হাদীস বিএন


সুনান ইবনু মাজাহ





সুনান ইবনু মাজাহ (2882)


حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، وَأَبُو مُصْعَبٍ الزُّهْرِيُّ وَسُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ قَالُوا حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ، عَنْ سُمَىٍّ، مَوْلَى أَبِي بَكْرِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ السَّمَّانِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ السَّفَرُ قِطْعَةٌ مِنَ الْعَذَابِ يَمْنَعُ أَحَدَكُمْ نَوْمَهُ وَطَعَامَهُ وَشَرَابَهُ فَإِذَا قَضَى أَحَدُكُمْ نَهْمَتَهُ مِنْ سَفَرِهِ فَلْيُعَجِّلِ الرُّجُوعَ إِلَى أَهْلِهِ ‏"‏ ‏.‏

حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ حُمَيْدِ بْنِ كَاسِبٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ، عَنْ سُهَيْلٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِنَحْوِهِ ‏.‏




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ সফর শাস্তিরই একটি টুকরা। তা তোমাদের যে কোন ব্যক্তির ঘুম ও পানাহারকে বাধাগ্রস্ত করে। তোমাদের যে কেউ সফরে নিজ প্রয়োজন পূরণ হওয়ার সাথে সাথে যেন অবিলম্বে বাড়ি ফিরে আসে।

[উপরোক্ত হাদীসে মোট ৪টি সানাদের ৩টি বর্ণিত হয়েছে, অপর সানাদটি হলো:]

২/২৮৮২ (১) . আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) , নবী (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সূত্রে অনুরূপ বর্ণিত আছে। [২৮৮২]

তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح، الف: متفق علیہ، ب: صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. وأخرجه البخاري (١٨٠٤)، ومسلم (١٩٢٧)، والنسائي في "الكبرى" (٨٧٣٢) و (٨٧٣٣) من طريق مالك بن أنس، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٧٢٢٥)، و"صحيح ابن حبان" (٢٧٠٨). قوله: "نهمته" قال السندي: بفتح فسكون، أي: حاجته. * صحيح بما قبله، يعقوب بن حميد بن كاسب -وإن كان ضعيفًا- قد توبع









সুনান ইবনু মাজাহ (2883)


حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، وَعَمْرُو بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ أَبُو إِسْرَائِيلَ، عَنْ فُضَيْلِ بْنِ عَمْرٍو، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنِ الْفَضْلِ، - أَوْ أَحَدِهِمَا عَنِ الآخَرِ، - قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ أَرَادَ الْحَجَّ فَلْيَتَعَجَّلْ فَإِنَّهُ قَدْ يَمْرَضُ الْمَرِيضُ وَتَضِلُّ الضَّالَّةُ وَتَعْرِضُ الْحَاجَةُ ‏"‏ ‏.‏




ইবনুল আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ যে ব্যক্তি হজ্জের সংকল্প করে সে যেন অবিলম্বে তা আদায় করে। কারণ মানুষ কখনও আসুস্থ হয়ে যায়, কখনও প্রয়োজনীয় জিনিস বিলুপ্ত হয়ে যায় এবং কখনও অপরিহার্য প্রয়োজন সামনে এসে যায়। [২৮৮৩]

তাহকীক আলবানীঃ হাসান।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث حسن، وهذا إسناد ضعيف لضعف إسماعيل -وهو ابن خيفة العبسي-، وقد توبع. وأخرجه أحمد (١٨٣٣) و (١٨٣٤) من طريق أبي إسرائيل، بهذا الإسناد. وأخرجه الطبراني ١٨/ (٧٣٧)، والبيهقي ٤/ ٣٤٠ من طريق أبي الوليد الطيالسي، عن أبي إسرائيل، به. وفي أحد أسانيد البيهقي: "ابن عباس أو الفضل أو عن أحدهما" قلنا: سعيد ابن جبير سمع من ابن عباس ولم يدرك أخاه الفضل بن عباس. وأخرجه أحمد (٢٨٦٧) عن عبد الرزاق، عن الثوري، عن أبي إسرائيل، به عن ابن عباس دون شك. وأخرجه الطبراني (٧٣٨) عن العباس بن حمدان الأصبهاني، عن يحيى بن حكيم، عن كثير بن هشام، عن فرات بن سلمان، عن عبد الكريم الجزري، عن سعيد بن جبير، عن ابن عباس، عن الفضل وأحدهما عن الآخر. وسنده جيّد. وأخرجه أحمد (١٩٧٣)، وأبو داود (١٧٣٢) من طريق مهران أبي صفوان، عن ابن عباس مرفوعًا: "من أراد الحج فليتعجل". ومهران أبو صفوان مجهول الحال









সুনান ইবনু মাজাহ (2884)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا مَنْصُورُ بْنُ وَرْدَانَ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي الْبَخْتَرِيِّ، عَنْ عَلِيٍّ، قَالَ لَمَّا نَزَلَتْ ‏{‏وَلِلَّهِ عَلَى النَّاسِ حِجُّ الْبَيْتِ مَنِ اسْتَطَاعَ إِلَيْهِ سَبِيلاً‏}‏‏.‏ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ الْحَجُّ فِي كُلِّ عَامٍ فَسَكَتَ ثُمَّ قَالُوا أَفِي كُلِّ عَامٍ فَقَالَ ‏"‏ لاَ وَلَوْ قُلْتُ نَعَمْ لَوَجَبَتْ ‏"‏ ‏.‏ فَنَزَلَتْ ‏{‏يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لاَ تَسْأَلُوا عَنْ أَشْيَاءَ إِنْ تُبْدَ لَكُمْ تَسُؤْكُمْ ‏}‏‏.‏




আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, যখন এ আয়াত নাযিল হলো (অনুবাদ) : “মানুষের মধ্যে যার সেখানে যাওয়ার সামর্থ্য আছে, আল্লাহর উদ্দেশ্যে ঐ ঘরের হজ্জ করা তার অবশ্য কর্তব্য” (সূরা আল ইমরান : ৯৭) , তখন সাহাবীগণ জিজ্ঞেস করেন, হে আল্লাহর রাসূল! প্রতি বছরই কি হজ্জ ফারদ? তিনি নিরুত্তর থাকলেন। পুনরায় তারা বলেন, প্রতি বছরই কি? তিনি বলেন, না। কিন্তু আমি যদি বলতাম, হাঁ, তবে তদ্রুপই ওয়াজিব হতো। অতঃপর নিম্নোক্ত আয়াত নাযিল হয় (অনুবাদ) : “হে ঈমানদারগণ! তোমরা এমন বিষয়ে প্রশ্ন করো না যা প্রকাশিত হলে তোমরা দুঃখিত হবে...” (সুরা মাইদাহ: ১০১)। [২৮৮৪]

তাহকীক আলবানীঃ দঈফ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف، ترمذي (814)، (انوار الصحیفہ ص 482)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف، عبد الأعلى بن عامر الثعلبي والد علي ضعيف، وأبو البختري -واسمه سعيد بن فيروز- لم يسمع عليًا. لكن للحديث شواهد صحيحة بغير هذه السياقة. وأخرجه الترمذي (٨٢٥) و (٣٣٠٧) من طريق منصور بن وردان، بهذا الإسناد. وانظر ما بعده









সুনান ইবনু মাজাহ (2885)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي عُبَيْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ الْحَجُّ فِي كُلِّ عَامٍ قَالَ ‏ "‏ لَوْ قُلْتُ نَعَمْ لَوَجَبَتْ وَلَوْ وَجَبَتْ لَمْ تَقُومُوا بِهَا وَلَوْ لَمْ تَقُومُوا بِهَا عُذِّبْتُمْ ‏"‏ ‏.‏




আনাস বিন মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, সাহাবীগণ জিজ্ঞেস করেন, হে আলাহর রাসূল! প্রতি বছরই কি হজ্জ ফারদ? তিনি বলেনঃ আমি যদি বলি হাঁ, তবে তা অবশ্যই ওয়াজিব (ফারদ) হতো। আর যদি তা ওয়াজিব হতো তবে তোমরা তা আদায় করতে অক্ষম হয়ে পড়তে। আর তোমরা যদি তা আদায় করতে না পারতে তবে তোমাদের শাস্তি দেয়া হতো। [২৮৮৫]

তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف، سلیمان الأعمش عنعن ، و روی مسلم (1337): ((لو قلت: نعم،لوجبت و لما استطعتم)) وھو یغني، عنہ، (انوار الصحیفہ ص 482)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده قوي. أبو عبيدة: هو عبد الملك بن معن بن عبد الرحمن بن عبد الله ابن مسعود، وأبو سفيان: هو طلحة بن نافع. وأخرجه أبو يعلى (٣٦٩٠) عن محمَّد بن عبد الله بن نمير، بهذا الإسناد مطولًا. وفي الباب عن أبي هريرة عند مسلم (١٣٣٧) وغيره، قال: خطبنا رسول الله ﷺ، فقال: "أيها الناس قد فرض الله عليكم الحج فحجوا" فقال رجل: أكل عام يا رسول الله؟ فسكت حتى قالها ثلاثًا، فقال رسول الله ﷺ:"لو قلت: نعم لوجبت ولما استطعتم"، ثم قال: "ذروني ما تركتكم … " إلخ









সুনান ইবনু মাজাহ (2886)


حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الدَّوْرَقِيُّ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ، أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ بْنُ حُسَيْنٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ أَبِي سِنَانٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ الأَقْرَعَ بْنَ حَابِسٍ، سَأَلَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ الْحَجُّ فِي كُلِّ سَنَةٍ أَوْ مَرَّةً وَاحِدَةً قَالَ ‏ "‏ بَلْ مَرَّةً وَاحِدَةً فَمَنِ اسْتَطَاعَ فَتَطَوُّعٌ ‏"‏ ‏.‏




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, আল-আকরা’ বিন হাসিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) মহানবী (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট জিজ্ঞেস করেন, হে আল্লাহর রাসূল! হজ্জ কি প্রতি বছর, না মাত্র একবার? তিনি বলেনঃ বরং একবার মাত্র। অতঃপর এর অধিক করার কারো সামর্থ্য থাকলে তা নফল। [২৮৮৬]

তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح، سفيان بن حسين وهو وإن كان ثقة إلا في روايته عن الزهري، قد توبع. أبو سنان: هو يزيد بن أمية الدؤلي. وأخرجه أبو داود (١٧٢١) من طريق يزيد بن هارون، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٣٣٠٣). وأخرجه أحمد (٢٣٠٤) من طريق سليمان بن كثير، و (٣٥١٠) من طريق محمَّد بن أبي حفصة، و (٣٥٢٠) من طريق زمعة بن صالح، والنسائي ٥/ ١١١ من طريق عبد الجليل بن حميد، أربعتهم عن الزهري، به. وليس في رواية أحمد الثالثة ورواية النسائي قوله: "فمن زاد فتطوع". وانظر ما قبله









সুনান ইবনু মাজাহ (2887)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَامِرٍ، عَنْ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ تَابِعُوا بَيْنَ الْحَجِّ وَالْعُمْرَةِ فَإِنَّ الْمُتَابَعَةَ بَيْنَهُمَا تَنْفِي الْفَقْرَ وَالذُّنُوبَ كَمَا يَنْفِي الْكِيرُ خَبَثَ الْحَدِيدِ ‏"‏ ‏.‏

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ، عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَامِرِ بْنِ رَبِيعَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ نَحْوَهُ ‏.‏




উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, মহানবী (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ তোমরা ধারাবাহিকভাবে হজ্জ ও উমরাহ আদায় করো। কেননা এ দু’টি ধারাবাহিকভাবে আদায় করলে তা দারিদ্র ও গুনাহ দূরীভুত করে, যেমন হাপর লোহার মরিচা দূর করে।
[উপরোক্ত হাদীসে মোট ২টি সানাদের ১টি বর্ণিত হয়েছে, অপর সানাদটি হলোঃ]
২/২৮৮৭ (১) . উমার ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) , মহানবী (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সূত্রে উপরোক্ত হাদীসের অনুরূপ বর্ণিত আছে। [২৮৮৭]

তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * صحيح لغيره، وهذا إسناد ضعيف لضعف عاصم بن عبيد الله. وانظر تخريجه في التعليق السابق. ويشهد له حديث ابن عباس عند النسائي ٥/ ١١٥. وهو حديث حسن. وحديث ابن مسعود عند الترمذي (٨٢١)، والنسائي ٥/ ١١٥ - ١١٦ وهو حسن. * إسناده ضعيف كسابقه









সুনান ইবনু মাজাহ (2888)


حَدَّثَنَا أَبُو مُصْعَبٍ، حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ، عَنْ سُمَىٍّ، - مَوْلَى أَبِي بَكْرِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ - عَنْ أَبِي صَالِحٍ السَّمَّانِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ الْعُمْرَةُ إِلَى الْعُمْرَةِ كَفَّارَةُ مَا بَيْنَهُمَا وَالْحَجُّ الْمَبْرُورُ لَيْسَ لَهُ جَزَاءٌ إِلاَّ الْجَنَّةُ ‏"‏ ‏.‏




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ এক উমরাহ থেকে অপর উমরাহ মাঝখানের সময়ের জন্য কাফ্‌ফারাস্বরূপ এবং জান্নাতই হলো মাবরূর (ত্রুটিমুক্ত) হজ্জের প্রতিদান। [২৮৮৮]

তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. وأخرجه البخاري (١٧٧٣)، ومسلم (١٣٤٩)، والنسائي ٥/ ١١٢ و ١١٢ - ١١٣ و١١٥ من طريق سمي، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٧٣٥٤)، و"صحيح ابن حبان" (٣٦٩٥)









সুনান ইবনু মাজাহ (2889)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ مِسْعَرٍ، وَسُفْيَانَ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ مَنْ حَجَّ هَذَا الْبَيْتَ فَلَمْ يَرْفُثْ وَلَمْ يَفْسُقْ رَجَعَ كَمَا وَلَدَتْهُ أُمُّهُ ‏"‏ ‏.‏




আবূ হুরায়রাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ যে ব্যক্তি এই ঘরের হজ্জ করেছে এবং তাতে অশালীন কথাবার্তা বা আচরণ করেনি, সে এমন অবস্থায় প্রত্যাবর্তন করবে যেমন তার মা তাকে (নিষ্পাপ) প্রসব করেছে। [২৮৮৯]

তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. مسعر: هو ابن كدام، وسفيان: هو الثوري، ومنصور: هو ابن المعتمر، وأبو حازم: هو سلمان الأشجعي. وأخرجه البخاري (١٥٢١) و (١٨١٩) و (١٨٢٠)، ومسلم (١٣٥٠)، والترمذي (٨٢٢)، والنسائي ٥/ ١١٤ من طريق أبي حازم الأشجعي، عن أبي هريرة. وهو في "مسند أحمد" (٧٣٨١)، و"صحيح ابن حبان" (٣٦٩٤)









সুনান ইবনু মাজাহ (2890)


حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنِ الرَّبِيعِ بْنِ صَبِيحٍ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبَانَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ حَجَّ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ عَلَى رَحْلٍ رَثٍّ وَقَطِيفَةٍ تُسَاوِي أَرْبَعَةَ دَرَاهِمَ أَوْ لاَ تُسَاوِي ثُمَّ قَالَ ‏ "‏ اللَّهُمَّ حِجَّةٌ لاَ رِيَاءَ فِيهَا وَلاَ سُمْعَةَ ‏"‏ ‏.‏




আনাস বিন মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) (উটের পিঠে) একটি পুরাতন জিন ও পালানে উপবিষ্ট অবস্থায় হজ্জ করেন। তাঁর পরিধানে ছিল একটি চাদর যার মূল্য চার দিরহাম বা তারও কম। অতঃপর তিনি বলেনঃ হে আল্লাহ! এ এমন হজ্জ, যাতে কোন প্রদর্শনেচ্ছা বা প্রচারেচ্ছা নেই। [২৮৯০]

তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، یزید بن أبان الرقاشي ضعیف ، ولہ شاھد ضعیف عند ابن خزیمۃ (2836) ، وللحدیث شواھد ضعیفۃ، (انوار الصحیفہ ص 482)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف، الربيع بن صبيح وشيخه يزيد بن أبان -وهو الرقاشي- ضعيفان. وأخرجه ابن أبي شيبة ٤/ ١٠٦، وهناد في "الزهد" (٨٢١)، وابن سعد في "الطبقات" ٢/ ١٧٧، والترمذي في "الشمائل" (٣٢٧) و (٣٣٣) وابن عدي في ترجمة الربيع بن صبيح من "الكامل" ٣/ ٩٩٣ من طريق الربيع بن صبيح، بهذا الإسناد. وأخرج البخاري (١٥١٧) من طريق ثمامة بن عبد الله بن أنس، عن أنس: أن رسول الله ﷺ حج على رَحْلٍ وكانت زاملته









সুনান ইবনু মাজাহ (2891)


حَدَّثَنَا أَبُو بِشْرٍ، بَكْرُ بْنُ خَلَفٍ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ، عَنْ دَاوُدَ بْنِ أَبِي هِنْدٍ، عَنْ أَبِي الْعَالِيَةِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ بَيْنَ مَكَّةَ وَالْمَدِينَةِ فَمَرَرْنَا بِوَادٍ فَقَالَ ‏"‏ أَىُّ وَادٍ هَذَا ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا وَادِي الأَزْرَقِ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ كَأَنِّي أَنْظُرُ إِلَى مُوسَى ـ صلى الله عليه وسلم ـ - فَذَكَرَ مِنْ طُولِ شَعَرِهِ شَيْئًا لاَ يَحْفَظُهُ دَاوُدُ - وَاضِعًا إِصْبَعَيْهِ فِي أُذُنَيْهِ لَهُ جُؤَارٌ إِلَى اللَّهِ بِالتَّلْبِيَةِ مَارًّا بِهَذَا الْوَادِي ‏"‏ ‏.‏ قَالَ ثُمَّ سِرْنَا حَتَّى أَتَيْنَا عَلَى ثَنِيَّةٍ فَقَالَ ‏"‏ أَىُّ ثَنِيَّةٍ هَذِهِ ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا ثَنِيَّةُ هَرْشَى أَوْ لَفْتٍ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ كَأَنِّي أَنْظُرُ إِلَى يُونُسَ عَلَى نَاقَةٍ حَمْرَاءَ عَلَيْهِ جُبَّةُ صُوفٍ وَخِطَامُ نَاقَتِهِ خُلْبَةٌ مَارًّا بِهَذَا الْوَادِي مُلَبِّيًا ‏"‏ ‏.‏




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, আমরা রাসূলুল্লাহ (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর সাথে মক্কা ও মদীনার মাঝপথে ছিলাম। আমরা একটি উপত্যকা অতিক্রম করাকালে তিনি বলেনঃ এটা কোন্‌ উপত্যকা? সাহাবীগণ বলেন, আল-আযরাক উপত্যকা। তিনি বলেনঃ আমি মূসা (আঃ) -কে দেখতে পাচ্ছি। অতঃপর তিনি নিজের দু’ আংগুল কর্ণদ্বয়ে স্থাপন করে তাঁর দীর্ঘ কেশের কিছুটা বর্ণনা দেন, যা রাবী দাউদ পূর্ণ মনে রাখতে পারেননি। তিনি উচ্চৈঃস্বরে আল্লাহর দরবারে ফরিয়াদ করতে করতে তালবিয়া পাঠরত অবস্থায় এ উপত্যকা অতিক্রম করেন। রাবী বলেন, অতঃপর আমরা পথ অতিক্রম করে একটি টিলার উপর আসলাম। তিনি বলেন, এটা কোন টিলা? সাহাবীগণ বলেন, এটা হারশা অথবা লিফাত (লাফ্‌ত) নামীয় টিলা। তিনি বলেন, আমি যেন ইউনুস (আঃ) -কে একটি লাল বর্ণের উষ্ট্রীর উপর পশমী জুব্বা পরিহিত অবস্থায় দেখতে পাচ্ছি, যার নাসারন্ধ্রের রমি ছিল খেজুর পাতার তৈরী এবং তিনি তালবিয়া পাঠরত অবস্থায় এ উপত্যকা অতিক্রম করেন। [২৮৯১]

তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. ابن أبي عدي: هو محمَّد بن إبراهيم، وأبو العالية: هو رفيع بن مهران. وأخرجه مسلم (١٦٦) من طريق داود بن أبي هند، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٨٥٣)، و"صحيح ابن حبان" (٣٨٠١). قوله: "جؤار" قال السندي: بجيم مضمومة ثم همزة: رفع الصوت. "هرشى" بفتح الهاء وإسكان الراء وبالشين المعجمة مقصورة الألف، وهو جبل على طريق الشام والمدينة قريب من الجحفة. "خُلبة" بضم خاء معجمة، وبالباء الموحدة، بينهما لام مضمومة أو ساكنة، وهو الليف. وقد نقل النووي في "شرح مسلم" ٢/ ١٩٧ عن القاضي عياض أحد الوجوه الذي فسر بها الحديث ونصه: أنه ﷺ أُري أحوالهم التي كانت في حياتهم، ومُثلوا له في حال حياتهم كيف كانوا وكيف حجهم وتلبيتهم، كما قال ﷺ: "كأني انظر إلى موسى … وكأني انظر إلى يونس"









সুনান ইবনু মাজাহ (2892)


حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ الْمُنْذِرِ الْحِزَامِيُّ، حَدَّثَنَا صَالِحُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ صَالِحٍ، - مَوْلَى بَنِي عَامِرٍ - حَدَّثَنِي يَعْقُوبُ بْنُ يَحْيَى بْنِ عَبَّادِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ السَّمَّانِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ الْحُجَّاجُ وَالْعُمَّارُ وَفْدُ اللَّهِ إِنْ دَعَوْهُ أَجَابَهُمْ وَإِنِ اسْتَغْفَرُوهُ غَفَرَ لَهُمْ ‏"‏ ‏.‏




আবূ হুরায়রাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ হজ্জযাত্রীগণ ও উমরার যাত্রীগণ আল্লাহর প্রতিনিধিদল। তারা তাঁর নিকট দুআ’ করলে তিনি তাদের দুআ’ কবুল করেন এবং তাঁর নিকট মাফ চাইলে তিনি তাদের ক্ষমা করেন। [২৮৯২]

তাহকীক আলবানীঃ দঈফ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، صالح بن عبد اللّٰہ بن صالح: منکر الحدیث،قالہ البخاري، (التاریخ الکبیر 285/4)، (انوار الصحیفہ ص 482)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف، صالح بن عبد الله بن صالح قال البخاري عنه: منكر الحديث، وذكره أبو زرعة في "الضعفاء"، وشيخه يعقوب بن يحيى بن عباد مجهول الحال. وأخرجه الطبراني في "الأوسط" (٦٣١١)، والبهقي في "الكبرى" ٥/ ٢٦٢، وفي "الشعب" (٤١٠٦) من طريق صالح بن عبد الله بن صالح، بهذا الإسناد. وفي الباب عن جابر عند البزار (١١٥٣ - كشف الأستار)، والفاكهي في "أخبار مكة" (٩٠٥). وفي سنده محمَّد بن أبي حميد، وهو ضعيف، قال البخاري وأبو حاتم: منكر الحديث وقال النسائي: ليس بثقة وقال أبو زرعة: ضعيف. وأخرجه الفاكهي (٩٠٦)، والبيهقي في "الشعب" (٤١٠٧) عن جابر موقوفًا، وسندهما ضعيف أيضًا. وأخرجه الفاكهي (٨٩٨)، وابن عدي في ترجمة محمَّد بن أبي حميد من "الكامل" ٦/ ٢٢٠٤، والبيهقي (٤١٠٤) من طريق محمَّد بن أبي حميد أيضًا عن عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده، فجعله من حديث عبد الله بن عمرو، قال أبو حاتم كما في "العلل" (٨٩٤): حديث منكر. وعن أنس عند البيهقي في "الشعب" (٤١٠٥)، وفي سنده ثمامة بن عبيدة متهم بالكذب. وعن ابن عمر، وهو الحديث التالي، وسيأتي الكلام عليه في موضعه. وأخرج النسائي ٥/ ١١٣ و ٦/ ١٦، وابن خزيمة (٢٥١١)، وأبو عوانة (٧٥٤٨)، وابن حبان (٣٦٩٢)، والحاكم ١/ ٤٤١، والبيهقي في "السُّنن" ٥/ ٢٦٢، و"الشعب" (٤١٠٣) من طريق عبد الله بن وهب، عن مخرمة بن بكير، عن أبيه، عن سهيل، عن أبيه أبي صالح، عن أبي هريرة رفعه: "وفد الله ثلاثة: الحاج والمعتمر والغازي". وأخرجه البيهقي في "السُّنن" ٥/ ٢٦٢، وفي "الشعب" (٤١٠١) من طريق وهيب بن خالد، عن سهيل بن أبي صالح، عن أبيه، عن مرداس، عن كعب قوله. قال البيهقي عقبه: حديث وهيب أصح -يعني من حديث عبد الله بن وهب السابق. ومثله قال أبو حاتم كما في "العلل" (١٠٠٧) بعد أن ذكر له طريقين آخرين: طريق سليمان بن بلال عن سهيل به، وطريق عاصم بن أبي صالح عن كعب قوله









সুনান ইবনু মাজাহ (2893)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ طَرِيفٍ، حَدَّثَنَا عِمْرَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ السَّائِبِ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ الْغَازِي فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَالْحَاجُّ وَالْمُعْتَمِرُ وَفْدُ اللَّهِ دَعَاهُمْ فَأَجَابُوهُ وَسَأَلُوهُ فَأَعْطَاهُمْ ‏"‏ ‏.‏




ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ আল্লাহর পথের সৈনিক, হজ্জযাত্রী ও উমরা যাত্রীগণ আল্লাহর প্রতিনিধি। তারা আল্লাহর নিকট দুআ’ করলে তিনি তা কবুল করেন এবং কিছু চাইলে তা তাদের দান করেন। [২৮৯৩]

তাহকীক আলবানীঃ হাসান।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، عطاء بن السائب اختلط وحدیث النسائي (5/ 113 ح 2626،6/ 16ح، 3123) یغني عنہ ، (انوار الصحیفہ ص 482)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف، عمران بن عيينة ليِّن، وشيخه عطاء بن السائب اختلط، وصوب أبو حاتم كما في "العلل" (٨٤٧) أنه من حديث مجاهد عن عمر، يعني أنه منقطع، ورجح وذلك مرةً أخرى (٨٨٧) من طريق آخر. وأخرجه ابن حبان (٤٦١٣)، والطبراني (١٣٥٥٦) من طريق عمران بن عيينة، بهذا الإسناد. وأخرجه البيهقي في "الشعب" (٤١٠٨) من طريق أبي الربيع أشعث بن سعيد السمان، عن عطاء بن السائب، عن مجاهد، عن ابن عمر قوله. وأشعث متروك. وأخرجه الفاكهي (٨٩٩) من طريق عثمان بن عمرو بن ساج، عن محمَّد بن عبد الله، عن مجاهد، عن ابن عمر مرفوعًا بلفظ: الحاج والمعتمر والغازي وفد الله، ضمانهم على الله حتى يدخلهم الجنة إن توفاهم، أو يرجعهم وقد غفر لهم. عثمان ابن ساج ضعيف. ثم أخرجه (٩٠٠) من طريق المثنى بن الصباح، عن مجاهد، عن ابن عمر قوله بنحو سابقه. والمثنى ضعيف. ثم أخرجه (٩٠١) من طريق إبراهيم الخوزي، عن الوليد بن عبد الله بن أبي مغيث، عن مجاهد عن ابن عمر مرفوعًا بنحو الرواية (٨٩٩) السابقة. وإبراهيم الخوزي متروك. ثم أخرجه (٩٠٢) من طريق أبان بن أبي عياش، عن أبيه، عن ابن عمر مرفوعًا. وفيه غير متروك. وأخرجه ابن أبي شيبة ص ٧٦ (الجزء الذي نشره العمروي) من طريق مجاهد، عن عبد الله بن ضمرة السلولي، عن كعب قوله. وسنده حسن. وأخرجه عبد الرزاق (٨٨٠٣) من طريق مجاهد، عن كعب قوله. وأخرجه البيهقي في "الشعب" (٤١٠٩) من طريق نافع، عن ابن عمر، عن عمر قوله وسنده ضعيف، فيه مسلم بن خالد الزنجي. وذكره ابن أبي حاتم في "العلل" (٨٨٧) من طريق إبراهيم بن المهاجر، عن أبي بكر بن حفص، عن ابن عمر مرفوعًا. وقال عن أبيه: هذا حديث خطأ إنما هو أبو بكر بن حفص عن عمر مرسلًا، وقد أدرك أبو بكر بن حفص ابنَ عمر، ولم يدرك عمر، ثم ذكره على الصواب عن عمر. وانظر الحديث السالف. قال في "النهاية": الوفد: هم القوم يجتمعون ويردون البلاد، واحدهم: وافد، وكذلك الذين يقصدون الأمراء لزيارة واسترفاد وانتجاع وغير ذلك









সুনান ইবনু মাজাহ (2894)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنْ سَالِمٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنْ عُمَرَ، أَنَّهُ اسْتَأْذَنَ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فِي الْعُمْرَةِ فَأَذِنَ لَهُ وَقَالَ ‏ "‏ يَا أُخَىَّ أَشْرِكْنَا فِي شَىْءٍ مِنْ دُعَائِكَ وَلاَ تَنْسَنَا ‏"‏ ‏.‏




উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট উমরা আদায় করার অনুমতি চাইলে তিনি তাকে অনুমতি দেন এবং বলেনঃ “হে আমার ছোট ভাই! তোমার দুআ’র মধ্যে আমাদেরকেও শরীক করবে, আমাদের ভুলে যেও না”। [২৮৯৪]

তাহকীক আলবানীঃ দঈফ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، سنن أبي داود (1498) ترمذي (3562)، (انوار الصحیفہ ص 482)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف، لضعف عاصم بن عبيد الله -وهو ابن عاصم بن عمر بن الخطاب-. وأخرجه أبو داود (١٤٩٨)، والترمذي (٣٨٧٨) من طريق عاصم بن عبيد الله، بهذا الإسناد. وقال الترمذي: حديث حسن صحيح!! وهو في "مسند أحمد" (١٩٥)









সুনান ইবনু মাজাহ (2895)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ أَبِي سُلَيْمَانَ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ صَفْوَانَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ صَفْوَانَ، قَالَ وَكَانَتْ تَحْتَهُ ابْنَةُ أَبِي الدَّرْدَاءِ فَأَتَاهَا فَوَجَدَ أُمَّ الدَّرْدَاءِ وَلَمْ يَجِدْ أَبَا الدَّرْدَاءِ فَقَالَتْ لَهُ تُرِيدُ الْحَجَّ الْعَامَ قَالَ نَعَمْ ‏.‏ قَالَتْ فَادْعُ اللَّهَ لَنَا بِخَيْرٍ فَإِنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ كَانَ يَقُولُ ‏ "‏ دَعْوَةُ الْمَرْءِ مُسْتَجَابَةٌ لأَخِيهِ بِظَهْرِ الْغَيْبِ عِنْدَ رَأْسِهِ مَلَكٌ يُؤَمِّنُ عَلَى دُعَائِهِ كُلَّمَا دَعَا لَهُ بِخَيْرٍ قَالَ آمِينَ وَلَكَ بِمِثْلِهِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ ثُمَّ خَرَجْتُ إِلَى السُّوقِ فَلَقِيتُ أَبَا الدَّرْدَاءِ فَحَدَّثَنِي عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ بِمِثْلِ ذَلِكَ ‏.‏




আবূ দারদা’ ও উম্মু দারদা’ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, আবূ দারদা’ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এর কন্যা তার বিবাহ বন্ধনে ছিল। তিনি তার নিকট এলেন এবং সেখানে উম্ম দারদা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) কেও উপস্থিত পেলেন কিন্তু আবূ দারদা’ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) কে পাননি। উম্মু দারদা’ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাকে জিজ্ঞেস করলেন, তুমি কি এ বছর হজ্জ করতে চাও? সফওয়ান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, হাঁ। তিনি বলেন, তাহলে তুমি আমাদের কল্যাণ কামনা করে আল্লাহর নিকট দুআ’ করো। কেননা নবী (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলতেন : কোন ব্যক্তি তার অপর ভাইয়ের জন্য তার অনুপস্থিতিতে দুআ’ করলে তা কবুল হয়। তার মাথার নিকট একজন ফেরেশতা তার দুআ’র সময় আমীন বলতে থাকেন। যখনই সে তার কল্যাণ কামনা করে দুআ’ করে, তখন ফেরেশতা বলেন, আমীন, তোমার জন্যও অনুরূপ কল্যাণ। রাবী বলেন, অতঃপর আমি বাজারের দিকে গেলাম এবং আবূ দারদা’ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -র সাক্ষাত পেলাম। তিনিও নবী (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর অনুরূপ হাদীস আমার নিকট বর্ণনা করেন। [২৮৯৫]

তাহকীক আলবানীঃ সহীহ




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. وأخرجه مسلم (٢٧٣٣) من طريق يزيد بن هارون، بهذا الإسناد. وأخرجه مسلم (٢٧٣٢)، وأبو داود (١٥٣٤) من طريق طلحة بن عبيد الله بن كرز، عن أم الدرداء، عن أبي الدرداء. وهو في "مسند أحمد" (٢١٧٠٧) و (٢١٧٠٨)، و "صحيح ابن حبان" (٩٨٩)









সুনান ইবনু মাজাহ (2896)


حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا مَرْوَانُ بْنُ مُعَاوِيَةَ، ح وَحَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، وَعَمْرُو بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ يَزِيدَ الْمَكِّيُّ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبَّادِ بْنِ جَعْفَرٍ الْمَخْزُومِيِّ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَامَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا يُوجِبُ الْحَجَّ قَالَ ‏"‏ الزَّادُ وَالرَّاحِلَةُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَمَا الْحَاجُّ قَالَ ‏"‏ الشَّعِثُ التَّفِلُ ‏"‏ ‏.‏ وَقَامَ آخَرُ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ وَمَا الْحَجُّ قَالَ ‏"‏ الْعَجُّ وَالثَّجُّ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ وَكِيعٌ يَعْنِي بِالْعَجِّ الْعَجِيجَ بِالتَّلْبِيَةِ وَالثَّجُّ نَحْرُ الْبُدْنِ ‏.‏




ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এক ব্যক্তি নবী (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর সামনে দাঁড়িয়ে বললো, হে আল্লাহর রাসূল! কিসে হজ্জ ফরদ হয়? তিনি বলেনঃ পাথেয় ও বাহন থাকলে। সে (পুনরায়) বললো, হে আল্লাহর রাসূল! হাজ্জী কে? তিনি বলেনঃ যার (ইহরামের কারনে) এলোমেলো কেশ এবং দুর্গন্ধ শরীর। অপর এক ব্যক্তি দাঁড়িয়ে বললো, হে আল্লাহর রাসূল! হজ্জ কী? তিনি বলেন, উচ্চৈস্বরে তালবিয়া পাঠ ও রক্ত প্রবাহিত (কোরবানী) করা। ওয়াকী’ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -এর মতে “আল-‘আজ্জ” অর্থ “তালবিয়া পাঠ” এবং “আস-সাজ্জু” অর্থ “পশু কোরবানী করা”। [২৮৯৬]

তাহকীক আলবানীঃ খুবই দুর্বল।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف جدا لكن جملة العج والثج ثبتت في حديث آخر




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، ترمذي (813،2998)، (انوار الصحیفہ ص 482)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف جدًا، إبراهيم بن يزيد المكي -وهو الخوزي- متروك الحديث، وبعضهم اتهمه. وقصة الزاد والراحلة قد رويت عن جماعة من الصحابة لا يثبت منها شيء كما قال غير واحد من أهل العلم، انظر "الوهم والإيهام" ٣/ ٤٤٨ لابن القطان، و"التلخيص الحبير" لابن حجر. وقصة العج والثج لها غير شاهد سيأتي الكلام عليها. وحديث ابن عمر أخرجه الترمذي مقطعا (٨٢٤) و (٣٢٤٣) من طريق إبراهيم الخوزي، بهذا الإسناد. وأخرج أبو يوسف في "كتاب الآثار" (٤٥٩)، وأبو يعلى (٥٠٨٦) من طريق طارق بن شهاب، عن ابن مسعود مرفوعًا: "أفضل الحج العج والثج". وسنده حسن. وله شاهد آخر عن أبي بكر الصديق سيأتي عند المصنف برقم (٢٩٢٤) ويأتي الكلام عليه هناك. وانظر ما سيأتي عند المصنف أيضًا برقم (٢٩٢٢) و (٢٩٢٣) ففيهما ما يشهد له









সুনান ইবনু মাজাহ (2897)


حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ سُلَيْمَانَ الْقُرَشِيُّ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، قَالَ وَأَخْبَرَنِيهِ أَيْضًا، عَنِ ابْنِ عَطَاءٍ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏"‏ الزَّادُ وَالرَّاحِلَةُ ‏"‏ ‏.‏ يَعْنِي قَوْلَهُ ‏{‏ مَنِ اسْتَطَاعَ إِلَيْهِ سَبِيلاً ‏}‏ ‏.‏




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, পাথেয় ও বাহন অর্থাৎ আল্লাহ তাআলার বাণী : “যার সেখানে যাওয়ার সামর্থ্য আছে” (সূরা আল ইমরান : ৯৭) (-এর তাৎপর্য এটাই)। [২৮৯৭]

তাহকীক আলবানীঃ খুবই দুর্বল।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف جدا




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف، عمر بن عطاء بن وراز: ضعیف ، ہشام بن سلیمان: مقبول (تقریب: 7296) أي مجہول، الحال و سویدبن سعید: ضعیف ، وللحدیث طریق موقوف عند البیہقي (331/4) وسندہ ضعیف، (انوار الصحیفہ ص 482، 483)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف، سويد بن سعيد ضعيف، وكذلك ابن عطاء -واسمه عمر ابن عطاء بن وراز- وعكرمة هو مولى ابن عباس، وأحلنا على كلام بعض أهل العلم في تضعيف شواهده في الحديث السالف قبله. ونزيد عليها هنا قول الإمام الطبري في "تفسيره" ٤/ ١٨: الأخبار التي رويت عن رسول الله ﷺ في ذلك بأنه الزاد والراحلة فإنها أخبار في أسانيدها نظر لا يجوز الاحتجاج بمثلها في الدِّين. وأخرجه الطبراني في "الكبير" (١١٥٩٦)، والدارقطني (٢٤٢٧)، والبيهقي ٤/ ٣٣١ من طريقين عن ابن جريج، بهذا الإسناد. وأخرجه الدارقطني (٢٤٢٥) من طريق حصين بن مخارق، عن محمَّد بن خالد، عن سماك، عن عكرمة، به. قال الدارقطني عن حصين بن مخارق: يضع الحديث. وأخرجه الدارقطني (٢٤٢٤) من طريق سعيد بن يزيد بن مروان الخلال، عن أبيه، عن داود بن الزبرقان، عن عبد الملك، عن عطاء، عن ابن عباس. ويزيد بن مروان قال ابن معين: كذاب









সুনান ইবনু মাজাহ (2898)


حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ لاَ تُسَافِرُ الْمَرْأَةُ سَفَرَ ثَلاَثَةِ أَيَّامٍ فَصَاعِدًا إِلاَّ مَعَ أَبِيهَا أَوْ أَخِيهَا أَوِ ابْنِهَا أَوْ زَوْجِهَا أَوْ ذِي مَحْرَمٍ ‏"‏ ‏.‏




আবূ সাঈদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ কোন মহিলা যেন তিন দিন বা তার অধিক দূরত্বের পথ সাথে তার পিতা, ভাই, ছেলে, স্বামী অথবা কোন মাহরাম পুরুষ ব্যতীত তিন দিন বা তার অধিক দূরত্বের পথ সফর না করে। [২৮৯৮]

তাহকীকঃ সহীহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. وأخرجه مسلم (١٣٤٥)، وأبو داود (١٧٢٦)، والترمذي (١٢٠٣) من طريق الأعمش، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١١٥١٥)، و"صحيح ابن حبان" (٢٧١٩)









সুনান ইবনু মাজাহ (2899)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا شَبَابَةُ، عَنِ ابْنِ أَبِي ذِئْبٍ، عَنْ سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيِّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ لاَ يَحِلُّ لاِمْرَأَةٍ تُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الآخِرِ أَنْ تُسَافِرَ مَسِيرَةَ يَوْمٍ وَاحِدٍ لَيْسَ لَهَا ذُو حُرْمَةٍ ‏"‏ ‏.‏




আবূ হুরায়রাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ যে মহিলা আল্লাহ ও আখেরাতের দিনের উপর ঈমান রাখে তার সাথে কোন মাহরাম পুরুষ ব্যতীত তার জন্য এক দিনের পরিমাণ দূরত্বের পথ সফর করা বৈধ নয়। [২৮৯৯]

তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح، لكن أصحاب ابن أبي ذئب -واسمه محمَّد بن عبد الرحمن ابن المغيرة- زادوا في الإسناد عنه عن سعيد المقبري: أباه أبا سعيد المقبري، وانفرد من بينهم شبابة فلم يذكره، وقد سمع سعيد وأبوه من أبي هريرة. وانظر "الفتح" ٢/ ٥٦٨. فقد أخرجه الطيالسي (٢٣١٧)، وأحمد (٩٧٤١) عن وكيع، و (١٠٥٧٥) عن يزيد بن هارون، والبخاري (١٠٨٨) عن آدم بن أبي إياس، ومسلم (١٣٣٩) (٤٢٠) من طريق يحيى القطان، وابن حبان (٢٧٢٦) من طريق عثمان بن عمر، ستتهم عن ابن أبي ذئب، عن سعيد المقبري، عن أبيه، عن أبي هريرة. وأخرجه كذلك بذكر أبي سعيد المقبري: الليث بن سعد عند مسلم (١٣٣٩) (٤١٩)، وأبي داود (١٧٢٣)، ومالك بن أنس عند مسلم (١٣٣٩) (٤٢١)، وأبي داود (١٧٢٤)، والترمذي (١٢٠٤)، كلاهما (الليث ومالك) عن سعيد، عن أبيه، عن أبي هريرة. وأخرجه أبو داود (١٧٢٤) من طريق مالك، و (١٧٢٥) من طريق سهيل بن أبي صالح، كلاهما عن سعيد المقبري عن أبي هريرة دون ذكر أبي سعيد. وأخرجه مسلم (١٣٣٩) (٤٢٢) من طريق سهيل بن أبي صالح، عن أبيه، عن أبي هريرة









সুনান ইবনু মাজাহ (2900)


حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا شُعَيْبُ بْنُ إِسْحَاقَ، حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، حَدَّثَنِي عَمْرُو بْنُ دِينَارٍ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا مَعْبَدٍ، مَوْلَى ابْنِ عَبَّاسٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ جَاءَ أَعْرَابِيٌّ إِلَى النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ إِنِّي اكْتُتِبْتُ فِي غَزْوَةِ كَذَا وَكَذَا وَامْرَأَتِي حَاجَّةٌ ‏.‏ قَالَ ‏ "‏ فَارْجِعْ مَعَهَا ‏"‏ ‏.‏




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এক বেদুঈন নবী (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট এসে বললো, অমুক অমুক যুদ্ধে যোগদানের জন্য আমার নাম তালিকাভুক্ত হয়েছে এবং আমার স্ত্রী হজ্জে যাওয়ার সংকল্প করেছে। নবী (সাল্লালাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ তুমি ফিরে গিয়ে তার সাথে হজ্জে যাও। [২৯০০]

তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح، وهشام بن عمار متابع. وأخرجه مطولًا البخاري (١٨٦٢)، ومسلم (١٣٤١) من طريق عمرو بن دينار، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٩٣٤)









সুনান ইবনু মাজাহ (2901)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ، عَنْ حَبِيبِ بْنِ أَبِي عَمْرَةَ، عَنْ عَائِشَةَ بِنْتِ طَلْحَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ عَلَى النِّسَاءِ جِهَادٌ قَالَ ‏ "‏ نَعَمْ عَلَيْهِنَّ جِهَادٌ لاَ قِتَالَ فِيهِ الْحَجُّ وَالْعُمْرَةُ ‏"‏ ‏.‏




আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, আমি বললাম, হে আল্লাহর রাসূল! মহিলাদের জন্য কি জিহাদ বাধ্যতামূলক? তিনি বলেনঃ হাঁ, তাদের উপরও জিহাদ ফারদ, তবে তাতে অস্ত্রবাজি নাই। তা হচ্ছে হজ্জ ও উমরা। [২৯০১]

তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. وأخرجه بنحوه البخاري (١٥٢٠) و (١٨٦١) و (٢٧٨٤) و (٢٨٧٦)، والنسائي ٥/ ١١٤ - ١١٥ من طريق حبيب بن أبي عمرة، بهذا الإسناد. وليس عندهما ذكر العمرة. وهو في "مسند أحمد" (٢٥٣٢٢)، و "صحيح ابن حبان" (٣٧٠٢). وأخرجه بنحوه البخاري (٢٨٧٥) و (٢٨٧٦) من طريق معاوية بن إسحاق، عن عائشة بنت طلحة، به