সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ
531 - ` قال الله عز وجل: يؤذيني ابن آدم يقول: يا خيبة الدهر (وفي رواية: يسب
الدهر) فلا يقولن أحدكم: يا خيبة الدهر، فإني أنا الدهر: أقلب ليله ونهاره
فإذا شئت قبضتهما `.
أخرجه البخاري (3 / 330، 4 / 478) ومسلم (7 / 45) والسياق له وأبو داود
(5274) وأحمد (2 / 138، 272، 275) من طرق عن الزهري عن ابن المسيب عن
أبي هريرة قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم فذكره. واستدركه
الحاكم (2 / 453) من هذا الوجه واللفظ وقال: ` صحيح على شرطهما ولم
يخرجاه هكذا `. ووافقه الذهبي، فوهما في الاستدراك على مسلم وقد أخرجه كما
ترى واغتر به المنذري فأورده في ` الترغيب ` بهذا اللفظ وقال (3 / 290) :
` رواه أبو داود والحاكم وقال: صحيح على شرط مسلم `.
وفي هذا الكلام على قلته ثلاث مؤاخذات:
الأولى: لم يعزه لمسلم وهو عنده بهذا التمام كما رأيت.
الثانية: عزاه لأبي داود وهو عنده مختصر ليس فيه ` يقول يا خيبة الدهر `
وإنما عنده الرواية الأخرى وهي رواية للشيخين وكذا ليس عنده ` فلا يقولن
أحدكم يا خيبة الدهر `.
الثالثة: أنه قال: إن الحاكم صححه على شرط مسلم والواقع أنه إنما صححه على
شرط الشيخين. وهو الصواب الموافق لحال الإسناد.
معنى الحديث:
قال المنذري: ` ومعنى الحديث أن العرب كانت إذا نزلت بأحدهم نازلة وأصابته
مصيبة أو مكروه يسب الدهر اعتقادا منهم أن الذي أصابه فعل الدهر كما كانت العرب
تستمطر بالأنواء وتقول: مطرنا بنوء كذا اعتقادا أن ذلك فعل الأنواء، فكان
هذا كاللاعن للفاعل ولا فاعل لكل شيء إلا الله تعالى خالق كل شيء وفاعله
فنهاهم النبي صلى الله عليه وسلم عن ذلك.
وكان (محمد) ابن داود ينكر رواية أهل الحديث ` وأنا الدهر ` بضم الراء
ويقول: لو كان كذلك كان الدهر اسما من أسماء الله عز وجل وكان يرويه ` وأنا
الدهر أقلب الليل والنهار `، بفتح راء الدهر على النظر في معناه: أنا طول
الدهر والزمان أقلب الليل والنهار. ورجح هذا بعضهم ورواية من قال: ` فإن
الله هو الدهر ` يرد هذا. والجمهور
على ضم الراء. والله أعلم `.
وللحديث طريق أخرى بلفظ آخر وهو: ` لا تسبوا الدهر، فإن الله عز وجل قال:
أنا الدهر الأيام والليالي لي أجددها وأبليها وآتي بملوك بعد ملوك `.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: আল্লাহ তা‘আলা ইরশাদ করেন, “আদম সন্তান আমাকে কষ্ট দেয়। তারা বলে, ‘হায়রে সময়ের দুর্ভাগ্য!’ (অন্য বর্ণনায়: তারা সময়কে গালি দেয়)। তোমাদের কেউ যেন ‘হায়রে সময়ের দুর্ভাগ্য!’—এ কথা না বলে। কারণ, আমিই তো কাল (সময়)। আমিই তার রাত ও দিনকে পরিবর্তন করি। আর যখন আমি ইচ্ছা করি, তখন এ দুটোকেই গুটিয়ে নেই।”
