হাদীস বিএন


সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ





সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (161)


` أنا عربي، والقرآن عربي، ولسان أهل الجنة عربي `.
موضوع.

أخرجه الطبراني في ` الأوسط ` (2 / 285 / 1 / 9301) قال حدثنا مسعدة بن سعد حدثنا إبراهيم بن المنذر حدثنا عبد العزيز بن عمران حدثنا شبل بن العلاء عن أبيه عن جده عن أبي هريرة مرفوعا، وقال: لم يروه عن شبل إلا عبد العزيز ابن عمران.
وقد ساقه السيوطي في ` اللآليء ` (1 / 442) شاهدا للحديث الذي قبله ثم عقبه بقوله: قال الذهبي في ` المغني `: شبل بن العلاء بن عبد الرحمن، قال ابن عدي: له مناكير.
قلت: وأعله الهيثمي في ` المجمع ` (10 / 52 - 53) بالراوي عنه فقال:
وفيه عبد العزيز بن عمران وهو متروك.
قلت: وقال ابن معين فيه: ليس بثقة، فالحمل في هذا الحديث عليه أولى، ولهذا قال الحافظ العراقي في ` المحجة ` (56 / 1) : لكن عبد العزيز بن عمران الزهري متروك قاله النسائي وغيره، وقال البخاري: لا يكتب حديثه، وعلى هذا فلا يصح هذا الحديث وأقره ابن عراق في ` تنزيه الشريعة ` (209) .
ومما يدل على بطلان نسبة هذا الحديث إليه صلى الله عليه وسلم أن فيه افتخاره صلى الله عليه وسلم بعروبته وهذا شيء غريب في الشرع الإسلامي لا يلتئم مع قوله تعالى: {إن أكرمكم عند الله أتقاكم} وقوله صلى الله عليه وسلم: ` لا فضل لعربي على عجمي … إلا بالتقوى ` رواه أحمد (5 / 411) بسند صحيح كما قال ابن تيمية في ` الاقتضاء ` (ص 69) ولا مع نهيه صلى الله عليه وسلم عن الافتخار بالآباء وهو قوله صلى الله عليه وسلم: ` إن الله عز وجل أذهب عنكم عبية الجاهلية وفخرها بالآباء، الناس بنوآدم، وآدم من تراب، مؤمن تقي وفاجر شقي، لينتهين أقوام يفتخرون برجال إنما هم فحم من فحم جهنم، أو ليكونن أهون على الله من الجعلان التي تدفع النتن بأفواها `.
رواه أبو داود والترمذي وحسنه وصححه ابن تيمية (ص 35، 69) وهو مخرج في ` غاية المرام ` (312) .
فإذا كانت هذه توجيهاته صلى الله عليه وسلم لأمته فكيف يعقل أن يخالفهم إلى ما نهاهم عنه؟ !
ومن أحاديث ابن عمران هذه التي تدل على حاله! الحديث الآتي وهو:




১৬১। আমি আরবী ভাষী, কুরআন আরবী ভাষায় এবং জান্নাতিদের ভাষা আরবী।





হাদীসটি জাল।





তাবারানী `আল-মুজামুল আওসাত` গ্রন্থে হাদীসটি (২/২৮৫/১/৯৩০১) উল্লেখ করেছেন। তার সূত্রে আব্দুল আযীয ইবনু ইমরান রয়েছেন, তিনি তার শাইখ । শিব্‌ল ইবনু 'আলা হতে ... বর্ণনা করেছেন। তাবারানী বলেনঃ আব্দুল আযীয এটিকে শিবল হতে এককভাবে বর্ণনা করেছেন।





সুয়ূতী এটিকে পূর্বে উল্লেখিত হাদীসটির শাহেদ হিসাবে `আল-লাআলী` (১/৪৪২) গ্রন্থে উল্লেখ করে বলেছেন, যাহাবী `আল-মুগনী` গ্রন্থে বলেছেনঃ শিবল সম্পর্কে ইবনু আদী বলেনঃ তার কতিপয় মুনকার রয়েছে। হায়সামী `আল-মাজমা` গ্রন্থে (১০/৫২-৫৩) এটিকে উল্লেখ করে বলেছেনঃ শিবল হতে বর্ণনাকারী আব্দুল আযীয মাতরুক।





আমি (আলবানী) বলছিঃ তার সম্পর্কে ইবনু মাঈন বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্য নন।





হাফিয ইরাকী “আল-মুহাজ্জা” (১/৫৬) গ্রন্থে বলেনঃ আব্দুল আযীয মাতরূক। নাসাঈ ও অন্যরাও এ কথা বলেছেন। তার সম্পর্কে বুখারী বলেনঃ لا يكتب حديثه তার হাদীস লিখা যাবে না। অতএব হাদীসটি সঠিক নয়।





ইবনু আররাক “তানযীহুশ শারীয়াহ` গ্রন্থে (২০৯) উক্ত বক্তব্যকে সমর্থন করেছেন। হাদীসটি বাতিল হওয়ার আরো প্রমাণ এই যে, এর মধ্যে রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম কর্তৃক আরবী হওয়ার অহংকার ফুটে উঠেছে। যা শরীয়াতের মধ্যে দুর্বল বিষয়। কারণ আল্লাহ্‌ বলেনঃ إن أكرمكم عند الله أتقاكم যে তোমাদের মধ্যে বেশি মুত্তাকী সেই তোমাদের মধ্যে সর্বাপেক্ষা সম্মানিত ব্যক্তি` (সূরা হুজুরাতঃ ১৩)।





এছাড়া সহীহ্ হাদীসে এসেছে, “কোন আরবের অনারবের উপর প্রাধান্য নেই ... একমাত্র তাকওয়া ব্যতীত।` এটি ইমাম আহমাদ (৫/৪১১) সহীহ সনদে বর্ণনা করেছেন। (সিলসিলাতুস সাহীহা হাঃ নং ২৭০০)











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (162)


` لما تجلى الله للجبل - يعني جبل الطور - طارت لعظمته ستة جبال فوقعت ثلاثة في المدينة، وثلاثة بمكة، بالمدينة أحد وورقان ورضوى، ووقع بمكة حراء وثبير وثور `.
موضوع.
رواه المحاملي في ` الأمالي ` (1 / 172 / 1) ، ومن طريقه الخطيب في ` التاريخ ` (10 / 440 ـ 441) وابن الأعرابي في ` معجمه ` (166 / 2) وابن أبي حاتم في ` تفسيره ` من طريق عبد العزيز بن عمران عن معاوية بن عبد الله عن الجلد بن أيوب عن معاوية بن قرة عن أنس مرفوعا، وقال الحافظ ابن كثير في ` تفسيره ` (2 / 245) : وهذا حديث غريب بل منكر.
قلت: ولم يبين علته، وهي من عبد العزيز بن عمران فإنه غير ثقة كما تقدم في الحديث الذي قبله، وفي ترجمته ساق له الذهبي هذا الحديث والجلد بن أيوب قال الدارقطني: متروك.
ثم وجدت الحديث أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (1 / 120) من طريق الخطيب وقال: قال ابن حبان: موضوع، وعبد العزيز متروك يروي المناكير عن المشاهير، وتعقبه السيوطي (1 / 24) بما لا يجدي، كما هي عادته.




১৬২। আল্লাহ যখন পাহাড়ের উদ্দেশ্যে নিজের আলোক রশ্মি প্রকাশ করলেন, অর্থাৎ তুর পাহাড়ের জন্য। তখন ছয়টি পাহাড় তার সম্মানার্থে উড়ে গিয়াছিল। অতঃপর তিনটি গিয়ে পড়ে মদিনায় আর তিনটি মক্কায়। মদিনায় হচ্ছে উহুদ, ওরাকান ও রাযওয়া, আর মক্কায় হচ্ছে হেরা, সবীর ও সাওর।





হাদীসটি জাল।





হাদীসটি মাহামিলী “আল-আমলী” গ্রন্থে (১/১৭২/১) বর্ণনা করেছেন এবং তার সূত্রে খাতীব বাগদাদী “আত-তারীখ” গ্রন্থে (১০/৪৪০-৪৪১), ইবনুল আরাবী তার “আল-মু'জাম` গ্রন্থে (২/১৬৬) এবং ইবনু আবী হাতিম তার “আত-তাফসীর” গ্রন্থে আব্দুল আযীয ইবনু ইমরান সূত্রে মুয়াবিয়া ইবনু আবদিল্লাহ হতে, তিনি জিলদ ইবনু আইউব হতে ... বর্ণনা করেছেন।





ইবনু কাসীর হাদীসটি সম্পর্কে তার “আত-তাফসীর” গ্রন্থে (২/২৪৫) বলেনঃ এটি গারীব হাদীস, বরং মুনকার ।





আমি (আলবানী) বলছিঃ হাদীসটির সমস্যা হচ্ছে আব্দুল আযীয ইবনু ইমরান, কারণ তিনি নির্ভরযোগ্য নন। তার সম্পর্কে ১৬১ নং হাদীসে আলোচনা করা হয়েছে।





এছাড়া এটির সনদে জিলদ ইবনু আইউব রয়েছেন। তার সম্পর্কে দারাকুতনী বলেনঃ তিনি মাতরূক ।





হাদীসটি ইবনুল জাওযী “আল-মাওযুআত” গ্রন্থে (১/১২০) খাতীব বাগদাদীর সূত্রে উল্লেখ করে বলেছেনঃ ইবনু হিব্বান বলেনঃ এটি বানোয়াট, আব্দুল আযীয মাতরূক। তিনি প্রসিদ্ধ বর্ণনাকারীদের উদ্ধৃতিতে মুনকার হাদীস বর্ণনাকারী।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (163)


` إذا ذلت العرب ذل الإسلام `.
موضوع.
رواه أبو نعيم في ` أخبار أصبهان ` (2 / 340) ، وكذا أبو يعلى في ` مسنده ` (3 / 402 / 1881) عن منصور بن أبي مزاحم حدثنا محمد بن الخطاب البصري عن علي ابن زيد عن محمد بن المنكدر عن جابر مرفوعا، وذكره ابن أبي حاتم في ` العلل ` (2 / 376) فقال: سألت أبي عن حديث رواه منصور بن أبي مزاحم فذكره قال: فسمعت أبي يقول: هذا حديث باطل ليس له أصل.
قلت: وله علتان:
الأولى: محمد بن الخطاب فإنه مجهول الحال، قال ابن أبي حاتم في ` الجرح ` (3 / 2 / 246) : سألت أبي عنه؟ فقال: لا أعرفه، وفي ` الميزان `، وقال الأزدي: منكر الحديث، ثم ساق له هذا الحديث، يشير بذلك إلى أنه منكر، وأقره الحافظ في ` اللسان ` وزاد عليه أن ابن الخطاب هذا ذكره ابن حبان في ` الثقات ` (9 / 139) .
قلت: وتوثيق ابن حبان لا يعتمد عليه كما سبق التنبيه عليه مرارا وبخاصة إذا خولف! .
الأخرى: علي بن زيد وهو ابن جدعان ضعيف وقد مضى.
وأما قول الهيثمي في ` المجمع ` (10 / 53) : رواه أبو يعلى، وفيه محمد بن الخطاب البصري ضعفه الأزدي وغيره، ووثقه ابن حبان، وبقية رجاله رجال الصحيح.
فهذا من أوهامه رحمه الله لأن ابن جدعان ليس من رجال الصحيح، ثم هو ضعيف كما تقدم، ومنه تعلم خطأ قول المناوي في ` فيض القدير `: قال العراقي في ` القرب `: صحيح، ثم نقل ما ذكرت عن الهيثمي آنفا ثم قال: ورمز المصنف لضعفه باطل … يعني أنه صحيح، ثم ناقض نفسه بنفسه في شرحه الآخر ` التيسير ` فقال: قال العراقي: صحيح وفيه ما فيه! واغتر بذلك السيد رشيد رضا فقال في مجلة ` المنار ` (17 / 920) : رواه أبو يعلى بسند صحيح.
ثم رأيت الحافظ العراقي يقول في ` محجة القرب في فضل العرب ` (5 / 2 - 5 / 1) بعد أن ساق الحديث من طريق أبي يعلى عن منصور به: ومحمد بن الخطاب بن جبير بن حية تقدم الكلام عليه في الباب الذي قبله، وعلي بن زيد بن جدعان مختلف فيه، وقد أخرج له مسلم في المتابعات والشواهد، وذكر في الباب المشار إليه أن محمد بن الخطاب زالت جهالة عينه برواية جماعة عنه ذكرهم، ولا يخفى أن زوال جهالة العين لا يلزم منه زوال جهالة الحال، وعلى هذا فكلام الحافظ المذكور يدل على أن الحديث ضعيف عنده للعلتين اللتين ذكرهما، فهذا التحقيق الذي ذكرته أنا يجعلني أشك في التصحيح الذي نقله المناوي عن العراقي، والحق أنه ضعيف كما رمز له السيوطي، ولولا أن في معناه ما يدل على بطلانه لاقتصرنا على تضعيفه، ذلك لأن الإسلام لا يرتبط عزه بالعرب فقط بل قد يعزه الله بغيرهم من المؤمنين كما وقع ذلك زمن الدولة العثمانية لا سيما في أو ائل أمرها فقد أعز الله بهم الإسلام حتى امتد سلطانه إلى أو اسط أو ربا، ثم لما أخذوا
يحيدون عن الشريعة إلى القوانين الأو ربية (يستبدلون الأدنى بالذي هو خير) تقلص سلطانهم عن تلك البلاد وغيرها حتى لقد زال عن بلادهم! فلم يبق فيها من المظاهر التي تدل على إسلامهم إلا الشيء اليسير! فذل بذلك المسلمون جميعا بعد عزهم ودخل الكفار بلادهم واستذلوهم إلا قليلا منها، وهذه وإن سلمت من استعمارهم إياها ظاهرا فهي تستعمرها بالخفاء تحت ستار المشاريع الكثيرة كالاقتصاد ونحوه! فثبت أن الإسلام يعز ويذل بعز أهله وذله سواء كانوا عربا أو عجما، ` ولا فضل لعربي على عجمي إلا بالتقوى `، فاللهم أعز المسلمين وألهمهم الرجوع إلى كتابك وسنة نبيك حتى تعز بهم الإسلام.
بيد أن ذلك لا ينافي أن يكون جنس العرب أفضل من جنس سائر الأمم، بل هذا هو الذي أؤمن به وأعتقده وأدين الله به - وإن كنت ألبانيا فإني مسلم ولله الحمد - ذلك لأن ما ذكرته من أفضلية جنس العرب هو الذي عليه أهل السنة والجماعة، ويدل عليه مجموعة من الأحاديث الواردة في هذا الباب منها قوله صلى الله عليه وسلم: ` إن الله اصطفى من ولد إبراهيم واصطفى من ولد إسماعيل بني كنانة، واصطفى من بني كنانة قريشا، واصطفى من قريش بني هاشم واصطفاني من بني هاشم `.
رواه أحمد (4 / 107) والترمذي (4 / 392) وصححه وأصله في ` صحيح مسلم ` (7 / 48) وكذا البخاري في ` التاريخ الصغير ` (ص 6) من حديث واثلة بن الأسقع، وله شاهد عن العباس بن عبد المطلب، عند الترمذي وصححه، وأحمد، وآخر عن ابن عمر عند الحاكم (4 / 86) وصححه.
ولكن هذا ينبغي ألا يحمل العربي على الافتخار بجنسه، لأنه من أمور الجاهلية التي أبطلها نبينا محمد العربي صلى الله عليه وسلم على ما سبق بيانه، كما ينبغي أن لا نجهل السبب الذي به استحق العرب الأفضلية، وهو ما اختصوا به في عقولهم وألسنتهم وأخلاقهم وأعمالهم، الأمر الذي أهلهم لأن يكونوا حملة الدعوة الإسلامية إلى الأمم الأخرى، فإنه إذا عرف العربي هذا وحافظ عليه أمكنه أن يكون مثل سلفه عضوا صالحا في حمل الدعوة الإسلامية، أما إذا هو تجرد من ذلك فليس له من الفضل شيء، بل الأعجمي الذي تخلق بالأخلاق الإسلامية هو خير منه دون شك ولا ريب، إذ الفضل الحقيقي إنما هو اتباع ما بعث به محمد صلى الله عليه وسلم من الإيمان والعلم، فكل من كان فيه أمكن، كان أفضل، والفضل إنما هو بالأسماء المحددة في الكتاب والسنة مثل الإسلام والإيمان والبر والتقوى والعلم، والعمل الصالح والإحسان ونحوذلك، لا بمجرد كون الإنسان عربيا أو أعجميا، كما قال شيخ الإسلام ابن تيمية رحمه الله، وإلى هذا أشار صلى الله عليه وسلم بقوله: ` من بطأ به عمله لم يسرع به نسبه ` رواه مسلم، ولهذا قال الشاعر العربي:
لسنا وإن أحسابنا كرمت يوما على الأحساب نتكل
نبني كما كانت أو ائلنا تبني ونفعل مثل ما فعلوا
وجملة القول: إن فضل العرب إنما هو لمزايا تحققت فيهم فإذا ذهبت بسبب إهمالهم لإسلامهم ذهب فضلهم، ومن أخذ بها من الأعاجم كان خيرا منهم، ` لا فضل لعربي على أعجمي إلا بالتقوى `، ومن هنا يظهر ضلال من يدعوإلى العروبة وهو لا يتصف بشيء من خصائصها المفضلة، بل هو أو ربي قلبا وقالبا!




১৬৩। যখন আরবদের পদস্খলন ঘটবে তখন ইসলামেরই পদস্খলন ঘটবে।





হাদীসটি জাল।





হাদীসটি আবূ নু’য়াইম “আখবার আসবাহান” গ্রন্থে (২/৩৪০) বর্ণনা করেছেন। অনুরূপ ভাবে আবু ইয়ালা তার “মুসনাদ” গ্রন্থে (৩/৪০২/১৮৮১) বর্ণনা করেছেন। যার সূত্রে মুহাম্মাদ ইবনুল খাত্তাব বাসরী ও তার শাইখ আলী ইবনু যায়েদ রয়েছেন।





ইবনু আবী হাতিমও “আল-ইলাল” গ্রন্থে (২/৩৭৬) উল্লেখ করে বলেছেনঃ আমি আমার পিতাকে মানসূর ইবনু আবী মাযাহিম কর্তৃক বর্ণিত হাদীসটি সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করেছিলাম। আমার পিতাকে উত্তরে বলতে শুনেছিঃ এ হাদীসটি বাতিল, এর কোন ভিত্তি নেই।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এ হাদীসটির সমস্যা দুটিঃ





১। মুহাম্মাদ ইবনুল খাত্তাব; তিনি মাজহুলুল হাল। তার সম্পর্কে ইবনু আবী হাতিম “আল-জারহু ওয়াত তা’দীল” গ্রন্থে (৩/২/২৪৬) বলেনঃ আমার পিতাকে তার সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করেছিলাম, তিনি উত্তরে বলেনঃ আমি তাকে চিনি না। “আল-মীযান” গ্রন্থে এসেছে, আযদী বলেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীস। অতঃপর এ হাদীসটি উল্লেখ করে মুনকার হওয়ার দিকেই ইঙ্গিত করেছেন। হাফিয ইবনু হাজার “লিসানুল মীযান” গ্রন্থে তার কথাকে সমর্থন করেন।





ইবনু হিব্বান তাকে নির্ভরযোগ্য বললেও তার নির্ভরযোগ্য বলা গ্রহণযােগ্য নয়। এ মর্মে পূর্বে একাধিকবার আলোচনা করা হয়েছে। বিশেষ করে যখন তার বিরোধী মতামত থাকবে।





২। মুহাম্মাদের শাইখ আলী ইবনু যায়েদ হচ্ছেন ইবনু জাদ'য়ান, তিনি দুর্বল।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (164)


` المدبر لا يباع ولا يوهب، وهو حر من الثلث `.
موضوع.

أخرجه الدارقطني (ص 384) والبيهقي (10 / 314) عن عبيدة بن حسان عن أيوب عن نافع عن ابن عمر مرفوعا، وقال الدارقطني: لم يسنده غير عبيدة بن حسان وهو ضعيف، وإنما هو عن ابن عمر موقوف من قوله.
قلت: وعبيدة هذا بالفتح، قال أبو حاتم: منكر الحديث، وقال ابن حبان (2 /189) : يروي الموضوعات عن الثقات.
قلت: وهذا منها بلا شك فقد صح أنه صلى الله عليه وسلم باع المدبر، فقال جابر رضي الله عنه: إن رجلا من الأنصار أعتق غلاما له عن دبر لم يكن له مال غيره، فبلغ ذلك النبي صلى الله عليه وسلم، فقال: من يشتريه مني؟ فاشتراه نعيم بن عبد الله بثمان مئة درهم، فدفع إليه، رواه البخاري (5 / 25) ومسلم (5 /97) وغيرهما، وهو مخرج في ` الإرواء ` (1288) ، والحديث روى منه ابن ماجه (2 / 104) والعقيلي (297) والدارقطني والبيهقي من طريق علي بن ظبيان عن عبيد الله نافع عن ابن عمر مرفوعا بلفظ: ` المدبر من الثلث `، وقال ابن ماجه:
سمعت ابن أبي شيبة يقول: هذا خطأ، قال ابن ماجه: ليس له أصل.
قلت: يعني مرفوعا وقال العقيلي: لا يعرف إلا به، يعني علي بن ظبيان، قال ابن معين: ليس بشيء، وقال البخاري: منكر الحديث، وقال ابن أبي حاتم في ` العلل ` (2 / 432) : سئل أبو زرعة عن حديث رواه علي بن ظبيان عن عبيد الله قلت: فذكره، فقال أبو زرعة: هذا حديث باطل وامتنع من قراءته، ثم أشار ابن أبي حاتم إلى أنه من قول ابن عمر موقوفا عليه ولهذا قال ابن الملقن في ` الخلاصة ` (179 / 1) : وأطبق الحفاظ على أن الصحيح رواية الوقف.
ورواه أبو داود في ` المراسيل ` (351) عن أبي قلابة مرسلا، ومع إرساله فيه عمر بن هشام القبطي، مجهول.
ومنه يتبين خطأ السيوطي في إيراده الحديث في ` الجامع ` بلفظيه! .




১৬৪। মুদাব্বার দাস (যাকে তার মালিক নিজের মৃত্যুর পর মুক্ত করার ঘোষণা দিয়েছে) বিক্রি করা যাবে না, হেবা করাও যাবে না, এক তৃতীয়াংশ হতে সে স্বাধীন (মুক্ত)।





হাদীসটি জাল।





হাদীসটি দারাকুতনী (পৃঃ ৩৮৪) ও বাইহাকী (১০/৩১৪) আবীদা ইবনু হাসসান হতে, তিনি আইউব হতে ... বর্ণনা করেছেন। দারাকুতনী বলেনঃ আবীদা ছাড়া অন্য কেউ এটিকে মুসনাদ হিসাবে বর্ণনা করেননি। আর আবীদা হচ্ছেন দুর্বল। এটি ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মওকুফ হিসাবেও বর্ণিত হয়েছে।





আমি (আলবানী) বলছিঃ আবু হাতিম বলেনঃ আবীদা মুনকারুল হাদীস। তার সম্পর্কে ইবনু হিব্বান (২/১৮৯) বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে জাল হাদীস বর্ণনা করতেন। নিঃসন্দেহে এটি সে সব জালগুলোর একটি। কারণ বুখারী (৫/২৫) এবং মুসলিম শরীফে (৫/৯৭) জাবের (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত হয়েছে, রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম নিজে মুদাব্বার দাস বিক্রি করেছেন।





আলোচ্য হাদীসটি ইবনু মাজাহ্ (২/১০৪), উকায়লী, দারাকুতনী ও বাইহাকী আলী ইবনু যিবইয়ান সূত্রে বর্ণনা করেছেন। অতঃপর ইবনু মাজাহ বলেছেনঃ এর কোন ভিত্তি নেই। অর্থাৎ মারফু' হিসাবে।





উকায়লী বলেনঃ আলী ইবনু যিবইয়ান ছাড়া অন্য কোন মাধ্যমে এটি জানা যায় না। তার সম্পর্কে ইবনু মাঈন বলেনঃ তিনি কিছুই না। বুখারী বলেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীস। ইবনু আবী হাতিম “আল-ইলাল” গ্রন্থে (২/৪৩২) বলেনঃ আবু যুরয়াহকে এ ‘আলীর হাদীস সম্পর্কে জিজ্ঞেস করা হয়েছিল, তিনি বলেনঃ এ হাদীসটি বাতিল, তা পাঠ করা হতে বিরত থাক।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (165)


` كلوا التين، فلوقلت: إن فاكهة نزلت من الجنة بلا عجم لقلت: هي التين، وإنه يذهب بالبواسير، وينفع من النقرس `.
ضعيف.
ذكره السيوطي في ` الجامع ` برواية ابن السني وأبي نعيم والديلمي في ` مسند الفردوس ` (6 / 47) بدون سند عن أبي ذر، وقال شارحه المناوي:
رووه كلهم من حديث يحيى بن أبي كثير عن الثقة عن أبي ذر.
قلت: فالإسناد ضعيف لجهالة هذا الذي قيل فيه الثقة! فإن هذا التوثيق غيرمقبول عند علماء الحديث حتى ولوكان الموثق إماما جليلا كالشافعي وأحمد حتى يتبين اسم الموثق، فينظر هل هو ثقة اتفاقا أم فيه خلاف، وعلى الثاني ينظر ما هو الراجح أتوثيقه أم تضعيفه؟ وهذا من دقيق نظر المحدثين رضي الله عنهم وشدة تحريهم في رواية الحديث عنه صلى الله عليه وسلم، ولهذا قال العلامة ابن القيم في ` زاد المعاد ` (3 / 214) بعد أن ذكر الحديث: وفي ثبوته نظر.
قلت: ويغلب على الظن أن هذا الحديث موضوع فإنه ليس عليه نور النبوة، وقد قال الشيخ العجلوني في ` الكشف ` (1 / 423) : جميع ما ورد في الفاكهة من الأحاديث موضوع، كأنه يعني في فضلها، ثم رأيت الحافظ ابن حجر عزاه في ` تخريج أحاديث الكشاف ` (4 / 186) لأبي نعيم في الطب والثعلبي من حديث أبي ذر وقال: وفي إسناده من لا يعرف.




১৬৫। তোমরা তীন ফল (ডুমুর) খাও। আমি যদি বলি যে, জান্নাত হতে বীচি ছাড়া একটি ফল নাযিল হয়েছে, তাহলে বলবঃ সেটি হচ্ছে তীন ফল (ডুমুর)। তা অর্শ্ব রোগকে দুরিভুত করে এবং নুকরাস নামক রোগের জন্য উপকার করে।





হাদীসটি দুর্বল।





হাদীসটি সুয়ূতী “জামেউস সাগীর” গ্রন্থে ইবনুস সুন্নী এবং আবু নু’য়াইম-এর বর্ণনায় উল্লেখ করেছেন। দাইলামী তার “মুসনাদ” গ্রন্থে (৬/৪৭) আবূ যার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বিনা সনদে উল্লেখ করেছেন। মানবী বলেনঃ তারা সকলে ইয়াহইয়া ইবনু আবী কাসীর-এর হাদীস হতে একজন নির্ভরযোগ্য ব্যক্তির মাধ্যমে আবু যার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ সনদটি দুর্বল, কারণ নামহীন এ নির্ভরযোগ্য ব্যক্তি কে তা জানা যায় না। এ জন্য ইবনুল কাইয়্যিম “যাদুল মায়াদ` গ্রন্থে (৩/২১৪) বলেছেনঃ এটি সাব্যস্ত হতে বিরূপ মন্তব্য আছে।





আমি (আলবানী) বলছিঃ আমার বেশীর ভাগ ধারণা এ হাদীসটি জাল। শাইখ আজলুনী “আল-কাশফ” গ্রন্থে (১/৪২৩) বলেনঃ ফাকিহা (ফল-মূল) সম্পর্কে যত হাদীস বর্ণিত হয়েছে সবই জাল (বানোয়াট)। সম্ভবত তিনি বুঝিয়েছেন ফযীলত সম্পর্কে যত হাদীস হয়েছে।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (166)


` إن أهل البيت ليقل طعمهم فتستنير بيوتهم `.
موضوع.
رواه ابن أبي الدنيا في ` كتاب الجوع ` (5 / 1) والعقيلي في ` الضعفاء ` (222) وعنه ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (3 / 35) وابن عدي (89 / 1) والطبراني في ` الأوسط ` (2 / 15 / 5298) من طريق عبد الله بن المطلب العجلي عن الحسن بن ذكوان عن يحيى بن أبي كثير عن أبي سلمة عن أبي هريرة مرفوعا، وقال الطبراني:
لم يروه عن الحسن إلا عبد الله بن المطلب.
قلت: أورده الذهبي في ` الضعفاء ` وقال: لا يعرف.
وقال ابن الجوزي: لا يصح، قال العقيلي: عبد الله بن المطلب مجهول، وحديثه منكر غير محفوظ، وقال أحمد: الحسن بن ذكوان أحاديثه أباطيل، وأقره السيوطي في ` اللآليء ` (2 / 253) ومع هذا فقد أورده في ` الجامع الصغير ` من رواية الطبراني في ` الأوسط ` عن أبي هريرة، والطريق هو هو! كما رأيت.
والحديث ذكره ابن أبي حاتم في ` العلل ` (2 / 5) من هذا الوجه وقال: سألت أبي عنه؟ قال: هذا حديث كذب، وعبد الله بن المطلب مجهول، وقال الذهبي في ` الميزان `: إنه خبر منكر، وأقره الحافظ في ` اللسان `.




১৬৬। আহলে বাইতের খাদ্য কমে যায়, ফলে তাদের ঘর আলোকিত হয়।





হাদীসটি জাল।





এটি ইবনু আবিদ-দুনিয়া “কিতাবুল জু” গ্রন্থে (১/৫), উকায়লী “আয-যুয়াফা” গ্রন্থে (২২২), এবং তার নিকট হতে ইবনুল জাওযী “আল-মাওযু আত” গ্রন্থে (৩/৩৫), ইবনু আদী (১/৮৯) ও তাবারানী “আল-আওসাত” গ্রন্থে (২/১৫/৫২৯৮) আব্দুল্লাহ ইবনু মুতাল্লিব আল-আজালী সূত্রে হাসান ইবনু যাকওয়ান হতে ... বর্ণনা করেছেন।





তাবারানী বলেনঃ আব্দুল্লাহ ইবনু মুতাল্লিব ছাড়া অন্য কেউ হাদীসটি হাসান হতে বর্ণনা করেননি।





আমি (আলবানী) বলছিঃ যাহাবী তাকে (আব্দুল্লাহকে) “আয-যুয়াফা” গ্রন্থে উল্লেখ করে বলেছেনঃ তাকে চেনা যায় না।





ইবনুল জাওযী বলেনঃ এটি সহীহ্ নয়। উকায়লী বলেনঃ আব্দুল্লাহ মাজহুল, তার হাদীস মুনকার, নিরাপদ নয়। ইমাম আহমাদ বলেনঃ হাসান ইবনু যাকওয়ান এর হাদীসগুলো বাতিল।





হাফিয সুয়ূতী তার এ কথাকে `আল-লাআলী` গ্রন্থে (২/২৫৩) সমর্থন করেছেন। তা সত্ত্বেও তিনি তাবারানীর বর্ণনায় `জামেউস সাগীর” গ্রন্থে এ একই সনদে হাদীসটি উল্লেখ করেছেন। ইবনু আবী হাতিম “আল-ইলাল” গ্রন্থে (২/৫) বলেনঃ আমি আমার পিতাকে এ হাদীসটি সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করেছিলাম। তিনি বলেনঃ এ হাদীসটি মিথ্যা আর আব্দুল্লাহ মাজহুল।





হাফিয যাহাবী `আল-মীযান গ্রন্থে বলেনঃ এ হাদীসটি মুনকার। তার এ কথাকে হাফিয ইবনু হাজার “লিসানুল মীযান” গ্রন্থে সমর্থন করেছেন।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (167)


` البطيخ قبل الطعام يغسل البطن غسلا، ويذهب بالداء أصلا `.
موضوع.

أخرجه ابن عساكر في ` تاريخ دمشق ` (2 / 282 و10 / 287 ـ المصورة) ، والذهبي في ترجمة أحمد بن يعقوب بن عبد الجبار الجرجاني حدثنا الفضل بن صالح ابن عبيد حدثنا أبو اليمان حدثنا شعيب عن الزهري حدثني أبو بكر بن عبد الرحمن عن أبيه عن بعض عمات النبي صلى الله عليه وسلم مرفوعا، وفيه قصة للزهري مع عبد الملك، وقال ابن عساكر:
شاذ لا يصح، وقال المناوي عقبه في ` التيسير `: بل لا يصح أصلا وبينه في ` الفيض `، فقال فيه مع شذوذه أحمد بن يعقوب بن عبد الجبار الجرجاني، قال البيهقي: روى أحاديث موضوعة لا أستحل رواية شيء منها ومنها هذا الخبر، وقال الحاكم: أحمد هذا يضع الحديث كاشفته وفضحته.
قلت: وهذا نقله عن ` الميزان `! ووافقه الحافظ في ` اللسان ` بل إن السيوطي نفسه قد أورد هذا الحديث في ` ذيل الأحاديث الموضوعة ` (ص 136 / 645 - بترقيمي) وأعله بما تقدم عن ابن عساكر والذهبي (ص 136) ووافقه ابن عراق (331 / 1) ومع ذلك شان به ` الجامع الصغير `!
فائدة: قال الحافظ السخاوي في ` المقاصد ` وتبعه جماعة: صنف أبو عمر النوقاني في فضائل البطيخ جزءا، وأحاديثه باطلة.
وقد ساق بعضها السيوطي في ` الذيل ` ولوائح الوضع عليها ظاهرة جدا.




১৬৭। খাদ্য গ্রহণের পূর্বে তরমুজ খেলে তা পেটকে ধৌত করে এবং রোগকে সমূলে বিনাশ করে।





হাদীসটি জাল।





এটিকে ইবনু আসাকির “তারীখু দেমাস্ক” গ্রন্থে (২/২৮২, ১০/২৮৭) বর্ণনা করেছেন এবং যাহাবী আহমাদ ইবনু ইয়াকুব ইবনে আবদিল জাব্বার আল-জুরজানীর জীবনী বর্ণনা করতে গিয়ে উল্লেখ করেছেন।





ইবনু আসাকির বলেনঃ এটি শায, সহীহ্ নয়। মানবী “আত-তায়সীর” গ্রন্থে বলেনঃ আসলেই এটি সহীহ নয়। ইয়াকুব বহু মাওযু হাদীস বর্ণনা করেছেন। সে সব থেকে কিছু বর্ণনা করা আমি বৈধ মনে করি না। এটি সেগুলোর একটি। হাকিম বলেনঃ এ আহমাদ হাদীস জালকারী।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এ জাল হাদীসটি “আল-মীযান” গ্রন্থ হতে নকল করা হয়েছে। এটি জাল হওয়ার বিষয়ে তার সাথে হাফিয ইবনু হাজার “লিসানুল মীযান” গ্রন্থে ঐকমত্য পোষণ করেছেন। সুয়ূতী নিজেও হাদীসটি তার “আল-মাওযুআত” গ্রন্থে (পৃঃ ১৩৬/৬৪৫) উল্লেখ করে জাল হওয়ার কারণ দর্শিয়েছেন সেভাবে যেভাবে ইবনু আসাকির ও যাহাবী বলেছেন। তার সাথে ইবনু আররাকও (১/৩৩১) ঐকমত্য পোষণ করেছেন। তা সত্ত্বেও তিনি “জামেউস সাগীর” গ্রন্থে হাদীসটি উল্লেখ করেছেন।





হাফিয সাখাবী “মাকাসিদুল হাসানা” গ্রন্থে বলেছেন (আরেক দল তার অনুসরণ করেছেন), আবু আমর নূকানী তরমুজের ফযীলত বর্ণনা করে একটি পুস্তিকা রচনা করেছেন। এর সবগুলোই বাতিল ।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (168)


` بركة الطعام الوضوء قبله وبعده `.
ضعيف.

أخرجه الطيالسي في ` مسنده ` (655) : حدثنا قيس عن أبي هاشم عن زاذان عن سلمان قال: في التوراة أن بركة الطعام الوضوء قبله، فذكرت ذلك للنبي صلى الله عليه وسلم قال: فذكره.
وأخرجه أبو داود (3761) والترمذي (1 / 329) وعنه البغوي في ` شرح
السنة ` (3 / 187 / 1) والحاكم (4 / 106 - 107) وأحمد (5 / 441) من طرق عن قيس بن الربيع به، وقال أبو داود:
وهو ضعيف، وقال الترمذي: لا نعرف هذا الحديث إلا من حديث قيس بن الربيع، وقيس يضعف في الحديث.
وقال الحاكم: تفرد به قيس بن الربيع عن أبي هاشم، وانفراده على علو محله أكثر من أن يمكن تركه في هذا الكتاب، وتعقبه الذهبي بقوله: قلت: مع ضعف قيس فيه إرسال.
قلت: ولم يتبين لي الإرسال الذي أشار إليه، فإن قيسا قد صرح بالتحديث عن أبي هاشم، وهذا من الرواة عن زاذان، وقيل لابن معين: ما تقول في زاذان؟ روى عن سلمان؟ قال: نعم روى عن سلمان وغيره، وهو ثبت في سلمان.
فعلة الحديث قيس هذا وبه أعله كل من ذكرنا وغيرهم، ففي ` تهذيب السنن ` لابن القيم (5 / 297 / 298) أن مهنا سأل الإمام أحمد عن هذا الحديث فقال: هو منكر ما حدث به إلا قيس بن الربيع.
والحديث أورده ابن أبي حاتم في ` العلل ` (2 / 10) فقال: سألت أبي عنه؟
فقال: هذا حديث منكر، لوكان هذا الحديث صحيحا، كان حديثا ويشبه هذا الحديث أحاديث أبي خالد الواسطي عمرو بن خالد، عنده من هذا النحوأحاديث موضوعة عن أبي هاشم.
قلت: وعمرو بن خالد هذا كذاب فإن كان الحديث حديثه فهو موضوع، والله أعلم.
وأما قول المنذري في ` الترغيب ` (3 / 129) بعد أن ساق كلام الترمذي في قيس ابن الربيع: قيس بن الربيع صدوق وفيه كلام لسوء حفظه لا يخرج الإسناد عن حد الحسن.
قلت: وهذا كلام مردود بشهادة أولئك الفحول من الأئمة الذين خرجوه وضعفوه فهم أدري بالحديث وأعلم من المنذري، والمنذري يميل إلى التساهل في التصحيح والتحسين، وهو يشبه في هذا ابن حبان والحاكم من القدامى، والسيوطي ونحوه من المتأخرين، وفي الباب حديث آخر ولكنه منكر، تقدم برقم (117) ، ثم قال المنذري: وقد كان سفيان يكره الوضوء قبل الطعام، قال البيهقي: وكذلك مالك ابن أنس كرهه، وكذلك صاحبنا الشافعي استحب تركه، واحتج بالحديث، يعني حديث ابن عباس قال: كنا عند النبي صلى الله عليه وسلم فأتى الخلاء ثم إنه رجع فأتي بالطعام، فقيل: ألا تتوضأ؟ قال: ` لم أصل فأتوضأ `.
رواه مسلم وأبو داود والترمذي بنحوه إلا أنهما قالا: ` إنما أمرت بالوضوء إذا قمت إلى الصلاة `.
قلت: فهذا دليل آخر على ضعف الحديث وهو ذهاب هؤلاء الأئمة الفقهاء إلى خلافه ومعهم ظاهر هذا الحديث الصحيح.
وقد تأول بعضهم الوضوء في هذا الحديث بمعنى غسل اليدين فقط، وهو معنى غير معروف في كلام النبي صلى الله عليه وسلم كما ذكر ذلك شيخ الإسلام ابن تيمية في ` الفتاوى `
(1 / 56) فلوصح هذا الحديث لكان دليلا ظاهرا على استحباب الوضوء قبل الطعام وبعده ولما جاز تأويله.
هذا، واختلف العلماء في مشروعية غسل اليدين قبل الطعام على قولين، منهم من استحبه، ومنهم من لم يستحبه، ومن هؤلاء سفيان الثوري فقد ذكر أبو داود عنه أنه كان يكره الوضوء قبل الطعام، قال ابن القيم: والقولان هما في مذهب أحمد وغيره، والصحيح أنه لا يستحب.
قلت: وينبغي تقييد هذا بما إذا لم يكن على اليدين من الأوساخ ما يستدعي غسلهما، وإلا فالغسل والحالة هذه لا مسوغ للتوقف عن القول بمشروعيته، وعليه يحمل ما رواه الخلال عن أبي بكر المروذي قال: رأيت أبا عبد الله يعني الإمام أحمد يغسل يديه قبل الطعام وبعده، وإن كان على وضوء.
والخلاصة أن الغسل المذكور ليس من الأمور التعبدية، لعدم صحة الحديث به، بل هو معقول المعنى، فحيث وجد المعنى شرع وإلا فلا.




১৬৮। খ্যাদের বরকত হচ্ছে তার পূর্বে ও পরে ওযু করাতে।





হাদীসটি দুর্বল।





এটিকে তায়ালিসী তার “মুসনাদ” গ্রন্থে (৬৫৫) উল্লেখ করেছেন। এছাড়া আবু দাউদ (৩৭৬১) ও তিরমিযী হাদীসটি বর্ণনা করেছেন। তিরমিযী হতে বাগাবী `শারহুস সুন্নাহ` গ্রন্থে (৩/১৮৭/১), হাকিম (৪/১০৬-১০৭) ও ইমাম আহমাদ (৫/৪৪১) বিভিন্ন সূত্রে কায়স ইবনু রাবী' হতে ... হাদীসটি বর্ণনা করেছেন। আবু দাউদ বলেনঃ তিনি দুর্বল। তিরমিযী বলেনঃ এ হাদীসটি শুধুমাত্র কায়স ইবনু রাবী' হতেই চিনি। এ কায়স হাদীসের ক্ষেত্রে দুর্বল। যাহাবী বলেনঃ কায়স দুর্বল হওয়া ছাড়াও এটি মুরসাল। ইমাম আহমাদকে এ হাদীসটি সম্পর্কে মুহান্না জিজ্ঞাসা করেছিলেন, তিনি বলেনঃ এটি মুনকার। কায়স ইবনু রাবী' ব্যতীত অন্য কেউ এটিকে বর্ণনা করেননি।





ইবনু আবী হাতিম “আল-ইলাল” গ্রন্থে (২/১০) বলেনঃ আমি আমার পিতাকে এ হাদীসটি সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করেছিলাম, তিনি বলেনঃ এটি মুনকার হাদীস। কোন কোন সিথিলতা প্রদর্শনকারী ব্যক্তি এটিকে হাসান বলার চেষ্টা করেছেন, যেমন মুনযেরী। কিন্তু তা গ্রহণযোগ্য নয়, সেই সব মুহাদ্দিসগণের কারণে যারা এ হাদীসটি বর্ণনা করেছেন, আবার তারা সেটিকে দুর্বলও বলেছেন। তারাই এ বিষয়ে বেশী অভিজ্ঞ।





“আল-ইলাল” গ্রন্থে (২/১০) এসেছে আবূ হাতিম বলেনঃ এ হাদীসটির সাদৃশ্যতা রয়েছে আবূ খালিদ ওয়াসেতী (আমর ইবনু খালিদ) এর হাদীসের সাথে। তার নিকট আবু হাশিম হতে এরূপ জাল হাদীস রয়েছে। তিনি হচ্ছেন একজন মিথ্যুক। হাদীসটি যদি তার হয় তাহলে এটি বানোয়াট।





সুফিয়ান সাওরী খাবারের পূর্বে ওযু করাকে অপছন্দ করতেন। বাইহাকী বলেনঃ মালিক ইবনু আনাস ওযু করাকে (খাবারের পূর্বে ওযু করাকে) মাকরূহ মনে করতেন। ইমাম শাফে'ঈ ওযু ছেড়ে দেয়াকে মুস্তাহাব জানতেন। তারা তাদের সমর্থনে মুসলিম, আবু দাউদ এবং তিরমিযীতে বর্ণিত হাদীস দ্বারা দলীল গ্রহণ করেছেন।





ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত, রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকট খাবার উপস্থিত করা হলে কেউ বললঃ আপনি কী ওযু করবেন না? তখন তিনি বললেনঃ “আমি তো (এখন) সালাত আদায় করব না যে, তার জন্য ওযু করব।` এটি বর্ণনা করেছেন ইমাম মুসলিম, আবু দাউদ ও তিরমিযী।





অন্য বর্ণনায় এসেছেঃ “যখন আমি সালাতের জন্য দাঁড়াব তখন আমাকে ওযু করার নির্দেশ দেয়া হয়েছে।” (আবু দাউদ, তিরমিযী)। এ হাদীসটি আলোচ্য হাদীসটি যে দুর্বল তার প্রমাণ বহন করছে।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (169)


` إن لكل شيء قلبا، وإن قلب القرآن يس، من قرأها فكأنما قرأ القرآن عشر مرات `.
موضوع.

أخرجه الترمذي (4 / 46) والدارمي (2 / 456) من طريق حميد بن عبد الرحمن عن الحسن بن صالح عن هارون أبي محمد عن مقاتل بن حيان عن قتادة عن أنس مرفوعا وقال الترمذي: هذا حديث حسن غريب لا نعرفه إلا من هذا الوجه وهارون أبو محمد مجهول، وفي الباب عن أبي بكر الصديق ولا يصح، وإسناده ضعيف وفي الباب عن أبي هريرة.
قلت: كذا في نسختنا من الترمذي حسن غريب، ونقل المنذري في ` الترغيب ` (2 /322) والحافظ ابن كثير في ` تفسيره ` (3 / 563) والحافظ في ` التهذيب ` أنه قال: حديث غريب ليس في نقلهم عنه أنه حسنه، ولعله الصواب فإن الحديث ضعيف ظاهر الضعف بل هو موضوع من أجل هارون، فقد قال الحافظ الذهبي في ترجمته
بعد أن نقل عن الترمذي تجهيله إياه: قلت: أنا أتهمه بما رواه القضاعي في ` شهابه `: ثم ساق له هذا الحديث، قلت: هو فيه برقم (1035) .
وفي ` العلل ` (2 / 55 - 56) لابن أبي حاتم: سألت أبي عن هذا الحديث؟ فقال: مقاتل هذا، هو مقاتل بن سليمان، رأيت هذا الحديث في أول كتاب وضعه مقاتل بن سليمان وهو حديث باطل لا أصل له.
قلت: كذا جزم أبو حاتم - وهو الإمام الحجة - أن مقاتلا المذكور في الإسناد هو ابن سليمان مع أنه وقع عندي الترمذي والدارمي مقاتل بن حيان كما رأيت، فلعله خطأ من بعض الرواة، ويؤيده أن الحديث رواه القضاعي كما سبق وكذا أبو الفتح الأزدي من طريق حميد الرؤاسي بسنده المتقدم عن مقاتل عن قتادة به، كذا قال:
عن مقاتل، لم ينسبه فظن بعض الرواة أنه ابن حيان فنسبه إليه، من هؤلاء الأزدي نفسه فإنه ذكر عن وكيع أنه قال في مقاتل بن حيان: ينسب إلى الكذب قال الذهبي:
كذا قال أبو الفتح وأحسبه التبس عليه مقاتل بن حيان بمقاتل بن سليمان فابن حيان صدوق قوي الحديث، والذي كذبه وكيع هو ابن سليمان، ثم قال أبو الفتح (قلت: فساق إسناد الحديث كما ذكرت آنفا) فتعقبه الذهبي بقوله: قلت: الظاهر أنه مقاتل بن سليمان.
قلت: وإذا ثبت أنه ابن سليمان كما استظهره الذهبي وجزم به أبو حاتم فالحديث موضوع قطعا لأنه أعني ابن سليمان كذاب كما قال وكيع وغيره.
ثم اعلم أن حديث أبي بكر الذي أشار إليه الترمذي وضعفه لم أقف على متنه وأما حديث أبي هريرة فقال الحافظ ابن كثير: منظور فيه ثم قال: قال أبو بكر البزار حدثنا عبد الرحمن بن الفضل حدثنا زيد بن الحباب حدثنا حميد المكي مولى آل علقمة عن عطاء بن أبي رباح عن أبي هريرة مرفوعا به دون قوله: ` من قرأها … ` ثم قال البزار: لا نعلم رواه إلا زيد عن حميد.
قلت: وحميد هذا مجهول كما قال الحافظ في ` التقريب ` وعبد الرحمن بن الفضل شيخ البزار لم أعرفه، وحديثه في ` كشف الأستار ` برقم (2304) .
والحديث مما شان به السيوطي ` جامعه ` وكذا الشيخ الصابوني ` مختصره ` 3 /154) الذي زعم أنه لا يذكر فيه إلا الصحيح من الحديث! وهيهات فإنه مجرد ادعاء! .
‌‌




১৬৯। প্রতিটি বস্তুর হৃদয় রয়েছে, আর কুরআনের হৃদয় হচ্ছে সূরা ইয়াসিন। যে ব্যাক্তি তা পাঠ করল, সে যেন দশবার কুরআন পাঠ করল।





হাদীসটি জাল।





এটিকে ইমাম তিরমিযী (৪/৪৬) ও দারেমী (২/৪৫৬) হামীদ ইবনু আব্দির রহমান সুত্রে ... হারুন আবূ মুহাম্মাদ হতে, তিনি মুকাতিল ইবনু হায়য়ান হতে ... বর্ণনা করেছেন।





হাদীসটির দুর্বলতা সুস্পষ্ট বরং এটি এ হারূণের কারণে বানোয়াট। যাহাবী তার জীবনী বর্ণনা করতে গিয়ে তিরমিযী হতে তার মাজহুল হওয়ার উক্তিটি উল্লেখ করে বলেছেনঃ আমি তাকে মিথ্যার দোষে দোষী করছি সেই হাদীস দ্বারা যেটি কাযাঈ তার “মুশনাদুশ-শিহাব” গ্রন্থে বর্ণনা করেছেন। অতঃপর এ হাদীসটি বর্ণনা করেছেন।





ইবনু আবী হাতিম “আল-ইলাল” গ্রন্থে বলেনঃ আমি আমার পিতাকে এ হাদীসটি সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করেছিলাম। তিনি বলেনঃ এ মুকাতিল হচ্ছেন ইবনু সুলায়মান। আমি এ হাদীসটি সেই কিতাবের প্রথমে দেখেছি যেটি মুকাতিল ইবনু সুলায়মান জাল করেছিলেন। হাদীসটি বাতিল, এর কোন ভিত্তি নেই।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এ মুকাতিল ইবনু হায়য়ান নন বরং তিনি হচ্ছেন ইবনু সুলায়মান, যেমনভাবে আবু হাতিম দৃঢ়তার সাথে উল্লেখ করেছেন। তিরমিযী ও দারিমী কর্তৃক মুকাতিলকে ইবনু হায়য়ান হিসাবে উল্লেখ করা সম্ভবত কোন বর্ণনাকারী হতে ভুলক্রমে সংঘটিত হয়েছে। যেটিকে কাযাঈর বর্ণনা শক্তি যোগাচ্ছে। আবুল ফাতাহ আল-আযদী বলেনঃ এ মুকাতিল ইবনু হায়য়ান সম্পর্কে ওয়াকী বলেনঃ তাকে মিথ্যুক বলা হয়েছে।





এছাড়া যাহাবী বলেনঃ আবুল ফাতহ এরূপই বলেছেন। আমার ধারণা তার মধ্যে ইবনু হায়য়ান না ইবনু সুলায়মান এ দুয়ের ব্যাপারে গড়মিল সৃষ্টি হয়েছে। কারণ ইবনু হায়য়ান হচ্ছেন একজন সত্যবাদী বর্ণনাকারী। আর ওয়াকী' যাকে মিথ্যুক বলেছেন তিনি হচ্ছেন ইবনু সুলায়মান। অতএব আমি (যাহাবী) বলছিঃ এ মুকাতিল হচ্ছেন ইবনু সুলায়মান।





আমি আলবানী বলছিঃ এটি যখন প্রমাণিত হচ্ছে যে, তিনি ইবনু সুলায়মান তখন বলতে হচ্ছে যে, হাদীসটি জাল।





এছাড়া বর্ণনাকারী হামীদ একজন মাজহুল, যেমনভাবে হাফিয ইবনু হাজার `আত-তাকরীব` গ্রন্থে বলেছেন।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (170)


` إن آدم صلى الله عليه وسلم لما أهبطه الله تعالى إلى الأرض قالت الملائكة: أي رب {أتجعل فيها من يفسد فيها ويسفك الدماء، ونحن نسبح بحمدك ونقدس لك؟ قال: إني أعلم ما لا تعلمون} قالوا: ربنا نحن أطوع لك من بني آدم، قال الله تعالى للملائكة: هلموا ملكين من الملائكة، حتى يهبط بهما الأرض، فننظر كيف يعملان؟ قالوا: ربنا! هاروت وماروت، فأهبطا إلى الأرض، ومثلت لهما الزهرة امرأة من أحسن البشر فجاءتهما فسألاها نفسها فقالت: لا والله حتى تكلما
بهذه الكلمة من الإشراك، فقالا: والله لا نشرك بالله، فذهبت عنهما ثم رجعت بصبي تحمله فسألاها نفسها قالت: لا والله حتى تقتلا هذا الصبي، فقالا: والله لا نقتله أبدا، فذهبت ثم رجعت بقدح خمر، فسألاها نفسها، قالت: لا والله حتى تشربا هذا الخمر، فشربا فسكرا، فوقعا عليها، وقتلا الصبى، فلما أفاقا، قالت المرأة: والله ما تركتما شيئا مما أبيتما علي إلا قد فعلتما حين سكرتما، فخيرا بين عذاب الدنيا والآخرة، فاختارا عذاب الدنيا `.
باطل مرفوعا.

أخرجه ابن حبان (717 ـ موارد) وأحمد (2 / 134 ورقم 6178 - طبع شاكر) وعبد بن حميد في ` المنتخب ` (ق 86 / 1) وابن أبي الدنيا في ` العقوبات ` (ق 75 / 2) والبزار (2938 ـ الكشف) وابن السني في ` عمل اليوم والليلة ` (651) من طريق زهير بن محمد عن موسى بن جبير عن نافع مولى ابن عمر عن
عبد الله بن عمر أنه سمع نبي الله صلى الله عليه وسلم يقول: فذكره.
وقال البزار: رواه بعضهم عن نافع عن ابن عمر موقوفا وإنما أتى رفع هذا عندي من زهير لأنه لم يكن بالحافظ.
قلت: والموقوف صحيح كما يأتي وقال الحافظ ابن كثير في تفسيره ` (1 / 254) : وهذا حديث غريب من هذا الوجه، ورجاله كلهم ثقات من رجال ` الصحيحين ` إلا موسى بن جبير هذا هو الأنصاري.... ذكره ابن أبي حاتم في ` كتاب الجرح والتعديل ` (4 / 1 / 139) ولم يحك فيه شيئا من هذا ولا هذا، فهو مستور الحال، وقد تفرد به عن نافع.
وذكره ابن حبان في ` الثقات ` (7 / 451) ولكنه قال: وكان يخطيء ويخالف.
قلت: واغتر به الهيثمي فقال في ` المجمع ` (5 / 68) بعد ما عزى الحديث لأحمد والبزار: ورجاله رجال الصحيح خلا موسى بن جبير وهو ثقة.
قلت: لو أن ابن حبان أورده في كتابه ساكتا عليه كما هو غالب عادته لما جاز الاعتماد عليه لما عرف عنه من التساهل في التوثيق فكيف وهو قد وصفه بقوله:
يخطيء ويخالف وليت شعري من كان هذا وصفه فكيف يكون ثقة ويخرج حديثه في ` الصحيح `؟ ! .
قلت: ولذلك قال الحافظ ابن حجر في موسى هذا: إنه مستور، ثم إن الراوي عنه زهير بن محمد وإن كان من رجال ` الصحيحين ` ففي حفظه كلام كثير ضعفه من أجله جماعة، وقد عرفت آنفا قول البزار فيه أنه لم يكن بالحافظ.
وقال أبو حاتم في ` الجرح والتعديل ` (1 / 2 / 590) : محله الصدق، وفي حفظه سوء، وكان حديثه بالشام أنكر من حديثه بالعراق لسوء حفظه، فما حدث من كتبه فهو صالح، وما حدث من حفظه ففيه أغاليط.
قلت: ومن أين لنا أن نعلم إذا كان حدث بهذا الحديث من كتابه، أو من حفظه؟ !
ففي هذه الحالة يتوقف عن قبول حديثه، هذا إن سلم من شيخه المستور، وقد تابعه مستور مثله، أخرجه ابن منده كما في ابن كثير من طريق سعيد بن سلمة حدثنا موسى ابن سرجس عن نافع به بطوله.
سكت عن علته ابن كثير ولكنه قال:
غريب، أي ضعيف، وفي ` التقريب ` موسى بن سرجس مستور.
قلت: ولا يبعد أن يكون هو الأول، اختلف الرواة في اسم أبيه، فسماه بعضهم جبيرا، وبعضهم سرجسا، وكلاهما حجازي، والله أعلم.
ثم قال الحافظ ابن كثير: وأقرب ما يكون في هذا أنه من رواية عبد الله بن عمر عن كعب الأحبار، لا عن النبي صلى الله عليه وسلم، كما قال عبد الرزاق في ` تفسيره `: عن الثوري عن موسى بن عقبة عن سالم عن ابن عمر عن كعب الأحبار قال: ذكرت الملائكة أعمال بني آدم وما يأتون من الذنوب فقيل لهم: اختاروا منكم اثنين، فاختاروا هاروت وماروت … إلخ، رواه ابن جرير من طريقين عن عبد الرزاق به، ورواه ابن أبي حاتم عن أحمد بن عصام عن مؤمل عن سفيان الثوري به، ورواه ابن جرير أيضا حدثني المثنى أخبرنا المعلى وهو ابن أسد أخبرنا عبد العزيز بن المختار عن موسى بن عقبة حدثني سالم أنه سمع عبد الله يحدث عن كعب الأحبار فذكره، فهذا أصح وأثبت إلى عبد الله بن عمر من الإسنادين المتقدمين، وسالم أثبت في أبيه من مولاه نافع، فدار الحديث ورجع إلى نقل كعب الأحبار عن كتب بني إسرائيل، وعلق عليه الشيخ رشيد رضا رحمه الله بقوله:
من المحقق أن هذه القصة لم تذكر في كتبهم المقدسة، فإن لم تكن وضعت في زمن روايتها فهي في كتبهم الخرافية، ورحم الله ابن كثير الذي بين لنا أن الحكاية خرافة إسرائيلية وأن الحديث المرفوع لا يثبت.
قلت: وقد استنكره جماعة من الأئمة المتقدمين، فقد روى حنبل الحديث من طريق أحمد ثم قال: قال أبو عبد الله (يعني الإمام أحمد) : هذا منكر، وإنما يروى عن كعب، ذكره في ` منتخب ابن قدامة ` (11 / 213) ، وقال ابن أبي حاتم في ` العلل ` (2 / 69 - 70) : سألت أبي عن هذا الحديث؟ فقال: هذا حديث منكر.
قلت: ومما يؤيد بطلان رفع الحديث من طريق ابن عمر أن سعيد بن جبير ومجاهدا روياه عن ابن عمر موقوفا عليه كما في ` الدر المنثور ` للسيوطي (1 / 97 - 98) وقال ابن كثير في طريق مجاهد: وهذا إسناد جيد إلى عبد الله بن عمر، ثم هو - والله أعلم - من رواية ابن عمر عن كعب كما تقدم بيانه من رواية سالم عن أبيه، ومن ذلك أن فيه وصف الملكين بأنهما عصيا الله تبارك وتعالى بأنواع من المعاصي على خلاف وصف الله تعالى لعموم ملائكته في قوله عز وجل: {لا يعصون الله ما أمرهم ويفعلون ما يؤمرون} .
وقد رويت فتنة الملكين في أحاديث أخرى ثلاثة، سيأتي الكلام عليها في المجلد الثاني رقم (910 و912 و913) إن شاء الله تعالى.




১৭০। আল্লাহ্‌ তা'আলা যখন আদম (আঃ) কে যমীনে নামিয়ে দিলেন, ফেরেশতারা বললেনঃ হে প্রভু! আপনি যমীনে এমন লোক সৃষ্টি করবেন যারা ফ্যাসাদ করবে ও রক্তারক্তি করবে- এমতাবস্থায় যে আমরা আপনার প্রশংসার সাথে তাসবীহ পাঠ করছি এবং আপনার পবিত্রতা বর্ণনা করছি। আল্লাহ্‌ বললেনঃ আমি যা জানি তোমরা তা জান না। তারা বললঃ হে প্রতিপালক! আমরা আদম সন্তানদের চেয়ে তোমার জন্য বেশী আনুগত্যশীল। আল্লাহ্‌ তা'আলা ফেরেশতাদের উদ্দেশ্যে বললেনঃ ফেরেশতাদের মধ্য হতে দু'জন ফেরেশতাকে নিয়ে আস, তাদের দু'জনকে যমীনে প্রেরণ করা হবে। অতঃপর আমরা দেখব তারা কেমন আমল করে। তারা বলল হে আমাদের রব! হারুত ও মারূত। অতঃপর তাদের দু'জনকে পৃথিবীতে প্রেরণ করা হল।





তাদের দু'জনের সম্মুখে মানবকুলের সর্বাপেক্ষা সুন্দরী রমণী হিসাবে যুহরাকে দাঁড় করানো হলো। সে তাদের দু'জনের নিকট আসল। অতঃপর তারা দু'জনে তার নিকট তাকে চাইল। সে বললঃ আল্লাহ্‌র কসম তা হবে না যতক্ষন পর্যন্ত আল্লাহ্‌র সাথে অংশীদার স্থাপনের উক্তি না করবে। তারা দু'জনে বললঃ আল্লাহর কসম আমরা আল্লাহ্‌র সাথে শির্ক করতে পারব না। অতঃপর সে তাদের দু'জনের নিকট হতে চলে গেল। তারপর একটি শিশুকে বহন করে পুনরায় আসল।





তারা দু'জনে তাকে পাবার জন্য চাইল। সে বললঃ আল্লাহ্‌র কসম তা হবে না যতক্ষন পর্যন্ত তোমরা দু'জনে এ শিশুটিকে হত্যা না করবে। তারা বলল আল্লাহ্‌র কসম আমরা তাকে কখনও হত্যা করব না। সে চলে গেল। তারপর এক পিয়ালা মদ নিয়ে পুনরায় আসল। অতঃপর তারা দু'জনে তাকে চাইল। কিন্তু সে বলল আল্লাহ্‌র কসম তা হবে না যতক্ষন পর্যন্ত এ মদ পান না করবে। এরপর তারা দু'জনে মদ পান করে মাতাল হয়ে গেল। অতঃপর সেই রমণীর সাথে দু'জনে যেনায় লিপ্ত হল, শিশুটিকে হত্যা করল।





অতঃপর যখন জ্ঞান ফিরে আসল, তখন রমণীটি বললঃ আল্লাহ্‌র কসম তোমরা দু'জনে যখন মদ পান করে মাতাল হয়ে গেলে তখন আমার নিকট যে সব কর্ম করতে অস্বীকার করেছিলে সে সব কর্ম করা হতে কিছুই ছাড়লে না। অতঃপর তাদের দু'জনকে দুনিয়া ও আখেরাতের শাস্তির মধ্য হতে একটি শাস্তি গ্রহন করার জন্য স্বাধীনতা দেয়া হল। তারা দু'জনে দুনিয়ার শাস্তি পছন্দ করল।





মারফু' হিসাবে হাদিসটি বাতিল।





এটিকে ইবনু হিব্বান, আহমাদ, আব্দু ইবনে হামীদ, ইবনু আবিদ-দুনিয়া, বাযযার, ইবনুস সুনী যুহায়ের ইবনু মুহাম্মাদ সূত্রে মূসা ইবনু যুবায়ের হতে ... বর্ণনা করেছেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এটি মওকুফ হিসাবে সহীহ, যার বিবরণ কিছু পরেই আসবে। ইবনু কাসীর তার “আত-তাফসীর” গ্রন্থে (১/২৫৪) বলেনঃ মূসা ইবনু যুবায়ের হচ্ছেন আনসারী। তাকে ইবনু আবী হাতিম `আল-জারহু ওয়াত তা’দীল` গ্রন্থে (৪/১/১৩৯) উল্লেখ করে তার সম্পর্কে ভাল-মন্দ কিছুই বলেননি। তার অবস্থা অস্পষ্ট (মাসতুরুল হাল)। তিনি এককভাবে নাফে হতে বর্ণনা করেছেন। ইবনু হিব্বান তাকে `আস-সিকাত` গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন, কিন্তু বলেছেনঃ كان يخطيء ويخالف তিনি ভুল করতেন এবং অন্যের বিরোধিতা করতেন।





ইবনু হিব্বান যদি কোন বর্ণনাকারীর ব্যাপারে চুপ থাকেন তাহলে তার উপর নির্ভর করা যায় না। তিনি নরমপন্থীদের অন্তর্ভুক্ত হওয়ার কারণে। অথচ এখানে তিনি বলেছেনঃ তিনি ভুল করতেন এবং বিরোধিতা করতেন। এছাড়া যুহায়ের ইবনু মুহাম্মাদ সহীহাইনের বর্ণনাকারী হওয়া সত্ত্বেও তার হেফযের ব্যাপারে বহু কথা আছে। এ কারণেই তাকে একদল দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন। বাযযার তার সম্পর্কে বলেনঃ তিনি হাফিয ছিলেন না।





তার সম্পর্কে ইবনু আবী হাতিম “আল-জারহু ওয়াত তা’দীল” গ্রন্থে (১/২/৫৯০) বলেনঃ তার হেফযে ক্রটি থাকার কারণে তিনি যে হাদীস শাম দেশে বলেছেন সেটি ইরাকে অস্বীকার করেছেন। ফলে তিনি তার কিতাব হতে যা বর্ণনা করেছেন তা সহীহ আর তার হেফয হতে যা বর্ণনা করেছেন তাতে ভুল করেছেন।





ইবনু কাসীর বিবরণ দিয়েছেন যে, এ ঘটনাটি ইসরাইলীদের বানোয়াট ঘটনা। মারফু হাদীস হিসাবে সাব্যস্ত হয়নি। এটি কা'য়াব আল-আহবার হতে আব্দুল্লাহ ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) সূত্রে বর্ণিত হয়েছে।





আমি (আলবানী) বলছিঃ একদল পূর্ববর্তী ইমাম এ হাদীসটিকে মুনকার হিসাবে চিহ্নিত করেছেন। ইমাম আহমাদ বলেনঃ এটি মুনকার, এটি কা'য়াব হতে বর্ণনা করা হয়ে থাকে। ইবনু আবী হাতিম বলেনঃ আমি আমার পিতাকে এ হাদীসটি সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করেছিলাম। তিনি উত্তরে বলেনঃ এটি মুনকার হাদীস।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এটি মারফু’ হিসাবে বাতিল হওয়ার প্রমাণ এই যে, এটিকে ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে সাঈদ ইবনু যুবায়ের এবং মুজাহিদ মওকুফ হিসাবে বর্ণনা করেছেন। যেমনভাবে সুয়ূতীর “দুররুল মানসূর” গ্রন্থে (১/৯৭-৯৮) এসেছে।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (171)


` من ولد له مولود، فسماه محمدا تبركا به، كان هو ومولوده في الجنة `.
موضوع.
رواه ابن بكير في ` فضل من اسمه أحمد ومحمد ` (ق 58 / 1) ومن طريقه أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (1 / 157) حدثنا حامد بن حماد بن المبارك العسكري حدثنا إسحاق بن يسار أبو يعقوب النصيبي حدثنا حجاج بن المنهال حدثنا حماد بن سلمة عن برد بن سنان عن مكحول عن أبي أمامة مرفوعا، وقال ابن الجوزي: في إسناده من تكلم فيه، ولم يزد، وتعقبه السيوطي في ` اللآليء ` (1 / 106) بقوله: قلت: هذا أمثل حديث ورد في الباب، وإسناده حسن، ومكحول من علماء التابعين وفقهائهم وثقه غير واحد، واحتج به مسلم في ` صحيحه `، وروى له البخاري في ` الأدب `، والأربعة، وثقه ابن معين والنسائي، وضعفه ابن المديني وقال أبو حاتم: ليس بالمتين، وقال مرة:
كان صدوقا، وقال أبو زرعة: لا بأس به، والله أعلم.
قلت: لقد أبعد السيوطي عفا الله عنه النجعة فأخذ يتكلم على بعض رجال السند موهما أنهم موضع النظر منه، مع أن علة الحديث ممن دونهم، ألا وهو حامد بن حماد العسكري شيخ ابن بكير قال الذهبي في ` الميزان `: روى عن إسحاق بن يسار النصيبي خبرا موضوعا هو آفته، ثم ساق له هذا.
ووافقه الحافظ ابن حجر في ` اللسان `.
ولذلك قال المحقق ابن القيم:
إنه حديث باطل، كما نقله الشيخ القاري في ` موضوعاته ` عنه، (ص 109) وأقره.
وغفل عن هذا التحقيق المناوي فأقر تحت الحديث الآتي (437) السيوطي على تحسينه فلا تغتر به، ثم وجدت ابن عراق قد تعقب السيوطي في ` تنزيه الشريعة ` (82 / 1) بمثل ما تعقبته به، إلا أنه زاد فقال: لكن وجدت له طريقا أخرى أخرجها ابن بكير أيضا والله أعلم.
قلت: وسكت عليه! وفيه ثلاثة لم أجد من ذكرهم، فأحدهم آفته.
‌‌




১৭১। যে ব্যাক্তির কোন পুত্র সন্তান ভূমিষ্ঠ হল, অতঃপর তার নাম রাখল মুহাম্মাদ তার দ্বারা বরকত নেয়ার উদ্দ্যেশে। তাহলে সেই ব্যাক্তি ও তার নবজাতক জান্নাতী হবে।





হাদীসটি জাল।





এটি ইবনু বুকায়ের “ফাযলু মান ইসমুহু আহমাদ ওয়া মুহাম্মাদ” নামক (কাফ ১/৫৮) গ্রন্থে বর্ণনা করেছেন এবং তার সূত্র হতে ইবনুল জাওযী তার `মাওযুআত` গ্রন্থে (১/১৫৭) উল্লেখ করেছেন। অতঃপর বলেছেনঃ এটির সনদে সমালোচিত ব্যক্তি রয়েছেন।





এটির সনদে ইবনু বুকায়ের-এর শাইখ হামেদ ইবনু হাম্মাদ ইবনুল মুবারাক আল-আসকারী রয়েছেন। তার সম্পর্কে যাহাবী “আল-মীযান” গ্রন্থে বলেনঃ তিনি ইসহাক ইবনু ইয়াসার আন-নাসীবী হতে বানোয়াট হাদীস বর্ণনা করেছেন। তিনিই হচ্ছেন এ হাদীসটির সমস্যা। তার এ কথাকে হাফিয ইবনু হাজার “লিসানুল মীযান” গ্রন্থে সমর্থন করেছেন। এ কারণেই ইবনুল কাইয়্যিম বলেছেনঃ এ হাদীসটি বাতিল।





শাইখ আল-কারী তার “আল-মাওযু’আত” গ্রন্থে হাদীসটি (পৃঃ১০৯) উল্লেখ করে যাহাবীর কথাকে সমর্থন করেছেন। তা সত্ত্বেও হাদীসটিকে সুয়ূতী হাসান বলেছেন। তিনি মাকহুলকে নির্ভলশীল বলে কারণ দর্শিয়েছেন অথচ সমস্যা তার নীচের ব্যক্তি হামেদ-এর ক্ষেত্রে।





ইবনু আররাক `তানযীহুশ শারীয়াহ` গ্রন্থে (১/৮২) সুয়ূতীর সমালোচনা করেছেন, যেরূপ আমি তার সমালোচনা করেছি।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (172)


` قال الله لداود: يا داود ابن لي في الأرض بيتا، فبنى داود بيتا لنفسه قبل البيت الذي أمر به، فأوحى الله إليه: يا داود بنيت بيتك قبل بيتي؟ قال: أي رب هكذا قلت فيما قضيت: من ملك استأثر، ثم أخذ في بناء المسجد، فلما تم سور الحائط سقط، فشكا ذلك إلى الله، فأوحى الله إليه أنه لا يصح أن تبني لي بيتا! قال: أي رب ولم؟ قال: لما جرى على يديك من الدماء، قال: أي رب أولم يكن ذلك في هو اك؟ قال: بلى ولكنهم عبادي وإمائي وأنا أرحمهم، فشق ذلك عليه فأوحى الله إليه: لا تحزن فإني سأقضى بناءه على يد ابنك سليمان … `.
باطل موضوع.

أخرجه الطبراني في ` المعجم الكبير ` (5 / 12) و` مسند الشاميين ` (ص 62 و 99 - المصورة) ، وابن حبان في ` الضعفاء ` (2 / 300) وعنه
ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (1 / 200) ، عن محمد بن أيوب بن سويد حدثنا أبي حدثنا إبراهيم ابن أبي عبلة عن أبي الزاهرية عن رافع بن عمير مرفوعا، وقال ابن الجوزي:
موضوع، محال، تتنزه الأنبياء عن مثله ويقبح أن يقال: أبيح له قتل قوم أو أمر بذلك، ثم أبعد بذلك عن الرضا، كيف وقد قال تعالى في حق العصاة: {ولا تأخذكم بهما رأفة في دين الله} قال ابن حبان: ومحمد بن أيوب يروي الموضوعات وأقره السيوطي في ` اللآلئ ` (1 / 170) وقال: قلت: أخرجه الطبراني وابن مردويه في ` التفسير ` وقد وافق صاحب ` الميزان ` على أنه موضوع، قال أبو زرعة: محمد بن أيوب رأيته قد أدخل في كتب أبيه أشياء موضوعة.
وقال ابن حبان، كان يضع الحديث، والموضوع منه قصة داود، وأما سؤال سليمان الخصال الثلاث فورد من طرق أخرى.
قلت: وقد حذفت السؤال منه وأشرت إليه بالنقط ( … ) لأنه صحيح من حديث عبد الله بن عمرو، وقد صححه جمع كما هو مبين في ` التعليق الرغيب ` (2 /137) ، وراجع تعليقي على ` صحيح ابن خزيمة ` (2 / 288 / 1334) ، وقد أورده بتمامه الهيثمي (4 / 7 - 8) وقال: رواه الطبراني في ` الكبير ` وفيه محمد ابن أيوب ابن سويد الرملي وهو متهم بالوضع.




১৭২। আল্লাহ তা’আলা দাঊদ (আঃ) কে বললেনঃ হে দাঊদ! আমার জন্য পৃথিবীতে একটি ঘর বানাও। অতঃপর তাকে যে ঘর বানানোর নির্দেশ দেয়া হল সেটির পূর্বেই দাঊদ তার নিজের জন্য একটি ঘর বানালেন। ফলে তার নিকট আল্লাহ ওহী করলেনঃ হে দাঊদ! তুমি আমার ঘর বানানোর পূর্বেই তোমার ঘর বানালে? তিনি বললেনঃ হে প্রভু! তুমি তোমার ফয়সালাতে এমনই বলেছ; যে ব্যাক্তি মালিক বনে যায় সে নিজের জন্য কিছু বস্তু নির্ধারিত করে নেয়। অতঃপর তিনি (দাঊদ) মসজিদ তৈরি করা শুরু করলেন। যখন প্রাচীর এর দেয়াল সমাপ্ত হল; তখন তা পড়ে গেল! ফলে তিনি সে বিষয়ে আল্লাহর নিকট অভিযোগ করলেন। আল্লাহ তার নিকট ওহী মারফত জানালেন, তুমি আমার জন্য যে ঘর তৈরি করবে তা সঠিকভাবে হবে না! (দাঊদ) বললেনঃ হে প্রভু কেন? (আল্লাহ) বললেনঃ তোমার সম্মুখে রক্ত প্রবাহিত হওয়ার কারণে। তিনি বললেনঃ হে প্রভু! সেটি কি তোমার ইচ্ছা মাফিক ছিল না? (আল্লাহ) বললেনঃ হ্যাঁ। কিন্তু তারাতো আমার দাস-দাসী এবং আমিই তো তাঁদেরকে দয়া করে থাকি। (এ কথা শোনার পর) তা তার উপর মুশকিল হয়ে গেল। ফলে আল্লাহ তার নিকট ওহী মারফত জানালেন তুমি চিন্তা করো না, কারন আমি তা তৈরির সিদ্ধান্ত নিয়েছি তোমার পুত্র সুলায়মানের হাতে।





হাদীসটি বাতিল ও জাল।





হাদীসটি তাবারানী “মুজামুল কাবীর” গ্রন্থে (৫/১২) এবং `মুসনাদুশ শামিয়ীন` গ্রন্থে (পৃঃ ৬২, ৯৯), ইবনু হিব্বান “আয-যুয়াফা` গ্রন্থে (২/৩০০) এবং তার থেকে ইবনুল জাওযী `মাওযু'আত” গ্রন্থে (১/২০০) মুহাম্মাদ ইবনু আইউব ইবনে সুওয়াইদ হতে ... বর্ণনা করেছেন। অতঃপর ইবনুল জাওযী বলেছেনঃ হাদীসটি জাল।





ইবনু হিব্বান এ মুহাম্মাদ ইবনু আইউব সম্পর্কে বলেনঃ তিনি জাল হাদীস বর্ণনাকারী। সুয়ূতী “আল-লাআলী” (১/১৭০) গ্রন্থে তার এ কথাকে সমর্থন করে বলেছেনঃ এটিকে তাবারানী ও ইবনু মারদুবিয়া তার “আত-তাফসীর” গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন। “আল-মীযান” গ্রন্থের লেখক যাহাবী হাদীসটি জাল হওয়ার ব্যাপারে ঐকমত্য পোষণ করেছেন। আবু যুর'য়াহ বলেনঃ মুহাম্মাদ ইবনু আইউবকে তার পিতার গ্রন্থসমূহে বানোয়াট কিছুর অনুপ্রবেশ ঘটাতে দেখেছি। ইবনু হিব্বান বলেনঃ তিনি হাদীস জাল করতেন। দাউদ-এর ঘটনা সে সবেরই একটি বানোয়াট ঘটনা।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (173)


` فكرة ساعة خير من عبادة ستين سنة `.
موضوع.

أخرجه أبو الشيخ في ` العظمة ` (1 / 297 / 42) وعنه ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (3 / 144) من طريق عثمان بن عبد الله القرشي حدثنا إسحاق بن نجيح الملطي حدثنا عطاء الخراساني عن أبي هريرة مرفوعا، وقال: عثمان وشيخه كذابان، وتعقبه السيوطي في ` اللآليء ` (2 / 227) بقوله: قلت:
اقتصر العراقي في ` تخريج الإحياء ` على تضعيفه، وله شاهد.
قلت: ثم ساق من رواية الديلمي وهذا في ` مسنده ` (2 / 46) بسنده إلى سعيد ابن ميسرة سمعت أنس بن مالك يقول: تفكر ساعة في اختلاف الليل والنهار خير من عبادة ألف سنة.
قلت: هذا مع كونه موقوفا ومغايرا للفظ الحديث فهو موضوع أيضا، سعيد بن ميسرة قال الذهبي: مظلم الأمر، وقال ابن حبان: يروي الموضوعات، وقال الحاكم:
روى عن أنس موضوعات، وكذبه يحيى القطان.
قلت: فمثله لا يستشهد به ولا كرامة! ولذلك فقد أساء بذكره في ` جامعه `.
‌‌




১৭৩। এক ঘণ্টা গবেষণা করা ষাট বছরের ইবাদতের থেকেও অতি উত্তম।





হাদীসটি জাল।





আবুশ শাইখ এটিকে “আল-আযমাহ” গ্রন্থে (১/২৯৭/৪২) উল্লেখ করেছেন এবং তার থেকে ইবনুল জাওযী “আল-মাওযু'আত” (৩/১৪৪) গ্রন্থে উসমান ইবনু আব্দিল্লাহ আল-কুরাশী সুত্রে ইসহাক ইবনু নাজীহ আল-মালতী হতে ... বর্ণনা করে বলেছেনঃ উসমান ও তার শাইখ তারা উভয়েই মিথ্যুক।





সুয়ূতী “আল-লাআলী” গ্রন্থে (২/২২৭) তার সমালোচনা করে বলেছেন যে, ইরাকী “তাখরীজুল ইহইয়া” গ্রন্থে হাদীসটিকে শুধুমাত্র দুর্বল আখ্যা দিয়ে বলেছেন তার শাহেদ রয়েছে।





আমি (আলবানী) বলছিঃ তিনি (ইরাকী) দাইলামীর বর্ণনায় উল্লেখ করেছেন এবং তিনি তার “মুসনাদ” গ্রন্থে (২/৪৬) নিজ সনদে সাঈদ ইবনু মায়সারা হতে বর্ণনা করেছেন, সাঈদ আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে শুনেছেন, তাতে আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেনঃ “রাত ও দিনের বিবর্তনের মাঝে এক ঘন্টা গবেষণা করা হাজার বছর ইবাদাত করা হতেও উত্তম।`





আমি (আলবানী) বলছিঃ এটি মওকুফ এবং এটিও জাল। এ সাঈদ সম্পর্কে যাহাবী বলেনঃ তার ব্যাপারটি অন্ধকারাচ্ছন্ন। ইবনু হিব্বান বলেনঃ তিনি জাল হাদীস বর্ণনাকারী। তার সম্পর্কে হাকিম বলেনঃ তিনি আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে জাল হাদীস বর্ণনা করেছেন। তাকে ইয়াহইয়া আল-কাত্তান মিথ্যুক আখ্যা দিয়েছেন।





অতএব এরূপ সনদের হাদীস শাহেদ হতে পারে না।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (174)


` إذا بنى الرجل المسلم سبعة أو تسعة أذرع، ناداه مناد من السماء: أين تذهب يا أفسق الفاسقين؟! `.
موضوع.

أخرجه أبو نعيم في ` الحلية ` (3 / 75) من طريق الطبراني قال: حدثنا علي بن سعيد الرازي قال: حدثنا الربيع بن سليمان الجيزي قال: حدثنا الوليد بن موسى الدمشقي قال: حدثنا الأوزاعي عن يحيى بن أبي كثير عن الحسن عن أنس
مرفوعا وقال: غريب من حديث الحسن ويحيى والأوزاعي، تفرد به الوليد بن موسى القرشي وهو ضعيف ليس كالوليد بن موسى الدمشقي.
قلت: وابن موسى هذا القرشي قال الذهبي في ` الميزان `: قال الدارقطني: منكر الحديث، وقواه أبو حاتم، وقال غيره: متروك، ووهاه العقيلي وابن حبان، وله حديث موضوع.
قلت: ولعله يشير إلى هذا الحديث فإنه ظاهر الوضع لأن الارتفاع بالبناء القدر المذكور في هذا الحديث ليس ذنبا بله كبيرة حتى يحكم على فاعله بأنه أفسق الفاسقين، فقاتل الله الوضاعين ما أقل حياءهم وأجرأهم على النار.
والحديث أورده السيوطي في ` الجامع الصغير ` بهذا اللفظ وبلفظ: ` من بنى فوق عشرة أذرع ناداه مناد من السماء: يا عدوالله إلى أين تريد `، وقال: رواه الطبراني عن أنس، أما شارحه المناوي فقال: أغفل المصنف من خرجه، وعزاه في ` الدرر ` إلى الطبراني عن أنس، وفيه
الربيع بن سليمان الجيزي أورده الذهبي في ` ذيل الضعفاء ` وقال: كان فقيها دينا لم يتقن السماع من ابن وهب.
قلت: تعصيب الجناية بالجيزي مع أن فوقه من هو أشد ضعفا منه ليس من الإنصاف في شيء ألا وهو الوليد بن موسى القرشي فقد عرفت مما سبق أنه متهم، ثم إن الحسن هو البصري وهو على جلالة قدره مدلس ولم يصرح بسماعه من أنس فهو منقطع.
ثم إن الحديث لم يورده الهيثمي في ` المجمع ` وإنما أورد فيه (4 / 70) ما نصه: وعن أنس بن مالك أن رسول الله صلى الله عليه وسلم مر ببنية قبة لرجل من الأنصار فقال: ` ما هذه `؟ قالوا: قبة، فقال النبي صلى الله عليه وسلم:
` كل بناء، وأشار بيده على رأسه أكبر من هذا فهو وبال على صاحبه يوم القيامة `، رواه الطبراني في ` الأوسط ` ورجاله ثقات.
قلت: هذا رواه أبو داود في ` سننه ` (3 / 347 و348) بنحوه من طريق آخر تبين فيما بعد أنه جيد، كما قال الحافظ العراقي، فنقلته إلى ` الصحيحة ` (8830) .




১৭৪। কোন মুসলিম ব্যাক্তি যখন ষাট বা নয় গজ বিশিষ্ট ঘর তৈরি করেবে, তখন আসমান হতে আহবানকারী তাকে ডাক দিয়ে বলবে, কোথায় যাচ্ছ হে সর্বাপেক্ষা বড় দুষ্কর্মকারী?





হাদীসটি জাল।





এটিকে আবূ নু’য়াইম `আল-হিলইয়াহ` গ্রন্থে (৩/৭৫) তাবারানীর সূত্রে বর্ণনা করে বলেছেনঃ এটি হাসান, ইয়াহইয়া ও আওযাঈ হতে গারিব হাদীস। ওয়ালীদ ইবনু মূসা আল-কুরাশী এটিকে এককভাবে বর্ণনা করেছেন। তিনি দুর্বল। তিনি ওয়ালীদ ইবনু মূসা আদ-দামেশকীর মত নন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এ ওয়ালীদ হচ্ছেন কুরাশী। তার সম্পর্কে যাহাবী “আল-মীযান” গ্রন্থে বলেনঃ দারাকুতনী বলেছেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীস। অন্যরা বলেছেনঃ তিনি মাতরূক। ওকায়লী ও ইবনু হিব্বান বলেছেনঃ তিনি য'ঈফ, তার বানোয়াট হাদীস রয়েছে। সম্ভবত এ হাদীসটির দিকে ইঙ্গিত করা হচ্ছে। কারণ স্পষ্টত এটি জাল।





সুয়ূতী হাদীসটি “জামেউস সাগীর” গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন। তার ভাষ্যকার মানবী বলেছেনঃ যে লেখক (মুসান্নিফ) এটি বর্ণনা করবেন তিনি সর্বাপেক্ষা বড় গাফিল।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (175)


` من بنى بناء فوق ما يكفيه كلف يوم القيامة بحمله على عاتقه `.
باطل.

أخرجه الطبراني (3 / 71 / 2) وابن عدي (333 / 1 - 2) وأبو نعيم (8 / 246) من طريق المسيب بن واضح حدثنا يوسف عن سفيان الثوري عن سلمة بن كهيل عن أبي عبيدة عن عبد الله بن مسعود مرفوعا، وقال أبو نعيم وابن عدي: غريب من حديث الثوري تفرد به المسيب عن يوسف، ثم رواه أبو نعيم (8 / 252) من طريق محمد يعني ابن المسيب حدثنا عبد الله بن خبيق حدثنا يوسف بن أسباط به.
قلت: وهذا سند ضعيف من أجل يوسف بن أسباط قال أبو حاتم: كان رجلا عابدا، دفن كتبه، وهو يغلط كثيرا، وهو رجل صالح، لا يحتج به، كما في ` الجرح ` (4 / 2 / 418) ، والحديث أورده السيوطي في ` الجامع ` والهيثمي في ` المجمع ` (4 / 70) وقال: رواه الطبراني في ` الكبير `، وفيه المسيب بن واضح وثقه النسائي وضعفه جماعة.
قلت: قد تابعه عبد الله بن خبيق كما سبق، فعلة الحديث من شيخهما ابن أسباط، ثم إن له علة أخرى هي الانقطاع بين أبي عبيدة وأبيه عبد الله بن مسعود فإنه لم يسمع منه وأشار لهذا الحافظ العراقي فقال في ` تخريج الإحياء ` (4 / 204) :
رواه الطبراني من حديث ابن مسعود بإسناد فيه لين وانقطاع، والحديث قال الذهبي في ترجمة المسيب: وهذا حديث منكر، وقال ابن أبي حاتم في ` العلل ` (2 / 115 و116) : سألت أبي عن حديث رواه المسيب بن واضح عن يوسف بن أسباط..
قلت: فذكره، قال: قال أبي: هذا حديث باطل لا أصل له بهذا الإسناد.




১৭৫। যে ব্যাক্তি তার জন্য যে পরিমাণ যথেষ্ট তার চেয়ে উঁচু করে ইমারত তৈরি করবে, কিয়ামতের দিন তার কাঁধে তা বহন করার দ্বারা তাকে কষ্ট দেয়া হবে।





হাদীসটি বাতিল।





এটিকে তাবারানী (৩/৭১/২), ইবনু আদী (৩৩৩/১-২) ও আবু নু’য়াইম (৮/২৪৬) মুসাইয়্যাব ইবনু ওয়াযিহ সূত্রে তার শাইখ ইউসুফ ইবনু আসবাত হতে ... বর্ণনা করেছেন।





আবু নু’য়াইম ও ইবনু আদী বলেনঃ সাওরী হতে হাদীসটি গারীব। এটিকে মুসাইয়্যাব ইউসুফ হতে এককভাবে বর্ণনা করেছেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি ইউসুফের কারণে দুর্বল। তার সম্পর্কে আবু হাতিম বলেনঃ তিনি একজন আবেদ ব্যক্তি ছিলেন। তার গ্রন্থগুলো দাফন করে দিয়েছিলেন। তিনি বহু ভুল করতেন। তবে তিনি ব্যক্তি হিসাবে সৎ ছিলেন। কিন্তু তার হাদীস দলীল হিসাবে গ্রহণীয় নয়, যেমনভাবে “আল-জারহু...” গ্রন্থে (৪/২/৪১৮) এসেছে।





হাদীসটিকে সুয়ূতী “জামেউস সাগীর” গ্রন্থে ও হায়সামী “আল-মাজমা” গ্রন্থে (৪/৭০) উল্লেখ করেছেন। হাদীসটি কোন সনদেই সহীহ নয়। এটির আরেকটি সমস্যা রয়েছে তা হচ্ছে সনদে আবু ওবায়দা ও তার পিতা আব্দুল্লাহ ইবনু মাসউদের মধ্যে বিচ্ছিন্নতা। কারণ আবু ওবায়দা ইবনু মাসউদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে শ্রবণ করেননি। হাফিয ইরাকী “তাখরীজুল ইহুইয়া” গ্রন্থে (৪/২০৪) এদিকেই ইঙ্গিত করেছেন।





যাহাবী মুসাইয়্যাব ইবনু ওয়াযিহ-এর জীবনী আলোচনা করতে গিয়ে বলেনঃ এ হাদীসটি মুনকার। ইবনু আবী হাতিম “আল-ইলাল” গ্রন্থে (২/১১৫,১১৬) বলেনঃ আমি আমার পিতাকে সেই হাদীসটি সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করেছিলাম যেটি মুসাইয়্যাব ইবনু ওয়াযিহ ইউসুফ ইবনু আসবাত হতে বর্ণনা করেছেন। তিনি উত্তরে বলেনঃ এ হাদীসটি বাতিল, এ সনদে এর কোন ভিত্তি নেই।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (176)


` لا تسقوني حلب امرأة `.
منكر.

أخرجه وكيع في ` الزهد ` (3 / 494 / 408) حدثنا قيس بن الربيع عن امرئ القيس عن عاصم بن بحير عن ابن أبي الشيخ المحاربي قال: أتانا رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال: ` نصركم الله يا معشر محارب! لا تسقوني … `.
وأخرجه ابن سعد في ` الطبقات ` (6 / 43) من طريقين آخرين عن قيس بن الربيع به، وزاد أحدهما: قال قيس بن الربيع: فرأيت امرأ القيس إذا أتى بشيراز (كذا) قال: حلاب امرأة هذا؟ .
قلت: وهذا إسناد ضعيف مظلم، ابن أبي الشيخ لا يعرف إلا في هذا الحديث بهذا الإسناد، أورده ابن الأثير وغيره هكذا في الصحابة.
وعاصم بن بحير ـ بالحاء المهملة مكبرا أو مصغرا ـ كما في` الإكمال ` وغيره ولم أجد له ترجمة، وامرؤ القيس، أورده في ` الميزان ` بروايته هذه عن عاصم وقال: قال الأزدي: حدث بخبر منكر لا يصح، وكذا في ` اللسان `.
وقيس بن الربيع، قال الحافظ في ` التقريب `: صدوق، تغير لما كبر، وأدخل عليه ابنه ما ليس من حديثه فحدث به.
قلت: فلا يبعد أن يكون هذا الحديث بهذا الإسناد المظلم مما أدخله عليه ابنه والله أعلم.




১৭৬। তোমরা আমাকে মহিলার দুধ পান করিয়ো না।





হাদীসটি মুনকার।





এটি ওয়াকী “আল-যুহুদ” গ্রন্থে (৩/৪৯৪/৪০৮) উল্লেখ করেছেন । এছাড়া ইবনু সা'দ “আত-তাবাকাত` গ্রন্থে (৬/৪৩) কায়স ইবনু রাবী' হতে অন্য দুটি সূত্রে বর্ণনা করেছেন। হাদীসটির একাধিক বর্ণনাকারীর মধ্যে সমস্যা রয়েছে।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এটির সনদ দুর্বল, অন্ধকারাচ্ছন্ন। বর্ণনাকারী ইবনু আবিশ শাইখ আল-মুহারেবীকে এ হাদীস ব্যতীত অন্য কোন হাদীসে চেনা যায় না। ইবনুল আসীর প্রমুখ এ ভাবেই তাকে সাহাবীগণের অন্তর্ভুক্ত করেছেন। এছাড়া বর্ণনাকারী আসিম ইবনু বুহায়েরের জীবনী পাচ্ছি না।





যাহাবী তার “আল-মীযান” গ্রন্থে আরেক বর্ণনাকারী ইমরুল কায়েস সম্পর্কে বলেন, আযদী বলেছেনঃ তিনি মুনকার হাদীস বর্ণনা করেছেন যা সহীহ নয়। অনুরূপ কথা “লিসানুল মীযান” গ্রন্থেও বলা হয়েছে।





বর্ণনাকারী কায়স ইবনু রাবী' সম্পর্কে হাফিয ইবনু হাজার “আত-তাকরীব` গ্রন্থে বলেনঃ তিনি সত্যবাদী । কিন্তু যখন বয়স্ক হয়ে গিয়েছিলেন, তখন তার পরিবর্তন সাধিত হয়। তার ছেলে যে হাদীস তার না সেটিকে তার উদ্ধৃতিতে হাদীস হিসাবে বর্ণনা করেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এটি অন্ধকারাচ্ছন্ন। এ সনদের হাদীসটি তার ছেলে কর্তৃক প্রবেশ ঘটানো হাদীসগুলোর একটি হওয়াটা অবাস্তব নয়।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (177)


` من بنى بنيانا في غير ظلم ولا اعتداء، أو غرس غرسا في غير ظلم ولا اعتداء كان أجره جاريا ما انتفع به أحد من خلق الرحمن تبارك وتعالى `.
ضعيف.

أخرجه أحمد (3 / 438) والطحاوي في ` المشكل ` (1 / 416 - 417) والطبراني في ` المعجم الكبير ` (20 / 187 / رقم 410 و411) من طريق زبان بن فائد عن سهل بن معاذ الجهني عن أبيه مرفوعا.
وهذا ضعيف من أجل زبان فإنه ضعيف الحديث مع صلاحه وعبادته كما قال الحافظ في ` التقريب `، والحديث قال في ` المجمع ` (4 / 70) : رواه أحمد والطبراني في ` الكبير ` وفيه زبان بن فائد ضعفه أحمد وغيره، ووثقه أبو حاتم.




১৭৭। যে ব্যাক্তি অট্টালিকা (ইমারত) তৈরি করল অত্যাচার ও সীমালংঘন না করে বা কোন গাছ লাগাল অত্যাচার ও সীমালংঘন না করে, তার সওয়াব অব্যাহত থাকবে যতক্ষণ পর্যন্ত দয়াময় আল্লাহ তাবারাক ওয়া তা’আলার সৃষ্টি থেকে একজন তা দ্বারা উপকৃত হবে।





হাদীসটি জাল।





এটি ইমাম আহমাদ (৩/৪৩৮), তাহাবী তার “আল-মুশকিল” গ্রন্থে (১/৪১৬৪১৭) ও তাবারানী “মুজামুল কাবীর” গ্রন্থে (২০/১৮৭/নং ৪১০, ৪১১) যুবান ইবনু ফায়েদ সূত্রে ... বর্ণনা করেছেন।





হাদীসটি দুর্বল যুবান হাদীসের ক্ষেত্রে দুর্বল হওয়ার কারণে, যেমনভাবে হাফিয ইবনু হাজার `আত-তাকরীব` গ্রন্থে বলেছেন। তাকে ইমাম আহমাদ প্রমুখ মুহাদ্দিসগণ দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন। আর আবু হাতিম তাকে নির্ভরযোগ্য আখ্যা দিয়েছেন।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (178)


` من عير أخاه بذنب لم يمت حتى يعمله `.
موضوع.

أخرجه الترمذي (3 / 318) وابن أبي الدنيا في ` ذم الغيبة ` وابن عدي (296 / 2) والخطيب في ` تاريخه ` (2 / 339 - 340) من طريق محمد بن الحسن بن أبي يزيد الهمداني عن ثور بن يزيد عن خالد بن معدان عن معاذ بن جبل مرفوعا، وقال الترمذي: هذا حديث حسن غريب، وليس إسناده بمتصل، وخالد بن معدان لم يدرك معاذ بن جبل.
قلت: أنى له الحسن إذن؟ ! فإنه مع هذا الانقطاع فيه محمد بن الحسن هذا، كذبه ابن معين وأبو داود كما في ` الميزان ` ثم ساق له هذا الحديث، ولهذا أورده الصغاني في ` الموضوعات ` (ص 6) ومن قبله ابن الجوزي (3 / 82) ذكره من طريق ابن أبى الدنيا ثم قال: لا يصح محمد بن الحسن كذاب، وتعقبه السيوطي في ` اللآليء ` (2 / 293) بقوله: قلت: أخرجه الترمذي وقال: هذا حديث حسن غريب، وله شاهد.
قلت: ثم ذكر الشاهد وهو من طريق الحسن قال:
كانوا يقولون: ` من رمى أخاه بذنب تاب إلى الله منه، لم يمت حتى يبتليه الله به `، وهو مع أنه ليس مرفوعا
إليه صلى الله عليه وسلم، فإن في سنده صالح بن بشير المري، وهو ضعيف كما في ` التقريب ` فلا يصح شاهدا لضعفه وعدم رفعه، وقد رواه عبد الله بن أحمد في ` زوائد الزهد ` (ص 281) قال أخبرت عن سيار حدثنا صالح المري قال: سمعت الحسن يقول: فذكره، وله شاهد آخر مرفوع ولكنه ضعيف فانظر أجوبة ابن حجر على
القزويني مع مقدمتي لها المنشورة في آخر ` المشكاة ` بتحقيقنا (ج 3 ص ح) .




১৭৮। যে ব্যাক্তি তার ভাইকে কোন গুনাহের কারণে ভৎসনা করবে, সে ব্যাক্তি সে কর্ম না করা পর্যন্ত মৃত্যুবরণ করবে না।





হাদীসটি জাল।





এটিকে ইমাম তিরমিযী (৩/৩১৮), ইবনু আবিদ-দুনিয়া “যাম্মুল গীবা” গ্রন্থে, ইবনু আদী (২/২৯৬) ও খাতীবুল বাগদাদী (২/৩৩৯-৩৩০) মুহাম্মাদ ইবনুল হাসান সূত্রে ... বর্ণনা করেছেন। তিরমিযী বলেনঃ হাদীসটি হাসান গারীব। এটির সনদ মুত্তাসিল নয়। খালিদ ইবনু মি’দান মুয়ায ইবনু জাবাল (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে পাননি।





আমি (আলবানী) বলছিঃ তাহলে কীভাবে এটি হাসান। এ মুহাম্মাদ ইবনু হাসানকে ইবনু মাঈন ও আবু দাউদ মিথ্যুক আখ্যা দিয়েছেন, যেমনটি যাহাবীর “আল-মীযান` গ্রন্থে এসেছে। অতঃপর তিনি এ হাদীসটি উল্লেখ করেছেন।





এ কারণেই সাগানী তার `আল-মাওযু'আত” গ্রন্থে (পৃঃ ৬) হাদীসটি উল্লেখ করেছেন। তার পূর্বে ইবনুল জাওযী (৩/৮২) ইবনু আবিদ-দুনিয়ার সূত্রে বর্ণনা করে বলেছেনঃ এটি সহীহ নয়। মুহাম্মাদ ইবনু হাসান মিথ্যুক।





সুয়ূতী-“আল-লাআলী” গ্রন্থে (২/২৯৩) তার সমালোচনা করে বলেছেন যে, এটি তিরমিযী বর্ণনা করে বলেছেনঃ এটি হাসান গারীব এবং তার শাহেদ রয়েছে।





আমি (আলবানী) বলছিঃ তার শাহেদটি মারফু নয়। তবুও এটির সনদটি দুর্বল সালেহ্ ইবনু বাশীর আল-মুররীর কারণে। তিনি দুর্বল যেমনভাবে “আত-তাকরীব” গ্রন্থে এসেছে। এটি শাহেদ হওয়ার যোগ্য নয় দুর্বল এবং মারফু না হওয়ার কারণে।





এছাড়া মারফূ' হিসাবেও শাহেদ এসেছে, কিন্তু সেটিও দুর্বল। দেখুন “মিশকাত” গ্রন্থের শেষে (৩য় খন্ড)।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (179)


` الدعاء سلاح المؤمن، وعماد الدين، ونور السموات والأرض `.
موضوع.

أخرجه أبو يعلى (439) وابن عدي (296 / 2) والحاكم (1 / 492) والقضاعي (4 / 2 / 1) من طريق الحسن بن حماد الضبي حدثنا محمد بن الحسن بن الزبير الهمداني حدثنا جعفر بن محمد بن علي بن الحسين عن أبيه عن جده عن علي رضي الله عنه مرفوعا، وقال الحاكم: هذا حديث صحيح فإن محمد بن الحسن هذا هو التل وهو صدوق في الكوفيين ووافقه الذهبي وهذا منه خطأ فاحش لأمرين:
الأول: أن فيه انقطاعا كما ذكره الذهبي نفسه في ` الميزان ` بين علي بن الحسين وجده علي بن أبي طالب.
الآخر: أن محمد بن الحسن الهمداني هذا ليس هو التل الصدوق كما قال الحاكم، وإنما هو محمد بن الحسن بن أبي يزيد الهمداني الكذاب المذكور في
الحديث المتقدم ويدل على هذا أمور:
1 - أن الذهبي نفسه أورد الحديث في ترجمته بعد أن نقل تكذيبه عن ابن معين وغيره، وكذلك أورده ابن عدي في ترجمته، فإيراد السيوطي الحديث في ` الجامع ` خطأ.
2 - أن الحديث ذكره الهيثمي في ` المجمع ` (10 / 147) وقال: رواه أبو يعلى وفيه محمد بن الحسن بن أبي يزيد وهو متروك.
3 - أن محمد بن الحسن التل لم يذكر في شيوخه جعفر بن محمد، وإنما ذكر هذا في شيوخ محمد بن الحسن الهمداني.
4 - أن التل لم ينسب إلى همدان، وإنما نسب إليها ابن أبي يزيد، فالظاهر أن لفظة (الزبير) تحرفت على بعض الرواة في ` المستدرك ` من (أبي يزيد) ، وبناء عليه ذهب الحاكم إلى أنه التل فأخطأ والله أعلم.
والجملة الأولى من الحديث وردت من كلام الفضيل بن عياض، رواه السلفي في ` الطيوريات ` (64 / 1) ، ورويت في حديث آخر لا يصح وهو:




১৭৯। মু’মিনের হাতিয়ার, দ্বীনের স্তম্ভ এবং আসমান ও যমীনের আলো হচ্ছে দো’আ।





হাদীসটি জাল।





এটিকে আবূ ইয়ালা (৪৩৯), ইবনু আদী (২/২৯৬), হাকিম (১/৪৯২) ও কাযাঈ (৪/২/১) হাসান ইবনু হাম্মদ আয-যাবী সূত্রে মুহাম্মাদ ইবনু হাসান হতে ... বর্ণনা করেছেন।





হাকিম বলেনঃ এটি সহীহ হাদীস। কারণ মুহাম্মাদ ইবনু হাসান হচ্ছেন আত-তাল। তিনি কূফীদের অন্তর্ভুক্ত একজন সত্যবাদী। যাহাবী তার সাথে ঐকমত্য পোষণ করেছেন। এটি যাহাবী হতে দুটি কারণে মারাত্মক ভুলঃ





১। এটির সনদে ইনকিতা অর্থাৎ বিচ্ছিন্নতা রয়েছে। যা যাহাবী নিজে তার “আল-মীযান” গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন। সেটি হচ্ছে আলী ইবনু হুসাইন ও তার দাদা ‘আলী ইবনু আবী তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর মধ্যে।





২। এ মুহাম্মাদ ইবনুল হাসান হামদানী। তিনি আত-তাল নন, সত্যবাদীও নন যেমনভাবে হাকিম বলেছেন। বরং তিনি হচ্ছেন মুহাম্মাদ ইবনুল হাসান ইবনু আবী ইয়াযীদ আল-হামাদানী, তিনি মিথ্যুক। যার সম্পর্কে পূর্ববতী হাদীসে আলোচনা করা হয়েছে। এর প্রমাণ হিসাবে নিম্নের বিষয়গুলো উল্লেখ করা যেতে পারেঃ





ক. যাহাবী নিজেই হাদীসটি তার (মুহাম্মাদের) জীবনী বর্ণনা করতে গিয়ে উল্লেখ করেছেন, তাকে ইবনু মাঈন প্রমুখ ব্যাক্তি কর্তৃক মিথ্যুক হিসাবে আখ্যায়িত করার পরে। অনুরূপভাবে ইবনু আদীও তার জীবনী বর্ণনা করার সময় হাদীসটি উল্লেখ করেছেন। অতএব সুয়ূতী কর্তৃক হাদীসটি `জামেউস সাগীর” গ্রন্থে - করাটা ভুল।





খ. হায়সামী হাদীসটি “আল-মাজমা` গ্রন্থে (১০/১৪৭) উল্লেখ করে বলেছেনঃ এটিকে আবূ ইয়ালা বর্ণনা করেছেন। যার সনদে মুহাম্মাদ ইবনুল হাসান ইবনু আবী ইয়াযীদ রয়েছেন, তিনি মাতরূক।





গ. মুহাম্মাদ ইবনুল হাসান আত-তাল-এর শাইখ হিসাবে জাফর ইবনু মুহাম্মাদকে উল্লেখ করা হয়নি। তাকে মুহাম্মাদ ইবনুল হাসান আল-হামাদানীর শাইখ হিসাবে উল্লেখ করা হয়েছে।





ঘ. এ সনদে যে বলা হয়েছে মুহাম্মাদ ইবনুল হাসান ইবনু যুবায়ের, যুবায়ের শব্দটি “আল-মুসতাদরাক” গ্রন্থের কোন বর্ণনাকারীর পক্ষ হতে বিকৃত করে উল্লেখ করা হয়েছে। যার কারণে হাকিম তাকে তাল হিসাবে উল্লেখ করেছেন। ফলে তিনি ভুল করেছেন।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (180)


` ألا أدلكم على ما ينجيكم من عدوكم ويدر لكم أرزاقكم؟ تدعون الله ليلكم ونهاركم، فإن الدعاء سلاح المؤمن `.
ضعيف.
رواه أبو يعلى (3 / 346 / 1812) من طريق سلام بن سليم عن محمد بن أبي حميد عن محمد بن المنكدر عن جابر بن عبد الله مرفوعا.
وقال الهيثمي في ` مجمع الزوائد ` (10 / 147) : رواه أبو يعلى من حديث جابر بن عبد الله وفيه محمد بن أبي حميد وهو ضعيف.
وأما قول الشيخ العجلوني في ` الكشف ` (1 / 403) عقب الحديث المتقدم
وقول الهيثمي هذا: وقال ابن الغرس: قال شيخنا: صحيح، فلعله أراد باعتبار انجباره فتدبر.
قلت: قد علمت أن الحديث الذي قبله موضوع فلا تأثير له في تقوية هذا الحديث الضعيف، كما هو مقرر في علم المصطلح.
على أن له علة أخرى تبينت لي بعد أن وقفت على إسناده في ` مسند أبي يعلى `، فإنه قال: حدثنا أبو الربيع حدثنا سلام يعني ابن سليم عن محمد بن أبي حميد عن محمد بن المنكدر عن جابر بن عبد الله به.
قلت: سلام هذا هو الطويل المدني، وهو متروك متهم بالوضع فإعلال الحديث به أولى من إعلاله بمحمد بن أبي حميد وقد مضى له حديث موضوع برقم (58) وآخر ضعيف توبع عليه برقم (26) فالحديث موضوع أيضا كالذي قبله، وليس ضعيفا فقط كما كنا عللناه بابن أبي حميد من قبل بناء على عبارة الهيثمي فتنبه.




১৮০। তোমাদেরকে কি আমি নির্দেশনা দিব না এমন বস্তুর যা তোমাদেরকে তোমাদের শত্রু হতে রক্ষা করবে এবং তোমাদের জন্য রিযক বর্ধিত করবে? (তা হচ্ছে) তোমরা দিনে ও রাতে আল্লাহকে ডাকবে। কারন দো’আ হচ্ছে মুমিনের হাতিয়ার।





হাদীসটি দুর্বল।





এটি আবু ইয়ালা (৩/৩৪৬/১৮১২) সাল্লাম ইবনু সুলাইম সূত্রে মুহাম্মাদ ইবনু আবী হুমায়েদ হতে ... বর্ণনা করেছেন।





হায়সামী “মাজমাউয যাওয়াইদ” গ্রন্থে (১০/১৪৭) বলেনঃ এটির সনদে মুহাম্মাদ ইবনু আবী হুমায়েদ নামক বর্ণনাকারী আছেন। তিনি দুর্বল ।





এ হাদীসটি সহীহ না হওয়ার পিছনে আরো একটি কারণ আছে, সেটি হচ্ছে সাল্লাম ইবনু সুলাইম। তিনি হচ্ছেন তাবিল আল-মাদানী, তিনি মাতরূক, জাল বর্ণনা করার দোষে দোষী। তাকে উল্লেখ করে এ হাদীসের সমস্যা বর্ণনা করাই উত্তম। পূর্বে তার একটি জাল হাদীস উল্লেখ করা হয়েছে (নং ৫৮) সেখানে তার সম্পর্কে বিস্তারিত আলোচনা করা হয়েছে। এছাড়া তার আরেকটি দুর্বল হাদীসও বর্ণনা করা হয়েছে ২৬ নাম্বারে মুতাবায়াত থাকার কারণে। তবে এটি পূর্বেরটির ন্যায় শুধু দুর্বল নয়, বরং জালও বটে।





অতএব এ হাদীসটি কেউ সহীহ বললে তা গ্রহণযোগ্য নয়।