হাদীস বিএন


সুনান আবী দাউদ





সুনান আবী দাউদ (161)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ الْبَزَّازُ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي الزِّنَادِ، قَالَ ذَكَرَهُ أَبِي عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ، عَنِ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَمْسَحُ عَلَى الْخُفَّيْنِ ‏.‏ وَقَالَ غَيْرُ مُحَمَّدٍ عَلَى ظَهْرِ الْخُفَّيْنِ ‏.‏




মুগীরাহ ইবনু শু'বাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মোজাদ্বয়ের উপর মাসাহ্‌ করতেন। বর্ণনাকারী মুহাম্মাদ ব্যতীত অন্যদের বর্ণনায় ‘মোজাদ্বয়ের উপরিভাগ’ মাসাহ করতেন কথাটি রয়েছে।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: حسن صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن ، مشکوۃ المصابیح (522) ، قال الذہبی فی عبدالرحمٰن بن ابی الزناد: ’’حدیثہ من قبیل الحسن‘‘ (سیر اعلام النبلاء: 8/ 168، 169)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حديث صحيح، وهذا إسناد حسن من أجل عبد الرحمن بن أبي الزناد، وقد توبع، وباقي رجاله ثقات. أبو الزناد: هو عبد الله بن ذكوان. وأخرجه الترمذي (٩٨) من طريق عبد الرحمن بن أبي الزناد، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٨١٥٦). وانظر ما سلف برقم (١٤٩).









সুনান আবী দাউদ (162)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ، حَدَّثَنَا حَفْصٌ، - يَعْنِي ابْنَ غِيَاثٍ - عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ عَبْدِ خَيْرٍ، عَنْ عَلِيٍّ، - رضى الله عنه - قَالَ لَوْ كَانَ الدِّينُ بِالرَّأْىِ لَكَانَ أَسْفَلُ الْخُفِّ أَوْلَى بِالْمَسْحِ مِنْ أَعْلاَهُ وَقَدْ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَمْسَحُ عَلَى ظَاهِرِ خُفَّيْهِ ‏.




‘আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, ধর্মের মাপকাঠি যদি রায়ের (মানুষের মনগড়া অভিমত ও বিবেক-বিবেচনার) উপর নির্ভরশীল হত, তাহলে মোজার উপরিভাগের চেয়ে নীচের (তলার) দিক মাসাহ্‌ করাই উত্তম হত। অথচ আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে তাঁর (পায়ের) মোজাদ্বয়ের উপরিভাগ মাসাহ্‌ করতে দেখেছি।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، أبو إسحاق السبیعي مدلس (طبقات المدلسین: 91/ 3) وعنعن ، وحدیث الحمیدی (47،بتحقیقي) یغني عنہ ، (انوار الصحیفہ ص 19)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح كما قال الحافظ ابن حجر في "التخليص الحبير" ١/ ١٦٠. الأعمش: هو سليمان بن مهران، وأبو إسحاق: هو عمرو بن عبد الله السبيعي، وعبد خير: هو ابن يزيد الهمداني. وأخرجه البيهقي ١/ ٢٩٢، وابن عبد البر في "التمهيد" ١١/ ١٥٠ من طريق المصنف، بهذا الإسناد. وأخرجه الدارقطني (٧٦٩) و (٧٧٠) و (٧٨٣)، والبيهقي ١/ ٢٩٢، والبغوي في "شرح السنة" (٢٣٩) من طرق عن حفص بن غياث، به. وانظر الروايات الآتية بعده.









সুনান আবী দাউদ (163)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ، قَالَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ، عَنِ الأَعْمَشِ، بِإِسْنَادِهِ بِهَذَا الْحَدِيثِ قَالَ مَا كُنْتُ أُرَى بَاطِنَ الْقَدَمَيْنِ إِلاَّ أَحَقَّ بِالْغَسْلِ حَتَّى رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَمْسَحُ عَلَى ظَهْرِ خُفَّيْهِ ‏.‏




আ‘মাশ (রাহিমাহুল্লাহ) হতে বর্ণিত, তাতে রয়েছে (‘আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন) : আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে তাঁর মোজার উপরিভাগ মাসাহ্‌ করতে দেখার আগে পায়ের তলার দিক ধৌত করাকে অধিক যুক্তি সঙ্গত মনে করতাম।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، أبو إسحاق السبیعي مدلس (طبقات المدلسین: 91/ 3) وعنعن ، وحدیث الحمیدی (47،بتحقیقي) یغني عنہ ، (انوار الصحیفہ ص 19)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. وأخرجه البيهقي ١/ ٢٩٢ من طريق المصنف، بهذا الإسناد. وأخرجه البزار (٧٨٩) من طريق محاضر بن مورع، عن الأعمش، به. وأخرجه الدارمي (٧١٥)، وأحمد (١٢٦٤)، والبزار (٧٩٤)، والبيهقي ١/ ٢٩٢ من طريق يونس، والدارقطني ٤/ ٤٧ من طريق سفيان الثوري، والبيهقي ١/ ٢٩٢ من طريق إبراهيم بن طهمان، كلاهما عن أبي إسحاق، به. قوله: "باطن القدمين" أراد بالقدمين الخفين كما في رواية حفص السالفة، وكما قال وكيع في روايته الآتية قريباً، ولقوله في آخر هذه الرواية نفسها: "يمسح على ظهر خفيه". قال البيهقي: إنما أُريد به قدما الخف بدليل ما مضى -يعني رواية حفص-، وبدليل ما روينا عن خالد بن علقمة، عن عبد خير، عن علي في وصفه وضوء النبي ﷺ، فذكر أنه غسل رجليه ثلاثاً ثلاثاً، قلنا: انظر حديث خالد بن علقمة عند المصنف برقم (١١١).









সুনান আবী দাউদ (164)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ، حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ، عَنِ الأَعْمَشِ، بِهَذَا الْحَدِيثِ قَالَ لَوْ كَانَ الدِّينُ بِالرَّأْىِ لَكَانَ بَاطِنُ الْقَدَمَيْنِ أَحَقَّ بِالْمَسْحِ مِنْ ظَاهِرِهِمَا وَقَدْ مَسَحَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم عَلَى ظَهْرِ خُفَّيْهِ وَرَوَاهُ وَكِيعٌ عَنِ الأَعْمَشِ بِإِسْنَادِهِ قَالَ كُنْتُ أُرَى أَنَّ بَاطِنَ الْقَدَمَيْنِ أَحَقُّ بِالْمَسْحِ مِنْ ظَاهِرِهِمَا حَتَّى رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَمْسَحُ عَلَى ظَاهِرِهِمَا ‏.‏ قَالَ وَكِيعٌ يَعْنِي الْخُفَّيْنِ ‏.‏ وَرَوَاهُ عِيسَى بْنُ يُونُسَ عَنِ الأَعْمَشِ كَمَا رَوَاهُ وَكِيعٌ وَرَوَاهُ أَبُو السَّوْدَاءِ عَنِ ابْنِ عَبْدِ خَيْرٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ رَأَيْتُ عَلِيًّا تَوَضَّأَ فَغَسَلَ ظَاهِرَ قَدَمَيْهِ وَقَالَ لَوْلاَ أَنِّي رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَفْعَلُهُ ‏.‏ وَسَاقَ الْحَدِيثَ ‏.‏




আ‘মাশ (রাহিমাহুল্লাহ) হতে বর্ণিত, তাতে রয়েছে (‘আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন) : ধর্মের মাপকাঠি যদি রায়ের (মানুষের মনগড়া অভিমত ও বিবেক-বিবেচনার) উপর নির্ভরশীল হত, তাহলে মোজার উপরিভাগের চেয়ে তলার দিক মাসাহ্‌ করাই অধিক যুক্তি সঙ্গত হত। অথচ নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর (পায়ের) মোজাদ্বয়ের উপরিভাগই মাসাহ্‌ করেছেন।



সহীহ।



হাদীসটি ওয়াকী‘ (রাহিমাহুল্লাহ) আ‘মাশ হতে তাঁর (উপরোক্ত) সানাদে বর্ণনা করেছেন। তাতে রয়েছে (‘আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন) : আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে তাঁর মোজার উপরিভাগ মাসাহ্‌ করতে দেখার পূর্বে পায়ের তলার দিক ধৌত করাকে অধিক যুক্তিসঙ্গত মনে করতাম। ওয়াকী‘ বলেনঃ এখানে ‘উপরিভাগ’ দ্বারা বুঝানো হয়েছে (পায়ের) মোজাদ্বয়ের উপর। হাদীসটি আ‘মাশ থেকে ঈসা ইবনু ইউনুসও ওয়াকী‘র অনুরূপ বর্ণনা করেছেন। আবুস্‌ সাওদা হাদীসটি ইবনু ‘আবদি খাইর হতে তাঁর পিতার সূত্রে বর্ণনা করেছেন এভাবে : আমি ‘আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে উযু করার সময় তাঁর দু’ পায়ের উপরিভাগ ধৌত করতে দেখেছি। তিনি বলেছেন, যদি আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে এরূপ করতে না দেখতাম’….। অতঃপর হাদীসের শেষ পর্যন্ত বর্ণনা করেন।



সহীহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح ورواه وكيع عن الأعمش بإسناده




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، أبو إسحاق السبیعي مدلس (طبقات المدلسین: 91/ 3) وعنعن ، وحدیث الحمیدی (47،بتحقیقي) یغني عنہ ، (انوار الصحیفہ ص 19)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. وأخرجه بلفظ القدمين ابن أبي شيبة ١/ ١٨١ عن حفص بن غياث، بهذا الإسناد. وقد سلف برقم (١٦٢) من طريق حفص بلفظ الخف، وهو الصحيح، ورواية القدمين محمولة على إرادة الخف كما هو مبين في التعليق السابق.









সুনান আবী দাউদ (165)


حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ مَرْوَانَ، وَمَحْمُودُ بْنُ خَالِدٍ الدِّمَشْقِيُّ، - الْمَعْنَى - قَالاَ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ، - قَالَ مَحْمُودٌ - أَخْبَرَنَا ثَوْرُ بْنُ يَزِيدَ، عَنْ رَجَاءِ بْنِ حَيْوَةَ، عَنْ كَاتِبِ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ، عَنِ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ، قَالَ وَضَّأْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فِي غَزْوَةِ تَبُوكَ فَمَسَحَ أَعْلَى الْخُفَّيْنِ وَأَسْفَلَهُمَا ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ وَبَلَغَنِي أَنَّهُ لَمْ يَسْمَعْ ثَوْرٌ هَذَا الْحَدِيثَ مِنْ رَجَاءٍ ‏.




মুগীরাহ ইবনু শু‘বাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, তাবূক যুদ্ধের সময় আমি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে উযু করিয়েছি। তিনি মোজাদ্বয়ের উপরিভাগ ও নিম্নভাগ মাসাহ্‌ করেছেন।



দুর্বলঃ মিশকাত ৫২১।



ইমাম আবূ দাউদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, আমি জানতে পেরেছি, সাওর হাদীসটি রাজা থেকে শোনেননি।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، ترمذی (97)،ابن ماجہ (550) ، رجاء لم یسمع من کاتب المغیرۃ بن شعبۃ،انظر سنن الترمذي (97) وثور لم یسمعہ من رجاء وجاء تصریحہ بالسماع عند الدارقطني (1/ 195 ح 742) والسند إلیہ ضعیف فالحدیث معلول ، (انوار الصحیفہ ص 19)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده ضعيف، الوليد بن مسلم يدلس ويُسوِّي، ومثله يجب أن يصرح بالسماع في طبقات السند كلها، وثور بن يزيد لم يسمعه من رجاء بن حيوة كما أشار إليه المصنف وكما سيأتي، وروي مرسلاً أيضاً، ورجحه -أي المرسل- بعض النقاد. وأخرجه الترمذي (٩٧)، وابن ماجه (٥٥٠) من طريق الوليد بن مسلم، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٨١٩٧). قال الترمذي: هذا حديث معلول، لم يُسنده عن ثور بن يزيد غير الوليد بن مسلم، وسألت أبا زرعة ومحمد بن إسماعيل عن هذا الحديث، فقالا: ليس بصحيح، لأن ابن المبارك روى هذا عن ثور عن رجاء بن حيوة قال: حُدِّثت عن كاتب المغيرة عن النبي ﷺ مرسلاً، ولم يذكر فيه المغيرة. كذا قال الترمذي فى "السنن" والصواب أن ابن المبارك رواه عن ثور قال: حُدِّثت عن رجاء بن حيوة عن كاتب المغيرة عن النبي ﷺ مرسلاً، كما ذكر هو نفسه فى "العلل الكبير" ١/ ١٨٠، وكذا قال الدارقطني وغيره.









সুনান আবী দাউদ (166)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، - هُوَ الثَّوْرِيُّ - عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنْ سُفْيَانَ بْنِ الْحَكَمِ الثَّقَفِيِّ، أَوِ الْحَكَمِ بْنِ سُفْيَانَ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا بَالَ يَتَوَضَّأُ وَيَنْتَضِحُ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ وَافَقَ سُفْيَانَ جَمَاعَةٌ عَلَى هَذَا الإِسْنَادِ وَقَالَ بَعْضُهُمُ الْحَكَمُ أَوِ ابْنُ الْحَكَمِ ‏.




সুফিয়ান ইবনু হাকাম আস-সাক্বাফী অথবা হাকাম ইবনু সুফিয়ান আস-সাক্বাফী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যখন পেশাব করতেন, তখন উযু করে (লজ্জাস্থানে) পানি ছিটাতেন।



সহীহ।



ইমাম আবূ দাউদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, এ সানাদের ব্যাপারে সুফিয়ানের সাথে একদল বর্ণনাকারী ঐকমত্য পোষণ করেছেন। তিনি বলেন, কারো মতে, এখানে হবে- হাকাম অথবা ইবনু হাকাম।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن ، مشکوۃ المصابیح (361) ، شیخ مجاہد اختلف فی صبحتہ فحدیثہ لاینزل عن درجۃ الحسن، وانظر التلخیص الحبیر (1/ 74)، وقال معاذ: سفیان الثوری عنعن لکن تابعہ شعبہ فی السنن النسائی (134) وجریر فی المسند الامام احمد (24/ 104 ح 15384)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حديث ضعيف لاضطراب منصور فى إسناده كما قال الذهبي فى "الميزان" والحافظ في "الإصابة"، وقد أخرجه المصنف هنا من أوجه مختلفة لبيان اضطرابه. سفيان: هو الثوري، ومنصور: هو ابن المعتمر، ومجاهد: هو ابن جبر المكي. وأخرجه النسائي فى "المجتبى" (١٣٥) من طريق سفيان الثوري، بهذا الإسناد. وأخرجه أيضاً (١٣٥) من طريق عمار بن رُزيق، وابن ماجه (٤٦١) من طريق زكريا بن أبي زائدة، كلاهما عن منصور، عن مجاهد، عن الحكم بن سفيان. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (١٣٤) من طريق شعبة، عن منصور، عن مجاهد، عن الحكم، عن أبيه. وسيأتي برقم (١٦٧) من طريق زائدة بن قدامة، عن منصور، عن مجاهد، عن الحكم أو ابن الحكم، عن أبيه. وسيأتي بعده من طريق سفيان بن عيينة، عن ابن أبي نجيح، عن مجاهد، عن رجل من ثقيف، عن أبيه. وهو في "مسند أحمد" (١٥٣٨٤) وفيه تمام الكلام عليه.









সুনান আবী দাউদ (167)


حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ هُوَ ابْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ ابْنِ أَبِي نَجِيحٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنْ رَجُلٍ مِنْ ثَقِيفٍ عَنْ أَبِيهِ، قَالَ: «رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَالَ ثُمَّ نَضَحَ فَرْجَهُ»




সাক্বীফ গোত্রের এক ব্যক্তি হতে তাঁর পিতা হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে পেশাব করে আপন লজ্জাস্থানে পানির ছিটা দিতে দেখেছি।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن ، فیہ رجل مجہول، وانظر الحدیث السابق




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: ضعيف لاضطرابه كما سلف بيانه فيما قبله. سفيان: هو ابن عيينة، وابن أبي نجيح: هو عبد الله بن يسار.









সুনান আবী দাউদ (168)


حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ الْمُهَاجِرِ، حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ عَمْرٍو، حَدَّثَنَا زَائِدَةُ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنِ الْحَكَمِ، أَوِ ابْنِ الْحَكَمِ عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بَالَ ثُمَّ تَوَضَّأَ وَنَضَحَ فَرْجَهُ ‏.‏




হাকাম অথবা ইবনু হাকাম হতে তাঁর পিতা হতে বর্ণিত, একদা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) পেশাব করলেন। অতঃপর উযু করে আপন লজ্জাস্থানে পানির ছিটা দিলেন।¬




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن ، انظر الحدیث السابقین




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: ضعيف لاضطرابه كما سلف بيانه برقم (١٦٧). زائدة: هو ابن قدامة.









সুনান আবী দাউদ (169)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ سَعِيدٍ الْهَمْدَانِيُّ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، سَمِعْتُ مُعَاوِيَةَ، - يَعْنِي ابْنَ صَالِحٍ - يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي عُثْمَانَ، عَنْ جُبَيْرِ بْنِ نُفَيْرٍ، عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ، قَالَ كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم خُدَّامَ أَنْفُسِنَا نَتَنَاوَبُ الرِّعَايَةَ رِعَايَةَ إِبِلِنَا فَكَانَتْ عَلَىَّ رِعَايَةُ الإِبِلِ فَرَوَّحْتُهَا بِالْعَشِيِّ فَأَدْرَكْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَخْطُبُ النَّاسَ فَسَمِعْتُهُ يَقُولُ ‏"‏ مَا مِنْكُمْ مِنْ أَحَدٍ يَتَوَضَّأُ فَيُحْسِنُ الْوُضُوءَ ثُمَّ يَقُومُ فَيَرْكَعُ رَكْعَتَيْنِ يُقْبِلُ عَلَيْهِمَا بِقَلْبِهِ وَوَجْهِهِ إِلاَّ قَدْ أَوْجَبَ ‏"‏ ‏.‏ فَقُلْتُ بَخْ بَخْ مَا أَجْوَدَ هَذِهِ ‏.‏ فَقَالَ رَجُلٌ مِنْ بَيْنِ يَدَىَّ الَّتِي قَبْلَهَا يَا عُقْبَةُ أَجْوَدُ مِنْهَا ‏.‏ فَنَظَرْتُ فَإِذَا هُوَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ فَقُلْتُ مَا هِيَ يَا أَبَا حَفْصٍ قَالَ إِنَّهُ قَالَ آنِفًا قَبْلَ أَنْ تَجِيءَ ‏"‏ مَا مِنْكُمْ مِنْ أَحَدٍ يَتَوَضَّأُ فَيُحْسِنُ الْوُضُوءَ ثُمَّ يَقُولُ حِينَ يَفْرُغُ مِنْ وُضُوئِهِ أَشْهَدُ أَنْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ إِلاَّ فُتِحَتْ لَهُ أَبْوَابُ الْجَنَّةِ الثَّمَانِيَةُ يَدْخُلُ مِنْ أَيِّهَا شَاءَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ مُعَاوِيَةُ وَحَدَّثَنِي رَبِيعَةُ بْنُ يَزِيدَ عَنْ أَبِي إِدْرِيسَ عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ ‏.‏




উক্ববাহ ইবনু ‘আমির হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমরা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাথে নিজেদের যাবতীয় কাজকর্ম করতাম এমনকি আমাদের উট চরানোর কাজও আমরা পালাক্রমে নিজেদের মধ্যে ভাগ করে নিতাম। একদা আমার উপর উট চরাবার পালা এলো সন্ধ্যায় উটগুলো নিয়ে আমি উটশালায় ফিরে এসে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে ভাষণরত অবস্থায় পেলাম। আমি শুনলাম, তিনি জনগণকে উদ্দেশ্য করে বলছেনঃ “তোমাদের মধ্যকার যে কেউ উত্তমরূপে উযু করে, অতঃপর দাঁড়িয়ে বিনয় ও একাগ্রতার সাথে দু’রাকআত সলাত আদায় করলে তার জন্য জান্নাত ওয়াজিব হয়ে যায়।” একথা শুনে আমি বললামঃ বাহ্‌ বাহ্‌, এটা তো অতি উত্তম কথা! তখন (আগে থেকেই উপস্থিত) আমার সামনে বসা এক ব্যক্তি বললেন, হে উক্ববাহ্‌! এর আগে তিনি যা বলেছেন, সেটা আরও উত্তম। আমি তার দিকে তাকিয়ে দেখি তিনি হলেন ‘উমার ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)। আমি তাঁকে জিজ্ঞাসা করলাম, হে আবূ হাফ্‌স! সেটা কী? ‘উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, আপনি এখানে আসার একটু আগেই নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ তোমাদের মধ্যকার যে কেউ উত্তমরূপে উযু করার পর এরূপ বলেঃ “আমি সাক্ষ্য দিচ্ছি, আল্লাহ ছাড়া কোন ইলাহ নেই, তিনি একক এবং তাঁর কোন অংশীদার নেই। আমি আরও সাক্ষ্য দিচ্ছি, নিশ্চয় মুহাম্মাদ আল্লাহর বান্দাহ ও রাসূল”- তার জন্য জান্নাতের আটটি দরজাই খুলে দেয়া হয়। যে দরজা দিয়ে ইচ্ছা সে জান্নাতে প্রবেশ করতে পারবে।



সহীহঃ মুসলিম




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (234)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حديث قوي، وهذا إسناد رجاله ثقات غير معاوية بن صالح ففيه كلام يحطه عن رتبة الصحيح قليلاً، وغير أبي عثمان، وقد اختلف في تعيينه، فقال ابن منجويه في "رجال صحيح مسلم" (٢٠٨٩): يُشبه أن يكون سعيد بن هانئ الخولاني المصري، وقال ابن حبان في "صحيحه": يُشبه أن يكون حريز بن عثمان الرَّحَبي. قلنا: وكلاهما ثقة، لكن لم يخرج مسلم لواحد منهما، والحديث في "صحيحه"، ولذلك قال الذهبي في "الميزان" ٤/ ٢٥٠: أبو عثمان عن جبير بن نفير لا يُدرَى من هو، وخرَّج له مسلم متابعة، روى عنه معاوية بن صالح. ولمعاوية بن صالح إسناد آخر في هذا الحديث سيأتي بعد المتن، وهو من روايته عن ربيعة بن يزيد، عن أبي إدريس -وهو عائذ الله بن عبد الله الخولاني-، عن عقبة ابن عامر. وهذا إسناد قوي من أجل معاوية بن صالح، وباقي رجاله ثقات. وأخرجه مسلم (٢٣٤) من طريق عبد الرحمن بن مهدي، عن معاوية بن صالح، عن ربيعة بن يزيد، بالإسناد الثاني. ورواه زيد بن الحباب عن معاوية بن صالح واضطرب فيه: فأخرجه مسلم (٢٣٤)، والنسائي في "الكبرى" (١٧٧) من طريقه عن معاوية، عن ربيعة بن يزيد، عن أبي إدريس وأبي عثمان، عن جبير بن نفير، عن عقبة. فخلط بين الإسنادين، فمعاوية يرويه عن أبي عثمان مباشرة، وعن أبي إدريس بواسطة ربيعة، وجبير مذكور في طريق أبي عثمان دون طريق ربيعة. وأخرجه النسائي (١٤٠) من طريقه عن معاوية، عن ربيعة، عن أبي إدريس وأبي عثمان، عن عقبة، عن عمر دون القصة. فأسقط جبير بن نفير من طريق أبي عثمان. وأخرجه الترمذي (٥٥) من طريقه عن معاوية، عن ربيعة، عن أبي إدريس وأبي عثمان، عن عمر. فأسقط عقبة بن عامر، وهو ثابت في الطريقين جميعاً. وقد حكم الترمذي على الحديث بالاضطراب، والصواب أن طريق زيد بن الحباب هي المضطربة فقط كما أشار إليه الحافظ في "التلخيص" ١/ ١٠١. وهو في "مسند أحمد" (١٧٣١٤)، و"صحيح ابن حبان" (١٠٥٠). وسيأتي شطره الأول برقم (٩٠٦)، وانظر ما بعده. وقوله: فكانت عليَّ رعاية الإبل. أي: إبل رفقته الذين قدم معهم على رسول الله ﷺ وهم اثنا عشر راكباً، وقوله: فروحتها. بتشديد الواو، أي: رددتها إلى المراح وهو مأواها ليلاً. وقوله "يقبل عليها بقلبه ووجهه" قال الإمام النووي: قد جمع ﷺ بهاتين اللفظتين أنواع الخضوع والخشوع، لأن الخضوع في الأعضاء، والخشوع في القلب وقوله: بخٍ بخٍ، قال فى "النهاية": هي كلمة تقال عند المدح والرضا بالشيء وتكرر للمبالغة، وهي مبنية على السكون، فإن وصلتَ جَرَرتَ ونَوَّنتَ فقلتَ: بخٍ بخٍ، وربما شُدِّدت. وقوله: آنفاً، أي: قريباً، وهو منصوب على الحال أو الظرف.









সুনান আবী দাউদ (170)


حَدَّثَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ عِيسَى، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ الْمُقْرِئُ، عَنْ حَيْوَةَ، - وَهُوَ ابْنُ شُرَيْحٍ - عَنْ أَبِي عَقِيلٍ، عَنِ ابْنِ عَمِّهِ، عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ الْجُهَنِيِّ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم نَحْوَهُ وَلَمْ يَذْكُرْ أَمْرَ الرِّعَايَةِ قَالَ عِنْدَ قَوْلِهِ ‏ "‏ فَأَحْسَنَ الْوُضُوءَ ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ رَفَعَ بَصَرَهُ إِلَى السَّمَاءِ ‏.‏ فَقَالَ وَسَاقَ الْحَدِيثَ بِمَعْنَى حَدِيثِ مُعَاوِيَةَ ‏.




উক্ববাহ ইবনু ‘আমির আল-জুহানী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, উক্ববাহ ইবনু ‘আমির আল-জুহানী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সূত্রে পূর্বোক্ত হাদীসের অনুরূপ বর্ণনা করেছেন। কিন্তু তিনি তাতে ‘উটশালায়’ কথাটি উল্লেখ করেননি। তিনি তাঁর বর্ণনায় ‘উত্তমরূপে উযু করার পর ‘আকাশের দিকে তাকিয়ে’ (দু’আ পড়ার কথা) বলেছেন। তারপর বাকি অংশ মু’আবিয়াহ বর্ণিত হাদীসের অনুরূপ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، ابن عم أبي عقیل زہرۃ بن معبد: ’’رجل مجہول‘‘ کما قال المنذري رحمہ اللّٰہ (عون العبود: 1/ 66) ولم أجد من وثقہ ، قال معاذ: وقال ابن دقیق العید فی حدیث ابی داود: ’’وفی إسناد ھذا رجل مجہول‘‘ (الامام: 2/ 66) ، (انوار الصحیفہ ص 19)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده ضعيف، أبو عقيل: هو زهرة بن معبد القرشي التيمي، وابن عمِّه لم يُسمَّ، فهو مجهول، وباقي رجاله ثقات. وانظر ما قبله.









সুনান আবী দাউদ (171)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عِيسَى، حَدَّثَنَا شَرِيكٌ، عَنْ عَمْرِو بْنِ عَامِرٍ الْبَجَلِيِّ، - قَالَ مُحَمَّدٌ هُوَ أَبُو أَسَدِ بْنِ عَمْرٍو - قَالَ سَأَلْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ عَنِ الْوُضُوءِ، فَقَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَتَوَضَّأُ لِكُلِّ صَلاَةٍ وَكُنَّا نُصَلِّي الصَّلَوَاتِ بِوُضُوءٍ وَاحِدٍ ‏.‏




আমর ইবনু ‘আমির আল-বাজালী হতে বর্ণিত, বর্ণনাকারী মুহাম্মাদ বলেন, তিনি হলেন আবূ আসাদ ইবনু ‘আমর। তিনি বলেন, একদা আমি আনাস ইবনু মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে উযু সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলে তিনি বললেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) প্রত্যেক সলাতের জন্যই (নতুনভাবে) উযু করতেন। আর আমরা এক উযুতেই একাধিকবার সলাত আদায় করতাম।



সহীহঃ বুখারী।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (214)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حديث صحيح، شريك -وهو ابن عبد الله النخعي، وإن كان سيئ الحفظ- قد توبع. وعمرو بن عامر هو الأنصاري كما في رواية الترمذي، وقوله: "البجلي والد أسد بن عمرو" وهم نبه عليه المزي في "هذيب الكمال" ٢٢/ ٩٤، وقال: إن البجلي متأخر عن طبقة الأنصاري. وأخرجه ابن ماجه (٥٠٩) من طريق شريك، بهذا الإسناد. وأخرجه البخاري (٢١٤)، والترمذي (٥٩) من طريق سفيان الثوري، والنسائي في "المجتبى" (١٣١) من طريق شعبة، كلاهما عن عمرو بن عامر، به. وأخرجه بنحوه الترمذي (٥٨) من طريق حميد الطويل، عن أنس. وهو في "مسند أحمد" (١٢٣٤٦). وهذا الحديث يدل على أن الوضوء لا يجبُ إلا مِن حدث، ونقل النووي أن الإجماع استقر على عدم الوجوب، وقوله تعالى: ﴿يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا قُمْتُمْ إِلَى الصَّلَاةِ فَاغْسِلُوا وُجُوهَكُمْ ....﴾ [المائدة: ٦] تأوله كثير من العلماء فقالوا: التقدير: إذا قمتم إلى الصلاة محدثين، فيكون الأمر في حق المحدثين على الوجوب، وفي حق غيرهم على الندب. وقال البغوي في "شرح السنة" ١/ ٤٤٩: يجوز الجمع بين الصلوات بوضوء واحد عند عامة أهل العلم، وتجديد الوضوء مستحب إذا كان قد صلى بالوضوء الأول صلاة، وكرهه قوم إذا لم يكن قد صلى بالوضوء الأول صلاة فرضاً أو تطوعاً.









সুনান আবী দাউদ (172)


حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، أَخْبَرَنَا يَحْيَى، عَنْ سُفْيَانَ، حَدَّثَنِي عَلْقَمَةُ بْنُ مَرْثَدٍ، عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ صَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ الْفَتْحِ خَمْسَ صَلَوَاتٍ بِوُضُوءٍ وَاحِدٍ وَمَسَحَ عَلَى خُفَّيْهِ فَقَالَ لَهُ عُمَرُ إِنِّي رَأَيْتُكَ صَنَعْتَ الْيَوْمَ شَيْئًا لَمْ تَكُنْ تَصْنَعُهُ ‏.‏ قَالَ ‏ "‏ عَمْدًا صَنَعْتُهُ ‏"‏ ‏.




সুলাইমান ইবনু বুরাইদা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে তার বাবা হতে বর্ণিত, সুলাইমান ইবনু বুরাইদাহ থেকে তাঁর পিতার সূত্রে বর্ণিত। তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মাক্কাহ বিজয়ের দিন এক উযুতেই পাঁচ ওয়াক্ত সলাত আদায় করেছেন এবং আপন মোজাদ্বয়ের উপর মাসাহ্‌ করেছেন। (এ দৃশ্য দেখে) ‘উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাঁকে জিজ্ঞাসা করলেন, আমি আপনাকে এমন একটি কাজ করতে দেখেছি, যা আপনি ইতোপূর্বে কখনো করেননি। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, আমি ইচ্ছাকৃতভাবেই এরূপ করেছি।



সহীহঃ মুসলিম




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (277)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. يحيي: هو ابن سيد القطان، وسفيان: هو الثوري. وأخرجه مسلم (٢٧٧)، والترمذي (٦١)، والنسائي في "الكبرى" (١٣٣) من طرق عن سفيان، بهذا الإسناد. وأخرجه ابن ماجه (٥١٠) من طريق الثوري، عن محارب بن دثار، عن سليمان ابن بريدة، به. وهو في "مسند أحمد" (٢٢٩٦٦)، و"صحيح ابن حبان" (١٧٠٦ - ١٧٠٨)، وشرح السنة (٢٣١).









সুনান আবী দাউদ (173)


حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ مَعْرُوفٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، عَنْ جَرِيرِ بْنِ حَازِمٍ، أَنَّهُ سَمِعَ قَتَادَةَ بْنَ دِعَامَةَ، حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ، أَنَّ رَجُلاً، جَاءَ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَقَدْ تَوَضَّأَ وَتَرَكَ عَلَى قَدَمَيْهِ مِثْلَ مَوْضِعِ الظُّفْرِ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ ارْجِعْ فَأَحْسِنْ وُضُوءَكَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ وَهَذَا الْحَدِيثُ لَيْسَ بِمَعْرُوفٍ عَنْ جَرِيرِ بْنِ حَازِمٍ وَلَمْ يَرْوِهِ إِلاَّ ابْنُ وَهْبٍ وَحْدَهُ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ مَعْقِلِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ الْجَزَرِيِّ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ عَنْ عُمَرَ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم نَحْوَهُ قَالَ ‏"‏ ارْجِعْ فَأَحْسِنْ وُضُوءَكَ ‏"‏ ‏.




আনাস ইবনু মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এক ব্যক্তি উযু করে নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট উপস্থিত হল। কিন্ত (উযুতে) তার পায়ে নখ পরিমাণ জায়গা শুকনা ছিল। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে বললেন, ‘ফিরে যাও এবং উত্তমরূপে আবার উযু করে এসো।



সহীহ।




ইমাম আবূ দাউদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেছেন, এ হাদীসটি প্রসিদ্ধ নয়। এটি কেবল ইবনু ওয়াহ্‌হাব বর্ণনা করেছেন। আর মা’ক্বিল ইবনু ‘উবাইদুল্লাহ আল-জাযাবী আবূ যুবাইর হতে, তিনি জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে, তিনি ‘উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে, তিনি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) হতে অনুরূপ হাদীস বর্ণনা করেছেন। তাতে রয়েছেঃ তিনি বলেছেন, ‘ফিরে যাও এবং উত্তমরূপে উযু করে এসো।’




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح ، فی حدیث ابی داود (173): قتادہ صرح بالسماع بل ابن وہب عنعن، وفی حدیث ابن ماجہ (665): ابن وہب صرح بالسماع بل قتادہ عنعن، وللحدیث شواھد منھا الحدیث الآتی (175)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. ورواية جرير بن حازم عن قتادة -وإن تكلم فيها بعضهم- صحيحة، فقد أخرج الشيخان لجرير عن قتادة، وتفرد ابن وهب -وهو عبد الله- بهذا الحديث عن جرير لا يضر، لا سيما أن للحديث شاهداً كما سيأتى. وأخرجه ابن ماجه (٦٦٥) من طريق ابن وهب، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٢٤٨٧). وله شاهد من حديث عمر بن الخطاب ﵁ سيورده المصنف تعليقاً بعده.









সুনান আবী দাউদ (174)


حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، أَخْبَرَنَا يُونُسُ، وَحُمَيْدٌ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِمَعْنَى قَتَادَةَ ‏.‏




হাসান বাসরী (রাহিমাহুল্লাহ) হতে বর্ণিত, হাসান বাসরী (রাহিমাহুল্লাহ) থেকে নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সূত্রে ক্বাতাদাহর অনুরূপ হাদীস বর্ণিত আছে।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح لغيره




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح ، حسن البصری عن النبي ﷺ: مرسل، انظر الحدیث السابق (173) وانظر الحدیث الآتی (176)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: رجاله ثقات لكنه مرسل، حماد: هو ابن سلمة، ويونس: هو ابن عبيد العبدي، وحميد: هو ابن أبي حميد الطويل، والحسن: هو البصري.









সুনান আবী দাউদ (175)


حَدَّثَنَا حَيْوَةُ بْنُ شُرَيْحٍ، حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ، عَنْ بَحِيرٍ، - هُوَ ابْنُ سَعْدٍ - عَنْ خَالِدٍ، عَنْ بَعْضِ، أَصْحَابِ النَّبِيِّ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم رَأَى رَجُلاً يُصَلِّي وَفِي ظَهْرِ قَدَمِهِ لُمْعَةٌ قَدْرُ الدِّرْهَمِ لَمْ يُصِبْهَا الْمَاءُ فَأَمَرَهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم أَنْ يُعِيدَ الْوُضُوءَ وَالصَّلاَةَ ‏.‏




নাবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর জনৈক সহাবী হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) দেখলেন, এক ব্যক্তি সলাত আদায় করছে, অথচ তার পায়ের উপরিভাগে এক দিরহাম পরিমাণ স্থান শুকনো, (উযুর সময়) তাতে পানি পৌছেনি। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁকে পুনরায় উযু করে সলাত আদায়ের নির্দেশ দিলেন।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح ، بقیۃ بن الولید صرح بالسماع عند احمد (3/ 424) وروایتہ عن بحیر محمولۃ علی السماع سواء صرح بالسماع أم لا، انظر تعلیق ابن عبدالھادی علی العلل لابن ابی حاتم (ص 124 ح 35/ 123) وذم الکلام للھروی (3/ 123)، وللحدیث شواہد




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: صحيح لغيره، وهذا إسناد ضعيف، بقية -وهو ابن الوليد- يدلس تدليس التسوية، فلا يكفى تصريحه بالسماع من شيخه عند أحمد، بل يجب أن يصرح به في طبقات السند كلها، ثمَّ هو في نفسه ضعيف. وأخرجه البيهقي ١/ ٨٣ من طريق المصنف، بهذا الإسناد. وتحرف فيه بحير بن سعد إلى يحيي بن سعيد. وأخرجه أحمد (١٥٤٩٥) من طريق بقية بن الوليد، به.









সুনান আবী দাউদ (176)


حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ أَحْمَدَ بْنِ أَبِي خَلَفٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، وَعَبَّادِ بْنِ تَمِيمٍ، عَنْ عَمِّهِ، قَالَ شُكِيَ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم الرَّجُلُ يَجِدُ الشَّىْءَ فِي الصَّلاَةِ حَتَّى يُخَيَّلَ إِلَيْهِ فَقَالَ ‏ "‏ لاَ يَنْفَتِلُ حَتَّى يَسْمَعَ صَوْتًا أَوْ يَجِدَ رِيحًا ‏"‏ ‏.‏




‘আব্বাদ ইবনু তামীম হতে তাঁর চাচার সূত্রে হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, এক ব্যক্তি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে অভিযোগ করল যে, কখনো সলাতের মধ্যে কিছু একটা সন্দেহ হয় যে, তার উযু হয়ত নষ্ট হয়ে গেছে। তিনি বললেন, (বায়ু নির্গত হওয়ার) শব্দ না শুনা কিংবা গন্ধ না পাওয়া পর্যন্ত সালাত ছাড়বে না।



সহীহঃ বুখারি ও মুসলিম




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (137) صحیح مسلم (361)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. سفيان: هو ابن عيينة، والزهري: هو محمَّد بن مسلم، وعم عباد بن تميم: هو عبد الله بن زيد الأنصاري المازني. وأخرجه البخاري (١٣٧) و (١٧٧)، ومسلم (٣٦١)، والنسائي في "الكبرى" (١٥١)، وابن ماجه (٥١٣) من طريق سفيان بن عيينة، بهذا الإسناد. ورواية البخاري في الموضوع الثاني عن عباد بن تميم وحده. وهو في "مسند أحمد" (١٦٤٥٠)، و "شرح مشكل الآثار" (٥١٠٠). واختلف في رواية سعيد بن المسيب، هل هي عن النبي ﷺ مباشرة فتكون مرسلة، أم هي عن عبد الله بن زيد أيضاً. وبالثاني قال المزي في "التحفة"، وبالأول قال الدارقطني في "العلل" ٤/ ٣٩٧، ويؤيده أن عبد الرزاق أخرجه في "مصنفه" (٥٣٤) من طريق الزهري، عن سعيد بن المسيب مرسلاً. ومراسيل سعيد قوية، وقد صح موصولاً أيضاً من طريق عباد بن تميم.









সুনান আবী দাউদ (177)


حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، أَخْبَرَنَا سُهَيْلُ بْنُ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِذَا كَانَ أَحَدُكُمْ فِي الصَّلاَةِ فَوَجَدَ حَرَكَةً فِي دُبُرِهِ أَحْدَثَ أَوْ لَمْ يُحْدِثْ فَأَشْكَلَ عَلَيْهِ فَلاَ يَنْصَرِفْ حَتَّى يَسْمَعَ صَوْتًا أَوْ يَجِدَ رِيحًا ‏"‏ ‏.‏




আবূ হুরাইরাহ হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, তোমাদের কেউ যদি সলাত আদায়রত অবস্থায় পশ্চাৎ-দ্বারে (মলদ্বারে) স্পন্দন অনুভব করে, অথবা বায়ু নির্গত হয়েছে কিনা এ ব্যাপারে তার সন্দেহ সৃষ্টি হয়, তাহলে শব্দ না শুনা কিংবা গন্ধ না পাওয়া পর্যন্ত সে সলাত পরিত্যাগ করবে না।



সহীহঃ মুসলিম।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (362)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. حماد: هو ابن سلمة. وأخرجه مسلم (٣٦٢)، والترمذي (٧٥) من طريقين عن سهيل بن أبي صالح، بهذا الإسناد. وأخرجه الترمذي (٧٤)، وابن ماجه (٥١٥) من طريق شعبة، عن سهيل، به، بلفظ: "لا وضوء إلا من صوت أو ريح". وهو في "مسند أحمد" (٩٣١٣) و (٩٣٥٥).









সুনান আবী দাউদ (178)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ، قَالاَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي رَوْقٍ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيِّ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَبَّلَهَا وَلَمْ يَتَوَضَّأْ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ كَذَا رَوَاهُ الْفِرْيَابِيُّ وَغَيْرُهُ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ وَهُوَ مُرْسَلٌ إِبْرَاهِيمُ التَّيْمِيُّ لَمْ يَسْمَعْ مِنْ عَائِشَةَ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ مَاتَ إِبْرَاهِيمُ التَّيْمِيُّ وَلَمْ يَبْلُغْ أَرْبَعِينَ سَنَةً وَكَانَ يُكْنَى أَبَا أَسْمَاءَ ‏.‏




‘আয়িশাহ হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে চুম্বন দিয়েছেন, কিন্তু এ জন্য উযু করেননি।



সহীহ।



ইমাম আবূ দাউদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, ফিরয়াবী এবং অন্যরাও হাদীসটি অনুরুপ বর্ণনা করেছেন। ইমাম আবূ দাউদ (রাহিমাহুল্লাহ) আরো বলেন, এটি মুরসাল হাদীস। কারণ ইব্রাহীম আত-তাইমী ‘আয়িশাহ থেকে কিছুই শোনেননি। ইমাম আবূ দাউদ (রাহিমাহুল্লাহ) আর বলেন, ইবরাহীম আত-তাইমী চল্লিশ বছরে পদার্পণের আগেই মৃত্যু বরণ করেন। তার কুনিয়াত ছিল আবূ আসমা।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، نسائی (170) ، السند منقطع وللحدیث شاہد ضعیف عندالبزار بلفظ: أن النبي ﷺ کان یقبل بعض نساء ہ ثم یصلي ولا یتوضأ انظر نصب الرایۃ (74/1) ، (انوار الصحیفہ ص 19)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حديث صحيح، وهذا إسناد ضعيف لانقطاعه، إبراهيم التيمي -وهو ابن يزيد- لم يسمع من عائشة. يحيي: هو ابن سعيد القطان، وعبد الرحمن: هو ابن مهدي، وأبو روق: هو عطية بن الحارث. وأخرجه النسائى في "الكبرى" (١٥٥)، وفي "المجتبى" (١٧٠) من طريق يحيى القطان، بهذا الإسناد. وقال في "المجتبى": ليس في هذا الباب حديث أحسن من هذا الحديث، وإن كان مرسلاً. يعني منقطعاً. وهو في "مسند أحمد" (٢٥٧٦٧). وانظر ما بعده.









সুনান আবী দাউদ (179)


حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ حَبِيبٍ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَبَّلَ امْرَأَةً مِنْ نِسَائِهِ ثُمَّ خَرَجَ إِلَى الصَّلاَةِ وَلَمْ يَتَوَضَّأْ ‏.‏ قَالَ عُرْوَةُ فَقُلْتُ لَهَا مَنْ هِيَ إِلاَّ أَنْتِ فَضَحِكَتْ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ هَكَذَا رَوَاهُ زَائِدَةُ وَعَبْدُ الْحَمِيدِ الْحِمَّانِيُّ عَنْ سُلَيْمَانَ الأَعْمَشِ ‏.




আয়িশাহ হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর কোন এক স্ত্রীকে চুম্বন করলেন, অতঃপর সলাত আদায়ের জন্য বের হলেন, কিন্তু উযু করলেন না। ‘উরওয়াহ বলেন, আমি ‘আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) কে বললাম, ‘সেই স্ত্রী আপনি নন কি? ফলে তিনি হেসে দিলেন।



সহীহ।



ইমাম আবূ দাউদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, সুলাইমান আল-আ’মাশ সূত্রে যায়িদাহ এবং ‘আবদুল হামীদ আল-হিম্মানী অনুরূপ বর্ণনা করেছেন।




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، ترمذی (86)،ابن ماجہ (502) ، الأعمش مدلس وعنعن ، وحبیب لم یسمع من عروۃ ، (انوار الصحیفہ ص 19، 20)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حديث صحيح، وفي سماع حبيب بن أبي ثابت من عروة بن الزُّبير خلاف، قال ابن عبد البر في "الاستذكار" ٣/ ٥٢: لا ينكر لقاؤه عروة، لروايته عمن هو أكبر من عروة وأقدم موتاً، وهو إمام ثقة، من أئمة العلماء الأجلة. وقال ابن سيد الناس في "شرح الترمذي" ورقة ١٩٩/ ١: قول أبي عمر (ابن عبد البر) هذا أفاد إمكان اللقاء، وهو مزيل للانقطاع عند الأكثرين. قلنا: وحبيب متابع كما بيناه في تعليقنا على "مسند أحمد". الأعمش: هو سليمان بن مهران، وعروة: هو ابن الزُّبير بن العوام كما في رواية ابن ماجه. وأخرجه الترمذي (٨٦)، وابن ماجه (٥٠٢) من طريق وكيع بن الجراح، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٥٧٦٦) وقد فصلنا القول فيه هناك. وانظر ما قبله وما بعده.









সুনান আবী দাউদ (180)


حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مَخْلَدٍ الطَّالْقَانِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، - يَعْنِي ابْنَ مَغْرَاءَ - حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، أَخْبَرَنَا أَصْحَابٌ، لَنَا عَنْ عُرْوَةَ الْمُزَنِيِّ، عَنْ عَائِشَةَ، بِهَذَا الْحَدِيثِ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ قَالَ يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ لِرَجُلٍ احْكِ عَنِّي أَنَّ هَذَيْنِ - يَعْنِي حَدِيثَ الأَعْمَشِ هَذَا عَنْ حَبِيبٍ وَحَدِيثَهُ بِهَذَا الإِسْنَادِ فِي الْمُسْتَحَاضَةِ أَنَّهَا تَتَوَضَّأُ لِكُلِّ صَلاَةٍ - قَالَ يَحْيَى احْكِ عَنِّي أَنَّهُمَا شِبْهُ لاَ شَىْءَ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ وَرُوِيَ عَنِ الثَّوْرِيِّ قَالَ مَا حَدَّثَنَا حَبِيبٌ إِلاَّ عَنْ عُرْوَةَ الْمُزَنِيِّ يَعْنِي لَمْ يُحَدِّثْهُمْ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ بِشَىْءٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ وَقَدْ رَوَى حَمْزَةُ الزَّيَّاتُ عَنْ حَبِيبٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَائِشَةَ حَدِيثًا صَحِيحًا ‏.‏




‘আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, ‘উরওয়াহ আল-মুযানী ‘আয়িশাহ সূত্রে উপরোক্ত হাদীস বর্ণনা করেন। ইমাম আবূ দাউদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, ইয়াহ্ইয়াহ্ ইবনু সাঈদ আল-কাত্তান এক ব্যাক্তিকে এ মর্মে আদেশ দেন, আমার সূত্রে ঐ হাদীস দু’টি বর্ণনা কর। অর্থাৎ আ’মাশের হাদীস এবং একই সানাদে ইস্তিহাযা রোগিণী” সম্পর্কে বর্ণিত তাঁর ঐ হাদীস যাতে রয়েছে, ‘ইস্তিহাযা রোগিনী প্রত্যেক সলাতের জন্যই উযু করবে।’ ইয়াহ্ইয়াহ্ ঐ ব্যাক্তিকে আরো বলেন, তুমি আমার সূত্রে বর্ণনা কর যে, (আ’মাশের সূত্রে বর্ণিত) উপরোক্ত হাদীসদ্বয় দুর্বল। ইমাম আবূ দাউদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, সাওরী বলেছেন, হাবীব আমাদের কাছে কেবল ‘উরওয়াহ আল-মুযানীর সুত্রেই হাদীস বর্ণনা করেননি। আবূ দাউদ আরো বলেন, অবশ্য হামযাহ আয-যাইয়্যাত, হাবীব এবং ‘উরওয়াহ ইবনু যুবাইরের থেকে ‘আয়িশাহ সূত্রে একটি সহীহ হাদীস বর্ণনা করেছেন।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، ترمذی (86)،ابن ماجہ (502) ، الأعمش مدلس وعنعن ، وحبیب لم یسمع من عروۃ ، (انوار الصحیفہ ص 19، 20)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حديث صحيح، وهذا إسناد ضعيف، عبد الرحمن بن مغراء ضعيف في روايته عن الأعمش، وقوله: "عروة المزني" وهم، فلم تأت نسبته إلا في هذا الإسناد الضعيف. والصحيح أنه عروة بن الزُّبير التابعي الثقة، أما عروة المزني، فمجهول.