হাদীস বিএন


সুনান আবী দাউদ





সুনান আবী দাউদ (3295)


حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ أَبِي يَعْقُوبَ، حَدَّثَنَا أَبُو النَّضْرِ، حَدَّثَنَا شَرِيكٌ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، مَوْلَى آلِ طَلْحَةَ عَنْ كُرَيْبٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ ‏:‏ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏:‏ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ أُخْتِي نَذَرَتْ - يَعْنِي - أَنْ تَحُجَّ مَاشِيَةً ‏.‏ فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏:‏ ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ لاَ يَصْنَعُ بِشَقَاءِ أُخْتِكَ شَيْئًا، فَلْتَحُجَّ رَاكِبَةً وَلْتُكَفِّرْ عَنْ يَمِينِهَا ‏"‏ ‏.‏




উকবাহ ইবনু ‘আমির আল-জুহানী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমার বোন পদব্রজে বাইতুল্লাহ তাওয়াফ করতে যাওয়ার মানত করেন। তিনি আমাকে এ বিষয়ে নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর কাছে ফাতাওয়াহ জিজ্ঞেস করতে বলেন। আমি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর কাছে ফাতাওয়াহ জানতে চাইলে তিনি বললেনঃ সে যেন পায়ে হেঁটে যায় এবং যানবাহনেও যায়।



দুর্বলঃ পূর্বেরটি দেখুন (৩২৯৪)।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح ، مشکوۃ المصابیح (3441) ، شریک القاضي صرح بالسماع عند الحاکم (4/302 وسندہ حسن) وصححہ ابن خزیمۃ (3046)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده ضعيف لسوء حفظ شريك -وهو ابن عبد الله القاضي- وقال البيهقي ١٠/ ٨٠: تفرد به شريك القاضي. أبو النضر: هو هاشم بن القاسم بن مسلم الليثي، وكُريب: هو ابن أبي مسلم مولى ابن عباس. وأخرجه أحمد (٢٨٢٨) و (٢٨٨٥)، وأبو يعلى في "مسنده" (٢٤٤٣)، وابن خزيمة (٣٠٤٦) و (٣٠٤٧)، والطحاوي في "شرح معاني الآثار" ٣/ ١٣٠، وابن حبان (٤٣٨٤)، والحاكم ٤/ ٣٠٢، والبيهقي ١٠/ ٨٠ من طرق عن شريك، بهذا الإسناد. والرجل السائل في هذا الحديث هو عقبة بن عامر الجهني كما في الحديث الذي بعده. تنبيه: جاء بعد هذا الحديث في (أ) و (هـ) حديثُ مطر، عن عكرمة، عن ابن عباس الآتي برقم (٣٣٠٣) ونحن تركناه على ترتيب المطبوع.









সুনান আবী দাউদ (3296)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ، حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، ‏:‏ أَنَّ أُخْتَ، عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ نَذَرَتْ أَنْ تَمْشِيَ، إِلَى الْبَيْتِ، فَأَمَرَهَا النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم أَنْ تَرْكَبَ وَتُهْدِيَ هَدْيًا ‏.‏




ইবনু ‘আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, উক্ববাহ ইবনু ‘আমিরের (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বোন পদব্রজে হাজ্জে যাওয়ার মানত করেছিলেন। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে সওয়ারীতে করে আসার এবং একটি কুরবানি করার নির্দেশ দিলেন।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن ، قتادۃ تابعہ مطر الوراق عند ابن طھمان في مشیختہ (29 وسندہ حسن)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. كما قال ابن التركماني في "الجوهر النقي " ١٠/ ٨٠، والحافظ في" التلخيص الحبير" ٤/ ١٧٨. أبو الوليد: هو هشام بن عبد الملك الطيالسي، وهمام: هو ابن يحيى العَوْذي، وقتادة: هو ابن دِعامةَ السَّدوسيُّ. وأخرجه أحمد في "مسنده" (٢١٣٤) و (٢١٣٩) و (٢٢٧٨) و (٢٨٣٤)، والدارمي (٢٣٣٥)، وابن الجارود (٦٣٦)، وأبو يعلى في "مسنده" (٢٧٣٧)، وابن خزيمة (٣٠٤٥)، والطحاوي في "شرح معاني الآثار" ٣/ ١٣١، وفي "شرح مشكل الآثار" (٢١٥١)، والطبراني في "المعجم الكبير" (١١٨٢٨)، والبيهقي ١٠/ ٧٩ من طرق عن همام بن يحيى، بهذا الإسناد. وجاء ذكر الهدي عند أحمد وابن الجارود وأبي يعلى وابن خزيمة والطبراني والبيهقي مقيداً بالبدنة. وقد تابع هماماً على ذكر الهدي فيه مطرٌ الورّاق عن عكرمة فيما سيأتي برقم (٣٣٠٣). وسيأتي بعده عن هشام الدستوائي عن قتادة. دون ذكر الهدي. وبرقم (٣٢٩٨) عن سعيد بن أبي عروبة، عن قتادة، عن عكرمة مرسلاً دون ذكر الهدي أيضاً. وسياتي من طريق أبي الخير، عن عقبة نفسه برقم (٣٢٩٩) وليس فيه ذكر الهدي كذلك. قال ابن التركماني: وسكوت من سكت ليس بحجة على من ذكر.









সুনান আবী দাউদ (3297)


حَدَّثَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، ‏:‏ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم لَمَّا بَلَغَهُ أَنَّ أُخْتَ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ نَذَرَتْ أَنْ تَحُجَّ مَاشِيَةً قَالَ ‏:‏ ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ لَغَنِيٌّ عَنْ نَذْرِهَا، مُرْهَا فَلْتَرْكَبْ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ ‏:‏ رَوَاهُ سَعِيدُ بْنُ أَبِي عَرُوبَةَ نَحْوَهُ وَخَالِدٌ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم نَحْوَهُ ‏.‏




ইবনু ‘আব্বাস(রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যখন জানতে পারলেন, ‘উক্ববাহ ইবনু ‘আমিরের (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বোন পদব্রজে হাজ্জ করার মানত করেছেন, তখন তিনি বললেনঃ নিশ্চয়ই আল্লাহ্‌ তার এরূপ মানতের মুখাপেক্ষী নন। তাকে যানবাহনে চড়ে হাজ্জে আসার নির্দেশ দাও। আবূ দাঊদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, সাঈদ ইবনু আবূ ‘আরূবাহ(রাহিমাহুল্লাহ)– ও অনুরূপ বর্ণনা করেছেন। খালিদ (রাহিমাহুল্লাহ) ‘ইকরিমাহ হতে নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সূত্রে অনুরূপ হাদীস বর্ণনা করেছেন।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن ، قتادۃ تابعہ مطر الوراق عند ابن طھمان في مشیختہ (29 وسندہ حسن)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. هشام: هو ابن أبي عبد الله الدستوائي، وخالد: هو ابن مهران الحذاء. وأخرجه الطبراني (١١٨٢٩)، والبيهقي ١٠/ ٧٩ من طريق مسلم بن إبراهيم، بهذا الإسناد. وأخرجه الطبراني (١١٩٤٩) من طريق بشر بن المفضل، عن خالد الحذاء، عن عكرمة، عن ابن عباس. دون ذكر الهدي. وانظر الحديثين السالفين قبله. وانظر تالييه.









সুনান আবী দাউদ (3298)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ، عَنْ سَعِيدٍ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ عِكْرِمَةَ، أَنَّ أُخْتَ، عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ بِمَعْنَى هِشَامٍ وَلَمْ يَذْكُرِ الْهَدْىَ وَقَالَ فِيهِ ‏:‏ ‏ "‏ مُرْ أُخْتَكَ فَلْتَرْكَبْ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ ‏:‏ رَوَاهُ خَالِدٌ عَنْ عِكْرِمَةَ بِمَعْنَى هِشَامٍ ‏.‏




‘ইকমিরাহ(রাহিমাহুল্লাহ) হতে বর্ণিত, উক্ববাহ ইবনু আমিরের (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বোন ... অতঃপর হিশামের হাদীসের সমার্থবোধক হাদীস বর্ণিত। বর্ণনাকারী কুরবানির উল্লেখ করেননি। এতে আরও রয়েছেঃ তোমার বোনকে হুকুম করো সে যেন বাহনে চড়ে যায়। আবূ দাঊদ(রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, খালিদ(রাহিমাহুল্লাহ) এ হাদীস ‘ইকরিমাহ সূত্রে হিশামের হাদীসের অনুরূপ অর্থে বর্ণনা করেছেন।



সহীহ: পূর্বেরটি দ্বারা।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح لغيره




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن ، قتادۃ تابعہ مطر الوراق عند ابن طھمان في مشیختہ (29 وسندہ حسن)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حديث صحيح، وهذا إسناد رجاله ثقات، لكنه مرسل، وقد أُسند من طريق هشام الدستوائي وهمام وغيرهما كما في الطريقين السالفين قبله، فالحكم للمسند. ابن عدي: هو محمد بن إبراهيم بن أبي عدي السلمي، وسعيد: هو ابن أبي عروبة. وأخرجه البيهقي ١٠/ ٧٩ من طريق سعيد بن أبي عروبة، بهذا الإسناد. وانظر سابقيه. تنبيه: هذا الحديث أثبتناه من (أ) و (هـ)، وهو في رواية ابن داسه وابن العبد. وقد جاء بعد هذا الحديث في (أ) حديث سفيان الثوري عن أبيه، عن عكرمة، عن ابن عباس الآتي برقم (٣٣٠٤)، وقد جاء هذا الحديث نفسه في (هـ) بعد حديث هشام عن قتادة، عن عكرمة، عن ابن عباس السالف برقم (٣٢٩٧).









সুনান আবী দাউদ (3299)


حَدَّثَنَا مَخْلَدُ بْنُ خَالِدٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، أَخْبَرَنِي سَعِيدُ بْنُ أَبِي أَيُّوبَ، أَنَّ يَزِيدَ بْنَ أَبِي حَبِيبٍ، أَخْبَرَهُ أَنَّ أَبَا الْخَيْرِ حَدَّثَهُ عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ الْجُهَنِيِّ، قَالَ ‏:‏ نَذَرَتْ أُخْتِي أَنْ تَمْشِيَ، إِلَى بَيْتِ اللَّهِ، فَأَمَرَتْنِي أَنْ أَسْتَفْتِيَ لَهَا رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَاسْتَفْتَيْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏:‏ ‏ "‏ لِتَمْشِ وَلْتَرْكَبْ ‏"‏ ‏.‏




উক্ববাহ ইবনু ‘আমির আল-জুহানী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমার এক বোন পায়ে হেঁটে বাইতুল্লাহ তাওয়াফ করার মানত করেন। তিনি আমাকে হুকুম করলেন, আমি যেন নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে এ বিষয়ে ফাতাওয়াহ জিজ্ঞেস করি। আমি নাবী(সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট ফাতাওয়াহ জানতে চাইলে তিনি (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ সে যেন পায়ে হেঁটেও যায় এবং বাহনে চড়েও যায়।



সহীহঃ ইরওয়া (৮/২১৯)।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (1866) صحیح مسلم (1644)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. ابن جريج: هو عبد الملك بن عبد العزيز، وأبو الخير: هو مَرْثد بن عبد الله اليَزَني. وهو في "مصنف عبد الرزاق" (١٥٨٧٣). وأخرجه البخاري (١٨٦٦)، ومسلم (١٦٤٤)، والنسائي في "الكبرى" (٤٧٣٧) من طريق ابن جريج، بهذا الإسناد. وأخرجه الطحاوي في "شرح مشكل الآثار" (٢١٥٠) عن عُبيد بن رِجَال، عن أحمد بن صالح، عن عبد الرزاق، عن ابن جريج، به بلفظ: عن عقبة بن عامر: أن أخته نذرت أن تحج ماشية ناشرة شعرها، فسأل عقبة رسول الله ﷺ، فقال: "لتركب، ولتصم ثلاثة أياماً. وذكر نشرالشعر والأمر بالصوم في هذا الحديث غير محفوظ من هذا الطريق، ويغلب على ظننا أن الوهم فيه من قِبَل عُبيد بن رجَال -كذا ضبطه الفيروزآبادي، وهو عبيد بن محمد بن موسى المصري المقرئ- لا من قبل أحمد بن صالح المصري الحافظ، فلم يُؤثَر توثيق عُبيد هذا عن أحدٍ. وقد رواه جماعة عن ابن جريج فلم يذكروا فيه نشر الشعر ولا الأمر بالصوم. وكذلك أخرجه مسلم (١٦٤٤) من طريق يحيى بن أيوب. ومن طريق عبد الله بن عياش كلاهما عن يزيد بن أبي حبيب. فلم يذكرا نشر الشعر ولا الأمر بالصوم. وهو في "مسند أحمد" (١٧٣٨٦). وانظر ما سلف برقم (٣٢٩٥)، وما سيأتي برقم (٣٣٠٤). وقد سلف ذكر نشر الشعر والأمر بالصوم في الحديث السالف برقم (٣٢٩٣) وهو ضعيف أيضاً.









সুনান আবী দাউদ (3300)


حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ، حَدَّثَنَا أَيُّوبُ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ ‏:‏ بَيْنَمَا النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَخْطُبُ إِذَا هُوَ بِرَجُلٍ قَائِمٍ فِي الشَّمْسِ فَسَأَلَ عَنْهُ قَالُوا ‏:‏ هَذَا أَبُو إِسْرَائِيلَ نَذَرَ أَنْ يَقُومَ وَلاَ يَقْعُدَ، وَلاَ يَسْتَظِلَّ وَلاَ يَتَكَلَّمَ وَيَصُومَ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ ‏ "‏ مُرُوهُ فَلْيَتَكَلَّمْ وَلْيَسْتَظِلَّ وَلْيَقْعُدْ، وَلْيُتِمَّ صَوْمَهُ ‏"‏ ‏.‏




ইবনু আব্বাস(রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, একদা নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) খুতবাহ দিচ্ছিলেন। তখন তিনি দেখলেন, একটি লোক রোদের মধ্যে দাঁড়িয়ে আছে। তিনি লোকটির ব্যাপারে জিজ্ঞেস করলে লোকেরা বলল, সে আবূ ইসরাইল। সে মানত করে যে, সে দাঁড়িয়ে থাকবে, বসবে না, ছায়া নিবে না, কথা বার্তা বলবে না এবং সওম পালন করবে। তখন তিনি বললেনঃ তাকে আদেশ করো , সে যেন কথা বলে, ছায়া নেয়, বসে এবং সওম পূর্ণ করে।



সহীহঃ ইরওয়া (৮/২১৮)।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (6704)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. وهيب: هو ابن خالد بن عجلان الباهلي، وأيوب: هو ابن أبي تميمة السَّختيانيّ. وأخرجه البخاري (٦٧٥٤)، وابن ماجه (٢١٣٦ م) من طرق عن وهيب، بهذا الإسناد. وهو في "صحيح ابن حبان" (٤٣٨٥). وأخرجه ابن ماجه (٢١٣٦) عن عطاء، عن ابن عباس. وفيه دليل على أن كل شيء يتأذى به الإنسان مما لم يرد بمشروعيته كتاب ولا سنة كالمشي حافياً والجلوس في الشمس ليس من طاعة الله تعالى، فلا ينعقد النذر به، فإنه ﷺ أمر أبا إسرائيل في هذا الحديث بإتمام الصوم دون غيره، وهو محمول على أنه علم أنه لا يشق عليه. هذا معنى كلام الخطابي.









সুনান আবী দাউদ (3301)


حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ حُمَيْدٍ الطَّوِيلِ، عَنْ ثَابِتٍ الْبُنَانِيِّ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، ‏:‏ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم رَأَى رَجُلاً يُهَادَى بَيْنَ ابْنَيْهِ فَسَأَلَ عَنْهُ فَقَالُوا ‏:‏ نَذَرَ أَنْ يَمْشِيَ ‏.‏ فَقَالَ ‏:‏ ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ لَغَنِيٌّ عَنْ تَعْذِيبِ هَذَا نَفْسَهُ ‏"‏ ‏.‏ وَأَمَرَهُ أَنْ يَرْكَبَ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ ‏:‏ رَوَاهُ عَمْرُو بْنُ أَبِي عَمْرٍو عَنِ الأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم نَحْوَهُ ‏.‏




আনাস ইবনু মালিক(রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, একদা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) দেখলেন, এক ব্যক্তি তার দুই ছেলের কাঁধে ভর করে হেঁটে যাচ্ছে। তিনি তার সম্পর্কে জানতে চাইলে লোকেরা বলল, সে পায়ে হেঁটে (হাজ্জে) যাওয়ার মানত করেছে। তিনি বললেনঃ এ ব্যক্তির নিজেকে এভাবে কষ্ট দেয়া হতে আল্লাহ্‌ সম্পূর্ণ মুক্ত। তিনি তাকে বাহনে চড়ে যাওয়ার নির্দেশ দিলেন। আবূ দাঊদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সূত্রে অনুরূপ হাদীস বর্ণিত হয়েছে।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (6701) صحیح مسلم (1642)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. حُميد الطويل: هو ابن أبي حُميد. ويحيى: هو ابن سعيد القطان، وثابت البناني: هو ابن أسلم، ومُسَدَّدٌ: هو ابن مُسَرهَد. وأخرجه البخاري (١٨٦٥) و (٦٧٥١)، ومسلم (١٦٤٢)، والترمذي (١٦١٧)، والنسائي في "المجتبى" (٣٨٥٢) و (٣٨٥٣) من طرق عن حُميد الطويل، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٢٠٣٨)، و"صحيح ابن حبان" (٤٣٨٣). وقوله: يُهادى، هو بضم أوله من المهاداة: وهو أن يمشي معتمداً على غيره. وأخرجه الترمذي (١٦١٨) من طريق محمد بن أبي عدي، والنسائي (٣٨٥٤) من طريق يحيى بن سعيد الأنصاري، كلاهما عن حميد الطويل، عن أنس. دون ذكر ثابت. قال حماد بن سلمة وشعبة: ما يرويه حميد عن أنس سمعه من ثابت أو ثبته فيها ثابت، قلنا: ولهذا قال الحافظ العلائي في "جامع التحصيل": على تقدير أن تكون روايات حميد عن أنس مراسيل، قد تبين الواسطة فيها، وهو ثقة محتج به. وهو في "مسند أحمد" (١٢٠٣٨). وأخرجه الترمذي (١٦١٦) من طريق عمران القطان، عن حميد، عن أنس، إلا أنه أخطأ فجعل الناذر امرأة، وخالف الجماعة من أصحاب حميد.









সুনান আবী দাউদ (3302)


حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مَعِينٍ، حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي الأَحْوَلُ، أَنَّ طَاوُسًا، أَخْبَرَهُ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، ‏:‏ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم مَرَّ وَهُوَ يَطُوفُ بِالْكَعْبَةِ بِإِنْسَانٍ يَقُودُهُ بِخِزَامَةٍ فِي أَنْفِهِ، فَقَطَعَهَا النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم بِيَدِهِ وَأَمَرَهُ أَنْ يَقُودَهُ بِيَدِهِ ‏.‏




ইবনু আব্বাস(রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কা’বা ঘর তাওয়াফ করার সময় এক ব্যক্তিকে অতিক্রম করতে গিয়ে দেখলেন – তার নাকে আংটিযুক্ত রশি লাগিয়ে তাকে নিয়ে যাওয়া হচ্ছে। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তা নিজ হাতে কেটে ফেলেন এবং তাকে তার হাত ধরে নিয়ে যাওয়ার নির্দেশ দিলেন।



সহীহঃ নাসায়ী (২৯২০)




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (1620)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. حجاج: هو ابن محمد الأعور، وابن جريج: هو عبد الملك ابن عبد العزيز، وطاووس: هو ابن كَيْسان. وأخرجه البخاري (١٦٢٠) و (١٦٢١) و (٦٧٠٢) و (٦٧٠٣)، والنسائي في "الكبرى" (٤٧٣٣) و (٤٧٣٤) من طرق عن ابن جريج، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٣٤٤٢) و (٣٤٤٣)، و"صحيح ابن حبان" (٣٨٣١) و (٣٨٣٢). والخزامة: بكسر الخاء: حلقة من شعر أو وَبرِ تجعل في الحاجز الذي بين منخري البعير يشذ فيها الزِّمامُ ليسهل انقياده إذا كان صعباً، قال ابن بطال: وإنما قطعه، لأن القَوْدَ بالأزمة إنما يُفعل بالبهائم وهو مُثلَةٌ. وانظر "الفتح" ٣/ ٤٨٢ في وجه إدخال هذا الحديث في أبواب النذر. ننبيه: هذا الحديث أثبتناه من (أ) و (هـ) وهو في روايتي ابن العبد وابن داسه. وذكره المزي في "تحفة الأشراف".









সুনান আবী দাউদ (3303)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَفْصِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ السُّلَمِيُّ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي قَالَ، حَدَّثَنِي إِبْرَاهِيمُ، - يَعْنِي ابْنَ طَهْمَانَ - عَنْ مَطَرٍ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، ‏:‏ أَنَّ أُخْتَ، عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ نَذَرَتْ أَنْ تَحُجَّ، مَاشِيَةً وَأَنَّهَا لاَ تُطِيقُ ذَلِكَ، فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏:‏ ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ لَغَنِيٌّ عَنْ مَشْىِ أُخْتِكَ، فَلْتَرْكَبْ وَلْتُهْدِ بَدَنَةً ‏"‏ ‏.‏




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, উক্ববাহ ইবনু ‘আমিরের(রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বোন শারীরিক সামর্থ্য না থাকা সত্ত্বেও পদব্রজে হজ্জ করার মানত করেন। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ নিশ্চয়ই মহামহিম আল্লাহ্‌ তোমার বোনের এরূপ মানতের মুখাপেক্ষী নন। সুতরাং সে বাহনে চড়ে যায় এবং একটি উট কুরবানি করে।



সহীহঃ দেখুন (৩২৯৭)।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن ، قال معاذ: قتادۃ تابعہ مطر الوراق عند ابن طھمان في مشیختہ (29 وسندہ حسن)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حديث صحيح، وهذا إسناد حسن في المتابعات. مطر -وهو ابن طهمان الورَّاق- ضعيف يُعتبر به في المتابعات والشواهد، وباقي رجاله ثقات. وقد تابعه همام ابن يحيى فيما سلف برقم (٣٢٩٦). وهو عند ابن طهمان في "مشيخته" برقم (٢٩)، ومن طريقه أخرجه البيهقي ١٠/ ٧٩، والخطيب في "تاريخ بغداد" ٤/ ٣٢٩ وقد زاد الخطيب في إسناده قتادة بين مطر وعكرمة، ونقل عن الحافظ الدارقطني قوله: لم يقل لنا في هذا الإسناد: عن قتادة، غيرُ أبي الحَسَنِ البغوي، وكان من الثقات. وهو عند غيره: عن مطر، عن عكرمة، عن ابن عباس. وأخرجه الطحاوي في "شرح مشكل الآثار" (٢١٥٢) من طريق عبد العزيز بن مسلم القَسْملي، عن مطر الوراق، عن عكرمة، عن عقبة بن عاصم. فجعله من مسند عقبة بن عامر. وانظر ما سلف برقم (٣٢٩٥) و (٣٢٩٦). وما سيأتي بعده. تنبيه: هذا الحديث أثبتناه من (أ) و (هـ)، وأشار في (أ) إلى أنه في رواية ابن العبد. قلنا: وهو عندنا في (هـ) وهي برواية ابن داسه. وموضعه في (أ) و (هـ) بعد الحديث (٣٢٩٥)، ولكننا أبقيناه على ترتيب المطبوع.









সুনান আবী দাউদ (3304)


حَدَّثَنَا شُعَيْبُ بْنُ أَيُّوبَ، حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ هِشَامٍ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ الْجُهَنِيِّ، أَنَّهُ قَالَ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏:‏ إِنَّ أُخْتِي نَذَرَتْ أَنْ تَمْشِيَ إِلَى الْبَيْتِ ‏.‏ فَقَالَ ‏:‏ ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ لاَ يَصْنَعُ بِمَشْىِ أُخْتِكَ إِلَى الْبَيْتِ شَيْئًا ‏"‏ ‏.‏




উক্ববাহ ইবনু ‘আমির আল-জুহানী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)- কে বললেন, আমার বোন পদব্রজে বাইতুল্লাহ যাওয়ার মানত করেছে। তিনি বললেনঃ নিশ্চয়ই আল্লাহ্‌ তোমার বোনের পায়ে হেঁটে বাইতুল্লাহ যাওয়াতে বাধ্যবাধকতা রাখেননি।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن ، رواہ ابن طھمان في مشیختہ (29 وسندہ حسن)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حديث صحيح. شعيب بن أيوب ومعاوية بن هشام متابعان. سفيان: هو ابن سعيد بن مسروق الثوري. وأخرجه البيهقي ١٥/ ٧٩ من طريق أبي داود، بهذا الإسناد. وقد سلف من طريق أبي الخير، عن عقبة بن عامر، برقم (٣٢٩٩). وإسناده صحيح، وقال فيه: "لتمش ولتركب". وأخرجه الطحاوي في "شرح المشكل" (٢١٥٢) من طريق عبد العزيز القسملي، عن مطر الوراق، عن عكرمة عن عقبة بن عامر وقال فيه: "فتركب، ولتهدِ بدنة". تنبيه: هذا الحديث أثبتاه من (أ) و (هـ)، وأشار في (أ) إلى أنه في رواية ابن العبد. قلنا: وهو أيضاً عندنا في (هـ) وهي برواية ابن داسه. ومن طريقه أخرجه البيهقي وموضع هذا الحديث في (أ) و (هـ) بعد الحديث (٣٢٩٨). ولكننا أبقيناه على ترتيب المطبوع.









সুনান আবী দাউদ (3305)


حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، قَالَ أَخْبَرَنَا حَبِيبٌ الْمُعَلِّمُ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ أَبِي رَبَاحٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، ‏:‏ أَنَّ رَجُلاً، قَامَ يَوْمَ الْفَتْحِ فَقَالَ ‏:‏ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي نَذَرْتُ لِلَّهِ إِنْ فَتَحَ اللَّهُ عَلَيْكَ مَكَّةَ أَنْ أُصَلِّيَ فِي بَيْتِ الْمَقْدِسِ رَكْعَتَيْنِ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ ‏"‏ صَلِّ هَا هُنَا ‏"‏ ثُمَّ أَعَادَ عَلَيْهِ فَقَالَ ‏:‏ ‏"‏ صَلِّ هَا هُنَا ‏"‏ ثُمَّ أَعَادَ عَلَيْهِ فَقَالَ ‏:‏ ‏"‏ شَأْنَكَ إِذًا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ ‏:‏ رُوِيَ نَحْوُهُ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏




জাবির ইবনু ‘আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এক ব্যক্তি (মাক্কাহ) বিজয়ের দিন দাঁড়িয়ে বলল, হে আল্লাহ্‌র রাসূল! আল্লাহ্‌ আপনাকে মক্কা বিজয়ের গৌরব দান করলে আমি আল্লাহ্‌র জন্য বাইতুল মুক্কাদাসে দু’রাক’আত সলাতের মানত করেছিলাম। তিনি বললেনঃ ঐ সলাত এখানেই আদায় করো। সে পুনরায় একই কথা বললে তিনি বললেনঃ এখানে (মাসজিদুল হারামে) পড়ে নাও। সে পুনরায় একই কথা বললে তিনি বললেনঃ এ ব্যাপারে তোমার স্বাধীনতা রয়েছে। আবূ দাঊদ(রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, ‘আবদুর রহমান ইবনু ‘আওফ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সূত্রে অনুরূপ হাদীস বর্ণিত আছে।



সহীহঃ ইরওয়া (২৫৯৭)




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح ، مشکوۃ المصابیح (3440)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده قوي من أجل حبيب المُعلِّم فهو صدوق لا بأس به. حماد: هو ابن سلمة. وأخرجه ابن أبي شيبة في "المُصنَّف" ٤/ ٤٢ - قسم العمروي- وأحمد (١٤٩١٩)، وعبد بن حميد (١٠٠٩)، والدارمي (٢٣٣٩)، وابن الجارود (٩٤٥)، وأبو يعلى (٢١١٦) و (٢٢٢٤)، وأبو عوانة (٥٨٨٣)، والطحاوي في "شرح معاني الآثار" ٣/ ١٢٥، والحاكم ٤/ ٣٠٤ - ٣٥٥، وابن عبد البر في "الاستذكار" (٢٠٧٧٣) من طرق عن حماد بن سلمة، بهذا الإسناد. وأخرجه ابن عدي في "الكامل" ٢/ ٤٧٧، والبيهقي ١٠/ ٨٢ - ٨٣ من طريق حبيب بن الشهيد عن عطاء، به والإسناد إليه ضعيف. وقال ابن عدي: هذا الحديث بهذا الإسناد لا أعرفه إلا عن بكار هذا عن حبيب. وأخرجه عبد الرزاق (٩١٤٠) و (١٥٨٩١) من طريق إبراهيم بن يزيد، عن عطاء ابن أبي رباح قال: جاء الشريد إلى رسول الله ﷺ … فذكره مرسلاً. وإبراهيم بن يزيد هو الخُوزي متروك الحديث. وفي هذا الحديث دليل على أن من جعل لله عليه أن يُصليَ في مكان، فصلى في غيره أجزأه ذلك، قال في "بدائع الصنائع": وإن كان الشرط مقيداً لمكان بأن قال: لله علي أن أصلِّي ركعتين في موضع كذا، أو أتصدق على فقراء في بلد كذا يجوز أداؤه في غير ذلك المكان عند أبي حنيفة وأبي يوسف ومحمد بن الحسن.









সুনান আবী দাউদ (3306)


حَدَّثَنَا مَخْلَدُ بْنُ خَالِدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ، ح وَحَدَّثَنَا عَبَّاسٌ الْعَنْبَرِيُّ، - الْمَعْنَى - قَالَ حَدَّثَنَا رَوْحٌ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي يُوسُفُ بْنُ الْحَكَمِ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ، أَنَّهُ سَمِعَ حَفْصَ بْنَ عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ، وَعَمْرًا، وَقَالَ، عَبَّاسٌ ‏:‏ ابْنَ حَنَّةَ أَخْبَرَاهُ عَنْ عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ، عَنْ رِجَالٍ، مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِهَذَا الْخَبَرِ ‏.‏ زَادَ فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ وَالَّذِي بَعَثَ مُحَمَّدًا بِالْحَقِّ لَوْ صَلَّيْتَ هَا هُنَا لأَجْزَأَ عَنْكَ صَلاَةً فِي بَيْتِ الْمَقْدِسِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ ‏:‏ رَوَاهُ الأَنْصَارِيُّ عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ فَقَالَ جَعْفَرُ بْنُ عَمْرٍو، وَقَالَ عَمْرُو بْنُ حَيَّةَ وَقَالَ أَخْبَرَاهُ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ وَعَنْ رِجَالٍ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏




‘উমার ইবনু ‘আবদুর রহমান ইবনু ‘আওফ(রাহিমাহুল্লাহ) হতে নাবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কতিপয় সাহাবীর সূত্র হতে বর্ণিত, উপরের হাদীসটি বর্ণিত হয়েছে। এতে রয়েছেঃ নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ ঐ সত্তার শপথ, যিনি মুহাম্মাদকে সত্য দ্বীনসহ পাঠিয়েছেন! তুমি এখানে তোমার মানতের সলাত আদায় করে নিলে এটা তোমার বাইতুল মুকাদ্দাসে সলাত আদায়ের জন্য যথেষ্ট হতো।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: ضعيف الإسناد




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * إسنادہ ضعيف ، یوسف بن الحکم مستور،لم یوثقہ غیر ابن حبان و فی التحریر (7859): ’’ مجہول الحال ‘‘ ، (انوار الصحیفہ ص 120)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: حسن لغيره، وهذا إسناد ضعيف لجهالة يوسف بن الحكم، ويشهد له حديث جابر بن عبد الله السالف عند المصف قبله. مخلد بن خالد: هو ابن يزيد، وأبو عاصم: هو الضحاك بن مخلد الشيباني، وعباس العنبري: هو عباس بن عبد العظيم، ورَوْح: هو ابن عُبادة القيسي. وأخرجه عبد الرزاق (١٥٨٩٠)، وأحمد (٢٣١٦٩) و (٢٣١٧٠)، وابن عساكر في "تاريخ دمشق" ٤٥/ ١٢١ و ١٢٢ و ١٢٣، والمزي في ترجمة حفص بن عمر بن عبد الرحمن في "تهذيب الكمال" ٧/ ٣١ - ٣٢ من طرق عن ابن جريج، بهذا الإسناد.









সুনান আবী দাউদ (3307)


حَدَّثَنَا الْقَعْنَبِيُّ، قَالَ قَرَأْتُ عَلَى مَالِكٍ عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ، ‏:‏ أَنَّ سَعْدَ بْنَ عُبَادَةَ، اسْتَفْتَى رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏:‏ إِنَّ أُمِّي مَاتَتْ وَعَلَيْهَا نَذْرٌ لَمْ تَقْضِهِ ‏.‏ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ اقْضِهِ عَنْهَا ‏"‏ ‏.‏




আবদুল্লাহ ইবনু ‘আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, সা’দ ইবনু উবাদাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) নিকট ফাতাওয়াহ জানতে চেয়ে বললেন, আমার মা মারা গেছেন, কিন্তু তার একটি মানত আছে যা তিনি পুরণ করে যেতে পারেননি। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ তুমি তার পক্ষ হতে তা আদায় করো।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (2761) صحیح مسلم (1638)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. القعنبيُّ: هو عبد الله بن مسلمة، وعُبيد الله بن عَبد الله: هو ابن عتبة بن مسعود الهُذَلي. وهو في "الموطأ" ٢/ ٤٧٢. وأخرجه البخاري (٢٧٦١) و (٦٦٩٨) و (٦٩٥٩)، ومسلم (١٦٣٨)، وابن ماجه (٢١٣٢)، والترمذي (١٦٢٧)، والنسائي في "الكبرى" (٤٧٤٠ - ٤٧٤٢) و (٦٤٥٣) و (٦٤٥٦) و (٦٤٥٧) من طرق عن الزهري، بهذا الإسناد. وأخرجه النسائي (٦٤٥٠ - ٦٤٥٢) و (٦٤٥٥) من طرق عن الزهري، عن عُبيد الله، عن ابن عباس، عن سعد. فجعله من مسند سعد بن عبادة. ومثل هذا لا يضر، لأن كلاً من ابن عباس وسعد بن عبادة صحابي. ومرسل الصحابي حجة. وهو في "مسند أحمد" (١٨٩٣)، و"صحيح ابن حبان" (٤٣٩٣ - ٤٣٩٥).









সুনান আবী দাউদ (3308)


حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَوْنٍ، أَخْبَرَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ أَبِي بِشْرٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، ‏:‏ أَنَّ امْرَأَةً، رَكِبَتِ الْبَحْرَ فَنَذَرَتْ إِنْ نَجَّاهَا اللَّهُ أَنْ تَصُومَ شَهْرًا، فَنَجَّاهَا اللَّهُ فَلَمْ تَصُمْ حَتَّى مَاتَتْ، فَجَاءَتِ ابْنَتُهَا أَوْ أُخْتُهَا إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَأَمَرَهَا أَنْ تَصُومَ عَنْهَا ‏.‏




ইবনু ‘আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এক মহিলা সমুদ্র ভ্রমণে গিয়ে মানত করলো, আল্লাহ যদি তাকে নিরাপদে ফেরার সুযোগ দিলে সে এক মাস সাওম পালন করবে। অতঃপর আল্লাহ তাকে সমুদ্রের বিপদ থেকে মুক্তি দিলেন। কিন্তু সাওম পালনের পূর্বেই সে মারা গেল। তার মেয়ে অথবা বোন রাসূলুল্লাহ(সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট আসলে তিনি তাকে মৃতের পক্ষ হতে সওম পালনের নির্দেশ দিলেন।



সহীহঃ নাসায়ী (৩৮১৬)।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح ، رواہ النسائي (3847 وسندہ صحیح) ولہ شواھد عند أحمد (1/338 وسندہ صحیح) وغیرہ




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. هشيم -وهو ابن بشير وإن كان مدلساً وقد عنعن- تابعه شعبة بن الحجاج عن أبي بشر -وهو جعفر بن إياس- عند الطيالسي (٢٦٢١). وحماد ابن سلمة عن أبي بشر عند البيهقي ٤/ ٢٥٦ على أنه رواه غير أبي بشر أيضاً. وهذا الحديث هو الحديث الآتي برقم (٣٣١٠) غير أنه أُطلق هناك ذكر الصوم، وقُيِّد هنا بأنه صوم نذر، يوضح ذلك ويؤكده رواية شعبة لهذا الحديث عن الأعمش، عن مسلم البطين، عن سعيد بن جبير، عن ابن عباس، عند أحمد والنسائي. وقد نص المصنف على ذلك وحكاه عن الإِمام أحمد فيما سلف برقم (٢٤٠٠). وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٤٧٣٩) من طريق مسلم البطين، عن سعيد بن جبير، به. وهو في "مسند أحمد" (١٨٦١). وانظر ما سيأتي برقم (٣٣١٠).









সুনান আবী দাউদ (3309)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ، حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَطَاءٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، بُرَيْدَةَ ‏:‏ أَنَّ امْرَأَةً، أَتَتْ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَتْ ‏:‏ كُنْتُ تَصَدَّقْتُ عَلَى أُمِّي بِوَلِيدَةٍ، وَإِنَّهَا مَاتَتْ وَتَرَكَتْ تِلْكَ الْوَلِيدَةَ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ ‏ "‏ قَدْ وَجَبَ أَجْرُكِ، وَرَجَعَتْ إِلَيْكِ فِي الْمِيرَاثِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَتْ ‏:‏ وَإِنَّهَا مَاتَتْ وَعَلَيْهَا صَوْمُ شَهْرٍ ‏.‏ فَذَكَرَ نَحْوَ حَدِيثِ عَمْرٍو ‏.‏




বুরাইদাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এক মহিলা নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে এসে বলল, আমি আমার মাকে একটি দাসী দিয়েছিলাম। তিনি ঐ দাসী রেখে মারা গেছেন। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, তুমি সওয়াব পেয়েছো এবং ঐ দাসী উত্তরাধিকার সূত্রে পুনরায় তোমার মালিকানায় ফিরে এসেছে। সে বলল, তিনি এক মাসের সাওম বাকি রেখে মারা গেছেন। হাদীসের বাকি অংশ (উপরের) ‘আমর ইবনু ‘আওন বর্ণিত হাদীসের অনুরূপ।



সহীহঃ ইবনু মাজাহ (১৭৫৯,২৩৯৬)।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم (1149)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. زهير: هو ابن معاوية الجعفي. وقد سلف تخريجه برقم (٢٨٧٧).









সুনান আবী দাউদ (3310)


حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، قَالَ سَمِعْتُ الأَعْمَشَ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ، حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، - الْمَعْنَى - عَنْ مُسْلِمٍ الْبَطِينِ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، ‏:‏ أَنَّ امْرَأَةً، جَاءَتْ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَتْ ‏:‏ إِنَّهُ كَانَ عَلَى أُمِّهَا صَوْمُ شَهْرٍ أَفَأَقْضِيهِ عَنْهَا فَقَالَ ‏:‏ ‏"‏ لَوْ كَانَ عَلَى أُمِّكِ دَيْنٌ أَكُنْتِ قَاضِيَتَهُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَتْ ‏:‏ نَعَمْ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ ‏"‏ فَدَيْنُ اللَّهِ أَحَقُّ أَنْ يُقْضَى ‏"‏ ‏.‏




ইবনু ‘আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এক মহিলা নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর কাছে এসে বলেন, তার মায়ের এক মাসের সওম বাকি আছে। কাজেই আমি কি তার পক্ষ থেকে তা পূর্ণ করবো? তিনি বলেনঃ তোমার মা ঋণগ্রস্থ হলে তুমি কি তা পরিশোধ করতে না? মহিলা বলেন, হাঁ। তিনি বলেনঃ তবে আল্লাহ্‌র প্রাপ্য পরিশোধ করাটা অধিক অগ্রগণ্য।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (1953) صحیح مسلم (1148)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. مسدد: هو ابن مسرهد الأسدي، ويحيى: هو ابن سعيد القطان، والأعمش: هو سليمان بن مهران، ومسلم البطين: هو مسلم بن عمران الكوفي، وأبو معاوية: هو محمد بن خازم الضرير. وأخرجه البخاري (١٩٥٣)، ومسلم (١١٤٨)، وابن ماجه (١٧٥٨)، والترمذي (٧٢٥) و (٧٢٦)، والنسائي في "الكبرى" (٢٩٢٤ - ٢٩٢٨) من طرق عن الأعمش، بهذا الإسناد. وقد قرن بمسلم البطين في بعض طرقه الحكم وسلمةُ بن كهيل، وقرن أيضاً بسعيد بن جبير عطاءٌ ومجاهد. واختُلف أيضاً في ذكر السائل فبعضهم رجلاً، وبعضهم يذكر امرأةً تسأل عن أختها، وبعضهم يذكر صوم شهر كما عند المصنف، وبعضهم يذكر شهرين متتابعين. وهذا يؤيد أن المقصود بهذا الصوم المذكور صوم النذر. وهو في "مسند أحمد" (١٩٧٠)، و"صحيح ابن حبان" (٣٥٧٠). وأخرجه مسلم (١١٤٨)، والنسائي (٢٩٢٩) من طريق زيد بن أبي أُنيسة، عن الحكم بن عتيبة، عن سعيد بن جبير، عن ابن عباس. وقال فيه: عيها صوم نذر. وعلَّقه البخاري بإثر (١٩٥٣) بصيغة الجزم. وهذا كالحديث السالف برقم (٣٣٠٨) مُقيِّد لمطلق الصوم بأنه صوم نذر. وانظر ما سلف برقم (٣٣٠٨). تنبيه: هذا الحديث أثبتناه من (أ) و (هـ)، وأشار في (أ) إلى أنه في رواية ابن العبد، قلنا: وهو عندنا في (هـ) وهي برواية ابن داسه.









সুনান আবী দাউদ (3311)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ صَالِحٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ الْحَارِثِ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي جَعْفَرٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جَعْفَرِ بْنِ الزُّبَيْرِ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏:‏ ‏ "‏ مَنْ مَاتَ وَعَلَيْهِ صِيَامٌ صَامَ عَنْهُ وَلِيُّهُ ‏"‏ ‏.‏




আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ কোন ব্যক্তি সওম অনাদায়ী রেখে মারা গেলে তার পক্ষ হতে তার ওয়ারিসগণ সওম পালন করবে।



সহীহ। এটি সাওম অধ্যায়ে গত হয়েছে।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری (1952) صحیح مسلم (1147)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. أحمد بن صالح: هو المصري، وابن وهب: هو عبد الله القرشي، عمرو بن الحارث: هو ابن يعقوب الأنصاري. وقد سلف تخريجه برقم (٢٤٠٠). تنبيه: هذا الحديث أثبتناه من (أ) و (هـ)، وأشار في (أ) إلى أنه في رواية ابن العبدء قلنا: وهو أيضاً عندنا في (هـ) وهي برواية ابن داسه. لكنه جاء موضعه في (أ) بعد الحديث (٣٣٠٧). قال الحافظ في "الفتح" ٤/ ١٩٣: وقد اختلف السلف في مسألة الصيام عن الميت، فأجاز أصحاب الحديث الصيام عنه، وعلق الشافعي في القديم القول به على صحة الحديث كلما نقله البيهقي في "المعرفة" وهو قول أبي ثور وجماعة من محدثي الشافعية. وقال الشافعي في الجديد ومالك وأبو حنيفة لا يُصام عن الميت. وقال الليث وأحمد وإسحاق وأبو عبيد: لا يُصام عنه إلا النذر حملاً للعموم الذي في حديث عائشة على المقيد في حديث ابن عباس، وليس بينهما تعارض حتى يجمع بينهما فحديث ابن عباس صورة مستقلة سأل عنها من وقعت له، وأما حديث عائشة فهو تقرير قاعدة عامة، وقد وقعت الإشارة في حديث ابن عباس إلى نحو هذا العموم حيث قيل في آخره: فدين الله أحق أن يقضى، وأما رمضان فيطعم عنه. وقوله: "صام عنه وليه" خبر بمعنى الأمر تقديره: فليصم عنه وليه، وليس هذا الأمر للوجوب عند الجمهور.









সুনান আবী দাউদ (3312)


حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا الْحَارِثُ بْنُ عُبَيْدٍ أَبُو قُدَامَةَ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ الأَخْنَسِ، عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، ‏:‏ أَنَّ امْرَأَةً، أَتَتِ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَتْ ‏:‏ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي نَذَرْتُ أَنْ أَضْرِبَ عَلَى رَأْسِكَ بِالدُّفِّ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ ‏"‏ أَوْفِي بِنَذْرِكِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَتْ ‏:‏ إِنِّي نَذَرْتُ أَنْ أَذْبَحَ بِمَكَانِ كَذَا وَكَذَا، مَكَانٌ كَانَ يَذْبَحُ فِيهِ أَهْلُ الْجَاهِلِيَّةِ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ ‏"‏ لِصَنَمٍ ‏"‏ ‏.‏ قَالَتْ ‏:‏ لاَ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ ‏"‏ لِوَثَنٍ ‏"‏ ‏.‏ قَالَتْ ‏:‏ لاَ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ ‏"‏ أَوْفِي بِنَذْرِكِ ‏"‏ ‏.‏




‘আমর ইবনু শু’আইব (রাহিমাহুল্লাহ) হতে তার পিতার সূত্র হতে বর্ণিত, তিনি তার দাদার সূত্রে বর্ণনা করেন, এক মহিলা নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর কাছে এসে বলেন, হে আল্লাহর রাসূল! আমি মানত করেছি যে, আমার মাথার উপর দফ বাজাবো। তিনি বললেনঃ তোমার মানত পূর্ণ করো। মহিলাটি আবার বললেনঃ আমি অমুক অমুক স্থানে যাবাহ করার মানত করেছি। বর্ণনাকারী বলেন, ঐসব স্থানে জাহিলী যুগে কুরবানি করা হতো। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) জিজ্ঞেস করেন, তোমার এ কোরবানি কি কোন মূর্তির জন্য? সে বলল, না। তিনি বললেনঃ তাহলে তোমার মানত পূর্ণ করো।



হাসান সহীহঃ ইরওয়া (৪৫৭৮)।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: حسن صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن ، مشکوۃ المصابیح (3438)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: صحيح لغيره، وهذا إسناد حسن في المتابعات والشواهد. الحارث بن عُبيد ضعيف يعتبر به. وقد روي ما يشهد لحديثه. وأخرجه البيهقي ١٠/ ٧٧ من طريق أبي داود، بهذا الإسناد. وله شاهد من حديث بريدة الأسلمي بسند قوي عند أحمد (٢٢٩٨٩)، والترمذي (٤٠٢٢)، وابن حبان (٦٨٩٢)، وقال الترمذي: حسن صحيح غريب. قال البيهقي: يشبه أن يكون ﷺ إنما أذن لها في الضرب لأنه أمر مباح، وفيه إظهار الفرح بظهور رسول الله ﷺ، ورجوعه سالماً لا أنه يجب بالنذر. وتعقبه الحافظ في "الفتح" ١١/ ٥٨٨ فقال: إن من قسم المباح ما قد يصير بالقصد مندوباً كالنوم في القائلة للتقوي على قيام الليل، وأكلة السحور للتقوي على صيام النهار، فيمكن أن يُقال: إن إظهار الفرح بعود النبىٍ ﷺ سالماً معنى مقصود يحصل به الثواب. وقد اختلف في جواز الضرب بالدف على غير النكاح والختان، ورجح الرافعي في "المحرر" وتبعه في "المنهاج" الإباحة والحديث حجة في ذلك. وقال الإِمام الخطابي: ضرب الدف ليس مما يعد في باب الطاعات التي يتعلق بها النذور، وأحسن حاله أن يكون من باب المباح، غير أنه لما اتصل بإظهار الفرح لسلامة مقدم رسول الله ﷺ حين قدم من بعض غزواته، وكانت فيه مساءة الكفار وإرغام المنافقين، صار فعله كبعض القرب، ولهذا استُحب ضرب الدف في النكاح لما فيه من إظهاره والخروج به عن معنى السفاح الذي لا يظهر، ومما يشبه هذا المعنى قول النبي ﷺ في هجاء الكفار: "اهجوا قريشاً، فإنه أشد عليهم من رشْق النبل". تنبيه: هذا الحديث جاء في أصولنا الخطية متاخراً إلى آخر الباب.









সুনান আবী দাউদ (3313)


حَدَّثَنَا دَاوُدُ بْنُ رُشَيْدٍ، حَدَّثَنَا شُعَيْبُ بْنُ إِسْحَاقَ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو قِلاَبَةَ، قَالَ حَدَّثَنِي ثَابِتُ بْنُ الضَّحَّاكِ، قَالَ ‏:‏ نَذَرَ رَجُلٌ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ يَنْحَرَ إِبِلاً بِبُوَانَةَ، فَأَتَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏:‏ إِنِّي نَذَرْتُ أَنْ أَنْحَرَ إِبِلاً بِبُوَانَةَ ‏.‏ فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏:‏ ‏"‏ هَلْ كَانَ فِيهَا وَثَنٌ مِنْ أَوْثَانِ الْجَاهِلِيَّةِ يُعْبَدُ ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا ‏:‏ لاَ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ ‏"‏ هَلْ كَانَ فِيهَا عِيدٌ مِنْ أَعْيَادِهِمْ ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا ‏:‏ لاَ ‏.‏ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏:‏ ‏"‏ أَوْفِ بِنَذْرِكَ، فَإِنَّهُ لاَ وَفَاءَ لِنَذْرٍ فِي مَعْصِيَةِ اللَّهِ وَلاَ فِيمَا لاَ يَمْلِكُ ابْنُ آدَمَ ‏"‏ ‏.‏




সাবিত ইবনুদ দাহহাক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর যুগে এক ব্যক্তি মানত করে যে, সে বুওয়ানা নামক স্থানে একটি উট যাবাহ করবে। সে নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর কাছে এসে বললো, আমি বুওয়ানা নামক স্থানে একটি উট কুরবানি করার মানত করেছি। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ সেখানে কি জাহেলী যুগের কোন মূর্তি রয়েছে? লোকেরা বলল, না। তিনি পুনরায় জিজ্ঞেস করলেনঃ সেখানে কি তাদের কোন মেলা বসতো? লোকেরা বলল, না। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ তোমার মানত পূর্ণ করতে পারো। কেননা আল্লাহ্‌র নাফরমানীমূলক কাজের জন্য কৃত মানত পূর্ণ করা জায়িয নয় এবং আদম সন্তান যে জিনিসের মালিক নয় তারও কোন মানত নেই।



সহীহঃ মিশকাত (৩৪৩৭)।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح ، مشکوۃ المصابیح (3437، 3438)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده صحيح. كما قال ابن الملقن في "البدر المنير" ٩/ ٥١٨، ووافقه الحافظ في "التلخيص" ٤/ ١٨٠.الأوزاعي: هو عبد الرحمن بن عمرو، وأبو قِلابة: هو عبد الله بن زيد الجَرْمي. وأخرجه الطبراني في "المعجم الكبير" (١٣٤١)، والبيهقي ١٠/ ٨٣ من طريق داود بن رشيد، بهذا الإسناد. وانظر ما بعده. وبُوانة: هضبة من وراء ينبع، قاله في "النهاية".









সুনান আবী দাউদ (3314)


حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ بْنِ مِقْسَمٍ الثَّقَفِيُّ، مِنْ أَهْلِ الطَّائِفِ قَالَ حَدَّثَتْنِي سَارَّةُ بِنْتُ مِقْسَمٍ الثَّقَفِيِّ، أَنَّهَا سَمِعَتْ مَيْمُونَةَ بِنْتَ كَرْدَمٍ، قَالَتْ ‏:‏ خَرَجْتُ مَعَ أَبِي فِي حَجَّةِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَرَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَسَمِعْتُ النَّاسَ يَقُولُونَ ‏:‏ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَجَعَلْتُ أُبِدُّهُ بَصَرِي، فَدَنَا إِلَيْهِ أَبِي وَهُوَ عَلَى نَاقَةٍ لَهُ مَعَهُ دِرَّةٌ كَدِرَّةِ الْكُتَّابِ، فَسَمِعْتُ الأَعْرَابَ وَالنَّاسَ يَقُولُونَ ‏:‏ الطَّبْطَبِيَّةَ الطَّبْطَبِيَّةَ، فَدَنَا إِلَيْهِ أَبِي فَأَخَذَ بِقَدَمِهِ قَالَتْ ‏:‏ فَأَقَرَّ لَهُ وَوَقَفَ فَاسْتَمَعَ مِنْهُ فَقَالَ ‏:‏ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي نَذَرْتُ إِنْ وُلِدَ لِي وَلَدٌ ذَكَرٌ أَنْ أَنْحَرَ عَلَى رَأْسِ بُوَانَةَ فِي عَقَبَةٍ مِنَ الثَّنَايَا عِدَّةً مِنَ الْغَنَمِ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ لاَ أَعْلَمُ إِلاَّ أَنَّهَا قَالَتْ خَمْسِينَ ‏.‏ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏:‏ ‏"‏ هَلْ بِهَا مِنَ الأَوْثَانِ شَىْءٌ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ لاَ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ ‏"‏ فَأَوْفِ بِمَا نَذَرْتَ بِهِ لِلَّهِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَتْ ‏:‏ فَجَمَعَهَا فَجَعَلَ يَذْبَحُهَا فَانْفَلَتَتْ مِنْهَا شَاةٌ فَطَلَبَهَا، وَهُوَ يَقُولُ ‏:‏ اللَّهُمَّ أَوْفِ عَنِّي نَذْرِي ‏.‏ فَظَفِرَهَا فَذَبَحَهَا ‏.‏




কারদাম-কন্যা মায়মূনাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, আমি আমার পিতার সাথে রাসূলুল্লাহর (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বিদায় হাজ্জের উদ্দেশে রওয়ানা হই। আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে দেখতে পেলাম। আমি যখন লোকজনকে বলতে শুনলাম রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তখন আমি এক দৃষ্টিতে তাঁর দিকে তাকিয়ে রইলাম। আমার পিতা তাঁর কাছে গেলেন, তখন তিনি তাঁর উষ্ট্রীতে আরোহিত ছিলেন। তার সাথে সচিবের চাবুকের মত একটি চাবুক ছিল। আমি লোকদেরকে এবং বেদুইনদেরকে বলতে শুনলাম, চাবুক, চাবুক। আমার পিতা তাঁর কাছে গিয়ে তাঁর পা ধরলেন। বর্ণনাকারী বলেন, আমার পিতা তাঁর নবুওয়াতের স্বীকারোক্তি করলেন এবং তাঁর কথা শুনলেন। তিনি বললেন, হে আল্লাহর রাসূল! আমি মানত করেছিলাম, আমার একটি পুত্র সন্তান হলে আমি বুওয়ানার শেষ প্রান্তে পাহাড়ের পাদদেশে কিছু সংখ্যক মেষ যাবাহ করবো। অধস্তন বর্ণনাকারী বলেন, আমার মনে হয় মায়মূনাহ(রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) পঞ্চাশটি বলেছেন। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) জিজ্ঞেস করলেনঃ সেখানে কি কোন প্রতিমা আছে? তিনি বললেন, না। তিনি বলেনঃ তাহলে তুমি আল্লাহর নামে কৃত তোমার মানত পূর্ণ করতে পারো। বর্ণনাকারী বলেন, তিনি তার মেষগুলো একত্র করে যাবাহ করতে লাগলেন। তার মধ্যে একটি মেষ ছুটে পালালে তিনি এই এই বলতে বলতে তার পিছু ধাওয়া করেনঃ ‘হে আল্লাহ! আপনি আমার পক্ষ হতে আমার মানত পূর্ণ করুন। সুতরাং তিনি সেটিকে ধরে ফেলেন এবং যাবাহ করেন।



সহীহঃ ইবনু মাজাহ (২১৩১)।




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: * ضعیف ، انظر الحدیث السابق (2103) ، و حدیث الأصل (3315) یغني عنہ ، (انوار الصحیفہ ص 120)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: إسناده ضعيف لجهالة حال سارة بنت مقسم، فقد إنفرد بالرواية عنها ابن أخيها عبد الله بن يزيد بن مقسم الضبي، وقصة النذر ببوانة وردت من طريق آخر عن ميمونة بنت كردم بسند حسن، ويشهد لها أيضاً حديث الضحاك بن ثابت السالف قبله، وإسناده صحيح. وأخرجه مختصراً بقصة بُوانة ابنُ ماجه (٢١٣١/ م) من طريق عبد الله بن عبد الرحمن الطائفي، عن يزيد بن مقسم، عن ميمونة بنت كَرْدَم. وسنده حسن كما قال ابن الملقن في "البدر المنير" ٩/ ٥١٩. وأخرجه ابن ماجه (٢١٣١) من طريق عبد الله بن عبد الله الطائفي، عن ميمونة. دون ذكر يزيد بن مقسم وهو منقطع. وهو في "مسند أحمد" (١٥٤٥٦) و (٢٧٠٦٤) و (٢٧٠٦٦). وفي الباب عن ابن عباس عند ابن ماجه (٢١٣٠)، وهو حسن في الشواهد. وحسّن إسناده ابن الملقن في "البدر المنير" ٩/ ٥١٩. والدِّرة: السوط، والطَّبْطَبيَّة: قيل: هي حكايته وقع الاقدام، أي: يقولون بأرجلهم على الأرض طب طب، أي: أن الناس يسمعون لاقدامهم صوت: طب طب، أو كناية عن الدِّرة، فإنها إذا ضرب بها حكت صوت طب طب. وقولها: أُبِدُّه بصري: قال الخطابي: معناه: أُتبعه بصري وألزمه إياه لا أقطعه عنه. تنيه: هذا الحديث أثبتناه من (أ) و (هـ)، وَأشار في (أ) إلى أنه في رواية ابن العبد. قلنا: وهو عندنا في (هـ) وهي برواية ابن داسه.