হাদীস বিএন


সুনান আবী দাউদ





সুনান আবী দাউদ (21)


حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِمَعْنَاهُ قَالَ ‏"‏ كَانَ لاَ يَسْتَتِرُ مِنْ بَوْلِهِ ‏"‏ ‏.‏ وَقَالَ أَبُو مُعَاوِيَةَ ‏"‏ يَسْتَنْزِهُ ‏"‏ ‏.‏




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর উপরোক্ত হাদীসের সমার্থবোধক হাদীস বর্ণনা করেছেন। তিনি বলেছেন, “সে তার পেশাব হতে আত্মগোপন করত না।” আর আবূ মু‘আবিয়াহ বলেছেন, “পেশাব থেকে সতর্ক থাকত না।”



সহীহঃ বুখারী ও মুসলিম, এর পূর্বের হাদীস দেখুন।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (216)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. جرير: هو ابن عبد الحميد، ومنصور: هو ابن المعتمر. وأخرجه البخاري (٢١٦) و (٦٠٥٥)، والنسائي في "الكبرى" (٢٢٠٦) من طريق منصور، بهذا الإسناد. وانظر ما قبله.









সুনান আবী দাউদ (22)


حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ زِيَادٍ، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ زَيْدِ بْنِ وَهْبٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ ابْنِ حَسَنَةَ، قَالَ انْطَلَقْتُ أَنَا وَعَمْرُو بْنُ الْعَاصِ، إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَخَرَجَ وَمَعَهُ دَرَقَةٌ ثُمَّ اسْتَتَرَ بِهَا ثُمَّ بَالَ فَقُلْنَا انْظُرُوا إِلَيْهِ يَبُولُ كَمَا تَبُولُ الْمَرْأَةُ ‏.‏ فَسَمِعَ ذَلِكَ فَقَالَ ‏"‏ أَلَمْ تَعْلَمُوا مَا لَقِيَ صَاحِبُ بَنِي إِسْرَائِيلَ كَانُوا إِذَا أَصَابَهُمُ الْبَوْلُ قَطَعُوا مَا أَصَابَهُ الْبَوْلُ مِنْهُمْ فَنَهَاهُمْ فَعُذِّبَ فِي قَبْرِهِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ قَالَ مَنْصُورٌ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ أَبِي مُوسَى فِي هَذَا الْحَدِيثِ قَالَ ‏"‏ جِلْدَ أَحَدِهِمْ ‏"‏ ‏.‏ وَقَالَ عَاصِمٌ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ أَبِي مُوسَى عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ جَسَدَ أَحَدِهِمْ ‏"‏ ‏.‏




‘আবদুর রহমান ইবনু হাসানাহ হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি ও ‘আমর ইবনুল ‘আস নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট গেলাম। তিনি সাথে একটি ঢাল নিয়ে বের হলেন এবং সেটিকে আড়াল বানিয়ে পেশাব করলেন। আমরা বললামঃ দেখ, তিনি মহিলাদের ন্যায় (লুকিয়ে লুকিয়ে) পেশাব করছেন। তিনি একথা শুনে বললেন, তোমরা কি জান না বানী ইসরাঈলের এক ব্যক্তির কী অবস্থা হয়েছিল? তাদের কারো যদি (কোথাও) পেশাব লেগে যেত, তাহলে তারা ঐ স্থানকে কেটে ফেলত। অতঃপর ঐ ব্যক্তি তাদেরকে এরূপ করতে নিষেধ করেছিল বিধায় তাকে ক্ববরের শাস্তি দেয়া হয়।



সহীহ মাওকুফঃ বুখারী ও মুসলিম এটি মুত্তাসিল সানাদে বর্ণনা করেছেন। কিন্তু এ শব্দেঃ -----



ইমাম আবু দাউদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, মানসুর আবূ ওয়াইল থেকে আবূ মুসা সুত্রে এ হাদীসের অনুরূপ বর্ণনা করেছেনঃ (যদি পেশাব লাগত) তাহলে নিজের চামড়া কেটে ফেলত।



সহীহ।



আর ‘আসিম আবূ ওয়াইল, আবূ মূসা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর সূত্রে বর্ণনা করেছেনঃ ‘নিজের শরীর কেটে ফেলত’।



মুনকার।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، نسائی (30)،ابن ماجہ (346) ، الأعمش عنعن ، وحدیث منصور رواہ البخاري (225،226،2471) ومسلم (273/74) ، وحدیث عاصم: لم أجدہ ، اضافہ از حبیب الرحمٰن ہزاروی: الاعمش صرح بالسماع عند شرح مشکل الآثار (13/ 203) ، (انوار الصحیفہ ص 14)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. الأعمش: هو سليمان بن مهران. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٢٦)، وابن ماجه (٣٤٦) من طريق الأعمش، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٧٧٥٨)، و"صحيح ابن حبان" (٣١٢٧). قوله: "ومعه دَرَقة": في بعض الروايات: "ومعه كهيئة الدَّرقة"، وفي بعضها: "ومعه درقة أو شبهها"، والدرقة: الترس من جلود ليس فيه خشب ولا عصب.









সুনান আবী দাউদ (23)


حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ، وَمُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالاَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، ح وَحَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، - وَهَذَا لَفْظُ حَفْصٍ - عَنْ سُلَيْمَانَ، عَنْ أَبِي وَائِلٍ، عَنْ حُذَيْفَةَ، قَالَ أَتَى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم سُبَاطَةَ قَوْمٍ فَبَالَ قَائِمًا ثُمَّ دَعَا بِمَاءٍ فَمَسَحَ عَلَى خُفَّيْهِ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ قَالَ مُسَدَّدٌ قَالَ فَذَهَبْتُ أَتَبَاعَدُ فَدَعَانِي حَتَّى كُنْتُ عِنْدَ عَقِبِهِ ‏.




হুযায়ফাহ্ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলূল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এক সম্প্রদায়ের ময়লার স্তুপের নিকট গিয়ে দাঁড়িয়ে পেশাব করলেন। অতঃপর পানি আনালেন এবং মোজা মাসাহ্ করলেন। ইমাম আবূ দাউদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, মুসাদ্দাদ আরো বর্ণনা করেছেনঃ হুযায়ফাহ্ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, (নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) পেশাব করবেন বুঝতে পেরে) আমি পেছনের দিকে সরে যেতে থাকলাম। তিনি আমাকে ডাকলেন। এমনকি আমি তাঁর পায়ের গোড়ালির নিকট ছিলাম বা তার পিছনে এসে দাঁড়ালাম।



সহীহঃ বুখারী ও মুসলিম।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (224) صحیح مسلم (273)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. أبو عوانة: هو الوضاح بن عبد الله اليشكري، وسليمان: هو ابن مهران الأعمش، وأبو وائل: هو شقيق بن سلمة. وأخرجه البخاري (٢٢٤)، ومسلم (٢٧٣) (٧٣)، والترمذي (١٣)، والنسائي في "الكبرى" (١٨)، وابن ماجه (٣٠٥) من طرق عن الأعمش، بهذا الإسناد. وعند أكثرهم: "ثم دعا بماء فتوضأ ومسح على خفيه"، واقتصر البخاري على قوله: "فتوضأ"، وروايتا ابن ماجه والنسائي في الموضع الثاني مختصرتان بالبول قائماً. وأخرجه مختصراً البخاري (٢٢٥) و (٢٢٦)، ومسلم (٢٧٣) (٧٤)، والنسائي في "الكبرى" (٢٣) من طريق منصور بن المعتمر، عن أبي وائل، به. وهو في "مسند أحمد" (٢٣٢٤١)، و"صحيح ابن حبان" (١٤٢٤).









সুনান আবী দাউদ (24)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عِيسَى، حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنْ حُكَيْمَةَ بِنْتِ أُمَيْمَةَ بِنْتِ رُقَيْقَةَ، عَنْ أُمِّهَا، أَنَّهَا قَالَتْ كَانَ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَدَحٌ مِنْ عَيْدَانٍ تَحْتَ سَرِيرِهِ يَبُولُ فِيهِ بِاللَّيْلِ ‏.‏




হুকাইমাহ বিনতু উমাইমাহ বিনতু রুক্বাইক্বাহ তাঁর মা হতে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর একটি কাঠের পাত্র ছিল। সেটি তাঁর খাটের নিচে থাকত। রাতের বেলায় তিনি তাতে পেশাব করতেন।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: حسن صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن ، مشکوۃ المصابیح (362) ، ابن جریج صرح بالسماع عند النسائی (32) وحکیمۃ وثقھا الجمہور




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده ضعيف، حكيمة بنت أميمة لم يرو عنها غيرُ ابن جريج، ولم يوثقها غير ابن حبان، وجهَّلها الذهبي وابن حجر. وباقي رجاله ثقات وابن جريج -واسمه عبد الملك بن عبد العزيز، صرح بالتحديث عند النسائي وغيره. حجاج: هو ابن محمد المصيصي. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٣١) من طريق حجاج بن محمد، بهذا الإسناد. وهو في "صحيح ابن حبان" (١٤٢٦). قوله: "عيدان" بفتح العين وإسكان الياء، جمع عَيدانة، وهي النخلة الطويلة المتجردة، والمراد قدح من خشب ينقر ويقوَّر ليحفظ ما يجعل فيه. وقيل: بكسر العين جمع عود، وهو خطأ، لأن اجتماع الأعواد لا يتأتى منها قدح يحفظ الماء، بخلاف من فتح العين، فإنه يريد قدحاً من خشب هذه صفته ينقر ليحفظ ما يجعل فيه. انظر شرح النسائي للسيوطي.









সুনান আবী দাউদ (25)


حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ جَعْفَرٍ، عَنِ الْعَلاَءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ اتَّقُوا اللاَّعِنَيْنِ ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا وَمَا اللاَّعِنَانِ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ ‏"‏ الَّذِي يَتَخَلَّى فِي طَرِيقِ النَّاسِ أَوْ ظِلِّهِمْ ‏"‏ ‏.




আবু হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, তোমরা দুটি অভিশপ্ত কাজ থেকে দূরে থাকবে। সাহাবীগণ জিজ্ঞেস করলেন, অভিশপ্ত কাজ দু’টি কী হে আল্লাহর রাসূল? নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, মানুষের যাতায়াতের পথে অথবা (বিশ্রাম নেয়ার) ছায়া বিশিষ্ট জায়গায় পেশাব পায়খানা করা।



সহীহঃ মুসলিম।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (269)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. وأخرجه مسلم (٢٦٩) عن قتيبة بن سعيد ويحيى بن أيوب، عن إسماعيل بن جعفر، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٨٨٥٣)، و"صحيح ابن حبان" (١٤١٥). وقوله: اتقوا اللاعِنَيْنٍ، وفي رواية: اللَّعَّانَيْنٍ، قَال صاحب "النهاية": أي: الأمرين الجالبين للعن، الباعثين للناس عليه، فإنه سبب للعن من فعله في هذه المواضع، قال الخطابي، فلما صار سبباً أضيف إليهما الفعل، فكان كأنهما اللاعنان، فهو مجاز عقلي. وقد يكون اللاعن أيضاً بمعنى الملعون، فاعل بمعنى مفعول، كما قالوا: سر كاتم، أي: مكتوم، وعيشة راضية، أي: مرضية. وقوله: الذي يتخلى في طريق الناس، أي: يتغوط في موضع يمر به الناس، وقد نهي عنه لما فيه من إيذاء المسلمين بتنجيس من يمر ونتنه واستقذاره وقوله: في ظلِّهم، أي: مستظل الناس الذي اتخذوه مقيلاً ومناخاً ينزلونه. ورواية ابن حبان وأفنيتهم: وهو جمع فِناء، وفناء الدار: ما امتد من جوانبها.









সুনান আবী দাউদ (26)


حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ سُوَيْدٍ الرَّمْلِيُّ، وَعُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ أَبُو حَفْصٍ، وَحَدِيثُهُ، أَتَمُّ أَنَّ سَعِيدَ بْنَ الْحَكَمِ، حَدَّثَهُمْ قَالَ أَخْبَرَنَا نَافِعُ بْنُ يَزِيدَ، حَدَّثَنِي حَيْوَةُ بْنُ شُرَيْحٍ، أَنَّ أَبَا سَعِيدٍ الْحِمْيَرِيَّ، حَدَّثَهُ عَنْ مُعَاذِ بْنِ جَبَلٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ اتَّقُوا الْمَلاَعِنَ الثَّلاَثَ الْبَرَازَ فِي الْمَوَارِدِ وَقَارِعَةِ الطَّرِيقِ وَالظِّلِّ ‏"‏ ‏.




মু‘আয ইবনু জাবাল (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ তোমরা তিনটি অভিশপ্ত কাজ থেকে বিরত থাকবে। সেগুলো হচেছঃ মানুষের অবতরণ স্থল, চলাচলের পথ ও ছায়াবিশিষ্ট জায়গায় পায়খানা করা।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: حسن




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، ابن ماجہ (328) ، أبو سعید الحمیري لم یدرک معاذ بن جبل رضي اللّٰہ عنہ ، وللحدیث شاھد ضعیف عند أحمد (299/1) ، وحدیث مسلم (269) یغني عنہ ، (انوار الصحیفہ ص 14)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حسن لغيره، وهذا إسناد ضعيف لجهالة أبي سعيد الحميري، وروايته عن معاذ منقطعة، فإنه لم يدركه. وأخرجه ابن ماجه (٣٢٨) من طريق نافع بن يزيد، بهذا الإسناد. وله شاهد من حديث أبي هريرة، وهو السالف قبله. وآخر من حديث جابر عند ابن ماجه (٣٢٩)، وإسناده ضعيف. وثالث من حديث ابن عمر عند ابن ماجه (٣٣٠)، وإسناده ضعيف. ورابع من حديث ابن عباس عند أحمد (٢٧١٥)، وإسناده ضعيف. والموارد: المراد: المجاري والطرق إلى الماء واحدها: مورد، وقارعة الطريق، أي: الطريق التي تقرع بالأرجل والنعال فتصبح ممهدة للمرور عليها، فهو من إضافة الصفة إلى الموصوف، أي: الطريق المقروعة.









সুনান আবী দাউদ (27)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ حَنْبَلٍ، وَالْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ، قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، قَالَ أَحْمَدُ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، أَخْبَرَنِي أَشْعَثُ، وَقَالَ الْحَسَنُ، عَنْ أَشْعَثَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ لاَ يَبُولَنَّ أَحَدُكُمْ فِي مُسْتَحَمِّهِ ثُمَّ يَغْتَسِلُ فِيهِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَحْمَدُ ‏"‏ ثُمَّ يَتَوَضَّأُ فِيهِ فَإِنَّ عَامَّةَ الْوَسْوَاسِ مِنْهُ ‏"‏ ‏.‏




‘আব্দুল্লাহ ইবনু মুগাফ্‌ফাল (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ তোমাদের কেউ যেন গোসলখানায় পেশাব না করে। অথচ সেখানেই সে গোসল করে থাকে।



সহীহ।



আহমাদের বর্ণনায় রয়েছে, অথচ সেখানেই সে উযু করে থাকে। কারণ মনের অধিকাংশ খটকা এ থেকেই সৃষ্টি হয়।



দুর্বল।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح دون قول: " قال أحمد …. الخ "




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، ترمذی (21)،نسائی (36)،ابن ماجہ (304) ، الحسن البصري عنعن ، والحدیث الآتي (الأصل: 28 وسندہ صحیح) یغني عنہ ، ولبعض الحدیث شاہد صحیح موقوف عند البیہقي (1/ 98) ، (انوار الصحیفہ ص 14)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: صحيح لغيره دون قوله:" فإن عامة الوسواس منه" فإنه موقوف، وهذا إسناد رجاله ثقات، إلا أن الحسن البصري لم يصرح بسماعه من عبد الله بن مغفل. وهو في "مسند أحمد" (٢٠٥٦٩)، و"مصنف عبد الرزاق" (٩٧٨)، ومن طريق عبد الرزاق أخرجه ابن ماجه (٣٠٤). وأخرجه الترمذي (٢١)، والنسائي في "الكبرى" (٣٣) من طريق عبد الله بن المبارك، عن معمر، به. وهو وفي "مسند أحمد" (٢٠٥٦٩)، و"صحيح ابن حبان" (١٢٥٥). وانظر تخريج الرواية الموقوفة في "المسند". وللنهي عن البول في المستحم شاهد من حديث رجل صحب النبي ﷺ، وهو الآتي بعده. وآخر من حديث عبد الله بن يزيد عند الطبراني في"الأوسط" (٢٠٧٧)، وحسَّن إسناده المنذري في "الترغيب والترهيب" ١/ ١٣٦، والهيثمي في "مجمع الزوائد" ١/ ٢٠٤. قال الخطابي: المستحم: المغتسل، ويسمى مستحماً باسم الحميم وهو الماء الحار. وقال ابن سيد الناس في شرح الترمذي ورقة (٦٢): قال أهل العلم: وإنما نهي عن ذلك إذا لم يكن له مسلك يذهب منه البول، أو كان المكان صلباً، فيخيل إليه أنه أصابه شيء من رشاشه، فيحصل له الوسواس، فإن كان لا يخاف ذلك بأن يكون له منفذ أو غير ذلك، فلا كراهة. وقال ابن المبارك: قد وسع في البول في المغتسل إذا جرى فيه الماء.









সুনান আবী দাউদ (28)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ، حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، عَنْ دَاوُدَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ حُمَيْدٍ الْحِمْيَرِيِّ، - وَهُوَ ابْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ - قَالَ لَقِيتُ رَجُلاً صَحِبَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَمَا صَحِبَهُ أَبُو هُرَيْرَةَ قَالَ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ يَمْتَشِطَ أَحَدُنَا كُلَّ يَوْمٍ أَوْ يَبُولَ فِي مُغْتَسَلِهِ ‏.‏




হুমাইদ ইবনু ‘আবদুর রহমান আল-হিম্‌য়ারী হতে বর্ণিত, তিনি বলেনঃ আমার সাথে এমন এক ব্যক্তির সাক্ষাৎ হয়, যিনি আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এর মতই নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর সাহচর্যে ছিলেন। তিনি বলেছেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) প্রতিদিন চুল আঁচড়াতে অথবা গোসলখানায় পেশাব করতে নিষেধ করেছেন।



সহীহঃ মুসলিম।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح ، مشکوۃ المصابیح (472) ، وانظر الحدیث الآتی (81)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. زهير: هو ابن معاوية، وداود بن عبد الله: هو الأودي الكوفي. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٢٣٥) من طريق داود بن عبد الله الأودي، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٧٠١١). والحديث عندهما أطول مما هنا، وسيأتي تمامه عند المصنف برقم (٨١). قوله: "كما صحبه أبو هريرة" أي: قدر ذلك، وبيَّنته رواية أحمد (١٧٠١٢)، ففيها: "قد صحب النبي ﷺ أربع سنين كما صحبه أبو هريرة أربع سنين". وفي باب النهي عن الامتشاط كل يوم حديث عبد الله بن مغفل الآتي برقم (٤١٥٩).









সুনান আবী দাউদ (29)


حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ بْنِ مَيْسَرَةَ، حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ، حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَرْجِسَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى أَنْ يُبَالَ فِي الْجُحْرِ ‏.‏ قَالَ قَالُوا لِقَتَادَةَ مَا يُكْرَهُ مِنَ الْبَوْلِ فِي الْجُحْرِ قَالَ كَانَ يُقَالُ إِنَّهَا مَسَاكِنُ الْجِنِّ ‏.‏




আবদুল্লাহ ইবনু সারজিস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) গর্তে পেশাব করতে নিষেধ করেছেন। লোকজন ক্বাতাদাহকে জিজ্ঞেস করল, গর্তে পেশাব করা কেন অপছন্দনীয়? তিনি বললেনঃ বলা হয়, এতে জিনেরা বসবাস করে। [২৯]



দুর্বলঃ যঈফ আল-জামি’উস সাগীর ৬৩২৪, ৬০০৩, ইরওয়াউল গালীল ৫৫।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف،نسائی (34) ، قتادۃ مدلس (طبقات المدلسین بتحقیقي: 3/92) وعنعن ، (انوار الصحیفہ ص 14)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: رجاله ثقات، وقد أثبت سماع قتادة من عبد الله بن سرجس غيرُ واحد من أهل العلم كابن المديني وأبي زرعة وأبي حاتم الرازيين، وأحمد بن حنبل في رواية ابنه عبد الله، وأما في رواية حرب بن إسماعيل فقد تشكك في سماعه منه. وصحح هذا الحديث ابن خزيمة وابن السكن كما في "التلخيص الحبير" ١/ ١٠٦. هشام: هو ابن أبي عبد الله الدستوائي. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٣٠) من طريق معاذ بن هشام، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٠٧٧٥). وأما تعليله النهي بأنها مساكن الجن، فلم يصرح بقائله، وهو غريب إلا إن أراد بالجن صغار الحيات، فإنه يقال لها: جِنّ وجِنَّان، واحدها جانّ. ومنه قوله تعالى: ﴿فَلَمَّا رَآهَا تَهْتَزُّ كَأَنَّهَا جَانٌّ وَلَّى مُدْبِرًا﴾ [القصص: ٣١] وقال صاحب "بذل المجهود": والجن هاهنا ليس أحد الثقلين فقط، بل المراد ما يكون مستوراً عن أعين الناس من حشرات الأرض والهوام وغيرها.









সুনান আবী দাউদ (30)


حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ مُحَمَّدٍ النَّاقِدُ، حَدَّثَنَا هَاشِمُ بْنُ الْقَاسِمِ، حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ، عَنْ يُوسُفَ بْنِ أَبِي بُرْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، حَدَّثَتْنِي عَائِشَةُ، رضى الله عنها أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ إِذَا خَرَجَ مِنَ الْغَائِطِ قَالَ ‏ "‏ غُفْرَانَكَ ‏"‏ ‏.‏




আয়িশাহ্ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যখন পায়খানা থেকে বের হতেন, তখন বলতেনঃ ‘গুফরানাকা’ (অর্থঃ হে আল্লাহ! আমি আপনার নিকট ক্ষমা চাই)।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح ، مشکوۃ المصابیح (359)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده حسن، يوسف بن أبي بردة -وإن لم يرو عنه غير اثنين- وثقه العجلي، وصحح حديثه هذا ابن خزيمة وابن حبان والحاكم، وأبو حاتم الرازي وحسَّنه الترمذي، وذكره ابن حبان في "الثقات"، وقال الذهبي في "الكاشف": ثقة. وأخرجه الترمذي (٧)، والنسائي في "الكبرى" (٩٨٢٤)، وابن ماجه (٣٠٠) من طريق إسرائيل بن يونس، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٥٢٢٠)، و"صحيح ابن حبان" (١٤٤٤).









সুনান আবী দাউদ (31)


حَدَّثَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَمُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبَانُ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي قَتَادَةَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِذَا بَالَ أَحَدُكُمْ فَلاَ يَمَسَّ ذَكَرَهُ بِيَمِينِهِ وَإِذَا أَتَى الْخَلاَءَ فَلاَ يَتَمَسَّحْ بِيَمِينِهِ وَإِذَا شَرِبَ فَلاَ يَشْرَبْ نَفَسًا وَاحِدًا ‏"‏ ‏.‏




আবূ ক্বাতাদাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ তোমাদের কেউ যেন পেশাব করার সময় ডান হাতে তার পুরুষাঙ্গ স্পর্শ না করে। যখন পায়খানায় যাবে, ডান হাতে যেন (ঢিলা ব্যবহার) শৌচ না করে। আর পানি পান করার সময় যেন এক নিঃশ্বাসে পান না করে।



সহীহঃ বুখারী ও মুসলিম।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (153، 154) صحیح مسلم (267)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. أبان: هو ابن يزيد العطار، ويحيى: هو ابن أبي كثير. وأخرجه البخاري (١٥٣)، ومسلم (٢٦٧)، والترمذي (١٥)، والنسائي في "الكبرى" (٢٨) و (٢٩) و (٤١)، وابن ماجه (٣١٠) من طرق عن يحيى بن أبي كثير، بهذا الإسناد. وبعضهم يقتصر على بعضه. وهو في "مسند أحمد" (١٩٤١٩)، و "صحيح ابن حبان" (١٤٣٤). قال ابن العربي في "عارضة الأحوذي": غفران: مصدر كالغفر والمغفرة ومثله سبحانك، ونصبه بإضمار فعل تقديره هنا: أطلب غفرانك، وفي طلب المغفرة هاهنا محتملان: الأول: أنه سأل المغفرة من تركه ذكر الله في ذلك في تلك الحالة، والثاني: وهو أشهر أن النبي ﷺ سأل المغفرة في العجز عن شكر النعمة في تيسير الغذاء وإبقاء منفعته، وإخراج فضلته على سهولة، فيؤدي قضاء حقها بالمغفرة.









সুনান আবী দাউদ (32)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ آدَمَ بْنِ سُلَيْمَانَ الْمِصِّيصِيُّ، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي زَائِدَةَ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو أَيُّوبَ، - يَعْنِي الإِفْرِيقِيَّ - عَنْ عَاصِمٍ، عَنِ الْمُسَيَّبِ بْنِ رَافِعٍ، وَمَعْبَدٍ، عَنْ حَارِثَةَ بْنِ وَهْبٍ الْخُزَاعِيِّ، قَالَ حَدَّثَتْنِي حَفْصَةُ، زَوْجُ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَجْعَلُ يَمِينَهُ لِطَعَامِهِ وَشَرَابِهِ وَثِيَابِهِ وَيَجْعَلُ شِمَالَهُ لِمَا سِوَى ذَلِكَ ‏.‏




হারিসাহ ইবনু ওয়াহ্‌ব আল-খুযাঈ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, `তিনি বলেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর স্ত্রী হাফসাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আমাকে বলেছেনঃ নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) খাদ্য গ্রহণ, পানীয় পান ও পোশাক পরিধানের কাজ ডান হাতে করতেন। এছাড়া অন্যান্য কাজ বাম হাতে করতেন।`




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: صحيح لغيره، وهذا إسناد ضعيف لضعف أبي أيوب الإفريقي -وهو عبد الله ابن علي الأزرق- ولاضطراب عاصم- وهو ابن أبي النجود- فيه. ابن أبي زائدة: هو يحيى بن زكريا، ومعبد: هو ابن خالد الكوفي. وأخرجه أبو يعلى (٧٠٤٢) و (٧٠٦٠)، وابن حبان (٥٢٢٧)، والطبراني في "الكبير" ٢٣/ (٣٤٦)، والحاكم ٤/ ١٠٩، والبيهقي ١/ ١١٣ من طريق ابن أبي زائدة، بهذا الإسناد. ورواية غير أبي يعلى والبيهقي عن المسيب وحده، لم يقرنوه بمعبد. وأخرجه ابن أبي شيبة ١/ ١٥٢، وعبد بن حميد (١٥٤٥)، وأحمد (٢٦٤٦١)، والطبراني ٢٣/ (٣٤٧) من طريق حسين بن علي الجعفي، عن زائدة بن قدامة، عن عاصم، عن المسيب بن رافع، عن حفصة. فأسقط الواسطة بين المسيب وحفصة. وقال ابن أبي شيبة: وقال غير حسين عن زائدة: عن سواء عن حفصة. وتشهد له أحاديث الباب قبله وبعده.









সুনান আবী দাউদ (33)


حَدَّثَنَا أَبُو تَوْبَةَ الرَّبِيعُ بْنُ نَافِعٍ، حَدَّثَنِي عِيسَى بْنُ يُونُسَ، عَنِ ابْنِ أَبِي عَرُوبَةَ، عَنْ أَبِي مَعْشَرٍ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَتْ يَدُ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم الْيُمْنَى لِطُهُورِهِ وَطَعَامِهِ وَكَانَتْ يَدُهُ الْيُسْرَى لِخَلاَئِهِ وَمَا كَانَ مِنْ أَذًى ‏.‏




আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর ডান হাত ছিল পবিত্রতা অর্জন ও খাদ্য গ্রহণের জন্য। আর তাঁর বাম হাত ছিল শৌচ ও অন্যান্য নিকৃষ্ট বা কষ্টদায়ক কাজের জন্য।




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، سعید بن أبي عروبۃ مدلس (طبقات المدلسین: 2/50 وھو من الثالثۃ) وعنعن ، والحدیث السابق (الأصل: 32 وسندہ حسن) یغني عنہ ، (انوار الصحیفہ ص 14، 15)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: رجاله ثقات، إلا أن إبراهيم -وهو ابن يزيد النخعي- لم يثبت له سماع من عائشة، وإنما دخل عليها ورآها، وقد تبينت الواسطة بينهما -وهو الأسود- كما سيأتي بعده. ابن أبي عروبة: هو سعيد، وعيسى بن يونس روى عنه قبل الاختلاط، وأبو معشر: هو زياد بن كليب الكوفي. وسيأتي بنحوه عند المصنف برقم (٤١٤٠) من طريق مسروق، عن عائشة. وانظر تخريجه هناك.









সুনান আবী দাউদ (34)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمِ بْنِ بَزِيعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ بْنُ عَطَاءٍ، عَنْ سَعِيدٍ، عَنْ أَبِي مَعْشَرٍ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنِ الأَسْوَدِ، عَنْ عَائِشَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِمَعْنَاهُ ‏.‏




‘আয়িশাহ্ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সূত্রে পুর্বোক্ত হাদীসের সমার্থক হাদীস বর্ণিত আছে।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، سعید بن أبي عروبۃ مدلس (طبقات المدلسین: 2/50 وھو من الثالثۃ) وعنعن ، والحدیث السابق (الأصل: 32 وسندہ حسن) یغني عنہ ، (انوار الصحیفہ ص 14، 15)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح، عبد الوهاب بن عطاء سمع من سعيد -وهو ابن أبي عروبة- قبل الاختلاط. الأسود: هو ابن يزيد النخعي. وانظر ما قبله، وما سيأتي برقم (٤١٤٠).









সুনান আবী দাউদ (35)


حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُوسَى الرَّازِيُّ، أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ، عَنْ ثَوْرٍ، عَنِ الْحُصَيْنِ الْحُبْرَانِيِّ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنِ اكْتَحَلَ فَلْيُوتِرْ مَنْ فَعَلَ فَقَدْ أَحْسَنَ وَمَنْ لاَ فَلاَ حَرَجَ وَمَنِ اسْتَجْمَرَ فَلْيُوتِرْ مَنْ فَعَلَ فَقَدْ أَحْسَنَ وَمَنْ لاَ فَلاَ حَرَجَ وَمَنْ أَكَلَ فَمَا تَخَلَّلَ فَلْيَلْفِظْ وَمَا لاَكَ بِلِسَانِهِ فَلْيَبْتَلِعْ مَنْ فَعَلَ فَقَدْ أَحْسَنَ وَمَنْ لاَ فَلاَ حَرَجَ وَمَنْ أَتَى الْغَائِطَ فَلْيَسْتَتِرْ فَإِنْ لَمْ يَجِدْ إِلاَّ أَنْ يَجْمَعَ كَثِيبًا مِنْ رَمْلٍ فَلْيَسْتَدْبِرْهُ فَإِنَّ الشَّيْطَانَ يَلْعَبُ بِمَقَاعِدِ بَنِي آدَمَ مَنْ فَعَلَ فَقَدْ أَحْسَنَ وَمَنْ لاَ فَلاَ حَرَجَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ رَوَاهُ أَبُو عَاصِمٍ عَنْ ثَوْرٍ قَالَ حُصَيْنٌ الْحِمْيَرِيُّ وَرَوَاهُ عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ الصَّبَّاحِ عَنْ ثَوْرٍ فَقَالَ أَبُو سَعِيدٍ الْخَيْرُ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ أَبُو سَعِيدٍ الْخَيْرُ هُوَ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.




আবূ হুরাইরাহ্ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, কেউ সুরমা লাগালে বেজোড় সংখ্যায় লাগাবে। এরূপ করলে ভাল, না করলে কোন ক্ষতি নেই। ঢিলা ব্যবহার করলে বেজোড় সংখ্যায় করবে। এরূপ করলে ভাল, না করলে কোন সমস্যা নেই। খাওয়ার পর খিলাল করলে যদি কিছু বের হয় তা ফেলে দিবে, আর জিহবার সাথে কিছু লেগে থাকলে তা গিলে ফেলবে। এরূপ করলে ভাল, না করলে কোন অসুবিধা নেই। পায়খানায় গেলে আড়ালে চলে যাবে। এরূপ জায়গা না পাওয়া গেলে অন্তত বালুর স্তুপ তৈরী করে তার আড়ালে বসবে। কারণ শাইত্বন মানুষের লজ্জাস্থান নিয়ে খেলা করে। এরূপ করলে ভাল, না করলে কোন গুনাহ নেই।



ইমাম আবূ দাউদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, আবূ সাঈদ আল খায়র নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর অন্যতম সহাবী।



দূর্বলঃ যঈফ আল-জামি’উস সাগীর ৫৪৬৮, মিশকাত ৩৫২।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف،ابن ماجہ (337،3498) ، حصین مجہول کما في تقریب التھذیب (1393) ، (انوار الصحیفہ ص 15)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده ضعيف، حصين الحبراني مجهول تفرد بالرواية عنه ثور بن يزيد الحمصي، وأبو سعيد، ويقال: أبو سعد -وهو الحبراني- مجهول أيضاً، تفرد بالرواية عنه حُصين الحبراني. وأخرجه ابن ماجه (٣٣٧) و (٣٣٨)، ومختصراً (٣٤٩٨) من طريق عبد الملك ابن الصباح، عن ثور بن يزيد، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٨٨٣٨)، و"صحيح ابن حبان" (١٤١٠).









সুনান আবী দাউদ (36)


حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ خَالِدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَوْهَبٍ الْهَمْدَانِيُّ، حَدَّثَنَا الْمُفَضَّلُ، - يَعْنِي ابْنَ فَضَالَةَ الْمِصْرِيَّ - عَنْ عَيَّاشِ بْنِ عَبَّاسٍ الْقِتْبَانِيِّ، أَنَّ شُيَيْمَ بْنَ بَيْتَانَ، أَخْبَرَهُ عَنْ شَيْبَانَ الْقِتْبَانِيِّ، قَالَ إِنَّ مَسْلَمَةَ بْنَ مُخَلَّدٍ اسْتَعْمَلَ رُوَيْفِعَ بْنَ ثَابِتٍ، عَلَى أَسْفَلِ الأَرْضِ ‏.‏ قَالَ شَيْبَانُ فَسِرْنَا مَعَهُ مِنْ كُومِ شَرِيكٍ إِلَى عَلْقَمَاءَ أَوْ مِنْ عَلْقَمَاءَ إِلَى كُومِ شَرِيكٍ - يُرِيدُ عَلْقَامَ - فَقَالَ رُوَيْفِعٌ إِنْ كَانَ أَحَدُنَا فِي زَمَنِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لَيَأْخُذُ نِضْوَ أَخِيهِ عَلَى أَنَّ لَهُ النِّصْفَ مِمَّا يَغْنَمُ وَلَنَا النِّصْفُ وَإِنْ كَانَ أَحَدُنَا لَيَطِيرُ لَهُ النَّصْلُ وَالرِّيشُ وَلِلآخَرِ الْقَدَحُ ‏.‏ ثُمَّ قَالَ قَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ يَا رُوَيْفِعُ لَعَلَّ الْحَيَاةَ سَتَطُولُ بِكَ بَعْدِي فَأَخْبِرِ النَّاسَ أَنَّهُ مَنْ عَقَدَ لِحْيَتَهُ أَوْ تَقَلَّدَ وَتَرًا أَوِ اسْتَنْجَى بِرَجِيعِ دَابَّةٍ أَوْ عَظْمٍ فَإِنَّ مُحَمَّدًا صلى الله عليه وسلم مِنْهُ بَرِيءٌ ‏"‏ ‏.




শায়বান আল-ক্বিতবানী (রাহিমাহুল্লাহ) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, মাসলামাহ্ ইবনু মুখাল্লাদ রুওয়াইফি’ ইবনু সাবিতকে নিম্নভূমিতে কর্মচারী করেছিলেন। শায়বান বলেন, আমরা তাঁর সাথে ‘কুমি শারীক’ থেকে ‘আলক্বামা’ পর্যন্ত অথবা ‘আলক্বামা’ থেকে ‘কুমি শারীক’ (মিসরের কয়েকটি স্থান) পর্যন্ত সফর করেছি। ‘আলক্বামা’ ছিল তাঁর গন্তব্যস্থল। রুওয়াইফি’ বলেন, রসুলূল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর যুগে আমাদের মধ্যকার একজন অপরজনের নিকট হতে এই শর্তে উট গ্রহণ করত যে, জিহাদে যা গনিমত লাভ হবে তার অর্ধেক তোমার, আর অর্ধেক আমার। এতে করে একজনের ভাগে যদি তরবারীর খাপ ও তীরের পালক পড়ত, তখন আরেকজনের ভাগে পড়ত পালকবিহীন তীর। রুওয়াইফি’ বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে বলেছেনঃ হে রুওয়াইফি’! সম্ভবতঃ আমার পরেও তুমি দীর্ঘদিন জীবিত থাকবে। তুমি লোকদের জানিয়ে দিওঃ যে ব্যক্তি দাড়িতে গিরা দিবে, ঘোড়ার গলায় মালা পরাবে অথবা প্রাণীর বিষ্ঠা বা হাড় দিয়ে ইস্তিনজা করবে, মুহাম্মদ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার দায়-দায়িত্ব থেকে মুক্ত।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح ، مشکوۃ المصابیح (351) ، وانظر الحدیث الآتی




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حديث صحيح، وهذا إسناد ضعيف لجهالة شيان القتباني -وهو ابن أمية-، لكنه متابع كما سيأتي بعده. وأخرج المرفوع منه النسائي في "الكبرى" (٩٢٨٤) من طريق حيوة بن شريح، عن عياش القتباني، أن شييم بن بيتان حدثه أنه سمع رويفع بن ثابت … فذكره. وهو في "مسند أحمد" (١٧٠٠٠). وانظر تمام الكلام عليه فيه. والقصة التي في أوله أخرجها أحمد (١٦٩٩٥). وانظر ما بعده.









সুনান আবী দাউদ (37)


حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ خَالِدٍ، حَدَّثَنَا مُفَضَّلٌ، عَنْ عَيَّاشٍ، أَنَّ شُيَيْمَ بْنَ بَيْتَانَ، أَخْبَرَهُ بِهَذَا الْحَدِيثِ، أَيْضًا عَنْ أَبِي سَالِمٍ الْجَيْشَانِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، يَذْكُرُ ذَلِكَ وَهُوَ مَعَهُ مُرَابِطٌ بِحِصْنِ بَابِ أَلْيُونَ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ حِصْنُ أَلْيُونَ عَلَى جَبَلٍ بِالْفُسْطَاطِ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ وَهُوَ شَيْبَانُ بْنُ أُمَيَّةَ يُكْنَى أَبَا حُذَيْفَةَ ‏.‏




‘আইয়াশ (রাহিমাহুল্লাহ) শুয়াইম ইবনু বাইতামের মাধ্যমে আবূ সালিম আল-জায়শানী সূত্র হতে বর্ণিত, উক্ত হাদীস বর্ণিত আছে। তিনি (সালিম) ‘আবদুল্লাহ ইবনু ‘আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)- কে এ হাদীস বর্ণনা করতে শুনেছেন, যখন তিনি ‘আলইউন’ দুর্গ অবরোধ করেছিলেন। ইমাম আবূ দাউদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, ‘আলইউন’ দুর্গ (মিসরের) ফুসত্বাত্বে একটি পাহাড়ের উপর অবস্থিত।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح ، انفرد بہ ابو داود، وانظر الحدیث السابق




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. أبو سالم الجيشاني: هو سفيان بن هانئ. وانظر تخريجه فيما قبله.









সুনান আবী দাউদ (38)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ حَنْبَلٍ، حَدَّثَنَا رَوْحُ بْنُ عُبَادَةَ، حَدَّثَنَا زَكَرِيَّا بْنُ إِسْحَاقَ، حَدَّثَنَا أَبُو الزُّبَيْرِ، أَنَّهُ سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، يَقُولُ نَهَانَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ نَتَمَسَّحَ بِعَظْمٍ أَوْ بَعْرٍ ‏.‏




আবুয যুবাইর হতে বর্ণিত, জাবির ইবনু ‘আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে বলতে শুনেছেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) আমাদেরকে হাড্ডি অথবা (প্রাণীর) বিষ্ঠা দ্বারা ইস্তিন্জা করতে নিষেধ করেছেন।



সহীহঃ মুসলিম।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (263)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. أبو الزبير -وهو محمد بن مسلم بن تدرس المكي- قد صرح بالتحديث. وأخرجه مسلم (٢٦٣) من طريق روح بن عبادة، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٤٦٩٩).









সুনান আবী দাউদ (39)


حَدَّثَنَا حَيْوَةُ بْنُ شُرَيْحٍ الْحِمْصِيُّ، حَدَّثَنَا ابْنُ عَيَّاشٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي عَمْرٍو السَّيْبَانِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الدَّيْلَمِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ، قَالَ قَدِمَ وَفْدُ الْجِنِّ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالُوا يَا مُحَمَّدُ انْهَ أُمَّتَكَ أَنْ يَسْتَنْجُوا بِعَظْمٍ أَوْ رَوْثَةٍ أَوْ حُمَمَةٍ فَإِنَّ اللَّهَ تَعَالَى جَعَلَ لَنَا فِيهَا رِزْقًا ‏.‏ قَالَ فَنَهَى النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم عَنْ ذَلِكَ ‏.




‘আবদুল্লাহ ইবনু মাসউদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, জিনদের একটি প্রতিনিধি দল নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) এর নিকট এসে বলল, হে মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম)! আপনার উম্মাতকে হাড়, গোবর অথবা কয়লা দ্বারা ইস্তিন্‌জা করতে নিষেধ করে দিন। কারণ মহান আল্লাহ ওগুলোর মধ্যে আমাদের রিযিক নিহিত রেখেছেন। অতঃপর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) ওগুলো দিয়ে ইস্তিন্‌জা করতে নিষেধ করেন।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن ، مشکوۃ المصابیح (375) ، اسماعیل بن عیاش صرح بالسماع من شیخہ الشامی عند الدارقطنی (1/ 55) وروایتہ عن الشامیین مقبولۃ عند الجمھور (الفتح المبین: 3/68) وانظر دارقطنی (1/ 56)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده ضعيف، ابن عياش -وهو إسماعيل، وإن كان صدوقاً في روايته عن أهل بلده، وهذا منها- قد تفرد بهذا السياق، ولم يُتابَع عليه إلا من طريق ضعيف، وضعفه بهذا السياق الدارقطني والبيهقي. وأخرجه من طريق أبي داود البيهقيُّ ١/ ١٠٩، والبغوي (١٨٠). وقال البيهقي: إسناده شامي غير قوي. وأخرجه الدارقطني (١٤٩) من طريق إسماعيل بن عياش، به. وقال: إسناده شامي ليس بثابت. وأخرجه الطبراني في "مسند الشاميين" (٨٧٢) من طريق بقية بن الوليد، عن الأوزاعي، عن يحيي السيباني، به. وبقية مدلس ورواه بالعنعنة على ضعف فيه أيضاً. وأخرج مسلم (٤٥٠) (١٥٠)، والترمذي (١٨)، والنسائي في "الكبرى" (٣٩) من طريق داود بن أبي هند، عن الشعبي، عن علقمة، عن ابن مسعود رفعه: "لا تستنجوا بالروث ولا بالعظام، فإنه زاد إخوانكم من الجن" وهذا إسناد رجاله ثقات، لكن رواه ابن عُلية عند مسلم بإثر الرواية السالفة والترمذي (٣٥٤٠) عن داود ابن أبي هند، به. إلا أنه جعل النهيَ عن الاستنجاء بهما مسنداً، وتعليلَ ذلك بأنهما من طعام الجن عن الشعبي مرسلاً. ورجح رواية ابن علية الدارقطني في "التتبع" ص٣٤١ - ٣٤٣، وفي "العلل" ٥/ ١٣٢، والخطيب في "الفصل للوصل" ٢/ ٦٢٤. وانظر ما علقناه على "جامع الترمذي". وللنهي عن الاستنجاء بالعظم والروث شواهد، منها حديث جابر السالف قبل هذا، وحديث أبي هريرة عند البخاري (١٥٥). وليس فيهما التعليل بأنهما من طعام الجن. أما النهي عن الاستنجاء بالحممة -وهي الفحمة- فأخرجه الدارقطي (١٥٠)، والبيهقي ١/ ١٠٩ - ١١٠ من طريق موسي بن عُلَيّ بن رباح، عن أبيه، عن ابن مسعود. وأعلاه بأن عُلي بن رباح لم يثبت له سماع من ابن مسعود. وانظر "مسند أحمد" (٤٣٧٥). وله شاهد من حديث عبد الله بن الحارث بن جزء عند البزار (٣٧٨٣)، وفي إسناده عبد الله بن لهيعة، وهو ضعيف.









সুনান আবী দাউদ (40)


حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ، وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ مُسْلِمِ بْنِ قُرْطٍ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِذَا ذَهَبَ أَحَدُكُمْ إِلَى الْغَائِطِ فَلْيَذْهَبْ مَعَهُ بِثَلاَثَةِ أَحْجَارٍ يَسْتَطِيبُ بِهِنَّ فَإِنَّهَا تُجْزِئُ عَنْهُ ‏"‏ ‏.




‘আয়িশাহ্‌ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বলেছেন, তোমাদের কেউ পায়খানায় গেলে যেন তিনটি পাথর সাথে নিয়ে যায় এবং ওগুলো দ্বারা ইস্তিন্‌জা করে। কারণ তার জন্য তাই যথেষ্ঠ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: حسن




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن ، مشکوۃ المصابیح (349) ، وصححہ الدارقطنی (1/54،55) وسندہ حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: صحيح لغيره، وهذا إسناد ضعيف لجهالة مسلم بن قرط، فقد تفرد بالرواية عنه أبو حازم، وهو سلمة بن دينار. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٤٢) من طريق أبي حازم، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٤٧٧١) و (٢٥٠١٣). ويشهد للاستنجاء بثلاثة أحجار حديث سلمان السالف برقم (٧)، وحديث أبي هريرة السالف برقم (٨)، وحديثه أيضاً السالف برقم (٣٥). والاستطابة بالأحجار والاستنجاء والاستجمار كناية عن إزالة الخارج من السبيلين عن مخرجه، فالاستطابة والاستنجاء تارة يكونان بالماء، وتارة بالأحجار، والاستجمار مختص بالأحجار.