সুনান আবী দাউদ
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ بْنِ سُفْيَانَ، أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ ثَابِتٍ، عَنْ عِكْرِمَةَ بْنِ عَمَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنِي ضَمْضَمُ بْنُ جَوْسٍ، قَالَ قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ " كَانَ رَجُلاَنِ فِي بَنِي إِسْرَائِيلَ مُتَآخِيَيْنِ فَكَانَ أَحَدُهُمَا يُذْنِبُ وَالآخَرُ مُجْتَهِدٌ فِي الْعِبَادَةِ فَكَانَ لاَ يَزَالُ الْمُجْتَهِدُ يَرَى الآخَرَ عَلَى الذَّنْبِ فَيَقُولُ أَقْصِرْ . فَوَجَدَهُ يَوْمًا عَلَى ذَنْبٍ فَقَالَ لَهُ أَقْصِرْ فَقَالَ خَلِّنِي وَرَبِّي أَبُعِثْتَ عَلَىَّ رَقِيبًا فَقَالَ وَاللَّهِ لاَ يَغْفِرُ اللَّهُ لَكَ أَوْ لاَ يُدْخِلُكَ اللَّهُ الْجَنَّةَ . فَقُبِضَ أَرْوَاحُهُمَا فَاجْتَمَعَا عِنْدَ رَبِّ الْعَالَمِينَ فَقَالَ لِهَذَا الْمُجْتَهِدِ أَكُنْتَ بِي عَالِمًا أَوْ كُنْتَ عَلَى مَا فِي يَدِي قَادِرًا وَقَالَ لِلْمُذْنِبِ اذْهَبْ فَادْخُلِ الْجَنَّةَ بِرَحْمَتِي وَقَالَ لِلآخَرِ اذْهَبُوا بِهِ إِلَى النَّارِ " . قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَتَكَلَّمَ بِكَلِمَةٍ أَوْبَقَتْ دُنْيَاهُ وَآخِرَتَهُ .
আবূ হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহি ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)কে বলতে শুনেছিঃ বনী ইসরাইলের মধ্যে দু’ব্যক্তি ছিল। তাদের একজন পাপ কাজ করতো এবং অন্যজন সর্বদা ‘ইবাদতে লিপ্ত থাকতো। যখনই ‘ইবাদতে রত ব্যক্তি অপর ব্যক্তিকে দেখতো তখনই তাকে খারাপ কাজ পরিহার করতে বলতো। একদিন সে তাকে পাপ কাজে লিপ্ত দেখে বললো, তুমি এমন কাজ হতে বিরত থাকো। সে বললো, আমাকে আমার রবের উপর ছেড়ে দাও। তোমাকে কি আমার উপর পাহারাদার করে পাঠানো হয়েছে? সে বললো, আল্লাহর কসম! আল্লাহ তোমাকে ক্ষমা করবেন না অথবা তোমাকে আল্লাহ জান্নাতে প্রবেশ করাবেন না। অতঃপর দু’জনকেই মৃত্যু দিয়ে আল্লাহর নিকট উপস্থিত করা হলে তিনি ‘ইবাদতগুজারী ব্যক্তিকে প্রশ্ন করলেন, তুমি কি আমার সম্পর্কে জানতে? অথবা তুমি কি আমার হাতে যা আছে তার উপর ক্ষমতাবান ছিলে? এবং পাপীকে বললেন, তুমি চলে যাও এবং আমার রহমতে জান্নাতে প্রবেশ করো। আর অপর ব্যক্তির ব্যাপারে তিনি বললেন, তোমরা একে জাহান্নামে নিয়ে যাও। আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, সেই মহান সত্তার কসম যার হাতে আমার জীবন! সে এমন উক্তি করেছে যার ফলে তার দুনিয়া ও আখিরাত উভয়ই বরবাদ হয়ে গেছে।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن ، مشکوۃ المصابیح (2347)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده حسن، ومتنه غريب، تفرد به عكرمة بن عمار، وهو -وإن كان من رجال مسلم- فيه كلام ينزله عن رتبة الصحيح، وقد روى أحاديث غرائب لم يَشرَكه فيها أحدٌ. وأخرجه أحمد في "مسنده" (٨٢٩٢) و (٨٧٤٩)، وابن أبي الدنيا في "حسن الظن بالله" (٤٥)، وابن حبان في "صحيحه" (٥٧١٢)، والبيهقي في "الشعب" (٦٦٨٩)، والمزي في "تهذيب الكمال" ١٣/ ٣٢٦ من طرق عن عكرمة بن عمار، بهذا الإسناد. وقول أبي هريرة في آخر الحديث: والذي نفسي بيده لتكلَّم بكلمة أوبقت دنياه وآخرته. جاء في رواية المزي منصوصاً عليه بأنه مرفرع. وفي السند عنده أبو جعفر موسى بن مسعود وفيه لين. والصواب أنه من قول أبي هريرة. وله شاهد من حديث أبي قتادة الأنصارى، أخرجه ابن أبو الدنيا في "حسن الظن" (٤٤)، والطبراني في "الشاميين" (٢٨١)، وأبو نعيم في "الحلية" ٨/ ٢٧٥، بإسناده ضعيف لجهالة الرجل من آل جبير بن مطعم راويه عن أبي قتادة. وفي الباب عن جندب بن عبد الله: أن رسول الله ﷺ حدَّث "أن رجلاً قال: والله لا يغفرُ الله لفلان. وإن الله تعالى قال: من ذا الذي يتألى عليَّ أن لا أغفر لفلانٍ، فإني قد غفرت لفلانٍ وأحبطتُ عمَلك". أو كما قال. أخرجه مسلم (٢٦٢١)، وهو عند ابن حبان في "صحيحه" (٥٧١١). وقوله: "مُتواخيين"، قال صاحب "عون المعبود"، أي: متقابلين في القصد والسعي، فهذا كان قاصداً وساعياً في الخير، وهذا كان قاصداً وساعياً في الشر. وقوله: "أقصر": من الاقصار، وهو الكف عن الشيء مع القدرة عليه. وقول أبي هريرة: "أوبقت ديناه وآخرته"، وأوبقت: أهلكت، وأراد أبو هريرة بالكلمة قوله: والله لا يغفر الله لك.