কঠোর শাস্তি, আল্লাহর ক্রোধ এবং আযাব। আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর পর আমি এমন কোনো হাদীস শুনিনি, যা দ্বারা আমি এই হাদীসটির চেয়ে বেশি আনন্দিত হয়েছি। বরং আমি আনন্দের সাথে জীবন যাপন করব, আর যখন পুনরুত্থিত হব, তখন সেই আনন্দ আমার অন্তরে (বা বলেছেন: আমার নফসে/আত্মায়) থাকবে।
تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] إسناده واهٍ، وقال الذهبي في "تلخيصه": بل أحسبه موضوعًا على أنس، ونعيم منكر الحديث إلى الغابية مع أنَّ البخاري روى عنه. قلنا: كذا عصَّب الجناية برأس نعيم وحده، مع أن نعيمًا متابع على بعضه كما سيأتي. وفي هذا الإسناد غير ما علّة، فبقية بن الوليد ليس بذاك القوي، وشيخه فيه يزيد لا يُعرَف، وقد ذكره الذهبي في "ميزان الاعتدال" وذكر له خبرًا آخر من رواية بقية عنه، وقال: لا يصحُّ خبره. ثم إنَّ روايته عن أنس منقطعة بينهما راوٍ لا يعرف أيضًا.فقد أخرجه نعيم بن حماد في "الفتن" (1729) وزاد فيه بين يزيد الجهني وأنس أبا العالية، هكذا كنَّاه، وأبو العالية في هذه الطبقة رفيع بن مِهران.وأخرج شطره الثاني في قصة الزلزلة ابن أبي الدنيا في "العقوبات" (17) عن محمد بن ناصح، عن بقية بن الوليد، عن يزيد الجهني قال: حدثني أبو العلاء، عن أنس. فكناه أبا العلاء، ولا يعرف من ذا، وقد أحصينا خمسة من الرواة ممَّن يكنى أبا العلاء كلهم يروي عن أنس بن مالك، وهم: خالد بن طهمان الخفّاف، وعبد الرحمن بن آمين - ويقال: يامين - ويزيد بن درهم، وصَبيح الهُذلي وموسى القتبي، وأغلبهم مجاهيل، وليس واحد منهم من الثقات.وقد سلف بعض هذا الخبر - وهو قصة خلع المرأة ثيابها في غير بيت زوجها - برقم (7973) و (7974) من حديث أبي المليح عن عائشة. وإسناده صحيح.وانظر في عقوبة من تطيبت لغير زوجها حديث أبي موسى الأشعري السالف برقم (3539). وإسناده قوي. وأخرجه ابن مردويه في "تفسيره" كما في "تفسير ابن كثير" 3/ 270 من طريق أبي كريب محمد بن العلاء، عن زيد بن الحباب، بهذا الإسناد.وأخرجه البزار (8686) من طريق أبي عوانة، عن عمر بن أبي سلمة، عن أبيه، عن أبي هريرة.وإسناده يعتبر به محتمل للتحسين.وأخرجه ابن أبي حاتم في "تفسيره" 4/ 1312، والطبراني في "الأوسط" (1862) من طريق أسباط بن نصر، عن إسماعيل السدي، عن أبي المنهال، عن أبي هريرة رفعه قال: "سألت ربي لأمتي أربع خصال، فأعطاني ثلاثًا ومنعني واحدة … "، فزاد رابعة، وهي قوله: "سألته أن لا تَكفُر أمتي صفقة واحدة فأعطانيها". وإسناده ضعيف لجهالة أبي المنهال هذا، وقد ذكره البخاري في "تاريخه" 9/ 72 وابن أبي حاتم في "الجرح والتعديل" 9/ 445، ولم يذكرا اسمه ولا راويًا عنه سوى السدي، وزيادته المذكورة زيادة منكرة انفرد بها.وفي الباب عن غير واحد من الصحابة في سؤال الثلاث، منها حديثا أنس بن مالك وثوبان السالفان عند المصنف برقم (1197) و (8595).