হাদীস বিএন


সুনান আবী দাউদ





সুনান আবী দাউদ (361)


حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ فَاطِمَةَ بِنْتِ الْمُنْذِرِ، عَنْ أَسْمَاءَ بِنْتِ أَبِي بَكْرٍ، أَنَّهَا قَالَتْ سَأَلَتِ امْرَأَةٌ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَرَأَيْتَ إِحْدَانَا إِذَا أَصَابَ ثَوْبَهَا الدَّمُ مِنَ الْحَيْضَةِ كَيْفَ تَصْنَعُ قَالَ ‏ "‏ إِذَا أَصَابَ إِحْدَاكُنَّ الدَّمُ مِنَ الْحَيْضِ فَلْتَقْرِصْهُ ثُمَّ لْتَنْضَحْهُ بِالْمَاءِ ثُمَّ لْتُصَلِّي ‏"‏ ‏.




আসমা বিনতু আবূ বাক্‌র (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, এক মহিলা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে জিজ্ঞেস করল, হে আল্লাহর রাসূল! আমাদের কারো কাপড়ে রক্ত লেগে গেলে করণীয় কি? তিনি বললেনঃ তোমাদের কারো কাপড়ে হায়িযের রক্ত লেগে গেলে তা হাত দিয়ে খুঁটে ফেলবে। অতঃপর তা পানি দিয়ে ধুয়ে ঐ কাপড়ে সলাত আদায় করবে।

সহীহঃ বুখারী ও মুসলিম।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (307) صحیح مسلم (291)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. وهو في "موطأ مالك" برواية أبي مصعب (١٦٦)، ومن طريق مالك أخرجه البخاري (٣٠٧)، ومسلم (٢٩١). ووقع في "الموطأ" برواية يحيي ١/ ٦٠ - ٦١: عن هشام بن عروة، عن أبيه، عن فاطمة بنت المنذر، وهو خطأ نبه عليه ابن عبد البر في "التمهيد" ٢٢٩/ ٢٢، وفي "الاستذكار" ٣/ ٢٠٣. وأخرجه البخاري (٢٢٧)، ومسلم (٢٩١)، والترمذي (١٣٨)، والنسائي في "الكبرى" (٢٨١)، وابن ماجه (٦٢٩) من طرق عن هشام بن عروة، عن فاطمة، به. وهو في "مسند أحمد" (٢٦٩٢٢)، و"صحح ابن حبان" (١٣٩٦ - ١٣٩٨). وانظر ما بعده.









সুনান আবী দাউদ (362)


حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، ح وَحَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ، ح وَحَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، - يَعْنِي ابْنَ سَلَمَةَ - عَنْ هِشَامٍ، بِهَذَا الْمَعْنَى قَالَ ‏ "‏ حُتِّيهِ ثُمَّ اقْرُصِيهِ بِالْمَاءِ ثُمَّ انْضَحِيهِ ‏"‏ ‏.‏




হিশাম (রাহিমাহুল্লাহ) হতে বর্ণিত, হিশাম (রাহিমাহুল্লাহ) সূত্রে উক্ত হাদীসের সমার্থক বর্ণনা আছে। তাতে রয়েছেঃ নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ কোন জিনিস দিয়ে তা দূর করে পানি দ্বারা ঘষে নিবে। তারপর তাতে পানি ছিটিয়ে ধুয়ে ফেলবে।



সহীহঃ বুখারী ও মুসলিম




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. حماد شيخ مسدد: هو ابن زيد. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٢٨١) من طريق حماد بن زيد، بهذا الإسناد. وانظر ما قبله.









সুনান আবী দাউদ (363)


حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، - يَعْنِي ابْنَ سَعِيدٍ الْقَطَّانَ - عَنْ سُفْيَانَ، حَدَّثَنِي ثَابِتٌ الْحَدَّادُ، حَدَّثَنِي عَدِيُّ بْنُ دِينَارٍ، قَالَ سَمِعْتُ أُمَّ قَيْسٍ بِنْتَ مِحْصَنٍ، تَقُولُ سَأَلْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم عَنْ دَمِ الْحَيْضِ يَكُونُ فِي الثَّوْبِ قَالَ ‏ "‏ حُكِّيهِ بِضِلْعٍ وَاغْسِلِيهِ بِمَاءٍ وَسِدْرٍ ‏"‏ ‏.‏




‘আদী ইবনু দীনার (রাহিমাহুল্লাহ) হতে বর্ণিত, উম্মু ক্বায়িস বিনতু মিহসান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -কে আমি বলতে শুনেছি, আমি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট জিজ্ঞেস করলাম, কাপড়ে হায়িযের রক্ত লেগে গেলে কী করতে হবে? তিনি বললেনঃ কাঠের টুকরা দিয়ে তা (খুঁচে) দূর করে বরই পাতা মিশানো পানি দিয়ে ধুয়ে ফেলবে।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. سفيان: هو الثوري، وثابت الحداد: هو ابن هرمز الكوفي أبو المقدام. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٢٨٢)، وابن ماجه (٦٢٨) من طريقين عن سفيان الثوري، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٦٩٩٨) ، و"صحيح ابن حبان" (١٣٦٥). قوله: "بضلع" الضِّلَع: العود، وهو في الأصل واحد أضلاع الحيوان، أُريد به العود المشبَّه به.









সুনান আবী দাউদ (364)


حَدَّثَنَا النُّفَيْلِيُّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ ابْنِ أَبِي نَجِيحٍ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ قَدْ كَانَ يَكُونُ لإِحْدَانَا الدِّرْعُ فِيهِ تَحِيضُ وَفِيهِ تُصِيبُهَا الْجَنَابَةُ ثُمَّ تَرَى فِيهِ قَطْرَةً مِنْ دَمٍ فَتَقْصَعُهُ بِرِيقِهَا ‏.‏




‘আয়িশাহ্‌ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমাদের করো নিকট (কখনো) একটি জামা থাকত। হায়িয অবস্থায় তার পরনে ঐ জামা থাকত। তাতেই জানাবাতের গোসল ফরয হত। অতঃপর জামার কোথাও এক ফোঁটা রক্ত পরিলক্ষিত হলে তা থু থু দ্বারা রগড়ে নিত।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، عبد اللّٰہ بن أبي نجیح مدلس (طبقات المدلسین: 77/ 3) وعنعن ، (انوار الصحیفہ ص 27)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. النفيلي: هو عبد الله بن محمَّد، وسفيان: هو ابن عيينة، وابن أبي نجيح: هو عبد الله بن يسار، وعطاء: هو ابن أبي رباح. وقد سلف برقم (٣٥٨). قولها: "الدرع" هو قميص المرأة.









সুনান আবী দাউদ (365)


حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، أَخْبَرَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ، عَنْ عِيسَى بْنِ طَلْحَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ خَوْلَةَ بِنْتَ يَسَارٍ، أَتَتِ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّهُ لَيْسَ لِي إِلاَّ ثَوْبٌ وَاحِدٌ وَأَنَا أَحِيضُ فِيهِ فَكَيْفَ أَصْنَعُ قَالَ ‏"‏ إِذَا طَهُرْتِ فَاغْسِلِيهِ ثُمَّ صَلِّي فِيهِ ‏"‏ ‏.‏ فَقَالَتْ فَإِنْ لَمْ يَخْرُجِ الدَّمُ قَالَ ‏"‏ يَكْفِيكِ غَسْلُ الدَّمِ وَلاَ يَضُرُّكِ أَثَرُهُ ‏"‏ ‏.‏




আবূ হুরাইরাহ্‌ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, খাওলা বিনতু ইয়াসার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর নিকট উপস্থিত হয়ে বলেন, হে আল্লাহর রাসূল! আমার একটি মাত্র পরনের কাপড় আছে। তা পরিহিত অবস্থায় আমি হায়িযগ্রস্ত হই। অতএব এ অবস্থায় আমার করণীয় কী? তিনি বললেন, তুমি হাযিয়মুক্ত হলে পরিধেয় বস্ত্রটি ধুয়ে নিবে। অতঃপর সেটা পরে সলাত আদায় করবে। তিনি বলেন, যদি রক্তের চিহ্ন দূরীভূত না হয়? নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ রক্ত ধুয়ে ফেলাই তোমার জন্য যথেষ্ট। রক্তের চিহ্ন তোমার কোন ক্ষতি করবে না।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن ، ابن لھیعۃ صرح بالسماع عند البیھقي (2/408) ورواہ عنہ عبد اللہ بن وھب وغیرہ وللحدیث طریق آخر عند أحمد (2/364)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده حسن، ابن لهيعة -وهو عبد الله، وإن كان سيئ الحفظ- قد رواه عنه قتيبة، وروايته عنه قوية، وتابعه عبد الله بن وهب أيضاً، وهو أحد العبادلة الذين رووا عن ابن لهيعة قبل احتراق كتبه. وأخرجه أحمد (٨٩٣٩) عن قتيبة بن سعيد، بهذا الإسناد. وأخرجه البيهقي ٢/ ٤٠٨ من طريق عبد الله بن وهب وعثمان بن صالح، كلاهما عن ابن لهيعة، به. وأخرجه ابن منده -كما في (الإصابة) ٧/ ٦٢٧ - ، والطبراني ٢٤/ (٦١٥)، والبيهقي ٢/ ٤٠٨ - ٤٠٩ من طريق علي بن ثابت، عن الوازع بن نافع، عن أبي سلمة ابن عبد الرحمن، عن خولة بنت حكيم. وفي رواية ابن منده والبيهقي: خولة بنت يمان أو يسار، وتصحف "يمان" في مطبوع "سنن البيهقي" إلى: نمار. والوازع بن نافع ضعيف. وهذا الحديث من حاشية نسخة (ج)، وهو ليس في رواية اللؤلؤي، وإنما هو في رواية ابن الأعرابي نبه عليه الحافظ المزي في "الأطراف". وترتيبه في نسخة (ج) بعد الحديث رقم (٣٥٩).









সুনান আবী দাউদ (366)


حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ حَمَّادٍ الْمِصْرِيُّ، أَخْبَرَنَا اللَّيْثُ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ، عَنْ سُوَيْدِ بْنِ قَيْسٍ، عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ حُدَيْجٍ، عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ، أَنَّهُ سَأَلَ أُخْتَهُ أُمَّ حَبِيبَةَ زَوْجَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم هَلْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي فِي الثَّوْبِ الَّذِي يُجَامِعُهَا فِيهِ فَقَالَتْ نَعَمْ إِذَا لَمْ يَرَ فِيهِ أَذًى ‏.‏




মু’আবিয়াহ ইবনু আবূ সুফিয়ান হতে বর্ণিত, তিনি তার বোন ও নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর স্ত্রী উম্মু হাবীবাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -কে জিজ্ঞেস করেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কি স্ত্রী সহবাসকালে পরিহিত কাপড়ে সলাত আদায় করতেন? তিনি বললেন, হ্যাঁ তাতে কোনরূপ অপবিত্রতা পরিদৃষ্ট না হলে আদায় করতেন।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. الليث: هو ابن سعد، ومعاوية بن حُديج صحابي صغير، ففي الإسناد ثلاثة من الصحابة. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٢٨٣)، وابن ماجه (٥٤٠) من طريق الليث بن سعد، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٧٤٠٤)، و"صحيح ابن حبان" (٢٣٣١).









সুনান আবী দাউদ (367)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ بْنُ عَبْدِ الْوَارِثِ، حَدَّثَنِي أَبِي، حَدَّثَتْنِي أُمُّ الْحَسَنِ، - يَعْنِي جَدَّةَ أَبِي بَكْرٍ الْعَدَوِيِّ - عَنْ مُعَاذَةَ، قَالَتْ سَأَلْتُ عَائِشَةَ - رضى الله عنها - عَنِ الْحَائِضِ يُصِيبُ ثَوْبَهَا الدَّمُ ‏.‏ قَالَتْ تَغْسِلُهُ فَإِنْ لَمْ يَذْهَبْ أَثَرُهُ فَلْتُغَيِّرْهُ بِشَىْءٍ مِنَ صُفْرَةٍ ‏.‏ قَالَتْ وَلَقَدْ كُنْتُ أَحِيضُ عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ثَلاَثَ حِيَضٍ جَمِيعًا لاَ أَغْسِلُ لِي ثَوْبًا ‏.‏




‘আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাদের কাপড়ে অথবা চাদরে সলাত আদায় করতেন না।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. معاذ: هو ابن معاذ العنبري، والأشعث: هو ابن عبد الملك الحمراني. وأخرجه الترمذى (٦٠٦)، والنسائي في "الكبرى" (٩٧٢٢) و (٩٧٢٣) من طرق عن الأشعث، بهذا الإسناد، وقال الترمذي: حديث حسن صحيح. وهو في "مسند أحمد" (٢٤٦٩٨)، و"صحيح ابن حبان" (٢٣٣٦). وسيتكرر برقم (٦٤٥)، وانظر ما بعده. قولها: "في شُعُرنا" الشُّعُر: جمع شعار، وهو الثوبُ الذي يلي البدنَ. قاله الخطابي في "معالم السنن". واللحف: جمع لحاف: وهو اسم لما يلتحف به. وإنما امتنع من الصلاة فيها مخافة أن يكون أصابها شيء من دم الحيض.









সুনান আবী দাউদ (368)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ الْعَبْدِيُّ، أَخْبَرَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ نَافِعٍ، قَالَ سَمِعْتُ الْحَسَنَ، - يَعْنِي ابْنَ مُسْلِمٍ - يَذْكُرُ عَنْ مُجَاهِدٍ، قَالَ قَالَتْ عَائِشَةُ مَا كَانَ لإِحْدَانَا إِلاَّ ثَوْبٌ وَاحِدٌ تَحِيضُ فِيهِ فَإِنْ أَصَابَهُ شَىْءٌ مِنْ دَمٍ بَلَّتْهُ بِرِيقِهَا ثُمَّ قَصَعَتْهُ بِرِيقِهَا ‏.




‘আয়িশাহ্‌ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাদের (গায়ে জড়ানো) চাদরে সলাত আদায় করতেন না।



সহীহ।



হাম্মাদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, আমি সাঈদ ইবনু আবূ সদাক্বাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -কে বলতে শুনেছি, আমি মুহাম্মাদ ইবনু সীরীন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -কে এ হাদীস সম্পর্কে জিজ্ঞেস করলে তিনি অপারগতা প্রকাশ করে বলেন, আমি কিছু কাল যাবত এ হাদীস শুনেছি কিন্তু আমার মনে নেই, কার কাছে তা শুনেছি। আমি তা বিশ্বস্ত বর্ণনাকারীর নিকট শুনেছি কিনা তাও স্মরণ নেই। অতএব তোমরা এ সম্পর্কে অন্য কাউকে জিজ্ঞেস করে জেনে নাও।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح ، والحدیث السابق (367) شاھد لہ




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حديث صحيح، وهذا إسناد منقطع بين محمَّد بن سيرين وعائشة، لكن قد عرفت الواسطة بينهما، فقد رواه أشعث الحُمراني، عن ابن سيرين، عن عبد الله بن شقيق، عن عائشة، كما سلف قبله. قال الدارقطني في "العلل" ٥/ الورقة ٩٠: القول فيه قول أشعث. حماد: هو ابن زيد، وهشام: هو ابن حسان القردوسي.









সুনান আবী দাউদ (369)


حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، - يَعْنِي ابْنَ مَهْدِيٍّ - حَدَّثَنَا بَكَّارُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَتْنِي جَدَّتِي، قَالَتْ دَخَلْتُ عَلَى أُمِّ سَلَمَةَ فَسَأَلَتْهَا امْرَأَةٌ مِنْ قُرَيْشٍ عَنِ الصَّلاَةِ فِي ثَوْبِ الْحَائِضِ فَقَالَتْ أُمُّ سَلَمَةَ قَدْ كَانَ يُصِيبُنَا الْحَيْضُ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَتَلْبَثُ إِحْدَانَا أَيَّامَ حَيْضِهَا ثُمَّ تَطْهُرُ فَتَنْظُرُ الثَّوْبَ الَّذِي كَانَتْ تَقْلِبُ فِيهِ فَإِنْ أَصَابَهُ دَمٌ غَسَلْنَاهُ وَصَلَّيْنَا فِيهِ وَإِنْ لَمْ يَكُنْ أَصَابَهُ شَىْءٌ تَرَكْنَاهُ وَلَمْ يَمْنَعْنَا ذَلِكَ مِنْ أَنْ نُصَلِّيَ فِيهِ وَأَمَّا الْمُمْتَشِطَةُ فَكَانَتْ إِحْدَانَا تَكُونُ مُمْتَشِطَةً فَإِذَا اغْتَسَلَتْ لَمْ تَنْقُضْ ذَلِكَ وَلَكِنَّهَا تَحْفِنُ عَلَى رَأْسِهَا ثَلاَثَ حَفَنَاتٍ فَإِذَا رَأَتِ الْبَلَلَ فِي أُصُولِ الشَّعْرِ دَلَكَتْهُ ثُمَّ أَفَاضَتْ عَلَى سَائِرِ جَسَدِهَا ‏.‏




মায়মূনাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) একটি চাদর গায়ে দিয়ে সলাত আদায় করলেন। চাদরের একাংশ তাঁর এক ঋতুবতী স্ত্রীর গায়ে জড়ানো ছিল।



সহীহঃ অনুরূপ বুখারী ও মুসলিম।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح ، وأصلہ متفق علیہ انظر صحیح البخاري (333) وصحیح مسلم (513)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. سفيان: هو ابن عيينة، وأبو إسحاق الشيبانى: هو سليمان ابن أبي سليمان. وأخرجه ابن ماجه (٦٥٣) من طريق سفيان بن عيينة، بهذا الإسناد، وفيه أن المذكورة في الحديث من أزواجه ﷺ هي ميمونةُ نفسُها. وهو في "مسند أحمد" (٢٦٨٠٤)، و"صحيح ابن حبان" (٢٣٢٩). وانظر ما سيأتى برقم (٦٥٦). قوله: "مرط" هو كساء من صوف أو خَزٍّ يُؤتَزر به وتتلفع المرأة به."المصباح المنير" (مرط).









সুনান আবী দাউদ (370)


حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعُ بْنُ الْجَرَّاحِ، حَدَّثَنَا طَلْحَةُ بْنُ يَحْيَى، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي بِاللَّيْلِ وَأَنَا إِلَى جَنْبِهِ وَأَنَا حَائِضٌ وَعَلَىَّ مِرْطٌ لِي وَعَلَيْهِ بَعْضُهُ ‏.‏




‘আয়িশাহ্‌ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এক রাতে সলাত আদায় করছিলেন। আমি হায়িয অবস্থায় আমার একটি চাদর গায়ে জড়িয়ে তাঁর পাশেই ছিলাম। চাদরের কিছু অংশ ছিল আমার গায়ে আর কিছু অংশ ছিল তাঁর গায়ে। [



সহীহঃ মুসলিম।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (514)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده حسن، طلحة بن يحيى -وهو ابن طلحة بن عبيد الله- صدوق حسن الحديث، وباقى رجاله ثقات. وأخرجه مسلم (٥١٤)، والنسائى في "الكبرى" (٨٤٦)، وابن ماجه (٦٥٢) من طريق وكيع بن الجراح، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٤٣٨٢). وفى الحديث جواز الصلاة بحضرة الحائض، وفيه أن ثياب الحائض طاهرة إلا موضعاً يرى فيه أثر الدم أو النجاسة، وفيه جواز الصلاة فى ثوب بعضه على المصلي وبعضه عليها.









সুনান আবী দাউদ (371)


حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنِ الْحَكَمِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ هَمَّامِ بْنِ الْحَارِثِ، أَنَّهُ كَانَ عِنْدَ عَائِشَةَ - رضى الله عنها - فَاحْتَلَمَ فَأَبْصَرَتْهُ جَارِيَةٌ لِعَائِشَةَ وَهُوَ يَغْسِلُ أَثَرَ الْجَنَابَةِ مِنْ ثَوْبِهِ أَوْ يَغْسِلُ ثَوْبَهُ فَأَخْبَرَتْ عَائِشَةَ فَقَالَتْ لَقَدْ رَأَيْتُنِي وَأَنَا أَفْرُكُهُ مِنْ ثَوْبِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ رَوَاهُ الأَعْمَشُ كَمَا رَوَاهُ الْحَكَمُ ‏.




হাম্মাম ইবনুল হারিস হতে বর্ণিত, তিনি ‘আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -এর মেহমান ছিলেন। তার স্বপ্নদোষ হলো। ‘আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -এর এক বাঁদী তাকে কাপড় থেকে বীর্য ধুতে দেখে বিষয়টি ‘আয়িশাহ্‌কে অবহিত করেন। তখন তিনি বলেন, আমি নিজে দেখেছি এবং আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর কাপড় হতে বীর্য রগড়ে তুলে ফেলেছি।



সহীহঃ মুসলিম।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (288)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. شعبة: هو ابن الحجاج، والحكم: هو ابن عتيبة، وإبراهيم: هو النخعي. وأخرجه مسلم (٢٨٨) (١٠٦) و (١٠٧)، والترمذي (١١٦)، والنسائي في "الكبرى" (٢٨٦)، وابن ماجه (٥٣٧) و (٥٣٨) و (٥٣٩) من طرق عن إبراهيم، بهذا الإسناد. وقُرِنَ همام عند مسلم في الموضع الأول بالأسود، وعند بعضهم قصة. وهو في "مسند أحمد" (٢٤١٥٨). وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٢٨٥) من طريق الحارث بن نوفل، عن عائشة. وانظر ما بعده.









সুনান আবী দাউদ (372)


حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ حَمَّادِ بْنِ أَبِي سُلَيْمَانَ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنِ الأَسْوَدِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كُنْتُ أَفْرُكُ الْمَنِيَّ مِنْ ثَوْبِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَيُصَلِّي فِيهِ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ وَافَقَهُ مُغِيرَةُ وَأَبُو مَعْشَرٍ وَوَاصِلٌ ‏.‏




আল-আসওয়াদ (রাহিমাহুল্লাহ) হতে বর্ণিত, ‘আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর কাপড় থেকে বীর্য রগড়ে তুলে ফেলতাম। অতঃপর তিনি ঐ কাপড়েই সলাত আদায় করতেন।



সহীহঃ মুসলিম।



ইমাম আবূ দাঊদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, মুগীরাহ ও আবূ মা’শার উপরোক্ত হাদীস বর্ণনায় ঐকমত্য পোষণ করেছেন এবং আ’মাশ হাকামের অনুরূপই বর্ণনা করেছেন।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (ح 288 من حدیث إبراھیم النخعي بہ)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح، حماد شيخ موسى: هو ابن سلمة، وحمّاد شيخه: هو ابن أبي سليمان النخعي، قال الذهبي: ثقة إمام مجتهد، وقد توبع، وباقي رجاله ثقات. إبراهيم والأسود: هما النخعيان. وأخرجه مسلم (٢٨٨) (١٠٥) من طريق أبي معشر، عن إبراهيم النخعي، عن علقمة والأسود: أن رجلاً نزل بعائشة، فأصبح يغسل ثوبَه، فقالت عائشة: إنما كان يُجزئك إن رأيته أن تغسِلَ مكانه، فإن لم تر نضحتَ حوله، ولقد رأيتني أفركُه من ثوب رسول الله ﷺ فركاً، فيصلي فيه. وهو في "مسند أحمد" (٢٤٠٦٤)، و"صحيح ابن حبان" (١٣٧٩). قال ابن دقيق العيد: اختلف العلماء نى طهارة المني ونجاسته، فقال الشافعي وأحمد بطهارته، وقال مالك وأبو حنيفة بنجاسته، والذين قالوا بنجاسته اختلفوا في كيفية إزالته، فقال مالك يغسل رطبه ويابسه، وقال أبو حنيفة: يغسل رطبه، ويفرك يابسه. والقائلون بنجاسته احتجوا بحديث الغسل، وقالوا يطهره الفرك، ولو كان طاهراً لم تحتج عائشة ﵂ إلى تطهيره بالفرك والغسل، والظاهر أن فعلها لم يكن إلا بأمر رسول الله ﷺ -أو اطلاعه، وأيضاً لو كان طاهراً لتركه على حاله مرة لبيان الجواز، فلما لم يتركه رسول الله ﷺ على ثوبه مرة، وكذلك الصحابة من بعده علم أنه نجس، ومواظبته ﷺ -على فعل شيءٍ من غير ترك فى الجملة يدل على الوجوب بلا نزاع فيه.









সুনান আবী দাউদ (373)


حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ النُّفَيْلِيُّ، حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، ح حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدِ بْنِ حِسَابٍ الْبَصْرِيُّ، حَدَّثَنَا سُلَيْمٌ، - يَعْنِي ابْنَ أَخْضَرَ الْمَعْنَى وَالإِخْبَارُ فِي حَدِيثِ سُلَيْمٍ - قَالاَ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ مَيْمُونِ بْنِ مِهْرَانَ سَمِعْتُ سُلَيْمَانَ بْنَ يَسَارٍ يَقُولُ سَمِعْتُ عَائِشَةَ تَقُولُ إِنَّهَا كَانَتْ تَغْسِلُ الْمَنِيَّ مِنْ ثَوْبِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ قَالَتْ ثُمَّ أَرَى فِيهِ بُقْعَةً أَوْ بُقَعًا ‏.




সুলাইমান ইবনু ইয়াসার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, আমি ‘আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে বলতে শুনেছি, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর কাপড় থেকে বীর্য ধুয়ে ফেলতাম। তারপরও কাপড়ে একটি বা কয়েকটি ভিজা চিহ্ন দেখতে পেতাম। [৩৭২]



সহীহঃ বুখারী ও মুসলিম।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (229) صحیح مسلم (289)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. زهير: هو ابن معاوية. وأخرجه البخاري (٢٢٩ - ٢٣٢)، ومسلم (٢٨٩)، والترمذي (١١٧)، والنسائي في "الكبرى" (٢٨٤)، ابن ماجه (٥٣٦) من طرق عن عمرو بن ميمون، بهذا الإسناد. وزادوا فيه عدا الترمذي: "فيخرج إلى الصلاة فيه"، ورواية الترمذي مختصرة بلفظ: أنها كانت تغسل منياً من ثوب رسول الله ﷺ. وهو في "مسند أحمد" (٢٤٢٠٧) و (٢٥٠٩٨)، و"صحيح ابن حبان" (١٣٨١) و (١٣٨٢). وقال الترمذي بإثره: وحديث عائشة أنها غسلت منياً من ثوب رسول الله ﷺ ليس بمخالف لحديث الفرك، وإن كان الفرك يجزئ، فقد يُستحب للرجل أن لا يرى على ثوبه أثره.









সুনান আবী দাউদ (374)


حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ الْقَعْنَبِيُّ، عَنْ مَالِكٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ، عَنْ أُمِّ قَيْسٍ بِنْتِ مِحْصَنٍ، أَنَّهَا أَتَتْ بِابْنٍ لَهَا صَغِيرٍ لَمْ يَأْكُلِ الطَّعَامَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَأَجْلَسَهُ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي حِجْرِهِ فَبَالَ عَلَى ثَوْبِهِ فَدَعَا بِمَاءٍ فَنَضَحَهُ وَلَمْ يَغْسِلْهُ ‏.‏




উম্মু কায়িস বিনতু মিহসান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি তাঁর দুগ্ধপোষ্য শিশুপুত্রকে নিয়ে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর নিকট আসলেন। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে নিজের কোলে বসালে শিশুটি তাঁর পরিধেয় বস্ত্রে পেশাব করে দেয়। তিনি পানি আনিয়ে তাতে ছিটিয়ে দিলেন, কিন্তু ধৌত করলেন না।

সহীহঃ বুখারী ও মুসলিম।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (223) صحیح مسلم (287)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. وهو في "موطأ مالك" ١/ ٦٤، ومن طريقه أخرجه البخاري (٢٢٣)، والنسائي في "الكبرى" (٢٨٧). وأخرجه مسلم (٢٨٧)، والترمذي (٧١)، وابن ماجه (٥٢٤) من طرق عن الزُّهريّ، بهذا الإسناد. ورواية بعضهم بلفظ: "فرشه". وهو في "مسند أحمد" (٢٦٩٩٦) و"صحيح ابن حبان" (١٣٧٣) و (١٣٧٤). وأخرجه البخارى (٥٧١٣) و (٥٧١٥) و (٥٧١٨)، ومسلم بإثر الحديث (٢٢١٣) (٨٦) وبرقم (٢٢١٤) (٨٧) من طريق الزُّهريّ، به. وزادوا فيه ما سيأتي برقم (٣٨٧٧). قال البغوي في شرح "السنة" ٢/ ٨٤: قال الخطابي: النضح: إمرار الماء عليه رفقاً من غير مرس ولا دلك … ، والغسل إنما يكون بالمرس والعصر. وبول الصبي الذي لم يطعم نجس كبول غيره غير أنه يكتفى فيه بالرش، وهو أن ينضح عليه الماء بحيث يصل إلى جميعه، فيطهر من غير مرس ولا دلك، وإليه ذهب غير واحد من الصحابة، منهم علي بن أبي طالب، وبه قال عطاء والحسن وهو قول الشافعي وأحمد وإسحاق. وذهب جماعة إلى وجوب غسله كسائر الأبوال وهو قول النخعي والثوري وأصحاب الرأي. قلت: ومالك وأتباعه كما في شرح "الموطأ" ١/ ١١٥ للزرقاني.









সুনান আবী দাউদ (375)


حَدَّثَنَا مُسَدَّدُ بْنُ مُسَرْهَدٍ، وَالرَّبِيعُ بْنُ نَافِعٍ أَبُو تَوْبَةَ، - الْمَعْنَى - قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ سِمَاكٍ، عَنْ قَابُوسَ، عَنْ لُبَابَةَ بِنْتِ الْحَارِثِ، قَالَتْ كَانَ الْحُسَيْنُ بْنُ عَلِيٍّ - رضى الله عنه - فِي حِجْرِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَبَالَ عَلَيْهِ فَقُلْتُ الْبَسْ ثَوْبًا وَأَعْطِنِي إِزَارَكَ حَتَّى أَغْسِلَهُ قَالَ ‏ "‏ إِنَّمَا يُغْسَلُ مِنْ بَوْلِ الأُنْثَى وَيُنْضَحُ مِنْ بَوْلِ الذَّكَرِ ‏"‏ ‏.




লুবাবাহ্ বিনতুল হারিস হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, একদা হুসাইন ইবনু ‘আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর কোলে থাকাবস্থায় পেশাব করে দিলেন। আমি বললাম, আপনি অন্য একটি কাপড় পরে নিন এবং আমার এ কাপড়টি আমাকে ধুতে দিন। তিনি বললেনঃ মেয়ে শিশু পেশাব করলে ধুতে হয়। আর ছেলে শিশু পেশাব করলে তাতে পানি ছিটিয়ে দিলেই যথেষ্ট।



হাসান সহীহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: حسن صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن ، مشکوۃ المصابیح (501) ، قابوس ھو ابن المخارق بن سلیم، روی عن أبیہ عن لبابۃ بہ (المعجم الکبیر للطبراني 25/25 ح 38) وسندہ حسن۔ قال معاذ: وانظر الامام في معرفۃ أحادیث الأحکام لابن دقیق العید (3/ 400)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حديث صحيح، وهذا إسناد اختلف فيه على سماك بن حرب كما هو مبين في التعليق على "مسند أحمد" (٢٦٨٧٥). أبو الأحوص: هو سلام بن سليم، وقابوس: هو ابن المخارق. وأخرجه ابن ماجه (٥٢٢) من طريق أبي الأحوص، بهذا الإسناد. وأخرج ابن ماجه (٣٩٢٣) من طريق علي بن صالح، عن سماك، عن قابوس قال: قالت أم الفضل: يا رسول الله، رأيت كأن في بيتي عضواً من أعضائك، قال: "خيراً رأيتِ، تلد فاطمةُ غلاماً فتُرضعيه"، فولدت حسيناً أو حسناً، فأرضعته بلبن قثم، قالت: فجئتُ به إلى النبي ﷺ فوضعتُه في حجره، فبال، فضربت كتفه، فقال النبي ﷺ: "أوجعت ابني رحمكِ الله". وأخرجه أحمد (٢٦٨٧٨) من طريق صالح بن أبي الخليل، عن عبد الله بن الحارث، عن أم الفضل. وإسناده صحيح.









সুনান আবী দাউদ (376)


حَدَّثَنَا مُجَاهِدُ بْنُ مُوسَى، وَعَبَّاسُ بْنُ عَبْدِ الْعَظِيمِ الْعَنْبَرِيُّ، - الْمَعْنَى - قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ، حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ الْوَلِيدِ، حَدَّثَنِي مُحِلُّ بْنُ خَلِيفَةَ، حَدَّثَنِي أَبُو السَّمْحِ، قَالَ كُنْتُ أَخْدُمُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَكَانَ إِذَا أَرَادَ أَنْ يَغْتَسِلَ قَالَ ‏"‏ وَلِّنِي قَفَاكَ ‏"‏ ‏.‏ فَأُوَلِّيهِ قَفَاىَ فَأَسْتُرُهُ بِهِ فَأُتِيَ بِحَسَنٍ أَوْ حُسَيْنٍ - رضى الله عنهما - فَبَالَ عَلَى صَدْرِهِ فَجِئْتُ أَغْسِلُهُ فَقَالَ ‏"‏ يُغْسَلُ مِنْ بَوْلِ الْجَارِيَةِ وَيُرَشُّ مِنْ بَوْلِ الْغُلاَمِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ عَبَّاسٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ الْوَلِيدِ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ وَهُوَ أَبُو الزَّعْرَاءِ ‏.‏ قَالَ هَارُونُ بْنُ تَمِيمٍ عَنِ الْحَسَنِ قَالَ الأَبْوَالُ كُلُّهَا سَوَاءٌ ‏.‏




আবূস সাম্‌হ্‌ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, আমি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর খিদমাত করতাম। তিনি গোসল করার ইচ্ছা করলে আমাকে বলতেনঃ তুমি পিঠ ঘুরিয়ে দাঁড়াও। তখন আমি পিঠ ঘুরিয়ে দাঁড়িয়ে তাঁকে আড়াল করে রাখতাম। একবার হাসান অথবা হুসাইন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -কে আনা হলে তাঁদের একজন তাঁর বুকে পেশাব করে দিলেন। আমি তা ধৌত করতে এলে তিনি বললেনঃ মেয়ে শিশুর পেশাব ধোয়া আবশ্যক হয়। আর ছেলে শিশুর পেশাবে পানি ছিটিয়ে দিলেই যথেষ্ট।

সহীহ।



ইমাম আবূ দাঊদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, হাসান বাসরীর মতে, সব পেশাবের হুকুমই (অপবিত্র হিসেবে) সমান।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح ، مشکوۃ المصابیح (502)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده جيد، يحيي بن الوليد لا بأس به، وباقي رجاله ثقات. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٢٢٣) و (٢٨٩) عن مجاهد بن موسى، وابن ماجه (٥٢٦) عن عمرو بن علي ومجاهد وعباس العنبري، ثلاثتهم عن عبد الرحمن بن مهدي، بهذا الإسناد.









সুনান আবী দাউদ (377)


حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنِ ابْنِ أَبِي عَرُوبَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَبِي حَرْبِ بْنِ أَبِي الأَسْوَدِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَلِيٍّ، - رضى الله عنه - قَالَ يُغْسَلُ مِنْ بَوْلِ الْجَارِيَةِ وَيُنْضَحُ مِنْ بَوْلِ الْغُلاَمِ مَا لَمْ يَطْعَمْ ‏.‏




‘আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, মেয়েদের পেশাব ধুতে হবে এবং ছেলেদের পেশাবে পানি ছিটিয়ে দিলেই যথেষ্ট হবে- যতক্ষণ না তারা শক্ত খাদ্য গ্রহণ করে।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح موقوف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، ترمذی (610)،ابن ماجہ (525) ، قتادۃ عنعن ، وقول قتادۃ: ’’ھذا ما لم یطعما الطعام فإذا طعما غسلا جمیعًا‘‘ صحیح عنہ ، (انوار الصحیفہ ص 27)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: رجاله ثقات وهو موقوف، وقد روي مرفوعاً كما سيأتي بعده، وهو الراجح. وأخرجه البيهقي ٢/ ٤١٥ من طريق المصنف، بهذا الإسناد. وأخرجه ابن أبي شيبة ١/ ١٢١، وعبد الرزاق (١٤٨٨) من طريق سعيد بن أبي عروبة، عن قتادة، عن أبي حرب، عن علي موقوفاً. ليس فيه أبو الأسود.









সুনান আবী দাউদ (378)


حَدَّثَنَا ابْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ، حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَبِي حَرْبِ بْنِ أَبِي الأَسْوَدِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ، - رضى الله عنه - أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ فَذَكَرَ مَعْنَاهُ وَلَمْ يَذْكُرْ ‏ "‏ مَا لَمْ يَطْعَمْ ‏"‏ ‏.‏ زَادَ قَالَ قَتَادَةُ هَذَا مَا لَمْ يَطْعَمَا الطَّعَامَ فَإِذَا طَعِمَا غُسِلاَ جَمِيعًا ‏.




‘আলী ইবনু আবূ ত্বালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, আল্লাহর নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন- পূর্বোক্ত হাদীসের অনুরূপ। এ বর্ণনায় ‘সে শক্ত খাদ্য গ্রহণ না করা পর্যন্ত’- এ কথাটুকু উল্লেখ নেই। তাতে এ কথা রয়েছে, ক্বাতাদাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেছেন, শিশু কন্যা ও পুত্রদের ব্যাপারে এ হুকুম খাদ্য গ্রহণ না করা পর্যন্ত প্রযোজ্য। (শক্ত) খাদ্য গ্রহণ করা শুরু করলে উভয়ের পেশাবই ধুতে হবে।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، ترمذی (610)،ابن ماجہ (525) ، قتادۃ عنعن ، وقول قتادۃ: ’’ھذا ما لم یطعما الطعام فإذا طعما غسلا جمیعًا‘‘ صحیح عنہ ، (انوار الصحیفہ ص 27)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. وقد صححه مرفوعاً الحافظ ابن حجر في "الفتح" ١/ ٣٢٦ وفي "التلخيص" ١/ ٣٨، ونقل تصحيحه عن البخاري والدارقطني، وقال عن الرواية الموقوفة: ليس ذلك بعلة قادحة. وأخرجه الترمذي (٦١٦)، وابن ماجه (٥٢٥) من طريق معاذ بن هشام، بهذا الإسناد. وقال الترمذي: حديث حسن. وهو في "مسند أحمد" (٥٦٣).









সুনান আবী দাউদ (379)


حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَمْرِو بْنِ أَبِي الْحَجَّاجِ أَبُو مَعْمَرٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ، عَنْ يُونُسَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ أُمِّهِ، أَنَّهَا أَبْصَرَتْ أُمَّ سَلَمَةَ تَصُبُّ الْمَاءَ عَلَى بَوْلِ الْغُلاَمِ مَا لَمْ يَطْعَمْ فَإِذَا طَعِمَ غَسَلَتْهُ وَكَانَتْ تَغْسِلُ بَوْلَ الْجَارِيَةِ ‏.‏




হাসান হতে তার মায়ের হতে বর্ণিত, তার মা বলেন, তিনি উম্মু সালামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -কে দেখেছেন, শক্ত খাদ্য গ্রহণ না করা পর্যন্ত তিনি (দুগ্ধপোষ্য) ছেলের পেশাবে পানি ছিটিয়ে দিতেন। আর (শক্ত) খাদ্য গ্রহণ শুরু করলে (তাদের পেশাব করা কাপড়) ধুয়ে ফেলতেন। আর তিনি মেয়ে শিশুর পেশাবের কাপড়ও ধুয়ে ফেলতেন।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، الحسن البصري مدلس وعنعن ، (انوار الصحیفہ ص 27)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده حسن، أم الحسن -وهو ابن أبي الحسن يسار البصري، واسمها خيرة- روى عنها جمع، وذكرها ابن حبان في "الثقات"، وأخرج لها مسلم في "الصحيح"، وباقي رجاله ثقات. عبد الوارث: هو ابن سعيد العنبري، ويونس: هو ابن عبيد العبدي. وأخرجه البيهقي ٢/ ٤١٦ من طريق المصنف، بهذا الإسناد. وأخرجه ابن أبي شيبة ١/ ١٢١، وابن الجعد في "مسنده" (٣١٩٠)، وأبو يعلى (٦٩٢١)، والطبراني ٢٣/ (٨٦٦)، وابن المنذر في "الأوسط" ٢/ ١٤٣من طرق عن يونس بن عبيد، بهذا الإسناد.









সুনান আবী দাউদ (380)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَمْرِو بْنِ السَّرْحِ، وَابْنُ، عَبْدَةَ - فِي آخَرِينَ وَهَذَا لَفْظُ ابْنِ عَبْدَةَ - أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ أَعْرَابِيًّا، دَخَلَ الْمَسْجِدَ وَرَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم جَالِسٌ فَصَلَّى - قَالَ ابْنُ عَبْدَةَ - رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ قَالَ اللَّهُمَّ ارْحَمْنِي وَمُحَمَّدًا وَلاَ تَرْحَمْ مَعَنَا أَحَدًا ‏.‏ فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ لَقَدْ تَحَجَّرْتَ وَاسِعًا ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ لَمْ يَلْبَثْ أَنْ بَالَ فِي نَاحِيةِ الْمَسْجِدِ فَأَسْرَعَ النَّاسُ إِلَيْهِ فَنَهَاهُمُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم وَقَالَ ‏"‏ إِنَّمَا بُعِثْتُمْ مُيَسِّرِينَ وَلَمْ تُبْعَثُوا مُعَسِّرِينَ صُبُّوا عَلَيْهِ سَجْلاً مِنْ مَاءٍ ‏"‏ ‏.‏ أَوْ قَالَ ‏"‏ ذَنُوبًا مِنْ مَاءٍ ‏"‏ ‏.‏




আবূ হুরাইরাহ্‌ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মাসজিদে বসা ছিলেন এমন সময় এক বেদুঈন মাসজিদে প্রবেশ করে দু’ রাকআত সলাত আদায় করল। অতঃপর দু’আ করল, হে আল্লাহ দয়া করো আমার প্রতি ও মুহাম্মাদের প্রতি এবং আমাদের সাথে অন্য কারো প্রতি দয়া করো না। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, তুমি ব্যাপককে সীমিত করে দিলে। কিছুক্ষণ পর ঐ লোকটি মাসজিদের এক কোণে পেশাব করে দিল। লোকেরা (তাকে শায়েস্তা করার জন্য) দ্রুত তার দিকে এগুচ্ছিল। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাদের নিষেধ করে বললেনঃ তোমাদের মানুষের প্রতি সহজ ও কোমল আচরণকারী হিসেবে পাঠানো হয়েছে, রুক্ষ ও কঠোর আচরণকারী হিসেবে নয়। তোমরা এর (পেশাবের) উপর এক বালতি বা এক ডোল পানি ঢেলে দাও।



সহীহঃ বুখারী।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح ، وانظر مسند حمیدی (944 وسندہ صحیح)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. ابن عبدة: هو أحمد الضبي، وسفيان: هو ابنُ عُيينة. وأخرجه الترمذي (١٤٧) من طريق سفيان بن عينية، بهذا الإسناد. وأخرجه مختصراً النسائي فى "المجتبى" (١٢١٧) عن عبد الله بن محمَّد بن عبد الرحمن، عن سفيان، به. وأخرجه البخاري (٢٢٠) و (٦١٢٨)، والنسائي في "الكبرى" (٥٤) من طريق عبيد الله بن عبد الله بن عتبة، عن أبي هريرة. وهو في "مسند أحمد" (٧٢٥٥)، و"صحيح ابن حبان" (٩٨٥). وسيأتي مختصراً برقم (٨٨٢) من طريق أبي سلمة، عن أبي هريرة. قوله: "تحجّرت واسعاً" أصل الحجر: المنع، ومنه الحجر على السفيه، وهو منعه من التصرف في ماله، وقبض يده عليه، يقول له: لقد ضيَّقت من رحمة الله ما وسَّعه ومنعت منها ما أباحه، وخصصت به نفسك دون غيرك. وقوله: "صبوا عليه سَجلاً" السجل: بفتح فسكون هو الدلو ملأى، ولا يقال لها ذلك وهي فارغة، وقال ابن دريد: السجل: الدلو الواسعة، وقال الجوهري: الدلو الضخمة، وكذا الذَّنُوبُ. وفي الحديث: الرفق بالجاهل وتعليمه ما يلزمه من غير تعنيف إذا لم يكن عناداً، ولا سيما إذا كان ممن يحتاج إلى استئلافه، وفيه رأفة النبي ﷺ، وحسن خلقه.