সুনান ইবনু মাজাহ
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَعْمَرٍ، حَدَّثَنَا رَوْحُ بْنُ عَوْفٍ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ " مَا حَقُّ امْرِئٍ مُسْلِمٍ يَبِيتُ لَيْلَتَيْنِ وَلَهُ شَىْءٌ يُوصِي بِهِ إِلاَّ وَوَصِيَّتُهُ مَكْتُوبَةٌ عِنْدَهُ " .
ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, কোন মুসলমানের নিকট ওসিয়াতযোগ্য জিনিস থাকা সত্ত্বেও তার ওয়াসিয়াতনামা তার কাছে লিখিত আকারে না রেখে দু’টি রাতও অতিবাহিত করার অধিকার তার নাই। [২৭০২]
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. رَوح: هو ابن عُبادة، وابن عون: هو عبد الله. وأخرجه النسائي ٦/ ٢٣٩ من طريق عبد الله بن المبارك، عن عبد الله بن عون، عن نافع، عن ابن عمر موقوفًا. وانظر ما سلف برقم (٢٦٩٩). تنبيه: هذا الحديث لم يرد في أصولنا الخطية، ولم يذكره المزي في "تحفة الأشراف"، ولا استدركه ابن حجر في "النكت الظراف"، وهو في النسخ المطبوعة
حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحِيمِ بْنُ زَيْدٍ الْعَمِّيِّ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " مَنْ فَرَّ مِنْ مِيرَاثِ وَارِثِهِ قَطَعَ اللَّهُ مِيرَاثَهُ مِنَ الْجَنَّةِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ " .
আনাস বিন মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, যে ব্যক্তি তার ওয়ারিসকে মীরাস দেয়া থেকে পশ্চাদপসরণ করে, কিয়ামাতের দিন আল্লাহ তাকে জান্নাতের অংশীদার হওয়া থেকে বঞ্চিত করবেন। [২৭০৩]
তাহকীক আলবানী: দঈফ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف جدًا، قال البوصیري: ’’ ھذا إسناد ضعیف،لضعف زید العمي، وابنہ عبد الرحیم ‘‘ عبدالرحیم: متروک کذبہ ابن معین ، (انوار الصحیفہ ص 476)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده واهٍ بمرة، وهو مسلسل بالضعفاء. عبد الرحيم بن زيد العمي متروك الحديث، وأبوه وسويد بن سعيد ضعيفان. وفي الباب عن أبي هريرة عند البيهقي في "الشعب" بإثر الحديث (٧٩٦٥) وإسناده ضعيف. وعن سليمان بن موسى الأشدق مرسلًا عند سعيد بن منصور (٢٨٥)، وابن أبي شيبة ١١/ ١٣٥ ورجاله ثقات
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ الأَزْهَرِ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ بْنُ هَمَّامٍ، أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ، عَنْ أَشْعَثَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ شَهْرِ بْنِ حَوْشَبٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " إِنَّ الرَّجُلَ لَيَعْمَلُ بِعَمَلِ أَهْلِ الْخَيْرِ سَبْعِينَ سَنَةً فَإِذَا أَوْصَى حَافَ فِي وَصِيَّتِهِ فَيُخْتَمُ لَهُ بِشَرِّ عَمَلِهِ فَيَدْخُلُ النَّارَ وَإِنَّ الرَّجُلَ لَيَعْمَلُ بِعَمَلِ أَهْلِ الشَّرِّ سَبْعِينَ سَنَةً فَيَعْدِلُ فِي وَصِيَّتِهِ فَيُخْتَمُ لَهُ بِخَيْرِ عَمَلِهِ فَيَدْخُلُ الْجَنَّةَ " . قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ وَاقْرَءُوا إِنْ شِئْتُمْ {تِلْكَ حُدُودُ اللَّهِ} إِلَى قَوْلِهِ {عَذَابٌ مُهِينٌ}
আবূ হুরায়রাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, কোন ব্যক্তি একাধারে সত্তর বছর যাবত উত্তম কাজ করলো, অতঃপর ওসিয়াতের মাধ্যমে যুলুম করলো, ফলে খারাপ কাজের দ্বারা তার জীবনের সমাপ্তি হলো, সে জাহান্নামে যাবে। আবার কোন লোক একাধারে সত্তর বছর ধরে খারাপ কাজ করলো, অতঃপর ওসিয়াতের মাধ্যমে ন্যায়সঙ্গত কাজ করলো, ফলে ভালো কাজের দ্বারা তার জীবনের সমাপ্তি হলো, সে জান্নাতে যাবে।
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, তোমরা ইচ্ছা করলে (কুরআনের এ আয়াত) পড়তে পারো (অনুবাদ) : “এসব আল্লাহর নির্ধারিত সীমা। কেউ আল্লাহ ও তাঁর রাসূলের আনুগত্য করলে আল্লাহ তাকে জান্নাতে দাখিল করবেন, যার পাদদেশে নদী প্রবাহিত। সেখানে তারা স্থায়ী হবে। এটা এক মহাসাফল্য। আর কেউ আল্লাহ ও তাঁর রাসূলের অবাধ্য হলে এবং তাঁর নির্ধারিত সীমা লংঘন করলে তিনি তাকে জাহান্নামে নিক্ষেপ করবেন। সেখানে সে স্থায়ী হবে, তার জন্য রয়েছে লাঞ্ছনাদায়ক শাস্তি”। (সূরা নিসা: ১৩-১৪)। [২৭০৪]
তাহকীক আলবানী: দঈফ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف لضعف شهر بن حوشب، وقد انفرد به. وأخرجه بنحوه أبو داود (٢٨٦٧)، والترمذي (٢٢٥٠) من طريق نصر بن علي، عن الأشعث بن عبد الله بن جابر، به. وقال الترمذي: حديث حسن غريب. وهو في "مسند أحمد" (٧٧٤٢). وفي الباب قوله-": "إن الرجل ليعمل بعمل أهل الجنة حتى ما يكون بينه وبينها إلا ذراع، فيسبق عليه الكتاب، فيعمل بعمل أهل النار فيدخل النار" أخرجه البخاري (٣٣٣٢)، ومسلم (٢٦٤٣) من حديث عبد الله بن مسعود. والحيف في الوصية من عمل أهل النار
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ عُثْمَانَ بْنِ سَعِيدِ بْنِ كَثِيرِ بْنِ دِينَارٍ الْحِمْصِيُّ، حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ، عَنْ أَبِي حَلْبَسٍ، عَنْ خُلَيْدِ بْنِ أَبِي خُلَيْدٍ، عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ قُرَّةَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " مَنْ حَضَرَتْهُ الْوَفَاةُ فَأَوْصَى وَكَانَتْ وَصِيَّتُهُ عَلَى كِتَابِ اللَّهِ كَانَتْ كَفَّارَةً لِمَا تَرَكَ مِنْ زَكَاتِهِ فِي حَيَاتِهِ " .
কুররাহ বিন ইয়াস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ কেউ অন্তিমকালে আল্লাহর কিতাব অনুযায়ী ওসিয়াত করলে, সে তার জীবনে যে যাকাত দেয়নি এটা তার কাফফারাস্বরূপ। [২৭০৫]
তাহকীক আলবানী: দঈফ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف، بقیۃ عنعن، وشیخہ أبو حلبس: مجہول وخلید مجہول أیضًا(تقریب:، 8062،1739) ، وللحدیث شواہد ضعیفۃ عند الطبراني (33/19) وغیرہ، (انوار الصحیفہ ص 476)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف جدًا لضعف بقية -وهو ابن الوليد الحمصي- وجهالة أبي حَلْبَس وشيخه خُليد بن أبي خُليد، وقد اختُلف فيه عن بقية كما سيأتي، وله طريق آخر لا يُحتفل بمثله. وأخرجه المزي في "تهذيب الكمال" في ترجمة خليد بن أبي خليد ٨/ ٣٠٦ من طريق يحيى بن عثمان، بهذا الإسناد. وخالف يحيى بنَ عثمان عبدُ الرحمن بنُ الحارث المعروف بجحدر وعيسى بنُ المنذر وغيرهما كما قال المزي فقالوا: عن بقية، عن خليد بن أبي خليد، عن أبي حلبس، عن معاوية بن قرة. قلنا: أما طريق عبد الرحمن بن الحارث فأخرجها الدارقطني (٤٢٨٨). وخالفهم جميعًا موسى بن مروان، فقال: عن بقية، عن أبي حلبس خليد بن دعلج، عن معاوية بن قرة، عن أبيه. أخرجه أبو بشر الدولابي في "الكنى" ١/ ١٥٦ وقال: هذا حديث معضل يكاد أن يكون باطلَا. قلنا: خُليد بن دعلج ضعيف. وأخرجه الطبراني في "الكبير" ١٩/ (٦٩)، والخطيب في "تاريخ بغداد" ٨/ ٢٤٧، وابن الجوزي في "الموضوعات" ٣/ ٢٢١ من طريق عبد الله بن عصمة الجزري النصيبي، عن بشر بن حكيم، عن سالم بن كثير، عن معاوية بن قرة، عن أبيه. وإسناده ضعيف لضعف بعض رواته، وفيه أيضًا من لم نعرفه
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا شَرِيكٌ، عَنْ عُمَارَةَ بْنِ الْقَعْقَاعِ، وَابْنِ، شُبْرُمَةَ عَنْ أَبِي زُرْعَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ نَبِّئْنِي بِأَحَقِّ النَّاسِ مِنِّي بِحُسْنِ الصُّحْبَةِ فَقَالَ " نَعَمْ وَأَبِيكَ لَتُنَبَّأَنَّ أُمُّكَ " . قَالَ ثُمَّ مَنْ قَالَ " ثُمَّ أُمُّكَ " . قَالَ ثُمَّ مَنْ قَالَ " ثُمَّ أُمُّكَ " . قَالَ ثُمَّ مَنْ قَالَ " ثُمَّ أَبُوكَ " . قَالَ نَبِّئْنِي يَا رَسُولَ اللَّهِ عَنْ مَالِي كَيْفَ أَتَصَدَّقُ فِيهِ قَالَ " نَعَمْ وَاللَّهِ لَتُنَبَّأَنَّ أَنْ تَصَدَّقَ وَأَنْتَ صَحِيحٌ شَحِيحٌ تَأْمُلُ الْعَيْشَ وَتَخَافُ الْفَقْرَ وَلاَ تُمْهِلْ حَتَّى إِذَا بَلَغَتْ نَفْسُكَ هَاهُنَا قُلْتَ مَالِي لِفُلاَنٍ وَمَالِي لِفُلاَنٍ وَهُوَ لَهُمْ وَإِنْ كَرِهْتَ " .
আবূ হুরায়রাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এক ব্যক্তি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট এসে বললো, ইয়া রাসূলুল্লাহ! আমাকে অবহিত করুন যে, লোকের মধ্যে কে আমার উত্তম সাহচর্যের অধিক দাবিদার। তিনি বলেনঃ হাঁ, তোমার পিতার শপথ! তোমাকে অবশ্যই অবহিত করা হবে, তোমার মা। সে বললো, তারপর কে? তিনি বলেনঃ তারপর তোমার মা। সে বললো, তারপর কে? তিনি বলেনঃ তারপর তোমার মা। সে বললো, তারপর কে? তিনি বলেনঃ তারপর তোমার পিতা। লোকটি বললো, ইয়া রাসূলুল্লাহ! আমাকে অবহিত করুন যে, আমার মাল থেকে আমি কিভাবে দান-খয়রাত করবো? তিনি বলেন: হাঁ, আল্লাহর শপথ! তোমাকে অবশ্যই বলা হবে। তুমি সুস্থ অবস্থায়, সম্পদের প্রতি তোমার আকর্ষণ থাকতে, উত্তমরূপে জীবন যাপনের আশা রেখে এবং দারিদ্রের আশঙ্কা জাগ্রত রেখে দান-খয়রাত করো, কিন্তু বিলম্ব করো না। শেষে যখন তোমার জান এখানে (কন্ঠনালীতে) এসে পৌঁছবে তখন তুমি বলবে আমার এই মাল অমুকের জন্য, আমার এই মাল অমুকের জন্য। অথচ তখন তা তাদের (ওয়ারিসদের) জন্য হয়েই গেছে, যদিও তুমি তা অপছন্দ করো। [২৭০৬]
তাহকীক আলবানী : সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح ق وليس عند خ زيادة نعم وأبيك لتنبأن وهي شهادة
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح، وهذا إسناد حسن في المتابعات، شريك -وهو ابن عبد الله القاضي- ضعيف يعتبر به، وقد توبع. وهذا الحديث أصلُه حديثان، حديث البر، وحديث الصدقة وإنما جمعهما شريك وحده. أخرج الحديثَ الأول البخاريُّ (٥٩٧١)، ومسلم (٢٥٤٨) (١) (٢) (٣) من طريق عُمارة بن القعقاع، به، ومسلم وحدَه قرن بعمارة عبدَ الله بن شبرمة في الطريق الثالثة، إذ إنها عن شريك القاضي. وهو في "مسند أحمد" (٨٣٤٤)، و"صحيح ابن حبان" (٤٣٣). وأخرج الحديثَ الثاني البخاريُّ (١٤١٩)، ومسلم (١٠٣٢)، وأبو داود (٢٨٦٥)، والنسائي ٥/ ٦٨، و ٦/ ٢٣٧ من طريق عمارة بن القعقاع وحده، به. وهو في "مسند أحمد" (٧١٥٩)، و"صحيح ابن حبان" (٣٣١٢) و (٣٣٣٥). وقوله: "وأبيك". قال السندي: قيل: هذا على عادة العرب من جَرْي مثل هذا على اللسان دون تعمد، والنهي عن تعمد مثله، فلا إشكال، وقيل: بل يُحتمل أن يكون قبل النهي، أو هو بتقدير: وخالِق أبيك مثلًا
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ، أَنْبَأَنَا حَرِيزُ بْنُ عُثْمَانَ، حَدَّثَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَيْسَرَةَ، عَنْ جُبَيْرِ بْنِ نُفَيْرٍ، عَنْ بُسْرِ بْنِ جَحَّاشٍ الْقُرَشِيِّ، قَالَ بَزَقَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فِي كَفِّهِ ثُمَّ وَضَعَ أَصْبُعَهُ السَّبَّابَةَ وَقَالَ " يَقُولُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ أَنَّى تُعْجِزُنِي ابْنَ آدَمَ وَقَدْ خَلَقْتُكَ مِنْ مِثْلِ هَذِهِ فَإِذَا بَلَغَتْ نَفْسُكَ هَذِهِ - وَأَشَارَ إِلَى حَلْقِهِ - قُلْتَ أَتَصَدَّقُ وَأَنَّى أَوَانُ الصَّدَقَةِ " .
বুস্র বিন জাহ্হাশ আল-কুরাশী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর হাতের তালুতে থুতু ফেলে তার অপর তাঁর হাতের শাহাদাত আঙ্গুল রেখে বলেন, মহামহিম আল্লাহ বলেন, আদম-সন্তান আমাকে কিভাবে অক্ষম করবে, অথচ আমি তোমাকে সৃষ্টি করেছি এর অনুরূপ জিনিস থেকে। অতঃপর তোমার জান যখন এ পর্যন্ত পৌছবে, তিনি তাঁর কণ্ঠনালীর দিকে ইশারা করলেন, তখন তুমি বলবে, আমি দান করবো। অথচ তখন দান-খয়রাত করার সুযোগ কোথায়? [২৭০৭]
তাহকীক আলবানীঃ হাসান।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. وأخرجه ابن سعد في "الطبقات" ٧/ ٤٢٧، وابن أبي عاصم في "الآحاد والمثاني" (٨٦٩) و (٨٧٠)، وابن قانع في "معجم الصحابة" ١/ ٧٦، والطبراني في "الكبير" (١١٩٤)، وفي "الشاميين" (٤٦٩) و (١٠٨٠)، والحاكم ٢/ ٥٠٢ و ٤٠/ ٣٢٣، وأبو نعيم في "معرفة الصحابة" (١٢٠٠ - ١٢٠٢)، والبيهقي في "الشعب" (٣٤٧٣)، وابن الأثير في "أسد الغابة" ١/ ٢١٥، والمزي في "تهذيب الكمال" في ترجمة بسر ابن جحاش ٤/ ٧١ - ٧٢ من طريق عبد الرحمن بن ميسرة، به. وسقط من مطبوع "الشاميين" في الموضع الأول: جبير بن نفير. وهو في "مسند أحمد" (١٧٨٤٢). قوله: "أنّى" أي: كيف
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، وَالْحُسَيْنُ بْنُ الْحَسَنِ الْمَرْوَزِيُّ، وَسَهْلٌ، قَالُوا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عَامِرِ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ مَرِضْتُ عَامَ الْفَتْحِ حَتَّى أَشْفَيْتُ عَلَى الْمَوْتِ فَعَادَنِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقُلْتُ أَىْ رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ لِي مَالاً كَثِيرًا وَلَيْسَ يَرِثُنِي إِلاَّ ابْنَتِي أَفَأَتَصَدَّقُ بِثُلُثَىْ مَالِي قَالَ " لاَ " . قُلْتُ فَالشَّطْرُ قَالَ " لاَ " . قُلْتُ فَالثُّلُثُ قَالَ " الثُّلُثُ وَالثُّلُثُ كَثِيرٌ إِنَّكَ أَنْ تَتْرُكَ وَرَثَتَكَ أَغْنِيَاءَ خَيْرٌ مِنْ أَنْ تَتْرُكَهُمْ عَالَةً يَتَكَفَّفُونَ النَّاسَ " .
সা‘দ বিন আবূ ওয়াক্কাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, মক্কা বিজয়ের বছর আমি অসুস্থ হয়ে পরলাম, এমনকি আমি মুমূর্ষু অবস্থায় উপনীত হলাম। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে দেখতে এলে আমি বললাম, ইয়া রাসূলুল্লাহ! আমার প্রচুর মাল আছে। একটি মাত্র কন্যা ব্যতীত আমার কোন ওয়ারিস নেই। আমি কি আমার দুই-তৃতীয়াংশ সম্পদ দান-খয়রাত করবো? তিনি বলেনঃ না। আমি বললাম, তাহলে অর্ধেক? তিনি বললেনঃ না। আমি বললাম, তাহলে এক-তৃতীয়াংশ? তিনি বলেনঃ এক-তৃতীয়াংশ করতে পারো, তবে এক-তৃতীয়াংশও অধিক। তুমি তোমার ওয়ারিসদেরকে সচ্ছল অবস্থায় রেখে যাবে, সেটা তাদেরকে মানুষের দ্বারে দ্বারে ঘুরে বেড়ানোর মত নিঃস্ব অবস্থায় রেখে যাওয়ার তুলনায় অধিক উত্তম। [২৭০৮]
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. سهل: هو ابن أبي سهل زَنْجلة. وأخرجه البخاري (١٢٩٥) و (٢٧٤٢) و (٢٧٤٤) و (٣٩٣٦) و (٤٤٠٩) و (٥٣٥٤) و (٥٦٦٨) و (٦٣٧٣) و (٦٧٣٣)، ومسلم (١٦٢٨)، وأبو داود (٢٨٦٤)، والترمذي (٢٢٤٩)، والنسائي ٦/ ٢٤١ - ٢٤٢ و ٢٤٢ و ٢٤٣ من طريق عامر بن سعد بن أبي وقاص، به. وأخرجه البخاري (٥٦٥٩)، ومسلم (١٦٢٨)، وأبو داود (٣١٠٤)، والترمذي (٩٩٧)، والنسائي ٦/ ٢٤٢ - ٢٤٣ و ٢٤٣ و ٢٤٤ من طرق عن سعد بن أبي وقاص. وهو في "مسند أحمد" (١٤٤٠) و (١٤٨٢)، و"صحيح ابن حبان" (٤٢٤٩) و (٦٠٢٦)
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ طَلْحَةَ بْنِ عَمْرٍو، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " إِنَّ اللَّهَ تَصَدَّقَ عَلَيْكُمْ عِنْدَ وَفَاتِكُمْ بِثُلُثِ أَمْوَالِكُمْ زِيَادَةً لَكُمْ فِي أَعْمَالِكُمْ " .
আবূ হুরায়রাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, তোমাদের মৃত্যুর সময়ও তোমাদের মাল থেকে আল্লাহ তাআলা এক-তৃতীয়াংশ ওসিয়াত করার অধিকার প্রদান করে তোমাদের নেক আমলের পরিমাণ আরো বাড়ানোর ব্যবস্থা করে দিয়েছেন। [২৭০৯]
তাহকীক আলবানীঃ হাসান।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف، ضعفہ البوصیري من أجل طلحۃ بن عمرو: متروک، ، وتابعہ عقبۃ بن عبد اللّٰہ الأصم عن عطاء عند أبي نعیم فی الحلیۃ، (322/3) وعقبۃ ضعیف (تقریب: 4642) ، وللحدیث طرق کلھا ضعیفۃ، (انوار الصحیفہ ص 477)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف جدًا. طلحة بن عمر -وهو المكي- متروك الحديث. وقد روي الحديث عن عدد من الصحابة بأسانيد ضعيفة، ولكن بمجموعها يدل على أن للحديث أصلًا، والله تعالى أعلم. وأخرجه سحنون في "المدونة" ٦/ ٥، والبزار في "مسنده" كما في "نصب الراية" ٤/ ٤٠٠، وابن حزم في "المحلى" ٩/ ٣٥٥، والبيهقي ٦/ ٢٦٩، والخطيب في "تاريخ بغداد" ١/ ٣٤٩ من طريق طلحة بن عمرو المكي، به. وفي الباب عن أبي الدرداء عند أحمد (٢٧٤٨٢)، والبزار (١٣٨٢ - كشف الأستار) والطبراني في "مسند الشاميين" (١٤٨٤)، وفي "المعجم الكبير" كما في "نصب الراية" ٤/ ٤٠٠، وأبو نعيم في "الحلية" ٦/ ١٠٤ وفي إسناده ضعف وانقطاع. وعن معاذ بن جبل عند الطبراني في "الكبير" ٢٠/ (٩٤)، والدارقطني (٤٢٨٩) وإسناده ضعيف. وعن أبي بكر الصديق عند العقيلي في "الضعفاء" ١/ ٢٧٥، وابن عدي في "الكامل" ٢/ ٧٩٤ وإسناده ضعيف. وعن خالد بن عُبيد الله -وقيل: عبد الله- السلمي عند ابن أبي عاصم في "الآحاد والمثاني" (١٣٨٥)، والطبراني في "الكبير" (٤١٢٩) وفي "مسند الشاميين" (١٦١٣). وأورده الهيثمي في "المجمع" ٤/ ٢١٢ وقال: إسناده حسن. قلنا: مع أن خالد بن عبيد الله مختلف في صحبته، وابنه الحارث مجهول. وقال الحافظ في "بلوغ المرام" بعد أن ذكر هذه الأحاديث: وكلها ضعيفة، لكن يقوي بعضُها بعضًا
حَدَّثَنَا صَالِحُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ الْقَطَّانِ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى، أَنْبَأَنَا مُبَارَكُ بْنُ حَسَّانَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " يَا ابْنَ آدَمَ اثْنَتَانِ لَمْ تَكُنْ لَكَ وَاحِدَةٌ مِنْهُمَا جَعَلْتُ لَكَ نَصِيبًا مِنْ مَالِكَ حِينَ أَخَذْتُ بِكَظَمِكَ لأُطَهِّرَكَ بِهِ وَأُزَكِّيَكَ وَصَلاَةُ عِبَادِي عَلَيْكَ بَعْدَ انْقِضَاءِ أَجَلِكَ " .
ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ আল্লাহ তাআলা বলেন, হে আদম সন্তান! দু’টি জিনিস তোমার পাওনা ছিলো না। তার একটি এই যে, তোমার মৃত্যুর সময় তোমার মাল থেকে একটি অংশ (দান-খয়রাতের জন্য) নির্দিষ্ট করে দিয়েছি, যাতে তুমি (গুনাহ থেকে) পাকসাফ হতে পারো। আর অপরটি হলো তোমার মৃত্যুর পর তোমার জন্য আমার বান্দাদের দোয়া। [২৭১০]
তাহকীক আলবানীঃ দঈফ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف، مبارک بن حسان: لین الحدیث (تقریب: 6460) وضعفہ، الجمہور، (انوار الصحیفہ ص 477)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف، مبارك بن حسان لين الحديث. وأخرجه عبد بن حميد في "مسنده" (٧٧١)، وأبو أمية الطرسوسي في "مسند عبد الله بن عمر" (٧٣)، والطبراني في "الأوسط" (٧١٢٤)، والدارقطني (٤٢٨٧) من طريقين عن مبارك بن حسان، به. وفي الباب عن أبي قلابة مرسلًا عند أبي نعيم في "حلية الأولياء" ٢/ ٢٨٥، ورجاله ثقات. وقوله: "لم تكن لك واحدة منهما" أي: لا تستحقه إلا برحمة الله تعالى، إذ المال للحياة. فإذا جاء الموت ينبغي أن ينتقل كله إلى غيره، لكنه تعالى أبقى له التصرف في الثلث. "وصلاة عبادي عليك" أي: على الجنازة لهم لا للميت، فينبغي أن لا ينتفع بها وأن ليس للإنسان إلا ما سعى، لكنه تعالى بمنه جعلها نافعةً له كأنها بمنزلة ما سعى. "بكَظَمك" الكَظَم، بفتحتين إعجام الظاء: مجامع النفس، والجمع كظام. قال السيوطي: أي: عند خروج نَفسك، وانقطاع نَفَسِك. قاله السندي
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ وَدِدْتُ أَنَّ النَّاسَ، غَضُّوا مِنَ الثُّلُثِ إِلَى الرُّبُعِ لأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ " الثُّلُثُ كَبِيرٌ - أَوْ كَثِيرٌ - " .
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, আমি আশা করি যে, লোকেরা (তাদের ওসিয়াতের পরিমাণ) এক-তৃতীয়াংশ থেকে এক-চতুর্থাংশে কমিয়ে আনুক। কেননা, রাসূলূল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ এক-তৃতীয়াংশও বেশী বা পর্যাপ্ত হয়ে যায়। [২৭১১]
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: متفق علیہ
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. علي بن محمَّد: هو الطنافسي. وأخرجه البخاري (٢٧٤٣)، ومسلم (١٦٢٩)، والنسائي ٦/ ٢٤٤ من طريق هشام بن عروة، به. وهو في "مسند أحمد" (٢٠٣٤)
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ، أَنْبَأَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي عَرُوبَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ شَهْرِ بْنِ حَوْشَبٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ غَنْمٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ خَارِجَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم خَطَبَهُمْ وَهُوَ عَلَى رَاحِلَتِهِ وَإِنَّ رَاحِلَتَهُ لَتَقْصَعُ بِجِرَّتِهَا وَإِنَّ لُغَامَهَا لَيَسِيلُ بَيْنَ كَتِفَىَّ قَالَ " إِنَّ اللَّهَ قَسَمَ لِكُلِّ وَارِثٍ نَصِيبَهُ مِنَ الْمِيرَاثِ فَلاَ يَجُوزُ لِوَارِثٍ وَصِيَّةٌ الْوَلَدُ لِلْفِرَاشِ وَلِلْعَاهِرِ الْحَجَرُ وَمَنِ ادَّعَى إِلَى غَيْرِ أَبِيهِ أَوْ تَوَلَّى غَيْرَ مَوَالِيهِ فَعَلَيْهِ لَعْنَةُ اللَّهِ وَالْمَلاَئِكَةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ لاَ يُقْبَلُ مِنْهُ صَرْفٌ وَلاَ عَدْلٌ " . أَوْ قَالَ " عَدْلٌ وَلاَ صَرْفٌ " .
আমর বিন খারিজাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর জন্ত্তযানে আরোহিত অবস্থায় তাদের উদ্দেশ্যে ভাষণ দিলেন। জন্ত্তটি তখন জাবর কাটছিল এবং মুখের লালা আমার উভয় কাঁধের মাঝখান দিয়ে পড়ছিল। তিনি বলেনঃ আল্লাহ তাআলা (মৃতের) পরিত্যক্ত মালে প্রত্যেক ওয়ারিসের অংশ নির্দিষ্ট করে দিয়েছেন। তাই কোন ওয়ারিসের অনুকূলে ওসিয়াত করা জায়েয নয়। সন্তান যার অধীন সন্তানের মালিকানা তার, যেনাকারীর জন্য রয়েছে পাথর। যে ব্যক্তি তার পিতাকে বাদ দিয়ে অন্যের সন্তান বলে পরিচয় দেয় অথবা নিজের মনিবকে ত্যাগ ক‘রে অপরকে মনিব বলে পরিচয় দেয়, তার উপর আল্লাহ, তাঁর ফেরেশতাকুল এবং সকল মানুষের অভিশাপ। তার নফল বা ফরয কোন ইবাদাতই কবুল করা হবেনা। [২৭১২]
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * صحيح لغيره، وهذا إسناد حسن في الشواهد من أجل شهر بن حوشب، فهو ضعيف يعتبر به. وأخرجه الترمذي (٢٢٥٤)، والنسائي ٦/ ٢٤٧ من طريق قتادة بن دعامة، بهذا الإسناد. ورواية النسائي مختصرة بقصة الميراث والوصية. وهو في "مسند أحمد" (١٧٦٦٣). ويشهد للحديث بطوله حديث أبي أمامة عند الترمذي (٢٢٥٣) بإسناد حسن، وهو في "مسند أحمد" (٢٢٢٩٤)، وهو عند المصف مختصر بذكر الوصية للوارث سيأتي بعده. وعن أنس بن مالك عند الدارقطني (٤٠٦٦) وفي إسناده مجهول. وفي باب قوله ﷺ: "إن الله قسم لكل وارثِ نصيبه من الميراث، فلا تجوز لوارث وصية" عن أبي أمامة عند أبي داود (٢٨٧٠) و (٣٥٦٥)، وابن الجارود (٩٤٩) وإسناد ابن الجارود صحيح. وليس هذا الحديث ناسخًا لآية الوصية، وإنما هو مخصص لها. وفي باب قوله: "الولد للفراش وللعاهر الحجر" عن عائشة عند البخاري (٢٢١٨)، ومسلم (١٤٥٧). وعن أبي هريرة عند البخاري (٦٨١٨)، ومسلم (١٤٥٨). وهو في "المسند" (٧٢٦٢)، وانظر تتمة شواهده عنده. وفي باب قوله: "ومن ادعى إلى غير أبيه، أو تولى غير مواليه، فعليه لعنة الله والملائكة والناس أجمعين … " عن علي بن أبي طالب عند البخاري (٣١٧٢). ومسلم بإثر (١٥٠٨) / ٢٠، وهو في "مسند أحمد" (٦١٥). وبذكر الادعاء إلى غير الأب عن عبد الله بن عمرو بن العاص عند أحمد (٦٥٩٢)، وقد سلف عند المصنف برقم (٢٦١١). قوله: لتقصَعُ بجرّتها، قال السندي: الجرة بالكسر وتشديد الراء، اسم من اجترار البعير، وهي اللقمة التي يتعلل بها البعير، وقصعُها: إخراجُها
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ عَيَّاشٍ، حَدَّثَنَا شُرَحْبِيلُ بْنُ مُسْلِمٍ الْخَوْلاَنِيُّ، سَمِعْتُ أَبَا أُمَامَةَ الْبَاهِلِيَّ، يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ فِي خُطْبَتِهِ عَامَ حِجَّةِ الْوَدَاعِ " إِنَّ اللَّهَ قَدْ أَعْطَى كُلَّ ذِي حَقٍّ حَقَّهُ فَلاَ وَصِيَّةَ لِوَارِثٍ " .
আবূ উমামা আল-বাহিলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে বিদায় হজ্জের দিন তাঁর খুতবায় বলতে শুনেছিঃ নিশ্চয় আল্লাহ তাআলা প্রত্যেক প্রাপকের প্রাপ্য অংশ নির্দিষ্ট করে দিয়েছেন। অতএব কোন ওয়ারিসের অনুকূলে ওসিয়াত করা যাবে না। [২৭১৩]
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * حديث صحيح، هشام بن عمار تابعه عبد الوهَّاب بن نجدة الحوطي، وعلي بن حجر وهناد وغيرهم فالإسناد من طريقهم حسن، وإسماعيل بن عياش روايته عن أهل بلده مستقيمة وهذا منها. وأخرجه أبو داود (٢٨٧٠) و (٣٥٦٥)، والترمذي (٢٢٥٣) من طرق عن إسماعيل بن عياش، به. وأخرجه ابن الجارود في "المنتقى" (٩٤٩) من طريق سُليم بن عامر وغيره، عن أبي أمامة. وإسناده صحيح. وقد أخرج أبو داود (١٩٥٥) من طريق سليم بن عامر الكلاعي، عن أبي أمامة قال: سمعتُ خطبة النبي ﷺ بمنى يوم النحر- ولم يزد على ذلك
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ شُعَيْبِ بْنِ شَابُورَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ يَزِيدَ بْنِ جَابِرٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي سَعِيدٍ، أَنَّهُ حَدَّثَهُ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ إِنِّي لَتَحْتَ نَاقَةِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَسِيلُ عَلَىَّ لُعَابُهَا فَسَمِعْتُهُ يَقُولُ " إِنَّ اللَّهَ قَدْ أَعْطَى كُلَّ ذِي حَقٍّ حَقَّهُ أَلاَ لاَ وَصِيَّةَ لِوَارِثٍ " .
আনাস বিন মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর উষ্ট্রীর নিচে ছিলাম এবং এর মুখের লালা আমার গায়ে পড়ছিল। এমতাবস্থায় আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে বলতে শুনেছিঃ নিশ্চয় আল্লাহ প্রত্যেক প্রাপকের প্রাপ্য অংশ নির্দিষ্ট করে দিয়েছেন। সাবধান! ওয়ারিসের অনুকূলে ওসিয়াত করা যাবেনা। [২৭১৪]
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * صحيح لغيره، وهذا إسناد ضعيف، لجهالة سعيد بن أبي سعيد -وهو رجل شامي كان ببيروت- وقد ظنه ابن عساكر سعيدَ بنَ أبي سعيد المقبري، وتبعه المزي في "الأطراف" وكذلك ظنه الضياء المقدسي في "مختارته" (٢١٤٤)، وابن التركماني في "الجوهر النقي" ٦/ ٢٦٤ - ٢٦٥، وعليه صحح الضياء الحديثَ، وجوّده ابن التركماني فلم يُصيبوا. وفرق بين الشامي وبين المقبري الخطيبُ البغدادي في "المتفق والمفترق" ٢/ ١٠٤٦، والحافظ سعد الدين الحارثي كما قال ابن حجر في "تهذيب التهذيب" ووافقهما على ذلك وبذلك جزم ابن عبد الهادي في "التنقيح" (١٧١٧)، وهو الصواب كما جاء مصرحًا به في بعض روايات الحديث. وأخرجه الطبراني في "مسند الشاميين" (٦٢١)، والدارقطني (٤٠٦٦) و (٤٠٦٧)، ومن طريقه البيهقي ٦/ ٢٦٤ - ٢٦٥ من طرق عن عبد الرحمن بن يزيد بن جابر، به. وقد جاء عند الدارقطني في الرواية الثانية: عن سعيد بن أبي سعيد شيخ بالساحل. والحديث عند الطبراني والدارقطني مطول بنحو حديث عمرو بن خارجة السالف برقم (٢٧١٢)، وقد أخرج قصة الادعاء إلى غير الأب وتولي غير الموالي من حديث سعيد بن أبي سعيد، عن أنس: أبو داود (٥١١٥)، والخطيب في "المتفق والمفترق" (٦٤٢) وكلاهما قال: عن سعيد بن أبي سعيد ونحن ببيروت. وقوله: لُغامها، قال السندي: بضم اللام وغين معجمة: هو لُعابها وزبدها الذي يخرج من فيها، وهو الزَّبد وحده
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنِ الْحَارِثِ، عَنْ عَلِيٍّ، قَالَ قَضَى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِالدَّيْنِ قَبْلَ الْوَصِيَّةِ وَأَنْتُمْ تَقْرَءُونَهَا {مِنْ بَعْدِ وَصِيَّةٍ يُوصِي بِهَا أَوْ دَيْنٍ } وَإِنَّ أَعْيَانَ بَنِي الأُمِّ لَيَتَوَارَثُونَ دُونَ بَنِي الْعَلاَّتِ .
আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ওসিয়াতের পূর্বে ঋণ পরিশোধের ফয়সালা দিয়েছেন। তোমরা এ আয়াত পাঠ করে থাকো (অনুবাদ) : “যা ওসিয়াত করা হয় তা দেয়ার এবং ঋণ পরিশোধ করার পর” (সুরা নিসাঃ ১২)। সহোদর ভাই ওয়ারিস হবে, বৈমাত্রেয় ভাই ওয়ারিস হবেনা। [২৭১৫]
তাহকীক আলবানীঃ হাসান।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف، ترمذي (2094۔2095،2122) وانظر الحدیث الآتي (2739)، (انوار الصحیفہ ص 477)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف لضعف الحارث -وهو ابن عبد الله الأعور- سفيان: هو الثوري. وأبو إسحاق: هو عمرو بن عبد الله السبيعي. وأخرجه الترمذي (٢٢٢٤ - ٢٢٢٦) و (٢٢٥٥) من طرق عن أبي إسحاق السبيعي، به. وهو في "مسند أحمد" (٥٩٥). وسيأتي برقم (٢٧٣٩). وقال ابن كثير في "تفسيره": ٢/ ١٩٩: أجمع العلماء سلفًا وخلفًا أن الدين مقدم على الوصية، وذلك عند إمعان النظر يُفهم من فحوى الآية الكريمة. ونقل السندي عن الدميري قوله: قال العلماء: أولادُ العَلات، بفتح العين المهملة، وتشديد اللام: الإخوة لأب من أمهات شتى، وأما الإخوة لأبوين فيقال لهم: أولاد الأعيان، والأخياف من الناس: الذين أمهم واحدة وآباؤهم شتى
حَدَّثَنَا أَبُو مَرْوَانَ، مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ الْعُثْمَانِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي حَازِمٍ، عَنِ الْعَلاَءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَجُلاً، سَأَلَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ إِنَّ أَبِي مَاتَ وَتَرَكَ مَالاً وَلَمْ يُوصِ فَهَلْ يُكَفِّرُ عَنْهُ أَنْ تَصَدَّقْتُ عَنْهُ قَالَ " نَعَمْ " .
আবূ হুরায়রাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এক ব্যক্তি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কে জিজ্ঞেস করলো, আমার পিতা ধন-সম্পদ রেখে মারা গেছেন কিন্ত ওসিয়াত করে যাননি। আমি যদি তার পক্ষ থেকে দান-খয়রাত করি তবে কি তা তার কাফ্ফারা হবে? তিনি বললেনঃ হ্যাঁ। [২৭১৬]
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. العلاء بن عبد الرحمن: هو ابن يعقوب مولى الحُرَقة. وأخرجه مسلم (١٦٣٠)، والنساني ٦/ ٢٥١ - ٢٥٢ من طريق العلاء بن عبد الرحمن، به. وهو في "مسند أحمد" (٨٨٤١)
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ رَجُلاً، أَتَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ إِنَّ أُمِّي افْتُلِتَتْ نَفْسُهَا وَلَمْ تُوصِ وَإِنِّي أَظُنُّهَا لَوْ تَكَلَّمَتْ لَتَصَدَّقَتْ فَلَهَا أَجْرٌ إِنْ تَصَدَّقْتُ عَنْهَا وَلِيَ أَجْرٌ فَقَالَ " نَعَمْ " .
আয়িশাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এক ব্যক্তি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট এসে বললো, আমার মায়ের আকস্মিক মৃত্যু হয়েছে, তিনি ওসিয়াত করে যেতে পারেননি। তার সম্পর্কে আমার ধারনা এই যে, তিনি কথা বলতে পারলে অবশ্যই দান-খয়রাত করতেন। আমি যদি তার পক্ষ থেকে দান-খয়রাত করি, তবে তিনি ও আমি কি সওয়াবের অধিকারী হবো? তিনি বলেনঃ হাঁ। [২৭১৭]
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح مسلم
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. أبو أسامة: هو حماد بن أسامة. وأخرجه البخاري (١٣٨٨) و (٢٧٦٠)، ومسلم (١٥٠٤) وبإثر (١٦٣٠) / ١٢، وأبو داود (٢٨٨١)، والنسائي ٦/ ٢٥٠ من طرق عن هشام بن عروة، به. وهو في "مسند أحمد" (٢٤٢٥١)، و"صحيح ابن حبان" (٣٣٥٣)
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ الأَزْهَرِ، حَدَّثَنَا رَوْحُ بْنُ عُبَادَةَ، حَدَّثَنَا حُسَيْنٌ الْمُعَلِّمُ، عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، قَالَ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ لاَ أَجِدُ شَيْئًا وَلَيْسَ لِي مَالٌ وَلِي يَتِيمٌ لَهُ مَالٌ قَالَ " كُلْ مِنْ مَالِ يَتِيمِكَ غَيْرَ مُسْرِفٍ وَلاَ مُتَأَثِّلٍ مَالاً " . قَالَ وَأَحْسِبُهُ قَالَ " وَلاَ تَقِي مَالَكَ بِمَالِهِ " .
আবদুল্লাহ বিন আমর ইবনুল আস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এক ব্যক্তি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট এসে বললো, আমি কিছুই যোগাড় করতে পারছি না এবং আমার ধন-সম্পদও নেই। তবে আমার অধীন এক সম্পদশালী ইয়াতীম আছে। তিনি বলেনঃ তুমি তোমার ইয়াতীমের মাল থেকে ভোগ করো অপচয় না করে এবং নিজের জন্য সঞ্চয় না করে। রাবী বলেন, আমার মনে হয় তিনি এও বলেছেনঃ তার মালকে তোমার মাল খরচ না করার উপায় বানিও না। [২৭১৮]
তাহকীক আলবানীঃ হাসান সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن صحيح
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ حسن
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده حسن. وقوى إسناده الحافظ في "الفتح" ٨/ ٢٤١. وأخرجه أبو داود (٢٨٧٢)، والنسائي ٦/ ٢٥٦ من طريق عمرو بن شعيب، به. وهو في "مسند أحمد" (٦٧٤٧). قوله: "غير مسرف" أي: غير آخذ أزيد من قدر الحاجة، و"متأثّل" أي: ولا متخذ منه أصل مالٍ للتجارة ونحوها، و"لا تقي" أي: ولا تحفظ مالك بصرف ماله في حاجتك. قاله السندي. قلنا: ويدل عليه ويؤيده قول الله تعالى: ﴿وَمَنْ كَانَ غَنِيًّا فَلْيَسْتَعْفِفْ وَمَنْ كَانَ فَقِيرًا فَلْيَأْكُلْ بِالْمَعْرُوفِ﴾ [النساء: ٦] حيث جاءت هذه الآية في معرض ذكر الأيتام وأموالهم
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ الْمُنْذِرِ الْحِزَامِيُّ، حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ بْنِ أَبِي الْعَطَّافِ، حَدَّثَنَا أَبُو الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " يَا أَبَا هُرَيْرَةَ تَعَلَّمُوا الْفَرَائِضَ وَعَلِّمُوهَا فَإِنَّهُ نِصْفُ الْعِلْمِ وَهُوَ يُنْسَى وَهُوَ أَوَّلُ شَىْءٍ يُنْتَزَعُ مِنْ أُمَّتِي " .
আবু হুরায়রাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ হে আবু হুরায়রাহ! ফারায়েয শিক্ষা করো এবং (অন্যদের) তা শিক্ষা দাও। কেননা তা জ্ঞানের অর্ধেক। আর এটা ভুলিয়ে দেয়া হবে এবং এটাই প্রথম জিনিস যা আমার উম্মাত থেকে (শেষ যুগে) ছিনিয়ে নেয়া হবে। [২৭১৯]
তাহকীক আলবানীঃ দঈফ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * ضعيف
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف، حفص بن عمر بن أبی العطاف: ضعیف (تقریب: 1418) ، والحدیث من أجلہ ضعفہ البوصیري، (انوار الصحیفہ ص 477)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده ضعيف جدًا. حفص بن عمر بن أبي العَطاف متروك الحديث. وأخرجه الطبراني في "الأوسط" (٥٢٩٣)، وابن عدي ٢/ ٧٩١، والدارقطني (٤٠٥٩)، والحاكم ٤/ ٣٣١، والبيهقي ٦/ ٢٠٨ - ٢٠٩، والخطيب في "تاريخ بغداد" ١٢/ ٩٠، والمزي في ترجمة حفص بن عمر ٧/ ٤٠ و٤٠ - ٤١ من طريق حفص بن عمر، بهذا الإسناد. وأخرجه الترمذي (٢٢٢٠) من طريق الفضل بن دلهم، عن عوف بن أبي جميلة الأعرابي، عن شهر بن حوشب، عن أبي هريرة. وهذا إسناد قد اختُلف فيه على عوف الأعرابي كما أوضحناه في "جامع الترمذي"، ولهذا قال الترمذي: هذا حديث فيه اضطراب. وله شاهدان ذكرناهما في "جامع الترمذي" وهما ضعيفان لا تقوم بهما الحجة
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي عُمَرَ الْعَدَنِيُّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ جَاءَتِ امْرَأَةُ سَعْدِ بْنِ الرَّبِيعِ بِابْنَتَىْ سَعْدٍ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ هَاتَانِ ابْنَتَا سَعْدٍ قُتِلَ مَعَكَ يَوْمَ أُحُدٍ وَإِنَّ عَمَّهُمَا أَخَذَ جَمِيعَ مَا تَرَكَ أَبُوهُمَا وَإِنَّ الْمَرْأَةَ لاَ تُنْكَحُ إِلاَّ عَلَى مَالِهَا . فَسَكَتَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حَتَّى أُنْزِلَتْ آيَةُ الْمِيرَاثِ فَدَعَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَخَا سَعْدِ بْنِ الرَّبِيعِ فَقَالَ " أَعْطِ ابْنَتَىْ سَعْدٍ ثُلُثَىْ مَالِهِ وَأَعْطِ امْرَأَتَهُ الثُّمُنَ وَخُذْ أَنْتَ مَا بَقِيَ " .
জাবির বিন আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, সা‘দ বিন আর রাবী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর স্ত্রী সা‘দের দু’ কন্যাসহ নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর নিকট এসে বলেন, ইয়া রাসুলুল্লাহ! এরা দু’জন সা‘দ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-র কন্যা, যিনি আপনার সাথে উহুদের যুদ্ধে শরীক হয়ে শহীদ হয়েছেন। এদের পিতার পরিত্যক্ত সমস্ত মাল এদের চাচা দখল করে নিয়েছে। মেয়েদের সম্পদ না থাকলে তাদের বিবাহ দেয়া যায় না| রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) চুপ করে রইলেন। শেষে উত্তরাধিকার স্বত্ব সংক্রান্ত আয়াত নাযিল হলো। তখন রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সা‘দ বিন আর রাবী‘র ভাইকে ডেকে এনে বলেনঃ সা‘দের কন্যাদ্বয়কে তার সম্পদের দুই-তৃতীয়াংশ দাও, তার স্ত্রীকে এক-অষ্টমাংশ দাও, অবশিষ্ট যা থাকে তা তুমি নাও। [২৭২০]
তাহকীক আলবানীঃ হাসান
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * حسن
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: إسنادہ ضعيف ، سنن أبي داود (2891) ترمذي (2092)، (انوار الصحیفہ ص 477)
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده محتمل للتحسين من أجل ابن عقيل، وقد تفرد به، وقد صححه الترمذي من طريقه. وآخرجه أبو داود (٢٨٩١) و (٢٨٩٢)، والترمذي (٢٢٢٢) من طريق عبد الله ابن محمَّد بن عقيل، عن جابر. وهو في "مسند أحمد" (١٤٧٩٨)
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي قَيْسٍ الأَوْدِيِّ، عَنِ الْهُزَيْلِ بْنِ شُرَحْبِيلَ، قَالَ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى أَبِي مُوسَى الأَشْعَرِيِّ وَسَلْمَانَ بْنِ رَبِيعَةَ الْبَاهِلِيِّ فَسَأَلَهُمَا عَنِ ابْنَةٍ وَابْنَةِ ابْنٍ وَأُخْتٍ، لأَبٍ وَأُمٍّ فَقَالاَ لِلاِبْنَةِ النِّصْفُ وَمَا بَقِيَ فَلِلأُخْتِ وَائْتِ ابْنَ مَسْعُودٍ فَسَيُتَابِعُنَا . فَأَتَى الرَّجُلُ ابْنَ مَسْعُودٍ فَسَأَلَهُ وَأَخْبَرَهُ بِمَا قَالاَ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ قَدْ ضَلَلْتُ إِذًا وَمَا أَنَا مِنَ الْمُهْتَدِينَ وَلَكِنِّي سَأَقْضِي بِمَا قَضَى بِهِ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لِلاِبْنَةِ النِّصْفُ وَلاِبْنَةِ الاِبْنِ السُّدُسُ تَكْمِلَةَ الثُّلُثَيْنِ وَمَا بَقِيَ فَلِلأُخْتِ .
আবদুল্লাহ বিন মাসঊদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, এক ব্যক্তি আবু মুসা আশাআরী ও সালমান বিন রাবীআ আল-বাহিলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে এসে এক কন্যা, এক পৌত্রী ও এক সহোদর বোনের ওয়ারিসী স্বত্ব সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলো। তারা বলেন, কন্যা পাবে অর্ধেক এবং অবশিষ্ট থাকবে তা পাবে বোন। তুমি বিন মাসউদের নিকট যাও। তিনিও হয়তো আমাদের সাথে একমত হবেন। অতঃপর লোকটি বিন মাসউদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)–এর নিকট গিয়ে জিজ্ঞাসা করলো এবং তারা যা বলেছিলেন তাও তাকে অবহিত করলো। আবদুল্লাহ বিন মাসউদ(রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, তাহলে আমি পথভ্রষ্ট হয়ে যাবো এবং হেদায়াতপ্রাপ্তদের অন্তভুক্ত থাকবো না। এ ব্যাপারে আমি রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এর অনুরূপ ফায়সালাই দিবো। কন্যা পাবে অর্ধাংশ এবং পৌত্রী পাবে এক-ষষ্ঠাংশ। এভাবে উভয়ের অংশ মিলে দুই-তৃতীয়াংশ পূর্ণ হবে। অবশিষ্ট যা থাকবে তা পাবে বোন। [২৭২১]
তাহকীক আলবানীঃ সহীহ।
تحقيق الشيخ ناصر الدين الألباني: * صحيح خ المرفوع منه فقط
تحقيق الشيخ زبیر العلیزي الباكستاني: صحیح بخاری
تحقيق الشيخ شعيب الأرناؤوط: * إسناده صحيح. أبو قيس الأودي: هو عبد الرحمن بن ثروان، ووكيع: هو ابن الجراح، وعلي بن محمَّد: هو الطَّنافسي. وأخرجه البخاري (٦٧٣٦) و (٦٧٤٢)، وأبو داود (٢٨٩٠)، والترمذي (٢٢٢٣)، والنسائي في "الكبرى" (٦٢٩٤ - ٦٢٩٦) من طريق أبي قيس عبد الرحمن ابن ثروان، به. وهو في "مسند أحمد" (٣٦٩١)