হাদীস বিএন


সুনান ইবনু মাজাহ





সুনান ইবনু মাজাহ (2001)


حَدَّثَنَا أَبُو بِشْرٍ بَكْرُ بْنُ خَلَفٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ قَالَا حَدَّثَنَا مَرْحُومُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ حَدَّثَنَا ثَابِتٌ قَالَ كُنَّا جُلُوسًا مَعَ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ وَعِنْدَهُ ابْنَةٌ لَهُ فَقَالَ أَنَسٌ جَاءَتْ امْرَأَةٌ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَعَرَضَتْ نَفْسَهَا عَلَيْهِ فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللهِ هَلْ لَكَ فِيَّ حَاجَةٌ فَقَالَتْ ابْنَتُهُ مَا أَقَلَّ حَيَاءَهَا قَالَ هِيَ خَيْرٌ مِنْكِ رَغِبَتْ فِي رَسُولِ اللهِ صلى الله عليه وسلم فَعَرَضَتْ نَفْسَهَا عَلَيْهِ




আনাস বিন মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, (সাবিত) বলেন, আমরা আনাস বিন মা'লিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -এর সাথে উপবিষ্ট ছিলাম। তার সাথে তার এক কন্যাও ছিলো। আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, এক মহিলা নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর নিকট এসে নিজেকে তাঁর জন্য পেশ করে। সে বলে, হে আল্লাহ্‌র রসূল! আপনার কি আমাকে প্রয়োজন আছে? (এ হাদীস শুনে) আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -এর মেয়ে বললো, মহিলাটি কত নির্লজ্জ! আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, সে তোমার চেয়ে অনেক উত্তম। সে রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর প্রতি অনুরক্ত হওয়ার কারণেই নিজেকে তাঁর জন্য পেশ করেছে। [২০০১]




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. ثابت: هو ابن أسلم البناني. وأخرجه البخاري (٥١٢٠)، والنسائي ٦/ ٧٨ - ٧٩ و ٧٩ من طريق مرحوم، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٣٨٣٥).









সুনান ইবনু মাজাহ (2002)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَمُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ قَالَا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ جَاءَ رَجُلٌ مِنْ بَنِي فَزَارَةَ إِلَى رَسُولِ اللهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ يَا رَسُولَ اللهِ إِنَّ امْرَأَتِي وَلَدَتْ غُلَامًا أَسْوَدَ فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم هَلْ لَكَ مِنْ إِبِلٍ قَالَ نَعَمْ قَالَ فَمَا أَلْوَانُهَا قَالَ حُمْرٌ قَالَ هَلْ فِيهَا مِنْ أَوْرَقَ قَالَ إِنَّ فِيهَا لَوُرْقًا قَالَ فَأَنَّى أَتَاهَا ذَلِكَ قَالَ عَسَى عِرْقٌ نَزَعَهَا قَالَ وَهَذَا لَعَلَّ عِرْقًا نَزَعَهُ وَاللَّفْظُ لِابْنِ الصَّبَّاحِ.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, ফাযা'রাহ গোত্রের এক ব্যক্তি রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর নিকট এসে বললো, হে আল্লাহ্‌র রসূল! আমার স্ত্রী কৃষ্ণ বর্ণের একটি পুত্র সন্তান প্রসব করেছে। রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ তোমার কি উট আছে? সে বললো, হাঁ। তিনি বলেনঃ এগুলো কী বর্ণের? সে বললো, লাল। তিনি বলেন এগুলোর মধ্যে ছাই বর্ণের উট আছে কি? সে বললো, হাঁ, এর মধ্যে অবশ্যই ছাই রং-এর উটও আছে। রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ এগুলো কোথা থেকে এলো? সে বললো, সম্ভবত এটি তার পূর্বপুরুষের কারো রং ধারণ করেছে। তিনি বলেনঃ এখানেও হয়ত পূর্বপুরুষের কালো রং ধারণ করে থাকবে। [২০০২]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: بخاری ومسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. وأخرجه البخاري (٥٣٠٥)، ومسلم (١٥٠٠)، وأبو داود (٢٢٦٠) و (٢٢٦١)، والترمذي (٢٢٦١)، والنسائي ٦/ ١٧٨ و ١٧٨ - ١٧٩ و ١٧٩ من طريق الزهري، بهذا الإسناد. وأخرجه البخاري (٧٣١٤)، ومسلم (١٥٠٠) (٢٠)، وأبو داود (٢٢٦٢) من طريق الزهري، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة. وهو في "مسند أحمد" (٧١٨٩)، و"صحيح ابن حبان" (٤١٠٦) و (٤١٠٧). وأخرجه مسلم (١٥٠٠) و (٢٠) من طريق الزهري قال: بلغنا أن أبا هريرة كان يحدث .. فذكره مرسلًا. والأورق من الإبل: ما في لونه بياض إلى سواد، وقوله: "عسى عرق نزعها" قال في "النهاية" يقال: نزع إليه في الشَبَهِ: إذا أشبهه. وفي هذا الحديث ضرب المثل، وتشبيه المجهول بالمعلوم تقريبًا لفهم السائل، واستدل به لصحة العمل بالقياس، قال الخطابي: هو أصل في قياس الشبه، وقال القاضي أبو بكر بن العربي: فيه دليل على صحة القياس والاعتبار بالنظير.









সুনান ইবনু মাজাহ (2003)


حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ قَالَ حَدَّثَنَا عُبَادَةُ بْنُ كُلَيْبٍ اللَّيْثِيُّ أَبُو غَسَّانَ عَنْ جُوَيْرِيَةَ بْنِ أَسْمَاءَ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ رَجُلًا مِنْ أَهْلِ الْبَادِيَةِ أَتَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ يَا رَسُولَ اللهِ إِنَّ امْرَأَتِي وَلَدَتْ عَلَى فِرَاشِي غُلَامًا أَسْوَدَ وَإِنَّا أَهْلُ بَيْتٍ لَمْ يَكُنْ فِينَا أَسْوَدُ قَطُّ قَالَ هَلْ لَكَ مِنْ إِبِلٍ قَالَ نَعَمْ قَالَ فَمَا أَلْوَانُهَا قَالَ حُمْرٌ قَالَ هَلْ فِيهَا أَسْوَدُ قَالَ لَا قَالَ فِيهَا أَوْرَقُ قَالَ نَعَمْ قَالَ فَأَنَّى كَانَ ذَلِكَ قَالَ عَسَى أَنْ يَكُونَ نَزَعَهُ عِرْقٌ قَالَ فَلَعَلَّ ابْنَكَ هَذَا نَزَعَهُ عِرْقٌ




ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এক গ্রাম্য বেদুইন নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর নিকট এসে বললো, হে আল্লাহ্‌র রসূল! আমার স্ত্রী আমার ঘরে একটি কালো রং-এর পুত্র সন্তান প্রসব করেছে, অথচ আমাদের পরিবারে কালো রং-এর কেউ কখনো ছিলো না। তিনি বলেনঃ তোমার কি উট আছে? সে বললো, হাঁ। তিনি বলেনঃ এগুলোর রং কী? সে বললো, লাল। তিনি বলেনঃ এগুলোর মধ্যে কি কালো বর্ণের উট আছে? সে বললো, না। তিনি বললেনঃ ছাই বর্ণের আছে কি? সে বললো, হাঁ। রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন এটা কিরূপে হলো? সে বললো, হয়ত পূর্বপুরুষের রক্ত ধারায় এমনটি হয়ে থাকবে। তিনি বলেনঃ হয়তো তোমার পুত্রের বেলায়ও এমনটি হয়ে থাকবে। [২০০৩]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * صحيح لغيره، وهذا إسناد حسن، عباءة -وسماه المزي: عباة- صدوق حسن الحديث. أبو كريب: هو محمَّد بن العلاء. وأخرجه العقيلي في "الضعفاء" عن محمَّد بن الحسن بن العباس بن عيسى الهاشمي، عن أبي كريب، بهذا الإسناد. وانظر ما قبله.









সুনান ইবনু মাজাহ (2004)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ إِنَّ عَبْدَ بْنَ زَمْعَةَ وَسَعْدًا اخْتَصَمَا إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فِي ابْنِ أَمَةِ زَمْعَةَ فَقَالَ سَعْدٌ يَا رَسُولَ اللهِ أَوْصَانِي أَخِي إِذَا قَدِمْتُ مَكَّةَ أَنْ أَنْظُرَ إِلَى ابْنِ أَمَةِ زَمْعَةَ فَأَقْبِضَهُ وَقَالَ عَبْدُ بْنُ زَمْعَةَ أَخِي وَابْنُ أَمَةِ أَبِي وُلِدَ عَلَى فِرَاشِ أَبِي فَرَأَى النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم شَبَهَهُ بِعُتْبَةَ فَقَالَ «هُوَ لَكَ يَا عَبْدَ بْنَ زَمْعَةَ الْوَلَدُ لِلْفِرَاشِ وَاحْتَجِبِي عَنْهُ يَا سَوْدَةُ».




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, ইবনু যামআহ ও সা'দ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) যামআহ'র দাসী-পুত্রকে কেন্দ্র করে নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর নিকট বিবাদে লিপ্ত হন। সা'দ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, হে আল্লাহ্‌র রসূল! আমার ভাই আমাকে বলেছেন যে, আমি মাক্কাহ্য় গেলে আমি যেন যাম্আর দাসী-পুত্রকে খুঁজে বের করি। আর আব্দ বিন যামআহ বললো, সে আমার ভাই, আমার পিতার দাসী-পুত্র, সে আমার পিতার শয্যায় জন্মগ্রহণ করে। রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ছেলেটিকে উতবার সাথে (গঠনাকৃতিতে) সাদৃশ্যপূর্ণ লক্ষ্য করেন। তিনি বলেনঃ হে আব্দ বিন যামআহ! এটি তোমারই প্রাপ্য। সন্তান বিছানার মালিকের (স্বামীর) এবং ব্যভিচারির জন্য রয়েছে পাথর। আর হে সাওদা! তুমি তার থেকে পর্দা করবে। [২০০৪]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. وأخرجه البخاري (٢٠٥٣)، ومسلم (١٤٥٧)، وأبو داود (٢٢٧٣)، والنسائي ٦/ ١٨٠ و١٨١ من طريق الزهري، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٤٠٨٦)، و "صحيح ابن حبان" (٤١٠٥). وقوله: "الولد للفراش" قال في "النهاية": أي: لمالك الفراش وهو الزوج والمولى، والمرأة تسمى فراشًا، لأن الرجل يفترشها. قوله: "واحتجبي عنه يا سودة" قال النووي: أمرها بالاحتجاب ندبًا واحتياطًا، لأنه في ظاهر الشرع أخوها، لأنه أُلحق بأبيها، لكن لما رأى ﷺ البين بعتبة ابن أبي وقاص خشيَ أن يكون من مائه فيكون أجنببًا منها، فأمرها بالاحتجاب منه احتياطًا. قاله السيسوطي في "شرح سنن النسائي".









সুনান ইবনু মাজাহ (2005)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ عُبَيْدِ اللهِ بْنِ أَبِي يَزِيدَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عُمَرَ أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم قَضَى بِالْوَلَدِ لِلْفِرَاشِ




উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ফয়সালা দিয়েছেন যে, সন্তান বৈধ শয্যাধারীর (স্বামীর)। [২০০৫]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. وهذا إسناد حسن في المتابعات والشواهد. أبو زيد -وهو المكي والد عبيد الله- من كبار التابعين، وذكره ابن حبان في "الثقات"، وقد تابعه عبيد الله بن عدي بن الخيار عند الضياء في "المختارة" (٢٣٣). وأخرجه الشافعي في "مسنده" ٢/ ٣٠، وعبد الرزاق في "مصنفه" (٩١٥٢)، والحميدي (٢٤)، وعلي ابن المديني في "مسنده" كما في "مسند الفاروق" لابن كثير ١/ ٤٢٥، وابن أبي شيبة في "مصنفه" ٤/ ٤١٥، وإسحاق بن راهويه ومحمد ابن يحيى بن أبي عمر العدني في "مسنديهما" كما في "إتحاف الخيرة المهرة" للبوصيري (٤٣٩٤)، وأحمد في "مسنده" (١٧٣)، وأبو يعلى في "مسنده" (١٩٩)، والطحاوي في "شرح معاني الآثار" ٣/ ١٠٤، والبيهقي في "السُّنن الكبرى" ٧/ ٤٠٢، وفي "معرفة السُّنن والآثار" (١٥١٦٠) و (١٥١٦١)، وابن عبد البر في "التمهيد" ٨/ ١٩٣ - ١٩٤، وفي "الاستذكار" (٣٢٣٣٥) و (٣٢٣٣٦)، والضياء المقدسي في "المختارة" (٣٠٥) و (٣٠٦) من طريق سفيان بن عيينة، بهذا الإسناد. وقال علي ابن المديني: وهذا حديث صحيح، وعبيد الله بن أبي يزيد رجل رضيّ معروف ثقة، وأبوه لم يرو عنه غيره، ولم نسمع أحدًا يقول فيه شيئًا. وأخرجه الضياء المقدسي في "المختارة" (٢٣٣) من طريق أبي العباس الأصم، عن زكريا بن يحيى المروزي زكرويه، عن سفيان بن عيينة، عن محمَّد بن عجلان، عن بكير بن الأشج، عن معمر بن أبي حبيبة، عن عبيد الله بن عدي بن الخيار، عن عمر بن الخطاب، وهذا إسناد قوي.









সুনান ইবনু মাজাহ (2006)


حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ الْوَلَدُ لِلْفِرَاشِ وَلِلْعَاهِرِ الْحَجَرُ




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ সন্তান বৈধ শয্যাধারীর (স্বামীর) এবং ব্যভিচারির জন্য রয়েছে পাথর। [২০০৬]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. هشام بن عمار قد توبع. وأخرجه مسلم (١٤٥٨) عن سعيد بن منصور، والترمذي (١١٩١) عن أحمد ابن منيع، كلاهما عن ابن عيينة، بهذا الإسناد. وأخرجه أحمد (٧٢٦٢)، ومسلم (١٤٥٨)، والنسائي ٦/ ١٨٠ من طرق عن سفيان بن عيينة، به، لكن حصل فيها الشك في الراوي عن أبي هريرة، فبعضهم يقول: عن أبي سلمة أو عن سعيد، وبعضهم يقول: عن سعيد وأبي سلمة -دون شك- وقد بين عمرو الناقد عند مسلم أن ابن عيينة حدثه بذلك على كل تلك الوجوه. وأخرجه مسلم (١٤٥٨)، والنسائي ٦/ ١٨٠ من طريق معمر بن راشد، عن الزهري، عن سعيد وأبي سلمة، عن أبي هريرة، وهو عند أحمد (٧٧٦٣). وأخرجه البخاري (٦٧٥٠) من طريق محمَّد بن زياد، عن أبي هريرة، وهو في "مسند أحمد" (٩٠٠٣). وانظر تمام الكلام عليه في "المسند" (٧٢٦٢). وقوله: "وللعاهر الحجر" العاهر: الزاني، يقال: عَهِرَ يَعْهَرُ عَهَرًا وعُهورًا: إذا أتى المرأة ليلًا للفجور بها، ثم غلب على الزنى مطلقًا، والمعنى: لا حظ للزاني في الولد، وهو لصاحب الفراش، أي: لصاحب أم الولد، وهو زوجها أو مولاها، وللزاني الخيبة.









সুনান ইবনু মাজাহ (2007)


حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ قَالَ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ عَيَّاشٍ حَدَّثَنَا شُرَحْبِيلُ بْنُ مُسْلِمٍ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا أُمَامَةَ الْبَاهِلِيَّ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ الْوَلَدُ لِلْفِرَاشِ وَلِلْعَاهِرِ الْحَجَرُ




আবু উমামা আল বাহিলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে বলতে শুনেছি: সন্তান বৈধ শয্যাধারীর (স্বামীর) এবং ব্যভীচারীর জন্য রয়েছে পাথর। [২০০৭]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح لغيره




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * صحيح لغيره. وهذا إسناد حسن، إسماعيل بن عياش روايته عن أهل بلده مستقيمة، وهذا منها. وهشام بن عمار متابع. وأخرجه ضمن حديث حجة الوداع الترمذي (٢٢٥٣) عن علي بن حجر وهناد ابن السري، عن إسماعيل بن أبي عياش، بهذا الإسناد. وهو فى "مسند أحمد" (٢٢٢٩٤). وانظر أحاديث الباب السالفة.









সুনান ইবনু মাজাহ (2008)


حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ جُمَيْعٍ حَدَّثَنَا سِمَاكٌ عَنْ عِكرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ امْرَأَةً جَاءَتْ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَأَسْلَمَتْ فَتَزَوَّجَهَا رَجُلٌ قَالَ فَجَاءَ زَوْجُهَا الْأَوَّلُ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللهِ إِنِّي قَدْ كُنْتُ أَسْلَمْتُ مَعَهَا وَعَلِمَتْ بِإِسْلَامِي قَالَ فَانْتَزَعَهَا رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم مِنْ زَوْجِهَا الْآخَرِ وَرَدَّهَا إِلَى زَوْجِهَا الْأَوَّلِ




ইকরিমা ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এক মহিলা নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) –এর নিকট এসে ইসলাম গ্রহণ করার পর এক ব্যক্তি তাকে বিবাহ করলো। রাবী বলেন, তখন পূর্ব স্বামী এসে বললো, “হে আল্লাহর রসূল! আমি তো তার সাথেই ইসলাম গ্রহণ করেছি এবং সে আমার ইসলাম গ্রহণ সম্পর্কে জানে। রাবী বলেন; রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মহিলাটিকে তার দ্বিতীয় স্বামীর থেকে বিচ্ছিন্ন করে তার প্রথম স্বামীকে ফেরত দেন। [২০০৮]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، سنن أبي داود (2238،2239) ترمذي (1144)، (انوار الصحیفہ ص 450)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف، سماك -وهو ابن حرب- في روايته عن عكرمة -وهو مولى ابن عباس- اضطراب. وأخرجه أبو داود (٢٢٣٨) و (٢٢٣٩)، والترمذي (١١٧٦) من طريق سماك، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (٢٠٥٩)، و "صحيح ابن حبان" (٤١٥٩).









সুনান ইবনু মাজাহ (2009)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ خَلَّادٍ وَيَحْيَى بْنُ حَكِيمٍ قَالَا حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَنْبَأَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْحَقَ عَنْ دَاوُدَ بْنِ الْحُصَيْنِ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم رَدَّ ابْنَتَهُ عَلَى أَبِي الْعَاصِ بْنِ الرَّبِيعِ بَعْدَ سَنَتَيْنِ بِنِكَاحِهَا الْأَوَّلِ




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর কন্যাকে প্রথম বিবাহের সুবাদে প্রথম দু’বছর পর আবুল আস ইবনুর রবী’ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) -এর নিকট ফেরত পাঠান। [২০০৯]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، سنن أبي داود (2240) ترمذي (1143)، (انوار الصحیفہ ص 450)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده حسن، فقد صرح محمَّد بن إسحاق بالسماع عند الترمذي والحاكم وابن هشام في "السيرة" ٢/ ٣١٣ - ٣١٤، وقال الترمذي في "جامعه" بإثر إخراج حديث ابن عباس السالف: سمعت يزيد بن هارون يذكر عن محمَّد بن إسحاق هذا الحديث (وهو الحديث الآتي بعد هذا الحديث): أن النبي ﷺ ردّ ابنته زينب على أبي العاص بمهر جديد ونكاح جديد. قال يزيد بن هارون: حديث ابن عباس (يعني هذا) أجودُ إسنادًا. قلنا: وصححه كذلك الإمام أحمد في "مسنده" عقب إخراجه حديث عمرو ابن شعيب (٦٩٣٨). ونقل الترمذي في "العلل الكبير" ١/ ٤٥٢ عن البخاري قوله: حديث ابن عباس أصحُّ في هذا الباب من حديث عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده، وقال في "الجامع الكبير" بعد إخراجه الحديث: حديث ليس بإسناده بأس، وصوب الدارقطني حديث ابن عباس بعد أن أخرج حديث عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده. وأخرجه أبو داود (٢٢٤٠)، والترمذي (١١٧٥) من طريق محمَّد بن إسحاق، بهذا الإسناد. وهو في "مسند أحمد" (١٨٧٦). وله شاهد صحيح من مرسل قتادة بن دعامة عند ابن سعد ٨/ ٣٢ ولفظه: أن زينب بنت رسول الله كانت تحت أبي العاص بن الربيع، فهاجرت مع رسول الله، ثم أسلم زوجها فهاجر إلى رسول الله، فردها عليه. قال قتادة: ثم أنزلت (سورة براءة) بعد ذلك، فإذا أسلمت المرأة قبل زوجها، فلا سبيل له عليها إلا بخطبة، وإسلامها تطليقة بائنة. ونقل ابن عبد البر في "الاستذكار" ١٦/ ٣٢٧ عن قتادة قوله: كان هذا قبل أن تنزل (سورة براءة) بقطع العهود بين المسلمين والمشركين. وقال الزهري: كان هذا قبل أن تنزل الفرائض. وآخر من مرسل الشعبي وهو صحيح عند عبد الرزاق (١٢٦٤٠)، وسعيد بن منصور (٢١٠٧)، وابن سعد ٨/ ٣٢، والطحاوي في "شرح معاني الآثار" ٣/ ٢٥٦ أن رسول الله ﷺ ردَّ ابنته زينب على أبي العاص بن الربيع حيث أسلم بعد إسلام زينب، فردها بالنكاح الأول. وثالث من مرسل عمرو بن دينار عند عبد الرزاق (١٢٦٤٣)، وسعيد بن منصور (٢١٠٨) ولفظه: أن زينب بنت رسول الله ﷺ كانت تحت أبي العاص بن الربيع فاسلمت قبله وأسر، فجيء به أسيرًا في قِد، فأسلم فكانا على نكاحهما. وهو صحيح. وانظر حديث الزهري في قصة صفوان بن أمية مع امرأته بعدما أسلم عند مالك في "الموطأ" ٢/ ٥٤٣.









সুনান ইবনু মাজাহ (2010)


حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ حَجَّاجٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم رَدَّ ابْنَتَهُ زَيْنَبَ عَلَى أَبِي الْعَاصِ بْنِ الرَّبِيعِ بِنِكَاحٍ جَدِيدٍ




আব্দুল্লাহ বিন আমর্ ইবনুল আস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর কন্যা যায়নাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) কে নতুন বিবাহের মাধ্যমে আবুল আস ইবনুর রবী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এর নিকট ফেরত পাঠান। [২০১০]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، ترمذي (1142)، (انوار الصحیفہ ص 450)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف. حجاج -وهو ابن أرطاة- مدلس، وقد عنعن ولم يسمعه من عمرو بن شعيب. فقد أخرجه أحمد في "مسنده" (٦٩٣٨)، وقال بإثره عبد الله بن أحمد: قال أبي في حديث حجاج هذا: حديث ضعيف أو قال: واهٍ، ولم يسمعه الحجاج من عمرو بن شعيب إنما سمعه من محمَّد بن عبيد الله العرزمي، والعرزمي لا يُساوي حديثه شيئًا، والحديث الصحيح الذي روي: أن النبي ﷺ أقرهما على النكاح الأول. وأخرجه الترمذي (١١٧٤) عن أحمد بن منيع وهناد، عن أبي معاوية، بهذا الإسناد. وقال: هذا حديث في إسناده مقال. وقال الدارقطني في "سننه" (٣٦٢٥): هذا لا يثبت، وحجاج لا يحتج به، والصواب حديث ابن عباس: أن النبي ﷺ ردها بالنكاح الأول. وقال ابن عبد البر في "الاستذكار" ١٢/ ٢٣: لم يختلف العلماء أن الكافرة إذا أسلمت ثم انقضت عِدتُها أنه لا سبيل لزوجها إليها إذا كان لم يُسلم في عدتها إلا شيء روي عن إبراهيم النخعي شذَّ فيه عن جماعة العلماء، ولم يتبعه عليه أحد من الفقهاء إلا بعض أهل الظاهر. ومما يدل على أن قصة أبى العاص منسوخة بقوله تعالى: ﴿يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا جَاءَكُمُ الْمُؤْمِنَاتُ مُهَاجِرَاتٍ فَامْتَحِنُوهُنَّ اللَّهُ أَعْلَمُ بِإِيمَانِهِنَّ فَإِنْ عَلِمْتُمُوهُنَّ مُؤْمِنَاتٍ فَلَا تَرْجِعُوهُنَّ إِلَى الْكُفَّارِ لَا هُنَّ حِلٌّ لَهُمْ وَلَا هُمْ يَحِلُّونَ لَهُنَّ … ﴾ [الممتحنة: ١٠] إجماع العلماء على أن أبا العاص بن الربيع كان كافرًا، وأن المسلمة لا يحل أن تكون زوجة لكافر، قال الله تعالى: ﴿وَلَنْ يَجْعَلَ اللَّهُ لِلْكَافِرِينَ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ سَبِيلًا﴾ [النساء: ١٤١] وقال رسول الله ﷺ للملاعن: "لا سبيل لك عليها".









সুনান ইবনু মাজাহ (2011)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ إِسْحَقَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ نَوْفَلٍ الْقُرَشِيِّ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ عَنْ جُدَامَةَ بِنْتِ وَهْبٍ الْأَسَدِيَّةِ أَنَّهَا قَالَتْ سَمِعْتُ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ قَدْ أَرَدْتُ أَنْ أَنْهَى عَنْ الْغِيَالِ فَإِذَا فَارِسُ وَالرُّومُ يُغِيلُونَ فَلَا يَقْتُلُونَ أَوْلَادَهُمْ وَسَمِعْتُهُ يَقُولُ وَسُئِلَ




জুদামাহ বিনতে ওয়াহাব আল আসাদিয়্যাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনিয়াছি: আমি ইচ্ছা করেছিলাম যে, দুগ্ধদানের মুদ্দতে মহিলাদের সাথে সহবাস করতে নিষেধ করাবো। কিন্তু আমি দেখলাম যে, পারস্য ও রোমের অধিবাসীরা এমনটি করে, অথচ তাদের সন্তানদের কোন ক্ষতি হয়না। রাবী বলেন, রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে আযল সম্পর্কে জিজ্ঞেস করা হলো। আমি তাঁকে বলতে শুনেছি: এটি হচ্ছে গোপন হত্যার একটি পদ্ধতি। [২০১১]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح. وهذا إسناد حسن من أجل يحيى بن أيوب: وهو الغافقي. محمَّد بن عبد الرحمن بن نوفل: هو أبو الأسود يتيم عروة، مشهور بكنيته ولقبه. وأخرجه مسلم (١٤٤٢)، وأبو داود (٣٨٨٢)، والترمذي (٢٢٠٩)، والنسائي ٦/ ١٠٦ - ١٠٧ من طريق مالك، وأخرجه مسلم (١٤٤٢)، والترمذي (٢٢٠٨) من طريق يحيى بن أيوب المصري، ومسلم (١٤٤٢) من طريق سعيد بن أبي أيوب، ثلاثتهم عن أبي الأسود محمَّد بن عبد الرحمن بن نوفل يتيم عروة، بهذا الإسناد. واقتصر مالك في روايته على الغِيلة، وكذا اقتصر عليها الترمذي من طريق يحيى بن أيوب. وهو في "مسند أحمد" (٢٧٠٣٤) و (٢٧٤٤٧)، و"صحيح ابن حبان" (٤١٩٦). قال مالك عقب الحديث: الغيلة: أن يمس الرجل امرأته وهي ترضع.









সুনান ইবনু মাজাহ (2012)


حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمْزَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُهَاجِرٍ أَنَّهُ سَمِعَ أَبَاهُ الْمُهَاجِرَ بْنَ أَبِي مُسْلِمٍ يُحَدِّثُ عَنْ أَسْمَاءَ بِنْتِ يَزِيدَ بْنِ السَّكَنِ وَكَانَتْ مَوْلَاتَهُ أَنَّهَا سَمِعَتْ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ لَا تَقْتُلُوا أَوْلَادَكُمْ سِرًّا فَوَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ إِنَّ الْغَيْلَ لَيُدْرِكُ الْفَارِسَ عَلَى ظَهْرِ فَرَسِهِ حَتَّى يَصْرَعَهُ




আসমা বিনতু ইয়াযীদ ইবনুস সাকান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে বলতে শুনেছেনঃ তোমরা গোপনে তোমাদের সন্তানদের হত্যা করোনা। সেই সত্তার শপথ যার হাতে আমার প্রাণ! দুধপানের মেয়াদে স্ত্রীর সাথে সহবাস করলে আরোহীকে ঘোড়া তার পিঠ থেকে ভূলুন্ঠিত করে। [২০১২]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، سنن أبي داود (3881)، (انوار الصحیفہ ص 450)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف، المهاجر -وهو ابن أبي مسلم الأنصاري، وإن روى عنه جمع، وذكره ابن حبان في "الثقات"- قد انفرد به، ومثله لا يحتمل تفرُّده، ثم إنه مخالف للحديث الصحيح السالف قبله. وأخرجه أبو داود (٣٨٨١) من طريق محمَّد بن مهاجر أخي عمرو بن مهاجر، عن أبيه، عن أسماء بنت يزيد. وهو في "مسند أحمد (٢٧٥٦٢)، و"صحيح ابن حبان" (٥٩٨٤) من طريق محمَّد بن مهاجر.









সুনান ইবনু মাজাহ (2013)


حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مُؤَمَّلٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ سَالِمِ بْنِ أَبِي الْجَعْدِ عَنْ أَبِي أُمَامَةَ قَالَ أَتَتْ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم امْرَأَةٌ مَعَهَا صَبِيَّانِ لَهَا قَدْ حَمَلَتْ أَحَدَهُمَا وَهِيَ تَقُودُ الْآخَرَ فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم حَامِلَاتٌ وَالِدَاتٌ رَحِيمَاتٌ لَوْلَا مَا يَأْتِينَ إِلَى أَزْوَاجِهِنَّ دَخَلَ مُصَلِّيَاتُهُنَّ الْجَنَّةَ




আবু উমামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, এক মহিলা তার দুটি সন্তানসহ নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট আসে। সে একটি সন্তানকে কোলে এবং অপরটিকে হাতে ধরে নিয়ে আসে। রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন: গর্ভধারিনী (বহনকারিণী) , সন্তান জন্মদানকারীণী এবং মমতাময়ী বা তারা তাদের স্বামীদের কষ্ট না দিলে তাদের মধ্যে যারা সলাতী তারা জান্নাতে যাবে। [২০১৩]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، قال سالم: ’’ ذکر لي عن أبي أمامۃ ‘‘ (مسند أحمد 252/5) ، فالسند ضعیف لجھالۃ الواسطۃ بینھما، (انوار الصحیفہ ص 450)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف لانقطاعه، فقد صرح سالم بن أبي الجعد بعدم سماعه لهذا الحديث من أبي أمامة عند أحمد في "المسند" (٢٢١٧٣). ومؤمل: هو ابن إسماعيل سيئ الحفظ، وسفيان: هو الثوري. وأخرجه أحمد (٢٢١٧٣) و (٢٢٢١٩) و (٢٢٣١١) من طريق منصور بن المعتمر، عن سالم، قال: ذكر لي عن أبي أمامة فذكره. وانظر تتمة تخريجه واختلاف ألفاظه في "المسند".









সুনান ইবনু মাজাহ (2014)


حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ بْنُ الضَّحَّاكِ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ عَيَّاشٍ عَنْ بَحِيرِ بْنِ سَعْدٍ عَنْ خَالِدِ بْنِ مَعْدَانَ عَنْ كَثِيرِ بْنِ مُرَّةَ عَنْ مُعَاذِ بْنِ جَبَلٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم لَا تُؤْذِي امْرَأَةٌ زَوْجَهَا إِلَّا قَالَتْ زَوْجَتُهُ مِنْ الْحُورِ الْعِينِ لَا تُؤْذِيهِ قَاتَلَكِ اللهُ فَإِنَّمَا هُوَ عِنْدَكِ دَخِيلٌ أَوْشَكَ أَنْ يُفَارِقَكِ إِلَيْنَا




মুআয বিন জাবাল (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ যখন কোন স্ত্রী তার স্বামীকে কষ্ট দেয় তখন জান্নাতে তার আয়তালোচনা হুর স্ত্রীগণ বলতে থাকেঃ ওহে! আল্লাহ তোমার সর্বনাশ করুন। তুমি তাকে কষ্ট দিওনা। সে তো তোমার নিকট অল্পদিনের মেহমান অচিরেই সে তোমাকে ত্যাগ করে আমাদের নিকট চলে আসবে। [২০১৪]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: حسن




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث حسن، عبد الوهاب بن الضحاك -وإن كان متروكًا- قد تابعه إبراهيم بن مهدي عند أحمد في "مسنده" (٢٢١٠١)، والحسن بن عرفة عند الترمذي (١٢٠٨)، كلاهما عن إسماعيل بن عياش، بهذا الإسناد. وقال الترمذي: حديث حسن غريب، وقال الذهبي في "سير أعلام النبلاء" ٤/ ٤٧ بعد إخراجه الحديث: إسناده صحيح متصل. قلنا: وإنما حسن إسناد هذا الحديث، لأن إسماعيل بن عياش روايتُه عن أهل الشام مستقيمة عند أهل العلم، وهذا منها.









সুনান ইবনু মাজাহ (2015)


حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مُعَلَّى بْنِ مَنْصُورٍ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ مُحَمَّدٍ الْفَرْوِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللهِ بْنُ عُمَرَ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ لَا يُحَرِّمُ الْحَرَامُ الْحَلَالَ




নাফি ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, হারাম বস্তু হালাল বস্তুকে হারাম করে না। [২০১৫]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، الفروي: ضعیف یعتبر بہ (التحریر: 381) ضعفہ الجمہور، ، وباقي السند حسن، (انوار الصحیفہ ص 450، 451)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف لضعف إسحاق بن محمَّد الفَزوي وعبد الله بن عمر العُمري. وأخرجه الدارقطني في "سننه" (٣٦٧٩)، وأبو نعيم الأصبهاني في "أخبار أصبهان" ١/ ١٦٣، والبيهقي في "السُّنن الكبرى" ٧/ ١٦٨، وفي "معرفة السُّنن والآثار" (١٣٨٧٢) من طريق إسحاق بن محمَّد الفروي، بهذا الإسناد. وفي الباب عن عائشة عند الطبراني في "الأوسط" (٤٨٠٠) و (٧٢٢٠)، وابن عدي في "الكامل" ٥/ ١٨٠٨، والدارقطني (٣٦٧٧) و (٣٦٧٨) و (٣٦٨٠)، والبيهقي في "السُّنن الكبرى" ٧/ ١٦٩، وابن الجوزي في "العلل المتناهية" (١٠٣١) وفي إسناده عثمان بن عبد الرحمن الوقاصي الزهري، وهو متروك الحديث. وعن علي بن أبي طالب موقوفًا عند سعيد بن منصور (١٧٢٢)، والبيهقي ٧/ ١٦٨، ولكنه مرسل. وعن ابن عباس موقوفًا عند عبد الرزاق (١٢٧٦٩) و (١٢٧٨١)، وابن أبي شيبة ٤/ ١٨٤ و ١٨٥ والبيهقي في "السُّنن الكبرى" ٧/ ١٦٨، وفي "المعرفة" (١٣٨٦٩) من طرق عن ابن عباس: أنه سئل عن رجل زنى بأخت امرأته -وبعضهم يقول: بأم امرأته- قال: تخطى حرمتين ولا تحرم عليه امرأته. وقد صححَ إسنادَه الحافظ في "الفتح" ٩/ ١٥٦.









সুনান ইবনু মাজাহ (2016)


حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ وَعَبْدُ اللهِ بْنُ عَامِرِ بْنِ زُرَارَةَ وَمَسْرُوقُ بْنُ الْمَرْزُبَانِ قَالُوا حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ زَكَرِيَّا بْنِ أَبِي زَائِدَةَ عَنْ صَالِحِ بْنِ صَالِحِ بْنِ حَيٍّ عَنْ سَلَمَةَ بْنِ كُهَيْلٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم طَلَّقَ حَفْصَةَ ثُمَّ رَاجَعَهَا




উমার ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) হাফসাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) কে তালাক দেন, অতঃপর তাকে ফিরিয়ে নেন। [২০১৬]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح من جهة عبد الله بن عامر بن زرارة. وأخرجه أبو داود (٢٢٨٣)، والنسائي ٦/ ٢١٣ من طريق يحيى بن زكريا، بهذا الإسناد. وهو في "صحيح ابن حبان" (٤٢٧٥). وأخرج أبو يعلى (١٧٢)، وابن حبان (٤٢٧٦) من طريق أبي صالح، عن ابن عمر، قال: دخل عمر على حفصة وهي تبكي، فقال لها: ما يبكيك؟ لعل رسول الله ﷺ طلقك، إنه قد كان طلقك مرةَ، ثم راجعك من أجلي، والله لئن كان طلقك مرة أخرى، لا أكلمُكِ أبدًا. وإسناده جيد. وانظر تتمة تخريجه في "صحيح ابن حبان" (٤٢٧٦).









সুনান ইবনু মাজাহ (2017)


- حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مُؤَمَّلٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ أَبِي بُرْدَةَ عَنْ أَبِي مُوسَى قَالَ قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم مَا بَالُ أَقْوَامٍ يَلْعَبُونَ بِحُدُودِ اللهِ يَقُولُ أَحَدُهُمْ قَدْ طَلَّقْتُكِ قَدْ رَاجَعْتُكِ قَدْ طَلَّقْتُكِ




আবু মুসা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, লোকদের কি হলো যে, তারা আল্লাহর বিধান নিয়ে ছিনি মিনি খেলছে? তোমাদের কেউ বলে, তোমাকে তালাক দিলাম, তোমাকে আবার ফিরিয়ে নিলাম, তোমাকে আবার তালাক দিলাম। [২২১৭]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، الثوري و أبو إسحاق عنعنا ، (انوار الصحیفہ ص 451)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث حسن، مُؤمَّل -وهو ابن إسماعيل، وإن كان سيئ الحفظ- قد توبع. سفيان: هو ابن سعيد الثوري، وأبو إسحاق: هو السبيعي، وأبو بردة: هو ابن أبي موسى الأشعري. وأخرجه البزار في "مسنده" (٣١١٧)، والروياني في "مسنده" (٤٥٢)، والطبري في "تفسيره" ٢/ ٥٣٩، وابن حبان (٤٢٦٥)، والبيهقي ٧/ ٣٢٢ من طريق مؤمل بن إسماعيل، بهذا الإسناد. وأخرجه ابن جُميع الصيداوي في "معجم شيوخه" (١٤٣)، والبيهقي ٧/ ٣٢٢ من طريق أبي حذيفة موسى بن مسعود، عن سفيان الثوري، به. وإسناده حسن. وأخرجه الطيالسي في "مسنده" (٥٢٧)، ومن طريقه البيهقي ٧/ ٣٢٢ من طريق زهير بن معاوية، عن أبي إسحاق السبيعي، عن أبي بردة مرسلًا، ووقع في مطبوع الطيالسي موصولًا، وهو خطأ. وسماع زهير من أبي إسحاق كان بأخَرة. وأخرجه ابن أبي شيبة في "مصنفه" ٥/ ١ - ٢، وفي "مسنده" كما في "إتحاف الخيرة" (٤٤٧٥)، والطبراني في "الأوسط" (٣٩٦٥)، والبيهقي ٧/ ٣٢٣ من طريق حميد بن عبد الرحمن الحِميَري، عن أبي موسى، وعند ابن أبي شيبة: عن حميد ابن عبد الرحمن الحميري، قال: بلغ أبا موسى أن النبي ﷺ وجد عليهم … ، وإسناده حسن إن صح سماع حميد بن عبد الرحمن من أبي موسى الأشعري.









সুনান ইবনু মাজাহ (2018)


- حَدَّثَنَا كَثِيرُ بْنُ عُبَيْدٍ الْحِمْصِيُّ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ خَالِدٍ عَنْ عُبَيْدِ اللهِ بْنِ الْوَلِيدِ الْوَصَّافِيِّ عَنْ مُحَارِبِ بْنِ دِثَارٍ عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ عُمَرَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم أَبْغَضُ الْحَلَالِ إِلَى اللهِ الطَّلَاقُ




আবদুল্লাহ বিন উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আল্রাহর নিকট সর্বাধিক ঘৃণ্য কাজ হচ্ছে তালাক। [২০১৮]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * عبيد الله بن الوليد الوصّافي وإن كان ضعيفًا تابعه محمَّد بن خالد الوهبي، وأحمد بن يونس، وباقي رجاله ثقات. لكن اختُلف عليهما في وصله وإرساله. وأخرجه أبو أمية الطرسوسي في "مسند عبد الله بن عمر" (١٤)، وابن حبان في "المجروحين" ٢/ ٦٤، وابن عدي في "الكامل" ٤/ ١٦٣٠، وتمام بن محمَّد الرازي في "فوائده" - الروض البسام- (٧٩٨)، وأبو إسحاق الثعلبي في "تفسيره" كما في "المداوي لعلل المناوي" ١/ ٨٢، والبغوي في "تفسيره" ١/ ٢٠٨، وابن عساكر في "تاريخ دمشق" ٢/ ورقة ٢٠٣، وابن الجوزي في "العلل المتناهية" (١٠٥٦) من طريق عبيد الله بن الوليد الوصّافي، بهذا الإسناد. وأخرجه الطرسوسي (١٥)، وأبو داود (٢١٧٨)، وابن عدي في "الكامل" ٤/ ١٦٣٠، و ٦/ ٢٤٥٣، والبيهقي ٧/ ٣٢٢ من طريق محمَّد بن خالد الوهبي، والحاكم ٢/ ١٩٦، وعنه البيهقي ٧/ ٣٢٢ من طريق محمَّد بن عمان بن أبي شيبة، عن أحمد بن يونس، كلاهما (محمَّد بن خالد، وأحمد بن يونس) عن مُعرِّف بن واصل، عن محارب بن دثار به. وأخرجه عبد الله بن المبارك في "البر والصلة" كما في "المقاصد الحسنة" للسخاوي، وأبو نعيم الفضل بن دكين كما في "المقاصد" أيضًا، وابن أبي شيبة ٥/ ٢٥٣ عن وكيع بن الجراح، وأبو داود (٢١٧٧) عن أحمد بن يونس، والبيهقي ٧/ ٣٢٢ من طريق يحيى بن بكير، خمستهم عن معرِّف بن واصل، عن محارب بن دثار، مرسلًاَ. وهو المحفوظ، وقد رجَّحه غير واحد من الأئمة، وذهب ابن التركماني في "الجوهر النقي" ٧/ ٣٢٢ - ٣٢٣ إلى ترجيح وصله. والمرسل الصحيح إذا لم يكن في الباب موصول صحيح يخالفه يحتجُّ به عند الأئمة الثلاثة أبي حنيفة ومالك وأحمد.









সুনান ইবনু মাজাহ (2019)


حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللهِ بْنُ إِدْرِيسَ عَنْ عُبَيْدِ اللهِ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَ طَلَّقْتُ امْرَأَتِي وَهِيَ حَائِضٌ فَذَكَرَ ذَلِكَ عُمَرُ لِرَسُولِ اللهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ مُرْهُ فَلْيُرَاجِعْهَا حَتَّى تَطْهُرَ ثُمَّ تَحِيضَ ثُمَّ تَطْهُرَ ثُمَّ إِنْ شَاءَ طَلَّقَهَا قَبْلَ أَنْ يُجَامِعَهَا وَإِنْ شَاءَ أَمْسَكَهَا فَإِنَّهَا الْعِدَّةُ الَّتِي أَمَرَ اللهُ




ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি আমার স্ত্রীকে তার হায়িদ অবস্থায় তালাক দিলে পর উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বিষয়টা রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর গোচরে আনেন। তিনি বলেনঃ তাকে নির্দেশ দাও, সে যেন তার স্ত্রীকে ফিরিয়ে নেয়, যাবত না সে পবিত্রাবস্থায় ফিরে আসে, অতঃপর পুনরায় তার মাসিক ঋতু হয়, অতঃপর পবিত্রাবস্থায় ফিরে আসে। অতঃপর সে চাইলে তাকে তালাক দিতে পারে তার সাথে সহবাস করার পূর্বে। আর চাইলে সে তাকে স্ত্রী হিসাবে রেখেও দিতে পারে। এই হলো সেই উদ্দাত যা পালনের জন্য আল্লাহ নির্দেশ দিয়েছেন। [২০১৯]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. عبيد الله: هو ابن عمر بن حفص العمري. وأخرجه البخاري (٥٢٥١)، ومسلم (١٤٧١)، وأبو داود (٢١٧٩)، والنسائي ٦/ ١٣٧ - ١٣٨ و١٤٠ - ١٤١ و ٢١٢ من طريق نافع، عن ابن عمر. وهو في "مسند أحمد" (٥١٦٤)، و "صحيح ابن حبان" (٤٢٦٣). وله طرق أخرى عن ابن عمر انظرها في "المسند" عند الحديث (٤٥٠٠). وسيأتي برقم (٢٠٢٢) و (٢٠٢٣) وفيه أن الطلقة التي وقعت في الحيض قد احتسبت.









সুনান ইবনু মাজাহ (2020)


- حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ أَبِي الْأَحْوَصِ عَنْ عَبْدِ اللهِ قَالَ طَلَاقُ السُّنَّةِ أَنْ يُطَلِّقَهَا طَاهِرًا مِنْ غَيْرِ جِمَاعٍ.




আবদুল্লাহ (বিন মাসউদ) (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, সহবাসমুক্ত পবিত্র অবস্থায় (তুহরে) তালাক প্রদান হচ্ছে যথার্থ নিয়মের (সুন্নাত) তালাক। [২০২০]




تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح




تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، نسائي (3423۔3424)، (انوار الصحیفہ ص 451)




تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. سفيان: هو الثوري وأبو إسحاق: هو عمرو بن عبد الله السبيعى وأبو الأحوص: هو عوف بن مالك بن فَضْلة. وعبد الله: هو ابن مسعود الهُذَلي. وأخرجه النسائي ٦/ ١٤٠ من طريق يحيى بن سعيد القطان، عن سفيان الثوري، بهذا الإسناد.