হাদীস বিএন


সুনান ইবনু মাজাহ





সুনান ইবনু মাজাহ (2401)


حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ الْجَهْمِ الأَنْمَاطِيُّ، حَدَّثَنَا أَيُّوبُ بْنُ سُوَيْدٍ، عَنِ الْمُثَنَّى، عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ أُودِعَ وَدِيعَةً فَلاَ ضَمَانَ عَلَيْهِ ‏"‏ ‏.‏




আব্দুল্লাহ বিন আমর ইবনুল আস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ কেউ কারো কাছে ওয়াদিয়া রাখলে (তা ধ্বংস হলে) তার কোন ক্ষতিপূরণ নাই। [২৪০১]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، المثنی بن الصباح: ضعیف ، ولہ متابعات ضعیفۃ، (انوار الصحیفہ ص 465)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف، أيوب بن سويد والمثنى -وهو ابن الصباح- ضعيفان. وأخرجه الدارقطني (٢٩٦١/ ١)، ومن طريقه البيهقي ٦/ ٢٨٩ من طريق يزيد ابن عبد الملك، عن محمَّد بن عبد الرحمن الحجبي، والدارقطني (٢/ ٢٩٦١)، ومن طريقه البيهقي ٦/ ٩١ من طريق عمرو بن عبد الجبار، عن عبيدة بن حسان، كلاهما عن عمرو بن شعيب، بهذا الإسناد. وقد ضعف البيهقي الإسناد الأول بيزيد ابن عبد الملك، وضعف الدارقطني الإسناد الثاني بعمرو بن عبد الجبار وعَبيدة، وقال: وإنما يُروى عن شريح القاضي غير مرفوع. وصحح البيهقي وقفه. وأخرج البيهقي ٦/ ٢٨٩ عن عمر: أنه ضمن رجلًا وديعة سُرقت من بيت ماله. وإسناده صحيح، وقال البيهقي: يُحتمل أنه كان فرَّط فيها، فضمَّنه بالتفريط، والله أعلم.









সুনান ইবনু মাজাহ (2402)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ شَبِيبِ بْنِ غَرْقَدَةَ، عَنْ عُرْوَةَ الْبَارِقِيِّ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أَعْطَاهُ دِينَارًا يَشْتَرِي لَهُ شَاةً فَاشْتَرَى لَهُ شَاتَيْنِ فَبَاعَ إِحْدَاهُمَا بِدِينَارٍ فَأَتَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم بِدِينَارٍ وَشَاةٍ فَدَعَا لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِالْبَرَكَةِ ‏.‏ قَالَ فَكَانَ لَوِ اشْتَرَى التُّرَابَ لَرَبِحَ فِيهِ ‏.‏

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ سَعِيدٍ الدَّارِمِيُّ، حَدَّثَنَا حَبَّانُ بْنُ هِلاَلٍ، حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ زَيْدٍ، عَنِ الزُّبَيْرِ بْنِ الْخِرِّيتِ، عَنْ أَبِي لَبِيدٍ، لِمَازَةَ بْنِ زَبَّارٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ أَبِي الْجَعْدِ الْبَارِقِيِّ، قَالَ قَدِمَ جَلَبٌ فَأَعْطَانِي النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم دِينَارًا فَذَكَرَ نَحْوَهُ ‏.‏




উরওয়া আল-বারিকী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর জন্য একটি ছাগল কেনার উদ্দেশে তাকে একটি দীনার দেন। তিনি তাঁর জন্য দু'টি ছাগল কিনে এর একটি এক দীনারে বিক্রয় করে একটি দীনার ও একটি ছাগল নিয়ে নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর নিকট উপস্থিত হন। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার জন্য বরকতের দোয়া করেন। রাবী বলেন, এরপর তিনি মাটি কিনলে তাতেও লাভবান হতেন।
[উপরোক্ত হাদীসে মোট ২টি সানাদের ১টি বর্ণিত হয়েছে। অপর সানাদটি হলোঃ]
২/২৪০২ (১) . আহমাদ বিন সাঈদ আদ-দারিমী, হাব্বান বিন হিলাল, সাঈদ বিন যায়দ (তিনি সত্যবাদী তবে হাদীস বর্ণনায় সন্দেহ করেন) , যুবায়রর ইবনুল খিররীত, আবূ লাবীদ লিমাযাহ বিন যাব্বার (তিনি সত্যবাদী তবে নাসিবী) , উরওয়াহ বিন আবুল জাদ আল-বারিকী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, একটি বাণিজ্যিক কাফেলা পণ্যদ্রব্য নিয়ে আসলো। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে একটি দীনার দিলেন...... পূর্বোক্ত হাদীসের অনুরূপ। [২৪০২]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری، 2402ب:، إسنادہ حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. وهذا إسناد رجاله ثقات إلا أنه منقطع، فإن شبيب بن غرقدة لم يسمعه من عروة البارقي كما سيأتي في التخريج. وأخرجه البخاري (٣٦٤٢) عن علي بن المديني، وأبو داود (٣٣٨٤) عن مسدد، كلاهما عن شبيب قال: سمعت الحي يتحدثون عن عروة البارقي. وقال البخاري في روايته: قال سفيان: وكان الحسن بن عمارة جاءنا بهذا الحديث عنه قال: سمعه شبيب من عروة، فاتية، فقال ضبيب: إني لم أسمعه من عروة، قال: سمعتُ الحيَّ يُخبرونه عنه. قال الحافظ في "الفتح"٦/ ٦٣٥: وهو المعتمد، وهذا يقتضي أن يكون سمعه من جماعة أقلهم ثلاثة. وانظر ما بعده. * حديث صحيح. وهذا إسناد حسن من أجل سعيد بن زيد وأبي لبيد لُمَازة ابن زبَّار. وأخرجه أبو داود (٣٣٨٥)، والترمذي (١٣٠٣) و (١٣٠٤) من طريقين عن الزبير بن خريت، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٩٣٦٢). وانظر ما قبله









সুনান ইবনু মাজাহ (2403)


حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ الظُّلْمُ مَطْلُ الْغَنِيِّ وَإِذَا أُتْبِعَ أَحَدُكُمْ عَلَى مَلِيءٍ فَلْيَتْبَعْ ‏"‏ ‏.‏




আবূ হুরায়ররাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ধনী ব্যক্তির ঋণ পরিশোধে গড়িমসি করা অন্যায়। সচ্ছল ব্যক্তির নিকট তোমাদের কারো পাওনা থাকলে সে যেন তার পেছনে লেগে থাকে। (শেষোক্ত বাক্যের আরো একটি অর্থ হতে পারেঃ তোমাদের কারো ঋণ পরিশোধ করার জন্য ঋণগ্রস্ত ব্যক্তি কোন সক্ষম ব্যক্তির উপর দায়িত্ব ন্যস্ত করলে তা অনুমোদন করা উচিত) [২৪০৩]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. هشام بن عمار متابع، وباقي رجاله ثقات. أبو الزناد: هو عبد الله بن ذكوان، والأعرج: هو عبد الرحمن بن هرمز. وأخرجه النسائي ٧/ ٣١٦ من طريق سفيان بن عيينة، بهذا الإسناد. وأخرجه البخاري (٢٢٨٧)، ومسلم (١٥٦٤)، وأبو داود (٣٣٤٥)، والترمذي (١٣٥٦)، والنسائي ٧/ ٣١٧ من طريق مالك بن أنس، عن أبي الزناد، به. وهو في "مسند أحمد" (٧٣٣٦)، و"صحيح ابن حبان" (٥٠٥٣). وأخرجه البخاري (٢٤٠٠)، ومسلم (١٥٦٤) من طريق همام بن منبه، عن أبي هريرة. وهو في "مسند أحمد" (٧٥٤١).









সুনান ইবনু মাজাহ (2404)


حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ تَوْبَةَ، حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ يُونُسَ بْنِ عُبَيْدٍ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَطْلُ الْغَنِيِّ ظُلْمٌ وَإِذَا أُحِلْتَ عَلَى مَلِيءٍ فَاتْبَعْهُ ‏"‏ ‏.‏




ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ সচ্ছল ব্যক্তির ঋণ পরিশোধে গড়িমসি করা জুলুম। সচ্ছল ব্যক্তির নিকট তোমার পাওনা থাকলে তার পেছনে লেগে থাকো। [২৪০৪]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * صحيح لغيره، وهذا إسناد رجاله ثقات إلا أن بعض أهل العلم أعله بالانقطاع، منهم أحمد وأبو حاتم، وقالوا: لم يسمع يونس بن عبيد من نافع شيئًا، وروى الطحاوي في "شرح مشكل الآثار" ٧/ ١٧٩ عن إبراهيم بن أبي داود البُرُلُّسي أنه قال: قال لي يحيى بن معين في حديث يونس بن عبيد عن نافع عن ابن عمر رضىِ الله عنهما: "مطل الغني ظلم" قد سمعته عن هشيم، ولم يسمعه يونس من نافع. قلت ليحيى: لم يسمع يونس من نافع شيئًا؟ قال: بلى، ولكن هذا الحديث خاصة لم يسمعه يونس من نافع. هشيم: هو ابن بشير، وقد صرح بالسماع عند أحمد وغيره. وأخرجه أحمد (٥٣٩٥)، والبزار (١٢٩٩ - كشف الأستار)، وابن الجارود (٥٩٩)، والطحاوي في "شرح المشكل" (٢٧٥٤)، والبيهقي ٦/ ٧٠، والخطيب في "تاريخ بغداد" ١٢/ ٤٨ من طريق هثم بن بشير. بهذا الإسناد. وأخرجه الطحاوي (٢٧٥٥) من طريق هشيم أيضًا، أخبرنا يونس بن عبيد، أخبرنا نافع، عن ابن عمر مرفوعًا: "إذا أُحِلتَ عليَّ مليء فأتبعه" واعتمادًا عليَّ هذه الرواية قال الطحاوي: إن ابن معين أراد نفي سماع يونس من نافع القطعة الأولى من الحديث وهي: "مطل الغني ظلم"، أما الثانية فسمعها منه. والله أعلم. ويشهد للحديث بتمامه حديث أبي هريرة السالف قبله. وحديث عمرو بن الشريد، عن أبيه، وسيأتي عند المؤلف برقم (٢٤٢٧).









সুনান ইবনু মাজাহ (2405)


حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، وَالْحَسَنُ بْنُ عَرَفَةَ، قَالاَ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ عَيَّاشٍ، حَدَّثَنِي شُرَحْبِيلُ بْنُ مُسْلِمٍ الْخَوْلاَنِيُّ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا أُمَامَةَ الْبَاهِلِيَّ، يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ الزَّعِيمُ غَارِمٌ وَالدَّيْنُ مَقْضِيٌّ ‏"‏ ‏.‏




আবূ উমামাহ আল-বাহিলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -কে বলতে শুনেছিঃ যামিনদার দায়বদ্ধ এবং ঋণ অবশ্যই পরিশোধযোগ্য। [২৪০৫]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده حسن. إسماعيل بن عياش صدوق في روايته عن أهل بلده، وهذا منها. وأخرجه مطولًا أبو داود (٣٥٦٥)، والترمذي (١٣١١) و (٢٢٥٣) من طريق إسماعيل بن عياش، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٢٢٩٤). قوله: "الزعيم غارم" الزعيم: الكفيل، فكل مَن تكفَّل دينًا عن غيره، عليه الغُرمُ.









সুনান ইবনু মাজাহ (2406)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ الدَّرَاوَرْدِيُّ، عَنْ عَمْرِو بْنِ أَبِي عَمْرٍو، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ رَجُلاً، لَزِمَ غَرِيمًا لَهُ بِعَشَرَةِ دَنَانِيرَ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ مَا عِنْدِي شَىْءٌ أُعْطِيكَهُ فَقَالَ لاَ وَاللَّهِ لاَ أُفَارِقُكَ حَتَّى تَقْضِيَنِي أَوْ تَأْتِيَنِي بِحَمِيلٍ فَجَرَّهُ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ لَهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ كَمْ تَسْتَنْظِرُهُ ‏"‏ ‏.‏ فَقَالَ شَهْرًا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ فَأَنَا أَحْمِلُ لَهُ ‏"‏ ‏.‏ فَجَاءَهُ فِي الْوَقْتِ الَّذِي قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ لَهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ مِنْ أَيْنَ أَصَبْتَ هَذَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ مِنْ مَعْدِنٍ قَالَ ‏"‏ لاَ خَيْرَ فِيهَا ‏"‏ ‏.‏ وَقَضَاهَا عَنْهُ ‏.‏




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর যুগে এক ব্যক্তি তার দেনাদারের পেছনে লাগলো। সে তার নিকট দশ দীনার পাওনা ছিল। দেনাদার বললো, আমার নিকট তোমাকে দেয়ার মতো কোন জিনিস নাই। পাওনাদার বললো, না, আল্লাহর শপথ ! আমার দেনা পরিশোধ না করা পর্যন্ত অথবা একজন যামিনদার উপস্থিত না করা পর্যন্ত আমি তোমাকে ছাড়ছি না। সে তাকে টেনে-হেঁচড়ে নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর নিকট নিয়ে গেলো। তিনি পাওনাদারকে বলেনঃ তুমি তাকে কতো দিনের অবকাশ দিতে পারো? সে বললো, এক মাস। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ তাহলে আমিই তার যামিন। দেনাদার নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর বলে দেয়া সময়সীমার মধ্যে পাওনাসহ তাঁর নিকট উপস্থিত হলে তিনি তাকে বলেনঃ তুমি এগুলো কোথায় পেলে? সে বললো, খনিতে। তিনি বলেনঃ এতে কোন কল্যাণ নেই। অতঃপর তিনি নিজের পক্ষ থেকে ঋণদাতার পাওনা পরিশোধ করেন। [২৪০৬]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده حسن مِن أجل عمرو بن أبي عمرو. وأخرجه أبو داود (٣٣٢٨) من طريق عبد العزيز الدراوردي، بهذا الإسناد. قوله: "بحميل" أي: بكفيل. وقوله: "من أين أصبت هذا" رواية أبي داود: " … هذا الذهب" وهي أوضح من رواية المصنف. وقوله: "لا خير فيها" قال الخطابي في "معالم السُّنن" ٣/ ٥٤: يشبه أن يكون رَدُّهُ الذهبَ لِسبب علمه فيه خاصة لا من جهة أن الذهب المستخرج من المعدن لا يُباحُ تموُّلُه وتملكه، … ، ويحتمل أن يكونَ ذلك من أجل أن أصحاب المعادن يبيعون ترابها ممن يُعالجه، فيحصل ما فيه من ذهب أو فضة، وهو غرر لا يدرى هل يوجد فيه شيء منهما أم لا، … ، وفيه وجه آخر، وهو أنه ليس لها رواجٌ، وذلك أن الذي كان تحمَّله عنه دنانير مضروبة، والذي جاء به تبرٌ غير مضروب، وليس بحضرته مَن يضربه دنانير، … ، وقد يحتمل ذلك أيضًا وجهًا آخر، وهو أن يكونَ إنما كرهه لما يقع فيه من الشبهة ويدخله من الغرر عند استخراجهم إياه من المعدن، وذلك أنهم إنما استخرجوه بالعشر أو الخمس أو الثلث مما يُصيبونه، وهو غررٌ لا يدرى هل يصيب العامل فيه شيئًا أم لا.









সুনান ইবনু মাজাহ (2407)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا أَبُو عَامِرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَوْهَبٍ، قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ أَبِي قَتَادَةَ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أُتِيَ بِجِنَازَةٍ لِيُصَلِّيَ عَلَيْهَا فَقَالَ ‏"‏ صَلُّوا عَلَى صَاحِبِكُمْ فَإِنَّ عَلَيْهِ دَيْنًا ‏"‏ ‏.‏ فَقَالَ أَبُو قَتَادَةَ أَنَا أَتَكَفَّلُ بِهِ ‏.‏ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ بِالْوَفَاءِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ بِالْوَفَاءِ ‏.‏ وَكَانَ الَّذِي عَلَيْهِ ثَمَانِيَةَ عَشَرَ أَوْ تِسْعَةَ عَشَرَ دِرْهَمًا ‏.‏




আবূ কাতাদাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, জানাযার নামায পড়ার জন্য একটি লাশ নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট নিয়ে আসা হলো। তিনি বলেনঃ তোমরা তোমাদের সঙ্গীর জানাযার নামাজ পড়ো। কেননা সে ঋণগ্রস্ত। আবূ কাতাদাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, আমি তার ঋণের যামিন হচ্ছি। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ পরিশোধ করার জন্য তো? তিনি বলেন, পরিশোধ করার জন্য। তার ঋণের পরিমাণ ছিলো আঠার বা উনিশ দিরহাম। [২৪০৭]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. أبو عامر: هو عبد الملك بن عمرو العقدي، وشعبة: هو ابن الحجاج. وأخرجه الترمذيُّ (١٠٩٢)، والنسائي ٤/ ٦٥ و ٧/ ٣١٧ من طرق عن عبد الله ابن أبي قتادة، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٢٥٤٣)، و"صحيح ابن حبان" (٣٠٥٨ - ٣٠٦٠).









সুনান ইবনু মাজাহ (2408)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبِيدَةُ بْنُ حُمَيْدٍ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ زِيَادِ بْنِ عَمْرِو بْنِ هِنْدٍ، عَنِ ابْنِ حُذَيْفَةَ، - هُوَ عِمْرَانُ - عَنْ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ، مَيْمُونَةَ قَالَ كَانَتْ تَدَّانُ دَيْنًا فَقَالَ لَهَا بَعْضُ أَهْلِهَا لاَ تَفْعَلِي وَأَنْكَرَ ذَلِكَ عَلَيْهَا قَالَتْ بَلَى إِنِّي سَمِعْتُ نَبِيِّي وَخَلِيلِي صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ مَا مِنْ مُسْلِمٍ يَدَّانُ دَيْنًا يَعْلَمُ اللَّهُ مِنْهُ أَنَّهُ يُرِيدُ أَدَاءَهُ إِلاَّ أَدَّاهُ اللَّهُ عَنْهُ فِي الدُّنْيَا ‏"‏ ‏.‏




মায়মূনাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) (হুযায়ফাহ) হতে বর্ণিত, উম্মুল মুমিনীন মায়মুনা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) ধারকর্জ গ্রহণ করতেন। তার পরিবারের কেউ কেউ বললো, আপনি ধারকর্জ করবেন না এবং তার এ কাজকে তারা অপছন্দ করলো। তিনি বলেন, হাঁ আমি আমার নবী ও বন্ধু (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে বলতে শুনেছিঃ যে কোন মুসলমান ধারকর্জ গ্রহণ করে এবং আল্লাহ জানেন যে, তা পরিশোধ করার অভিপ্রায় তার রয়েছে, তাহলে দুনিয়াতেই আল্লাহ তার ঐ ধারকর্জ পরিশোধের ব্যবস্থা করে দেন। [২৪০৮]

তাহকিক আলবানীঃ (আরবি) শব্দ ব্যতিত সহীহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح دون قوله في الدنيا




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، نسائي (4690)، (انوار الصحیفہ ص 465)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * صحيح بشواهده دون قوله: "في الدنيا"، وهذا إسناد ضعيف لجهالة زياد ابن عمرو بن هند وجهالة عمران بن حذيفة. منصور: هو ابن المعتمر. وأخرجه النسائي ٧/ ٣١٥ من طريق منصور بن المعتمر، بهذا الإسناد. وهو في "صحيح ابن حبان" (٥٠٤١). وأخرجه النسائي ٧/ ٣١٥ - ٣١٦ من طريق عبيد الله بن عبد الله بن عتبة، عن ميمونة، دون قوله: "في الدنيا"، وإسناده صحيح، لكن رجح الدارقطني في "العلل" ٥/ ورقة ١٨٦ إرساله. وهو في "مسند أحمد" (٢٦٨١٦) من طريق منصور، قال: حسبتُه عن سالم، عن ميمونة. وهذا إسناد منقطع، فإن سالما -وهو ابن أبي الجعد- لم يذكروا له سماعًا من ميمونة. وفي إسناده اختلاف مبين في التعليق عليَّ "المسند". وله شاهد من حديث أبي هريرة عند البخاري (٢٣٨٧) مرفوعًا: "مَن أخذ أموال الناس يريد أداءَها، أدى اللهُ عنه، ومَن أخذ يريد إتلافها أتلفَه اللهُ". وآخر من حديث عائشة عند أحمد (٢٢٤٣٩)، وهو حديث حسن. وانظر ما بعده.









সুনান ইবনু মাজাহ (2409)


حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ الْمُنْذِرِ، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي فُدَيْكٍ، حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ سُفْيَانَ، - مَوْلَى الأَسْلَمِيِّينَ - عَنْ جَعْفَرِ بْنِ مُحَمَّدٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ جَعْفَرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ مَعَ الدَّائِنِ حَتَّى يَقْضِيَ دَيْنَهُ مَا لَمْ يَكُنْ فِيمَا يَكْرَهُ اللَّهُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ فَكَانَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ جَعْفَرٍ يَقُولُ لِخَازِنِهِ اذْهَبْ فَخُذْ لِي بِدَيْنٍ فَإِنِّي أَكْرَهُ أَنْ أَبِيتَ لَيْلَةً إِلاَّ وَاللَّهُ مَعِي بَعْدَ الَّذِي سَمِعْتُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏




আবদুল্লাহ বিন জাফর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ঋণগ্রস্ত ব্যক্তির ঋণ পরিশোধ না করা পর্যন্ত আল্লাহ তার সাথে থাকেন, যদি না সে আল্লাহর অপছন্দনীয় উদ্দেশ্যে ঋণ গ্রহণ করে থাকে। রাবী বলেন, আবদুল্লাহ বিন জাফর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তার কোষাধ্যক্ষকে বলতেন, যাও, আমার জন্য ঋণ গ্রহণ করো। কেননা আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট যে হাদীস শুনেছি তারপর থেকে এক রাতও আল্লাহ আমার সঙ্গে থাকা ছাড়া কাটাতে অপছন্দ করি। [২৪০৯]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حسن لغيره وهذا إسناد ضعيف. سعيد بن سفيان الأسلمي مجهول، ولم يوثقه غير ابن حبان. ثم قد خالفه القاسم بن الفضل -وهو ثقة- فرواه عن محمَّد ابن علي الباقر، عن عائشة، وهو الصحيح. جعفر بن محمَّد: هو الصادق، وأبوه محمَّد: هو ابن علي الباقر. وأخرجه الدارمي (٢٥٩٥)، والبخاري في "التاريخ الكبير" ٣/ ٤٧٦ تعليقًا، والبزار (٢٢٤٣)، والحاكم ٢/ ٢٣، وأبو نعيم في "الحلية" ٣/ ٢٠٤، والبيهقي ٥/ ٣٥٥، والخطيب في "موضح أوهام الجمع والتفريق" ٢٠٦/ ٢، وابن عساكر في "تاريخ دمشق" ٢٧/ ٢٧٤، والمزي في ترجمة سعيد بن سفيان من "تهذيب الكمال" ١٠/ ٤٧٦ من طريق ابن أبي فديك، بهذا الإسناد. وصححه الحاكم، ولم يتعقبه الذهبي! وحسَّنه الحافظ المنذري في "الترغيب والترهيب"! والحافظ ابن حجر في "الفتح" ٥/ ٥٤! وأخرجه الطيالسي (١٥٢٤)، وإسحاق بن راهويه في "مسنده" (١١١١) و (١١١٢)، وأحمد (٢٤٤٣٩)، والبخاري في "التاريخ الكبير" ٣/ ٤٧٦ تعليقًا، والطحاوي في "شرح مشكل الآثار" (٤٢٨٨)، والحاكم ٢/ ٢٢، والبيهقي ٥/ ٣٥٤ من طريق القاسم بن الفضل، عن محمَّد بن علي الباقر، عن عائشة، وهذا إسناد رجاله ثقات إلا أنه منقطع، محمَّد الباقر لم يسمع من عائشة. ويشهد له حديث ميمونة السالف قبله وشواهده.









সুনান ইবনু মাজাহ (2410)


حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا يُوسُفُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ صَيْفِيِّ بْنِ صُهَيْبِ الْخَيْرِ، حَدَّثَنِي عَبْدُ الْحَمِيدِ بْنُ زِيَادِ بْنِ صَيْفِيِّ بْنِ صُهَيْبٍ، عَنْ شُعَيْبِ بْنِ عَمْرٍو، حَدَّثَنَا صُهَيْبُ الْخَيْرِ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ أَيُّمَا رَجُلٍ يَدَيَّنُ دَيْنًا وَهُوَ مُجْمِعٌ أَنْ لاَ يُوَفِّيَهُ إِيَّاهُ لَقِيَ اللَّهَ سَارِقًا ‏"‏ ‏.‏

حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ الْمُنْذِرِ الْحِزَامِيُّ، حَدَّثَنَا يُوسُفُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ صَيْفِيٍّ، عَنْ عَبْدِ الْحَمِيدِ بْنِ زِيَادٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، صُهَيْبٍ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم نَحْوَهُ ‏.‏




সুহায়ব আল-খায়র (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ যে কোন ব্যক্তি ঋণ গ্রহণ করলো এবং তা পরিশোধ না করতে সংকল্পবদ্ধ, (কিয়ামতের দিন) সে আল্লাহর সাথে তস্কররূপে সাক্ষাত করবে। [২৪১০]

[উপরোক্ত হাদীসে মোট ২টি সানাদের ১টি বর্ণিত হয়েছে, অপর সানাদটি হলোঃ]

২/২৪১০ (১) . সুহায়ব আল-খায়র (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)

তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، یوسف بن محمد بن صیفي و عبد الحمید بن زیاد ضعیفان ، و للحدیث شواھد ضعیفۃ عند الطبراني (الأوسط 506/2 ح، 1872،119/7 ح 6409) وغیرہ، (انوار الصحیفہ ص 465، 466)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف. يوسف بن محمَّد بن صيفي فيه كلام، وعبد الحمد بن زياد أو يزيد لين الحديث، وشعيب بن عمرو مجهول، وقد اختلف عليَّ محمَّد بن يوسف فيه: فأخرجه البخاري في "التاريخ" ٨/ ٣٧٩ عن هشام بن عمار، بهذا الإسناد. وأخرجه البخاري في "التاريخ" ٨/ ٣٧٩، وابن ماجه بعده، والعقيلي في "الضعفاء" ٤/ ٤٥١، وابن عدي في "الكامل" ٧/ ٢٦٢٦، وابن الجرزي في "العلل المتناهية" (١٥٢٨) والضياء المقدسي في "المختارة" ٨/ ٦٩ - ٧٠ من طرق عن يوسف بن محمَّد، عن عبد الحميد بن زياد، عن أبيه، عن جده، به. قال البخاري فيما نقله عنه العقيلي ٣/ ٤٧: عبد الحميد بن زياد بن صيفي، عن أبيه، عن جده، لا يعرف سماع بعضهم من بعض. وأخرجه الطبراني (٧٣٠١) من طريق سعيد بن سليمان، عن يوسف، عن أبيه محمَّد بن يزيد وعمه عبد الحميد بن يزيد، عن صيفي بن صهيب، عن صهيب، به. ووهو عنده (٧٣٠٢) من طريق عمرو بن دينار البصري أن بني صهيب قالوا لصهيب … فذكره مطولًا. وعمرو بن دينار ضعيف جدًا. وأخرجه الخطيب في "تاريخه" ٦/ ٣١٢ - ٣١٣، ومن طريقه ابن الجوزي في "العلل" (١٠٢٧) من طريق عَطَّاف بن خالد، عن ابن صهيب، عن صهيب، به. وابن صهيب إن كان هو صيفي نفسه فهذا أصح إسنادِ لحديث صهيبِ. ولا يُلتفت إلى ما نقله ابنُ الجوزي عن ابن حبان في تضعيف عطاف، فهو صدوق حسن الحديث. وأخرجه أحمد (١٨٩٣٢) من طريق الحسن بن محمَّد الأنصاري، عن رجل من النمر بن قاسط، عن صهب، به. والحسن بن محمَّد مجهول، وشيخه مبهم. وربما يكون الرجل النمري هو صيفي نفسه، لأنه من ولد النمر بن قاسط كما بينه أهل النسب. وفي الباب حديث ميمون الكردي، عن أبيه عند الطبراني في "الأوسط" (١٨٧٢) و (٦٢٠٩)، وفي "الصغير" (١١١) وقال في "الصغير": تفرد به أبو سعيد مولى بني هاشم وهو ثقة. وحسَّن إسناده! الهيثمي في "مجمع الزوائد" ١/ ١٤٨، وقال المنذري في "الترغيب والترهيب" ٢/ ٦٠٢: ورواته ثقات! * إسناده ضعيف كسابقه. وقد سلف تخريجه فيما قبله









সুনান ইবনু মাজাহ (2411)


حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ حُمَيْدِ بْنِ كَاسِبٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ، عَنْ ثَوْرِ بْنِ زَيْدٍ الدِّيلِيِّ، عَنْ أَبِي الْغَيْثِ، - مَوْلَى ابْنِ مُطِيعٍ - عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ أَخَذَ أَمْوَالَ النَّاسِ يُرِيدُ إِتْلاَفَهَا أَتْلَفَهُ اللَّهُ ‏"‏ ‏.‏




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, যে ব্যক্তি মানুষের সম্পদ ধ্বংস করার অভিপ্রায় গ্রহণ করে, আল্লাহ তাকে ধ্বংস করবেন। [২৪১১]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. يعقوب بن حميد بن كاسب وإن كان ضعيفًا قد توبع. وأخرجه مطولًا البخاري (٢٣٨٧) من طريق سليمان بن بلال، عن ثور بن زيد، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٨٧٣٣).









সুনান ইবনু মাজাহ (2412)


حَدَّثَنَا حُمَيْدُ بْنُ مَسْعَدَةَ، حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ الْحَارِثِ، حَدَّثَنَا سَعِيدٌ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ سَالِمِ بْنِ أَبِي الْجَعْدِ، عَنْ مَعْدَانَ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ، عَنْ ثَوْبَانَ، - مَوْلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم - عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ مَنْ فَارَقَ الرُّوحُ الْجَسَدَ وَهُوَ بَرِيءٌ مِنْ ثَلاَثٍ دَخَلَ الْجَنَّةَ مِنَ الْكِبْرِ وَالْغُلُولِ وَالدَّيْنِ ‏"‏ ‏.‏




রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর মুক্ত দাস সাওবান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, তিনটি দোষ থেকে মুক্ত অবস্থায় যার দেহ থেকে তার প্রাণবায়ু বের হয়েছে সে জান্নাতে প্রবেশ করবেঃ অহংকার, আত্নসাৎ ও ঋণ। [২৪১২]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، ترمذي (1573)، (انوار الصحیفہ ص 466)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. سعيد: هو ابن أبي عروبة، وقتادة: هو ابن دعامة السدوسي. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٨٧١١) عن محمَّد بن عبد الله بن بزيع، عن يزيد بن زريع، عن سعيد، بهذا الإسناد واللفظ. وأخرجه الترمذيُّ (١٦٦٣) من طريق ابن أبي عدي، والنسائي في "الكبرى" (٨٧١١) عن عمرو بن علي الفلاس، عن يزيد بن زريع، كلاهما (ابن أبي عدي ويزيد) عن سعيد، به. وقالا: "الكنز". وهو في "مسند أحمد" (٢٢٤٢٧)، و "صحيح ابن حبان" (١٩٨)، وعندهما "الكبر". وأخرجه الترمذيُّ (١٦٦٢) من طريق أبي عوانة، عن قتادة، عن سالم، عن ثوبان بلفظ "الكبر". فأسقط معدان. وقال الترمذيُّ: هكذا قال سعيد: "الكنز"، وقال أبو عوانة في حديثه: "الكبر" ولم يذكر فيه معدان. ورواية سعيد أصح. ونقل السندي في "حاشيته" عن الحافظ أبي الفضل العراقي: أن المشهور في الرواية بالباء الموحدة والراء، وذكر ابن الجوزي في "مجمع الأسانيد" عن الدارقطني أنه الكنز بالنون والزاي، ولذا ذكره ابن مردويه في تفسير قوله تعالى: ﴿وَالَّذِينَ يَكْنِزُونَ الذَّهَبَ وَالْفِضَّةَ﴾ [التوبة: ٣٤]. فالكِبر بالباء الموحدة بمعنى التكبُّر والعلو، وأما الكنز فبمعنى الجمع دون أداء حق المال بإنفاقه في سبيل الله، كما قال تعالى: ﴿وَالَّذِينَ يَكْنِزُونَ الذَّهَبَ وَالْفِضَّةَ … ﴾ الآية، وهو الموافق لما بعده، إذ الكلام فيما يتعلق بالأموال.









সুনান ইবনু মাজাহ (2413)


حَدَّثَنَا أَبُو مَرْوَانَ الْعُثْمَانِيُّ، حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عُمَرَ بْنِ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ نَفْسُ الْمُؤْمِنِ مُعَلَّقَةٌ بِدَيْنِهِ حَتَّى يُقْضَى عَنْهُ ‏"‏ ‏.‏




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, মু’মিন ব্যক্তির রূহ তার ঋণের কারণে ঝুলন্ত অবস্থায় থাকে, যাবত না তা পরিশোধ করা হয়। [২৪১৩]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. وهذا إسناد حسن في المتابعات والشواهد من أجل عمر ابن أبي سلمة، فإنه ضعيف يُعتبر به، وقد نقل ابن عبد البر في "التمهيد" ٢٣/ ٢٣٦ عن يحيى بن سعيد القطان أنه سُئل عن هذا الحديث فقال: هو صحيح، وسُئل عن عمر بن أبي سلمة فقال: ضعيف الحديث. أبو مروان العثماني: هو محمَّد بن مروان، وإبراهيم بن سعد: هو ابن إبراهيم بن عبد الرحمن بن عوف. وأخرجه الترمذيُّ (١١٠٢) من طريق إبراهيم بن سعد، عن أبيه، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٩٦٧٩). وأخرجه الترمذيُّ (١١٠١) من طريق زكريا بن أبي زائدة، عن سعد بن إبراهيم، عن أبي سلمة، به، بإسقاط عمر من الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٠٥٩٩). وأخرجه ابن حبان (٣٠٦١) من طريق عبد الرزاق، عن معمر بن راشد، عن الزهري، عن أبي سلمة، به. وهذا إسناد صحيح. وله شاهد من حديث سمرة بن جندب عند أحمد (٢٠١٢٤) و (٢٠٢٣١)، وأبي داود (٣٣٤١)، وإسناده صحيح.









সুনান ইবনু মাজাহ (2414)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ ثَعْلَبَةَ بْنِ سَوَاءٍ، حَدَّثَنَا عَمِّي، مُحَمَّدُ بْنُ سَوَاءٍ عَنْ حُسَيْنٍ الْمُعَلِّمِ، عَنْ مَطَرٍ الْوَرَّاقِ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ مَاتَ وَعَلَيْهِ دِينَارٌ أَوْ دِرْهَمٌ قُضِيَ مِنْ حَسَنَاتِهِ لَيْسَ ثَمَّ دِينَارٌ وَلاَ دِرْهَمٌ ‏"‏ ‏.‏




ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ কোন ব্যক্তি তার যিম্মায় এক দীনার বা এক দিরহাম পরিমাণ ঋণ রেখে মারা গেলে (কিয়ামতের দিন) তার নেক আমলের দ্বারা তা পরিশোধ করা হবে। আর সেখানে কোন দীনারও থাকবে না দিরহামও থাকবে না। [২৪১৪]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. وهذا إسناد حسن في المتابعات والشواهد من أجل مطر- وهو ابن طهمان- الوراق، وقد توبع. حسن المعلم: هو ابن ذكوان. وأخرجه الطبراني في "الأوسط" (٢٩٢١)، وابن عدي في "الكامل" ٣/ ١٢٤٩ من طريق مطر الوراق، بهذا الإسناد. وأخرجه الطبراني في "الكبير" (١٣٥٠٤)، وفي "الأوسط" (٢٩٥٩)، وأبو نعيم في "الحلية" ٣/ ٢٠٣ من طريق ليث بن أبي سليم، عن مجاهد، عن ابن عمر. وليث ضعيف. وأخرجه أحمد (٥٣٨٥)، والحاكم ٢/ ٢٧، والبيهقي ٦/ ٨٢ و ٨/ ٣٣٢ من طريق يحيى بن راشد، عن ابن عمر. وإسناده صحيح. إلا أن في رواية الحاكم: عبد الله بن عمرو، بدل: ابن عمر، ولعله خطأ قديم في "المستدرك" فقد أورده ابن حجر في "إتحاف المهرة" ٩/ ٦٣٨ في مسند عبد الله بن عمرو، ونسبه إلى "المستدرك". وله شاهد من حديث أبي هريرة عند البخاري (٢٤٤٩).









সুনান ইবনু মাজাহ (2415)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَمْرِو بْنِ السَّرْحِ الْمِصْرِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقُولُ إِذَا تُوُفِّيَ الْمُؤْمِنُ فِي عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَعَلَيْهِ الدَّيْنُ فَيَسْأَلُ ‏"‏ هَلْ تَرَكَ لِدَيْنِهِ مِنْ قَضَاءٍ ‏"‏ ‏.‏ فَإِنْ قَالُوا نَعَمْ ‏.‏ صَلَّى عَلَيْهِ وَإِنْ قَالُوا لاَ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ صَلُّوا عَلَى صَاحِبِكُمْ ‏"‏ ‏.‏ فَلَمَّا فَتَحَ اللَّهُ عَلَى رَسُولِهِ الْفُتُوحَ قَالَ ‏"‏ أَنَا أَوْلَى بِالْمُؤْمِنِينَ مِنْ أَنْفُسِهِمْ فَمَنْ تُوُفِّيَ وَعَلَيْهِ دَيْنٌ فَعَلَىَّ قَضَاؤُهُ وَمَنْ تَرَكَ مَالاً فَهُوَ لِوَرَثَتِهِ ‏"‏ ‏.‏




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর যুগে কোন মু’মিন ব্যক্তি ঋণগ্রস্ত অবস্থায় মারা গেলে তিনি জিজ্ঞেস করতেন, সে কি তাঁর ঋণ পরিশোধ করার মত কোন কিছু রেখে গেছে? লোকজন যদি বলতো, হাঁ, তবে তিনি তার জানাযার নামায পড়তেন। আর যদি তারা বলতো, না, তাহলে তিনি বলতেনঃ তোমরা তোমাদের সঙ্গীর জানাযার নামায পড়ো। অতঃপর আল্লাহ তাঁর রাসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -কে (যুদ্ধে) অসংখ্য বিজয় দান করলে তিনি বলেনঃ আমিই মু’মিনদের জন্য তাদের নিজেদের চেয়ে অধিক কল্যাণকামী। অতএব কোন ব্যক্তি ঋণগ্রস্ত অবস্থায় মারা গেলে তা পরিশোধের দায়িত্ব আমার। আর সে যে সম্পদ রেখে যাবে, তা তার ওয়ারিসদের প্রাপ্য। [২৪১৫]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. يونس: هو ابن يزيد الأيلي، وابن شهاب: هو الزهري، وأبو سلمة: هو ابن عبد الرحمن بن عوف. وأخرجه البخاري (٥٣٧١)، ومسلم (١٦١٩)، والترمذي (١٠٩٣)، والنسائي ٤/ ٦٦ من طرق عن الزهري، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٧٨٩٩) و (٩٨٤٨)، و"صحيح ابن حبان" (٣٠٦٣). وأخرج شطره الأول البخاري (٦٧٤٥) من طريق أبي صالح، عن أبي هريرة. وهو في "مسند أحمد" (٨٩٥٠). وأخرج شطره الثاني البخاري (٢٣٩٨) و (٢٣٩٩)، ومسلم (١٦١٩) (١٥ - ١٧)، وأبو داود (٢٩٥٥) من طرق عن أبي هريرة.









সুনান ইবনু মাজাহ (2416)


حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ جَعْفَرِ بْنِ مُحَمَّدٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ تَرَكَ مَالاً فَلِوَرَثَتِهِ وَمَنْ تَرَكَ دَيْنًا أَوْ ضَيَاعًا فَعَلَىَّ وَإِلَىَّ وَأَنَا أَوْلَى بِالْمُؤْمِنِينَ ‏"‏ ‏.‏




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ কোন ব্যক্তি সম্পদ রেখে মারা গেলে তা তার ওয়ারিসদের প্রাপ্য। আর কোন ব্যক্তি ঋণ অথবা অসহায় সন্তান রেখে মারা গেলে তা পরিশোধের দায়িত্ব আমার এবং তাদের লালন-পালনের দায়িত্বও আমার। আমিই মু’মিনদের অধিক উপযুক্ত পৃষ্ঠপোষক। [২৪১৬]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. وكيع: هو ابن الجراح، وسفيان: هو الثوري. ومحمد: هو ابن علي الباقر. وأخرجه مسلم (٨٦٧)، وأبو داود (٢٩٥٤)، والنسائي ٣/ ١٨٨ - ١٨٩ من طرق عن جعفر بن محمَّد الصادق، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٤٦٣٠)، و "صحيح ابن حبان" (٣٠٦٢). وأخرجه أبو داود (٢٩٥٦) و (٣٣٤٣)، والنسائي ٤/ ٦٥ من طريق أبي سلمة، عن جابر مطولًا بنحوه. وقد سلف آخر الحديث السالف برقم (٤٥). قوله: "ضياعًا" قال ابن الأثير في "النهاية": الضياع: العيال. وأصله مصدر ضاع يضيع ضَياعًا، فسُمي العيال بالمصدر، كما تقول: مَن مات وترك فقرًا، أي: فقراء، وإن كسرت الضاد كان جمع ضائع، كجائع وجِياع.









সুনান ইবনু মাজাহ (2417)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ يَسَّرَ عَلَى مُعْسِرٍ يَسَّرَ اللَّهُ عَلَيْهِ فِي الدُّنْيَا وَالآخِرَةِ ‏"‏ ‏.‏




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ যে ব্যক্তি অসচ্ছল (ঋণগ্রস্ত) ব্যক্তিকে অবকাশ দিবে, আল্লাহ দুনিয়াতে ও আখিরাতে তার সাথে সহজ ব্যবহার করবেন। [২৪১৭]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. أبو معاوية: هو محمَّد بن خازم، والأعمش: هو سليمان ابن مهران، وأبو صالح: هو ذكوان السمَّان. وقد سلف عند المصنف ضمن حديث مطول برقم (٢٢٥) وخرجناه هناك.









সুনান ইবনু মাজাহ (2418)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ نُفَيْعٍ أَبِي دَاوُدَ، عَنْ بُرَيْدَةَ الأَسْلَمِيِّ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ أَنْظَرَ مُعْسِرًا كَانَ لَهُ بِكُلِّ يَوْمٍ صَدَقَةٌ وَمَنْ أَنْظَرَهُ بَعْدَ حِلِّهِ كَانَ لَهُ مِثْلُهُ فِي كُلِّ يَوْمٍ صَدَقَةٌ ‏"‏ ‏.‏




বুরায়দাহ আল-আসলামী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, যে ব্যক্তি (ঋণগ্রস্ত) অভাবী ব্যক্তিকে অবকাশ দিবে, সে দান-খয়রাত করার সওয়াব পাবে। আর যে ব্যক্তি ঋণ শোধের মেয়াদ শেষ হওয়ার পর ও সময় বাড়িয়ে দিবে সেও প্রতিদিন দান-খয়রাত করার সওয়াব পাবে। [২৪১৮]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف جدًا، نُفيع أبو داود -وهو ابن الحارث الأعمى- متروك الحديث، لكن للحديث طرق أخرى صحيحة كما سيأتي في التخريج. الأعمش: هو سليمان بن مهران. وأخرجه أحمد (١٩٩٧٧) و (٢٢٩٧٠)، وأبو يعلى في "معجم شيوخه" (٢٥١)، وابن عدي في "الكامل" ٤/ ١٥٣٠ - ١٥٣١، والطبراني في "الكبير" ١٨/ (٦٠٣) من طريق الأعمش، بهذا الإسناد. وأخرجه أحمد (٢٣٠٤٦)، والطحاوي في "شرح مشكل الآثار" (٣٨١٠) و (٣٨١١)، والحاكم ٢/ ٢٩، وأبو نعيم في "أخبار أصبهان" ٢/ ٢٨٦، والبيهقي في "السُّنن" ٥/ ٣٥٧، وفي "الشعب" (١١٢٦١) و (١١٢٦٢)، وابن عساكر في "تاريخ دمشق" ١٤/ ورقة ٧٧٨ من طرق عن عبد الوارث بن سعيد، عن محمَّد بن جحادة، عن سليمان بن بريدة، عن أبيه، به. وهذا إسناد صحيح.









সুনান ইবনু মাজাহ (2419)


حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الدَّوْرَقِيُّ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ إِسْحَاقَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ مُعَاوِيَةَ، عَنْ حَنْظَلَةَ بْنِ قَيْسٍ، عَنْ أَبِي الْيَسَرِ، صَاحِبِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ أَحَبَّ أَنْ يُظِلَّهُ اللَّهُ فِي ظِلِّهِ - فَلْيُنْظِرْ مُعْسِرًا أَوْ لِيَضَعْ لَهُ ‏"‏ ‏.‏




আবুল য়াসর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, যে ব্যক্তি চায় যে আল্লাহ তাকে তাঁর ছায়ার নিচে স্থান দিন, সে যেন ঋণগ্রস্ত ব্যক্তিকে অবকাশ দেয় অথবা তার দেনা মাফ করে দেন। [২৪১৯]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. وهذا إسناد حسن في المتابعات والشواهد، عبد الرحمن ابن إسحاق -وهو المدني- صدوق حسن الحديث، وعبد الرحمن بن معاوية -وهو الزرقي- ضعيف يُعتبر به، وقد توبعا. إسماعيل بن إبراهيم: هو المعروف بابن عُلية. وأخرجه أحمد (١٥٥٢٠)، وابن أبي عاصم في "الآحاد والمثاني" (١٩١٤)، والطبراني في "الكبير" ١٩/ (٣٧٦)، والبيهقي ٦/ ٢٧ - ٢٨ من طريق عبد الرحمن بن إسحاق، بهذا الإسناد. وأخرجه مسلم (٣٠٠٦) من طريق عبادة بن الوليد بن عبادة بن الصامت، عن أبي اليسر، مطولًا بقصة. وهو في "شرح مشكل الآثار" (٣٨١٥) و (٣٨١٦)، و"صحيح ابن حبان" (٥٠٤٤).









সুনান ইবনু মাজাহ (2420)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا أَبُو عَامِرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ، قَالَ سَمِعْتُ رِبْعِيَّ بْنَ حِرَاشٍ، يُحَدِّثُ عَنْ حُذَيْفَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَنَّ رَجُلاً مَاتَ فَقِيلَ لَهُ مَا عَمِلْتَ - فَإِمَّا ذَكَرَ أَوْ ذُكِّرَ - قَالَ إِنِّي كُنْتُ أَتَجَوَّزُ فِي السِّكَّةِ وَالنَّقْدِ وَأُنْظِرُ الْمُعْسِرَ ‏.‏ فَغَفَرَ اللَّهُ لَهُ ‏"‏ ‏.‏
قَالَ أَبُو مُسْعُودٍ أَنَا قَدْ، سَمِعْتُ هَذَا، مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏




হুযায়ফাহ ও আবূ মাসঊদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এক ব্যক্তি মারা গেলে তাকে জিজ্ঞেস করা হলো, তুমি কী আমল করেছো? সে নিজের স্মৃতি থেকে অথবা তাকে স্মরণ করিয়ে দেয়া হলে বললো, আমি নগদ অর্থ ধার দিতাম এবং অভাবগ্রস্তকে (ঋণ পরিশোধে) অবকাশ দিতাম। এজন্য আল্লাহ তাকে ক্ষমা করে দেন। আবূ মাসঊদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, আমিও এ হাদীস রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট শুনেছি। [২৪২০]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. أبو عامر: هو عبد الملك بن عمرو العقدي، وشعبة: هو ابن الحجاج. وقد اختلف عليَّ عبد الملك بن عمير في تسمية الصحابي راوي الحديث، فسماه هنا حذيفة، وسماه في رواية زائدة عنه عند أحمد (١٥٥٢١)، والطحاوي في "شرح مشكل الآثار" (٣٨١٧) وغيرهما: أبا اليَسَر بن عمرو، وهذا لا يضر في صحة الحديث، فالصحابة كلهم عدول. وأخرجه البخاري (٣٤٥١)، ومسلم (١٥٦٠) من طرق عن ربعي بن حراش، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٣٣٥٣). وأخرجه مسلم (١٥٦٠) (٢٧) و (٢٩) من طريقين عن ربعي بن حراش، قال: اجتمع حذيفة وأبو مسعود، فقال حذيفة … قال أبو مسعود: هكذا سمعت رسول الله ﷺ يقول. وزاد في الموضع الثاني: فقال عقبة بن عامر الجهني وأبو مسعود البدري: هكذا سمعناه من في رسول الله ﷺ. وهو في "مسند أحمد" (١٧٠٦٤). وانظر في اختلاف ألفاظ الحديث "فح الباري" ٤/ ٣٠٧ - ٣٠٨.