হাদীস বিএন


সুনান আবী দাউদ





সুনান আবী দাউদ (4421)


حَدَّثَنَا أَبُو كَامِلٍ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، حَدَّثَنَا خَالِدٌ، - يَعْنِي الْحَذَّاءَ - عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ مَاعِزَ بْنَ مَالِكٍ، أَتَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ إِنَّهُ زَنَى ‏.‏ فَأَعْرَضَ عَنْهُ فَأَعَادَ عَلَيْهِ مِرَارًا فَأَعْرَضَ عَنْهُ فَسَأَلَ قَوْمَهُ ‏"‏ أَمَجْنُونٌ هُوَ ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا لَيْسَ بِهِ بَأْسٌ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ أَفَعَلْتَ بِهَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ نَعَمْ ‏.‏ فَأَمَرَ بِهِ أَنْ يُرْجَمَ فَانْطُلِقَ بِهِ فَرُجِمَ وَلَمْ يُصَلِّ عَلَيْهِ ‏.‏




ইবনু ‘আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, একদা মাঈদ ইবনু মালিক নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট এসে বললো যে সে যেনা করেছে। একথা শুনে নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার হতে মুখ ফিরিয়ে নিলেন। সে কয়েকবার একথা বললো, আর তিনি প্রতিবার মুখ ফিরিয়ে নিলেন। অতঃপর তিনি তার গোত্রের লোকদের প্রশ্ন করলেন: সে কি পাগল? তারা বললো, তার তো কোনো সমস্যা নেই। তিনি তাকে প্রশ্ন করলেন: তুমি কি তার সঙ্গে এটা করেছো? সে বললো, হ্যাঁ। অতএব তিনি তাকে পাথর মেরে হত্যা করার আদেশ দিলেন। অতঃপর তাকে নিয়ে যাওয়া হলো এবং পাথর নিক্ষেপে হত্যা করা হলো। আর তিনি (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার জানাযার সলাত পরেননি।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح الإسناد




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح ، انظر الحدیث الآتي (4427)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. خالد الحذاء: هو ابن مِهران، وأبو كامل: هو فُضَيل بن حُسين الجَحْدري. وأخرجه الطبراني في "الكبير" (١١٩٤٥)، وفي "الأوسط" (٤٥٥٦) من طريق أبي كامل الجَحْدري، بهذا الإسناد. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٧١٣٢) من طريق عبد الوهاب الثقفي، عن خالد الحذاء، عن عكرمة مرسلاً. وانظر ما سيأتي برقم (٤٤٢٥ - ٤٤٢٧). وقد سلف الكلام في الصلاة على المرجوم عند الحديث السالف برقم (٣١٨٦).









সুনান আবী দাউদ (4422)


حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ سِمَاكٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ رَأَيْتُ مَاعِزَ بْنَ مَالِكٍ حِينَ جِيءَ بِهِ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم رَجُلاً قَصِيرًا أَعْضَلَ لَيْسَ عَلَيْهِ رِدَاءٌ فَشَهِدَ عَلَى نَفْسِهِ أَرْبَعَ مَرَّاتٍ أَنَّهُ قَدْ زَنَى ‏.‏ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ فَلَعَلَّكَ قَبَّلْتَهَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ لاَ وَاللَّهِ إِنَّهُ قَدْ زَنَى الآخِرُ ‏.‏ قَالَ فَرَجَمَهُ ثُمَّ خَطَبَ فَقَالَ ‏"‏ أَلاَ كُلَّمَا نَفَرْنَا فِي سَبِيلِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ خَلَفَ أَحَدُهُمْ لَهُ نَبِيبٌ كَنَبِيبِ التَّيْسِ يَمْنَحُ إِحْدَاهُنَّ الْكُثْبَةَ أَمَا إِنَّ اللَّهَ إِنْ يُمَكِّنِّي مِنْ أَحَدٍ مِنْهُمْ إِلاَّ نَكَلْتُهُ عَنْهُنَّ ‏"‏ ‏.




জাবির ইবনু সামুরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি মাঈয ইবনু মালিককে দেখেছি। যখন তাকে নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট হাযির করা হয়। সে ছিলো বেঁটে, মাংসল ও বলিষ্ঠ গড়নের লোক। তার দেহে কোনো চাদর ছিলো না। সে নিজের বিরুদ্ধে চারবার সাক্ষ্য দিয়ে বলে যে, সে যেনা করেছে। রাসুলাল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃসম্ভবত তুমি তাকে চুমা দিয়েছো। সে বললো, না আল্লাহর কসম! এ দুর্ভাগা নিশ্চয়ই যেনা করেছে। বর্ণনাকারী বলেন, অতঃপর তাকে পাথর নিক্ষেপে হত্যা করা হয়। অতঃপর তিনি (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ভাষন দিতে গিয়ে বলেন: জেনে রাখো আমরা যখনই আল্লাহর রাস্তায় জিহাদে যাই, আর এদিকে যদি তাদের কেউ পিছনে গিয়ে পাঠা ছাগলের ন্যায় ভ্যাভ্যা করে কোনো নারীকে যৎকিঞ্চিৎ বীর্য দান করে। জেনে রাখো, আল্লাহ যদি আমাকে তাদের কারো উপর নিয়ন্ত্রণ ক্ষমতা দেন, তবে তাকে দুষ্টান্তমূলক শাস্তি দিয়ে নারীদের থেকে প্রতিহত করবো।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (1692)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: صحيح لغيره، وهذا إسناد حسن من أجل سماك -وهو ابن حرب- أبو عوانة: هو الوضاح بن عبد الله اليشكُري، ومُسدَّد: هو ابن مُسرهَد. وأخرجه مسلم (١٦٩٢) من طريق أبي عوانة اليشكري، به. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٧١٤٥) من طريق زهير بن معاوية، عن سماك ابن حرب، عن جابر بن سمرة قال: أتى ماعز بن مالك الأسلمي رجل قصير في إزار ما عليه رداء وأنا انظر إليه، قال: ورسول الله ﷺ على وسادة عن يساره، قال: وبيني وبينه القوم، فكلَّمه وما أدري ما يُكلِّمه وأنا انظر، ثم قال: "اذهبوا به" فانطلق به، ثم قال: "ردُّوه" فرُدَّ فكلَّمهُ، ثم قال: "اذهبوا به فارجموه". وهو في "مسند أحمد" (٢٠٨٠٣)، و"صحيح ابن حبان" (٤٤٣٦). ويشهد له حديث أبي سعيد الخدري عند مسلم (١٦٩٤) وغيره. وقوله: له نبيب. النبيب: صوت التيس عند السفاد، والكثبة: القليل من اللبن، وقوله: نكلته معناه: ردعته بالعقوبة، ومنه النكول في اليمين، وهو أن يرتدع فلا يحلف، يقال: نكل ينكُل، ونكل يَنكِلُ لغتان.









সুনান আবী দাউদ (4423)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جَعْفَرٍ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ سِمَاكٍ، قَالَ سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ سَمُرَةَ، بِهَذَا الْحَدِيثِ وَالأَوَّلُ أَتَمُّ قَالَ فَرَدَّهُ مَرَّتَيْنِ ‏.‏ قَالَ سِمَاكٌ فَحَدَّثْتُ بِهِ سَعِيدَ بْنَ جُبَيْرٍ فَقَالَ إِنَّهُ رَدَّهُ أَرْبَعَ مَرَّاتٍ ‏.‏




সিমাক (রাহিমাহুল্লাহ) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি জাবির ইবনু সামুরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) কে উপরোক্ত হাদীস বর্ণনা করতে শুনেছি। তবে পূর্বোক্ত বর্ণনাটি পুর্ণাঙ্গ। তিনি বলেন, সে দু’বার এ কথা বলেছে। সিমাক বলেন, আমি মাঈদ ইবনু জুরাইরের নিকট এ হাদীস বর্ণনা করলে তিনি বলেন, সে বরং চারবার একথা বলেছে।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (1692)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: صحيح لغيره، وهذا إسناد حسن كسابقه. شعبة: هو ابن الحجّاج. وأخرجه مسلم (١٦٩٢)، والنسائي في "الكبرى" (٧١٤٤) من طريق محمَّد بن جعفر، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٠٩٨٣). وانظر ما قبله.









সুনান আবী দাউদ (4424)


حَدَّثَنَا عَبْدُ الْغَنِيِّ بْنُ أَبِي عَقِيلٍ الْمِصْرِيُّ، حَدَّثَنَا خَالِدٌ، - يَعْنِي ابْنَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ - قَالَ قَالَ شُعْبَةُ فَسَأَلْتُ سِمَاكًا عَنِ الْكُثْبَةِ فَقَالَ اللَّبَنُ الْقَلِيلُ ‏.‏




শু’বাহ (রাহিমাহুল্লাহ) হতে বর্ণিত, আমি সিমাককে ‘কুসবাহ’ এর অর্থ বললাম। তিনি বললেন, অল্প দুধ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح مقطوع




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: رجاله ثقات. خالد بن عبد الرحمن: هو الخُراساني، وعبد الغني بن أبي عَقيل: هو ابن رِفَاعة بن عبد الملك. وهو في "مَسند أحمد" (٢٠٩٨٤). وانظر سالفيه.









সুনান আবী দাউদ (4425)


حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لِمَاعِزِ بْنِ مَالِكٍ ‏"‏ أَحَقٌّ مَا بَلَغَنِي عَنْكَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ وَمَا بَلَغَكَ عَنِّي قَالَ ‏"‏ بَلَغَنِي عَنْكَ أَنَّكَ وَقَعْتَ عَلَى جَارِيَةِ بَنِي فُلاَنٍ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ نَعَمْ ‏.‏ فَشَهِدَ أَرْبَعَ شَهَادَاتٍ فَأَمَرَ بِهِ فَرُجِمَ ‏.‏




ইবনু ‘আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসুলাল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মাঈয ইবনু মালিককে ডেকে বললেনঃতোমার সম্বন্ধে যে সংবাদ আমার কানে পৌঁছেছে তা কি সত্য? সে বললো, আমার সম্বন্ধে আপনার নিকট কিরুপ সংবাদ পৌঁছেছে? তিনি বললেনঃতুমি নাকি অমুক গোত্রের জনৈক বাঁদীর সঙ্গে যেনা করেছো? সে বললো, হ্যাঁ। অতঃপর সে চারবার একথার স্বীকারোক্তি করে। সুতরাং তাকে পাথর নিক্ষেপে হত্যা করার আদেশ দেন। অতঃপর তাকে পাথর মারা হয়।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (1693)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده حسن من أجل سماك بن حرب. أبو عوانة: هو الوضاح بن عبد الله اليشكُري. وأخرجه مسلم (١٦٩٣)، والترمذي (١٤٩٠)، والنسائي في "الكبرى" (٧١٣٣) من طريق أبي عوانة اليشكُري، والنسائي (٧١٣٤) من طريق زهير بن معاوية، كلاهما عن سماك، به. إلا أنه قال في رواية زهير: فاعترف أربع مرات: مرتين مرتين. وانظر تالييه وما سلف برقم (٤٤٢١).









সুনান আবী দাউদ (4426)


حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ، أَخْبَرَنَا أَبُو أَحْمَدَ، أَخْبَرَنَا إِسْرَائِيلُ، عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ جَاءَ مَاعِزُ بْنُ مَالِكٍ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَاعْتَرَفَ بِالزِّنَا مَرَّتَيْنِ فَطَرَدَهُ ثُمَّ جَاءَ فَاعْتَرَفَ بِالزِّنَا مَرَّتَيْنِ فَقَالَ ‏ "‏ شَهِدْتَ عَلَى نَفْسِكَ أَرْبَعَ مَرَّاتٍ اذْهَبُوا بِهِ فَارْجُمُوهُ ‏"‏ ‏.‏




ইবনু ‘আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, একদা মাঈয ইবনু মালিক নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট এসে যেনা করেছে বলে দু’বার সাক্ষ্য দেয়। তিনি তাকে তাড়িয়ে দিলে সে আবারো এসে দু’বার যেনার স্বীকারোক্তি করে। অতঃপর তিনি (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন: তুমি নিজের বিরুদ্ধে চারবার সাক্ষ্য দিয়েছো। তোমরা একে নিয়ে যাও এবং ‘রজম’ করো।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده حسن من أجل سماك بن حرب. إسرائيل: هو ابن يونس بن أبي إسحاق السبيعي، وأبو أحمد: هو محمَّد بن عبد الله بن الزبير الأسدي الزُّبيري. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٧١٣٥) من طريق إسرائيل، بهذا الإسناد. وانظر ما قبله.









সুনান আবী দাউদ (4427)


حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، حَدَّثَنِي يَعْلَى، عَنْ عِكْرِمَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم ح وَحَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ وَعُقْبَةُ بْنُ مُكْرَمٍ قَالاَ حَدَّثَنَا وَهْبُ بْنُ جَرِيرٍ حَدَّثَنَا أَبِي قَالَ سَمِعْتُ يَعْلَى بْنَ حَكِيمٍ يُحَدِّثُ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ لِمَاعِزِ بْنِ مَالِكٍ ‏"‏ لَعَلَّكَ قَبَّلْتَ أَوْ غَمَزْتَ أَوْ نَظَرْتَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ لاَ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ أَفَنِكْتَهَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ نَعَمْ ‏.‏ قَالَ فَعِنْدَ ذَلِكَ أَمَرَ بِرَجْمِهِ ‏.‏ وَلَمْ يَذْكُرْ مُوسَى عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ وَهَذَا لَفْظُ وَهْبٍ ‏.‏




ইবনু ‘আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মাঈয ইবনু মালিককে বললেনঃ তুমি সম্ভবত চুমু খেয়েছো অথবা হাতে স্পর্শ করেছো অথবা তাকিয়েছো। সে বললো, না। তিনি বললেনঃ তবে কি তুমি যেনা করেছো? সে বললো, হাঁ। বর্ণনাকারী বলেন, সে একথা বলতেই তিনি তাকে পাথর মেরে হত্যা করার আদেশ দেন। বর্ণনাকারী মূসা (রাহিমাহুল্লাহ) ইবনু ‘আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেননি, বরং এটি ওয়াহ্‌বের বর্ণনা।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن، صحیح بخاری (6824)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده الموصُول صحيح. جرير: هو ابن حازم. وأخرجه البخاري (٦٨٢٤)، والنسائي في "الكبرى" (٧١٣١) من طريق وهب بن جرير، بهذا الإسناد. وأخرجه النسائي (٧١٣٠) من طريق يحيى بن أبي كثير، عن عكرمة، عن ابن عباس أن الأسلمي أتى رسولَ الله ﷺ فاعترف بالزنى، فقال: "لعلك قبَّلت، أو غمزت، أو نظرت؟ ". وهو في "مسند أحمد" (٢١٢٩). وانظر سابقيه.









সুনান আবী দাউদ (4428)


حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو الزُّبَيْرِ، أَنَّ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ الصَّامِتِ ابْنَ عَمِّ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَخْبَرَهُ أَنَّهُ، سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ جَاءَ الأَسْلَمِيُّ إِلَى نَبِيِّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَشَهِدَ عَلَى نَفْسِهِ أَنَّهُ أَصَابَ امْرَأَةً حَرَامًا أَرْبَعَ مَرَّاتٍ كُلُّ ذَلِكَ يُعْرِضُ عَنْهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَأَقْبَلَ فِي الْخَامِسَةِ فَقَالَ ‏"‏ أَنِكْتَهَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ نَعَمْ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ حَتَّى غَابَ ذَلِكَ مِنْكَ فِي ذَلِكَ مِنْهَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ نَعَمْ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ كَمَا يَغِيبُ الْمِرْوَدُ فِي الْمُكْحُلَةِ وَالرِّشَاءُ فِي الْبِئْرِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ نَعَمْ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ فَهَلْ تَدْرِي مَا الزِّنَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ نَعَمْ أَتَيْتُ مِنْهَا حَرَامًا مَا يَأْتِي الرَّجُلُ مِنِ امْرَأَتِهِ حَلاَلاً ‏.‏ قَالَ ‏"‏ فَمَا تُرِيدُ بِهَذَا الْقَوْلِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أُرِيدُ أَنْ تُطَهِّرَنِي ‏.‏ فَأَمَرَ بِهِ فَرُجِمَ فَسَمِعَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم رَجُلَيْنِ مِنْ أَصْحَابِهِ يَقُولُ أَحَدُهُمَا لِصَاحِبِهِ انْظُرْ إِلَى هَذَا الَّذِي سَتَرَ اللَّهُ عَلَيْهِ فَلَمْ تَدَعْهُ نَفْسُهُ حَتَّى رُجِمَ رَجْمَ الْكَلْبِ ‏.‏ فَسَكَتَ عَنْهُمَا ثُمَّ سَارَ سَاعَةً حَتَّى مَرَّ بِجِيفَةِ حِمَارٍ شَائِلٍ بِرِجْلِهِ فَقَالَ ‏"‏ أَيْنَ فُلاَنٌ وَفُلاَنٌ ‏"‏ ‏.‏ فَقَالاَ نَحْنُ ذَانِ يَا رَسُولَ اللَّهِ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ انْزِلاَ فَكُلاَ مِنْ جِيفَةِ هَذَا الْحِمَارِ ‏"‏ ‏.‏ فَقَالاَ يَا نَبِيَّ اللَّهِ مَنْ يَأْكُلُ مِنْ هَذَا قَالَ ‏"‏ فَمَا نِلْتُمَا مِنْ عِرْضِ أَخِيكُمَا آنِفًا أَشَدُّ مِنْ أَكْلٍ مِنْهُ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ إِنَّهُ الآنَ لَفِي أَنْهَارِ الْجَنَّةِ يَنْقَمِسُ فِيهَا ‏"‏ ‏.




আবূ হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, একদা আসলাম গোত্রীয় এক লোক নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট এসে নিজের বিরুদ্ধে চারবার সাক্ষ্য দেয় যে, সে জনৈকা নারীর সঙ্গে হারাম কাজ করেছে। প্রতিবারই নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার থেকে মুখ ফিরিয়ে নিলেন। পঞ্চমবার সে একথা বললে তিনি তার দিকে ফিরে প্রশ্ন করলেনঃ তুমি কি তার সঙ্গে যেনা করেছ সে বললো, হাঁ। তিনি প্রশ্ন করলেনঃ তোমার লজ্জাস্থান কি তার লজ্জাস্থানে ঢুকেছে? সে বললো, হাঁ। তিনি বললেনঃ যেরূপ সুরমা শলাকা সুরমা দানীতে ঢুকে যায় এবং রশি যেরূপ কূপের মধ্যে ঢুকে পড়ে? সে বললো, হাঁ। তিনি প্রশ্ন করলেনঃ তুমি কি জান, যেনা কি? সে বললো, হাঁ, কোন ব্যাক্তি তার স্ত্রীর সঙ্গে বৈধভাবে যে সহবাস করে, আমি ঐ নারীর সঙ্গে অবৈধভাবে তা করেছি। তিনি বললেনঃ তোমার একথা বলার উদ্দেশ্য কী? সে বললো, আপনি আমাকে পবিত্র করবেন, এটাই আমার উদ্দেশ্য। অতঃপর তিনি আদেশ দিলেন তাকে পাথর মেরে হত্যা করা হলো। অতঃপর আল্লাহর নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) শুনতে পান যে, তাঁর দু’জন সাহাবী একে অপরকে বলছেন লোকটিকে দেখো, আল্লাহ যার অপরাধ গোপন রাখলেন, অথচ নিজেকেই সে রক্ষা করতে পারলো না, অতঃপর কুকুরের মত তাকে পাথর মেরে হত্যা করা হলো। তিনি তাদের একথা শুনে চুপ থকলেন এবং কিছু সময় চলার পর একটি গাধার লাশের নিকট এলেন যার পা উপরের দিকে উঠেছিল। তিনি বললেনঃ অমুক অমুক কোথায়? তারা বললো, হে আল্লাহর রাসূল! আমরা এখানে। তিনি বললেনঃ তোমরা দু’জন নেমে গিয়ে এ গাধার গোশত খাও। তারা বললো, হে আল্লাহর নাবী! এটা কি কেউ খেতে পারে? তিনি বললেনঃ তোমরা এখন তোমাদের এক ভাইয়ের মর্যাদা নিয়ে যেরূপ মন্তব্য করেছ, তা এর গোশত খাওয়ার চাইতেও গুরুতর। সেই সত্তার কসম যাঁর হাতে আমার প্রাণ! নিশ্চয়ই সে এখন জান্নাতের ঝর্ণাসমূহে আনন্দে ডুব দিচ্ছে। [৪৪২৭]



দুর্বলঃ ইরওয়া হা/২৩৫৪, যঈফাহ হা/২৯৫৭।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن ، مشکوۃ المصابیح (3627) ، عبد الرزاق صرح بالسماع عند ابن الجارود (814)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده ضعيف. عبد الرحمن بن الصامت -ويقال: عبد الرحمن بن الهضاض، وقيل: ابن هضهاض، وقيل: ابن الهضاب- لم يوثقه غير ابن حبان. وقال البخاري: لا يُعرف إلا بهذا الحديث، وقال النسائي في "الكبرى": عبد الرحمن بن هضاض ليس بمشهور. ومع ذلك فقد صححه ابن الجارود (٨١٤)، وابن حبان (٤٣٩٩)! أبو الزبير: هو محمَّد بن مسلم بن تدرُس، وابن جريج: هو عبد الملك بن عبد العزيز. وهو في "مصنف عبد الرزاق" (١٣٣٤٠)، ومن طريقه النسائي في "الكبرى" (٧١٦٥). وأخرجه أيضاً (٧١٢٨) من طريق حماد بن سلمة، عن أبي الزبير، عن عبدالرحمن ابن هضاض، عن أبي هريرة. وأخرجه النسائي (٧١٦٢) من طريق الحسين بن واقد، عن أبي الزبير، عن عبد الرحمن بن الهضاب ابن أخي أبي هريرة، عن أبي هريرة. وهو في "صحيح ابن حبان" (٤٣٩٩) و (٤٤٠٠). وانظر ما بعده. وأخرج البخاري (٥٢٧١)، ومسلم بإثر (١٦٩١)، والنسائي في "الكبرى" (٧١٣٩) و (٧١٤٠) من طريق ابن شهاب الزهري، عن أبي سلمة بن عبد الرحمن وسعيد بن المسيب أن أبا هريرة قال: أتى رجل من أسلم رسولَ الله ﷺ وهو في المسجد فناداه، فقال: يا رسول الله، إن الآخر قد زنى، يعني نفسه، فأعرض عنه، فتنحى لشق وجهه الذي أعرض قِبله، فقال: يا رسولَ الله، إن الآخر قد زنى، فأعرض عنه، فتنحى لشق وجهه الذي أعرض قِبله، فقال له ذلك فأعرض عنه، فتنحى له الرابعة، فلما شهد على نفسه أربع شهادات دعاه فقال: "هل بك جنون؟ " قال: لا، فقال النبي ﷺ: "اذهبوا به فارجموه". وكان قد أحصن. هذا لفظ البخاري. وأخرج ابنُ ماجه (٢٥٥٤)، والترمذي (١٤٩١) من طريق محمَّد بن عمرو بن علقمة، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة بنحو رواية الزهري وزاد: فلما أصابته الحجارة أدبر يشتدُّ، فلقيه رجل بيده لحي جمل، فضربه فصرعه، فذكر للنبي ﷺ فراره حين مسَّتْه الحجارة، قال: "فهلا تركتموه". وهو في "صحيح ابن حبان" (٤٤٣٩). قوله: "ينقمسُ" قال الخطابي: معناه: ينغمس ويغوص فيها، والقاموس معظم الماء، ومنه: قاموس البحر.









সুনান আবী দাউদ (4429)


حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ، حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، قَالَ أَخْبَرَنَا أَبُو الزُّبَيْرِ، عَنِ ابْنِ عَمِّ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، بِنَحْوِهِ زَادَ وَاخْتَلَفُوا فَقَالَ بَعْضُهُمْ رُبِطَ إِلَى شَجَرَةٍ وَقَالَ بَعْضُهُمْ وَقَفَ ‏.




আবূ হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) সূত্রে অনূরূপ হাদীস বর্ণিত। এতে আরো রয়েছেঃ হাসান ইবনু ‘আলী বলেন, বর্ণনাকারীগণ বিভিন্ন শব্দে হাদীসটি আমার নিকট বর্ণনা করেছেন। কেউ বলেছেন, লোকজন মাঈযকে গাছের সঙ্গে বেঁধেছিল আবার কেউ বলেছেন, তাকে দাঁড় করিয়ে রাখা হয়েছিল। [৪৪২৮]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن ، انظر الحدیث السابق (4428)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده ضعيف كسابقه. أبو عاصم: هو الضحاك بن مخلد، والحسن بن علي: هو الخلّال. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٧١٢٦) من طريق أبي عاصم الضحاك بن مخلد، بهذا الإسناد. وانظر ما قبله. تنبيه: هذا الطريق أثبتناه من هامش (هـ)، وأشار هناك إلى أنه في رواية ابن الأعرابي، وذكره المزي في "التحفة" (١٣٥٩٩)، وذكر أنه في رواية ابن داسه.









সুনান আবী দাউদ (4430)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُتَوَكِّلِ الْعَسْقَلاَنِيُّ، وَالْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ، قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، أَنَّ رَجُلاً، مِنْ أَسْلَمَ جَاءَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَاعْتَرَفَ بِالزِّنَا فَأَعْرَضَ عَنْهُ ثُمَّ اعْتَرَفَ فَأَعْرَضَ عَنْهُ حَتَّى شَهِدَ عَلَى نَفْسِهِ أَرْبَعَ شَهَادَاتٍ فَقَالَ لَهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ أَبِكَ جُنُونٌ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ لاَ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ أَحْصَنْتَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ نَعَمْ ‏.‏ قَالَ فَأَمَرَ بِهِ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَرُجِمَ فِي الْمُصَلَّى فَلَمَّا أَذْلَقَتْهُ الْحِجَارَةُ فَرَّ فَأُدْرِكَ فَرُجِمَ حَتَّى مَاتَ فَقَالَ لَهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم خَيْرًا وَلَمْ يُصَلِّ عَلَيْهِ ‏.‏




জাবির ইবনু ‘আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, একদা আসলাম গোত্রের জনৈক ব্যাক্তি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট এসে যেনার কথা স্বীকার করলে তিনি তার থেকে মুখ ফিরিয়ে নিলেন। সে আবারো সাক্ষ্য দিলো। তিনি তার থেকে মুখ ফিরিয়ে নেন। এরূপ সে চারবার নিজের বিরুদ্ধে সাক্ষ্য দিলো। অতঃপর নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে প্রশ্ন করেনঃ তোমার পাগলামী রোগ আছে নাকি? সে বললো, না। তিনি পুনরায় প্রশ্ন করলেনঃ তুমি কি বিবাহিত? সে বললো, হাঁ। বর্ণনাকারী বলেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে পাথর মারার আদেশ দিলেন। ঈদগাহে তাকে পাথর মারা হয়। পাথরের আঘাত যখন তাকে সন্ত্রস্ত করে তুললো সে পালাতে লাগলো। অতঃপর তাকে ধরে এনে পাথর মেরে হত্যা করা হলো। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার সম্পর্কে উত্তম কথা বললেন, তবে তার জানাযা পড়েননি।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح ، اختصرہ مسلم (1691) ولم یسق متنہ وحدیثہ یدل علٰی أن الزھري سمع من أبي سلمۃ ھذا الحدیث




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. وهو في "مصنف عبد الرزاق" (١٣٣٣٧)، ومن طريقه أخرجه البخاري (٦٨٢٠)، ومسلم بإثر (١٦٩١)، والترمذي (١٤٩٢)، والنسائي في "الكبرى" (٢٠٩٤) و (٧١٣٨). لكن انفرد محمود بن غيلان عن عبد الرزاق عند البخاري بقوله: وصلى عليه. قال البيهقي ٨/ ٢١٨: وهو خطأ، وانظر تمام الكلام على هذا الاختلاف فيما سلف برقم (٣١٨٦). وأخرجه البخاري (٥٢٧٠) و (٦٨١٤)، ومسلم بإثر (١٦٩١)، والنسائي (٧١٣٦) من طريق يونس بن يزيد الأيلي، ومسلم بإثر (١٦٩١)، والنسائي (٧١٣٧) من طريق ابن جريج، كلاهما عن الزهري، به. وسكتا في روايتيهما عن الصلاة عليه. وهو في "مسند أحمد" (١٤٤٦٢)، و"صحيح ابن حبان"، (٣٠٩٤) و (٤٤٤٠). وانظر الكلام على فقه الحديث فيما سلف برقم (٣١٨٦). وقوله: أذلقته الحجارة. قال الخطابي: معناه أصابته بحدها فعقرته، وذلقُ كل شيء حَدُّه، يقال: أذلقت السنان إذا أرهفته، والذلاقة في اللسان: خفته وسرعة مروره على الكلام. وفي قوله: أبك جنون؟ دليل على أنه قد ارتاب في أمره، ولذلك كان ترديده إياه وترك الاقتصار به على إقراره الأول. وفيه دليل على أن المحصن يرجم ولا يجلد.









সুনান আবী দাউদ (4431)


حَدَّثَنَا أَبُو كَامِلٍ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ، - يَعْنِي ابْنَ زُرَيْعٍ - ح وَحَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ زَكَرِيَّا، - وَهَذَا لَفْظُهُ - عَنْ دَاوُدَ، عَنْ أَبِي نَضْرَةَ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ، قَالَ لَمَّا أَمَرَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم بِرَجْمِ مَاعِزِ بْنِ مَالِكٍ خَرَجْنَا بِهِ إِلَى الْبَقِيعِ فَوَاللَّهِ مَا أَوْثَقْنَاهُ وَلاَ حَفَرْنَا لَهُ وَلَكِنَّهُ قَامَ لَنَا ‏.‏ - قَالَ أَبُو كَامِلٍ قَالَ - فَرَمَيْنَاهُ بِالْعِظَامِ وَالْمَدَرِ وَالْخَزَفِ فَاشْتَدَّ وَاشْتَدَدْنَا خَلْفَهُ حَتَّى أَتَى عُرْضَ الْحَرَّةِ فَانْتَصَبَ لَنَا فَرَمَيْنَاهُ بِجَلاَمِيدِ الْحَرَّةِ حَتَّى سَكَتَ - قَالَ - فَمَا اسْتَغْفَرَ لَهُ وَلاَ سَبَّهُ ‏.‏




আবূ সাঈদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মাঈয ইবনু মালিককে পাথর মারার আদেশ করলে আমরা তাকে নিয়ে আল-বাকী’ নামক স্থানে যাই। আল্লাহর কসম! আমরা তাকে বাঁধিওনি এবং তার জন্য গর্তও খনন করিনি; কিন্তু তবু সে দাঁড়িয়ে থাকে। আবূ কামিল বললেন, আবূ সাঈদ বলেছেন, অতঃপর আমরা তার শরীরে হাড়, মাটির ঢিলা ও কংকর নিক্ষেপ করতে লাগলাম। সে দৌড়াতে লাগলো, আমরাও তার পিছনে দৌড়াতে লাগলাম। অবশেষে সে সেই প্রস্তরময় প্রান্তরের এক প্রান্তে গিয়ে আমাদের জন্য দাঁড়িয়ে গেলো। আমরা তাকে পাথর নিক্ষেপ করলাম। অবশেষে সে চুপ হয়ে গেলো (মৃত্যবরণ করলো)। বর্ণনাকারী বলেন, তিনি তার জন্য ক্ষমা প্রার্থনাও করেননি, তাকে গালিও দেননি।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (1694)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. أبو نضرة: هو المنذر بن مالك بن قِطْعَة العَبْدي، وداود: هو ابن أبي هند، وأبو كامل: هو فُضيل بن حسين الجَحْدري. وأخرجه مسلم (١٦٩٤)، والنسائي في "الكبرى" (٧١٦١) من طريق داود بن أبي داود، به. وهو في "مسند أحمد" (١١٥٨٩)، و "صحيح ابن حبان" (٤٤٣٨). قوله: المدر: قال صاحب "النهاية": هو الطين المتماسِك. والخزف: قال في "اللسان": هو ما عُمل من الطين وشوي بالنار فصار فخَّاراً. وعُرض الحرة: قال النووي في "شرح مسلم": هو بضم العين، أي: جانبها. قال: وجلاميد الحرة، أي: الحجارة الكبار، واحدها جلمد بفتح الجيم والميم، وجُلمود بضم الجيم. وقال الخطابي: سكت، يريد: مات، قال الشاعر عدي بن زيد: ولقد شفى نفسي وأبرأ داءَها … أخذُ الرجالِ بحَلْقِه حَتَّى سكت









সুনান আবী দাউদ (4432)


حَدَّثَنَا مُؤَمَّلُ بْنُ هِشَامٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، عَنِ الْجُرَيْرِيِّ، عَنْ أَبِي نَضْرَةَ، قَالَ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم نَحْوَهُ وَلَيْسَ بِتَمَامِهِ قَالَ ذَهَبُوا يَسُبُّونَهُ فَنَهَاهُمْ قَالَ ذَهَبُوا يَسْتَغْفِرُونَ لَهُ فَنَهَاهُمْ قَالَ ‏ "‏ هُوَ رَجُلٌ أَصَابَ ذَنْبًا حَسِيبُهُ اللَّهُ ‏"‏ ‏.




আবূ নাদরাহ (রাহিমাহুল্লাহ) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, একদা এক লোক নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট হাযির হলো। অতঃপর অনুরূপ সমার্থবোধক হাদীস বর্ণনা করেন তবে অপূর্ণাঙ্গভাবে। তিনি বলেন, উপস্থিত জনতা লোকটিকে গালি দিতে শুরু করলে তিনি তাদের নিষেধ করলেন। বর্ণনাকারী বলেন, তারা তার জন্য ক্ষমা প্রার্থনা করতে লাগলে তিনি তাদের নিষেধ করে বললেনঃ লোকটি গুনাহ করেছে, আল্লাহই তার হিসাব গ্রহনের জন্য যথেষ্ট। [৪৪৩১]



যঈফ মুরসালঃ ইরওয়া (৭/২৫৫-২৫৬)।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: ضعيف مرسل




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، السند مرسل ، أبو نضرۃ المنذر بن مالک من التابعین ، (انوار الصحیفہ ص 156)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: رجاله ثقات لكنه مرسل. أبو نضرة: هو المنذر بن مالك بن قِطْعة العَبْدي، والجُريري: هو سعيد بن إياس، وسماع إسماعيل -وهو ابن عُلية، منه وإن كان قبل تغيُّره- تبقى في الحديث علةُ الإرسال.









সুনান আবী দাউদ (4433)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي بَكْرِ بْنِ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَعْلَى بْنِ الْحَارِثِ، حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ غَيْلاَنَ، عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ مَرْثَدٍ، عَنِ ابْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم اسْتَنْكَهَ مَاعِزًا ‏.‏




ইবনু বুরাইদাহ (রাহিমাহুল্লাহ) হতে তার পিতা হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মাঈযের মুখের গন্ধ শুঁকলেন, (নেশাগ্রস্ত কিনা জানার জন্য)। [৪৪৩২]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (1695)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حديث صحيح، محمَّد بن أبي بكر بن أبي شيبة متابع. ابن بريدة. هو سليمان، وغيلان: هو ابن جامع المُحاربي. وأخرجه مطولاً مسلم (١٦٩٥)، والنسائي في "الكبرى" (٧١٢٥) من طريق يحيى بن يعلى بن الحارث، بهذا الإسناد. لكنه قال فيه: فقام رجل فاستنكهه فلم يجد منه ريح خمر. وقال النسائي: هذا صالح الإسناد. وسقط من بعض نسخ مسلم من إسناده: يعلى بن الحارث. قال القاضي عياض: والصواب ما وقع في نسخة الدمشقي: عن يحيى بن يعلى، عن أبيه، عن غيلان. فزاد في الإسناد: عن أبيه. وانظر ما بعده، وما سيأتي برقم (٤٤٤٢). قال الخطابي: فيه دلالة على أنه قد ارتاب بأمره، وفيه حجة لمن لم ير طلاق السكران طلاقاً وهو قول مالك بن أنس والمزني.









সুনান আবী দাউদ (4434)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ إِسْحَاقَ الأَهْوَازِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ، حَدَّثَنَا بَشِيرُ بْنُ الْمُهَاجِرِ، حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ بُرَيْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ كُنَّا أَصْحَابَ رَسُولِ اللَّهِ نَتَحَدَّثُ أَنَّ الْغَامِدِيَّةَ وَمَاعِزَ بْنَ مَالِكٍ لَوْ رَجَعَا بَعْدَ اعْتِرَافِهِمَا أَوْ قَالَ لَوْ لَمْ يَرْجِعَا بَعْدَ اعْتِرَافِهِمَا لَمْ يَطْلُبْهُمَا وَإِنَّمَا رَجَمَهُمَا عِنْدَ الرَّابِعَةِ ‏.‏




‘আবদুল্লাহ ইবনু বুরাইদাহ (রাহিমাহুল্লাহ) হতে তার পিতা হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমরা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাহাবীগণ পরস্পর আলোচনা করতাম যে, ‘গামিদ’ গোত্রের ঐ নারী এবং মাঈয ইবনু মালিক যদি তাদের স্বীকারোক্তি প্রত্যাহার করতো অথবা তিনি বলেন, তারা স্বীকারোক্তির পর যদি তার পুনরাবৃত্তি না করতো, তবে তিনি (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাদের তলব করতেন না। তিনি তাদেরকে পাথর মেরেছেন চারবার স্বীকারোক্তির পর। [৪৪৩৩]



দুর্বলঃ ইরওয়া হা/২৩৫৯।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن ، بشیر بن المھاجر حسن الحدیث




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده ضعيف لضعف بشير بن المهاجر. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٧١٦٤) و (٧٢٣١) من طريق بشير بن المهاجر، به. وهو في "مسند أحمد" (٢٢٩٤٢). قلنا: وفي قوله ﷺ "هلا تركموه" من حديث جابر بن عبد الله السالف برقم (٤٤٢٠) وحديث نعيم بن هزال السالف أيضاً (٤٤١٩) وغيرهما، دليل على أن الحَدَّ يُدرأ عن المعترف إذا رجَع، كما بوَّب له الترمذي في "جامعه" للحديث (١٤٩١). وانظر كلام الحافظ في "الفتح" ١٢/ ١٢٧.









সুনান আবী দাউদ (4435)


حَدَّثَنَا عَبْدَةُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، وَمُحَمَّدُ بْنُ دَاوُدَ بْنِ صُبَيْحٍ، قَالَ عَبْدَةُ أَخْبَرَنَا حَرَمِيُّ بْنُ حَفْصٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُلاَثَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ، أَنَّ خَالِدَ بْنَ اللَّجْلاَجِ، حَدَّثَهُ أَنَّ اللَّجْلاَجَ أَبَاهُ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ، كَانَ قَاعِدًا يَعْتَمِلُ فِي السُّوقِ فَمَرَّتِ امْرَأَةٌ تَحْمِلُ صَبِيًّا فَثَارَ النَّاسُ مَعَهَا وَثُرْتُ فِيمَنْ ثَارَ فَانْتَهَيْتُ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَهُوَ يَقُولُ ‏"‏ مَنْ أَبُو هَذَا مَعَكِ ‏"‏ ‏.‏ فَسَكَتَتْ فَقَالَ شَابٌّ حَذْوَهَا أَنَا أَبُوهُ يَا رَسُولَ اللَّهِ ‏.‏ فَأَقْبَلَ عَلَيْهَا فَقَالَ ‏"‏ مَنْ أَبُو هَذَا مَعَكِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ الْفَتَى أَنَا أَبُوهُ يَا رَسُولَ اللَّهِ ‏.‏ فَنَظَرَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِلَى بَعْضِ مَنْ حَوْلَهُ يَسْأَلُهُمْ عَنْهُ فَقَالُوا مَا عَلِمْنَا إِلاَّ خَيْرًا ‏.‏ فَقَالَ لَهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ أَحْصَنْتَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ نَعَمْ ‏.‏ فَأَمَرَ بِهِ فَرُجِمَ ‏.‏ قَالَ فَخَرَجْنَا بِهِ فَحَفَرْنَا لَهُ حَتَّى أَمْكَنَّا ثُمَّ رَمَيْنَاهُ بِالْحِجَارَةِ حَتَّى هَدَأَ فَجَاءَ رَجُلٌ يَسْأَلُ عَنِ الْمَرْجُومِ فَانْطَلَقْنَا بِهِ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقُلْنَا هَذَا جَاءَ يَسْأَلُ عَنِ الْخَبِيثِ ‏.‏ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ لَهُوَ أَطْيَبُ عِنْدَ اللَّهِ مِنْ رِيحِ الْمِسْكِ ‏"‏ ‏.‏ فَإِذَا هُوَ أَبُوهُ فَأَعَنَّاهُ عَلَى غُسْلِهِ وَتَكْفِينِهِ وَدَفْنِهِ وَمَا أَدْرِي قَالَ وَالصَّلاَةِ عَلَيْهِ أَمْ لاَ ‏.‏ وَهَذَا حَدِيثُ عَبْدَةَ وَهُوَ أَتَمُّ ‏.‏




খালিদ ইবনুল লাজলাজ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বাজারে বসে কাজে ব্যাস্ত ছিলেন। এমন সময় এক মহিলা একটি শিশুসহ এ পথ দিয়ে যাচ্ছিল। কিছু লোকেরা তার সঙ্গে ভীড় করছিল এবং আমিও তাদের অন্তর্ভুক্ত ছিলাম। সে নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট পৌঁছালে তিনি প্রশ্ন করলেনঃ তোমার সঙ্গের এ শিশুর পিতা কে? সে চুপ থাকলো। তার পাশে দাঁড়ানো এক যুবক বললো, হে আল্লাহর রাসূল! আমিই এ শিশুটির পিতা। তিনি মহিলার দিকে মুখ করে বললেনঃ তোমার সঙ্গের এ শিশুটির পিতা কে? যুবকটি বললো, হে আল্লাহর রাসূল! আমি এর পিতা। এ কথা শুনে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার চারপাশের লোকজনের নিকট তার সম্পর্কে জানতে চাইলে তারা বললো, তাকে আমরা ভালো লোক বলেই জানি। অতঃপর নবী রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকেই প্রশ্ন করলেনঃ তুমি কি বিবাহিত? সে বললো, হাঁ। অতঃপর তাঁর হুকুমে লোকটিকে পাথর মারা হয়। বর্ণনাকারী বলেন, আমরা তাকে নিয়ে বেরিয়ে পড়লাম, তার জন্য গর্ত খনন করে তাকে তাতে রাখলাম এবং রজম করলাম। ফলে সে মারা গেলো। একজন লোক এসে পাথর নিক্ষেপে নিহত ব্যাক্তি সম্পর্কে প্রশ্ন করতে লাগলো। আমরা তাকে নিয়ে নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট হাযির হয়ে বললাম, এ লোকটি এসে অপবিত্র ব্যাক্তি সম্পর্কে প্রশ্ন করছে। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ সে তো মহান আল্লাহর নিকট মৃগনাভীর চেয়েও অধিক সুগন্ধযুক্ত। পরে দেখা গেল যে, আগন্তুক লোকটি নিহত ব্যাক্তির পিতা। অতঃপর আমরা তাকে এর গোসল, কাফন ও দাফন করতে সাহায্য করি। খালিদ বলেন, তার জানাযার সলাত পড়া হয়েছিল কিনা এ সম্পর্কে আমি জানি না।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: حسن الإسناد




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حديث حسن إن شاء الله، وهذا إسناد فيه محمَّد بن عبد الله بن عُلاثة مختلف فيه، وأعدل الأقوال فيه أنه لا يحتج بما انفرد به وإنما يكتب حديثه للمتابعة والشواهد، وقد توبع في بعض هذا الحديث، ويشهد له قصة ماعز عند مسلم (١٦٥٥) وهو عند أبي داود (٤٤٣٣) مختصراً، وحديث المرأة الجهنية وسيأتي خبرها برقم (٤٤٤٠) و (٤٤٤٢). وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٧١٤٦) و (٧١٦٥) من طريق حرمي بن حفص، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٥٩٣٤). وانظر ما بعده.









সুনান আবী দাউদ (4436)


حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا صَدَقَةُ بْنُ خَالِدٍ، ح وَحَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَاصِمٍ الأَنْطَاكِيُّ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ، جَمِيعًا قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ، - قَالَ هِشَامٌ مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الشُّعَيْثِيُّ - عَنْ مَسْلَمَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْجُهَنِيِّ، عَنْ خَالِدِ بْنِ اللَّجْلاَجِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِبَعْضِ هَذَا الْحَدِيثِ ‏.




খালিদ ইবনুল লাজলাজ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে তার পিতা হতে বর্ণিত, খালিদ ইবনুল লাজলাজ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে তার পিতা থেকে নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর উপরোক্ত হাদীসের অংশবিশেষ বর্ণিত। [৪৪৩৫]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: حسن الإسناد




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن ، انظر الحدیث السابق (4435)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده حسن. مسلمة بن عبد الله الجهني روى عنه جمع، وذكره ابن حبان في "الثقات"، وذكره أبو زرعة الدمشقي في الطبقة الثالثة وذكر أنه كان صاحب تابوت الزكاة، وذكره ابن سُميع في الطبقة الخامسة، وقال: كان على بيت المال زمن هشام. قلتا: فمثله يكون حسن الحديث في أقل أحواله، ومحمد بن عبد الله الشعيثي -وهو ابن المهاجر- صدوق حسن الحديث. فهذه متابعة جيدة للإسناد السابق. وأخرجه النسائي في: "الكبرى" (٧١٤٧) من طريق الوليد بن مسلم، بهذا الإسناد. ببعض الحديث السالف قبله.









সুনান আবী দাউদ (4437)


حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا طَلْقُ بْنُ غَنَّامٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ السَّلاَمِ بْنُ حَفْصٍ، حَدَّثَنَا أَبُو حَازِمٍ، عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّ رَجُلاً أَتَاهُ فَأَقَرَّ عِنْدَهُ أَنَّهُ زَنَى بِامْرَأَةٍ سَمَّاهَا لَهُ فَبَعَثَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِلَى الْمَرْأَةِ فَسَأَلَهَا عَنْ ذَلِكَ فَأَنْكَرَتْ أَنْ تَكُونَ زَنَتْ فَجَلَدَهُ الْحَدَّ وَتَرَكَهَا ‏.‏




সাহল ইবনু সা’দ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এক ব্যাক্তি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট এসে স্বীকারোক্তি করলো যে, সে এক নারীর সঙ্গে যেনা করেছে। সে তাঁর নিকট সেই নারীর নামও বলেছে। অতএব রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সেই নারীর নিকট লোক পাঠিয়ে এ বিষয়ে প্রশ্ন করলে সে তা অস্বীকার করে। অতএব তিনি পুরুষ লোকটির উপর বেত্রাঘাতের হাদ্দ কার্য করেন এবং নারীকে রেহাই দেন।




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. أبو حازم: هو سلمة بن دينار المدني القاصّ. وأخرجه الطبراني في "الكبير" (٥٩٢٤)، والبيهقي ٨/ ٢٢٨ من طريق عثمان بن أبي شيبة، بهذا الإسناد. وأخرجه أحمد (٢٢٨٧٥) عن حسين بن محمَّد، والطحاوي في "شرح مشكل الآثار" (٤٩٤٢) والطبراني في "الكبير" (٥٧٦٧)، والدارقطني (٣١٥٥)، والبيهقي ٨/ ٢٥١ من طريق هشام بن عمار، والدارقطفي (٣١٥٥) من طريق يونس بن محمَّد، و (٣١٥٥) من طريق أبي علي أحمد بن الحكم، أربعتهم عن مسلم بن خالد الزنجي، عن عباد بن إسحاق، عن أبي حازم، عن سهل بن سعد. لكن قال حسين في روايته: فحده وتركها، وقال الآخرون: فرجمه النبي ﷺ وتركها. والصحيح رواية حسين لموافقتها لرواية عبد السلام بن حفص على أن مسلم بن خالد الزنجي ضعيف. وأخرجه الطحاوي (٤٩٤١)، والحاكم ٤/ ٣٧٠ من طريق أسد بن موسى، عن مسلم بن خالد، عن أبي حازم، عن سهل. فأسقط من إسناده عباداً، والصحيح ذكره كما رواه من سبق ذكرهم عن مسلم. وأخرجه الدارقطني (٣١٥٦) من طريق فليح بن سليمان، عن أبي حازم، عن سهل: أن وليدة في عهد رسول الله ﷺ حملت من الزنى، فسئلت: من أحبلك؟ قالت: أحبلني المقعد، فسئل عن ذلك، فاعترف، فقال النبي ﷺ: إنه لضعيف عن الجلد، فأمر بمئة عثكول، فضربه بها ضربة واحدة. ثم قال الدارقطني: كذا قال، والصواب عن أبي حازم، عن أبي أمامة بن سهل. قلنا: يعني أن فليحاً وهم في ذكر قصة المُقعد بهذا الإسناد، وإنما هذه القصة من رواية أبي حازم عن أبي أمامة بن سهل، ثم ساقها من طريق أبي الزناد ويحيى بن سعيد الأنصاري، عن أبي أمامة. وسيتكرر برقم (٤٤٦٦). تنبيه: هذا الحديث أثبتناه من هامش (هـ)، وقال صاحب "عون المعبود": هذا الحديث في بعض النسخ في هذا المحل، وفي أكثر النسخ في باب إذا أقر الرجل بالزنى، ولم تقر المرأة، وسيأتي، وهو الصحيح، والله أعلم. قلنا: قد يكون أبو داود كرره في الموضعين عمداً تفقهاً وثبت ذلك في بعض الروايات عنه، فلا مجال لتصحيح وجودِه في مكان دون آخر.









সুনান আবী দাউদ (4438)


حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا ح، وَحَدَّثَنَا ابْنُ السَّرْحِ، - الْمَعْنَى - قَالَ أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، أَنَّ رَجُلاً، زَنَى بِامْرَأَةٍ فَأَمَرَ بِهِ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَجُلِدَ الْحَدَّ ثُمَّ أُخْبِرَ أَنَّهُ مُحْصَنٌ فَأَمَرَ بِهِ فَرُجِمَ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ رَوَى هَذَا الْحَدِيثَ مُحَمَّدُ بْنُ بَكْرٍ الْبُرْسَانِيُّ عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ مَوْقُوفًا عَلَى جَابِرٍ ‏.‏ وَرَوَاهُ أَبُو عَاصِمٍ عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ بِنَحْوِ ابْنِ وَهْبٍ لَمْ يَذْكُرِ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ إِنَّ رَجُلاً زَنَى فَلَمْ يَعْلَمْ بِإِحْصَانِهِ فَجُلِدَ ثُمَّ عَلِمَ بِإِحْصَانِهِ فَرُجِمَ ‏.‏




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, জনৈক ব্যাক্তি এক মহিলার সঙ্গে যেনা করে। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর আদেশে তাকে বেত্রাঘাত করা হয়। অতঃপর তাঁকে অভিহিত করা হয় যে, সে বিবাহিত; কাজেই তিনি নির্দেশ দিলে তাকে পাথর মারা হয়। ইমাম আবূ দাঊদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, মুহাম্মাদ ইবনু বাক্‌র আল-বুরসানী এ হাদীস ইবনু জুরাইজ হতে জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) সূত্রে মাওকুফভাবে বর্ণনা করেছেন। আবূ ‘আসিম এ হাদীস ইবনু জুরাইজ সূত্রে ইবনু ওয়াহরের মতই বর্ণনা করেছেন এবং নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর উল্লেখ করেননি। বর্ণনাকারী বলেন, এক ব্যাক্তি যেনা করলো, কিন্তু সে বিবাহিত কিনা তা জানা গেলো না। অতএব তাকে বেত্রাঘাত করা হয়। পরে তার বৈবাহিক অবস্থা জানা গেলে তাকে রজম করা হয়। [৪৪৩৭]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: ضعيف الإسناد




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، ابن جریج وأبو الزبیر عنعنا ، (انوار الصحیفہ ص 157)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده ضعيف مرفوعاً، فقد انفردَ عبدُ الله بن وهب برفعه، وخالفه أبو عاصم الضحاك بن مخلد كما في الطريق الآتي بعده عند المصنف، ومحمد بن بكر البُرساني كما أشار المصنف، فروياه عن ابن جريج موقوفاً. قلنا: وقد ثبت تصريح ابن جريج وأبي الزبير بسماعهما في الطريق الموقوف عند النسائي في "الكبرى"، فلهذا صوَّب الموقوفَ، وخطَّأ المرفوعَ. وأخرجه النَّسائي في "الكبرى" (٧١٧٣) عن قتيبة بن سعيد، بهذا الإسناد. وقال بإثره: لا أعلم أن أحداً رفع هذا الحديث غير ابن وهب. وانظر ما بعده.









সুনান আবী দাউদ (4439)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحِيمِ أَبُو يَحْيَى الْبَزَّازُ، أَخْبَرَنَا أَبُو عَاصِمٍ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، أَنَّ رَجُلاً، زَنَى بِامْرَأَةٍ فَلَمْ يَعْلَمْ بِإِحْصَانِهِ فَجُلِدَ ثُمَّ عَلِمَ بِإِحْصَانِهِ فَرُجِمَ ‏.




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এক লোক জনৈকা স্ত্রীলোকের সঙ্গে ব্যাভিচার করে। পুরুষটি বিবাহিত কিনা তা জানা যায়নি। সুতরাং তাকে বেত্রাঘাত করা হয়। অতঃপর তার বৈবাহিক অবস্থা জানা গেলে তাকে পাথর নিক্ষেপে হত্যা করা হয়। [৪৪৩৮]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، انظر الحدیث السابق (4438) ، (انوار الصحیفہ ص 157)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح مرقوفاً، وقد جاء عند النسائي تصريح ابن جريج -وهو عبد الملك بن عبد العزيز- وأبي الزبير -وهو محمَّد بن مسلم بن تدرُس- بالسماع، فانتفت شبهة تدليسهما. أبو عاصم: هو الضحاك بن مخلد. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٧١٧٤) عن محمَّد بن بشار، عن أبي عاصم، بهذا الإسناد. وقال: هذا الصواب، والذي قبله خطأ.









সুনান আবী দাউদ (4440)


حَدَّثَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، أَنَّ هِشَامًا الدَّسْتَوَائِيَّ، وَأَبَانَ بْنَ يَزِيدَ، حَدَّثَاهُمُ - الْمَعْنَى، - عَنْ يَحْيَى، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، عَنْ أَبِي الْمُهَلَّبِ، عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ، أَنَّ امْرَأَةً، - قَالَ فِي حَدِيثِ أَبَانَ مِنْ جُهَيْنَةَ - أَتَتِ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَتْ إِنَّهَا زَنَتْ وَهِيَ حُبْلَى ‏.‏ فَدَعَا النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم وَلِيًّا لَهَا فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ أَحْسِنْ إِلَيْهَا فَإِذَا وَضَعَتْ فَجِئْ بِهَا ‏"‏ ‏.‏ فَلَمَّا أَنْ وَضَعَتْ جَاءَ بِهَا فَأَمَرَ بِهَا النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَشُكَّتْ عَلَيْهَا ثِيَابُهَا ثُمَّ أَمَرَ بِهَا فَرُجِمَتْ ثُمَّ أَمَرَهُمْ فَصَلَّوْا عَلَيْهَا فَقَالَ عُمَرُ يَا رَسُولَ اللَّهِ تُصَلِّي عَلَيْهَا وَقَدْ زَنَتْ قَالَ ‏"‏ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَقَدْ تَابَتْ تَوْبَةً لَوْ قُسِّمَتْ بَيْنَ سَبْعِينَ مِنْ أَهْلِ الْمَدِينَةِ لَوَسِعَتْهُمْ وَهَلْ وَجَدْتَ أَفْضَلَ مِنْ أَنْ جَادَتْ بِنَفْسِهَا ‏"‏ ‏.‏ لَمْ يَقُلْ عَنْ أَبَانَ فَشُكَّتْ عَلَيْهَا ثِيَابُهَا ‏.




‘ইমরান ইবনু হুসাইন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, একদা জুহাইনাহ গোত্রের জনৈকা মহিলা নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট এসে বললো, সে যেনা করেছে এবং অন্তঃসত্বা হয়ে পড়েছে। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার অভিভাবককে ডেকে এনে বলেনঃ এর সঙ্গে উত্তম আচরণ করো। আর যখন সে সন্তান প্রসব করবে, তাকে আমার নিকট নিয়ে এসো। অতঃপর সে সন্তান প্রসব করলে অভিভাবক তাকে নিয়ে এলো। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর আদেশে তাকে কাপড় দিয়ে বেঁধে পাথর নিক্ষেপে হত্যা করা হয়। অতঃপর তিনি সাহাবীদের আদেশ দিলেন তার জানাযার সলাত পড়তে। ‘উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, হে আল্লাহর রাসূল! আপনি তার জানাযার সলাত পড়বেন? সে তো যেনা করেছে! তিনি বললেনঃ যার হাতে আমার প্রাণ তাঁর কসম! সে এরূপ তাওবাহ করেছে, যা মাদীনাহ্‌বাসীদের সত্তরজনের মধ্যে বন্টন করে দিলেও তাদের জন্য তা যথেষ্ট হবে। তুমি তার চাইতে উত্তম কোন ব্যাক্তিকে পাবে যে তার নিজের সত্তাকে উৎসর্গ করে দিল। আবান সূত্রে বর্ণিত হাদীসে কাপড় দিয়ে বাঁধার কথাটূকু নেই।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (1696)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. أبو المهلب: هو الجَرمي، عم أبي قلابة، مختلف في اسمه، وأبو قلابة: هو عبد الله بن زيد الجَرمي، ويحيى: هو ابن أبي كثير، وهام الدَّستُوائي: هو ابن أبي عبد الله. وأخرجه مسلم (١٦٩٦)، وابن ماجه (٢٥٥٥)، والترمذي (١٥٠٠)،والنسائي في "الكبرى" (٢٠٩٥) و (٧١٥٠) و (٧١٥١) و (٧١٥٦) و (٧١٥٧) من طريق يحيى بن أبي كثير، بهذا الإسناد. وقد وقع خطأ في رواية الأوزاعي عن يحيى بن أبي كثير عند ابن ماجه والنسائي في الموضعين الثاني والخامس حيث سمى أبا المهلب: أبا المهاجر. وقد نبه عليه النسائي بإثر (٧١٥١). وهو في "مسند أحمد" (١٩٨٦١)، و"صحيح ابن حبان" (٤٤٠٣) و (٤٤٤١). قال الخطابي: شُكَّت عليها ثيابها، أي: شُدَّت عليها لئلا تتجرد فتبدو عورتها.