হাদীস বিএন


সুনান ইবনু মাজাহ





সুনান ইবনু মাজাহ (2502)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ حُمَيْدٍ الطَّوِيلِ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ مُطَرِّفِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الشِّخِّيرِ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ ضَالَّةُ الْمُسْلِمِ حَرَقُ النَّارِ ‏"‏ ‏.‏




আবদুল্লাহ ইবনুশ-শিখ্খীর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ মুসলমানের হারানো বস্তু (অপরজনের জন্য) জাহান্নামের আগুন। [২৫০২]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. الحسن: هو ابن أبي الحسن البصري. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٥٧٥٨) من طريق يحيى بن سعيد، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٦٣١٤)، و"شرح مشكل الآثار" (٤٧٢٢)، و"صحيح ابن حبان" (٤٨٨٨). وأخرجه النسائي (٥٧٥٩) من طريق الأشعث بن عبد الملك الحمراني، عن الحسن مرسلًا. وفي الباب عن الجارود عند أحمد (٢٠٧٥٤)، والنسائي (٥٧٦٠) و (٥٧٦١)، وصححه ابن حبان (٤٨٨٧). قوله: "حَرَق النار" أي: سبب لدخول النار إذا أخذها المرء ليتملكها.









সুনান ইবনু মাজাহ (2503)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا أَبُو حَيَّانَ التَّيْمِيُّ، حَدَّثَنَا الضَّحَّاكُ، خَالُ الْمُنْذِرِ بْنِ جَرِيرٍ عَنِ الْمُنْذِرِ بْنِ جَرِيرٍ، قَالَ كُنْتُ مَعَ أَبِي بِالْبَوَازِيجِ فَرَاحَتِ الْبَقَرُ فَرَأَى بَقَرَةً أَنْكَرَهَا فَقَالَ مَا هَذِهِ قَالُوا بَقَرَةٌ لَحِقَتْ بِالْبَقَرِ ‏.‏ قَالَ فَأَمَرَ بِهَا فَطُرِدَتْ حَتَّى تَوَارَتْ ثُمَّ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ لاَ يُئْوِي الضَّالَّةَ إِلاَّ ضَالٌّ ‏"‏ ‏.‏




জারীর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) (মুনযির বিন জারীর) হতে বর্ণিত, আমি আল-বাওয়াযীজ নামক স্থানে আমার পিতার সাথে ছিলাম। সন্ধ্যাবেলা গরুর পাল ফিরে এলে তার সাথে তিনি একটি অপরিচিত গাভী দেখে বলেনঃ এটা কাদের গাভী? লোকেরা বললো, এই গাভীটি আমাদের গরুর সাথে চলে এসেছে। রাবী বলেন, তিনি গাভীটি সম্পর্কে নির্দেশ দিলে তদনুযায়ী সেটিকে তাড়িয়ে দেওয়া হলো, শেষে তা দৃষ্টির আড়ালে চলে গেল। অতঃপর তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে বলতে শুনেছিঃ কেবল পথভ্রষ্ট ব্যক্তিই হারানো জন্তুকে আশ্রয় দেয়। [২৫০৩]

তাহকীক আলবানীঃ দঈফ তবে মারফূ’ সূত্রে সহীহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف والمرفوع صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف، سنن أبي داود (1720)، (انوار الصحیفہ ص 469)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * صحيح لغيره، وهذا إسناد ضعيف لجهالة الضحاك خال المنذر. أبو حيان التيمي: هو يحيي بن سعيد بن حيان. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٥٧٦٨) من طريق يحيى بن سعيد، بهذا الإسناد. وأخرجه أيضًا -كما في "تحفة الأشراف" (٣٢٣٣) - من طريق إسماعيل ابن علية، عن أبي حيان، عن الضحاك، عن ابن أخيه المنذر، عن جرير. وأخرجه أيضًا -كما في "التحفة"- من طريق شعبة، عن أبي حيان، عن رجل، عن المنذر، عن جرير. وأخرجه (٥٧٦٩) من طريق عبد الله بن المبارك، عن أبي حيان، عن الضحاك، عن جرير. لم يذكر المنذر. وأخرجه (٥٧٦٧) من طريق إبراهيم بن عيينة، عن أبي حيان، عن أبي زرعة ابن عمرو بن جرير، عن المنذر بن جرير: كنا مع جرير … فذكر نحوه. وأخرجه أبو داود (١٧٢٠) من طريق خالد بن عبد الله، عن أبي حيان، عن المنذر بن جرير قال: كنا مع جرير … وهو في "مسند أحمد" (١٩٢٠٩)، و"شرح مشكل الآثار" (٤٧١٩). وله شاهد من حديث زيد بن خالد الجهني عند مسلم (١٧٢٥) بلفظ: "من آوى ضالة، فهو ضال ما لم يُعرِّفها". قوله: "لا يؤوي الضالة" أي: لا يضمها إلى ماله ولا يخلطها معه بقصد التملك والانتفاع بها، لا بقصد التعريف والرد على صاحبها. قاله السندي في حاشيته على "المسند". والضالة: المفقودة من كل ما يقتني من الحيوان وغيره. والبوازيج: اسم موضع قرب تكريت في العراق.









সুনান ইবনু মাজাহ (2504)


حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ بْنِ الْعَلاَءِ الأَيْلِيُّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ يَزِيدَ، مَوْلَى الْمُنْبَعِثِ عَنْ زَيْدِ بْنِ خَالِدٍ الْجُهَنِيِّ، فَلَقِيتُ رَبِيعَةَ فَسَأَلْتُهُ فَقَالَ حَدَّثَنِي يَزِيدُ، عَنْ زَيْدِ بْنِ خَالِدٍ الْجُهَنِيِّ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ سُئِلَ عَنْ ضَالَّةِ الإِبِلِ فَغَضِبَ وَاحْمَرَّتْ وَجْنَتَاهُ وَقَالَ ‏"‏ مَالَكَ وَلَهَا مَعَهَا الْحِذَاءُ وَالسِّقَاءُ تَرِدُ الْمَاءَ وَتَأْكُلُ الشَّجَرَ حَتَّى يَلْقَاهَا رَبُّهَا ‏"‏ ‏.‏ وَسُئِلَ عَنْ ضَالَّةِ الْغَنَمِ فَقَالَ ‏"‏ خُذْهَا فَإِنَّمَا هِيَ لَكَ أَوْ لأَخِيكَ أَوْ لِلذِّئْبِ ‏"‏ ‏.‏ وَسُئِلَ عَنِ اللُّقَطَةِ فَقَالَ ‏"‏ اعْرِفْ عِفَاصَهَا وَوِكَاءَهَا وَعَرِّفْهَا سَنَةً فَإِنِ اعْتُرِفَتْ وَإِلاَّ فَاخْلِطْهَا بِمَالِكَ ‏"‏ ‏.‏




যায়দ বিন খালিদ আল-জুহানী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে পথ ভোলা উট সম্পর্কে জিজ্ঞেস করা হলে তিনি অসন্তুষ্ট হন, এমনকি তাঁর গন্ডদেশ বা মুখমন্ডল রক্তিমাভ হয়ে যায়। তিনি বলেনঃ তাতে তোমার কী? ওর সাথে জুতা (খুর) ও মশক (পেট) রয়েছে। সে পানির উৎসে পৌঁছে তা পান করতে থাকবে এবং গাছপাতা খেতে থাকবে, শেষে তার মালিক তাকে পেয়ে যাবে। তাঁকে হারানো মেষ-বকরী সম্পর্কে জিজ্ঞেস করা হলে তিনি বলেনঃ তাকে ধরে রাখ। হয় এটা তোমার অথবা তোমার ভাইয়ের অথবা নেকড়ে বাঘের জন্য। তাঁকে হারানো বস্তু সম্পর্কে জিজ্ঞেস করা হলে তিনি বলেনঃ তার থলে ও চামড়ার বাক্স এবং মুখ বাধাঁর রশি উত্তমরূপে চিনে রাখো এবং এক বছর ধরে তার ঘোষণা দিতে থাকো। যদি তার মালিক পাওয়া যায় তো ভালো, অন্যথায় তা তোমাদের মালের সাথে যোগ কর। [২৫০৪]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. وهذا إسناد حسن من أجل إسحاق بن إسماعيل الأيلي. والقائل: "فلقيت ربيعة" هو سفيان. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٥٧٨٢) من طريق سفيان بن عيينة، عن يحيى ابن سعيد، عن ربيعة، بهذا الإسناد. وأخرجه البخاري (٦٤٢٨)، ومسلم (١٧٢٢) (٥) و (٦)، وأبو داود (١٧٠٨)، والنسائي (٥٧٣٩) و (٥٧٨١) من طريقين عن يحيى بن سعيد، به. وأخرجه البخاري (٥٢٩٢) من طريق سفيان بن عيينة، عن يحيى بن سعيد، عن يزيد مرسلًا. ثم قال سفيان: فلقيت ربيعة … يعني أن يحيى بن سعيد كان يحدث به عن يزيد مرسلًا، وعن ربيعة عن يزيد عن زيد موصولًا. وأخرجه النسائي (٥٧٣٨) من طريق سفيان، عن ربيعة، به. وهو في "مسند أحمد" (١٧٠٥٠). وأخرجه البخاري (٩١)، ومسلم (١٧٢٢)، وأبو داود (١٧٠٤) و (١٧٠٥)، والترمذي (١٣٧٢)، والنسائي (٥٧٤٠) و (٥٧٨٣) و (٥٧٨٤) من طرق عن ربيعة، به. وأخرجه أبو داود (١٧٠٧)، والنسائي (٥٧٨٦) من طريق عبد الله بن يزيد، عن أبيه يزيد مولى المنبعث، عن زيد بن خالد. وسيأتي عند المصنف برقم (٢٥٠٧) من طريق بسر بن سعيد، عن زيد. قوله: "عفاصها" العِفاص: هو الوعاء الذي تكون فيه النفقة من جلد أو خرقة أو غير ذلك. "النهاية" (عفص). و"وكاءها": هو الخيط الذي يُشد به الصرةُ أو الكيسُ. "النهاية" (وكا).









সুনান ইবনু মাজাহ (2505)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ الثَّقَفِيُّ، عَنْ خَالِدٍ الْحَذَّاءِ، عَنْ أَبِي الْعَلاَءِ، عَنْ مُطَرِّفٍ، عَنْ عِيَاضِ بْنِ حِمَارٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ وَجَدَ لُقَطَةً فَلْيُشْهِدْ ذَا عَدْلٍ أَوْ ذَوَىْ عَدْلٍ ثُمَّ لاَ يُغَيِّرْهُ وَلاَ يَكْتُمْ فَإِنْ جَاءَ رَبُّهَا فَهُوَ أَحَقُّ بِهَا وَإِلاَّ فَهُوَ مَالُ اللَّهِ يُؤْتِيهِ مَنْ يَشَاءُ ‏"‏ ‏.‏




ইয়াদ বিন হিমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ কেউ কারো কুড়িয়ে পাওয়া বস্তু পেলে যেন একজন অথবা দু’জন ন্যায়পরায়ণ লোককে সাক্ষী রাখে, অতঃপর তা পরিবর্তনও না করে এবং গোপনও না করে। যদি তার মালিক এসে যায় তবে সে-ই তার যথার্থ প্রাপক, অন্যথায় তা আল্লাহর সম্পদ, যাকে ইচ্ছা তা দান করেন। [২৫০৫]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. عبد الوهَّاب الثقفي: هو ابن عبد المجيد، وخالد الحذاء: هو ابن مهران، وأبو العلاء -واسمه يزيد- ومطرف: هما ابنا عبد الله بن الشخير. وأخرجه أبو داود (١٧٠٩)، والنسائي في "الكبرى" (٥٧٧٦) من طريق خالد الحذاء، بهذا الإسناد. وأخرجه النسائي (٥٧٧) من طريق حماد بن سلمة، عن الجريري، عن أبي العلاء، عن مطرف، عن أبي هريرة. وهو في "مسند أحمد" (١٧٤٨١) وفيه بيان الاختلاف على حماد فيه، و"شرح مشكل الآثار" (٣١٣٦) و (٤٧١٤).









সুনান ইবনু মাজাহ (2506)


حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ سَلَمَةَ بْنِ كُهَيْلٍ، عَنْ سُوَيْدِ بْنِ غَفَلَةَ، قَالَ خَرَجْتُ مَعَ زَيْدِ بْنِ صُوحَانَ وَسَلْمَانَ بْنِ رَبِيعَةَ حَتَّى إِذَا كُنَّا بِالْعُذَيْبِ الْتَقَطْتُ سَوْطًا فَقَالاَ لِي أَلْقِهِ ‏.‏ فَأَبَيْتُ فَلَمَّا قَدِمْنَا الْمَدِينَةَ أَتَيْتُ أُبَىَّ بْنَ كَعْبٍ فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لَهُ فَقَالَ أَصَبْتَ الْتَقَطْتُ مِائَةَ دِينَارٍ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَسَأَلْتُهُ فَقَالَ ‏"‏ عَرِّفْهَا سَنَةً ‏"‏ ‏.‏ فَعَرَّفْتُهَا فَلَمْ أَجِدْ أَحَدًا يَعْرِفُهَا فَسَأَلْتُهُ فَقَالَ ‏"‏ عَرِّفْهَا ‏"‏ ‏.‏ فَعَرَّفْتُهَا فَلَمْ أَجِدْ أَحَدًا يَعْرِفُهَا ‏.‏ فَقَالَ ‏"‏ اعْرِفْ وِعَاءَهَا وَوِكَاءَهَا وَعَدَدَهَا ثُمَّ عَرِّفْهَا سَنَةً فَإِنْ جَاءَ مَنْ يَعْرِفُهَا وَإِلاَّ فَهِيَ كَسَبِيلِ مَالِكَ ‏"‏ ‏.‏




উবাই বিন কা’ব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, (সুওয়ায়দ বিন গাফালাহ) বলেন, আমি যায়েদ বিন সূহান ও সালামান বিন রাবীআর সাথে সফরে বের হলাম। আমরা উযায়ব নামক স্থানে পৌছে আমি একটি চাবুক কুড়িয়ে পেলাম। তারা উভয়ে আমাকে বলেন, এটা ফেলে দাও, কিন্তু আমি তা অস্বীকার করলাম। অতঃপর আমরা মদীনায় ফিরে এসে আমি উবাই বিন কা‘ব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -এর নিকট উপস্থিত হয়ে তাকে বিষয়টি জানালাম। তিনি বলেন, তুমি ঠিকই করেছো। আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর যুগে এক শত দীনার কুড়িয়ে পেয়েছিলাম। আমি তাঁকে (এর বিধান) জিজ্ঞেস করলে তিনি বলেনঃ এক বছর পর্যন্ত এর ঘোষণা দিতে থাকো। আমি ঘোষণা দিতে থাকলাম, কিন্তু তার শনাক্তকারী কাউকে পেলাম না। পুনরায় আমি তাঁকে জিজ্ঞেস করলে তিনি বলেনঃ ঘোষণা দিতে থাকো। আমি ঘোষণা দিতে থাকলাম, কিন্তু তার শনাক্তকারী পেলাম না। অতঃপর তিনি বলেনঃ তুমি তার থলে ও মুখ বাঁধার রশি ও মুদ্রার সংখ্যা চিনে রাখো এবং আরো এক বছর ঘোষণা দাও। যদি তার শনাক্তকারী আসে তো ভালো, অন্যথায় তা তোমার সম্পদতুল্য। [২৫০৬]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح.إلا أن سلمة بن كهيل وهم في ذكر التعريف ثلاث سنين كما سيأتي. وكيع: هو ابن الجراح، وسفيان: هو الثوري. وأخرجه البخاري (٢٤٢٦)، ومسلم (١٧٢٣)، وأبو داود (١٧٠١) و (١٧٠٢)، والترمذي (١٣٧٤)، والنسائي في "الكبرى" (٥٧٨٩ - ٥٧٩٤) من طرق عن سلمة بن كهيل، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢١١٦٦ - ٢١١٧٥)، و"شرح مشكل الآثار" (٤٦٩٨) و (٤٦٩٩)، و"صحيح ابن حبان" (٤٨٩١) و (٤٨٩٢). قال شعبة في رواية البخاري (٢٤٢٦): فلقيته بعد بمكة، فقال: لا أدري ثلاثة أحوال أو حولًا واحدًا. وقال شعبة في رواية مسلم (١٧٢٣) (٩)، والنسائي (٥٧٩٢): فسمعته بعد عشر سنين يقول: عرفها عاما واحدًا. قلنا: وتعريفها عامًا واحدًا هو الموافق لحديث زيد بن خالد السالف برقم (٢٥٠٤)، ولحديث عبد الله ابن عمرو عند أحمد (٦٦٨٣)، وأبي داود (١٧٥٨).









সুনান ইবনু মাজাহ (2507)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ الْحَنَفِيُّ، ح وَحَدَّثَنَا حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا الضَّحَّاكُ بْنُ عُثْمَانَ الْقُرَشِيُّ، حَدَّثَنِي سَالِمٌ أَبُو النَّضْرِ، عَنْ بُسْرِ بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ زَيْدِ بْنِ خَالِدٍ الْجُهَنِيِّ، ‏.‏ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم سُئِلَ عَنِ اللُّقَطَةِ فَقَالَ ‏ "‏ عَرِّفْهَا سَنَةً فَإِنِ اعْتُرِفَتْ فَأَدِّهَا فَإِنْ لَمْ تُعْرَفْ فَاعْرِفْ عِفَاصَهَا وَوِعَاءَهَا ثُمَّ كُلْهَا فَإِنْ جَاءَ صَاحِبُهَا فَأَدِّهَا إِلَيْهِ ‏"‏ ‏.‏




যায়দ বিন খালিদ আল-জুহানী (রা:) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে হারানো বস্তু (লুকতা) সম্পর্কে জিজ্ঞেস করা হলো। তিনি বলেনঃ এক বছর পর্যন্ত তার ঘোষনা দিতে থাকো। যদি তার মালিক পাও, তবে তাঁকে তা ফেরত দাও। আর যদি তার মালিক না পাও তবে তার থলে এবং মুখ বাঁধার রশি চিনে রাখো। তারপর তুমি তা ব্যবহার করো। এরপর যদি তার মালিক এসে যায়, তবে তাকে তা ফেরত দাও। [২৫০৭]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. أبو بكر الحنفي: هو عبد الكبير بن عبد المجيد البصري، وسالم: هو ابن أبي أمية. وأخرجه مسلم (١٧٢٢) (٧) و (٨)، وأبو داود (١٧٠٦)، والترمذي (١٣٧٣)، والنسائي في "الكبرى" (٥٧٧٩) من طريق الضحاك بن عثمان، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٧٠٤٦)، و"صحيح ابن حبان" (٤٨٩٥). وانظر ما سلف برقم (٢٥٠٤).









সুনান ইবনু মাজাহ (2508)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ خَالِدِ بْنِ عَثْمَةَ، حَدَّثَنِي مُوسَى بْنُ يَعْقُوبَ الزَّمْعِيُّ، حَدَّثَتْنِي عَمَّتِي، قُرَيْبَةُ بِنْتُ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ أُمَّهَا، كَرِيمَةَ بِنْتَ الْمِقْدَادِ بْنِ عَمْرٍو أَخْبَرَتْهَا عَنْ ضُبَاعَةَ بِنْتِ الزُّبَيْرِ، عَنِ الْمِقْدَادِ بْنِ عَمْرٍو، أَنَّهُ خَرَجَ ذَاتَ يَوْمٍ إِلَى الْبَقِيعِ وَهُوَ الْمَقْبُرَةُ لِحَاجَتِهِ وَكَانَ النَّاسُ لاَ يَذْهَبُ أَحَدُهُمْ فِي حَاجَتِهِ إِلاَّ فِي الْيَوْمَيْنِ وَالثَّلاَثَةِ فَإِنَّمَا يَبْعَرُ كَمَا تَبْعَرُ الإِبِلُ ثُمَّ دَخَلَ خَرِبَةً فَبَيْنَمَا هُوَ جَالِسٌ لِحَاجَتِهِ إِذْ رَأَى جُرَذًا أَخْرَجَ مِنْ جُحْرٍ دِينَارًا ثُمَّ دَخَلَ فَأَخْرَجَ آخَرَ حَتَّى أَخْرَجَ سَبْعَةَ عَشَرَ دِينَارًا ثُمَّ أَخْرَجَ طَرَفَ خِرْقَةٍ حَمْرَاءَ ‏.‏ قَالَ الْمِقْدَادُ فَسَلَلْتُ الْخِرْقَةَ فَوَجَدْتُ فِيهَا دِينَارًا فَتَمَّتْ ثَمَانِيَةَ عَشَرَ دِينَارًا فَخَرَجْتُ بِهَا حَتَّى أَتَيْتُ بِهَا رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَأَخْبَرْتُهُ خَبَرَهَا فَقُلْتُ خُذْ صَدَقَتَهَا يَا رَسُولَ اللَّهِ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ ارْجِعْ بِهَا لاَ صَدَقَةَ فِيهَا بَارَكَ اللَّهُ لَكَ فِيهَا ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ قَالَ ‏"‏ لَعَلَّكَ أَتْبَعْتَ يَدَكَ فِي الْجُحْرِ ‏"‏ ‏.‏ قُلْتُ لاَ وَالَّذِي أَكْرَمَكَ بِالْحَقِّ ‏.‏ قَالَ فَلَمْ يَفْنَ آخِرُهَا حَتَّى مَاتَ ‏.‏




মিকদাদ বিন আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, প্রাকৃতিক প্রয়োজনে তিনি একদিন আল-বাকী‘ নামক কবরস্থানে যান। তৎকালে লোকেরা দু’-তিন দিন পরপর প্রাকৃতিক প্রয়োজন সারতো। তারা উটের বিষ্ঠা সদৃশ মল ত্যাগ করতো। অতঃপর তিনি একটি বিরান ঘরে প্রবেশ করেন। তিনি বসে প্রয়োজন সারছিলেন, হঠাৎ দেখলেন যে, একটি ইঁদুর তার গর্ত থেকে একটি দীনার বের করলো। তারপর সে গর্তে প্রবেশ করে আর একটি দীনার বের করলো। ইঁদুরটি এভাবে পরপর সতেরটি দীনার বের করলো, অতঃপর একটি লাল কাপড়ের টুকরা টেনে বের করলো। মিকদাদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, আমি আস্তে আস্তে কাপড়ের টুকরাটি টেনে উঠালাম এবং তার মধ্যেও একটি দীনার পেলাম। এভাবে মোট আঠারটি দীনার হলো। আমি সেগুলো নিয়ে সরাসরি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট চলে এলাম এবং বিষয়টি তাঁকে জানালাম। আমি আরো বললাম, ইয়া রাসূলুল্লাহ! এর যাকাত গ্রহণ করুন। তিনি বলেনঃ তুমি এগুলো নিয়ে যাও এবং এর কোন যাকাত নেই। আল্লাহ এগুলোতে তোমার বরকত দান করুন। অতঃপর তিনি বলেনঃ মনে হয় তুমি গর্তের মধ্যে তোমার হাত ঢুকিয়েছিলে। আমি বললাম, সেই সত্তার শপথ যিনি আপনাকে সত্য দ্বীন দ্বারা মর্যাদাবান করেছেন! আমি গর্তে হাত ঢুকাইনি। রাবী বলেন, এর শেষ দীনারটি তার ইনতিকাল পর্যন্ত অবশিষ্ট ছিলো। [২৫০৮]

তাহকীক আলবানীঃ দঈফ তা‘লীক ইবনু মাজাহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، سنن أبي داود (3087)، (انوار الصحیفہ ص 469)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف لضعف موسى بن يعقوب الزمعي، ولجهالة قُريبة بنت عبد الله. وأخرجه أبو داود (٣٠٨٧) من طريق موسى بن يعقوب، بهذا الإسناد. قوله: "جُرَذاَ" قال في "القاموس" جُرَذ كصُرَدٍ: ضرب من الفأر، والجمع: جُزذان، بضم الجيم، وبعضهم يكسرها.









সুনান ইবনু মাজাহ (2509)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَيْمُونٍ الْمَكِّيُّ، وَهِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَعِيدٍ، وَأَبِي، سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ فِي الرِّكَازِ الْخُمُسُ ‏"‏ ‏.‏




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ খনিজ সম্পদের এক-পঞ্চমাংশ (রাষ্ট্রের) প্রাপ্য। [২৫০৯]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. محمَّد بن ميمون المكي -وإن كان ضعيفًا-، وهشام بن عمار -وإن كبر وصار يتلقن- متابعان. سعيد: هو ابن المسيب. وأخرجه البخاري (١٤٩٩)، ومسلم (١٧١٠)، وأبو داود (٣٠٨٥)، والترمذي ٦٤٧١) و (١٤٣١)، والنسائي ٥/ ٤٥ من طرق عن الزهري، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٧٢٥٤)، و"صحيح ابن حبان" (٦٠٠٥ - ٦٠٠٧). وأخرجه الترمذيُّ (١٤٣١)، والنسائي ٥/ ٤٥ من طريق سفيان بن عيينة، عن الزهري، عن سعيد وحده، عن أبي هريرة. قال صاحب "النهاية": الركاز عند أهل الحجاز: كنوز الجاهلية المدفونة في الأرض، وعند أهل العراق المعادن، والقولان تحتملهما اللغة، لأن كلًا منهما مركوز في الأرض، أي: ثابت. وأخرجه مسلم (١٧١٠) (٤٥)، والنسائي ٥/ ٤٥ من طريق يونس بن يزيد، عن الزهري، عن سعيد وعبيد الله بن عبد الله، عن أبي هريرة. وأخرجه البخاري (٢٣٥٥)، ومسلم (١٧١٠) (٤٦)، والنسائي ٥/ ٤٥ و ٤٦ من طرق عن أبي هريرة.









সুনান ইবনু মাজাহ (2510)


حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيىٍّ الْجَهْضَمِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ، عَنْ إِسْرَائِيلَ، عَنْ سِمَاكٍ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ فِي الرِّكَازِ الْخُمُسُ ‏"‏ ‏.‏




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ খনিজ সম্পদের এক-পঞ্চমাংশ (রাষ্ট্রের) প্রাপ্য। [২৫১০]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * صحيح بما قبله، وهذا إسناد ضعيف لاضطراب رواية سماك -وهو ابن حرب- عن عكرمة. أبو أحمد: هو محمَّد بن عبد الله بن الزبير، وإسرائيل: هو ابن يونس السبيعي. وأخرجه ابن أبي شيبة ٣/ ٢٢٥ و١٠/ ١٧٨ و ١٢/ ٢٥٦، وأحمد (٢٨٦٩) و (٢٨٧٠) و (٣٢٧٦ م)، والطبراني في "الكبير" (١١٧٢٦) من طريق إسرائيل، بهذا الإسناد.









সুনান ইবনু মাজাহ (2511)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ ثَابِتٍ الْجَحْدَرِيُّ، حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِسْحَاقَ الْحَضْرَمِيُّ، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَيَّانَ، سَمِعْتُ أَبِي يُحَدِّثُ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ كَانَ فِيمَنْ كَانَ قَبْلَكُمْ رَجُلٌ اشْتَرَى عَقَارًا فَوَجَدَ فِيهَا جَرَّةً مِنْ ذَهَبٍ فَقَالَ اشْتَرَيْتُ مِنْكَ الأَرْضَ وَلَمْ أَشْتَرِ مِنْكَ الذَّهَبَ ‏.‏ فَقَالَ الرَّجُلُ إِنَّمَا بِعْتُكَ الأَرْضَ بِمَا فِيهَا ‏.‏ فَتَحَاكَمَا إِلَى رَجُلٍ فَقَالَ أَلَكُمَا وَلَدٌ فَقَالَ أَحَدُهُمَا لِي غُلاَمٌ ‏.‏ وَقَالَ الآخَرُ لِي جَارِيَةٌ ‏.‏ قَالَ فَأَنْكِحَا الْغُلاَمَ الْجَارِيَةَ وَلْيُنْفِقَا عَلَى أَنْفُسِهِمَا مِنْهُ وَلْيَتَصَدَّقَا ‏"‏ ‏.‏




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, তোমাদের পূর্বকালে এক ব্যক্তি এক খন্ড জমি ক্রয় করে তার মধ্যে সোনাভর্তি একটি কলস পায়। সে (বিক্রেতাকে) বললো, আমি তো তোমার থেকে জমি ক্রয় করেছি, সোনা কিনিনি। বিক্রেতা বললো, আমি তোমার নিকট জমি এবং তার মধ্যকার সবকিছু বিক্রয় করেছি। অতঃপর তারা বিষয়টির মীমাংসার জন্য এক ব্যক্তির নিকট উপস্থিত হলো। লোকটি বললো, তোমাদের দু’জনের কি সন্তান-সন্ততি আছে? একজন বললো, আমার একটি পুত্র সন্তান আছে। অপরজন বললো, আমার একটি কন্যা সন্তান আছে। লোকটি বললো, তাহলে তোমরা ছেলেটির সাথে মেয়েটির বিবাহ দাও এবং এই সোনা তাদেরকে দাও, যাতে তারা এটা নিজেদের প্রয়োজনে খরচ করতে পারে এবং দান-খয়রাতও করতে পারে। [২৫১১]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. حيان والد سليم- وإن كان مجهولًا- متابع. وأخرجه البخاري (٣٤٧٢)، ومسلم (١٧٢١) من طريق همام بن منبه، عن أبي هريرة. وهو في "مسند أحمد" (٨١٩١)، و"صحيح ابن حبان" (٧٢١).









সুনান ইবনু মাজাহ (2512)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ، عَنْ سَلَمَةَ بْنِ كُهَيْلٍ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ جَابِرٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ذصلى الله عليه وسلم بَاعَ الْمُدَبَّرَ ‏.‏




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মুদাব্বার গোলাম বিক্রয় করেছেন। [২৫১২]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. وكيع: هو ابن الجراح، وعطاء: هو ابن أبي رباح. وأخرجه البخاري (٢١٤١)، ومسلم بإثر الحديث (١٦٦٨) / (٥٩)، وأبو داود (٣٩٥٥) و (٣٩٥٦)، والنسائي ٧/ ٣٠٤ و ٨/ ٢٤٦ من طرق عن عطاء، بهذا الإسناد. وبعضهم يزيد على بعض. وهو في "مسند أحمد" (١٤٢١٦)، و"صحيح ابن حبان" (٤٩٢٩) و (٤٩٣٣). وأخرجه مسلم (٩٩٧) وبإثر (١٦٦٨) / (٥٩)، وأبو داود (٣٩٥٧)، والنسائي ٥/ ٦٩ - ٧٠ و ٧/ ٣٠٤ من طريق أبي الزبير عن جابر. وهو في "مسند أحمد" (١٤٢١٥). وانظر لزامًا مسألة بيع المدبر في "شرح مشكل الآثار" للإمام الطحاوي (٤٩١٨ - ٤٩٤٠)، و "المغني" ١٤/ ٤١٩ - ٤٢٠. وانظر ما بعده.









সুনান ইবনু মাজাহ (2513)


حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ دَبَّرَ رَجُلٌ مِنَّا غُلاَمًا وَلَمْ يَكُنْ لَهُ مَالٌ غَيْرُهُ فَبَاعَهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَاشْتَرَاهُ ابْنُ النَّحَّامِ رَجُلٌ مِنْ بَنِي عَدِيٍّ ‏.‏




জাবির বিন আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, আমাদের মধ্যকার এক ব্যক্তি একটি দাসকে মুদাব্বার বানালো। এ দাসটি ছাড়া তার আর কোনো সম্পত্তি ছিলো না। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তা বিক্রয় করেন এবং আদী গোত্রের ইবনু নাহ্হাম তা কিনে নেন। [২৫১৩]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. هشام بن عمار متابع، وباقي رجاله ثقات. وأخرجه البخاري (٢٥٣٤)، ومسلم بإثر الحديث (١٦٦٨) / (٥٨) و (٥٩)، والترمذي (١٢١٩)، والنسائي في "الكبرى" (٤٩٧٨) و (٤٩٧٩) من طرق عن عمرو ابن دينار، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٤١٣٣)، و"صحيح ابن حبان" (٤٩٣٠). وأخرجه البخاري (٢٤١٥)، والنسائي في "الكبرى" (٤٩٨٩) من طريق محمَّد ابن المنكدر، عن جابر. ولم يقل: إن العبد مدبر. وانظر ما قبله.









সুনান ইবনু মাজাহ (2514)


حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ ظَبْيَانَ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ الْمُدَبَّرُ مِنَ الثُّلُثِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ ابْنُ مَاجَهْ سَمِعْتُ عُثْمَانَ - يَعْنِي ابْنَ أَبِي شَيْبَةَ - يَقُولُ هَذَا خَطَأٌ يَعْنِي حَدِيثَ ‏"‏ الْمُدَبَّرُ مِنَ الثُّلُثِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عَبْدِ اللَّهِ لَيْسَ لَهُ أَصْلٌ ‏.‏




ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, মুদাব্বার (মৃতের) সম্পদের এক–তৃতীয়াংশের অন্তর্ভুক্ত। ইমাম ইবনু মাজা (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, আমি উছমান বিন আবূ শায়বা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) কে বলতে শুনেছি যে, “মুদাব্বার মৃতের (সম্পদের) এক-তৃতীয়াংশের অন্তর্ভুক্ত” শীর্ষক হাদীসটি ভুল। আবূ আবদুল্লাহ ইবনু মাজা (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, এ হাদীসের কোন ভিত্তি নেই। [২৫১৪]

তাহকীক আলবানীঃ বানোয়াট।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * موضوع




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف جدًا ، علي بن ظبیان: ضعیف (تقریب: 4756) ، ورجع عن رفعہ،والموقوف ھو الصحیح،، وللمر فوع شاہد ضعیف جدًا، (انوار الصحیفہ ص 469، 470)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف جدًا، علي بن ظبيان متروك، والجمهور على تضعيفه. وقد روي هذا الحديث موقوفًا وهو أصح. عبيد الله: هو ابن عمر العمري. وأخرجه العقيلي في ترجمة علي بن ظبيان من "الضعفاء" ٣/ ٢٣٤، والطبراني (١٣٣٦٥)، والدارقطني (٤٢٦٣)، والبيهقي ١٥/ ٣١٤، والمزي في ترجمة علي بن ظبيان من "تهذيب الكمال" ٢٠/ ٥٠٢ من طرق عن علي، بهذا الإسناد. وأخرجه البيهقي ١٠/ ٣١٤ من طريق الشافعي، عن علي بن ظبيان، به موقوفًا على ابن عمر، وقال الشافعي: قال لي علي بن ظبيان: كنت أحدث به مرفوعًا، فقال لي أصحابي: ليس بمرفوع، وهو موقوف على ابن عمر فوقفته. والحفاظ يقفونه على ابن عمر. وأخرجه الدارقطني (٤٢٦٤) من طريق عبيدة بن حسان، عن أيوب، عن نافع، عن ابن عمر مرفوعًا بلفظ: "المدبر لا يباع ولا يوهب، وهو حر من الثلث" وقال: لم يُسنده غير عبيدة بن حسان، وهو ضعيف، وإنما هو عن ابن عمر موقوفًا من قوله. وأخرجه الدارمي (٣٢٧٣) من طريق شريك بن عبد الله النخعي، عن الأشعث بن سوار الكندي، عن نافع، عن ابن عمر مرفوعًا أيضًا. وشريك سيئ الحفظ والأشعث ضعيف. وأخرجه أبو داود في "المراسيل" (٣٥١)، والبيهقي ١٥/ ٣١٤ عن أبي قلابة عن النبي ﷺ مرسلًا. وإسناده ضعيف.









সুনান ইবনু মাজাহ (2515)


حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا شَرِيكٌ، عَنْ حُسَيْنِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَيُّمَا رَجُلٍ وَلَدَتْ أَمَتُهُ مِنْهُ فَهِيَ مُعْتَقَةٌ عَنْ دُبُرٍ مِنْهُ ‏"‏ ‏.‏




ইবনু আব্বাস (রা:) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ কোন ব্যক্তির ঔরসে তার বাঁদীর গর্ভে সন্তান হলে, সে বাঁদী তার (মালিকের) মৃত্যুর পর স্বয়ং দাসত্বমুক্ত হয়ে যাবে। [২৫১৫]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، حسین بن عبد اللّٰہ: ضعیف ، (انوار الصحیفہ ص 470)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف لضعف حسين بن عبد الله. وكيع: هو ابن الجراح. وأخرجه أحمد (٢٧٥٩) و (٢٩١٠) و (٢٩٣٧)، وابن عدي في "الكامل" ٢/ ٧٦١، والدارقطني (٤٢٢٩) و (٤٢٣٥) و (٤٢٣٢) و (٤٢٣٦)، والحاكم ٢/ ١٩، والبيهقي ١٠/ ٣٤٦ من طرق عن حسين، بهذا الإسناد. وأخرج البيهقي ١٠/ ٣٤٦ من طريق سعيد الثوري والحكم بن أبان -فرَّقهما-، عن عكرمة، عن عمر قال: إذا ولدت أم الولد من سيدها فقد عتقت وإن كان سقطًا. وعكرمة لم يسمع من عمر. وأخرجه أيضًا من طريق خصيف الجزري، عن عكرمة، عن ابن عباس، عن عمر. وخصيف ضعيف. قال البيهقي: والصحيح حديث سعيد الثوري والحكم بن أبان. يعني دون ذكر ابن عباس. قلنا: لكن صح عن عمر من طريق أخرى، أخرجها مالك في "الموطأ" ٢/ ٧٧٦ عن نافع، عن ابن عمر، أن عمر بن الخطاب قال: أيما وليدة ولدت من سيدها، فإنه لا يبيعها ولا يهبها ولا يُورثها، وهو يستمتع بها، فإذا مات فهي حرة. وجمهور أهل العلم على قول عمر ؓ هذا.









সুনান ইবনু মাজাহ (2516)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُوسُفَ، حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ، حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ يَعْنِي النَّهْشَلِيَّ، عَنِ الْحُسَيْنِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ ذُكِرَتْ أُمُّ إِبْرَاهِيمَ عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ فَقَالَ ‏ "‏ أَعْتَقَهَا وَلَدُهَا ‏"‏ ‏.‏




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট (তাঁর পুত্র) ইবরাহীমের মা (মারিয়া কিবতিয়া) ’র কথা উত্থাপিত হলে তিনি বলেনঃ তাঁর সন্তান তাকে দাসত্বমুক্ত করেছে। [২৫১৬]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: ضعیف ، أبو بکر بن أبي سبرۃ: ضعیف جدًا ، وانظر الحدیث السابق (2515) ، (انوار الصحیفہ ص 470)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف جدًا، حسين بن عبد الله ضعيف، وأبو بكر: هو ابن أبي سبرة، والقول هنا بأنه النهشلي وهم من قائله، فقد رواه الدارقطني (٤٢٣٨) من طريق أبي عاصم الضحاك بن مخلد، فقال: عن أبي بكر بن أبي سبرة، ورواه العنقزي عند الدارقطني (٤٢٣٣)، وعبد الحميد بن أبي أويس عنده (٤٢٣٧)، وشبابة عنده أيضًا (٤٢٣٩)، والقعنبي عند الحاكم ٢/ ١٩، والبيهقي ١٠/ ٣٤٦، أربعتهم قالوا: عن أبي بكر بن أبي سبرة، قلنا: وابن أبي سبرة هذا متهم بالوضع، لكنه لم ينفرد به كما سيأتي. وأخرجه الدارقطني (٤٢٣٤) و (٤٢٣٦) و (٤٢٤٥) من طريقين عن حسين بن عبد الله، بهذا الإسناد. وأخرج الدارقطني (٤٢٣٥)، والبيهقي ١٠/ ٣٤٦ من طريق سعيد بن زكريا المدائني، عن ابن أبي سارة، عن ابن أبي حسين، عن عكرمة، به. وسعيد بن زكريا فيه لين، وابن أبي سارة مجهول. وأخرجه ابن حزم في "المحلى" ٩/ ١٨ من طريق مصعب بن سعيد، عن عبد الله بن عمرو الرقي، عن عبد الكريم الجزري، عن عكرمة، به. ومصعب بن سعيد -وهو أبو خيثمة المصيصي- صاحب مناكير. وأخرجه البيهقي ١٠/ ٣٤٧ عن عبيد الله بن أبي جعفر مرسلًا، وسنده إلى عبيد الله حَسَنٌ. وهذا أصح ما في الباب مرفوعًا. وفي الباب عن عائشة عند البخاري (٢٧٣٩)، ومسلم (١٦٣٥) بلفظ: ما ترك رسول الله ﷺ عند موته درهما ولا دينارًا ولا عبدًا ولا أمةً ولا شيئًا إلا بغلته البيضاء وسلاحه وأرضا جعلها صدقة. قال البيهقي: وفي ذلك دلالة على أنه لم يترك أم إبراهيم أمة، وأنها عتقت بموته بما تقدم من حرمة الاستيلاد.









সুনান ইবনু মাজাহ (2517)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، وَإِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، أَخْبَرَنِي أَبُو الزُّبَيْرِ، أَنَّهُ سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، يَقُولُ كُنَّا نَبِيعُ سَرَارِينَا وَأُمَّهَاتِ أَوْلاَدِنَا وَالنَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فِينَا حَىٌّ لاَ نَرَى بِذَلِكَ بَأْسًا ‏.‏




জাবির বিন আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাদের মাঝে জীবিত থাকা অবস্থায় আমরা আমাদের যুদ্ধবন্দিনী ক্রীতদাসী ও উম্মু ওয়ালাদ বিক্রয় করতাম। আমরা এটিকে দুষণীয় মনে করতাম না। [২৫১৭]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. ابن جريج: هو عبد الملك بن عبد العزيز، وأبو الزبير: هو محمَّد بن مسلم بن تدرس المكي. وهو في "مصنف عبد الرزاق" (١٣٢١١). وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٥٠٢١) و (٥٥٢٢) من طريق ابن جريج، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٤٤٤٦)، و"صحيح ابن حبان" (٤٣٢٣). وأخرجه أبو داود (٣٩٥٤) من طريق عطاء بن أبي رباح، عن جابر قال: كنا نبيع أمهات الأولاد على عهد رسول الله ﷺ وأبي بكر، فلما كان عمر نهى عن بيعهن. قال البيهقي في "سننه" ١٠/ ٣٤٨: ليس في شيء من هذه الأحاديث أن النبي ﷺ علم بذلك فأقرهم عليه، وانظر لزامًا في ما علقناه على هذا الحديث في "المسند".









সুনান ইবনু মাজাহ (2518)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَبْدُ اللهِ بْنُ سَعِيدٍ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الْأَحْمَرُ عَنْ ابْنِ عَجْلَانَ عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي سَعِيدٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم ثَلَاثَةٌ كُلُّهُمْ حَقٌّ عَلَى اللهِ عَوْنُهُ الْغَازِي فِي سَبِيلِ اللهِ وَالْمُكَاتَبُ الَّذِي يُرِيدُ الْأَدَاءَ وَالنَّاكِحُ الَّذِي يُرِيدُ التَّعَفُّفَ




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ তিন শ্রেনীর লোকের প্রত্যেককে সাহায্য করা আল্লাহর কর্তব্য (যদিও কোন কাজ তার জন্য বাধ্যতামূলক নয়) : আল্লাহর রাস্তায় জিহাদকারী, মুকাতাব চুক্তিবদ্ধ দাস যে তার চুক্তিকৃত অর্থ পরিশোধ করতে সংকল্পবদ্ধ এবং যে বিবাহকারী পূত-পবিত্র থাকতে ইচ্ছুক। [২৫১৮]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده قوي من أجل ابن عجلان، واسمه محمَّد. أبو خالد الأحمر: هو سليمان بن حيان. وأخرجه الترمذيُّ (١٧٥٠)، والنسائي ٦/ ١٥ - ١٦ و٦١ من طريقين عن محمَّد ابن عجلان، بهذا الإسناد. وقال الترمذيُّ: حديث حسن. وهو في "مسند أحمد" (٧٤١٦)، و"صحيح ابن حبان" (٤٠٣٠).









সুনান ইবনু মাজাহ (2519)


حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ، عَنْ حَجَّاجٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَيُّمَا عَبْدٍ كُوتِبَ عَلَى مِائَةِ أُوقِيَّةٍ فَأَدَّاهَا إِلاَّ عَشْرَ أُوقِيَّاتٍ فَهُوَ رَقِيقٌ ‏"‏ ‏.‏




আবদুল্লাহ বিন আমর ইবনুল আস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ যে গোলাম এক শত উকিয়ার বিনিময়ে মুক্তিলাভ করতে চুক্তিবদ্ধ, দশ উকিয়া ব্যতিত বাকিটা পরিশোধ করতে পারলে সে আযাদ। [২৫১৯]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث حسن، حجاج -وهو ابن أرطاة- مدلس ورواه بالعنعنة، لكنه متابع. أبو كريب: هو محمَّد بن العلاء. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٥٠٠٧) من طريق حجاج، بهذا الإسناد. وأخرجه أبو داود (٣٩٢٦) و (٣٩٢٧)، والترمذي (١٣٠٦) من طرق عن عمرو ابن شعيب، به. وهو في "مسند أحمد" (٦٦) و (٦٧٢٦). وأخرجه مطولًا النسائي (٥٠١٠) من طريق ابن جريج، أخبرني عطاء الخراساني، عن عبد الله بن عمرو مطولًا. وعطاه هذا صاحب أوهام، وموصوف بالإرسال والتدليس، ولا يُعرف له سماع من عبد الله بن عمرو. وهو في "صحيح ابن حبان" (٤٣٢١).









সুনান ইবনু মাজাহ (2520)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ نَبْهَانَ، - مَوْلَى أُمِّ سَلَمَةَ - عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ، أَنَّهَا أَخْبَرَتْ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ إِذَا كَانَ لإِحْدَاكُنَّ مُكَاتَبٌ وَكَانَ عِنْدَهُ مَا يُؤَدِّي فَلْتَحْتَجِبْ مِنْهُ ‏"‏ ‏.‏




উম্মু সালামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ তোমাদের (মহিলাদের) মালিকানায় কারো মুকতাব দাস থাকলে এবং তার নিকট চুক্তিকৃত অর্থের সম-পরিমান সম্পদ থাকলে তার থেকে তোমাদের পর্দা করা উচিত। [২৫২০]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف، نبهان -وهو مكاتب أم سلمة- مجهول لم يذكروا في الرواة عنه سوى الزهري ومحمد بن عبد الرحمن مولى آل طلحة على خلاف في رواية الثاني عنه. وأخرجه أبو داود (٣٩٢٨)، والترمذي (١٣٠٧)، والنسائي في "الكبرى" (٥٠١١ - ٥٠١٦) من طرق عن الزهري، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٦٤٧٣)، و"شرح مشكل الآثار" (٢٩٨)، و"صحيح ابن حبان" (٤٣٢٢). ويُعارضه ما أخرجه البيهقي ١٠/ ٣٢٤ بإسناد صحيح عن سليمان بن يسار، عن عائشة، قال: استأذنتُ عليها، فقالت: مَن هذا؟ فقلت: سليمان. قالت: كم بقي عليك من مكاتبتك؟ قال: قلت: عشر أواق. قالت: ادخُل، فإنك عبدٌ ما بقي عليك درهم.









সুনান ইবনু মাজাহ (2521)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، زَوْجِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّ بَرِيرَةَ أَتَتْهَا وَهِيَ مُكَاتَبَةٌ قَدْ كَاتَبَهَا أَهْلُهَا عَلَى تِسْعِ أَوَاقٍ فَقَالَتْ لَهَا إِنْ شَاءَ أَهْلُكِ عَدَدْتُ لَهُمْ عَدَّةً وَاحِدَةً وَكَانَ الْوَلاَءُ لِي قَالَ فَأَتَتْ أَهْلَهَا فَذَكَرَتْ ذَلِكَ لَهُمْ فَأَبَوْا إِلاَّ أَنْ تَشْتَرِطَ الْوَلاَءَ لَهُمْ فَذَكَرَتْ عَائِشَةُ ذَلِكَ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏"‏ افْعَلِي ‏"‏ ‏.‏ قَالَتْ فَقَامَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَخَطَبَ النَّاسَ فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ ثُمَّ قَالَ ‏"‏ مَا بَالُ رِجَالٍ يَشْتَرِطُونَ شُرُوطًا لَيْسَتْ فِي كِتَابِ اللَّهِ كُلُّ شَرْطٍ لَيْسَ فِي كِتَابِ اللَّهِ فَهُوَ بَاطِلٌ وَإِنْ كَانَ مِائَةَ شَرْطٍ كِتَابُ اللَّهِ أَحَقُّ وَشَرْطُ اللَّهِ أَوْثَقُ وَالْوَلاَءُ لِمَنْ أَعْتَقَ ‏"‏ ‏.‏




নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর স্ত্রী আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, বারীরা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তার নিকট এলেন, তিনি ছিলেন মুকাতাবা। তিনি তার মালিকের সাথে নয় উকিয়া পরিশোধে চুক্তিবদ্ধ হয়েছিলেন। আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাকে বলেন, তোমার মালিক চাইলে আমি এককালীন তাদেরকে তা পরিশোধ করে দিতে পারি এই শর্তে যে, ওয়ালার মালিক হবো আমি। রাবী বলেন, বারীরা তার মালিকের নিকট এসে একথা জানালে তারা এতে অসম্মতি জানায় এবং ওয়ালার মালিকানা তাদের থাকার শর্ত আরোপ করে। আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বিষয়টি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট উল্লেখ করলে তিনি বলেনঃ তুমি তাকে ক্রয় করো। রাবী বলেন, অতঃপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) লোকদের উদ্দেশে দাঁড়িয়ে খুতবা দিলেন। তিনি প্রথমে আল্লাহর প্রশংসা ও গুনগান করেন, তারপর বলেনঃ লোকদের কী হলো যে, তারা এমন সব শর্ত আরোপ করে, যা আল্লাহর কিতাবে নাই। যেসব শর্ত আল্লাহর কিতাবে নাই তা বাতিল, যদিও তা সংখ্যায় একশত হয়। আল্লাহর কিতাবই যথার্থ এবং আল্লাহর শর্তই অধিক মজবুত। ওয়ালার মালিক হবে আযাদকারী। [২৫২১]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. وكيع: هو ابن الجراح، وعروة: هو ابن الزبير. وأخرجه مطولًا ومختصرًا البخاري (١٥٦٣)، ومسلم (١٥٠٤) (٦ - ٩) و (١٣)، وأبو داود (٢٢٣٣) و (٣٩٢٩) و (٣٩٣٠)، والترمذي (١١٥٤)، والنسائي ٦/ ١٠٤ و١٠٥ من طرق عن عروة، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٤١٨٧)، و "صحيح ابن حبان" (٤٣٢٥). وأخرجه البخاري (٢١٦٩)، ومسلم (١٥٠٤) (٥)، وأبو داود (٢٩١٥)، والنسائي ٧/ ٣٠٠ من طريق نافع، عن ابن عمر: أن عائشة أرادت أن تشتري … ، وعند مسلم: عن ابن عمر عن عائشة أنها أرادت … فذكر نحوه. وأخرجه البخاري (٤٥٦) من طريق عمرة، عن عائشة. وانظر ما سلف برقم (٢٠٧٤) و (٢٠٧٦).