আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম
8913 - أخبرنا عبد الله بن إسحاق الخُراساني العدل ببغداد، حدثنا أحمد بن الوليد الفَحَّام، حدثنا رَوْح بن عُبَادة، حدثنا حمّاد بن سَلَمة، عن علي بن زيد، عن يوسف بن مِهْران، عن ابن عباس أنه قرأَ: {وَيَوْمَ تَشَقَّقُ السَّمَاءُ بِالْغَمَامِ وَنُزِّلَ الْمَلَائِكَةُ تَنْزِيلًا} [الفرقان: 25] قال: تَشقَّقُ سماء الدنيا وتَنزِلُ الملائكة على كل سماء، وهم أكثرُ ممَّن في الأرض من الجنِّ والإنس فيقول أهلُ الأرض: أفيكم ربُّنا؟ فيقولون: لا، ثم يَنزِل أهل السماء الثانية، وهم أكثرُ من أهل السماء الدنيا وأهل الأرض، فيقولون: أفيكم ربُّنا؟ فيقولون: لا، ثم يَنزل أهل السماء الثالثة، وهم أكثرُ من أهل السماء الثانية وسماءِ الدنيا وأهل الأرض، فيقولون: أفيكم ربُّنا؟ فيقولون: لا، ثم يَنزِل أهلُ السماءِ، الرابعة، وهم أكثرُ من أهلِ السماء الثالثة والثانية والدنيا وأهلِ الأرض، فيقولون: أفيكم ربُّنا؟ فيقولون: لا، ثم يَنزِل أهلُ السماء الخامسة، وهم أكثرُ من أهل السماء الرابعة والثالثة والثانية والدنيا وأهلِ الأرض، فيقولون: أفيكم ربُّنا؟ فيقولون: لا، ثم يَنزِل أهلُ السماء السادسة، وهم أكثرُ من أهل السماء الخامسة والرابعة والثالثة والثانية والدنيا وأهلِ الأرض، فيقولون: أفيكم ربُّنا؟ فيقولون: لا، ثم يَنزِل أهل السماء السابعة وهم أكثرُ من أهل السماء السادسة والخامسة والرابعة والثالثة والثانية والدنيا وأهلِ الأرض، فيقولون: أفيكم ربُّنا؟ فيقولون: لا، ثم يَنزِل الكَرُوبيُّون، وهم أكثرُ من أهل السماوات السبع والأَرَضِين، وحَمَلةُ العَرْش، لهم قرونٌ كُعُوبٌ كُعوبَ [1] القَنَا، ما بين قَدَم أحدهم كذا وكذا، ومن أخَمصِ قدمه إلى كَعْبه مسيرةُ خمس مئة عامٍ، ومن كَعْبه إلى ركبته مسيرةُ خمس مئة عام [2]، ومن ركبتِه إلى أَرنَبَتِه مسيرةُ خمس مئة عامٍ، ومن تَرقُوَتِه إلى موضع القُرْطِ مسيرةُ خمسِ مئة عام [3]. رُواة هذا الحديثِ عن آخرهم مُحَتجٌّ بهم غيرَ عليِّ بن زيد بن جُدْعان القُرَشي، وهو وإن كان موقوفًا على ابن عبَّاس، فإنه عجيبٌ بمَرَّةٍ.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি এই আয়াতটি পাঠ করলেন: “আর যেদিন আকাশ মেঘমালাসহ বিদীর্ণ হবে এবং ফেরেশতাদেরকে সম্পূর্ণরূপে নামিয়ে দেওয়া হবে।” [সূরা আল-ফুরকান: ২৫]।
তিনি বলেন: (কিয়ামতের দিন) দুনিয়ার আসমান বিদীর্ণ হবে এবং প্রত্যেক আসমান থেকে ফেরেশতারা অবতরণ করবেন। তারা হবেন যমীনে থাকা জিন ও মানুষের চেয়ে সংখ্যায় অনেক বেশি। তখন পৃথিবীবাসী বলবে: আমাদের রব কি তোমাদের মাঝে আছেন? তারা বলবে: না।
অতঃপর দ্বিতীয় আসমানের অধিবাসীরা অবতরণ করবেন। তারা প্রথম আসমানের অধিবাসী এবং পৃথিবীবাসীর চেয়ে সংখ্যায় বেশি হবে। তারা বলবে: আমাদের রব কি তোমাদের মাঝে আছেন? তারা বলবে: না।
অতঃপর তৃতীয় আসমানের অধিবাসীরা অবতরণ করবেন। তারা দ্বিতীয় আসমান, প্রথম আসমান এবং পৃথিবীবাসীর চেয়ে সংখ্যায় বেশি হবে। তারা বলবে: আমাদের রব কি তোমাদের মাঝে আছেন? তারা বলবে: না।
অতঃপর চতুর্থ আসমানের অধিবাসীরা অবতরণ করবেন। তারা তৃতীয়, দ্বিতীয়, প্রথম আসমান এবং পৃথিবীবাসীর চেয়ে সংখ্যায় বেশি হবে। তারা বলবে: আমাদের রব কি তোমাদের মাঝে আছেন? তারা বলবে: না।
অতঃপর পঞ্চম আসমানের অধিবাসীরা অবতরণ করবেন। তারা চতুর্থ, তৃতীয়, দ্বিতীয়, প্রথম আসমান এবং পৃথিবীবাসীর চেয়ে সংখ্যায় বেশি হবে। তারা বলবে: আমাদের রব কি তোমাদের মাঝে আছেন? তারা বলবে: না।
অতঃপর ষষ্ঠ আসমানের অধিবাসীরা অবতরণ করবেন। তারা পঞ্চম, চতুর্থ, তৃতীয়, দ্বিতীয়, প্রথম আসমান এবং পৃথিবীবাসীর চেয়ে সংখ্যায় বেশি হবে। তারা বলবে: আমাদের রব কি তোমাদের মাঝে আছেন? তারা বলবে: না।
অতঃপর সপ্তম আসমানের অধিবাসীরা অবতরণ করবেন। তারা ষষ্ঠ, পঞ্চম, চতুর্থ, তৃতীয়, দ্বিতীয়, প্রথম আসমান এবং পৃথিবীবাসীর চেয়ে সংখ্যায় বেশি হবে। তারা বলবে: আমাদের রব কি তোমাদের মাঝে আছেন? তারা বলবে: না।
এরপর কারূবিয়্যূন (আল্লাহর নৈকট্যপ্রাপ্ত ফেরেশতাগণ) অবতরণ করবেন। তারা সাত আসমান ও যমীনবাসীর চেয়েও সংখ্যায় বেশি হবেন। আর তাঁরাই হলেন আরশের বাহক। তাদের শিংগুলো বর্শার অগ্রভাগের মতো সুদৃঢ়। তাদের (আরশ বহনকারী ফেরেশতাদের) একজনের দুই পায়ের মাঝখানে এত এত দূরত্ব (অনেক বেশি দূরত্ব বোঝানো হয়েছে)। তাদের পায়ের গোড়ালি থেকে হাঁটু পর্যন্ত পাঁচশো বছরের পথের দূরত্ব। তাদের হাঁটু থেকে নাকের ডগা পর্যন্ত পাঁচশো বছরের পথের দূরত্ব। আর তাদের কণ্ঠাস্থি (কলার বোন) থেকে কানের লতি পর্যন্ত পাঁচশো বছরের পথের দূরত্ব।
تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] في (م) و (ب) ككعوب بإثبات كاف التشبيه. والقَنا: جمع القَناة، وهو الرُّمح، وكعبُها: ما بين كل عُقدتين من أنبوبتها. انظر "النهاية" لابن الأثير (كعب). وأخرجه آدم بن أبي إياس في "تفسيره" 2/ 450 - 451 حماد بن سلمة، وأخرجه أيضًا أسدُ بن موسى في "الزهد" (53)، والدارمي في "الرد على الجهمية" (142)، وفي "نقضه على بشر المريسي" 1/ 476 - 477، وابن أبي حاتم في "تفسيره" 8/ 2682 من طرق عن حماد بن سلمة، بهذا الإسناد. وهو عند بعضهم مختصر.وأخرجه بنحوه الطبري في "التفسير" 19/ 6 - 7 من طريق مبارك بن فضالة، عن علي بن زيد، به.وأخرجه بنحوه ابن المبارك في الزهد برواية نعيم بن حماد (353)، وابن أبي الدنيا في "الأهوال" (173)، والحارث بن أبي أسامة في "مسنده" (1122 - بغية الباحث)، وأبو نعيم في "الحلية" 6/ 62 من طريق عوف الأعرابي، عن أبي المنهال سيّار بن سلامة الرِّياحي، عن شهر بن حوشب عن ابن عباس. وشهر فيه ضعف.ورواه غسان بن بُرْزِين عند أسد بن موسى في "الزهد" (52) عن سيار بن سلامة، عن أبي العالية الرياحي، عن ابن عباس. ورجال هذه الرواية، ثقات، إلَّا أنها شاذة، فقد خالف غسان من هو أوثق وأثبت منه، وهو عوف الأعرابي في الرواية السابقة، فذكر فيه شهرًا مكان أبي العالية.وقد ورد قريب من خبر ابن عباس هذا في حديث الصور الطويل من حديث أبي هريرة مرفوعًا إلى النبي صلى الله عليه وسلم، فيما أخرجه إسحاق بن راهويه في "مسنده" (10)، وابن أبي الدنيا في "الأهوال" (155)، والطبري في "التفسير" 2/ 330 - 331، وغيرهم وفيه إسماعيل بن رافع قاص أهل المدينة، وهو ضعيف بمرَّة.
[2] لفظ "عام" هنا من (ك) وحدها. وأخرجه آدم بن أبي إياس في "تفسيره" 2/ 450 - 451 حماد بن سلمة، وأخرجه أيضًا أسدُ بن موسى في "الزهد" (53)، والدارمي في "الرد على الجهمية" (142)، وفي "نقضه على بشر المريسي" 1/ 476 - 477، وابن أبي حاتم في "تفسيره" 8/ 2682 من طرق عن حماد بن سلمة، بهذا الإسناد. وهو عند بعضهم مختصر.وأخرجه بنحوه الطبري في "التفسير" 19/ 6 - 7 من طريق مبارك بن فضالة، عن علي بن زيد، به.وأخرجه بنحوه ابن المبارك في الزهد برواية نعيم بن حماد (353)، وابن أبي الدنيا في "الأهوال" (173)، والحارث بن أبي أسامة في "مسنده" (1122 - بغية الباحث)، وأبو نعيم في "الحلية" 6/ 62 من طريق عوف الأعرابي، عن أبي المنهال سيّار بن سلامة الرِّياحي، عن شهر بن حوشب عن ابن عباس. وشهر فيه ضعف.ورواه غسان بن بُرْزِين عند أسد بن موسى في "الزهد" (52) عن سيار بن سلامة، عن أبي العالية الرياحي، عن ابن عباس. ورجال هذه الرواية، ثقات، إلَّا أنها شاذة، فقد خالف غسان من هو أوثق وأثبت منه، وهو عوف الأعرابي في الرواية السابقة، فذكر فيه شهرًا مكان أبي العالية.وقد ورد قريب من خبر ابن عباس هذا في حديث الصور الطويل من حديث أبي هريرة مرفوعًا إلى النبي صلى الله عليه وسلم، فيما أخرجه إسحاق بن راهويه في "مسنده" (10)، وابن أبي الدنيا في "الأهوال" (155)، والطبري في "التفسير" 2/ 330 - 331، وغيرهم وفيه إسماعيل بن رافع قاص أهل المدينة، وهو ضعيف بمرَّة.
8913 [3] - إسناده ضعيف لضعف علي بن زيد - وهو ابن جدعان - وتساهل الذهبي في "تلخيصه" فقوَّى الإسناد. وأخرجه آدم بن أبي إياس في "تفسيره" 2/ 450 - 451 حماد بن سلمة، وأخرجه أيضًا أسدُ بن موسى في "الزهد" (53)، والدارمي في "الرد على الجهمية" (142)، وفي "نقضه على بشر المريسي" 1/ 476 - 477، وابن أبي حاتم في "تفسيره" 8/ 2682 من طرق عن حماد بن سلمة، بهذا الإسناد. وهو عند بعضهم مختصر.وأخرجه بنحوه الطبري في "التفسير" 19/ 6 - 7 من طريق مبارك بن فضالة، عن علي بن زيد، به.وأخرجه بنحوه ابن المبارك في الزهد برواية نعيم بن حماد (353)، وابن أبي الدنيا في "الأهوال" (173)، والحارث بن أبي أسامة في "مسنده" (1122 - بغية الباحث)، وأبو نعيم في "الحلية" 6/ 62 من طريق عوف الأعرابي، عن أبي المنهال سيّار بن سلامة الرِّياحي، عن شهر بن حوشب عن ابن عباس. وشهر فيه ضعف.ورواه غسان بن بُرْزِين عند أسد بن موسى في "الزهد" (52) عن سيار بن سلامة، عن أبي العالية الرياحي، عن ابن عباس. ورجال هذه الرواية، ثقات، إلَّا أنها شاذة، فقد خالف غسان من هو أوثق وأثبت منه، وهو عوف الأعرابي في الرواية السابقة، فذكر فيه شهرًا مكان أبي العالية.وقد ورد قريب من خبر ابن عباس هذا في حديث الصور الطويل من حديث أبي هريرة مرفوعًا إلى النبي صلى الله عليه وسلم، فيما أخرجه إسحاق بن راهويه في "مسنده" (10)، وابن أبي الدنيا في "الأهوال" (155)، والطبري في "التفسير" 2/ 330 - 331، وغيرهم وفيه إسماعيل بن رافع قاص أهل المدينة، وهو ضعيف بمرَّة.