সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ
` قل ما يوجد في آخر الزمان درهم من حلال، أو أخ يوثق به `.
ضعيف جدا أو موضوع.
أخرجه أبو نعيم (4 / 94) من طريق محمد بن سعيد الحراني حدثنا أبو فروة الرهاوي حدثنا أبي حدثنا محمد بن أيوب الرقى عن ميمون بن مهران عن ابن عمر مرفوعا.
قلت: وهذا سند ضعيف جدا محمد بن سعيد الحراني قال النسائي: لا أدري ما هو وأبو فروة الرهاوي اسمه يزيد بن محمد بن يزيد بن سنان بن يزيد، ترجمه ابن أبي حاتم (4 / 2 / 288) ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا، وأبوه محمد بن يزيد قال ابن أبي حاتم (4 / 1 / 128) : سألت أبي عنه؟ فقال: ليس بالمتين، هو أشد غفلة من أبيه مع أنه كان رجلا صالحا لم يكن من أحلاس الحديث، صدوق، وكان يرجع إلى ستر وصلاح، وكان النفيلي يرضاه، وقال البخاري: يروي عن أبيه مناكير، وقال النسائي: ليس بالقوي، ومحمد بن أيوب الرقي، قال ابن أبي حاتم (3 / 2 / 197) : سألت أبي عنه؟ فقال: ضعيف الحديث.
قلت: وبهذا ترجمه الذهبي في ` الميزان `، ثم قال عقبه: محمد بن أيوب الرقي آخر، عن مالك بخبر باطل، وعنه زهير بن عباد، ثم أعاده بعد خمس تراجم فقال:
محمد بن أيوب عن مالك بن أنس، قال ابن حبان: يضع الحديث، ثم ساق ابن حبان له خبرا باطلا في فضل أو يس، وقال الحافظ في ` اللسان ` عقب هذه الترجمة:
محمد ابن أيوب الرقي عن ميمون بن مهران وعنه محمد بن يزيد بن سنان، قال أبو حاتم ضعيف الحديث، وفرق النباتي بينه وبين الراوي عن مالك، والذي يظهر لي أنهما واحد.
১২১। শেষ যামানায় হালাল পন্থায় দিরহাম অর্জন কমে যাবে বা এমন ভাই মিলা কমে যাবে যার উপর নির্ভর করা যায়।
হাদীসটি নিতান্তই দুর্বল অথবা জাল।
হাদীসটি আবূ নু’য়াইম (৪/৯৪) মুহাম্মাদ ইবনু সাঈদ আল-হাররানী সূত্রে আবূ ফারওয়া আর-রাহাবী হতে, তিনি তার পিতা হতে, তার পিতা মুহাম্মাদ ইবনু আইউব আর-রাকী হতে ... বর্ণনা করেছেন। মুহাম্মাদ ইবনু সাঈদ আল-হাররানী সম্পর্কে নাসাঈ বলেনঃ তিনি কে জানি না। আবূ ফরওয়া আর-রাহাবী; তার নাম ইয়াযীদ ইবনু মুহাম্মাদ। ইবনু আবী হাতিম তার জীবনী উল্লেখ করলেও তার সম্পর্কে ভাল-মন্দ কিছুই বলেননি।
তার পিতা মুহাম্মাদ ইবনু ইয়াযীদ সম্পর্কে আবূ হাতিম বলেনঃ তিনি শক্তিশালী নন। তিনি তার পিতা হতে হাদীস বর্ণনা করতে খুবই গাফিল ছিলেন। যদিও তিনি একজন নেককার ব্যক্তি ছিলেন, ...। তার সম্পর্কে বুখারী বলেনঃ يروي عن أبيه مناكير তিনি তার পিতা হতে মুনকারগুলো বর্ণনা করতেন। নাসাঈ বলেনঃ তিনি শক্তিশালী নন।
মুহাম্মাদ ইবনু আইউব আর-রাকী সম্পর্কে ইবনু আবী হাতিম (৩/২/১৯৭) বলেনঃ আমার পিতা [আবূ হাতিমা] বলেছেনঃ তিনি হাদীসের ক্ষেত্রে দুর্বল। যাহাবী “আল-মীযান” গ্রন্থে অন্য এক মুহাম্মাদ ইবনু আইউব আর-রাকীর কথা উল্লেখ করেছেন। যিনি মালেক হতে বাতিল হাদীস বর্ণনা করতেন। মুহাম্মাদ ইবনু আইউব আর-রাকী মালেক ইবনু আনাস হতে হাদীস বর্ণনা করেছেন। তার সম্পর্কে ইবনু হিব্বান বলেনঃ তিনি হাদীস জাল করতেন। আমার কাছে যা স্পষ্ট হচ্ছে তা এই যে, তারা একজনই, দু'জন নয়
` نهى عن الغناء، والاستماع إلى الغناء، ونهى عن الغيبة، وعن الاستماع إلى الغيبة، وعن النميمة، وعن الاستماع إلى النميمة `.
ضعيف جدا.
أخرجه الخطيب في ` تاريخه ` (8 / 226) والطبراني في ` الكبير ` و` الأوسط ` مفرقا كما في ` المجمع ` (8 / 91) وأبو نعيم (4 / 93) دون ذكر الغناء، كلهم من طريق فرات بن السائب عن ميمون بن مهران عن ابن عمر مرفوعا.
قلت: والفرات هذا قال النسائي والدارقطني: متروك، وقال البخاري: منكر الحديث، وقال أحمد: هو قريب من محمد بن الطحان في ميمون يتهم بما يتهم به ذاك.
قلت: والطحان هذا هو ابن زياد اليشكري وقد كذبه أحمد وغيره، وقد تقدم
له بعض الأحاديث فانظر الأحاديث (16 - 19) ، وعليه فالفرات هذا متهم عند أحمد.
والحديث عزاه العراقي في ` تخريج الإحياء ` (3 / 127) للطبراني ثم قال:
وهو ضعيف، وقال الهيثمي: وفيه فرات بن السائب وهو متروك، وفي تحريم النميمة والغيبة أحاديث صحيحة تغني عن هذا الحديث الضعيف فراجع إن شئت ` الترغيب ` (3 / 296 - 303) .
وأما الغناء فليس كله حراما بل ما كان منه في وصف الخدود والخصور والخمور ونحوذلك فحرام قطعا، وما خلا من ذلك فالإكثار منه مكروه، وأما آلات الطرب فهي محرمة لقوله صلى الله عليه وسلم: ` ليكونن من أمتي أقوام يستحلون الحر والحرير والخمر والمعازف `.. الحديث، أخرجه البخاري تعليقا ووصله أبو داود (2 / 174) وغيره بسند صحيح، وقد ضعفه ابن حزم بدون حجة، ولي رسالة في الرد عليه، أسأل الله تيسير نشرها، ثم نشرت الحديث وتكلمت على تضعيف ابن حزم له، وبينت صحته في ` سلسلة الأحاديث ` فراجعها برقم (91) .
১২২। তিনি গান গাওয়া ও গান শ্রবণ করাকে নিষিদ্ধ করেছেন। তিনি গীবত করা ও গীবত শ্রবণ করাকে নিষিদ্ধ করেছেন এবং তিনি পরনিন্দা করা ও পরনিন্দা শ্রবণ করাকে নিষিদ্ধ করেছেন।
হাদীসটি নিতান্তই দুর্বল।
খাতীব বাগদাদী তার “আত-তারীখ” গ্রন্থে (৮/২২৬), তাবারানী “মুজামুল কাবীর” ও “মুজামুল আওসাত” গ্রন্থে এবং আবু নু’য়াইম (৪/৯৩) গেনা শব্দ ছাড়া ফুরাত ইবনু সাঈব সূত্রে ... উল্লেখ করেছেন।
ফুরাত সম্পর্কে নাসাঈ ও দারাকুতনী বলেনঃ তিনি মাতরূক। হায়সামীও বলেনঃ তিনি মাতরূক। ইমাম বুখারী বলেনঃ منكر الحديث তিনি মুনকারুল হাদীস।” ইমাম আহমাদ বলেনঃ তিনি মুহাম্মাদ ইবনু তাহানের ন্যায়। তাকে যে মিথ্যার দোষে দোষী করা হয়, তিনি সেই দোষে দোষী।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ মুহাম্মাদ ইবনু তাহান ইবনু যিয়াদ ইয়াশকুরীকে ইমাম আহমাদ ও অন্যরা মিথ্যুক আখ্যা দিয়েছেন, যেমনভাবে ১৬ ও ১৯ নং হাদীসে আলোচনা করা হয়েছে।
পরনিন্দা এবং গীবাত হারাম মর্মে সহীহ হাদীস এসেছে। অতএব এ য’ঈফ হাদীসের কোন প্রয়োজনীয়তা নেই।
তবে গানের ক্ষেত্রে সব গানই হারাম নয়। যেগুলোতে হারাম স্থান, বস্তু বা কথার উল্লেখ রয়েছে, সেগুলোই হারাম। যেগুলোতে এসব কিছু নেই সেগুলো হারাম নয়।
তবে বাদ্যযন্ত্র; সেগুলোর সবই হারাম, এ মর্মে সহীহ্ হাদীস বর্ণিত হয়েছে।
` إن الله يسأل عن صحبة ساعة `.
اشتهر هكذا على الألسنة ولا أعرفه بهذا اللفظ.
وهو بمعنى الحديث الآتي وهو:
১২৩। আল্লাহ তা’আলা এক ঘণ্টা সঙ্গ দেওয়া সম্পর্কেও জিজ্ঞেস করবেন।
হাদীসটি বানোয়াট।
হাদীসটি এভাবেই মুখে মুখে পরিচিতি লাভ করেছে। এটিকে এ শব্দে চিনি না। এটি আগত হাদীসটির অর্থবোধক।
` ما من صاحب يصحب صاحبا ولوساعة من نهار إلا سئل عن صحبته هل أقام فيها
حق الله أم أضاعه؟ `.
موضوع.
أورده الغزالي في ` الإحياء ` (2 / 154) جازما بنسبته إليه صلى الله عليه وسلم بلفظ: ` إنه دخل غيضة مع بعض أصحابه فاجتنى منه سواكين أحدهما معوج والآخر مستقيم فدفع المستقيم إلى صاحبه فقال له: يا رسول الله كنت والله أحق بالمستقيم مني فقال: … ` فذكره، قال الحافظ العراقي في ` تخريج الإحياء `:لم أقف له على أصل، وذكر نحوه السبكي في ` الطبقات ` (4 / 156) .
وأقول: قد وجدت له أصلا ولكنه موضوع لأنه من رواية أحمد بن محمد بن عمر بن يونس اليمامي، قال ابن أبي حاتم في ترجمته (1 / 1 / 71) : سألت أبي عنه فقال: قدم علينا، وكان كذابا، وكتبت عنه، ولا أحدث عنه، فقال الذهبي في ترجمته من ` الميزان `: روى عن عمر بن يونس - يعني جده - عن أبيه سمع حمزة بن عبد الله بن عمر عن أبيه: أن رسول الله صلى الله عليه وسلم دخل غيضة فاجتنى سواكين أحدهما مستقيم، قلت: فذكر الحديث بتمامه إلا أنه قال: ` إنه ليس من صاحب يصاحب صاحبا ولوساعة إلا سأله الله عن مصاحبته إياه `.
قلت: أخرجه ابن حبان في ` الضعفاء ` (1 / 143 - 144) ، ورواه الطبري (5 / 53) عن فلان عن الثقة عنده مرفوعا نحوه، وهذا مرسل ضعيف.
১২৪। কোন ব্যাক্তি যদি তার সাথীদের সাথে সঙ্গ দেয় এবং তা যদি দিবসের একটি মুহূর্তের জন্যও হয়; তবু তাকে তার সঙ্গদানের মুহূর্ত সম্পর্কে জিজ্ঞাসিত হতে হবে। সে তাতে আল্লাহর হক প্রতিষ্ঠা করেছে না নষ্ট করেছে?
হাদীসটি জাল।
গাযালী হাদীসটি “আল-ইহইয়া” গ্রন্থে (২/১৫৪) উল্লেখ করেছেন। “আল-ইহইয়া” গ্রন্থের তাখরীজকারী হাফিয ইরাকী বলেনঃ এটির কোন ভিত্তি সম্পর্কে অবহিত হতে পারিনি। সুবকী “আত-তাবাকাত” গ্রন্থে (৪/১৫৬) একই কথা বলেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ হাদীসটির ভিত্তি পেয়েছি। কিন্তু সেটি জাল (বানোয়াট)। কারণ এটি আহমাদ ইবনু মুহাম্মাদ ইবনু উমারের বর্ণনাকৃত, যার সম্পর্কে ইবনু আবী হাতিম তার জীবনীতে (১/১/৭১) বলেছেনঃ আমি তার সম্পর্কে আমার পিতাকে জিজ্ঞাসা করেছিলাম, তিনি বলেনঃ তিনি আমাদের নিকট এসেছিলেন। তিনি ছিলেন একজন মিথ্যুক। তার নিকট হতে লিখেছি কিন্তু তার থেকে হাদীস বর্ণনা করিনি।
` سوء الخلق ذنب لا يغفر، وسوء الظن خطيئة تفوح `.
باطل لا أصل له.
وقد أورده الغزالي (3 / 45) جازما بنسبته إليه صلى الله عليه وسلم وإذا جاز أن يخفى عليه بطلانه من الناحية الحديثية فلست أدري كيف خفي
عليه بطلانه من الناحية الفقهية؟! فإن الحديث معارض تمام المعارضة لقوله تعالى: {إن الله لا يغفر أن يشرك به، ويغفر ما دون ذلك لمن يشاء} ، ولعل في هذا عبرة لمن يتساهلون برواية الأحاديث ونسبتها إليه صلى الله عليه وسلم دون أن يتثبتوا من صحتها على طريقة المحدثين جزاهم الله عن المسلمين خيرا.
وهذا الحديث أورده السبكي في ` الطبقات ` (4 / 162) في فصل الأحاديث التي لم يجد لها إسنادا مما وقع في كتاب ` الإحياء `، وأما الحافظ العراقي فإنه استشهد له في تخريجه إياه بالحديث الآتي وهو:
১২৫। খারাপ চরিত্র এমন এক গুনাহ যা ক্ষমা করা হবে না আর কু-ধারনা এমন এক ত্রুটি যা দুর্গন্ধ ছাড়ায়।
হাদীসটি বাতিল, এর কোন ভিত্তি নেই।
এটিকে গাযালী “আল-ইহইয়া” গ্রন্থে (৩/৪৫) উল্লেখ করেছেন। যদি ধরে নেই যে, এ হাদীসটি হাদীস হিসাবে বাতিল একথাটি তার (গাযালী) নিকট লুক্কায়িত ছিল; তা বোধগম্য। কিন্তু জানি না হাদীসটি ফিকহের দৃষ্টিকোণ থেকেও যে বাতিল, এ বিষয়টি তার নিকট কীভাবে লুক্কায়িত থাকল?! কারণ হাদীসটি সম্পূর্ণরূপে আয়াত বিরোধী। আল্লাহ তা'আলা বলেনঃ (إِنَّ اللَّهَ لَا يَغْفِرُ أَن يُشْرَكَ بِهِ وَيَغْفِرُ مَا دُونَ ذَٰلِكَ لِمَن يَشَاءُ) অর্থঃ “নিশ্চয় আল্লাহ ক্ষমা করবেন না তার সাথে শরীক স্থাপন করাকে, তবে তা ছাড়া অন্যান্য পাপ যাকে চান ক্ষমা করে দিবেন” (সূরা আন-নিসাঃ ৪৮)।
সম্ভবত এর মাঝে শিক্ষণীয় বিষয় রয়েছে সেই ব্যক্তির জন্য যিনি হাদীস বর্ণনার ক্ষেত্রে শিথিলতা করেন এবং মুহাদ্দিসগণের তরীকায় সহীহ হাদীস হিসাবে সাব্যস্ত না করেই নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর উদ্ধৃতিতে তা বর্ণনা করেন।
সুবকী “আত-তাবাকাত” গ্রন্থে (৪/১৬২) এ হাদীসটি “আল-ইহ্ইয়া” গ্রন্থের ঐ অধ্যায়ে উল্লেখ করেছেন, যেখানে সেই হাদীসগুলো উল্লেখ করা হয়েছে যেগুলোর সনদ নেই।
` ما من شيء إلا له توبة، إلا صاحب سوء الخلق، فإنه لا يتوب من ذنب إلا عاد في شر منه `.
موضوع.
أخرجه الطبراني في ` المعجم الصغير ` (ص 114) والأصبهاني في ` الترغيب ` (151 / 1) من طريق عمرو بن جميع عن يحيى بن سعيد الأنصاري عن محمد بن إبراهيم التيمي عن أبيه عن عائشة مرفوعا.
وقال الطبراني: لم يروه عن يحيى إلا عمرو، ولا يروى عن عائشة إلا بهذا الإسناد.
قلت: وهو موضوع، فإن عمرا هذا قال النقاش: أحاديثه موضوعة وكذبه يحيى بن معين وقال ابن عدي: كان يتهم بالوضع، ومنه تعلم أن قول الحافظ العراقي في ` تخريج الإحياء ` (3 / 45) بعد أن عزاه
للطبراني: وإسناده ضعيف، قصور إلا أن يلاحظ أن الموضوع من أنواع الضعيف كما هو مقرر في المصطلح.
وقال الحافظ الهيثمي في ` مجمع الزوائد ` (8 / 25) : رواه الطبراني في ` الصغير `، وفيه عمرو بن جميع وهو كذاب.
والحديث أورده السيوطي في ` الجامع ` برواية أبي الفتح الصابوني في ` الأربعين ` عن عائشة ويعترض عليه من وجهين.
الأول: إيراده فيه مع أنه ليس على شرطه لتفرد الكذاب به!
الآخر: اقتصاره في العزو على الصابوني فأو هم أنه ليس عند من هو أشهر منه!
ثم إن الحديث أورده العراقي شاهدا للحديث الذي قبله وليس بصواب لأمرين.
الأول: أنه ليس فيه ` أن سوء الخلق ذنب لا يغفر `.
الآخر: أنه ليس فيه: ` وسوء الظن خطيئة تفوح ` وهو تمام الحديث قبله.
১২৬। অসৎ চরিত্রের অধিকারী ব্যাতিত এমন কোন গুনাহ নেই যার জন্য তওবা নেই। কারন সে যখনই গুনাহ হতে তওবা করে তখনই সে তার চেয়েও নিকৃষ্ট গুনহার মধ্যে পতিত হয়।
হাদীসটি জাল।
হাদীসটি তাবরানী “মুজামুস সাগীর` গ্রন্থে (পৃঃ ১১৪) এবং ইস্পাহানী “আত-তারগীব” গ্রন্থে (১/১৫১) আমর ইবনু জামী সূত্রে ... উল্লেখ করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ হাদীসটি বানোয়াট। কারণ আমর সম্পর্কে নাক্কাশ বলেনঃأحاديثه موضوعة وكذبه يحيى بن معين তার হাদিসগুলো বানোয়াট এবং তাকে ইহইয়া ইবনু মাঈন মিথ্যুক আখ্যা দিয়েছেন।
ইবনু আদী বলেনঃ كان يتهم بالوضع তাকে জাল করার দোষে দোষী করা হত।
হাফিয হায়সামী “মাজমাউয যাওয়াইদ” গ্রন্থে (৮/২৫) বলেছেনঃ এটিকে তাবারানী বর্ণনা করেছেন। এ সনদে মিথ্যুক আমর ইবনু জামী' রয়েছেন। সুয়ূতী হাদীসটি `জামেউস সাগীর` গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন। কিন্তু তা তার শর্ত মোতাবেক হয়নি। সনদে মিথ্যুক ব্যক্তি এককভাবে বর্ণনা করার কারণে।
`তাখরীজুল ইহইয়া` গ্রন্থে (৩/৪৫) ইরাকী কর্তৃক শুধুমাত্র হাদীসটির সনদ দুর্বল বলেই শেষ করাও ঠিক হয়নি। তবে যদি এ দৃষ্টিকোণ থেকে বলে থাকেন যে, জাল তো দুর্বল হাদীসেরই একটি প্রকার, তাহলে সমস্যা নেই।
` صلاة بعمامة تعدل خمسا وعشرين صلاة بغير عمامة، وجمعة بعمامة تعدل سبعين جمعة بغير عمامة، إن الملائكة ليشهدون الجمعة معتمين، ولا يزالون يصلون على أصحاب العمائم حتى تغرب الشمس `.
موضوع.
أخرجه ابن النجار بسنده إلى محمد بن مهدي المروزي أنبأنا أبو بشر بن سيار الرقي حدثنا العباس بن كثير الرقي عن يزيد بن أبي حبيب قال: قال لي مهدي بن ميمون:
دخلت على سالم بن عبد الله بن عمر وهو يعتم، فقال لي: يا أبا أيوب ألا أحدثك بحديث تحبه وتحمله وترويه؟ قلت: بلى، قال: دخلت على عبد الله بن عمر وهو يعتم فقال: يا بني أحب العمامة، يا بني اعتم تجل وتكرم وتوقر، ولا يراك الشيطان إلا ولى هاربا إني سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:
فذكره، قال الحافظ ابن حجر في ` لسان الميزان ` (3 / 244) : هذا حديث موضوع ولم أر للعباس بن كثير في ` الغرباء ` لابن يونس ولا في ` ذيله ` لابن الطحان ذكرا، وأما أبو بشر بن سيار فلم يذكره أبو أحمد الحاكم في ` الكنى ` وما عرفت محمد بن مهدي المروزي، ولا مهدي بن ميمون الراوي للحديث المذكور عن سالم وليس هو البصري المخرج في ` الصحيحين ` ولا أدري ممن الآفة.
ونقله السيوطي في ` ذيل الأحاديث الموضوعة ` (ص 110) وأقره وتبعه ابن عراق (159 / 2) .
ثم ذكر السيوطي أنه أخرجه ابن عساكر في ` تاريخه ` من طريق عيسى بن يونس والديلمي من طريق سفيان بن زياد المخرمي كلاهما عن العباس بن كثير به.
قلت: ثم ذهل عن هذا السيوطي فأورد الحديث في ` الجامع الصغير ` من رواية ابن عساكر عن ابن عمر، وتعقبه المناوي في شرحه بأن ابن حجر قال: إنه موضوع ونقله عنه السخاوي وارتضاه.
قلت: ولو تعقبه بما نقله السيوطي نفسه في ` الذيل ` عن ابن حجر كان أولى كما لا يخفى، وكلام السخاوي المشار إليه في ` المقاصد ` (ص 124) .
ونقل الشيخ على القاري في ` موضوعاته ` (ص 51) عن المنوفي أنه قال:
هذا حديث باطل.
ثم تعقبه القاري بأن السيوطي أورده في ` الجامع الصغير ` مع التزامه بأنه لم يذكر فيه الموضوع ونقل العجلوني نحوه عن النجم.
قلت: وهذا تعقب باطل تغني حكايته عن إطالة الرد عليه، وما جاءهم ذلك إلا من حسن ظنهم بعلم السيوطي، وعدم معرفتهم بما في ` الجامع الصغير ` من الأحاديث الموضوعة التي نص هو نفسه في غير ` الجامع ` على وضع بعضها كهذا الحديث وغيره مما سبق ويأتي، فكن امرءا لا يعرف الحق بالرجال، بل اعرف الحق تعرف الرجال.
وقد علمت مما سبق أن الحافظ ابن حجر إنما حكم بوضع هذا الحديث من قبل ما فيه من مبالغة في الفضل لأمر لا يشهد له العقل السليم بمثل هذا الأجر، ولولا هذا لاكتفى بتضعيفه لأنه ليس في سنده من يتهم، فإذا عرفت هذا أمكنك أن تعلم حكم الحديث الذي بعده من باب أولى، وهو:
১২৭। পাগড়ী পরে একটি সালাত (নামায/নামাজ) আদায় করা বিনা পাগড়িতে ২৫টি সালাত (নামায/নামাজ) আদায়ের সমতুল্য। পাগড়ী সহ একটি জুম’আহ পাগড়ী ছাড়া ৭০টি জুম’আর সমতুল্য। ফেরেশতাগণ পাগড়ী পরা অবস্থায় জুম’আতে উপস্থিত হন এবং পাগড়ীধারীদের প্রতি সূর্যাস্ত পর্যন্ত অব্যাহতভাবে রহমত কামনা করতে থাকেন।
হাদীসটি জাল।
হাদীসটি ইবনুন নাজ্জার তার সনদে মহাম্মাদ ইবনু মাহদী আল-মারওয়াযী পর্যন্ত ... বর্ণনা করেছেন। ইবনু হাজার “লিসানুল মীযান” গ্রন্থে (৩/২৪৪) বলেছেনঃ এ হাদীসটি জাল। এটির সনদে আব্বাস ইবনু কাসীর রয়েছেন। তার বিবরণ ইবনু ইউনুসের `আল-গুরাবা` এবং তার “আয-যায়ল” নামক গ্রন্থে দেখছিনা। বর্ণনাকারী আবু বিশর ইবনু সায়য়ারকে আবু আহমাদ হাকিম তার “আল-কুনা” গ্রন্থে উল্লেখ করেননি। এছাড়া আরেক বর্ণনাকারী মুহাম্মাদ ইবনু মাহদী আল-মারওয়াযীকে চিনি না। আর মাহদী ইবনু মায়মূনকে সালিম হতে বর্ণনাকারী হিসাবে চিনি না, তিনি বাসরীও নন।
সুয়ূতী তার “যায়লুল আহাদীসিল মাওযুআহ” গ্রন্থে (পৃ. ১১০) হাদীসটি উল্লেখ করে আসকালানীর কথাকে সমর্থন করেছেন। ইবনুল আররাকও (২/১৫৯) তার অনুসরণ করেছেন। তা সত্ত্বেও সুয়ূতী তার “জামেউস সাগীর” গ্রন্থে হাদীসটি উল্লেখ করেছেন।
আলী আল-কারী হাদীসটি তার “আল-মাওযুআত” গ্রন্থে (পৃ. ৫১) মানুকী হতে বর্ণনা করেছেন। তিনি বলেনঃ هذا حديث باطل এ হাদীসটি বাতিল।’
` ركعتان بعمامة خير من سبعين ركعة بلا عمامة `.
موضوع.
أورده السيوطي في ` الجامع الصغير ` برواية الديلمي في ` مسند الفردوس ` عن جابر! وكان حقه أن يورده في ` ذيل الأحاديث الموضوعة ` كما صنع بالحديث الذي قبله، لأنه أشد مبالغة في فضل الصلاة بالعمامة من ذاك فكان الحكم عليه بالوضع أولى وأحرى.
هذا وقال المناوي في ` شرح الجامع `: ورواه عن جابر أيضا أبو نعيم ومن طريقه وعنه تلقاه الديلمي، فلوعزاه إلى الأصل لكان أولى، ثم إن فيه طارق بن عبد الرحمن، أورده الذهبي في ` الضعفاء `
وقال: قال النسائي: ليس بقوى عن محمد بن عجلان ذكره البخاري ` في الضعفاء `، وقال الحاكم: سيء الحفظ ومن ثم قال السخاوي: هذا الحديث لا يثبت.
قلت: محمد بن عجلان ثقة حسن الحديث، فلا يعل بمثله هذا الحديث، وطارق بن عبد الرحمن اثنان أحدهما البجلي الكوفي روى عن سعيد بن المسيب ونحوه، وهو ثقة من رجال الشيخين والآخر القرشي الحجازي يروي عن العلاء بن عبد الرحمن ونحوه قال الذهبي: لا يكاد يعرف، قال النسائي: ليس بالقوي، فالظاهر أن هذا هو المراد وليس الأول لأنه في طبقته وذكره ابن حبان في ` الثقات ` فلعله هو علة الحديث وإلا فمن دونه.
ويؤسفني أنني لم أقف على سند الحديث لأنظر فيه مع أن المناوي ذكر فيما تقدم أن أبا نعيم رواه أيضا، ولم أجده في ` البغية في ترتيب أحاديث الحلية ` للشيخ عبد العزيز بن محمد بن الصديق الغماري فالله أعلم.
ثم رأيت بخط الحافظ ابن رجب الحنبلى في قطعة من شرحه على الترمذي (83 / 2) ما نصه: سئل أبو عبد الله يعني أحمد بن حنبل عن شيخ نصيبي يقال: محمد بن نعيم قيل له: روى شيئا عن سهيل عن أبيه عن أبي هريرة عن النبي صلى الله عليه وسلم:
` صلاة بعمامة أفضل من سبعين صلاة بغير عمامة `، قال: هذا كذاب، هذا باطل.
ثم رأيت رواية أبي نعيم، فتأكدت أن آفة الحديث ممن دون طارق بن عبد الرحمن، فخرجته فيما سيأتي (برقم 5699) .
১২৮। পাগড়ী সহ দু’রাকাত সালাত (নামায/নামাজ) আদায় বিনা পাগড়ীতে সত্তর রাকা’য়াত সালাত (নামায/নামাজ) আদায়ের চাইতেও উত্তম।
হাদীসটি জাল।
হাদীসটি সুয়ূতী “জমেউস সাগীর” গ্রন্থে দাইলামীর বর্ণনায় জাবের (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে উল্লেখ করেছেন। এ হাদীসটি তার “যায়লুল আহাদীসিল মাওযুআহ” গ্রন্থে উল্লেখ করা উচিত ছিল। যেমনটি পূর্বে উল্লেখিত হাদীসের ক্ষেত্রে করেছেন। কারণ এটিতে পূর্বেরটির চেয়ে বেশী ফযীলত বর্ণনা করা হয়েছে। এর উপর জালের হুকুম লাগানোটা বেশী উপযোগী ছিল। এটির সনদে তারেক ইবনু আব্দির রহমান নামক এক বর্ণনাকারী আছেন। তাকে যাহাবী দুর্বলদের অন্তর্ভুক্ত করে বলেছেনঃ নাসাঈ বলেনঃ তিনি শক্তিশালী নন। বুখারী তাকে দুর্বলদের অন্তর্ভুক্ত করেছেন।
হাকিম বলেন তিনি হেফযের ক্ষেত্রে ক্রটযুক্ত ছিলেন। এ কারণে সাখাবী বলেনঃ এ হাদীসটি সাব্যস্ত হয়নি।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তারেক ইবনু আব্দির রহমান দু'জন রয়েছেন। একজন হচ্ছেন বাজালী কুফী। তিনি সাঈদ ইবনুল মুসাইয়্যাব হতে বর্ণনা করেছেন। অপরজন হচ্ছেন কুরাশী হিজাজী। তিনি 'আলা ইবনু আব্দির রহমান হতে বর্ণনা করেছেন। এ দ্বিতীয়জন সম্পর্কে জানা যায় না। তার সম্পর্কে নাসাঈ বলেনঃ তিনি শক্তিশালী নন। এ হাদীসের সনদে এ দ্বিতীয়জনই রয়েছেন।
ইমাম আহমাদ ইবনু হাম্বালকে নাসীবীর শাইখ মুহাম্মাদ ইবনু নু’য়াইম সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করা হয়েছিল, তাকে বলা হয়েছিল তিনি সোহাইল হতে, আর সোহাইল তার পিতা হতে, তার পিতা আবু হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে, আবু হুরাইরাহ্ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেছেন। ‘পাগড়ী সহ সালাত আদায় করা বিনা পাগড়ীতে সত্তরবার সালাত আদায় করার চেয়েও উত্তম? উত্তরে তিনি (আহমাদ ইবনু হাম্মাল) বলেনঃ তিনি মিথ্যুক, এটি বাতিল হাদীস।
` الصلاة في العمامة تعدل بعشرة آلاف حسنة `.
موضوع.
أورده السيوطي في ` ذيل الأحاديث الموضوعة ` (ص 111) من رواية الديلمي (2 / 256) بسنده إلى أبان عن أنس مرفوعا.
وقال: أبان متهم وتبعه ابن عراق في ` تنزيه الشريعة ` (257 / 2) .
قلت: وقال الحافظ السخاوي في ` المقاصد ` (ص 124) تبعا لشيخه الحافظ ابن حجر: إنه موضوع وقال المنوفي: إنه حديث باطل كما في ` موضوعات ` الشيخ القاري (ص 51) .
ولا شك عندي في بطلان هذا الحديث وكذا الحديثين قبله، لأن الشارع الحكيم يزن الأمور بالقسطاص المستقيم، فغير معقول أن يجعل أجر الصلاة في العمامة مثل أجر صلاة الجماعة بل أضعاف أضعافها! مع الفارق الكبير بين حكم العمامة وصلاة الجماعة، فإن العمامة غاية ما يمكن أن يقال فيها: إنها مستحبة، والراجح أنها من سنن العادة لا من سنن العبادة، أما صلاة الجماعة فأقل ما قيل فيها:
إنها سنة مؤكدة، وقيل: إنها ركن من أركان الصلاة لا تصح إلا بها، والصواب أنها فريضة تصح الصلاة بتركها مع الإثم الشديد، فكيف يليق بالحكيم العليم أن يجعل ثوابها مساويا لثواب الصلاة في العمامة بل دونها بدرجات! ولعل الحافظ ابن حجر لاحظ هذا المعنى حين حكم على الحديث بالوضع.
ومن آثار هذه الأحاديث السيئة وتوجيهاتها الخاطئة أننا نرى بعض الناس حين يريد الدخول في الصلاة يكور على رأسه أو طربوشه منديلا لكي يحصل بزعمه
على هذا الأجر المذكور مع أنه لم يأت عملا يطهر به نفسه ويزكيها! ومن العجائب أن ترى بعض هؤلاء يرتكبون إثم حلق اللحية فإذا قاموا إلى الصلاة لم يشعروا بأي نقص يلحقهم بسبب تساهلهم هذا ولا يهمهم ذلك أبدا، أما الصلاة في العمامة فأمر لا يستهان به عندهم! ومن الدليل على هذا أنه إذا تقدم رجل ملتح يصلي بهم لم يرضوه حتى يتعمم، وإذا تقدم متعمم ولوكان عاصيا بحلقه للحيته لم يزعجهم ذلك ولم يهتموا له فعكسوا شريعة الله حيث استباحوا ما حرمه، وأو جبوا، أو كادوا أن يوجبوا ما أباحه، والعمامة إن ثبت لها فضيلة فإنما يراد بها العمامة التي
يتزين بها المسلم في أحواله العادية! ويتميز بها عن غيره من المواطنين، وليس يراد بها العمامة المستعارة التي يؤدي بها عبادة في دقائق معدودة، فما يكاد يفرغ منها حتى يسجنها في جيبه! والمسلم بحاجة إلى عمامة خارج الصلاة
أكثر من حاجته إليها داخلها بحكم أنها شعار للمسلم تميزه عن الكافر ولا سيما في هذا العصر الذي اختلطت فيه أزياء المؤمن بالكافر حتى صار من العسير أن يفشي المسلم السلام على من عرف ومن لم يعرف، فانظر كيف صرفهم الشيطان عن العمامة النافعة إلى العمامة المبتدعة، وسول لهم أن هذه تكفي وتغني عن تلك وعن
إعفاء اللحية التي تميز المسلم من الكافر كما قال صلى الله عليه وسلم:
` خالفوا المشركين احفوا وفي رواية قصوا الشوارب وأو فوا اللحى `، رواه الشيخان وغيرهما عن ابن عمر وغيره وهو مخرج في ` حجاب المرأة المسلمة ` (ص 93 - 95) .
وما مثل من يضع هذه العمامة المستعارة عند الصلاة إلا كمثل من يضع لحية مستعارة عند القيام إليها! ولئن كنا لم نشاهد هذه اللحى المستعارة في بلادنا فإني لا أستبعد أن أراها يوما ما بحكم تقليد كثير من المسلمين للأوربيين. فقد قرأت في ` جريدة العلم الدمشقية ` عدد (2485) بتاريخ 25 ذي القعدة سنة 1364 هـ ما نصه:
لندن - عندما اشتدت وطأة الحر، وانعقدت جلسة مجلس اللوردات سمح لهم الرئيس بأن يخلعوا لحاهم المستعارة!
فهل من معتبر؟ .
১২৯। পাগড়ীসহ সালাত (নামায/নামাজ) পড়া দশ হাজার ভাল কর্মের সমতুল্য।
হাদীসটি জাল।
হাদীসটি সুয়ূতী “যায়লুল আহাদীসিল মাওযু'আহ” গ্রন্থে (পৃ. ১১১) দাইলামীর বর্ণনায় (২/২৫৬) উল্লেখ করেছেন। এ সূত্রে আবান নামক এক বর্ণনাকারী রয়েছেন। অতঃপর তিনি (সুয়ূতী) বলেনঃ আবান মিথ্যার দোষে দোষী।
ইবনুল আররাক “তানযীহুশ শারীয়াহ` গ্রন্থে (২/২৫৭) তার এ কথার অনুকরণ করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ সাখাবী “মাকাসীদুল হাসানা” গ্রন্থে (পৃ. ১২৪) তার শাইখ হাফিয ইবনু হাজারের অনুকরণ করে বলেনঃ অবশ্যই হাদীসটি জাল। মানুকী বলেনঃ অবশ্যই উক্ত হাদীসটি বাতিল, যেমনভাবে শাইখ আল-কারী তার “আল-মাওযুআত” গ্রন্থে (পৃ. ৫১) বলেছেন।
উল্লেখ্য এ হাদীসটিসহ উপরের হাদীস দুটি বাতিল তাতে আমার নিকট কোন সন্দেহ নেই। কারণ জামা'আতের সাথে সালাত আদায়ের চেয়েও পাগড়ী পরে সালাত আদায় করলে তা বেশী সাওয়াব হবে এটি বোধগম্য নয়। কারণ পাগড়ী সম্পর্কে সর্বোচ্চ বলা যেতে পারে এটি মুস্তাহাব। এমনকি পাগড়ী পরা অভ্যাসগত সুন্নাত ইবাদাতগত সুন্নাত নয়, এটিই সঠিক। অতএব এরূপ ফযীলত সম্বলিত হাদীস বাতিল হওয়ারই উপযোগী।
` إن الله تعالى لا يعذب حسان الوجوه سود الحدق `.
موضوع.
أخرجه الديلمي، أنبأنا بنجير بن منصور عن جعفر بن محمد بن الحسين الأبهري وعن علي بن أحمد الحروري عن جعفر بن أحمد الدقاق عن عبد الملك بن محمد الرقاشي عن عمرو بن مرزوق عن شعبة عن قتادة عن أنس مرفوعا.
أورده السيوطي في ` اللآليء ` (1 / 113 ـ 114) ، عند كلامه على الحديث الآتي بعد هذا، كأنه ساقه شاهدا له، وسكت عنه، فرأيت أن أتكلم عنه وأكشف عن علته ولا سيما وقد سألني عنه أقرب الناس إلي وهو والدي رحمه الله وجزاه الله عني خير الجزاء، فأقول: علة هذا الحديث من الرقاشي فمن دونه، وكلهم مجهولون لم
أجد لهم ذكرا في شيء من كتب الرجال التي تحت يدي إلا الرقاشي فإنه من رجال ابن ماجه وله ترجمة واسعة في ` تهذيب التهذيب ` (6 / 419 - 421) و` تاريخ بغداد ` (10 / 425 - 427) ويتلخص مما جاء فيها أنه في نفسه صدوق، لكنه اختلط حين جاء بغداد فكثر خطؤه في الأسانيد والمتون، فلعل هذا الحديث من
تخاليطه! وإلا فهو من وضع أحد أولئك المجهولين، وقال ابن عراق في ` تنزيه الشريعة ` (1 / 174) : في سنده جعفر بن أحمد الدقاق، وهو آفته فيما أظن، والله أعلم.
قلت: ولست أشك في بطلان هذا الحديث لأنه يتعارض مع ما ورد
في الشريعة، من أن الجزاء إنما يكون على الكسب والعمل {فمن يعمل مثقال ذرة خيرا يره، ومن يعمل مثقال ذرة شرا يره} لا على ما لا صنع ولا يد للإنسان فيه كالحسن أو القبح، وإلى هذا أشار صلى الله عليه وسلم بقوله: ` إن الله لا ينظر إلى أجسادكم ولا إلى صوركم ولكن ينظر إلى قلوبكم وأعمالكم ` رواه مسلم (8 / 11) ، وغيره وهو مخرج في ` غاية المرام ` (415) ، وراجع التعليق عليه في مقدمتي على ` رياض الصالحين ` للنووي (ص: ل ـ ن) ، فإنه مهم جدا، ومثل هذا الحديث الموضوع في البطلان الحديث الآتي وهو:
১৩০। নিশ্চয় আল্লাহ তা’আলা চোখে কালো মনি বিশিষ্ট সুন্দর চেহারার অধিকারীদের শাস্তি দেবেন না।
হাদীসটি জাল।
হাদীসটি দাইলামী বর্ণনা করেছেন। তার সূত্রে বেনজীর ইবনু মানসূর, জা'ফার ইবনু মুহাম্মাদ আল-আবহারী, আলী ইবনু আহমাদ আল-হারুরী, জাফর ইবনু আহমাদ আর-দাকাক এবং আব্দুল মালেক ইবনু মুহাম্মাদ আর-রুকাশী রয়েছেন। সুয়ূতী “আল-লাআলী” গ্রন্থে (১/১১৩-১১৪) উল্লেখ করে এটি সম্পর্কে কিছু না বলে চুপ থেকেছেন।
আমি এটি সম্পর্কে আলোচনা করা প্রয়োজন মনে করছি এর সমস্যা কি তা প্রকাশ করার জন্য। আমাকে এটি সম্পর্কে আমার অতি আপনজন আমার পিতা বিশেষভাবে জিজ্ঞাসা করেছিলেন। আমি বলছিঃ এ হাদীসটির সনদে রুকাশীর নীচের বর্ণনাকারীগণ সকলেই মাজহুল। তাদের কারো সম্পর্কে আমার নিকট যে সব আসমায়ে রিজালের (বর্ণনাকারীদের তথ্য সম্বলিত) গ্রন্থ রয়েছে সে সবের কোনটিতেই (তাদের) আলোচনা পাইনি। তবে এ রুকাশীর জীবনী সম্পর্কে “তাহযীবুত তাহযীব” (৬/৪১৯-৪২১) এবং “তারীখু বাগদাদ” গ্রন্থে (১০/৪২৫-৪২৭) আলোচনা করা হয়েছে। তিনি হচ্ছেন ইবনু মাজার এক বর্ণনাকারী।
তিনি সত্যবাদী হলেও যখন তিনি বাগদাদে আগমন করেন তখন তার মস্তিষ্ক বিকৃতি ঘটেছিল। ফলে তার হাদীসের সনদ এবং মতনগুলোতে বহু ভুলের সমাহার ঘটে। সম্ভবত এ হাদীসটি সেগুলোর একটি। নতুবা এটি সে সব মাজহুল বর্ণনাকারীদের কোন একজনের তৈরিকৃত।
ইবনুল আররাক “তানীহুশ শারীয়াহ` গ্রন্থে (১/১৭৪) বলেনঃ তার সনদে জাফার ইবনু আহমাদ আদ-দাকাক রয়েছেন। তিনিই হচ্ছেন হাদীসটির বিপদ।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ হাদীসটি বাতিল হওয়ার ব্যাপারে কোন প্রকার সন্দেহ পোষণ করছি না। কারণ এটি শরীয়তে যা বর্ণিত হয়েছে তার সাথে বিরোধপূর্ণ। যেমন বলা হয়েছে প্রতিদান দেয়া হবে অর্জন এবং কর্মের উপর ভিত্তি করে।
فَمَن يَعْمَلْ مِثْقَالَ ذَرَّةٍ خَيْرًا يَرَهُ ٭ وَمَن يَعْمَلْ مِثْقَالَ ذَرَّةٍ شَرًّا يَرَهُ
অর্থঃ “যে ব্যক্তি এক অণু পরিমাণ নেক আমল করবে সে তা দেখতে পাবে, আর যে ব্যক্তি এক অণু পরিমাণ বদ আমল করবে সে তা দেখতে পাবে।` (সূরা যিলযাল আয়াতঃ ৭-৮)
এমন কিছুর উপর ভিত্তি করে নয় যা মানুষের কৃত নয় এবং যাতে মানুষের কোন হাত নেই, যেমন ভাল-মন্দ। এ দিকেই ইঙ্গিত করে রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনঃ
إن الله لا ينظر إلى أجسادكم ولا إلى صوركم ولكن ينظر إلى قلوبكم وأعمالكم
অর্থঃ নিশ্চয় আল্লাহ দৃষ্টি দিবেন না তোমাদের শরীর এবং তোমাদের আকৃতির দিকে, বরং দৃষ্টি দিবেন তোমাদের অন্তর ও তোমাদের কর্ম সমূহের দিকে। এ হাদীসটি ইমাম মুসলিম ও অন্যান্য মুহাদ্দিসগণ হাদীসটি বর্ণনা করেছেন।
অতএব আলোচ্য হাদীসটি যে বানোয়াট তাতে কোন প্রকার সন্দেহ নেই।
` عليكم بالوجوه الملاح والحدق السود فإن الله يستحي أن يعذب وجها مليحا بالنار `.
موضوع.
أخرجه الخطيب في ` التاريخ ` (7 / 282 ـ 283) في ترجمة الحسن بن علي بن زكريا بإسناده عن شعبة عن توبة العنبري عن أنس رفعه وأورده ابن الجوزي في ` الموضوعات `، وقال: آفته الحسن بن علي بن زكريا العدوي يضع الحديث، قال السيوطي في ` اللآليء ` (1 / 113) : هو أحد المعروفين بالوضع، وقال الشيخ القاري (ص 110) : فلعنة الله على واضعه الخبيث، ثم وجدت له طريقا أخرى فقال لاحق بن محمد في ` شيوخه `، (114 /
1 / 2) : أخبرنا أبو مسعود حدثنا لاحق بن الحسين المقدسي حدثنا محمد بن عبد الله بن أبي درة القاضي حدثنا محمد بن طلحة العروقي حدثنا إبراهيم بن سليمان الزيات حدثنا شعبة عن توبة العنبري عن أنس بن مالك مرفوعا به.
قلت: وهذا كالذي قبله أو شر منه، وفيه علل:
1 - الزيات هذا قال ابن عدي: ليس بالقوي.
2 - والعروقي، والراوي عنه محمد القاضي لم أعرفهما.
3 - لاحق هذا وهو آفة الحديث فإنه كذاب وضاع، وقال الإدريسى الحافظ: كان كذابا أفاكا يضع الحديث على الثقات، لا نعلم له ثانيا في عصرنا مثله في الكذب والوقاحة.
وقال الشيرازي في ` الألقاب `: حدثنا أبو عمر لاحق بن الحسين بن أبي الورد فذكر خبرا موضوعا ظاهر الكذب، متنه: ` عليكم بالوجوه الملاح … ` فذكره.
قلت: ومن أحاديث هذا العدوي الكذاب الحديث الآتي.
১৩১। তোমরা সুন্দর (সুশ্রী) চেহারা এবং চোখে কালো মনি বিশিষ্ট রূপ ধারন কর। কারন আল্লাহ সুশ্রী চেহারার অধিকারীকে জাহান্নামের শাস্তি দিতে লজ্জা পান।
হাদীসটি জাল।
হাদীসটি খাতীব বাগদাদী “আত-তারীখ” গ্রন্থে (৭/২৮২-২৮৩) হাসান ইবনু আলী ইবনু জাকারিয়ার জীবনী বর্ণনা করতে গিয়ে উল্লেখ করেছেন। ইবনুল জাওযী হাদীসটি “আল-মাওযু'আত” গ্রন্থে উল্লেখ করে বলেছেনঃ এটির সমস্যা হচ্ছে হাসান ইবনু আলী ইবনু জাকারিয়া আল-আদাবী। কারণ তিনি হাদীস জালকারী। সুয়ূতী “আল-লাআলী” গ্রন্থে (১/১১৩) বলেনঃ তিনি প্রসিদ্ধ জালকারীদের একজন।
শাইখ আল-কারী (পৃঃ ১১০) বলেনঃفلعنة الله على واضعه الخبيث আল্লাহর অভিশাপ এ হাদীসের জালকারী খবীসের উপর।
হাদীসটি অন্য একটি সূত্রেও পেয়েছি, যাতে একাধিক সমস্যাধারী বর্ণনাকারী রয়েছেন। এ কারণে এ সনদটি পূর্বোল্লেখিত হাদীসের সনদের মতই অথবা তার চেয়েও নিকৃষ্ট। এতে রয়েছেনঃ
১। ইবরাহীম ইবনু সুলায়মান আয-যাইয়াত; তার সম্পর্কে ইবনু আদী বলেনঃ তিনি শক্তিশালী নন।
২। মুহাম্মাদ ইবনু তালহা আরুকী এবং তার থেকে বর্ণনাকারী মুহাম্মাদ ইবনু আবদিল্লাহ আল-কাযী; তাদের দু’জনকেই চিনি না।
৩। লাহেক ইবনু হুসাঈন; তিনি এ হাদীসের সমস্যা। কারণ তিনি একজন মিথ্যুক, জালকারী। হাফিয ইদরীসী বলেনঃ তিনি ছিলেন মিথ্যুক, নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে হাদীস জালকারী আমাদের যুগে তার মত মিথ্যুক দ্বিতীয় কাউকে চিনি না।
মিথ্যুক হাসান ইবনু আলী আল-আদাবীর হাদীসগুলোর একটি নিম্নের হাদীসটিও (দেখুন পরেরটি)
` النظر إلى الوجه الحسن يجلوالبصر، والنظر إلى الوجه القبيح يورث الكلح `.
موضوع.
أخرجه الخطيب (3 / 226) ومن طريقه ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (1 / 162 - 163) من طريق الحسن بن علي بن زكريا البصري حدثنا بشر بن معاذ حدثنا بشر بن الفضل عن أبيه عن أبي الجوزاء عن ابن عباس
مرفوعا.
ورواه محمد بن محمد بن أحمد بن عثمان الطرازي عن الحسن بن علي بن زكريا بإسناد آخر عن أنس مرفوعا، لكنها رواية أخطأ فيها الطرازي هذا وقد روى مناكير وأباطيل، والصواب عن الحسن بن زكريا الرواية الأولى كما قال الخطيب، والحسن هذا قال ابن عدي: عامة ما حدث به إلا القليل موضوعات وكنا نتهمه بل نتيقن أنه هو الذي وضعها، وقال ابن حبان: لعله حدث عن الثقات بالأشياء
الموضوعات ما يزيد على ألف حديث، وقال ابن الجوزى: لا نشك أن أبا سعيد هو الذي وضعه ومثله:
১৩২। সুন্দর চেহারার দিকে দৃষ্টিদান চোখকে উজ্জ্বল করে আর কুৎসিত চেহারার দিকে দৃষ্টিদান মুখমণ্ডলে ভীতির চিহ্নের উদ্ভব ঘটায়।
হাদীসটি জাল।
খাতীব বাগদাদী হাদীসটি (৩/২২৬) উল্লেখ করেছেন এবং তার সূত্রে ইবনুল জাওযী “আল-মাওযূ'আত” গ্রন্থে (১/১৬২-১৬৩) হাসান ইবনু আলী আল-আদাবীর মাধ্যমে উল্লেখ করেছেন। তার সম্পর্কে ১৩১ নং হাদীসে বিস্তারিত আলোচনা করা হয়েছে। এছাড়ও তার সম্পর্কে ইবনু হিব্বান বলেনঃ সম্ভবত তিনি নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে এক হাজারেরও বেশী জাল হাদীস বর্ণনা করেছেন। ইবনু আদী বলেনঃ তিনিই হাদীসটি জাল করেছেন। ইবনুল জাওযী বলেনঃ আবু সাঈদ'ই যে, হাদীসটি জাল করেছেন তাতে কোন সন্দেহ করছি না।
` النظر إلى وجه المرأة الحسناء والخضرة يزيدان في البصر `.
موضوع.
أخرجه أبو نعيم في ` الحلية ` (3 / 201 - 202) وعنه الديلمي (4 / 106) من طريق أحمد بن الحسين الأنصاري حدثنا إبراهيم بن حبيب بن سلام المكي حدثنا ابن أبي فديك حدثنا جعفر بن محمد عن أبيه عن جابر مرفوعا.
إبراهيم هذا لم أجد من ترجمه وكذا الراوي عنه أحمد بن الحسين، لكن تابعه محمد ابن يعقوب عن أبي الشيخ في ` التاريخ ` (236) إلا أنه قال: حدثنا إبراهيم بن سلام المكي وتابعه أيضا محمد بن أحمد القاضي البوراني قال: حدثنا إبراهيم بن
حبيب بن سلام به، رواه أبو نعيم أيضا كما ذكره السيوطي في ` اللآليء ` (1 /116) والبوراني هذا ترجمه الخطيب (1 / 295) وروي عن الدارقطني أنه قال فيه: لا بأس به، ولكنه يحدث عن شيوخ ضعفاء.
قلت: فالظاهر أن إبراهيم شيخ البوراني في هذا الحديث من أولئك الشيوخ الضعفاء فهو آفة هذا الحديث وقد ذكره الذهبي في ` الميزان ` في ترجمة محمد بن عبد الرحمن أبي الفضل بسنده عن ابن أبي فديك به، وقال: خبر باطل.
قلت: وأورده الصغاني في ` الأحاديث الموضوعة ` (ص 7) ، وقال ابن القيم:
هذا الحديث ونحوه من وضع الزنادقة.
قلت: وهو وما بعده مما سود به السيوطي ` الجامع الصغير ` وقد أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` ولكن بلفظ آخر وهو:
১৩৩। সুন্দর চেহারার অধিকারিণী নারী এবং সুন্দর ঘাসের দিকে দৃষ্টিদান দৃষ্টিশক্তিকে বৃদ্ধি করে।
হাদীসটি জাল।
হাদীসটি আবূ নু’য়াইম `হিলইয়াহ` গ্রন্থে (৩/২০১-২০২) উল্লেখ করেছেন এবং তার থেকে দাইলামী (৪/১০৬) বর্ণনা করেছেন।
এটির সনদে ইবরাহীম ইবনু হাবীব ইবনে সালাম আল-মাক্কী রয়েছেন। তার জীবনী পাচ্ছিনা। একই অবস্থা তার থেকে বর্ণনাকারী আহমাদ ইবনু হুসাইনের ক্ষেত্রেও। কিন্তু তার মুতাবায়াত পাওয়া গেছে। মুহাম্মাদ ইবনু ইয়াকূব এবং মুহাম্মাদ ইবনু আহমাদ কাযী বুরানী তার মুতাবায়াত করেছেন। তারা সকলেই ইবরাহীম হতে বর্ণনা করেছেন। হাদীসটি সুয়ূতী “আল-লাআলী” গ্রন্থে (১/১১৬) উল্লেখ করেছেন। এ বুরানীর জীবনী আল-খাতীব (১/২৯৫) উল্লেখ করে দারাকুতনীর উদ্ধৃতিতে বলেছেনঃ তার ব্যাপারে কোন সমস্যা নেই। কিন্তু তিনি দুর্বল শাইখদের থেকে হাদীস বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ হাদীসটির সমস্যা হচ্ছে ইবরাহীম। হাদীসটি যাহাবী `আল-মীযান` গ্রন্থে মুহাম্মাদ ইবনু আব্দির রহমান আবুল ফযলের জীবনি বর্ণনা করতে গিয়ে ইবরাহীমের সূত্রে উল্লেখ করে বলেছেনঃ خبر باطل হাদীসটি বাতিল।
সাগানী হাদীসটি “আহাদীসুল মাওযুআহ” গ্রন্থে (পৃঃ ৭) উল্লেখ করেছেন। ইবনুল কাইয়্যিম বলেনঃ এ হাদীসসহ অনুরূপ হাদীসগুলো যিন্দীকদের (নাস্তিকদের) জালকৃত।
আমি (আলবানী) বলছিঃ সুয়ূতী তার “জামেউস সাগীর” গ্রন্থে এটি এবং পরবতী হাদীসটি উল্লেখ করে গ্রন্থটিকে কালিমালিপ্ত করেছেন।
` ثلاثة يزدن في قوة البصر: النظر إلى الخضرة، وإلى الماء الجاري، وإلى الوجه الحسن `.
موضوع.
أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (1 / 163) من طريق وهب بن وهب القرشي عن جعفر بن محمد الصادق عن أبيه عن علي بن الحسين عن جده علي بن أبي طالب مرفوعا.
وقال ابن الجوزي: باطل، وهب كذاب.
وتعقبه السيوطي في ` اللآليء ` (1 / 115 - 117) بأن له طرقا أخرى يرقي الحديث بها عن درجة الوضع، ثم ساقها من حديث ابن عمرو وبريدة وعائشة وجابر
وقد تقدم قبل هذا وأبي سعيد الخدري وابن عباس موقوفا عليه.
قلت: وكل من هذه الطرق فيها ضعيف أو مجهول أو متهم، وبيان ذلك مما يطول به الكلام جدا فاكتفيت بالإشارة، والحكم على هذا الحديث وما في معناه بالوضع من قبل معناه أقوى من الحكم عليه به من جهة الإسناد، فقد قال ابن القيم رحمه الله في رسالته ` المنار `: فصل: ونحن ننبه على أمور كلية يعرف بها كون الحديث موضوعا، ثم ذكر في بيان ذلك فصولا قيمة جدا نقلها عنه الشيخ على القاري في ` خاتمة الموضوعات ` قال (ص 109) : فصل: ومنها أن يكون الحديث لا يشبه كلام الأنبياء بل لا يشبه كلام الصحابة كحديث: ` ثلاثة يزدن في البصر: النظر إلى الخضرة، والوجه الحسن `، وهذا الكلام مما يجل عنه أبوهريرة وابن عباس بل سعيد بن المسيب والحسن، بل أحمد ومالك.
وتعقبه الشيخ القاري بأنه ضعيف لا موضوع.
قلت: لا تعارض بين قوليهما فهو ضعيف سندا موضوع متنا، وقد سبق لهذا بعض الأمثلة.
১৩৪। তিনটি বস্তু দৃষ্টিশক্তি বৃদ্ধি করেঃ সবুজ বর্ণ, প্রবাহিত পানি ও সুন্দর চেহারার দিকে দৃষ্টি দান।
হাদীসটি জাল।
ইবনুল জাওযী এটিকে “মাওযূ’আত” গ্রন্থে (১/১৬৩) ওয়াহাব ইবনু ওয়াহাব সূত্রে ... উল্লেখ করে বলেছেনঃ باطل، وهب كذاب হাদীসটি বাতিল ওয়াহাব একজন মিথ্যুক।
সুয়ূতী “আল-লাআলী” গ্রন্থে (১/১১৫-১১৭) তার সমালোচনা করে বলেছেনঃ হাদীসটির একাধিক সূত্র রয়েছে। যা হাদীসটিকে জালের পর্যায় হতে বের করে নিয়ে আসে।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এটির সুত্রগুলোতে হয় দুর্বল, না হয় মাজহুল, না হয় মিথ্যার দোষে দোষী বর্ণনাকারী রয়েছেন। ইবনুল কাইয়্যিম তার “আল-মানার” গ্রন্থে জাল হাদীস চেনার উপায় বলতে গিয়ে বলেছেনঃ (যা শাইখ আল-কারী তার “মাওযুআত” গ্রন্থে (পৃ. ১০৯) উল্লেখ করেছেন) হাদীসটি নবীদের কথার সাথে পূর্ণ হবে না, এমনকি সাহাবীদের কথার সাথেও মিলবে না, যেমন বলে এ হাদিসটি উল্লেখ করেছেন। অতঃপর শাইখ আল-কারী তার সমালোচনা করে বলেছেনঃ এটি দুর্বল জাল নয়।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তাদের উভয়ের কথার মধ্যে কোন মতভেদ নেই। কারণ এটি সনদের দিক দিয়ে দুর্বল এবং মতনের (ভাষার) দিক দিয়ে জাল।
` إذا سمعتم بجبل زال عن مكانه فصدقوا، وإذا سمعتم برجل تغير عن خلقه فلا تصدقوا به، وإنه يصير إلى ما جبل عليه `.
ضعيف.
أخرجه أحمد (6 / 443) من طريق الزهري أن أبا الدرداء قال: بينما نحن عند رسول الله صلى الله عليه وسلم نتذاكر ما يكون إذ قال رسول الله صلى الله عليه وسلم، الحديث.
وهذا إسناد منقطع.
وبه أعله الهيثمي في ` مجمع الزوائد ` (7 / 696) وتبعه المناوي في ` شرح الجامع الصغير ` فقال: قال الهيثمي: رجاله رجال الصحيح إلا أن الزهري لم يدرك أبا الدرداء، وقال السخاوي: حديث منقطع، وبه يعرف ما في رمز المؤلف لصحته.
قلت: وكأن الشيخ العجلوني اغتر بالرمز المشار إليه فإنه قال في ` الكشف ` (1 / 87) ، رواه أحمد بسند صحيح `! ومن عجيب أمره أنه ذكره في موضع آخر (1 / 82) برواية أحمد وسكت عليه فلم يصححه، ثم أورده في مكان ثالث (1 /259) ونقل عن ` المقاصد ` أنه منقطع! ، وهذا من الأدلة الكثيرة على أن العجلوني مقلد ناقل، وهذا الحديث يستشم منه رائحة الجبر وأن المسلم لا يملك تحسين خلقه لأنه لا يملك تغييره! ، وحينئذ فما معنى الأحاديث الثابتة في الحض على تحسين الخلق كقوله صلى الله عليه وسلم: ` أنا زعيم ببيت في أعلى الجنة لمن حسن خلقه ` رواه أبو داود (2 / 288) وغيره في حديث.
وسنده صحيح، فهذا يدل على أن حديث الباب منكر، والله أعلم.
১৩৫। যখন তোমরা কোন পাহাড় সম্পর্কে শুনবে যে, পাহাড়টি স্থানচ্যুত হয়েছে, তখন তোমরা তা বিশ্বাস করবে, আর যখন শুনবে কোন ব্যাক্তির চরিত্র পরিবর্তন হয়ে গেছে, তখন তোমরা তা বিশ্বাস করবে না। কারন সে চলবে সেই ছাঁচে যার উপর তাকে তৈরি করা হয়েছে।
হাদীসটি দুর্বল।
হাদীসটি ইমাম আহমাদ (৬/৪৪৩) যুহরীর সূত্রে আবুদ-দারদা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন। এ সনদটি মুনকাতি (বিচ্ছিন্ন)।
হায়সামী “মাজমাউয যাওয়াইদ” গ্রন্থে (৭/৬৯৬) এ কারণই দর্শিয়েছেন। মানবী “শারহুল জামেইস সাগীর” গ্রন্থে তার অনুসরণ করে বলেনঃ হায়সামী বলেছেনঃ সনদের বর্ণনাকারীগণ সহীহার বর্ণনাকারী। কিন্তু যুহরী আবুদ-দারদা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে পায়নি। সাখাবীও বলেছেনঃ হাদীসটি মুনকাতি ।
আজলুনী “আল-কাশফ” গ্রন্থে (১/৮৭) বলেছেনঃ এটিকে সহীহ্ সনদে ইমাম আহমাদ উল্লেখ করেছেন। কিন্তু অদ্ভুত ব্যাপার এই যে, তিনি অন্যত্র (১/৮২) উল্লেখ করে কোন হুকুম লাগাননি। অতঃপর তৃতীয় স্থানে (১/২৫৯) উল্লেখ করে “আল মাকাসিদ” গ্রন্থ হতে নকল করে বলেছেনঃ এটি মুনকাতি’। এ ঘটনা প্রমাণ করছে যে, আজলুনী একজন মুকাল্লিদ, নকল করে বর্ণনাকারী।
এ হাদীসটির মধ্যে জাবরিয়াদের আকীদার গন্ধ পাওয়া যায়। কারণ তাদের নিকট মুসলিম ব্যক্তি তার চরিত্র ভাল করার অধিকারী নয়। কেননা সে তার পরিবর্তন করতে সক্ষম নয়। অথচ চরিত্র ভাল করার জন্য হাদীসে তাগাদা এসেছে। যেমন রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনঃ أنا زعيم ببيت في أعلى الجنة لمن حسن خلقه 'আমি সেই ব্যক্তির জন্য একটি ঘরের জিম্মাদার যে, তার চরিত্রকে সুন্দর করেছে।' আবু দাউদ (২/২৮৮) ও অন্যান্য মুহাদ্দিসগণ হাদীসটি বর্ণনা করেছেন। এটির সনদ সহীহ । এ হাদীসটি প্রমাণ করছে যে, আলোচ্য হাদীসটি মুনকার।
` من حدث حديثا فعطس عنده فهو حق `.
باطل.
أخرجه تمام في ` الفوائد ` (148 / 2) وكذا الترمذي الحكيم وأبو يعلى والطبراني في ` الأوسط ` وابن شاهين من طريق بقية عن معاوية بن يحيى عن أبي الزناد عن الأعرج عن أبي هريرة مرفوعا، وأورده ابن الجوزي في
` الموضوعات ` (3 / 77) من طريق ابن شاهين ثم قال:
باطل تفرد به معاوية وليس بشيء، وتابعه عبد الله بن جعفر المديني أبو علي عن أبي الزناد، وعبد الله متروك.
وتعقبه السيوطي في ` اللآليء ` (2 / 286) بأحاديث أوردها، بعضها مرفوعة وبعضها موقوفة، ثم إن بعضها في فضل العطاس مطلقا فلا يصلح شاهدا لوصح.
وأما قول النووي رحمه الله في فتاويه (ص 36 - 37) بعد أن عزاه لأبي يعلى:
إسناده جيد حسن، كل رجاله ثقات متقنون إلا بقية بن الوليد فمختلف فيه، وأكثر الحفاظ والأئمة يحتجون بروايته عن الشاميين، وهو يروي هذا الحديث عن معاوية ابن يحيى الشامي.
قلت: فهذا من أوهامه رحمه الله فإن بقية معروف بالتدليس وقد رواه عن معاوية معنعنا وقد قال النسائي وغيره: إذا قال:حدثنا وأخبرنا فهو ثقة، وقال غير واحد: كان مدلسا فإذا قال: عن فليس حجة، ولهذا قال أبو مسهر: أحاديث بقية ليست نقية فكن منها على تقية، ذكره الذهبي ثم قال: وبقية ذو غرائب ومناكير، أقول هذا لبيان حال بقية وإلا فالظاهر من كلام السيوطي في ` اللآليء ` أنه لم يتفرد به عن معاوية، فعلة الحديث هو معاوية هذا فإنه ضعيف جدا
قال ابن معين: هالك ليس بشيء، وقال أبو حاتم: ضعيف في حديثه إنكار، وقال النسائي: ليس بثقة، وقال الحاكم أبو أحمد: يروي عنه الهقل بن زياد عن الزهري أحاديث منكرة شبيهة بالموضوعة، وقال الساجي: ضعيف الحديث جدا، وهكذا باقي أقوال الأئمة كلها متفقة على تضعيفه ليس فيهم من وثقه، فانظر كيف انصرف النووي عن علة الحديث الحقيقية، وأخذ يدافع عن بقية مع أنه لم يحمل عليه في هذا الحديث أحد! فلولا أن النووي رحمه الله وهم لما جاز له أن يصف يحيى هذا بالثقة والإتقان، وقد علم أنه متفق على تضعيفه! والحديث رواه البيهقي أيضا وقال: إنه منكر، كما في ` شرح المناوي ` وقال الهيثمي في ` المجمع ` (8 / 59) : رواه الطبراني في ` الأوسط ` وقال: لا يروى عن النبي صلى الله عليه وسلم إلا بهذا الإسناد وأبو يعلى، وفيه معاوية بن يحيى الصدفي وهو ضعيف، وقد قال ابن أبي حاتم في ` العلل ` (2 / 342) : سألت أبي عن حديث رواه داود بن رشيد عن بقية عن معاوية بن يحيى عن أبي الزناد.. عن النبي صلى الله عليه وسلم: ` من حدث بحديث فعطس عنده فهو حق `؟ قال
أبي: هذا حديث كذب، فبعد شهادة مثل هذا الإمام النقاد أنه حديث كذب، فما يفيد المتساهلين محاولتهم إنقاذ إسناد هذا الحديث من الوضع إلى الضعف أو الحسن لأنها محاولات لا تتفق مع قواعد الحديث في شيء، وما أحسن ما قاله المحقق ابن القيم رحمه الله فيما نقله عنه الشيخ القاري في ` موضوعاته ` (ص 106 ـ 107) : وهذا الحديث وإن صحح بعض الناس سنده فالحس يشهد بوضعه، لأنا نشاهد العطاس والكذب يعمل عمله، ولوعطس مئة ألف رجل عند حديث يروي عن النبي صلى الله عليه وسلم لم يحكم بصحته بالعطاس، ولوعطسوا عنده بشهادة رجل لم يحكم بصدقه، وتعقبه هو والزركشي من قبل وغيرهما بقولهم:
إن إسناده إذا صح ولم يكن في العقل ما يأباه وجب تلقيه بالقبول.
قلت: أنى لإسناده الصحة وفيه من اتفقوا على ضعفه ويشهد الإمام أبو حاتم بأن حديثه هذا كذب؟ ! ثم العقل يأباه كما بينه ابن القيم فيما سبق ولو صح هذا الحديث لكان يمكن الحكم على كل حديث نبوي عطس عنده بأنه حق وصدق، ولو كان عند أئمة الحديث زورا وكذبا؟ وهذا ما لا يقوله فيما أظن أحد.
১৩৬। যে ব্যাক্তি কোন হাদীস বর্ণনা করবে। অতঃপর তার নিকট হাঁচি দেয়া হবে, সে ব্যাক্তি (তার কথাই) সত্য।
হাদীসটি বাতিল।
হাদীসটি তাম্মাম “আল-ফাওয়াইদ” গ্রন্থে (২/১৪৮) উল্লেখ করেছেন। অনুরূপভাবে তিরমিযী, হাকিম, আবূ ইয়ালা, তাবারানী “মুজামুল আওসাত” গ্রন্থে এবং ইবনু শাহীন বাকিয়া সূত্রে মুয়াবিয়া ইবনু ইয়াহইয়া হতে ... বর্ণনা করেছেন। ইবনুল জাওযী “মাওযু'আত” গ্রন্থে ইবনু শাহীন-এর সূত্রে উল্লেখ করে (৩/৭৭) বলেছেনঃ এটি বাতিল। মুয়াবিয়া এককভাবে এটি বর্ণনা করেছেন। তিনি কিছুই না। আব্দুল্লাহ ইবনু জাফার আল-মাদীনী আবু আলী তার মুতাবায়াত করেছেন, কিন্তু এ আব্দুল্লাহ মাতরূক।
সুয়ূতী “আল-লাআলী” গ্রন্থে (২/২৮৬) কতিপয় হাদীস উল্লেখ করে তার সমালোচনা করেছেন। যেগুলোর কোনটি মারফু’ আবার কোনটি মওকুফ, আবার কোনটি “আমভাবে হাঁচি প্রদানকারীর ফযীলত বর্ণনায় এসেছে। সেগুলো এটির শাহেদ হতে পারে না যদিও সহীহ হয়। এছাড়া ইমাম নাবাবী কর্তৃক তার “আল-ফাতাওয়া” গ্রন্থে (পৃঃ ৩৬-৩৭) ‘এটির সনদ ভাল ও হাসান বলা এবং একমাত্র বাকিয়া ব্যতীত সকলে নির্ভরশীল; এছাড়া তিনি যখন শামীদের থেকে হাদীস বর্ণনা করেছেন তখন তার হাদীসকে অধিকাংশ মুহাদ্দিসগণ দলীল হিসাবে গ্রহণ করেছেন এবং মুয়াবীয়া শামী এ বক্তব্যটি তার ধারণা মাত্র। কারণ বাকিয়া তাদলীসের ব্যাপারে প্রসিদ্ধ। মুয়াবিয়া হতে আন আন শব্দে বর্ণনা করেছেন। নাসাঈ সহ আরো অনেকে বলেছেনঃ তিনি যখন বলবেনঃ حدثنا وأخبرنا আমাকে হাদীস শুনিয়েছেন, আমাকে সংবাদ দিয়েছেন, তখন তিনি নির্ভরযোগ্য। একাধিক ব্যক্তি বলেছেনঃ তিনি যখন আন দিয়ে হাদীস বর্ণনা করবেন তখন তিনি গ্রহণযোগ্য নন। এ জন্য আবু মুসহের বলেছেনঃ বাকিয়ার হাদীসগুলো পরিচ্ছন্ন নয়, তার হাদীসগুলো হতে বেঁচে থাকুন।
যাহাবী বলেনঃ বাকিয়া দুর্বল এবং মুনকারের অধিকারী। মুয়াবীয়া নিতান্তই দুর্বল বর্ণনাকারী।
ইবনু মাঈন বলেনঃ তিনি হালেক, কিছুই না।
আবু হাতিম বলেনঃ তিনি দুর্বল, তার হাদীসে ইনকার রয়েছে।
নাসাঈ বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্য নন।
হাকিম আবু আহমাদ বলেনঃ তার হাদীসগুলো মুনকার, জালের সাথে সাদৃশ্যপূর্ণ।
সাজী বলেনঃ হাদীসের ক্ষেত্রে তিনি নিতান্তই দুর্বল। সকলেই তার দুর্বল হওয়ার ব্যাপারে একমত।
ইবনু আবী হাতিম “আল-ইলাল” গ্রন্থে (২/৩৪২) বলেনঃ আমি আমার পিতাকে মুয়াবিয়া হতে বাকিয়ার এ হাদীস সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করেছিলাম। তিনি বলেনঃ এ হাদীসটি মিথ্যা।
ইবনুল কাইয়্যিমও হাদীসটিকে জাল হিসাবেই উল্লেখ করেছেন। এছাড়া অর্থের দিক দিয়েও হাদীসটি সহীহ্ নয়। কারণ যদি একশত ব্যক্তি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর হাদীসের নিকটে হাঁচি দেয়, তবুও তাকে সহীহ বলে হুকুম লাগানো যাবে না। অনুরূপভাবে কোন ব্যক্তির সাক্ষীর সাথে যদি তারা হাচি দেয় তাহলেও তাকে সত্যবাদী হিসাবে হুকুম দেয়া যাবে না। মিথ্যা তার কর্ম চালিয়েই যাবে। অতএব কোন লোক যদি বলে যে, সনদটি সহীহ তবুও হাদিসটি বানোয়াট অনুভূতি এমনই সাক্ষ্য দিচ্ছে।
` أصدق الحديث ما عطس عنده `.
باطل.
أخرجه الطبراني في ` الأوسط ` (1 / 191 / 2 / 3502 ـ بترقيمي) من طريق عمارة ابن زاذان عن ثابت عن أنس مرفوعا، وقال: لم يروه عن ثابت إلا عمارة.
قلت: وعمارة هذا، قال أحمد: يروي عن ثابت عن أنس أحاديث مناكير.
قلت: وهذا الحديث من روايته عن ثابت عن أنس، فهو علة الحديث، وإلى ذلك أشار الهيثمي بقوله في ` المجمع ` (8 / 59) : رواه الطبراني في ` الأوسط ` عن شيخه جعفر بن محمد بن ماجد ولم أعرفه، وعمارة بن زاذان وثقه أبو زرعة وجماعة وفيه ضعف، وبقية رجاله ثقات.
وابن ماجد وثقه الخطيب في ` التاريخ ` (7 / 196) فلا يعل به الحديث، والله أعلم.
وقد تقدم الكلام على بطلان الحديث من حيث معناه في الحديث الذي قبله فأغنى عن الإعادة.
১৩৭। যে কথার নিকট হাঁচি দেয়া হয় সেটিই হচ্ছে সর্বাপেক্ষা সত্য কথা।
হাদীসটি বাতিল।
এটিকে তাবারানী “মুজামুল আওসাত” গ্রন্থে (১/১৯১/২/৩৫০২) আম্মারা ইবনু যাযান সূত্রে সাবেত হতে, তিনি আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু হিসাবে বর্ণনা করে বলেছেনঃ সাবেত হতে একমাত্র আম্মারাই হাদীসটি বর্ণনা করেছেন।
এ আম্মারা সম্পর্কে ইমাম আহমাদ বলেনঃ তিনি সাবেতের সূত্রে আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বহু মুনকার হাদীস বর্ণনা করেছেন। এটিই হচ্ছে এ হাদীসের সমস্যা। হায়সামী “আল-মাজমা` গ্রন্থে (৮/৫৯) এদিকেই ইঙ্গিত করেছেন। অর্থের দিক দিয়েও যে হাদীসটি বাতিল তা পূর্বের হাদীসেই আলোচনা করা হয়েছে।
` ثلاث يفرح بهن البدن ويربوعليها: الطيب، والثوب اللين، وشرب العسل `.
موضوع.
رواه ابن حبان في ` الضعفاء والمتروكين ` (3 / 141) وأبو نعيم (6 / 340) من طريق الطبراني عن محمد بن روح القتيري حدثنا يونس بن هارون الأزدي عن مالك ابن أنس عن أبيه عن جده عن عمر بن الخطاب مرفوعا، وقال أبو نعيم:
غريب من حديث مالك عن أبيه تفرد به القتيري في الأصل القشيري في الموضعين وهو تصحيف.
قلت: والقتيرى هذا بفتح القاف وبعدها مثناة ضبطه ابن ماكولا وغيره، وتصحف على ابن السمعاني فذكره في القنبري، وقال: نسبة إلى قنبر مولى علي رضي الله عنه، منكر الحديث.
قلت: قال فيه ابن يونس أيضا:
منكر الحديث، وقال الدارقطني فيه وفي شيخه يونس بن هارون ضعيفان، وقال في ` غرائب مالك `: لا يصح هذا الحديث عن مالك وقال ابن حبان في ترجمة يونس بن هارون: روى عجائب لا تحل الرواية عنه، ما روى مالك عن أبيه ولا جده شيئا.
১৩৮। তিনটি বস্তু দ্বারা শরীর আনন্দিত (পরিতৃপ্ত) হয় এবং তার উপর ভর করেই বৃদ্ধি লাভ করে; সুগন্ধি, মোলায়েম কাপড় এবং মধু পান করা।
হাদীসটি জাল।
এটিকে ইবনু হিব্বান “আয-যুয়াফা ওয়াল মাতরূকীন` গ্রন্থে (৩/১৪১) এবং আবু নু’য়াইম (৬/৩৪০) তাবারানী সূত্রে মুহাম্মাদ ইবনু রাওহ আল-কাতাইরী হতে, তিনি ইউনুস ইবনু হারূণ আল-আযদী হতে ... বর্ণনা করেছেন। আবূ নু’য়াইম বলেনঃ মালেক হতে তার পিতার উদ্ধৃতিতে হাদীসটি গরীব। মুহাম্মাদ ইবনু রাওহ এককভাবে এটি বর্ণনা করেছেন। ইবনুস সামায়ানী মুহাম্মাদ ইবনু রাওহ সম্পর্কে বলেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীস।
আমি (আলবানী) বলছিঃ ইবনু ইউনুসও বলেছেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীস।
দারাকুতনী তার এবং তার শাইখ ইউনুস ইবনু হারূণ সম্পর্কে বলেনঃ তারা দু’জনই দুর্বল। তিনি “গারায়েবে মালেক” গ্রন্থে বলেনঃ মালেক হতে হাদীসটি সহীহ নয়।
ইবনু হিব্বান বলেনঃ ইউনুস আশ্চর্যজনক কিছু বর্ণনা করেছেন। তার থেকে বর্ণনা করাই হালাল নয়। মালেক তার পিতা ও তার দাদা হতে কিছুই বর্ণনা করেননি।
` أشقى الأشقياء من اجتمع عليه فقر الدنيا والآخرة `.
موضوع.
أخرجه الحاكم (4 / 322) والبيهقي في ` السنن ` (7 / 13) والطبراني في ` الأوسط ` (2 / 294 / 1 9423) من طريق خالد بن يزيد بن عبد الرحمن بن أبي مالك الدمشقي عن أبيه عن عطاء بن أبي رباح عن أبي سعيد الخدري مرفوعا.
وقال الطبراني: لا يروى عن أبي سعيد إلا بهذا الإسناد تفرد به خالد.
قلت: وهو ضعيف متهم ولكنه لم يتفرد به كما يأتي قريبا.
وقال الحاكم: صحيح الإسناد، ووافقه الذهبي.
قلت: وهذا من أوهامهما الفاحشة، فإن خالدا هذا قال أحمد: ليس بشيء، وقال ابن أبي الحواري: سمعت ابن معين يقول: بالشام كتاب ينبغي أن يدفن كتاب الديات لخالد بن يزيد بن أبي مالك، لم يرض أن يكذب على أبيه حتى كذب على الصحابة قال أحمد بن أبي الحواري: سمعت هذا الكتاب عن خالد ثم أعطيته للعطار، فأعطى للناس
فيه
حوائج! ذكره الذهبي في ` الميزان `، وقال ابن أبي حاتم في ` الجرح والتعديل ` (1 / 2 / 359) : سئل أبي عن خالد هذا؟ فقال: يروي أحاديث مناكير.
وللحديث طريق ثان، فقال ابن أبي حاتم في ` العلل ` (2 / 278) : وسمعت أبي وحدثنا عن حرملة عن ابن وهب عن الماضي بن محمد الغافقي أبي مسعود عن هشام عن الحسن عن أبي سعيد الخدري مرفوعا به، قال أبي: هذا حديث باطل، وماضى لا أعرفه، وذكر نحوه في ` الجرح والتعديل ` (4 / 1 / 242) وأقره الذهبي في ` الميزان ` وقال: لم يروعنه غير ابن وهب، قال ابن عدي: منكر الحديث، ورواه أبو سعيد بن الأعرابي في ` المعجم ` (99 / 1 / 2) والطبراني في ` الأوسط ` (1 / 102 / 2 / 2085) من طريقين آخرين عن ابن وهب قال: أخبرني الماضي بن محمد عن هشام بن حسام عن الحسن عن أبي سلمة عن أبي سعيد به.
وأعله الهيثمي (10 / 267) بشيخ الطبراني أحمد بن طاهر، وهو كذاب وقلده المعلق على ` الأوسط ` (2 / 528) وهو متابع كما ترى وإنما علته الماضي كما عرفت، وقد أخرجه ابن عدي أيضا عنه (6 / 432) وأعله به.وله طريق ثالث سوف يأتي بلفظ: ` اللهم توفني إليك فقيرا … `، ورابع أخرجه القضاعي (94 / 1) عن محمد بن يزيد بن سنان عن أبيه عن عطاء به.
وهذا سند واه من أجل يزيد بن سنان، وابنه محمد، وهو أشد ضعفا من أبيه.
ثم وجدت له شاهدا لكنه مما لا يفرح به، يرويه أحمد بن إبراهيم المزني: حدثنا محمد بن كثير حدثنا الأوزاعي عن الزهري عن أنس بن مالك مرفوعا بلفظ: ` ألا أخبركم بأشقى الأشقياء.... ` الحديث، وهو لفظ ابن عدي عن الماضي.
أخرجه ابن حبان في ` الضعفاء ` (1 / 144) ومن طريقه ابن الجوزي في ` العلل ` (2 / 325) وقال: لا يصح، قال ابن حبان: كان المزني يضع الحديث على الثقات وضعا.
قلت: فهو بكتاب ابن الجوزي الآخر ` الموضوعات ` أولى، وله من مثله الشيء الكثير، كما أنه يورد في هذا ما هو بـ ` العلل ` أولى، كما هو معروف عند العلماء.
والحديث أورده السيوطي في ` الجامع ` من رواية الطبراني، ثم تكلم عليه المناوي بما نقله عن الهيثمي، وذكرت بعض كلامه آنفا، ثم قال المناوي:
ومن العجب العجاب أنه رمز لصحته لكن الحديث كله مضروب عليه في مسودة المصنف، وأما قوله في ` التيسير ` وهو حسن لا صحيح خلافا للمؤلف ولا ضعيف خلافا لبعضهم فهو مما لا يساعد عليه شدة ضعف طرقه مع إبطال أبي حاتم إياه، ومن أحاديث هذا الماضي:
১৩৯। হতভাগ্যদের মধ্যে সর্বাপেক্ষা দুঃখী সেই ব্যাক্তি যার মাঝে দুনিয়া ও আখেরাতের দারিদ্রতা একত্রিত হয়েছে।
হাদীসটি জাল।
এটিকে হাকিম (৪/৩২২), বাইহাকী “সুনান” গ্রন্থে (৭/১৩) ও তাবারানী “মুজামুল আওসাত” গ্রন্থে (২/২৯৪/১/৯৪২৩) খালেদ ইবনু ইয়াযীদ ইবনে আব্দির রহমান সূত্রে ... উল্লেখ করেছেন। তাবারানী বলেনঃ তিনি এককভাবে এটি বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তিনি দুর্বল, মিথ্যার দোষে দোষী। তবে তিনি এককভাবে বর্ণনা করেননি। এ আলোচনা একটু পরেই আসবে। হাকিম বলেনঃ এটির সনদ সহীহ। যাহাবী তার সাথে ঐকমত্য পোষণ করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এটি তাদের দু'জনের অশোভনীয় ধারণা মাত্র। কারণ এ খালেদ সম্পর্কে ইমাম আহমাদ বলেনঃ ليس بشيء 'তিনি কিছুই নন'।
ইবনু আবিল হাওয়ারী বলেনঃ আমি ইবনু মা'ঈনকে বলতে শুনেছি যে, শাম দেশে একটি কিতাব আছে সেটি গেড়ে দেয়া উচিত। সেটি হচ্ছে খালেদ ইবনু ইয়াযীদ ইবনে আবী মালেক-এর কিতাবুদ দিয়াত’। তিনি তার পিতার উপর মিথ্যারোপ করে সম্ভষ্ট হতে পারেননি। এমনকি সাহাবীগণের উপরেও মিথ্যারোপ করেছেন।
ইবনু আবী হাতিম “আল-জারহ ওয়াত তা'দীল” গ্রন্থে (১/২/৩৫৯) বলেনঃ আমার পিতাকে এ খালেদ সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করা হয়েছিল। তিনি বলেনঃ তিনি মুনকার হাদীস বর্ণনাকারী। এ হাদীসটি দ্বিতীয়, তৃতীয় এবং চতুর্থ সূত্রেও বর্ণিত হয়েছে, কিন্তু কোনটিই জাল বর্ণনাকারী হতে মুক্ত নয়।
` الزنا يورث الفقر `.
باطل.
رواه القضاعي في ` مسند الشهاب ` (7 / 2) عن أحمد بن عبد الرحمن بن أخي وهب قال أخبرنا عمي قال أنبأنا الماضي بن محمد عن ليث بن أبي سليم عن مجاهد عن عبد الله بن عمر مرفوعا.
قلت: وهذا سند واه، وله علتان: الأولى ضعف ليث بن أبي سليم.
والأخرى الماضي بن محمد وهو مجهول، منكر الحديث كما تقدم، وعزاه السيوطي في ` الجامع ` لرواية القضاعي والبيهقي عن ابن عمر، وقال المنذري في ` الترغيب ` (3 / 190) : رواه البيهقي، وفي إسناده الماضي بن محمد.
قلت: هو عنده في ` الشعب ` (4 / 363) من طريق ابن عدي وهذا في ` الكامل ` (6 / 432) وقال الذهبي: له أحاديث منكرة منها هذا الحديث.
قلت: والحديث رواه ابن أبي حاتم في ` العلل ` (1 / 410 - 411) : سمعت أبي وحدثنا عن حرملة عن ابن وهب عن الماضي بن محمد عن هشام عن ليث بن أبي سليم عن مجاهد عن ابن عمر أن النبي صلى الله عليه وسلم قال: فذكره، قال أبي: هذا حديث باطل، وماضي لا أعرفه.
قلت: ثم وجدت له متابعا، فقال أبو بكر الكلاباذي في ` مفتاح المعاني ` (359 / 2) : حدثنا عبد الله بن محمد حدثنا القاسم بن عباد حدثنا عباد حدثنا أحمد بن حرب عن حسان عن إسماعيل عن ليث به.
قلت: فانحصرت علة الحديث في الليث ولعل أصله موقوف وهم فيه الليث فرفعه، فقد رواه ابن حبان في ` الثقات، (2 / 295) من طريق مكحول الشامي قال لي ابن عمر يا مكحول إياك والزنا فإنه يورث الفقر.
ثم وجدت له طريقا آخر أخرجه البيهقي في ` الشعب ` والديلمي في ` مسند الفردوس ` (2 / 99 / 2 - الغرائب) كلاهما من طريق الحاكم عن شيخه محمد ابن صالح بن هانيء وهو ثقة قال حدثنا أحمد بن سهل بن مالك حدثني محمد بن إسماعيل البخاري حدثنا الحسن بن علي الصفار حدثنا أبو خالد الأحمر حدثنا محمد ابن عجلان عن نافع عن ابن عمر به.
قلت: وهذا إسناد حسن لولا أنني لم أعرف الحسن بن علي بن صفار وأحمد بن سهل ابن مالك، فمن كان عنده علم عنهما فليتفضل بإعلامي مشكورا وجزاه الله خيرا.
وللحديث شاهد ولكنه واه وهو:
১৪০। ব্যভিচার (যিনা) দারিদ্রতার অধিকারী করে।
হাদীসটি বাতিল।
এটিকে কাযাঈ “মুসনাদুশ শিহাব” গ্রন্থে (৭/২) উল্লেখ করেছেন। দু'টি কারণে এটির সনদ নিতান্তই দুর্বলঃ
১। বর্ণনাকারী লাইস ইবনু আবী সুলাইম দুর্বল।
২। অপর বর্ণনাকারী আল-মাযী ইবনু মুহাম্মাদ মাজহুল, মুনকারুল হাদীস। যাহাবী বলেছেনঃ তার বহু মুনকার হাদীস রয়েছে এটি সেগুলোর একটি।
ইবনু আবী হাতিম “আল-ইলাল” গ্রন্থে (১/৪১০-৪১১) বলেছেনঃ আমার পিতা এ হাদীসটি সম্পর্কে বলেনঃ এটি বাতিল হাদীস, মাযীকে আমি চিনি না। এছাড়াও অন্য এক সূত্রে হাদীসটি বাইহাকীর “আশ-শু'য়াব” গ্রন্থে (৬/৪৩২) এবং দাইলামীর “মুসনাদুল ফিরদাউস” গ্রন্থে (২/৯৯/২) বর্ণিত হয়েছে। সেটিতে একাধিক মাজহুল বর্ণনাকারী রয়েছেন।