হাদীস বিএন


সুনান ইবনু মাজাহ





সুনান ইবনু মাজাহ (1961)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ عُمَرَ حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عَبْدِ اللهِ وَالْحَسَنِ ابْنَيْ مُحَمَّدِ بْنِ عَلِيٍّ عَنْ أَبِيهِمَا عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنْ مُتْعَةِ النِّسَاءِ يَوْمَ خَيْبَرَ وَعَنْ لُحُومِ الْحُمُرِ الْإِنْسِيَّةِ




আলী বিন আবূ তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) খায়বার এলাকা বিজয়ের দিন মহিলাদের সাথে মুতআ (বিবাহ) করতে এবং গৃহপালিত গাধার গোসত খেতে নিষেধ করেছেন। [১৯৬১]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: بخاری ومسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. وأخرجه البخاري (٤٢١٦)، ومسلم (١٤٠٧)، والترمذي (١١٤٩) و (١٨٩٧)، والنسائي ٦/ ١٢٥ - ١٢٦ و ١٢٦ و ٢٠٢/ ٧ و ٢٠٢ - ٢٠٣ من طريق الزهري، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٥٩٢)، و"صحيح ابن حبان" (٤١٤٠) و (٤١٤٣)، وانظر لزامًا "زاد المعاد" ٣/ ٤٠٠ و٥/ ١١١ بتحقيقنا.









সুনান ইবনু মাজাহ (1962)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عَبْدَةُ بْنُ سُلَيْمَانَ عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ عُمَرَ عَنْ الرَّبِيعِ بْنِ سَبْرَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَ خَرَجْنَا مَعَ رَسُولِ اللهِ صلى الله عليه وسلم فِي حَجَّةِ الْوَدَاعِ فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللهِ إِنَّ الْعُزْبَةَ قَدْ اشْتَدَّتْ عَلَيْنَا قَالَ فَاسْتَمْتِعُوا مِنْ هَذِهِ النِّسَاءِ فَأَتَيْنَاهُنَّ فَأَبَيْنَ أَنْ يَنْكِحْنَنَا إِلَّا أَنْ نَجْعَلَ بَيْنَنَا وَبَيْنَهُنَّ أَجَلًا فَذَكَرُوا ذَلِكَ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ اجْعَلُوا بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُنَّ أَجَلًا فَخَرَجْتُ أَنَا وَابْنُ عَمٍّ لِي مَعَهُ بُرْدٌ وَمَعِي بُرْدٌ وَبُرْدُهُ أَجْوَدُ مِنْ بُرْدِي وَأَنَا أَشَبُّ مِنْهُ فَأَتَيْنَا عَلَى امْرَأَةٍ فَقَالَتْ بُرْدٌ كَبُرْدٍ فَتَزَوَّجْتُهَا فَمَكَثْتُ عِنْدَهَا تِلْكَ اللَّيْلَةَ ثُمَّ غَدَوْتُ وَرَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم قَائِمٌ بَيْنَ الرُّكْنِ وَالْبَابِ وَهُوَ يَقُولُ أَيُّهَا النَّاسُ إِنِّي قَدْ كُنْتُ أَذِنْتُ لَكُمْ فِي الِاسْتِمْتَاعِ أَلَا وَإِنَّ اللهَ قَدْ حَرَّمَهَا إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ فَمَنْ كَانَ عِنْدَهُ مِنْهُنَّ شَيْءٌ فَلْيُخْلِ سَبِيلَهَا وَلَا تَأْخُذُوا مِمَّا آتَيْتُمُوهُنَّ شَيْئًا




সাবরাহ বিন মা’বাদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বললেন, হে আল্লাহর রসূল! স্ত্রীহীন অবস্থায় থাকা আমাদের জন্য কষ্টকর হয়ে দাঁড়িয়েছে। তিনি বলেনঃ তাহলে তোমরা এসব মহিলার সাথে মুতআ করো (সাময়িকভাবে উপকৃত হও)। অতএব আমরা তাদের সান্নিধ্যে পৌঁছলাম, কিন্তু তারা আমাদের এবং তাদের মাঝে নির্দিষ্ট মেয়াদ নির্ধারণ ব্যতিত আমাদের সঙ্গে বিবাহ বসতে অস্বীকার করলো। সাহাবীগণ বিষয়টি রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর নিকট উল্লেখ করলে তিনি বলেনঃ তাহলে তোমাদের ও তাদের মাঝে মেয়াদ নির্দিষ্ট করে নাও। অতএব আমি ও আমার এক চাচাত ভাই (এই উদ্দেশে) বের হলাম। তাঁর সাথে ছিল একটি চাদর এবং আমার সাথেও ছিল একটি চাদর। তার চাদরটি ছিল আমার চাদর থেকে বেশি সুন্দর। আর আমি ছিলাম তার চাইতে অধিক যুবক। আমরা দু’জন এক নারীর নিকট আসলাম। সে বললো, চাদর দু’টি তো একই মানের। অতঃপর আমি তাকে বিবাহ করলাম এবং তার কাছেই ঐ রাত কাটালাম। ভোরে আমি ফিরে এলাম, তখন রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কা’বা ঘরের দরজা ও রুকনের মাঝখানে দাঁড়িয়ে বলছিলেনঃ হে লোক সকল! আমি তোমাদের মুতআ বিবাহের অনুমতি দিয়েছিলাম। এখন তোমরা শুনে নাও যে, আল্লাহ্‌ কিয়ামাত পর্যন্ত এই প্রকার বিবাহ হারাম করেছেন। অতএব তোমাদের কারো কাছে এ ধরণের কোন নারী থাকলে সে যেন তাকে ছেড়ে দেয় এবং তোমরা তাদেরকে যা কিছু দিয়েছো তা থেকে কিছুই ফেরত নিও না। [১৯৬২]

তাহকীক আলবানীঃ (আরবি) শব্দ ছাড়া সহীহ, তবে সঠিক হলোঃ (আরবি)।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح دون قوله حجة الوداع والصواب يوم الفتح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. وأخرجه مسلم (١٤٠٦)، والنسائي ٦/ ١٢٦ - ١٢٧ من طريق الربيع بن سبرة، عن أبيه. وأخرجه مختصرًا بذكر النهي عن المتعة مسلم (١٤٠٦) (٢٤) - (٢٦)، وأبو داود (٢٠٧٢) و (٢٠٧٣) من طريق الزهري، عن الربيع، به. وهو في "مسند أحمد" (١٥٣٣٧)، و"صحيح ابن حبان" (٤١٤٤) و (٤١٤٦). فائدة: اختلف على الربيع بن سبرة في تعيين وقت التحريم، فروي عنه في حجة الوداع، وروي عنه عام فتح مكة. قال الحافظ في "التلخيص" ٢/ ١٥٦: ويجاب عنه بجوابين: أحدهما: أن المراد بذكر ذلك في حجة الوداع إشاعة النهي والتحريم لكثرة من حضرها من الخلائق. والثاني: احتمال أن يكون انتقل ذهن أحد رواته من فتح مكة إلى حجة الوداع، لأن أكثر الرواة عن سبرة أن ذلك في الفتح.









সুনান ইবনু মাজাহ (1963)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ خَلَفٍ الْعَسْقَلَانِيُّ حَدَّثَنَا الْفِرْيَابِيُّ عَنْ أَبَانَ بْنِ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ حَفْصٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَ لَمَّا وَلِيَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ خَطَبَ النَّاسَ فَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم أَذِنَ لَنَا فِي الْمُتْعَةِ ثَلَاثًا ثُمَّ حَرَّمَهَا وَاللهِ لَا أَعْلَمُ أَحَدًا يَتَمَتَّعُ وَهُوَ مُحْصَنٌ إِلَّا رَجَمْتُهُ بِالْحِجَارَةِ إِلَّا أَنْ يَأْتِيَنِي بِأَرْبَعَةٍ يَشْهَدُونَ أَنَّ رَسُولَ اللهِ أَحَلَّهَا بَعْدَ إِذْ حَرَّمَهَا




ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, উমার ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) খলীফা নির্বাচিত হওয়ার পর লোকেদের উদ্দেশে ভাষণ দিতে গিয়ে বলেন, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাদেরকে মাত্র তিন দিন মুতআ বিবাহের অনুমতি দিয়েছিলেন। এরপর তিনি তা হারাম ঘোষণা করেন। আল্লাহ্‌র শপথ! আমি যদি কোন বিবাহিত পুরুষের ব্যাপারে জানতে পারি যে সে মুতআ বিবাহ করে তবে আমি প্রস্তরাঘাতে তাকে মৃত্যুদণ্ড দিবো। তবে সে যদি আমার সামনে চারজন সাক্ষী উপস্থিত করতে পারে, যারা সাক্ষ্য দিবে যে, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মুতআ বিবাহ হারাম ঘোষণার পর তা আবার হালাল করেছেন। [১৯৬৩]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. وهذا سند حسن من أجل أبان بن أبي حازم. أبو بكر بن حفص هو عبد الله بن حفص بن عمر بن سعد بن أبي وقاص. وأخرجه بنحوه مسلم (١٢١٧) من طريق أبي نضرة عن جابر بن عبد الله قال: فلما قام عمر قال: إن الله كان يحل لرسوله ما شاء بما شاء، وإن القرآن قد نزل منازله … ، وأبِتُّوا نكاحَ هذه النساء، فلن أُوتَى برجل نكح امرأةَ إلى أجلٍ، إلا رجمتُه بالحجارة.









সুনান ইবনু মাজাহ (1964)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ حَدَّثَنَا جَرِيرُ بْنُ حَازِمٍ حَدَّثَنَا أَبُو فَزَارَةَ عَنْ يَزِيدَ بْنِ الْأَصَمِّ حَدَّثَتْنِي مَيْمُونَةُ بِنْتُ الْحَارِثِ أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم تَزَوَّجَهَا وَهُوَ حَلَالٌ قَالَ وَكَانَتْ خَالَتِي وَخَالَةَ ابْنِ عَبَّاسٍ




মায়মূনাহ বিনতুল হারিস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে হালাল (ইহরামমুক্ত) অবস্থায় বিবাহ করেন। রাবী ইয়াযীদ বিন আসাম্ম বলেন, মায়মূনাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) ছিলেন আমার ও ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -এর খালা। [১৯৬৪]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. وأخرجه البخاري (١٨٣٧)، ومسلم (١٤١٠)، وأبو داود (١٨٤٤)، والترمذي (٨٥٨) و (٨٥٩) و (٨٦٠)، والنسائي ٥/ ١٩١ و ٦/ ٨٧ - ٨٨ من طريق عمرو بن دينار، بهذا الإسناد. وعند الجميع أن التي تزوجها ﷺ هي ميمونة. وهو في "مسند أحمد" (١٩١٩)، و"صحيح ابن حبان" (٤١٣٣). وأخرجه البخاري (١٨٣٧) و (٤٢٥٨)، وأبو داود (١٨٤٤)، والترمذي (٨٥٨) و (٨٥٩)، والنسائي ٥/ ١٩١ و ١٩٢ و ٦/ ٨٧ و ٨٨ من طرق عن ابن عباس. وفي الباب عن عائشة عند البزار (١٤٤٣ - كشف الأستار)، والطحاوي في "شرح معاني الآثار" ٢/ ٢٦٩، وابن حبان (٤١٣٢)، والبيهقي ٧/ ٢١٢ وإسناده صحيح. ولفظه: تزوج رسول الله ﷺ بعض نسائه وهو محرم، واحتجم وهو محرم. قال الحافظ في "الفتح" ٩/ ١٦٦: وأكثر ما أعل بالإرسال، وليس ذلك بقادح فيه. وعن أبي هريرة عند الدارقطني ٣/ ٢٦٣ وإسناده حسن في الشواهد. قال البغوي في "شرح السنة" ٧/ ٢٥١ - ٢٥٢: والأكثرون على أنه تزوجها حلالًا، فظهر أمر تزويجها وهو محرم، ثم بني بها وهو حلال بسَرِف في طريق مكة. وقال الحافظ في "الفتح" ٤/ ٥٢: واختلف العلماءُ في هذه المسألة، فالجمهور على المنع لحديث عثمان: "لا ينكح المحرم ولا ينكح" أخرجه مسلم [(١٤٠٩)] وأجابوا عن حديث ميمونة بأنه اختلف في الواقعة كيف كانت، ولا تقوم بها الحجة، ولأنها تحتمل الخصوصية، فكان الحديث في النهي عن ذلك أولى بأن يؤخذ به، وقال عطاء وعكرمة وأهل الكوفة: يجوز للمحرم أن يتزوج كما يجوز له أن يشتري الجارية للوطء. وتعقب بأنه قياس في معارضة السنة فلا يعتبر به، وأما تاويلهم حديث عثمان بأن المراد به الوطء فمتعقبٌ بالتصريح فيه بقوله: "ولا يُنكِح، بضم أوله، وبقوله: "ولا يَخطُب". وقال ابن عبد البر في "التمهيد" ٣/ ١٥٢: والرواية أن رسول الله ﷺ تزوج ميمونة وهو حلال متواترة عن ميمونة بعينها، وعن أبي رافع مولى النبي ﷺ، وعن سليمان بن يسار مولاها، وعن يزيد بن الأصم وهو ابن أختها، وهو قول سعيد بن المسيب، وسليمان بن يسار، وأبي بكر بن عبد الرحمن وابن شهاب وجمهور علماء المدينة: أن رسول الله ﷺ لم ينكح ميمونة إلا وهو حلال قبل أن يحرم، وما أعلم أحدًا روى من الصحابة أن رسول الله نكح ميمونة وهو محرم إلا عبد الله بن عباس، ورواية من ذكر معارضة لروايته، والقلب إلى رواية الجماعة أميل، لأن الواحد أقرب إلى الغلط …









সুনান ইবনু মাজাহ (1965)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ خَلَّادٍ الْبَاهِلِيِّ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ عَنْ جَابِرِ بْنِ زَيْدٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنْ أَبِيّ صلى الله عليه وسلم نَكَحَ وَهُوَ مُحْرِمٍ




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ইহরাম অবস্থায় বিবাহ করেন। [১৯৬৫]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * شاذ




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. أبو فَزارة: هو راشد بن كَيسان العبسي الكوفي. وأخرجه مسلم (١٤١١)، وأبو داود (١٨٤٣)، والترمذي (٨٦٠)، والنسائي في "الكبرى" (٥٣٨٣) من طريق يزيد بن الأصم، عن ميمونة. وفي رواية الترمذي والنسائي قالت: إن رسول الله ﷺ تزوجها وهو حلال، وبنى بها حلالًا. وهو في "مسند أحمد" (٢٦٨١٥)، و"صحيح ابن حبان" (٤١٣٤). وأخرجه مرسلًا النسائي (٥٣٨٤) من طريق شعبة، عن الحكم، عن يزيد بن الأصم قال: ما تزوج رسولُ الله ﷺ ميمونة وهو محرم.









সুনান ইবনু মাজাহ (1966)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللهِ بْنُ رَجَاءٍ الْمَكِّيُّ عَنْ مَالِكِ بْنِ أَنَسٍ عَنْ نَافِعٍ عَنْ نَبِيهِ بْنِ وَهْبٍ عَنْ أَبَانَ بْنِ عُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ عَنْ أَبِيهِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم الْمُحْرِمُ لَا يَنْكِحُ وَلَا يُنْكِحُ وَلَا يَخْطُبُ




উসমান বিন আফফান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, ইহরাম অবস্থায় কোন ব্যক্তি নিজে বিবাহ করবে না, অন্যকেও বিবাহ করাবে না এবং বিবাহের প্রস্তাবও দিবে না। [১৯৬৬]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. وهو في "موطأ مالك" ١/ ٣٤٨ - ٣٤٩. وأخرجه مسلم (١٤٠٩)، وأبو داود (١٨٤١) و (١٨٤٢)، والترمذي (٨٥٦)، والنسائي ٥/ ١٩٢ و ٦/ ٨٨ و ٨٨ - ٨٩ من طريق نبيه بن وهب، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٤٠١)، و"صحيح ابن حبان" (٤١٢٣).









সুনান ইবনু মাজাহ (1967)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَابُورَ الرَّقِّيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْحَمِيدِ بْنُ سُلَيْمَانَ الْأَنْصَارِيُّ أَخُو فُلَيْحٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَجْلَانَ عَنْ ابْنِ وَثِيمَةَ النَّصْرِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا أَتَاكُمْ مَنْ تَرْضَوْنَ خُلُقَهُ وَدِينَهُ فَزَوِّجُوهُ إِلَّا تَفْعَلُوا تَكُنْ فِتْنَةٌ فِي الْأَرْضِ وَفَسَادٌ عَرِيضٌ




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ তোমাদের নিকট এমন কোন ব্যক্তি বিবাহের প্রস্তাব নিয়ে এলের চরিত্র ও ধর্মানুরাগ সম্পর্কে তোমরা সন্তুষ্ট,তার সাথে (তোমাদের মেয়েদের) বিবাহ দাও। তোমরা যদি তা না করো, তাহলে পৃথিবীতে বিপর্যয় ও ব্যাপক বিশৃঙ্খলা ছড়িয়ে পড়বে। [১৯৬৭]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، ترمذي (1084)، (انوار الصحیفہ ص 449)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حسن لغيره، وهذا إسناد ضعيف لضعف عبد الحميد بن سليمان: وهو الخُزاعي. ابن وثيمة النصري: هو زُفَر، وقد خالف عبدَ الحميد الليثُ بن سعد عند أبي داود في "المراسيل" (٢٢٥)، وعبد العزيز بن محمَّد الدراوردي عند سعيد ابن منصور (٥٩٠) فروياه عن ابن عجلان، عن عبد الله بن هرمز اليماني مرسلًا، ونقل الترمذي عن البخاري قوله: وهو أشبه، ولم يعدّ حديث عبد الحميد محفوظًا. وأخرجه الترمذي (١١٠٩)، وابن حبان في "المجروحين" ٢/ ١٤١ - ١٤٢، والحاكم ٢/ ١٦٤ - ١٦٥، والخطيب البغدادي في "تاريخ بغداد" ١١/ ٦١، والمزي في ترجمة زفر بن وثيمة من "تهذيب الكمال" ٩/ ٣٥٥ من طريق عبد الحميد بن سليمان، بهذا الإسناد. ويشهد له حديث أبي حاتم المزني عند أبي داود في "المراسيل" (٢٢٤)، والترمذي (١٠٨٥) وغيرهما، وقال الترمذي: حسن غريب، وأبو حاتم المزني له صحبة، ولا نعرف له عن النبي ﷺ غير هذا الحديث. قلنا: كذا قال مع أن في إسناده عبد الله بن مسلم بن هرمز وهو ضعيف، وسعيد ومحمد ابني عبيد مجهولان، إلا أنه يتقوى بحديثنا ويقويه. وأخرج عبد الرزاق (١٠٣٢٥) عن معمر، عن يحيى بن أبي كثير، قال: قال رسول الله ﷺ: … الحديث وهو مرسل رجاله ثقات. وفي الباب عن عائشة عند البخاري (٥٠٨٨) أن أبا حذيفة بن عتبة بن ربيعة بن عبد شمس وكان ممن شهد بدرًا مع النبي ﷺ تبنَّى سالما وأنكحه ابنة أخيه الوليد بن عتبة بن ربيعة وهو مولى امرأة من الأنصار.









সুনান ইবনু মাজাহ (1968)


حَدَّثَنَا عَبْدُ اللهِ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا الْحَارِثُ بْنُ عِمْرَانَ الْجَعْفَرِيُّ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم تَخَيَّرُوا لِنُطَفِكُمْ وَانْكِحُوا الْأَكْفَاءَ وَأَنْكِحُوا إِلَيْهِمْ




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ তোমরা ভবিষ্যত বংশধরদের স্বার্থে উত্তম মহিলা গ্রহণ করো এবং সমতা (কুফু) বিবেচনায় বিবাহ করো, আর বিবাহ দিতেও সমতার প্রতি লক্ষ্য রাখো। [১৯৬৮]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف جدا منکر، (انوار الصحیفہ ص 449)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث حسن بطرقه وشواهده، وهذا إسناد ضعيف لضعف الحارث بن عمران الجعفري وقد توبع كما سيأتي. وقد حسنه الحافظ في "التلخيص" ٣/ ١٤٦، وفي "الفتح" ٩/ ١٢٥. وأخرجه ابن أبي حاتم في "العلل" ١/ ٤٠٣ و ٤٠٤، وابن حبان في "المجروحين" ١/ ٢٢٥، وابن عدي في ترجمة الحارث بن عمران من "الكامل" ٢/ ٦١٤، والدارقطني (٣٧٨٨)، والحاكم ٢/ ١٦٣، والقضاعي في "مسند الشهاب" (٦٦٧)، والبيهقي ٧/ ١٣٣، والخطب البغدادي في "تاريخ بغداد" ١/ ٢٦٤، وابن الجوزي في "العلل المتناهية" (١٠٠٩) من طريق الحارث بن عمران الجعفري، وابن أبي الدنيا في "العيال" (١٣٠)، وابن عساكر في "تاريخ دمشق" ٥/ ورقة ٢٤١ - ٢٤٢ من طريق الحكم بن هشام الثقفي، وابن أبي الدنيا (١٣١)، والحاكم ٢/ ١٦٣، والبيهقي ٧/ ١٣٣ من طريق عكرمة ابن إبراهيم الأزدي، والدارقطني (٣٧٨٦)، وابن الجوزي في "العلل" (١٠١٠) من طريق صالح بن موسى، وأخرجه الدارقطني (٣٧٨٧)، وابن الجوزي (١٠١١) من طريق أبي أمية بن يعلى الثقفي -واسمه إسماعيل-، وابن حبان في "المجروحين" ٢/ ٢٨٦ من طريق محمَّد بن مروان السُّديِّ، ستتهم عن هشام بن عروة، بهذا الإسناد. قلنا: أمثلُ هذه الطرق طريق الحكم بن هشام الثقفي، وبمجموعها يتحسن الحديث. وفي الباب عن أنس بن مالك عند تمام الرازي في "فوائده" (٧٤١)، وأبي نعيم الأصبهاني في "الحلية" ٣/ ٣٧٧، وابن الجوزي في "العلل المتناهية" (١٠٠٨)، والضياء المقدسي في "المختارة" (٢٦٣٤) ولفظه عند أبي نعيم وابن الجوزي: "تخيروا لنطفكم، واجتنبوا هذا السواد، فإنه لون مُشوَّه"، والباقون رووه بلفظ: "تخيروا لنطفكم"، وفي إسناده محمَّد بن عبد الملك، وعند بعضهم عبد الملك بن يحيى، ولم نتبينه. وعن عمر بن الخطاب عند ابن عدي في ترجمة سليمان بن عطاء من "الكامل" ٣/ ١١٣٤، وأبي نعيم في "أخبار أصبهان" ٢/ ١١٥، وابن الجوزي (١٠٠٦) بلفظ: "تخيروا لنطفكم، وانتخبوا المناكح، وعليكم بذات الأوراك فإنهن أنجب"، وفي إسناده سليمان بن عطاء منكر الحديث.









সুনান ইবনু মাজাহ (1969)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ هَمَّامٍ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ النَّضْرِ بْنِ أَنَسٍ عَنْ بَشِيرِ بْنِ نَهِيكٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم مَنْ كَانَتْ لَهُ امْرَأَتَانِ يَمِيلُ مَعَ إِحْدَاهُمَا عَلَى الْأُخْرَى جَاءَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَأَحَدُ شِقَّيْهِ سَاقِطٌ




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ যার দু’জন স্ত্রী আছে, আর সে তাদের একজনের চেয়ে অপরজনের প্রতি বেশী ঝুঁকে পড়ে, সে কিয়ামাতের দিন তার (দেহের) এক পার্শ্ব পতিত অবস্থায় উপস্থিত হবে। [১৯৬৯]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف سنن أبي داود (2133) ترمذي (1141) نسائي، (3394)، (انوار الصحیفہ ص 449)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. همام: هو ابن يحيى العَوذي. وأخرجه أبو داود (٢١٣٣)، والترمذي (١١٧٣)، والنسائي ٧/ ٦٣ من طريق همام بن يحيى، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٧٩٣٦). قال الخطابي في "معالم السُّنن" ٣/ ٢١٨ - ٢١٩: في هذا دلالة على توكيد وجوب القَسْم بين الضرائر الحرائر، وإنما المكرؤه من الميل هو ميل العِشرة الذي يكون معه بخس الحق، دون ميل القلوب، فإن القلوب لا تُملَك، فكان رسول الله ﷺ يسوَّي في القَسْم بين نسائه، ويقول: "اللهم هذا قَسمي فيما أملك، فلا تؤاخذني فيما لا أملك"، وفي هذا نزل قوله تعالى: ﴿وَلَنْ تَسْتَطِيعُوا أَنْ تَعْدِلُوا بَيْنَ النِّسَاءِ وَلَوْ حَرَصْتُمْ فَلَا تَمِيلُوا كُلَّ الْمَيْلِ فَتَذَرُوهَا كَالْمُعَلَّقَةِ﴾ [النساء: ١٢٩].









সুনান ইবনু মাজাহ (1970)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَمَانٍ عَنْ مَعْمَرٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ إِذَا سَافَرَ أَقْرَعَ بَيْنَ نِسَائِهِ




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সফরে রওয়ানা হলে তাঁর স্ত্রীদের মধ্যে (কে তাঁর সাথে যাবেন তা নির্ধারণের জন্য) লটারির ব্যবস্থা করতেন। [১৯৭০]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: بخاری ومسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. ويحيى بن يمان قد توبع. وأخرجه البخاري (٢٥٩٣)، وأبو داود (٢١٣٨)، والنسائي في "الكبرى" (٨٨٧٤) من طريق يونس عن الزهري، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٤٨٥٩). وأخرجه البخاري (٥٢١١)، ومسلم (٢٤٤٥) من طريق القاسم بن محمَّد بن أبي بكر، عن عائشة. وهو في "مسند أحمد" (٢٤٨٣٤). وسيأتي برقم (٢٣٤٧).









সুনান ইবনু মাজাহ (1971)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَمُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى قَالَا حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَنْبَأَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ أَيُّوبَ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ يَزِيدَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّه صلى الله عليه وسلم يَقْسِمُ بَيْنَ نِسَائِهِ فَيَعْدِلُ ثُمَّ يَقُولُ اللّٰهُمَّ هَذَا فِعْلِي فِيمَا أَمْلِكُ فَلَا تَلُمْنِي فِيمَا تَمْلِكُ وَلَا أَمْلِكُ




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আপন স্ত্রীদের মধ্যে ইনসাফের সাথে (সব কিছু) সমানভাবে বণ্টন করতেন, অতঃপর বলতেনঃ হে আল্লাহ! এ হলো আমার সামর্থ্য অনুযায়ী আমার কাজ। যে বিষয়ে তোমার ক্ষমতা আছে, আমার সামর্থ্য নাই, সে বিষয়ে আমাকে তিরস্কার করো না। [১৯৭১]

তাহকীক আলবানীঃ দঈফ তবে প্রথম অংশটি হাসান।




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف لكن الطرف الأول منه حسن




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح.كما قال ابن كثير في "التفسير" ٢/ ٣٨٢، إلا أنه اختلف في وصله وإرساله، ورجح الإرسالَ غير واحد من الأئمة، وقد روي من وجهٍ آخر عن عائشة بإسناد حسن كما سيأتي. وأخرجه أبو داود (٢١٣٤)، والترمذي (١١٧٢)، والنسائي ٧/ ٦٣ من طريق حماد بن سلمة، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٥١١١)، و"صحيح ابن حبان" (٤٢٠٥). وأخرجه أبو داود (٢١٣٥) من طريق عبد الرحمن بن أبي الزناد، عن هشام بن عروة عن أبيه، عن عائشة قالت: يا ابن أختي، كان رسول الله ﷺ لا يفضل بعضنا على بعض في القَسمِ … وإسناده حسن من أجل عبد الرحمن بن أبي الزناد فهو صدوق، وأصل هذا الحديث عند البخاري (٢٥٩٣) بلفظ: " … وكان يقسم لكل امرأة منهن يومها وليلتها … ".









সুনান ইবনু মাজাহ (1972)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عُقْبَةُ بْنُ خَالِدٍ ح و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ أَنْبَأَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ جَمِيعًا عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ لَمَّا كَبِرَتْ سَوْدَةُ بِنْتُ زَمْعَةَ وَهَبَتْ يَوْمَهَا لِعَائِشَةَ فَكَانَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم «يَقْسِمُ لِعَائِشَةَ بِيَوْمِ سَوْدَةَ




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, সাওদা বিনতু যামআহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বার্ধক্যগ্রস্ত হয়ে পড়লে তিনি তার নির্ধারিত পালার দিনটি আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে হেবা করেন। অতএব রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সাওদা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -এর দিনটি আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এর ভাগে ফেলতেন। [১৯৭২]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. وأخرجه البخاري (٥٢١٢)، ومسلم (١٤٦٣)، والنسائي في"الكبرى" (٨٨٨٥) من طريق هشام بن عروة، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٤٣٩٥)، و"صحيح ابن حبان" (٤٢١١). وأخرجه بنحوه مطولًا (٢٥٩٣)، وأبو داود (٢١٣٨)، والنسائي (٨٨٧٤) من طريق الزهري، عن عروة، به.









সুনান ইবনু মাজাহ (1973)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَمُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى قَالَا حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ ثَابِتٍ عَنْ سُمَيَّةَ عَنْ عَائِشَةَ أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم وَجَدَ عَلَى صَفِيَّةَ بِنْتِ حُيَيٍّ فِي شَيْءٍ فَقَالَتْ صَفِيَّةُ يَا عَائِشَةُ هَلْ لَكِ أَنْ تُرْضِي رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم عَنِّي وَلَكِ يَوْمِي قَالَتْ نَعَمْ فَأَخَذَتْ خِمَارًا لَهَا مَصْبُوغًا بِزَعْفَرَانٍ فَرَشَّتْهُ بِالْمَاءِ لِيَفُوحَ رِيحُهُ ثُمَّ قَعَدَتْ إِلَى جَنْبِ رَسُولُ اللَّه صلى الله عليه وسلم فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَا عَائِشَةُ إِلَيْكِ عَنِّي إِنَّهُ لَيْسَ يَوْمَكِ فَقَالَتْ ذَلِكَ فَضْلُ اللهِ يُؤْتِيهِ مَنْ يَشَاءُ فَأَخْبَرَتْهُ بِالْأَمْرِ فَرَضِيَ عَنْهَا




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, কোন কারণে রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সাফিয়্যা বিনতু হুয়াই (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এর উপর অসন্তুষ্ট হলে তিনি (সাফিয়্যা) বলেন, হে আয়িশা! তুমি কি রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে আমার প্রতি সন্তুষ্ট করে দিবে? আমি আমার পালার দিনটি তোমাকে দিবো। আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, হ্যাঁ। এরপর তিনি যাফরান রংয়ে রঞ্জিত তার একটি ওড়না নিলেন এবং তাতে পানি ছিটিয়ে দিলেন, যাতে এর ঘ্রাণ ছড়িয়ে পড়ে। অতঃপর তিনি রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর পাশে বসলে তিনি বলেনঃ হে আয়িশা! তুমি আমার নিকট থেকে সরে যাও। এটা তোমার পালার দিন নয়। আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, এটি হচ্ছে আল্লাহর অনুগ্রহ যাকে ইচ্ছা তিনি দান করেন। তিনি তাঁকে ব্যাপারটি খুলে বলেন। তাতে রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সাফিয়্যা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এর প্রতি সন্তুষ্ট হয়ে যান। [১৯৭৩]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف لجهالة سُمية الراوية عن عائشة. وأخرجه النسائي في "الكبرى" (٨٨٨٤) من طريق حماد بن سلمة، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٤٦٤٠).









সুনান ইবনু মাজাহ (1974)


حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عَمْرٍو حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ أَنَّهَا قَالَتْ نَزَلَتْ هَذِهِ الْآيَةُ {وَالصُّلْحُ خَيْرٌ} فِي رَجُلٍ كَانَتْ تَحْتَهُ امْرَأَةٌ قَدْ طَالَتْ صُحْبَتُهَا وَوَلَدَتْ مِنْهُ أَوْلَادًا فَأَرَادَ أَنْ يَسْتَبْدِلَ بِهَا فَرَاضَتْهُ عَلَى أَنْ تُقِيمَ عِنْدَهُ وَلَا يَقْسِمَ لَهَا.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, “আপোষ-নিষ্পত্তিই উত্তম” (৪:১২৮) ) আয়াত এমন এক ব্যাক্তি সম্পর্কে নাযিল হয়, যার বিবাহধীনে এক মহিলা দীর্ঘদিন যাবত ছিল এবং সে তার স্বামীর ঔরসে কয়েকটি সন্তানও প্রসব করেছিল। স্বামী তাঁকে তালাক দিয়ে অন্য স্ত্রী গ্রহণ করতে চাইলে মহিলাটি এ শর্তে স্বামীকে সম্মত করলো যে, সে তার বিবাহ বন্ধনে থাকবে এবং তাকে কোন পালার দিন দিবে না। [১৯৭৪]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. حفص بن عمرو: هو ابن رَبَال الرَّقَاشي، وعُمر بن علي: هو المقدَّمي. وأخرجه بنحوه البخاري (٢٤٥٠)، ومسلم (٣٠٢١)، والنسائي في "الكبرى" (١١٠٦٠) من طرق عن هشام بن عروة، بهذا الإسناد.









সুনান ইবনু মাজাহ (1975)


حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ يَزِيدَ عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ عَنْ أَبِي الْخَيْرِ عَنْ أَبِي رُهْمٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم مِنْ أَفْضَلِ الشَّفَاعَةِ أَنْ يُشَفَّعَ بَيْنَ الِاثْنَيْنِ فِي النِّكَاحِ




আবূ রুহ্‌ম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন,রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ দু’জনের মধ্যে বিবাহ বন্ধনের সুপারিশই হলো সর্বোত্তম সুপারিশ। [১৯৭৫]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، معاویۃ بن یحیی الصدفي ضعیف ، (انوار الصحیفہ ص 449)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف، لأن أبا رُهم -واسمه أحزاب بن أَسِيد السمعي أو السماعي- مُختلَف في صحبته، والأكثرون على أنها لا تصح صحبته فالحديث مرسل. ومعاوية بن يزيد -كذا جاء في رواية ابن ماجه، والصحيح: ابن سعيد، وهو التجيبي- لم يوثقه غير ابن حبان، ومعاوية بن يحيى -وهو الطرابلسي، وإن وثقه بعضهم- ضعفه الدارقطني وأبو القاسم البغوي: وقال ابن عدي: في بعض رواياته ما لا يتابع عليه. قلنا: ولم يتابع ها هنا. وأخرجه ضمن حديث طويل ابن أبي عاصم في "الآحاد والمثاني" (٢٦٣٨)، والطبراني في "الكبير" ٢٢/ (٨٤٣)، والمزي في ترجمة معاوية بن سعيد من "التهذيب" ٢٨/ ١٧٥ - ١٧٦ من طرق عن معاوية بن يحيى، بهذا الإسناد.









সুনান ইবনু মাজাহ (1976)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ الْعَبَّاسِ بْنِ ذُرَيْحٍ عَنْ الْبَهِيِّ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ عَثَرَ أُسَامَةُ بِعَتَبَةِ الْبَابِ فَشُجَّ فِي وَجْهِهِ فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم أَمِيطِي عَنْهُ الْأَذَى فَتَقَذَّرْتُهُ فَجَعَلَ يَمُصُّ عَنْهُ الدَّمَ وَيَمُجُّهُ عَنْ وَجْهِهِ ثُمَّ قَالَ لَوْ كَانَ أُسَامَةُ جَارِيَةً لَحَلَّيْتُهُ وَكَسَوْتُهُ حَتَّى أُنَفِّقَهُ




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, উসামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) পা পিছলে ঘরের দরজার চৌকাঠে পড়ে গেলে তার মুখমণ্ডল আহত হয়। তখন রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) (আমাকে) বলেনঃ তার চেহারা থেকে রক্ত পরিস্কার করে দাও। আমি তা অপছন্দ করলে তিনি নিজেই তার মুখমণ্ডল থেকে রক্ত মুছে পরিস্কার করে দিলেন, অতঃপর বলেনঃ উসামাহ মেয়ে হলে আমি অবশ্যই তাঁকে অলঙ্কার ও পোশাকে এতটা সজ্জিত করতাম যেমন বিবাহে পর্যাপ্ত খরচ করা হয়। [১৯৭৬]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، شریک عنعن ، وتابعہ مجالد وھو ضعیف ، وفي سماع البہي من عائشۃ رضي اﷲ عنہا کلام وللحدیث شاہد مرسل عند، ابن سعد (62/4) ، (انوار الصحیفہ ص 449، 450)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث حسن بطرقه، وهذا إسناد ضعيف لضعف شريك -وهو ابن عبد الله النخعي، وقد اختلف في سماع البهي -عبد الله-، فنفاه أحمد، وأثبته البخاري، وأخرج له مسلم عن عائشة معنعنًا. وقد خالف شريكًا سفيان بن عيينة، فرواه عن وائل بن داود الكوفي، عن البهي مرسلًا وهو أصح. وأخرجه أحمد (٢٥٠٨٢)، وابن سعد في "الطبقات" ٤/ ٦١ - ٦٢، وابن أبي شيبة ١٢/ ١٣٩ - ١٤٠، وابن أبي الدنيا في "العيال" (٢٢٨)، وأبو يعلى (٤٥٩٧)، وابن حبان (٧٠٥٦)، والبيهقي في "الشعب" (١١٠١٧)، وابن الأثير في "أسد الغابة" في ترجمة أسامة بن زيد من طرق عن شريك، بهذا الإسناد. وأخرجه ابن أبي الدنيا (٢٣٠) عن إسحاق بن إسماعيل الطالقاني، عن سفيان ابن عيينة، عن داود بن وائل، عن البهي مرسلًا. وأخرجه مرسلًا ابن سعد ٤/ ٦٢ عن يحيى بن عباد، حدثنا يونس بن أبي إسحاق، عن أبي السفر، قال: بينما رسول الله ﷺ جالس هو وعائشة وأسامة عندهم، إذ نظر رسولُ الله ﷺ في وجه أسامة، فضحك، ثم قال رسول الله ﷺ: "لو أن أسامة جارية، لحلَّيتُها وزينتُها، حتى أنفقها" ورجاله ثقات. وأخرجه بنحوه أبو يعلى (٤٤٥٨) من طريق هشيم، وابن أبي الدنيا (٢٢٩) من طريق يحيى بن زكريا بن أبي زائدة، كلاهما عن مجالد، عن الشعبي، عن مسروق عن عائشة. ومجالد -وهو ابن سعيد- ضعيف ولم يذكر أبو يعلى مسروقًا في روايته.









সুনান ইবনু মাজাহ (1977)


حَدَّثَنَا أَبُو بِشْرٍ بَكْرُ بْنُ خَلَفٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ عَنْ جَعْفَرِ بْنِ يَحْيَى بْنِ ثَوْبَانَ عَنْ عَمِّهِ عُمَارَةَ بْنِ ثَوْبَانَ عَنْ عَطَاءٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ خَيْرُكُمْ خَيْرُكُمْ لِأَهْلِهِ وَأَنَا خَيْرُكُمْ لِأَهْلِي




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, তোমাদের মধ্যে সেই ব্যক্তি উত্তম যে নিজের পরিবারের কাছে উত্তম। আর আমি তোমাদের চেয়ে আমার পরিবারের কাছে অধিক উত্তম। [১৯৭৭]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * صحيح لغيره، وهذا إسناد ضعيف، جعفر بن يحيى بن ثوبان وعمه عمارة ابن ثوبان مجهولان، لكن للحديث شواهد يصح بها. وأخرجه البزار (١٤٨٣ - كشف الأستار)، وابن حبان في "صحيحه" (٤١٨٦)، والحاكم ٤/ ١٧٣ من طريق أبي عاصم الضحاك بن مخلد، بهذا الإسناد. وذكروا فيه قصة إلا الحاكم. ويشهد له حديث عائشة عند الترمذي (٤٢٣٣)، وابن حبان (٤١٧٧)، وإسناده صحيح. وانظر تتمة شواهد في "مسند أحمد" عند حديث أبي هريرة (٧٤٠٢). وانظر ما بعده.









সুনান ইবনু মাজাহ (1978)


حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ شَقِيقٍ عَنْ مَسْرُوقٍ عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ عَمْرٍو قَالَ قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم خِيَارُكُمْ خِيَارُكُمْ لِنِسَائِهِمْ




আব্দুল্লাহ বিন আম্‌র (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, তোমাদের মধ্যে উত্তম লোক তারাই, যারা তাদের স্ত্রীদের কাছে উত্তম। [১৯৭৮]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * رجاله ثقات رجال الصحيح، إلا أنه قد انفرد أبو كريب -واسمه محمَّد بن العلاء- عن أبي خالد -واسمه سليمان بن حيان الأحمر- بهذا اللفظ في حديث عبد الله بن عمرو، وقد خالفه أبو سعيد الأشج عند مسلم (٢٣٢١)، فرواه عن أبي خالد، بهذا الإسناد بلفظ: "إن من خياركم أحسنكم أخلاقًا" وهذا هو الصواب في حديث عبد الله بن عمرو، هكذا أخرجه أصحاب الأعمش عنه بهذا الإسناد. فقد أخرجه البخاري (٣٥٥٩) من طريق أبي حمزة السكري، و (٦٠٣٥) من طريق حفص بن غياث، والبخاري (٦٠٢٩)، ومسلم (٢٣٢١) من طريق جرير بن عبد الحميد، ومسلم (٢٣٢١) من طريق أبي معاوية الضرير، والبخاري (٣٧٥٩) و (٦٠٢٩)، والترمذي (٢٠٩٠) من طريق شعبة بن الحجاج، ومسلم (٢٣٢١) من طريق وكيع بن الجراح، و (٢٣٢١) من طريق عبد الله بن نمير، كلهم عن الأعمش، به، بلفظ: "إن من خياركم أحسنكم أخلاقًا". وهو في "مسند أحمد" (٦٥٠٤) و (٦٧٦٧). وانظر ما قبله.









সুনান ইবনু মাজাহ (1979)


حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ سَابَقَنِي النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَسَبَقْتُهُ




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমার সাথে দৌড় প্রতিযোগিতায় অবতীর্ণ হলে তাঁকে অতিক্রম করে যাই। [১৯৭৯]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. هشام بن عمار وإن كان فيه كلام تابعه أحمد بن حنبل وغيره. وأخرجه مطولًا أبو داود (٢٥٧٨)، والنسائي في "الكبرى" (٨٨٩٣) و (٨٨٩٥) من طريق هشام بن عروة، بهذا الإسناد. وأخرجه كذلك أبو داود (٢٥٧٨)، والنسائي (٨٨٩٤) و (٨٨٩٦) من طريق أبي سلمة بن عبد الرحمن، عن عائشة. وهو في "مسند أحمد" (٢٤١١٨)، و"صحيح ابن حبان" (٤٦٩١).









সুনান ইবনু মাজাহ (1980)


حَدَّثَنَا أَبُو بَدْرٍ عَبَّادُ بْنُ الْوَلِيدِ حَدَّثَنَا حَبَّانُ بْنُ هِلَالٍ حَدَّثَنَا مُبَارَكُ بْنُ فَضَالَةَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ عَنْ أُمِّ مُحَمَّدٍ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ لَمَّا قَدِمَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم الْمَدِينَةَ وَهُوَ عَرُوسٌ بِصَفِيَّةَ بِنْتِ حُيَيٍّ جِئْنَ نِسَاءُ الْأَنْصَارِ فَأَخْبَرْنَ عَنْهَا قَالَتْ فَتَنَكَّرْتُ وَتَنَقَّبْتُ فَذَهَبْتُ فَنَظَرَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم إِلَى عَيْنِي فَعَرَفَنِي قَالَتْ فَالْتَفَتَ فَأَسْرَعْتُ الْمَشْيَ فَأَدْرَكَنِي فَاحْتَضَنَنِي فَقَالَ كَيْفَ رَأَيْتِ قَالَتْ قُلْتُ أَرْسِلْ يَهُودِيَّةٌ وَسْطَ يَهُودِيَّاتٍ




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সাফিয়্যা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে বিবাহ করে মদিনায় নিয়ে এলে আনসারী মহিলাগণ এসে তার ব্যাপারে (আমাকে) অবহিত করে। আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, আমি বেশভূষা পরিবর্তন করে এবং মুখমণ্ডল আবৃত করে তাকে দেখতে গেলাম। রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমার চোখের দিকে তাকিয়ে আমাকে চিনে ফেলেন। তিনি বলেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমার দিকে লক্ষ্য করলে আমি দ্রুত সরে যেতে চেষ্টা করলাম। কিন্তু তিনি আমাকে ধরে ফেলে কোলে তুলে নেন এবং বলেনঃ কেমন দেখলে? আমি বললাম,আমাকে ছেড়ে দিন, ইয়াহূদী নারীদের মধ্যকার এক ইয়াহূদিনী। [১৯৮০]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، فیہ علل منہا ضعف علي بن زید بن جدعان ، (انوار الصحیفہ ص 450)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف لضعف علي بن زيد -وهو ابن جُدعان- وجهالة أم محمَّد الراوية عن عائشة. وأخرجه ابن سعد في "الطبقات" ٨/ ١٢٥ عن أحمد بن محمَّد بن الوليد الأزرقي، حدثنا عبد الرحمن بن أبي الرجال، عن عبد الله بن عمر. وهذا سند رجاله ثقات إلا أن عبد الرحمن بن أبي الرجال لم يسمع من ابن عمر. وأخرجه أيضًا في "الطبقات" من حديث عطاء بن يسار مرسلًا، وفيه الواقدي وهو متروك، وفي آخره بعد قوله: رأيت يهودية، قال رسول الله ﷺ: "لا تقولي هذا يا عائشة، فإنها قد أسلمت فحسن إسلامها".