মুসান্নাফ ইবনে আবি শায়বাহ
(حدثنا أبو خالد الأحمر عن يحيى بن سعيد عن عمرو بن شعيب قال: لما انصرف رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم)(1) من حنين بعد الطائف قال: "أدوا الخياط والمخيط"، فإن الغلول نار (وعار)(2) وشنار على أهله يوم القيامة
إلا (الخمس)(3) "، ثم تناول شعرة من بعير فقال: "ما لي من مالكم هذا إلا الخمس، ((والخمس)(4) مردود)(5) عليكم"(6).
আমর ইবনে শুআইব (রাহ.) থেকে বর্ণিত, যখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম তায়েফের (অভিযানের) পর হুনাইন থেকে প্রত্যাবর্তন করলেন, তখন তিনি বললেন: “তোমরা সূচ ও সুতো পর্যন্ত (যা আত্মসাৎ করেছ তা) ফিরিয়ে দাও। কারণ (যুদ্ধলব্ধ সম্পদ) আত্মসাৎ করা (গুলূল) হলো আগুন, লজ্জা ও চরম অপমানের কারণ, যা কিয়ামতের দিন আত্মসাৎকারীর ওপর বর্তাবে। তবে (শরীয়ত নির্ধারিত) এক-পঞ্চমাংশ (খুমুস) এর ব্যতিক্রম।”
এরপর তিনি একটি উট থেকে একটি পশম তুলে নিলেন এবং বললেন: “তোমাদের এই সম্পদ থেকে আমার জন্য কেবল এক-পঞ্চমাংশ (খুমুস)-ই প্রাপ্য, আর সেই এক-পঞ্চমাংশও তোমাদের কাছেই ফিরিয়ে দেওয়া হবে।”
تحقيق: الشيخ سعد بن ناصر الشثري
(1) سقط من: [أ، ب].(2) في [ب]: (وبحار).
(3) في [أ، ب]: (الخميس)، وفي [ق]: (خمس).
(4) سقط من: [س].
(5) (والخمس مردود) ذكره (مرة في النسخة)، ومرة أخرى في الحاشية من النسخة [أ، ب].
(6) مرسل؛ عمرو بن شعيب تابعي، أخرجه مالك في الموطأ 2/ 457 (977)، وعبد الرزاق (9498)،
وورد من حديث عمرو بن شعيب عن أبيه عن جده، أخرجه أحمد 2/ 184 (6728)، وأبو داود (2694)، والنسائي (6515)، والطبراني في الأوسط (1864)، والبيهقي 6/ 336.
