সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ
1681 - ` إن بني إسرائيل لما هلكوا قصوا `.
أخرجه الطبراني في ` المعجم الكبير ` (رقم - 7305) وأبو نعيم في ` الحلية `
(4 / 362) عن أبي أحمد الزبير أخبرنا سفيان عن الأجلح عن عبد الله بن أبي
الهذيل عن أبي
الهذيل عن خباب عن النبي صلى الله عليه وسلم. وقال أبو
نعيم: ` غريب من حديث الأجلح والثوري، تفرد به أبو أحمد `.
قلت: وهذا إسناد حسن، رجاله ثقات رجال مسلم غير الأجلح وهو ابن عبد الله بن
حجية، وهو صدوق كما قال الذهبي في ` الضعفاء ` والحافظ في ` التقريب ` ولا
عيب فيه سوى أنه شيعي ولكن ذلك لا يضر في الرواية لأن العمدة فيها إنما هو
الصدق كما حرره الحافظ في ` شرح النخبة `. وقال الهيثمي في ` المجمع ` (1 /
189) : ` رواه الطبراني في ` الكبير ` ورجاله موثقون، واختلف في الأجلح
الكندي، والأكثر على توثيقه `. والحديث أورده عبد الحق الإشبيلي في `
الأحكام ` (ق 8 / 1) وقال: ` رواه البزار من حديث شريك - هو ابن عبد الله -
عن أبي سنان عن أبي - لعله عن ابن أبي - الهزيل عن خباب مرفوعا وقال: هذا
إسناد حسن كذا قال: وليس مما يحتج به.
قلت: وذلك لضعف شريك بن عبد الله القاضي، لكن الطريق الأولى تشهد له وتقويه
. ولم يورده الهيثمي في ` كشف الأستار عن زوائد البزار ` فلعله في غير `
المسند ` له.
(قصوا) قال في ` النهاية `: وفي رواية: ` لما هلكوا قصوا ` أي اتكلوا على
القول وتركوا العمل، فكان ذلك سبب هلاكهم، أو بالعكس، لما هلكوا بترك العمل
أخلدوا إلى القصص `. وأقول: ومن الممكن أن يقال: إن سبب هلاكهم اهتمام
وعاظهم بالقصص والحكايات دون الفقه والعلم النافع الذي يعرف الناس بدينهم
فيحملهم ذلك على العمل
الصالح، لما فعلوا ذلك هلكوا. وهذا هو شأن كثير من
قصاص زماننا الذين جل كلامهم في وعظهم حول الإسرائيليات والرقائق والصوفيات.
نسأل الله العافية.
খাব্বাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, [রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:]
নিশ্চয়ই বনি ইসরাঈল যখন ধ্বংসপ্রাপ্ত হয়েছিল, তখন তারা (আমল ছেড়ে) কিসসা-কাহিনীতে মগ্ন হয়েছিল।
1682 - ` إن بين يدي الساعة الهرج، قالوا: وما الهرج؟ قال: القتل، إنه ليس
بقتلكم المشركين، ولكن قتل بعضكم بعضا (حتى يقتل الرجل جاره ويقتل أخاه
ويقتل عمه ويقتل ابن عمه) قالوا: ومعنا عقولنا يومئذ؟ قال: إنه لتنزع
عقول أهل ذلك الزمان، ويخلف له هباء من الناس، يحسب أكثرهم أنهم على شيء
وليسوا على شيء `.
أخرجه أحمد (4 /
আবু মূসা আল-আশ’আরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: কিয়ামতের পূর্বে হারজ হবে। সাহাবীগণ জিজ্ঞাসা করলেন: হারজ কী? তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: হত্যা। এটি মুশরিকদের প্রতি তোমাদের হত্যাকাণ্ড নয়, বরং তোমাদের নিজেদের মধ্যে পরস্পরের হত্যাকাণ্ড—এমনকি মানুষ তার প্রতিবেশীকে হত্যা করবে, তার ভাইকে হত্যা করবে, তার চাচাকে হত্যা করবে এবং তার চাচাতো ভাইকে হত্যা করবে। সাহাবীগণ বললেন: সেই সময় কি আমাদের বিবেক-বুদ্ধি আমাদের সাথে থাকবে? তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: নিশ্চয়ই সেই সময়ের লোকজনের বিবেক-বুদ্ধি ছিনিয়ে নেওয়া হবে। আর তাদের স্থলাভিষিক্ত হবে একদল নিকৃষ্ট ও নগণ্য মানুষ, যাদের অধিকাংশই মনে করবে যে তারা কোনো সঠিক পথের ওপর আছে, অথচ তারা (আসলে) কোনো সঠিক কিছুর উপর থাকবে না।
1683 - ` إن بين يدي الساعة ثلاثين دجالا كذابا `.
أخرجه أحمد (2 /
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত: "নিশ্চয়ই কিয়ামত সংঘটিত হওয়ার পূর্বে ত্রিশ জন মিথ্যাবাদী দাজ্জালের আগমন ঘটবে।"
1684 - ` إن رجلا من العرب يهدي أحدهم الهدية، فأعوضه منها بقدر ما عندي، ثم يتسخطه
، فيظل يتسخط علي وايم الله لا أقبل بعد مقامي هذا من رجل من العرب هدية إلا من
قرشي أو أنصاري أو ثقفي أو دوسي `.
أخرجه البخاري في ` الأدب المفرد ` (596) وعنه الترمذي (2 / 330) والسياق
له - وهو أتم - عن محمد بن إسحاق عن سعيد بن أبي سعيد المقبري عن أبيه عن
أبي هريرة قال: ` أهدى رجل من بني فزارة إلى النبي صلى الله عليه وسلم
ناقة من إبله التي كانوا أصابوا بـ (الغابة) ، فعوضه منها بعض العوض، فتسخطه
، فسمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم على هذا المنبر يقول.... ` فذكره.
وقال: ` هذا حديث حسن، وهو أصح من حديث يزيد بن هارون عن أيوب `.
قلت: يشير إلى ما أخرجه قبله قال: حدثنا أحمد بن منيع: حدثنا يزيد بن هارون
: أخبرني أيوب عن سعيد المقبري به بشيء من الاختصار وقال: ` قد روي من غير
وجه عن أبي هريرة. ويزيد بن هارون يروي عن أيوب أبي العلاء وهو أيوب بن
مسكين، ويقال ابن أبي مسكين. ولعل هذا الحديث الذي رواه عن أيوب عن سعيد
المقبري. وهو أيوب أبو العلاء `.
قلت: كذا في الأصل طبعة بولاق، وفي العبارة شيء. ثم رجعت إلى نسخة الأحوذي
فإذا العبارة فيه هكذا:
ولعل هذا الحديث الذي روي عن أيوب عن سعيد المقبري هو
أيوب أبو العلاء وهو أيوب بن مسكين `. ولعل هذا هو الصواب. والله أعلم.
وأيوب هذا صدوق له أوهام كما في ` التقريب `. وابن إسحاق مدلس، ومن طريقه
أخرجه أبو داود (3537) مختصرا. وقد توبع، فقال أحمد (2 / 292) : حدثنا
يزيد: أنبأنا أبو معشر عن سعيد بن أبي سعيد المقبري به. وأبو معشر هذا اسمه
نجيح بن عبد الرحمن السندي المدني وفيه ضعف. ويزيد هو ابن هارون، فالظاهر
أن له فيه شيخين أيوب بن أبي مسكين وأبو معشر. وتابعه ابن عجلان عن المقبري
به. أخرجه البيهقي (6 / 180) ، فالحديث بمجموع هذه المتابعات صحيح. وله
طريق أخرى عن أبي هريرة مرفوعا مختصرا. أخرجه ابن حبان (1145) . وله عنده
وعند الضياء (62 / 281 / 2) شاهد من حديث ابن عباس. وسنده صحيح.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: বনু ফাযারাহ গোত্রের এক ব্যক্তি নবী করীম সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম-কে আল-গাবায় প্রাপ্ত গনীমতের উটগুলোর মধ্য থেকে একটি উটনী হাদিয়া দিল। তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে এর কিছু প্রতিদান দিলেন, কিন্তু লোকটি তাতে অসন্তুষ্ট হলো। তখন আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম-কে এই মিম্বরের উপর দাঁড়িয়ে বলতে শুনলাম:
"নিশ্চয়ই আরবের কোনো লোক আমাকে হাদিয়া দেয়, আর আমি আমার কাছে যা আছে, সেই পরিমাণ তাকে তার প্রতিদান দিই। এরপরও সে অসন্তুষ্ট হয় এবং আমার প্রতি नाराजगी প্রকাশ করতে থাকে। আল্লাহর কসম! আমার এই মিম্বরে দাঁড়ানোর পর, আমি আরবের কোনো পুরুষের থেকে হাদিয়া গ্রহণ করব না; তবে কুরাইশী, আনসারী, সাকাফী অথবা দাউসী গোত্রের লোক ছাড়া।"
1685 - ` إن رجلا قال: والله لا يغفر الله لفلان، وإن الله قال: من ذا الذي يتألى
علي أن لا أغفر لفلان؟! فإني قد غفرت لفلان، وأحبطت عملك. أو كما قال `.
رواه مسلم (8 / 36) وابن أبي الدنيا في ` حسن الظن بالله ` (190 /
জুনদুব ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত:
এক ব্যক্তি বললো, ‘আল্লাহর কসম! আল্লাহ অমুক ব্যক্তিকে ক্ষমা করবেন না।’
তখন আল্লাহ তা‘আলা বললেন, ‘কে সেই ব্যক্তি, যে আমার ওপর শপথ করে বলছে যে, আমি অমুককে ক্ষমা করবো না?! আমি তো অমুককে ক্ষমা করে দিলাম, আর তোমার (ঐ শপথকারী ব্যক্তির) আমল নষ্ট করে দিলাম।’ অথবা যেমনটি তিনি (রাসূল ﷺ) বলেছেন।
1686 - ` إن طعام الواحد يكفي الاثنين، وإن طعام الاثنين يكفي الثلاثة والأربعة،
وإن طعام الأربعة يكفي الخمسة والستة `.
أخرجه ابن ماجة (3255) من طريق عمرو بن دينار قهرمان آل الزبير قال: سمعت
سالم بن عبد الله بن عمر عن أبيه عن جده عمر بن الخطاب مرفوعا.
قلت: وهذا إسناد ضعيف، عمرو بن دينار هذا ضعيف كما في ` التقريب ` وغيره.
لكن للحديث شواهد تشهد لصحته. الأول: عن أبي هريرة أن رسول الله صلى الله
عليه وسلم قال: ` طعام الاثنين كافي الثلاثة، وطعام الثلاثة كافي الأربعة `
. أخرجه مالك (2 / 928 / 20) وعنه البخاري (3 / 496) وكذا مسلم (6 / 132
) والترمذي (1 / 335) وقال: ` حسن صحيح ` عن مالك عن أبي الزناد عن الأعرج
عنه به. وتابعه سفيان بن عيينة عن أبي الزناد به. أخرجه أحمد (2 / 244) .
ثم أخرجه (2 / 407) عن علي بن زيد عمن سمع أبا هريرة.
الثاني: عن جابر مرفوعا بلفظ: ` طعام الواحد يكفي الاثنين، وطعام الاثنين
يكفي الأربعة، وطعام الأربعة يكفي الثمانية `.
أخرجه مسلم وابن ماجة (3254) والدارمي (2 / 100) وأحمد (3 / 301 و 382
) عن أبي الزبير أنه سمع جابر بن عبد الله. وتابعه أبو سفيان عن جابر به.
أخرجه مسلم والترمذي وأحمد (3 / 301 و 315) .
الثالث: عن عبد الله بن عمر مرفوعا بلفظ: ` طعام الاثنين يكفي الأربعة وطعام
الأربعة يكفي الثمانية، فاجتمعوا عليه، ولا تفرقوا عنه `.
أخرجه الطبراني
في ` المعجم الكبير ` (رقم - 13236) عن أبي الربيع السمان عن عمرو بن دينار
عن سالم عن أبيه.
قلت: وأبو الربيع - واسمه أشعث بن سعيد السمان - متروك، وقد تفرد بقوله:
` فاجتمعوا عليه.. `. لكن لهذه الزيادة شواهد فانظر الحديث (664) .
উমর ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন:
"নিশ্চয়ই একজনের খাবার দু’জনের জন্য যথেষ্ট, আর নিশ্চয়ই দু’জনের খাবার তিনজনের ও চারজনের জন্য যথেষ্ট, আর নিশ্চয়ই চারজনের খাবার পাঁচজনের ও ছয়জনের জন্য যথেষ্ট।"
1687 - ` إن عثمان رجل حيي وإني خشيت إن أذنت له على تلك الحال أن لا يبلغ إلي في
حاجته `.
أخرجه مسلم (7 / 117) والبخاري في ` الأدب المفرد ` (600) والطحاوي في
` شرح المعاني ` (1 / 274) و ` مشكل الآثار ` (2 /
আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন): “নিশ্চয়ই উসমান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) একজন লাজুক মানুষ। আমি আশঙ্কা করলাম যে, যদি আমি তাঁকে ওই অবস্থায় (আমার কাছে প্রবেশের) অনুমতি দেই, তবে লজ্জার কারণে তিনি আমার কাছে তাঁর প্রয়োজনীয় কথাটি বলতে পারবেন না।”
1688 - ` إن قريشا أهل أمانة، لا يبغيهم العثرات أحد إلا كبه الله عز وجل لمنخريه `.
رواه ابن عساكر (3 / 320 /
রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন:
"নিশ্চয়ই কুরাইশরা হলো আমানতদার লোক। যে ব্যক্তি তাদের কোনো পদস্খলন (বিপদ বা ভুল) কামনা করবে, আল্লাহ তাআলা তাকে তার নাকের উপর উপুড় করে নিক্ষেপ করবেন।"
1689 - ` إن قلوب بني آدم كلها بين إصبعين من أصابع الرحمن كقلب واحد يصرفه كيف يشاء.
ثم يقول رسول الله صلى الله عليه وسلم: اللهم مصرف القلوب صرف قلوبنا إلى
طاعتك `.
رواه مسلم (8 / 51) وأحمد (2 / 168 و 173) والطبري (ج 6 رقم 6657 صفحة
219) عن حيوة بن شريح قال: أخبرني أبو هانيء الخولاني. أنه سمع أبا عبد
الرحمن الحبلي يقول: سمعت عبد الله بن عمرو بن العاص يقول: سمعت رسول
الله صلى الله عليه وسلم يقول ` فذكره `.
আব্দুল্লাহ ইবনে আমর ইবনুল আস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত:
নিশ্চয়ই বনী আদমের সকল অন্তর, তা একটি অন্তরের মতো, রাহমানের (আল্লাহর) আঙ্গুলসমূহের দু’টি আঙ্গুলের মাঝে রয়েছে। তিনি যেভাবে ইচ্ছা তা পরিবর্তন করেন। অতঃপর রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন: “হে অন্তরসমূহের পরিবর্তনকারী (আল্লাহ)! আপনি আমাদের অন্তরসমূহকে আপনার আনুগত্যের দিকে ঘুরিয়ে দিন।”
1690 - ` لكل غادر لواء يوم القيامة يعرف به عند استه `.
أخرجه أحمد (3 / 35 و 64) ومسلم (5 / 142) من طريق شعبة عن خليد بن جعفر
عن أبي نضرة عن أبي سعيد الخدري عن النبي صلى الله عليه وسلم. وليس عند
مسلم ` يعرف به `، وهو رواية لأحمد. وتابعه علي بن زيد عن أبي نضرة به إلا
أنه قال: ` بقدر غدرته ` بدل ` يعرف به `. أخرجه الطيالسي (2156) وأحمد (
3 / 7 و 61) وزاد في رواية (3 / 19) : ` ألا وأكبر الغدر غدر أمير عامة `
. وهي عند الطيالسي من هذا الوجه، وعند مسلم (5 / 143) من طريق المستمر
ابن الريان: حدثنا أبو نضرة به. وللحديث شاهد من حديث ابن عمر مرفوعا به
نحوه. أخرجه أحمد (2 / 49) حدثنا إبراهيم بن وهب بن الشهيد حدثنا أبي عن أنس
ابن سيرين عنه. وإبراهيم هذا وأبوه لم أعرفهما، ولم يترجمها الحافظ في
` التعجيل `! ثم أخرجه (2 / 70 و 126) من طريق بشر بن حرب عنه مرفوعا نحو
حديث المستمر بن الريان. وسنده حسن في المتابعات. وأخرجه البخاري (4 / 342
) ومسلم وأحمد (2 / 116) من طريق عبد الله بن دينار عنه مرفوعا بلفظ
الترجمة، دون قوله: ` عند استه `. وكذلك البخاري (2 / 301) ومسلم وأحمد
(3 / 142 و 270) من حديث أنس بن مالك. وقد عزاه السيوطي إلى الطيالسي
وأحمد عنه بلفظ الترجمة! وما أظنه إلا
وهما. فقد عزاه في ` الجامع الكبير `
(1 / 210 / 2) إليهما وإلى أبي عوانة من حديث أبي سعيد. وهو الصواب كما
يتبين لك من هذا التخريج.
আবু সাঈদ আল-খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:
“প্রত্যেক বিশ্বাসঘাতকের জন্য কিয়ামতের দিন একটি পতাকা (নিদর্শন) থাকবে, যা দ্বারা তাকে তার নিতম্বের (পিছন দিকের) কাছে চেনা যাবে।”
1691 - ` إن لله آنية من أهل الأرض، وآنية ربكم قلوب عباده الصالحين، وأحبها إليه
ألينها وأرقها `.
أخرجه الطبراني في ` المعجم الكبير ` (ق 40 /
নিশ্চয়ই আল্লাহ তাআলার জন্য পৃথিবীতে কিছু আধার বা পাত্র (ভান্ডার) রয়েছে। আর তোমাদের রবের সেই আধার হলো তাঁর নেককার বান্দাদের অন্তরসমূহ। সেগুলোর মধ্যে তাঁর কাছে সর্বাধিক প্রিয় হলো যা সবচেয়ে কোমল এবং বিনম্র।
1692 - ` إن لله أقواما يختصهم بالنعم لمنافع العباد، ويقرهم فيها ما بذلوها، فإذا
منعوها نزعها منهم، فحولها إلى غيرهم `.
أخرجه ابن أبي الدنيا في ` قضاء الحوائج ` (رقم 5) والطبراني في ` الأوسط `
(5295) وأبو نعيم في ` الحلية ` (6 / 115 و 10 / 215) والخطيب في
` التاريخ ` (9 / 459) عن محمد بن حسان السمتي حدثنا عبد الله بن زيد الحمصي
حدثنا الأوزاعي عن عبدة بن أبي لبابة عن ابن عمر مرفوعا به.
قلت: وهذا إسناد ضعيف محمد بن حسان السمتي صدوق لين الحديث كما قال الحافظ.
وعبد الله بن زيد الحمصي، قال الأزدي ضعيف.
قلت: لكنه قد توبع كما يأتي. والحديث قال الهيثمي في ` المجمع ` (8 / 192)
: ` رواه الطبراني في ` الأوسط ` و ` الكبير ` وفيه محمد بن حسان السمتي،
وثقه ابن معين وغيره وفيه لين، ولكن شيخه أبو عثمان عبد الله بن زيد الحمصي
ضعفه الأزدي `.
قلت: تابعه معاوية بن يحيى الشامي أبو عثمان: حدثنا الأوزاعي به. أخرجه يحيى
ابن منده في ` أحاديثه ` (ق 91 / 1) وتمام في ` الفوائد ` (27 / 2) وأبو
نعيم في ` أخبار أصبهان ` (2 / 276) وابن عساكر في ` التاريخ ` (16 / 395 /
1) والضياء في ` المنتقى من مسموعاته بمرو ` (15 / 1) . أورده ابن عساكر في
ترجمة أبي عثمان الشامي هذا وروى عن أبي أحمد - وهو ابن عدي - أنه قال:
` منكر الحديث `. وقال أبو بكر الكلاباذي في ` مفتاح المعاني ` (257 / 1) :
حدثنا محمد بن عبد الله الفقيه حدثنا الدقيقي أبو محمد عبد الله بن يزيد عن
الأوزاعي به.
قلت: وأبو محمد بن عبد الله بن يزيد لم أعرفه، وفي الرواة عن الأوزاعي عبد
الله بن يزيد بن راشد القرشي الدمشقي المقري أبو بكر وهو ثقة، مات سنة (218
) روى عنه أبو زرعة وغيره ترجمه ابن أبي حاتم، لكن يبدو أن في السند سقطا فإن
هذا كنيته أبو بكر، والراوي للحديث كنيته أبو محمد الدقيقي، فلعل الساقط بين
أبي محمد وعبد الله بن يزيد. والله أعلم. وعلى كل حال فالحديث عندي حسن
بمجموع هذا المتابعات، وقد قال المنذري في ` الترغيب ` (3 / 250) :
` رواه
ابن أبي الدنيا والطبراني في ` الكبير ` و ` الأوسط `، ولو قيل بتحسين
إسناده لكان ممكنا `.
قلت: يعني من الطريق الأولى، فكيف لا يكون حسنا بالطريقين الآخرين؟ لاسيما
وله شاهد من حديث ابن عباس مرفوعا بلفظ: ` ما من عبد أنعم الله عليه نعمة
فأسبغها عليه، ثم جعل من حوائج الناس إليه فتبرم، فقد عرض تلك النعمة للزوال
`. قال المنذري وتبعه الهيثمي: ` رواه الطبراني في ` الأوسط ` وإسناده جيد
`. كذا قالا، وفيه نظر فإنه في ` الأوسط ` (7679 / 2) من طريق إبراهيم بن
محمد السامي حدثنا الوليد بن مسلم عن ابن جريج عن عطاء عن ابن عباس. وقال:
` تفرد به إبراهيم بن محمد السامي `.
قلت: الوليد وابن جريج مدلسان. والسامي بالمهلمة وابن محمد بن عرعرة ثقة
حافظ، ومن طريقه رواه أبو نعيم في ` أخبار أصبهان ` (1 / 175) .
قلت: وله شاهد من حديث أبي هريرة مرفوعا به. أخرجه أبو نعيم في ` أخبار
أصبهان ` (1 / 80) من طريق أحمد بن يحيى المصيصي حدثنا الوليد بن مسلم عن
الأوزاعي عن ابن جريج عن عطاء عنه. وهذا إسناد ضعيف، فإنه مع عنعنة الوليد
وابن جريج فيه المصيصي هذا، قال ابن طاهر: ` روى عن الوليد بن مسلم مناكير `.
قلت: وكأنه يعني، وهو منكر إسنادا لا متنا للطرق المتقدمة. والله أعلم.
ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:
নিশ্চয় আল্লাহ তাআলার এমন কিছু বান্দা আছেন, যাদেরকে তিনি মানুষের উপকারের জন্য নিয়ামত দ্বারা বিশেষিত করেন। যতক্ষণ তারা (সেই নিয়ামত) খরচ করে, ততক্ষণ তিনি তাদেরকে এর ওপর প্রতিষ্ঠিত রাখেন। কিন্তু যখন তারা তা (খরচ করা বা দান করা) থেকে বিরত থাকে, তখন তিনি তাদের কাছ থেকে সেই নিয়ামত ছিনিয়ে নেন এবং তা অন্যদের দিকে ঘুরিয়ে দেন।
1693 - ` إن لله عبادا يعرفون الناس بالتوسم `.
رواه أبو الشيخ في ` عواليه ` (2 / 32 / 1) والطبراني في ` الأوسط ` (3086
) والقضاعي (84 / 2) والواحدي في ` التفسير ` عن أبي بشر المزلق عن ثابت
البناني عن أنس بن مالك مرفوعا.
قلت: وهذا إسناد حسن رجاله ثقات غير أبي بشر هذا واسمه بكر بن الحكم التميمي
، وثقه أبو عبيدة الحداد وأبو سلمة التبوذكي وسعيد بن محمد الحربي وابن حبان
ولم يضعفه أحد غير أن أبا زرعة قال: ` شيخ ليس قوي `.
قلت: ومع أن هذا ليس جرحا قويا، فهو غير مفسر، فلا يقدم على توثيق من ذكرنا
، وكأنه لذلك قال الذهبي في ` الميزان `: ` صدوق `. وقال الحافظ: ` صدوق،
فيه لين `. وقال الهيثمي: ` إسناده حسن `. وتبعه السخاوي في ` المقاصد
الحسنة ` (ص 20) . وقول الذهبي في ترجمة أبي المزلق: ` روى خبرا منكرا ...
` ثم ذكره غير مقبول منه إلا أن يعني أنه تفرد به، فذلك لا يضر في ثبوته لقول
الإمام الشافعي رحمه الله تعالى: ` ليس الحديث الشاذ أن يروي الثقة ما لم يرو
الناس، وإنما هو أن يروي ما يخالف الناس `. وراوي هذا الحديث لم يخالف فيه
أحدا بل الحديث المشهور يؤيده:
` اتقوا فراسة المؤمن فإنه ينظر بنور الله `.
وهو إن كان ضعيف الإسناد من جميع طرقه كما بينته ` في الضعيفة ` (1821) فلا
أقل من أن يصلح شاهدا لهذا، ولا عكس. فتأمل.
আনাস ইবনে মালেক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “নিশ্চয় আল্লাহর এমন কিছু বান্দা আছেন, যারা (বিশেষ অন্তর্দৃষ্টি বা) লক্ষণ দেখে মানুষ সম্পর্কে জানতে পারে।”
1694 - ` نعم يا أبا بكر! إن لله ملائكة تنطق على ألسنة بني آدم بما في المرء من
الخير والشر `.
أخرجه الحاكم (1 / 377) والديلمي (1 / 2 / 258) وأبو شريح الأنصاري في
` جزء بيبي ` (171 / 2) من طريق يونس بن محمد حدثنا حرب بن ميمون عن النضر بن
أنس عن أنس قال: ` كنت قاعدا مع النبي صلى الله عليه وسلم، فمر بجنازة،
فقال: ما هذه الجنازة؟ قالوا جنازة فلان الفلاني كان يحب الله ورسوله ويعمل
بطاعة الله ويسعى فيها، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: وجبت وجبت وجبت
، وبجنازة أخرى قالوا: جنازة فلان الفلاني كان يبغض الله ورسوله ويعمل
بمعصية الله ويسعى فيها، فقال: وجبت وجبت وجبت، فقالوا: يا رسول الله قولك
في الجنازة والثناء عليها: أثني على الأول خير، وعلى الآخر شر، فقلت فيها
: ` وجبت وجبت وجبت `؟ فقال: فذكره. وقال الحاكم: ` صحيح على شرط مسلم `.
ووافقه الذهبي، وهو كما قالا. وهو في ` الصحيحين ` وغيرهما من طرق أخرى
عن أنس نحوه، يزيد بعضهم على بعض، وقد جمعت الزيادات الثابتة منها، وسقتها
في سياق واحد في ` أحكام الجنائز ` (ص 44) ، وفيه بحث هام حول الشهادة للميت
بالخير. فراجعه.
আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত। তিনি বলেন:
আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর সঙ্গে বসেছিলাম, এমন সময় একটি জানাযা অতিক্রম করল। তিনি জিজ্ঞেস করলেন: এটি কার জানাযা? সাহাবাগণ বললেন: অমুক ব্যক্তির জানাযা। তিনি আল্লাহ ও তাঁর রাসূলকে ভালোবাসতেন, আল্লাহর আনুগত্যের কাজ করতেন এবং তাতে সচেষ্ট থাকতেন। তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন: ওয়াজিব হয়ে গেল, ওয়াজিব হয়ে গেল, ওয়াজিব হয়ে গেল।
এরপর অন্য একটি জানাযা অতিক্রম করল। সাহাবাগণ বললেন: অমুক ব্যক্তির জানাযা। সে আল্লাহ ও তাঁর রাসূলকে ঘৃণা করত, আল্লাহর অবাধ্যতার কাজ করত এবং তাতে সচেষ্ট থাকত। তিনি (রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বললেন: ওয়াজিব হয়ে গেল, ওয়াজিব হয়ে গেল, ওয়াজিব হয়ে গেল।
তখন সাহাবাগণ বললেন: হে আল্লাহর রাসূল! আপনি প্রথম জানাযা ও তার প্রশংসার ব্যাপারে ভালো প্রশংসা শুনলেন, আর শেষের জানাযা ও তার নিন্দার ব্যাপারে মন্দ সমালোচনা শুনলেন, অথচ আপনি উভয় ক্ষেত্রেই বললেন, ‘ওয়াজিব হয়ে গেল, ওয়াজিব হয়ে গেল, ওয়াজিব হয়ে গেল’?
তখন তিনি (রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বললেন: হ্যাঁ, হে আবু বকর! নিশ্চয়ই আল্লাহর এমন ফেরেশতাগণ আছেন, যারা বনি আদমের জিহ্বা দ্বারা কোনো ব্যক্তির মধ্যে যে ভালো ও মন্দ রয়েছে, তা দ্বারা কথা বলে থাকেন।
1695 - ` إن للقبر ضغطة، فلو نجا أو سلم أحد منها لنجا سعد بن معاذ `.
رواه البغوي في ` حديث علي بن الجعد ` (8 / 73 / 2) والطحاوي في ` مشكل
الآثار ` (1 / 107) عن شعبة عن سعد بن إبراهيم قال: سمعت نافعا يحدث عن
امرأة ابن عمر عن عائشة مرفوعا به. وأخرجه أحمد (6 / 55 و 98) من هذا
الوجه إلا أنه قال: ` إنسان ` مكان ` امرأة ابن عمر `. ورجال إسناده ثقات
كلهم غير امرأة ابن عمر فلم أعرفها، والظن بها حسن. على أن سفيان الثوري قد
أسقطها من الإسناد، وجعل الحديث من مسند زوجها ابن عمر. أخرجه الطحاوي من
طريق أبي حذيفة حدثنا سفيان عن سعد عن نافع عن ابن عمر مرفوعا به نحوه. وهذا
إسناد رجاله ثقات أيضا رجال البخاري إلا أنه أخرج لأبي حذيفة متابعة، واسمه
موسى بن مسعود النهدي، والثوري أحفظ من شعبة لولا أن الراوي عنه فيه ضعف فقال
الحافظ: ` صدوق سيء الحفظ `. ولما أخرجه أبو نعيم في ` الحلية ` (3 / 174)
من طريقه، أشار إلى تضعيفه وترجيح الأول بقوله: ` كذا رواه أبو حذيفة عن
الثوري عن سعد، ورواه غندر وغيره عن شعبة عن سعد عن نافع عن إنسان (الأصل
سنان!) عن عائشة رضي الله عنها مثله `. لكن للحديث أصل عن ابن عمر، فقال
ابن سعد في ` الطبقات ` (3 / 430) : أخبرنا إسماعيل بن مسعود قال: أخبرنا
عبد الله بن إدريس قال: أخبرنا عبيد الله بن عمر عن نافع عن ابن عمر قال: قال
رسول الله صلى الله عليه وسلم: فذكره نحوه.
قلت: وهذا إسناد صحيح رجاله كلهم ثقات رجال الشيخين غير إسماعيل بن مسعود
وهو أبو مسعود الجحدري البصري وهو ثقة.
وتابعه عمرو بن محمد العنقزي:
حدثنا ابن إدريس به. أخرجه النسائي (1 / 289) وسنده صحيح أيضا. فهذه
متابعة قوية من عبيد الله بن عمر لرواية أبي حذيفة عن الثوري عن سعد بن إبراهيم
. والله أعلم. وله طريق آخر، برواية عطاء بن السائب عن مجاهد عن ابن عمر
مرفوعا بلفظ: ` ضم سعد في القبر ضمة فدعوت الله أن يكشف عنه `. أخرجه الحاكم
(3 / 206) وصححه، ووافقه الذهبي! وعطاء كان اختلط، وقد زاد فيه الدعاء
. وخالفه ابن لهيعة في إسناده فقال: عن عقيل أنه سمع سعد بن إبراهيم يخبر عن
عائشة بنت سعد أنها حدثته عن عائشة أم المؤمنين مرفوعا به نحوه. أخرجه
الطبراني في ` الأوسط ` (1 / 82 / 1) وقال: ` تفرد به ابن لهيعة `.
قلت: وهو سيء الحفظ. وله شاهد من حديث ابن عباس مرفوعا به نحوه. أخرجه
الطبراني (1 / 81 / 2) وفي ` الكبير ` (10827 و 12975) من طريق زياد مولى
ابن عباس عنه. وقال الهيثمي في ` المجمع ` (3 /
আবদুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ইরশাদ করেছেন:
“নিশ্চয়ই কবরের একটি চাপ বা সংকোচন রয়েছে। যদি কেউ তা থেকে নিষ্কৃতি পেত বা মুক্তি লাভ করত, তবে সা’দ ইবনে মু’আয (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) অবশ্যই নিষ্কৃতি পেতেন।”
1696 - ` إن للصلاة أولا وآخرا، وإن أول وقت صلاة الظهر حين تزول الشمس وآخر وقتها
حين يدخل وقت العصر، وإن أول وقت صلاة العصر حين يدخل وقتها وإن آخر وقتها
حين تصفر الشمس، وإن أول وقت المغرب حين تغرب الشمس وإن آخر وقتها حين يغيب
الأفق، وإن أول وقت العشاء الآخرة حين يغيب الأفق وإن آخر وقتها حين ينتصف
الليل، وإن أول وقت الفجر حين يطلع الفجر وإن آخر وقتها حين تطلع الشمس `.
أخرجه الترمذي (1 /
নিশ্চয়ই সালাতের একটি শুরু সময় ও একটি শেষ সময় রয়েছে। আর যুহরের সালাতের প্রথম সময় হলো যখন সূর্য হেলে যায় এবং তার শেষ সময় হলো যখন আসরের ওয়াক্ত শুরু হয়। আসরের সালাতের প্রথম সময় হলো যখন এর ওয়াক্ত শুরু হয়, আর তার শেষ সময় হলো যখন সূর্য হলুদ (নিস্তেজ) হয়ে যায়। মাগরিবের প্রথম সময় হলো যখন সূর্য ডুবে যায়, আর তার শেষ সময় হলো যখন দিগন্তের লালিমা অদৃশ্য হয়ে যায়। আর এশার সালাতের প্রথম সময় হলো যখন দিগন্তের লালিমা অদৃশ্য হয়ে যায়, আর তার শেষ সময় হলো যখন রাতের অর্ধেক পেরিয়ে যায়। আর ফজরের প্রথম সময় হলো যখন ফজর (সুবহি সাদিক) উদিত হয়, আর তার শেষ সময় হলো যখন সূর্য উদিত হয়।
1697 - ` إن للقرشي مثلي قوة الرجل من غير قريش `.
أخرجه الطحاوي في ` مشكل الآثار ` (4 / 203) وابن أبي عاصم في ` السنة `
(1508) وابن حبان (2289) والحاكم (4 / 72) والطيالسي (951) وعنه
البيهقي في ` معرفة السنن ` (ص 29) وأحمد (4 / 81 و 83) وأبو نعيم في
` الحلية ` (9 / 64) من طريق ابن أبي ذئب عن الزهري عن طلحة بن عبد الله بن
عوف عن عبد الرحمن بن الأزهر عن جبير بن مطعم قال: قال رسول الله صلى الله
عليه وسلم: فذكره. فقيل للزهري: بم ذاك؟ قال: بنبل الرأي. وقال الحاكم:
` صحيح على شرط الشيخين `. ووافقه الذهبي.
قلت: ابن عوف هذا لم يخرج له مسلم شيئا، فهو على شرط البخاري وحده. وابن
الأزهر لم يرمزوا له بأنه من رجال الشيخين، ولكن الحافظ بين في ترجمته من
` التهذيب ` أن من حقه الرمز له بذلك، فليراجع كلامه من شاء. ثم أخرجه ابن
أبي عاصم (1509) عن محمد بن عبد العزيز عن الزهري عن أبي سلمة وعن سعيد بن
المسيب عن عتبة بن غزوان وعن عروة بن الزبير عن عتبة بن غزوان قال: قال رسول
الله صلى الله عليه وسلم ... فذكره.
قلت: وهذا إسناد واه جدا، فإن محمد هذا وهو القاضي المدني أخو عبد الله -
مع مخالفته لابن أبي الذئب ثقة - فهو ضعيف جدا، فلا يعتد به..
জুবাইর ইবনে মুত‘ইম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: নিঃসন্দেহে একজন কুরাইশ ব্যক্তির মধ্যে গায়রে-কুরাইশ (অন্যান্য গোত্রের) পুরুষের দ্বিগুণ শক্তি বিদ্যমান।
1698 - ` إن ما بين مصراعين في الجنة مسيرة أربعين سنة `.
ورد من حديث أبي سعيد الخدري ومعاوية بن حيدة وعتبة بن غزوان وعبد الله بن
سلام.
আবু সাঈদ খুদরি (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত:
"নিশ্চয় জান্নাতের দুটি দরজার চৌকাঠের মধ্যবর্তী দূরত্ব হবে চল্লিশ বছরের পথের সমান।"
1699 - ` إن مثل الذي يعود في عطيته كمثل الكلب أكل حتى إذا شبع قاء، ثم عاد في قيئه
فأكله `.
أخرجه ابن ماجة (2384) وأحمد (2 / 259) من طريق عوف عن خلاس عن أبي
هريرة مرفوعا به.
قلت: وإسناده ثقات لكن قال أحمد: لم يسمع خلاس من أبي هريرة شيئا. وذكر
البخاري في ` التاريخ ` أن روايته عنه صحيفة. لكن الحديث صحيح، فإن له شواهد
من حديث ابن عباس وابن عمرو وغيرهما، وقد خرجت بعضها في ` الإرواء ` (1621
) .
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই যে ব্যক্তি তার দান বা প্রদত্ত বস্তু ফিরিয়ে নেয়, তার উপমা হলো সেই কুকুরের মতো, যা ভক্ষণ করে এবং যখন পেট ভরে যায় তখন বমি করে দেয়। অতঃপর সে আবার তার সেই বমির দিকে ফিরে যায় এবং তা খেয়ে ফেলে।
1700 - ` إن من أمتي قوما يعطون مثل أجور أولهم، ينكرون المنكر `.
أخرجه أحمد (4 / 62 و 5 / 375) : حدثنا زيد بن الحباب أخبرني سفيان عن عطاء
ابن السائب قال: سمعت عبد الرحمن بن الحضرمي يقول: أخبرني من سمع النبي
صلى الله عليه وسلم يقول: فذكره.
قلت: وهذا إسناد جيد رجاله كلهم رجال الصحيح، وفي زيد بن الحباب كلام لا
يضر إن شاء الله تعالى، وأما جهالة الصحابي فلا تضر قطعا لأنهم عدول.
وللحديث شاهد من حديث أبي ثعلبة الخشني مرفوعا نحوه بإسناد ضعيف، خرجته في
` المشكاة ` (5144) .
আবু ছা’লাবা আল-খুশানী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন:
নিশ্চয়ই আমার উম্মতের মধ্যে এমন একদল লোক থাকবে, যাদেরকে তাদের প্রথম যুগের (পূর্বসূরিদের) সমপরিমাণ সাওয়াব দেওয়া হবে। (কারণ) তারা অন্যায় বা অসৎ কাজকে প্রতিহত করবে।