হাদীস বিএন


সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ





সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (306)


306 - ` لما أسري بالنبي صلى الله عليه وسلم إلى المسجد الأقصى أصبح يتحدث الناس
بذلك فارتد ناس ممن كانوا آمنوا به وصدقوه وسعوا بذلك إلى أبي بكر رضي الله
عنه فقالوا: هل لك إلى صاحبك يزعم أنه أسري به الليلة إلى بيت المقدس؟ قال:
أو قال ذلك؟ قالوا: نعم، قال: لئن كان قال ذلك لقد صدق، قالوا: أو تصدقه
أنه ذهب الليلة إلى بيت المقدس وجاء قبل أن يصبح؟ قال: نعم إني لأصدقه فيما
هو أبعد من ذلك، أصدقه بخبر السماء في غدوة أو روحة. فلذلك سمي أبو بكر
الصديق `.
أخرجه الحاكم (3 / 62) من طريق محمد بن كثير الصنعاني حدثنا معمر بن راشد عن
الزهري عن عروة عن عائشة رضي الله عنها قالت: فذكره.
وقال: ` صحيح الإسناد `. ووافقه الذهبي.
قلت: وفيه نظر، لأن الصنعاني فيه ضعف من قبل حفظه، ولذلك أورده الذهبي في
` الضعفاء ` وقال: ` ضعفه أحمد `.
وقال الحافظ في ` التقريب `: ` صدوق كثير الغلط `.
قلت: فمثله لا يحتج به إذا انفرد، لكنه قد توبع كما يأتي، فحديثه لذلك صحيح
وقد عزاه الحافظ ابن كثير في ` التفسير ` (15 / 138) للبيهقي (يعني في
` الدلائل `) من طريق الحاكم، ثم سكت عليه، وكان ذلك لشواهده التي أشرنا
إليها آنفا، وإنما ذكرت الحديث من أجل ما فيه من سبب تسمية أبي بكر بـ
` الصديق `، وإلا فسائره متواتر صح من طرق جماعة من الصحابة قد استقصى كثيرا
منها الحافظ ابن كثير في أول تفسيره لسورة ` الإسراء `، فلنذكر هنا الشواهد
لهذه الزيادة فأقول:
الأول: عن شداد بن أوس مرفوعا بلفظ:
` صليت بأصحابي صلاة العتمة بمكة معتما فأتاني جبريل عليه السلام بدابة أبيض
أو قال: بيضاء ... (الحديث وفيه:) فقال أبو بكر: أشهد أنك لرسول الله،
وقال المشركون: انظروا إلى ابن أبي كبشة يزعم أنه أتى بيت المقدس الليلة!
... الحديث.
أخرجه ابن أبي حاتم والبيهقي وقال: ` هذا إسناد صحيح `.
الثاني: عن ابن شهاب عن أبي سلمة بن عبد الرحمن في قصة الإسراء قال:
` فتجهز - أو كلمة نحوها - ناس من قريش إلى أبي بكر، فقالوا: هل لك في صاحبك
يزعم أنه جاء إلى بيت المقدس ثم رجع إلى مكة في ليلة واحدة؟ !
فقال أبو بكر: أو قال ذلك؟ قالوا: نعم. قال: فأنا أشهد لئن كان قال ذلك
لقد صدق، قالوا: فتصدقه في أن يأتي الشام في ليلة واحدة، ثم يرجع إلى مكة
قبل أن يصبح؟ قال: نعم أنا أصدقه بأبعد من ذلك أصدقه بخبر السماء، قال
أبو سلمة: سمي أبو بكر الصديق `.
قلت: وهذا سند صحيح مرسل، وشاهد قوي لموصول عائشة.
الثالث: عن أبي معشر قال: أنبأنا أبو وهب مولى أبي هريرة:
` أن رسول الله صلى الله عليه وسلم ليلة أسري به، قلت لجبريل إن قومي لا
يصدقوني، فقال له جبريل يصدقك أبو بكر وهو الصديق `.
أخرجه ابن سعد في ` الطبقات ` (3 / 1 / 120) وهذا سند ضعيف.
وروى الحاكم (3 / 62) عن محمد بن سليمان السعدي يحدث عن هارون بن سعد عن
عمران بن ظبيان عن أبي يحيى سمع عليا:
` لأنزل الله تعالى اسم أبي بكر رضي الله عنه من السماء صديقا ` وقال:
` لولا مكان محمد بن سليمان السعيدي من الجهالة لحكمت لهذا الإسناد بالصحة `.
ووافقه الذهبي.
(تنبيه) كذا وقع في ` المستدرك `: ` السعدي ` وفي الموضع الآخر:
` السعيدي ` وكله خطأ والصواب ` العبدي ` كما في ` الجرح والتعديل ` (3 / 2
/ 269) و ` الميزان ` و ` اللسان `.
هذا وقد جزم الإمام أبو جعفر الطحاوي في ` مشكل الآثار ` (2 / 145) بأن سبب
تسمية أبي بكر رضي الله عنه و ` الصديق ` إنما هو سبقه الناس إلى تصديقه رسول
الله صلى الله عليه وسلم على إتيانه بيت المقدس من مكة، ورجوعه منه إلى منزله
بمكة في تلك الليلة، وإن كان المؤمنون يشهدون لرسول الله صلى الله عليه وسلم
بمثل ذلك إذا وقفوا عليه.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত:

যখন নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম-কে মসজিদুল আকসা-তে ইসরা (রাত্রিকালীন ভ্রমণ) করানো হলো, তখন সকালে মানুষজন এ নিয়ে আলোচনা করতে শুরু করল। ফলে যারা তাঁর প্রতি ঈমান এনেছিল এবং তাঁকে সত্যায়ন করেছিল, তাদের মধ্যে কিছু লোক মুরতাদ (ধর্মত্যাগী) হয়ে গেল।

তারা এই খবর নিয়ে আবু বকর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে গেল এবং বলল: আপনি কি আপনার বন্ধুর খবর রাখেন? তিনি দাবি করছেন যে, তাকে নাকি গত রাতে বাইতুল মাকদিসে (জেরুজালেম) ইসরা করানো হয়েছে?

তিনি (আবু বকর) বললেন: তিনি কি সত্যিই এমন বলেছেন? তারা বলল: হ্যাঁ। তিনি বললেন: যদি তিনি এমন বলে থাকেন, তবে অবশ্যই সত্য বলেছেন।

তারা বলল: আপনি কি তাকে এই বিষয়েও বিশ্বাস করেন যে, তিনি এক রাতের মধ্যে বাইতুল মাকদিসে গেলেন এবং সকাল হওয়ার আগেই ফিরেও আসলেন?

তিনি (আবু বকর) বললেন: হ্যাঁ, আমি তো তাঁকে এর চেয়েও দূরের বিষয়ে বিশ্বাস করি। আমি সকাল-সন্ধ্যা তাঁর কাছে আসা আসমানের (ওহীর) খবরকেও সত্য বলে বিশ্বাস করি।

এ কারণেই আবু বকরকে ’আস-সিদ্দিক’ (সত্যায়নকারী) নামে নামকরণ করা হলো।