হাদীস বিএন


সুনান ইবনু মাজাহ





সুনান ইবনু মাজাহ (641)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ لَهَا وَكَانَتْ حَائِضًا ‏"‏ انْقُضِي شَعْرَكِ وَاغْتَسِلِي ‏"‏ ‏.‏ قَالَ عَلِيٌّ فِي حَدِيثِهِ ‏"‏ انَقُضِي رَأْسَكِ ‏"‏ ‏.‏




আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে তার হায়িদগ্রস্ত অবস্থায় বলেন, তোমার মাথার চুল খুলে গোসল করো। অধস্তন রাবী আলী (রাহিমাহুল্লাহ)-এর বর্ণনায় আছেঃ তোমার মাথার চুল খুলে ফেলো। [৬৩৮]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  إسناده صحيح. وكيع: هو ابن الجراح، وعروة: هو ابن الزبير. وأخرجه ضمن قصة حجة الوداع البخاري (٣١٦)، ومسلم (١٢١١)، وأبو داود (١٧٨١)، والنسائي ١/ ١٣٢ و٥/ ١٦٥ - ١٦٦ من طريقين عن عروة، بهذا الإسناد. قال الحافظ ابن حجر في "فتح الباري" ١/ ٤١٨: وظاهر الحديث وجوب نقض المرأة شعرها عند غسل المحيض، وبه قال الحسن وطاووس في الحائض دون الجنب، وبه قال أحمد، ورجح جماعة من أصحابه أنه للاستحباب فيهما، قال ابن قدامة في "المغني" ١/ ٢٩٨ - ٢٩٩: ولا أعلم أحدًا قال بوجوبه فيهما إلا ما روي عن عبد الله بن عمرو، قال الحافظ: وهو في "صحيح مسلم" (٣٣١) عنه، وفيه إنكار عائشة عليه الأمر بذلك، لكن ليس فيه تصريح بأنه كان يوجبه. وقال النووي: حكاه أصحابنا عن النخعي. واستدل الجمهور على عدم الوجوب بحديث أم سلمة قالت: يا رسول الله، إني امرأة أشذُ ضفر رأسي أفانقضه لغسل الجنابة؟ قال: "لا". رواه مسلم (٣٣٠)، وفي رواية له: "للحيضة والجنابة" وحملوا الأمر في حديث عائشة على الاستحباب جمعًا بين الروايتين، أو يجمع بالتفصيل بين من لا يصل الماء إليه بالنقض فيلزم، وإلا فلا.









সুনান ইবনু মাজাহ (642)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ مُهَاجِرٍ، قَالَ سَمِعْتُ صَفِيَّةَ، تُحَدِّثُ عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ أَسْمَاءَ، سَأَلَتْ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ عَنِ الْغُسْلِ مِنَ الْمَحِيضِ فَقَالَ ‏"‏ تَأْخُذُ إِحْدَاكُنَّ مَاءَهَا وَسِدْرَهَا فَتَطْهُرُ فَتُحْسِنُ الطُّهُورَ أَوْ تَبْلُغُ فِي الطُّهُورِ ثُمَّ تَصُبُّ عَلَى رَأْسِهَا فَتَدْلُكُهُ دَلْكًا شَدِيدًا حَتَّى تَبْلُغَ شُئُونَ رَأْسِهَا ثُمَّ تَصُبُّ عَلَيْهَا الْمَاءَ ثُمَّ تَأْخُذُ فِرْصَةً مُمَسَّكَةً فَتَطْهُرُ بِهَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَتْ أَسْمَاءُ كَيْفَ أَتَطَهَّرُ بِهَا قَالَ ‏"‏ سُبْحَانَ اللَّهِ تَطَهَّرِي بِهَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَتْ عَائِشَةُ - كَأَنَّهَا تُخْفِي ذَلِكَ - تَتَبَّعِي بِهَا أَثَرَ الدَّمِ ‏.‏ قَالَتْ وَسَأَلَتْهُ عَنِ الْغُسْلِ مِنَ الْجَنَابَةِ ‏.‏ فَقَالَ ‏"‏ تَأْخُذُ إِحْدَاكُنَّ مَاءَهَا فَتَطْهُرُ فَتُحْسِنُ الطُّهُورَ أَوْ تَبْلُغُ فِي الطُّهُورِ حَتَّى تَصُبَّ الْمَاءَ عَلَى رَأْسِهَا فَتَدْلُكُهُ حَتَّى تَبْلُغَ شُئُونَ رَأْسِهَا ثُمَّ تُفِيضُ الْمَاءَ عَلَى جَسَدِهَا ‏.‏ فَقَالَتْ عَائِشَةُ نِعْمَ النِّسَاءُ نِسَاءُ الأَنْصَارِ لَمْ يَمْنَعْهُنَّ الْحَيَاءُ أَنْ يَتَفَقَّهْنَ فِي الدِّينِ ‏.




আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, আসমা’ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট হায়িদের গোসল সম্পর্কে জিজ্ঞেস করেন। তিনি বলেনঃ তোমাদের যে কোন নারী বরই পাতাযুক্ত পানি নিয়ে যেন উত্তমরূপে পবিত্রতা অর্জন করে যতটা উত্তমরূপে সম্ভব; অতঃপর মাথায় পানি ঢেলে তা মর্দন করবে, যেন তার চুলের গোড়ায় ‍পানি পৌঁছে যায়, অতঃপর তার গোটা শরীরে পানি ঢেলে দিয়ে এক টুকরা সুগন্ধিযুক্ত পশমী কাপড় অথবা তুলা দ্বারা পবিত্রতা অর্জন করবে। আসমা’ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, আমি তার সাহায্যে কিরূপে পবিত্রতা অর্জন করবো? তিনি বলেন, সুবহানাল্লাহ! তার সাহায্যেই তুমি পবিত্রতা অর্জন করবে। আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) চুপিসারে বলেন, তুমি তা দিয়ে রক্তের চিহ্ন মুছে ফেলবে। আসমা’ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, আমি তাঁকে নাপাকির গোসল সর্ম্পকে জিজ্ঞেস করলাম। তিনি বলেন, তোমাদের যে কোন নারী তার গোসলের পানি নিয়ে যেন যতটা সম্ভব উত্তমরূপে পবিত্রতা অর্জন করে, অতঃপর তার মাথায় পানি ঢেলে তা উত্তমরূপে মর্দন করে, যাতে চুলের গোড়ায় ‍পানি পৌঁছে যায়, অতঃপর গোটা দেহে পানি ঢালবে। আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, আনসার মহিলারা কতই না উত্তম। ধর্মীয় জ্ঞান অর্জন করতে লজ্জা তাদের বিরত রাখে না। [৬৩৯]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  حديث صحيح دون ذكر غسل الجنابة، وهذا إسناد حسن في المتابعات والشواهد من أجل إبراهيم بن المهاجر الكوفي، فقد روى له مسلم متابعة، وقد تابعه منصور بن عبد الرحمن ابن صفية، وهي بنت شيبة. شيبة: هو ابن الحجاج. وأخرجه مسلم (٣٣٢) (٦١)، وأبو داود (٣١٤) و (٣١٥) و (٣١٦) من طريق إبراهيم بن المهاجر. وهو في "مسند أحمد" (٢٥١٤٥). وأخرجه البخاري (٣١٤)، ومسلم (٣٣٢) (٦٠)، والنسائي ١/ ١٣٥ - ١٣٦ من طريق منصور بن عبد الرحمن الحَجَبي، عن أمه صفية بنت شيبة، عن عائشة، أن امرأة سألت النبي ﷺ عن غسلها من المحيض، فأمرها كيف تغتسل، قال: "خذي فِرصة من مِسْك فتطهري بها". قالت: كيف أتطهر بها؟ قال: "سبحان الله، تطهري"، فاجتبذتُها إلي فقلتُ: تتعبي بها أثر الدم. وهو في "مسند أحمد" (٢٤٩٠٧). وانظر حديث أم سلمة السالف برقم (٦٠٣). قوله: "فِرْصة" أي: قطعة من قطن أو صوف. "ممسكة" أي: مطلية بالمسك. قاله السندي.









সুনান ইবনু মাজাহ (643)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنِ الْمِقْدَامِ بْنِ شُرَيْحِ بْنِ هَانِئٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كُنْتُ أَتَعَرَّقُ الْعَظْمَ وَأَنَا حَائِضٌ، فَيَأْخُذُهُ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَيَضَعُ فَمَهُ حَيْثُ كَانَ فَمِي وَأَشْرَبُ مِنَ الإِنَاءِ فَيَأْخُذُهُ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَيَضَعُ فَمَهُ حَيْثُ كَانَ فَمِي وَأَنَا حَائِضٌ ‏.‏




আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি ঋতুবতী অবস্থায় হাড় চুষতাম, অতঃপর রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সেটি নিয়ে আমার মুখ লাগানো স্থানে তাঁর মুখ রেখে তা চুষতেন। আবার আমি ঋতুবতী থাকাকালে যে ‍পাত্রে পানি পান করতাম, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সেটি নিয়ে আমার মুখ লাগানো স্থানে তাঁর মুখ লাগিয়ে পান করতেন। [৬৪০]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  إسناده صحيح. شعبة: هو ابن الحجاج. وأخرجه مسلم (٣٠٠)، وأبو داود (٢٥٩)، والنسائي ١/ ٥٦ - ٥٧ و ١٤٨ - ١٤٩ و ١٤٩ و ١٧٨ و١٩٠ و١٩٠ - ١٩١ و١٩١ من طرق عن المقدام، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٤٣٢٨)، و"صحيح ابن حبان" (١٣٦٠) و (١٣٦١). قولها: "أتعرَّق العظم" أي: آخُذُ عنه اللحم بأسناني.









সুনান ইবনু মাজাহ (644)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ ثَابِتٍ، عَنْ أَنَسٍ، أَنَّ الْيَهُودَ، كَانُوا لاَ يَجْلِسُونَ مَعَ الْحَائِضِ فِي بَيْتٍ وَلاَ يَأْكُلُونَ وَلاَ يَشْرَبُونَ ‏.‏ قَالَ فَذُكِرَ ذَلِكَ لِلنَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَأَنْزَلَ اللَّهُ ‏{وَيَسْأَلُونَكَ عَنِ الْمَحِيضِ قُلْ هُوَ أَذًى فَاعْتَزِلُوا النِّسَاءَ فِي الْمَحِيضِ}‏ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏"‏ اصْنَعُوا كُلَّ شَىْءٍ إِلاَّ الْجِمَاعَ ‏"‏ ‏.‏




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, বাড়িতে ইহূদীরা ঋতুবতী মহিলাদের সাথে একত্রে বসতো না এবং পানাহার করত না। রাবী বলেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট বিষয়টি উত্থাপন করা হলে আল্লাহ তাআলা এ আয়াত নাযিল করেন (অনুবাদ): “লোকে আপনাকে ঋতুস্রাব সম্পর্কে জিজ্ঞেস করে। আপনি বলুনঃ তা অশুচি। অতএব তোমরা ঋতুস্রাবকালে স্ত্রীসঙ্গ ত্যাগ করো” (সূরাহ বাকারাঃ ২২২)। তখন রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, তোমরা তাদের সাথে সঙ্গম ব্যতীত আর সবকিছুই করতে পারো। [৬৪১]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  إسناده صحيح. أبو الوليد: هو هشام بن عبد الملك الطيالسي، وثابت: هو ابن أسلم. وأخرجه مطولًا مسلم (٣٠٢)، وأبو داود (٢٥٨) و (٢١٦٥)، والترمذي (٣٢١٨)، والنسائي ١/ ١٥٢ و ١٨٧ من طرق عن حماد، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٢٣٥٤) و (١٣٥٧٦)، و"صحيح ابن حبان" (١٣٦٢).









সুনান ইবনু মাজাহ (645)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَمُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي غَنِيَّةَ، عَنْ أَبِي الْخَطَّابِ الْهَجَرِيِّ، عَنْ مَحْدُوجٍ الذُّهْلِيِّ، عَنْ جَسْرَةَ، قَالَتْ أَخْبَرَتْنِي أُمُّ سَلَمَةَ، قَالَتْ دَخَلَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ صَرْحَةَ هَذَا الْمَسْجِدِ فَنَادَى بِأَعْلَى صَوْتِهِ ‏ "‏ إِنَّ الْمَسْجِدَ لاَ يَحِلُّ لِجُنُبٍ وَلاَ لِحَائِضٍ ‏"‏ ‏.




উম্মু সালামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এই মাসজিদের বারান্দায় প্রবেশ করে উচ্চৈঃস্বরে ঘোষণা করেন যে, নাপাক ব্যক্তি ও হায়িদগ্রস্তা নারীর মাসজিদে প্রবেশ করা হালাল নয়। [৬৪২]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، أبو الخطاب و محدوج مجہولان (تقریب: 8081،6498) ، والحدیث ضعفہ البوصیري وحدیث أبي داود (232) یغني، عنہ، (انوار الصحیفہ ص 401)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  إسناده ضعيف لجهالة أبي الخطّاب الهَجَري ومَحدوج الذُّهْلي. وقد خالفهما أفلَتُ بن خليفة، فرواه عن جَسرة بنت دجاجة، عن عائشة عند أبي داود (٢٣٢)، وإسناده حسن. وقد صحح أبو زرعة الرازي أنه من حديث عائشة فيما نقله عنه ابن أبي حاتم في "العلل" ١/ ٩٩ أبو نعيم: هو الفضل بن دكين، وابن أبي غنية: هو عبد الملك بن حميد بن أبي غنية.









সুনান ইবনু মাজাহ (646)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى، عَنْ شَيْبَانَ النَّحْوِيِّ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أُمِّ بَكْرٍ، أَنَّهَا أَخْبَرَتْ أَنَّ عَائِشَةَ قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فِي الْمَرْأَةِ تَرَى مَا يَرِيبُهَا بَعْدَ الطُّهْرِ قَالَ ‏ "‏ إِنَّمَا هِيَ عِرْقٌ أَوْ عُرُوقٌ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى يُرِيدُ بَعْدَ الطُّهْرِ بَعْدَ الْغُسْلِ ‏.‏




আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, যে নারী (হায়িদ থেকে) পবিত্র হওয়ার পর সন্দেহজনক কিছু দেখতে পায় তার সম্পর্কে রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, তা শিরাজনিত রোগ বা শিরাসমূহ থেকে নির্গত। মুহাম্মাদ বিন ইয়াহইয়া (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, হাদীসে “পবিত্র হওয়ার পর” বলতে “গোসল করার পর” বুঝানো হয়েছে। [৬৪৩]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف، سنن أبي داود (293)، (انوار الصحیفہ ص 401)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  صحيح لغيره، وهذا إسناد ضعيف لجهالة أم بكر الراوية عن عائشة. شيبان النحوي: هو ابن عبد الرحمن. وأخرجه أبو داود (٢٩٣) من طريق يحيى بن أبي كثير، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٤٤٢٨). وقد صح من حديث عائشة في قصة أم حبيبة بنت جحش التي كانت تُستحاض فشكت ذلك إلى النبي ﷺ فقال لها: "إن هذه ليست بالحيضة، وإنما هو عرق … " وقد أخرجه البخاري (٣٢٧)، ومسلم (٣٣٤).









সুনান ইবনু মাজাহ (647)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنِ ابْنِ سِيرِينَ، عَنْ أُمِّ عَطِيَّةَ، قَالَتْ لَمْ نَكُنْ نَرَى الصُّفْرَةَ وَالْكُدْرَةَ شَيْئًا ‏.‏
قَالَ مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الرَّقَاشِيُّ، حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ حَفْصَةَ، عَنْ أُمِّ عَطِيَّةَ، قَالَتْ كُنَّا لاَ نَعُدُّ الصُّفْرَةَ وَالْكُدْرَةَ شَيْئًا ‏.
‏ قَالَ مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى وُهَيْبٌ أَوْلاَهُمَا عِنْدَنَا بِهَذَا ‏.‏




উম্মু আতিয়্যাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমরা হলদে ও মেটে বর্ণের স্রাব দেখলে তাকে কিছুই মনে করতাম না। [৬৪৪]

তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।

২/৬৪৭(১). উম্মু আতিয়্যাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা), তিনি বলেন, আমরা হলদে ও মেটে বর্ণের স্রাবকে হায়িদের মধ্যে গণ্য করতাম না। মুহাম্মাদ বিন ইয়াহইয়া বলেন, আমাদের কাছে এটাই গ্রহণযোগ্য। [৬৪৫]

তাহকীক আলবানীঃ হাসান সহীহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  إسناده صحيح. معمر: هو ابن رشد، وأيوب: هو ابن أبي تميمة السختياني وابن سيرين: هو محمَّد. وهو في "مصنف عبد الرزاق" (١٢١٦). وأخرجه البخاري (٣٢٦)، وأبو داود (٣٠٨)، والنسائي ١/ ١٨٦ - ١٨٧ من طريق إسماعيل ابن علية، عن أيوب، بهذا الإسناد. وانظر ما بعده. ويجمع بين حديث عائشة الذي أخرجه مالك في "موطئه" ١/ ٥٩، وفيه: "لا تعجلْن حتى ترين القَصَّةَ البيضاء" وبين حديث أم عطية هذا بأن ذلك محمول على ما إذا رأت الصفرة أو الكدرة في أيام الحيض، وأما في غير أيام الحيض، فعلى ما قالته أم عطية. *  إسناده صحيح. وُهَيب: هو ابن خالد، وحفصة: هي بنت سيرين أم الهُذَيل أخت محمَّد بن سيرين الفقيه. وأخرجه أبو داود (٣٠٧) من طريق قتادة، عن أم الهذيل -وهي حفصة- بهذا الإسناد، بلفظ: "كنا لا نعد الكدرة والصفرة بعد الطهر شيئا". وانظر ما قبله









সুনান ইবনু মাজাহ (648)


حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ، حَدَّثَنَا شُجَاعُ بْنُ الْوَلِيدِ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ عَبْدِ الأَعْلَى، عَنْ أَبِي سَهْلٍ، عَنْ مُسَّةَ الأَزْدِيَّةِ، عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ، قَالَتْ كَانَتِ النُّفَسَاءُ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ تَجْلِسُ أَرْبَعِينَ يَوْمًا وَكُنَّا نَطْلِي وُجُوهَنَا بِالْوَرْسِ مِنَ الْكَلَفِ ‏.




উম্মু সালামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর যুগে নিফাসগ্রস্তা নারীরা চল্লিশ দিন পর্যন্ত অপেক্ষা করতো। আমরা তখন আমাদের মুখমন্ডলে ওয়ারস ঘাস থেকে নিঃসৃত হলদে বর্ণের রস কলপ হিসাবে ব্যবহার করতাম। [৬৪৬]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  حسن لغيره، وهذا إسناد ضعيف فيه مُسَّة الأزدية، وهي مجهولة الحال. أبو سهل: هو كثير بن زياد. وأخرجه أبو داود (٣١١) و (٣١٢)، والترمذي (١٣٩) من طريقين عن أبي سهل، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٦٥٦١). وفي الباب عن أنس بن مالك سيأتي بعده. وعن عثمان بن أبي العاص عند الدارقطني (٨٥٦)، والحاكم ١/ ١٧٦ بلفظ: "وقت لنساء في نفاسهن أربعين يومًا" وإسناده ضعيف. وعن أبي هريرة عند ابن عدي في "الكامل" ٥/ ١٨٦١، وفيه العلاء بن كثير، وهو ضعيف. وعن جابر بن عبد الله عند الطبراني في "الأوسط" (٤٦٥)، وفي إسناده عبيد ابن جَنَّاد، وهو ضعيف. وانظر تتمة شواهده في "المسند" (٢٦٥٦١).









সুনান ইবনু মাজাহ (649)


حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا الْمُحَارِبِيُّ، عَنْ سَلاَّمِ بْنِ سُلَيْمٍ، - أَوْ سَلْمٍ شَكَّ أَبُو الْحَسَنِ وَأَظُنُّهُ هُوَ أَبُو الأَحْوَصِ - عَنْ حُمَيْدٍ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ وَقَّتَ لِلنُّفَسَاءِ أَرْبَعِينَ يَوْمًا إِلاَّ أَنْ تَرَى الطُّهْرَ قَبْلَ ذَلِكَ ‏.‏




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) নিফাসগ্রস্তা নারীদের নিফাসকাল চল্লিশ দিন নির্ধারণ করতেন। এই মেয়াদের আগেই কেউ পবিত্র হলে তা স্বতন্ত্র ব্যাপার। [৬৪৭]

তাহকীক আলবানীঃ দঈফ জিদ্দান।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف جدا




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف جدًا، سلام الطویل: متروک (تقریب: 2702) ، والمحاربي مدلس و عنعن ، وللحدیث شواہد کثیرۃ، (انوار الصحیفہ ص 401، 402)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  إسناده ضعيف، سلام بن سُلَيم -وهو الطويل- متروك الحديث، وصححه البوصيري في "مصباح الزجاجة" ورقة ٤٤ ظنًا منه أن سلاّمًا هذا هو أبو الأحوص الثقة، وأخطأ في ذلك. المحاربي: هو عبد الرحمن بن محمَّد، وأبو الحسن الذي شك: هو القطان راوي "السُّنن" عن ابن ماجه، وحميد: هو الطويل. وأخرجه أبو يعلى (٣٧٩١)، والدارقطني (٨٥٢) من طريق عبد الله بن سعيد أبي سعيد الأشج، بهذا الإسناد. وأخرجه البيهقي ١/ ٣٤٣ من طريق زيد العمي، عن أبي إياس، عن أنس، وإسناده ضعيف لضعف زيد العمي.









সুনান ইবনু মাজাহ (650)


حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْجَرَّاحِ، حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ عَبْدِ الْكَرِيمِ، عَنْ مِقْسَمٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ كَانَ الرَّجُلُ إِذَا وَقَعَ عَلَى امْرَأَتِهِ وَهِيَ حَائِضٌ أَمَرَهُ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ أَنْ يَتَصَدَّقَ بِنِصْفِ دِينَارٍ ‏.‏




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, কোন ব্যক্তি তার হায়িদগ্রস্তা স্ত্রীর সাথে সহবাস করলে, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে অর্ধ-দীনার সদাকা (দান-খয়রাত) করার নির্দেশ দিয়েছেন। [৬৪৮]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، ترمذي (137)، (انوار الصحیفہ ص 402)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  صحيح موقوفًا، وهذا إسناد رجاله ثقات غير عبد الله بن الجرّاح فهو صدوق. أبو الأحوص: هو سلاّم بن سُليم، وعبد الكريم: هو ابن مالك الجزري. وقد سلف برقم (٦٤٠) وخرجناه هناك.









সুনান ইবনু মাজাহ (651)


حَدَّثَنَا أَبُو بِشْرٍ، بَكْرُ بْنُ خَلَفٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ، عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ صَالِحٍ، عَنِ الْعَلاَءِ بْنِ الْحَارِثِ، عَنْ حَرَامِ بْنِ حَكِيمٍ، عَنْ عَمِّهِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَعْدٍ، قَالَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ عَنْ مُوَاكَلَةِ الْحَائِضِ فَقَالَ ‏ "‏ وَاكِلْهَا ‏"‏ ‏.‏




আবদুল্লাহ্ বিন সাদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট ঋতুবতী স্ত্রীর সাথে একত্রে পানাহার করা সম্পর্কে জিজ্ঞেস করলাম। তিনি বলেন, তুমি তার সাথে একত্রে পানাহার করতে পারো। [৬৪৯]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  إسناده صحيح. وأخرجه أبو داود (٢١٢)، والترمذي (١٣٣) من طريق العلاء بن الحارث، بهذا الإسناد. ورواية أبي داود بلفظ: وذكر مؤاكلة الحائض، وساق الحديث. وقال الترمذي: حديث حسن غريب. وهو في "مسند أحمد" (١٩٠٠٧) مطولًا. تنبيه: هذان البابان مع حديثيهما من النسخ المطبوعة، ولم يردا في أصولنا الخطية، وذكرهما المزي في "التحفة" (٦٤٩١) و (٥٣٢٦)، وقال الحافظ ابن حجر في "النكت الظراف" في الثاني منهما: سقط هذا من الرواية المشهورة، وثبت في بعض النسخ، والله أعلم.









সুনান ইবনু মাজাহ (652)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ طَلْحَةَ بْنِ يَحْيَى، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يُصَلِّي وَأَنَا إِلَى جَنْبِهِ وَأَنَا حَائِضٌ وَعَلَىَّ مِرْطٌ لِي وَعَلَيْهِ بَعْضُهُ ‏.‏




আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সলাত আদায় করতেন, আমি হায়িদগ্রস্তা অবস্থায় তাঁর পাশে অবস্থান করতাম। আমার গায়ে পরিহিত পশমী চাদরের কিছু অংশ তাঁর উপর পতিত থাকতো। [৬৫০]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  إسناده قوي، طلحة بن يحيى -وهو ابن طلحة بن عبيد الله التيمي- صدوق لا بأس به. وأخرجه مسلم (٥١٤)، وأبو داود (٣٧٥)، والنسائي ٢/ ٧١ من طريق وكيع، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٥٠٦٤). قوله: "مِرْط" هو من أكسية النساء، قال ابن الأثير: ويكون من صوف، وربما يكون من خز أو غيره.









সুনান ইবনু মাজাহ (653)


حَدَّثَنَا سَهْلُ بْنُ أَبِي سَهْلٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، حَدَّثَنَا الشَّيْبَانِيُّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ شَدَّادٍ، عَنْ مَيْمُونَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ صَلَّى وَعَلَيْهِ مِرْطٌ عَلَيْهِ بَعْضُهُ وَعَلَيْهَا بَعْضُهُ وَهِيَ حَائِضٌ ‏.‏




মায়মূনা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) রেশমী চাদর পরিহিত অবস্থায় সলাত পড়লেন, যার কতকাংশ আমার দেহে এবং কতকাংশ তাঁর দেহে ছিল। তখন আমি হায়িদগ্রস্তা ছিলাম। [৬৫১]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  إسناده صحيح. الشيباني: هو سليمان بن أبي سليمان أبو إسحاق. وأخرجه أبو داود (٣٦٩) من طريق سفيان بن عيينة، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٦٨٠٤). وأخرج نحوه البخاري (٣٣٣)، ومسلم (٥١٣)، وأبو داود (٦٥٦) من طريق الشيباني، به. وهو في "المسند" (٢٦٨٠٦).









সুনান ইবনু মাজাহ (654)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ عَبْدِ الْكَرِيمِ، عَنْ عَمْرِو بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ دَخَلَ عَلَيْهَا فَاخْتَبَأَتْ مَوْلاَةٌ لَهَا فَقَالَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏"‏ حَاضَتْ ‏"‏ ‏.‏ فَقَالَتْ نَعَمْ ‏.‏ فَشَقَّ لَهَا مِنْ عِمَامَتِهِ فَقَالَ ‏"‏ اخْتَمِرِي بِهَذَا ‏"‏ ‏.‏




আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার নিকট প্রবেশ করলেন। তার মুক্তদাসী পর্দার আড়ালে চলে গেল। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) জিজ্ঞেস করেনঃ তার কি হায়িদ হয়েছে (বালেগ হয়েছে)? আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, হাঁ। তিনি তাঁর পাগড়ীর একাংশ ছিঁড়ে তাকে দিয়ে বলেন, এটা দিয়ে তোমার মাথা ঢেকে নাও। [৬৫২]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، عبدالکریم بن أبی المخارق: ضعیف ، (انوار الصحیفہ ص 402)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  حديث صحيح، وهذا إسناد ضعيف لضعف عبد الكريم -وهو ابن أبي المُخارِق -وهو متابع. سفيان: هو الثوري. وعمرو بن سعيد: هو ابن العاص الأموي. وأخرجه أبو داود (٦٤٢) من طريق محمَّد بن سيرين، عن عائشة أنها قالت: إن رسول الله ﷺ دخل وفي حجرتي جارية، فألقى عليها حقوه، وقال لي: "شُقيه بشقتين، فأعطي هذه نصفًا والفتاة التي عند أم سلمة نصفًا، فإني لا أراها إلا قد حاضت، أو لا أُراهُما إلا قد حاضتا". وهو في "مسند أحمد" (٢٤٦٤٦). قلنا: ابن سيرين لم يسمع من عائشة. لكن جاء الحديث عند ابن الأعرابي في "معجمه" (١٩٩٦) من طريق حماد بن سلمة، عن أيوب، عن ابن سيرين، عن صفية بنت الحارث، عن عائشة. فإن كان الوصل محفوظًا عنده فالإسناد صحيح. وانظر تمام الكلام عليه في "المسند" (٢٤٦٤٦).









সুনান ইবনু মাজাহ (655)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ، وَأَبُو النُّعْمَانِ، قَالاَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ، عَنْ صَفِيَّةَ بِنْتِ الْحَارِثِ، عَنْ عَائِشَةَ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ لاَ يَقْبَلُ اللَّهُ صَلاَةَ حَائِضٍ إِلاَّ بِخِمَارٍ ‏"‏ ‏.‏




আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, ‍নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, আল্লাহ প্রাপ্তবয়স্কা নারীর সলাত ওড়না পরা ব্যতীত কবূল করেন না। [৬৫৩]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  إسناده حسن، صفية بنت الحارث بن طلحة العبدرية أم طلحة الطلحات، وكانت عائشة ﵂ تنزل عليها بالبصرة عقب وقعة الجمل، ذكرها ابن حبان في ثقات التابعين ٤/ ٣٨٥ - ٣٨٦، روى عنها محمَّد بن سيرين وقتادة، وعدها ابن حجر في "التقريب" صحابية، ولم يُتابَع. وباقي رجال الإسناد ثقات. أبو الوليد: هو الطيالسي، وأبو النعمان: هو محمَّد بن الفضل السدوسي. وأخرجه إسحاق بن راهويه في "مسنده" (١٢٨٤) و (١٢٨٥)، وابن أبي شيبة ٢/ ٢٣٠، وأحمد (٢٥١٦٧)، وأبو داود (٦٤١)، والترمذي (٣٧٨)، وابن الأعرابي في "معجمه" (١٩٩٤)، والبيهقي ٢/ ٢٣٢ و ٦/ ٥٧، والبغوي في "شرح السنة" (٥٢٧) من طرق عن حماد بن سلمة، بهذا الإسناد. وقال الترمذي: حديث حسن، وصححه ابن خزيمة (٧٧٥)، وابن حبان (١٧١١) و (١٧١٢)، والحاكم ١/ ٢٥١. وفي الباب آثار موقوفة عن عائشة وأم سلمة وميمونة وابن عباس خرجناها في "المسند" عند الحديث (٢٤٦٤٦). قال ابن عبد البر في "الاستذكار" ٥/ ٤٤٣: والذي عليه فقهاء الأمصار بالحجاز والعراق أن على المرأة الحرة أن تغطي جسمها كله بدرع صفيق سابغ وتخمر رأسها، فإنها كلها عورة إلا وجهها وكفيها، وأن عليها ستر ما عدا وجهها وكفيها.









সুনান ইবনু মাজাহ (656)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا أَيُّوبُ، عَنْ مُعَاذَةَ، ‏.‏ أَنَّ امْرَأَةً، سَأَلَتْ عَائِشَةَ قَالَتْ تَخْتَضِبُ الْحَائِضُ فَقَالَتْ قَدْ كُنَّا عِنْدَ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ وَنَحْنُ نَخْتَضِبُ فَلَمْ يَكُنْ يَنْهَانَا عَنْهُ ‏.




আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এক মহিলা আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে জিজ্ঞেস করলো, ঋতুবতী নারী কি খেযাব লাগাতে পারে? তিনি বলেন, আমরা নবী সাল্লাল্লাহু আল্লাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকট অবস্থানকালে খেযাব লাগাতাম। তিনি আমাদের তা থেকে বিরত থাকতে বলেননি। [৬৫৪]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  إسناده صحيح. حجاج: هو ابن منهال، ومعاذة: هي بنت عبد الله العدوية.









সুনান ইবনু মাজাহ (657)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبَانَ الْبَلْخِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَنْبَأَنَا إِسْرَائِيلُ، عَنْ عَمْرِو بْنِ خَالِدٍ، عَنْ زَيْدِ بْنِ عَلِيٍّ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ، قَالَ انْكَسَرَتْ إِحْدَى زَنْدَىَّ فَسَأَلْتُ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَأَمَرَنِي أَنْ أَمْسَحَ عَلَى الْجَبَائِرِ ‏.‏
قَالَ أَبُو الْحَسَنِ بْنُ سَلَمَةَ أَنْبَأَنَا الدَّبَرِيُّ، عَنْ عَبْدِ الرَّزَّاقِ، نَحْوَهُ ‏.‏




আলী বিন আবূ তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমার বাহুর একটি হাড় ভেঙ্গে গেল। আমি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে জিজ্ঞেস করলে তিনি আমাকে পট্টির উপর মাসহ করতে নির্দেশ দেন। [৬৫৫]

তাহকীক আলবানী : দঈফ জিদ্দান।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف جدا




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ موضوع ، عمرو بن خالد الواسطي: متروک،رماہ وکیع بالکذب ، قال معاذ: وقال ابن دقیق العید: ’’زید بن علی عن ابیہ وھو منقطع‘‘، (الامام: 3/ 178)، (انوار الصحیفہ ص 402)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  إسناده تالف جدًا، عمرو بن خالد -وهو القرشي- كذبه بعضهم وتركه آخرون، وقال أحمد بن حنبل: كذاب يروي عن زيد بن علي عن آبائه أحاديث موضوعة. وهو في "مصنف عبد الرزاق" (٦٢٣)، ومن طريقه أخرجه الدارقطني (٨٧٨). وأخرجه الدارقطني (٨٧٩)، والبيهقي ١/ ٢٢٨ من طريق سعيد بن سالم القداح، عن إسرائيل بن يونس بن أبي إسحاق السبيعي، بهذا الإسناد.









সুনান ইবনু মাজাহ (658)


حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ حَمَّادِ بْنِ سَلَمَةَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ زِيَادٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ رَأَيْتُ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ حَامِلَ الْحُسَيْنِ بْنِ عَلِيٍّ عَلَى عَاتِقِهِ وَلُعَابُهُ يَسِيلُ عَلَيْهِ ‏.




আবূ হুরায়রাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে হুসাইন বিন আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে তাঁর কাঁধে বহন করতে দেখেছি এবং তার মুখের লালা নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর শরীরে গড়িয়ে পড়ছিল। [৬৫৬]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  إسناده صحيح. محمَّد بن زياد: هو الجمحي مولاهم المدني. وأخرجه أحمد في "مسنده" (٩٧٧٩)، وفي "فضائل الصحابة" (١٣٧٠) عن وكيع بن الجراح، وإسحاقُ بن راهويه في "مسنده" (٥٢) عن عفان بن مسلم، كلاهما عن حماد بن سلمة، بهذا الإسناد. ولفظ أحمد: "الحسن"، ولفظ عفان: "الحسن أو الحسين". وأخرجه عبد الرزاق (٦٩٤٠) - وعنه أحمد (٧٧٥٨) - عن معمر، عن محمَّد ابن زياد، به، وقال: "الحسين". قوله: "رأيت النبي ﷺ حاملَ الحسينِ" بإضافة اسم الفاعل إلى مفعوله، ورواية أحمد: "حاملًا الحسن".









সুনান ইবনু মাজাহ (659)


حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ مِسْعَرٍ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ بْنِ كَرَامَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، عَنْ مِسْعَرٍ، عَنْ عَبْدِ الْجَبَّارِ بْنِ وَائِلٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ رَأَيْتُ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ أُتِيَ بِدَلْوٍ فَمَضْمَضَ مِنْهُ فَمَجَّ فِيهِ مِسْكًا أَوْ أَطْيَبَ مِنَ الْمِسْكِ وَاسْتَنْثَرَ خَارِجًا مِنَ الدَّلْوِ ‏.‏




ওয়ায়িল বিন হুজর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি দেখলাম যে, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সামনে এক বালতি পানি আনা হলো। তিনি তা থেকে কুলি করলেন এবং তাতে কস্তুরীসম বা কস্তুরীর চেয়েও সুঘ্রাণযুক্ত তাঁর মুখের লালা নিক্ষেপ করলেন এবং নাকের ময়লা বালতির পানিতে ঝেড়ে ফেললেন। [৬৫৭]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، السند منقطع: عبد الجبار لم یسمع من أبیہ کما قال البخاري، (جامع الترمذي: 1453)، (انوار الصحیفہ ص 402)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  حديث حسن، عبد الجبار بن وائل لم يسمع من أبيه، وبينهما في هذا الحديث واسطة جاء بيانها في رواية أبي نعيم الفضل بن دكين عن مسعر، وهم أهل عبد الجبار، حيث قال: حدثني أهلي عن أبي … ، وجهالة أهله لا تضر، لأنهم جمع، كما بينا ذلك في التعليق على "المسند" عند الحديث (١١٧٣٧). أبو أسامة: هو حماد بن أسامة، ومسعر: هو ابن كدام. وأخرجه الحميدي (٨٨٦)، والفاكهي في "أخبار مكة" (١١٣٦) من طريق ابن عيينة، بهذا الإسناد. وأخرجه البيهقي في "دلائل النبوة" ٦/ ٦٩ من طريق أبي أسامة، به. وأخرجه أحمد (١٨٨٥١)، والطبراني ٢٢/ (٧٠) من طريق وكيع، وأحمد (١٨٨٧٤) عن أبي أحمد عبد الله بن الزبير، كلاهما عن مسعر، به. وأخرجه أحمد (١٨٨٣٨)، وابن قانع في "معجم الصحابة" ٣/ ١٨٢، والطبراني ٢٢/ (١١٩) من طريق أبي نعيم الفضل بن دكين، عن مسعر، عن عبد الجبار، حدثني بعض أهلي، عن أبي. وأخرجه الطبراني ٢٢/ (١٢٠) من طريق المقدام بن داود، عن أسد بن موسى، عن ابن عيينة، عن عبد الجبار، عن بعض أهله، عن أبيه. والمقدام ضعيف.









সুনান ইবনু মাজাহ (660)


حَدَّثَنَا أَبُو مَرْوَانَ، حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ مَحْمُودِ بْنِ الرَّبِيعِ، وَكَانَ، قَدْ عَقَلَ مَجَّةً مَجَّهَا رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فِي دَلْوٍ مِنْ بِئْرٍ لَهُمْ ‏.‏




মাহমুদ ইবনুর রবী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি কূপ থেকে পানি তোলা বালতিটি তুলে রেখে দিলেন, যার মধ্যে রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর মুখের লালা নিক্ষেপ করেছিলেন। [৬৫৮]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: *  إسناده صحيح، وقد اختلف فيه على إبراهيم بن سعد اختلافًا لا يضر، فهو يرويه عن الزهري مباشرة كما عند المصنف هنا وعند البخاري (١١٨٥)، ويرويه أيضًا عن صالح بن كيسان عن الزهري كما عند البخاري (١٨٩)، والطريقان محفوظان، ويكون إبراهيم سمعه أولًا من صالح، ثم سمعه من الزهري، وسماعه من الزهري معروف. وأخرجه البخاري (٧٧)، ومسلم بإثر الحديث (٦٥٧)، والنسائي في "الكبرى" (٥٨٣٤) من طرق عن الزهري، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٣٦٢٠)، و"صحيح ابن حبان" (٤٥٣٤). وسيأتي ضمن حديث مطول برقم (٧٥٤).