হাদীস বিএন


সুনান আবী দাউদ





সুনান আবী দাউদ (2421)


حَدَّثَنَا حُمَيْدُ بْنُ مَسْعَدَةَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ حَبِيبٍ، ح وَحَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ قُبَيْسٍ، - مِنْ أَهْلِ جَبَلَةَ - حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ، جَمِيعًا عَنْ ثَوْرِ بْنِ يَزِيدَ، عَنْ خَالِدِ بْنِ مَعْدَانَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُسْرٍ السُّلَمِيِّ، عَنْ أُخْتِهِ، - وَقَالَ يَزِيدُ الصَّمَّاءِ - أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ تَصُومُوا يَوْمَ السَّبْتِ إِلاَّ فِيمَا افْتُرِضَ عَلَيْكُمْ وَإِنْ لَمْ يَجِدْ أَحَدُكُمْ إِلاَّ لِحَاءَ عِنَبَةٍ أَوْ عُودَ شَجَرَةٍ فَلْيَمْضُغْهُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ وَهَذَا حَدِيثٌ مَنْسُوخٌ ‏.‏




‘আবদুল্লাহ ইবনু বুসর আস-সুলামী (রাহিমাহুল্লাহ) হতে তার বোন আস-সাম্মা’’ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ তোমরা শুধু শনিবারে সওম রেখো না। তবে ঐ দিন তোমাদের উপর ফারয কৃত সওম রাখতে পারো। তোমাদের কেউ যদি সওম ভঙ্গের জন্য আঙ্গুর গাছের ছাল বা অন্য গাছের ডালা ছাড়া কিছু না পায়, তাহলে তা চিবিয়ে সওম ভঙ্গ করবে। ইমাম আবু দাঊদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, এ হাদীসটি মানসূখ।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن ، مشکوۃ المصابیح (2063) ، أخرجہ الترمذي (744 وسندہ صحیح) وابن ماجہ (1726 وسندہ حسن)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: رجاله ثقات إلا أن غيرَ واحد من الأئمة الذين يُرجَعُ إليهم في النقد أعلُّوه بالاضطراب والمعارضة، وانظر كلامنا عليه في "المسند" (١٧٦٨٦). الوليد: هو ابن مسلم. وأخرجه ابن ماجه (١٧٢٦ م)، والترمذي (٧٥٤)، والنسائي في "الكبرى" (٢٧٧٦) من طريق حميد بن مسعدة، بهذا الإسناد. وقال الترمذي: حديث حسن. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٢٧٧٥) و (٢٧٧٧) من طريق ثور بن يزيد، به. وهو في "مسند أحمد" (٢٧٠٧٥). قال ابن مفلح في "الفروع " ٣/ ١٢٣ - ١٢٤: قال الأثرم: قال أبو عبد الله: قد جاء في حديث الصماء وكان يحيي بن سعيد يتقيه، وأبى أن يحدثني به، قال الأثرم: وحجة أبي عبد الله في الرخصة في صوم يوم السبت أن الأحاديث كلها مخالفة لحديث عبد الله بن بسر منها حديث أم سلمة: كان رسول الله ﷺ يصوم يوم السبت ويوم الأحد أكثر مما يصوم من الأيام ويقول: "إنهما يوما عيد المشركين، فأنا أحب أن أخالفهم" أخرجه أحمد (٢٦٧٥٠)، وصححه ابن خزيمة (٢١٦٧) وابن حبان (٣٦١٦). قال ابن مفلح: واختار شيخنا (يعني ابن تيمية) أنه لا يكره، وأنه قول أكثر العلماء، وأنه الذي فهمه الأثرم من روايتهم، وأنه لو أريد إفراده لما دخل الصوم المفروض ليسثنى، فالحديث شاذ أو منسوخ. وجَبَلة: بالتحريك، بلدة مشهورة بساحِل الشام من أعمال حلب، قرب اللاذقية.









সুনান আবী দাউদ (2422)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ، حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، عَنْ قَتَادَةَ، ح وَحَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ، حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، حَدَّثَنَا قَتَادَةُ، عَنْ أَبِي أَيُّوبَ، - قَالَ حَفْصٌ الْعَتَكِيُّ - عَنْ جُوَيْرِيَةَ بِنْتِ الْحَارِثِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم دَخَلَ عَلَيْهَا يَوْمَ الْجُمُعَةِ وَهِيَ صَائِمَةٌ فَقَالَ ‏"‏ أَصُمْتِ أَمْسِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَتْ لاَ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ تُرِيدِينَ أَنْ تَصُومِي غَدًا ‏"‏ ‏.‏ قَالَتْ لاَ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ فَأَفْطِرِي ‏"‏ ‏.‏




জুয়াইরিয়াহ বিনতুল হারিস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) জুমু’‘আহর দিন তাঁর কাছে আসলেন তখন তিনি সওম পালন অবস্তায় ছিলেন। তিনি জিজ্ঞেস করলেনঃ তুমি কি গতকাল সওম রেখেছিলে? তিনি বললেন, না। তিনি পুনরায় জিজ্ঞেস করলেনঃ তোমার কি আগামীকাল সওম পালনের ইচ্ছা আছে? তিনি বললেন, না। তিনি বললেনঃ তাহলে সওম ভঙ্গ করো।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (1986)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. همام: هو ابن يحيى العَوذِي، وقتادة: هو ابن دِعامة السَّدُوسي، وأبو أيوب: هو يحيى -ويقال: حبيب- بن مالك المَراغي العتكي. وأخرجه البخاري (١٩٨٦)، والنسائي في "الكبرى" (٢٧٦٧) من طريق شعبة، عن قتادة، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٦٧٥٦). وفي هذا الحديث دليل على أن صوم يوم السبت جائز صومه إذا ضم إليه صيام يوم قبله أو بعده، وإنما المكروه إفرادُه.









সুনান আবী দাউদ (2423)


حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ شُعَيْبٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، قَالَ سَمِعْتُ اللَّيْثَ، يُحَدِّثُ عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَنَّهُ كَانَ إِذَا ذُكِرَ لَهُ أَنَّهُ نُهِيَ عَنْ صِيَامِ يَوْمِ السَّبْتِ يَقُولُ ابْنُ شِهَابٍ هَذَا حَدِيثٌ حِمْصِيٌّ ‏.‏




ইবনু শিহাব (রাহিমাহুল্লাহ) সূত্র হতে বর্ণিত, তার নিকট শুধু শনিবার সওম রাখা নিষেধ সম্পর্কিত হাদীস আলোচনা করা হলে তিনি বলেন, এটাতো হিমসী বর্ণিত হাদীস। [২৪২৩]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: مقطوع مرفوض




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: أخرج قول ابن شهاب هذا البيهقي في "الكبرى" ٤/ ٣٠٢ من طريق عبد الملك ابن شعيب، به. وقال الطحاوي في "شرح معاني الآثار" ٢/ ٨١: ولقد أنكر الزهري حديث الصماء في كراهة صوم يوم السبت، ولم يعدّه من حديث أهل العلم بعد معرفته به، حدَّثنا محمد بن حميد بن هشام الرعيني، حدَّثنا عبد الله بن صالح، حدثني الليث، قال: سُئل الزهري عن صوم يوم السبت، فقال: لا بأس به، فقيل له: فقد رُوي عن النبي ﷺ في كراهته، فقال: ذاك حديث حمصي، فلم يَعُدَّه الزهري حديثاً يقال به وضعَّفه.









সুনান আবী দাউদ (2424)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ بْنِ سُفْيَانَ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ، قَالَ مَا زِلْتُ لَهُ كَاتِمًا حَتَّى رَأَيْتُهُ انْتَشَرَ ‏.‏ يَعْنِي حَدِيثَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُسْرٍ هَذَا فِي صَوْمِ يَوْمِ السَّبْتِ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ قَالَ مَالِكٌ هَذَا كَذِبٌ ‏.‏




আল-আওযাঈ (রাহিমাহুল্লাহ) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, শনিবারের সওম সম্পর্কিত ইবনু বূসর বর্ণিত হাদীসটি আমি গোপন রেখেছিলাম। কিন্ত আমি দেখলাম যে, তা ব্যপকভাবে প্রসার পেয়েছে। ইমাম আবূ দাঊদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, ইমাম মালিক (রাহিমাহুল্লাহ) বলেছেন, এ হাদীসটি মিথ্যা।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح مقطوع




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، الولید بن مسلم عنعن ، و قول أبي داود عن مالک،ضعیف لإنقطاعہ ، (انوار الصحیفہ ص 90)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: أخرجه البيهقي في "الكبرى" ٤/ ٣٠٢ - ٣٠٣ من طريق المصنف، بهذا الإسناد.









সুনান আবী দাউদ (2425)


حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ، وَمُسَدَّدٌ، قَالاَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ غَيْلاَنَ بْنِ جَرِيرٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَعْبَدٍ الزِّمَّانِيِّ، عَنْ أَبِي قَتَادَةَ، أَنَّ رَجُلاً، أَتَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ كَيْفَ تَصُومُ فَغَضِبَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مِنْ قَوْلِهِ فَلَمَّا رَأَى ذَلِكَ عُمَرُ قَالَ رَضِينَا بِاللَّهِ رَبًّا وَبِالإِسْلاَمِ دِينًا وَبِمُحَمَّدٍ نَبِيًّا نَعُوذُ بِاللَّهِ مِنْ غَضَبِ اللَّهِ وَمِنْ غَضَبِ رَسُولِهِ ‏.‏ فَلَمْ يَزَلْ عُمَرُ يُرَدِّدُهَا حَتَّى سَكَنَ غَضَبُ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ كَيْفَ بِمَنْ يَصُومُ الدَّهْرَ كُلَّهُ قَالَ ‏"‏ لاَ صَامَ وَلاَ أَفْطَرَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ مُسَدَّدٌ ‏"‏ لَمْ يَصُمْ وَلَمْ يُفْطِرْ أَوْ مَا صَامَ وَلاَ أَفْطَرَ ‏"‏ ‏.‏ شَكَّ غَيْلاَنُ ‏.‏ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ كَيْفَ بِمَنْ يَصُومُ يَوْمَيْنِ وَيُفْطِرُ يَوْمًا قَالَ ‏"‏ أَوَيُطِيقُ ذَلِكَ أَحَدٌ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَكَيْفَ بِمَنْ يَصُومُ يَوْمًا وَيُفْطِرُ يَوْمًا قَالَ ‏"‏ ذَلِكَ صَوْمُ دَاوُدَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَكَيْفَ بِمَنْ يَصُومُ يَوْمًا وَيُفْطِرُ يَوْمَيْنِ قَالَ ‏"‏ وَدِدْتُ أَنِّي طُوِّقْتُ ذَلِكَ ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ ثَلاَثٌ مِنْ كُلِّ شَهْرٍ وَرَمَضَانُ إِلَى رَمَضَانَ فَهَذَا صِيَامُ الدَّهْرِ كُلِّهِ وَصِيَامُ عَرَفَةَ إِنِّي أَحْتَسِبُ عَلَى اللَّهِ أَنْ يُكَفِّرَ السَّنَةَ الَّتِي قَبْلَهُ وَالسَّنَةَ الَّتِي بَعْدَهُ وَصَوْمُ يَوْمِ عَاشُورَاءَ إِنِّي أَحْتَسِبُ عَلَى اللَّهِ أَنْ يُكَفِّرَ السَّنَةَ الَّتِي قَبْلَهُ ‏"‏ ‏.‏




আবূ ক্বাতাদাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, একদা নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট এক ব্যক্তি এসে বললো, হে আল্লাহর রাসূল! আপনি কিভাবে সওম রাখেন? এতে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) অসন্তুষ্ট হলেন। ‘উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তা দেখেতে পেয়ে বললেন, আমরা আল্লাহকে আমাদের রব, ইসলামকে আমাদের দ্বীন এবং মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে আমাদের নবী হিসাবে পেয়ে সন্তুষ্ট। আমরা আল্লাহর কাছে তাঁর রাসূলের অসন্তুষ্টি থেকে আশ্রয় চাই। ‘উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) উক্ত বাক্যটি বারবার বলতে লাগলেন, এক পর্যায়ে নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর অসন্তুষ্টির ভাব দূরীভূত হল। এরপর ‘উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) জিজ্ঞেস করলেন, হে আল্লাহর রাসূল! ঐ বাক্তি কেমন যে সারা বছর সওম রাখে? তিনি বললেনঃ এমনও কি কেউ সামর্থ্য রাখে? তিনি জিজ্ঞেস করলেন, হে আল্লাহর রাসূল! ঐ বাক্তি কেমন যে দুই দিন সওম পালন করে এবং একদিন রোযাহীন থাকে? তিনি বললেন, কেউ কি এরূপ করতে সহ্মম? তিনি জিজ্ঞেস করলেন, এ ব্যক্তি কেমন যে একদিন সওম পালন করে এবং একদিন রযাহীন থাকে? তিনি বললেন, তা দাঊদ (আঃ) এর সাওমের মতই। তিনি জিজ্ঞেস করলেন, হে আল্লাহর রাসূল! ঐ ব্যক্তির সওম কেমন যে একদিন সওম রেখে দু’দিন রোযাহীন থাকে? তিনি বললেনঃ আমি এটাই কামনা করি, যেন আমাকে এরূপ শক্তি দেয়া হয়। অতঃপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ প্রতি মাসে তিনটি সওম এবং এক রমাযান থেকে পরবর্তী রমাযান পর্যন্ত প্রতি বছরের রমাযানের সওম, এটাই হচ্ছে সর্বদা সওম পালনের সমতুল্য। আরাফাহ্ দিনের সওম আমি আল্লাহর কাছে আশা করি, এর দ্বারা তিনি পূর্বের বছর এবং পরের বছরের গুনাহ ক্ষমা করবেন। আর আশূরার সওম, আমি আল্লাহর কাছে আশা করি তিনি (এর বিনিময়ে) আগামী এক বছরের গুনাহ ক্ষমা করবেন।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (1162)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. مسدَّدٌ: هو ابن مسرهد الأسَدي. وأخرجه مطولاً ومختصراً مسلم (١١٦٢)، وابن ماجه (١٧١٣) و (١٧٣٠) و (١٧٣٨)، والترمذي (٧٥٩) و (٧٦٢) و (٧٧٧)، والنسائي في "الكبرى" (٢٧٠٨) من طرق عن حماد بن زيد، بهذا الإسناد. وأخرجه النسائي (٢٦٩٨) و (٢٨٢٦) من طريق شعبة، عن غيلان، به. مختصراً. وهو في "مسند أحمد" (٢٢٥١٧) و (٢٢٥٣٧)، و"صحيح ابن حبان" (٣٦٣٩). وانظر ما بعده.









সুনান আবী দাউদ (2426)


حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا مَهْدِيُّ، حَدَّثَنَا غَيْلاَنُ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَعْبَدٍ الزِّمَّانِيِّ، عَنْ أَبِي قَتَادَةَ، بِهَذَا الْحَدِيثِ زَادَ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَرَأَيْتَ صَوْمَ يَوْمِ الاِثْنَيْنِ وَيَوْمِ الْخَمِيسِ قَالَ ‏ "‏ فِيهِ وُلِدْتُ وَفِيهِ أُنْزِلَ عَلَىَّ الْقُرْآنُ ‏"‏ ‏.‏




আবূ ক্বাতাদাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এই সানাদে পূর্বোক্ত হাদীস বর্ণিত। তাতে অতিরিক্ত রয়েছেঃ তিনি জিজ্ঞেস করলেন, হে আল্লাহর রাসূল! সোমবার ও বৃহস্পতিবার সওম পালনের ব্যাপারে আপনার কি অভিমত? তিনি বললেনঃ ঐ দিন আমি জন্মগ্রহন করেছি এবং ঐ দিনই আমার উপর কুরআন অবতীর্ণ হয়েছে।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح ، انظر الحدیث السابق (2425)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. مهدي: هو ابن ميمون الأزدي. وأخرجه مسلم (١١٦٢)، والنسائي في "الكبرى" (٢٧٩٠) من طريق مهدي، بهذا الإسناد. وأخرجه مسلم (١١٦٢) من طريق شعبة، عن غيلان، به. وهو في "مسند أحمد" (٢٢٥٥٠)، و"صحيح ابن حبان" (٤٦٤٢). وانظر ما قبله.









সুনান আবী দাউদ (2427)


حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنِ ابْنِ الْمُسَيَّبِ، وَأَبِي، سَلَمَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ، قَالَ لَقِيَنِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏"‏ أَلَمْ أُحَدَّثْ أَنَّكَ تَقُولُ لأَقُومَنَّ اللَّيْلَ وَلأَصُومَنَّ النَّهَارَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ - أَحْسِبُهُ قَالَ - نَعَمْ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَدْ قُلْتُ ذَاكَ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ قُمْ وَنَمْ وَصُمْ وَأَفْطِرْ وَصُمْ مِنْ كُلِّ شَهْرٍ ثَلاَثَةَ أَيَّامٍ وَذَاكَ مِثْلُ صِيَامِ الدَّهْرِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي أُطِيقُ أَفْضَلَ مِنْ ذَلِكَ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ فَصُمْ يَوْمًا وَأَفْطِرْ يَوْمَيْنِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ فَقُلْتُ إِنِّي أُطِيقُ أَفْضَلَ مِنْ ذَلِكَ قَالَ ‏"‏ فَصُمْ يَوْمًا وَأَفْطِرْ يَوْمًا وَهُوَ أَعْدَلُ الصِّيَامِ وَهُوَ صِيَامُ دَاوُدَ ‏"‏ ‏.‏ قُلْتُ إِنِّي أُطِيقُ أَفْضَلَ مِنْ ذَلِكَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ لاَ أَفْضَلَ مِنْ ذَلِكَ ‏"‏ ‏.‏




‘আবদুল্লাহ ইবনু ‘আমার ইবনুল ‘আস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমার সাথে সাক্ষাত করে বললেনঃ আমাকে কি জানানো হয়নি যে, তুমি বলেছো, আল্লাহর শপথ! আমি সারা দিন সওম রাখবো এবং সারা রাত দাঁড়িয়ে সলাত পড়বো? তিনি বললেন হ্যাঁ, হে আল্লাহর রাসূল! আমি এরূপ বলেছি। তিনি বললেনঃ সলাত আদায় করবে এবং নিদ্রায়ও যাবে। সওম পালন করবে এবং কোন দিন সওম থেকে বিরত থাকবে। তুমি প্রতি মাসে (১৩, ১৪, ও ১৫ তারিখ) তিনটি সওম রাখো, এটাই সারা বছর সওম পালনের সমতুল্য। আমি বললাম, হে আল্লাহর রাসূল! আমি এর চেয়ে অধিক শক্তি রাখি। তিনি বললেনঃ তাহলে একদিন সওম রাখো এবং একদিন সওম থেকে বিরত থেকো। এটিই সর্বোত্তম সওম এবং এটিই হচ্ছে দাঊদ (আঃ)-এর সওম। আমি বললাম, আমি এর চাইতেও অধিক শক্তি রাখি। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ এর চেয়ে উত্তম সওম নেই।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (1976) صحیح مسلم (1159)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. عبد الرزاق: هو ابن همام الصنعاني، ومعمر: هو ابن راشد، والزهري: هو محمد بن مسلم ابن شهاب، وابن المسيب: هو سعيد، وأبو سلمة: هو ابن عبد الرحمن بن عوف الزهري. وهو عند عبد الرزاق في "مصنفه" (٧٨٦٢)، ومن طريقه أخرجه البخاري (٦١٣٤). وأخرجه البخاري (١٩٧٦) و (٣٤١٨)، ومسلم (١١٥٩)، والنسائي في "الكبرى" (٢٧١٣) من طريق الزهري، به. وأخرجه البخاري (١٩٧٥)، ومسلم (١١٥٩) من طريق يحيى بن أبي كثير، والنسائي (٢٧١٤) من طريق محمد بن إبراهيم، كلاهما عن أبي سلمة وحده، به. وأخرجه مختصراً البخاري (١٩٧٧) و (١٩٧٨) و (١٩٧٩) و (١٩٨٠) و (٣٤١٩) و (٥٠٥٢)، ومسلم (١١٥٩)، والنسائي في "الكبرى" (٢٧٠٤) و (٢٧٠٩ - ٢٧١١) و (٢٧١٥ - ٢٧٢٤) من طرق عن عبد الله بن عمرو. بعضهم يزيد فيه على بعض. وهو في "مسند أحمد" (٦٧٦٠)، و "صحيح ابن حبان" (٣٦٦٠). وانظر ما سلف برقم (١٣٨٩).









সুনান আবী দাউদ (2428)


حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، عَنْ سَعِيدٍ الْجُرَيْرِيِّ، عَنْ أَبِي السَّلِيلِ، عَنْ مُجِيبَةَ الْبَاهِلِيَّةِ، عَنْ أَبِيهَا، أَوْ عَمِّهَا أَنَّهُ أَتَى رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ثُمَّ انْطَلَقَ فَأَتَاهُ بَعْدَ سَنَةٍ وَقَدْ تَغَيَّرَتْ حَالَتُهُ وَهَيْئَتُهُ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَمَا تَعْرِفُنِي قَالَ ‏"‏ وَمَنْ أَنْتَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَنَا الْبَاهِلِيُّ الَّذِي جِئْتُكَ عَامَ الأَوَّلِ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ فَمَا غَيَّرَكَ وَقَدْ كُنْتَ حَسَنَ الْهَيْئَةِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ مَا أَكَلْتُ طَعَامًا إِلاَّ بِلَيْلٍ مُنْذُ فَارَقْتُكَ ‏.‏ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ لِمَ عَذَّبْتَ نَفْسَكَ ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ قَالَ ‏"‏ صُمْ شَهْرَ الصَّبْرِ وَيَوْمًا مِنْ كُلِّ شَهْرٍ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ زِدْنِي فَإِنَّ بِي قُوَّةً ‏.‏ قَالَ ‏"‏ صُمْ يَوْمَيْنِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ زِدْنِي ‏.‏ قَالَ ‏"‏ صُمْ ثَلاَثَةَ أَيَّامٍ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ زِدْنِي ‏.‏ قَالَ ‏"‏ صُمْ مِنَ الْحُرُمِ وَاتْرُكْ صُمْ مِنَ الْحُرُمِ وَاتْرُكْ صُمْ مِنَ الْحُرُمِ وَاتْرُكْ ‏"‏ ‏.‏ وَقَالَ بِأَصَابِعِهِ الثَّلاَثَةِ فَضَمَّهَا ثُمَّ أَرْسَلَهَا ‏.‏




বাহিলিয়্যাহ গোত্রীয় ‘মুজীবা’ নাম্নী নামক জনৈক মহিলা হতে তার পিতা অথবা চাচা হতে বর্ণিত, একদা তিনি (পিতা অথবা চাচা) রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর সাথে দেখা করে চলে যান। অতঃপর এক বছর পরে তিনি আসেন। তখন তার মারাত্মক স্বাস্থ্যহানি ঘটেছিলো। তিনি বললেন, হে আল্লাহর রাসূল! আপনি কি আমাকে চিনতে পারেননি? তিনি জিজ্ঞেস করলেনঃ তুমি কে? তিনি বললেন, আমি ঐ বাহিলী, আমি গত বছর এসেছিলাম। তিনি জিজ্ঞেস করলেনঃ কি কারণে তোমার এরূপ পরিবর্তন ঘটলো, অথচ তুমি তো সুন্দর স্বাস্থ্যের অধিকারী ছিলে? আমি বললাম, আমি আপনার নিকট থেকে বিদায় নেয়ার পর থেকে রাত ছাড়া আহার করিনি ( দিনে অনবরত সওম রেখেছি)। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ তুমি তোমার নাফসকে কেন এরূপ কষ্ট দিয়েছো? অতঃপর তিনি বলেনঃ ধৈর্যের মাস (রমাযান) এবং প্রতি মাসে একটি করে সওম রাখো। তিনি বললেন, আমাকে আরো বাড়িয়ে দিন, কেননা আমার সামর্থ্য আছে। তিনি বললেনঃ দু’’দিন সওম রাখো। লোকটি বললেন, আরো বাড়িয়ে দিন। তিনি বললেনঃ ( প্রতি মাসে) তিন দিন সওম রাখো। লোকটি বললেন, আরো বাড়িয়ে দিন। তিনি বললেনঃ তুমি হারাম মাসগুলোতে সওম রাখো এবং সওম বর্জনও করো। তুমি হারাম মাসগুলোতে সওম রাখো এবং সওম বর্জনও করো। তুমি হারাম মাসগুলোতে সওম রাখো এবং সওম বর্জনও করো। একথা বলে তিনি তিনটি আঙ্গুল একত্র করার পর ফাঁক করে দিলেন। [২৪২৮]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، ابن ماجہ (1741) ، في مجیبۃ نظر ! انظر التحریر (6491) ، (انوار الصحیفہ ص 90)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده ضعيف لجهالة مُجيبة الباهلية، وذكر بعضهم أن مُجيبة رجل، وقيل فيه: أبو مجيبة. حمّاد: هو ابن سلمة، سعيد الجريري: هو ابن إياس، وأبو السليل: هو ضُريب بن نُقير. وأخرجه ابن ماجه (١٧٤١)، والنسائي في "الكبرى" (٢٧٥٦) من طريق سفيان الثوري، عن سعيد الجريري، بهذا الإسناد. وقال ابن ماجه فيه: عن أبي مجيبة الباهلي عن أبيه أو عن عمه. وهو في "مسند أحمد" (٢٠٣٢٣). وقوله: "صم ثلاثة أيام" له شاهد من حديث عبد الله بن عمرو بن العاص عند أحمد في "مسنده" (٦٤٧٧) وإسناده صحيح. وآخر من حديث أبي هريرة عند النسائي في "الكبرى" (٢٧٢٩). وإسناده صحيح أيضاً. وهو في "المسند" (٧٥٧٧). ولصوم شهر المحرَّم شاهد صحيح سيأتي بعده. وقوله: "صُم من الحرم". قال الخطابي: فإن الحرم أربعة أشهر، وهي التي ذكرها الله في كتابه فقال: ﴿إِنَّ عِدَّةَ الشُّهُورِ عِنْدَ اللَّهِ اثْنَا عَشَرَ شَهْرًا فِي كِتَابِ اللَّهِ يَوْمَ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ مِنْهَا أَرْبَعَةٌ حُرُمٌ﴾ [التوبة: ٣٦] وهي شهر رجب وذي القَعدة وذي الحِجة والمحرم، وقيل لأعرابي يتفقه: كم الاشهر الحرم؟ قال: أربعة: ثلاث سرد وواحد فرد.









সুনান আবী দাউদ (2429)


حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ أَبِي بِشْرٍ، عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ أَفْضَلُ الصِّيَامِ بَعْدَ شَهْرِ رَمَضَانَ شَهْرُ اللَّهِ الْمُحَرَّمُ وَإِنَّ أَفْضَلَ الصَّلاَةِ بَعْدَ الْمَفْرُوضَةِ صَلاَةٌ مِنَ اللَّيْلِ ‏"‏ ‏.‏ لَمْ يَقُلْ قُتَيْبَةُ ‏"‏ شَهْرِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ رَمَضَانَ ‏"‏ ‏.




আবূ হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ রমাযান মাসের পর আল্লাহর মাস মুহররম-এর সওম হচ্ছে সর্বোত্তম এবং ফরয সালাতের পর রাতের সলাতই সর্বোত্তম।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (1163)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. مسدَّدٌ: هو ابن مسرهد الأسَدي، وأبو عوانة: هو الوضاح ابن عبد الله اليشكري، وأبو بشر: هو جعفر بن إياس. وأخرجه مسلم (١١٦٣)، والترمذي (٤٤٠) و (٧٥٠)، والنسائي في "الكبرى" (١٣١٤) و (٢٩١٩) من طريق قتيبة، بهذا الإسناد. وأخرجه مسلم (١١٦٣)، وابن ماجه (١٧٤٢)، والنسائي (٢٩١٧) و (٢٩١٨) من طريق محمد بن المنتشر، عن حميد بن عبد الرحمن، به. وأخرجه النسائي (١٣١٥) من طريق شعبة، عن أبي بشر، به. مرسلاً. وهو في "مسند أحمد" (٨٠٢٦) و (٨٥٣٤)، و"صحيح ابن حبان" (٢٥٦٣) و (٣٦٣٦).









সুনান আবী দাউদ (2430)


حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُوسَى، حَدَّثَنَا عِيسَى، حَدَّثَنَا عُثْمَانُ، - يَعْنِي ابْنَ حَكِيمٍ - قَالَ سَأَلْتُ سَعِيدَ بْنَ جُبَيْرٍ عَنْ صِيَامِ رَجَبَ، فَقَالَ أَخْبَرَنِي ابْنُ عَبَّاسٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَصُومُ حَتَّى نَقُولَ لاَ يُفْطِرُ وَيُفْطِرُ حَتَّى نَقُولَ لاَ يَصُومُ ‏.‏




উসমান ইবনু হাকীম (রাহিমাহুল্লাহ) হতে বর্ণিত, আমি সাঈদ ইবনু জুবাইর (রাহিমাহুল্লাহ)-কে রজব মাসের সওম সম্পর্কে জিজ্ঞেস করলে তিনি বলেন, ইবনু ‘আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আমাকে জানিয়েছেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) অনবরত সওম পালন করতেন, এমনকি আমরা বলতাম, তিনি এ মাসে সওম বর্জন করবেন না। আবার তিনি অনবরত সওম বর্জন করতেন, এমনকি আমরা বলতাম তিনি (হয়তো) আর সওম রাখবেন না।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (1971 مختصرًا) صحیح مسلم (1157)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. عيسى: هو ابن يونس السبيعي. وأخرجه مسلم (١١٥٧) عن إبراهيم بن موسى، بهذا الإسناد. وأخرجه مسلم أيضاً (١١٥٧) من طريقين، عن عثمان بن حكيم، به. وأخرجه البخاري (١٩٧١)، ومسلم (١١٥٧)، وابن ماجه (١٧١١)، والنسائي (٢٦٦٧) من طريق أبي بشر، عن سعيد بن جُبير، به. وهو في "مسند أحمد" (١٩٩٨) و (٢٠٤٦).









সুনান আবী দাউদ (2431)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ، عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ صَالِحٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي قَيْسٍ، سَمِعَ عَائِشَةَ، تَقُولُ كَانَ أَحَبَّ الشُّهُورِ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ يَصُومَهُ شَعْبَانُ ثُمَّ يَصِلُهُ بِرَمَضَانَ ‏.‏




আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূল্লুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট সকল মাসের মধ্যে শা‘বান মাসে অধিক সওম রাখা অধিক পছন্দনীয় ছিলো? তিনি এ মাসে সওম অব্যাহত রেখে তা রমযানের সাথে যুক্ত করতেন।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح ، أخرجہ النسائي (2352 وسندہ صحیح)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. معاوية بن صالح: هو ابن حُدَير الحضرمي. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٢٦٧١) و (٢٩٢٢) من طريق عبد الله بن وهب، عن معاوية بن صالح، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٥٥٤٨). وانظر ما سيأتي برقم (٢٤٣٤).









সুনান আবী দাউদ (2432)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ الْعِجْلِيُّ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ، - يَعْنِي ابْنَ مُوسَى - عَنْ هَارُونَ بْنِ سَلْمَانَ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ مُسْلِمٍ الْقُرَشِيِّ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ سَأَلْتُ - أَوْ سُئِلَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم - عَنْ صِيَامِ الدَّهْرِ فَقَالَ ‏ "‏ إِنَّ لأَهْلِكَ عَلَيْكَ حَقًّا صُمْ رَمَضَانَ وَالَّذِي يَلِيهِ وَكُلَّ أَرْبِعَاءَ وَخَمِيسٍ فَإِذَا أَنْتَ قَدْ صُمْتَ الدَّهْرَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ وَافَقَهُ زَيْدٌ الْعُكْلِيُّ وَخَالَفَهُ أَبُو نُعَيْمٍ قَالَ مُسْلِمُ بْنُ عُبَيْدِ اللَّهِ ‏.‏




‘উবাইদুল্লাহ ইবনু মুসলিম আল-ক্বারাশী (রাহিমাহুল্লাহ) হতে তার পিতা হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, একদা আমি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -কে জিজ্ঞেস করেছি (বর্ণনাকারীর সন্দেহ) অথবা তাঁকে সারা বছর সওম পালন সম্পর্কে জিজ্ঞেস করা হলো। তিনি বলেনঃ তোমার স্ত্রীর প্রতি তোমার কর্তব্য রয়েছে। সুতরাং তুমি রমাযান মাস এবং তার সাথে সংশ্লিষ্ট মাসে আর প্রতি বুধবার ও বৃহস্পতিবার সওম পালন করো। তুমি এরূপ করলে সারা বছরই সওম রাখলে।



দুর্বলঃ যইফ আল-জামি‘উস সাগীর (১৯১৪), মিশকাত (২০৬১), যইফ সুনান আত-তিরমিযী (১২২/৭৫২)।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، ترمذی (748) ، عبیداللّٰہ بن مسلم: مجہول،انظر التحریر (6636) ، (انوار الصحیفہ ص 90)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده ضعيف؛ لجهالة عبيد الله بن مسلم القرشي -وقيل: مسلم بن عبيد الله وهو الذي رجحه البغوي وغيرُ واحد-. هارون بن سَلْمان: هو القرشي المخزومي. وأخرجه الترمذي (٧٥٨) من طريقين عن عبيد الله بن موسى، بهذا الإسناد. وقال: حديث غريب. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٢٧٩٢) و (٢٧٩٣) من طريقين عن هارون بن سلمان، به.









সুনান আবী দাউদ (2433)


حَدَّثَنَا النُّفَيْلِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ، عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍ، وَسَعْدِ بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ عُمَرَ بْنِ ثَابِتٍ الأَنْصَارِيِّ، عَنْ أَبِي أَيُّوبَ، صَاحِبِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ صَامَ رَمَضَانَ ثُمَّ أَتْبَعَهُ بِسِتٍّ مِنْ شَوَّالٍ فَكَأَنَّمَا صَامَ الدَّهْرَ ‏"‏ ‏.‏




নাবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর সাহাবী আবূ আইয়ূব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ যে ব্যক্তি রমাযান মাসের সওম রাখার পর শাওয়াল মাসে ছয়টি সওম রাখলো, সে যেন সারা বছর সওম রাখলো।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (1164)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حديث صحيح، وهذا إسناد قوي من جهة صفوان بن سليم، حسن من جهة سعد بن سعيد -وهو ابن قيس الأنصاري- عبد العزيز بن محمد -وهو الداروردي- صدوق لا بأس به، وسعد بن سعيد حسن الحديث في المتابعات، وقد توبعا. وأخرجه النسائى في "الكبرى" (٢٨٧٦) من طريق عبد العزيز بن محمد، بهذا الإسناد. وأخرجه مسلم (١١٦٤)، وابن ماجه (١٧١٦)، والترمذي (٧٦٩)، والنسائي في "الكبرى" (٢٨٧٥) و (٢٨٧٧) من طرق عن سعد بن سعيد وحده، به. وأخرجه النسائي (٢٨٧٩) من طريق يحيى بن سعيد، عن عمر بن ثابت، به. وأخرجه النسائي أيضاً (٢٨٧٨) من طريق عبد ربه بن سعيد، عن عمر بن ثابت، به. موقوفاً. وهو في "مسند أحمد" (٢٣٥٣٣)، و"صحيح ابن حبان" (٣٦٣٤). وانظر تمام كلامنا عليه في "المسند". ويشهد له حديث ثوبان مولى رسول الله ﷺ عند ابن ماجه (١٧١٥)، والنسائي في "الكبرى" (٢٨٧٣) و (٢٨٧٤). وإسناده عند النسائي صحيح. وهو في "مسند أحمد" (٢٢٤١٢). ولفظ النسائى الأول: "صيام شهر رمضان بعشرة أشهر، وصيام ستة أيام من شوال بشهرين، فذلك صيام سنة". قلنا: في هذه الرواية تفسير لقوله ﷺ في الرواية الأخرى: "فكأنما صام الدهر" يعني الستة.









সুনান আবী দাউদ (2434)


حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ أَبِي النَّضْرِ، مَوْلَى عُمَرَ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ عَائِشَةَ، زَوْجِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهَا قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَصُومُ حَتَّى نَقُولَ لاَ يُفْطِرُ وَيُفْطِرُ حَتَّى نَقُولَ لاَ يَصُومُ وَمَا رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم اسْتَكْمَلَ صِيَامَ شَهْرٍ قَطُّ إِلاَّ رَمَضَانَ وَمَا رَأَيْتُهُ فِي شَهْرٍ أَكْثَرَ صِيَامًا مِنْهُ فِي شَعْبَانَ ‏.‏




নাবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর স্ত্রী ‘আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) একাধারে সওম রাখতেন, এমনকি আমরা বলতাম, তিনি সওম বর্জন করবেন না। আবার তিনি সওম বর্জন করতেন, এমনকি আমরা বলতাম, তিনি হয়তো আর সওম রাখবেন না। আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে রমাযান মাস ব্যতীত অন্য কোন মাসে পূর্ণ মাস সওম পালন করতে দেখিনি। আর আমি তাঁকে শা‘বান মাস ব্যতীত অন্য কোন মাসে অধিক (নফল) সওম রাখতে দাখিনি।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (1969) صحیح مسلم (1156)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. مالك: هو ابن أنس، وأبو النضر: هو سالم بن أبي أمية التيمي، وأبو سلمة: هو عبد الله الزهري. وهو عند مالك في "الموطأ" ١/ ٣٠٩، ومن طريقه أخرجه البخاري (١٩٦٩)، ومسلم (١١٥٦)، والنسائي في "الكبرى" (٢٦٧٢). وقرن النسائي بمالك عمرو بن الحارث المصري، وقال: وذكر آخر قبلهما. وأخرجه مختصراً البخاري (١٩٧٠)، ومسلم (١١٥٦) من طريق يحيى بن أبي كثير، ومسلم (١١٥٦)، وابن ماجه (١٧١٠) من طريق ابن أبي لبيد، والنسائي (٢٤٩٨) و (٢٤٩٩) من طريق محمد بن إبراهيم، ثلاثتهم عن أبي سلمة، به. وأخرجه مختصراً أيضاً مسلم (١١٥٦)، والترمذي (٧٧٨)، والنسائي (٢٥٠٤) و (٢٥٠٥) و (٢٦٧٠) من طريق عبد الله بن شقيق، والنسائي (٢٦٦٨) و (١٠٤٨٠) و (١١٣٨٠) من طريق مروان أبي لبابة كلاهما عن عائشة. وهو في "مسند أحمد" (٢٤٧٥٧)، و"صحيح ابن حبان" (٣٥٨٠) و (٣٦٤٨).









সুনান আবী দাউদ (2435)


حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرٍو، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِمَعْنَاهُ ‏.‏ زَادَ كَانَ يَصُومُهُ إِلاَّ قَلِيلاً بَلْ كَانَ يَصُومُهُ كُلَّهُ ‏.‏




আবূ হুরায়রাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর সূত্রে পূর্বোক্ত হাদীসের অর্থের অনুরূপ বর্ণিত। তাতে রয়েছেঃ তিনি (শা‘বান মাসে) সামান্য ক’দিন ছাড়া গোটা মাসই সওম পালন করতেন।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: حسن صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حديث صحيح، وهذا إسناد حسن. محمد بن عمرو -وهو ابن علقمة الليثي- صدوق حسن الحديث. لكن ذكر أبي هريرة فيه غير محفوظ وإنما يروى عن أم سلمة وعائشة، وانظر ما قبله. حماد: هو ابن سلمة. وقال المنذري: وهذه الزيادة أخرجها مسلم في "صحيحه" وفي البخاري أيضاً.









সুনান আবী দাউদ (2436)


حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا أَبَانُ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ عُمَرَ بْنِ أَبِي الْحَكَمِ بْنِ ثَوْبَانَ، عَنْ مَوْلَى، قُدَامَةَ بْنِ مَظْعُونٍ عَنْ مَوْلَى، أُسَامَةَ بْنِ زَيْدٍ أَنَّهُ انْطَلَقَ مَعَ أُسَامَةَ إِلَى وَادِي الْقُرَى فِي طَلَبِ مَالٍ لَهُ فَكَانَ يَصُومُ يَوْمَ الاِثْنَيْنِ وَيَوْمَ الْخَمِيسِ فَقَالَ لَهُ مَوْلاَهُ لِمَ تَصُومُ يَوْمَ الاِثْنَيْنِ وَيَوْمَ الْخَمِيسِ وَأَنْتَ شَيْخٌ كَبِيرٌ فَقَالَ إِنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَصُومُ يَوْمَ الاِثْنَيْنِ وَيَوْمَ الْخَمِيسِ وَسُئِلَ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ ‏ "‏ إِنَّ أَعْمَالَ الْعِبَادِ تُعْرَضُ يَوْمَ الاِثْنَيْنِ وَيَوْمَ الْخَمِيسِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ كَذَا قَالَ هِشَامٌ الدَّسْتَوَائِيُّ عَنْ يَحْيَى عَنْ عُمَرَ بْنِ أَبِي الْحَكَمِ ‏.‏




উসামাহ ইবনু যায়িদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এর আযাদকৃত গোলাম হতে বর্ণিত, তিনি উাসমাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এর সাথে তার কোন মালের সন্ধানে ওয়াদিয়ুল কুরায় যান। উসামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) প্রতি সোমবার ও বৃহস্পতিবার সওম পালন করতেন। তার মুক্তদাস তাকে জিজ্ঞেস করলেন, আপনি সোমবার ও বৃহস্পতিবার কেন সওম রাখেন অথচ আপনি একজন বৃদ্ধ মানুষ। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সোমবার ও বৃহস্পতিবার সওম রাখতেন। তাঁকে এর কারন জিজ্ঞেস করা হলে তিনি বলেনঃ সোমবার ও বৃহস্পতিবার আল্লাহর নিকট বান্দার আমলসমূহ পেশ করা হয়।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، مولی قدامۃ ومولی أسامۃ مستوران ، وحدیث الترمذي (745) یغني عنہ ، (انوار الصحیفہ ص 90)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: المرفوع منه صحيح، وهذا إسناد ضعيف لجهالة مولى قدامة، وجهالة مولى أسامة، عمر بن أبي الحكم بن ثوبان، كذا جاء اسمه في أصولنا الخطية، لكن جاء في هامش (أ) و (هـ) أن صوابه عمر بن الحكم. قلنا: كذا سماه أبان -وهو ابن يزيد العطار- فقد جاء اسمه كذلك في "مسند أحمد" (٢١٧٤٤): عمر بن أبي الحكم، لكن خالفه هشام الدستوائي فسماه: عمر بن الحكم. وذكر صاحب "بذل المجهود" ١١/ ٣٠٣ أن كلاهما صواب فأحدهما نسبه إلى أبيه والآخر إلى جده. لأنه عمر بن الحكم بن أبي الحكم ثوبان إلا أن ما جاء في الأصول الخطية هنا من زيادة: بن ثوبان فخطأ، لأن ثوبان هو نفسه أبو الحكم. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٢٧٩٤) و (٢٧٩٥) من طريق هشام الدستوائي، عن يحيى بن أبي كثير، بهذا الإسناد. وأخرجه النسائي (٢٦٧٩) من طريق أبي سعيد المقبري، عن أسامة بن زيد، به. وإسناده حسن. وهو في "مسند أحمد" (٢١٧٤٤) و (٢١٧٥٣) وانظر تمام تخريجه فيه. ويشهد للمرفوع منه حديث أبي هريرة الآتي عند المصنف برقم (٤٩١٦)، وهو في "الصحيح". وحديث عائشة عند أحمد (٢٤٥٠٨)، وابن ماجه (١٦٤٩) و (١٧٣٩)، والترمذي (٧٥٥)، والنسائي في "الكبرى" (٢٥٠٧) و (٢٥٠٨). وحديث أم سلمة أو حفصة عند النسائي (٢٦٨٦) و (٢٦٨٧) و (٢٦٨٨).









সুনান আবী দাউদ (2437)


حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنِ الْحُرِّ بْنِ الصَّبَّاحِ، عَنْ هُنَيْدَةَ بْنِ خَالِدٍ، عَنِ امْرَأَتِهِ، عَنْ بَعْضِ، أَزْوَاجِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَصُومُ تِسْعَ ذِي الْحِجَّةِ وَيَوْمَ عَاشُورَاءَ وَثَلاَثَةَ أَيَّامٍ مِنْ كُلِّ شَهْرٍ أَوَّلَ اثْنَيْنِ مِنَ الشَّهْرِ وَالْخَمِيسَ ‏.‏




হুনাইদাহ ইবনু খালিদ (রাহিমাহুল্লাহ) তার স্ত্রী হতে এবং তিনি নাবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর কোন এক স্ত্রী সূত্র হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যিলহাজ্জ মাসের নয় তারিখ পর্যন্ত, আশূরার দিন, প্রত্যেক মাসে তিনদিন, মাসের প্রথম সোমবার ও বৃহস্পতিবার সওম রাখতেন।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح ، وأخرجہ النسائي (2374 وسندہ صحیح) ھنیدۃ: صحابي، وامرأتہ: صحابیۃ




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: ضعيف لاضطرابه فقد اختلف عن هنيدة في إسناده، فروي عنه كما ذكره المصنف هنا وروي عنه، عن حفصة زوج النبي ﷺ، وروي عنه، عن أمه عن أم سلمة زوج النبي ﷺ مختصراً، وانظر التفصيل في ما كتبناه على الحديث في "مسند أحمد" برقم (٢٢٣٣٤). مسدَّدٌ: هو ابن مسرهد الأسَدي، وأبو عوانة: هو الوضاح بن عبد الله اليشكري. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٢٦٩٣)، (٢٧٣٨) من طريق أبي عوانة، بهذا الإسناد. وانظر ما سيأتي برقم (٢٤٥٢).









সুনান আবী দাউদ (2438)


حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، وَمُجَاهِدٍ، وَمُسْلِمٍ الْبَطِينِ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ مَا مِنْ أَيَّامٍ الْعَمَلُ الصَّالِحُ فِيهَا أَحَبُّ إِلَى اللَّهِ مِنْ هَذِهِ الأَيَّامِ ‏"‏ ‏.‏ يَعْنِي أَيَّامَ الْعَشْرِ ‏.‏ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ وَلاَ الْجِهَادُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ قَالَ ‏"‏ وَلاَ الْجِهَادُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ إِلاَّ رَجُلٌ خَرَجَ بِنَفْسِهِ وَمَالِهِ فَلَمْ يَرْجِعْ مِنْ ذَلِكَ بِشَىْءٍ ‏"‏ ‏.‏




ইবনু ‘আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ মহান আল্লাহর নিকট যে কোন দিনের সৎ আমলের চাইতে যিলহাজ্জ মাসের দশ প্রথম দিনের আমলের অধিক প্রিয়। লোকেরা জিজ্ঞেস করলো, হে আল্লাহর রাসূল! আল্লাহর পথে জিহাদও নয়? তিনি বললেনঃ না, আল্লাহর পথে জিহাদও নয়। তবে যে ব্যক্তি তার জান-মাল নিয়ে জিহাদে বের হয় এবং এর কোন একটি নিয়েও ফিরে না আসে তার কথা স্বতন্ত্র।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (969)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. وكيع: هو ابن الجراح، والأعمش: هو سليمان بن مهران، وأبو صالح: هو ذكوان السمان، ومجاهد: هو ابن جَبر، ومُسلم البَطين: هو مُسلم بن عِمران. وأخرجه الخاري (٩٦٩)، وابن ماجه (١٧٢٧)، والترمذي (٧٦٧). من طريقين، عن الأعمش، عن مسلم البَطين وحده، به. وهو في "مسند أحمد" (١٩٦٨)، و"صحيح ابن حبان" (٣٢٤).









সুনান আবী দাউদ (2439)


حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنِ الأَسْوَدِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ مَا رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم صَائِمًا الْعَشْرَ قَطُّ ‏.‏




‘আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -কে কখনো (যিলহাজ্জ মাসে) দশ দিন সওম পালন করতে দেখিনি।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (1176)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. مسدَّدٌ: هو ابن مسرهد الأسدي، وأبو عوانة: هو الوضاح ابن عبد الله اليشكري، والأعمش: هو سليمان بن مهران، وإبراهيم: هو ابن يزيد النخعي، والأسود: هو ابن يزيد النخعي. وأخرجه مسلم (١١٧٦)، والترمذي (٧٦٦)، والنسائي في "الكبرى" (٢٨٨٥ - ٢٨٨٧) من طرق عن الأعمش، بهذا الإسناد. وأخرجه ابن ماجه (١٧٢٩) من طريق منصور، عن إبراهيم، به. وهو في "مسند أحمد" (٢٤١٤٧)، و"صحيح ابن حبان" (١٤٤١) و (٣٦٠٨).









সুনান আবী দাউদ (2440)


حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا حَوْشَبُ بْنُ عَقِيلٍ، عَنْ مَهْدِيٍّ الْهَجَرِيِّ، حَدَّثَنَا عِكْرِمَةُ، قَالَ كُنَّا عِنْدَ أَبِي هُرَيْرَةَ فِي بَيْتِهِ فَحَدَّثَنَا أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنْ صَوْمِ يَوْمِ عَرَفَةَ بِعَرَفَةَ ‏.‏




ইকরিমাহ (রাহিমাহুল্লাহ) হতে বর্ণিত, আমরা আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এর কাছে তারঘরে অবস্থান করছিলাম। তখন তিনি আমাদেরকে হাদীস বর্ণনা করেন যে, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আরাফাহর দিন আরাফাহর ময়দানে সওম রাখতে নিষেধ করেছেন। [২৪৪০]



দুর্বলঃ যঈফ আল-জামি‘উস সাগীর (৬০৬৯), যঈফ সুনান ইবনু মাজাহ (৩৭৮/১৭৩২), সিলসিলাতুল আহাদীসিয যঈফাহ (৪০৪), মিশকাত(২০৬৩)।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن ، مشکوۃ المصابیح (2062) ، أخرجہ ابن ماجہ (1732 وسندہ حسن) وصححہ ابن خزیمۃ (2101 وسندہ حسن) مھدي بن حرب العبدي وثقہ ابن خزیمۃ والحاکم وغیرہما وأخطأ من جھلہ




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده ضعيف لجهالة مهدي الهَجَري -وهو ابن حرب العبدي المُحَاربي-. وأخرجه ابن ماجه (١٧٣٢)، والنسائي في "الكبرى" (٢٨٤٣) و (٢٨٤٤) من طريق حوشب بن عقيل، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٨٠٣١). قال الخطابي: هذا نهي استحباب لا نهي إيجاب، وإنما نهي المحرم عن ذلك خوفاً عليه أن يضعف عن الدعاء والابتهال في ذلك المقام، فأما من وجد قوة، ولا يخاف معها ضعفاً فصوم ذلك اليوم أفضل له إن شاء الله، وقد قال النبي ﷺ: "صيامُ يومِ عرفَة يُكفر سنتين: سنة قبلها، وسنة بعدها. قال ابن القيم: وقد صح عن رسول الله ﷺ أنه أفطر بعرفة، وصح عنه أن صيامه يكفر سنتين، فالصواب أن الأفضل لأهل الآفاق صومه، ولأهل عرفة فطره، لاختياره ﷺ ذلك لنفسه وعمل خلفائه بعده بالفطر، وفيه قوة على الدعاء الذي هو أفضل دعاء العبد، وفيه أن يوم عرفة عيد لأهل عرفة، فلا يستحب لهم صيامه. وانظر الحديث الآتي بعد هذا.