সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ
392 - ` إنه أعظم للبركة. يعني الطعام الذي ذهب فوره `.
أخرجه الدارمي (2 / 100) وابن حبان (1344) والحاكم (4 / 118) وابن أبي
الدنيا في ` الجوع ` (14 / 2) والبيهقي (7 / 280) عن قرة بن عبد الرحمن عن
ابن شهاب عن عروة بن الزبير عن أسماء بنت أبي بكر.
أنها كانت إذا ثردت غطته شيئا حتى يذهب فوره ثم تقول: إنى سمعت رسول الله صلى
الله عليه وسلم يقول ... فذكره.
وقال الحاكم: ` صحيح على شرط مسلم `. ووافقه الذهبي!
قلت: وذلك من أوهامهما فإن قرة بن عبد الرحمن لم يحتج به مسلم، وإنما أخرج
له في الشواهد كما صرح بذلك الذهبي نفسه في ` الميزان `، ثم هو في نفسه ضعيف
من قبل حفظه، وقد مضى ذكر شيء من حاله في أول الكتاب.
نعم إنه لم يتفرد به، فقد تابعه عقيل بن خالد عن ابن شهاب به.
أخرجه أحمد (6 / 350) : حدثنا قتيبة بن سعيد قال: حدثنا ابن لهيعة عن عقيل،
وحدثنا عتاب قال: حدثنا عبد الله، قال: أنبأنا ابن لهيعة، قال: حدثني
عقيل ابن خالد عن ابن شهاب به.
قلت: وهذا إسناد صحيح من طريق عبد الله وهو ابن المبارك، فإن ابن لهيعة
وإن كان معروفا بسوء الحفظ، لكن المحققين من العلماء على أن حديثه صحيح إذا
كان من رواية العبادلة عنه منهم عبد الله بن المبارك. وقد رواه عنه كما ترى.
وعتاب هو ابن زياد المروزي، قال ابن أبي حاتم (3 / 2 / 13) عن أبيه:
` ثقة `.
ولم يورده الحافظ في ` التعجيل ` مع أنه على شرطه!
وقد صح عن أبي هريرة رضي الله عنه أنه قال:
` لا يؤكل طعام حتى يذهب بخاره `.
أخرجه البيهقي بإسناد صحيح كما بينته في ` الإرواء ` (2038) .
وأخرج الحاكم من طريق محمد بن عبيد الله بن العرزمي عن عطاء عن جابر
مرفوعا بلفظ:
` أبردوا الطعام الحار، فإن الطعام الحار غير ذي بركة `.
والعرزمي هذا متروك شديد الضعف، لكن ذكر له السيوطي في ` الجامع ` شواهد عدة
في بعضها نظر، منها حديث
أسماء هذا، ولا يخفى على اللبيب أن قوله فيه
` أعظم للبركة ` لا يساوي قوله ` غير ذي بركة ` فإن الأول يدل بمفهومه أنه دونه
في البركة، فهذا شيء، وقوله ` غير ذي بركة ` فليحقق النظر في الشواهد الأخرى
من حيث إسنادها ومن جهة شهادتها، فإن من تلك الشواهد ما عزاه لـ ` الحلية `
من حديث أنس. ولم أره فيه بهذا اللفظ. ثم رأيت المناوي ذكر أنه يعني حديث
أنس قال: أتي النبي صلى الله عليه وسلم بقصعة تفور، فرفع يده منها وقال:
إن الله لم يطعمنا نارا، ثم ذكره.
ولم يتكلم عن إسناده بشيء ولا رأيته في ` البغية في ترتيب أحاديث الحلية `.
আসমা বিনতে আবু বকর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত,
তিনি যখন ’সারিদ’ (গোশত ও ঝোলে ভেজানো রুটির খাবার) প্রস্তুত করতেন, তখন তা কোনো কিছু দিয়ে ঢেকে রাখতেন যতক্ষণ না তার বাষ্প বা প্রচণ্ড গরম কমে যেত। এরপর তিনি বলতেন, আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে বলতে শুনেছি: "নিশ্চয়ই তা (অর্থাৎ ঠান্ডা হওয়া বা যার বাষ্প চলে গেছে) বরকতের দিক থেকে অনেক বেশি।"
