সুনান ইবনু মাজাহ
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ، أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ رَجَاءٍ الْمَكِّيُّ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ تُخْرَجُ لَهُ حَرْبَةٌ فِي السَّفَرِ فَيَنْصِبُهَا فَيُصَلِّي إِلَيْهَا .
ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর সফরকালে তাঁর জন্য একটি বর্শা সাথে নেয়া হতো। তিনি তা মাটিতে গেড়ে তার দিকে ফিরে সালাত আদায় করতেন। [৯৪১]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: بخاری ومسلم
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. عبيد الله: هو ابن عمر العمري. وأخرجه البخاري (٤٩٤)، ومسلم (٥٠١)، وأبو داود (٦٨٧)، والنسائي ٢/ ٦٢ من طرق عن عبيد الله بن عمر، بهذا الإسناد. ولفظ مسلم: كان إذا خرج يوم العيد أمر بالحربة فتوضع بين يديه، فيصلي إليها، والناس وراءه، وكان يفعل ذلك في السفر، فمن ثَمَّ اتخذها الأمراء. وأخرجه النسائي ٣/ ١٨٣ من طريق أيوب، عن نافع، به، ولفظه: كان يُخرِج العَنَزة يوم الفطر ويوم الأضحى يَركُزها فيصلي إليها. وهو يوم "مسند أحمد" (٤٦١٤) و (٥٧٣٤)، وسيأتي برقم (١٣٠٤) و (١٣٠٥). قوله. "حربة" هي دون الرمح عريضة النصل. قاله السندي.
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ أَبِي سَعِيدٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَ لِرَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ حَصِيرٌ يُبْسَطُ بِالنَّهَارِ وَيَحْتَجِرُهُ بِاللَّيْلِ يُصَلِّي إِلَيْهِ .
আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর একটি চাটাই ছিল, যা দিনের বেলা বিছানো হতো এবং রাতে তিনি তা দিয়ে ঘের তৈরি করে সেদিকে মুখ করে সালাত আদায় করতেন।[৯৪২]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: بخاری ومسلم
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. سعيد بن أبي سعيد: هو المقبري. وأخرجه مطولًا البخاري (٧٣٠)، ومسلم (٧٨٢)، والنسائي ٢/ ٦٨ - ٦٩ من طرق عن سعيد المقبري، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٤١٢٤)، و"صحيح ابن حبان" (٢٥٧١).
حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ خَلَفٍ أَبُو بِشْرٍ، حَدَّثَنَا حُمَيْدُ بْنُ الأَسْوَدِ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ أُمَيَّةَ، ح وَحَدَّثَنَا عَمَّارُ بْنُ خَالِدٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أُمَيَّةَ، عَنْ أَبِي عَمْرِو بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حُرَيْثٍ، عَنْ جَدِّهِ، حُرَيْثِ بْنِ سُلَيْمٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ " إِذَا صَلَّى أَحَدُكُمْ فَلْيَجْعَلْ تِلْقَاءَ وَجْهِهِ شَيْئًا فَإِنْ لَمْ يَجِدْ فَلْيَنْصِبْ عَصًا فَإِنْ لَمْ يَجِدْ فَلْيَخُطَّ خَطًّا ثُمَّ لاَ يَضُرُّهُ مَا مَرَّ بَيْنَ يَدَيْهِ " .
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে বর্ণনা করেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, তোমাদের কেউ যখন নামায পড়বে তখন তার সামনে কোন একটি কিছু দিয়ে দিবে। যদি কোন কিছু না পাও তবে একটি লাঠি দাঁড় করাবে। তাও যদি না পাও তবে দাগ দিয়ে দিবে। এরপর তার সামনে দিয়ে কোন কিছু অতিক্রম করলেও (নামাযের) কোন ক্ষতি হবে না। [৯৪৩]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، سنن أبي داود (689،690)، (انوار الصحیفہ ص 411)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف لجهالة راويه أبي عمرو بن محمَّد بن عمرو بن حريث، وقد اضطربوا في تسميته، فقيل: عن أبي عمرو بن محمَّد بن عمرو بن حريث عن جده، وقيل: عن أبي محمَّد بن عمرو بن حريث عن جده، وقيل: عن أبي عمرو ابن حريث عن أبيه. وأخرجه أبو داود (٦٩٠) من طريق علي بن المديني، عن سفيان بن عيينة، عن إسماعيل بن أمية، عن أبي محمَّد بن عمرو بن حريث، عن جده، عن أبي هريرة. قال ابن المديني: قلت لسفيان: إنهم يختلفون فيه، فتفكر ساعة ثم قال: ما أحفظ إلا أبا محمَّد بن عمرو، قال سفيان: قدم ها هنا رجل بعدما مات إسماعيل بن أمية، فطلب هذا الشيخ أبا محمَّد حتى وجده، فسأله عنه، فخلط عليه. وأخرجه أبو داود (٦٨٩) من طريق بشر بن المفضل، عن إسماعيل بن أمية، عن أبي عمرو بن محمَّد بن حريث، به. وهو في "مسند أحمد" (٧٣٩٢)، و "صحيح ابن حبان" (٢٣٦١).
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ سَالِمٍ أَبِي النَّضْرِ، عَنْ بُسْرِ بْنِ سَعِيدٍ، قَالَ أَرْسَلُونِي إِلَى زَيْدِ بْنِ خَالِدٍ أَسْأَلُهُ عَنِ الْمُرُورِ، بَيْنَ يَدَىِ الْمُصَلِّي فَأَخْبَرَنِي عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ " لأَنْ يَقُومَ أَرْبَعِينَ خَيْرٌ لَهُ مِنْ أَنْ يَمُرَّ بَيْنَ يَدَيْهِ " . قَالَ سُفْيَانُ فَلاَ أَدْرِي أَرْبَعِينَ سَنَةً أَوْ شَهْرًا أَوْ صَبَاحًا أَوْ سَاعَةً .
যায়দ বিন খালিদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) (বুশর বিন সাঈদ) হতে বর্ণিত, সলাতীর সামনে দিয়ে অতিক্রমকারী সম্পর্কে জিজ্ঞেস করার জন্য সাহাবীগন আমাকে যায়দ বিন খালিদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এর নিকট পাঠালেন। তিনি আমাকে অবহিত করেন যে, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, সলাতীর সামনে দিয়ে অতিক্রম করার চাইতে “চল্লিশ” পর্যন্ত দাঁড়িয়ে থাকা উত্তম। সুফ্ইয়ান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, চল্লিশ দ্বারা তিনি চল্লিশ বছর না মাস না দিন, না ঘন্টা বুঝিয়েছেন তা আমি অবগত নই। [৯৪৪]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح لغيره
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح على خطأ في إسناده، فالصواب أنه من مسند أبي جهيم، وأن زيد بن خالد أرسل بسر بن سعيد إلى أبي جهيم يسأله، كما في الحديث الآتي بعده. قال ابن عبد البر في "التمهيد" ٢١/ ١٤٧: روى ابن عيينة هذا الحديث مقلوبًا عن أبي النضر، عن بسر بن سعيد، جعل في موضع زيد بن خالد أبا جهيم، وفي موضع أبي جهيم زيدَ بن خالد. وقال أيضًا ٢١/ ١٤٨: سئل يحيى بن معين عن هذا الحديث فقال: خطأ، إنما هو زيد إلى أبي جهيم، كما روى مالك. وقال المزي في "تحفة الأشراف" (٣٧٤٩): ومن جعل الحديث من مسند زيد بن خالد فقد وهم. قلنا: رواية مالك التي أشار إليها ابن معين هي في "موطئه" ١/ ١٥٤ - ١٥٥. وهو في "مسند أحمد" (١٧٠٥١) عن سفيان بن عيينة، بهذا الإسناد. وانظر ما بعده.
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ سَالِمٍ أَبِي النَّضْرِ، عَنْ بُسْرِ بْنِ سَعِيدٍ، أَنَّ زَيْدَ بْنَ خَالِدٍ، أَرْسَلَ إِلَى أَبِي جُهَيْمٍ الأَنْصَارِيِّ يَسْأَلُهُ مَا سَمِعْتَ مِنَ النَّبِيِّ، ـ صلى الله عليه وسلم ـ فِي الرَّجُلِ يَمُرُّ بَيْنَ يَدَىِ الرَّجُلِ وَهُوَ يُصَلِّي فَقَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَقُولُ " لَوْ يَعْلَمُ أَحَدُكُمْ مَالَهُ أَنْ يَمُرَّ بَيْنَ يَدَىْ أَخِيهِ وَهُوَ يُصَلِّي كَانَ لأَنْ يَقِفَ أَرْبَعِينَ - قَالَ لاَ أَدْرِي أَرْبَعِينَ عَامًا أَوْ أَرْبَعِينَ شَهْرًا أَوْ أَرْبَعِينَ يَوْمًا - خَيْرٌ لَهُ مِنْ ذَلِكَ " .
যায়দ বিন খালিদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, যায়দ বিন খালিদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আবূ জুহাইম আল-আনসারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -এর নিকট জিজ্ঞেস করতে পাঠানঃ সালাতরত ব্যক্তির সামনে দিয়ে অতিক্রমকারী সম্পর্কে আপনি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর নিকট কী শুনেছেন? তিনি বলেন, আমি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -কে বলতে শুনেছিঃ তোমাদের যে কেউ তার সালাতরত ভাইয়ের সামনে দিয়ে অতিক্রম করার পরিণতি সম্পর্কে যদি জানতো, তাহলে অবশ্যি সে ‘চল্লিশ’ পর্যন্ত দাঁড়িয়ে থাকা উত্তম ভাবতো। রাবী বলেন, তিনি কি চল্লিশ বছর অথবা চল্লিশ মাস বা চল্লিশ দিন বলেছেন তা আমি অবগত নই।[৯৪৫]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: بخاری ومسلم
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. سفيان: هو ابن سعيد الثوري، وسالم: هو ابن أبي أمية. وأخرجه مسلم (٥٠٧) من طريق وكيع، بهذا الإسناد. وأخرجه البخاري (٥١٠)، ومسلم (٥٠٧)، وأبو داود (٧٠١)، والترمذي (٣٣٦)، والنسائي ٢/ ٦٦ من طريق مالك، عن سالم أبي النضر، به. وهو في "موطأ مالك" ١/ ١٥٤ - ١٥٥. وهو في "مسند أحمد" (١٧٥٤٠)، و"صحيح ابن حبان" (٢٣٦٦).
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ مَوْهَبٍ، عَنْ عَمِّهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ " لَوْ يَعْلَمُ أَحَدُكُمْ مَا لَهُ فِي أَنْ يَمُرَّ بَيْنَ يَدَىْ أَخِيهِ مُعْتَرِضًا فِي الصَّلاَةِ كَانَ لأَنْ يُقِيمَ مِائَةَ عَامٍ خَيْرٌ لَهُ مِنَ الْخَطْوَةِ الَّتِي خَطَاهَا " .
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, তোমাদের যে কেউ যদি জানতো যে, তার সালাতরত ভাইয়ের সামনে দিয়ে তার অতিক্রম করার পরিণতি কী, তাহলে সে এ ধরনের পদক্ষেপ ফেলার চাইতে এক শত বছর দাঁড়িয়ে থাকাকে অবশ্যি অধিক উত্তম মনে করতো। [৯৪৬]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف، عبيد الله بن عبد الرحمن بن موهب ضعيف، وعمه -وهو عبيد الله بن عبد الله بن موهب- مجهول الحال. وأخرجه عبد بن حميد (١٤٥٢)، وابن خزيمة (٨١٤)، والطحاوي في "شرح مشكل الآثار" (٨٧)، وابن حبان (٢٣٦٥)، والطبراني في "الصغير" (٤٢٠)، وأبو نعيم في "تاريخ أصبهان" ١/ ٢٩٩، وابن عبد البر في "الاستذكار" ٦/ ١٦٩ من طرق عن عبيد الله بن عبد الرحمن بن موهب، عن عمه عبيد الله بن عبد الله بن موهب، عن أبي هريرة. وفيه عند عبد بن حميد "أربعين عامًا" مكان قوله: "مئة عام". وأخرجه أحمد (٨٨٣٧)، وابن خزيمة (٨١٤) من طريق أبي أحمد الزبيري محمَّد بن عبد الله، عن عبيد الله بن عبد الله بن موهب، عن عمه عبيد الله بن عبد الرحمن بن موهب، عن أبي هريرة. فقلب الاسمين، جعل اسم العم لابن أخيه، واسم ابن الأخ لعمه. وانظر" شرح مشكل الآثار" (٨٧)، و "فتح الباري"١/ ٥٨٥.
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يُصَلِّي بِعَرَفَةَ فَجِئْتُ أَنَا وَالْفَضْلُ عَلَى أَتَانٍ فَمَرَرْنَا عَلَى بَعْضِ الصَّفِّ فَنَزَلْنَا عَنْهَا وَتَرَكْنَاهَا ثُمَّ دَخَلْنَا فِي الصَّفِّ .
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আরাফাতের ময়দানে সালাত পড়ছিলেন। আমি ও ফাদল গাধায় চড়ে সলাতের একটি কাতারের সামনে দিয়ে অতিক্রম করলাম। আমরা গাধার পিঠ থেকে নেমে সেটিকে ছেড়ে দিয়ে সলাতের কাতারে শামিল হলাম। [৯৪৭]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح، هشام بن عمار متابع، وباقي رجاله ثقات. سفيان: هو ابن عيينة، والزهري: هو محمَّد بن مسلم، وعبيد الله بن عبد الله: هو ابن عتبة بن مسعود. وأخرجه البخاري (٧٦)، ومسلم (٥٠٤)، وأبو داود (٧١٥)، والترمذي (٣٣٧)، والنسائي ٢/ ٦٤ - ٦٥ من طرق عن الزهري، بهذا الإسناد. وأخرجه أبو داود (٧١٦) و (٧١٧)، والنسائي ٢/ ٦٥ من طريق الحكم بن عتيبة، عن يحيى بن الجزار، عن أبي الصهباء، عن ابن عباس، بنحوه. وهو في "مسند أحمد" (١٨٩١)، و"صحيح ابن حبان" (٢١٥١).
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ أُسَامَةَ بْنِ زَيْدٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ قَيْسٍ، - هُوَ قَاصُّ عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ - عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ، قَالَتْ كَانَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يُصَلِّي فِي حُجْرَةِ أُمِّ سَلَمَةَ فَمَرَّ بَيْنَ يَدَيْهِ عَبْدُ اللَّهِ أَوْ عُمَرُ بْنُ أَبِي سَلَمَةَ فَقَالَ بِيَدِهِ فَرَجَعَ فَمَرَّتْ زَيْنَبُ بِنْتُ أُمِّ سَلَمَةَ فَقَالَ بِيَدِهِ هَكَذَا فَمَضَتْ فَلَمَّا صَلَّى رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ " هُنَّ أَغْلَبُ " .
উম্মু সালামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) উম্মু সালামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -এর ঘরে সালাত পড়ছিলেন। আবদুল্লাহ অথবা উমার বিন আবূ সালামাহ তাঁর সামনে দিয়ে যেতে উদ্যত হলে তাঁর হাত দিয়ে ইশারা করলে তিনি ফিরে যান। তারপর যয়নব বিনতে উম্মু সালামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) যেতে চাইলে তাকেও তিনি হাতের ইশারায় নিষেধ করেন, কিন্তু তিনি অতিক্রম করে চলে যান। রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সালাত শেষে বলেন, নারীরা (পুরুষের উপর) বিজয়ী। [৯৪৮]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، أم محمد بن قیس: لم أجد من وثقہا ، والسند ضعفہ البوصیري ، (انوار الصحیفہ ص 411)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف لجهالة قيس أبي محمَّد، أو أم محمَّد، على الروايتين، وباقي رجاله ثقات غير أسامة بن زيد -وهو الليثي- فهو صدوق حسن الحديث. وهو في "مصنف ابن أبي شيبة" ١/ ٢٨٣، وفيه: عن أمه. وأخرجه أحمد (٢٦٥٢٣)، والطبراني في "الكبير" ٢٣/ (٨٥١) من طريق أبي بكر بن أبي شيبة" ومن طريق عثمان بن أبي شيبة" ثلاثتهم "أحمد وابنا أبي شيبة" عن وكيع، بهذا الإسناد. وعند أحمد: عن أمه، وعند الطبراني: عن أبيه. قوله "هن أغلب" أي: النساء، فلذلك ما قَبِلَت البنت الإشارة، وقَبِلَها الابن. قاله السندي.
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ خَلاَّدٍ الْبَاهِلِيُّ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، حَدَّثَنَا قَتَادَةُ، حَدَّثَنَا جَابِرُ بْنُ زَيْدٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ " يَقْطَعُ الصَّلاَةَ الْكَلْبُ الأَسْوَدُ وَالْمَرْأَةُ الْحَائِضُ " .
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, কালো বর্ণের কুকুর ও ঋতুবর্তী নারী সালাত নষ্ট করে। [৯৪৯]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * رجاله ثقات، والصحيح أنه موقوف، كما سيأتي. يحيى بن سعيد: هو القطان، وشعبة: هو ابن الحجاج، وقتادة: هو ابن دعامة، وجابر: هو ابن زيد أبو الشعثاء. وأخرجه أبو داود (٧٠٣)، والنسائي ٢/ ٦٤ من طريق يحيى بن سعيد، بهذا الإسناد. وقرن النسائي بشعبة هشامًا إلا أن هشامًا وقفه. وقال أبو داود: وقفه سعيد وهشام وهمام عن قتادة، عن جابر بن زيد، على ابن عباس. وليس عندهما وصف الكلب بالأسود. وهو في "مسند أحمد" (٣٢٤١)، و"صحيح ابن حبان" (٢٣٨٧). قال الإمام البغوي في "شرح السنة" ٢/ ٤٦١ - ٤٦٣ بعد أن أورد حديث عائشة: أنه ﷺ كان يصلي وهي معترضة بين يديه، وحديث ابن عباس: أن رسول الله ﷺ كان يصلي بالناس بمنى، فمر بين يدي بعض الصف … (وهو السالف برقم ٩٤٧)، قال: في هذه الأحاديث دليل على أن المرأة إذا مرت بين يدي المصلي لا تقطع صلاته، وعليه أكثر أهل العلم من الصحابة فمن بعدهم: أنه لا يقطع صلاة المصلي شيء مر بين يديه؛ ثم ذكر حديث أبي سعيد الخدري مرفوعًا: "لا يقطع الصلاة شيء، وادرؤوا ما استطعتم، فإنما هو شيطان" [أخرجه أبو داود (٧١٩)]، وقال: وهذا قول علي وعثمان وابن عمر، وبه قال ابن المسيب والشعبي وعروة، وإليه ذهب مالك والثوري والشافعي وأصحاب الرأي، وذهب قوم إلى أنه يقطع صلاته المرأة والحمار والكلب، يُروى ذلك عن أنس … وقالت طائفة: يقطعها المرأة الحائص والكلب الأسود، روى ذلك عن ابن عباس، وبه قال عطاء بن أبي رباح، وقالت طائفة: لا يقطعها إلا الكلب الأسود، روي ذلك عن عائشة، وهو قول أحمد وإسحاق.
حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ أَخْزَمَ أَبُو طَالِبٍ، حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ زُرَارَةَ بْنِ أَوْفَى، عَنْ سَعْدِ بْنِ هِشَامٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ " يَقْطَعُ الصَّلاَةَ الْمَرْأَةُ وَالْكَلْبُ وَالْحِمَارُ " .
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, নারী, কুকুর ও গাধা সালাত নষ্ট করে। [৯৫০]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح على اختلاف كبير فيه على قتادة، كما بسطناه في التعليق على "مسند أحمد" (٧٩٨٣)، ورواية أحمد عن معاذ بن هشام بهذا الإسناد. هشام: هو ابن أبي عبد الله الدستوائي، وقتادة: هو ابن دِعامة السدوسي. وأخرجه مسلم (٥١١) (٢٦٦) من طريق عبيد الله بن عبد الله بن الأصم، عن يزيد بن الأصم، عن أبي هريرة مرفوعًا، وزاد: "ويقي ذلك مثل مؤخرة الرحل" وعبيد الله بن عبد الله بن الأصم روى عنه ثلاثة، وذكره ابن حبان في "الثقات" ولم يوثقه غيره، واحتج به مسلم. وله شاهد من حديث أبي ذر الآتي برقم (٩٥٢). وانظر في الكلام على متن الحديث في التعليق على "المسند" (٧٩٨٣) أيضًا، والتعليق على الحديث السالف.
حَدَّثَنَا جَمِيلُ بْنُ الْحَسَنِ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الأَعْلَى، حَدَّثَنَا سَعِيدٌ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ " يَقْطَعُ الصَّلاَةَ الْمَرْأَةُ وَالْكَلْبُ وَالْحِمَارُ " .
আবদুল্লাহ বিন মুগাফ্ফাল (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, নারী, কুকুর ও গাধা সালাত নষ্ট করে। [৯৫১]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * صحيح لغيره، رجاله ثقات غير جميل بن الحسن -وهو العتكي الجهضمي- وقد توبع، وفيه عنعنة الحسن البصري. عبد الأعلى: هو ابن عبد الأعلى السامي، وسعيد: هو ابن أبي عروبة. وأخرجه أحمد (١٦٧٩٧)، والطحاوي ١/ ٤٥٨، وابن حبان (٢٣٨٦) من طرق عن سعيد، بهذا الإسناد.
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ حُمَيْدِ بْنِ هِلاَلٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الصَّامِتِ، عَنْ أَبِي ذَرٍّ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ " يَقْطَعُ الصَّلاَةَ إِذَا لَمْ يَكُنْ بَيْنَ يَدَىِ الرَّجُلِ مِثْلُ مُؤْخِرَةِ الرَّحْلِ الْمَرْأَةُ وَالْحِمَارُ وَالْكَلْبُ الأَسْوَدُ " . قَالَ قُلْتُ مَا بَالُ الأَسْوَدِ مِنَ الأَحْمَرِ فَقَالَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ كَمَا سَأَلْتَنِي فَقَالَ " الْكَلْبُ الأَسْوَدُ شَيْطَانٌ " .
আবূ যার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, সলাতীর সামনে শিবিকার খুঁটির ন্যায় কোন জিনিস না থাকলে নারী, গাধা ও কালো বর্ণের কুকুর তার সালাত নষ্ট করে। অধস্তন রাবী বলেন, আমি বললাম, লাল বর্ণের কুকুর থেকে কালো বর্ণের কুকুরের পার্থক্য কি? তিনি বলেন, তুমি আমাকে যেরূপ জিজ্ঞেস করলে আমিও রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে তদ্রূপ জিজ্ঞেস করেছিলাম। তিনি বলেন, কালো কুকুর হলো শয়তান। [৯৫২]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. وأخرجه مسلم (٥١٠)، وأبو داود (٧٠٢)، والترمذي (٣٣٨)، والنسائي ٢/ ٦٣ - ٦٤ من طرق عن حميد بن هلال، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢١٣٢٣)، و"صحيح ابن حبان" (٢٣٨٥). قوله: "الكلب الأسود شيطان" أي: إن ضرره أشد من غيره، فسُمي شيطانا على المجاز، قال أبو جعفر الطبري: الشيطان في كلام العرب كل متمرد من الجن والإنس والدواب وكل شيء، وكذلك قال ربنا جل ثناؤه: ﴿وَكَذَلِكَ جَعَلْنَا لِكُلِّ نَبِيٍّ عَدُوًّا شَيَاطِينَ الْإِنْسِ وَالْجِنِّ﴾ [الأنعام: ١١٢] فجعل من الإنس شياطين مثل الذي جعل من الجن، وقال عمر بن الخطاب ؓ، وركب بِرذَونًا فجعل يتبختر به، فجعل يضربه فلا يزداد إلا تبختُرًا، فنزل عنه وقال: ما حملتموني إلا على شيطان، ما نزلت عنه حتى أنكرتُ نفسي. وإنما سُمِّي المتمرد من كل شيء شيطانًا لمفارقة أخلاقه وأفعاله أخلاقَ سائر جنسه وأفعالَه، وبُعدِه من الخير.
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ، أَنْبَأَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى أَبُو الْمُعَلَّى، عَنِ الْحَسَنِ الْعُرَنِيِّ، قَالَ ذُكِرَ عِنْدَ ابْنِ عَبَّاسٍ مَا يَقْطَعُ الصَّلاَةَ فَذَكَرُوا الْكَلْبَ وَالْحِمَارَ وَالْمَرْأَةَ فَقَالَ مَا تَقُولُونَ فِي الْجَدْىِ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ كَانَ يُصَلِّي يَوْمًا فَذَهَبَ جَدْىٌ يَمُرُّ بَيْنَ يَدَيْهِ فَبَادَرَهُ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ الْقِبْلَةَ .
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, (আল-হাসান আল-উরানী) বলেন, কিসে সালাত নষ্ট করে তা ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -এর উপস্থিতিতে আলোচিত হলো। লোকেরা কুকুর, গাধা ও স্ত্রীলোকের কথা উল্লেখ করলো। ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, ছয়-সাত মাসের বকরীর বাচ্চা সম্পর্কে আপনারা কী বলেন? রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) একদিন সালাত পড়ছিলেন। তাঁর সামনে দিয়ে ছয়-সাত মাসের একটি বকরীর বাচ্চা অতিক্রম করে যাচ্ছিল। রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সেটিকে কিবলার দিক থেকে হটিয়ে দিতে চেষ্টা করেন। [৯৫৩]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، قال البوصیري: ’’ ھذا إسناد صحیح،رجالہ ثقات إلا أنہ منقطع، قال أحمد و ابن معین: لم یسمع الحسن (العرني) من ابن عباس، ‘‘ فالسند منقطع ، وقال الحافظ فی العرني: ثقۃ،أرسل عن ابن عباس (تقریب: 1252)، (انوار الصحیفہ ص 411)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث حسن، وهذا إسناد منقطع، الحسن العرني -وهو الحسن بن عبد الله- لم يسمع من ابن عباس. أبو المعلى يحيى: هو ابن ميمون العطار. وأخرجه أحمد (٢٢٢٢)، والطبراني (١٢٦٩٦) و (١٢٧٠٤) من طريق أبي المعلى العطار، بهذا الإسناد. وأخرجه أحمد (٢٨٠٤) و (٣١٩٣) من طريق سفيان الثوري، عن سلمة بن كهيل، عن الحسن العرني، به- بلفظ: أن جديا سقط بين يدي رسول الله ﷺ وهو يصلي، فلم يقطع صلاته. وأخرجه أحمد (٢٦٥٣)، وأبو داود (٧٠٩) من طريق شعبة، عن عمرو بن مرة، عن يحيى بن الجزار، عن ابن عباس لم يسمعه منه: أن جديًا أراد أن يمر بين يدي رسول الله ﷺ -وهو يصلي، فجعل يتقيه. وهذا إسناد منقطع فقد صرح يحيى ابن الجزار بأنه لم يسمعه من ابن عباس. لكن رواه البيهقي ٢/ ٢٦٨ من طريق يحيى بن أبي بكير، عن شعبة، عن عمرو، عن يحيى بن الجزار، عن صهيب البصري، عن ابن عباس. وهذا إسناد حسن. وأخرج ابن خزيمة (٧٢٧)، وابن حبان (٢٣٧١)، والحاكم ١/ ٢٥٤ من طريق جرير بن حازم، عن يعلى بن حكيم والزبير بن خِرِّيت، عن عكرمة، عن ابن عباس: أن النبي ﷺ كان يصلي، فمرت شاة بين يديه، فساعاها إلى القبلة حتى ألصق بطنه بالقبلة. وهذا إسناد صحيح. قوله: "فبادره القبلة" أي سبقه إلى جهة القبلة ليمنعه من المرور بين يديه بتضييق الطريق عليه.
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الأَحْمَرُ، عَنِ ابْنِ عَجْلاَنَ، عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي سَعِيدٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ " إِذَا صَلَّى أَحَدُكُمْ فَلْيُصَلِّ إِلَى سُتْرَةٍ وَلْيَدْنُ مِنْهَا وَلاَ يَدَعْ أَحَدًا يَمُرُّ بَيْنَ يَدَيْهِ فَإِنْ جَاءَ أَحَدٌ يَمُرَّ فَلْيُقَاتِلْهُ فَإِنَّهُ شَيْطَانٌ " .
আবূ সাঈদ খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, তোমাদের যে কেউ সালাত আদায় করতে চাইলে যেন সুতরা সামনে রেখে সালাত পড়ে এবং তার নিকটবর্তী হয়। সে যেন তার সামনে দিয়ে কাউকে অতিক্রম করতে না দেয়। অতএব যদি কেউ সামনে দিয়ে অতিক্রম করে, তাহলে সে যেন তার সাথে লড়াই করে। কারণ সে একটা শয়তান। [৯৫৪]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده قوي من أجل محمَّد بن عجلان، وهو متابع، وباقي رجاله ثقات. أبو غريب: هو محمَّد بن العلاء، وأبو خالد الأحمر: هو سليمان بن حيان، وعبد الرحمن ابن أبي سعيد: هو الخدري. وأخرجه أبو داود (٧٩٨) من طريق أبي خالد الأحمر، بهذا الإسناد. وهو في "صحيح ابن حبان" (٢٣٧٢). وأخرجه مسلم (٥٠٥) (٢٥٨)، وأبو داود (٦٩٧)، والنسائي ٢/ ٦٦ من طريق مالك بن أنس، عن زيد بن أسلم، عن عبد الرحمن بن أبي سعيد، عن أبيه رفعه بلفظ: "إذا كان أحدكم يصلي، فلا يدع أحدًا يمر بين يديه … ". وأخرجه البخاري (٥٠٩)، ومسلم (٥٠٥) (٢٥٩)، وأبو داود (٧٠٠) من طريق أبي صالح السمان، والنسائي ٨/ ٦١ - ٦٢ من طريق عطاء بن يسار، كلاهما عن أبي سعيد الخدري مرفوعًا، بلفظ: "إذا صلى أحدكم إلى شيءٍ يستره من الناس، فأراد أحد أن يجتاز بين يديه، فليدفعه" وفيه قصة. وأخرجه أبو داود (٦٩٩) من طريق عطاء بن يزيد الليثي، عن أبي سعيد مرفوعًا بلفظ: "من استطاع منكم أن لا يحول بينه وبين قبلته أحد فليفعل". وهو في "مسند أحمد" (١١٢٩٩)، و "صحيح ابن حبان" (٢٣٦٧).
حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْحَمَّالُ، وَالْحَسَنُ بْنُ دَاوُدَ الْمُنْكَدِرِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي فُدَيْكٍ، عَنِ الضَّحَّاكِ بْنِ عُثْمَانَ، عَنْ صَدَقَةَ بْنِ يَسَارٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ " إِذَا كَانَ أَحَدُكُمْ يُصَلِّي فَلاَ يَدَعْ أَحَدًا يَمُرُّ بَيْنَ يَدَيْهِ فَإِنْ أَبَى فَلْيُقَاتِلْهُ فَإِنَّ مَعَهُ الْقَرِينَ " . وَقَالَ الْمُنْكَدِرِيُّ فَإِنَّ مَعَهُ الْعُزَّى .
আবদুল্লাহ বিন উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, তোমাদের কেউ যখন সালাত পড়ে, তখন সে যেন তার সামনে দিয়ে কাউকে অতিক্রম করতে না দেয়। যদি সে অস্বীকার করে তবে সে যেন তার সাথে লড়াই করে। কেননা তার সাথে তার সহযোগী (শয়তান) রয়েছে। আল-হাসান বিন দাঊদ আল-মুনকাদিরী (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, নিশ্চয় তার সাথে উয্যা (প্রতিমা) রয়েছে। [৯৫৫]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح، وهذا إسناد حسن من أجل الضحاك بن عثمان، فإنه حسن الحديث. ابن أبي فديك: هو محمَّد بن إسماعيل. وأخرجه مسلم (٥٠٦) من طريقي أبي بكر الحنفي وابن أبي فديك، عن الضحاك بن عثمان، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٥٥٨٥)، و"صحيح ابن حبان" (٢٣٦٢) و (٢٣٦٩). ويشهد له حديث أبي سعيد السالف قبله لكنه بلفظ: "فإنه شيطان". أما رواية المنكدري، فهي شاذة إن لم تكن مصحَّفة عن "القرين"، والله أعلم.
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ كَانَ يُصَلِّي مِنَ اللَّيْلِ وَأَنَا مُعْتَرِضَةٌ بَيْنَهُ وَبَيْنَ الْقِبْلَةِ كَاعْتِرَاضِ الْجِنَازَةِ " .
আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) রাতে সালাত আদায় করতো এবং আমি তখন তাঁর ও কিবলার মাঝখানে জানাযাহর লাশের ন্যায় আড়াআড়িভাবে শোয়া থাকতাম। [৯৫৬]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. سفيان: هو ابن عيينة، وعروة: هو ابن الزبير بن العوام. وأخرجه البخاري (٣٨٣) و (٣٨٤) و (٥١٢) و (٥١٥) و (٩٩٧)، ومسلم (٥١٢) (٢٦٧ - ٢٦٩)، وأبو داود (٧١٠ - ٧١٢)، والنسائي ٢/ ٦٧ من طرق عن عروة، به. وأخرجه البخاري (٣٨٢) و (٥٠٨) و (٥١١) و (٥١٣) و (٥١٤) و (٥١٩) و (١٢٠٩) و (٦٢٧٦)، ومسلم (٥١٢) (٢٧٠ - ٢٧٢) و (٧٤٤) (٣٥)، وأبو داود (٧١٣) و (٧١٤)، والنسائي١/ ١٠١ - ١٠٢ و ١٠٢ من طرق عن عائشة. وهو في "مسند أحمد" (٢٤٠٨٨)، و"صحيح ابن حبان" (٢٣٤١). وقد بيَّنت معظم الروايات عن عائشة أنها ذكرت ذلك ردًا على من قال: إن المرأة تقطع الصلاة.
حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ خَلَفٍ، وَسُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، حَدَّثَنَا خَالِدٌ الْحَذَّاءُ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، عَنْ زَيْنَبَ بِنْتِ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أُمِّهَا، قَالَتْ كَانَ فِرَاشُهَا بِحِيَالِ مَسْجِدِ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ .
উম্মু সালামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন যে, তার বিছানা রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর সিজদার স্থানের দিকে ছিল। [৯৫৭]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح، سويد بن سعيد وإن كان فيه كلام تابعه هنا بكر بن خلف، وهو ثقة. خالد الحذاء: هو ابن مهران، وأبو قلابة: هو عبد الله بن زيد الجرمي. وأخرجه أبو داود (٤١٤٨) عن مسدد، عن يزيد بن زريع، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٦٧٣٣).
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبَّادُ بْنُ الْعَوَّامِ، عَنِ الشَّيْبَانِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ شَدَّادٍ، قَالَ حَدَّثَتْنِي مَيْمُونَةُ، زَوْجُ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَتْ كَانَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يُصَلِّي وَأَنَا بِحِذَائِهِ وَرُبَّمَا أَصَابَنِي ثَوْبُهُ إِذَا سَجَدَ .
মায়মূনাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সালাত আদায় করতো এবং আমি তাঁর সামনে থাকতাম। তিনি সিজদায় গেলে কখনো কখনো তাঁর পরিধেয় বস্ত্র (কাপড়) আমারা শরীরে লাগতো। [৯৫৮]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: بخاری ومسلم
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. الشيباني: هو أبو إسحاق سليمان بن أبي سليمان. وأخرجه البخاري (٣٣٣)، ومسلم (٥١٣)، وأبو داود (٦٥٦) من طرق عن سليمان الشياني، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٦٨٠٦).
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ الْحُبَابِ، حَدَّثَنِي أَبُو الْمِقْدَامِ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ كَعْبٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ أَنْ يُصَلَّى خَلْفَ الْمُتَحَدِّثِ وَالنَّائِمِ .
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বাক্যালাপে রত ব্যক্তি ও ঘুমন্ত ব্যাক্তির পেছনে সালাত আদায় করতে নিষেধ করেছেন। [৯৫৯]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن، ولہ شاھد عند الطبراني فی المعجم الاوسط (6/، 118 ح 5242، وسندہ حسن / معاذ علی زئي)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف جدًا، أبو المقدام -وهو هشام بن زياد بن أبي يزيد- متروك، وبينه وبين محمَّد بن كعب راوٍ مجهول يقال له يحيى بن فلان فيما نقله مسلم في مقدمة "صحيحه" (باب ٥) عن عفان بن مسلم. وأخرجه أبو داود (٦٩٤) من طريق عبد الملك بن محمَّد بن أيمن، عن عبد الله ابن يعقوب بن إسحاق، عمن حدثه، عن محمَّد بن كعب القرظي، عن ابن عباس. وعبد الملك وعبد الله مجهولا الحال، والرجل المبهم الظاهر أنه أبو المقدام المتروك، والله أعلم. قال الحافظ ابن حجر في "فتح الباري" ١/ ٥٨٧ عند قول البخاري: باب الصلاة خلف النائم، قال: وكأنه أشار أيضًا إلى تضعيف الحديث الوارد في النهي عن الصلاة إلى النائم، فقد أخرجه أبو داود وابن ماجه من حديث ابن عباس، وقال أبو داود: طرقه كلها واهية، يعني حديث ابن عباس. وفي الباب عن ابن عمر أخرجه ابن عدي، وعن أبي هريرة أخرجه الطبراني في "الأوسط" (٥٢٤٦)، وهما واهيان أيضًا. قلنا: وأخرج البخاري في هذا الباب حديث عائشة -وهو السالف برقم (٩٥٦) -: أن النبي ﷺ كان يصلي وهي معترضة بينه وبين القبلة. والصلاة إلى النائم كرهها مجاهد وطاووس ومالك خشية أن يبدو من النائم ما يلهي المصلي عن صلاته، أما الصلاة إلى المتحدث فقد كرهها الشافعي وأحمد، وذلك من أجل أن كلامهم يشغل المصلي عن صلاته، وكان ابن عمر لا يصلي خلف رجل يتكلم إلا يوم الجمعة. راجع "فتح الباري" ١/ ٥٨٧، و"معالم السُّنن" للخطابي ١/ ١٨٧.
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يُعَلِّمُنَا أَنْ لاَ نُبَادِرَ الإِمَامَ بِالرُّكُوعِ وَالسُّجُودِ وَإِذَا كَبَّرَ فَكَبِّرُوا وَإِذَا سَجَدَ فَاسْجُدُوا .
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাদেরকে শিক্ষা দিতেন যে, আমরা যেন ইমামের আগে রুকূ’ ও সিজদায় না যাই। তিনি আরো বলেন, ইমাম যখন তাকবীর বলেন, তখন তোমরাও তাকবীর বলো এবং তিনি যখন সিজদা করেন, তোমরাও তখন সিজদা করো। [৯৬০]
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. الأعمش: هو سليمان بن مهران، وأبو صالح: هو ذكوان السمان. وأخرجه أحمد (٩٦٨٢)، والنسائي في "الكبرى" كما في "تحفة الأشراف" (١٢٤٦٠) من طريق محمَّد بن عبيد، بهذا الإسناد. وأخرجه بنحوه مسلم (٤١٥) من طريق عيسى بن يونس، عن الأعمش، به. وروايتهم أطول من رواية المصنف، وانظر ما سلف برقم (٨٤٦)، وما سيأتي برقم (١٢٣٩).