সুনান ইবনু মাজাহ
حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ، أَنْبَأَنَا مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ أَمَرَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ بِقَتْلِ الْكِلاَبِ .
ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুর হত্যার নির্দেশ দেন। [৩২০২]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح، سويد بن سعيد متابع. وأخرجه البخاري (٣٣٢٣)، ومسلم (١٥٧٠)، والنسائي ٧/ ١٨٤ من طريق نافع، به. زاد النسائي: غير ما استثني منها. وهو في "مسند أحمد" (٤٧٤٤) و (٥٧٧٥) و (٥٩٢٥)، و"صحيح ابن حبان" (٥٦٤٨). وأخرجه الترمذي (١٥٥٩)، والنسائي ٧/ ١٨٤ - ١٨٥ من طريق عمرو بن دينار، عن ابن عمر، وزاد: إلا كلب صيد أو كلب ماشية. وانظر ما بعده
حَدَّثَنَا أَبُو طَاهِرٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ رَافِعًا صَوْتَهُ يَأْمُرُ بِقَتْلِ الْكِلاَبِ وَكَانَتِ الْكِلاَبُ تُقْتَلُ إِلاَّ كَلْبَ صَيْدٍ أَوْ مَاشِيَةٍ
আবদুল্লাহ বিন উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে উচ্চ কণ্ঠে কুকুর নিধনের নির্দেশ দিতে শুনেছি। শিকারী কুকুর অথবা পশুপাল পাহারায় নিয়োজিত কুকুর ব্যতীত অন্যান্য কুকুর হত্যা করা হতো (তাঁর যুগে) [৩২০৩]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. يونس: هو ابن يزيد الأيلي، وابن وهب: هو عبد الله، وأبو طاهر: هو أحمد بن عمرو بن عبد الله بن عمرو بن السرح. وأخرجه النسائي ٧/ ١٨٤ عن وهب بن بيان، عن ابن وهب، بهذا الإسناد. وأخرجه مسلم (٢٢٣٣) من طريق محمَّد بن الوليد الزبيدي، عن الزهري، به بلفظ: سمعت رسول الله ﷺ يأمر بقتل الكلاب، يقول: "اقتلوا الحيات والكلاب واتتلوا ذا الطفيتين … ". وهو في "مسند أحمد" (٦١٧١) من طريق الزبيدي. وأخرج البخاري (٥٤٨١)، ومسلم (١٥٧٤)، والنسائي ٧/ ١٨٦ - ١٨٧ و ١٨٨ و ١٨٩ من طرق عن سالم، عن أبيه قال: سمعت رسول الله ﷺ يقول: "من اقتنى كلبًا إلا كلبًا ضاريًا أو كلب ماشية، فإنه ينقص من أجره كل يوم قيراطان" وعند بعضهم: "كلب صيد" بدل " كلبًا ضاريًا". وأخرجه بهذا اللفظ نفسه البخاري (٥٤٨٠) و (٥٤٨٢)، ومسلم (١٥٧٠) و (١٥٧٤)، والترمذي (١٥٥٨)، والنسائي ٧/ ١٨٨ من طرق عن ابن عمر. وهو في "مسند أحمد" (٤٤٧٩) و (٤٥٤٩)، و"صحيح ابن حبان" (٥٦٥٣)
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ، حَدَّثَنَا الأَوْزَاعِيُّ، حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ " مَنِ اقْتَنَى كَلْبًا فَإِنَّهُ يَنْقُصُ مِنْ عَمَلِهِ كُلَّ يَوْمٍ قِيرَاطٌ إِلاَّ كَلْبَ حَرْثٍ أَوْ مَاشِيَةٍ " .
আবূ হুরায়রাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ যে ব্যক্তি কৃষিক্ষেত অথবা পশুপাল পাহারায় রত কুকুর ব্যতীত অন্যান্য কুকুর পোষে সে তার সৎকর্ম থেকে প্রতিদিন এক কীরাত পরিমাণ হ্রাস করে। [৩২০৪]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. هشام بن عمار متابع. الأوزاعي: هو عبد الرحمن بن عمرو، وأبو سلمة: هو ابن عبد الرحمن بن عوف. وأخرجه البخاري (٢٣٢٢) و (٣٣٢٤)، ومسلم (١٥٧٥)، وأبو داود (٢٨٤٤)، والترمذي (١٥٦٠)، والنسائي ٧/ ١٨٩ من طريق أبي سلمة بن عبد الرحمن، به، قال بعضهم: "ماشية أو صيد أو زرع". وأخرجه مسلم (١٥٧٥)، والنسائي ٧/ ١٨٩ من طريق سعيد بن المسيب، ومسلم (١٥٧٥) من طريق أبي رَزين مسعود بن مالك، كلاهما عن أبي هريرة لكن سعيدًا قال في روايته: "ينقص من أجره قيراطان"، وفي رواية أبي رزين: "ليس بكلب صيد أو غنم". وهو في "مسند أحمد" (٧٦٢١)، و"صحيح ابن حبان" (٥٦٥٢) و (٥٦٥٤) والقيراط: قال صاحب "النهاية": هو جزء من أجزاء الدينار، وهو نصف عشره في أكثر البلاد
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِي شِهَابٍ، حَدَّثَنِي يُونُسُ بْنُ عُبَيْدٍ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ " لَوْلاَ أَنَّ الْكِلاَبَ أُمَّةٌ مِنَ الأُمَمِ لأَمَرْتُ بِقَتْلِهَا فَاقْتُلُوا مِنْهَا الأَسْوَدَ الْبَهِيمَ وَمَا مِنْ قَوْمٍ اتَّخَذُوا كَلْبًا إِلاَّ كَلْبَ مَاشِيَةٍ أَوْ كَلْبَ صَيْدٍ أَوْ كَلْبَ حَرْثٍ إِلاَّ نَقَصَ مِنْ أُجُورِهِمْ كُلَّ يَوْمٍ قِيرَاطَانِ " .
আবদুল্লাহ বিন মুগাফফাল (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ কুকুর যদি আল্লাহর সৃষ্ট প্রজাতিগুলোর অন্তর্ভুক্ত প্রজাতি না হতো তবে আমি তা নির্মূল করার নির্দেশ দিতাম। অতএব তোমরা এর মধ্যে কালোগুলো হত্যা করো। যে সম্প্রদায় পশুপাল পাহারায় নিয়োজিত কুকুর, শিকারী কুকুর ও কৃষিখামার পাহারায় রত কুকুর ব্যতীত অন্য কুকুর পোষে তাদের সৎকর্মের সওয়াব থেকে প্রতিদিন দুই কীরাত করে হ্রাস পায়। [৩২০৫]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، سنن أبي داود (2845) ترمذي (1486،1489) نسائي (4285)، (انوار الصحیفہ ص 491)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. الحسن -وهو البصري- صرح بسماعه من عبد الله بن مغفل عند أحمد (٢٠٥٤٨)، أبو شهاب: هو عبد ربه بن نافع الحنّاظ، وأحمد بن عبد الله: هو ابن يونُس التميمي. وأخرجه أبو داود (٢٨٤٥)، والترمذي (١٥٥٧)، والنسائي ٧/ ١٨٥ من طريق يونس بن عبيد، به. وقرن به الترمذيُّ منصورَ بن زاذان. واقتصروا على ذكر قتل الكلب الأسود. وأخرجه تامًا الترمذي (١٥٦٢) من طريق إسماعيل بن مسلم، عن الحسن، به إلا أنه قال: "نقص من عملهم كل يوم قيراط". وهو في "مسند أحمد" (١٦٧٨٨) و (٢٠٥٤٧)، و"صحيح ابن حبان" (٥٦٥٦)
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ مَخْلَدٍ، حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ خُصَيْفَةَ، عَنِ السَّائِبِ بْنِ يَزِيدَ، عَنْ سُفْيَانَ بْنِ أَبِي زُهَيْرٍ، قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَقُولُ " مَنِ اقْتَنَى كَلْبًا لاَ يُغْنِي عَنْهُ زَرْعًا وَلاَ ضَرْعًا نَقَصَ مِنْ عَمَلِهِ كُلَّ يَوْمٍ قِيرَاطٌ " . فَقِيلَ لَهُ أَنْتَ سَمِعْتَ مِنَ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ إِي وَرَبِّ هَذَا الْمَسْجِدِ .
সুফইয়ান বিন আবূ যুহায়ব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে বলতে শুনেছিঃ যে ব্যক্তি কুকুর পোষে এবং তা তার কৃষিক্ষেত বা মেষপাল পাহারায় প্রয়োজন হয় না, তার আমল থেকে প্রতিদিন এক কীরাত পরিমাণ হ্রাস পায়। সুফিয়ান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) কে জিজ্ঞেস করা হলো, আপনি কি সরাসরি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট শুনেছেন? তিনি বলেন, হাঁ, এই মসজিদের প্রতিপালকের শপথ। [৩২০৬]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. خالد بن مخلد -وهو القَطَواني- متابع. والحديث في "الموطأ" ٢/ ٩٦٩. ومن طريق مالك أخرجه البخاري (٢٣٢٣)، ومسلم (١٥٧٦). وأخرجه البخاري (٣٣٢٥)، ومسلم (١٥٧٦)، والنسائي ٧/ ١٨٧ - ١٨٨ من طريق يزيد ابن خصيفة، به. وهو في "مسند أحمد" (٢١٩١٣)
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا الضَّحَّاكُ بْنُ مَخْلَدٍ، حَدَّثَنَا حَيْوَةُ بْنُ شُرَيْحٍ، حَدَّثَنِي رَبِيعَةُ بْنُ يَزِيدَ، أَخْبَرَنِي أَبُو إِدْرِيسَ الْخَوْلاَنِيُّ، عَنْ أَبِي ثَعْلَبَةَ الْخُشَنِيِّ، قَالَ أَتَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا بِأَرْضِ أَهْلِ كِتَابٍ نَأْكُلُ فِي آنِيَتِهِمْ وَبِأَرْضِ صَيْدٍ أَصِيدُ بِقَوْسِي وَأَصِيدُ بِكَلْبِيَ الْمُعَلَّمِ وَأَصِيدُ بِكَلْبِيَ الَّذِي لَيْسَ بِمُعَلَّمٍ . قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ " أَمَّا مَا ذَكَرْتَ أَنَّكُمْ فِي أَرْضِ أَهْلِ كِتَابٍ فَلاَ تَأْكُلُوا فِي آنِيَتِهِمْ إِلاَّ أَنْ لاَ تَجِدُوا مِنْهَا بُدًّا فَإِنْ لَمْ تَجِدُوا مِنْهَا بُدًّا فَاغْسِلُوهَا وَكُلُوا فِيهَا وَأَمَّا مَا ذَكَرْتَ مِنْ أَمْرِ الصَّيْدِ فَمَا أَصَبْتَ بِقَوْسِكَ فَاذْكُرِ اسْمَ اللَّهِ وَكُلْ وَمَا صِدْتَ بِكَلْبِكَ الْمُعَلَّمِ فَاذْكُرِ اسْمَ اللَّهِ وَكُلْ وَمَا صِدْتَ بِكَلْبِكَ الَّذِي لَيْسَ بِمُعَلَّمٍ فَأَدْرَكْتَ ذَكَاتَهُ فَكُلْ " .
আবূ সা’লাবাহ আল-খুশানী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট উপস্থিত হয়ে বললাম, ইয়া রাসূলাল্লাহ! আমরা আহলে কিতাবের (ইহূদী-খৃস্টান) এলাকায় বসবাস করি। আমরা কখনো তাদের পাত্রে আহার করি। এখানে প্রচুর শিকার পাওয়া যায়। আমি তা আমার ধনুক ও প্রশিক্ষনপ্রাপ্ত কুকুর দিয়ে শিকার করি এবং প্রশিক্ষণহীন কুকুরের সাহায্যেও শিকার করি। রাবী বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ তুমি যে বলছো- তোমরা আহলে কিতাবের এলাকায় বসবাস করো, একান্ত নিরুপায় না হলে তাদের পাত্রে আহার করো না। যদি তোমরা একান্ত নিরুপায় হয়ে যাও, তবে তাদের পাত্র ধৌত করার পর তাতে আহার করো। আর তুমি যে শিকারের কথা বললে তাতে তুমি তীরের সাহায্যে যে শিকার করো তার উপর আল্লাহ্র নাম স্মরণ করো এবং খাও। আর তোমার প্রশিক্ষণপ্রাপ্ত কুকুরের সাহায্যে যে শিকার ধরো তাতে আল্লাহ্র নাম স্মরণ করো এবং খাও। আর তুমি প্রশিক্ষণহীন কুকুরের সাহায্যে যে শিকার ধরো তা যবেহ করতে পারলে খাও। [৩২০৭]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. أبو إدريس الخَولاني: هو عائذ الله بن عبد الله. وأخرجه البخاري (٥٤٧٨)، ومسلم (١٩٣٠)، وأبو داود (٢٨٥٢) و (٢٨٥٥) و (٢٨٥٦)، والترمذي (١٥٣٢) و (١٦٤٦)، والنسائي ٧/ ١٨١ من طريق أبي إدريس الخولاني، به. والحديث عند بعضهم مختصر. وعند الترمذي في الموضع الأول زاد أيضًا آنية المجوس. وهو في "مسند أحمد" (١٧٧٤٨) و (١٧٧٥٢)، و "صحيح ابن حبان" (٥٨٧٩). وأخرجه مقطعا مسلم (١٩٣١)، وأبو داود (٣٨٣٩)، والترمذي (١٥٣٢) و (١٦٤٥) و (١٩٠٠) و (١٩٠١) من طرق عن أبي ثعلبة الخشني. زاد الترمذي في الموضع الأول آنية المجوس، واقتصر عليها في الموضعين الثاني والثالث. وهو في "مسند أحمد" (١٧٧٣١) و (١٧٧٣٣). وسيأتي ذكر صيد القوس برقم (٣٢١١). وقد سلف ذكر آنية المشركين (٢٨٣١)
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْمُنْذِرِ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ، حَدَّثَنَا بَيَانُ بْنُ بِشْرٍ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ عَدِيِّ بْنِ حَاتِمٍ، قَالَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَقُلْتُ إِنَّا قَوْمٌ نَصِيدُ بِهَذِهِ الْكِلاَبِ . قَالَ " إِذَا أَرْسَلْتَ كِلاَبَكَ الْمُعَلَّمَةَ وَذَكَرْتَ اسْمَ اللَّهِ عَلَيْهَا فَكُلْ مَا أَمْسَكْنَ عَلَيْكَ وَإِنْ قَتَلْنَ إِلاَّ أَنْ يَأْكُلَ الْكَلْبُ فَإِنْ أَكَلَ الْكَلْبُ فَلاَ تَأْكُلْ فَإِنِّي أَخَافُ أَنْ يَكُونَ إِنَّمَا أَمْسَكَ عَلَى نَفْسِهِ وَإِنْ خَالَطَهَا كِلاَبٌ أُخَرُ فَلاَ تَأْكُلْ " . قَالَ ابْنُ مَاجَهْ سَمِعْتُهُ - يَعْنِي عَلِيَّ بْنَ الْمُنْذِرِ - يَقُولُ حَجَجْتُ ثَمَانِيَةً وَخَمْسِينَ حِجَّةً أَكْثَرُهَا رَاجِلٌ .
আদী বিন হাতিম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট জিজ্ঞেস করে বললাম, আমরা এই কুকুরের সাহায্যে শিকার ধরে থাকি। তিনি বলেন, তুমি তোমার প্রশিক্ষণপ্রাপ্ত কুকুর আল্লাহ্র নাম নিয়ে শিকারের উদ্দেশ্যে প্রেরণ করে থাকলে সে তোমাদের জন্য যা শিকার করে তা খাও, তা সে হত্যা করে ফেললেও, কিন্তু (তা থেকে) কুকুর খেয়ে ফেললে (তা খেও না)। যদি কুকুর (তা থেকে) খেয়ে থাকে তবে তুমি তা ভক্ষণ করো না। কারণ আমার সন্দেহ হয় যে, সে তা নিজের জন্য শিকার করেছে। আর সাথে অন্য কুকুর থাকলে তুমি তা আহার করো না। ইবনু মাজাহ (রহি) বলেন, আমি আলী ইবনু মুনযিরকে বলতে শুনেছি, আমি আটান্ন বার হাজ্জ করেছি এবং এর অধিকাংশ বার পদব্রজে। [৩২০৮]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. الشعبي: هو عامر بن شراحيل. وأخرجه البخاري (١٧٥)، ومسلم (١٩٢٩)، وأبو داود (٢٨٤٨) و (٢٨٤٩) و (٢٨٥١) و (٢٨٥٤)، والترمذي (١٥٣٧)، والنسائي ٧/ ١٨٠ و ١٨٢ و ١٨٢ - ١٨٣ و ١٨٣ من طريق عامر الشعبي، به. وأخرجه البخاري (٥٤٧٧) و (٧٣٩٧)، ومسلم (١٩٢٩)، وأبو داود (٢٨٤٧)، والترمذي (١٥٣١)، والنسائي ٧/ ١٨٠ و١٨١ و ١٩٤ من طريق همام بن الحارث، عن عدي بن حاتم. وهو في "مسند أحمد" (١٨٢٤٥) و (١٨٢٦٦)، و"صحيح ابن حبان" (٥٨٨١)
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ شَرِيكٍ، عَنْ حَجَّاجِ بْنِ أَرْطَاةَ، عَنِ الْقَاسِمِ بْنِ أَبِي بَزَّةَ، عَنْ سُلَيْمَانَ الْيَشْكُرِيِّ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ نُهِينَا عَنْ صَيْدِ، كَلْبِهِمْ وَطَائِرِهِمْ يَعْنِي الْمَجُوسَ .
জাবির বিন আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমাদের অগ্নি উপাসকদের কুকুর ও পাখির ধৃত শিকার খেতে নিষেধ করা হয়েছে। [৩২০৯]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف الإسناد
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف، ترمذي (1466)، (انوار الصحیفہ ص 491)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف لضعف شريك -وهو ابن عبد الله النخعي- وحجاج بن أرطاة مدلس وقد عنعن. سليمان اليشكري: هو ابن قيس. وعمرو بن عبد الله: هو ابن حَنَش الأودي. وأخرجه البيهقي ٩/ ٢٤٥ من طريق شريك النخعي، بهذا الإسناد. وأخرج ابن أبي شيبة ٥/ ٣٦٢ عن يزيد بن هارون، عن حجاج بن أرطاة، عن أبي الزبير، عن جابر قال: لا خير في صيد المجوسي ولا بازه، ولا في كلبه. وقد صح عن سعيد بن المسيب أنه قال عن كلب المشرك: إنما هو كشفرته. أخرجه ابن أبي شيبة ٥/ ٣٦١. وصح كذلك عن الحسن أنه كان يكره أن يستعين المسلم بكلب المجوسي فيصيد به. أخرجه ابن أبي شيبة ٥/ ٣٦٢
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ الْمُغِيرَةِ، عَنْ حُمَيْدِ بْنِ هِلاَلٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الصَّامِتِ، عَنْ أَبِي ذَرٍّ، قَالَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ عَنِ الْكَلْبِ الأَسْوَدِ الْبَهِيمِ فَقَالَ " شَيْطَانٌ " .
আবূ যার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট ঘোর কালো কুকুর সম্পর্কে জিজ্ঞেস করলে তিনি বলেনঃ তা শয়তান। [৩২১০]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. وقد سلف برقم (٩٥٢)
حَدَّثَنَا أَبُو عُمَيْرٍ، عِيسَى بْنُ مُحَمَّدٍ النَّحَّاسُ وَعِيسَى بْنُ يُونُسَ الرَّمْلِيُّ قَالاَ حَدَّثَنَا ضَمْرَةُ بْنُ رَبِيعَةَ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، عَنْ أَبِي ثَعْلَبَةَ الْخُشَنِيِّ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ " كُلْ مَا رَدَّتْ عَلَيْكَ قَوْسُكَ " .
আবূ সা’লাবাহ আল-খুশানী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ তোমরা ধনুকের সাহায্যে ধৃত শিকার খাও। [৩২১১]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح، وقد سلف ضمن حديث مطول برقم (٣٢٠٧)
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْمُنْذِرِ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ، حَدَّثَنَا مُجَالِدُ بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ عَامِرٍ، عَنْ عَدِيِّ بْنِ حَاتِمٍ، قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا قَوْمٌ نَرْمِي . قَالَ " إِذَا رَمَيْتَ وَخَزَقْتَ فَكُلْ مَا خَزَقْتَ " .
আদী বিন হাতিম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি বললাম, ইয়া রাসূলুল্লাহ! আমরা তীরন্দাজ সম্প্রদায়। তিনি বলেনঃ তুমি তীর নিক্ষেপ করলে এবং তা শিকার বিদ্ধ হলে তা খাও। [৩২১২]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح، وهذا إسناد ضعيف لضعف مجالد بن سعيد، ولكنه متابع. وانظر ما بعده، وما سيأتي برقم (٣٢١٤) و (٣٢١٥)
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ، عَنْ عَاصِمٍ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ عَدِيِّ بْنِ حَاتِمٍ، قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَرْمِي الصَّيْدَ فَيَغِيبُ عَنِّي لَيْلَةً قَالَ " إِذَا وَجَدْتَ فِيهِ سَهْمَكَ وَلَمْ تَجِدْ فِيهِ شَيْئًا غَيْرَهُ فَكُلْهُ " .
আদী বিন হাতিম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি বললাম, হে আল্লাহ্র রাসূল! আমি শিকারের প্রতি তীর নিক্ষেপ করি, অতঃপর তা এক রাত পর্যন্ত নিখোঁজ থাকে। তিনি বলেনঃ তুমি শিকারের সাথে তোমার তীর পেলে এবং অন্য কিছু না পেলে তা খাও। [৩২১৩]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. الشعبي: هو عامر بن شراحيل، وعاصم: هو ابن سليمان الأحول، ومعمر: هو ابن راشد، وعبد الرزاق: هو ابن همام، ومحمد بن يحيى: هو الذهلي. وأخرجه البخاري (٥٤٨٤) و (٥٤٨٥)، ومسلم (١٩٢٩) (٦)، وأبو داود (٢٨٤٩) و (٢٨٥٣)، والترمذي (١٥٣٥)، والنسائي ٧/ ١٩٣ من طريق عامر الشعبي، به. وجاء عند البخاري في الموضع الأول: بعد يوم أو يومين، وفي الرواية الثانية عنده وعند أبي داود: اليومين والثلاثة وقال: "يأكلُ إن شاء"، وفي الرواية الأولى لأبي داود والترمذي: من الغد، وعند مسلم: يومًا، وعند النسائي: بات عني ليلة. وأخرجه النسائي ٧/ ١٩٣ من طريقين عن سعيد بن جبير، عن عدي بن حاتم، وفي الطريق الأول: فيغيب عنه الليلة والليلتين، وفي الطريق الثاني: فأطلب أثره بعد ليلة. وهو في "مسند أحمد" (١٩٣٦٩) و (١٩٣٨٨)، و "صحيح ابن حبان" (٥٨٨٠)
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، ح وَحَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْمُنْذِرِ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا زَكَرِيَّا بْنُ أَبِي زَائِدَةَ، عَنْ عَامِرٍ، عَنْ عَدِيِّ بْنِ حَاتِمٍ، قَالَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ عَنِ الصَّيْدِ بِالْمِعْرَاضِ . قَالَ " مَا أَصَبْتَ بِحَدِّهِ فَكُلْ وَمَا أَصَبْتَ بِعَرْضِهِ فَهُوَ وَقِيذٌ " .
আদী বিন হাতিম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট পালক ও সূক্ষ্মাগ্রবিহীন তীরের শিকার সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলাম। তিনি বলেনঃ তীরের আঘাতে যে শিকার ধরতে পারো তা খাও এবং তীরের পার্শ্বদেশের আঘাতে যে শিকার ধরো তা মৃত (তা খাওয়া যাবে না)। [৩২১৪]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. عامر: هو ابن شراحيل الشعبي. وأخرجه البخاري (٢٠٥٤) و (٥٤٧٥) و (٥٤٧٦) و (٥٤٨٦)، ومسلم (١٩٢٩) (٣) و (٤)، وأبو داود (٢٨٥٤)، والترمذي (١٥٣٨) و (١٥٣٩)، والنسائي ٧/ ١٨٠ و ١٨٣ و ١٩٤ - ١٩٥ و١٩٥ من طريق عامر الشعبي، به. وهو في "مسند أحمد" (١٨٢٤٥) و (١٩٣٧١). وانظر ما بعده وما قبله، وما سلف برقم (٣٢١٢). والمِعراض، بالكسر: سهم بلا ريش ولا نصْل، وإنما يُصيب بعرضه دون حدَّه. قاله في "النهاية". وقوله: "فهو وقيذ" أي: موقوذة: وهي المقتولة بغير محدد من عصا أو حجر أو ما شابه ذلك، وكانوا في الجاهلية يضربون الشاة أو غيرها من الأنعام حتى يقتلوها ثم يأكلوها
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ هَمَّامِ بْنِ الْحَارِثِ النَّخَعِيِّ، عَنْ عَدِيِّ بْنِ حَاتِمٍ، قَالَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ عَنِ الْمِعْرَاضِ فَقَالَ " لاَ تَأْكُلْ إِلاَّ أَنْ يَخْزِقَ " .
আদী বিন হাতিম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট তীর বা লাঠির পার্শ্বদেশের আঘাতে ধৃত শিকার সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলাম। তিনি বলেন, তার শিকার খেও না, কিন্তু যদি তা শিকারের দেহ ভেদ করে (তবে খাবে) [৩২১৫]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح، وهذا إسناد حسن من أجل والد وكيع -واسمه الجراح بن مَليح- فهو صدوق حسن الحديث، ولكنه متابع. وأخرجه البخاري (٥٤٧٧) و (٧٣٩٧)، ومسلم (١٩٢٩)، وأبو داود (٢٨٤٧)، والترمذي (١٥٣١) و (١٥٣٢)، والنسائي ٧/ ١٨٠ - ١٨١ و١٨١ - ١٨٢ و ١٩٤ من طريق همام بن الحارث، به. وهو في "مسند أحمد" (١٨٢٦٦) و (١٩٣٧٢)، و"صحيح ابن حبان" (٥٨٨١)
حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ حُمَيْدِ بْنِ كَاسِبٍ، حَدَّثَنَا مَعْنُ بْنُ عِيسَى، عَنْ هِشَامِ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ " مَا قُطِعَ مِنَ الْبَهِيمَةِ وَهِيَ حَيَّةٌ فَمَا قُطِعَ مِنْهَا فَهُوَ مَيْتَةٌ " .
ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নাবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ জীবিত প্রানীর দেহের কোন অংশ কেটে বিচ্ছিন্ন করা হলে তা মৃত হিসাবে গণ্য। [৩২১৬]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث حسن، وهذا إسناد ضعيف لضعف هشام بن سعد ويعقوب بن حميد بن كاسب، وقد اختُلف فيه عن زيد بن أسلم: فرواه هشام بن سعد عنه، عن ابن عمر كما في رواية المصنف، وأخرجه كذلك البزار كما في "نصب الراية" ٤/ ٣١٧، والدارقطني (٤٧٩٣)، والحاكم ٤/ ١٢٤. ورواه عبد الرحمن بن عبد الله بن دينار، عن زيد بن أسلم، عن عطاء بن يسار، عن أبي واقد الليثي. أخرجه من هذا الطريق أحمد (٢١٩٠٣)، وأبو داود (٢٨٥٨)، والترمذي (١٥٤٩) و (١٥٥٠)، وقال الترمذي: حسن غريب والعمل على هذا عند أهل العلم. وسأل شيخه البخاريَّ عنه كما في "العلل الكبير" ٢/ ٦٣٢ فقال: هو محفوظ. أما أبو زرعة فوهم كلتا الروايتين السالفتين فيما نقله ابن أبي حاتم في "العلل" ٢/ ٣، وكذلك ضعفهما عبد الحق الإشبيلي وتبعه ابن القطان الفاسي ورواه سليمان بن بلال، واختلف عنه كذلك: فرواه يحيى بن حسان، عن سليمان بن بلال، عن زيد بن أسلم، عن عطاء بن يسار مرسلًا. أخرجه البزار (إثر الحديث ١٢٢٠ - كشف الأستار)، والطحاوي في "شرح مشكل الآثار" (١٥٧٣)، والحاكم ٤/ ١٢٤. وهذا الذي رجحه أبو زرعة فيما نقله ابن أبي حاتم في "العلل" ٢/ ٣، وكذلك البزار، والدارقطني في "العلل" ٦/ ٢٩٧. ورواه عبد العزيز بن عبد الله الأويسي، عن سليمان بن بلال، عن زيد بن أسلم، عن عطاء بن يسار، عن أبي سعيد الخدري. فوصله. أخرجه من هذا الطريق الحاكم ٤/ ٢٣٩ وصححه ووافقه الذهبي. وعبد العزيز ثقة من رجال البخاري. ورواه معمر، عن زيد بن أسلم مرسلًا، أخرجه عنه عبد الرزاق (٨٦١١). قال الحاكم ٤/ ١٢٤: ورواه عبد الرحمن بن مهدي، عن سليمان بن بلال، عن زيد بن أسلم مرسلًا. ورواه المسور بن الصلت وخارجة بن مصعب عن زيد بن أسلم، عن عطاء بن يسار، عن أبي سعيد الخدري. فوصلاه كذلك. أخرجه من طريق المسور البزار (١٢٢٠ - كشف الأستار) والطحاوي (١٥٧٣)، والحاكم ٤/ ١٢٤، ومن طريق خارجة أخرجه ابن عدي في "الكامل" ٣/ ٩٢٦، وأبو نعيم في "الحلية" ٨/ ٢٥١. والمسور ضعيف، وخارجة متروك. وأخرجه الطبراني في "الأوسط" (٧٩٣٢) من طريق عاصم بن عمر بن حفص العمري، عن عبد الله بن دينار، عن ابن عمر. وعاصم ضعيف. وقال أبو حاتم فيما نقله عنه ابنه في "العلل" ١٧/ ٢: هذا حديث منكر
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ عَيَّاشٍ، حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ الْهُذَلِيُّ، عَنْ شَهْرِ بْنِ حَوْشَبٍ، عَنْ تَمِيمٍ الدَّارِيِّ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ " يَكُونُ فِي آخِرِ الزَّمَانِ قَوْمٌ يَجُبُّونَ أَسْنِمَةَ الإِبِلِ وَيَقْطَعُونَ أَذْنَابَ الْغَنَمِ أَلاَ فَمَا قُطِعَ مِنْ حَىٍّ فَهُوَ مَيِّتٌ " .
তামীম আদ-দারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, ২/৩২১৭. তামীম আদ-দারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা), তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ শেষ যুগে এমন একদল লোকের আবির্ভাব ঘটবে, যারা উটের কুজ এবং মেষের লেজের (প্রান্তভাগের চর্বিযুক্ত মোটা) অংশ (খাওয়ার জন্য) কেটে বিচ্ছিন্ন করবে। সাবধান! জীবন্ত প্রানীর দেহের কোন অংশ কেটে বিচ্ছিন্ন করা হলে তা মৃত হিসাবে গণ্য (তা খাওয়া নিষিদ্ধ) [৩২১৭]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف جدا
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف جدًا، أبو بکر الہذلي: متروک ، (انوار الصحیفہ ص 491)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف جدًا. أبو بكر الهُذلي -واسمه سُلمى، وقيل: رَوح بن عبد الله- متروك الحديث، وهشام بن عمار وشهر بن حوشب ضعيفان. وأخرجه الطبراني في "الكبير" (١٢٧٦) و (١٢٧٧)، وفي "الأوسط" (٣٠٩٩)، وابن عدي في "الكامل" ٣/ ١١١٧ من طريق أبي بكر الهُذَلي، به. وانظر ما قبله
حَدَّثَنَا أَبُو مُصْعَبٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ " أُحِلَّتْ لَنَا مَيْتَتَانِ الْحُوتُ وَالْجَرَادُ " .
আবদুল্লাহ বিন উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ আমাদের জন্য দু’টি মৃত জীব হালাল করা হয়েছেঃ মাছ ও টিড্ডি (এক প্রকারের বড় জাতের ফড়িং)। [৩২১৮]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف، انظر الحدیث الآتي (3314)، عبد الرحمٰن بن زید بن أسلم ضعیف ، وتابعہ أخواہ: أسامۃ وعبد اللّٰہ (السنن الکبری للبیہقي 254/1)، وھما ضعیفان وسندہ ضعیف ، و قال ابن الترکماني في عبد اللّٰہ بن زید بن أسلم: ضعفہ، الجمھور (الجوہر النقي 4/ 171) ، و قال الھیثمي: و ضعفہ الجمھور (185/5) ، وأخرج البیھقي بإسناد صحیح عن عبد اللّٰہ بن عمر رضي اللّٰہ عنہ، قال: ’’ أحلت لنا میتتان ودمان: الجراد والحیتان والکبد والطحال ‘‘ وھذا الأثر، لہ حکم الرفع، (انوار الصحیفہ ص 491)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث حسن. وهذا إسناد ضعيف لضعف عبد الرحمن بن زيد بن أسلم، ولكنه متابع - وقد اختلف فيه على زيد بن أسلم: فرواه عبد الرحمن بن زيد بن أسلم، عن أبيه، عن ابن عمر كما في رواية المصنف هذه، وأخرجه كذلك من هذا الطريق الشافعي في "مسنده" ٢/ ١٧٣، وأحمد (٥٧٢٣)، وعبد بن حميد (٨٢٠)، وابن حبان في "المجروحين" ٣/ ٥٨، والدارقطني في "السُّنن" (٤٧٣٢)، والبيهقي في "السُّنن" ١/ ٢٥٤ و ٩/ ٢٥٧ و١٠/ ٧، وفي "المعرفة" (١٨٨٥٣)، والبغوي في "شرح السنة" (٢٨٠٣). ووافقه أخوه عبد الله بن زيد بن أسلم عند ابن عدي ١/ ٣٨٨ و ٤/ ١٥٠٣، والدارقطي (٤٧٣٢)، والبيهقي ١/ ٢٥٤، وعبد الله هذا وثقه أحمد وابن المديني، وضعفه ابن معين، وقال النسائي: ليس بالقوي. فحديث مثله حسن. ووافقه كذلك أخوه الآخر أسامة بن زيد بن أسلم عند ابن عدي في "الكامل" ١/ ٣٨٨، والبيهقي في "السُّنن" ١/ ٢٥٤. وأسامة بن زيد ضعيف. ورواه سليمان بن بلال، واختلف عنه كذلك: فرواه يحيى بن حسان، عنه، عن زيد بن أسلم، عن ابن عمر كرواية عبد الرحمن ابن زيد وأخَويه. أخرجه من طريقه ابن عدي ٤/ ١٥٠٣. ورواه عبد الله بن وهب، عن سليمان بن بلال، عن زيد بن أسلم، عن ابن عمر موقوفًا عليه بلفظ: أحِلت لنا … أخرجه من طريقه البيهقي ١/ ٢٥٤ وقال: هذا إسناد صحيح، وهو في معنى المسند، وقد رفعه أولاد زيد عن أبيهم. وقد حسن هذا الحديث أيضًا ابن القيم في "زاد المعاد" ٣/ ٣٩٢، وقال: هذا الموقوف في حكم المرفوع. ورواه المسور بن الصلت، عن زيد بن أسلم، عن عطاء بن يسار، عن أبي سعيد الخدري. أخرجه من طريقه الخطيب في "تاريخ بغداد" ١٣/ ٢٤٥. والمسور ضعيف. وسيأتي عند المصنف بهذا الإسناد مكررًا (٣٣١٤) بزيادة: "أحلت لكم ميتتان ودمان: أما الميتتان فالحوت والجراد، وأما الدمان فالكبد والطحال"
حَدَّثَنَا أَبُو بِشْرٍ، بَكْرُ بْنُ خَلَفٍ وَنَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ قَالاَ حَدَّثَنَا زَكَرِيَّا بْنُ يَحْيَى بْنِ عُمَارَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو الْعَوَّامِ، عَنْ أَبِي عُثْمَانَ النَّهْدِيِّ، عَنْ سَلْمَانَ، قَالَ سُئِلَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ عَنِ الْجَرَادِ فَقَالَ " أَكْثَرُ جُنُودِ اللَّهِ لاَ آكُلُهُ وَلاَ أُحَرِّمُهُ " .
সালমান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট টিড্ডি সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করা হলে তিনি বলেন, আল্লাহ তাআলার বিরাট বাহিনী। আমি তা খাইও না এবং হারামও করি না। [৩২১৯]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف، سنن أبي داود (3814)، (انوار الصحیفہ ص 491)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف لضعف أبي العوام -واسمه فائد بن كيسان- وقد تابعه على وصل الحديث محمَّد بن الزبرقان أبو همام الأهوازي عن سليمان التيمي، عن أبي عثمان، وأبو همام، هذا وإن احتج به الشيخان فيه كلام يحطُه عن رتبة الثقة لا سيما إذا خالف، وقد خالفهما محمَّد بن عبد الله الأنصاري ومعتمر بن سليمان، فروياه عن سليمان التيمي، عن أبي عثمان النهدي مرسلًا، وهما في الثقة بمكان، ولهذا رجح ابنُ معين في رواية الدوري عنه ٤/ ٢٦٨ المُرسلَ، وكذلك رجحه أبو حاتم فيما نقله عنه ابنه في "العلل" ٢/ ٨، وإليه مال البيهقي ٩/ ٢٥٧. وأخرجه أبو داود (٣٨١٤)، وابن قانع في "معجم الصحابة" ١/ ٢٨٥، والطبراني في "الكبير" (٦١٤٩)، والبيهقي ٩/ ٢٥٧، والمزي في ترجمة أبي العوام فائد بن كيسان في "تهذيب الكمال" من طريق أبي العوام، به. قال أبو داود: رواه حماد بن سلمة، عن أبي العوام، عن أبي عثمان، عن النبي ﷺ لم يذكر سلمان. وأخرجه أبو داود (٣٨١٣)، والبزار (٢٥٠٩)، والطبراني (٦١٢٩)، والبيهقي ٩/ ٢٥٧، والخطيب في "تاريخه" ١٤/ ٧٢ من طريق محمَّد بن الزبرقان أبي همام، عن سليمان بن طَرْخان التيمي، عن أبي عثمان عبد الرحمن بن مُل النهدي، عن سلمان الفارسي. وخالف محمَّد بن الزبرقان محمدُ بنُ عبد الله الأنصاري عند البيهقي ٩/ ٢٥٧، ومعتمر بن سليمان فيما حكاه أبو داود بإثر الحديث (٣٨١٣)، فروياه عن سليمان التيمي، عن أبي عثمان النهدي مرسلًا. وكذلك رواه شعبة بن الحجاج، عمن سمع أبا عثمان النهدي، عن أبي عثمان مرسلًا. أخرجه عنه أبو داود الطيالسي في "مسنده" (٦٥٣). قلنا: وأبو عثمان النهدي تابعي مخضرم كبير، ومراسيله أقوى من مراسيل مثل إبراهيم النخعي وأمثاله، كحال سعيد بن المسيب، والله تعالى أعلم
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ أَبِي سَعْدٍ الْبَقَّالِ، سَمِعَ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ، يَقُولُ كُنَّ أَزْوَاجُ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَتَهَادَيْنَ الْجَرَادَ عَلَى الأَطْبَاقِ .
আনাস বিন মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর স্ত্রীগণ থরে থরে সাজিয়ে টিড্ডি উপঢৌকন পাঠাতেন। [৩২২০]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف الإسناد
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، أبو سعد البقال: ضعیف مدلس ، ولابن عینۃ ، لون آخر في مصنف عبدالرزاق (533/4 ح 8763) ، (انوار الصحیفہ ص 491، 492)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف لضعف أبي سعد البقال -واسمه سعيد بن المَرزُبان-. وأخرجه البيهقي في "السُّنن الكبرى" ٩/ ٢٥٨ من طريق يزيد بن هارون، والخطيب في "موضح أوهام الجمع والتفريق" ٢/ ١٣١ من طريق عبد الله بن عون، كلاهما عن أبي سعد البقال، عن أنس. وأخرجه عبد الرزاق في "مصنفه" (٨٧٦٣) عن ابن عُيينة، عن أبي يعفور، عن أنس. فذكر أبا يعفور -واسمه وقْدان، ويقال: واقد، وهو ثقة- بدل أبي سعد البقال، والذي يغلب على ظننا أنه سبق نظر من الإسناد السابق عند عبد الرزاق وقع من بعض النُّسَّاخ
حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْحَمَّالُ، حَدَّثَنَا هَاشِمُ بْنُ الْقَاسِمِ، حَدَّثَنَا زِيَادُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُلاَثَةَ، عَنْ مُوسَى بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَابِرٍ، وَأَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ كَانَ إِذَا دَعَا عَلَى الْجَرَادِ قَالَ " اللَّهُمَّ أَهْلِكْ كِبَارَهُ وَاقْتُلْ صِغَارَهُ وَأَفْسِدْ بَيْضَهُ وَاقْطَعْ دَابِرَهُ وَخُذْ بِأَفْوَاهِهَا عَنْ مَعَايِشِنَا وَأَرْزَاقِنَا إِنَّكَ سَمِيعُ الدُّعَاءِ " . فَقَالَ رَجُلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ كَيْفَ تَدْعُو عَلَى جُنْدٍ مِنْ أَجْنَادِ اللَّهِ بِقَطْعِ دَابِرِهِ قَالَ " إِنَّ الْجَرَادَ نَثْرَةُ الْحُوتِ فِي الْبَحْرِ " . قَالَ هَاشِمٌ قَالَ زِيَادٌ فَحَدَّثَنِي مَنْ رَأَى الْحُوتَ يَنْثُرُهُ .
আনাস বিন মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) টীড্ডির ব্যাপারে বদদোয়া করে বলতেনঃ ‘‘হে আল্লাহ! বড় টিড্ডীগুলো ধংস করো, ছোট টিড্ডীগুলো হত্যা করো, এর ডিমগুলো নষ্ট করে তার মূলোৎপাটন করো এবং আমাদের কৃষিজ উৎপাদনের ক্ষতিসাধন থেকে এবং আমাদের জীবিকা থেকে তার মুখ বন্ধ করে দাও। নিশ্চয় তুমিই দুআ শ্রবণকারী।’’ এক ব্যাক্তি বললো, ইয়া রাসূলাল্লাহ! আল্লাহ্র একদল সৈনিকের মূলোৎপাটোনের জন্য আপনি কিরূপে বদদোয়া করলেন? তিনি বলেনঃ সমুদ্রে মাছের হাঁচি থেকে টিড্ডি নির্গত হয়। হাশিম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, যিয়াদ বলেছেন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এমন এক ব্যক্তি আমাদের তা বলেছেন, যিনি মাছের হাঁচি দিয়ে টিড্ডি নির্গত করতে দেখেছেন। [৩২২১]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * موضوع
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف جدًا ، ترمذي (1823)، (انوار الصحیفہ ص 492)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف جدًا، ومتنه منكر جدًا، موسى بن محمَّد بن إبراهيم التيمي منكر الحديث. وأخرجه الطبراني في "الأوسط" (٨٥٣٩)، والخطيب في "تاريخ بغداد" ٨/ ٤٧٨، وابن الجوزي في "الموضوعات" ٣/ ١٤، والمزي في "تهذيب الكمال" في ترجمة زياد بن عبد الله بن علاثة من طريق هاشم بن القاسم، بهذا الإسناد. زاد بعضهم بين زياد وموسى: عبدَ الله بن علاثة أبا زياد