سلسلة الأحاديث الصحيحة
Silsilatul Ahadisis Sahihah
সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ
179 - ` لا طاعة لأحد في معصية الله تبارك وتعالى `.
رواه أحمد (5 / 66) عن عبد الله بن الصامت قال:
` أراد زياد أن يبعث عمران بن حصين على خراسان، فأبى عليهم، فقال له أصحابه:
أتركت خراسان أن تكون عليها؟ قال: فقال إني والله ما يسرني أن أصلى بحرها
وتصلون ببردها وإني أخاف إذا كنت في نحور العدو أن يأتيني كتاب من زياد، فإن
أنا مضيت هلكت، وإن رجعت ضربت عنقي، قال: فأراد الحكم بن عمرو الغفاري
عليها، قال: فانقاد لأمره، قال: فقال عمران: ألا أحد يدعو لي الحكم؟
قال: فانطلق الرسول، قال: فأقبل الحكم إليه، قال: فدخل عليه، قال: فقال
عمران للحكم: أسمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: (فذكره) قال: نعم
قال عمران: لله الحمد أو الله أكبر `.
قلت: وإسناده صحيح على شرط مسلم، وقواه الحافظ في ` الفتح ` (13 / 109)
وروى الطبراني في ` الكبير ` (1 / 154 / 2) المرفوع منه فقط بهذا اللفظ.
وله طريق أخرى عند الطيالسي (856) وأحمد (4 / 432، 5 / 66) والطبراني
(155 / 1) من طرق عن محمد قال:
` جاء رجل إلى عمران بن حصين ونحن عنده، فقال: استعمل الحكم بن عمرو الغفاري
على خراسان، فتمناه عمران حتى قال له رجل من القوم ألا ندعو لك؟ فقال له: لا
ثم قام عمران، فلقيه بين الناس فقال عمران: إنك قد وليت أمرا من أمر
المسلمين
عظيما، ثم أمره ونهاه ووعظه، ثم قال: هل تذكر يوم قال رسول الله صلى الله
عليه وسلم ` لا طاعة لمخلوق في معصية الله تبارك وتعالى `؟ قال الحكم: نعم،
قال عمران: الله أكبر `.
وفي رواية لأحمد عن محمد:
` أنبئت أن عمران بن حصين قال للحكم الغفاري - وكلاهما من أصحاب رسول الله
صلى الله عليه وسلم: هل تعلم يوم قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: لا طاعة
في معصية الله تبارك وتعالى؟ قال: نعم، قال: الله أكبر، الله أكبر `.
ورجاله ثقات رجال الشيخين لكنه منقطع بين محمد وهو ابن سيرين وبين عمران كما
هو صريح الرواية الثانية.
ثم أخرجه أحمد والطبراني والحاكم (3 / 443) من طريقين عن الحسن:
` أن زيادا استعمل الحكم الغفاري على جيش فأتاه عمران بن حصين فلقيه بين الناس
فقال: أتدري لم جئتك؟ فقال له ` لم؟ قال: هل تذكر قول رسول الله صلى الله
عليه وسلم للرجل الذي قال أميره قع في النار! ` فقام الرجل ليقع فيها ` فأدرك
فاحتبس، فأخبر بذلك النبي صلى الله عليه وسلم فقال: لو وقع فيها لدخلا النار
جميعا، لا طاعة في معصية الله تبارك وتعالى؟ قال: قال: إنما أردت أن أذكرك
هذا الحديث `.
وقال الحاكم: ` صحيح الإسناد `. ووافقه الذهبي.
قلت: وهو كما قالا إن كان الحسن - وهو البصري - سمعه من عمران فقد كان
مدلسا وقال الهيثمي في ` المجمع ` (5 / 226) بعد أن ساقه من طريق عبد الله
بن
الصامت، وطريق الحسن هذه:
` رواه أحمد بألفاظ، والطبراني باختصار، وفي بعض طرقه لا طاعة لمخلوق في
معصية الخالق، ورجال أحمد رجال الصحيح `.
وللمرفوع منه طريق أخرى مختصرا بلفظ:
` لا طاعة في معصية الله تبارك وتعالى `.
অনুবাদঃ ইমরান ইবনে হুসাইন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত:
“আল্লাহ তাবারাকা ওয়া তা‘আলার নাফরমানী বা অবাধ্যতার ক্ষেত্রে কারোই আনুগত্য করা যাবে না।”
(বর্ণনা অনুসারে এসেছে যে,) যিয়াদ (শাসক) ইমরান ইবনে হুসাইন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে খোরাসানের শাসক হিসেবে প্রেরণ করতে চাইলেন, কিন্তু তিনি তাতে অস্বীকৃতি জানালেন। তখন তাঁর সঙ্গীরা তাঁকে বললেন, আপনি খোরাসানের (শাসনের দায়িত্ব) ছেড়ে দিলেন? তিনি বললেন, আল্লাহর কসম! আমার কাছে এটা মোটেও পছন্দনীয় নয় যে, আমি তার গরমের মধ্যে সালাত আদায় করব আর তোমরা তার শীতের মধ্যে সালাত আদায় করবে। আর আমি ভয় করি, যখন আমি শত্রুদের সম্মুখীন হব, তখন হয়তো যিয়াদের পক্ষ থেকে আমার কাছে কোনো নির্দেশনামা আসবে। যদি আমি তা মেনে অগ্রসর হই, তাহলে ধ্বংস হয়ে যাব। আর যদি ফিরে আসি, তাহলে আমার গর্দান কেটে ফেলা হবে।
অতঃপর আল-হাকাম ইবনে আমর আল-গিফারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) সেই দায়িত্ব নিতে চাইলেন এবং তিনি সে অনুযায়ী নির্দেশ মান্য করলেন। ইমরান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: কেউ কি আল-হাকামকে আমার কাছে ডেকে আনতে পারবে? তখন একজন দূত গেলেন। এরপর আল-হাকাম তাঁর কাছে আসলেন এবং প্রবেশ করলেন।
ইমরান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তখন আল-হাকামকে জিজ্ঞেস করলেন: আপনি কি আল্লাহর রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লামকে বলতে শুনেছেন: (আল্লাহর অবাধ্যতার ক্ষেত্রে কারো আনুগত্য নেই)? তিনি (আল-হাকাম) বললেন: হ্যাঁ। ইমরান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: আল্লাহু আকবার (আল্লাহই মহান)।
অন্য একটি বর্ণনায় আছে: “আল্লাহ তাবারাকা ওয়া তা‘আলার নাফরমানীর কাজে কোনো সৃষ্টিজীবের আনুগত্য করা বৈধ নয়।”
অন্য আরেকটি বর্ণনায় আছে: আল্লাহর রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “আল্লাহ তাবারাকা ওয়া তা‘আলার অবাধ্যতার ক্ষেত্রে আনুগত্য করা যাবে না।”