হাদীস বিএন


সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ





সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (3564)


3564 - (من أُعْمِر شيئاً فهو لمُعمَرِهِ؛ محياهُ ومماتهُ، ولا ترقبوا؛ فمن أرقب شيئاً؛ فهو سبيله. وفي رواية: سبيلُ الميراث) .
أخرجه أبو داود (3559) ، والنسائي (2/135) ، وابن ماجه (2381) مختصراً - ، وكذا ابن حبان (1149 و1150) ، وأحمد (5/182 و186 و189) ، والطبراني في`المعجم الكبير` (5/179 ~ 182) من طرق عن حُجر المدريّ عن زيد بن ثابت قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم - : ... فذكره.
قلت: وهذا إسناد صحيح. وله شاهد من حديث جابر عند مسلم وغيره، وهو مخرج في ` الإرواء ` (1607 ~ 1609) .
(فائدة) : روى أبو داود (3560) بسند جيد عن مجاهد قال:
` (العمرى) : أن يقول الرجل للرجل: هو لك ما عشت. و (الرقبى) : هو أن يقول الإنسان: هو للآخر مني ومنك `.
وقال أبو الحسن السندي في `حاشية النسائي`:
` (الرّقبى) على وزن (حُبلى) ، وصورتها: أن يقول: جعلت لك هذه الدار،
فإن مت قبلك فهي لك، وإن مت قبلي عادت إلي؛ من المراقبة؛ لأن كلاً منهما يراقب موت صاحبه `.
وقال، في (العمرى) :
`هي ك (حبلى) كما سبق؛ اسم من أعمرتك الدار؛ أي: جعلت سكناها لك مدة عمرك `.
قلت: وكل من (العمرى) و (الرقبى) توجبان الملك لـ (المعمر) و (المرقب) ، ولعقبه من بعده، ولا رجوع فيهما، كما قال الشوكاني وغيره، انظر `الروضة الندية ` (2/167 ~ 168) . *




যায়িদ ইবনে সাবেত (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন:

“যাকে কোনো বস্তু ‘উমরা’ (আজীবন দান) হিসেবে দেওয়া হয়, তা তার জীবদ্দশায় এবং তার মৃত্যুর পরেও গ্রহীতারই হয়ে যায়। আর তোমরা ‘রুক্বা’ (শর্তাধীন জীবনকাল দান) করবে না। কেননা, যে ব্যক্তি কোনো জিনিস ‘রুক্বা’ হিসেবে দান করে, তা তার (গ্রহীতার) পথে চলে যায়। অন্য এক বর্ণনায় আছে: (তা) উত্তরাধিকারের পথে চলে যায়।”