সুনান ইবনু মাজাহ
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ، عَنْ جَابِرٍ الْجُعْفِيِّ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " لاَ ضَرَرَ وَلاَ ضِرَارَ " .
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু 'আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ "ক্ষতি করাও যাবে না, ক্ষতি সহাও যাবে না। "[২৩৪১]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح لغيره
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف جدًا، جابر الجعفي: ضعیف رافضي ، وانظر الحدیث السابق (2340)، (انوار الصحیفہ ص 463)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * صحيح لغيره، وهذا إسناد ضعيف من أجل جابر -وهو ابن يزيد- الجعفي، وقد توبع. محمَّد بن يحيى: هو الذهلي، ومعمر: هو ابن راشد. وأخرجه أحمد (٢٨٦٥)، والطبراني (١١٨٠٦)، والبيهقي ٦/ ٦٩ من طريق معمر، بهذا الإسناد. وأخرجه ابن أبي شيبة ٧/ ٢٥٦ من طريق سماك، والطبراني (١١٥٧٦)، والدارقطني (٤٥٤٠)، والخطب في "موضح أوهام الجمع والتفريق" ٢/ ٩٦ من طريق داود بن الحصين، كلاهما عن عكرمة، به. وسماك وداود ضعيفان في عكرمة. والحديث صحيح بشواهده، وقد ذكرناها في تخريج الحديث السالف قبله.
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ، أَنْبَأَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانَ، عَنْ لُؤْلُؤَةَ، عَنْ أَبِي صِرْمَةَ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ " مَنْ ضَارَّ أَضَرَّ اللَّهُ بِهِ وَمَنْ شَاقَّ شَقَّ اللَّهُ عَلَيْهِ " .
আবূ সিরমাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু 'আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, "যে ব্যক্তি অন্যের ক্ষতি করবে, আল্লাহ তার ক্ষতি করবেন এবং যে ব্যক্তি অন্যকে কষ্ট দিবে, আল্লাহ তাকে কষ্ট দিবেন। "[২৩৪২]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، سنن أبي داود (3635) ترمذي (1940)، (انوار الصحیفہ ص 463)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث حسن، وهذا إسناد رجاله ثقات غير لؤلؤة -وهي مولاة الأنصار- فلم يرو عنها غير محمَّد بن يحيى بن حبان، وهو تابعي ثقة فقيه. وأخرجه أبو داود (٣٦٣٥)، والترمذي (٢٠٥٤) عن قتيبة بن سعيد، عن الليث، بهذا الإسناد. وقال الترمذي: حسن غريب. وهو في "مسند أحمد" (١٥٧٥٥). قوله: "ضار" أي: قصد إيقاع الضررِ بأحد بلا حَق، و"شاق" أي: قصد إلحاق المشقة بأحد. قاله السندي.
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ، وَعَمَّارُ بْنُ خَالِدٍ الْوَاسِطِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ عَيَّاشٍ، عَنْ دَهْثَمِ بْنِ قُرَّانٍ، عَنْ نِمْرَانَ بْنِ جَارِيَةَ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ قَوْمًا، اخْتَصَمُوا إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فِي خُصٍّ كَانَ بَيْنَهُمْ فَبَعَثَ حُذَيْفَةَ يَقْضِي بَيْنَهُمْ فَقَضَى لِلَّذِينَ يَلِيهِمُ الْقِمْطُ فَلَمَّا رَجَعَ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَخْبَرَهُ فَقَالَ " أَصَبْتَ وَأَحْسَنْتَ " .
জারিয়াহ বিন যুফর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, কতক লোক একটি কুঁড়ে ঘরের মালিকানা নিয়ে নবী (সাল্লাল্লাহু 'আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর নিকট নালিশ দায়ের করলো। তিনি হুযায়ফাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -কে তাদের মধ্যে মীমাংসা করে দিতে পাঠান। যাদের রশি দিয়ে সে ঘর বাঁধা ছিল তিনি তাদের পক্ষে রায় দেন। অতঃপর তিনি নবী (সাল্লাল্লাহু 'আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর নিকট ফিরে এসে তাঁকে তার মীমাংসার কথা জানান। তিনি বলেনঃ "তুমি যথার্থ ফয়সালা করেছো এবং ভালো করেছো। "[২৩৪৩]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف جدا
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف جدًا، دہثم: ضعیف جدًا (الإصابۃ 218/1 ت 1048) وھو متروک، (تقریب: 1831) ، ونمران مجہول (تقریب: 7187) ، (انوار الصحیفہ ص 463)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف جدًا، دَهْثَم بن قُران: متروك، ونمران بن جارية: مجهول، ثم إن دَهثمًا اضطرب في إسناده أيضًا. فأخرجه البخاري في "التاريخ الكبير" ٢/ ٢٣٧، والبزار (٣٧٩١)، والطبراني (٢٠٨٧)، والدارقطني (٤٥٤٥) من طريق أبي بكر بن عياش، بهذا الإسناد. وقال البخاري: إسناده ليس بمشهور. وقال الدارقطني: لم يروه غير دهثم بن قرّان، وهو ضعيف، وقد اختلف في إسناده. وأخرجه ابن عدي في "الكامل" ٣/ ٩٧٥، ومن طريقه البيهقي ٦/ ٦٧، من طريق سلمة بن الحسن الكوفي، عن دهثم، به. وأخرجه البخاري في "التاريخ الكبير" ٢/ ٢٣٧، والطبراني (٢٠٨٨)، والدارقطني (٤٥٤٤)، والبيهقي ٦/ ٦٧ من طريق مروان بن معاوية، عن دهثم، عن عقيل بن دينار مولى جارية، عن جارية مرفوعًا. وأخرجه البيهقي ٦/ ٦٧ من طريق عبد الرحمن بن سليمان بن أبي الجون العنسي، عن دهثم، عن عبد الله بن أبي سعيد الأنصاري، عن حذيفة، مرفوعًا. قوله: "في خُصٍّ" الخص: هو البيت يُعمل من الخشب والقصب، قاله ابن الأثير في "النهاية" ٢/ ٣٧. وقوله: "القُمُط" هي جمع قِماط، وهي الشرط التي يُشَدّ بها الخص ويُوثَق، من ليف أو خُوص أو غيرهما. "النهاية" ٤/ ١٠٨.
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَكِيمٍ، حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ، حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدُبٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ " إِذَا بِيعَ الْبَيْعُ مِنْ رَجُلَيْنِ فَالْبَيْعُ لِلأَوَّلِ " . قَالَ أَبُو الْوَلِيدِ فِي هَذَا الْحَدِيثِ إِبْطَالُ الْخَلاَصِ .
সামুরাহ বিন জুনদুব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু 'আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন কোন জিনিস দু ব্যাক্তির কাছে বিক্রয় করা হলে তা প্রথম খরিদদার পাবে। রাবী আবুল ওয়ালীদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, এ হাদীসে অপরের থেকে ছাড়িয়ে এনে দেয়ার শর্ত বাতিল করা হয়েছে। [২৩৪৪]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. وهذا إسناد رجاله ثقات إلا أن فيه عنعنة الحسن البصري. أبو الوليد: هو هشام بن عبد الملك الطيالسي، وهمام: هو ابن يحيي العَوذي، وقتادة: هو ابن دعامة السدوسي. وقد سلف برقم (٢١٩٠)، وانظر تخريجه والكلام عليه هناك.
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ، وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الأَعْلَى، حَدَّثَنَا خَالِدٌ الْحَذَّاءُ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، عَنْ أَبِي الْمُهَلَّبِ، عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ، أَنَّ رَجُلاً، كَانَ لَهُ سِتَّةُ مَمْلُوكِينَ لَيْسَ لَهُ مَالٌ غَيْرُهُمْ فَأَعْتَقَهُمْ عِنْدَ مَوْتِهِ فَجَزَّأَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَأَعْتَقَ اثْنَيْنِ وَأَرَقَّ أَرْبَعَةً .
ইমরান বিন হুসায়ন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এক ব্যক্তির ছয়টি গোলাম ছিল, এদের ব্যতীত তার আর কোন মাল ছিলো না। সে তার মৃত্যুর পূর্বে তাদেরকে দাসত্বমুক্ত করে দেয়। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু 'আলাইহি ওয়া সাল্লাম) লটারীর মাধ্যমে এদের মধ্যে দু'জনকে দাসত্বমুক্ত করে দেন এবং চারজনকে গোলাম হিসেবে বহাল রাখেন। [২৩৪৫]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. عبد الأعلى: هو ابن عبد الأعلى السامي، وخالد الحذاء: هو ابن مهران، وأبو قِلابة: هو عبد الله بن زيد الجرمي. وأخرجه أبو داود (٣٩٥٩) من طريق عبد العزيز بن المختار، عن خالد الحذاء، بهذا الإسناد. وأخرجه أيضًا (٣٩٦٠) من طريق خالد بن عبد الله الطحان، عن خالد الحذاء، عن أبي قلابة، عن أبي زيد عمرو بن أخطب الأنصاري. وهو في "مسند أحمد" (٢٢٨٩١). والمحفوظ الأول. وأخرجه مسلم (١٦٦٨)، وأبو داود (٣٩٥٨)، والترمذي (١٤١٥)، والنسائي في "الكبرى" (٤٩٥٥) من طريق أيوب السختياني، عن أبي قلابة، عن أبي المهلب، به. وأخرجه مسلم (١٦٦٨)، وأبو داود (٣٩٦١) من طريق محمَّد بن سيرين، عن عمران بن حصين. وهو في "مسند أحمد" (١٩٨٢٦) و (١٩٩٣٢).
حَدَّثَنَا جَمِيلُ بْنُ الْحَسَنِ الْعَتَكِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الأَعْلَى، حَدَّثَنَا سَعِيدٌ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ خِلاَسٍ، عَنْ أَبِي رَافِعٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَجُلَيْنِ، تَدَارَءَا فِي بَيْعٍ لَيْسَ لِوَاحِدٍ مِنْهُمَا بَيِّنَةٌ فَأَمَرَهُمَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ يَسْتَهِمَا عَلَى الْيَمِينِ أَحَبَّا ذَلِكَ أَمْ كَرِهَا .
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, দু' ব্যক্তি একটি বিক্রীত পণ্য নিয়ে ঝগড়া করছিল। তাদের একজনের নিকটও কোন প্রমাণ ছিল না। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু 'আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাদেরকে নির্দেশ দেন যে, "লটারীতে তাদের দু'জনের মধ্যে যার নাম উঠবে সে শপথ করে পণ্য নিবে, তাতে তারা সন্তুষ্ট হতে পারুক বা না পারুক। "[২৩৪৬]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: ضعیف ، انظر الحدیث السابق (2329)، (انوار الصحیفہ ص 463)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. وقد سلف برقم (٢٣٢٩)، فانظر تخريجه هناك.
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَمَانٍ، عَنْ مَعْمَرٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ إِذَا سَافَرَ أَقْرَعَ بَيْنَ نِسَائِهِ .
আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু 'আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যখন সফরে যেতেন, তাঁর স্ত্রীদের মধ্যে লটারী করতেন। [২৩৪৭]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. يحيى بن يمان متابع، وباقي رجاله ثقات. وقد سلف برقم (١٩٧٠)، وانظر تخريجه هناك.
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، أَنْبَأَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَنْبَأَنَا الثَّوْرِيُّ، عَنْ صَالِحٍ الْهَمْدَانِيِّ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ عَبْدِ خَيْرٍ الْحَضْرَمِيِّ، عَنْ زَيْدِ بْنِ أَرْقَمَ، قَالَ أُتِيَ عَلِيُّ بْنُ أَبِي طَالِبٍ وَهُوَ بِالْيَمَنِ فِي ثَلاَثَةٍ قَدْ وَقَعُوا عَلَى امْرَأَةٍ فِي طُهْرٍ وَاحِدٍ فَسَأَلَ اثْنَيْنِ فَقَالَ أَتُقِرَّانِ لِهَذَا بِالْوَلَدِ فَقَالاَ لاَ . ثُمَّ سَأَلَ اثْنَيْنِ فَقَالَ أَتُقِرَّانِ لِهَذَا بِالْوَلَدِ فَقَالاَ لاَ . فَجَعَلَ كُلَّمَا سَأَلَ اثْنَيْنِ أَتُقِرَّانِ لِهَذَا بِالْوَلَدِ قَالاَ لاَ . فَأَقْرَعَ بَيْنَهُمْ وَأَلْحَقَ الْوَلَدَ بِالَّذِي أَصَابَتْهُ الْقُرْعَةُ وَجَعَلَ عَلَيْهِ ثُلُثَىِ الدِّيَةِ فَذُكِرَ ذَلِكَ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَضَحِكَ حَتَّى بَدَتْ نَوَاجِذُهُ .
যায়দ বিন আরকাম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আলী বিন আবূ তালিব ইয়ামান থাকাকালে তার সামনে মীমাংসার জন্য এই মর্মে একটি বিষয় উত্থাপিত হয় যে, তিন ব্যাক্তি একই তুহরে এক নারীর সাথে সংগম করে (ফলে তার একটি সন্তান হয়)। আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) দু’জনকে জিজ্ঞেস করেন (তৃতীয় ব্যাক্তিকে দেখিয়ে) : তোমরা কি সন্তানটি এই ব্যাক্তির বলে স্বীকার করো? তারা বললো, না। তিনি আবার দুজনকে জিজ্ঞেস করেন, তোমরা কি সন্তানটি এই ব্যাক্তির বলে স্বীকার করো? তারা বলল, না। তিনি যখনই দু'জনকে জিজ্ঞেস করলেন, তোমরা কি সন্তানটি তার বলে স্বীকার করো, তখনই তারা বলে, না। অতঃপর আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাদের মধ্যে লটারির ব্যবস্থা করেন এবং লটারিতে যার নাম উঠে তিনি তাকে সন্তানটি দিলেন এবং তার উপর দু’-তৃতীয়াংশ দইয়াত ধার্য করেন। এ ঘটনা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু 'আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর কাছে বলা হলে তিনি এমনভাবে হেসে দিলেন, যে তাঁর সামনের পাটির দাঁত প্রকাশ পেলো। [২৩৪৮]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * رجاله ثقات، إلا أن فيه اضطرابًا. عبد الرزاق: هو ابن همام الصنعاني، والثوري: هو سفيان بن سعيد، وصالح الهمداني: هو صالح بن صالح بن حي، والشعبي: هو عامر بن شراحيل، وعبد خير الحضرمي: هو ابن يزيد. أما اضطرابه فقد رواه إسحاق بن منصور هنا، وخشيش بن أصرم عند أبي داود (٢٢٧٠)، والنسائي ٦/ ١٨٢، وأحمد بن أزهر عند البيهقي ١٥/ ٢٦٦، وإسحاق بن إبراهيم الدبري عند الطبراني في "الكبير" (٤٩٨٧) كلهم عن عبد الرزاق، عن الثوري، عن صالح الهمداني، عن الشعبي، عن عبد خير الحضرمي، عن زيد بن أرقم. ورواه أحمد (١٩٣٢٩) عن عبد الرزاق، عن الثوري، عن أجلح بن عبد الله، عن الشعبي، عن عبد خير، عن زيد. ورواه ابن عيينة عند أحمد (١٩٣٤٢)، وهشيم عنده أيضًا (١٩٣٤٤)، وعلي بن مسهر عند النسائي ٦/ ١٨٢ - ١٨٣، ويحيى القطان عند أبي داود (٢٢٦٩) والنسائي ٦/ ١٨٣، أربعتهم عن أجلح، عن الشعبي، عن عبد الله بن الخليل الحضرمي، عن زيد. ورواه خالد بن عبد الله الواسطي عند النسائي ٦/ ١٨٣ عن الشعبي، عن رجل من حضرموت، عن زيد. ورواه شعبة عند أبي داود (٢٢٧١) والنسائي ٦/ ١٨٤ عن سلمة بن كهيل، عن الشعبي، عن أبي الخليل أو ابن أبي الخليل -وقيل غير ذلك- عن علي بن أبي طالب موقوفًا. وفيه اختلافات ووجوه أخرى ذكرناها في "المسند" (١٩٣٢٩). قال النسائي في "الكبرى" بإثر الحديث (٥٦٥٤): هذه الأحاديث كلها مضطربة الأسانيد، ثم قال: وسلمة بن كهيل أثبتهم، وحديثه أولى بالصواب، والله أعلم. وقال العقيلي: الحديث مضطرب الإسناد، متقارب في الضعف. وقال أبو حاتم في "الجرح والتعديل" ١/ ٤٠٢: قد اختلفوا في هذا الحديث فاضطربوا، والصحيح حديث سلمة بن كهيل. قلنا: يعني أصح ما روي في هذا الباب، كما قال البيهقي.
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَهِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ، قَالُوا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ دَخَلَ عَلَىَّ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ذَاتَ يَوْمٍ مَسْرُورًا وَهُوَ يَقُولُ " يَا عَائِشَةُ أَلَمْ تَرَىْ أَنَّ مُجَزِّزًا الْمُدْلِجِيَّ دَخَلَ عَلَىَّ فَرَأَى أُسَامَةَ وَزَيْدًا عَلَيْهِمَا قَطِيفَةٌ قَدْ غَطَّيَا رُءُوسَهُمَا وَقَدْ بَدَتْ أَقْدَامُهُمَا فَقَالَ " إِنَّ هَذِهِ الأَقْدَامَ بَعْضُهَا مِنْ بَعْضٍ " .
আ'য়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, একদিন রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) প্রফুল্ল মনে ঘরে প্রবেশ করে বলতে লাগলেন, হে আ'য়িশাহ! তুমি কি দেখনি, যে মুজাযযায আল-মুদলিজী আমার ঘরে প্রবেশ করে উসামা ও যায়েদকে একটি চাদর মুড়ি দিয়ে তাদের মাথা ঢাকা ও পা বের করা অবস্থায় ঘুমন্ত দেখতে পেল। সে বললো, এই পা গুলোর কতক অপর কতক থেকে। [২৩৪৯]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. الزهري: هو محمَّد بن مسلم، وعروة: هو ابن الزبير. وأخرجه البخاري (٣٧٣١) و (٦٧٧٠) و (٦٧٧١)، ومسلم (١٤٥٩)، وأبو داود (٢٢٦٧)، والترمذي (٢٢٦٢) و (٢٢٦٣)، والنسائي ٦/ ١٨٤ من طرق عن الزهري، بهذا الإسناد. قوله: "مسرورًا" أي: بذلك القول، لما قيل: إن الناس كانوا يشكون في نسب أسامة بن زيد، ففرح بذلك، إما لأن قول القائف يثبت النسب شرعًا، أو لأنه حجة على الشاكين لاعتقادهم صحةَ ذلك.
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ، حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ، حَدَّثَنَا سِمَاكُ بْنُ حَرْبٍ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ قُرَيْشًا، أَتَوُا امْرَأَةً كَاهِنَةً فَقَالُوا لَهَا أَخْبِرِينَا أَشْبَهَنَا أَثَرًا بِصَاحِبِ الْمَقَامِ . فَقَالَتْ إِنْ أَنْتُمْ جَرَرْتُمْ كِسَاءً عَلَى هَذِهِ السِّهْلَةِ ثُمَّ مَشَيْتُمْ عَلَيْهَا أَنْبَأْتُكُمْ . قَالَ فَجَرُّوا كِسَاءً ثُمَّ مَشَى النَّاسُ عَلَيْهَا فَأَبْصَرَتْ أَثَرَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم . فَقَالَتْ هَذَا أَقْرَبُكُمْ إِلَيْهِ شَبَهًا . ثُمَّ مَكَثُوا بَعْدَ ذَلِكَ عِشْرِينَ سَنَةً أَوْ مَا شَاءَ اللَّهُ ثُمَّ بَعَثَ اللَّهُ مُحَمَّدًا صلى الله عليه وسلم .
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, কুরাইশগণ এক জ্যোতিষী নারীর কাছে গিয়ে তাকে বললো, আমাদের মধ্যে মাকামে ইব্রাহীমের মালিকের (ইব্রাহীম আঃ) সাথে কার অধিক সাদৃশ্য তা বলে দিন। সে বললো, তোমরা যদি এই নরম মাটির উপর দিয়ে একটি চাদর টেনে দেবার পর উক্ত মাটির উপর দিয়ে (নগ্নপদে) হেঁটে যাও তবে আমি তোমাদের তা বলতে পারব। ইবনু আব্বাস (রাঃ বলেন, অতঃপর তারা একটি চাদর টেনে নেয়ার পর ঐ মাটির উপর দিয়ে হেঁটে গেল। অতঃপর সেই নারী রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর পদ চিহ্ন দেখিয়ে বলল, তোমাদের মধ্যে ইনিই তাঁর (ইব্রাহিমের) সাথে অধিক সাদৃশ্যপুর্ণ। এই ঘটনার পর তারা আল্লাহর মর্জি বিশ বছর বা ততোধিক অপেক্ষা করল। শেষে আল্লাহ তায়ালা মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে নবুয়াত দান করেন। [২৩৫০]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * منكر ضعيف
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، سلسلۃ سماک عن عکرمۃ: ضعیفۃ ، (انوار الصحیفہ ص 463)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف، فإن رواية سماك عن عكرمة فيها اضطراب، ومع ذلك قال البوصيري في "مصباح الزجاجة" ورقة ١٤٩: هذا إسناد صحيح رجاله ثقات! وأخرجه أحمد (٣٠٧٢)، وأبو الشيخ في "دلائل النبوة" كما في "دلائل النبوة" لإسماعيل بن محمَّد الأصبهاني (٦٠) من طريق إسرائيل، بهذا الإسناد. وصاحب المقام: هو إبراهيم ﵇، ويشهد لتشبيه النبي ﷺ بإبراهيم ﵇ ما أخرجه أحمد (٢٥٠١)، والبخاري (٥٩١٣)، ومسلم (١٦٦) من حديث ابن عباس، أن رسول الله ﷺ قال: "أما إبراهيم فانظروا إلى صاحبكم" قلنا: يعني بذلك نفسَه ﷺ. وقولها: السِّهلة، بكسر السين، تراب كالرمل يجيء به الماء، ويقال لرمل البحر: السهلة. قاله في "اللسان".
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ زِيَادِ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ هِلاَلِ بْنِ أَبِي مَيْمُونَةَ، عَنْ أَبِي مَيْمُونَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم خَيَّرَ غُلاَمًا بَيْنَ أَبِيهِ وَأُمِّهِ وَقَالَ " يَا غُلاَمُ هَذِهِ أُمُّكَ وَهَذَا أَبُوكَ " .
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) একটি শিশুকে তার পিতা ও মাতার মধ্যে (যাকে ইচ্ছা গ্রহণ করার) এখতিয়ার দিয়ে বললেনঃ হে বৎস! এই তোমার মা এবং এই তোমার বাপ। [২৩৫১]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. هشام بن عمار متابع، وباقي رجاله ثقات. وأخرجه أبو داود (٢٢٧٧)، والترمذي (١٤٠٧)، والنسائي ٦/ ١٨٥ من طريق زياد بن سعد، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٧٣٥٢).
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ ابْنُ عُلَيَّةَ، عَنْ عُثْمَانَ الْبَتِّيِّ، عَنْ عَبْدِ الْحَمِيدِ بْنِ سَلَمَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، أَنَّ أَبَوَيْهِ، اخْتَصَمَا إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَحَدُهُمَا كَافِرٌ وَالآخَرُ مُسْلِمٌ فَخَيَّرَهُ فَتَوَجَّهَ إِلَى الْكَافِرِ فَقَالَ " اللَّهُمَّ اهْدِهِ " . فَتَوَجَّهَ إِلَى الْمُسْلِمِ فَقَضَى لَهُ بِهِ .
ইসমু মুবহাম বা নাম অজ্ঞাত হতে বর্ণিত, তার পিতা-মাতা নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এ সামনে (সন্তানের তত্ত্বাবধানের ব্যাপারে) বিবাদ পেশ করে। তাদের একজন ছিল কাফের, অপরজন মুসলমান। তিনি সন্তানকে এখতিয়ার দিলে সে কাফেরের প্রতি আকৃষ্ট হয়। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ হে আল্লাহ! তাকে হেদায়াত দান করুন। অতঃপর সে মুসলমানের প্রতি আকৃষ্ট হয়। এতএব তিনি তাকে মুসলমানের সাথে থাকার ফয়সালা দেন। [২৩৫২]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. وقد وهم عثمان البتي -وهو ابن مسلم- فقال فيه: "عن عبد الحميد بن سلمة، عن أبيه، عن جده" وهذه سلسلة لا تعرف إلا من طريقه، وخالفه في ذلك جماعة فقالوا: "عن عبد الحميد بن جعفر، عن أبيه، عن جده" وفي رواية الجماعة أنه هو الذي أسلم ولم تُسلم امرأته. ويؤيد القول بوهم عثمان ما أخرجه الطحاوي في "شرح مشكل الآثار" ٨/ ١٠٥ عن أبي عاصم النبيل، قال: سمعت عبد الحميد بن جعفر يقول: أنا حدثتُ البَتِّيَّ بحديث التخيير بالأهواز. وهو في "مصنف ابن أبي شيبة" ١٠/ ١٦٢ و١١/ ٣٧٧. وأخرجه النسائي ٦/ ١٨٥ من طريق عثمان البتي، بهذا الإسناد. وأخرجه أبو داود (٢٢٤٤) من طريق عيسى بن يونس، والنسائي في "الكبرى" (٦٣٥٢) من طريق معافى بن عمران، كلاهما عن عبد الحميد بن جعفر، عن أبيه، عن جده رافع بن سنان. قلنا: عبد الحميد بن جعفر وأبوه ثقتان، لكن قيل: إن جعفر بن عبد الله بن الحكم بن رافع بن سنان لم يسمع من جد أبيه رافع بن سنان، لكن جعفرًا ثقة، وما رواه كان قد حصل في أهل بيته، فهو أدرى به. والله أعلم.
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ مَخْلَدٍ، حَدَّثَنَا كَثِيرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ عَوْفٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ " الصُّلْحُ جَائِزٌ بَيْنَ الْمُسْلِمِينَ إِلاَّ صُلْحًا حَرَّمَ حَلاَلاً أَوْ أَحَلَّ حَرَامًا " .
আমর বিন আওফ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে বলতে শুনেছি, মুসলমানের মধ্যে সন্ধি ও সমঝোতা স্থাপন করা জায়েজ, তবে হালালকে হারামকারী এবং হারামকে হালালকারী সন্ধি ব্যতীত। [২৩৫৩]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حسن لغيره، وهذا إسناد ضعيف لضعف كثير بن عبد الله المزني، فالأكثرون على تضعيفه، قال الحافظ في "التقريب": ضعيف أفرط من نسبه إلى الكذب، وقد حسن الرأي فيه البخاريُّ وتبعه الترمذيُّ، فقد سأل الترمذيُّ البخاريَّ في "علله الكبير" ١/ ٢٨٨ عن حديثه في التكبير في صلاة العيدين فقال: ليس شيء في الباب أصح من هذا وبه أقولُ، وسأله أيضًا عن حديث الساعة التي تُرجى يوم الجمعة فقال: حديث حسن إلا أن أحمد بن حنبل كان يحمل على كثير يضعفه، قال: وقد روى يحيى بن سعيد عن كثير. وأخرجه الترمذيُّ (١٤٠٢) من طريق كثير بن عبد الله المزني، بهذا الإسناد. وقال: هذا حديث حسن صحيح. وله شاهد بسند حسن من حديث أبي هريرة عند أحمد (٨٧٨٤)، وأبي داود (٣٥٩٤)، وصححه ابن حبان (٥٠٩١).
حَدَّثَنَا أَزْهَرُ بْنُ مَرْوَانَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الأَعْلَى، حَدَّثَنَا سَعِيدٌ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّ رَجُلاً، كَانَ فِي عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي عُقْدَتِهِ ضَعْفٌ وَكَانَ يُبَايِعُ وَأَنَّ أَهْلَهُ أَتَوُا النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ احْجُرْ عَلَيْهِ . فَدَعَاهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَنَهَاهُ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي لاَ أَصْبِرُ عَنِ الْبَيْعِ . فَقَالَ " إِذَا بَايَعْتَ فَقُلْ هَا وَلاَ خِلاَبَةَ " .
আনাস বিন মালিক (রাঃ হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর যুগে এক ব্যাক্তি ক্রয় বিক্রয়ের চুক্তি করতে গিয়ে (বুদ্ধির দুর্বলতার কারণে) ঠকে যেত। তার পরিবারের লোকজন নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট উপস্থিত হয়ে বলল, ইয়া রাসূলুল্লাহ! তার উপর প্রতিবন্ধকতা আরোপ করুন। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে ডেকে নিয়ে ক্রয়-বিক্রয়ে লিপ্ত হতে নিষেধ করলেন। সে বলল, ইয়া রাসূলুল্লাহ! আমি ক্রয় বিক্রয় ত্যাগ করে ধৈর্য্য ধারণ করতে পারব না। তিনি বললেনঃ তুমি ক্রয়-বিক্রয় করাকালে বলো, নগদ আদান-প্রদান হবে এবং যেন প্রতারণা করা না হয়। [২৩৫৪]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح.عبد الأعلى -وهو ابن عبد الأعلى السامي- سمع من سعيد -وهو ابن أبي عروبة- قبل الاختلاط. وأخرجه أبو داود (٣٥٠١)، والترمذي (١٢٩٤)، والنسائي ٧/ ٢٥٢ من طريق سعيد بن أبي عروبة، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٣٢٧٦)، و"صحيح ابن حبان" (٥٠٤٩) و (٥٠٥٠). وفي الباب عن ابن عمر عند البخاري (٢١١٧)، ومسلم (١٥٣٣). قوله: "في عُقدته" قال السندي: أي: في رأيه ونظره في مصالح نفسه. وقوله: "ها" قال ابن الأثير في "النهاية" ٥/ ٢٣٧: هو أن يقول كل واحد من البيِّعين: هاء، فيعطيه ما في يده، وقيل: معناه: هاكَ وهاتِ، أي: خذ وأعطِ. وقال الإمام الخطابي: أصحاب الحديث يروونه: "ها وها" ساكنة الألف، والصواب مدها وفتحها، لأن أصلها: هاك، أي: خذ، فحذفت الكاف، وعوضت منها المدة والهمزة، يقال للواحد: هاء، وللاثنين: هاؤما، وللجميع: هاؤم. وقوله: "لا خلابة" أي: لا خديعة.
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الأَعْلَى، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَاقَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانٍ، قَالَ هُوَ جَدِّي مُنْقِذُ بْنُ عَمْرٍو وَكَانَ رَجُلاً قَدْ أَصَابَتْهُ آمَّةٌ فِي رَأْسِهِ فَكَسَرَتْ لِسَانَهُ وَكَانَ لاَ يَدَعُ عَلَى ذَلِكَ التِّجَارَةَ وَكَانَ لاَ يَزَالُ يُغْبَنُ فَأَتَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَذَكَرَ ذَلِكَ لَهُ فَقَالَ لَهُ " إِذَا أَنْتَ بَايَعْتَ فَقُلْ لاَ خِلاَبَةَ . ثُمَّ أَنْتَ فِي كُلِّ سِلْعَةٍ ابْتَعْتَهَا بِالْخِيَارِ ثَلاَثَ لَيَالٍ فَإِنْ رَضِيتَ فَأَمْسِكْ وَإِنْ سَخِطْتَ فَارْدُدْهَا عَلَى صَاحِبِهَا " .
মুহাম্মাদ বিন ইয়াহইয়া বিন হাব্বান হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, মুনকিয বিন আমর হলেন আমার নানা। তার মাথায় একটি প্রচন্ড আঘাত লাগার ফলে তার জিহবা আড়ষ্ট হয়ে গেল। এতদসত্ত্বেও তিনি ব্যবসা-বাণিজ্য ত্যাগ করেননি। তিনি প্রায়ই ঠকে যেতেন। তিনি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট এসে বিষয়টি তাঁকে জানান। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে বলেনঃ তুমি যখন ক্রয়-বিক্রয় করবে তখন বল, যেন প্রতারণা করা না হয়। অতঃপর তুমি যে পণ্যই ক্রয় করবে, তিন দিনের এখতিয়ার পাবে। তুমি সন্তুষ্ট হতে পারলে পণ্য রেখে দিবে আর অসন্তুষ্ট হলে তা তার মালিককে ফেরত দিবে। [২৩৫৫]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. وقد اختُلف هل القصة لمنقذ بن عمرو كلما جاء في هذه الرواية وغيرها، أم هي لولده حَبّان، وسواء كانت لهذا أو ذاك فإن محمَّد بن يحيى لم يُدركهما، لكن جاء عند الحسن بن سفيان في "مسنده" كما في "الإصابة" لابن حجر ٢/ ١١، وعند ابن عبد البر في "التمهيد" ١٧/ ٨ أن محمَّد بن يحيى سمع القصة عن عمه واسع بن حَبّان، وعلى أي حال فالقصة يرويها محمَّد بن يحيى عن جده أو جدِّ أبيه، فهي معروفة عند آل منقذٍ، والرجل أعرف بأهل بيته، على أن محمَّد بن إسحاق قد سمع القصة نفسها من نافع يرويها عن ابن عمر كما سيأتي. وهو في "مصنف ابن أبي شيبة" ٢٢٨/ ١٤. وأخرجه البخاري في "التاريخ الأوسط" ١/ ٦٣، والدارقطني (٣٠١١/ ٢)، والبيهقي ٥/ ٢٧٣ - ٢٧٤ من طريق محمَّد بن إسحاق، حدثني محمَّد بن يحيى بن حَبّان. وأخرجه بنحوه الشافعي في "السُّنن المأثورة" (٢٦٦)، والحُميدي (٦٦٢)، وابن الجارود (٥٦٧)، والدارقطني (٣٠٠٨)، والحاكم ٢/ ٢٢، والبيهقي ٥/ ٢٧٣ - ٢٧٤، والخطيب في "الأسماء المبهحة" ص ١١٠ و١١١، وابن عبد البر في "التمهيد" ١٧/ ٧ - ٨ من طريق محمَّد بن إسحاق، عن نافع، عن ابن عمر. وعندهم جميعًا ذكر الخيار ثلاثًا، وقد صرح ابن إسحاق بسماعه من نافع عند البيهقي من رواية يونس بن بُكير عنه. ويشهد له ما أخرجه عبد الله بن وهب كما في "مسند عمر" لابن كثير ١/ ٣٤٥، والدارقطني (٣٠٠٧) من طريق عبد الله بن لهيعة، عن حبان بن واسع -في رواية ابن وهب قال: عن يزيد بن ركانة، وفي رواية الدارقطني: عن طلحة بن يزيد بن ركانة- أن عمر بن الخطاب خطب فقال: ما أجد لكم في بيوعكم في الرقيق شيئًا أفضل مما جعل رسول الله ﷺ لمنقذ بن عمرو، ثلاثة أيام فيما اشترى وباع. واللفظ لابن وهب. وإسناده يحتمل التحسين. ويشهد للخيار ثلاثًا حديثُ المُصراة عند مسلم (١٥٢٤) من حديث أبي هريرة، أن رسول الله ﷺ قال: "من ابتاع شاة مصراة فهو فيها بالخيار ثلاثة أيام، إن شاء أمسكها، وإن شاء ردها ورد معها صاعًا من تمر".
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا شَبَابَةُ، حَدَّثَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ بُكَيْرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الأَشَجِّ، عَنْ عِيَاضِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، قَالَ أُصِيبَ رَجُلٌ فِي عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي ثِمَارٍ ابْتَاعَهَا فَكَثُرَ دَيْنُهُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " تَصَدَّقُوا عَلَيْهِ " . فَتَصَدَّقَ النَّاسُ عَلَيْهِ فَلَمْ يَبْلُغْ ذَلِكَ وَفَاءَ دَيْنِهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " خُذُوا مَا وَجَدْتُمْ وَلَيْسَ لَكُمْ إِلاَّ ذَلِكَ " . يَعْنِي الْغُرَمَاءَ .
আবূ সাঈদ আল-খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর যুগে এক ব্যাক্তি ফলের বাগান ক্রয় করে লোকসানের শিকার হয় এবং মারাত্মকভাবে ঋণগ্রস্ত হয়ে পড়ে। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) লোকেদের বলেনঃ তোমরা তাকে দান-খয়রাত কর। এতএব লোকজন তাকে দান-খয়রাত করল, কিন্তু তাতেও তার ঋণ শোধ হল না। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) পাওনাদারদের বললেনঃ তোমরা যা পেয়েছ তা ই নিয়ে নাও, এর বেশি আর পাবেনা। [২৩৫৬]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. شبابة: هو ابن سوار المدائني. وأخرجه مسلم (١٥٥٦)، وأبو داود (٣٤٦٩)، والترمذي (٦٦١)، والنسائي ٧/ ٢٦٥ و ٣١٢ من طريق بكير بن عبد الله، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١١٣١٧)، و"صحيح ابن حبان" (٥٠٣٣).
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُسْلِمِ بْنِ هُرْمُزٍ، عَنْ سَلَمَةَ الْمَكِّيِّ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم خَلَعَ مُعَاذَ بْنَ جَبَلٍ مِنْ غُرَمَائِهِ ثُمَّ اسْتَعْمَلَهُ عَلَى الْيَمَنِ فَقَالَ مُعَاذٌ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم اسْتَخْلَصَنِي بِمَالِي ثُمَّ اسْتَعْمَلَنِي .
জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মুআয বিন জাবাল (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) কে তার পাওনাদারদের থেকে নিষ্কৃতি দেন, তারপর তাকে ইয়ামানের শাসক নিয়োগ করেন। মুআয (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমার মাল দ্বারা আমাকে ঋণমুক্ত করেন, অতঃপর আমাকে শাসক নিয়োগ করেন। [২৩৫৭]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، عبد اللّٰہ بن مسلم بن ہرمز: ضعیف ، وسلمۃ المکي: مجہول (التحریر: 2518 م) ، وقال البوصیري: ’’ لایعرف حالہ ‘‘ والسند ضعفہ البوصیري ، (انوار الصحیفہ ص 464)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حسن لغيره، وهذا إسناد ضعيف، عبد الله بن مسلم بن هرمز ضعيف، وشيخه سلمة المكي مجهول. أبو عاصم: هو الضحاك بن مخلد النبيل. وأخرجه مطولًا ابن سعد في "الطبقات" ٣/ ٥٨٧، والحاكم ٣/ ٢٧٤، والبيهقي ٦/ ٥٠ من طريق معاذ بن رفاعة، عن جابر. وفي إسناده محمَّد بن عمر الواقدي، وهو متروك. وفي الباب عن كعب بن مالك عند عبد الرزاق (١٥١٧٧)، والطبراني في "الأوسط" (٣٢٧٤)، والحاكم ٣/ ٢٧٣، والبيهقي ٦/ ٤٨ و٥٠. وصححه الحاكم ولم يتعقبه الذهبي. وقد روي موصولًا ومرسلًا.
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ، أَنْبَأَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ، جَمِيعًا عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حَزْمٍ، عَنْ عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ، عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْحَارِثِ بْنِ هِشَامٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " مَنْ وَجَدَ مَتَاعَهُ بِعَيْنِهِ عِنْدَ رَجُلٍ قَدْ أَفْلَسَ فَهُوَ أَحَقُّ بِهِ مِنْ غَيْرِهِ " .
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, কোন ব্যক্তি দেউলিয়ার দখলে অবিকল তার মাল পেয়ে গেলে অন্যের তুলনায় সে-ই তার অগ্রগণ্য হকদার। [২৩৫৮]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. يحيى بن سعيد: هو الأنصاري. وأخرجه البخاري (٢٤٠٢)، ومسلم (١٥٥٩)، وأبو داود (٣٥١٩)، والترمذي (١٣٠٨)، والنسائي ٧/ ٣١١ من طريق يحيى بن سعيد، بهذا الإسناد. وفي "مسند أحمد" (٧١٢٤)، و "صحيح ابن حبان" (٥٠٣٦) و (٥٠٣٧). وأخرجه مسلم (١٥٥٩) من طريق بشير بن نَهيك، و (١٥٥٩) من طريق عِراك ابن مالك، كلاهما عن أبى هريرة. قال الخطابي في "معالم السُّنن" ٣/ ١٥٧ وهذه سنة النبي ﷺ قد قال بها كثير من أهل العلم، وقد قضى بها عثمان ؓ، ورُوي ذلك عن علي بن أبي طالب ؓ، ولا يُعلم لهما مخالف في الصحابة، وهو قول عروة بن الزبير، وبه قال مالك والأوزاعي والشافعي وأحمد بن حنبل وإسحاق. وقال إبراهيم النخعي وأبو حنيفة وابن شبرمة: هو أسوة الغرماء.
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ عَيَّاشٍ، عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْحَارِثِ بْنِ هِشَامٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ " أَيُّمَا رَجُلٍ بَاعَ سِلْعَةً فَأَدْرَكَ سِلْعَتَهُ بِعَيْنِهَا عِنْدَ رَجُلٍ وَقَدْ أَفْلَسَ وَلَمْ يَكُنْ قَبَضَ مِنْ ثَمَنِهَا شَيْئًا فَهِيَ لَهُ . وَإِنْ كَانَ قَبَضَ مِنْ ثَمَنِهَا شَيْئًا فَهُوَ أُسْوَةُ الْغُرَمَاءِ " .
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ কোন ব্যক্তি অপর ব্যক্তির নিকট বাকিতে তার পণ্য বিক্রয় করার পর ক্রেতা দেউলিয়া হয়ে গেলে এবং তার পণ্য অবিকল অবস্থায় তার নিকট বিদ্যমান থাকলে সে-ই তা ফেরত পাবে। আর তার পণ্যের কিছু মূল্য আদায় করে থাকলে সে অন্যান্য পাওনাদারের অন্তর্ভুক্ত হবে। [২৩৫৯]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * قد اختُلف في وصل هذا الحديث وإرساله عن الزهري، فرواه إسماعيل ابن عياش، عن موسى بن عُقبة ومحمد بن الوليد الزبيدي عن الزهري، عن أبي بكر ابن عبد الرحمن، عن أبي هريرة موصولًا. وخالفهما مالك ويونس بن يزيد الأيلي وصالح بن كيسان ومعمر بن راشد، فرووه عن الزهري، عن أبي بكر بن عبد الرحمن مرسلًا، ولا يُعرف أحدٌ رواه عن موسى بن عقبة ومحمد بن الوليد إلا إسماعيل بن عياش وهو دون الثقة، على أن موسى بن عقبة مدني وإسماعيل حمصي، ورواية إسماعيل عن غير أهل بلده فيها تخليط. قال الحافظ محمَّد بن يحيى الذهلي فيما نقله عنه ابن الجارود بإثر الحديث (٦٣٣): رواه مالك وصالح بن كيسان ويونس، عن الزهري، عن أبي بكر مُطلقٌ عن رسول الله ﷺ وهم أولى بالحديث -يعني من طريق الزهري- وقال الدارقطني بإثر الحديث (٢٩٠٣) إسماعيل بن عياش مضطرب الحديث، ولا يثبتُ هذا عن الزهري مسندًا، وإنما هو مرسلٌ، وقال البيهقي ٤٧/ ٦: لا يصح موصولًا عن الزهري، وذكره ابن القطان الفاسي في "بيان الوهم والإيهام" (١٦٧٤) فيما سكت عنه عبد الحق مُصححا له وليس بصحيح. وأخرجه ابن الجارود في "المنتقى" (٦٣١) و (٦٣٣)، والطحاوي في "شرح المشكل" (٤٦٥٧)، والدارقطني (٢٩٠٣) و (٤٥٤٩)، والبيهقي ٦/ ٤٧ - ٤٨ من طريق إسماعيل بن عياش، عن موسى بن عقبة، وأخرجه ابن الجارود (٦٣٢)، والطحاوي (٤٦٠٨)، والدارقطني (٢٩٠٤) و (٤٥٥٠)، والبيهقي ٦/ ٤٧ من طريق إسماعيل بن عياش، عن محمَّد بن الوليد الزبيدي الحمصي، كلاهما عن الزهري، به. وأخرجه مالك في "الموطأ" ٢/ ٦٧٨، ومن طريقه أبو داود (٣٥٢٠)، وأخرجه أبو داود كذلك (٣٥٢١) من طريق يونس بن يزيد الأيلي، كلاهما (مالك ويونس) عن الزهري، عن أبي بكر بن عبد الرحمن مرسلًا. قال ابن عبد البر في "التمهيد" ٨/ ٤٠٦: هكذا هو في جميع "الموطآت" التي رأينا، وكذلك رواه جميع الرواة عن مالك فيما علمنا مرسلًا، إلا عبد الرزاق، فقد رواه عن مالك، عن ابن شهاب، عن أبي بكر، عن أبي هريرة فأسنده، وقد اختُلف في ذلك عن عبد الرزاق فرواه عبد الله بن بركة ومحمد بن علي وإسحاق بن إبراهيم بن جوتى الصنعانيون، عن عبد الرزاق مسندًا، ورواه محمَّد بن يوسف الحُذاقي وإسحاق بن إبراهيم الدبري عن عبد الرزاق مرسلًا كما في "الموطأ" قال: وذكر الدارقطني أنه قد تابع عبدَ الرزاق على إسناده عن مالك أحمدُ بن موسى وأحمد بن أبي طيبة. وإنما هو في "الموطأ" مرسل. قال: ورواه صالح بن كيسان ويونس بن يزيد، ومعمر بن راشد عن الزهري، عن أبي بكر بن عبد الرحمن مرسلًا. قلنا: وكذلك رواه الشافعي، عن مالك مرسلًا كما في "السُّنن الكبرى" للبيهقي ٦/ ٤٦. وجاء في رواية مالك: "وإن مات الذي ابتاعه، فصاحب المتاع فيه أسوة الغرماء" بدل قوله: "وإن كان قَبَضَ من ثمنها شيئًا، فهو أسوة الغرماء" وجمع يونس في روايته اللفظين. وجزم أبو بكر بن العربي في "عارضة الأحوذي" ٦/ ١٩ بأن ما زِيد من الأسوة في الموت من قول الراوي. وهو في "مصنف عبد الرزاق" (١٥١٥٨) عن مالك، عن ابن شهاب، عن أبي بكر بن عبد الرحمن مرسلًا، وقد جزم الحافظ في "الفتح" ٥/ ٦٣ أنه وصله في "المصنف"! وأخرجه الطحاوي في "شرح المشكل" (٤٦٠٦) من طريق عبد الرحمن بن بشر ابن الحكم النيسابوري، عن عبد الرزاق، عن مالك، عن ابن شهاب، عن أبي بكر، عن أبي هريرة فوصله. ونقل عن ابن خزيمة قوله في عبد الرحمن بن بشر: وكان هذا من علماء نيسابور وثقاتهم. قلنا: وعلى أي حالٍ فرواة "الموطأ" رووه بالإرسال، ولا شك أن روايتهم أثبتُ، على أنه اختُلف على عبد الرزاق في وصله وإرساله! قال الخطابي: ذهب مالك إلى جملة ما في هذا الحديث، وقال: إن كان قبض شيئًا من ثمن السلعة فهو أسوة الغرماء. وقال الشافعي: لا فرق بين أن يكون قبض شيئا أو لم يقبضه في أنه إذا وجد عين ماله كان أحق به. "معالم السُّنن" ٣/ ١٥٩.
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ الْمُنْذِرِ الْحِزَامِيُّ، وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الدِّمَشْقِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي فُدَيْكٍ، عَنِ ابْنِ أَبِي ذِئْبٍ، عَنْ أَبِي الْمُعْتَمِرِ بْنِ عَمْرِو بْنِ رَافِعٍ، عَنِ ابْنِ خَلْدَةَ الزُّرَقِيِّ، وَكَانَ، قَاضِيًا بِالْمَدِينَةِ قَالَ جِئْنَا أَبَا هُرَيْرَةَ فِي صَاحِبٍ لَنَا قَدْ أَفْلَسَ فَقَالَ هَذَا الَّذِي قَضَى فِيهِ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم " أَيُّمَا رَجُلٍ مَاتَ أَوْ أَفْلَسَ فَصَاحِبُ الْمَتَاعِ أَحَقُّ بِمَتَاعِهِ إِذَا وَجَدَهُ بِعَيْنِهِ " .
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, ইবনু খালদাহ ছিলেন মদীনার বিচারপতি। তিনি বলেন, আমরা আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -এর কাছে আমাদের এক দেউলিয়া সঙ্গীর ব্যাপারে জানতে আসলাম। তিনি বলেন, এ ধরনের লোক সম্পর্কে নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এই মীমাংসা দিয়েছেন যে, কোন ব্যক্তি দেউলিয়া হলে অথবা মারা গেলে, ঋণদাতা তার মাল অবিকল তার নিকট বিদ্যমান পেলে সে-ই হবে তার অগ্রগণ্য প্রাপক। [২৩৬০]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف لجهالة أبي المعتمر بن عمرو بن نافع، فقد تفرد بالرواية عنه ابن أبي ذئب. ابن أبي فديك: هو محمَّد بن إسماعيل، وابن أبي ذئب: هو محمَّد بن عبد الرحمن، وابن خلدة: هو عمر. والحديث ضعفه الطحاوي في "شرح المشكل" (٤٦٠٩)، وابن العربي في "عارضة الأحوذي" ٦/ ١٩. وأخرجه أبو داود (٣٥٢٣) من طريق أبي داود الطيالسي، عن ابن أبي ذئب، بهذا الإسناد. قال أبو بكر بن العربي في "عارضة الأحوذي" ٦/ ١٩: اختلف العلماء في ذلك على أقوال أمهاتها ثلاثة: أحدها: أحق في الفلس والموت، قاله الشافعي. الثاني: أنه أسوة الغرماء، قاله أبو حنيفة. الثالث: الفرق بين الفلس والموت، قاله مالك.