হাদীস বিএন


সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ





সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (261)


` أحسنوا إلى عمتكم النخلة فإن الله تعالى خلق آدم ففضل من طينتها فخلق منها النخلة `.
موضوع.
رواه ابن عدي (57 / 2) والباطرقاني في جزء من ` حديثه ` (157 / 2) وابن الجوزي في ` الموضوعات ` (1 / 184) كلهم عن جعفر بن أحمد بن علي الغافقي حدثنا أبو صالح كاتب الليث حدثنا وكيع عن الأعمش عن مجاهد عن ابن عمر مرفوعا.
وقال ابن عدي: وهذا الحديث موضوع ولا شك أن جعفر وضعه، وقال ابن الجوزي:
لا يصح وجعفر وضاع، وأقره الحافظ بن حجر في ` اللسان ` وأما السيوطي فتعقبه كعادته في ` اللآليء ` (1 / 156) فلم يصنع شيئا لأنه لم يزد على أن ذكر له شاهدا من حديث أبي سعيد الخدري وهو الآتي عقب هذا وفيه طعن شديد كما سترى، ومن عجائبه أنه لم يسق إسناده ولا بين حاله! .




২৬১। তোমরা তোমাদের চাচী খেজুর গাছের সাথে ভাল ব্যাবহার কর। কারণ আল্লাহ তা’আলা আদমকে সৃষ্টি করার পর তার মাটির কিছু অংশ অবশিষ্ট রয়ে যায়, অতঃপর তা থেকেই খেজুর গাছকে সৃষ্টি করেন।





হাদীসটি জাল।





এটি ইবনু আদী (২/৫৭), বাতেরকানী তার `জুযউ মিন হাদীস` গ্রন্থে (২/১৫৭) এবং ইবনুল জাওযী “আল-মাওযূ’আত” গ্রন্থে (১/১৮৪) জাফার ইবনু আহমাদ ইবনে গাফেকী হতে ... বর্ণনা করেছেন। ইবনু আদী বলেনঃ এ হাদীসটি জাল। এটি যে জাফরি জাল করেছেন তাতে কোন সন্দেহ নেই। ইবনুল জাওযী বলেনঃ এটি সহীহ নয়, জাফার একজন জালকারী।





হাফিয ইবনু হাজার “লিসানুল মীযান” গ্রন্থে তার এ বক্তব্যকে সমর্থন করেছেন।





কিন্তু সুয়ূতী অভ্যাসগতভাবে “আল-লাআলী” গ্রন্থে (১/১৫৬) তার সমালোচনা করে বলেছেনঃ আবু সাঈদ খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর হাদীসে এটির শাহেদ আছে। কিন্তু তাতেও চরম সমস্যা রয়েছে, সেটি হচ্ছে সম্মুখের হাদীসটি।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (262)


` خلقت النخلة والرمان والعنب من فضل طينة آدم صلى الله عليه وسلم `.
ضعيف جدا.
رواه المحاملي في الثالث من ` الأمالي ` (38 / 2) وعنه ابن عساكر (2 / 309 / 2) عن الحاكم بن عبد الله الكلبي أبي سالم من أهل قزوين عن يحيى بن سعيد البحراني من أهل غطيف عن أبي هارون العبدي عن أبي سعيد
الخدري قال: سألنا رسول الله صلى الله عليه وسلم من ماذا خلقت النخلة؟ فذكره.
قلت: وهذا إسناد ضعيف جدا، وأبوهارون العبدي اسمه عمارة بن جوين وهو متروك ومنهم من كذبه كما في ` التقريب `، ومع هذا الضعف الشديد فقد ذكره السيوطي في ` اللآليء ` شاهدا للحديث الذي قبله! من رواية ابن عساكر، ولم يقتصر على هذا بل أورده في ` الجامع الصغير ` فتعقبه المناوي بقوله: وظاهر صنيع المصنف أنه لم يره لأشهر من ابن عساكر، ولا أقدم، مع أن الديلمي أخرجه عن أبي سعيد أيضا، لكن سنده مطعون فيه.
قلت: المحاملي أشهر وأقدم من الديلمي أيضا فالعزو إليه أولى، والموفق هو الله تعالى.




২৬২। আদম (আঃ) কে সৃষ্টিকৃত মাটির অবশিষ্টাংস হতে খেজুর গাছ, আনার গাছ এবং আঙ্গুর গাছ সৃষ্টি করা হয়েছে।





হাদীসটি নিতান্তই দুর্বল।





এটি মাহামেলী “আল-আমলী” গ্রন্থে (২/৩৮) এবং তার থেকে ইবনু আসাকির (২/২০৯/২) বর্ণনা করেছেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এটির সনদটি নিতান্তই দুর্বল। বর্ণনাকারী আবু হারুণ আল-আবাদীর নাম হচ্ছে আম্মারা ইবনু যুওয়াইন। তিনি মাতরূক। কেউ কেউ তাকে মিথ্যুকও আখ্যা দিয়েছেন; যেমনভাবে “আত-তাকরীব” গ্রন্থে এসেছে।





এরূপ চরম পর্যায়ের দুর্বল হওয়া সত্ত্বেও সুয়ূতী `আল-লাআলী` গ্রন্থে পূর্বের হাদীসটির শাহেদ হিসাবে ইবনু আসাকীরের বর্ণনা হতে হাদীসটি উল্লেখ করেছেন। শুধু তাই নয়, তিনি “জামেউস সাগীর” গ্রন্থেও উল্লেখ করেছেন। এ কারণে মানবী তার সমালোচনা করেছেন।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (263)


` أكرموا عمتكم النخلة، فإنها خلقت من فضلة طينة أبيكم آدم، وليس من الشجر شجرة أكرم على الله من شجرة ولدت تحتها مريم بنت عمران، فأطعموا نساءكم الوالد الرطب، فإن لم يكن رطبا فتمر `.
موضوع.

أخرجه العقيلي في ` الضعفاء ` (430) وأبو الشيخ في ` الأمثال ` (رقم 263) وابن عدي (330 / 1) وابن حبان في ` الضعفاء ` (3 / 44 - 45 حلب) والباغندي في ` حديث شيبان وغيره ` (190 / 1) وعنه ابن عساكر (2 / 309 / 2 و19 / 267 / 1) وأبو نعيم في ` الطب ` (2 / 23 / 2) و` الحلية ` (6 /123) والسياق له من طريق مسرور بن سعيد التميمي عن الأوزاعي عن عروة بن رويم عن علي مرفوعا. وقال أبو نعيم:
غريب من حديث الأوزاعي عن عروة تفرد به مسرور بن سعيد، وقال العقيلي: حديثه غير محفوظ ولا يعرف إلا به، وقال ابن عساكر: عروة لم يدرك عليا، والحديث غريب، والتميمي مجهول.
قلت: بل هو متهم، قال الذهبي في ` الميزان `: غمزه ابن حبان فقال: يروي عن الأوزاعي المناكير الكثيرة.
ومن طريق أبي نعيم أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (1 / 184) وقال: لا يصح، مسرور منكر الحديث يروي عن الأوزاعي المناكير، وعقب عليه السيوطي في ` اللآليء ` (1 / 156) بقوله: أخرجه العقيلي وقال: أنه غير محفوظ، لا يعرف إلا بمسرور، وأخرجه ابن عدي وقال: هذا منكر عن الأوزاعي، وعروة عن علي مرسل، ومسرور غير معروف لم أسمع بذكره إلا في هذا الحديث، وأخرجه أبو يعلى في ` مسنده ` عن شيبان به، وأخرجه ابن أبي حاتم وابن مردويه معا في ` التفسير ` وابن السني، ولأوله شاهد من حديث أبي سعيد الخدري، ولآخره شاهد.
قلت: حديث أبي سعيد الخدري ضعيف جدا فلا يصلح شاهدا اتفاقا، وقد بينت حاله قبيل هذا، وأما الشاهد الآخر فهو حديث أبي أمامة الذي تقدم برقم (260) وقد بينا هناك أن إسناده ضعيف، ثم ذكر الحديث الآتي:




২৬৩। তোমরা তোমাদের চাচী খেজুর গাছকে সম্মান কর। কারণ তাঁকে তোমাদের পিতা আদমকে সৃষ্টিকৃত মাটির অবশিষ্টাংশ দ্বারা সৃষ্টি করা হয়েছে। মারইয়াম বিনতে ইমরান যে বৃক্ষের নীচে সন্তান প্রসব করেছেন, তার চেয়ে আল্লাহর নিকট সম্মানিত বৃক্ষ আর নেই। অতএব তোমরা তোমাদের নারী মাতাকে কাঁচা খেজুর খাওয়াও। যদি কাঁচা খেজুর না থাকে তাহলে শুকনা খেজুর।





হাদীসটি জাল।





এটি উকায়লী “আয-যুয়াফা” গ্রন্থে (৪৩০), আবুশ শাইখ “আল-আমসাল` গ্রন্থে (নং ২৬৩), ইবনু আদী (১/৩৩০), ইবনু হিব্বান `আয-যুয়াফা` গ্রন্থে (৩/৪৪-৪৫), বাগেন্দী “হাদীস শায়বান” গ্রন্থে (১/১৯০) এবং তার থেকে ইবনু আসাকির (২/৩০৯/২, ১৯/২৬৭/১), আবু নু’য়াইম “আত-তিব্ব” গ্রন্থে (২/২৩/২) এবং `আল-হিলইয়াহ` গ্রন্থে (৬/১২৩) মাসরুর ইবনু সাঈদ আত-তামীমী সূত্রে ... বর্ণনা করেছেন।





আবূ নু’য়াইম বলেনঃ উরওয়া হতে আওযাঈর এ হাদীসটি গারীব। মাসরূর এককভাবে এটিকে বর্ণনা করেছেন। উকায়লী বলেনঃ তার হাদীসটি নিরাপদ নয়। তাকে ছাড়া অন্য কারো মাধ্যমে এটিকে জানা যায় না।





ইবনু আসাকির বলেনঃ উরওয়া আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে পায়নি, অর্থাৎ সনদটি মুনকাতি বিচ্ছিন্ন। হাদীসটি গরীব এবং তামীমী মাজহুল।





আমি (আলবানী) বলছিঃ তিনি মিথ্যার দোষে দোষী। যাহাবী “আল-মীযান” গ্রন্থে বলেনঃ ইবনু হিব্বান তার সম্পর্কে অনুসন্ধান করে বলেছেনঃ তিনি আওযাঈ হতে বহু মুনকার হাদীস বর্ণনা করেছেন।





সুয়ূতী তার সমালোচনা করে “আল-লাআলী” গ্রন্থে (১/১৫৬) বলেছেনঃ আবূ সাঈদ খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এর হাদীসে তার প্রথমাংশের শাহেদ রয়েছে এবং শেষাংশেরও শাহেদ আছে।





আমি (আলবানী) বলছিঃ আবু সাঈদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এর (২৬২) হাদীসটি নিতান্তই দুর্বল। সবার ঐক্যমতে সেটি শাহেদ হবার যোগ্য নয়। তার অবস্থা সম্পর্কে এটির পূর্বেই আলোচনা করেছি।





আরো একটি শাহেদ হচ্ছে আবু উমামা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর হাদীস। সেটি হচ্ছে ২৬০ নং হাদীস। সেটি যে দুর্বল তা সেখানেই আলোচনা করা হয়েছে।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (264)


` ما للنفساء عندي شفاء مثل الرطب، ولا للمريض مثل العسل `.
موضوع.

أخرجه أبو نعيم في ` الطب ` عن أبي هريرة مرفوعا، ذكره السيوطي شاهدا للحديث الذي قبله، ولم يسق إسناده لينظر فيه، ولا هو تكلم عليه ليعرف حاله من لم يقف عليه، وأحسن أحواله أن يكون ضعيفا إن لم يكن موضوعا.
ثم تحقق الظن فيه، فقد رأيته أخرجه (2 / 24 / 1) في ` الطب ` عن علي بن عروة عن الزهري عن سعيد بن المسيب عن أبي هريرة مرفوعا.
قلت: وعلي بن عروة كذاب يضع الحديث، وقد مضى له حديث موضوع برقم (119) .
وتبع ابن عراق السيوطي في السكوت عن الحديث في ` تنزيه الشريعة ` (1 / 209) ولكنه قال: قلت: وأخرج وكيع في ` الغرر ` هذا من حديث عائشة لكنه من طريق أصرم بن حوشب، يعني: وهو كذاب.




২৬৪। নেফাসধারী নারীদের জন্য আমার নিকট কাঁচা খেজুরের ন্যায় রোগ মুক্তকারী কিছু নেই এবং কোন রোগীর জন্য মধুর ন্যায় আরোগ্যদানকারী কিছু নেই।





হাদীসটি জাল।





এটি ইবনু নু’য়াইম “আত-তিব্ব” গ্রন্থে আবু হুরাইয়াহ্ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন। সুয়ূতী এটিকে পূর্বের হাদীসটির শাহেদ হিসাবে উল্লেখ করেছেন। অথচ তার কোন সনদ উল্লেখ করেননি যাতে করে তাতে দৃষ্টি দেয়া যায়। আবু নু’য়াইম তার “আত-তিব্ব” গ্রন্থে (২/২৪/১) আলী ইবনু উরওয়া হতে ... বর্ণনা করেছেন, যা আমার দৃষ্টি গোচর হয়েছে।





আমি (আলবানী) বলছিঃ আলী ইবনু উরওয়া মিথ্যুক। তিনি হাদীস জাল করতেন। তার সম্পর্কে ১১৯ নং হাদীসে বিস্তারিত আলোচনা করা হয়েছে। ইবনু আররাক `তানযীহুশ শারী'য়াহ` গ্রন্থে (১/২০৯) ইমাম সুয়ূতীর অনুসরণ করে হাদীসটি সম্পর্কে কিছু না বলে চুপ থেকেছেন। তবে তিনি বলেনঃ হাদীসটি ওয়াকী “আল-গারার” গ্রন্থে আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর হাদীস হতে বর্ণনা করেছেন। কিন্তু তার সূত্রে আসরাম ইবনু হাওশাব নামক এক বর্ণনাকারী আছেন, তিনি মিথ্যুক।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (265)


` يا أبا هريرة، علم الناس القرآن وتعلمه، فإنك إن مت وأنت كذلك زارت الملائكة قبرك كما يزار البيت العتيق، وعلم الناس سنتي وإن كرهو اذلك، وإن أحببت أن لا توقف على الصراط طرفة عين حتى تدخل الجنة فلا تحدث في دين الله حدثا برأيك `.
موضوع.

أخرجه الخطيب (4 / 380) وأبو الفرج بن المسلمة في ` مجلس من الأمالي ` (120 / 2) من طريق عبد الله بن صالح اليماني حدثني أبوهمام القرشي عن سليمان ابن المغيرة عن قيس بن مسلم عن طاووس عن أبي هريرة مرفوعا، ومن هذا الوجه ذكره ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (1 / 264) وقال: لا يصح، وأبوهمام: محمد بن مجيب (الأصل محبب وهو تصحيف) .
قال يحيى: كذاب، وقال أبو حاتم: ذاهب الحديث، وتعقبه السيوطي في ` اللآليء ` (1 / 222) بقوله: قلت له طريق آخر قال أبو نعيم: حدثنا عبد الله بن محمد بن جعفر حدثنا محمد بن عبد الرحيم بن شبيب عن محمد بن قدامة المصيصي عن جرير عن الأعمش عن أبي صالح عن أبي هريرة مرفوعا.
قلت: فذكره نحوه إلا أنه قال: ` فإن أتاك الموت وأنت كذلك حجت الملائكة إلى قبرك كما يحج المؤمنون إلى بيت الله الحرام `.
وسكت عليه السيوطي، وهو بهذا اللفظ أشد نكارة عندي من الأول لما فيه من ذكر الحج إلى القبر فإنه تعبير مبتدع لا أصل له في الشرع ولم يرد فيه إطلاق الحج إلى شيء مما يزار إلا إلى بيت الله الحرام، وإنما يطلق الحج إلى القبور، المبتدعة الذين يغالون في تعظيم القبور مثل شد الرحال إليها والبيات عندها والطواف حولها، والدعاء والتضرع لديها ونحوذلك مما هو من شعائر الحج حتى لقد ألف بعضهم كتابا سماه ` مناسك حج المشاهد والقبور `! على ما ذكره شيخ الإسلام ابن تيمية في كتبه، وهذا ضلال كبير لا يشك مسلم شم رائحة التوحيد الخالص في كونه أكره شيء إليه صلى الله عليه وسلم، فكيف يعقل إذن أن ينطق عليه السلام بهذه الكلمة: ` حجت الملائكة إلى قبرك كما يحج المؤمنون إلى بيت الله الحرام `؟ ! اللهم إن القلب يشهد أن النبي صلى الله عليه وسلم ما صدر منه حرف من هذا، فقبح الله من وضعه.
وأنا أتهم به ابن شبيب هذا، فإن رجال إسناده كلهم ثقات غيره، أما عبد الله ابن محمد بن جعفر شيخ أبي نعيم فهو أبو الشيخ ابن حبان الحافظ الثقة صاحب كتاب ` طبقات الأصبهانيين ` وله ترجمة في ` تذكرة الحفاظ ` للذهبي (3 / 147 - 149) و` شذرات الذهب ` (3 / 69) وغيرهما.
وأما سائر الرواة فكلهم ثقات معروفون من رجال ` التهذيب ` غير ابن شبيب
فهو المتهم به، ولم أجد له ترجمة إلا في ` طبقات الأصبهانيين ` (ص 234) فإنه قال: محمد بن عبد الرحيم بن شبيب أبو بكر توفي سنة ست وتسعين ومئتين، كان من أئمة القراء، حدث عن عثمان بن أبي شيبة وابن ماسرجس وإسحاق بن أبي إسرائيل ومشكدانة، ومما لم نكتب إلا عنه … .
قلت: ثم ساق له أحاديث سأذكر إن شاء الله بعضها، ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا، فهو مجهول، والحمل عليه عندي في هذا الحديث وعنه أيضا أبو نعيم في ` أخبار أصبهان ` (2 / 226) والله أعلم.
ولم يعرفه ابن عراق فقال في ` تنزيه الشريعة ` (115 / 2) : ولم أقف له على ترجمة، وشيخ أبي نعيم عبد الله بن محمد بن جعفر أظنه القزويني وهو وضاع كما مر في المقدمة.
كذا قال والصواب أنه أبو الشيخ كما ذكرنا، فإن أبا نعيم يكثر عنه في ` الحلية ` وغيرها ولوكان هو هذا الكذاب لنسبه تمييزا بينهما فتأمل.
ثم استدركت فقلت: بل ليس هو القزويني يقينا، لأن أبا نعيم لم يدركه، فقد ولد بعد وفاته بإحدى وعشرين سنة كما سيأتي بيانه تحت الحديث (5291) .
ثم وجدت لابن شبيب متابعا فقال أبو الحسن بن عبد كويه في ` ثلاثة مجالس ` (5 / 1) أخبرنا أبو بكر محمد بن أحمد بن عبد الوهاب المقري حدثنا محمد بن إبراهيم بن شقيق حدثنا محمد بن قدامة المصيصي به.
ثم تبين لي أن محمد بن إبراهيم بن شقيق تحرف اسمه على بعض النساخ وإنما هو محمد بن عبد الرحيم بن شبيب المذكور آنفا فقد قال أبو نعيم في ` أخبار
أصبهان ` (2 / 226) : حدثنا أبو بكر محمد بن أحمد بن عبد الوهاب المقري، حدثنا محمد ابن عبد الرحيم بن شبيب به.
وعلقه الديلمي في ` مسنده ` (3 / 268) على أبي نعيم، ووقع فيه عبد الله بن محمد بن جعفر كما تقدم في نقل السيوطي وابن عراق عنه، فلعل أبا نعيم له فيه شيخان، والله أعلم.
وقال ابن منده يحيى في ` تاريخ أصبهان ` (229 - مخطوطة الظاهرية) في ترجمة أحمد بن محمد بن أحمد بن سدوس: وجدت في كتاب سمع منه حدثنا أبو بكر بن عبد الوهاب حدثنا أبو بكر بن عبد الرحيم المقري حدثنا محمد بن قدامة المصيصي به وقد ترجم أبو نعيم لأبي بكر هذا (2 / 289) وذكر أنه ختم عليه القرآن ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا، ثم رأيت الحديث أخرجه السلفي في ` الأربعين `، (20 / 1) من الطريق الأولى إلا أنه قال: طارق بن شهاب بدل طاووس وكتب محمد ابن المحب بخطه على النسخة ما نصه: هذا حديث منكر، قال الحافظ الدمشقي: كذا قال، ووجدته في جزء أبي السكين عن طاووس وكذلك وجدته في تاريخ بغداد وهو الصواب وطارق وهم فيه السلفي رحمه الله، ثم رأيت الحديث في ` طرق أربعين السلفي ` (54 / 1 - 2) للحافظ القاسم ابن الحافظ ابن عساكر أخرجه من الطريق الأولى مثل رواية السلفي ثم قال: كذا قال: عن طارق بن شهاب، وأظن أنه الصواب … ، ثم نقل كلام والده الذي نقله ابن المحب آنفا، لكن النسخة أصابها الماء فذهب ببعض الكلمات فلم نستطع نقل ما كتبه بتمامه.
ثم رواه القاسم من طريق أبي السكين زكريا بن يحيى الطائي حدثني عبد الله بن صالح اليماني به وقال: عن طاووس، ثم قال القاسم: هذا حديث غريب، وأبوهمام القرشي لم أجد له ذكرا في الكتب، وليس بمعروف، وعبد الله ابن صالح مجهول أيضا.




২৬৫। হে আবূ হুরায়রা! তুমি লোকেদেরকে কুরআন শিক্ষা দাও এবং তুমি তা শিখ। কারণ তুমি যদি এমতাবস্থায় মৃত্যুবরণ কর তাহলে ফেরেশতাগণ তোমার কবর যিয়ারত করবে যেরূপ বায়তুল্লাহকে যিয়ারত করা হয়। তুমি লোকদেরকে আমার সুন্নাত শিক্ষা দাও, যদিও তাঁরা তা অপছন্দ করে। তুমি যদি পথে এক পলক পরিমাণ সময় অপেক্ষা না করে জান্নাতে প্রবেশ করাকে পছন্দ কর, তাহলে তোমার মতামত দ্বারা আল্লাহর দ্বীনের মধ্যে নূতন কিছু আবিষ্কার করো না।





হাদীসটি জাল।





এটি খাতীব বাগদাদী (৪/৩৮০) এবং আবুল ফারাজ ইবনু মাসলামা “মাজলিসুল আমলী” গ্রন্থে (২/১২০) আব্দুল্লাহ ইবনু সালেহ আল-ইয়ামানী সূত্রে আবু হাম্মাম আল-কুরাশী হতে ... বর্ণনা করেছেন। ইবনুল জাওযী তার “আল-মাওযুআত” গ্রন্থেও (১/২৬৪) উল্লেখ করে বলেছেনঃ এটি সহীহ নয়। আবূ হুম্মাম-এর নাম হচ্ছে মুহাম্মাদ ইবনু মুহাব্বাব। তার সম্পর্কে ইয়াহইয়া বলেনঃ তিনি মিথ্যুক। আবূ হাতিম বলেনঃ তিনি যাহেবুল হাদীস। সুয়ূতী তার সমালোচনা করে “আল-লাআলী” গ্রন্থে (১/২২২) বলেছেনঃ এটির অন্য সূত্রও রয়েছে। আবূ নু’য়াইম বলেনঃ আমাকে আব্দুল্লাহ ইবনু মুহাম্মাদ হাদীসটি শুনিয়েছেন...।





আমি (আলবানী) বলছিঃ তিনি উল্লেখিত হাদীসটির ন্যায় বলেছেন, কিন্তু ভাষায় কিছুটা ভিন্নতা রয়েছে। তিনি বলেনঃ





فإن أتاك الموت وأنت كذلك حجت الملائكة إلى قبرك كما يحج المؤمنون إلى بيت الله الحرام





তুমি এ অবস্থায় থাকাকালীন যদি তোমার নিকট মৃত্যু এসে যায়; তাহলে ফেরেশতাগণ তোমার কবরের নিকট হজ্জ করবে; যেভাবে মু'মিনরা বায়তুল্লাহুল হারামে হজ্জ করে।





সুয়ূতী হাদীসটির ব্যাপারে কোন হুকুম না লাগিয়ে চুপ থেকেছেন। আমার নিকট এ অংশটুকুতে প্রথমটির চেয়ে আরো শক্তিশালী ইনকার অপছন্দনীয় বস্তু রয়েছে। কারণ এতে কবরের দিকে হজ্জ করার কথা উল্লেখ করা হয়েছে। এ ব্যাখ্যা বিদ'আতী ব্যাখ্যা, শরীয়তে এর কোন অস্তিত্ব নেই। বায়তুল্লাহ ছাড়া অন্য কোন দিকে হজ্জের উদ্দেশ্যে যিয়ারত করা যায় এমন কথা কোথাও আসেনি। এরূপ কর্মকান্ড সেই সব বিদ'আতীদের মাঝেই বিদ্যমান আছে যারা কবরগুলোকে অতিরিক্ত সম্মান দেখায় ...।





আমার হৃদয় সাক্ষ্য দিচ্ছে যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে এটির একটি অক্ষরও বের হয়নি। আল্লাহ খারাপ পরিনতি করুন ঐ ব্যক্তির যিনি এ হাদীসটি জাল করেছেন। এ হাদীসটি মুহাম্মাদ ইবনু আব্দির রহীম ইবনু শাবীব জাল করেছেন। আমি তাকেই জালকারী হিসাবে দোষী সাব্যস্ত করছি। তিনি মাজহুল অপরিচিত। এছাড়া অন্য এক সনদে মুহাম্মাদ ইবনু আব্দির রহীম ইবনু শাবীবের স্থলে মুহাম্মাদ ইবনু ইবরাহীম ইবনে শাকীক বলা হয়েছে, কিন্তু যাচাই-বাছাই করার পর দেখা যাচ্ছে যে এখানে ইবনু শাবীবই সঠিক।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (266)


` كان إذا أشفق من الحاجة أن ينساها جعل فى يده خيطا ليذكرها `.
باطل.
رواه ابن عدي (172 / 1) وابن سعد (1 / 286) والحارث بن أبي أسامة في ` مسنده ` (17 ـ من زوائده) ، وأبو الحسن الآبنوسي في ` الفوائد ` (26 / 2) عن سالم بن عبد الأعلى عن نافع عن ابن عمر مرفوعا.
وقال ابن عدي: سالم معروف بهذا الحديث، وأنكر عليه ابن معين وغيره.
وذكره السيوطي في ` الجامع الصغير ` من رواية ابن سعد والحكيم عن ابن عمر فتعقبه شارحه المناوي بقوله: رواه أبو يعلى، قال الزركشي: فيه سالم بن عبد الأعلى قال فيه ابن حبان: وضاع، وقال ابن أبي حاتم: حديث باطل، وقال ابن شاهين في ` الناسخ `: أحاديثه منكرة، وقال المصنف في ` الدرر `: قال أبو حاتم: حديث باطل، وقال ابن شاهين: منكر لا يصح.
قلت: وقول أبي حاتم رواه عنه ابنه في ` العلل ` (2 / 252) قال:
سألت أبي عن حديث رواه محمد بن يعلى السلمي قال: حدثنا سالم بن عبد الأعلى أبو الفيض عن نافع عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم قلت: فذكره، قال أبي: هذا حديث باطل.
قلت: فما حال سالم؟ قال: ضعيف الحديث، وهذا من سالم.
وقال ابن أبي حاتم في ` الجرح والتعديل ` (2 / 1 / 186) : سالم قال ابن معين: ليس حديثه بشيء، قلت: وتمام كلام ابن معين في ` تاريخه ` (ق 86 /2) : وهو الذي يروي عن نافع عن ابن عمر، فذكر هذا الحديث، ثم قال ابن أبي حاتم: وقال أبي: متروك الحديث، وقال ابن طاهر في ` التذكرة `: يضع الحديث على ` الثقات ` وتبع في ذلك ابن حبان، وقال الحاكم والنقاش:
روى عن نافع أحاديث موضوعة كذا في ` اللسان `.
قلت: وهذا من روايته عن نافع، وقد رواه الخطيب (11 / 85) من هذا الوجه، وكذا الدارقطني، ومن طريقه أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (3 / 73) وقد ذكره فيه من ثلاثة طرق:
الأول: هذا.
الثاني: من طريق أبي عمرو بشر بن إبراهيم الأنصاري حدثنا الأوزاعي عن مكحول عن واثلة بن الأسقع مرفوعا نحوه رواه الدارقطني وكذا ابن عساكر في ` تاريخه ` (3 / 10 / 1 - المصورة عن
الأزهرية) .
قال ابن الجوزي: تفرد به بشر وهو يضع الحديث.
قلت: وقد ذكر الذهبي في ترجمته أن هذا الحديث من مصائبه! وأخرج له ابن عدي في ` الكامل ` (33 / 2) أحاديث منها هذا ثم قال: وهذه الأحاديث عن الأوزاعي وغيره لا يرويها عنه غير بشر وهي بواطيل وضعها عليهم، وكذلك سائر أحاديثه التي لم أذكرها موضوعات عن كل من روى عنهم.
الثالث: من طريق غياث بن إبراهيم حدثنا عبد الرحمن بن الحارث بن عياش بن أبي ربيعة عن سعيد بن أبي سعيد المقبري عن رافع بن خديج مرفوعا نحوه، قال الدارقطني: تفرد به غياث وهو متروك.
قلت: وهو متهم بالوضع كما سبق، وقد ذكر السيوطي في ` اللآليء ` (2 / 180) للحديث طريقا رابعا من رواية الطبراني في ` الكبير ` (رقم 4431) من طريق بقية ابن الوليد حدثنا أبو عبد الرحمن مولى بنى تميم عن سعيد المقبري عن رافع بن خديج به، وسكت عليه، وليس بجيد فإن بقية إذا روى عن المجهولين ليس بشيء كما قال ابن معين والعجلي، وهذه الرواية من هذا الصنف فإن أبا عبد الرحمن هذا من شيوخ بقية الذين لا يعرفون كما في ` اللسان `.
ثم وجدت له طريقا خامسا عن ابن عمر، أخرجه أبو سعيد بن الأعرابي في
` المعجم ` (110 / 1) قال: أنبأنا إبراهيم يعني ابن فهد أنبأنا بشر بن عبيد الله الدراسي، أنبأنا عيسى بن شعيب عن يحيى بن أبي الفرات عن سالم بن عبد الله بن عمر عن أبيه مرفوعا.
بشر هذا أورده السمعاني في الدارسي، فقال: والمشهور بهذه النسبة أبو علي بشر بن عبيد الله الدارسي من أهل البصرة ويقال له: المدارسي أيضا هكذا ذكره أبو حاتم بن حبان، يروي عن حماد بن سلمة والبصريين، روى عنه يعقوب بن سفيان الفارسي.
قلت: الذي ي ` ثقات ابن حبان ` (8 / 142) : الدارس مكان الدارسي، وكذلك هو في ` ترتيب الثقات ` (1 / 51 / 1) .
ونحوه في ` الجرح والتعديل ` لابن أبي حاتم (1 / 1 / 362) ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا، وأما ابن عدي فقال: منكر الحديث عن الأئمة.
وفيه نظر بينته في ` تيسير الانتفاع `.
ويحيى بن أبي الفرات لم أعرفه وعيسى بن شعيب فيه ضعف، فأحدهما هو آفة هذا الطريق والله أعلم.
وقد روي ما يخالف هذا الحديث وهو:




২৬৬। তিনি যখন কোন প্রয়োজনীয়তাকে ভুলে যাবার আশংকা করতেন, তখন তার হাতে একটি সুতা রেখে দিতেন (বেঁধে দিতেন), যাতে করে তা স্মরণ করতে পারেন।





হাদীসটি বাতিল।





এটি ইবনু আদী (১/১৭২), ইবনু সা'দ (১/২৮৬), হারিস ইবনু আবূ উসামা তার “মুসনাদ” গ্রন্থে এবং আবুল হাসান আল-আবনুসী “আল-ফাওয়াইদ” গ্রন্থে (২/২৬) সালেম ইবনু আবদিল 'আলা হতে ... বর্ণনা করেছেন। ইবনু আদী বলেনঃ সালেম এ হাদীসটির ব্যাপারে প্রসিদ্ধ, ইবনু মাঈন ও অন্যরা তার উপরে এটিকে হাদীস হিসাবে ইনকার (অস্বীকার) করেছেন। সুয়ূতী “জামেউস সাগীর” গ্রন্থে ইবনু সাদের বর্ণনা হতে উল্লেখ করেছেন। মানবী তার সমালোচনা করে বলেছেনঃ এটি আবু ইয়ালা বর্ণনা করেছেন। যারাকশী বলেনঃ এটির সনদে সালেম ইবনু আবদিল 'আলা রয়েছেন। তার সম্পর্কে ইবনু হিব্বান বলেনঃ তিনি জালকারী। ইবনু আবী হাতিম বলেনঃ হাদীসটি বাতিল।





ইবনু শাহীন “আন-নাসিখ” গ্রন্থে বলেনঃ তার সব হাদীসই মুনকার। মুসান্নেফ (সুয়ূতী) “আদ-দুরার” গ্রন্থে বলেনঃ আবু হাতিম বলেছেনঃ হাদীসটি বাতিল। ইবনু শাহীন বলেছেনঃ এটি মুনকার, সহীহ্ নয়।





আমি (আলবানী) বলছিঃ ইবনু আবী হাতিম তার “আল-ইলাল” গ্রন্থে (২/২৫২) বলেনঃ আমি আমার পিতাকে এ হাদীসটি সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করেছিলাম ... তিনি উত্তরে বলেনঃ এ হাদীসটি বাতিল। আমি সালেমের অবস্থা সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলাম। তিনি বললেনঃ তিনি হাদীসের ক্ষেত্রে দুর্বল এবং এটি সালেম হতেই বর্ণিত।





ইবনু আবী হাতিম “আল-জারহু ওয়াত তা’দীল” গ্রন্থে (২/১/১৮৬) বলেনঃ সালেম সম্পর্কে ইবনু মাঈন বলেছেনঃ তার হাদীসটি কিছুই না। ইবনু আবী হাতিম আরো বলেনঃ আমার পিতা বলেছেনঃ তিনি মাতরূকুল হাদীস।





আবূ তাহের `আত-তাযকিরা` গ্রন্থে বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে হাদীস জাল করতেন। ইবনু হিব্বানও তার কথার অনুসরণ করেছেন। হাকিম ও নাক্কাশ বলেনঃ তিনি নাফে' হতে জাল হাদীস বর্ণনা করেন। অনুরূপ কথা “লিসানুল মীযান” গ্রন্থে এসেছে। তার এ বর্ণনাটি নাফে' হতেই।





ইবনুল জাওযী “আল-মাওযূ’আত” গ্রন্থে (৩/৭৩) হাদীসটির তিনটি সূত্র উল্লেখ করেছেন।





১। প্রথমটি সম্পর্কে আলোচনা করা হল।





২। দ্বিতীয় সূত্রটিতে আবু আমর বিশর ইবনু ইবরাহীম আল-আনসারী রয়েছেন। তিনি আওযাঈ হতে হাদীসটি বর্ণনা করেছেন। এটি দারাকুতনী এবং ইবনু আসাকির তার “আত-তারীখ” গ্রন্থে (৩/১০/১) বর্ণনা করেছেন। ইবনুল জাওযী বলেনঃ বিশর এককভাবে এটি বর্ণনা করেছেন। তিনি হাদীস জালকারী।





আমি (আলবানী) বলছিঃ ইমাম যাহাবী তার জীবনীতে উল্লেখ করেছেন যে, এ হাদীস তার মুসীবতগুলোর একটি! ইবনু আদী “আল-কামিল” গ্রন্থে তার কতিপয় হাদীস (২/৩৩) বর্ণনা করেছেন, এটি সেগুলোর একটি। অতঃপর বলেছেনঃ এ হাদীসগুলো আওযাঈ এবং অন্যদের থেকে বর্ণনা করা। বিশর ছাড়া অন্য কেউ আওযাঈ হতে সেগুলো বর্ণনা করেননি। এগুলো বাতিল তিনি তাদের উপর জাল করেছেন। অনুরূপভাবে তার সেই সব হাদীস যেগুলো আমি উল্লেখ করিনি (তাদের থেকে বর্ণনা করা) সেগুলোও বানোয়াট।





৩। তৃতীয়টি গিয়াস ইবনু ইবরাহীম সূত্রে বর্ণিত হয়েছে। এ গিয়াস এককভাবে হাদীসটি বর্ণনা করেছেন, তিনি মাতরূক।





আমি (আলবানী) বলছিঃ তিনি জাল করার দোষে দোষী, যেমনভাবে পূর্বে তার সম্পর্কে আলোচনা করা হয়েছে। সুয়ূতী “আল-লাআলী” গ্রন্থে (২/১৮০) তাবারানীর বর্ণনা হতে বাকিয়া ইবনুল ওয়ালীদ থেকে চতুর্থ সূত্র উল্লেখ করেছেন। অতঃপর চুপ থেকেছেন, কিন্তু তার চুপ থাকা সঠিক হয়নি। কারণ বাকিয়া মাজহুল বর্ণনাকারীদের থেকে বর্ণনা করেছেন, যেমনভাবে ইবনু মাঈন ও আজালী বলেছেন। এ বর্ণনাটি এ প্রকারের অন্তর্ভুক্ত। কারণ তার শাইখ আবু আব্দির রহমান মাজহুল বর্ণনাকারীদের একজন; যেমনভাবে “আল-লিসান” গ্রন্থে এসেছে।





অতঃপর আমি (আলবানী) আরেকটি সূত্র পেয়েছি, যেটি একাধিক সমস্যায় জর্জরিত। তাতে বিশর ইবনু ওবায়দিল্লাহ রয়েছেন। তার সম্পর্কে ইবনু আদী বলেনঃ তিনি আইম্মাদের থেকে বর্ণনাকারী হিসাবে মুনকারুল হাদীস।





আরো রয়েছেন ইয়াহইয়া ইবনু আবী ফুরাত; আমি তাকে চিনি না।





আরো আছেন ঈসা ইবনু শুয়া'য়েব; তার মধ্যে দুর্বলতা রয়েছে। তাদের দু'জনের একজন এ সূত্রটির সমস্যা।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (267)


` من حول خاتمه أو عمامته أو علق خيطا في أصبعه ليذكره حاجته فقد أشرك بالله عز وجل، إن الله هو يذكر الحاجات `.
موضوع.
رواه ابن عدي (33 / 1 - 2) وابن الجوزي في ` الموضوعات ` (3 / 74) من طريق بشر بن الحسين حدثنا الزبير بن عدي عن أنس مرفوعا، وقال
ابن عدي: لا يصح وقال ابن الجوزي: لا أصل له، بشر يروي عن الزبير بواطيل.
وأقره السيوطي في ` اللآليء ` (2 /283) وزاد عليه بقوله: قلت: قال ابن حبان: روى بشر بن الحسين الأصبهاني عن الزبير نسخة موضوعة شبيها بمائة وخمسين حديثا، وأقره ابن عراق في ` تنزيه الشريعة ` (322 / 2) .




২৬৭। যে ব্যাক্তি তার আংটি বা পাগড়ী উল্টিয়ে রাখে বা তার আংগুলে সুতা ঝুলিয়ে রাখে, যাতে করে তার প্রয়োজনীয়তাকে স্মরণ করতে পারে, সে ব্যাক্তি অবশ্যই আল্লাহর সাথে শির্ক করল। কারণ আল্লাহ তা’আলাই প্রয়োজনীয়তাকে স্মরণ করিয়ে দেন।





হাদীসটি জাল।





এটি ইবনু আদী (৩৩/১-২) এবং ইবনুল জাওযী “আল-মাওযুআত” গ্রন্থে (৩/৭৪) বিশর ইবনুল হুসাইন সূত্রে ... বর্ণনা করেছেন। অতঃপর ইবনু আদী বলেছেনঃ এটি সহীহ নয়।





ইবনুল জাওযী বলেছেনঃ এটির কোন ভিত্তি নেই। কারণ বিশর যুবায়ের হতে বাতিল হাদীস বর্ণনাকারী। সুয়ূতী তার এ বক্তব্যকে “আল-লাআলী” গ্রন্থে (২/২৮৩) সমর্থন করে বলেছেনঃ ইবনু হিব্বান বলেনঃ বিশর ইবনুল হুসাইন আল-আসবাহানী যুবায়ের হতে একটি জাল কপি বর্ণনা করেছেন যাতে একশত পঞ্চাশটি হাদীস ছিল।





ইবনু আররাক `তানযীহুশ শারীয়াহ` গ্রন্থে (২/৩২২) তার এ বক্তব্যকে সমর্থন করেছেন।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (268)


` من رفع قرطاسا من الأرض فيه بسم الله الرحمن الرحيم إجلالا أن يداس كتب عند الله من الصديقين، وخفف عن والديه وإن كانا مشركين، ومن كتب بسم الله الرحمن الرحيم فجوده تعظيما لله غفر له `.
موضوع.

أخرجه أبو الشيخ ابن حبان في ` طبقات الأصبهانيين ` (ص 234) مفرقا في موضعين وابن عدي (246 / 1) بتمامه من طريق أبي سالم الرواسي العلاء بن مسلمة قال: حدثنا أبو حفص العبدي عن أبان عن أنس مرفوعا، وذكره ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (1 / 226) من رواية ابن عدي ثم قال: أبان ضعيف جدا، وأبو حفص أشد منه ضعفا، وأبو سالم العلاء بن مسلمة كذبه محمد بن طاهر الأزدي لا تحل الرواية عنه.
قال السيوطي في ` اللآليء ` (1 / 202) :
قلت: أورده ابن عدي في ترجمة العبدي وقال: إنه متروك الحديث، قال: وقد روي عن علي بن أبي طالب من وجه لا يصح.




২৬৮। যে ব্যাক্তি যমীন হতে বিসমিল্লাহির রাহমানির রাহীম লিখা কাগজ উঠাবে; তাঁকে পদদলিত হওয়া থেকে সম্মান প্রদর্শন করে, তাঁকে আল্লাহর নিকট সত্যবাদী বিশ্বাসীদের মধ্যে লিপিবদ্ধ করা হবে এবং তার পিতা-মাতার উপর হতে শাস্তি লাঘব করা হবে যদিও তাঁরা দু’জন মুশরিক হয়। আর যে ব্যাক্তি বিসমিল্লাহির রাহমানির রাহিম লিখল, অতঃপর আল্লাহকে সম্মান দেখিয়ে তাঁকে সৌন্দর্য মণ্ডিত করল, তাঁকে ক্ষমা করে দেয়া হবে।





হাদীসটি জাল।





এটি আবুশ শাইখ ইবনু হিব্বান “তাবাকাতুল আসবাহানিয়ীন` গ্রন্থে (পৃঃ ২৩৪) এবং ইবনু আদী (১/২৪৬) আবূ সালেম আর-রাওয়াসী আলা ইবনু মাসলামী সূত্রে আবু হাফস আল-আবাদী হতে, তিনি আবান হতে ... বর্ণনা করেছেন।





ইবনুল জাওযী এটিকে তার `আল-মাওযু’আত` গ্রন্থে (১/২২৬) ইবনু আদীর বর্ণনায় উল্লেখ করে বলেছেনঃ আবান নিতান্তই দুর্বল। হাফস তার চেয়েও দুর্বল এবং আবু সালেম আলা ইবনু মাসলামাকে মুহাম্মাদ ইবনু তাহির আল-আযদী মিথ্যুক আখ্যা দিয়েছেন। তিনি আরো বলেছেনঃ তার থেকে বর্ণনা করা হালাল নয়।





সুয়ূতী “আল-লাআলী” গ্রন্থে (১/২০২) বলেনঃ আবাদীর জীবনী বর্ণনা করতে গিয়ে এটিকে ইবনু আদী উল্লেখ করে বলেছেনঃ তিনি মাতরূকুল হাদীস। তিনি (সুয়ূতী) আরো বলেনঃ এটি আলী ইবনু আবী তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত হয়েছে, কিন্তু সহীহ্ নয়।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (269)


` العالم لا يخرف `.
موضوع.
قال ابن أبي حاتم في ` العلل ` (2 / 439) ، وسئل أبي عن حديث رواه العلاء ابن زيدل عن أنس مرفوعا: ` العالم لا يخرف `، فقال: العلاء ضعيف الحديث متروك الحديث، وقد وجدنا من ينسب إلى العلم المسعودي والجريري وسعيد بن أبي عروبة وعطاء بن السائب وغيرهم يعني أنهم قد تغيروا في آخر عمرهم.
قلت: العلاء هذا قال الذهبي: تالف، قال ابن المديني: كان يضع الحديث وقال ابن حبان: روى عن أنس نسخة موضوعة.
وقد روي الحديث بلفظ آخر وهو:




২৬৯। আলেম ব্যাক্তির বার্ধক্য জনিত কারণে মস্তিষ্ক বিকৃত হবে না।





হাদীসটি জাল।





ইবনু আবী হাতিম “আল-ইলাল” গ্রন্থে (২/৪৩৯) বলেনঃ আমার পিতাকে আলা ইবনু যায়দাল কর্তৃক আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনাকৃত হাদীস সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করা হয়েছিল। তিনি বলেনঃ 'আলা দুর্বল, মাতরূকুল হাদীস। আমরা জ্ঞানের অধিকারী মাসউদী, জারীরী, সাঈদ ইবনু আরুবা, আতা ইবনুস সায়েব ও অন্যান্যদের পেয়েছি তাদের প্রত্যেকের শেষ বয়সে মস্তিষ্কে পরিবর্তন ঘটেছিল।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এ আলা সম্পর্কে যাহাবী বলেছেনঃ তিনি ধ্বংসপ্রাপ্ত। ইবনুল মাদীনী বলেনঃ তিনি হাদীস জাল করতেন। ইবনু হিব্বান বলেনঃ তিনি আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে জাল কপি বর্ণনা করেছেন।





তিনি হাদীসটি অন্য ভাষাতেও বর্ণনা করেছেন এভাবেঃ (দেখুন পরেরটি)











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (270)


` لا يخرف قارئ القرآن `.
موضوع.
ذكره السيوطي في ` ذيل الأحاديث الموضوعة ` (ص 25) وتبعه ابن عراق فأورده في ` تنزيه الشريعة ` (36 / 2) من طريق أبي نعيم وهذا في ` أخبار أصبهان ` (2 / 343) أنبأنا لاحق بن الحسين حدثنا خيثمة بن سليمان حدثنا عبيد بن محمد حدثنا محمد بن يحيى بن جميل حدثنا بكر بن السرور حدثنا يحيى بن مالك عن أنس عن أبيه
عن الزهري عن أنس رفعه، ورواه الديلمي (4 / 190) ورواه ابن عساكر في ` تاريخه ` (18 / 1 / 2) من
طريق أبي نعيم وغيره، أخبرنا لاحق به، ثم قال السيوطي: قال في ` الميزان `: لاحق كذاب، وروى عنه أبو نعيم في ` الحلية ` وغيرها مصائب، وقال في ` اللسان `: قال الإدريسي: يضع الحديث على الثقات، ولعله لم يخلق في الكذابين مثله، وقال ابن السمعاني: كان أحد الكذابين وضع نسخا لا يعرف أسماء رواتها وقال ابن النجار: مجمع على كذبه.
قلت: ومع هذا كله فقد سود به السيوطي كتابه ` الجامع الصغير `! وبيض له المناوي في ` شرحيه `.
ورواه عبد الرحمن بن نصر الدمشقي في ` الفوائد ` (2 / 226 / 2) عن الشعبي من قوله وسنده ضعيف، فلعله أصل الحديث، رفعه بعض الكذبة! .
وقد وجدت له طريقا أخرى بنحوه وهو:




২৭০। কুরআন পাঠকারী বার্ধক্য জনিত কারণে বিকৃত মস্তিষ্ক হবে না।





হাদীসটি জাল।





এটিকে সুয়ূতী “যায়লু আহাদীসিল মাওযু আহ” গ্রন্থে (পৃঃ ২৫) উল্লেখ করেছেন এবং তার অনুসরণ করে ইবনু আররাক “তানীহুশ শারীয়াহ` গ্রন্থে (২/৩৬) আবূ নু’য়াইম সূত্রে বর্ণনা করেছেন। এটি “আখবারু আসবাহান” গ্রন্থেও (২/৩৪৩) লাহেক ইবনুল হুসাইন-এর বর্ণনায় ... এসেছে।





দাইলামী (৪/১৯০) এবং ইবনু আসাকির তার “আত-তারীখ” গ্রন্থে (১৮/১/২) আবূ নু’য়াইম ও অন্য একটি সূত্রের বরাতে বর্ণনা করেছেন। এটির সনদে লাহেক ইবনুল হুসাইন নামক এক বর্ণনাকারী আছেন। সুয়ূতী বলেনঃ যাহাবী “আল-মীযান” গ্রন্থে বলেছেনঃ লাহেক মিথ্যুক। তার থেকেই আবু নু’য়াইম “আল-হিলইয়াহ` গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন।





“লিসানুল মীযান” গ্রন্থে ইবনু হাজার বলেনঃ ইদরীসী বলেছেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে হাদীস জাল করতেন। সম্ভবত মিথ্যুকদের মধ্যে তার মত কাউকে সৃষ্টি করা হয়নি। ইবনুস সামায়ানী বলেনঃ তিনি ছিলেন মিথ্যুকদের একজন। এমন একটি কপি জাল করেছেন, যার বর্ণনাকারীদের নাম জানা যায় না। ইবনুন নাজ্জার বলেনঃ তিনি মিথ্যুক হওয়ার ব্যাপারে সকলেই একমত পোষণ করেছেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এতো কিছু বলার পরেও সুয়ূতী হাদীসটি উল্লেখ করার দ্বারা “জামেউস সাগীর” গ্রন্থকে কালিমালিপ্ত করেছেন।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (271)


` من جمع القرآن متعه الله بعقله حتى يموت `.
موضوع.
رواه أبو سعيد بن الأعرابي في ` معجمه ` (111 / 2) : أخبرنا إبراهيم بن الهيثم يعني البلدي أخبرنا أبو صالح عبد الله بن صالح، أخبرنا رشدين بن سعد عن جرير بن حازم عن حميد عن أنس مرفوعا، ورواه ابن عساكر (2 / 111 / 2) من طريق آخر عن أبي صالح به.
وهذا سند ضعيف جدا، رشدين بن سعد قال الحافظ في ` التقريب `: ضعيف، رجح أبو حاتم عليه ابن لهيعة، وقال ابن يونس: كان صالحا في دينه فأدركته غفلة الصالحين فخلط في الحديث.
قلت: فالظاهر أن هذا من تخاليطه، ويحتمل أن يكون من وضع خالد بن نجيح جار لعبد الله بن صالح كان يضع الحديث في كتب عبد الله وهو لا يشعر! انظر ` الميزان ` (2 / 46 - 48) ، وقول أبي حاتم المتقدم تحت الحديث (194) .




২৭১। যে ব্যাক্তি কুরআন জমা করবে, মৃত্যু পর্যন্ত আল্লাহ তাঁকে তার জ্ঞান দ্বারা উপকৃত করবেন।





হাদীসটি জাল।





এটি আবূ সাঈদ ইবনুল আরাবী তার “আল-মু'জাম” গ্রন্থে (২/১১১) ইবরাহীম ইবনু হায়সামের মাধ্যমে আবূ সালেহ্ হতে ... বর্ণনা করেছেন। ইবনু আসাকির (২/১১১/২) অন্য একটি সূত্রে আবূ সালেহ্ হতে বর্ণনা করেছেন। এটির সনদ নিতান্তই দুর্বল। বর্ণনাকারী রিশদীন ইবনু সাঈদ সম্পর্কে হাফিয ইবনু হাজার `আত-তাকরীব` গ্রন্থে বলেনঃ তিনি দুর্বল। আবূ হাতিম ইবনু লাহীয়াকে তার উপর অগ্রাধিকার দিয়েছেন। ইবনু ইউনুস বলেনঃ তিনি দ্বীনের ক্ষেত্রে নেককার ছিলেন। আমি তাকে সালেহীনদের মধ্যে গাফেল হিসাবে পেয়েছি। ফলে তার হাদীসে সংমিশ্রণ ঘটেছে।





আমি (আলবানী) বলছিঃ বাহ্যিকতা প্রমাণ করছে যে, এটি তার সংমিশ্রণ ঘটিত হাদীসগুলোর একটি। হতে পারে হাদীসটি আব্দুল্লাহ ইবনু সালেহ (আবু সালেহ)-এর প্রতিবেশী খালেদ ইবনু নাজীহ কর্তৃক জালকৃত। কারণ তিনি হাদীস জাল করতেন এবং আব্দুল্লাহর গ্রন্থ সমূহে ঢুকিয়ে দিতেন। অথচ আব্দুল্লাহ তা বুঝতে পারতেন না। দেখুন “আল-মীযান” গ্রন্থ (২/৪৬-৪৮) এবং এ মর্মে আবূ হাতিমের ভাষ্য ১৯৪ নং হাদিসে দেখুন, সেখানেও তার সম্পর্কে ব্যাখ্যা দেয়া হয়েছে।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (272)


` اعتبروا عقل الرجل فى طول لحيته ونقش خاتمه وكنوته `.
موضوع.
ذكره السيوطي في ` ذيل الأحاديث الموضوعة ` (ص 10) من رواية ابن عساكر بسنده عن عثمان بن عبد الرحمن الطرائفي عن يزيد بن سنان الأشعري عن أبي دوس الأشعري قال: كنا عند معاوية جلوسا إذ أقبل علينا رجل طويل اللحية، فقال معاوية:
أيكم يحفظ حديث رسول الله صلى الله عليه وسلم في طول اللحية، فسكت القوم، فقال معاوية: لكني أحفظه، فلما جلس الرجل قال معاوية: أما اللحية فلسنا نسأل عنها! سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: فذكره، قال: فما كنوتك؟
قال: أبو كوكب الدرى، قال: فما نقش خاتمك؟ قال: وتفقد الطير، فقال: ما لي لا أرى الهدهد أم كان من الغائبين، فقال: وجدنا حديث رسول الله صلى الله عليه وسلم حقا، قال السيوطي: يزيد ضعيف، والطرائفي كذبه ابن نمير.




২৭২। ব্যাক্তির জ্ঞানের গভীরতা যাচাই কর তার দাড়ির দীর্ঘায়ত্বের মাঝে, আংটির কারুকার্যের মাঝে এবং তার কুনিয়াতের মাঝে।





হাদীসটি জাল।





এটিকে সুয়ূতী “যায়লু আহাদীসিল মাওযুআহ” গ্রন্থে (পৃঃ ১০) ইবনু আসাকিরের বর্ণনা হতে উসমান ইবনু আব্দির রহমান আত-তারায়েকী হতে উল্লেখ করেছেন। তিনি ইয়াযীদ ইবনু সিনান আশয়ারী হতে ... বর্ণনা করেছেন। সুয়ূতী বলেনঃ ইয়াযীদ দুর্বল এবং তারায়েফীকে ইবনু নুমায়ের মিথ্যুক আখ্যা দিয়েছেন।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (273)


` لا حبس (أي وقف) بعد سورة النساء `.
ضعيف.

أخرجه الطحاوي في ` شرح معاني الآثار ` (2 / 250) والطبراني (3 / 114 / 1) والدارقطني (4 / 68 / 3 و4) والبيهقي في ` سننه ` (6 / 162) من طريق عبد الله بن لهيعة حدثنا عيسى بن لهيعة عن عكرمة قال: سمعت ابن عباس يقول: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول بعد ما نزلت سورة النساء وفرضت فيها الفرائض: فذكره، وقال الدارقطني: وأقره البيهقي:
لم يسنده غير ابن لهيعة عن أخيه وهما ضعيفان.
قلت: وبه يعرف ما في رمز السيوطي في ` الجامع الصغير ` لحسنه، وقد رده عليه المناوي في شرحه بقول الدارقطني هذا، وبقول الهيثمي في ` المجمع ` (7 / 2) : رواه الطبراني وفيه عيسى بن لهيعة وهو ضعيف، والحديث استدل به
الطحاوي لأبي حنيفة في قوله: إن الوقف باطل، وهو استدلال واه لأمور:
الأول: أن الحديث ضعيف كما علمت فلا يجوز الاحتجاج به.
الثاني: أنه معارض بأحاديث صحيحة في مشروعية الوقف، منها قوله صلى الله عليه وسلم لعمر بن الخطاب: ` حبس الأصل، وسبل الثمرة ` أي اجعله وقفا حبيسا، رواه الشيخان في ` صحيحيهما `، وهو مخرج في ` الإرواء ` (6 / 30 / 1582) .
الثالث: أنه يمكن تفسيره بمعنى لا يتعارض مع الأحاديث الصحيحة وبه فسره ابن الأثير في ` النهاية ` فقال: أراد أنه لا يوقف مال ولا يزوى عن وارثه، وكأنه إشارة إلى ما كانوا يفعلونه في الجاهلية من حبس مال الميت ونسائه، كانوا إذا كرهو االنساء لقبح أو قلة مال حبسوهن عن الأزواج لأن أولياء الميت كانوا أولى بهن عندهم.




২৭৩। সূরা নেসার পরে ওয়াকফ নেই।





হাদীসটি দুর্বল।





এটি তাহাবী “শারহু মা'য়ানীল আসার” গ্রন্থে (২/২৫০), তাবারানী (৩/১১৪/১), দারাকুতনী (৪/৬৮/৩,৪) এবং বাইহাকী তার “সুনান” গ্রন্থে (৬/১৬২) আব্দুল্লাহ ইবনু লাহীয়াহ সূত্রে ঈসা ইবনু লাহীয়াহ হতে ... বর্ণনা করেছেন।





দারাকুতনী বলেন (বাইহাকীও তাকে সমর্থন করেছেন) ইবনু লাহীয়াহ ছাড়া অন্য কেউ তার ভাই থেকে মুসনাদ হিসাবে বর্ণনা করেননি। তারা দু’জনই দুর্বল।


এটিকে সুয়ূতী “জামেউস সাগীর” গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন এবং হাসান হিসাবে চিহ্নিত করেছেন। মানবী দারাকুতনী ও “আল-মাজমা” গ্রন্থে (২/৭) হায়সামীর কথা দ্বারা তার প্রতিবাদ করেছেন। তিনি বলেনঃ হাদীসটি তাবারানী বর্ণনা করেছেন, যার সনদে ঈসা ইবনু লাহীয়াহ রয়েছেন; তিনি দুর্বল।





তাহাবী ইমাম আবু হানীফা (রাহিমাহুল্লাহ)-এর নিকট ওয়াকফ বাতিল এ মতামতের সমর্থনে এ হাদীস দ্বারা দলীল গ্রহণ করেছেন। এরূপ দলীল গ্রহণ করা নিতান্তই দুর্বল নিম্নে বর্ণিত কারণেঃ





১। হাদীসটি দুর্বল; যেমনটি অবহিত হয়েছেন। এর দ্বারা দলীল গ্রহণ করা অবৈধ ।





২। এটি (ওয়াকফ) শরীয়ত সম্মত এ মর্মে বর্ণিত সহীহ হাদীসের সাথে সাংঘর্ষিক, যা বুখারী ও মুসলিমের মধ্যে বর্ণিত হয়েছে। দেখুন `ইরওয়াউল গালীল” (৬/৩০/১৫৮২)।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (274)


` أو صاني جبرائيل عليه السلام بالجار إلى أربعين دارا، عشرة من ها هنا وعشرة من ها هنا، وعشرة من ها هنا، وعشرة من ها هنا `.
ضعيف.

أخرجه البيهقي (6 / 276) عن إسماعيل بن سيف حدثتني سكينة قالت: أخبرتني أم هانيء بنت أبي صفرة عن عائشة مرفوعا، وقال: في إسناده ضعف.
قلت: وأقره في ` نصب الراية ` (4 / 414) وذلك لأن إسماعيل هذا قال ابن عدي (1 / 318) : حدث بأحاديث عن الثقات غير محفوظة، ويسرق الحديث.
قلت: وسكينة وأم هانيء لم أعرفهما ولا يفيد هنا بصورة خاصة توثيق ابن حبان (8 / 103) لإسماعيل هذا لأنه قال: مستقيم الحديث إذا حدث عن ثقة.
وقد روي عن كعب بن مالك وهو:




২৭৪। চল্লিশটি বাড়ী পর্যন্ত প্রতিবেশী এ মর্মে জিবরীল আমাকে ওয়াসিয়াত করেছেন। চতুর্দিকে দশটি দশটি করে।





হাদীসটি দুর্বল।





এটি বাইহাকী (৬/২৭৬) ইসমাঈল ইবনু সায়েফ হতে ... বর্ণনা করেছেন। অতঃপর বলেছেনঃ এটির সনদ দুর্বল। আমি (আলবানী) বলছিঃ যায়লাঈ “নাসবুর রায়ার” গ্রন্থে (৪/৪১৪) তা স্বীকার করেছেন। কারণ এ ইসমাঈল সম্পর্কে ইবনু আদী (১/৩১৮) বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে ভেজালযুক্ত হাদীস বর্ণনা করেছেন এবং তিনি হাদীস চোর।





আমি (আলবানী) বলছিঃ বর্ণনাকার সাকীনা এবং উম্মে হানীকে আমি চিনি না।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (275)


` ألا إن أربعين دارا جوار، ولا يدخل الجنة من خاف جاره بوائقه `، قيل للزهري: أربعين دارا؟ قال: أربعين هكذا، وأربعين هكذا.
ضعيف.

أخرجه الطبراني في ` الكبير ` (19 / 73 / رقم 143) عن يوسف بن السفر عن الأوزاعي عن يونس بن يزيد عن الزهري عن عبد الرحمن بن كعب بن مالك
عن أبيه قال: أتى النبي صلى الله عليه وسلم رجل فقال: يا رسول الله إني نزلت محلة بني فلان، وإن أشدهم لي أذى أقربهم لي جوارا، فبعث النبي صلى الله عليه وسلم أبا بكر وعمر وعليا أن يأتوا باب المسجد فيقوموا عليه فيصيحوا: ألا … `.
ويوسف بن السفر أبو الفيض فيه مقال، كذا قال الزيلعي (4 / 413 - 414) وقد ألان القول جدا في ابن السفر هذا، فإن مثل هذا القول: فيه مقال إنما يقال فيمن هو مختلف في توثيقه وتجريحه، وابن السفر هذا متفق على تركه بل كذبه الدارقطني وقال البيهقي: هو في عداد من يضع الحديث، وقد مضى بعض أحاديثه الموضوعة (برقم 187) ولهذا قال الهيثمي بعد أن ساق له هذا الحديث في ` المجمع ` (8 / 169) : وفيه يوسف بن السفر وهو متروك.
قلت: وقد خالفه هقل بن زياد فقال: حدثنا الأوزاعي عن يونس عن ابن شهاب الزهري قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: فذكره مرسلا، أخرجه أبو داود في ` المراسيل ` (رقم 350) حدثنا إبراهيم بن مروان الدمشقي حدثني أبي حدثنا هقل بن زياد به، ويأتي لفظه بعد حديث.
وهذا سند رجاله ثقات ولولا إرساله لحكمت عليه بالصحة، وعلى من يقول بصحة المرسل أن يأخذ به كالحنفية ولهذا أقول: إن قول صاحب ` الهداية `، وما قاله الشافعي إن الجوار إلى أربعين دار بعيد، وما يرويه فيه ضعف لا يتفق مع قول الحنفية: إن الحديث المرسل حجة، فتأمل.
والحديث قال الحافظ العراقي في ` تخريج الإحياء ` (2 / 189) بعد أن ساقه من الوجهين المرسل والموصول: إنه حديث ضعيف، وكذا قال الحافظ في ` الفتح ` (10 / 397) .
قلت: وأما قوله: ` ولا يدخل الجنة … `، فصحيح لأنه جاء من حديث أبي هريرة مرفوعا بلفظ: ` لا يدخل الجنة من لا يأمن جاره بوائقه ` أخرجه مسلم (1 / 49) والبخاري في ` الأدب المفرد ` (ص 20) ، وهو مخرج في ` السلسلة الأخرى ` (رقم 549) .
وقد روي الحديث عن أبي هريرة أيضا وهو:




২৭৫। সাবধান! অবশ্যই চল্লিশ ঘর পর্যন্ত প্রতিবেশী। সেই ব্যাক্তি জান্নাতে প্রবেশ করবে না যার প্রতিবেশী তার অনিষ্ঠতাকে ভয় করে। চল্লিশ ঘর বলতে কী বুঝানো হচ্ছে এ মর্মে যুহরীকে জিজ্ঞাসা করা হয়েছিল? তিনি বললেনঃ চল্লিশ এ দিকে আর চল্লিশ ঐ দিকে।





হাদীসটি দুর্বল।





এটি তাবরানী “মুজামুল কাবীর” গ্রন্থে (১৯/৭৩/নং ১৪৩) ইউসুফ ইবনু সাফার হতে এবং তিনি আওযাঈ হতে ... বর্ণনা করেছেন। বর্ণনাকারী ইউসুফ ইবনু সাফার আবুল ফায়েয সম্পর্কে সমালোচনা রয়েছে। অনুরূপ কথা যায়লাঈও (৪/৪১৩-৪১৪) বলেছেন। তাদের পক্ষ হতে এ ইবনু সাফার সম্পর্কে নিতান্তই নরম কথা বলা হয়েছে। কারণ এরূপ কথা বলা হয় যার ব্যাপারে ভাল না মন্দ এ নিয়ে দ্বন্দ্ব রয়েছে তার ক্ষেত্রে। অথচ এ ইবনু সাফার মাতরূক হওয়ার ব্যাপারে সবাই একমত, বরং তাকে দারাকুতনী মিথ্যুক আখ্যা দিয়েছেন এবং বাইহাকী তার সম্পর্কে বলেছেনঃ তিনি হাদীস জালকারীদের অন্তর্ভুক্ত। তার জাল হাদীস পূর্বে আলোচিত হয়েছে (১৮৭ নং)।





এ জন্য হায়সামী “আল-মাজমা` গ্রন্থে ( ৮/১৬৯) বলেছেনঃ ইউসুফ ইবনুস সাফার মাতরক।





আমি (আলবানী) বলছি হাকাল ইবনু যিয়াদ আওযাই হতে মুরসাল হিসাবে হাদীসটি বর্ণনা করেছেন। সেটি আবু দাউদ তার `আল-মারাসীল` গ্রন্থে (নং ৩৫০) বর্ণনা করেছেন।





এটির সনদের বর্ণনাকারীগণ নির্ভরযোগ্য। যদি মুরসাল না হত তাহলে সহীহ বলে হুকুম লাগাতাম। হাফিয় ইরাকী “তাখরীজুল ইহইয়া” গ্রন্থে (২/১৮৯) বলেছেনঃ হাদীসটি দুর্বল। অনুরূপ কথা হাফিয ইবনু হাজার “ফাতহুল বারী” গ্রন্থেও (১০/৩৯৭) বলেছেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ হাদীসটির অংশ বিশেষ ولا يدخل الجنة من خاف সহীহ। কারণ আবু হুরাইরাহ্ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর হাদীসের মধ্যে এসেছে এ ভাষায়ঃ





لا يدخل الجنة من لا يأمن جاره بوائقه





এটি মুসলিম (১/৪৯) এবং বুখারী “আদাবুল মুফরাদ” গ্রন্থে (পৃঃ ২০) বর্ণনা করেছেন।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (276)


` حق الجوار إلى أربعين دارا، وهكذا وهكذا وهكذا يمينا وشمالا وقدام وخلف `.
ضعيف جدا.
رواه أبو يعلى في ` مسنده ` (10 / 385 / 5982) حدثنا محمد بن جامع العطار حدثنا محمد بن عثمان حدثنا عبد السلام بن أبي الجنوب عن أبي سلمة عن أبي هريرة مرفوعا، وعن أبي يعلى رواه ابن حبان في ` الضعفاء ` (2 /150) وأعله بعبد السلام هذا وقال: إنه منكر الحديث.
قلت: وأقره الزيلعي في ` نصب الراية ` (3 / 414) ثم تناقض ابن حبان فذكره في ` الثقات ` (7 / 127) ، انظر ` تيسير الانتفاع `.
وقال أبو حاتم: (3 / 1 / 45) : متروك الحديث.
قلت: وفيه علة أخرى فقال الهيثمي في ` المجمع ` (8 / 168) : رواه أبو يعلى عن شيخه محمد بن جامع العطار وهو ضعيف.
قلت: بل هو أسوأ حالا، قال أبو زرعة: ليس بصدوق، ومحمد بن عثمان وهو الجمحي المكي ضعيف فهذه علة ثالثة.
ولهذا قال الحافظ العراقي في ` تخريج الإحياء ` (2 / 189) : إنه حديث ضعيف، وقد روي مرسلا وهو:




২৭৬। প্রতিবেশীর হক হচ্ছে চল্লিশ বাড়ী পর্যন্ত। এদিকে, ঐদিকে তথা ডানে, বামে, সম্মুখে ও পিছনে।





হাদীসটি নিতান্তই দুর্বল।





হাদীসটি নিতান্তই দুর্বল। এটি আবু ইয়ালা তার “মুসনাদ” গ্রন্থে (১০/৩৮৫/ ৫৯৮২) বর্ণনা করেছেন। এটির সনদে মুহাম্মাদ ইবনু জামে আল-আত্তার, মুহাম্মাদ ইবনু উসমান ও আব্দুস সালাম ইবনু আবীল জানূব রয়েছেন। আবু ইয়ালার সূত্র হতেই হাদীসটি ইবনু হিব্বান “আয-যুয়াফা” গ্রন্থে (২/১৫০) বর্ণনা করেছেন এবং এটির সমস্যা হিসাবে আব্দুস সালামকে মুনকারুল হাদীস বলে চিহ্নিত করেছেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ যায়লাঈ “নাসবুর রায়া” গ্রন্থে (৩/৪১৪) তার এ বক্তব্যকে সমর্থন করেছেন। ইবনু হিব্বান এটিকে “আস-সিকাত” গ্রন্থেও (৭/১২৭) উল্লেখ করেছেন। আবু হাতিম (৩/১/৪৫) বলেনঃ তিনি মাতরূকুল হাদীস।





আমি (আলবানী) বলছিঃ হাদীসটির সনদে অন্য একটি সমস্যা রয়েছে। হায়সামী বলেনঃ (৮/১৬৮) আবূ ইয়ালা তার শাইখ মুহাম্মাদ ইবনু জামে আল-আত্তার হতে বর্ণনা করেছেন। তিনি দুর্বল।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এর চেয়েও বরং তার অবস্থা আরো খারাপ। আবূ যুর'য়াহ বলেনঃ তিনি সত্যবাদী নন।





এছাড়া মুহাম্মাদ ইবনু উসমান হচ্ছেন জামহী মাক্কী, তিনিও দুর্বল। এটি হচ্ছে হাদীসটির তৃতীয় সমস্যা। এ কারণেই হাফিয ইরাকী “তাখরীজুল ইহইয়া” গ্রন্থে (২/১৮৯) বলেছেনঃ হাদীসটি দুর্বল।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (277)


` الساكن من أربعين دارا جار `.
ضعيف.

أخرجه أبو داود في ` المراسيل ` (450) عن الزهري مرسلا مرفوعا وفيه:
قيل للزهري: وكيف أربعون دارا؟ قال: أربعون عن يمينه وعن يساره، وخلفه وبين يديه، ورجاله ثقات، فهو صحيح عند من يحتج بالمرسل كما سبق بيانه قبل حديث.
وقد اختلف العلماء في حد الجوار على أقوال ذكرها في ` الفتح ` (10 / 367) ، وكل ما جاء تحديده عنه صلى الله عليه وسلم بأربعين ضعيف لا يصح، فالظاهر أن الصواب تحديده بالعرف، والله أعلم.




২৭৭। চল্লিশটি বাড়ীর অধিবাসীরাই প্রতিবেশী।





হাদীসটি দুর্বল।





এটি আবু দাউদ তার “আল-মারাসীল” গ্রন্থে (৪৫০) যুহরী হতে মুরসাল হিসাবে বর্ণনা করেছেন। যুহরীকে জিজ্ঞাসা করা হয়েছিল কীভাবে চল্লিশ ঘর? তিনি বলেনঃ ডানে চল্লিশ, বামে চল্লিশ, পিছনে চল্লিশ এবং সামনে চল্লিশ ।





এটির সনদের বর্ণনাকারীগণ নির্ভরযোগ্য। হাদীসটি সহীহ সেই ব্যক্তির নিকট যিনি মুরসালকে দলীল হিসাবে গ্রহণ করেন।





আলেমগণ প্রতিবেশীর সীমা-রেখা নির্ধারণের ব্যাপারে মতভেদ করেছেন। হাফিয ইবনু হাজার “ফাতহুল বারী” গ্রন্থে (১০/৩৬৭) সেগুলো উল্লেখ করেছেন। সীমা-রেখা নির্দিষ্ট করে যা কিছু রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করা হয়েছে সেগুলো দুর্বল, সহীহ নয়। সমাজ যতটুকু পর্যন্ত প্রতিবেশী হিসাবে গণ্য করে ততটুকুই প্রতিবেশী হিসাবে গণ্য হবে। এ সিদ্ধান্তটিই সঠিক।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (278)


` العلم خزائن، ومفتاحها السؤال، فاسألوا يرحمكم الله، فإنه يؤجر فيه أربعة: السائل، والمعلم، والمستمع، والمجيب لهم `.
موضوع.

أخرجه أبو نعيم (3 / 192) وأبو عثمان النجيرمي في ` الفوائد ` (24 / 1) من طريق داود بن سليمان القزاز حدثنا علي بن موسى الرضى حدثني أبي عن أبيه جعفر عن أبيه محمد بن علي عن أبيه علي بن الحسين بن علي عن أبيه عن علي بن أبي طالب مرفوعا، وقال أبو نعيم: هذا حديث غريب لم نكتبه إلا بهذا الإسناد.
قلت: وهو إسناد موضوع من داود بن سليمان هذا الجرجاني الغازي.
قال الذهبي: كذبه يحيى بن معين، ولم يعرفه أبو حاتم، وبكل حال فهو شيخ كذاب له نسخة موضوعة عن علي بن موسى الرضى، ثم ساق له أحاديث هذا أحدها وأقره الحافظ في ` اللسان `.
ولهذا فقد أساء السيوطي بإيراده لهذا الحديث في ` الجامع الصغير `، وقد تعقبه شارحه المناوي بما نقلناه عن الذهبي ثم العسقلاني، ثم كأنه نسي ذلك في شرحه الآخر ` التيسير `، فقال: إسناده ضعيف.
نعم رواه الشيروي في ` العوالي ` (213 / 1) والخطيب في ` الفقيه والمتفقه ` (2 / 32 ـ ط الرياض) من طريق عبد الله بن أحمد بن عامر الطائي حدثني أبي حدثني علي بن موسى الرضى به، لكن عبد الله هذا حاله كحال الجرجاني! قال الذهبي: روى عن أبيه عن علي الرضى عن آبائه بتلك النسخة الموضوعة الباطلة ما
تنفك عن وضعه أو وضع أبيه.




২৭৮। জ্ঞান হচ্ছে ভাণ্ডার এবং তার চাবি হচ্ছে প্রশ্ন করা/ জিজ্ঞাসা করা। অতএব তোমরা জিজ্ঞাসা কর, তোমাদেরকে আল্লাহ দয়া করবেন। কারন তাতে চার জনকে সওয়াব দেয়া হবে; প্রশ্নকারীকে, শিক্ষককে, মনোযোগ সহকারে শ্রবণকারীকে এবং তাঁদের উত্তর দানকারীকে।





হাদীসটি জাল।





এটি আবূ নু’য়াইম (৩/১৯২) এবং আবু উসমান আন-নুজায়রেমী “আল-ফাওয়াইদ” গ্রন্থে (১/২৪) দাউদ ইবনু সুলায়মান আল-কাযযায সূত্রে ... বর্ণনা করেছেন। অতঃপর আবু নু’য়াইম বলেনঃ এ হাদীসটি গারীব, এ সনদ ছাড়া অন্য কোন সনদে আমরা এটিকে লিখিনি।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এটির সনদ দাউদ ইবনু সুলায়মান হতে জালকৃত। তিনি হচ্ছেন জুরজানী গাযী। যাহাবী তার সম্পর্কে বলেনঃ ইয়াহইয়া ইবনু মাঈন তাকে মিথ্যুক আখ্যা দিয়েছেন। আবু হাতিম তাকে চিনেন না। সর্বাবস্থায় তিনি মিথ্যুক শাইখ। আলী ইবনু মূসা আর-রিযা হতে তার একটি জাল কপি রয়েছে। অতঃপর তার কতিপয় হাদীস উল্লেখ করেছেন, এটি সেগুলোর একটি।





হাফিয ইবনু হাজারও “লিসানুল মীযান” গ্রন্থে তার (যাহাবীর) কথাকে সমর্থন করেছেন। এ কারণেই সুয়ূতী “জামেউস সাগীর” গ্রন্থে হাদীসটি উল্লেখ করে ক্রটি করেছেন। মানবী যাহাবী ও আসকালানীর কথা উল্লেখ করে তার সমালোচনা করেছেন। হাদীসটি অন্য এক সনদে “আওয়ালী” গ্রন্থে শায়রাবী (১/২১৩) এবং “আল-ফাকীহ ওয়াল মুতাফাক্কিহ” গ্রন্থে (২/৩২) আল-খাতীব বর্ণনা করেছেন। কিন্তু এটির সনদে আব্দুল্লাহ ইবনু আহমাদ আত-তাঈ রয়েছেন। তার অবস্থা জুরজানীর অবস্থার ন্যায়। তিনি তার পিতা হতে বাতিল-বানোয়াট কপি বর্ণনা করেছেন। তিনি অথবা তার পিতা এটি জাল করেছেন।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (279)


` نبي ضيعه قومه، يعنى سطيحا `.
لا أصل له.
في شيء من كتب الإسلام المعهودة ولم أره بإسناد أصلا، كذا قال الحافظ ابن كثير في ` البداية والنهاية ` (2 / 271) وسيأتي بعد حديث ما يعارضه.




২৭৯। কোন এক নবীকে তার জাতি ধ্বংস করে দিয়েছে। অর্থাৎ সোতাইহ।





ইসলামী কোন গ্রন্থে এটির কোন ভিত্তি নেই।





আসলে এটির সনদই দেখছি না। হাফিয ইবনু কাসীর “আল-বিদায়া ওয়ান নিহায়া” গ্রন্থে (২/২৭১) এরূপই বলেছেন।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (280)


` أوحى الله إلى عيسى عليه السلام يا عيسى آمن بمحمد وأمر من أدركه من أمتك أن يؤمنوا به، فلولا محمد ما خلقت آدم، ولولا محمد ما خلقت الجنة ولا النار، ولقد خلقت العرش على الماء فاضطرب فكتبت عليه: لا إله إلا الله محمد رسول الله، فسكن `.
لا أصل له مرفوعا.
وإنما أخرجه الحاكم في ` المستدرك ` (2 / 614 - 615) من طريق عمرو بن أوس الأنصاري حدثنا سعيد بن أبي عروبة عن قتادة عن سعيد بن المسيب عن ابن عباس قال: فذكره موقوفا وقال: صحيح الإسناد، وتعقبه الذهبي بقوله: أظنه موضوعا على سعيد.
قلت: يعني ابن أبي عروبة، والمتهم به الراوي عنه عمرو بن أوس الأنصارى، قال الذهبي في ` الميزان `: يجهل حاله، وأتى بخبر منكر.
ثم ساق له هذا الحديث وقال: وأظنه موضوعا، ووافقه الحافظ ابن حجر في ` اللسان ` فأقره.
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২৮০। আল্লাহ পাক ঈসা (আঃ) এর নিকট ওহী মারফত বললেনঃ হে ঈসা! মুহাম্মদের প্রতি ঈমান আন এবং তোমার উম্মতের মধ্য হতে যে ব্যাক্তি তাঁকে পাবে তাঁদেরকে তার প্রতি ঈমান আনার নির্দেশ দাও। কারণ মুহাম্মদ যদি না হত তাহলে আদমকে সৃষ্টি করতাম না। মুহাম্মদ যদি না হত তাহলে জান্নাত ও জাহান্নাম সৃষ্টি করতাম না। অবশ্যই আমি পানির উপর আরশ সৃষ্টি করেছিলাম। অতঃপর সে (আরশ) অশান্ত হয়ে গেলে তার উপর লা-ইলাহা ইল্লালাহু মুহাম্মাদুর রাসুলুল্লাহ লিখে দিলাম, ফলে সে শান্ত হয়ে গেল।





হাদীসটি জাল।





মারফু’ হিসাবে এটির কোন ভিত্তি নেই। হাকিম “আল-মুসতাদরাক” গ্রন্থে (২/৬১৪-৬১৫) আমর ইবনু আওস আনসারী সূত্রে ... বর্ণনা করে বলেছেনঃ এটির সনদ সহীহ। যাহাবী তার সমালোচনা করে বলেছেনঃ আমার ধারণা এটি সাঈদের উপর জাল করা হয়েছে।





আমি (আলবানী) বলছিঃ অর্থাৎ সাঈদ ইবনু আবী আরুবার উপর। এ হাদীসটির ব্যাপারে সাঈদ হতে বর্ণনাকারী আমর ইবনু আওস আনসারী মিথ্যার দোষে দোষী। যাহাবী “আল-মীযান` গ্রন্থে বলেনঃ তার অবস্থা মাজহুল, তিনি মুনকার হাদীস নিয়ে এসেছেন। তিনি তার এ হাদীসটি উল্লেখ করে বলেছেনঃ আমার ধারণা এটি বানোয়াট। হাফিয ইবনু হাজার “লিসানুল মীযান” গ্রন্থে তার কথার সাথে একমত পোষণ করেছেন এবং তাকে সমর্থন করেছেন।