الحديث


سنن ابن ماجه
Sunan Ibn Majah
সুনান ইবনু মাজাহ





سنن ابن ماجه (4333)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ، عَنْ عُمَارَةَ بْنِ الْقَعْقَاعِ، عَنْ أَبِي زُرْعَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ أَوَّلُ زُمْرَةٍ تَدْخُلُ الْجَنَّةَ عَلَى صُورَةِ الْقَمَرِ لَيْلَةَ الْبَدْرِ ثُمَّ الَّذِينَ يَلُونَهُمْ عَلَى ضَوْءِ أَشَدِّ كَوْكَبٍ دُرِّيٍّ فِي السَّمَاءِ إِضَاءَةً لاَ يَبُولُونَ وَلاَ يَتَغَوَّطُونَ وَلاَ يَمْتَخِطُونَ وَلاَ يَتْفِلُونَ أَمْشَاطُهُمُ الذَّهَبُ وَرَشْحُهُمُ الْمِسْكُ وَمَجَامِرُهُمُ الأَلُوَّةُ أَزْوَاجُهُمُ الْحُورُ الْعِينُ أَخْلاَقُهُمْ عَلَى خَلْقِ رَجُلٍ وَاحِدٍ عَلَى صُورَةِ أَبِيهِمْ آدَمَ سِتُّونَ ذِرَاعًا ‏"‏ ‏.‏




অনুবাদঃ আবূ হুরায়রাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ জান্নাতে প্রবেশকারী সর্বপ্রথম দলের লোকেদের চেহারা হবে পূর্নিমা রাতের পূর্ণ চাঁদের ন্যায় উজ্জ্বল। তাদের পরবর্তী দলের চেহারা হবে আকাশের উজ্জ্বল তারকারাজির মত। জান্নাতবাসীগণ পেশাব করবে না, পায়খানাও করবে না। তাদের নাকে শ্লেষ্মা হবে না এবং থুথুও ফেলবে না। তাদের চিরুনী হবে সোনার তৈরী। তাদের শরীর থেকে নির্গত ঘাম মিশকের ন্যায় সুগন্ধময় হবে। তাদের জন্য চন্দন কাঠ ও আগরবাতি জ্বালানো থাকবে। তাদের স্ত্রীগণ হবে আয়তলোচনা হূর। তাদের চরিত্র... বৈশিষ্ট হবে একই ব্যক্তির ন্যায়। তারা তাদের পিতা আদম আলাইহিস সালামের অবয়বে ষাট হাত লম্বা হবে।

[উপরোক্ত হাদীসে মোট ২টি সানাদের ১টি বর্ণিত হয়েছে, অপর সানাদটি হলোঃ]

৭/৪৩৩৩ (১) . আবূ বাক্‌র বিন আবূ শায়বাহ, মুহাম্মাদ বিন ফুদায়ল (তিনি সত্যবাদী তবে তার ব্যাপারে শীয়া মতাবলম্বী হওয়ার অভিযোগ রয়েছে) , উমারাহ ইবনুল কা’কা’, আবূ সালিহ, আবূ হুরায়রাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)। [৩৬৬৫]

তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. أبو زرعة: هو ابن عمرو بن جرير البجلي. وأخرجه البخاري (٣٣٢٧)، ومسلم (٢٨٣٤) (١٥) من طريقين عن عمارة بن القعقاع، بهذا الإسناد. وهو في "صحيح ابن حبان" (٧٤٣٧). وانظر ما بعده. وقوله: "مجامرهم الألوة". المجامر جمع مجمرة وهي المبخرة، سميت مجمرة، لأنها يوضع فيها الجمر ليفوح به ما يوضع فيها من البخور، والألوة -بفتح الهمزة وضمها وضم اللام وتشديد الواو-: العود الذي يُبخر به. قال الإمام النووي في "شرح مسلم" ١٧/ ١٧٣: مذهب أهل السنة وعامة المسلمين أن أهل الجنة يأكلون فيها ويشربون يتنعمون بذلك وبغيره من ملاذ وأنواع نعيمها تنعما دائمًا لا آخر له ولا انقطاع أبدًا، وأن تنعمهم بذلك على هيئة تنعم أهل الدنيا إلا ما بينهما من التفاضل في اللذة والنفاسة التي لا يشارك نعيم الدنيا إلا في التسمية وأصل الهيئة، وإلا فإنهم لا يبولون ولا يتغوطون ولا يتمخطون ولا يبصقون وقد دلت دلائل القرآن والسنة في هذه الأحاديث التي ذكرها مسلم وغيره أن نعيم الجنة دائم لا انقطاع له أبدًا. *إسناده صحيح. أبو معاوية: هو محمَّد بن خازم الضرير، والأعمش: هو سليمان بن مهران، وأبو صالح: هو ذكوان السمان. وهو في "مصنف ابن أبي شيبة" ١٣/ ١٠٩ - ١١٠ و ١٤/ ١٣٠، وعنه أخرجه مسلم (٢٨٣٤) (١٦). وأخرجه مسلم (٢٨٣٤) (١٦) عن أبي كريب، عن أبي معاوية، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٧٤٣٥). وانظر ما قبله. قوله: "على خُلُق رجل واحد" ذكر الإمام مسلم بإثر الحديث ما نصه: قال ابن أبي شيبة: "على خُلُق رجل"، وقال أبو كريب: "على خَلْق رجل". وقال النووي في "شرحه" ١٧/ ١٧٢: كلاهما صحيح، وقد اختلف فيه رواة "صحيح البخاري"، ويُرَجَّح الضم بقوله في الحديث الآخر: "لا اختلاف بينهم ولا تباغض، قلوبهم قلب واحد"، وقد يُرجح الفتح بقوله ﷺ في تمام الحديث: "على صورة أبيهم آدم أو على طوله"