হাদীস বিএন


সুনান আবী দাউদ





সুনান আবী দাউদ (4661)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ صَالِحٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي فُدَيْكٍ، قَالَ حَدَّثَنِي مُوسَى بْنُ يَعْقُوبَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ إِسْحَاقَ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ، أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ زَمْعَةَ، أَخْبَرَهُ بِهَذَا الْخَبَرِ، قَالَ لَمَّا سَمِعَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم صَوْتَ عُمَرَ قَالَ ابْنُ زَمَعَةَ خَرَجَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم حَتَّى أَطْلَعَ رَأْسَهُ مِنْ حُجْرَتِهِ ثُمَّ قَالَ ‏ "‏ لاَ لاَ لاَ لِيُصَلِّ لِلنَّاسِ ابْنُ أَبِي قُحَافَةَ ‏"‏ ‏.‏ يَقُولُ ذَلِكَ مُغْضَبًا ‏.




আবদুল্লাহ ইবনু ‘উতবাহ (রাহিমাহুল্লাহ) হতে বর্ণিত, এ হাদীস সম্পর্কে তাকে ‘আবদুল্লাহ ইবনু যাম‘আহ্ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) জানিয়েছেন। তিনি বলেন, নবী (সাল্লাল্লাহ ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ‘উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কন্ঠস্বর শোনার সঙ্গে উঠে এসে তাঁর ঘর থেকে মাথা বের করে ক্রোধের সঙ্গে বললেন, না, না, না; আবূ কুহাফার পুত্র যেন লোকদের সলাতে ইমামতি করে।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن ، انظر الحدیث السابق (6660)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده ضعيف لضعف موسى بن يعقوب. وعبد الرحمن بن إسحاق قال عنه البخاري: ليس ممن يعتمد على حفظه إذا خالف من ليس بدونه. ابن أبي فديك: هو محمَّد بن إسماعيل. وأخرجه يعقوب بن سفيان في "المعرفة والتاريخ" ١/ ٤٥٤، وابن أبي عاصم في "السنة" (١١٦٠) من طريق ابن أبي فديك، بهذا الإسناد. وانظر ما قبله.









সুনান আবী দাউদ (4662)


حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، وَمُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالاَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ أَبِي بَكْرَةَ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الأَنْصَارِيِّ، قَالَ حَدَّثَنِي الأَشْعَثُ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ أَبِي بَكْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لِلْحَسَنِ بْنِ عَلِيٍّ ‏"‏ إِنَّ ابْنِي هَذَا سَيِّدٌ وَإِنِّي أَرْجُو أَنْ يُصْلِحَ اللَّهُ بِهِ بَيْنَ فِئَتَيْنِ مِنْ أُمَّتِي ‏"‏ ‏.‏ وَقَالَ فِي حَدِيثِ حَمَّادٍ ‏"‏ وَلَعَلَّ اللَّهَ أَنْ يُصْلِحَ بِهِ بَيْنَ فِئَتَيْنِ مِنَ الْمُسْلِمِينَ عَظِيمَتَيْنِ ‏"‏ ‏.‏




আবূ বাক্‌রাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহ ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) হাসান ইবনু ‘আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) সম্পর্কে বললেন, আমার এ ছেলে (নাতি) নেতা হবে। আর আমি কামনা করি, আল্লাহ তার মাধ্যমে আমার উম্মাতের দু’টি দলের মধ্যে সমঝোতা করাবেন। হাম্মাদ (রাহিমাহুল্লাহ) সূত্রে বর্ণিত হাদীসে রয়েছেঃ তিনি বলেন, আশা করি আল্লাহ তার মাধ্যমে মুসলিমদের বৃহৎ দু’টি দলের মধ্য সমঝোতা করাবেন।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح ، رواہ البخاري (3629)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. حماد: هو ابن زيد، والحسن: هو البصري. وأشعث: هو ابن عبد الملك الحُمراني. وأخرجه البخاري (٢٧٠٤) و (٣٦٢٩)، والترمذي (٤١٠٧)، والنسائي في "الكبرى" (١٧٣٠) من طريقين عن الحسن، به. وهو في "مسند أحمد" (٢٠٣٩٢)، و"صحيح ابن حبان" (٦٩٦٤). قال الخطابي في "معالم السنن" ٤/ ٣١١: السيد يقال اشتقاقه من السواد، أي: هو الذي يلي السواد العظيم ويقوم بشأنهم. وفي الخبر دليل على أن واحداً من الفريقين لم يخرج بما كان منه في تلك الفتنة من قول أو فعل عن ملة الإِسلام، إذ قد جعلهم النبي-ﷺ مسلمين. وهكذا سبيل كل متأول فيما تعاطاه من رأي ومذهب دعا إليه إذا كان قد تأوله بشبهة وإن كان مخطئاً فى ذلك. ومعلوم أن إحدى الفئتين كانت مصيبة والأخرى مخطئة. وقد خرج مصداق هذا القول فيه بما كان من إصلاحه بين أهل الشام وأهل العراق، وتخليه عن الأمر خوفاً من الفتنة، وكراهية إراقة الدم، ويُسمى ذلك العام سَنَةَ الجماعة.









সুনান আবী দাউদ (4663)


حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ، أَخْبَرَنَا هِشَامٌ، عَنْ مُحَمَّدٍ، قَالَ قَالَ حُذَيْفَةُ مَا أَحَدٌ مِنَ النَّاسِ تُدْرِكُهُ الْفِتْنَةُ إِلاَّ أَنَا أَخَافُهَا عَلَيْهِ إِلاَّ مُحَمَّدُ بْنُ مَسْلَمَةَ فَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ لاَ تَضُرُّكَ الْفِتْنَةُ ‏"‏ ‏.




মুহাম্মাদ (রাহিমাহুল্লাহ) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, হুযাইফাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেছেন, মুহাম্মাদ ইবনু মাসলামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) ছাড়া অন্য সবার ব্যাপারেই হাঙ্গামার শিকার হওয়ার আশঙ্কা করেছি। কেননা আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে বলতে শুনেছি, হাঙ্গামা তোমার (মুহাম্মাদ ইবনু মাসলামাহ্‌র) কোন ক্ষতি করতে পারবে না।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، ھشام بن حسان مدلس وعنعن ، (انوار الصحیفہ ص 164)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حديث حسن، وهذا إسناد فيه انقطاع، فإن محمَّد بن سيرين لم يسمع من حذيفة بن اليمان، نقله أبو زرعة العراقي في "تحفة التحصيل" ص ٢٧٨ عن المزي في "التهذيب" فقال: ان روايته (يعني محمَّد بن سيرين) عن حذيفة وأبي الدرداء مرسلة قال أبو زرعة: لم أر ذلك في "التهذيب" بل ذكر روايته عنهما ساكتاً عليها، وروايته عن حذيفه في "سنن" أبي داود، وابن ماجه، وعن أبي الدرداه في "سنن النسائي". الحسن بن علي: هو الخلال، ويزيد: هو ابن هارون، وهشام: هو بن حسان الأزدي، ومحمد: هو ابن سيرين. ويعضده ما بعده. وأخرجه ابن أبي شيبة في "مصنفه" ١٥/ ٥٠ عن يزيد بن هارون، بهذا الإسناد.









সুনান আবী দাউদ (4664)


حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ مَرْزُوقٍ، أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ، عَنِ الأَشْعَثِ بْنِ سُلَيْمٍ، عَنْ أَبِي بُرْدَةَ، عَنْ ثَعْلَبَةَ بْنِ ضُبَيْعَةَ، قَالَ دَخَلْنَا عَلَى حُذَيْفَةَ فَقَالَ إِنِّي لأَعْرِفُ رَجُلاً لاَ تَضُرُّهُ الْفِتَنُ شَيْئًا ‏.‏ قَالَ فَخَرَجْنَا فَإِذَا فُسْطَاطٌ مَضْرُوبٌ فَدَخَلْنَا فَإِذَا فِيهِ مُحَمَّدُ بْنُ مَسْلَمَةَ فَسَأَلْنَاهُ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ مَا أُرِيدُ أَنْ يَشْتَمِلَ عَلَىَّ شَىْءٌ مِنْ أَمْصَارِكُمْ حَتَّى تَنْجَلِيَ عَمَّا انْجَلَتْ ‏.‏




সা‘লাবাহ ইবনু দুবাই‘আহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, একদা আমরা হুযাইফাহ্‌র (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) নিকট গেলে তিনি বললেন, আমি এমন একজনকে চিনি, সংঘাত যার কোন ক্ষতি করতে পারবে না। বর্ণনাকারী বলেন, তারপর আমরা রওয়ানা হয়ে একটি তাঁবু খাটানো দেখতে পেয়ে তাতে ঢুকে মুহাম্মাদ ইবনু মাসলামাহ্‌র সাক্ষাত পেলাম। আমরা তাকে এ ব্যাপারে জিজ্ঞেস করলে তিনি বলেন, আমি চাই না যে, দাঙ্গা-হাঙ্গামার আবসান না হওয়া পর্যন্ত তোমাদের কোন এক শহর আমাকে ঘিরে ধরুক (আমি বসবাস করি)।




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، ثعلبۃ بن ضبیعۃ ھو ضبیعۃ بن حصین: مجہول الحال،وثقہ ابن حبان وحدہ ، (انوار الصحیفہ ص 164)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حسن بما قبله، أبو بردة: هو ابن أبي موسى، وأشعث بن سليم ، هو ابن أبي الشعثاء، وثعلبة بن ضبيعة مختلف في اسمه، ويقال له: ضبيعة بن حصين الثعلبي. ذكره ابن حبان في "الثقات". وأخرجه الحاكم في "المستدرك" ٣/ ٤٣٣ - ٤٣٤ من طريق أبي داود الطيالسي، عن شعبة، بهذا الإسناد. وسكت عنه الذهبي. وأخرجه أيضاً ٣/ ٤٣٤ من طريق سفيان، عن أشعث بن أبي الشعثاء، عن أبي بردة قال: قال حذيفة: إني لأعرف رجلاً … فذكره. وأسقط من إسناده ثعلبة بن ضبيعة. وقال الحاكم: هذه فضيلة كبيرة بإسناد صحيح. وانظر ما بعده.









সুনান আবী দাউদ (4665)


حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ أَشْعَثَ بْنِ سُلَيْمٍ، عَنْ أَبِي بُرْدَةَ، عَنْ ضُبَيْعَةَ بْنِ حُصَيْنٍ الثَّعْلَبِيِّ، بِمَعْنَاهُ ‏.‏




দুবাই‘আহ ইবনু হুসাইন আস-সা‘লাবী (রাহিমাহুল্লাহ) সূত্র হতে বর্ণিত, পূর্বোক্ত হাদীসের অর্থানুরূপ বর্ণিত। [৪৬৬৪]



আমি এটি সহীহ এবং যঈফে পাইনি।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح لغيره




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، انظر الحدیث السابق (4664) ، (انوار الصحیفہ ص 164)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حسن بما قبله، وهذا سند موقوف على حذيفة، أبو عوانة: هو وضاح بن عبد الله اليشكري. أخرجه ابن سعد في "الطبقات" ٣/ ٤٤٤ - ٤٤٥ عن عفان بن مسلم، عن أبي عوانة، بهذا الإسناد. وفيه قصة.









সুনান আবী দাউদ (4666)


حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الْهُذَلِيُّ، حَدَّثَنَا ابْنُ عُلَيَّةَ، عَنْ يُونُسَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ قَيْسِ بْنِ عُبَادٍ، قَالَ قُلْتُ لِعَلِيٍّ رضى الله عنه أَخْبِرْنَا عَنْ مَسِيرِكَ هَذَا أَعَهْدٌ عَهِدَهُ إِلَيْكَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَمْ رَأْىٌ رَأَيْتَهُ فَقَالَ مَا عَهِدَ إِلَىَّ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِشَىْءٍ وَلَكِنَّهُ رَأْىٌ رَأَيْتُهُ ‏.‏




ক্বাইস ইবনু ‘উবাদ (রাহিমাহুল্লাহ) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি ‘আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -কে বললাম, আপনার এ সফলতা কি আপনার প্রতি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহ ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নির্দেশ মোতাবেক, নাকি আপনার ব্যক্তিগত সিদ্ধান্ত? তিনি বললেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহ ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমার প্রতি এরকম কোন নির্দেশ দেননি, বরং এটা আমার ব্যক্তিগত সিদ্ধান্ত।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح الإسناد




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح ، تقدم (4530) وللحدیث شواھد




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح، ابن علية: هو إسماعيل، ويونس: هو ابن عبيد بن دينار، والحسن: هو البصري. وأخرجه الخطيب البغدادي في "الموضح" ١/ ٣٩٣ من طريق إسماعيل بن إبراهيم أبي معمر، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٢٧١) وانظر حديث قيس المطول في "المسند" (١٢٠٧). قوله: أخبرنا عن مسيرك هذا، أي: إلى بلاد العراق لقتال معاوية أو مسيرك إلى البصرة لقتال الزبير رضي الله عهم.









সুনান আবী দাউদ (4667)


حَدَّثَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا الْقَاسِمُ بْنُ الْفَضْلِ، عَنْ أَبِي نَضْرَةَ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ تَمْرُقُ مَارِقَةٌ عِنْدَ فُرْقَةٍ مِنَ الْمُسْلِمِينَ يَقْتُلُهَا أَوْلَى الطَّائِفَتَيْنِ بِالْحَقِّ ‏"‏ ‏.‏




আবূ সাঈদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহ ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ মুসলিমদের মধ্যে গোলযোগ চলাকালে একটি দল আত্মপ্রকাশ করবে। যারা সত্যের নিকটবর্তী তারা ওদের বিরুদ্ধে যুদ্ধ করবে।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (1065)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح، أبو نضرة: هو المنذر بن مالك بن قِطعة. وأخرجه مسلم (١٠٦٥) (١٥٠)، والنسائي في "الكبرى" (٨٤٥٧) من طريقين عن القاسم بن الفضل، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١١١٩٦) و (١١٢٧٥)، و"صحيح ابن حبان" (٦٧٣٥).









সুনান আবী দাউদ (4668)


حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ، حَدَّثَنَا عَمْرٌو، - يَعْنِي ابْنَ يَحْيَى - عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ تُخَيِّرُوا بَيْنَ الأَنْبِيَاءِ ‏"‏ ‏.




আবূ সাঈদ আল-খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহ ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ তোমরা নবীগণের মধ্যে মর্যাদার পার্থক্য করো না।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (2412) صحیح مسلم (2374)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح، وهيب: هو ابن خالد بن عجلان، وعمرو بن يحيى: هو المازني، وأبوه: هو يحيى بن عمارة بن أبي الحسن. وأخرجه البخاري (٢٤١٢) عن موسى بن إسماعيل، بهذا الإسناد، وفيه قصة. وأخرجه البخاري (٦٩١٦)، ومسلم (٢٣٧٤) (١٦٣) من طريق سفيان الثوري، عن عمرو بن يحيى، به. وهو في "مسند أحمد" (١١٢٦٥)، و"صحيح ابن حبان" (٦٢٣٧). قوله: "لا تخيروا" قال السندي: من التخيير، أرشدهم إلى ما ينبغي لهم من التأدب مع الكل، إذ التخيير ربما يؤدي إلى التنقيص وسوء الأدب، وهذا لا ينافي أن يكون بعضهم أفضلَ كما يدل عليه قوله تعالى: ﴿تِلْكَ الرُّسُلُ فَضَّلْنَا بَعْضَهُمْ عَلَى بَعْضٍ﴾ [البقرة: ٢٥٣].









সুনান আবী দাউদ (4669)


حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَبِي الْعَالِيَةِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَا يَنْبَغِي لِعَبْدٍ أَنْ يَقُولَ إِنِّي خَيْرٌ مِنْ يُونُسَ بْنِ مَتَّى ‏"‏ ‏.




আবূ হুরাইরাহ (রাহিমাহুল্লাহ) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, একদা এক ইয়াহুদী বললো, সেই মহান সত্তার কসম! যিনি মূসা (আঃ)-কে মনোনীত করেছেন। তখন এক মুসলিম ইয়াহুদী লোকটির চেহারায় থাপ্পর মারলো। ইয়াহুদী রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহ ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর নিকট গিয়ে তার বিরুদ্ধে অভিযোগ করলে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহ ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ তোমরা আমাকে মূসা (আঃ)-এর উপর অধিক মর্যাদা দিও না। কেননা (ক্বিয়ামাতের দিন) সব মানুষ মূর্ছা যাবে। সর্বপ্রথম আমিই হুঁশ ফিরে পাবো। আর তখন মূসা (আঃ) আরশের একপাশ ধরে থাকবেন। আমি অবহিত নই যে, মূসা (আঃ) মূর্ছা গিয়ে আমার আগে হুশ ফিরে পাবে, না তিনি মূর্ছা যাবেন না অর্থাৎ যাদেরকে আল্লাহ ব্যতিক্রম করবেন তিনি তাদের একজন কিনা।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (3413) صحیح مسلم (2377)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح، أبو العالية: هو رفيع بن مهران. وأخرجه البخاري (٣٤١٣) عن حفص بن عمر، بهذا الإسناد. وأخرجه البخاري (٣٣٩٥)، ومسلم (٢٣٧٧) (١٦٧) من طريق محمَّد بن جعفر، عن شعبة، به. وهو في "مسند أحمد" (٢١٦٧)، و"صحيح ابن حبان" (٦٢٤١).









সুনান আবী দাউদ (4670)


حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ يَحْيَى الْحَرَّانِيُّ، قَالَ حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَاقَ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أَبِي حَكِيمٍ، عَنِ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ جَعْفَرٍ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ مَا يَنْبَغِي لِنَبِيٍّ أَنْ يَقُولَ إِنِّي خَيْرٌ مِنْ يُونُسَ بْنِ مَتَّى ‏"‏ ‏.‏




আবূ হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহ ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ আমি আদম সন্তানের নেতা এবং আমাকেই সর্বপ্রথম কবর হতে উঠানো হবে এবং আমিই সর্বপ্রথম সুপারিশকারী হবো এবং সর্বপ্রথম আমার সুপারিশ গ্রহণ করা হবে।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح لغيره




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، محمد بن إسحاق مدلس وعنعن ، (انوار الصحیفہ ص 164)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: صحيح بما قبله، وهذا إسناد رجاله ثقات إلا أن فيه عنعنة محمَّد بن إسحاق. محمَّد بن سلمة: هو ابن عبد الله الباهلي، والقاسم بن محمَّد: هو ابن أبي بكر الصديق. وأخرجه أحمد في "مسنده" (١٧٥٧) عن أحمد بن عبد الملك، عن محمَّد بن سلمة، بهذا الإسناد. وأخرجه أبو يعلى في "مسنده" (٦٧٩٣) من طريق يونس بن بكير، والخطيب البغدادي في "تاريخه" ١٠/ ١٣٨ من طريق سعيد بن بزيع، كلاهما عن محمَّد بن إسحاق، به. ويشهد له ما قبله. وفي الباب عن ابن مسعود أخرجه البخاري (٣٤١٢)، وهو في "المسند" (٣٧٠٣). وعن أبي هريرة أخرجه البخاري (٣٤١٦)، ومسلم (٢٣٧٦)، وهو في "المسند" قال الخطابي: وإنما خص يونس بالذكر فيما نرى -والله أعلم- لما قصه الله تعالى علينا من شأنه، وما كان من قلة صبره على أذى قومه، فخرج مغاضباً لهم، ولم يصبر كما صبر أولو العزم من الرسل.









সুনান আবী দাউদ (4671)


حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ أَبِي يَعْقُوبَ، وَمُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى بْنِ فَارِسٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، وَعَبْدِ الرَّحْمَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَجُلٌ مِنَ الْيَهُودِ وَالَّذِي اصْطَفَى مُوسَى ‏.‏ فَرَفَعَ الْمُسْلِمُ يَدَهُ فَلَطَمَ وَجْهَ الْيَهُودِيِّ فَذَهَبَ الْيَهُودِيُّ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَأَخْبَرَهُ فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ تُخَيِّرُونِي عَلَى مُوسَى فَإِنَّ النَّاسَ يُصْعَقُونَ فَأَكُونُ أَوَّلَ مَنْ يُفِيقُ فَإِذَا مُوسَى بَاطِشٌ فِي جَانِبِ الْعَرْشِ فَلاَ أَدْرِي أَكَانَ مِمَّنْ صَعِقَ فَأَفَاقَ قَبْلِي أَوْ كَانَ مِمَّنِ اسْتَثْنَى اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ وَحَدِيثُ ابْنِ يَحْيَى أَتَمُّ ‏.‏




ইবনু ‘আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নাবী (সাল্লাল্লাহ ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ কারো একথা বলা উচিৎ নয় যে, আমি ইউনুস ইবনু মাত্তার (আঃ) চেয়ে উত্তম।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (2411) صحیح مسلم (2377)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح، يعقوب: هو ابن إبراهيم بن سعد بن إبراهيم الزهري. وأخرجه مسلم (٢٣٧٣) (١٦٠) عن زهير بن حرب وأبي بكر، كلاهما عن يعقوب بن إبراهيم، عن أبيه إبراهيم بن سعد، بهذا الإسناد. وأخرجه البخاري (٢٤١١) عن يحيى بن قزعة، عن إبراهيم بن سعد، به. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٧٧١٠) و (١١٣٩٣) من طريق يونس بن محمَّد، عن إبراهيم بن سعد، به، وليس فيه قصة لطم اليهودي. وأخرجه ابن ماجه (٤٢٧٤)، والترمذي (٣٥٢٦) من طريق محمَّد بن عمرو، عن أبي سلمة، به. وفيه زيادة. وأخرجه مسلم (٢٣٧٣) (١٥٩)، والنسائي في "الكبرى" (١١٣٩٤) من طريق عبد الله بن الفضل، عن عبد الرحمن الأعرج، عن أبي هريرة وعندهما زيادات، وليس عند النسائي قصة لطم اليهودي. وأخرجه مسلم (٢٣٧٣) (١٦١) من طريق شعيب، عن الزهري ابن شهاب، عن أبي سلمة بن عبد الرحمن وسعيد بن المسيب، عن أبي هريرة، فذكره. وهو في "مسند أحمد" (٧٥٨٦)، و"صحيح ابن حبان" (٧٣١١).









সুনান আবী দাউদ (4672)


حَدَّثَنَا زِيَادُ بْنُ أَيُّوبَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِدْرِيسَ، عَنْ مُخْتَارِ بْنِ فُلْفُلٍ، يَذْكُرُ عَنْ أَنَسٍ، قَالَ قَالَ رَجُلٌ لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَا خَيْرَ الْبَرِيَّةِ ‏.‏ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ ذَاكَ إِبْرَاهِيمُ ‏"‏ ‏.‏




আবদুল্লাহ ইবনু জা‘ফার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহ ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলতেনঃ কোন নাবীর একথা বলা উচিৎ নয় যে, আমি ইউনুস ইবনু মাত্তার (আঃ) চেয়ে উত্তম।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (2369)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (١١٦٢٨) عن زياد بن أيوب، بهذا الإسناد. وأخرجه مسلم (٢٣٦٩) (١٥٠)، والنسائي (١١٦٢٨) عن محمَّد بن العلاء أبي غريب، والنسائي (١١٦٢٨) عن الحسن بن إسماعيل، كلاهما عن عبد الله بن إدريس، به. وأخرجه مسلم (٢٣٦٩) و (٢٣٦٩) (١٥٠)، والترمذي (٣٦٤٦)، والنسائي في "الكبرى" (١١٦٢٨) من طريق عن المختار بن فلفل، به. وهو في "مسند أحمد" (١٢٨٢٦). قال النووي في "شرح مسلم" ١٥/ ١٢١: قال العلماء: إنما قال- هذا تواضعاً واحتراماً وإبراهيم ﵇ لخُلَّته وأُبوَّته، وإلا فنبيُّنا ﷺ أفضل كما قال ﷺ: "أنا سيدُ ولد آدم" (سيأتي بعد هذا الحديث) ولم يقصد به الافتخار ولا التطاول على من تقدمه، بل قاله بياناً لما أمر ببيانه وتبليغه، ولهذا قال ﷺ: "ولا فخر" لينفي ما قد يتطرق إلى بعض الأفهام السخيفة.









সুনান আবী দাউদ (4673)


حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عُثْمَانَ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ، عَنْ أَبِي عَمَّارٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ فَرُّوخَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَنَا سَيِّدُ وَلَدِ آدَمَ وَأَوَّلُ مَنْ تَنْشَقُّ عَنْهُ الأَرْضُ وَأَوَّلُ شَافِعٍ وَأَوَّلُ مُشَفَّعٍ ‏"‏ ‏.‏




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, একদা এক ব্যক্তি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহ ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)–কে বললো, ওহে সৃষ্টিকূলের সর্বোত্তম ব্যক্তি। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহ ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ তিনি তো ইবরাহীম (আঃ)।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (2278)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: صحيح، والوليد: وهو ابن مسلم وإن كان مدلساً قد توبع. الأوزاعي: هو عبد الرحمن، وأبو عمار: هو شداد بن عبد الله. وأخرجه مسلم (٢٢٧٨) من طريق هقل بن زياد، عن عبد الرحمن الأوزاعي، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٠٩٧٢). وقوله ﷺ: "أنا سيد ولد آدم" وروي أيضاً في أول حديث الشفاعة الذي أخرجه البخاري (٤٧١٢)، ومسلم (١٩٤) (٣٢٧) من طريق أبي زرعة بن جرير، عن أبى هريرة: فذكره. وهو في "مسند أحمد" (٩٦٢٣). وانظر حديث أبي سعيد الخدري في "المسند" (١٠٩٨٧)، ففيه تمام أحاديث الباب.









সুনান আবী দাউদ (4674)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُتَوَكِّلِ الْعَسْقَلاَنِيُّ، وَمَخْلَدُ بْنُ خَالِدٍ الشَّعِيرِيُّ، - الْمَعْنَى - قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ ابْنِ أَبِي ذِئْبٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي سَعِيدٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَا أَدْرِي أَتُبَّعٌ لَعِينٌ هُوَ أَمْ لاَ وَمَا أَدْرِي أَعُزَيْرٌ نَبِيٌّ هُوَ أَمْ لاَ ‏"‏ ‏.‏




আবূ হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহ ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ আমি অবহিত নই যে, তুব্বা’ অভিশপ্ত কিনা এবং আমার জানা নেই যে, উযাইর নবী কি না।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: رجاله ثقات، لكن أعل بالإرسال، قال الدارقطني فيما نقله عنه الحافظ ابنُ عساكر في: "تاريخه" ١١/ ٤: تفرد به عبد الرزاق، ونقل عنه أيضاً الحافظ ابن حجر في "تخريج أحاديث الكشاف" ٤/ ١٤٨، و"الفتح" ١/ ٦٦ قوله: تفرد بوصله عبد الرزاق وغيره أرسله. عبد الرزاق: هو ابن همام، ومعمر: هو ابن راشد، وسعيد بن أبي سعيد: هو المقبري. وأخرجه ابن أبي حاتم في "تفسيره" كما في "تفسير ابن كثير" ٧/ ٢٤٢، والحاكم في "المستدرك" ١/ ٣٦ و ٢/ ١٤، والبيهقي في "السنن" ٨/ ٣٢٩، وابن عبد البر في "جامع بيان العلم وفضله" ٢/ ٥٠ وابن عساكر في "تاريخ دمشق" ١١/ ٤ من طرق عن عبد الرزاق بن همام، بهذا الإسناد بلفظ: "ما أدري أتبع لعيناً كان أم لا، وما أدري ذو القرنين نبياً كان أم لا، وما أدري الحدود كفارات لأهلها أم لا". وأورده البخاري في "تاريخه الكبير"، ١/ ٥٣ مرسلاً ومسنداً، وقال عن المرسل: هو أصح ولا يثبت هذا عن النبي ﷺ لأن النبي ﷺ قال: " الحدود كفارة". وانظر لزاماً ما علقناه على حديث سهل بن سحد من "مسند أحمد" (٢٢٨٨٠) "لا تسبوا تبعاً فإنه قد كان قد أسلم".









সুনান আবী দাউদ (4675)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ صَالِحٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَنَّ أَبَا سَلَمَةَ بْنَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، أَخْبَرَهُ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ أَنَا أَوْلَى النَّاسِ بِابْنِ مَرْيَمَ الأَنْبِيَاءُ أَوْلاَدُ عَلاَّتٍ وَلَيْسَ بَيْنِي وَبَيْنَهُ نَبِيٌّ ‏"‏ ‏.




আবূ হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহ ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি, আমি আত্মীয়তায় মারইয়াম (আঃ)-এর পুত্র ঈসা (আঃ)-এর নিকটতর। নাবীগণ পরস্পর বৈমাত্রেয় ভাই। আমার ও তাঁর মাঝখানে কোন নবী নেই।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (3442) صحیح مسلم (2365)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: صحيح، ابن وهب: هو عبد الله، ويونس: هو ابن يزيد بن أبى النجاد. وأخرجه مسلم (٢٣٦٥) (١٤٣) عن حرملة بن يحيى، عن عبد الله بن وهب، بهذا الإسناد. وأخرجه البخاري (٣٤٤٢) من طريق شعيب، عن ابن شهاب الزهري، به. وأخرجه مسلم (٢٣٦٥) (١٤٤) من طريق الأعرج، عن أبي سلمة، به. وأخرجه البخاري (٣٤٤٣) من طريق عبد الرحمن بن أبي عمرة، ومسلم (٢٣٦٥) (١٤٥) من طريق همام بن منبه، كلاهما عن أبي هريرة. وهو في "مسند أحمد" (٧٥٢٩)، و"صحيح ابن حبان"، (٦١٩٤) و (٦٤٠٦). وقوله: "أولى" بمعنى أقرب، ولما لم يكن بينهما نبي كانا كأنهما في زمن واحد. والعلات بفتح العين المهملة وتشديد اللام، واحدة عَلة: وهم الذين أمهاتهم مختلفة وأبوهم واحد، أراد أن إيمانهم واحد، وشرائعهم مختلفة. قاله في "النهاية".









সুনান আবী দাউদ (4676)


حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، أَخْبَرَنَا سُهَيْلُ بْنُ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ الإِيمَانُ بِضْعٌ وَسَبْعُونَ أَفْضَلُهَا قَوْلُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَأَدْنَاهَا إِمَاطَةُ الْعَظْمِ عَنِ الطَّرِيقِ وَالْحَيَاءُ شُعْبَةٌ مِنَ الإِيمَانِ ‏"‏ ‏.‏




আবূ হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহ ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ঈমানের সত্তরটিরও বেশী শাখা রয়েছে। তার মধ্যে সর্বত্তোম হলো এ সাক্ষ্য দেয়া যে, “আল্লাহ ব্যতীত অন্য কোন ইলাহ নেই”। আর সর্বনিম্ন হলো রাস্তা থেকে হাড় অপসারণ করা এবং লজ্জাশীলতা ঈমানের একটি শাখা।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (35) ، ورواہ البخاري (9) من طریق آخر




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: صحيح، حماد هو ابن سلمة، وأبو صالح: هو ذكوان السمان. وأخرجه مسلم (٣٥) (٥٨)، وابن ماجه بإثر الحديث (٥٧) من طريق جرير، وابن ماجه (٥٧)، والترمذي (٢٨٠١) من طريق سفيان، كلاهما عن سهيل بن أبي صالح، به. وعندهم بلفظ: "الأذى". وأخرجه البخاري (٩)، ومسلم (٣٥) (٥٧) من طريق سليمان بن بلال، عن عبد الله ابن دينار، به. دون قوله: "وأدناها إماطة العظم عن الطريق". وهو في المسند" (٨٩٢٦) و (٩٣٦١)، و"صحيح ابن حبان"، (١٦٦). البضع بكسر أوله وهو عدد مبهم مقيد بما بين الثلاث إلى التسع كما جزم به القزاز. قال الخطابي: وفي هذا الحديث بيان أن الإيمان الشرعي اسم لمعنى ذي شُعَبِ وأجزاء له أعلى وأدنى، فالاسم يتعلق ببعضها كما يتعلق بأكلها، والحقيقة تقتضي جميع شعبها وتستوفيها، ويدل على ذلك قوله: "والحياء شعبة من الإيمان" فأخبر أن الحياء إحدى تلك الشعب. وفي هذا الباب إثبات التفاضل في الإيمان وتباين المؤمنين في درجاته. ومعنى قوله: " والحياء شعبة من الإيمان، أن الايمان يقطع صاحبه عن المعاصي، ويحجزه عنها، فصار بذلك من الإيمان، إذ الإيمان بمجموعه ينقسم إلى ائتمار بما أمر الله به، وانتهاه عما نهى الله عنه.









সুনান আবী দাউদ (4677)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ، حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ شُعْبَةَ، حَدَّثَنِي أَبُو جَمْرَةَ، قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ، قَالَ إِنَّ وَفْدَ عَبْدِ الْقَيْسِ لَمَّا قَدِمُوا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَمَرَهُمْ بِالإِيمَانِ بِاللَّهِ قَالَ ‏"‏ أَتَدْرُونَ مَا الإِيمَانُ بِاللَّهِ ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ ‏"‏ شَهَادَةُ أَنْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ وَإِقَامُ الصَّلاَةِ وَإِيتَاءُ الزَّكَاةِ وَصَوْمُ رَمَضَانَ وَأَنْ تُعْطُوا الْخُمُسَ مِنَ الْمَغْنَمِ ‏"‏ ‏.




ইবনু 'আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, একদা 'আবদুল ক্বাইস গোত্রের প্রতিনিধি দল রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট এলে তিনি তাদেরকে আল্লাহ্‌র প্রতি ঈমান আনার নির্দেশ দেন। তিনি বললেন, তোমরা কি জানো এক আল্লাহ্‌র উপর ঈমান আনা কী? তারা বললেন, আল্লাহ্ ও তাঁর রাসূলই বেশী জানেন। তিনি বললেন, আল্লাহ্ ছাড়া কোন ইলাহ নেই এবং মুহাম্মাদ আল্লাহ্‌র রাসূল-এর সাক্ষ্য দেয়া, সলাত ক্বায়িম করা, যাকাত দেয়া এবং রমযান মাসের সিয়াম পালন করা। এছাড়া তোমরা গণীমাতের এক-পঞ্চমাংশ জমা দিবে।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (53) صحیح مسلم (17) ، وانظر الحدیث السابق (3692)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: صحيح، يحيى بن سعيد: هو القطان، وأبو جمرة: هو نصر بن عمران الضبعي. وأخرجه البخاري (٥٣)، ومسلم (١٧)، والنسائي في "الكبرى" (٣٢٠) و (٥٨١٨) من طرق عن شعبة، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٠٢٠)، و "صحيح ابن حبان" (١٧٢). وقد سلف برقم (٣٦٩٢) من طريق حماد بن زيد وعبّاد بن عباد، كلاهما عن أبي جمرة، عن ابن عباس.









সুনান আবী দাউদ (4678)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ بَيْنَ الْعَبْدِ وَبَيْنَ الْكُفْرِ تَرْكُ الصَّلاَةِ ‏"‏ ‏.




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ বান্দা ও কুফর এর মধ্যে পার্থক্য হলো সলাত ছেড়ে দেয়া।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح ، رواہ مسلم (82)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: صحيح، وهذا إسناد حسن. أبو الزبير -هو محمَّد بن مسلم بن تدرس- وإن كان مدلساً، وقد عنعنه إلاَّ أنه صرح بالسماع عند مسلم، وهو متابع. وأخرجه ابن ماجه (١٠٧٨) عن علي بن محمَّد، والترمذي (٢٨٠٨) عن هناد، كلاهما عن وكيع، بهذا الإسناد. وأخرجه مسلم (٨٢) (١٣٤)، والنسائي في "الكبرى" (٣٢٨) من طريق ابن جريج، عن أبي الزبير، به. وأخرجه مسلم (٨٢)، والترمذي (٢٨٠٦) و (٢٨٠٧) من طريق أبي سفيان طلحة ابن نافع، عن جابر، به. وهو في "مسند أحمد"، (١٤٩٧٩) و (١٥١٨٣)، و "صحيح ابن حبان" (١٤٥٣). والكفرُ الوارد في هذا الحديث محمول على سبيل التغليظ والتشبيه له بالكفار، لا على الحقيقة، أو بأنه كفر عملي لا يُعدُّ المتلبِّس به خارجاً عن الملّة، كقوله ﵇: "سبابُ المسلم فسوق، وقتاله كفر"، وقوله: "كفرٌ بالله تبرّؤ من نسب ان دق" وقوله: "من قال لأخيه: يا كافر، فقد باء به أحدهما"، وقوله:" من أتى امرأة في دبرها، فقد كفر بما أنزل على محمَّد". وانظر "شرح السنة" ٢/ ١٧٩ - ١٨٠.









সুনান আবী দাউদ (4679)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَمْرِو بْنِ السَّرْحِ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، عَنْ بَكْرِ بْنِ مُضَرَ، عَنِ ابْنِ الْهَادِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ مَا رَأَيْتُ مِنْ نَاقِصَاتِ عَقْلٍ وَلاَ دِينٍ أَغْلَبَ لِذِي لُبٍّ مِنْكُنَّ ‏"‏ ‏.‏ قَالَتْ وَمَا نُقْصَانُ الْعَقْلِ وَالدِّينِ قَالَ ‏"‏ أَمَّا نُقْصَانُ الْعَقْلِ فَشَهَادَةُ امْرَأَتَيْنِ شَهَادَةُ رَجُلٍ وَأَمَّا نُقْصَانُ الدِّينِ فَإِنَّ إِحْدَاكُنَّ تُفْطِرُ رَمَضَانَ وَتُقِيمُ أَيَّامًا لاَ تُصَلِّي ‏"‏ ‏.‏




ইবনু 'আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কা'বার দিকে নিবিষ্ট হলে সাহাবীগণ বললেন, হে আল্লাহ্‌র রাসূল! যারা বাইতুল মুকাদ্দাসের দিকে ফিরে সলাত পড়া অবস্থায় মারা গেছে তাদের কি হবে? তখন মহান আল্লাহ্ অবতীর্ন করলেন, "আল্লাহ্ তোমাদের ঈমান (সলাত) বিনষ্ট করবেন না" (সূরাহ বাকারা : ১৪৩)।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (79)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: صحيح، ابن وهب: هو عبد الله، وابن الهاد: هو يزيد. وأخرجه مسلم بإثر (٧٩) عند أبي الطاهر، عن عبد الله بن وهب، بهذا الإسناد. وأخرجه مسلم (٧٩) (١٣٢)، وابن ماجه (٤٠٠٣) من طريق الليث بن سعد، عن يزيد بن الهاد، به. وزادوا في أوله: "يا معشر النساء تصدَّقن وأكثرن الاستغفار، فإني رأيتكن أكثرَ أهل النار" فقالت امرأةٌ منهن، جزلةٌ: وما لنا يا رسول الله ﷺ أكثرَ أهل النار. قال: "تكثرن اللعن، وتكفُرنَ العَشير، وما رأيت ناقصات عقل … " فذكروا الحديث. وهو في "مسند أحمد" (٥٣٤٣). قال السندي في "حاشيته على المسند": قولها: وما نقصان العقل والدين، أي: وما دليل ذلك؛ أي: أي دليل تبين به نقصانُ عقل النساء ودينهن؟ فاستدل على نقصان العقل بما ترتب عليه من كون شهادة المرأة كنصف شهادة الرجل، فإن هذا مترتب على نقصان عقلهن ومسبب عنه، لا أنه علة له، واستدل على نقصان دينهن بما هو سبب له، فإن مكثهن الليالي بلا صلاة وصوم سبب لنقصان دينهن، فالدليل الأول إنِّي، والثاني لِمِّي، ولكن مطلق الدليل يشملهما، ومن هنا ظهر أنه لا ينبغي أن يكون السؤال عن سبب النقصان، إذ لا يوافقه الجواب في بيان نقصان العقل.









সুনান আবী দাউদ (4680)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سُلَيْمَانَ الأَنْبَارِيُّ، وَعُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، - الْمَعْنَى - قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ سِمَاكٍ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ لَمَّا تَوَجَّهَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِلَى الْكَعْبَةِ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ فَكَيْفَ الَّذِينَ مَاتُوا وَهُمْ يُصَلُّونَ إِلَى بَيْتِ الْمَقْدِسِ فَأَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى ‏{‏ وَمَا كَانَ اللَّهُ لِيُضِيعَ إِيمَانَكُمْ ‏}‏ ‏.




আবূ উমামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, যে ব্যক্তির ভালোবাসা ও শত্রুতা, দান করা ও না করা একমাত্র আল্লাহ্‌র সন্তুষ্টি লাভের জন্য হয়ে থাকে সে ব্যক্তিই পূর্ণ ঈমানদার।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن ، وللحدیث شاھد عند البخاري (4486)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: صحيح لغيره، وهذا سند ضعيف؛ لأن في رواية سماك وهو ابن حرب عن عكرمة اضطراباً. سفيان: هو الثوري، وعكرمة: هو مولى ابن عباس. وأخرجه الترمذي (٣٢٠٢) عن هناد وأبي عمار، قالا: حدَّثنا وكيع، عن إسرائيل، عن سماك، عن عكرمة، عن ابن عباس. فذكره. وهو في "مسند أحمد" (٢٦٩١) و (٢٧٧٥)، و "صحيح ابن حبان" (١٧١٧). ويشهد له حديث البراء بن عازب عند البخاري في "صحيحه"، برقم (٤٠).