সুনান ইবনু মাজাহ
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ الْحُبَابِ، حَدَّثَنَا فَائِدٌ، مَوْلَى عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَلِيِّ بْنِ أَبِي رَافِعٍ حَدَّثَنِي مَوْلاَىَ، عُبَيْدُ اللَّهِ حَدَّثَتْنِي جَدَّتِي، سَلْمَى أُمُّ رَافِعٍ مَوْلاَةُ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَتْ كَانَ لاَ يُصِيبُ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَرْحَةٌ وَلاَ شَوْكَةٌ إِلاَّ وَضَعَ عَلَيْهِ الْحِنَّاءَ .
রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর মুক্তদাসী সালমা উম্মু রাফি’ (রা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কখনো আঘাত পেলে বা তাঁর কাটা বিদ্ধ হলে তিনি আহত স্থানে মেহেদী লাগাতেন। [৩৫০২]
তাহকীক আলবানীঃ হাসান।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف، سنن أبي داود (3858) ترمذي (2054)، (انوار الصحیفہ ص 503)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده محتمل للتحسين. وأخرجه الترمذي (٢١٧٩) و (٢١٨٠) من طريق فائد مولى عبيد الله، به. وأخرجه بنحوه أبو داود (٣٨٥٨) من طريق عبد الرحمن بن أبي الموالي، عن فائد مولى عبيد الله، عن جدته سلمى قالت: ما كان أحد يشتكي إلى رسول الله ﷺ وجعًا في رأسه إلا قال: "احتجم"، ولا وجعًا في رجليه إلا قال: "اخضِبهما". وانظر "مسند أحمد" (٢٧٦١٧). قال المباركفوري في "تحفة الأحوذي": القرحة، بفتح القاف ويُضم: جراحة من سيف وسكين ونحوه. إلا وضع عليه الحناء: لأنه ببرودته يخفف حرارةً الجراحة وألم الدم
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ، حَدَّثَنَا حُمَيْدٌ، عَنْ أَنَسٍ، أَنَّ نَاسًا، مِنْ عُرَيْنَةَ قَدِمُوا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَاجْتَوَوُا الْمَدِينَةَ فَقَالَ ـ صلى الله عليه وسلم ـ " لَوْ خَرَجْتُمْ إِلَى ذَوْدٍ لَنَا فَشَرِبْتُمْ مِنْ أَلْبَانِهَا وَأَبْوَالِهَا " . فَفَعَلُوا .
আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, উরায়নাহ গোত্রের কতক লোক রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট আসে। কিন্তু মদীনার আবহাওয়া তাদের অনুকূল হলো না। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ যদি তোমরা আমাদের উটের পালে চলে যেতে এবং সেগুলোর দুধ ও পেশাব পান করতে! তারা তাই করলো।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. وقد سلف بهذا الإسناد مطولًا برقم (٢٥٧٨)
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ، عَنِ ابْنِ أَبِي ذِئْبٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ خَالِدٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، حَدَّثَنِي أَبُو سَعِيدٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ " فِي أَحَدِ جَنَاحَىِ الذُّبَابِ سُمٌّ وَفِي الآخَرِ شِفَاءٌ فَإِذَا وَقَعَ فِي الطَّعَامِ فَامْقُلُوهُ فِيهِ فَإِنَّهُ يُقَدِّمُ السُّمَّ وَيُؤَخِّرُ الشِّفَاءَ " .
আবূ সাঈদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা), হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ মাছির দু’টি ডানার একটিতে বিষ এবং অন্যটিতে আরোগ্য আছে। অতএব খাদ্যদ্রব্যে মাছি পড়লে সেটিকে তাতে ডুবিয়ে দাও। কেননা সেটি বিষের ডানাকে আরোগ্যের ডানার আগে খাদ্যে লাগায়।
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. ابن أبي ذئب: اسمه محمَّد بن عبد الرحمن بن المغيرة، وسعيد بن خالد: هو ابن عبد الله بن قارظ القارظي، وأبو سلمة: هو ابن عبد الرحمن ابن عوف. وأخرجه النسائي ٧/ ١٧٨ - ١٧٩ من طريق ابن أبي ذئب، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١١٦٤٣)، و"صحيح ابن حبان" (١٢٤٧). فامقلوه، أي: أدخِلوه واغمسوه في الطعام ثم اطرحوه
حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا مُسْلِمُ بْنُ خَالِدٍ، عَنْ عُتْبَةَ بْنِ مُسْلِمٍ، عَنْ عُبَيْدِ بْنِ حُنَيْنٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ " إِذَا وَقَعَ الذُّبَابُ فِي شَرَابِكُمْ فَلْيَغْمِسْهُ فِيهِ ثُمَّ لْيَطْرَحْهُ فَإِنَّ فِي أَحَدِ جَنَاحَيْهِ دَاءً وَفِي الآخَرِ شِفَاءً " .
আবূ হুরায়রাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ তোমাদের পানীয়তে মাছি পড়লে সেটাকে তাতে ডুবিয়ে দাও, অতঃপর সেটিকে তুলে ফেলে দাও। কেননা তার একটি ডানায় রোগ এবং অন্যটিতে আরোগ্য রয়েছে।
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح، وهذا إسناد ضعيف من أجل سويد بن سعيد ومسلم بن خالد الزنجي، لكنهما متابعان. وأخرجه البخاري (٣٣٢٠) من طريق سليمان بن بلال، و (٥٧٨٢) من طريق إسماعيل بن جعفر، كلاهما عن عتيبة بن مسلم، به. وأخرجه أبو داود (٣٨٤٤) من طريق ابن عجلان، عن سعيد المقبري، عن أبي هريرة. وهو في "مسند أحمد" (٩١٦٨)، و "صحيح ابن حبان" (١٢٤٦)
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ هِشَامٍ، حَدَّثَنَا عَمَّارُ بْنُ رُزَيْقٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عِيسَى، عَنْ أُمَيَّةَ بْنِ هِنْدٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَامِرِ بْنِ رَبِيعَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ " الْعَيْنُ حَقٌّ " .
আমির বিন রাবীআহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ বদনজর সত্য।
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح متواتر
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * صحيح لغيره، وهذا إسناد ضعيف لجهالة حال أمية بن هند. وأخرجه ضمنَ حديث النسائي في "الكبرى" (١٠٨٠٥) من طريق معاوية بن هشام، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٥٧٠٠). ويشهد له ما بعده
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ ابْنُ عُلَيَّةَ، عَنِ الْجُرَيْرِيِّ، عَنْ مُضَارِبِ بْنِ حَزْنٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ " الْعَيْنُ حَقٌّ " .
আবূ হুরায়রাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা), হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ বদনজর সত্য।
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح، وهذا إسناد حسن، مضارب بن حزن صدوق حسن الحديث. الجريري: اسمه سعيد بن إياس. وهو من هذا الطريق في "مسند أحمد" (١٠٣٢١). وأخرجه البخاري (٥٧٤٠)، ومسلم (٢١٨٧)، وأبو داود (٣٨٧٩) من طريق معمر، عن همام بن منبه، عن أبي هريرة. وهو من طريق همام في "مسند أحمد" (٨٢٤٥)، و "صحيح ابن حبان" (٥٥٠٣). وانظر لزامًا في شرح هذا الحديث "زاد المعاد" ٣/ ١٦٢ - ١٧٣
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا أَبُو هِشَامٍ الْمَخْزُومِيُّ، حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ، عَنْ أَبِي وَاقِدٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ " اسْتَعِيذُوا بِاللَّهِ فَإِنَّ الْعَيْنَ حَقٌّ " .
আয়িশাহ (রা), হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ তোমরা আল্লাহর নিকট আশ্রয় প্রার্থনা করো। কেননা বদনজর সত্য বা বাস্তব ব্যাপার।
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، أبو واقد صالح بن محمد بن زائدۃ: ضعیف ، والحدیث السابق (الأصل: 3507) یغني عنہ، (انوار الصحیفہ ص 503، 504)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * صحيح لغيره، وهذا إسناد ضعيف لضعف أبي واقد: وهو صالح بن محمَّد بن زائدة. أبو هشام المخزومي: هو المغيرة بن سلمة، ووُهيب: هو ابن خالد بن عجلان البصري. وأخرجه الطبراني في "الأوسط" (٥٩٤٥)، والحاكم ٤/ ٢١٥ من طريق وهيب ابن خالد، بهذا الإسناد
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ أَبِي أُمَامَةَ بْنِ سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ، قَالَ مَرَّ عَامِرُ بْنُ رَبِيعَةَ بِسَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ وَهُوَ يَغْتَسِلُ فَقَالَ لَمْ أَرَ كَالْيَوْمِ وَلاَ جِلْدَ مُخَبَّأَةٍ . فَمَا لَبِثَ أَنْ لُبِطَ بِهِ فَأُتِيَ بِهِ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَقِيلَ لَهُ أَدْرِكْ سَهْلاً صَرِيعًا . قَالَ " مَنْ تَتَّهِمُونَ بِهِ " . قَالُوا عَامِرَ بْنَ رَبِيعَةَ . قَالَ " عَلاَمَ يَقْتُلُ أَحَدُكُمْ أَخَاهُ إِذَا رَأَى أَحَدُكُمْ مِنْ أَخِيهِ مَا يُعْجِبُهُ فَلْيَدْعُ لَهُ بِالْبَرَكَةِ " . ثُمَّ دَعَا بِمَاءٍ فَأَمَرَ عَامِرًا أَنْ يَتَوَضَّأَ فَيَغْسِلَ وَجْهَهُ وَيَدَيْهِ إِلَى الْمِرْفَقَيْنِ وَرُكْبَتَيْهِ وَدَاخِلَةَ إِزَارِهِ وَأَمَرَهُ أَنْ يَصُبَّ عَلَيْهِ . قَالَ سُفْيَانُ قَالَ مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ وَأَمَرَهُ أَنْ يَكْفَأَ الإِنَاءَ مِنْ خَلْفِهِ .
আবূ উমামাহ বিন হুনায়ফ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা), হতে বর্ণিত, আমির বিন রাবীআহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) সাহল বিন হুনায়ফ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এর নিকট দিয়ে যাচ্ছিলেন। তিনি তখন গোসল করছিলেন। আমির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, আমি এমন খুবসুরত সুপুরুষ দেখিনি, এমনকি পর্দানশীন নারীকেও এরুপ সুন্দর দেখিনি, যেমন আজ দেখলাম। অতঃপর কিছুক্ষণের মধ্যেই সাহল (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বেহুঁশ হয়ে পড়ে গেলেন। তাকে নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট নিয়ে যাওয়া হল এবং তাঁকে বলা হলো, ধরাশায়ী সাহলকে রক্ষা করুন। তিনি জিজ্ঞেস করলেনঃ তোমরা কাকে অভিযুক্ত করছো? তারা বললো, আমির বিন রাবীআহ কে। তিনি বলেন, তোমাদের কেও বদনজর লাগিয়ে তার ভাইকে কেন হত্যা করতে চায়? তোমাদের কেউ তার ভাইয়ের মনোমুগ্ধকর কিছু দেখলে যেন তার জন্য বরকতের দুআ’ করে। অতঃপর তিনি পানি নিয়ে ডাকলেন, অতঃপর আমিরকে উযু করতে নির্দেশ দিলেন। তিনি তার মুখমণ্ডল, দু’হাত কনুই পর্যন্ত, দু’পা গোছা পর্যন্ত ও লজ্জাস্থান ধৌত করলেন। তিনি আমিরকে পাত্রের (অবশিষ্ট) পানি সকলের উপর ঢেলে দেয়ার নির্দেশ দিলেন। তিনি সাহলের পেছন দিক থেকে পানি ঢেলে দেয়ার জন্য আমিরকে নির্দেশ দেন।
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح، هشام بن عمار قد توبع، وباقي رجاله ثقات. سفيان: هو ابن عيينة. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٧٥٧١) و (٩٩٦٥) عن محمَّد بن عبد الله بن يزيد والحارث بن مسكين، عن سفيان، به. وأخرجه أيضًا (٧٥٧٢) من طريق مالك، عن ابن شهاب الزهري، به. وأخرجه (٩٩٦٦) عن محمَّد بن عبد الله بن يزيد، عن سفيان، عن معمر، عن الزهري، به. إلا أنه جعله من رواية أبي أمامة بن سهل بن حنيف عن أبيه: أن عامرًا مرَّ به … إلخ. وهذا أصح، إذ إن أبا أمامة له رؤية فقط ولم يسمع من النبي ﷺ، ولم يحضر هذه القصة وإنما سمعها من أبيه. وأخرجه النسائي أيضًا (٧٥٧٠) من طريق مالك، عن محمَّد بن أبي أمامة، عن أبيه قال: اعتل أبي سهلُ بن حنيف … والحديث في "مسند أحمد" (١٥٩٨٥)، و"صحيح ابن حبان" (٦١٠٦). قوله: "جلد مخبَّأة" أي: جلد جارية مخباة في خِدرها. "لُبِطَ به": صُرعَ به
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ عُرْوَةَ بْنِ عَامِرٍ، عَنْ عُبَيْدِ بْنِ رِفَاعَةَ الزُّرَقِيِّ، قَالَ قَالَتْ أَسْمَاءُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ بَنِي جَعْفَرٍ تُصِيبُهُمُ الْعَيْنُ فَأَسْتَرْقِي لَهُمْ قَالَ " نَعَمْ فَلَوْ كَانَ شَىْءٌ سَابَقَ الْقَدَرَ سَبَقَتْهُ الْعَيْنُ " .
উবায়দ বিন রিফায়াহ আয-যুরাকী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, আসমা’ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, হে আল্লাহর রাসূল! জাফরের সন্তানদের বদনজর লেগেছে, আপনি তাদের ঝাড়ফুঁক করুন। তিনি বলেনঃ আচ্ছা। যদি কোন কিছু তাকদীরকে পরাভূত করতে পারতো, তবে বদনজরই তাকে পরাভূত করতো।
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * صحيح لغيره، وهذا إسناد جيد. وأخرجه الترمذي (٢١٨٦) من طريق سفيان بن عيينة، بهذا الإسناد. وقال: حديث حسن صحيح. وأخرجه الترمذي أيضًا (٢١٨٧)، والنسائي في "الكبرى" (٧٤٩٥) من طريق معمر، عن أيوب السختياني، عن عمرو بن دينار، عن عروة بن عامر، عن عبيد بن رفاعة، عن أسماء بنت عميس قالت: قلت: يا رسول الله … إلخ. فجعله من مسند أسماء بنت عميس، وذكر الدارقطني في "العلل" ٥/ ررقة ١٩٣ أن هذا الإسناد هو الأصح. وهو في مسند أسماء بنت عميس من "مسند أحمد" (٢٧٤٧٠) عن سفيان بن عيينة بإسناده. ويشهد له حديث جابر عند مسلم (٢١٩٨)، وحديث ابن عباس عنده أيضًا (٢١٨٨). قوله: "سبقته" قال السندي: أي: لسابقَتْه العين فسبقته، أي: غلبته بالسبق، ففي الكلام اختصار للظهور، والمقصود بيان قوة ضرر العين وشدته بحيث إنه لو كان هناك شيء آخر على خلاف مقتضى التقدير، لكان ذلك الشيء هو العين
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ سُلَيْمَانَ، عَنْ عَبَّادٍ، عَنِ الْجُرَيْرِيِّ، عَنْ أَبِي نَضْرَةَ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَتَعَوَّذُ مِنْ عَيْنِ الْجَانِّ وَأَعْيُنِ الإِنْسِ فَلَمَّا نَزَلَتِ الْمُعَوِّذَتَانِ أَخَذَهُمَا وَتَرَكَ مَا سِوَى ذَلِكَ .
আবূ সাঈদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা), হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) জিন ও মানুষের বদনজর থেকে আশ্রয় প্রার্থনা করতেন। অতঃপর সূরা ফালাক ও সূরা নাস নাযিল হলে তিনি এ সূরা দু’টি গ্রহণ করেন এবং অন্যগুলো ত্যাগ করেন (তি,না)।
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، ترمذي (2058) نسائي (5496)، (انوار الصحیفہ ص 504)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * صحيح رجاله ثقات إلا أن عباد -وهو ابن العوام- لم يُذكر في عداد من روى عن سعيد بن إياس قبل اختلاطه، ورواه القاسم بن مالك المزني عن سعيد بن إياس وهو مثل عباد بن العوام. وأخرجه النسائي ٨/ ٢٧١، والطحاوي في "شرح مشكل الآثار" (٢٩٠٢) من طريق سعيد بن سليمان، بهذا الإسناد. وأخرجه الترمذي (٢١٨٥) من طريق القاسم بن مالك المزني، عن الجريري، به. وقال: حديث حسن غريب. وقد استدل به الإمام الطحاوي وبحديث عائشة: "أمرني رسول الله ﷺ أن أسترقي من العين " وهو متفق عليه، وبحديث أبي سعيد الصحيح أنه ﷺ اشتكى، فرقاه جبريل، فقال: باسم الله أرقيك من كل شيء يؤذيك ومن كل حاسد وعين والله يشفيك. بأن حديث أبي أمامة بن سهل بن حنيف السالف عند المصنف برقم (٣٥٠٩) منسوخ بها
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ أَبِي الْخَصِيبِ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، وَمِسْعَرٍ، عَنْ مَعْبَدِ بْنِ خَالِدٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ شَدَّادٍ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ أَمَرَهَا أَنْ تَسْتَرْقِيَ مِنَ الْعَيْنِ .
আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা), হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ বদনজর ও বিষাক্ত প্রাণীর দংশন ছাড়া অন্য কিছুতে ঝাড়ফুঁক বৈধ নয়।
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح، وهذا إسناد حسن، علي بن أبي الخصيب صدوق وقد توبع، ومن فوقه ثقات. سفيان: هو الثوري. وأخرجه البخاري (٥٧٣٨)، ومسلم (٢١٩٥)، والنسائي في "الكبرى" (٧٤٩٤) من طريق سفيان الثوري، وفي بعض طرق مسلم عن مسعر، به. وهو في "مسند أحمد" (٢٤٣٤٥)، و"صحيح ابن حبان" (٦١٠٣)
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ سُلَيْمَانَ، عَنْ أَبِي جَعْفَرٍ الرَّازِيِّ، عَنْ حُصَيْنٍ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ بُرَيْدَةَ بْنِ الْحُصَيْبِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ " لاَ رُقْيَةَ إِلاَّ مِنْ عَيْنٍ أَوْ حُمَةٍ " .
বুরায়দাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, বদনজর ও বিষাক্ত প্রাণীর দংশন ছাড়া অন্য কিছুতে ঝাড়ফুঁক বৈধ নয়।
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح، أبو جعفر الرازي -وإن كان سيئ الحفظ- قد توبع، وباقي رجاله ثقات. حصين: هو ابن عبد الرحمن السلمي. وتابع أبا جعفر الرازي عليه شعبةُ، أشار إلى روايته الترمذي بإثر الحديث (٢١٨٤) من "جامعه"، وأبو حاتم الرازي في "العلل" ٢/ ٣٤٨. وخالفهما هشيم فرواه عن حصين عن الشعبي عن بريدة موقوفًا، أخرجه من طريقه مسلم (٢٢٠) (٣٧٤) ضمن حديث. وروي من طرق عن حصين عن الشعبي عن عمران بن حصين مرفوعًا، انظر تخريجها في "مسند أحمد" (١٩٩٠٨). وخالف محمَّد بن فضيل عند البخاري (٥٧٠٥) فرواه عن حصين عن الشعبي عن عمران موقوفًا. وقد رجح الحافظ المزي في "تحفة الأشراف" ٢/ ٧٧ أن المحفوظ حديثُ عمران لا حديث بريدة، بينما ذهب الحافظ ابن حجر في "الفتح" ١٠/ ١٥٦ إلى أنه عند حصين عن عمران وعن بريدة جميعًا. الحُمَة: سمُّ الحية والعقرب ونحوهما. وقيل: إنه لم يرد الحصر في العين والحمة، وإنما أراد أنهما أحق بالرقية لشدة الضرر فيهما
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِدْرِيسَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عُمَارَةَ، عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ مُحَمَّدٍ، أَنَّ خَالِدَةَ بِنْتَ أَنَسٍ أُمَّ بَنِي حَزْمٍ السَّاعِدِيَّةَ، جَاءَتْ إِلَى النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَعَرَضَتْ عَلَيْهِ الرُّقَى فَأَمَرَهَا بِهَا .
আনাস এর কন্যা উম্মু বানী হাযম খালিদাহ আস-সাইদিয়্যাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট আসেন এবং ঝাড়ফুঁক করার মন্ত্র পেশ করেন। তিনি তাকে তা দ্বারা ঝাড়ফুঁক করার অনুমতি দেন। [৩৫১৪]
তাহকীক আলবানীঃ দুর্বল।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده حسن إن كان أبو بكر بن محمَّد -وهو ابن عمرو بن حزم- سمعه من خالدة بنت أنس، وإلا فهو مرسل حسن الإسناد إلى أبي بكر بن محمَّد. وهو في "مصنف ابن أبي شيبة" ٨/ ٣٦، ومن طريقه الطبراني في "الكبير" ٢٤/ (٦٣٧)
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ أَبِي الْخَصِيبِ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ عِيسَى، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ كَانَ أَهْلُ بَيْتٍ مِنَ الأَنْصَارِ يُقَالُ لَهُمْ آلُ عَمْرِو بْنِ حَزْمٍ يَرْقُونَ مِنَ الْحُمَةِ وَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَدْ نَهَى عَنِ الرُّقَى فَأَتَوْهُ فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّكَ قَدْ نَهَيْتَ عَنِ الرُّقَى وَإِنَّا نَرْقِي مِنَ الْحُمَةِ . فَقَالَ لَهُمُ " اعْرِضُوا عَلَىَّ " . فَعَرَضُوهَا عَلَيْهِ فَقَالَ " لاَ بَأْسَ بِهَذِهِ هَذِهِ مَوَاثِيقُ " .
জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা), হতে বর্ণিত, আনসার সম্প্রদায়ভুক্ত আমর বিন হাযম নামক পরিবার বিষাক্ত প্রাণীর দংশনে ঝাড়ফুঁক করতো। অথচ রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ঝাড়ফুঁক করতে নিষেধ করেছেন। তারা তাঁর নিকট এসে বললো, হে আল্লাহর রাসূল! আপনি তো ঝাড়ফুঁক করতে নিষেধ করেছেন, অথচ আমরা বিষাক্ত প্রাণীর দংশনে ঝাড়ফুঁক করি। তিনি তাদের বলেনঃ সেগুলো আমার সামনে পেশ করো। তারা তা তাঁর নিকট পেশ করেন। তিনি বলেনঃ এগুলো দোষের কিছু নেই। এগুলো নির্ভরযোগ্য।
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده حسن. الأعمش: اسمه سليمان بن مهران، وأبو سفيان: اسمه طلحة بن نافع. وأخرجه الطحاوي في "شرح معاني الآثار" ٤/ ٣٢٨، والطبراني في "الكبير" ١٧/ (٧٤)، والحاكم ٤/ ٣٢٨ من طرق عن الأعمش، به. وجمعوا معه قصة السؤال عن الرقى من العقرب، فقال: "من استطاع أن ينفع أخاه فليفعل". وأخرج الشطر الذي عند المصنف: أحمد في "المسند" (١٥٢٣٥)، والطحاوي ٤/ ٣٢٨ من طريق ابن لهيعة، عن أبي الزبير، عن جابر. وأخرجه مختصرًا مسلم (٢١٩٩) (٦١) من طريق ابن جريج، عن أبي الزبير، عن جابر بن عبد الله قال: أرخصَ النبي ﷺ في رُقْية الحلية لبني عمرو. وانظر ما سيأتي برقم (٣٥١٩). وأما قصة السؤال عن الرقى من العقرب فهو عند مسلم (٢١٩٩) من طريق أبي الزبير وأبي سفيان. وهي في "مسند أحمد" (١٤٢٣١). والحُمة بالتخفيف: السُّم
حَدَّثَنَا عَبْدَةُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ هِشَامٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَاصِمٍ، عَنْ يُوسُفَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْحَارِثِ، عَنْ أَنَسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ رَخَّصَ فِي الرُّقْيَةِ مِنَ الْحُمَةِ وَالْعَيْنِ وَالنَّمْلَةِ .
আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা), হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বিষাক্ত প্রাণীর দংশন, বদনজর ও ব্রণ-ফুসকুড়ি (pimple) সারাতে ঝাড়ফুঁক করার অনুমতি দিয়েছেন।
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح، وهذا إسناد قوي. سفيان: هو الثوري، وعاصم: هو ابن سليمان الأحول. وأخرجه مسلم (٢١٩٦)، والترمذي (٢١٨٢) و (٢١٨٣)، والنسائي في "الكبرى" (٧٤٩٩) من طريق عاصم الأحول، به. وهو في "مسند أحمد" (١٢١٧٣)، و"صحيح ابن حبان" (٦١٠٤). وأخرج أبو داود (٣٨٨٩) من طريق شريك النخعي، عن العباس بن ذَريح، عن الشعبي، عن أنس قال: قال رسول الله ﷺ: "لا رُقية إلا من عين أو حُمَة أَو دمِ يرقأ". وسنده ضعيف، شريك سيئ الحفظ. ومعنى "يرقأ": ينقطع. النملة: قروح تخرج في جنب الإنسان
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَهَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ مُغِيرَةَ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنِ الأَسْوَدِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ رَخَّصَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فِي الرُّقْيَةِ مِنَ الْحَيَّةِ وَالْعَقْرَبِ .
আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা), হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সাপ ও বিছার দংশনে ঝাড়ফুঁক করার অনুমতি দিয়েছেন।
তাহকীক আলবানীঃ সনদ সহীহ
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. أبو الأحوص: هو سلام بن سليم الحنفي، ومغيرة: هو ابن مِقسم الضبي، وإبراهيم: هو ابن يزيد النخَعي، والأسود: هو ابن يزيد النخعي خال إبراهيم. وأخرجه بنحوه البخاري (٥٧٤١)، ومسلم (٢١٩٣) من طريق الأسود، به. وهو في "مسند أحمد" (٢٤٠١٨)، و"صحيح ابن حبان" (٦١٠١)
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ بَهْرَامَ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ الأَشْجَعِيُّ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ لَدَغَتْ عَقْرَبٌ رَجُلاً فَلَمْ يَنَمْ لَيْلَتَهُ فَقِيلَ لِلنَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ إِنَّ فُلاَنًا لَدَغَتْهُ عَقْرَبٌ فَلَمْ يَنَمْ لَيْلَتَهُ . فَقَالَ " أَمَا إِنَّهُ لَوْ قَالَ حِينَ أَمْسَى أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ - مَا ضَرَّهُ لَدْغُ عَقْرَبٍ حَتَّى يُصْبِحَ " .
আবূ হুরায়রাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা), হতে বর্ণিত, একটি বিছা এক ব্যক্তিকে দংশন করলে ঐ রাতে সে আর ঘুমাতে পারেনি। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে বলা হলো, অমুক ব্যক্তিকে বিছায় দংশন করায় সে গত রাতে ঘুমাতে পারেনি। তিনি বলেনঃ আহা, সে যদি সন্ধ্যায় উপনিত হয়ে বলতো, “আউযূ বিকালিমাতিল্লাহিত তাম্মাতি মিন শাররি মা খালাক” (আমি আল্লাহর পরিপূর্ণ কালামের ওয়াসিলায় তাঁর সৃষ্টির অনিষ্ট থেকে আশ্রয় চাই), তাহলে বিছার দংশন সকাল পর্যন্ত তার কোন ক্ষতি করতে পারতো না।
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح، وهذا إسناد حسن، إسماعيل بن بهرام صدوق، ومن فوقه ثقات. سفيان: هو الثوري. وأخرجه بنحوه مسلم (٢٧٠٩)، والترمذي (٣٩٢٣)، والنسائي في "الكبرى" (١٠٣٤٦ - ١٠٣٥٣) من طريق أبي صالح، عن أبي هريرة. وأخرجه أبو داود (٣٩٠٠)، والنسائي (١٠٣٥٩) من طريق الزهري، عن طارق ابن مخاشن، عن أبي هريرة. وهو في "مسند أحمد" (٨٨٨٠)، و"صحيح ابن حبان" (١٠٢١)
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَفَّانُ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ زِيَادٍ، حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ حَكِيمٍ، حَدَّثَنِي أَبُو بَكْرِ بْنُ عَمْرِو بْنِ حَزْمٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ حَزْمٍ، قَالَ عَرَضْتُ النَّهْشَةَ مِنَ الْحَيَّةِ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَأَمَرَ بِهَا .
আমর বিন হাযম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সামনে আমি সর্পদংশনের ঝাড়ফুঁকের দুআ’ পেশ করলে তিনি আমাকে এর অনুমতি দেন। [৩৫১৯]
তাহকীক আলবানীঃ সানাদটি দুর্বল।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف الإسناد
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، أبو بکر لم یدرک جدہ (تحفۃ الأشراف 149/8 ح 10729)، (انوار الصحیفہ ص 504)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * صحيح لغيره، وهذا إسناد رجاله ثقات إلا أنه منقطع، أبو بكر بن عمرو: هو أبو بكر بن محمَّد بن عمرو بن حرَّم، لم يُدرك جدَّه عَمرًا. وأخرجه أبو يعلى في "مسنده" (٧١٧٦) عن أبي خيثمة زهير بن حرب، عن عفان بن مسلم، بهذا الإسناد. إلا أنه سقط ذِكرُ عمرو بن حزم منه، فصار من حديث أبي بكر بن محمَّد، ونظنه خطأً من المطبوع، والله أعلم. ويشهد له حديث جابر عند مسلم (٢١٩٩) (٦١) قال: أرخَصَ النبي ﷺ في رُقية الحلية لبني عمرو. وانظر الحديث السالف برقم (٣٥١٥). قوله: "عرضت النهشة" أي: عرضت الرُّقية من نهشة الحلية، أي: لَسعتها
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ أَبِي الضُّحَى، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ إِذَا أَتَى الْمَرِيضَ فَدَعَا لَهُ قَالَ " أَذْهِبِ الْبَاسْ رَبَّ النَّاسْ وَاشْفِ أَنْتَ الشَّافِي لاَ شِفَاءَ إِلاَّ شِفَاؤُكَ شِفَاءً لاَ يُغَادِرُ سَقَمًا " .
আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা), হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কোন রোগীর নিকট এলে তিনি এই দুআ’ করতেনঃ “আযহিবিল বাসা রব্বানা নাস ওয়াশফে আনতাশ শাফী লা শিফাউকা শিফাআন লা ইউগাদিরু সাকামান” (হে মানুষের প্রভু! ব্যাধি ও কষ্ট দূর করে দাও, রোগমুক্তি দান করো তুমিই আরোগ্য দানকারী, তোমার আরোগ্য দানই আসল, যা কোন রোগকেই ছাড়ে না)।
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. جرير: هو ابن عبد الحميد، ومنصور: هو ابن المعتمر، وأبو الضحى: هو مسلم بن صَبِيح. وقد سلف الحديث برقم (١٦١٩)
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ رَبِّهِ، عَنْ عَمْرَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ كَانَ مِمَّا يَقُولُ لِلْمَرِيضِ بِبُزَاقِهِ بِإِصْبَعِهِ " بِسْمِ اللَّهِ بِتُرْبَةِ أَرْضِنَا بِرِيقَةِ بَعْضِنَا لِيُشْفَى سَقِيمُنَا بِإِذْنِ رَبِّنَا " .
আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা), হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর আংগুলে লালা লাগিয়ে রোগীর জন্য এই বলে দুআ’ করতেনঃ “বিসমিল্লাহ তুরবাতু আরদিনা বিরীকাতি বা’দিনা লিয়ুশফা সাকীমুনা বিইযনি রব্বিনা” (আল্লাহর নামে আমাদের এ যমীনের মাটি আমাদের কারো লালার সাথে মিশিয়ে দিলাম, যেন তাতে আমাদের প্রভুর নির্দেশে আমাদের রোগী আরোগ্য লাভ করে)
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. سفيان: هو ابن عيينة، وعبد ربه: هو ابن سعيد بن قيس الأنصاري، وعمرة: هي بنت عبد الرحمن الأنصارية. وأخرجه البخاري (٥٧٤٦)، ومسلم (٢١٩٤)، وأبو داود (٣٨٩٥)، والنسائي في "الكبرى" (٧٥٠٨) و (١٠٧٩٥) من طريق سفيان بن عيينة، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٤٦١٧)، و"صحيح ابن حبان" (٢٩٧٣). قال النووي في "شرح مسلم": معنى الحديث أنه يأخذ مِن ريقِ نفسه على إصبعه السبابة ثم يضعها على التراب، فيعلق بها منه شيء فيمسح به على الموضع الجريح أو العليل، ويقول هذا الكلام في حال المسح، والله أعلم