সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ
` إن الرزق لا تنقصه المعصية ولا تزيده الحسنة، وترك الدعاء معصية `.
موضوع.
أخرجه الطبراني في ` الصغير ` (ص 147) وابن عدي في ` الكامل ` (11 / 2) من طريق إسماعيل بن يحيى التيمي عن مسعر بن كدام عن عطية عن أبي سعيد مرفوعا.
وهذا إسناد موضوع، إسماعيل هذا كذاب كما قال أبو علي النيسابوري والدارقطني والحاكم، وقال ابن عدي: عامة ما يرويه بواطيل، وعطية العوفي ضعيف وقد مضى له حديث رقم (24) .
وقال المناوي في ` شرح الجامع `: قال الهيثمي: وفيه عطية العوفي ضعيف، قال السخاوي: سنده ضعيف.
وقد ذهلوا جميعا عن علة الحديث الحقيقية، وإلا لما جاز تعصيب الجناية برأس عطية دون إسماعيل الكذاب! ولعله لذلك أورده السيوطي في ` الجامع `.
ثم إن مما يدل على بطلان الحديث قوله صلى الله عليه وسلم: ` من أحب أن يبسط له في رزقه وأن ينسأ له في أثره فليصل رحمه `، رواه الشيخان وغيرهما، وهو مخرج في ` صحيح أبي داود ` (1486) .
فهذا يدل على أن الحسنة سبب في زيادة الرزق كما أنها سبب في إطالة العمر، ولا تعارض عند التحقيق بين هذا وبين قوله تعالى {فإذا جاء أجلهم لا يستأخرون ساعة ولا يستقدمون} ولبسط هذا موضع آخر.
১৮১। অবাধ্যতা রিযক কমিয়ে দেয় না এবং তাকে (রিযককে) সৎকর্ম বৃদ্ধিও করে না। আর দো’আ ছেড়ে দেয়া হচ্ছে নাফারমানী (অবাধ্যতা)।
হাদীসটি জাল।
হাদীসটি তাবরানী “মুজামুস সাগীর” গ্রন্থে (পৃঃ ১৪৭) এবং ইবনু আদী “আল-কামিল” গ্রন্থে (১১/২) ইসমাঈল ইবনু ইয়াহইয়া আত-তাইনী সূত্রে ... উল্লেখ করেছেন। এ সনদটি জাল এ ইসমাঈল মিথ্যুক হওয়ার কারণে, যেমনভাবে আবু আলী আন-নাইসাপুরী, দারাকুতনী ও হাকিম বলেছেন। ইবনু আদী বলেনঃ তিনি যা কিছু বর্ণনা করেছেন তার সবই বাতিল। এছাড়া আতিয়া আল-আওফী দুর্বল। তার সম্পর্কে ২৪ নং হাদীসে আলোচনা করা হয়েছে।
মানবী “জামেউস সাগীর`-এর শারাহর মধ্যে বলেন, হায়সামী বলেছেনঃ আওফী দুর্বল। সাখাবী বলেনঃ এটির সনদ দুর্বল। কিন্তু হাদীসটির মূল কারণ উদঘাটন করতে তারা সকলে ভুলে গেছেন। সেটি হচ্ছে ইসমাঈলের মিথ্যুক হওয়া। এ কারণেই সম্ভবত সুয়ূতী “জামেউস সাগীর` গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন।
এছাড়া হাদীসটি বাতিল হওয়ার প্রমাণ বহন করছে রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিম্নের সহীহ হাদীসটি। যেটিকে বুখারী ও মুসলিম বর্ণনা করেছেন।
من أحب أن يبسط له في رزقه وأن ينسأ له في أثره فليصل رحمه
অর্থঃ যে ব্যক্তি তার রিযক বৃদ্ধি করা ও তার হায়াত বৃদ্ধি পাওয়াকে ভালবাসে, সে যেন আত্মীয়দের সাথে সম্পর্ক বজায় রাখে।
` خيركم المدافع عن عشيرته ما لم يأثم `.
موضوع.
أخرجه أبو داود (رقم 5120) من طريق أيوب بن سويد عن أسامة بن زيد أنه سمع سعيد بن المسيب يحدث عن سراقة بن مالك بن جعشم المدلجي قال: خطبنا رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال: فذكره.
قلت: وهذا سند ضعيف جدا من أجل أيوب بن سويد ضعفه أحمد وأبو داود وغيرهما.
وقال النسائي: ليس بثقة، وقال ابن أبي حاتم في ` العلل ` (2 / 231) :
سمعت أبي قال: أول ما أنكرنا على أيوب بن سويد حديث أسامة بن زيد عن
سعيد بن المسيب عن سراقة بن مالك (فذكر هذا الحديث) ، وما أعلم أسامة روى عن سعيد بن المسيب شيئا، وقال في موضع آخر (2 / 209) : قال أبي: كنت أسمع منذ حين يذكر عن يحيى بن معين أنه سئل عن أيوب بن سويد فقال: ليس بشيء، وسعيد بن المسيب عن سراقة لا يجيء، وهذا حديث موضوع، بابه حديث الواقدي.
والحديث أعله المنذري في ` مختصر السنن ` (8 / 18) بأيوب بن سويد، وبالانقطاع بين سعيد بن المسيب وسراقة، وذهل المناوي في ` شرح الجامع الصغير ` عن الانقطاع فأعله بأيوب فقط؟
وأورده الهيثمي في ` المجمع ` (8 / 110) من حديث خالد بن عبد الله بن حرملة المدلجي ثم قال: رواه الطبراني وفيه من لم أعرفهم.
والذي تقتضيه الصناعة الحديثية أن الحديث ضعيف جدا، لولا حكم أبي حاتم بوضعه فإنه إمام حجة، والله أعلم.
১৮২। তোমাদের সেই সর্বোত্তম ব্যাক্তি যে, তার নিজ বংশের পক্ষে অন্যকে প্রতিরোধ করে, তবে যতক্ষণ পর্যন্ত সে গুনাহ না করবে।
হাদীসটি জাল।
এটি আবু দাউদ (নং ৫১২০) আইউব ইবনু সুওয়াইদ সূত্রে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ আইউব ইবনু সুওয়াইদ-এর কারণে এটির সনদটি নিতান্তই দুর্বল। তাকে আহমাদ, আবু দাউদ প্রমুখ দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন।
নাসাঈ বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্য নন।
ইবনু আবী হাতিম “আল-ইলাল” গ্রন্থে (২/২৩১) বলেনঃ আমি আমার পিতাকে বলতে শুনেছিঃ আইউব ইবনু সুওয়াইদ এর প্রথম যে বস্তুটি আমরা ইনকার করি সেটি হচ্ছে সাঈদ ইবনু মুসাইয়াব হতে উসামা ইবনুয়ায়েদ সূত্রের এ হাদীসটি। উসামা সা'ঈদ হতে কিছু বর্ণনা করেছেন বলে আমি জানিনা।
তিনি অন্যত্র (২/২০৯) বলেনঃ ইবনু মাঈনকে এ আইউব সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করা হয়েছিল। তিনি বলেন তিনি কিছুই না। সাঈদ ইবনু মুয়াইয়্যার সুরাকা হতে কিছু বর্ণনা করেননি। এ হাদীসটি জাল, এর দরজা হচ্ছে ওয়াকেদীর হাদিস।
মুনযেরী `মুখতাসারুস সুনান` গ্রন্থে (৮/১৮) আইউব ইবনু সুওয়াইদকে এবং সনদের মধ্যে সাঈদ এবং সুরাকার মধ্যে ইনকিতা' (বিচ্ছিন্নতা) হওয়াকে হাদীসটিৱ সমস্যা হিসাবে চিহ্নিত করেছেন। কিন্তু মানবী শুধুমাত্র আইউব ইবনু সুওয়াইদকে দুর্বলতার কারণ হিসাবে উল্লেখ করেছেন।
` لا صلاة لجار المسجد إلا في المسجد `.
ضعيف.
أخرجه الدارقطني (ص 161) والحاكم (1 / 246) والبيهقي (3 / 57) من طريق سليمان بن داود اليمامي عن يحيى بن أبي كثير عن أبي سلمة عن أبي هريرة مرفوعا، سكت عنه الحاكم! وقال البيهقي: وهو ضعيف.
قلت: وعلته سليمان هذا فإنه ضعيف جدا، قال ابن معين: ليس بشيء.
وقال البخاري: منكر الحديث، قال الذهبي: قال البخاري: من قلت فيه منكر الحديث فلا تحل رواية حديثه.
ثم أخرجه الدارقطني من طريق محمد بن سكين الشقري المؤذن، أنبأنا عبد الله بن بكير الغنوي، عن محمد بن سوقة عن محمد بن المنكدر عن جابر مرفوعا به، وفي لفظ عنده: ` لا صلاة لمن سمع النداء ثم لم يأت إلا من علة `.
وهذا سند ضعيف من أجل محمد بن سكين، أورده ابن أبي حاتم في ` الجرح والتعديل ` (3 / 2 / 283) وساق له هذا الحديث باللفظ الثاني ثم قال: سمعت أبي يقول: هو مجهول، والحديث منكر، وقال الذهبي في ` الميزان `: لا يعرف وخبره منكر، ثم ساق له هذا الحديث باللفظ الأول، ثم قال: قال الدارقطني:
هو ضعيف.
ورواه أحمد في ` مسائل ابنه صالح ` (ص 56) بسند صحيح عن أبي حيان التيمي عن أبيه عن علي به موقوفا عليه، وزاد قيل: ومن جار المسجد؟ قال: ` من سمع النداء `، ثم رواه من طريق أبي إسحاق عن الحارث عنه دون الزيادة.
والحديث أخرجه العقيلي في ` الضعفاء ` من هذا الوجه باللفظ الثاني ثم قال:
وهذا يروى من وجه آخر صالح.
قلت: يشير إلى حديث ابن عباس مرفوعا:
` من سمع النداء فلم يأته فلا صلاة له إلا من عذر `.
أخرجه أبو داود وابن ماجه والدارقطني والحاكم والبيهقي، وسند ابن ماجه وغيره صحيح، وقد صححه النووي والعسقلاني والذهبي ومن قبلهم الحاكم، وهو مخرج تخريجا دقيقا في ` الإرواء ` (551) .
وأما قول مؤلف كتاب ` التاج الجامع للأصول ` (1 / 268) : رواه أبو داود وابن ماجه بسند ضعيف.
فمن تخليطاته وأخطائه الكثيرة التي بينتها في ` نقد التاج ` (رقم 180) ، ثم إن الحديث بلفظه الأول أورده الصغاني في ` الأحاديث الموضوعة ` (ص 6) وكذا ابن الجوزي أورده في ` الموضوعات ` (2 / 93) من طريق صالح كاتب الليث: حدثنا عمر بن راشد عن ابن أبي ذئب عن الزهري عن عروة عن عائشة مرفوعا به، وقال: قال ابن حبان: عمر لا يحل ذكره إلا بالقدح، وتعقبه السيوطي في ` اللآليء ` (2 / 16) بقوله: قلت: قد وثقه العجلي وغيره، وروى له الترمذي وابن ماجه، وله طرق أخر عن جابر وأبي هريرة وعلي.
ثم ذكر ما تقدم من حديث جابر وأبي هريرة، وأما حديث علي فموقوف أخرجه البيهقي وأحمد كما تقدم من طريق أبي حيان عن أبيه عن علي موقوفا.
وهذا سند ضعيف أيضا والد أبي حيان اسمه سعيد بن حيان، قال الذهبي: لا يكاد يعرف، وقال ابن القطان: إنه مجهول.
مع أن ابن حبان والعجلي وثقاه!
فكأنهما لم يعتدا بتوثيقها، كما فعل الذهبي في ` الميزان ` على ما بينته في ` تيسير الانتفاع ` نفعنا الله به وإياك.
تنبيه: عمر بن راشد الذي طعن فيه ابن حبان ووثقه العجلي هو أبو حفص اليمامي ومن طبقته راوآخر، وهو عمر بن راشد الجاري المصري، وأنا أرجح أنه راوي الحديث لأمرين، الأول: أن راويه عنه صالح كاتب الليث مصري، والآخر: أن شيخه فيه ابن أبي ذئب، وهذا ذكروه في شيوخه لا في شيوخ اليمامي، فإذا صح هذا فهو أشد ضعفا من الأول فإنه متفق على تضعيفه، وقال الدارقطني: كان يتهم بوضع الحديث على الثقات.
ولكن مجيء الحديث من الطرق التي أوردنا يخرجه عن كونه موضوعا إلى درجة الضعيف وأما قول المناوي: ومن شواهده حديث الشيخين: ` من سمع النداء فلم يجب فلا صلاة له إلا من عذر `، ففيه نظر من وجهين: الأول: أنه لا يصلح شاهدا لحديث الباب لأنه أخص منه فإنه يفيد أن جار المسجد ينبغي أن يصلي في مسجده الذي هو جاره فإن صلى في غيره فلا صلاة له وهذا ما لا يفيده الشاهد المذكور كما لا يخفى، وهذا فرق جوهري بين الحديث الضعيف والحديث الصحيح.
الآخر: أن عزو الحديث للشيخين خطأ بين كما يشعر به تخريجنا المتقدم له.
وبالجملة فالحديث بلفظه الأول ضعيف لا حجة فيه، وبلفظه الثاني صحيح لشاهده المتقدم.
১৮৩। মসজিদ ছাড়া মসজিদের প্রতিবেশীর সালাত (নামায/নামাজ) হবে না।
হাদীসটি দুর্বল।
এটি দারাকুতনী (পৃঃ ১৬১), হাকিম (১/২৪৬) ও বাইহাকী (৩/৫৭) সুলায়মান ইবনু দাউদ আল-ইয়ামামী সূত্রে ... বর্ণনা করেছেন। হাদীসটির সমস্যা হচ্ছে এ সুলায়মান, কারণ তিনি নিতান্তই দুর্বল। তার সম্পর্কে ইবনু মাঈন বলেনঃ তিনি কিছুই না। ইমাম বুখারী বলেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীস। যাহাবী বলেন, ইমাম বুখারী বলেছেনঃ যার সম্পর্কে আমি মুনকারুল হাদীস বলেছি তার হাদীস বর্ণনা করা হালাল নয়।
হাদীসটি সাগানী তার “আল-মাওযুআহ” গ্রন্থে (পৃঃ ৬) এবং ইবনুল জাওযী তার “আল-মাওযুআত” গ্রন্থে (২/৯৩) উল্লেখ করেছেন।
দারাকুতনী মুহাম্মাদ ইবনু সিক্কীন আশ-শাকারী সুত্রে হাদিসটি উল্লেখ করেছেন। কিন্তু এ মুহাম্মাদের কারণে হাদীসটি দুর্বল। কেননা তার সম্পর্কে আবূ হাতিম “আল-জারহু ওয়াত-তাদীল” গ্রন্থে (৩/২/২৮৩) বলেনঃ তিনি মাজহুল (অপরিচিত), তার হাদীসটি মুনকার।
যাহাবী বলেনঃ তাকে চেনা যায় না, তার খবর হচ্ছে মুনকার।
দারাকুতনী তার হাদীসকে দুর্বল বলেছেন।
এছাড় হাদীসটি অন্যান্য সনদেও বর্ণিত হয়েছে কিন্তু কোনটিই দুৰ্বলতার সমস্যা হতে মুক্ত নয়।
` إذا دخلتم على المريض فنفسوا له في أجله فإن ذلك لا يرد شيئا ويطيب نفسه `.
ضعيف جدا.
أخرجه الترمذي (3 / 177) وابن ماجه (1 / 439) وابن عدي (324 / 2) من طريق موسى بن محمد بن إبراهيم التيمي عن أبيه عن أبي سعيد الخدري مرفوعا.
وضعفه الترمذي بقوله: هذا حديث غريب.
قلت: وعلته موسى هذا وقد أخرج له ابن الجوزي في ` موضوعاته `، وأقره السيوطي كما تقدم في الحديث (رقم 112) ، وقد ساق له الذهبي في ترجمته منكرات هذا أحدها، ونقل المناوي عن النووي أنه قال في ` الأذكار `: إسناده ضعيف، وعن ابن الجوزي قال: حديث لا يصح، وهو في كتابه ` العلل المتناهية ` (2 /388) .
قلت: وفيه أحاديث هي من حق كتابه الآخر ` الموضوعات `، وعلى العكس، انظر الحديثين الآتيين بعده.
وقال الحافظ في ` الفتح `: في سنده لين
وكذا قال في ` بذل الماعون ` (2 / 2 من الكراس 11) .
قلت: وفي ` العلل ` لابن أبي حاتم (2 / 241) : سألت أبي عن هذا الحديث؟
فقال: هذا حديث منكر، كأنه موضوع، وموسى ضعيف الحديث جدا.
১৮৪। তোমরা যখন রোগীর নিকট প্রবেশ করবে, তখন তাকে তার মৃত্যুর ব্যাপারে সান্ত্বনা দাও। কারন তা তার কিছুই প্রতিরোধ করবে না। তবে তা তার হৃদয়ে প্রশান্তি এনে দিবে।
হাদীসটি নিতান্তই দুর্বল।
এটি ইমাম তিরমিযী (৩/১৭৭), ইবনু মাজাহ (১/৪৩৯) ও ইবনু আদী (২/৩২৪) মূসা ইবনু মুহাম্মাদ ইবনে ইবরাহীম আত-তাইমী সুত্রে ... বর্ণনা করেছেন। `এটি গরীব` তিরমিযী তার এ কথা দ্বারা বুঝিয়েছেন হাদীসটি দুর্বল।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এর সমস্যা ইচ্ছে ঐ মূসা ইবনুল জাওযী তার হাদিসকে `আল-মাওযু'আত` গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন এবং সুয়ূতী তাকে সমর্থন করেছেন, যেমনভাবে ১১২ নাম্বার হাদীসে আলোচিত হয়েছে। যাহাবী তার জীবনী আলোচনা করার সময় তার মুনকারগুলো উল্লেখ করেছেন, এটি সেগুলোর একটি।
মানবী ইমাম নাবাবী হতে নকল করেছেন, তিনি তার “আল-আযকার” গ্রন্থে বলেনঃ এটির সনদ দুর্বল।
ইবনুল জাওযী তার `ইলালুল মুতানাহিয়া` গ্রন্থে (২/৩৮৮) বলেনঃ হাদিসটি সহীহ নয়। হাফিয ইবনু হাজার বলেনঃ তার সনদে দুর্বলতা রয়েছে।
ইবনু আবী হাতিম `আল-ইলাল` গ্রন্থে (২/২৪১) বলেছেনঃ আমি আমার পিতাকে এ হাদিসটি সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করেছিলাম। তিনি উত্তরে বলেনঃ এটি মুনকার হাদিস, এটি যেন বানোয়াট, মূসা নিতান্তই দুর্বল।
` الحمد لله، دفن البنات من المكرمات `.
موضوع.
أخرجه يعقوب الفسوي في ` المعرفة ` (3 / 159) والطبراني في ` الكبير ` (3 /144 / 2) ` والأوسط ` (1 / 76 / 2) و` مسند الشاميين ` (2408) والبزار (790 - زوائده) وأبو القاسم المهراني في ` الفوائد المنتخبة ` (3 / 26 /1) والخطيب في ` تاريخه ` (5 / 57) والقضاعي في ` مسند الشهاب ` (15 /2) وابن عساكر (1 / 216 و8 / 503 / 1 و11 / 262 / 1 و15 / 159 / 2 و16 /25 / 2) من طريق عراك بن خالد بن يزيد عن عثمان بن عطاء عن أبيه عن عكرمة عن ابن عباس قال: لما عزي رسول الله صلى الله عليه وسلم على رقية امرأة عثمان ابن عفان قال: فذكره، وقال الطبراني: لا يروى عن النبي صلى الله عليه وسلم إلا بهذا الإسناد، وقال المهراني: غريب تفرد به عثمان بن عطاء، وهذا أولى من قول الطبراني المذكور فإنه مردود برواية ابن عدي إياه في ` الكامل ` (300 /1) من طريق محمد بن عبد الرحمن بن طلحة القرشي حدثنا عثمان بن عطاء به، وأورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (3 / 236) وقال: لا يصح، عثمان ضعيف وأبوه رديء الحفظ، وعراك ليس بالقوي، ومحمد
بن عبد الرحمن ضعيف يسرق الحديث، قال: وسمعت شيخنا عبد الوهاب بن الأنماطي الحافظ يحلف بالله عز وجل
أنه ما قال رسول الله صلى الله عليه وسلم من هذا شيئا قط، وأقره السيوطي في ` اللآليء ` (2 / 438) ، ومع هذا فقد أورده في ` الجامع الصغير ` وتعقبه شارحه المناوي بما ذكرناه من الإقرار، ثم تناقض، فقال في ` التيسير `:
إسناده ضعيف، والحديث أورده الصغاني أيضا في الموضوعات ` (ص 8) ، وقد روي عن ابن عمر وهو:
১৮৫। আল-হামদুলিল্লাহ, মেয়েদের দাফন করা সন্মানজনক কর্ম সমূহের অন্তর্ভুক্ত।
হাদীসটি জাল।
এটি ইয়াকূব আল-ফাসাবী `আল-মা'রিফাহ` (৩/১৫৯) গ্রন্থে, তাবারানী `আল-মু'জামুল কাবীর` (৩/১৪৪/২), `আল-আওসাত` গ্রন্থে (১/৭৬২) ও `মুসনাদুশ শামেয়ীন` (২৪০৮) গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন। এছাড়া বাযযার আবুল কাশিম আল-মেহরানী, খতীব বাগদাদী, কাযা'ঈ এবং ইবনু আসাকিরও আরাক ইবনু খালিদ ইবনে ইয়াযীদ সুত্রে উসমান ইবনু আতা হতে ... বর্ণনা করেছেন।
তাবারানী বলেনঃ নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে এ সনদ ছাড়া অন্য কোন সনদে হাদীসটি বর্ণনা করা হয়নি। মেহরানী বলেনঃ এটি গারীব। উসমান ইবনু আতা এটিকে এককভাবে বর্ণনা করেছেন। ইবনুল জাওয হাদীসটি “আল-মাওযু আত” গ্রন্থে (৩/২৩৬) উল্লেখ করে বলেছেনঃ এটি সহীহ নয়। উসমান দুর্বল। তার পিতা হেফযের দিক দিয়ে নিম্নমানের। আরাক ইবনু খালিদ শক্তিশালী নন। মুহাম্মাদ ইবনু আব্দির রহমান আল-কুরাশী দুর্বল, তিনি হাদীস চুরি করতেন। তিনি আরো বলেনঃ আমি আমার শাইখ আব্দুল ওয়াহাব ইবনু আনমাতী হতে শুনেছি; তিনি আল্লাহর নামে কসম করে বলেনঃ এ সংক্রান্ত বিষয়ে রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম কখনও কিছুই বলেননি।
সুয়ূতী তার (ইবনুল জাওযীর) এ বক্তব্যকে “আল-লাআলী” গ্রন্থে (২/৪৩৮) সমর্থন করেছেন। তা সত্ত্বেও তিনি “জামেউস সাগীর” গ্রন্থে হাদীসটি উল্লেখ করেছেন। এ কারণে `জামেউস সাগীর”-এর ভাষ্যকার মানবী তার সমালোচনা করেছেন।
সাগানী হাদীসটি তার “আল-মাওযুআত” গ্রন্থে (পৃঃ ৮) উল্লেখ করেছেন।
` دفن البنات من المكرمات `.
موضوع.
أخرجه ابن عدي في ` الكامل ` (80 / 2) والخطيب (7 / 291) عن حميد بن حماد عن مسعر بن كدام عن عبد الله بن دينار عن ابن عمر مرفوعا به.
قلت: وهذا سند ضعيف حميد بن حماد قال ابن عدي: يحدث عن الثقات بالمناكير والحديث غير محفوظ، وقال أبو داود: ضعيف، وبه أعله ابن الجوزي فأورد الحديث في ` الموضوعات ` (3 / 235) من هذا الوجه ثم قال: لا يصح، حميد يحدث عن الثقات بالمناكير، وأقره السيوطي في ` اللآليء ` كالحديث الذي قبله، ومع هذا أورده أيضا في ` الجامع الصغير `! وتعقبه المناوي أيضا بما سبق عن ابن عدي وقال:
وحكم ابن الجوزي بوضعه وأقره عليه الذهبي والمؤلف في ` مختصر الموضوعات `.
ثم تناقض المناوي أيضا، فقال: إسناده ضعيف.
১৮৬। মেয়েদের দাফন করা সন্মানজনক কর্ম সমূহের অন্তর্ভুক্ত।
হাদীসটি জাল।
এটি ইবনু আদী “আল-কামিল” গ্রন্থে (২/৮০) এবং খাতীব বাগদাদী (৭/২৯১) হুমায়েদ ইবনু হাম্মাদ সূত্রে ... উল্লেখ করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এটির সনদ দুর্বল। হুমায়েদ ইবনু হাম্মাদ সম্পর্কে ইবনু আদী বলেনঃ তিনি নির্ভরশীলদের উদ্ধৃতিতে মুনকার হাদীস বর্ণনা করতেন। হাদীসটি নিরাপদ নয়। আবু দাউদ বলেনঃ এটি দুর্বল। ইবনুল জাওযী হাদীসটির এ কারণই বর্ণনা করেছেন। তিনি এটিকে তার “আল-মাওযূ’আত” গ্রন্থে (৩/২৩৫) উল্লেখ করে বলেছেনঃ হুমায়েদ নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে মুনকার হাদীস বর্ণনা করতেন।
সুয়ূতী তার (ইবনুল জাওযীর) এ বক্তব্যকে “আল-লাআলী” গ্রন্থে (২/৪৩৮) সমর্থন করেছেন। তা সত্ত্বেও তিনি “জামেউস সাগীর” গ্রন্থে হাদীসটি উল্লেখ করেছেন। এ কারণে ইবনু আদীর কথা উল্লেখ করার মাধ্যমে মানবী তার সমালোচনা করে বলেছেনঃ ইবনুল জাওযী এটিকে জাল হিসাবে হুকুম লাগিয়েছেন। যাহাবী এবং লেখক (সুয়ূতী) তার এ কথাকে সমর্থন করেছেন।
` إن الله تعالى ينزل على أهل هذا المسجد - مسجد مكة - في كل يوم وليلة عشرين ومئة رحمة: ستين للطائفين، وأربعين للمصلين، وعشرين للناظرين `.
ضعيف.
رواه الطبراني في ` الأوسط ` (1 / 123 / 2) و` الكبير ` (11475) ووقع عنده يوسف بن الفيض، وابن عساكر (9 / 476 / 2) والضياء في ` المنتقى من مسموعاته بمرو` عن عبد الرحمن بن السفر الدمشقي حدثنا الأوزاعي عن عطاء حدثني ابن عباس مرفوعا، وعزاه السيوطي في ` الجامع الصغير ` للحاكم أيضا في ` الكنى ` وابن عساكر، وقال الطبراني: لم يروه عن الأوزاعي إلا ابن السفر.
قلت: وهو كذاب يضع الحديث كما يأتي، قال المناوي في ` شرح الجامع ` بعد أن عزاه للخطيب أيضا في ` التاريخ ` والبيهقي في ` الشعب `: ظاهر صنيع المصنف أن ابن عساكر خرجه وسكت عليه، والأمر بخلافه، فإنه أورده في ترجمة عبد الرحمن ابن السفر من حديثه، ونقل عن ابن منده أنه متروك، وتبعه الذهبي، وقال ابن الجوزي في ` العلل المتناهية ` (2 / 82 - 83) :
حديث لا يصح، تفرد به يوسف بن السفر وهو كما قال الدارقطني والنسائي: متروك، وقال الدارقطني:
يكذب، وابن حبان: لا يحل الاحتجاج به وقال يحيى: ليس بشيء.
ومنه أخذ الهيثمي (3 / 292) قوله بعد ما عزاه الطبراني: فيه يوسف بن السفر وهو متروك.
قلت: ويقال فيه ابن الفيض وهكذا رواه ابن حبان في ` الضعفاء ` (3 / 136 - 137) وأبو نعيم في ` أخبار أصبهان ` (1 / 116 و307) ، وقال ابن حبان:
يوسف بن الفيض يروي عن الأوزاعي المناكير الكثيرة والأوهام الفاحشة، كأنه كان يعملها تعمدا.
وأورده ابن أبي حاتم في ` العلل ` (1 / 287) بسنده هذا وقال: سألت أبي عنه فقال: هذا حديث منكر، ويوسف ضعيف الحديث شبه المتروك، وفيه يقول ابن عدي:
روى بواطيل، والبيهقي: هو في عداد من يضع الحديث ذكره الذهبي في ` الميزان ` ثم ساق له أحاديث هذا أحدها، وهو عبد الرحمن بن السفر المتقدم في كلام المناوي، قال ابن حجر في ترجمته من ` اللسان `: كذا سماه بعضهم والصواب يوسف ابن السفر متروك، وذكره البخاري فقال: عبد الرحمن بن السفر روى حديثا موضوعا.
قلت: وكما ذكره البخاري رواه الطبراني في ` الكبير ` (3 / 123 / 1) ، وعلى
الصواب رواه ابن الأعرابي في ` معجمه ` (185 / 2) ، ثم رواه من حديث عبد الله ابن عمرو بن العاص موقوفا عليه وفي سنده جعفر بن محمد الأنطاكي، قال الذهبي:
ليس بثقة وله خبر باطل.
قلت: وسيأتي هذا الخبر بلفظ: ` يبعث معاوية عليه رداء من نور `.
وأما قول المنذري في ` الترغيب ` (2 / 121) : رواه البيهقي بإسناد حسن فهو فيما أظن من تساهله أو أوهامه، ثم وجدت للحديث طريقا أخرى عن ابن جريج فقال الأزرقي في ` أخبار مكة ` (256) حدثني جدي عن سعيد بن سالم وسليم بن مسلم عن ابن جريج به، وهذا إسناد لا بأس به إلى ابن جريج فإن جد الأزرقي ثقة، واسمه أحمد بن محمد بن الوليد، وسعيد بن سالم هو القداح، قال الحافظ في ` التقريب `: صدوق يهم.
وأما قرينه سليم بن مسلم فهو الخشاب وهو متروك فلا يعتد به والعمدة على القداح، فلولا عنعنة ابن جريج فإنه مدلس، لحكمت على هذا السند بأنه حسن، ولفظ هذه الرواية مثل لفظ حديث الترجمة.
ثم رأيت الحديث رواه الحارث بن أبي أسامة في ` مسنده ` (96 - من زوائده) وابن حبان في ` الضعفاء ` (1 / 321) وعنه ابن الجوزي، وقال ابن حبان: قد تبرأنا من عهدة سالم، وتابعه إبراهيم بن يزيد الخوزي وهو متروك متهم رواه الأصبهاني في ` الترغيب ` (1 / 444) من طريق أخرى عن سعيد به مثله، ثم صدق ظني حين رأيت الحديث في ` شعب الإيمان / الحج ` للبيهقي (ق
66 / 1) رواه من طريق النيسابوري باللفظ الآتي بعده وعلقه من طريق يوسف بن السفر وقال: وهو ضعيف.
والحديث في ` المعجم الكبير ` من طريق أخرى فيه كذاب آخر بلفظ مغاير لهذا بعض الشيء وسيأتي إن شاء الله تعالى برقم (6245) ، وأما الخطيب فرواه من طريق يوسف هذا في ` الموضح ` (2 / 255) وقال: تفرد به أبو الفيض يوسف بن السفر عن الأوزاعي، ورواه في غيره من طريق آخر بلفظ:
১৮৭। নিশ্চয় আল্লাহ তা’আলা এ মসজিদের (মক্কার মসজিদ) অধিবাসীদের জন্য প্র্যত্যেক দিনে ও রাতে একশত বিশটি রহমত নাযিল করেন। ষাটটি তাওয়াফ কারীদের জন্য, চল্লিশটি সালাত (নামায/নামাজ) আদায়কারীদের জন্য আর বিশটি দৃষ্টিদান কারীদের জন্য।
হাদীসটি য’ঈফ।
এটি তাবারানী “আল-আওসাত” (১/১২৩/২) ও “আল-কাবীর” গ্রন্থে (১১৪৭৫) ইউসুফ ইবনু ফায়েয হতে বর্ণনা করেছেন। এছাড়া ইবনু আসাকির (৯/৪৭৬/২) ও যিয়া “আল-মুনতাকা মিন মাসমূ'আতিহী বিমারু” গ্রন্থে হাদীসটি আব্দুর রহমান ইবনু সাফর আদ-দামেস্ক হতে ... বর্ণনা করেছেন।
এ হাদীসটি সম্পর্কে তাবারানী বলেনঃ এটি আওযাঈ হতে ইবনুস সাফর ব্যতীত অন্য কেউ বর্ণনা করেননি।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তিনি মিথ্যুক, হাদীস জাল করতেন। ইবনু আসাকির আব্দুর রহমান ইবনুস সাফরের জীবনী বর্ণনা করতে গিয়ে হাদীসটি উল্লেখ করে ইবনু মান্দার উদ্ধৃতিতে বলেছেন যে, তিনি (আব্দুর রহমান) মাতরূক [অগ্রহণযোগ্য]। যাহাবীও তার অনুসরণ করেছেন।
ইবনুল জাওযী “ইলালুল মুতানাহিয়া” গ্রন্থে (২/৮২-৮৩) বলেছেনঃ হাদীসটি সহীহ নয়। কারণ ইউসুফ ইবনুস সাফর এককভাবে এটি বর্ণনা করেছেন। তিনি মাতরূক, যেমনভাবে দারাকুতনী ও নাসাঈ বলেছেন। দারাকুতনী বলেনঃ তিনি মিথ্যা বলতেন। ইবনু হিব্বান বলেনঃ তার দ্বারা হাদীস গ্রহণ করা হালাল নয়। ইয়াহইয়া বলেনঃ তিনি কিছুই না। হায়সামীও তাকে মাতরূক হিসাবে উল্লেখ করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তাকে বলা হয় ইবনুল ফায়েয। ইবনু হিব্বান “আয-যুয়াফা” গ্রন্থে (৩/১৩৬-১৩৭) ও আবু নু’য়াইম “আখবারু আসবাহান” গ্রন্থে (১/১১৬, ৩০৭) এরূপ বর্ণনা করেছেন। অতঃপর ইবনু হিব্বান বলেছেনঃ ইউসুফ ইবনু ফায়েয আওযাঈ হতে বহু মুনকার হাদীস বর্ণনা করেছেন। তিনি যেন তা ইচ্ছাকৃতই করতেন।
ইবনু আবী হাতিম `আল-ইলাল` গ্রন্থে (১/২৮৭) বলেনঃ আমি আমার পিতাকে তার সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করেছিলাম? তিনি বলেন এ হাদীসটি মুনকার, ইউসুফ হাদীসের ক্ষেত্রে দুর্বল, মাতরুকের ন্যায়।
তার সম্পর্কে ইবনু আদী বলেন তিনি বহু বাতিল হাদীস বর্ণনা করেছেন। বাইহাকী বলেনঃ তাকে হাদীস জলকারীদের মধ্যে গণ্য করা হয়েছে।
যাহাবী `আল-মীযান` গ্রন্থে বলেনঃ তিনিই হচ্ছেন আব্দুর রহমান ইবনুস সাফর।
ইবনু হাজার `আল-লিসান` গ্রন্থে বলেনঃ কেউ কেউ তার নাম এমনই রেখেছেন। সঠিক নাম হচ্ছে ইউসুফ ইবনুস সাফর। তিনি মাতরুক। তাকে ইমাম বুখারী উল্লেখ করে বলেছেনঃ তিনি আবদুর রহমান ইবনুস সাফর, তিনি জাল হাদিস বর্ণনা করেছেন।
এছাড়া যে সব সনদে হাদিসটি বর্ণিত হয়েছে, সেগুলো কোনটিই সহীহ নয়।
` إن الله تعالى ينزل في كل يوم مئة رحمة: ستين منها على الطائفين بالبيت، وعشرين على أهل مكة، وعشرين على سائر الناس `.
ضعيف.
أخرجه ابن عدي (314 / 1) والخطيب في ` تاريخه ` (6 / 27) والبيهقي (3 /454 - 455) من طريق محمد بن معاوية النيسابوري حدثنا محمد بن صفوان عن ابن جريج عن عطاء ابن عباس مرفوعا، وقال ابن عدي: وهذا منكر، وروي عن الأوزاعي عن عطاء عن ابن عباس رواه عنه يوسف بن السفر وهو ضعيف.
قلت: وابن معاوية هذا قال ابن معين والدارقطني: كذاب، زاد الثاني: يضع الحديث، وساق الذهبي في ترجمته هذا الحديث.
১৮৮। নিশ্চয় আল্লাহ তা’আলা প্রতি দিন একশত রহমত নাযিল করেন। তার ষাটটি বায়তুল্লাহকে তাওয়াফ কারীদের জন্য, বিশটি মক্কাবাসীদের জন্য এবং বিশটি সকল মানুষের জন্য।
হাদীসটি দুর্বল।
এটিকে ইবনু আদী (১/৩১৪), খাতীব বাগদাদী, তার; আত-তারীখ` গ্রন্থে (৬/২৭) ও বাইহাকী (৩/৪৫৪-৪৫৫) মুহাম্মদ ইবনু মুয়াবিয়া সূত্র ... উল্লেখ করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ ইবনু মুয়াবিয়া সম্পর্কে ইবনু মাঈন ও দারাকুতনী বলেনঃ তিনি মিথ্যুক। দারাকুতনী আরো বলেনঃ তিনি হাদীস জাল করতেন। যাহাবী তার জীবনীতে এ হাদিসটি উল্লেখ করেছেন।
` إياكم والجلوس في الشمس فإنها تبلي الثوب وتنتن الريح وتظهر الداء الدفين `.
موضوع.
أخرجه الحاكم في ` المستدرك ` (4 / 411) من طريق محمد بن زياد الطحان حدثنا ميمون بن مهران عن ابن عباس مرفوعا، وسكت عليه الحاكم وتعقبه الذهبي بقوله: قلت: ذا من وضع الطحان.
قلت: ومع هذا أورده السيوطي في ` الجامع الصغير ` فتعقبه المناوي بكلام الذهبي هذا، ثم قال المناوي: فكان ينبغي للمصنف حذفه.
১৮৯। তোমরা তোমাদেরকে সূর্যের মাঝে বসা হতে রক্ষা কর। কারন সে কাপড়কে পুরাতন করে দেয়, বাতাসকে দুর্গন্ধযুক্ত করে দেয় এবং লুক্কায়িত রোগকে প্রকাশ করে দেয়।
হাদীসটি জাল।
এটিকে হাকিম আল-মুসতাদরাক গ্রন্থে (৪/৪১১) মুহাম্মাদ ইবনু যিয়াদ আত-তাহান সুত্রে উল্লেখ করেছেন। হাকিম হাদিসটির উপর হুকুম লাগানো হতে চুপ থেকেছেন। যাহাবী তার সমালোচনা করে বলেছেনঃ এটি তাহান কর্তৃক জালকৃত।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তা সত্ত্বেও সুয়ূতী হাদিসটিকে `জামে'উস সাগীর` গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন। এ কারণে মানবী যাহাবীর এ কথা দ্বারা তার সমালোচনা করেছেন। অতঃপর মানবী বলেছেনঃ লেখকের উচিত ছিল এটিকে মুছে ফেলা।
` ما من أحد إلا وفي رأسه عرق من الجذام تنعر، فإذا هاج سلط الله عليه الزكام فلا تداووا له `.
موضوع.
أخرجه الحاكم (4 / 411) وكذا القاسم السرقسطي في ` غريب الحديث ` (2 / 154 / 1) من طريق محمد بن يونس القرشي حدثنا بشر بن حجر السلمي، حدثنا فضيل بن عياض عن ليث عن مجاهد عن ابن عباس عن عائشة مرفوعا، وسكت عليه الحاكم، وتعقبه الذهبي بقوله: قلت: كأنه موضوع فالكديمي متهم.
قلت: وقد أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (3 / 205) بإسناده إلى الكديمي به، ثم قال: لا يصح، محمد بن يونس هو الكديمي يضع الحديث.
وأقره السيوطي في ` اللآليء ` (2 / 402) فإنه لم يتعقبه بشيء إلا أنه ذكر
أن الحاكم أخرجه وأن الذهبي تعقبه بما سبق، ومع هذا أورده في ` الجامع الصغير `! وبذلك تعقبه المناوي في ` شرحيه `، وأخرجه الديلمي (4 / 22) من طريق ابن لال: حدثنا محمد بن أحمد بن منصور حدثنا الحسين بن يوسف الفحام بمصر حدثنا محمد بن سحنون التنوخي حدثنا محمد بن بشر المصري حدثنا أبو معاوية الضرير عن
الأعمش عن زيد بن وهب عن جرير بن عبد الله رفعه.
قلت: وهذا المتهم به عندي محمد بن أحمد بن منصور أو شيخه الفحام، فإن هذا لم أعرفه، ويحتمل أنه الحسين بن يوسف الذي قال ابن عساكر: مجهول، والأول قال الذهبي: روى عن أبي حفص الفلاس خبرا باطلا في لعن الرافضة والجهمية، لا يدرى من هو وكذلك الراوي عنه.
১৯০। প্রত্যেকের মাথায় কুষ্ঠ রোগের ভিত্তি রয়েছে যা (ঘুমন্তাবস্থায়) গড় গড় শব্দ করে। অতঃপর তা যখন অস্থিরতায় ভুগে তখন তার উপর সর্দি চাপিয়ে দেন। অতএব তোমরা তার জন্য ঔষধ ব্যাবহার করো না।
হাদীসটি জাল।
এটিকে হাকিম আল-মুসতাদরাক গ্রন্থে (৪/৪১১), অনুরূপভবে কাসিম আস-সারকাসতী `গারীবুল হাদিস` গ্রন্থে (২/১৫৪/১) মুহাম্মাদ ইবনু ইউনুস কুরাশী সুত্রে বর্ণনা করেছেন। হাকিম হাদিসটির উপর কোন প্রকার হুকিমলাগানো হতে চুপ থেকেছেন।
এ কারণে যাহাবী তার সমালোচনা করে বলেছেন, আমি বলছিঃ সম্ভবত এটি বানোয়াট। কুদায়মী (কুরাশী) মিথ্যার দোষে দোষী।
আমি (আলবানী) বলছিঃ ইবনুল জাওযী হাদীসটিকে `আল-মাওযূ'আত` গ্রন্থে (৩/২০৫) কুদায়মী পর্যন্ত তার সনদে উল্লেখ করে বলেছেনঃ এটি সহীহ্ নয়। মুহাম্মাদ ইবনু ইউনুস হচ্ছেন কুদায়মী; তিনি হাদীস জালকারী।
সুয়ূতী “আল-লাআলী` গ্রন্থে (২/৪০২) তাঁর এ কথাকে সমর্থন করা সত্ত্বেও তিনি হাদীসটি `জামেউস সাগীর` গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন।
হাদিসটি দাইলামী (৪/২২) ইবনু লাল সুত্রে বর্ণনা করেছেন। এ সনদে মুহাম্মাদ ইবনু আহমাদ ইবনু মানসূর রয়েছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ মুহাম্মাদ ইবনু আহমাদ ইবনে মানুসর অথবা তার শাইখ হুসাইন ইবনু ইউসুফ আল-ফাহহাম আমার নিকট মিথ্যার দোষে দোষী। তার এ শাইখকে আমি চিনি না। হতে পারে তিনিই সে ব্যক্তি যাকে ইবনু আসাকির মাজহুল (অপরিচিত) বলেছেন।
যাহাবী বলেনঃ মুহাম্মাদ ইবনু আহমাদ আবূ হাফস ফাল্লাসের উদ্ধৃতিতে রাফেযী এবং জাহমিয়াদের অভিশাপ করতে বাতিল হাদীস বর্ণনা করেছেন। জানা যায় না তিনি কে? অনুরূপভাবে তার থেকে বর্ণনাকারীকেও চিনি না।
` الجمعة حج الفقراء، وفي لفظ: المساكين `.
موضوع.
رواه أبو نعيم في ` أخبار أصبهان ` (2 / 190) والقضاعي (رقم 79) وابن عساكر (11 / 132) عن ابن عباس باللفظ الأول، وابن زنجويه والقضاعي (78) أيضا باللفظ الثاني أيضا كما في ` الجامع الصغير ` وقال المناوي في شرحه: ورواه الحارث بن أبي أسامة، أخرجوه كلهم من حديث عيسى بن إبراهيم الهاشمي عن مقاتل عن الضحاك عن ابن عباس، قال الحافظ العراقي: سنده ضعيف، وأورده في ` الميزان ` في ترجمة عيسى هذا وقال عن جمع: هو منكر الحديث، متروك.
وقال السخاوي: مقاتل ضعيف، وكذا الراوي
عنه.
قلت: هذا الكلام إنما هو على اللفظ الثاني، وأما اللفظ الأول وهو الثاني في ترتيب السيوطي فلم يتكلم عليه المناوي بشيء فلعله اكتفى بذلك إشارة إلى أن طريقهما واحد وهو الظاهر من صنيع ` الكشف ` ولعله تبع فيه أصله ` المقاصد ` فإنه أورده باللفظين ثم قال: وفي سنده مقاتل ضعيف.
قلت: أما مقاتل فكذاب كما تقدم نقله عن وكيع في الحديث (168) ، وأما الراوي عنه عيسى بن إبراهيم فضعيف جدا، قال البخاري والنسائي: منكر الحديث فما دام أن الحديث من رواية الكذاب فكان اللائق بالسيوطي أن ينزه منه الكتاب! ولهذا ذكره الصغاني في ` الأحاديث الموضوعة ` (ص 7) ومن قبله ابن الجوزي في
` الموضوعات ` وأقره السيوطي نفسه لكن بلفظ آخر، وهو:
১৯১। জুম’আহ হচ্ছে ফকীরদের হাজ্জ (হজ্জ), (অন্য ভাষায়) মিসকিনদের হাজ্জ (হজ্জ)।
হাদীসটি জাল।
এটি আবু নু’য়াইম “আখবাবু আসবাহান” গ্রন্থে (২/১৯০), কাযাঈ (নং ৭৯) ও ইবনু আসাকির (১১/১৩২) ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে প্রথম শব্দে এবং ইবনু যানজুবিয়াহ ও কাযাঈ (৭৮) দ্বিতীয় শব্দে বর্ণনা করেছেন, যেমনভাবে “জামেউস সাগীর” গ্রন্থে এসেছে। এটির সনদে ঈসা ইবনু ইবরাহীম হাশেমী ও তার শাইখ মুকাতিল রয়েছেন। হাফিয ইরাকী বলেনঃ সনদটি দুর্বল।
যাহাবী হাদিসটি ঈসার জীবনী বর্ণনা করতে গিয়ে `আল-মীযান` গ্রন্থে উল্লেখ করে বলেছেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীস, মাতরূক। সাখাবী বলেনঃ মুকাতিল দুর্বল, অনুরূপভাবে তার থেকে বর্ণনাকারী ঈসাও দুর্বল।
আমি (আলবানী) বলছিঃ মুকাতিল মিথ্যুক, যেমনভাবে তার সম্পর্কে ওয়াকী' হতে নকল করা হয়েছে এবং তার থেকে বর্ণনাকারী ঈসা ইবনু ইবরাহীম নিতান্তই দুর্বল। বুখারী ও নাসাঈ বলেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীস। এ জন্যেই সাগানী হাদীসটিকে “আহাদীসুল মাওযুআহ” গ্রন্থে (পৃ ৭) উল্লেখ করেছেন। ইবনুল জাওযীও “আল-মাওযুআত” গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন। সুয়ূতী নিজে তা সমর্থন করেছেন, তবে নিম্নের বাক্যেঃ (দেখুন পরেরটি)
` الدجاج غنم فقراء أمتي، والجمعة حج فقرائها `.
موضوع.
أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (3 / 8) من رواية ابن حبان في ` المجروحين ` (3 / 90) من طريق عبد الله بن زيد - محمش - النيسابوري عن هشام ابن عبيد الله الرازي عن ابن أبي ذئب عن نافع عن ابن عمر مرفوعا ثم قال:
قال ابن حبان: باطل لا أصل له، وهشام لا يحتج به، وقال الدارقطني: هذا كذب، والحمل فيه على محمش كان يضع الحديث.
وأقره السيوطي في ` اللآليء ` (2 / 28) فلم يتعقبه بشيء البتة، وأما ابن عراق فتعقبه في ` تنزيه الشريعة ` (236 / 2) بقوله: قلت: اقتصر الحافظ الذهبي في ` طبقات الحفاظ ` على قوله بعد إيراد
الحديث: هذا غير صحيح، والله أعلم.
قلت: وهذا التعقب لا طائل تحته لسببين، الأول: أن علة الحديث المقتضية لوضعه ظاهرة، وهو كونه من رواية هذا الوضاع، ولا سيما أنه قد صرح الدارقطني بأنه حديث كذب، وابن حبان ببطلانه.
والآخر أن قوله: لا يصح، لا ينافي كونه موضوعا بل كثيرا ما تكون هذه اللفظة مرادفة لكلمة موضوع، وهي هنا بهذا المعنى لما سبق، ولأن الذهبي نفسه قد أورد هذا الحديث وحديثا آخر في ترجمة الرازي هذا من رواية ابن حبان عنه ثم قال الذهبي: قلت: كلاهما باطل، ووصف هذا الخبر في ` النبلاء ` (10 / 447) بأنه:
لا يحتمل.
ونقل المناوي (6 / 163) عنه أنه قال في ` الضعفاء `: إنهما حديثان موضوعان.
فتبين أن الذهبي من القائلين بوضع الحديث خلافا لما ظنه ابن عراق.
১৯২। মোরগ হচ্ছে আমার উম্মতদের দরিদ্রদের ছাগল এবং জুম’আহ হচ্ছে আমাদের দরিদ্রদের হাজ্জ (হজ্জ)।
হাদীসটি জাল।
ইবনু হিব্বান কর্তৃক `মাজরুহীন` গ্রন্থের (৩/৯০) বর্ণনা হতে ইবনুল জাওযী “আল-মাওযুআত” গ্রন্থে (৩/৮) হাদীসটি আব্দুল্লাহ ইবনু যায়েদ-মাহমাশ আন-নাইসাপুরী সূত্রে হিশাম ইবনু ওবায়দিল্লাহ হতে ... উল্লেখ করেছেন। অতঃপর বলেছেনঃ ইবনু হিব্বান বলেনঃ এটি বাতিল, এর কোন ভিত্তি নেই। হিশাম হচ্ছেন এমন এক বর্ণনাকারী যার দ্বারা দলীল গ্রহণ করা যায় না।
দারাকুতনী বলেনঃ হাদীসটি মিথ্যা, মাহমাশ হাদীস জাল করতেন। সয়ুতী “আল-লাআলী” গ্রন্থে (২/২৮) তা সমর্থন করেছেন। ইবনু আররাক “তানযীহুশ শারীয়াহ` গ্রন্থে (২/২৩৬) বলেনঃ হাফিয যাহাবী “তাবাকাতুল হুফফায” গ্রন্থে শুধুমাত্র বলেছেন হাদীসটি সহীহ নয়।
সহীহ নয় এ কথা দ্বারা হাদীসটি জাল নয় এমন কিছু বুঝানো ঠিক হবে না, দুটি কারণেঃ
১। হাদীসটি স্পষ্টত জাল এ কারণই তার প্রমাণ বহন করছে। কারণ এটিকে একজন জালকারী বর্ণনা করেছেন। তাছাড়া দারাকুতনী স্পষ্ট করেই বলেছেনঃ এটি মিথ্যা হাদীস এবং ইবনু হিব্বান বলেছেন বাতিল।
২ । এটি সহীহ নয়' কথাটি হাদীসটি জাল এ কথা বিরোধী নয়, বরং বহু সময় দেখা যায় এ শব্দটি জাল শব্দের স্থলাভিষিক্ত হয়েছে, এখানেও সেরূপ। কারণ যাহাবী নিজেই হিশাম ইবনু ওবায়দিল্লার জীবনীতে ইবনু হিব্বান-এর বর্ণনায় এ হাদীসটিসহ আরেকটি হাদীস উল্লেখ করে বলেছেনঃ উভয়টিই বাতিল।
মানবী যাহাবী হতে নকল করেছেন (৬/১৬৩) যে, তিনি “আয-যুয়াফা` গ্রন্থে বলেছেনঃ এ দু’টাে হাদীসই বানোয়াট। অতএব ইবনু আররাক কর্তৃক এরূপ ধারণা পোষণ করা যে, যাহাবী জাল হিসাবে উল্লেখ করেননি, সঠিক নয়।
` من سعادة المرء خفة لحيته `.
موضوع.
أخرجه ابن حبان في ` الضعفاء ` (1 / 360) والطبراني (3 / 282 / 1) وابن عدي (358 / 2) والخطيب في ` تاريخه ` (14 / 297) من طريق يوسف بن الغرق عن سكين بن أبي سراج عن المغيرة بن سويد عن ابن عباس مرفوعا، ثم روى الخطيب: عن أبي علي صالح بن محمد: قال بعض الناس: إنما هذا تصحيف إنما هو: ` من سعادة المرء خفة لحييه بذكر الله `، ثم قال الخطيب:
سكين مجهول منكر الحديث، والمغيرة بن سويد أيضا مجهول، ولا يصح هذا الحديث، ويوسف بن الغرق منكر الحديث، ولا تصح لحيته، ولا لحييه، وقال ابن حبان: سكين يروي الموضوعات عن الأثبات والملزقات عن الثقات، والحديث ذكره الهيثمي في ` المجمع ` (5 /164 - 165) وقال: رواه الطبراني وفيه يوسف بن الغرق قال الأزدي: كذاب، وأورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (1 / 166) من هذا الوجه، ثم ساقه من رواية الجوهري من طريق سويد بن سعيد، حدثنا بقية بن الوليد عن أبي الفضل عن مكحول عن ابن عباس مرفوعا بمثله، ومن رواية ابن عدي من طريق أبي داود النخعي عن حطان بن خفاف عن ابن عباس، ومن روايته أيضا (97 / 2) عن الحسين بن المبارك حدثنا بقية حدثنا ورقاء بن عمر عن أبي الزناد عن الأعرج عن أبي هريرة مرفوعا ثم قال ابن الجوزي: لا يصح، المغيرة مجهول، وسكين يروي الموضوعات عن الأثبات، ويوسف كذاب وسويد ضعفه يحيى، وبقية مدلس، وشيخه أبو الفضل هو بحر بن كنيز السقاء ضعيف، فكفاه تدليسا، والنخعي يضع، وورقاء لا يساوي شيئا، والحسين بن المبارك قال ابن عدي: حدث بأسانيد ومتون منكرة.
قلت: وقال ابن عدي (153 / 2) في ترجمة النخعي: هذا مما وضعه هو.
وتعقب ابن الجوزي السيوطي في ` اللآليء ` (1 / 121) بما ينتج منه أنه وافقه على وضعه، فإنه إنما تعقبه فيما ذكره من الجرح في بعض رواة الحديث فقال:
قلت: المغيرة ذكره ابن بان في ` الثقات `.
قلت: قد سبق غير مرة أن توثيق ابن حبان وحده لا يعتمد عليه لتساهله فيه ولا سيما عند المخالفة كما هو الأمر هنا فقد سمعت قول الخطيب في المغيرة هذا أنه مجهول، وكذا قال أبو علي النيسابوري فيما نقله الذهبي في ` الميزان `، ثم هب أنه ثقة فالراوي عنه سكين مجهول أيضا كما تقدم في كلام الخطيب، وقد قال الحافظ العسقلاني في ترجمته من ` اللسان `: قال ابن حبان: يروي الموضوعات، روى عن المغيرة عن ابن عباس رفعه: ` من سعادة المرء خفة لحيته `.
قلت: فالحديث إذا موضوع من هذا الوجه حتى عند ابن حبان الذي وثق المغيرة فهو إنما يتهم به سكين هذا، فالراوي عنه يوسف الغرق قد تابعه عليه عبد الرحمن بن قيس عند أبي بكر الكلاباذي في ` مفتاح معاني الآثار ` (16 / 1 رقم 18) .
ثم قال السيوطي: وورقاء هو اليشكري ثقة صدوق عالم روى عنه الأئمة الستة.
قلت: صدق السيوطي، وأخطأ ابن الجوزي في قوله فيه لا يساوي شيئا، لكن هذا لا ينجي الحديث من الوضع ما دام في الطريق إليه بقية وهو مدلس مشهور، ولا يفرح بتصريحه بالتحديث هنا لأن الراوي عنه الحسين بن المبارك غير ثقة كما يشعر به كلام ابن عدي المتقدم وهو في ` الكامل ` (97 / 2) وقد سلمه السيوطي، بل قال الذهبي في ترجمته: قال ابن عدي: متهم، ثم ساق له حديثين هذا أحدهما وقال عقبه:
وهو كذب، وأقره الحافظ في ` اللسان `.
ويؤيد ما ذهبت إليه من موافقة السيوطي على وضع هذا الحديث أنه نقل في فتاواه (2 / 205) عن ابن الجوزي أنه أورده في ` الموضوعات `، ولم يتعقبه بشيء.
ومع هذا أورده في كتابه ` الجامع الصغير `! فأخطأ وتناقض ولذا تعقبه شارحه المناوي ببعض ما ذكرناه عن ابن الجوزي والذهبي والعسقلاني، والحديث أورده ابن أبي حاتم (2 / 263) من طريق بقية عن أبي الفضل ثم ذكر أنه سأل أباه عنه فقال: هذا حديث موضوع باطل، وذكر ابن قتيبة في ` مختلف الحديث ` (ص 90) عن أصحاب الحديث أنهم قالوا في هذا الحديث: لا أصل له.
১৯৩। পুরুষদের সৌভাগ্য রয়েছে তার হালকা পাতলা দাড়িতে।
হাদীসটি জাল।
হাদীসটি ইবনু হিব্বান “আয-যুয়াফা` গ্রন্থে (১/৩৬০), তাবারানী (৩/২৮২/১), ইবনু আদী (২/৩৫৮) ও খাতীব বাগদাদী তার “আত-তারীখ” গ্রন্থে (১৪/২৯৭) ইউসুফ ইবনু গারাক সূত্রে সুকায়েন ইবনু আবী সিরাজ হতে, তিনি মুগীরা ইবনু সুওয়াইদ হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আল-খাতীব বলেনঃ সুকায়েন মাজহুল, মুনকারুল হাদীস । মুগীরা ইবনু সুওয়াইদও মাজহুল। এ হাদীসটি সহীহ নয়। এছাড়া ইউসুফ ইবনু গারাক মুনকারুল হাদীস।
ইবনু হিব্বান বলেনঃ সুকায়েন নির্ভরশীলদের উদ্ধৃতিতে জাল হাদীস বর্ণনাকারী।
হাদিসটি হায়সামী `আল-মাজমা` গ্রন্থে (৫/১৬৪-১৬৫) উল্লেখ করে বলেছেনঃ এটি তারারানী বর্ণনা করেছেন তার সনদে ইউসুফ ইবনু গারাক রয়েছেন। তার সম্পর্কে আযদী বলেনঃ তিনি মিথ্যুক।
হাদীসটি ইবনুল-জাওযী “আল-মাওযুআত” গ্রন্থে (১/১৬৬) সুওয়াইদ-ইবনু সা'ঈদু সূত্রে বাকিয়া ইবনু ওয়ালীদ হতে উল্লেখ করেছেন। এ সুওয়াইদ ইবনু সা'ঈদকে ইয়াহইয়া দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন আর বাকিয়া হচ্ছেন মুদল্লিস। এছাড়া, তার শাইখ আবুল ফযলও দুর্বল।
ইবনু আদীৱ বৰ্ণনায় অন্য এক সূত্রের বর্ণনাকারী আবূ দাউদ আন-নাখঈ হচ্ছেন একজন জালকারী। তার জীবনী বর্ণনা করতে গিয়ে ইবনু আদী বলেনঃ (২/১৫৩) এ হাদীসটি তিনিই জাল করেছেন।
ইবনু আদীর আরো এক সূত্রের বর্ণনাকারী হচ্ছেন হুসাইন ইবনুল মুবারাক; তার সম্পর্কে ইবনু আদী বলেনঃ তিনি বিভিন্ন সনদে মুনকার বাক্যে হাদীস বর্ণনা করেছেন। অন্য বর্ণনাকারী ওরাকা; তিনি কিছুরই সমকক্ষ নন। এ হুসাইন সম্পর্কে ইবনু আদী বলেনঃ তিনি মিথ্যার দোষে দোষী।
যাহাবী তার দু'টি হাদীস বর্ণনা করেছেন। এটি সে দু'টোর একটি অতঃপর বলেছেনঃ এটি মিথ্যা। তার এ কথাকে হাফিয় ইবনু হাজার `লিসানুল মীযান” গ্রন্থে সমর্থন করেছেন। সুয়ূতীও হাদীসটি জাল হওয়ার ব্যাপারে তার “আল-ফাতাওয়া (২/২০৫) গ্রন্থে ঐকমত্য পোষণ করেছেন।
বাকিয়া সুত্রে বর্ণিত এ হাদিসটি সম্পর্কে আবূ হাতিমকে জিজ্ঞেস করা হলে তিনি বলেনঃ এ হাদীসটি জাল, বাতিল।
ইবনু কুতাইবা `মুখতালাফুল হাদীস` গ্রন্থে (৯০) উল্লেখ করেছেন যে, হাদিসবিদগণ এটি সম্পর্কে বলেছেনঃ হাদিসটির কোন ভিত্তি নেই।
` عليكم بهذه الشجرة المباركة زيت الزيتون فتداووا به فإنه مصحة من الباسور `.
كذب.
رواه الطبراني في ` الكبير ` (17 / 247 / 774) وعنه أبو نعيم في ` الطب ` (80 / 2) حدثنا يحيى بن عثمان بن صالح حدثني أبي حدثنا ابن لهيعة عن يزيد بن أبي حبيب عن أبي الخير عن عقبة بن عامر مرفوعا.
قلت: وهذا إسناد واه، قال الهيثمي في ` المجمع ` (5 / 100) : رواه الطبراني، وفيه ابن لهيعة، وحديثه حسن، وبقية رجاله رجال الصحيح، ولكن ذكر الذهبي هذا الحديث في ترجمة عثمان بن صالح، ونقل عن أبي حاتم أنه كذب.
قلت: قال ابنه في ` العلل ` (2 / 279) : سمعت أبي حدثنا عن يحيى بن عثمان عن أبيه عن ابن لهيعة عن زيد بن أبي حبيب عن أبي الخير عن عقبة مرفوعا بهذا الحديث قال أبي: هذا حديث كذب.
وأقره الذهبي في ` الميزان `، وأشار إلى علته فقال: قال أبو زرعة: لم يكن عثمان يعني ابن صالح ممن يكذب، ولكن كان يكتب مع خالد بن نجيح، فبلوا به، كان يملي عليهم ما لم يسمعوا من الشيخ.
وقال ابن أبي حاتم في ترجمة خالد بن نجيح من ` الجرح والتعديل ` (1 / 2 /355) عن أبيه: كان يصحب عثمان بن صالح المصري وأبا صالح كاتب الليث وابن أبي مريم، وهو كذاب يفتعل الأحاديث ويضعها في كتب ابن أبي مريم وأبي صالح، وهذه الأحاديث التي أنكرت على أبي صالح يتوهم أنها من فعله.
قلت: فالظاهر أن خالدا هذا هو الذي افتعل هذا الحديث واستطاع أن يوهم عثمان ابن صالح أنه كتبه عن الشيخ، وهو ابن لهيعة، وأما كيف تمكن من ذلك فالله أعلم به، وابن لهيعة ضعيف الحفظ معروف بذلك، ومع هذا لم يحملوا في هذا الحديث عليه كأنهم رأو اأنه مع ضعفه لا يليق به ذلك والله أعلم.
وقد خفيت علة هذا الحديث على السيوطي فأورده في ` الجامع الصغير `! .
فتعقبه المناوي في ` شرحيه ` بتكذيب أبي حاتم المتقدم، وقد ذكره السيوطي من قبل مختصرا بلفظ: ` عليكم بزيت الزيتون فكلوه وادهنوا به، فإنه ينفع من الباسور `، وقال: رواه ابن السني عن عقبة.
زاد المناوي: ورواه عنه الديلمي أيضا.
قلت: وسكتا عنه وظني أنه عنده بلفظ حديث الترجمة وإسناده فقد رأيته في ` الفردوس ` (3 / 27 / 4054) بلفظ حديث الترجمة، ولم أره في ` الغرائب الملتقطة من مسند الفردوس ` لابن حجر العسقلاني، والله أعلم.
১৯৪। তোমরা বরকতপূর্ণ যায়তুন গাছের তেল গ্রহণ কর এবং ঔষধ হিসেবে ব্যাবহার কর, কারন তা অর্শ্ব রোগের আরোগ্যকারী।
হাদীসটি মিথ্যা।
এটিকে তাবারানী `আল-মু-জামুল কাবীর` গ্রন্থে (১৭/২৪৭/৭৭৪) এবং তার থেকে আবূ নু’য়াইম `আত-তিব্ব` গ্রন্থে (২/৮০) উসমান ইবনু সালেহ সূত্রে তার পিতা হতে, তার পিতা ইবনু লাহী'য়াহ হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ ইবনু আবী হাতিম `আল-ইলাল` গ্রন্থে (২/২৭৯) বলেনঃ আমার পিতা হতে শুনেছিঃ তিনি ইবনু লাহী'য়াহ হতে উসমান ইবনু সালেহ সুত্রে হাদিসটি বর্ণনা করেছেন। অতঃপর বলেছেনঃ এটি একটি মিথ্যা হাদিস।
যাহাবী তার `আল-মীমান` গ্রন্থে এ কথাকে সমর্থন করে এটির কারণ সম্পর্কে ইঙ্গিত দিয়ে বলেছেনঃ আবূ যুর'য়াহ বলেছেনঃ উসমান মিথ্যুকদের অন্তর্ভুক্ত ছিলেন না। কিন্তু তিনি খালিদ ইবনু নাজীহ-এর সাথে হাদীস লিখতেন। আর এ খালিদ তাদেরকে লিখে দিতেন সে সব কিছু যা তারা তাদের শাইখ হতে শুনেননি।
ইবনু আবী হাতিম “আল-জারহু ওয়াত তাদীল” গ্রন্থে (১/২/৩৫৫) খালিদ ইবনু নাজীহ-এর জীবনী আলোচনা করতে গিয়ে তার পিতা হতে নকল করে বলেছেনঃ তিনি (খালিদ) উসমান ইবনু সালেহ মিসরী, লাইস-এর কাতিব আবু সালেহ ও ইবনু আবী মারইয়াম-এর সাথে থাকতেন। তিনি একজন মিথ্যুক, হাদীস জাল করতেন এবং সেগুলো ইবনু আবী মারইয়াম এবং আবু সালেহ-এর গ্রন্থগুলোতে ঢুকিয়ে দিতেন। যে হাদীসগুলো আবু সালেহ হতে ইনকার করা হচ্ছে, ধারণা করা হচ্ছে সেগুলো তারই জালকৃত।
আমি (আলবানী) বলছিঃ স্পষ্ট ব্যাপার এই যে, এ হাদীসটি খালেদ কর্তৃক জালকৃত। তার পক্ষে উসমান ইবনু সালেহের মধ্যে সন্দেহ ঢুকানো সম্ভব হয়েছে যে, এটি তিনি তার শাইখ ইবনু লাহীয়াহ হতে লিখেছেন। কিন্তু সুয়ূতীর নিকট হাদীসটির কারণ লুক্কায়িতই রয়ে গেছে। ফলে তিনি “জামেউস সাগীর” গ্রন্থে হাদীসটি উল্লেখ করেছেন। এজন্য মানবী তার সমালোচনা করেছেন।
` إذا جامع أحدكم زوجته أو جاريته فلا ينظر إلى فرجها فإن ذلك يورث العمى `.
موضوع.
أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (2 / 271) من رواية ابن عدي (44 / 1) عن هشام بن خالد حدثنا بقية عن ابن جريج عن عطاء عن ابن عباس مرفوعا، ثم قال ابن الجوزي: قال ابن حبان: كان بقية يروي عن كذابين ويدلس، وكان له أصحاب يسقطون الضعفاء من حديثه ويسوونه، فيشبه أن يكون هذا من بعض الضعفاء عن ابن جريج ثم دلس عنه، وهذا موضوع.
قال السيوطي في ` اللآليء ` (2 / 170) : وكذا نقل ابن أبي حاتم في ` العلل ` عن أبيه، قال الحافظ ابن حجر: لكن ذكر ابن القطان في ` كتاب أحكام النظر ` أن بقي بن مخلد رواه عن هشام بن خالد عن بقية قال: حدثنا ابن جريج، فما بقي فيه إلا التسوية، قال: وقد خالف ابن الجوزي ابن الصلاح فقال: إنه جيد الإسناد، انتهى.
والحديث أخرجه البيهقي في ` سننه ` من الطريقين التي عنعن فيها بقية والتي صرح فيها بالتحديث، والله
أعلم.
قلت: وكذلك رواه ابن عساكر (13 / 295 / 2) وكذا ابن أبي حاتم (2 / 295) عن أبيه عن هشام عن بقية حدثنا ابن جريج به، ساقه ابن أبي حاتم بعد أن روى بهذا الإسناد حديثين آخرين لعلنا نذكرهما فيما بعد، وأشار إلى أن تصريح بقية بالتحديث خطأ من الراوي عنه هشام فقال: وقال أبي: هذه الثلاثة الأحاديث موضوعة لا أصل لها، وكان بقية يدلس، فظن هؤلاء أنه يقول في كل حديث حدثنا، ولم يفتقدوا الخبر منه، وأقره الذهبي في ` الميزان ` وجعله أصل قوله في ترجمة هشام: يروي عن ثقات الدماشقة، لكن يروج عليه، وكأنه لهذا تبع ابن الجوزي في الحكم على الحديث بالوضع ابن دقيق العيد صاحب ` الإمام ` كما في ` خلاصة البدر المنير ` (118 / 2) ، وقال عبد الحق في ` أحكامه ` (143 /1) لا يعرف من حديث ابن جريج، وقد رواه ابن عساكر في مكان آخر (18 / 188 / 1) من طريق هشام بن عمار عن بقية عن ابن جريج به، فلا أدري هذه متابعة من هشام بن عمار لهشام بن خالد، أم أن قوله: عمار محرف عن خالد كما أرجح، ومنه تعلم أن قول ابن الصلاح: إنه جيد الإسناد غير صواب وإنه اغتر بظاهر التحديث ولم ينتبه لهذه العلة الدقيقة التي نبهنا عليها الإمام أبو حاتم جزاه الله خيرا.
ومن الغرائب أن ابن الصلاح مع كونه أخطأ في تقوية هذا الحديث فإنه فيها مخالف لقاعدة له وضعها هو لم يسبق إليها، وهي أنه انقطع التصحيح في هذه الأعصار فليس لأحد أن يصحح! كما ذكر ذلك في ` مقدمة علوم الحديث ` (ص 18 بشرح الحافظ العراقي) بل الواجب عنده الاتباع لأئمة الحديث الذين سبقوا! فما باله خالف هذا الأصل هنا، فصحح حديثا يقول فيه الحافظان الجليلان أبو حاتم الرازي وابن حبان: إنه موضوع؟ ! وخالف السيوطي كعادته فذكره في ` جامعه `.
والنظر الصحيح يدل على بطلان هذا الحديث، فإن تحريم النظر بالنسبة للجماع من باب تحريم الوسائل فإذا أباح الله تعالى للزوج أن يجامع زوجته فهل يعقل أن يمنعه من النظر إلى فرجها؟ ! اللهم لا، ويؤيد هذا من النقل حديث عائشة
قالت: كنت أغتسل أنا ورسول الله صلى الله عليه وسلم من إناء بيني وبينه واحد فيبادرني حتى أقول: دع لي دع لي، أخرجه الشيخان وغيرهما، فإن الظاهر من هذا الحديث جواز النظر، ويؤيده رواية ابن حبان من طريق سليمان بن موسى أنه سئل عن الرجل ينظر إلى فرج امرأته؟ فقال: سألت عطاء فقال سألت عائشة فذكرت هذا الحديث بمعناه، قال الحافظ في ` الفتح ` (1 / 290) :
وهو نص في جواز نظر الرجل إلى عورة امرأته وعكسه، وإذا تبين هذا فلا فرق حينئذ بين النظر عند الاغتسال أو الجماع فثبت بطلان الحديث.
১৯৫। তোমাদের কোন ব্যাক্তি যখন তার স্ত্রী বা তার দাসীর সাথে মিলিত হবে; তখন যেন তাঁরা গুপ্তাঙ্গের দিকে দৃষ্টি না দেয়। কারণ তা অন্ধ সন্তান ভূমিষ্ঠ করায়।
হাদীসটি জাল।
হাদীসটি ইবনুল জাওযী “আল-মাওযু'আত” গ্রন্থে (২/২৭১) ইবনু আদীর (১/৪৪) বর্ণনায় হিশাম ইবনু খালিদ হতে, তিনি বাকিয়া হতে ... বর্ণনা করেছেন। অতঃপর ইবনুল জাওযী বলেন, ইবনু হিব্বান বলেছেনঃ বাকিয়া মিথ্যুকদের থেকে বর্ণনা করতেন এবং তাদলীস করতেন। তার কিছু সাথী ছিল যারা তার হাদীস হতে দুর্বল বর্ণনাকারীদেরকে সরিয়ে দিত। এ হাদীসটি ইবনু যুরায়েজ হতে কোন দুর্বল বর্ণনাকারীর। অতঃপর তিনি তার থেকে তাদলীস করেছেন। এটি জাল (বানোয়াট)।
সুয়ূতী “আল-লাআলী” গ্রন্থে (২/১৭০) বলেছেনঃ ইবনু আবী হাতিম “আল-ইলাল” গ্রন্থে তার পিতা হতে অনুরূপ কথা বর্ণনা করেছেন।
ইবনু সালাহ বাকিয়া কর্তৃক ইবনু যুরায়েজ হতে শ্রবণ সাব্যস্ত করেছেন। কিন্তু ইবনু আবী হাতিম ইঙ্গিত দিয়েছেন যে, বাকিয়া থেকে বর্ণনাকারী হিশাম হতে এ ভুল সংঘটিত হয়েছে। মূলত এটি তিনি ইবনু যুরায়েজ হতে শ্রবণ করেননি। অতঃপর বলেছেন, আমার পিতা বলেছেনঃ এ তিনটি হাদীস বানোয়াট, এগুলোর কোন ভিত্তি নেই। তার এ কথাকে যাহাবী “আল-মীযান” গ্রন্থে সমর্থন করেছেন।
এছাড়া সঠিক দৃষ্টিভঙ্গিও এ হাদীসটি বাতিল হওয়ার প্রমাণ বহন করে। যখন আল্লাহ তা’আলা স্ত্রীর সাথে মেলা-মেশাকে বৈধ করেছেন, তখন এটি বোধগম্য নয় যে, তিনি তার গুপ্তাঙ্গের দিকে দৃষ্টি দিতে নিষেধ করবেন।
এ দৃষ্টিভঙ্গিকেই শক্তি যোগাচ্ছে আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) কর্তৃক বর্ণিত নিম্নের হাদীসটি। তিনি বলেনঃ “আমি এবং রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম উভয়ের মধ্যবর্তী স্থলে রাখা একই পাত্র হতে গোসল করতাম এবং তিনি (পানি নিতে) আমার চাইতে অগ্রণী হতেন, তখন আমি বলতামঃ আমার জন্য ছাডুন আমার জন্য ছাডুন (বুখারী, মুসলিম)।
ইবনু হিব্বান-এর বর্ণনায় সুলায়মান ইবনু মূসার সূত্রে এসেছে যে, কোন ব্যক্তি কর্তৃক তার স্ত্রীর গুপ্তাঙ্গের দিকে দৃষ্টি দেয়া যাবে কিনা তাকে এ মর্মে প্রশ্ন করা হয়েছিল? তিনি বলেনঃ আমি এ বিষয়ে আতাকে জিজ্ঞাসা করলে; তিনি বলেনঃ আমি আয়েশাকে জিজ্ঞাসা করেছিলাম, তখন তিনি উপরের হাদীসটি বর্ণনা করেন।
হাফিয ইবনু হাজার “ফাতহুল বারী” গ্রন্থে (১/২৯০) বলেনঃ এটি ব্যক্তি কর্তৃক তার স্ত্রীর গুপ্তাঙ্গের দিকে দৃষ্টি দেয়া জায়েয হওয়ার দলীল।
এটি যখন স্পষ্ট হচ্ছে, তখন গোসলের সময় এবং সঙ্গম করার সময় দৃষ্টি দেয়ার মধ্যে কোন পার্থক্য নেই। অতএব হাদীসটি বাতিল হওয়া সাব্যস্ত হচ্ছে।
` إذا جامع أحدكم فلا ينظر إلى الفرج فإنه يورث العمى، ولا يكثر الكلام فإنه يورث الخرس `.
موضوع.
أورده ابن الجوزي (2 / 271) من رواية الأزدي عن إبراهيم بن محمد بن يوسف الفريابي حدثنا محمد بن عبد الرحمن القشيري عن مسعر بن كدام عن سعيد المقبري عن أبي هريرة مرفوعا، ثم قال الأزدي: إبراهيم ساقط، وتعقبه السيوطي في ` اللآليء ` (2 / 170) بقوله: قلت: روى له ابن ماجه، وقال في ` الميزان ` قال أبو حاتم وغيره: صدوق، وقال الأزدي وحده: ساقط، قال: ولا يلتفت إلى قول الأزدي فإن في لسانه في الجرح رهقا، انتهى.
قال الخليل في ` مشيخته `: هذا الحديث تفرد به محمد بن عبد الرحمن القشيري وهو شامى يأتي بمناكير.
قلت: فهذا هو علة الحديث قال فيه الذهبي: متهم ليس بثقة، وقد قال فيه أبو الفتح الأزدي: كذاب متروك الحديث، ونقل في ` اللسان ` عن الدارقطني أنه قال: متروك الحديث، وعن العقيلي قال: في أحاديثه عن مسعر عن المقبري حديث منكر ليس له أصل ولا يتابع
عليه وهو مجهول.
قلت: ونحوه في ` كامل ابن عدي ` (6 / 2261) ، والحديث في ` الجامع ` أيضا ثم ساق له السيوطي شاهدا وهو:
১৯৬। তোমাদের কোন ব্যাক্তি যখন সঙ্গম করবে, তখন গুপ্তাঙ্গের দিকে দৃষ্টি দেবে না, কারণ তা অন্ধ সন্তান ভূমিষ্ঠের কারণ এবং বেশী বেশী কথা বলবে না; কারণ তা বোবা সন্তান ভূমিষ্ঠের কারণ।
হাদীসটি জাল।
এটি ইবনুল জাওযী “আল-মাওযুআত” গ্রন্থে (২/২৭১) আযদীর বর্ণনা হতে ... উল্লেখ করেছেন। যার সূত্রে মুহাম্মাদ ইবনু আব্দির রহমান আল-কুশায়রী রয়েছেন। তার সম্পর্কে খালীলী তার “মাশিখাত” গ্রন্থে বলেনঃ তিনি শামী। এ হাদীসটি তিনি এককভাবে বর্ণনা করেছেন। তিনি মুনকার বর্ণনা করতেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তিনিই হচ্ছেন হাদীসটির সমস্যা। তার সম্পর্কে যাহাবী বলেনঃ তিনি মিথ্যার দোষে দোষী, নির্ভরযোগ্য নন। আবুল ফাতাহ আল আযদী বলেনঃ তিনি মিথ্যুক, মাতরূকুল হাদীস। “লিসানুল মীযান” গ্রন্থে দারাকুতনী হতে বর্ণনা করা হয়েছে; তিনি বলেনঃ তিনি মাতরূকুল হাদীস । উকায়লী মিসায়ার হতে তার হাদীসগুলো সম্পর্কে বলেনঃ মুনকারুল হাদীস, তার কোন ভিত্তি নেই, তার অনুকরণও করা যায় না। কারণ তিনি (কুশায়রী) মাজহুল (অপরিচিত)।
অনুরূপ কথা ইবনু আদীর “আল-কামিল” গ্রন্থেও (৬/২২৬১) এসেছে।
` لا تكثروا الكلام عند مجامعة النساء فإن منه يكون الخرس والفأفأة `.
ضعيف جدا.
أخرجه ابن عساكر (5 / 700) بسنده إلى أبي الدرداء هاشم بن محمد بن صالح الأنصاري حدثنا عبد العزيز بن عبد الله بن عمرو الأو يسي الأصل عامر وهو خطأ حدثنا خيران بن العلاء الكيساني ثم الدمشقي عن زهير بن محمد عن ابن شهاب عن قبيصة بن ذؤيب أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: فذكره قلت: وأورده السيوطي في ` اللآليء ` (2 / 170 - 171) شاهدا للحديث المتقدم من رواية ابن عساكر وسكت عنه وله علل أربع:
الأولى: الإرسال فإن قبيصة هذا تابعي قيل: له رؤية.
الثانية: زهير بن محمد هو التميمي مختلف فيه قال الحافظ في ` التقريب `:
رواية أهل الشام عنه غير مستقيمة فضعف بسببها، قال البخاري عن أحمد: كأن زهيرا الذي يروي عنه الشاميون آخر، قال أبو حاتم: حدث بالشام من حفظه فكثر غلطه وفي ` الميزان `، قال الترمذي في ` العلل `: سألت البخاري عن حديث زهير هذا فقال: أنا أتقي هذا الشيخ كأن حديثه موضوع وليس هذا عندي زهير بن محمد.
قلت: وهذا الحديث من رواية أهل الشام عنه فدل على ضعفه.
الثالثة: خيران بن العلاء، ليس بالمشهور ولم يوثقه غير ابن حبان وقد أشار لهذا الذهبي حين قال في ترجمته: وثق، له خبر منكر، لعل ذلك من شيخه يعني زهير بن محمد ولعله عنى هذا الحديث، ثم بدا لي بأن تعصيب علة هذا الحديث بمن فوق خيران أو من دونه أولى، لأنه قد روى عنه ثمانية، وأثنى عليه الأوزاعي، وهو من شيوخه، كما حققته في ترجمته من ` تيسير الانتفاع `.
الرابعة: أبو الدرداء هاشم بن محمد بن صالح الأنصاري لم أجد له ترجمة.
ويبعد جدا أن يكون هو الذي في ` ثقات ابن حبان ` (9 / 244) ، لأنه أعلى طبقة من هذا بدرجتين، ثم إن ابن حبان لم ينسبه إلى جده الأنصاري، والله أعلم.
وبالجملة فالإسناد ضعيف جدا لا تقوم به حجة والخبر منكر والله أعلم.
১৯৭। নারীদের সাথে মিলিত হবার সময় তোমরা বেশী কথা বলবে না, কারণ তা থেকে বোবা বা ধবল রোগের সৃষ্টি হয়।
হাদীসটি নিতান্তই দুর্বল।
এটি ইবনু আসাকির তার সনদে (৫/৭০০) আবুদ-দারদা হাশিম ইবনু মুহাম্মাদ ইবনে সালেহ আল-আনসারী পর্যন্ত ... বর্ণনা করেছেন।
সুয়ূতী `আল-লাআলী` গ্রন্থে (২/১৭০-১৭১) ইবনু আসাকির এর বর্ণনায় হাদীসটি পূর্ববর্তী হাদীসের শাহেদ হিসাবে উল্লেখ করে চুপ থেকেছেন, অথচ (দুর্বল হওয়ার জন্য) তার চারটি কারণ রয়েছেঃ
১ এটি মুরসাল এ কাবীসা যিনি রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেছেন তিনি তাবে'ঈ সাহাবী নন।
২। যুহায়ের ইবনু মুহাম্মদ আত-তামীমী হচ্ছেন বিতর্কিত ব্যক্তি। হাফিয ইবনু হাজার “আত-তাকরীব” গ্রন্থে বলেনঃ তার থেকে শামীদের বর্ণনা সহীহ নয়। এ কারণে এ বর্ণনাটি দুর্বল। ইমাম বুখারী ইমাম আহমাদ হতে বর্ণনা করে বলেনঃ যে যুহায়ের থেকে শামীরা বর্ণনা করেছেন তিনি অন্যজন। আবূ হাতিম বলেনঃ তিনি শামীদের সম্মুখে হাদীস বর্ণনা করেছেন তার হেফয হতে, ফলে তার বহু ভুল সংঘটিত হয়েছে। ইমাম বুখারীকে যুহায়ের কর্তৃক বর্ণিত এ হাদীসটি সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করেছিলাম, তিনি বলেনঃ আমি এ শাইখ হতে পরহেজ করি, তার হাদীস যেন বানোয়াট, আমার নিকট এ যুহায়ের- ইবনু মুহাম্মাদ নন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ হাদীসটি তার থেকে শামীদের বর্ণনায় এসেছে। অতএব তা তার হাদীসটি দুর্বল হওয়ার প্রমাণ বহন করছে।
৩। খায়রান ইবনু 'আলা প্রসিদ্ধ নন। তাকে ইবনু হিব্বান ছাড়া অন্য কেউ নির্ভরযোগ্য বলেননি। যাহাবী যখন তার জীবনী বর্ণনা করেছেন, তখন বলেছেনঃ তাকে নির্ভরযোগ্য বলা হয়েছে অথচ তার মুনকার হাদীস রয়েছে।
৪। আমি আবুদ-দারদা হাশিম ইবনু মুহাম্মাদ ইবনে সালেহ্ আনসারীর জীবনী পাচ্ছি না।
মোটকথা, হাদীসটি নিতান্তই দুর্বল। এর দ্বারা দলীল গ্রহণ করা যাবে না। এটি মুনকার।
` من أصيب بمصيبة في ماله أو جسده وكتمها ولم يشكها إلى الناس كان حقا على الله أن يغفر له `.
موضوع.
رواه الطبراني (3 / 122 / 1) وابن حبان في ` المجروحين ` (1 / 202) عن هشام بن خالد، أنبأنا بقية عن ابن جريج عن عطاء عن ابن عباس مرفوعا، قال الهيثمي في ` المجمع ` (2 / 331) : رواه الطبراني في ` الكبير ` وفيه بقية مدلس.
وقال في مكان آخر (10 / 256) : رواه الطبراني في ` الأوسط `، ورجاله وثقوا وأظن أن قوله ` الأوسط ` خطأ من الناسخ ويؤيده أن المنذري قال: (4 / 148)
رواه الطبراني ولا بأس بإسناده، كذا قال والمقصود أنه أطلق العزو للطبراني والمراد به في هذه الحالة ` معجمه الكبير `، والله أعلم.
قلت: ومن طريقه رواه ابن أبي حاتم في ` العلل ` وذكر عن أبيه أنه قال: حديث موضوع لا أصل له، وأقره الذهبي وقد نقلت كلام أبي حاتم بتمامه في الحديث (195) فراجعه، وذكره في ترجمة بقية من ` الميزان ` من طريق ابن حبان وقال أعني ابن حبان: وهذا من نسخة كتبناها بهذا الإسناد كلها موضوعة يشبه أن يكون
بقية سمعه من إنسان واه عن ابن جريج فدلس عنه والتزق به.
قلت: وكأن السيوطي عفا الله عنا وعنه لم يقف على حكم هذين الإمامين بوضع هذا الحديث، وإلا لما سود به ` الجامع الصغير `! ، أولعله قلد الهيثمي والمنذري، وقد تعقبهم المناوي بقول أبي حاتم والذهبي، ثم تراجع عن ذلك في شرحه الآخر ` التيسير `، فنقل كلام المنذري فقط، وأقره.
১৯৮। যে ব্যাক্তি তার সম্পদ বা তার শরীরে কোন বিপদ দ্বারা আক্রান্ত হবে। অতঃপর তা গোপন রাখবে এবং তা মানুষের নিকট উপস্থাপন করবে না। আল্লাহর উপর তাকে ক্ষমা করা অপরিহার্য হয়ে যায়।
হাদীসটি জাল।
এটি তাবারানী “মুজামুল কাবীর” গ্রন্থে (৩/১২৩/১) এবং ইবনু হিব্বান “আল-মাজরূহীন` গ্রন্থে (১/২০২) হিশাম ইবনু খালিদ সূত্রে বাকিয়া হতে ... বর্ণনা করেছেন।
হায়সামী “আল-মাজমা` গ্রন্থে (২/৩৩১) বলেনঃ হাদীসটি তাবারানী “আল-কাবীর” গ্রন্থে বর্ণনা করেছেন, তাতে বাকিয়া রয়েছেন, তিনি মুদাল্লিস।
আমি (আলবানী) বলছিঃ ইবনু আবী হাতিম তার “আল-ইলাল” গ্রন্থে তাবারানীর সূত্রেই হাদীসটি উল্লেখ করেছেন এবং তার পিতা হতে বর্ণনা করেছেন তিনি বলেনঃ হাদীসটি জাল (বানোয়াট), এটির কোন ভিত্তি নেই। যাহাবী আবু হাতিমের কথাকে সমর্থন করেছেন।
১৯৫ নং হাদীসে এ বাকিয়া সম্পর্কে আলোচনা করা হয়েছে। যাহাবী “আল-মীযান” গ্রন্থে বলেনঃ ইবনু হিব্বান বলেছেনঃ এ হাদীসটি এমন এক কপি হতে আমরা লিখেছি যে কপির সবই বানোয়াট ।
সুয়ূতী এ দুই ইমাম কর্তৃক হাদীসটিকে জাল হিসাবে হুকুম লাগানোর পরেও সে দিকে লক্ষ্য না করে তার “জামেউস সাগীর” গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন।
` حق الولد على الوالد أن يحسن اسمه ويحسن أدبه `.
موضوع.
رواه أبو محمد جعفر بن محمد بن الحسين السراج القاري ` في الفوائد ` (5 / 32 / 1 من مجموع 98) ومحمد بن عبد الواحد المقدسي وهو الضياء في ` المنتقى من مسموعاته ` (ج 4 ورقة 26 / 1 مجموع 101) من طريق محمد بن عيسى قال حدثنا محمد ابن الفضل عن أبيه عن عطاء عن ابن عباس مرفوعا، وقال القاري: غريب لا أعلم رواه إلا محمد بن الفضل وهو ضعيف جدا، وأما أبوه فكان ثقة.
قلت: محمد بن الفضل رماه ابن أبي شيبة بالكذب، وقال الفلاس: كذاب، وقال أحمد: حديثه حديث أهل الكذب.
ومحمد بن عيسى هو المدائني وهو متروك كما قال الدارقطني والحاكم.
والحديث أورده السيوطي في ` الجامع ` من رواية البيهقي في ` الشعب ` فتعقبه المناوي بقوله: وقضية تصرف المصنف أن مخرجه البيهقي خرجه ساكتا عليه والأمر بخلافه، بل قال: محمد بن الفضل بن عطية ضعيف بمرة انتهى.
وفيه أيضا محمد بن عيسى المدائني قال في ` الضعفاء `: قال الدارقطني: ضعيف متروك.
قلت: ولم يتفرد به فقد رواه أبو بكر الجصاص في ` أحكام القرآن ` (3 / 574) من طريق جبارة قال: حدثنا محمد بن الفضل به، لكن جبارة هذا هو ابن المغلس قال ابن معين: كذاب، وقال ابن نمير: يوضع له الحديث فيرويه ولا يدري! .
১৯৯। পিতার নিকট পুত্রের প্রাপ্ত এই যে, সে তার সুন্দর নাম রাখবে এবং তাকে উত্তম রূপে আদব শিক্ষা দিবে।
হাদীসটি জাল।
এটি আবু মুহাম্মাদ জাফার ইবনু মুহাম্মাদ আস-সীরাজ আল-কারী “আলফাওয়াইদ” গ্রন্থে (৫/৩২/১-৯৮ পর্যন্ত) এবং মুহাম্মাদ ইবনু আবদিল ওয়াহিদ আল-মাকদেসী (যিয়া) “আল-মুনতাকা মীন মাসমু'য়াত” গ্রন্থে (৪/২৬/১) মুহাম্মাদ ইবনু ঈসা সূত্রে তার শাইখ মুহাম্মাদ ইবনুল ফযল হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আল-কারী বলেনঃ এটি গারীব, মুহাম্মাদ ইবনুল ফযল ছাড়া অন্য কেউ বর্ণনা করেছেন কিনা তা জানি না, তিনি নিতান্তই দুর্বল, তবে তার পিতা নির্ভরযোগ্য।
আমি (আলবানী) বলছিঃ মুহাম্মাদ ইবনুল ফযলকে ইবনু আবী শায়বাহ মিথ্যার দোষে দোষী করেছেন। ফাল্লাস বলেনঃ তিনি মিথ্যুক। ইমাম আহমাদ বলেনঃ তার হাদীস মিথ্যুকদের হাদীসের অন্তর্ভুক্ত।
অপর বর্ণনাকারী মুহাম্মাদ ইবনু ইসহাক আল-মাদায়েনী মাতরূক, যেমনভাবে দারাকুতনী ও হাকিম বলেছেন।
এ হাদীসটি অন্য এক সনদে আবু বাকর আল-জাসসাস “আহকামুল কুরআন” গ্রন্থে (৩/৫৭৪) এ মুহাম্মাদ ইবনুল ফযল হতেই জাবারার সূত্রে বর্ণনা করেছেন কিন্তু এ জাবারা হচ্ছেন ইবনুল মুগাল্লিস। তার সম্পর্কে ইবনু মাঈন বলেনঃ মিথ্যুক।
ইবনু নুমায়ের বলেনঃ তার জন্য হাদীস জাল করা হত। অতঃপর তিনি সেটি বর্ণনা করতেন অথচ তিনি তা জানতেন না।
` الحج جهاد، والعمرة تطوع `.
ضعيف.
أخرجه ابن ماجه (2 / 232) وابن أبي حاتم في ` العلل ` (1 / 286) من طريق الحسن بن يحيى الخشني حدثنا عمر بن قيس، أخبرني طلحة بن
يحيى عن عمه إسحاق بن طلحة عن طلحة بن عبيد الله مرفوعا.
قال البوصيري في ` الزوائد ` (2 / 138) : هذا إسناد ضعيف عمر بن قيس هو المعروف بمندل ضعفه أحمد وابن معين والفلاس وأبو زرعة والبخاري وأبو حاتم وأبو داود والنسائي وغيرهم، والحسن أيضا ضعيف.
قلت: بل هما متروكان، فالأول قال فيه أحمد: أحاديثه بواطيل، والحسن قال فيه النسائي: ليس بثقة، وقال الدارقطني: متروك، وقال ابن حبان: منكر الحديث جدا يروي عن الثقات ما لا أصل له، ثم ساق له حديثا قال فيه: إنه موضوع وسأذكره عقب هذا إن شاء الله تعالى.
وهذا الحديث قال ابن أبي حاتم: سألت أبي عنه؟ فقال: هذا حديث باطل.
قلت: لكن له طرق أخرى، فرواه البيهقي في ` سننه ` (4 / 348) من طريق سعيد ابن سالم أن سفيان الثوري أخبره عن معاوية بن إسحاق عن أبي صالح الحنفي مرفوعا به.
قلت: وهذا سند ضعيف لإرساله، وسعيد بن سالم فيه ضعف، وقد روى البيهقي عن الشافعي أنه قال:
هو منقطع يعني مرسل، ثم قال البيهقي: وقد روي من حديث شعبة عن معاوية بن إسحاق عن أبي صالح عن أبي هريرة موصولا، والطريق فيه إلى شعبة طريق ضعيف، ورواه محمد بن الفضل بن عطية عن سالم الأفطس عن ابن جبير عن ابن عباس مرفوعا، ومحمد هذا متروك.
قلت: بل هو كذاب، كذبه ابن معين والفلاس وغيرهما كما سبق برقم (26) ، وقد رواه من طريقه الطبراني في ` المعجم الكبير ` (3 / 154 / 1) .
২০০। হাজ্জ (হজ্জ) হচ্ছে জিহাদ আর উমরা হচ্ছে স্বেচ্ছাসেবক স্বরূপ (নফল)।
হাদীসটি দুর্বল।
এটি ইবনু মাজাহ্ (২/২৩২) ও ইবনু আবী হাতিম “আল-ইলাল” গ্রন্থে (১/২৮৬) হাসান ইবনু ইয়াহইয়া আল-খুশানী সূত্রে উমার ইবনু কায়েস হতে ... বর্ণনা করেছেন। এর সনদটি দুর্বল। কারণ এ উমার ইবনু কায়েস মন্ডল হিসাবে প্রসিদ্ধ। তাকে আহমাদ, ইবনু মাঈন, ফাল্লাস, আবূ যুরয়াহ, বুখারী, আবু হাতিম, আবু দাউদ, নাসাঈ প্রমুখ দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন এবং হাসানও দুর্বল।
আমি (আলবানী) বলছিঃ বরং তারা উভয়েই মাতরূক। প্রথমটি সম্পর্কে আহমাদ বলেনঃ তার হাদীসগুলো বাতিল । হাসান সম্পর্কে নাসাঈ বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্য নন। দারাকুতনী বলেনঃ তিনি মাতরূক। ইবনু হিব্বান বলেনঃ তিনি নিতান্তই মুনকারুল হাদীস। তিনি নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে এমন কিছু বর্ণনা করেছেন যেগুলোর কোন ভিত্তি নেই।
অতঃপর তার একটি হাদীস উল্লেখ করে বলেছেনঃ এটি বানোয়াট। ইবনু আী হাতিম বলেনঃ আমি আমার পিতাকে এ হাদীসটি সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করেছিলাম, তিনি বলেনঃ এ হাদীসটি বাতিল।
কিন্তু হাদীসটি অন্য সূত্রেও বর্ণিত হয়েছে। বাইহাকী তার “সুনান” গ্রন্থে (৪/৩৪৮) সাঈদ ইবনু সালেম সূত্রে বর্ণনা করেছেন। মুরসাল এবং বর্ণনাকারী সাঈদ দুর্বল হওয়ার কারণে এ সনদটি দুর্বল। এ জন্যেই বলা হয়েছে হাদীসটি দুর্বল।