সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ
` ألا أخبركم بخياركم؟ الذين إذا رؤوا ذكر الله، أفلا أخبركم بشراركم
؟ المشاؤون بالنميمة، المفسدون بين الأحبة، الباغون للبرآء العنت `.
ضعيف.
أخرجه البخاري في ` الأدب المفرد ` (48) وأحمد في ` المسند ` (6 / 459) عن عبد الله بن عثمان بن خثيم عن شهر بن حوشب عن أسماء بنت يزيد
مرفوعا. وهذا سند ضعيف، رجاله كلهم ثقات، غير شهر بن حوشب، وهو صدوق،
كثير الإرسال والأوهام كما في ` التقريب `. وقال شيخه العراقي في ` تخريج
الإحياء ` (2 / 162) : ` رواه أحمد من حديث أسماء بنت يزيد بسند ضعيف `.
ورواه ابن أبي شيبة وابن أبي الدنيا عن شهر كما في ` الترغيب ` (3 / 295) .
وروى ابن ماجة (2 / 528) الشطر الأول منه. وهذا القدر له شاهد مخرج في
` الصحيحة ` (1646 و1733) . وقد اضطرب شهر في إسناده، فمرة يرويه عن أسماء
هذه، ومرة عن عبد الرحمن بن غنم بلفظ: ` خيار عباد الله … `. كما يأتي.
قال المنذري: ` ورواه الطبراني من حديث عبادة عن النبي صلى الله عليه وسلم،
وابن أبي الدنيا في كتاب
` الصمت ` عن أبي هريرة عن النبي صلى الله عليه وسلم
، وحديث عبد الرحمن أصح، وقد قيل: إن له صحبة `. ولفظ حديث ابن غنم: `
خيار عباد الله الذين إذا رؤوا ذكر الله، وشرار عباد الله المشاؤون بالنميمة
، المفرقون بين الأحبة، الباغون البرآء العنت `. أخرجه أحمد (4 / 227)
وابن منده في ` المعرفة ` (ق 27 / 1) عن ابن أبي الحسين عن شهر بن حوشب عن عبد
الرحمن بن غنم يبلغ به النبي صلى الله عليه وسلم. وهذا سند ضعيف لضعف شهر،
وبقية رجال السند ثقات رجال الستة. وللحديث شاهد من حديث أبي هريرة مخرج في
` الروض ` (1084) وفي ` غاية المرام ` (434) من رواية ابن أبي الدنيا في
` الصمت `، وقلت هناك في آخر تخريج هذا الحديث: ` فلعل الحديث بهذا الشاهد
يصير حسنا. والله أعلم `.
১৮৬১। আমি কি তোমাদের সর্বাপেক্ষা উত্তম ব্যক্তি সম্পর্কে সংবাদ দিব না? তাদেরকে যখন দেখা যায় তখন আল্লাহকে স্মরণ করা হয়। আর আমি কি তোমাদেরকে তোমাদের সর্বাপেক্ষা নিকৃষ্ট ব্যক্তি সম্পর্কে সংবাদ দিব না? যারা চোগলখোরী করার জন্য চলে। যারা বন্ধুদের মাঝে গোলমাল সৃষ্টি করে, কঠোরতার দ্বারা নিরপরাধদের প্রতি অত্যাচার করে।
হাদিসটি দুর্বল।
তিনি (আলবানী) হাদীসটিকে দুর্বল আখ্যা দিলেও তিনি এটিকে শেষে গিয়ে হাসান আখ্যা দিয়েছেন বহু শাহেদ থাকার কারণে।
এটিকে ইমাম বুখারী “আলআদাবুল মুফরাদ” গ্রন্থে (৪৮), আহমাদ `আলমুসনাদ` গ্রন্থে (৬/৪৫৯) আব্দুল্লাহ ইবনু উসমান ইবনু খুসাইম হতে, তিনি শাহর ইবনু হাওশাব হতে, তিনি আসমা বিনতু ইয়াযীদ হতে মারফু হিসেবে বর্ণনা করেছেন।
এ সনদটি দুর্বল। শাহর ইবনু হাওশাব ছাড়া অন্য বর্ণনাকারীগণ নির্ভরযোগ্য। তিনি সত্যবাদী, তবে তিনি বহু মুরসাল এবং সন্দেহমূলক বর্ণনাকারী যেমনটি “আত-তাকরীব” গ্রন্থে এসেছে।
তার শাইখ ইরাকী “তাখরাজুল ইহইয়া” গ্রন্থে (২/১৬২) বলেনঃ এটিকে আহমাদ আসমা বিনতু ইয়াযীদের হাদীস হতে দুর্বল সনদে বর্ণনা করেছেন। আর ইবনু আবী শাইবাহ ও ইবনু আবিদ দুনিয়া শাহর হতে বর্ণনা করেছেন যেমনটি “আত-তাকরীব” গ্রন্থে (৩/২৯৫) এসেছে। ইবনু মাজাহ প্রথম অংশটুকু (২/৫২৮) তার থেকে বর্ণনা করেছেন। আর এ পরিমাণের শাহেদ রয়েছে, আমি “সিলসিলাহ সহীহাহ” গ্রন্থে (১৬৪৬, ১৭৩৩) যার তাখরীজ করেছি।
সনদের মধ্যে শাহর ইযতিরাব করেছেন। একবার আসমা হতে বর্ণনা করেছেন, আরেকবার আব্দুর রহমান ইবনু গানাম হতে বর্ণনা করেছেন।
মুনযেরী বলেনঃ হাদীসটিকে ত্ববারানী ওবাদার হাদীস হতে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেছেন। আর ইবনু আবিদ দুনিয়া “কিতাবুস সম্ত” এর মধ্যে আবূ হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেছেন। আব্দুর রহমানের হাদীসটি বেশী সঠিক। বলা হয়েছে যে, রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর সাথে তার সাক্ষাৎ ঘটেছিল। আর ইবনু গানামের হাদীসের ভাষা হচ্ছেঃ
خيار عباد الله الذين إذا رؤوا ذكر الله، وشرار عباد الله المشاؤون بالنميمة، المفرقون بين الأحبة، الباغون البرآء العنت
এ উম্মাতের মধ্য হতে আল্লাহর সর্বোত্তম বান্দা হচ্ছে তারাই যাদেরকে দেখা মাত্রই আল্লাহকে স্মরণ করা হয়। এ উম্মাতের মধ্যে আল্লাহর সর্বাপেক্ষা নিকৃষ্ট বান্দা হচ্ছে তারাই যারা চোগলখোরী করার জন্য চলে। যারা বন্ধুদের মাঝে বিচ্ছেদ ঘটায়, কঠোরতার দ্বারা নিরাপরাধদের প্রতি অত্যাচার করে।
এটিকে ইমাম আহমাদ (৪/২২৭) ও ইবনু মান্দা “আলমারিফাহ” গ্রন্থে (কাফ ১/২৭) ইবনু আবুল হুসাইন হতে, তিনি শাহর ইবনু হাওশাব হতে, তিনি আব্দুর রহমান ইবনু গানাম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন, তার দ্বারা নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম পর্যন্ত পৌছে।
এ সনদটি দুর্বল শাহর দুর্বল হওয়ার কারণে। অন্যান্য বর্ণনাকারীগণ নির্ভরযোগ্য, তারা ছয়টি হাদীস গ্রন্থের বর্ণনাকারী। “আসসমত” গ্রন্থের বর্ণনা হতে। আমি “আররাওয” (১০৮৪) ও “গায়াতুল মারাম” গ্রন্থে (৪৩৪) যেটির তাখরীজ করেছি এবং আমি সেখানে হাদীসের শেষে বলেছিঃ সম্ভবত হাদীসটি এ শাহেদের কারণে হাসান পর্যায়ে পৌছে গেছে।
উল্লেখ্য শাইখ আলবানী হাদীসটিকে অন্যান্য গ্রন্থে হাসান আখ্যা দিয়েছেন। দেখুন `সহীহাহ` (২৮৪৯), `আলআদাবুল মুফরাদ` (৩২৩)।
` من وقر صاحب بدعة فقد أعان على هدم الإسلام `.
ضعيف.
رواه ابن عدي (90 / 1) وأبو عثمان النجيرمي في ` الفوائد ` (36
/ 2) وابن عساكر (4 / 322 / 2 - 14 / 124 / 1) عن الحسن بن يحيى الخشني عن
هشام بن عروة عن أبيه عن عائشة مرفوعا. ومن هذا الوجه رواه الهروي (99 / 1) وابن حبان في ` الضعفاء ` (1 / 235) ، وقال في الخشني: ` منكر الحديث
جدا، يروي عن الثقات ما لا أصل له، والحديث باطل موضوع `. قلت: وهذا سند
ضعيف جدا، الحسن بن يحيى هذا متروك كما قال الدارقطني وغيره، وقد روى
أحاديث موضوعة سبق ذكر بعضها، فانظر الحديث رقم (199) . وهذا الحديث من
جملة أحاديث أوردها ابن عدي في ` الكامل ` (90 / 1) في ترجمة الخشني، ثم قال
: ` وهي أنكر ما رأيت له، وهذا لا يعرف إلا به `. هذا كل ما جرح به ابن عدي
هذا الحديث، وهو وإن كان ليس بالأمر الهين، فهو لا
يطابق ما حكاه ابن الجوزي عنه في ` الموضوعات `، فقد ساق الحديث من طريق ابن عدي، ثم قال (1 / 271) : ` قال ابن عدي: موضوع، الخشني يروي عن الثقات ما لا أصل له، وإنما
يعرف نحوهذا من قول الفضيل `. فلعل ابن عدي ذكر هذا في مكان أوكتاب آخر.
والله أعلم. وقد تعقبه السيوطي بأقوال حكاها عن بعض الأئمة لا تخرج عن كون
الرجل ضعيفا لسوء حفظه، وهذا لا ينافي الضعف الشديد الذي تبين لغيرهم ممن
حكينا أقوالهم فيه وغيرهم، ولذلك فهو تعقب لا طائل تحته. ثم قال السيوطي:
` وقد توبع على هذا الحديث فأخرجه ابن عساكر في ` تاريخه ` (8 / 500 / 2) :
أنبأنا أبو بكر محمد بن عبد الباقي أنبأنا الحسن بن علي أنبأنا أبو بكر محمد بن
عبيد الله بن الشخير أخبرنا أبو الفضل العباس بن يوسف الشكلي حدثنا أحمد بن
سفيان حدثنا يحيى بن بكير حدثنا الليث بن سعد عن هشام بن عروة به. وهذه
متابعة قوية `. قلت: لا شك في قوة هذه المتابعة، لأن الليث بن سعد إمام جليل
لا يسأل عن مثله، لكن ينبغي النظر في صحة السند إليه، ولقد بحثت عن تراجم
رجاله وأحوالهم واحدا بعد واحد، فلم أجد فيهم ما يمكن إعلال السند به إلا أن
يكون العباس بن يوسف هذا، وقد ترجمه الخطيب في ` تاريخه ` (12 / 153 - 154)
، ثم ابن عساكر (8 / 500 / 2) وذكرا عنه رواة كثيرين، ولم يذكرا فيه جرحا
ولا تعديلا، اللهم إلا قول الخطيب: ` وكان صالحا متنسكا `. وما أعتقد أن
هذه العبارة تفيد توثيق الرجل في الرواية، إذ لا تلازم بين كون الرجل صالحا
متنسكا، وبين كونه ثقة ضابطا، فكم في الصالحين من ضعفاء ومتروكين، كما هو
معروف لدى من له عناية بهذا العلم الشريف، ولهذا فإن القلب لم يطمئن لصحة هذا
السند، ولاسيما أن السيوطي نفسه قد نص في مقدمة كتابه ` الجامع الكبير `، أن
كل ما عزاه للعقيلي وابن عدي والخطيب وابن عساكر، وللحكيم الترمذي في `
نوادر الأصول `، أو
للحاكم في ` تاريخه `، أولابن النجار في ` تاريخه `، أو
للديلمي في ` مسند الفردوس ` ; فهو ضعيف. وأما سائر رجال السند فثقات كلهم
، فالذين فوق العباس هذا من رجال ` التهذيب ` وأما ابن الشخير فترجمه الخطيب (
2 / 333) وقال: ` كان صدوقا `. وأما الحسن بن علي فهو أبو محمد الجوهري
ترجمه الخطيب أيضا (7 / 393) وقال: ` كتبنا عنه، وكان ثقة أمينا كثير
السماع `. وأما محمد بن عبد الباقي فترجمه ابن عساكر (15 / 293 / 1 - 295 /
1) لكن ورقتان منها بياض! وله ترجمة طيبة في ` اللسان ` (5 / 241 - 243) .
ثم رأيت الحديث في ` ذم الكلام ` للهروي (99 / 1) من طريق آخر عن ابن الشخير
به. فالعلة شيخه العباس بن يوسف الشكلي، والله أعلم. ثم الحديث أورده ابن
الجوزي من طرق أخرى واهية منها عن أبي نعيم في ` الحلية ` (5 / 218) عن أحمد
بن معاوية بن بكر: حدثنا عيسى بن يونس عن ثور بن يزيد عن خالد بن معدان عن عبد
الله بن بسر مرفوعا. وقال: ` غريب من حديث خالد تفرد به عيسى عن ثور `.
قلت: لكن أحمد هذا قال ابن الجوزي: ` حدث بالأباطيل `. وهو أخذه عن ابن عدي
وتمام كلامه: ` وكان يسرق الحديث `. ثم رواه أبو نعيم (6 / 97) وابن
عساكر (9 / 247 / 1) ويوسف بن عبد الهادي في ` جمع الجيوش والدساكر على ابن
عساكر ` (9 / 1) من طريقين عن بقية بن الوليد عن - وفي ` الحلية ` وابن
عساكر: حدثنا - ثور عن خالد عن معاذ مرفوعا به. وكذلك رواه الطبراني في
` المعجم الكبير ` (20 / 96 / 188) . وقال أبو نعيم:
` كذا رواه بقية
، فقال: عن معاذ، ورواه عيسى بن يونس عن ثور عن خالد عن عبد الله بن بسر
مثله `. يعني الرواية التي قبلها، وقد عرفت سقوطها، فلا تنهض لمعارضة هذه
الرواية ورجالها ثقات، لولا ما يخشى من تدليس بقية، ولكنه قد صرح بالتحديث
عند من ذكرنا، وكذلك رواه الحسن بن سفيان في ` مسنده ` كما في ` اللآلىء ` (
ص 151) وعنه رواه أبو نعيم، فإذا كان سماع بقية له من ثور محفوظا، فالسند
قوي لوسلم من الانقطاع بين خالد ومعاذ، وقد غفل عنه في ` المجمع ` (1 /
188) ، فأعله بضعف بقية فقط!! وعزاه في ` الجامعين ` لـ (طب) عن عبد الله
بن بسر، وأظنه وهما. وأما قول ابن عبد الهادي عقبه: ` إسناد جيد `. فليس
بجيد بالنظر لطريقه الذي عنعن فيه بقية مع الانقطاع المشار إليه. ثم قال ابن
عبد الهادي: ` وروي من طرق عديدة مرسلا عن إبراهيم بن ميسرة ومحمد بن مسلم
وابن عيينة وغيرهم `. قلت: وقد رواه اللالكائي في ` شرح أصول السنة ` (1 /
35 / 1) عن ابن ميسرة موقوفا عليه. ورواه ابن الأعرابي في ` المعجم ` (193
/ 2) عن الحسن موقوفا. لكن فيه داود بن المحبر وهو كذاب.
১৮৬২। যে ব্যক্তি বিদ'আতীকে সম্মান করল সে ইসলামকে ধ্বংস করার জন্য সহযোগিতা করল।
হাদীসটি দুর্বল।
এটিকে ইবনু আদী (১/৯০), আবূ উসমান নুজাইরেমী `আলফাওয়াইদ` গ্রন্থে (২/৩৬) ও ইবনু আসাকির (৪/৩২২/২-১৪/১২৪/১) হাসান ইবনু ইয়াহইয়া খুশানী হতে, তিনি হিশাম ইবনু উরওয়া হতে, তিনি তার পিতা হতে, তিনি আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু হিসেবে বর্ণনা করেছেন। আর এ সূত্রেই হাদীসটিকে হারাবী (১/৯৯), ইবনু হিব্বান “আযযুয়াফা” গ্রন্থে (১/২৩৫) বর্ণনা করেছেন। তিনি খুশানী সম্পর্কে বলেনঃ তিনি খুবই মুনকারুল হাদীস। তিনি নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে যার ভিত্তি নেই তা বর্ণনা করেছেন। হাদীসটি বাতিল, বানোয়াট।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি খুবই দুর্বল। এ হাসান ইবনু ইয়াহইয়া মাতরূক যেমনটি দারাকুতনী প্রমুখ বলেছেন। তিনি কতিপয় বানোয়াট হাদীস বর্ণনা করেছেন যেগুলোর কোন কোনটি পূর্বে আলোচিত হয়েছে। দেখুন হাদীস নং (১৯৯)।
এ হাদীসটি সেই সব হাদীসগুলোর একটি যেগুলোকে খুশানীর জীবনীতে ইবনু আদী “আলকামেল” গ্রন্থে (১/৯০) উল্লেখ করেছেন। অতঃপর বলেছেনঃ এগুলো আমার দেখা তার হাদীসগুলোর মধ্যে সর্বাপেক্ষা বেশী মুনকার। আর এটিকে একমাত্র তার মাধ্যমেই জানা যায়। এ হাদীসের ব্যাপারে ইবনু আদী হতে এসব সমালোচনা বর্ণিত হয়েছে। বিষয়টি এতো সহজ না হলেও ইবনুল জাওযী “আলমাওয়ূয়াত” গ্রন্থে যা বর্ণনা করেছেন তার সাথে সামঞ্জস্যপূর্ণ নয়। কারণ তিনি ইবনু আদীর সূত্রে হাদীসটি উল্লেখ করে (১/২৭১) বলেছেনঃ ইবনু আদী বলেনঃ এটি বানোয়াট। খুশানী নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে ভিত্তিহীন হাদীস বর্ণনা করেন। এরূপ কথা ইবনুল ফুযায়েলের ভাষা হতে জানা যায়।
সম্ভবত ইবনু আদী কোন এক স্থানে অথবা অন্য কিতাবে উল্লেখ করেছেন। আল্লাহই বেশী জানেন। সুয়ুতী কতিপয় ইমামের উদ্ধৃতিতে তাদের উক্তিগুলো উল্লেখ করে তার সমালোচনা করেছেন। কিন্তু তা সত্ত্বেও এ ব্যক্তিকে তার মন্দ হেফযের কারণে দুর্বল হওয়া থেকে বের করে না ...।
অতঃপর সুয়ূতী বলেনঃ এ হাদীসের মুতাবায়াত করা হয়েছে। সেটিকে ইবনু আসাকির তার `তারীখ` গ্রন্থে (৮/৫০০/২) আবূ বাকর মুহাম্মাদ ইবনু আব্দুল বাকী হতে, তিনি হাসান ইবনু আলী হতে, তিনি আবু বাকর মুহাম্মাদ ইবনু মুহাম্মাদ ইবনু ওবাইদুল্লাহ ইবনু শিখখির হতে, তিনি আবুল ফাযল আব্বাস ইবনু ইউসুফ শাকলী হতে, তিনি আহমাদ ইবনু সুফইয়ান হতে, তিনি ইয়াহইয়া ইবনু বুকায়ের হতে, তিনি লাইস ইবনু সা'দ হতে, তিনি হিশাম ইবনু উরওয়া হতে বর্ণনা করেছেন। আর এটি শক্তিশালী মুতাবা'য়াত।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ মুতাবায়াত শক্তিশালী হওয়ার ব্যাপারে কোন সন্দেহ নেই। কারণ লাইস ইবনু সা'দ সম্মানিত ইমাম তার মত ব্যক্তির ব্যাপারে প্রশ্ন করার কিছু নেই। কিন্তু তার নিকট পর্যন্ত পৌছা সনদটি সহীহ কি সহীহ নয় তা যাচাই করা জরুরী। আমি এর বর্ণনাকারীদের জীবনী এক এক করে অনুসন্ধান করেছি। এরপর আব্বাস ইবনু ইউসুফ ছাড়া অন্য কারো দ্বারা সনদটির সমস্যা বের করা সম্ভব হয়নি। খাতীব বাগদাদী তার “তারীখ” গ্রন্থে (১২/১৫৩-১৫৪) অতঃপর ইবনু আসাকির (৮/৫০০/২) তার জীবনী উল্লেখ করেছেন এবং তারা উভয়েই তার থেকে বহু বর্ণনাকারীকে উল্লেখ করেছেন। তারা দু'জন তার সম্পর্কে ভাল-মন্দ কিছুই বলেননি। তবে শুধুমাত্র খাতীব বলেছেনঃ তিনি নেককার আবেদ ছিলেন।
আমি বিশ্বাস করি যে, বর্ণনার ক্ষেত্রে এ ভাষা একজনের নির্ভরযোগ্য হওয়ার প্রমাণ বহন করে না। কারণ নেককার আবেদ হওয়া, নির্ভরযোগ্য হওয়াকে অপরিহার্য করে না। কারণ কতই নেককার রয়েছেন যারা দুর্বল এবং মাতরূকদের অন্তর্ভুক্ত। এ কারণে সনদটি সহীহ হওয়ার ব্যাপারে হৃদয় পরিতৃপ্ত হচ্ছে না।
হাদীসটিকে ইবনুল জাওযী বিভিন্ন দুর্বল সনদে উল্লেখ করেছেন। যেগুলোর একটিকে আবু নুয়াইম `আলহিলইয়াহ` গ্রন্থে (৫/২১৮) আহমাদ ইবনু মুয়াবিয়্যাহ্ ইবনু বাকর হতে, তিনি ঈসা ইবনু ইউনুস হতে, তিনি সাওর ইবনু ইয়াযীদ হতে, তিনি খালেদ ইবনু মাদান হতে, তিনি আব্দুল্লাহ ইবনু বুসর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু হিসেবে বর্ণনা করেছেন। তিনি বলেনঃ খালেদের হাদীস হতে এটি গারীব। সাওর হতে ঈসা এককভাবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ আহমাদ সম্পর্কে ইবনুল জাওযী বলেনঃ তিনি বাতিল হাদীস বর্ণনা করেন। আর তিনি তা ইবনু আদী হতে গ্রহণ করেছেন। তার সম্পূর্ণ কথা হচ্ছেঃ এবং তিনি হাদীস চুরি করতেন।
অতঃপর হাদীসটিকে আবু নুয়াইম (৬/৯৭) ও ইবনু আসাকির (৯/২৪৭/১) ও ইউসুফ ইবনু আব্দুল হাদী “জামউল জুয়ুস অদদাসাকির আলা ইবনু আসাকির” গ্রন্থে (৯/১) দু'টি সূত্রে বাকিয়্যাহ ইবনুল অলীদ হতে, তিনি -আর হিলইয়্যাহ গ্রন্থে এবং ইবনু আসাকিরের নিকট এসেছে- সাওর হতে, তিনি খালেদ হতে, তিনি মুয়ায (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু হিসেবে বর্ণনা করেছেন।
অনুরূপভাবে ত্ববারানী “আলমুজামুল কাবীর” গ্রন্থে (২০/৯৬/১৮৮) বর্ণনা করেছেন। আর আবু নুয়াইম বলেছেনঃ বাকিয়্যাহ্ এরূপই বর্ণনা করেছেন। তিনি বলেনঃ মুয়ায (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে। আর ঈসা ইবনু ইউনুস হাদীসটিকে সাওর হতে, তিনি খালেদ হতে, তিনি আব্দুল্লাহ ইবনু বুসর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে অনুরূপভাবে বর্ণনা করেছেন। অর্থাৎ পূর্বের বর্ণনাটি। যেটির প্রত্যাখ্যাত হওয়ার বিষয়টি জেনেছেন।
কিন্তু কোন কোন বর্ণনায় বাকিয়্যার শ্রবণকে স্পষ্ট করা হয়েছে। সাওর হতে বাকিয়্যার শ্রবণ নিরাপদ হলে সনদটি শক্তিশালী হতো, যদি খালেদ আর মুয়াযের মধ্যে বিচ্ছিন্নতা থেকে নিরাপদে থাকত। (কিন্তু উভয়ের মধ্যে সনদে বিচ্ছিন্নতা রয়েছে)।
ইবনু আব্দুল হাদী যে বলেছেনঃ সনদটি ভাল, তার এ কথা ভাল নয়, যার প্রমাণ মিলে তার সূত্রে দৃষ্টি দেয়ার দ্বারা। কারণ এতে বাকিয়্যাহ কর্তৃক আন আন করে বর্ণিত হয়েছে, এছাড়া খালেদ আর মুয়াযের মধ্যে বিচ্ছিন্নতার বিষয়টি তো আছেই। অতঃপর ইবনু আব্দুল হাদী বলেনঃ মুসলিম ও ইবনু ওয়াইনাহ প্রমুখ হতে বর্ণিত হয়েছে।
আমি (আলবানী) বলছিঃ লালকাঈ `শারহু উসুলুস সুন্নাহ` গ্রন্থে (১/৩৫/১) হাদীসটিকে ইবনু মাইসারাহ হতে মওকুফ হিসেবে বর্ণনা করেছেন। আর ইবনুল আরাবী “আলমুজাম” গ্রন্থে (২/১৯৩) হাসান হতে মওকুফ হিসেবে বর্ণনা করেছেন। কিন্তু এর সনদে দাউদ ইবনুল মুহাব্বার রয়েছেন যিনি মিথ্যুক।
` احتجموا لخمس عشرة أولسبع عشرة أوتسع عشرة أوإحدى وعشرين، لا يتبيغ بكم
الدم فيقتلكم `.
ضعيف.
رواه ابن جرير في ` تهذيب الآثار ` (2 / 116) والبزار (3023 -
كشف الأستار) والطبراني (3 / 108 / 2) والجرجاني (286) عن يعقوب القمي
عن ليث عن مجاهد عن ابن عباس مرفوعا.
قلت: وهذا إسناد ضعيف، ليث هو ابن
أبي سليم، وهو ضعيف لسوء حفظه واختلاطه. ويعقوب القمي، وهو ابن عبد الله
صدوق يهم كما في ` التقريب `. وإنما يصح الحديث من رواية أنس من فعله صلى
الله عليه وسلم دون قوله: ` لا يتبيغ `. وهو مخرج في ` الصحيحة ` (908)
ومن قوله نحوه دون: (التبيغ) ، فانظر رقم (1847) ومن حديث أبي هريرة نحوه
رقم (622) وليس فيها كلها قوله: ` لخمس عشرة `، لكن جملة (التبيغ) قد
جاءت من طريق أخرى بلفظ: ` إذا هاج بأحدكم الدم … `. خرجته في ` الصحيحة
` برقم (2747) . وقد رواه البزار من طريق الليث أيضا كما في ` المجمع ` (5
/ 93) وفاته أنه في ` كبير ` الطبراني فلم يعزه إليه، وقلده السيوطي في
` الجامع ` فلم يعزه إلا للبزار وأبي نعيم في ` الطب `! وله شاهد قاصر
، يرويه ابن ماجة، ولكنه واه، ولفظه: ` من أراد الحجامة فليتحر سبعة عشر
أوتسعة عشر أوإحدى وعشرين ولا يتبيغ بأحدكم الدم فيقتله `.
১৮৬৩। তোমরা শিংগা (রক্তমোক্ষম) লাগাও পনেরো, অথবা সতের, অথবা উনিশ, অথবা একুশ তারিখে। তাহলে রক্ত আন্দোলিত (অস্থির) হয়ে তা তোমাদের হত্যার কারণ হয়ে দাঁড়াবে না।
হাদীসটি দুর্বল।
এটিকে ইবনু জারীর “তাহযীবুল আসার” গ্রন্থে (২/১১৬), বাযযার (৩০২৩), ত্ববারানী (৩/১০৮/২) ও জুরজানী (২৮৬) ইয়া'কুব কুম্মী হতে, তিনি লাইস হতে, তিনি মুজাহিদ হতে, তিনি আবদুল্লাহ ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু হিসেবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি দুর্বল। কারণ লাইস হচ্ছেন ইবনু আবী সুলাইম, তিনি দুর্বল তার মন্দ হেফয এবং মস্তিষ্ক বিকৃতির কারণে। ইয়াকুব কুম্মী হচ্ছেন ইবনু আব্দুল্লাহ, তিনি সত্যবাদী কিন্তু সন্দেহকারী। যেমনটি হাফিয ইবনু হাজার “আত-তাকরীব” গ্রন্থে বলেছেন।
হাদীসটি আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর বর্ণনায় রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর কর্ম হিসেবে সহীহ, তবে শেষবাক্য (لا يتبيغ) ছাড়া। এটির `সিলসিলাহ সহীহাহ` গ্রন্থে (৯০৮) তাখরীজ করেছি। তার কথা হিসেবে শেষবাক্য (لا يتبيغ ...) ছাড়াও সহীহ, দেখুন হাদীস নং (১৮৪৭)। আর আবু হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর হাদীস হতে অনুরূপ হাদীস (নং ৬২২) দেখুন। এগুলোর কোনটিকেই (لخمس عشرة) এ শব্দটি আসেনি। তবে শেষবাক্য (تبيغ) সহকারে অন্য সূত্রে নিম্নোক্ত ভাষায় হাসান হিসেবে বর্ণিত হয়েছেঃ
إذا هاج بأحدكم الدم ...
তোমাদের কারো রক্ত যখন ভড়কে যাবে তখন সে যেন রক্তমোক্ষম করে, কারণ কারো রক্ত আন্দোলিত (অস্থির) হয়ে গেলে তা তাকে হত্যার কারণ হয়ে দাড়াবে।
এটিকে আমি “সিলসিলাহ্ সহীহাহ” গ্রন্থে (নং ২৭৪৭) তাখরীজ করেছি।
হাদীসটিকে বাযযার লাইসের সূত্রেও বর্ণনা করেছেন যেমনটি “আলমাজমা” গ্রন্থে (৫/৯৩) এসেছে। তার থেকে হাদীসটি যে ত্ববারানী “আলমুজামুল কাবীর” গ্রন্থে এসেছে তা ছুটে গেছে। আর এর একটি শাহেদ রয়েছে যেটিকে ইবনু মাজাহ্ বর্ণনা করেছেন। কিন্তু দুর্বল। সেটি হচ্ছে নিম্নের হাদীসটিঃ (দেখুন পরেরটি)
` من أراد الحجامة فليتحر سبعة عشر أوتسعة عشر أوإحدى وعشرين ولا يتبيغ
بأحدكم الدم فيقتله `.
ضعيف جدا.
قال ابن ماجة (2 / 351) : حدثنا سويد بن سعيد حدثنا عثمان بن
مطر عن زكريا بن ميسرة عن النهاس بن قهم عن أنس بن مالك أن رسول الله صلى
الله عليه وسلم قال: فذكره. قلت: وهذا إسناد ضعيف جدا كل من دون أنس ضعيف
، وبعضهم أشد ضعفا من بعض. الأول: النهاس بن قهم. قال الذهبي في ` الضعفاء
`: ` تركه القطان، وضعفه النسائي `.
وقال الحافظ في ` التقريب `: ` ضعيف
`. الثاني: زكريا بن ميسرة، قال الحافظ: ` مستور `. الثالث: عثمان بن مطر
، قال الذهبي: ` ضعفوه `. وقال الحافظ: ` ضعيف `. الرابع: سويد بن سعيد
. قال الذهبي: ` قال أحمد: متروك الحديث. وقال ابن معين: كذاب، وقال
النسائي: ليس بثقة. وقال البخاري: كان قد عمي فلقن ما ليس من حديثه. وقال
أبو حاتم: صدوق كثير التدليس. وقال الدارقطني: ثقة، غير أنه كبر، فربما
قرىء عليه حديث فيه النكارة فيجيزه `. وقال الحافظ: ` صدوق في نفسه، إلا
أنه عمي فصار يتلقن ما ليس من حديثه، وأفحش فيه ابن معين القول `. ومن هذا
البيان تعلم أن اقتصار البوصيري في ` الزوائد ` على إعلال الحديث بالنهاس فقط،
قصور شديد. وقوله: ` رواه الشيخان وأبو داود والترمذي من حديث أنس أيضا
، كما رواه ابن ماجة خلا قوله: ` يتبيغ بأحدكم ` إلى آخره. ورواه البزار في
` مسنده ` من حديث ابن عباس، كما رواه ابن ماجة. ورواه الحاكم في ` المستدرك
` من طريق معاذ عن أنس، وقال: صحيح على شرط الشيخين `. فيه أمور:
أولا: أنه لم يخرجه الشيخان عن أنس أصلا. ثانيا: أنه عن أنس من فعله صلى الله
عليه وسلم كما سبق التنبيه عليه في الحديث الذي قبله. ثالثا: أني لم أره في
` المستدرك ` إلا من فعله صلى الله عليه وسلم، وهو الذي ذكرت فيما قبله أنه
مخرج في ` الصحيحة ` (908) . والله أعلم. قلت: لكن الحديث الذي قبله
بمعناه، فينجوبه من الضعف الشديد الذي دل عليه إسناده، لكن قوله: ` لخمس
عشرة ` منكر، لتفرد الضعيف به كما تقدم، والله أعلم.
১৮৬৪। যে শিংগা লাগাতে চায় সে যেন সতের, অথবা উনিশ, অথবা একুশ তারিখগুলোকে অনুসন্ধান করে। (কারণ) তাহলে রক্ত অস্থির হয়ে তা তোমাদের কাউকে হত্যার কারণ হয়ে যাবে না।
হাদীসটি খুবই দুর্বল।
এটিকে ইবনু মাজাহ (২/৩৫১) সুওয়াইদ ইবনু সাঈদ হতে, তিনি উসমান ইবনু মাতার হতে, তিনি যাকারিয়া ইবনু মাইসারাহ হতে, তিনি নাহহাস ইবনু কাহম হতে, তিনি আনাস ইবনু মালেক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন যে, রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনঃ ...।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি খুবই দুর্বল। আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর নিচের সকল বর্ণনাকারী দুর্বল। একজন অপরজন হতে বেশী দুর্বল।
১। নাহহাস ইবনু কাহম সম্পর্কে হাফিয যাহাবী “আযযুয়াফা” গ্রন্থে বলেনঃ তাকে ইবনু কাত্তান ত্যাগ করেছেন, আর নাসাঈ দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন। হাফিয ইবনু হাজার `আততাকরীব` গ্রন্থে বলেনঃ তিনি দুর্বল।
২। যাকারিয়া ইবনু মাইসারাহ সম্পর্কে হাফিয ইবনু হাজার বলেনঃ তিনি মাসতুর (তার অবস্থা অস্পষ্ট)।
৩। উসমান ইবনু মাতার সম্পর্কে হাফিয যাহাবী বলেনঃ মুহাদ্দিসগণ তাকে দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন। হাফিয ইবনু হাজার বলেনঃ তিনি দুর্বল।
৪। সুওয়াইদ ইবনু সাঈদ সম্পর্কে হাফিয যাহাবী বলেনঃ ইমাম আহমাদ বলেনঃ তিনি মাতরূকুল হাদীস। ইবনু মাঈন বলেনঃ তিনি মিথ্যুক। নাসাঈ বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্য নন। ইমাম বুখারী বলেনঃ তিনি অন্ধ হয়ে গিয়েছিলেন, ফলে তাকে যেটি তার হাদিস নয় সেটিকে ধরিয়ে দিতে হতো। আবু হাতিম বলেনঃ তিনি সত্যবাদী, বহু তাদলীসকারী। দারাকুতনী বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্য, তবে তিনি বৃদ্ধ হয়ে গিয়েছিলেন। এর ফলে তার নিকট মুনকার হাদীস পাঠ করা হলেও তিনি তার অনুমোদন দিয়ে দেন।
হাফিয ইবনু হাজার বলেনঃ তিনি নিজে সত্যবাদী। তবে তিনি অন্ধ হয়ে গিয়েছিলেন, ফলে তাকে যেটি তার হাদীস নয় সেটিকে ধরিয়ে দিতে হতো। তার ব্যাপারে ইবনু মা'ঈন মারাত্মক মন্তব্য করেছেন। উপরোক্ত বর্ণনা থেকে জানা যাচ্ছে যে, বুসয়রী যে “আযযাওয়াইদ” গ্রন্থে হাদীসটির সমস্যা হিসেবে শুধুমাত্র নাহহাসকে সমস্যা হিসেবে চিহ্নিত করেছেন, তা যথেষ্ট নয়।
আবার তিনি যে বলেছেনঃ হাদীসটিকে বুখারী, মুসলিম, আবু দাউদ ও তিরমিযী আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতেও বর্ণনা করেছেন, যেমন ইবনু মাজাহ শেষাংশ ছাড়া বর্ণনা করেছেন। আর বাযযার হাদীসটিকে তার “মুসনাদ’ গ্রন্থে আব্দুল্লাহ ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন, যেমন এটিকে ইবনু মাজাহ্ বর্ণনা করেছেন। আর হাকিম `আলমুসতাদরাক` গ্রন্থে মু'য়ায সূত্রে আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করে বলেছেনঃ বুখারী ও মুসলিমের শর্তানুযায়ী সহীহ।
তার এ বক্তব্যের ব্যাপারে কতিপয় বিষয় ধরার রয়েছেঃ
১। হাদীসটিকে ইমাম বুখারী ও মুসলিম আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে আসলেই বর্ণনা করেননি।
২। আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) সূত্রে রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে তার কর্ম হিসেবে বর্ণিত হয়েছে যেমনটি পূর্বে সেদিকে ইঙ্গিত করা হয়েছে।
৩। “মুসতাদরাক” গ্রন্থে শুধুমাত্র রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর কর্ম হিসেবে বর্ণিত হয়েছে। সেটিকে “সিলসিলাহ সহীহাহ” গ্রন্থে (৯০৮) উল্লেখ করেছি।
আমি (আলবানী) বলছি তবে অনুরূপ ভাবার্থের পূর্বের হাদীসটির কারণে এর সনদটি বেশী দুর্বল হওয়ার গণ্ডি থেকে রক্ষা পেয়েছে। কিন্তু পনেরো দিনের কথাটি হাদীসের মধ্যে মুনকার এটুকু এককভাবে দুর্বল বর্ণনাকারী কর্তৃক বর্ণিত হওয়ার কারণে।
` سيد بنى دارا، واتخذ مأدبة، وبعث داعيا، فالسيد الجبار، والمأدبة القرآن، والدار الجنة، والداعي أنا، فأنا اسمي في القرآن محمد، وفي الإنجيل أحمد، وفي التوراة أحيد، وإنما سميت أحيد لأني أحيد عن أمتي نار جهنم، وأحبوا العرب بكل قلوبكم `.
موضوع.
رواه ابن عدي (16 / 2) عن إسحاق بن بشر الخراساني حدثنا ابن جريج
عن عطاء عن ابن عباس مرفوعا، وقال: ` إسحاق روى عن ابن جريج والثوري
وغيرهما ما لا يرويه غيره، وأحاديثه غير محفوظة كلها، وهي منكرة، إما
إسنادا أومتنا لا يتابعه أحد عليه `. وقال الذهبي: ` تركوه، وكذبه علي بن
المديني والدارقطني، وقال ابن حبان: لا يحل حديثه إلا على جهة التعجب. قلت
: يروي العظائم عن ابن إسحاق وابن جريج والثوري `. قلت: والجملة الأخيرة
منه جاءت في الحديث المتقدم برقم (1838) .
১৮৬৫। সাইয়্যিদ একটি ঘর তৈরি করেন, খাদ্য তৈরি করেন এবং আহবানকারীকে প্রেরণ করেন। সাইয়্যিদ হচ্ছেন জাব্বার, খাদ্য হচ্ছে কুরআন, আর ঘর হচ্ছে জান্নাত, আর দাঈ হচ্ছেন আমি। কুরআনে আমার নাম মুহাম্মাদ, ইঞ্জীলে আহমাদ, তাওরাতে আহইয়াদ। আমার নাম রাখা হচ্ছে আহইয়াদ, কারণ আমি আমার উম্মাতকে জাহান্নামের আগুন থেকে বের করব। তোমরা আরবদেরকে তোমাদের প্রতিটি অন্তর দ্বারা ভালবাস।
হাদীসটি বানোয়াট।
এটিকে ইবনু আদী (২/১৬) ইসহাক ইবনু বিশর খুরাসানী হতে, তিনি ইবনু জুরায়েয হতে, তিনি আতা হতে, তিনি আব্দুল্লাহ ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু হিসেবে বর্ণনা করেছেন।
ইবনু আদী বলেনঃ ইসহাক ইবনু জুরায়েয সাওরী প্রমুখ হতে এমন কিছু বর্ণনা করেছেন যা অন্য কেউ বর্ণনা করেননি। তার কোন হাদীসই নিরাপদ নয়। সেগুলো মুনকার, হয় সনদের দিক দিয়ে, না হয় ভাষার দিক দিয়ে, কেউ সেগুলোর ক্ষেত্রে তার মুতাবায়াত করেননি।
হাফিয যাহাবী বলেনঃ মুহাদ্দিসগণ তাকে ত্যাগ করেছেন। আর আলী ইবনুল মাদীনী ও দারাকুতনী তাকে মিথ্যুক আখ্যা দিয়েছেন। ইবনু হিব্বান বলেনঃ আশ্চর্যাম্বিত হওয়ার উদ্দেশ্যে ছাড়া তার হাদীস বর্ণনা করাই বৈধ নয়। আমি বলছিঃ তিনি ইবনু জুরায়েয ও সাওরী হতে বহু অলৌকিক বস্তু বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ হাদীসের শেষ বাক্যটি (নং ১৮৩৮) হাদীসের মধ্যে আলোচিত হয়েছে।
` من لا حياء له فلا غيبة له `.
ضعيف جدا.
رواه ابن عساكر (15 / 306 / 1) من طريق أبي بكر الخرائطي:
حدثنا محمد بن عبد الرحمن السراج الرقي: حدثنا سليمان بن عبد الرحمن بن شرحبيل
حدثنا الحكم بن يعلى بن عطاء المحاربي حدثنا عبد الله بن وهب عن ابن جريج عن
عطاء [عن] ابن عباس مرفوعا. قلت: وهذا سند ضعيف جدا، ابن جريج مدلس
وقد عنعنه. والحكم بن يعلى، قال أبو حاتم: ` متروك الحديث منكر الحديث `.
وقال أبو زرعة: ` ضعيف الحديث منكر الحديث `. كما في ` الجرح والتعديل ` (
1 / 2 / 130 - 131) . وقال البخاري في ` التاريخ الكبير `: ` قال لي سليمان
بن عبد الرحمن (يعني الراوي لهذا الحديث عنه) : عنده عجائب، منكر الحديث
، ذاهب، تركت أنا حديثه `. كذا في ` اللسان `. والحديث أورده السيوطي في
` الجامع ` من رواية الخرائطي في ` مساوىء الأخلاق ` وابن عساكر عن ابن عباس.
وبيض له المناوي!
১৮৬৬। যার লজ্জা নাই তার গীবাতও নাই।
হাদীসটি খুবই দুর্বল।
এটিকে ইবনু আসাকির আবু বাকর খারাইতী সূত্রে মুহাম্মাদ ইবনু আব্দুর রহমান সিরাজ রাকী হতে, তিনি সুলাইমান ইবনু আব্দুর রহমান ইবনু শুরাহবীল হতে, তিনি হাকাম ইবনু ইয়ালা ইবনু আতা মুহারেবী হতে, তিনি তিনি আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু হিসেবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি খুবই দুর্বল। ইবনু জুরায়েয মুদাল্লিস আনআন করে বর্ণনা করেছেন। আর হাকাম ইবনু ইয়ালা সম্পর্কে আবু হাতিম বলেনঃ তিনি মাতরূকুল হাদীস, মুনকারুল হাদীস। আবু যুর'আহ বলেনঃ তিনি হাদীসের ক্ষেত্রে দুর্বল, মুনকারুল হাদীস। যেমনটি `আরজারহু অততা'দীল` গ্রন্থে (১/২/১৩০-১৩১) এসেছে।
ইমাম বুখারী “আততারীখুল কাবীর” গ্রন্থে বলেনঃ আমাকে সুলাইমান ইবনু আব্দুর রহমান (এ হাদীসের বর্ণনাকারী) বলেনঃ তার নিকট আজব আজব বস্তু রয়েছে। তিনি মুনকারুল হাদীস, যাহেব, আমি তার হাদীসকে ত্যাগ করেছি। `আললিসান` গ্রন্থে এরূপই এসেছে।
` كان يحتجم على هامته وبين كتفيه، ويقول: من أهراق من هذه الدماء فلا يضره
أن لا يتداوى بشيء لشيء `.
ضعيف.
أخرجه أبو داود (2 / 151) وابن ماجة (2 / 351) عن الوليد بن
مسلم: حدثنا ابن ثوبان عن أبيه عن أبي كبشة الأنماري مرفوعا. وهذا إسناد
حسن لولا ما فيه من الانقطاع، فإن ابن ثوبان هو عبد الرحمن بن ثابت ابن ثوبان
العنسي الدمشقي. لم يذكروا لأبيه سماعا من أحد من الصحابة وقد ذكره ابن حبان
في أتباع التابعين من ` الثقات ` (6 / 125) وكذا قال في ` التقريب `: ` إنه
ثقة من السادسة `. يعني من الطبقة التي لم يثبت لهم لقاء أحد من الصحابة. كما
صرح بذلك في المقدمة. وكأن المناوي لم يتنبه لهذه العلة، فحسن إسناده في
` التيسير `، وقد كنت أوردته في ` صحيح الجامع `، فلا أدري أكان ذلك عن وهم
، أم لشاهد لا يحضرني الآن، غير جملة: (بين كتفيه) ، فلها شاهد مخرج في
` الصحيحة ` (908) .
১৮৬৭। তিনি তার মাথা এবং তার দু’স্কন্ধের মাঝে শিংগা লাগাতেন এবং বলতেনঃ যে ব্যক্তি এ রক্তগুলো প্রবাহিত করবে সে অন্য কোন সমস্যার জন্য কোন ঔষধ ব্যবহার না করলেও (কিছুই) তার কোন ক্ষতি করতে পারবে না।
হাদীসটি দুর্বল।
এটিকে আবু দাউদ (২/১৫১) ও ইবনু মাজাহ (২/৩৫১) অলীদ ইবনু মুসলিম হতে, তিনি ইবনু সাওবান হতে, তিনি তার পিতা হতে, তিনি আবূ কাবাশাহ আনমারী হতে মারফু হিসেবে বর্ণনা করেছেন।
সনদটি হাসান হিসেবে গণ্য হতো যদি এর মধ্যে বিচ্ছিন্নতা না থাকত। কারণ ইবনু সাওবান হচ্ছে আব্দুর রহমান ইবনু সাবেত ইবনু সাওবান আনাসী দেমাস্কী। মুহাদ্দিসগণ উল্লেখ করেননি যে, কোন সাহাবী হতে তার পিতার শ্রবণ সাব্যস্ত হয়েছে। ইবনু হিব্বান তাকে “আসসিকাত” গ্রন্থে (৬/১২৫) তাবে তাবেঈগণের মধ্যে উল্লেখ করেছেন। “আত-তাকরীব” গ্রন্থে ইবনু হাজার এরূপই বলেছেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্য ষষ্ঠ স্তরে। অর্থাৎ যারা এ স্তরের তাদের সাহাবীগণের সাথে সাক্ষাৎ ঘটেনি, যেমনটি তিনি ভূমিকার মধ্যে সে সম্পর্কে স্পষ্ট করেছেন।
এ সমস্যা সম্পর্কে মানবী সতর্ক না হওয়ার কারণে “আততাইসীর” গ্রন্থে সনদটিকে হাসান আখ্যা দিয়েছেন। আমি (আলবানী) এটিকে `সহীহ জামেউস সাগীর` গ্রন্থে উল্লেখ করেছিলাম। জানি না সন্দেহের কারণে নাকি কোন শাহেদ থাকার কারণে? এ মুহুর্তে আমার স্মরণে আসছে না। তবে “তার দু’স্কন্ধের মাঝে” এ অংশটুকুর শাহেদ থাকার কারণে আমি এটাকে `সিলসিলাহ সহীহাহ` গ্রন্থে (৯০৮) উল্লেখ করেছি।
` حبك الشيء يعمي ويصم `.
ضعيف.
أخرجه البخاري في ` التاريخ الكبير ` (2 / 1 / 157) وأبو داود (
5130) وأحمد (5 / 194 و6 / 650) وعبد بن حميد في ` المنتخب من المسند ` (
ق 28 / 1) والدولابي في ` الكنى ` (1 / 101) وابن عدي في ` الكامل ` (ق
37 / 2) والقضاعي في ` مسند الشهاب ` (12 / 1) وأبو بكر الكلاباذي في `
مفتاح المعاني ` (ق 193 / 1) وابن عساكر في ` تاريخ دمشق ` (5 / 178 / 2
و3 / 249 / 2) وابن الجوزي في ` ذم الهو ى ` (ص 20) من طريق الخرائطي عن أبي
بكر بن أبي مريم عن خالد بن محمد عن بلال بن أبي الدرداء عن أبي الدرداء عن
النبي صلى الله عليه وسلم.. فذكره. قلت: وهذا إسناد ضعيف، من أجل أبي بكر
هذا، فإنه كان اختلط مع سوء حفظ، وقد اختلفوا عليه في إسناده، فرواه جماعة
عنه هكذا مرفوعا، ورواه بعضهم عنه موقوفا. فقال أحمد عقب الحديث: `
وحدثناه أبو اليمان لم يرفعه `. وقال البخاري عقبه أيضا: ` وقال الوليد: عن
أبي بكر عن بلال عن أبي الدرداء عن النبي صلى الله عليه وسلم `. فأسقط من
السند خالد بن محمد، وهو الثقفي. وأبو بكر مع ضعفه المذكور، قد خولف في
رفعه. فرواه حريز بن عثمان عن بلال بن أبي الدرداء عن أبي الدرداء قال: فذكره
موقوفا عليه. وتابعه أم الدرداء عن أبي الدرداء به. أخرجه البخاري في
` التاريخ `، فقال: ` وقال سعيد بن أبي أيوب عن حميد بن مسلم سمع أم الدرداء
`. وقد وصله البخاري، وعنه ابن عساكر في ترجمة حميد هذا (5 / 178 / 2)
ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا، وكذلك صنع ابن أبي حاتم في كتابه (1 / 2 / 229) . وفي سند الموقوف قبله بكر بن فرقد أبو أمية التميمي، ولم أجد من ترجمه.
وعلى كل حال فالموقوف أقوى من المرفوع، ولهذا قال السيوطي في `
الدرر ` كأصله: ` الوقف أشبه `. كما نقله المناوي في ` الفيض `. نعم قد رواه
عبد الله بن هانىء مرفوعا، فقال: أخبرنا أبي أخبرنا إبراهيم بن أبي عبلة عن
بلال بن أبي الدرداء به مرفوع. أخرجه ابن عساكر (17 / 209 / 2) . لكن ابن
هانىء هذا قال الذهبي: ` اتهم بالكذب `. وعزاه في ` الجامع الكبير ` (2 / 13) لابن عساكر عن أبي حنيفة عن عبد الله بن أنيس، والخرائطي في ` اعتلال
القلوب ` عن أبي برزة الأسلمي.
১৮৬৮। কোন বস্তুকে তোমার ভালোবাসা অন্ধ এবং বধির বানিয়ে ফেলে।
হাদীসটি দুর্বল।
এটিকে ইমাম বুখারী `আততারীখুল কাবীর” গ্রন্থে (২/১/১৫৭), আবু দাউদ (৫১৩০), আহমাদ (৫/১৯৪, ৬/৬৫০), আবূদ ইবনু হুমায়েদ “আলমুনতাখাব মিনাল মুসনাদ’ গ্রন্থে (কাফ ২৮/১), দূলাবী `আলকুনা` গ্রন্থে (১/১০১), ইবনু আদী “আলকামেল” গ্রন্থে (কাফ ৩৭/২), কাযাঈ “মুসনাদুশ শিহাব” গ্রন্থে (১/১২), আবূ বাকর কালাবাযী “মিফতাহুল মায়ানী” গ্রন্থে (কাফ ১/১৯৩), ইবনু আসাকির “তারীখু দেমাস্ক” গ্রন্থে (৫/১৭৮/২, ৩/২৪৯/২) ও ইবনুল জাওযী “যাম্মুল হাঅ” গ্রন্থে (পৃঃ ২০) খারায়েতী সূত্রে আবু বাকর ইবনু আবূ মারইয়াম হতে, তিনি খালেদ ইবনু মুহাম্মাদ হতে, তিনি বিলাল ইবনু আবুদ দারাদা হতে, তিনি আবুদ দারাদা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ আবূ বাকরের কারণে সনদটি দুর্বল। কারণ মন্দ হেফযের অধিকারী হওয়া সত্ত্বেও তার মস্তিষ্ক বিকৃতি ঘটেছিল। বর্ণনাকারীগণ তার সনদের ব্যাপারে মতভেদ করেছেন। একদল তার থেকে এভাবে মারফু' হিসেবে বর্ণনা করেছেন। আর তাদের কেউ কেউ তার থেকে মওকুফ হিসেবে বর্ণনা করেছেন। ইমাম আহমাদ হাদীসটির পরক্ষণেই বলেনঃ আবুল ইয়ামান হাদীসটিকে মারফু হিসেবে বর্ণনা করেননি।
ইমাম বুখারী বলেনঃ অলীদ বলেনঃ আবু বাকর হতে, তিনি বিলাল হতে, তিনি আবুদ দারদা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেছেন। সনদ হতে খালেদ ইবনু মুহাম্মাদ সাকাফীকে ফেলে দেয়া হয়েছে।
আবু বাকর দুর্বল হওয়া সত্ত্বেও, হাদীসটিকে মারফু হিসেবে বর্ণনা করার ক্ষেত্রে তার বিরোধিতা করা হয়েছে। হুরাইজ ইবনু উসমান হাদীসটিকে বিলাল ইবনু আবুদ দারদ হতে, তিনি আবুদ দারদা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন। তিনি বলেনঃ ...। তার থেকে মওকুফ হিসেবে উল্লেখ করা হয়েছে।
উম্মুদ দারদা আবুদ দারদা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে (মওকুফ হিসেবে) বর্ণনা করার ক্ষেত্রে তার (হুরায়েযের) মুতাবায়াত করেছেন।
এটিকে ইমাম বুখারী `আততারীখ` গ্রন্থে উল্লেখ করে বলেছেনঃ সাঈদ ইবনু আবূ আইউব বলেনঃ হুমায়েদ ইবনু মুসলিম হতে, তিনি উম্মুদ দারদা হতে শুনেছেন। ইমাম বুখারী এটিকে মওসূল হিসেবে বর্ণনা করেছেন। আর তার থেকে ইবনু আসাকির হুমায়েদের জীবনীতে (৫/১৭৮/২) উল্লেখ করেছেন। কিন্তু তার সম্পর্কে ভাল-মন্দ কিছুই উল্লেখ করেননি।
ইবনু আবী হাতিমও তার কিতাবে (১/২/২২৯) তাই করেছেন। এর পূর্বে মওকৃফের সনদে বাকর ইবনু ফারকাদ আবু উমাইয়্যাহ্ তামীমী রয়েছেন। কে তার জীবনী উল্লেখ করেছেন আমি পাচ্ছি না। সর্বাবস্থায় মারফু হওয়ার চেয়ে মওকুফ হওয়ায় বেশী শক্তিশালী। এ কারণেই সুয়ূতী বলেছেনঃ এটি মওকুফ হওয়ার সাথেই বেশী সাদৃশ্যপূর্ণ। যেমনটি মানবী তার থেকে `আলফায়েয` গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন।
হ্যাঁ, হাদিসটিকে আবদুল্লাহ ইবনু হানী তার পিতা হতে, তিনি ইবরাহীম ইবনু আবূ আবলাহ হতে, তিনি বিলাল ইবনু আবুদ দারাদা হতে মারফূ' হিসেবে বর্ণনা করেছেন। এটিকে ইবনু আসাকির (১৭/২০৯/২) বর্ণনা করেছেন। কিন্তু এ ইবনু হানী সম্পর্কে হাফিয যাহাবী বলেনঃ তাকে মিথ্যা বর্ণনা করার দোষে দোষী করা হয়েছে।
` أحد جبل يحبنا ونحبه، فإذا أحببتموه فكلوا من شجره، ولومن عضاهه `.
ضعيف.
رواه ابن شبة في ` تاريخ المدينة ` (1 / 84) عن سفيان بن حمزة،
والطبراني في ` الأوسط ` (1 / 103 / 2 - مصورة الجامعة) عن عبد العزيز بن محمد
الدراوردي عن كثير بن زيد عن عبد الله بن تمام مولى أم حبيبة عن زينب بنت نبيط
عن أنس بن مالك مرفوعا، وقال: ` لم يروعن زينب إلا بهذا الإسناد تفرد
به الدراوردي `. قلت: وهو ثقة، لكن قد تابعه ابن حمزة كما ترى، فالعلة من
ابن تمام هذا فقد أورده ابن أبي حاتم (2 / 2 / 19) بهذه الرواية ولم يذكر
فيه جرحا، وأما الهيثمي فأعله بغيره فقال (4 / 14) : ` رواه الطبراني في `
الأوسط ` وفيه كثير بن زيد، وثقه أحمد وغيره، وفيه كلام `. وأقره
المناوي! وإنما العلة من شيخ كثير كما ذكرنا. ثم رواه ابن شبة عن عبد العزيز
عن ابن سمعان عن عبد الله بن محمد بن عبيد عن زينب بنت نبيط به.
وهذا إسناد
واه بمرة، عبد العزيز وهو ابن عمران المدني متروك، ومثله بل وأسوأ منه ابن
سمعان، واسمه عبد الله بن زياد اتهمه بالكذب أبو داود وغيره. وشيخه ابن
عبيد لم أعرفه. وقد تقدمت أحاديث أخرى في (أحد) وهذه أرقامها: (1618
و1819) وراجع التنبيه المذكور في آخر الكلام على الحديث الأول.
১৮৬৯। উহুদ পাহাড় আমাদেরকে ভালবাসে আর আমরা তাকে ভালবাসি। অতএব তোমরা যদি তাকে ভালবেসে থাক তাহলে তোমরা তার গাছ থেকে ভক্ষণ কর, যদিও তার কাঁটাযুক্ত বড় বৃক্ষ থেকে হয়।
হাদীসটি দুর্বল।
এটিকে ইবনু শাব্বাহ “তারীখুল মাদীনাহ” গ্রন্থে (১/৮৪) সুফইয়ান ইবনু হামযাহ্ হতে, ত্ববারানী “আলআওসাত” গ্রন্থে (১/১০৩/২) আব্দুল আযীয ইবনু মুহাম্মাদ দারাওরদী হতে, তিনি কাসীর ইবনু যায়েদ হতে, তিনি উম্মু হাবীবার দাস আবদুল্লাহ ইবনু তাম্মাম হতে, তিনি যাইনাব বিনতু নুবায়েত হতে, তিনি আনাস ইবনু মালেক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু হিসেবে বর্ণনা করেছেন। ত্ববারানী বলেনঃ যাইনাব হতে একমাত্র এ সনদেই বর্ণনা করা হয়েছে। দারাওরদী এটিকে এককভাবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তিনি নির্ভরযোগ্য। ইবনু হামযাহ তার মুতাবায়াত করেছেন যেমনটি দেখছেন। সমস্যা হচ্ছে ইবনু তাম্মাম হতে। তাকে ইবনু আবী হাতিম (২/২/১৯) এ বর্ণনায় উল্লেখ করে তার সম্পর্কে মন্দ কিছু উল্লেখ করেননি। আর হাইসামী তাকে নয় অন্যকে দিয়ে হাদীসটির সমস্যা বর্ণনা করেছেন। তিনি (৪/১৪) বলেনঃ ত্ববারানী হাদীসটিকে “আলআওসাত” গ্রন্থে বর্ণনা করেছেন। তার সনদে কাসীর ইবনু যায়েদ রয়েছেন। তাকে ইমাম আহমাদ প্রমুখ নির্ভরযোগ্য আখ্যা দিয়েছেন। আর তার ব্যাপারে সমালোচনা রয়েছে। আর মানবী তাকে সমর্থন করেছেন। আসলে সমস্যা হচ্ছে কাসীরের শাইখ থেকেই যেমনটি উল্লেখ করেছি।
অতঃপর ইবনু শাব্বাহ হাদীসটিকে আব্দুল আযীয হতে, তিনি ইবনু সাম'আন হতে, তিনি আব্দুল্লাহ ইবনু মুহাম্মাদ ইবনু ওবায়েদ হতে, তিনি যাইনাব বিনতু নুবায়েত হতে বর্ণনা করেছেন।
কিন্তু এ সনদটি একেবারে দুর্বল। আব্দুল আযীয হচ্ছেন ইবনু ইমরান মাদানী, তিনি মাতরূক। আর ইবনু সাম'আন তার মতই বা তার চেয়েও নিকৃষ্ট, এর নাম হচ্ছে আব্দুল্লাহ ইবনু যিয়াদ। তাকে আবু দাউদ প্রমুখ মিথ্যা বর্ণনা করার দোষে দোষী করেছেন।
আর তার শাইখ ইবনু ওবাইদকে আমি চিনি না।
উহুদ পাহাড় সম্পর্কে পূর্বেও কয়েকটি হাদীস আলোচিত হয়েছে। সেগুলো হচ্ছেঃ (১৬১৮, ১৮১৯) প্রথম হাদীসটিতে কিছু অতিরিক্ত তথ্য রয়েছে সেটি দেখুন।
` أحذركم من سبع فتن تكون بعدي: فتنة تقبل من المدينة وفتنة في مكة وفتنة تقبل من اليمن وفتنة تقبل من الشام وفتنة تقبل من المشرق وفتنة تقبل من المغرب وفتنة من بطن الشام، وهي السفياني `.
ضعيف جدا.
أخرجه الحاكم (4 / 468) من طريق نعيم بن حماد: حدثنا يحيى بن
سعيد حدثنا الوليد بن عياش أخوأبي بكر بن عياش عن إبراهيم عن علقمة قال: قال
ابن مسعود رضي الله عنه: قال لنا رسول الله صلى الله عليه وسلم: فذكره.
قال: ` فقال ابن مسعود: منكم من يدرك أولها، ومن هذه الأمة من يدرك آخرها.
قال الوليد بن عياش: فكانت فتنة المدينة من قبل طلحة الزبير، وفتنة مكة فتنة
عبد الله بن الزبير، وفتنة الشام من قبل بني أمية، وفتنة المشرق من قبل
هؤلاء `. وقال الحاكم: ` صحيح الإسناد `. ورده الذهبي بقوله: ` قلت: هذا
من أوابد نعيم `. أي: من غرائبه وعجائبه. قلت: هو متهم بالكذب، فالحديث
ضعيف جدا كما يشعر بذلك قول الذهبي هذا.
১৮৭০। আমি তোমাদেরকে আমার পরে যেগুলো ঘটবে এরূপ সাতটি ফেতনা থেকে সতর্ক করছি সেই ফেতনা হতে যা আসবে মদীনাহ্ হতে, সেই ফেতনা যা আসবে মক্কা হতে, সেই ফেতনা যা আসবে ইয়ামান হতে, সেই ফেতনা যা আসবে শাম হতে, সেই ফেতনা যা আসবে মাশরিক (পূর্ব) হতে, সেই ফেতনা যা আসবে মাগরিব (পশ্চিম) হতে, সেই ফেতনা যা আসবে শামের পেট হতে, সেটি হচ্ছে সুফইয়ানী (ফেতনা)।
হাদীসটি খুবই দুর্বল।
এটিকে হাকিম (৪/৪৬৮) নুয়াইম ইবনু হাম্মাদ সূত্রে ইয়াহইয়া ইবনু সাঈদ হতে, তিনি আবু বাকর ইবনু আইয়্যাশের ভাই অলীদ ইবনু আইয়্যাশ হতে, তিনি ইবরাহীম হতে, তিনি আলকামাহ হতে বর্ণনা করেছেন। তিনি বলেনঃ আব্দুল্লাহ ইবনু মাসউদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেনঃ রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আমাদেরকে বলেছেনঃ ...।
আব্দুল্লাহ ইবনু মাসউদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেনঃ তোমাদের মধ্য থেকে সেগুলোর প্রথমটি কে পাবে, আর এ উম্মাতের মধ্য হতে সেগুলোর শেষটি কে পাবে। অলীদ ইবনু আইয়্যাশ বললেনঃ মদীনার ফেতনা ছিল ত্বলহা আর যুবায়েরের পক্ষ থেকে, আর মক্কার ফেতনা ছিল আবদুল্লাহ ইবনুয যুবায়রের ফেতনা, শামের ফেতনা ছিল বানু উমাইয়্যার পক্ষ থেকে সংঘটিত ফেতনা, মাশরিকের ফেতনা ছিল তাদের পক্ষ থেকেই।
হাকিম বলেনঃ সনদটি সহীহ। আর হাফিয যাহাবী তার প্রতিবাদ করে বলেছেনঃ এটি হচ্ছে নুয়াইমের গারীব ও আজবগুলোর একটি।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তিনি মিথ্যা বর্ণনা করার দোষে দোষী। হাদীসটি খুবই দুর্বল। যা হাফিয যাহাবীর কথা থেকেই বুঝা যায়।
` احذروا البغي فإنه ليس من عقوبة هي أحضر من عقوبة البغي `.
ضعيف جدا.
رواه ابن أبي الدنيا في ` ذم البغي ` (31 / 1 - 2) عن أبي
إسحاق عن الحارث عن علي مرفوعا.
قلت: وهذا إسناد ضعيف جدا، الحارث هو
الأعور، وهو ضعيف جدا، كما تقدم مرارا. والحديث عزاه السيوطي لابن عدي
وابن النجار عن علي، وبيض له المناوي فلم يتكلم على إسناده بشيء.
১৮৭১। তোমরা অত্যাচার করা হতে সাবধান হও। কারণ অত্যাচারের শাস্তির চেয়ে বেশী দ্রুত উপস্থিত হওয়ার মত শাস্তি আর নেই।
হাদীসটি খুবই দুর্বল।
এটিকে ইবনু আবিদ দুনিয়া “যাম্মুল বাগী” গ্রন্থে (৩১/১-২) আবূ ইসহাক হতে, তিনি হারেস হতে, তিনি আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফূ' হিসেবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি খুবই দুর্বল। হারেস হচ্ছেন আলআওয়ার। তিনি খুবই দুর্বল যেমনটি বারবার তার সম্পর্কে আলোচনা করা হয়েছে। হাদীসটিকে সুয়ুতী আলী হতে ইবনু আদী ও ইবনুন নাজ্জারের উদ্ধৃতিতে উল্লেখ করেছেন। আর মানবী এর সনদ সম্পর্কে কিছুই বলেননি।
` احذروا كل مسكر، فإن كل مسكر حرام `.
ضعيف.
رواه ابن عساكر (8 / 42 / 1) عن شعيب بن رزيق عن عطاء الخراساني
عن إبراهيم النخعي عن عبد الله بن بريدة الأسلمي عن أبيه مرفوعا. قلت:
وهذا إسناد ضعيف: عطاء هو ابن أبي مسلم أبو عثمان الخراساني قال الحافظ:
` صدوق يهم كثيرا، ويرسل ويدلس `. قلت: وقد عنعنه. وشعيب بن رزيق هو
الشامي أبو شيبة المقدسي، قال الحافظ: ` صدوق يخطىء `. والحديث عزاه في `
الجامع الكبير ` (93 / 675) للطبراني في ` الأوسط ` أيضا، وكذا في ` الفتح
الكبير ` ولم أره فيه بعد البحث عنه مع العلم أن في النسخة خرما لكن لم يورده
الهيثمي في ` مجمع الزوائد ` والله أعلم. (تنبيه) : وقع في مخطوطة (ابن
عساكر) : (منكر) في الموضعين، وعليهما حرف التضبيب (صـ) إشارة من الناسخ
إلى أنه وجدها كذلك في أصله. والشطر الثاني من الحديث صحيح من طرق مخرجة في
` الإرواء ` (2373) وغيره.
১৮৭২। তোমরা প্রত্যেক মাতালকারী (বস্তু) হতে বেঁচে থাক। কারণ প্রতিটি মাতালকারী বস্তু হারাম।
হাদীসটি দুর্বল।
এটিকে ইবনু আসাকির (৮/৪২/১) শুয়াইব ইবনু রুযায়েক হতে, তিনি আতা খুরাসানী হতে, তিনি ইবরাহীম নাখ'ঈ হতে, তিনি আব্দুল্লাহ ইবনু বুরাইদাহ আসলামী হতে, তিনি তার পিতা হতে মারফু হিসেবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি দুর্বল। আতা হচ্ছেন ইবনু আবী মুসলিম আবূ উসমান খুরাসানী। হাফিয ইবনু হাজার তার সম্পর্কে বলেনঃ তিনি সত্যবাদী বহু সন্দেহকারী, মুরসাল বর্ণনা করতেন এবং তাদলীস করতেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তিনি আন আন করে বর্ণনা করেছেন।
আর শুয়াইব ইবনু রুযায়েক হচ্ছেন শামী আবু শাইবাহ মাকদেসী।
হাফিয ইবনু হাজার তার সম্পর্কে বলেনঃ তিনি সত্যবাদী, ভুলকারী।
হাদীসটিকে “আলজামেউল কাবীর” গ্রন্থে (৯৩/৬৭৫) ত্ববারানীর “আলআওসাত” গ্রন্থের উদ্ধৃতিতেও উল্লেখ করা হয়েছে। `ফাতহুল কাবীর` গ্রন্থে এরূপই এসেছে। কিন্তু অনুসন্ধান করার পর তাতে এটিকে দেখছি না।
উল্লেখ্য হাদীসটির দ্বিতীয় অংশ 'প্রতিটি মাতালকারী বস্তু হারাম' সহীহ। বিভিন্ন সূত্রে বর্ণিত হয়েছে। `আলইরওয়াউল গালীল` (২৩৭৩) প্রমুখ গ্রন্থে এর তাখরীজ করা হয়েছে।
` أحسنوا إذا وليتم واعفوا عما ملكتم `.
موضوع.
رواه القضاعي (60 / 1) والديلمي (1 / 1 / 25) عن إسماعيل بن
يحيى قال: أخبرنا مسعر عن عطية عن أبي سعيد مرفوعا.
قلت: وهذا إسناد موضوع آفته إسماعيل بن يحيى، وهو كذاب وضاع، وعطية وهو العوفي ضعيف مدلس.
والحديث عزاه السيوطي للخرائطي في ` مكارم الأخلاق ` عن أبي سعيد، وقال
المناوي: ` وكذا رواه الديلمي وغيره، وفيه ضعف `. كذا قال، ولست أدري
إذا كان عند الخرائطي من غير طريق إسماعيل هذا، أوهو لم يتنبه له.
১৮৭৩। তোমাদের উপর যদি দায়িত্ব অর্পণ করা হয় তাহলে (অধীনস্থদের সাথে) তোমরা ভাল আচরণ করো আর তোমরা যাদের অধিকারী হয়েছ (তারা ক্ৰটি করলে) তাদেরকে ক্ষমা করো।
হাদীসটি বানোয়াট।
এটিকে কাযাঈ (১/৬০) ও দাইলামী (১/১/২৫) ইসমাঈল ইবনু ইয়াহইয়া হতে, তিনি মিসআর হতে, তিনি আতিয়্যাহ হতে, তিনি আবূ সাঈদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু হিসেবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি রানোয়াট। এর সমস্যা হচ্ছে ইসমাঈল ইবনু ইয়াহইয়া। তিনি মিথ্যুক, জলকারী। আর আতিয়্যাহ হচ্ছেন আওফী, দুর্বল ও মুদাল্লিস বর্ণনাকারী।
সুয়ূতী হাদিসটিকে রাখায়েতীর `মাকারিমুল আখলাক` গ্রন্থের উদ্ধৃতিতে আবু সাঈদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন। মানবী বলেনঃ দাইলামী প্রমুখ বর্ণনা করেছেন, এর মধ্যে দুর্বলতা রয়েছে।
জানি না খারাইতির নিকট ইসমাঈল ছাড়া অন্য কোন সূত্র রয়েছে নাকি তিনি তার ব্যাপারে অবগত হননি।
অনুবাদকঃ খারাইতির সনদেও ইসমাঈল ইবনু ইয়াহইয়া এবং আতিয়্যাহ আওফী উভয়েই রয়েছেন। অতএব হাদীসটি শুধুমাত্র দুর্বল নয় বরং বানোয়াট ।
` من أصبح وهمه التقوى ثم أصاب فيما بين ذلك ذنبا، غفر الله له `.
موضوع.
رواه ابن عساكر (15 / 320 / 1) عن أبي الحسام محمد بن عبد الواحد
ابن محمد الكسائي الطبري: حدثنا أبو عبد الله الحسين بن أحمد الأسدي الطبري:
أنبأنا أبو نعيم عبد الملك بن محمد بن عدي الإستراباذي: حدثنا أبو الحسن أحمد
بن الحسن بن أبان المصري الأيلي حدثنا محمد بن عبد الله الأنصاري حدثنا أبو
عامر بن يسار - بعبادان - : حدثنا يحيى بن أبي كثير عن عكرمة عن ابن عباس
مرفوعا. أورده في ترجمة أبي الحسام هذا وساق له هذا الحديث ولم يذكر فيه
جرحا ولا تعديلا. وآفة الحديث أحمد بن الحسن هذا، قال ابن حبان: ` كذاب
دجال يضع الحديث على الثقات `. وقال الدارقطني: ` حدثونا عنه وهو كذاب `.
والحديث أورده السيوطي في ` الجامع ` من رواية ابن عساكر هذه وبيض له المناوي
في ` الفيض `! وأما في ` التيسير ` فقال: ` ضعيف `!
قلت: ومن الظاهر أنه
لم يقف على علته الموجبة الحكم عليه بالوضع كما رأيت، وإنما جرى في تضعيفه
على الجادة المعروفة فيما رواه ابن عساكر وحده!
১৮৭৪। যে সকাল করল এমতাবস্থায় যে তার ভাবনা হচ্ছে তাকওয়া কেন্দ্রিক। অতঃপর সে যদি এর মাঝে কোন গুনাহে জড়িয়ে পড়ে তাহলে আল্লাহ্ তাকে ক্ষমা করে দিবেন।
হাদীসটি বানোয়াট।
এটিকে ইবনু আসাকির (১৫/৩২০/১) আবুল হুসাম মুহাম্মাদ ইবনু আব্দুল অহেদ ইবনু মুহাম্মাদ কাসাঈ ত্ববারী হতে, তিনি আবু আব্দুল্লাহ হুসাইন ইবনু আহমাদ আসাদী ত্ববারী হতে, তিনি আবূ নুয়া'ইম আব্দুল মালেক ইবনু মুহাম্মাদ ইবনু আদী ইসতারাবাযী হতে, তিনি আবুল হাসান আহমাদ ইবনুল হাসান ইবনু আবান মিসরী উবুল্লী হতে, তিনি মুহাম্মাদ ইবনু আব্দুল্লাহ্ আনসারী হতে, তিনি আবু আমের ইবনু ইয়াসার বা'বাদান হতে, তিনি ইয়াহইয়া ইবনু আবী কাসীর হতে, তিনি ইকরিমাহ হতে, তিনি আবদুল্লাহ ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফূ' হিসেবে বর্ণনা করেছেন। তিনি এটিকে আবুল হুসামের জীবনীতে উল্লেখ করে তার সম্পর্কে ভাল-মন্দ কিছুই বলেননি।
এ হাদীসটির সমস্যা হচ্ছে আহমাদ ইবনুল হাসান। ইবনু হিব্বান তার সম্পর্কে বলেনঃ তিনি বড় মিথ্যুক, দাজ্জাল, নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে হাদীস জালকারী। দারাকুতনী বলেনঃ তারা আমাদেরকে তার থেকে হাদীস বর্ণনা করে শুনিয়েছেন, তিনি একজন বড় মিথ্যুক।
হাদিসটিকে সুয়ূতী `আলজামে` গ্রন্থে ইবনু আসাকিরের বর্ণনায় উল্লেখ করেছেন। আর মানবী `আলফায়েয` গ্রন্থে কিছু না বললেও তিনি `আত-তায়সীর` গ্রন্থে বলেছেনঃ দুর্বল।
আমি (আলবানী) বলছিঃ বাহ্যিক অবস্থা এই যে, তিনি হাদীসটির সেই সমস্যা সম্পর্কে অবগত হননি, যা জাল বলে হুকুম প্রদান করাকে অপরিহার্য করে।
` من أصبح لا ينوي ظلم أحد غفر الله له ما جنى `.
ضعيف جدا.
رواه أبو حفص الكتاني في ` جزء من حديثه ` (142 / 2) : حدثنا
أبو نصر حبشون بن موسى الخلال حدثنا عبد الله بن أيوب حدثنا داود بن المحبر
حدثنا هياج بن بسطام عن إسحاق بن مرة عن أنس بن مالك مرفوعا. ورواه ابن
الأعرابي في ` معجمه ` (191 / 2) : أخبرنا عبد الله بن أيوب به. ومن طريق
ابن الأعرابي رواه القضاعي (36 / 1) ورواه الخطيب في ` تاريخه ` (3 / 325)
من طريق محمد بن مصعب عن الهياج بن بسطام به. وهذا سند ضعيف جدا، إسحاق بن
مرة، قال أبو الفتح الأزدي: ` متروك الحديث `. وهياج بن بسطام متروك الحديث
أيضا كما قال أحمد وغيره. لكنه قد توبع فأخرجه الأزدي من طريق عيينة بن عبد
الرحمن عن إسحاق بن مرة به. لكن قال الحافظ في ` اللسان `: ` وعيينة ضعيف
جدا `.
১৮৭৫। যে এমতাবস্থায় সকাল করল যে, সে কারো উপর অত্যাচার করার নিয়্যাত করেনি। আল্লাহ্ তা'আলা তাকে সে যা অপরাধ করেছিল তা ক্ষমা করে দিবেন।
হাদীসটি খুবই দুর্বল।
এটিকে আবু হাফস কাত্তানী `জুযউ হাদীসহি` গ্রন্থে (২/১৪২) আবূ নাসর হাবশুন ইবনু মূসা খাল্লাল হতে, তিনি আবদুল্লাহ ইবনু আইউব হতে, তিনি দাউদ ইবনুল মুহাব্বার হতে, তিনি হাইয়্যাজ ইবনু বিসতাম হতে, তিনি ইসহাক ইবনু মুররাহ হতে, তিনি আনাস ইবনু মালেক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু' হিসেবে বর্ণনা করেছেন।
এটিকে ইবনুল আরাবী তার “মু'জাম” গ্রন্থে (২/১৯১) আব্দুল্লাহ ইবনু আইউব হতে বর্ণনা করেছেন। আর ইবনুল আরাবীর সূত্র হতে কাযাঈ (১/৩৬) হাদীসটিকে বর্ণনা করেছেন। আর খাতীব তার “তারীখ” গ্রন্থে (৩/৩২৫) মুহাম্মাদ ইবনু মুসয়াব সূত্রে হাইয়্যাজ ইবনু বিসতাম হতে বর্ণনা করেছেন।
এ সনদটি খুবই দুর্বল। ইসহাক ইবনু মুররাহ সম্পর্কে আবুল ফাতহ আযদী বলেনঃ তিনি মাতরূকুল হাদীস। আর হাইয়্যাজ ইবনু বিসতামও মাতরূকুল হাদীস যেমনটি আহমাদ প্রমুখ বলেছেন।
তবে তার মুতাবায়াত করা হয়েছে। আযদী ওয়াইনাহ ইবনু আব্দুর রহমান সূত্রে ইসহাক ইবনু মুররাহ হতে বর্ণনা করেছেন। কিন্তু হাফিয ইবনু হাজার “আললিসান” গ্রন্থে বলেনঃ ওয়াইনাহ খুবই দুর্বল।
` من أصبح لا يهم بظلم أحد غفر له ما اجترم `.
ضعيف جدا.
رواه ابن عساكر (15 / 240 / 1) عن بقية بن الوليد عن عمار بن
عبد الملك عن أبي بسطام عن أنس بن مالك مرفوعا. قلت: وهذا سند ضعيف جدا
، عمار هذا قال الذهبي: ` أتى بعجائب، قال الأزدي: متروك الحديث `. وساق
له الأزدي هذا الحديث.
وبقية مدلس وقد عنعنه. والحديث أورده السيوطي في
` الجامع ` من رواية ابن عساكر عن أنس ورمز له في بعض النسخ بالضعف، وأما
المناوي فقال في ` الفيض `: ` إنه رمز لحسنه `. وهذا لا وجه له ألبتة.
وأما في ` التيسير ` فجرى على الجادة فقال: ` وإسناده ضعيف `! ثم ذكر أن ابن
عساكر رواه في ` تاريخه ` من طريق عيينة بن عبد الرحمن عن إسحاق بن مرة عن أنس
. قلت: وهذه طريق أخرى غير ما قبلها، وقد أخرجها الأزدي كما ذكرته فيما
تقدم آنفا، فلا أدري إذا كان ابن عساكر رواه من هذا الوجه أيضا أم هو سهو من
المناوي؟ .
১৮৭৬। যে এমতাবস্থায় সকাল করল যে, সে কারো উপর অত্যাচার করার চিন্তা করেনি। সে যা অন্যায় করেছিল তাকে তা ক্ষমা করে দেয়া হবে।
হাদীসটি খুবই দুর্বল।
এটিকে ইবনু আসাকির (১৫/২৪০/১) বাকিয়্যাহ ইবনুল অলীদ হতে, তিনি আম্মার ইবনু আব্দুল মালেক হতে, তিনি আবূ বিসতাম হতে, তিনি আনাস ইবনু মালেক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু' হিসেবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি খুবই দুর্বল। এ আম্মার সম্পর্কে হাফিয যাহাবী বলেনঃ তিনি আজব আজব বস্তু নিয়ে এসেছেন। আযদী বলেনঃ তিনি মাতরূকুল হাদীস । আযদী তার এ হাদীসটি উল্লেখ করেছেন।
আর বাকিয়্যাহ হচ্ছেন মুদাল্লিস বর্ণনাকারী, তিনি আন আন করে বর্ণনা করেছেন।
হাদীসটিকে সুয়ূতী “আলজামে” গ্রন্থে ইবনু আসাকিরের বর্ণনায় আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন এবং কোন কোন কপিতে দুর্বল হওয়ার চিহ্ন ব্যবহার করেছেন। কিন্তু মানবী `আলফায়েয` গ্রন্থে বলেছেনঃ তিনি হাসান হওয়ার চিহ্ন ব্যবহার করেছেন। তবে তিনি তার “আততাইসীর” গ্রন্থে বলেছেনঃ এর সনদটি দুর্বল।
অতঃপর তিনি উল্লেখ করেছেন যে, হাদীসটিকে ইবনু আসাকির তার `তারীখ` গ্রন্থে ওয়াইনাহ ইবনু আব্দুর রহমান সূত্রে ইসহাক ইবনু মুররাহ হতে, তিনি আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এটি পূর্বের সূত্র ছাড়া অন্য একটি সূত্র। তবে এটিকে আযদী বর্ণনা করেছেন যেমনটি আমি পূর্বের হাদীসের আলোচনার সময় উল্লেখ করেছি। জানি না ইবনু আসাকির এ সূত্র হতেও বর্ণনা করেছেন নাকি মানবী ভুল করেছেন।
` ما صيد من صيد، ولا قطع من شجر إلا بتضييعه التسبيح `.
موضوع.
رواه أبو نعيم (7 / 240) من طريق محمد بن عبد الرحمن القشيري:
حدثنا مسعر عن سعيد بن أبي سعيد عن أبيه عن أبي هريرة مرفوعا. وقال: `
غريب تفرد به القشيري `. قلت: وهو كذاب كما قال الذهبي وغيره، ومع ذلك
أورد السيوطي هذا الحديث في ` الجامع الصغير `! وتعقبه المناوي بقول الذهبي
المذكور، ثم قال: ` وبه يعرف أن رمز المصنف لحسنه غير صواب `. قلت: وقد
وجدت له شاهدا من حديث أبي بكر الصديق، أخرجه ابن عساكر (6 / 149 / 2) عن
أبي علي الحسين بن جبر بن حيوة بن يعيش بن الموفق بن أبي النعمان الطائي الحمصي
- بحمص - : حدثنا أبو القاسم عبد الرحمن بن يحيى بن أبي النقاش أخبرنا
عبد الله
بن عبد الجبار الخبائري: أنبأنا الحكم بن عبد الله بن خطاف حدثنا الزهري عن
أبي واقد بن حبيب قال: بينا أنا عند أبي بكر إذ أتي بغراب، فلما رآه بجناحين
، حمد الله ثم قال: فذكره مرفوعا. ثم قال: ` هذا حديث منكر، والحكم بن عبد
الله بن خطاف ضعيف، والخبائري ضعيف، والرجلان اللذان قبلهما حمصيان مجهولان
`. قلت: الخبائري عبد الله بن عبد الجبار، لم أجد من سبق ابن عساكر إلى
تضعيفه، بل قال أبو حاتم: ` ليس به بأس، صدوق `. وقال ابن وضاح: ` لقيته
بحمص، وهو ثقة مأمون `. وذكره ابن حبان في ` الثقات ` كما في ` التهذيب `.
والحكم بن عبد الله بن خطاف حاله شر مما قال ابن عساكر، فقد قال فيه أبو حاتم
: ` كذاب متروك الحديث، الذي رواه باطل `. وقال الدارقطني: ` كان يضع
الحديث `. وقد ذكره السيوطي في ` الفتاوى ` (2 / 126) مع أحاديث أخرى في
معناه سكت عنها كلها! وما يصح منها شيء.
১৮৭৭। শুধুমাত্র তাসবীহ পাঠ করাকে নষ্ট করার কারণেই কোন শিকার যোগ্য পশু শিকার করা হয় আর কোন বৃক্ষকে কাটা হয়।
হাদীসটি বানোয়াট।
এটিকে আবু নুয়াইম (৭/২৪০) মুহাম্মাদ ইবনু আব্দুর রহমান কুশাইরী হতে, তিনি মিস আর হতে, তিনি সাঈদ ইবনু আবূ সাঈদ হতে, তিনি তার পিতা হতে, তিনি আবূ হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু' হিসেবে বর্ণনা করেছেন। তিনি বলেনঃ এ হাদীসটি গারীব, কুশাইরী এককভাবে এটিকে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তিনি বড়ই মিথ্যুক। যেমনটি হাফিয যাহাবী প্রমুখ বলেছেন। তা সত্ত্বেও সয়ূতী হাদীসটিকে “আলজামেউস সাগীর” গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন। আর মানবী তার সমালোচনা করেছেন হাফিয যাহাবীর উক্ত কথার দ্বারা। অতঃপর বলেছেনঃ এ থেকেই জানা যায় যে, লেখকের হাসান আখ্যা দেয়ার চিহ্ন সঠিক নয়।
আমি (আলবানী) বলছিঃ আবু বাকর সিদীক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে তার একটি শাহেদ পেয়েছি। যেটিকে ইবনু আসাকির (৬/১৪৯/২) আবূ আলী হুসাইন ইবনু জাবর ইবনু হাইওয়াহ ইবনু ইয়াশ হতে ইবনুল মুওয়াফফিক ইবনু আবুন নু'মান তা'ঈ হিমসী হতে, তিনি আবুল কাসেম আব্দুর রহমান ইবনু ইয়াহইয়া ইবনু আবুন নাক্কাশ হতে, তিনি আবদুল্লাহ ইবনু আব্দুল জাব্বার খাবাইরী হতে, তিনি হাকাম ইবনু আবদুল্লাহ খুত্তাফ হতে, তিনি যুহরী হতে, তিনি আবূ অকেদ ইবনু হাবীব হতে বর্ণনা করেছেন। তিনি বলেনঃ আমি আবু বাকর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর নিকট বসেছিলাম এমতাবস্থায় একটি কাক নিয়ে আসা হলো। যখন তিনি তার ডানা দু’টোসহ তাকে দেখলেন, তখন আল্লাহর প্রশংসা করে বললেনঃ ..., তিনি এটিকে মারফু হিসেবে উল্লেখ করেন।
এরপর ইবনু আসাকির বলেনঃ এ হাদীসটি মুনকার। হাকাম ইবনু আব্দুল্লাহ ইবনু খুত্তাফ আর খাবাইরী দুর্বল। আর তাদের দু'জনের পূর্বে দু’ব্যক্তিই মাজহুল (অপরিচিত)।
আমি (আলবানী) বলছিঃ ইবনু আসাকিরের পূর্বে কে খাবাইরীকে দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন পাচ্ছি না। বরং আবু হাতিম বলেছেন তার ব্যাপারে সমস্যা নেই। তিনি সত্যবাদী।
ইবনু অযুযাহ বলেনঃ আমি তার সাথে হিমসে মিলিত হয়েছি। তিনি নির্ভরযোগ্য নিরাপদ। তাকে ইবনু হিব্বান `আসসিকাত` গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন যেমনটি “আততাহযীব” গ্রন্থে এসেছে।
আর হাকাম ইবনু আব্দুল্লাহ খুত্তাফের অবস্থা সম্পর্কে ইবনু আসাকির যা বলেছেন তার চেয়েও তিনি নিকৃষ্ট। তার সম্পর্কে আবু হাতিম বলেনঃ তিনি বড়ই মিথ্যুক, মাতরূকুল হাদীস। তিনি যা বর্ণনা করেছেন তা বাতিল। দারাকুতনী বলেনঃ তিনি হাদীস জাল করতেন। হাদীসটিকে সুয়ূতী “আলফাওয়া” গ্রন্থে (২/১২৬) অন্যান্য সমভাবার্থের হাদীসের সাথে উল্লেখ করে সবগুলোর ব্যাপারেই কোন কিছু বলা থেকে চুপ থেকেছেন। অথচ সেগুলোর কোনটিই সহীহ নয়।
` حق كبير الإخوة على صغيرهم، كحق الوالد على ولده `.
ضعيف.
رواه أبو نعيم في ` أخبار أصبهان ` (1 / 122) عن أحمد بن محمد بن
إبراهيم: حدثنا محمد بن مشكان حدثنا عبد الرحمن بن أيوب حدثنا الوليد بن مسلم
عن الأوزاعي عن عطاء عن أبي هريرة مرفوعا.
أورده في ترجمة أحمد هذا،
ويكنى أبا عمرو الأبرش، وقال: ` توفي في جمادى الآخرة سنة ثلاث وثلاثين
وثلاثمائة، كان أديبا فاضلا حسن المعرفة بالحديث `. قلت: ومحمد بن مشكان لم
أعرفه. وعبد الرحمن بن أيوب، لعله السكوني الذي يروي عن العطاف بن خالد،
قال الذهبي في ` الضعفاء `: ` ضعيف `. وقد خالفه داود بن رشيد الثقة، فقال
: حدثنا الوليد بن مسلم عن محمد بن السائب البكري قال: سمعت سعيد بن عمرو بن
سعيد بن العاص عن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: فذكره. قلت: وهذا مرسل
، ومحمد بن السائب البكري لم أعرفه، لكني أخشى أن يكون (البكري) محرفا من (
الكلبي) ، فإن محمد بن السائب الكلبي من هذه الطبقة، فإن يكن هو، فهو كذاب.
ثم رجعت إلى ` مراسيل أبي داود ` المخطوطة (ق 25 / 1) ، فرأيت الحديث قد سقط
طرف إسناده الأول، وبقي منه قوله: ` حدثنا محمد بن السائب البكري عن أبيه عن
سعيد بن عمرو.. `. فزاد في السند: ` عن أبيه `. فانكشفت لي علته، وتحقق
ما خشيته من التحريف، وتبين أن (البكري) مصحف من (النكري) ، فقد قال
الذهبي في ` الميزان `: ` السائب النكري والد محمد، لا يعرف `. وأقره
الحافظ في ` التهذيب `، وصرح في ` التقريب ` بأنه: ` مجهول `.
وأشار فيهما
إلى أنه من رجال أبي داود في ` المراسيل `. ثم رجعت إلى ترجمة محمد بن السائب
النكري في ` الميزان `، فإذا به يقول: ` شويخ للوليد بن مسلم، قال الأزدي
: يتكلمون فيه، وقال الخطيب: هو الكلبي، وقد غلط من جعلهما اثنين `.
قلت: كأنه يشير إلى ابن حبان، فإنه أورد هذا في ` الثقات ` (7 / 435)
وأورد الكلبي في ` الضعفاء `، انظر ما علقته عليه في كتابي الجديد ` تيسير
الانتفاع `. والحديث قال العراقي في ` تخريج الإحياء ` (2 / 195) : ` رواه
أبو الشيخ في ` كتاب الثواب ` من حديث أبي هريرة، ورواه أبو داود في
` المراسيل ` من رواية سعيد بن عمرو بن العاص مرسلا، ووصله صاحب ` مسند
الفردوس ` فقال: عن سعيد بن عمرو بن سعيد بن العاص عن أبيه عن جده سعيد بن
العاص، وإسناده ضعيف `. قلت: ووصله البيهقي أيضا في ` شعب الإيمان ` كما
في ` المشكاة ` (4946) . ثم رأيت الحديث في ` مسند الفردوس ` (2 / 87 - 88)
، فإذا هو من طريق البكري المذكور، والظاهر أن البيهقي رواه من طريقه.
১৮৭৮। বড় ভাইয়ের হক তাদের ছোট ভাইয়ের উপর সেরূপ, যেরূপ পিতার হক রয়েছে তার সন্তানের উপর।
হাদীসটি দুর্বল।
হাদীসটিকে আবু নুয়াইম “আখবারু আসবাহান” গ্রন্থে (১/১২২) আহমাদ ইবনু মুহাম্মাদ ইবনু ইবরাহীম হতে, তিনি মুহাম্মাদ ইবনু মুশকান হতে, তিনি আব্দুর রহমান ইবনু আইউব হতে, তিনি আলীদ ইবনু মুসলিম হতে, তিনি আওযাঈ হতে, তিনি আতা হতে, তিনি আবু হুরাইরাহ্ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু হিসেবে বর্ণনা করেছেন।
তিনি হাদীসটিকে আহমাদের জীবনীতে উল্লেখ করেছেন, যার কুনিয়্যাত হচ্ছে আবূ আমর আলআবরাশ। তিনি (আবু নুয়াইম) বলেনঃ তিনি ৩৩৩ হিজরীর জুমাদাল আখেরাহ মাসে মারা যান। তিনি মর্যাদাসম্পন্ন সাহিত্যিক ছিলেন, হাদীস সম্পর্কে ভাল জ্ঞান রাখতেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ মুহাম্মাদ ইবনু মুশকানকে আমি চিনি না। আর আব্দুর রহমান ইবনু আইউব হচ্ছেন সম্ভবত সাকূনী যিনি আত্তাফ ইবনু খালেদ হতে বর্ণনা করেছেন। হাফিয যাহাবী “আযযুয়াফা” গ্রন্থে বলেনঃ তিনি দুর্বল।
আর নির্ভরযোগ্য দাউদ ইবনু রাশীদ তার বিরোধিতা করেছেন। তিনি অলীদ ইবনু মুসলিম হতে, তিনি মুহাম্মাদ ইবনুস সায়েব বিকরী হতে, তিনি সা'ঈদ ইবনু আমর ইবনু সা'ঈদ ইবনুল আস হতে শুনেছেন, তিনি রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেছেন। তিনি বলেনঃ ...।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এটি মুরসাল। মুহাম্মাদ ইবনুস সায়েব বিকরকে আমি চিনি না। আমি আশঙ্কা করছি যে, বিকরী শব্দকে কালবী শব্দ হতে পরিবর্তন করা হয়েছে। কারণ মুহাম্মাদ ইবনুস সায়েব কালবী এ স্তরের বর্ণনাকারী। তিনি যদি হন তাহলে তিনি মিথ্যুক।
অতঃপর আমি আবু দাউদের “মারাসীল” গ্রন্থ (কাফ ১/২৫) অনুসন্ধান করেছি। আমি দেখেছি হাদীসটির সনদের প্রথম অংশ পড়ে গেছে। অবশিষ্ট রয়ের পিতা সায়েব আননুকরীকে চেনা যায় না।
আর হাফিয ইবনু হাজার “আত তাহযীব” গ্রন্থে তাকে সমর্থন করেছেন। আর “আত-তাকরীব” গ্রন্থে স্পষ্ট করেই বলেছেনঃ তিনি মাজহুল। এবং তিনি তার দু'গ্রন্থের মধ্যে ইঙ্গিত দিয়েছেন যে, তিনি হচ্ছেন আবূ দাউদের `আলমারাসীল` গ্রন্থের অন্তর্ভুক্ত।
অতঃপর আমি মুহাম্মাদ ইবনুস সায়েব নুকরীর জীবনী “আলমীযান” গ্রন্থে অনুসন্ধান করেছি। তিনি তার সম্পর্কে বলেনঃ তিনি অলীদ ইবনু মুসলিমের ছোট শাইখ। আযদী বলেনঃ মুহাদ্দিসগণ তার সমালোচনা করেছেন। খাতীব বলেনঃ তিনিই হচ্ছেন কালবী । যিনি তাদের দু’জনকে দু'জন বানিয়েছেন তিনি ভুল করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ সম্ভবত তিনি ইবনু হিব্বানের দিকে ইঙ্গিত করেছেন। কারণ তিনি বিকরকে “আসসিকাত” গ্রন্থে (৭/৪৩৫) উল্লেখ করেছেন আর কালবীকে `আয যুয়াফা` গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন।
আমার(আলবানী) নতুন গ্রন্থ “তাইসীরুল ইনতিফা” গ্রন্থে এ সম্পর্কে টীকা লিখেছি তা দেখুন।
হাদীসটি সম্পর্কে হাফিয ইরাকী “তাখরাজুল ইহইয়া” গ্রন্থে (২/১৯৫) বলেনঃ এটিকে আবুশ শাইখ “কিতাবুস সাওয়াব” গ্রন্থে আবু হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এর হাদীস হতে বর্ণনা করেছেন। আর আবু দাউদ “আলমারাসীল” গ্রন্থে সাঈদ ইবনু আমর ইবনুল আসের বর্ণনা হতে মুরসাল হিসেবে বর্ণনা করেছেন। আর “মুসনাদুল ফিরদাউস” গ্রন্থে লেখক মওসূল হিসেবে সাঈদ ইবনু আমর ইবনু সাঈদ ইবনুল আস হতে, তিনি তার পিতা হতে, তিনি তার দাদা সাঈদ ইবনুল আস হতে বর্ণনা করেছেন। তার সনদটি দুর্বল।
আমি (আলবানী) বলছিঃ বাইহাকীও “শুয়াবুল ঈমান” গ্রন্থে- যেমনটি `মিশকাত` (৪৯৪৬) গ্রন্থে এসেছে- মওসূল হিসেবে বর্ণনা করেছেন।
অতঃপর আমি হাদীসটিকে “মুসনাদুল ফিরদাউস” গ্রন্থে (২/৮৭-৮৮) দেখেছি যে, হাদীসটি আলোচিত বিকরী সূত্রেই বর্ণিত হয়েছে। বাহ্যিক অবস্থা এই যে, বাইহাকী তার সূত্রেই বর্ণনা করেছেন।
অনুবাদকঃ উল্লেখ্য বাইহাকীর উল্লেখিত গ্রন্থে উক্ত নুকরীকেই উল্লেখ করা হয়েছে যার মাজহুল হওয়ার ব্যাপারে আলোচনা করা হয়েছে।
موراد) والفظ له.
وتابعه واصل بن عبد الأعلى: ثنا محمد بن فضيل … به.
أخرجه الطبراني في `المعجم الكبير` (9/168/10229) . وقال البزار عقبه:
`لا نعلم رواه عن عثمان بن شبرمة إلا محمد بن فضيل، وقد رَوى هذا
الكلام عن عاصم جماعة منهم: فطر وزائدة وحماد بن سلمة وغيرهم `.
قلت: هؤلاء وغيرهم قد رووه عن عاصم بنحوه، ولكنهم جميعاً لم يذكروا
فيه جملة: `وَخُلُقُهُ خُلُقِي`، وعلى ذلك فهي منكرة - عندي - ؛ لتفرد ابن شبرمة
هذا بها دون الثقات، وقد أخرجه عن بعضهم أبو داود والترمذي وابن حبان
(1878) وغيرهم، وقد خرجته في `الروض النضير` (647) .
وأيضاً؛ فقد توبع عاصم عليه، وكذا شيخه زر، وكذا تابع ابن مسعود جماعة
من الأصحاب، وكلهم لم يذكروا تلك الزيادة، وقد خرجت أحاديثهم هناك.
يضاف إلى المخالفة أن مخالفهم عثمان بن شبرمة ليس معروفاً بالعدالة، ولا
بالرواية؛ إلا في هذه، ومن أجلها ذكرها البخاري في `تاريخه` وابن أبي حاتم في
`كتابه`، وابن حبان في `ثقاته` (7/198 و 8/448) ، وقال البخاري:
`لا أدري سمع من عاصم أم لا؟ `.
قلت: وهذا على مذهبه في اشتراطه في ثبوت الاتصال ثبوت اللقاء وعدم
الاكتفاء بالمعاصرة؛ ولو كان ثقة، فكيف وعثمان هذا مجهول؟! وتساهل ابن حبان
في توثيق المجهولين معروف مشهور، طالما نبّه عليه العلماء الحافظ كابن عبد الهادي
والذهبي والعسقلاني وغيرهم، وتجاهل ذلك بعض مدعي هذا العلم في العصر
الحاضر؛ فتراهم يصححون أحاديث `ثقات ابن حبان` ولو نص الذهبي وغيره
بجهالته. والله المستعان.
وبهذه المناسبة أقول:
يحسن بي التنبيه على مخالف أخرى وقعت في `صحيح ابن حبان`؛ لكنها
في الإسناد دون المتن. أخرجه ابن حبان (5922) : أخبرنا الفضل بن الحباب قال:
حدثنا مسدد بن مسرهد: حدثنا محمد بن إبراهيم أبو شهاب عن عاصم بن
بهدلة عن أبي صالح عن أبي هريرة قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:
«لو لم يبق من الدنيا إلا ليلة، لملك فيها رجل من أهل بيت النبي صلى الله عليه وسلم» .
ثم ساقه عقبه بالسند ذاته؛ إلا أنه قال أبو شهاب: حدثنا عاصم ابن بهدلة
عن زر عن ابن مسعود قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:
«لو لم يبق من الدنيا؛ إلا ليلة لملك فيها رجل من أهل بيتي يواطئ اسمه
اسمي» .
قلت: وهذا هو المحفوظ عن عاصم لرواية الجماعة عنه؛ كما تقدم، أما إسناده
الأول فوهم، والظاهر أنه من أبي شهاب محمد بن إبراهيم؛ فإن حاله كحال
عثمان بن شبرمة: لم يذكروا عنه راوياً غير مسدد. ومنهم ابن حبان في `ثقاته`
(9/39) ، وقال ابن أبي حاتم عن أبيه:
`ليس بمشهور، يكتب حديثه`.
وقد خالفه سفيان بن عيينة؛ فرواه عن عاصم قال: وأخبرنا أبو صالح عن
أبي هريرة قال: … فذكره موقوفاً على أبي هريرة.
أخرجه الترمذي (2232) عقب روايته من طريق سفيان عن عاصم عن زر
عن عبد الله مرفوعاً.
فدلّ على أن له أصلاً عن أبي هريرة؛ لكنه موقوف وقد رفعه بعض الضعفاء،
فانظره برقم (4361) ، وفي متنه زيادة منكرة أخرى. والله أعلم.
هذا، وقبل إنهاء الكتابة حول حديث الترجمة لا بد لي من أن أذكر له شاهداً
وجدته في `سنن أبي داود` في إسناده انقطاع وجهالة؛ فلم تطمئن النفس إليه،
فقال أبو داود (4290) : حُدِّثْتُ عَنْ هَارُونَ بْنِ الْمُغِيرَةِ قَالَ: حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ أَبِي
قَيْسٍ عَنْ شُعَيْبِ بْنِ خَالِدٍ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ قَالَ: قَالَ عَلِيٌّ رضي الله عنه وَنَظَرَ
إِلَى ابْنِهِ الْحَسَنِ - فَقَالَ:
`إِنَّ ابْنِي هَذَا سَيِّدٌ `؛ كَمَا سَمَّاهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم، وَسَيَخْرُجُ مِنْ صُلْبِهِ رَجُلٌ يُسَمَّى
بِاسْمِ نَبِيِّكُمْ، يُشْبِهُهُ فِي الْخُلُقِ، وَلَا يُشْبِهُهُ فِي الْخَلْقِ.ثُمَّ ذَكَرَ قِصَّةً: يَمْلَأُ الْأَرْضَ
عَدْلاً.
هكذا ساقه أبو داود. فقال الخطابي عقبه في `المعالم` (6/162) :
`هذا منقطع؛ أبو إسحاق السبيعي رأى علياً رضي الله عنه رؤية، وقال فيه أبو
داود: حدثت عن هارون بن المغيرة `.
قلت: يعني أن شيخ أبي داود فيه لم يسم؛ فهو مجهول.
وأيضاً؛ فأبو إسحاق كان اختلط، وشعيب بن خالد ليس مذكوراً فيمن روى
عنه قبل الاختلاط.
১৮৭৯। তোমরা তোমাদের নিজেদেরকে ভাল খাবার হতে বঞ্চিত কর। কারণ তা শয়তানকে তোমাদের রগে রগে চলতে শক্তি যোগায়।
হাদীসটি বানোয়াট।
হাদীসটিকে আবুল হাসান কাযবীনী “আলআমলী” গ্রন্থে (২২/৭/১) বানু হাশেমের দাস আযহার ইবনু জামীল হতে, তিনি বাযী আবুল খালীল খাফফাফ হতে, তিনি হিশাম ইবনু উরওয়াহ হতে, তিনি তার পিতা হতে, তিনি আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু হিসেবে বর্ণনা করেছেন। অনুরূপভাবে ইবনুয যাইয়্যাত তার “হাদীস” গ্রন্থে (১/২) বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ হাফেযগণের কেউ “আলআমলী” গ্রন্থের এক কপির টীকাতে লিখেছেনঃ এ হাদীসটি দুর্বল। হাদীসটিকে ইবনুল জাওযী “আলমাওয়ূয়াত” গ্রন্থে উল্লেখ করে বলেছেনঃ এ হাদীসটির ব্যাপারে মিথ্যা বর্ণনা করার দোষে দোষী হচ্ছেন বাযী আবুল খালীল আর সুয়ূতী “আললাআলী” গ্রন্থে (২/৩২০, ২/২০৯) তার সাথে ঐকমত্য পোষণ করেছেন। অতঃপর ইবনু ইরাকও `তানযীহুশ শারীয়াহ` গ্রন্থে (২/২৪০) ঐকমত্য পোষণ করেছেন। সুয়ূতী হাদীসটিকে তার দু'জামে গ্রন্থে উল্লেখ না করে ভাল করেছেন। কারণ এটি কুরআনের বিরোধী হওয়ার কারণে সুস্পষ্টভাবে বাতিল।
` أحسنوا إلى الماعزة، وامسحوا عنها الرغام، فإنها دابة من دواب الجنة `.
ضعيف.
رواه ابن السماك في ` الفوائد ` (9 / 211 / 2) عن سعيد بن محمد
الزهري: حدثنا الزهري عن سعيد بن المسيب عن أبي هريرة مرفوعا. قلت:
وسعيد هذا ترجمه ابن أبي حاتم (2 / 1 / 58) وقال عن أبيه: ` ليس بمشهور،
وحديثه مستقيم، إنما روى حديثا واحدا `. والشطر الثاني له طرق أخرى هو بها
قوي، لذلك أوردته في المجلد الثالث من ` الصحيحة ` (1128) .
১৮৮০। তোমরা ছাগলের প্রতি সদাচরণ কর। তার থেকে মাটিকে মুছে দাও। কারণ সে জান্নাতী চতুস্পদ জম্ভগুলোর একটি জম্ভ।
হাদীসটি দুর্বল।
হাদীসটিকে ইবনুস সাম্মাক `আলফাওয়াইদ` গ্রন্থে (৯/২১১/২) সাঈদ ইবনু মুহাম্মাদ যুহরী হতে, তিনি যুহরী হতে, তিনি সাঈদ ইবনুল মুসাইয়্যাব হতে, তিনি আবু হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু হিসেবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ ইবনু আবী হাতেম (২/১/৫৮) এ সাঈদের জীবনী আলোচনা করে তার পিতার উদ্ধৃতিতে বলেছেনঃ তিনি প্রসিদ্ধ নন আর তার হাদীস সঠিক। তিনি মাত্র একটি হাদীস বর্ণনা করেছেন।
হাদীসটির দ্বিতীয় অংশ থেকে শেষ পর্যন্ত অন্যান্য সূত্রে বর্ণিত হয়েছে যেগুলোর দ্বারা সে অংশের শক্তি বৃদ্ধি পেয়েছে। এ কারণে সেটাকে `সিলসিলাহ্ সহীহাহ` গ্রন্থে (১১২৮) তৃতীয় খণ্ডে উল্লেখ করেছি।
এছাড়া দেখুন “সহীহ জামেউস সাগীর” (৩৭৮৯, ৪০৭৩, ৪১৮২) অর্থাৎ প্রথম অংশ সহকারে হাদীসটি দুর্বল।