হাদীস বিএন


সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ





সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (3565)


3565 - (من صلى صلاتنا، واستقبل قبلتنا، وأكل ذبيحتنا؛ فذلك المسلم الذي له ذمّة الله وذمّة رسوله، فلا تخفروا الله في ذمته) .
أخرجه البخاري (391) ، والنسائي في `السنن الكبرى` (2/530/ 11728) ـ دون جملة الذمة - من طريق منصور بن سعد عن ميمون بن سياه عن أنس بن مالك قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم - : ... فذكره.
قلت: وهذا إسناد حسن؛ فإن ميمون بن سياه - مع أنه من رجال البخاري - ففيه كلام أشار إليه الحافظ بقوله في `التقريب `:
`صدوق عابد يخطئ `.
وهو تلخيص لقول ابن عدي في آخر ترجمته من `الكامل ` بعد أن ساق له أحاديث هذا أحدها (6/414 ~ 415) :
`أحد من كان يعد في زهاد البصرة، ولعل ليس له من الحديث غير ما ذكرت
من المسند، والزهاد لا يضبطون الأحاديث كما يجب، وأرجو أنه لا بأس به `.
قلت: فأنا أخشى أن يكون وهم في ذكر جملة الذمة في الحديث، دخل عليه حديث في حديث؛ فإنها معروفة وثابتة في أحاديث: `من صلى صلاة الصبح؛ فهو في ذمة الله ... ` إلخ، وقد سبق تخريجه برقم (2890) .
وميمون نفسه لم يذكرها في رواية عنه، فقال حميد: سأل ميمون بن سياه أنس بن مالك قال:
يا أبا حمزة! ما يحرم دم العبد وماله؟ فقال:
من شهد أن لا إله إلا الله، واستقبل قبلتنا، وصلى صلاتنا، وأكل ذبيحتنا؛ فهو المسلم، له ما للمسلم، وعليه ما على المسلم.
أخرجه البخاري (393) .
ولعل الإمام النسائي أشار إلى ما ذكرت من الخشية بحذفه الجملة المذكورة.
والله سبحانه وتعالى أعلم. *




আনাস ইবনে মালেক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “যে ব্যক্তি আমাদের মতো সালাত আদায় করল, আমাদের কিবলাকে কিবলা হিসেবে গ্রহণ করল এবং আমাদের যবেহকৃত পশু ভক্ষণ করল; সেই ব্যক্তিই হলো মুসলিম। তার জন্য রয়েছে আল্লাহ্‌র যিম্মা (নিরাপত্তা ও অঙ্গীকার) এবং তাঁর রাসূলের যিম্মা। সুতরাং, তোমরা আল্লাহ্‌র যিম্মার (অঙ্গীকারের) ব্যাপারে তাঁকে (লঙ্ঘন করে) লজ্জিত করো না।”