আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম
8890 - أخبرني أبو الحسن علي بن محمد القرشي بالكوفة، حدثنا الحسن بن علي بن عفّان العامري، حدثنا أسباطُ بن محمد القُرَشي، حدثنا مُطرِّف بن طَريف الحارثي، عن عطيَّة، عن ابن عبَّاس، في قوله عز وجل: {فَإِذَا نُفِخَ فِي الصُّورِ} [المؤمنون: 101] قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "كيف أَنعَمُ وصاحبُ الصُّورِ قد الْتقَمَ القَرْنَ، وَحَنَى جبهتَه، وأَصغَى بسمعِه! " قال أصحاب رسول الله صلى الله عليه وسلم: كيف نقولُ يا رسولَ الله؟ قال: "قولوا: حَسْبُنَا الله ونِعم الوكيلُ، على الله توكَّلْنا" [1]مدارُ هذا الحديث على عطيَّة بن سعد العَوْفِي رحمه الله، وهو كبيرُ المَحَلِّ في أقرانه من التابعين، ولم يُخرج عنه الشيخان رضي الله عنهما في "الصحيحين".
আবদুল্লাহ ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহ তাআলার বাণী {فَإِذَا نُفِخَ فِي الصُّورِ} (যখন শিঙ্গায় ফুঁক দেওয়া হবে) [সূরা আল-মুমিনুন: ১০১] প্রসঙ্গে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আমি কীভাবে নিশ্চিন্ত থাকব? যখন শিঙ্গায় ফুঁক দেওয়ার দায়িত্বে থাকা ফেরেশতা শিঙ্গা মুখে তুলে নিয়েছেন, নিজের কপাল নিচু করে রেখেছেন এবং কান পেতে আছেন!" রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাহাবীগণ জিজ্ঞেস করলেন, "হে আল্লাহর রাসূল! আমরা কী বলব?" তিনি বললেন, "তোমরা বলো: 'حَسْبُنَا الله ونِعم الوكيلُ، على الله توكَّلْنا' (হাসবুনাল্লাহু ওয়া নি'মাল ওয়াকীল, আলাল্লাহি তাওয়াক্কালনা)। অর্থাৎ, আল্লাহই আমাদের জন্য যথেষ্ট এবং তিনি উত্তম কর্মবিধায়ক। আমরা আল্লাহর ওপর ভরসা করলাম।"
تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] إسناده ضعيف لضعف عطية - وهو ابن سعد العَوْفِي - وقد كان يضطرب فيه، فمرةً يرويه عن ابن عباس كما وقع للمصنف هنا، ومرةً أخرى عن أبي سعيد الخدري كما سيأتي في لاحقه، ومرة ثالثة يرويه عن زيد بن أرقم كما وقع عند أحمد في "المسند" 32/ (19345) وغيره، وأصحها حديث أبي سعيد الخدري لمجيئه في رواية أخرى من غير طريقه.وأما حديث ابن عباس فقد أخرجه أحمد 5/ (3008) عن أسباط بن محمد، بهذا الإسناد. وانظر تتمة تخريجه هناك.