সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ
` أربع لا يصبن إلا بعجب: الصمت - وهو أول العبادة - ، والتواضع، وذكر الله، وقلة الشيء `.
موضوع.
رواه ابن حبان في ` الضعفاء ` (2 / 185) والطبراني (1 / 65 / 2) وابن عدي في ` الكامل ` (81 / 1) وأبو طاهر الزيادي في ` ثلاثة مجالس ` (193 / 1) والحاكم في ` المستدرك ` (4 / 311) وتمام في ` الفوائد ` (153 / 2، 267 / 1) عن العوام بن جويرية عن الحسن عن أنس بن مالك مرفوعا.
وقال ابن عدي: ` الأصل فيه موقوف من قول أنس `. قلت: وعلة المرفوع ابن جويرية هذا، قال ابن حبان:
` كان يروي الموضوعات عن الثقات `. ثم ساق له هذا الحديث هو والذهبي ثم قال هذا: ` قلت: والعجب أن الحاكم أخرجه في (المستدرك) `.
قلت: ورد عليه في ` تلخيص المستدرك ` أيضا بقول ابن حبان المذكور. والحديث أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` من رواية ابن عدي وقال (3 / 135) : ` لا يصح، العوام يروي الموضوعات عن الثقات، وكان يأتي بالشيء على التوهم لا التعمد، فلا يحتج به `. ولم يتعقبه السيوطي في ` اللآليء ` (2 / 319 - 320
) إلا بأن الحاكم أخرجه في ` المستدرك ` والبيهقي في ` الشعب ` من هذا الوجه!
وهذا تعقب لا طائل تحته كما هو بين، فمن العجيب أن يورد السيوطي الحديث في ` الجامع الصغير ` من رواية الطبراني والحاكم والبيهقي! فتعقبه المناوي بما خلاصته: ` سكت المصنف عليه فأوهم أنه لا علة فيه، وهو اغترار بقول الحاكم ` صحيح `.
وغفل عن تشنيع الذهبي في ` التلخيص ` والمنذري والحافظ العراقي عليه بأن فيه العوام بن جويرية `. ثم ذكر كلام ابن حبان فيه، وتعجب الذهبي من إخراج الحاكم للحديث. ثم قال: ` ومن ثم أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات `. وتعقبه المصنف فلم يأت بطائل كعادته! `.
قلت: وجزم ابن أبي حاتم في ` العلل ` (2 / 114) بأنه موقوف على الحسن أو أنس.
৭৮১। চারটি বস্তু আশ্চর্য হওয়ার মাধ্যমেই অর্জিত হয়। চুপ থাকা-এটি ইবাদাতের প্রথম- বিনম্রতা, আল্লাহকে স্মরণ করা, প্রতিটি বস্তুর অল্প হওয়া।
হাদিছটি জাল।
এটি ইবনু হিব্বান `আয-যোয়াফা` (২/১৮৫) গ্রন্থে, তাবারানী (১/৬৫/২), ইবনু আদী “আল-কামিল” (১/৮১) গ্রন্থে, আবু তাহের আয-যিয়াদী `ছালাছাতু মাজালেস` (১/১৯৩) গ্রন্থে, হাকিম “আল-মুসতাদরাক” (৪/৩১১) গ্রন্থে এবং তাম্মাম `আল-ফাওয়ায়েদ` (২/১৫৩, ১/২৬৭) গ্রন্থে আল-আওয়াম ইবনু জুওয়াইরিয়াহ হতে তিনি আল-হাসান হতে তিনি আনাস ইবনু মালেক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু' হিসাবে বর্ণনা করেছেন। ইবনু আদী বলেনঃ আসলে এটি মওকুফ, আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কথা।
আমি (আলবানী) বলছিঃ মারফু হওয়ার সমস্যা হচ্ছে এই ইবনুল জুওয়াইরিয়াহ। তার সম্পর্কে ইবনু হিব্বান বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে বানোয়াট হাদীছ বর্ণনা করতেন।
অতঃপর তিনি ও হাফিয যাহাবী তার এ হাদীছটি উল্লেখ করে বলেছেনঃ আশ্চর্যের ব্যাপার এই যে, হাকিম হাদীছটি `আল-মুসতাদরাক` গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তিনি (যাহাবী) “তালখীসুল মুসতাদরাক” গ্রন্থেও ইবনু হিব্বানের কথা উল্লেখ করে তার প্রতিবাদ করেছেন।
হাদীছটি ইবনুল জাওযী “আল-মাওষু'আত” গ্রন্থে ইবনু আদীর বর্ণনা হতে উল্লেখ করে (৩/১৩৫) বলেছেনঃ এটি সহীহ নয়। আল-আওয়াম নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে বানোয়াট হাদীছ বর্ণনাকারী। তিনি সন্দেহ বশত কিছু বস্তু নিয়ে আসতেন ইচ্ছাকৃত নয়, তার দ্বারা দলীল গ্রহণ করা যায় না।
তা সত্ত্বেও সুয়ূতী হাদীছটি “আল-জামেউস সাগীর” গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন। ইবনু আবী হাতিম “আল-ইলাল” (২/১১৪) গ্রন্থে দৃঢ়তার সাথে বলেছেনঃ এটি হাসান বা আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মওকুফ।
` المتعبد بلا فقه كالحمار في الطاحونة `.
موضوع.
رواه ابن عدي (345 / 1) عن محمد بن رزق الله الكلوذاني: حدثنا نعيم بن حماد: حدثنا بقية عن ثور بن يزيد عن خالد بن معدان عن واثلة بن الأسقع مرفوعا. وقال: ` وهذا حديث لا أعلم رواه عن بقية غير نعيم `. قلت
: قد تابعه محمد بن إبراهيم: حدثنا بقية به.
أخرجه أبو نعيم في ` الحلية ` (5 / 219) وقال: ` لم نكتبه إلا من حديث بقية `.
قلت: وبقية مدلس وقد عنعنه، وكان يدلس عن الثقات ما أخذه عن مثل مجاشع بن عمرو وعمر بن موسى الوجيهي وغيرهما من الكذابين والوضاعين كما قال ابن حبان، فهو آفة هذا الحديث عندي، وأما ابن الجوزي فقد أورده في ` الموضوعات ` فأصاب، لكنه أعله بمحمد بن إبراهيم هذا - وهو الشامي فقال (1 / 262) : ` لا يصح، والمتهم به محمد بن إبراهيم، قال ابن حبان: كان يضع الحديث، لا يحل الاحتجاج به `.
وتعقبه السيوطي في ` اللآليء ` (1 / 219) بمتابعة نعيم بن حماد. أخرجه الطيالسي (1) في ` ترغيبه `.
وفاته أن ابن عدي أخرجه أيضا من طريقه كما ذكرنا، ونعيم ضعيف، لكن الآفة من تدليس بقية كما بينت، وإنما لم يعله به ابن الجوزي لأنه إنما وقع الحديث عنده من رواية أبي نعيم عن الشامي هذا، وهو وضاع، فاقتصر عليه، وإلا لووقعت له متابعة نعيم بن حماد هذه لأعله إن شاء الله بالتدليس المذكور، والله أعلم.
ومن عجائب السيوطي أنه أورد الحديث في ` الجامع الصغير ` من رواية أبي نعيم التي فيها ذاك الوضاع، وأعرض عن رواية ابن عدي والطيالسي التي ليس فيها هذا الوضاع! .
৭৮২। না বুঝে ইবাদতকারী যাতা (পেষণ যন্ত্রের) ঘুরানো গাধার ন্যায়।
হাদীছটি জাল।
এটি ইবনু আদী (১/৩৪৫) মুহাম্মাদ ইবনু রিযকিল্লাহ আল-কালওয়াযানী হতে তিনি নোয়াইম ইবনু হাম্মাদ হতে তিনি বাকিয়াহ হতে তিনি ছাওর ইবনু ইয়াধীদ হতে তিনি খালেদ ইবনু মি’দান হতে ... বর্ণনা করেছেন।
ইবনু আদী বলেনঃ এ হাদীছটি বাকিয়াহ হতে নোয়াইম ছাড়া অন্য কেউ বর্ণনা করেছেন বলে জানি না।
আমি (আলবানী) বলছিঃ মুহাম্মাদ ইবনু ইব্রাহীম তার মুতাবায়াত করেছেন। এটিকে আবু নোয়াইম `আল-হিলইয়্যাহ` (৫/২১৯) গ্রন্থে বর্ণনা করে বলেছেনঃ এটিকে আমরা একমাত্র বাকিয়ার হাদীছ হতে লিখেছি।
আমি (আলবানী) বলছিঃ বাকিয়াহ মুদল্লিস। তিনি আন্ আন্ করে বর্ণনা করেছেন। তিনি নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে তাদলীস করতেন। তিনি সেগুলো আসলে মুজাশে ইবনু আমর, আমর ইবনু মূসা আল-ওয়াজীহী ও অন্যান্য মিথ্যুক, জালকারীদের থেকে গ্রহণ করেছেন যেমনটি ইবনু হিব্বান বলেছেন। আমার নিকট তিনিই এ হাদীছটির সমস্যা। ইবনুল জাওযী হাদীছটি `আল-মাওযুআত` গ্রন্থে উল্লেখ করে ঠিকই করেছেন। কিন্তু তিনি সমস্যা হিসাবে মুহাম্মাদ ইবনু ইব্রাহীমকে চিহ্নিত করে (১/২৬২) বলেছেনঃ এটি সহীহ নয়। এ হাদীছটির ব্যাপারে দোষী হচ্ছে মুহাম্মাদ ইবনু ইবরাহীম। ইবনু হিব্বান তার সম্পর্কে বলেনঃ তিনি হাদীছ জাল করতেন। তার দ্বারা দলীল গ্রহণ করাই হালাল নয়। আশ্চর্যের ব্যাপার এই যে, সুয়ূতী “আল-জামেউস সাগীর” গ্রন্থে হাদীছটি জলিকারী মুহাম্মাদ ইবনু ইবরাহীমের বর্ণনা হতেই উল্লেখ করেছেন।
` تناصحوا في العلم، فإن خيانة أحدكم في علمه أشد من خيانته في ماله، وإن الله عز وجل مسائلكم يوم القيامة `.
موضوع.
رواه الطبراني (3 / 132 / 2) : حدثنا محمد بن عبد الله الحضرمي ومحمد بن عثمان بن أبي شيبة قالا: أخبرنا عبيد بن يعيش: أخبرنا مصعب بن سلام عن أبي سعد عن عكرمة عن ابن عباس مرفوعا. قلت: وهذا إسناد رجاله ثقات غير أبي سعد هذا، وقد جزم السيوطي في ` اللآلي ` (1 / 207 - 208) بأنه سعيد بن المرزبان البقال، قال: ` وهو صدوق مدلس `. سبقه إلى ذلك الحافظ المنذري (1 / 75) والهيثمي في ` المجمع ` (1 / 141) ، وليس به بل هو عبد القدوس ابن حبيب أبو سعيد الكلاعي، ومن الحجة على ذلك:
1 - أن الحديث من رواية
الطبراني عن الحضرمي (وهو مطين) ومحمد بن أبي شيبة معا، وقد روى الخطيب (3 / 43) قصة الخلاف بينهما في هذا السند، وخلاصة ذلك أن مطينا قال فيه: ` عن أبي سعد ` يريد البقال. وقال ابن أبي شيبة: ` عن أبي سعيد ` يريد عبد القدوس بن حبيب.
وحكى الخطيب عن أبي نعيم عبد الملك بن محمد بن عدي أن الصواب رواية ابن أبي شيبة، لأن أبا نعيم هذا سمع الحديث من مطين بهذا السند قال فيه: ` أبي سعيد `.
قال أبو نعيم: ` وهذا سماعي من مطين قديما، ثم سمعت منه
هذا الحديث بعد ذلك بعشرين سنة في ` فوائد الحاج ` قال: حدثنا عبيد بن يعيش: حدثنا مصعب بن سلام عن أبي سعد. قال أبو جعفر الحضرمي: يعني عبد القدوس بن حبيب الدمشقي عن عكرمة عن ابن عباس. كأن الحضرمي ينبه بذلك، وقال: ` يعني عبد القدوس `. ولم يقل ` عن أبي سعيد `، وقال: ` عن أبي سعد، فأقر سعدا على حاله ولم يقر الاسم `. فهذا يدل على رجوع مطين إلى أن راوي الحديث عن عكرمة هو عبد القدوس هذا وإن أصر
(1) ليس هو أبا داود الطيالسي صاحب ` المسند `، فإنه متأخر عنه. اهـ.
على تكنيته بأبي سعد، وإنما هي أبو سعيد، كما رواه الخطيب عن ابن أبي شيبة عن شيخيه إبراهيم بن محمد بن ميمون وعمار بن رجاء عن عبيد بن يعيش. وتابعهما أبو العباس أحمد بن إسحاق الخشاب المصري عند مشرق بن عبد الله الحنفي في ` حديثه ` (61 / 1) .
وتابعهم القاسم بن محمد بن حماد الدلال في ` أمالي أبي جعفر الطوسي ` (ص 79) أربعتهم قالوا: ` أبي سعيد ` وهو عبد القدوس ويؤيده. 2 - أن الخطيب رواه (6 / 356 - 357، 389) وابن عساكر (2 / 399 / 1) عن إسحاق بن أبي إسرائيل عن عامر بن سيار كلاهما:
أخبرنا عبد القدوس بن حبيب عن عكرمة به. فهذا كله يبين أن راوي الحديث عن عكرمة هو عبد القدوس هذا وكنيته أبو سعيد كما سبق في رواية ابن أبي شيبة عند الخطيب ومشرق عن غيره. وعليه فقول الطبراني من رواية ابن أبي شيبة والحضرمي: ` أبي سعد ` تأوله بعضهم على أنه حمل رواية ابن أبي شيبة على رواية الحضرمي، ولوعكس لأصاب! وإذا عرفت أن الراوي هو عبد القدوس بن حبيب الكلاعي يتبين لك أن السند واه بمرة، لأن الكلاعي هذا قال فيه ابن المبارك: ` كذاب `.
وصرح ابن حبان في ` الضعفاء ` (2 / 126) بأنه: ` كان يضع الحديث `. ولذلك أورد ابن الجوزي الحديث من رواية الخطيب عن إسحاق عن الكلاعي في ` الموضوعات ` وقال (1 / 232) : ` تفرد به عبد القدوس وكان يضع على الثقات. قاله ابن حبان `.
وتعقبه السيوطي بأمرين:
أولا: برواية الطبراني عن أبي سعد. بناء على أن أبا سعد هو سعيد بن المرزبان البقال! وقد عرفت أنه وهم، وأن الصواب أنه الكلاعي هذا الكذاب.
وثانيا: وبما أخرجه أبو نعيم في ` الحلية ` (9 / 20) : حدثنا الحسن بن أحمد بن صالح السبيعي: حدثنا علي بن عبد الحميد الغضائري: حدثنا محمد بن عبد الأعلى الصنعاني: حدثنا عبد الرحمن بن مهدي: حدثنا الحسن زياد عن يحيى بن سعيد الحمصي عن إبراهيم بن مختار (الأصل: محمد) عن الضحاك عن ابن عباس مرفوعا.
وقال السيوطي: ` إبراهيم روى له الترمذي وابن ماجة، وقال أبو حاتم: صالح الحديث، وقال أبو داود: لا بأس به. وقال ابن معين: ليس بذاك، ويحيى بن سعيد صاحب حديث، وله رحلات، قال ابن مصفى: ثقة، وضعفه ابن معين، وغيره `.
قلت: وفي ` التقريب `: ` إبراهيم بن المختار صدوق ضعيف الحفظ، ويحيى بن سعيد ضعيف `. قلت: واتهمه ابن حبان فقال: ` يروي الموضوعات عن الأثبات `. ثم إن السيوطي قد أبعد النجعة، فإن آفة الحديث، إنما هو الحسن بن زياد وهو اللؤلؤي، فقد قال أبو داود والفسوي والعقيلي والساجي: ` كذاب `. وضعفه الآخرون. وللحديث علة أخرى وهي الانقطاع، فقد قال شعبة وغيره: إن الضحاك (وهو ابن مزاحم الهلالي) ما رأى ابن عباس قط.
৭৮৩। তোমরা পরস্পরে জ্ঞানের ব্যাপারে নসিহত কর। কারণ তোমাদের কোন ব্যক্তির জ্ঞানের বিষয়ের খিয়ানাত তার সম্পদের খিয়ানাতের চেয়েও বেশী কঠিন। অবশ্যই আল্লাহর পক্ষ হতে তোমাদেরকে কিয়ামতের দিন জিজ্ঞাসিত হতে হবে।
হাদীছটি জাল।
এটি তাবারানী (৩/১৩২/১) মুহাম্মাদ ইবনু আবদিল্লাহ আল-হাযরামী (মুতাইয়্যান) ও মুহাম্মাদ ইবনু উছমান ইবনে আবী শায়বাহ হতে তিনি ওবায়েদ ইবনু ইয়াঈশ হতে তিনি মুসআব ইবনু সালাম হতে তিনি আবু সা’আদ হতে তিনি ইকরিমাহ হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ আবু সা’আদ ব্যতীত সনদের সকল বর্ণনাকারী নির্ভরযোগ্য। সুয়ূতী “আল-লাআলী” (১/২০৭-২০৮) গ্রন্থে বলেনঃ আবু সা’আদ হচ্ছেন সাঈদ ইবনুল মারযাবান আল-বাক্কাল, তিনি সত্যবাদী তবে মুদাল্লিস। তার পূর্বে হাফিয মুনযেরী (১/৭৫) এবং হায়ছামী `আল-মাজমা` (১/১৪১) গ্রন্থে একই কথা বলেছেন। আসলে তা নয়, বরং তিনি (আবু সা’আদ) হচ্ছেন আব্দুল কুদ্দূস ইবনু হাবীব আবু সাঈদ আল-কালাঈ। যা ইবনু আবী শায়বার বর্ণনায় এসেছে। আল-খাতীব আবু নোয়াইম আব্দুল মালেক ইবনু মুহাম্মাদ ইবনে আদী হতে বর্ণনা করেছেন। তিনি বলেনঃ সঠিক হচ্ছে ইবনু আবী শায়বার বর্ণনা। কারণ আবূ নোয়াইম এ হাদীছটি মুতাইয়্যান হতে বর্ণনা করেছেন। তাতে তিনি আবু সা'আদের পরিবর্তে আবু সাঈদকে (আবুল কুদ্দূস) উল্লেখ করেছেন। আবু নােয়াইম বলেনঃ মুতাইয়্যান হতে আমার শ্রবণ পুরাতন। অতঃপর আমি যখন বিশ বছর পর এ হাদীছটি তার থেকে শুনলাম তখন তিনি বললেনঃ আবু সা’আদ হতে অর্থাৎ আব্দুল কুদ্দুস ইবনু হাবীব হতে। কুনিয়াত পূর্বেরটিই রেখেছেন। তবে নামের ব্যাপারে পূর্বের অবস্থায় থাকেননি। এটি প্রমাণ করছে যে, তিনি তার পূর্বের অবস্থান হতে ফিরে এসেছেন। অর্থাৎ ইকরিম হতে বর্ণনাকারী হচ্ছেন আব্দুল কুদ্দুস।
আল-খাতীব এবং ইবনু আসাকির হাদীছটি বর্ণনা করেছেন। তাতে তারা ইকরিম হতে বর্ণনাকারী হিসাবে আব্দুল কুদ্দুসের কথাই উল্লেখ করেছেন। যার কুনিয়াত আবু সাঈদ।
যখন ইকরিম হতে বর্ণনাকারী আব্দুল কুদ্দুস কালাঈ, তখন স্পষ্ট হচ্ছে এই যে, সনদটি একেবারে দুর্বল।
কারণ এই কালাঈ সম্পর্কে ইবনুল মুবারাক বলেনঃ তিনি মিথ্যুক। ইবনু হিব্বান `আয-যোয়াফা` (২/১২৬) গ্রন্থে স্পষ্ট করে বলেনঃ তিনি হাদীছ জাল করতেন।
এ কারণেই ইবনুল জাওযী আল-খাতীবের সূত্রে কালাঈ হতে `আলমাওযূ'আত` (১/২৩২) গ্রন্থে উল্লেখ করে বলেছেনঃ আব্দুল কুদ্দুস হাদীছটি এককভাবে বর্ণনা করেছেন। তিনি নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে হাদীছ জাল করতেন। এ কথাটি ইবনু হিব্বান বলেছেন।
সুয়ূতী দুটি বিষয় উল্লেখ করে তার সমালোচনা করেছেনঃ
১। তাবারানীর বর্ণনায় এসেছে- ইকরিমা হতে বর্ণনাকারী হচ্ছেন আবু সা’আদ সাঈদ ইবনু মারযাবান আল-বাক্কাল। আপনারা অবহিত হয়েছেন যে, তিনি বাক্কাল নন বরং সঠিক হচ্ছে এই যে, তিনি আব্দুল কুদ্দুস আল-কালাঈ, তিনি একজন মিথ্যুক।
২। আবু নোয়াইম `আল-হিলইয়্যাহ` (৯/২০) গ্রন্থে অন্য একটি সূত্রে হাদীছটি বর্ণনা করেছেন। কিন্তু তাতে একাধিক সমস্যা জড়িত বর্ণনাকারী রয়েছেন। ইবরাহীম ইবনু হেফযের দিক দিয়ে দুর্বল। আরেক বর্ণনাকারী ইয়াহইয়া ইবনু সাঈদ দুর্বল। তাকে ইবনু হিব্বান মিথ্যার দোষে দোষী করেছেন। তিনি বলেছেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে বানোয়াট হাদীছ বর্ণনা করেছেন। ইবরাহীমকে ইবনু মাঈন ও অন্য বিদ্বানগণ দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন। যদিও তাকে কেউ কেউ নির্ভরযোগ্য বলেছেন।
হাদীছটির সমস্যা হচ্ছে আরেক বর্ণনাকারী আল-হাসান ইবনু যিয়াদ আল-লুউলুআই; তার সম্পর্কে আবু দাউদ, আল-ফাসাবী, উকায়লী ও আস-সাজী বলেনঃ তিনি মিথ্যুক। তাকে অন্য বিদ্বানগণ দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন। হাদীছটির আরেক সমস্যা হচ্ছে এটির সনদে বিচ্ছিন্নতা সংঘটিত হয়েছে। শুবাহ ও অন্য বিদ্বানগণ বলেনঃ যহহাক ইবনু মুযাহিম আল-হিলালী ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে দেখেননি।
` قريش خالصة الله، فمن نصب لها حربا، أو فمن حاربها سلب، ومن أرادها بسوء خزي في الدنيا والآخرة `.
موضوع.
رواه ابن عساكر (2 / 398 / 2) عن أبي عبد الرحمن محمد بن الحسين بن موسى السلمي: أنبأنا جعفر بن محمد بن الحارث المراغي: أخبرنا أبو يعقوب إسحاق بن يعقوب الدمشقي: أخبرنا أحمد بن أنس بن مالك الدمشقي: أخبرنا إسحاق بن سعيد بن الأركون عن أبي مسلم سلمة بن العيار عن عبد الله بن لهيعة عن مشرح بن هاعان عن عمرو بن العاص مرفوعا.
قلت: وهذا إسناد تالف: مشرح مختلف فيه، ولا أدري إذا كان سمع من عمرو بن العاص أولا؟ والأقرب الثاني فإن بين وفاتيهما نحوثمانين سنة! وعبد الله بن لهيعة ضعيف. وإسحاق بن سعيد بن
الأركون قال الدارقطني: ` منكر الحديث `. وقال أبو حاتم: ` ليس بثقة `. وأحمد بن أنس لم أجد له ترجمة وهو من شرط ابن عساكر في ` تاريخه ` فيراجع فإن نسختنا منه ناقصة. وإسحاق بن يعقوب الدمشقي في ترجمته ساق ابن عساكر هذا الحديث، ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا. وجعفر بن محمد بن الحارث المراغي لم أعرفه. وأبو عبد الرحمن السلمي هو الصوفي المشهور قال الذهبي: ` تكلموا فيه وليس بعمدة. قال الخطيب: ` قال لي محمد بن يوسف القطان: كان يضع الحديث
للصوفية `. قال الذهبي: وفي القلب مما ينفرد به `.
قلت: أفلا يعجب القاريء الكريم معي من الحافظ السيوطي كيف أورد هذا الحديث المظلم في كتابه ` الجامع الصغير ` من رواية ابن عساكر هذه التالفة؟! وأما المناوي فقد بيض له ولم يتكلم عليه بشيء! وفي فضل قريش من الأحاديث الصحيحة ما يغنيهم عن مثل هذا الحديث الباطل كقوله صلى الله عليه وسلم: ` الناس تبع لقريش في هذا الشأن `، وقوله: ` الأئمة من قريش ` وهو حديث متواتر، كما قال الحافظ ابن حجر: فيما نقله الشيخ علي القاري في ` شرح النخبة `.
৭৮৪। কুরাইশরা হচ্ছে আল্লাহর নির্বাচিত। যে ব্যক্তি তাদের বিপক্ষে বর্শা ধরবে বা তাদের সাথে যুদ্ধ করবে তাকে ছিনিয়ে নেয়া হবে। আর যে ব্যক্তি তাদের ব্যাপারে কোন অনিষ্টতা করার ইচ্ছা পোষণ করবে তাকে দুনিয়া এবং আখেরাতে অপমানিত করা হবে।
হাদীছটি জাল।
এটি ইবনু আসাকির (২/৩৯৮/২) আবু আবদির রহমান মুহাম্মাদ ইবনুল হুসাইন আস-সুলামী হতে তিনি জাফার ইবনু মুহাম্মাদ আল-মুরাগী হতে তিনি আবু ইয়াকুব ইসহাক ইবনু ইয়াকুব আদ-দামেস্ক হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি ধ্বংসপ্রাপ্ত। বর্ণনাকারী মুশরেহ ইবনু হা'আন বিতর্কিত ব্যক্তি। তিনি আমর ইবনুল আস হতে শ্রবণ করেছেন কি না জানি না? সঠিকের নিকটবর্তী হচ্ছে এই যে, তিনি তার থেকে শ্রবণ করেননি। কারণ তাদের দু'জনের মৃত্যুর মধ্যে আশি বছরের পার্থক্য।
আরেক বর্ণনাকারী আব্দুল্লাহ ইবনু লাহিয়্যাহ দুর্বল।
সনদের অপর বর্ণনাকারী ইসহাক ইবনু সাঈদ ইবনিল আরকূন সম্পর্কে দারাকুতনী বলেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীছ। আবু হাতিম বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্য নন।
আর আহমাদ ইবনু আনাসের জীবনী পাচ্ছি না।
বর্ণনাকারী ইসহাক ইবনু ইয়াকুব সম্পর্কে তার জীবনীতে ইবনু আসাকির ভালমন্দ কিছুই বলেননি।
জাফর ইবনু মুহাম্মাদ আল-মুরাগীকে আমি চিনি না।
আবু আবদির রহমান আস-সুলামী সম্পর্কে হাফিয যাহাবী বলেনঃ মুহাদ্দিছগণ তার ব্যাপারে সমালোচনা করেছেন। তিনি ভাল নন। আল-খাতীব বলেনঃ মুহাম্মাদ ইবনু ইউসুফ আল-কাত্তান আমাকে বলেনঃ তিনি সূফীদের জন্য হাদীছ জাল করতেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ পাঠকবৃন্দ কি আমার সাথে আশ্চর্য হবেন না কিভাবে সুয়ূতী অন্ধকারাচ্ছন্ন হাদীছটি তার কিতাব `জামেউস সাগীর` গ্রন্থে ইবনু আসাকিরের বর্ণনা হতে উল্লেখ করলেন?
` لوأن بكاء داود وبكاء جميع أهل الأرض يعدل ببكاء آدم ما عدله `.
موضوع.
رواه أبو نعيم في ` الحلية ` (7 / 257) وابن عساكر (2 / 318 / 1) من طريق الطبراني: أخبرنا أحمد بن يحيى بن خالد الرقي: أخبرنا يحيى بن سليمان الجعفي: أخبرنا أحمد بن بشر الهمداني: أخبرنا مسعر بن كدام عن علقمة
بن مرثد عن سليمان بن بريدة عن أبيه يرفعه. وعزاه الهيثمي في ` المجمع ` (8 / 198) للطبراني في ` الأوسط ` وقال: ` ورجاله ثقات `. وأقره المناوي في ` الفيض `. وفيه نظر فإن أحمد بن بشر (1) هذا أورده الحافظ في ` اللسان ` وقال: ` مجهول، قاله مسلمة في (الصلة) `.
قلت: وقد خالفه محمد بن بشر العبدي وهو ثقة حافظ فأوقفه على ابن بريدة، أخرجه ابن عساكر وقال: ` قال ابن عدي ولم يذكر فيه بريدة، ولا النبي صلى الله عليه وسلم، وهذه الرواية أصح `.
قلت: وكذلك رواه موقوفا أحمد في ` الزهد ` (ص 47) من طريق المسعودي عن علقمة ابن مرثد قال: فذكره موقوفا عليه.
وكذلك رواه ابن أبي الدنيا في ` الرقة ` (137 / 1) عن مسعر عمن حدثه عن ابن سابط موقوفا عليه. وهذا هو الصواب موقوف، ورفعه منكر، بل هو عندي باطل موضوع، لأنه لا يشبه كلام النبوة لما فيه من المبالغة، فالظاهر أنه من الإسرائيليات السمجة التي دست في كتب أهل الكتاب مر القرون، ثم أخطأ بعض الرواة فرفعه إلى النبي صلى الله عليه وسلم وهو منه بريء! والحديث أورده السيوطي في ` الجامع الصغير ` من رواية ابن عساكر هذه. وتعقبه المناوي بأنه رواه الطبراني أيضا والديلمي فاقتصاره على ابن عساكر غير جيد.
(1) في ` اللسان `: ` بشير `. اهـ.
قلت: لاسيما وهو عند ابن عساكر من طريق الطبراني كما رأيت. ثم نقل المناوي كلام الهيثمي المتقدم في توثيق رجال الإسناد وسكت عليه! وفيه ما علمت من الجهالة والوقف والنكارة. والله ولي التوفيق.
৭৮৫। যদি দাউদের কান্নাকে যমীনের সকল অধিবাসীদের কান্নার সাথে একত্রিত করে আদমের কান্নার সাথে তুলনা করা হতো তাহলে তা তার কান্নার সমতুল্য হতো না।
হাদীছটি জাল।
এটি আবু নোয়াইম `আল-হিলইয়্যাহ` (৭/২৫৭) গ্রন্থে এবং ইবনু আসাকির (২/৩১৮/১) তাবরানীর সূত্রে আহমাদ ইবনু ইয়াহইয়া হতে তিনি ইয়াহইয়া ইবনু সুলায়মান আল-জুকী হতে তিনি আহমাদ ইবনু বিশর আল-হামাদানী হতে ... বর্ণনা করেছেন।
হায়ছামী `আল-মাজমা` (৮/১৯৮) গ্রন্থে তাবারানীর `আল-আওসাত` গ্রন্থের উদ্ধৃতিতে উল্লেখ করে বলেছেনঃ হাদীছটির বর্ণনাকারীগণ নির্ভরযোগ্য। মানবী তার কথাকে `আল-ফায়েয` গ্রন্থে সমর্থন করেছেন।
তাতে বিরূপ মন্তব্য রয়েছে। কারণ এই আহমাদ ইবনু বিশরকে হাফিয ইবনু হাজার “আল-লিসান” গ্রন্থে উল্লেখ করে বলেছেনঃ তিনি মাজহুল। কথাটি মাসলামাহ `আস-সিলাহ` গ্রন্থে বলেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ মুহাম্মাদ ইবনু বিশর আল-আবাদী একজন নির্ভরযোগ্য হাফিয তিনি তার বিরোধিতা করে সুলায়মান ইবনু বুরাইদাহ হতে হাদীছটি মওকুফ হিসাবে বর্ণনা করেছেন।
এটি ইবনু আসাকির বর্ণনা করে বলেছেন, ইবনু আদী বলেনঃ তাতে তিনি বুরায়দাহ ও নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে উল্লেখ করেননি। এ বর্ণনাটিই সঠিক।
আমি (আলবানী) বলছিঃ অনুরূপভাবে ইমাম আহমাদ `আয-যুহুদ` (পৃঃ ৪৭) গ্রন্থে মাসউদীর সূত্রে মওকুফ হিসাবে বর্ণনা করেছেন।
ইবনু আবিদ দুনিয়া `আর-রিক্কাহ` (১/১৩৭) গ্রন্থেও মওকুফ হিসাবে বর্ণনা করেছেন।
মওকুফ হওয়াটাই সঠিক। মারফু হওয়াটা মুনকার। বরং আমার নিকট এটি বাতিল, মাওযু। কারণ এটি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর বাণীর সাথে সাদৃশ্যপূর্ণ নয়। বাহ্যিকতা প্রমাণ করছে যে, এটি ইসরাঈলী বর্ণনা।
` دعاء الوالد لولده مثل دعاء النبي لأمته `.
موضوع.
رواه أبو نعيم في ` أخبار أصبهان ` (1 / 185) عن إبراهيم بن معمر: حدثنا أبو أيوب بن أخي زبريق بن الحمصي: حدثنا يحيى بن سعيد الأموي: حدثنا خلف بن حبيب الرقاشي: سمعت أنس بن مالك يقول: فذكره مرفوعا. أورده في ترجمة إبراهيم هذا وكنيته أبو إسحاق الجوزجاني، روى عنه جماعة ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا، وكذلك صنع الحافظ ابن عساكر (2 / 275 / 2) .
وأبو أيوب هذا لم أعرفه ولم يورده الدولابي في ` الكنى ` وكذا لم أعرف خلف بن حبيب الرقاشي، وأخشى أن يكون وقع في السند تحريف، وأنه تحريف قديم من بعض رواة ` أخبار أصبهان `، فإن الإسناد هو في ` تاريخ ابن عساكر `، من طريق أبي نعيم كما ذكرته عن أبي نعيم. أما الحامل على الخشية المذكورة فهو أنني رأيت ابن قدامة ذكر في ` المنتخب ` (11 / 214 / 2) :
` قال إسحاق بن إبراهيم (هو ابن هانئ) : عرضت على أبي عبد الله: يحيى بن سعيد عن سعد أبي حبيب عن يزيد الرقاشي عن أنس مرفوعا به؟ فقال: حديث باطل منكر، وسمعته يقول: سعد أبو حبيب ليس بشيء `. ثم رأيته في ` مسائل ابن هاني ` (ص 156 مخطوطة المكتب الإسلامي) (1) فصواب الإسناد إذن ` سعد أبي حبيب عن يزيد الرقاشي ` وهكذا وقع في ` اللآلي ` (2 / 295) . ويؤيده ما في ` الميزان `: ` سعد أبو حبيب عن يزيد الرقاشي، قال أحمد: ليس حديثه بشيء `. وقد سقطت هذه الترجمة من ` لسان الميزان ` للحافظ ابن حجر، مع أنها ليست في كتاب ` تهذيب التهذيب ` له.
ثم إن الحديث أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (3 / 87) مستندا على حكم الإمام أحمد عليه بالبطلان كما سبق، وأقره السيوطي في ` اللآلي ` ثم تناقض، فأورده في ` الجامع الصغير ` من رواية الديلمي عن أنس! وتعقبه المناوي بقوله:
(1) وقد قام الأخ زهير الشاويش بطبعه، ثم حالت الحرب القائمة في لبنان دون نشره. فرج الله عن عباده. اهـ.
` ورواه عنه أيضا أبو نعيم وعنه أورده الديلمي مصرحا، فلو عزاه المصنف للأصل لكان أحسن، قال الزين العراقي في شرح ` الترمذي `: ` هذا حديث منكر `. وحكم ابن الجوزي بوضعه، وقال: قال أحمد: هذا حديث باطل منكر. وأقره عليه المؤلف في مختصر الموضوعات `.
৭৮৬। পুত্রের জন্য পিতার দোআ নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কর্তৃক তার উম্মাতের জন্য দো'আর ন্যায়।
হাদীছটি জাল।
এটি আবু নোয়াইম “আখবার আসবাহান” (১/১৮৫) গ্রন্থে ইবরাহীম ইবনু মামার হতে তিনি আবু আইউব ইবনু আখী যাবরীক হতে তিনি ইয়াহইয়া ইবনু সাঈদ আল-উমাবী হতে তিনি খালাফ ইবনু হাবীব আর-রুকাশী হতে ... বর্ণনা করেছেন।
এই ইবরাহীমের জীবনীতে তিনি হাদীছটি উল্লেখ করেছেন, তার কুনিয়্যাত হচ্ছে আবু ইসহাক আল-জুযদানী। তার থেকে একদল বর্ণনা করেছেন অথচ তার সম্পর্কে ভাল-মন্দ কিছুই উল্লেখ করেননি। হাফিয ইবনু আসাকিরও তাই করেছেন। আর আবু আইউবকে আমি চিনি না। দুলাবী তাকে `আল-কুনা` গ্রন্থে উল্লেখ করেননি। আমি খালাফ ইবনু হাবীব আর-রুকাশীকেও চিনি না। আমার ভয় হচ্ছে যে, সনদটিতে উলট পালট করা হয়েছে। ভয় হওয়ার কারণ এই যে, ইবনু কুদামাহ “আল-মুস্তাখাব” (১১/২১৪/২) গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন যে, ইসহাক ইবনু ইবরাহীম (ইবনু হানী) বলেনঃ আমি হাদীছটি আবু আবদিল্লার (ইমাম আহমাদ) নিকট পেশ করেছিলাম, তিনি বলেনঃ হাদীছটি বাতিল, মুনকার। তাকে বলতে শুনেছিঃ সা’আদ আবু হাবীব কিছুই না। সঠিক হচ্ছে এই যে, সা’আদ আবু হাবীব ইয়াযীদ আর-রুকাশী হতে বর্ণনা করেছেন। অনুরূপ `আল-লাআলী` (২/২৯৫) গ্রন্থেও এসেছে। `আল-মীযান` গ্রন্থে যা এসেছে সেটিও এটিকে আরো শক্তিশালী করছেঃ বলা হয়েছে, সা’আদ আবু হাবীব ইয়াখীদ আর-রুকাশী হতে বর্ণনা করেছেন। ইমাম আহমাদ বলেনঃ তার হাদীছ কিছুই না।
ইবনুল জাওযী হাদীছটি “আল-মাওযু আত” (৩/৮৭) গ্রন্থে ইমাম আহমাদ কর্তৃক বাতিল বলে হুকুম লাগানো কথার উপর ভিত্তি করে উল্লেখ করেছেন। হাফিয সুয়ূতী “আল-লাআলী” গ্রন্থে তার কথাকে সমর্থন করেছেন। অতঃপর তিনি দ্বন্দ্বে পড়ে হাদীছটি “আল-জামেউস সাগীর” গ্রন্থে দাইলামীর বর্ণনা হতে উল্লেখ করেছেন। এ কারণে মানবী তার সমালোচনা করেছেন।
যায়ন আল-ইরাকী “শারহুত তিরমিযী” গ্রন্থে বলেনঃ এ হাদীছটি মুনকার।
` العباس وصيي ووارثي `.
موضوع.
رواه الخطيب (13 / 137) وابن عساكر (2 / 306 / 2) من طريقين عن جعفر بن عبد الواحد قال: أخبرنا سعيد بن سلم الباهلي عن المسيب بن زهير بن المسيب عن المنصور أبي جعفر عن أبيه عن جده مرفوعا.
قلت: وهذا موضوع آفته جعفر هذا قال الدارقطني: ` يضع الحديث `. وقال أبو زرعة: ` روى أحاديث لا أصل لها `. وسعيد بن سلم الباهلي لم أعرفه. ثم وجدته في ` تاريخ بغداد ` (9 / 74 - 75) وذكر أنه كان عالما بالحديث والعربية ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا، ووقع في ` تاريخ ابن عساكر ` ` سعيد بن سلام ` وهو تصحيف. والمسيب بن زهير مجهول الحال لم أجد له ترجمة إلا في ` التاريخ ` للخطيب، وساق له هذا الحديث، ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا. والحديث أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` من رواية الخطيب هذه ومن رواية ابن حبان عن محمد بن الضوء بن الصلصال بن الدلهمس عن أبيه عن جده مرفوعا به، وقال (2 / 31) : ` موضوع، جعفر كذاب يضع، ومحمد بن الضوء يروي عن أبيه المناكير `. وأقره السيوطي في ` اللآليء ` (1 / 429 - 430) ، ومع ذلك فقد أورده في ` الجامع الصغير ` من رواية الخطيب فما أكثر تناقضه! ومحمد بن الضوء هذا له ترجمة في ` الضعفاء ` لابن حبان (2 / 303 - 304) وقال ` روى عن أبيه المناكير `. ثم ساق له الحديث. وترجمه الخطيب في ` تاريخ بغداد ` (5 / 374 - 376) وقال فيه: ` ليس بمحل لأن يؤخذ عنه العلم لأنه كان كذابا، وكان أحد المتهتكين المشتهرين بشرب الخمور، والمجاهرة بالفجور `. وقال الجوزقاني في ` الموضوعات `: ` محمد بن الضوء كذاب `.
৭৮৭। আব্বাস হচ্ছে আমার অসিয়তপ্রাপ্ত এবং আমার মিরাসের ভাগীদার।
হাদীছটি জাল।
এটি আল-খাতীব “আত-তারীখ” (১৩/১৩৭) গ্রন্থে এবং ইবনু আসাকির (২/৩০৬/২) দু'টি সূত্রে জাফর ইবনু আব্দিল ওয়াহেদ হতে তিনি সাঈদ ইবনু সালাম আল-বাহেলী হতে তিনি আল-মুসাইয়্যাব ইবনু যুহায়ের হতে তিনি আল-মানসূর আবী জাফার হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এটি বানোয়াট। তার সমস্যা হচ্ছে এই জাফার ইবনু আব্দিল ওয়াহেদ, দারাকুতনী তার সম্পর্কে বলেনঃ তিনি হাদীছ জালকারী। আবু যুর'আহ বলেনঃ তিনি কতিপয় ভিত্তিহীন হাদীছ বর্ণনা করেছেন। আর সাঈদ ইবনু সালাম আল-বাহেলীকে আমি চিনি না।
অতঃপর আমি তাকে (সাঈদকে) `তারীখু বাগদাদ` (৯/৭৪-৭৫) গ্রন্থে পেয়েছি, তিনি উল্লেখ করেছেন যে, তিনি হাদীছ ও আরবী ভাষার আলেম ছিলেন, কিন্তু তার সম্পর্কে ভাল-মন্দ কিছুই বর্ণনা করেননি।
এ ছাড়া বর্ণনাকারী আল-মুসাইয়্যাব ইবনু যুহায়ের মাজহুলুল হাল (তার অবস্থা সম্পর্কে জানা যায় না)। আল-খাতীব তার সম্পর্কে ভাল-মন্দ কিছুই উল্লেখ করেননি।
ইবনুল জাওযী হাদীছটি “আল-মাওযুআত” গ্রন্থে আল-খাতীবের উক্ত বর্ণনায় এবং ইবনু হিব্বানের বর্ণনা হতে মুহাম্মাদ ইবনু যাঊ হতে উল্লেখ করে (২/৩১) বলেছেনঃ হাদীছটি বানোয়াট। জাফার মিথ্যুক, জালকারী। আর মুহাম্মাদ ইবনুল যাঊ তার পিতা হতে মুনকার হাদীছ বর্ণনা করেছেন। ইবনু হিব্বানও যাঊয়ের ব্যাপারে `আয-যোয়াফা` (২/৩০৩-৩০৪) গ্রন্থে বলেনঃ তিনি তার পিতা হতে মুনকার হাদীছ বর্ণনা করতেন।
সুয়ূতী “আল-লাআলী” (১/৪২৯-৪৩০) গ্রন্থে তার বক্তব্যকে সমর্থন করেছেন। তা সত্ত্বেও তিনি “আল-জামেউস সাগীর” গ্রন্থে হাদীছটি উল্লেখ করেছেন। আল-খাতীব `তারীখু বাগদাদ` (৫/৩৭৪-৩৭৬) গ্রন্থে বলেনঃ তার থেকে জ্ঞান গ্রহণ করার স্থান তিনি নন। কারণ তিনি মিথ্যুক। তিনি মদ পানকারী হিসাবে এবং পাপ প্রকাশকারী হিসাবে প্রসিদ্ধ ছিলেন। আল-জুযকানী “আল-মাওযুআত” গ্রন্থে বলেনঃ মুহাম্মাদ ইবনুল যাঊ মিথ্যুক।
` آخر ما تكلم به إبراهيم حين ألقي في النار: حسبي الله ونعم الوكيل `.
موضوع.
رواه أبو القاسم الحرفي في ` الفوائد ` (2 / 2) والخطيب (9 / 118) وابن عساكر (2 / 164 / 1) عن سلام بن سليمان: حدثنا إسرائيل عن أبي حصين عن أبي صالح عن أبي هريرة مرفوعا.
وقال الخطيب والحرفي: ` هذا حديث غريب من رواية أبي حصين عن أبي صالح عن أبي هريرة مسندا، لا أعلم رواه غير سلام بن سليمان عن إسرائيل، والمحفوظ ما رواه الناس عن إسرائيل وأبي بكر بن عياش عن أبي حصين عن أبي الضحى عن ابن عباس قال: ` لما ألقي إبراهيم في النار.
الحديث `. قلت: وسلام بن سليم هو سلام بن سلم ويقال: ابن سليم أو ابن سليمان والصواب الأول كما في ` التهذيب ` وهو سلام الطويل المدائني كذاب
متهم بالوضع كما تقدم مرارا، فكان على السيوطي أن لا يورده في الجامع ` على ما شرطه في مقدمته أنه ` صانه عما تفرد به كذاب أو وضاع `. وقد خالفه عثمان بن عمر فرواه عن إسرائيل به موقوفا على أبي هريرة.
رواه الخطيب (5 / 228 - 229) ومن قبله البخاري. ولا يفيد هنا قول المناوي: ` إن الموقوف صحيح أخرجه البخاري، ومثله لا يقال من قبل الرأي فهو في حكم المرفوع `. لأننا نقول: إنه يحتمل أن يكون هذا مما تلقاه ابن عباس من أهل الكتاب، ومع الاحتمال يسقط الاستدلال، فلا يجوز أن ينسب إليه صلى الله عليه وسلم، وهذا بين ظاهر إن شاء الله تعالى.
৭৮৮। ইবরাহীম (আঃ)-কে যখন আগুনে নিক্ষেপ করা হয় তখন সর্বশেষ যে কথাটি তিনি বলেছিলেন সেটি হচ্ছেঃ আল্লাহই আমার জন্য যথেষ্ট আর তিনিই উত্তম ভরসা।
হাদীছটি জাল।
এটি আবুল কাসেম আল-হুরফী `আল-ফাওয়ায়েদ` (২/২) গ্রন্থে, আল-খাতীব (৯/১১৮) এবং ইবনু আসাকির (২/১৬৪/১) সালাম ইবনু সুলায়মান হতে তিনি ইসরাঈল হতে তিনি আবু হুসায়েন হতে তিনি আবু সালেহ হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আল-খাতীব এবং আল-হুরফী বলেনঃ এ হাদীছটি আবু হুসায়েনের বর্ণনা হতে মুসনাদ হিসাবে গারীব। ইসরাঈল হতে সালাম ইবনু সুলায়মান ছাড়া অন্য কেউ বর্ণনা করেছেন বলে জানি না।
আমি (আলবানী) বলছিঃ সালাম ইবনু সুলায়েম তিনিই সালাম ইবনু সিলম, তাকে ইবনু সুলায়েম বা ইবনু সুলায়মান বলা হয়। প্রথমটিই সঠিক যেমনটি `আত-তাহযীব` গ্রন্থে এসেছে। তিনি সালাম আত-তাবীল আল-মাদায়েনী। মিথ্যুক, জাল করার দোষে দোষী, যেমনটি তার সম্পর্কে পূর্বে বহুবার আলোচনা করা হয়েছে। হাফিয সুয়ুতীর উচিত ছিল হাদীছটি “আল-জামে” গ্রন্থে উল্লেখ না করা।
` عنوان صحيفة المؤمن حب علي بن أبي طالب `.
باطل.
رواه الخطيب في ` تاريخه ` (4 / 410) ومن طريقه ابن عساكر (2 / 55 / 2) عن أبي الفرج أحمد بن محمد بن جوري العكبري: حدثنا إبراهيم بن عبد الله بن مهران الرملي: حدثنا ميمون بن مهران بن مخلد بن أيان الكاتب: حدثنا أبو النعمان عارم بن الفضل: حدثنا قدامة بن النعمان عن الزهري قال: سمعت أنس بن مالك يقول: والله الذي لا إله إلا هو سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: فذكره.
أورداه في ترجمة أبي الفرج هذا وقالا: ` وفي حديثه غرائب ومناكير `. وقال الذهبي في ترجمته: ` عن خيثمة بحديث موضوع `. قال المناوي عقبه: ` كأنه يشير إلى هذا `. قلت: كلا، فإن هذا الحديث ليس من روايته عن خيثمة كما ترى، ثم قال المناوي: ` وقال ابن الجوزي: حديث لا أصل له `. وإنما أشار الذهبي إلى هذا الحديث في ترجمة قدامة بن النعمان فقال:
` عن الزهري، لا يعرف، والخبر باطل، ثم إن سنده مظلم إليه `. قال الحافظ في ` اللسان `: ` والخبر المذكور رواه الخطيب … ` ثم ذكر هذا الحديث.
৭৮৯। আলী ইবনু আবী তালেব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে ভালবাসাই হচ্ছে মুমিন ব্যক্তির আমল নামার শিরোনাম।
হাদীছটি বাতিল।
এটি আল-খাতীব “আত-তারীখ” (৪/৪১০) গ্রন্থে এবং তার সূত্রে ইবনু আসাকির (২/৫৫/২) আবুল ফারজ আহমাদ ইবনু মুহাম্মাদ আল-উকবুরী হতে তিনি নুমান হতে ... বর্ণনা করেছেন। তারা উভয়েই আবুল ফারজের জীবনীতে হাদীছটি উল্লেখ করে বলেছেনঃ তার হাদীছে অভিনবতা এবং মুনকার রয়েছে। হাফিয যাহাবী তার জীবনীতে বলেনঃ তিনি খায়ছমাহ হতে জাল হাদীছ বর্ণনা করেছেন। পরক্ষণেই মানবী বলেনঃ সম্ভবত তিনি এ হাদীছটির দিকেই ইঙ্গিত করছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ কক্ষণও নয়; কারণ এ হাদীছটির বর্ণনায় খায়ছমাহ নেই। যেমনটি আপনারা দেখছেন। অতঃপর মানবী বলেন, ইবনুল জাওযী বলেছেনঃ এ হাদীছটির কোন ভিত্তি নেই। হাফিয যাহাবী কুদামাহ ইবনুন নুমানের জীবনীতে এ হাদীছটির দিকে ইঙ্গিত করে বলেছেনঃ যুহরী হতে তাকে চেনা যায় না, হাদীছটি বাতিল। তার সনদটি অন্ধকারাচ্ছন্ন।
` تلمد الفقير عند الشهو ة لا يقدر على إنفاذها أفضل من عبادة الغني سبعين سنة `.
موضوع.
رواه ابن النجار في ` الذيل ` من طريق أحمد بن محمد بن جوزي عن أحمد بن زكريا عن إبراهيم بن أخي عبد الرزاق عن عبد الرزاق بسند صحيح عن ابن عباس رفعه. فذكره. أورده الحافظ في ترجمة ابن جوزي هذا من ` اللسان ` وقال: ` حديث موضوع `.
قلت: واتهمه الذهبي بوضع حديث آخر كما سبق في الحديث الذي قبله. لكن فوقه في إسناد هذا الحديث إبراهيم بن أخي عبد الرزاق وهو كذاب كما قال الدارقطني، وقال ابن حبان (1 / 104) : ` روى عن عبد الرزاق المقلوبات الكثيرة، لا يجوز الاحتجاج بها `. فتعصيب الجناية بابن جوزي ليس بأولى من تعصيبها بإبراهيم هذا. ومن أكاذيبه الحديث الآتي:
৭৯০। যৌন উত্তেজনার সময় দরিদ্র ব্যক্তির তা প্রয়োগ করতে সক্ষম না হওয়া ধনী ব্যক্তির সত্তর বছরের ইবাদাতের চেয়েও অতি উত্তম।
হাদীছটি জাল।
এটি ইবনুন নাজ্জার “আয-যায়েল” গ্রন্থে আহমাদ ইবনু মুহাম্মাদ ইবনে জাওযী সূত্রে আহমাদ ইবনু যাকারিয়া হতে তিনি ইবরাহীম ইবনু আখী আবদির রাযযাক হতে তিনি আব্দুর রাযযাক হতে ... বর্ণনা করেছেন। হাফিয ইবনু হাজার ইবনু জাওয়ীর জীবনীতে এ হাদীছটি `আল-লিসান` গ্রন্থে উল্লেখ করে বলেছেনঃ হাদীছটি বানোয়াট।
আমি (আলবানী) বলছিঃ হাফিয যাহাবী তাকে (আহমাদ ইবনু মুহাম্মাদ ইবনে জাওযীকে) জাল করার দোষে দোষী করেছেন। তার উপরের বর্ণনাকারী ইবরাহীম ইবনু আখী আবদির রাযযাক সম্পর্কে দারাকুতনী বলেনঃ তিনি মিথ্যুক। ইবনু হিব্বান (১/১০৪) বলেনঃ তিনি আব্দুর রাযযাক হতে উলট পালটকৃত বহু কিছু বর্ণনা করেছেন। তার দ্বারা দলীল গ্রহণ করা জায়েয নয়। ইবনু জাওযীকে বাদ দিয়ে ইবরাহীমকে অপরাধী করাই বেশী উত্তম। তার মিথ্যা বর্ণনাগুলোর একটি হচ্ছে সম্মুখের হাদীছটিঃ (দেখুন পরেরটি)
بتحقيقي) .
وبالجملة؛ فالحديث لم يطمئن القلب لصحته؛ لاضطراب الرواة في إسناده على زياد بن خيثمة، على هذه الوجوه الثلاثة، والوجهان الأخيران أرجح عندي؛ لأن راوي الأول منهما أوثق من راوي الوجه الأول منها. وكذلك راوي الوجه الثالث ثقة؛ وهو معمر بن سليمان الرقي، وقد اختلف هذان الثقتان أيضاً؛ فقال الأول منهما: `زياد بن خيثمة عن نعمان بن قراد عن عبد الله بن عمر`. وخالفه الآخر، فقال: `علي بن النعمان بن قراد` بدل: نعمان بن قراد. ثم أدخل بينه وبين ابن عمر رجلاً لم يسمه. وقد رجح العلامة أحمد شاكر ثبوت كل من الوجهين، وأطال الكلام في ذلك، فإن صح ذلك فالعلة عندي جهالة النعمان هذا؛ فقد قال ابن أبي حاتم (4/ 1/ 446) :
`النعمان بن قراد، ويقال: علي بن النعمان بن قراد، روى عن ابن عمر،
روى عنه زيادة بن خيثمة`. وأما ابن حبان فأورده على قاعدته في `ثقات التابعين` (1/ 239) ، واعتمده الشيخ أحمد شاكر، فصحح الحديث لذلك، فلم يصب، ولعله استروح لقول الحافظ المنذري في `الترغيب` (4/ 221) :
`رواه أحمد والطبراني، وإسناده جيد`!
قلت: وكل ذلك ذهول عن قاعدة ابن حبان في توثيقه المجهولين كما بينه الحافظ في مقدمة `اللسان`. وزدناه بياناً في `الرد على التعقيب الحثيث`، فتذكر هذا؛ فإنه مهم.
نعم؛ للحديث أصل من طريق أخرى عن أبي موسى مرفوعاً به، دون قوله `لأنها أعم … ` إلخ.
أخرجه أحمد (4/ 404) من طريق عاصم، عن أبي بردة عنه به؛ وفيه قصة.
وهذا إسناد حسن.
وتابعه حمزة بن علي بن مخفر، عن أبي بردة به؛ وزاد:
`وعلمت أنها أوسع لهم`.
أخرجه أحمد أيضاً (4/ 415) .
وحمزة هذا مجهول.
وتابعهما عبد الملك بن عمير؛ عن أبي بردة وأبي بكر ابني أبي موسى عنه.
أخرجه ابن أبي عاصم (821) .
وله شاهد من حديث عوف بن مالك الأشجعي، وهو مخرج في `الروض النضير` (1019) ، و `تخريج المشكاة` (5600) .
وآخر من مرسل الحسن البصري مرفوعاً.
أخرجه المروزي في `زوائد الزهد` (1625) بسند صحيح عنه.
৭৯১। মেহমানদারী করার দায়িত্ব শহরে বসবাসকারীদের উপর, গ্রামে বসবাসকারীদের উপর নয়।
হাদীছটি জাল।
এটি ইবনু আদী (১/৭) এবং কাযা'ঈ `মুসনাদুশ শিহাব` (১/১৯) গ্রন্থে ইবরাহীম ইবনু আবদিল্লাহ ইবনে আখী আবদির রাযযাক হতে তিনি (আমার ধারণা) হাদীছটি ইবনু আদী এই ইবরাহীমের জীবনীতে তার অন্যান্য হাদীছের সাথে উল্লেখ করে বলেছেনঃ এ হাদীছগুলো মুনকার। হাফিয যাহাবী সে হাদীছগুলো উল্লেখ করার পর বলেছেন, দারাকুতনী বলেনঃ তিনি মিথ্যুক। অতঃপর বলেছেনঃ এগুলো এই ইবরাহীমেরই জালকৃত। হাফিয ইবনু হাজার তার মন্তব্যকে সমর্থন করেছেন। সুয়ূতী হাদীছটি `আল-জামে` গ্রন্থে উল্লেখ করাই মানবী দারাকুতনী ও অন্য বিদ্বানদের বক্তব্য উল্লেখপূর্বক তার সমালোচনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ সক্ষম প্রত্যেক ব্যক্তির উপর শরীয়তের দৃষ্টিকোণ থেকে মেহমানদারী করা ওয়াজিব। মেযবান গ্রামের লোক হোক আর শহরের লোক হোক তাতে কোন পার্থক্য নেই, আম সহীহ হাদীছের কারণে। তিন দিন পর্যন্ত মেহমানদারী করা অপরিহার্য কর্তব্য। বেশী করলে তা হচ্ছে সাদাকাহ স্বরূপ।
الروض النضير) .
ثالثاً: قول المعلق:، وفي إسناده (هلال) أيضاً ` لم أدر بقلم من هو؟ وغالب الهوامش التي على ` المجمع ` هي بقلم الحافظ ابن حجر - تلميذ الهيثمي - ، وأستبعد أن يكون هذا منه؛ لأن (هلالاً الوزان) ثقة من رجال الشيخين، ومثله لا يخفى حاله على الحافظ، والمهمش يشير إلى أنه لا يعرف كالذين دونه. والله أعلم.
والحديث ذكره السيوطي في ` مفتاح الجنة ` (ص 38 - منيرية) من رواية الطبراني فقط، وسكت عنه على غالب عادته، ووقع فيه (سلمى) مكان (سلمان) ، وهوخطأ مطبعي.
৭৯২। মন্দ চরিত্র হচ্ছে দুর্ভাগ্যের কারণ।
হাদীছটি দুর্বল।
এটি ইবনু শাহীন “আল-আমলী” (১/৯৭) গ্রন্থ হতে `ছালাছাতু মাজালেস` এর মধ্যে সাঈদ ইবনু নুফায়েস আল-মিসরী হতে তিনি সাহাল ইবনু সাওয়াদাহ হতে তিনি লাইছের কাতিব আব্দুল্লাহ ইবনু সালেহ হতে তিনি লাইছ হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি দুর্বল। আব্দুল্লাহ ইবনু সালেহের মধ্যে দুর্বলতা রয়েছে। তার নীচের দু' ব্যক্তির জীবনী কে আলোচনা করেছেন পাচ্ছি না।
হাদীছটি অন্যান্য সূত্রে বর্ণিত হয়েছে, কিন্তু কোনটিই সহীহ নয়। এ কারণে হাফিয ইরাকী বলেনঃ হাদীছটি সহীহ নয়।
মানবী তা নকল করে সমর্থন করেছেন।
` الشؤم سوء الخلق `.
ضعيف.
رواه ابن عدي (37 / 2) عن أبي بكر بن أبي مريم عن ضمرة بن حبيب عن عائشة مرفوعا. قلت: وهذا سند ضعيف، أبو بكر هذا كان اختلط، ثم هو منقطع بين ضمرة وعائشة فإن بين وفاتيهما (73) سنة.
ثم رأيت الحديث في ` الحلية ` (6 / 103) رواه في ترجمة حبيب بن عبيد من هذا الوجه إلا أنه جعل حبيبا هذا بدل ضمرة، وكذلك أخرجه أحمد (6 / 85) ، وكلاهما يروي عنه أبو بكر بن أبي مريم، فمن الصعب الجزم بالصواب من الروايتين، بل لعل هذا الاختلاف من اختلاط أبي بكر هذا وضعفه.
ومن طريقه رواه الطبراني في ` الأوسط ` كما في ` المجمع ` (8 / 25) . وله شاهد من حديث جابر، أخرجه أبو القاسم السهمي في ` تاريخ جرجان ` (99) عن أبي إسحاق إبراهيم بن محمد بن إبراهيم اليزيدي، حدثنا موسى بن عمر بن علي بن عمران: حدثنا عبيد الله بن عائشة البصري: حدثنا إسماعيل بن حكيم: أخبرنا الفضل بن عيسى عن محمد بن المنكدر عن جابر بن عبد الله مرفوعا. بيد أن هذا إسناد ضعيف من أجل الفضل هذا.
ومن طريقه رواه الطبراني أيضا في ` الأوسط ` وقال الهيثمي: ` وهو ضعيف `.
ورواه ابن وهب في ` الجامع ` (76 / 77) : أخبرني يحيى بن أيوب عن ابن أيوب عن ابن أبي حسين عن زيد بن الأخنس الكعبي عن سعيد بن المسيب قال: سئل رسول الله صلى الله عليه وسلم عن الشؤم؟ قال: سوء الخلق. قلت: وهذا مرسل، ورجاله كلهم ثقات رجال الشيخين غير زيد بن الأخنس أورده ابن أبي حاتم (1 / 2 / 556) ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا، وأما ابن حبان فأورده في ` الثقات ` (2 / 88) ! وذكر هو وابن أبي حاتم أنه روى عنه إسماعيل بن أمية، فقد روى عنه ثقتان هذا أحدهما، والآخر ابن أبي حسين راوي هذا الحديث عنه، وهو إما عبد الله بن عبد الرحمن، وإما عمر بن سعيد وكلاهما مكيان ثقات محتج بهما في الصحيحين، فابن الأخنس مستور. والله أعلم.
ثم رأيته في ` تاريخ ابن عساكر ` (18 / 92 / 2) من طريق إسماعيل بن الفضل الرقاشي عن محمد بن المنكدر به. وإسماعيل بن الفضل لم أعرفه. لكن يبدو أنه محرف عن ` إسماعيل عن الفضل ` بدليل رواية السهمي. والله أعلم.
৭৯৩। দুর্ভাগ্যের কারণ হচ্ছে মন্দ চরিত্র।
হাদিছটি দুর্বল।
হাদীছটি ইবনু আদী (২/৩৭) আবু বাকর ইবনু আবী মারিয়াম হতে তিনি যামারাহ ইবনু হাবীব হতে তিনি আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু' হিসাবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি দুর্বল। এই আবু বাকরের মস্তিষ্ক বিকৃতি ঘটেছিল। তাছাড়া যামারাহ এবং আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর মধ্যে বিচ্ছিন্নতার সমস্যার রয়েছে। কারণ তাদের দু'জনের মৃত্যুর মাঝে তিহাওর বছরের ব্যবধান রয়েছে। হাদীছটি আবু নোয়াইম `আল-হিলইয়াহ` (৬/১০৩) গ্রন্থে বর্ণনা করেছেন। অনুরূপভাবে ইমাম আহমাদ (৬/৮৫) বর্ণনা করেছেন। কিন্তু তাদের উভয়ের বর্ণনায় আবু বাকর হতে হাবীব ইবনু ওবায়েদ বর্ণনা করেছেন বলা হয়েছে। হাদীছটির একটি শাহেদ জাবের (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত হয়েছে। এটি আবুল কাসেম `তারীখু জুরজান` (৯৯) গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন। কিন্তু তাতে ফাযল ইবনু ঈসা নামের এক বর্ণনাকারী রয়েছেন। তিনি দুর্বল।
হায়ছামী তাকে দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন। ইবনু ওয়াহাব `আল-জামে` (৭৬-৭৭) গ্রন্থে অন্য একটি সূত্রে বর্ণনা করেছেন। কিন্তু সনদটি মুরসাল। তাতে যায়েদ ইবনু আখনাস নামের এক বর্ণনাকারী রয়েছেন। তাকে ইবনু আবী হাতিম (১/২/৫৫৬) উল্লেখ ক'রে তার সম্পর্কে ভাল-মন্দ কিছুই বলেননি। “তারীখু ইবনু আসাকির” (১৮/৯২/২) গ্রন্থে হাদীছটিকে আমি ইসমাঈল ইবনুল ফাযল আর-রুকাশী সূত্রে দেখেছি। এই ইসমাঈল ইবনুল ফাল আর-রুকাশীকে আমি চিনি না।
` سوء الخلق شؤم، وحسن الملكة نماء، والصدقة تدفع ميتة السوء `.
ضعيف.
رواه أحمد (3 / 502) وعباس الدوري في ` التاريخ والعلل ` لابن معين (41 / 1 - 2) وابن عساكر (6 / 95 / 2 و11 / 48 / 1) وأبو داود (5162) بالشطر الأول عن عثمان بن زفر عن بعض ولد رافع بن مكيث عن رافع بن مكيث مرفوعا.
ولفظ أحمد: ` حسن الخلق نماء، وسوء الخلق شؤم، والبر زيادة في العمر، والصدقة تمنع ميتة السوء `. قلت: وهذا سند ضعيف عثمان هذا مجهول كما في ` التقريب ` مات سنة (218) .
ورافع بن مكيث صحابي، وبعض ولده لم أعرفه. وقد اضطرب فيه عثمان، فمرة رواه هكذا، ومرة قال: حدثني محمد بن خالد بن رافع بن مكيث عن عمه الحارث بن رافع بن مكيث، - وكان رافع من جهينة، قد شهد الحديبية مع رسول الله صلى الله عليه وسلم عن رسول الله صلى الله عليه وسلم بالشطر الأول.
أخرجه أبو داود (5163) . ورواه ابن منده في ` المعرفة ` (14 / 2 - 4443 عام) عن عثمان بن عبد الرحمن قال: أخبرنا عنبسة بن عبد الرحمن عن محمد بن زاذان عن أم سعد بنت الربيع عن أبيها مرفوعا به. وزاد: ` وطاعة النساء ندامة `.
قلت: وهذا سند واه جدا، عنبسة بن عبد الرحمن متروك، وعثمان بن عبد الرحمن هو الحراني، ضعيف.
৭৯৪। মন্দ চরিত্র হচ্ছে দুর্ভাগ্যের কারণ, ভাল অভ্যাস বয়স বৃদ্ধির কারণ আর সাদাকাহ মন্দ মৃত্যুকে প্রতিহত করে।
হাদীছটি দুর্বল।
এটি ইমাম আহমাদ (৩/৫০২), আব্বাস আদ-দাওরী ইবনু মাঈনের “আততারীখ ওয়াল ইলাল” (৪১/১-২) গ্রন্থে, ইবনু আসাকির (৬/৯৫/২, ১১/৪৮/১) এবং আবু দাউদ (৫১৬২) (প্রথম অংশটি) উছমান ইবনু যুফার হতে তিনি রাফে ইবনু মাকীছের কোন সন্তান হতে তিনি রাফে ইবনু মাকীছ হতে মারফু হিসাবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি দুর্বল এই উছমানের কারণে। তিনি ইবনু মাকীছ সাহাবী। তার কোন সন্তান হাদীছটি বর্ণনা করেছেন, তাকে চিনি না। উছমান বর্ণনা করতে গিয়ে ইযতিরাব করেছেন। একবার বলেছেন এরূপ, আবার বলেছেন, আমাকে মুহাম্মাদ ইবনু খালেদ ... হাদীছ শুনিয়েছেন। হাদীছটি ইবনু মান্দাহ `আল-মারিফাহ` (১৪/২-৪৪৪৩) গ্রন্থে উছমান ইবনু আবদির রহমান হতে তিনি আম্বাসাহ ইবনু আবদির রহমান হতে ... বর্ণনা করেছেন। এ সনদটি নিতান্তই দুর্বল। কারণ আম্বাসাহ মাতরূক। আর উছমান ইবনু আবদির রহমান হাররানী দুর্বল।
` سوء الخلق شؤم، وشراركم أسوءكم خلقا `.
موضوع.
رواه أبو نعيم في ` الحلية ` (10 / 249) وعنه الخطيب (4 / 276) وعن هذا ابن عساكر (2 / 31 / 2) عن أبي سعيد أحمد بن عيسى الخراز البغدادي الصوفي: أخبرنا عبد الله بن إبراهيم الغفاري: حدثنا جابر بن سليم عن يحيى بن سعيد عن محمد بن إبراهيم عن عائشة مرفوعا. قلت: وهذا إسناد تالف، الغفاري هذا نسبه ابن حبان (2 / 39) إلى أنه يضع الحديث. وأبو سعيد الخراز صوفي مشهور وقد ترجم له الخطيب ثم ابن عساكر ترجمة طويلة ولم يذكروا حاله في الرواية. والحديث أورده السيوطي في ` الجامع ` من رواية الخطيب هذه فأساء
، لما عرفت من حال الغفاري، ولم يتكلم المناوي على إسناده بشيء!
৭৯৫। মন্দ চরিত্র দুর্ভাগ্যের কারণ। আর তোমাদের নিকৃষ্ট ব্যক্তি সেই, যে তোমাদের মধ্যে সর্বাপেক্ষা মন্দ চরিত্রের অধিকারী।
হাদীছটি জাল।
এটি আবু নোয়াইম `আল-হিলইয়্যাহ` (১০/২৪৯) গ্রন্থে, তার থেকে আল-খাতীব (৪/২৭৬) এবং এর থেকে ইবনু আসাকির (২/৩১/২) আবু সাঈদ আহমাদ ইবনু ঈসা আল-খাররায আল-বাগদাদী আস-সূফী হতে তিনি আব্দুল্লাহ ইবনু ইব্রাহীম আল-গিফারী হতে তিনি জাবের ইবনু মুসলিম হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি ধ্বংসপ্রাপ্ত। আল-গিফারীকে ইবনু হিব্বান (২/৩৯) হাদীছ জালকারী হিসাবে চিহৃিত করেছেন।
আবু সাঈদ আল-খাররায প্রসিদ্ধ সূফী। আল-খাতীব এবং ইবনু আসাকির তার দীর্ঘ জীবনী আলোচনা করলেও বর্ণনার ক্ষেত্রে তার অবস্থা সম্পর্কে কিছুই বলেননি।
` ليس للدين دواء إلا القضاء والوفاء والحمد `.
ضعيف جدا.
رواه الخطيب (7 / 198) وابن عساكر (2 / 21 / 1) من طريقه عن جعفر بن عامر بن أبي الليث البغدادي: حدثنا أحمد بن عمار بن نصير الشامي: حدثنا مالك عن نافع عن ابن عمر مرفوعا. أورده الخطيب في ترجمة جعفر هذا وقال: ` شيخ مجهول، روى عن الحسن بن عرفة أحاديث منكرة `. ثم ساق له هذا الحديث.
وأما ابن عساكر فأورده في ترجمة أحمد بن عمار، وهو أخو هشام بن عمار، وقال عقبه: ` قال الشيخ أبو بكر الخطيب: أحمد بن عمار بن نصير الشامي شيخ مجهول، وهذا حديث منكر `. وإنما قال الخطيب: ` شيخ مجهول ` في حق جعفر هذا كما رأيت، فلعل ما نقله ابن عساكر عنه في موضع آخر من كتب الخطيب.
ثم روى عن الدارقطني أنه قال: ` أحمد هذا متروك الحديث `. والحديث أورده الذهبي في ترجمة ابن عمار هذا وقال: ` وهذا منكر `. ثم قال في ترجمة جعفر بن عامر هذا: ` عن أحمد بن عمار أخي هشام بخبر كذب، واتهمه ابن الجوزي `. وأقره الحافظ.
৭৯৬। পরিশোধ করা, পূর্ণ করা এবং প্রশংসা করাই হচ্ছে ঋণের একমাত্র ওষুধ।
হাদীছটি নিতান্তই দুর্বল।
এটি আল-খাতীব (৭/১৯৮) এবং ইবনু আসাকির (২/২১/১) তার সূত্রে জাফার ইবনু আমের হতে তিনি আহমাদ ইবনু আম্মার আশ-শামী হতে তিনি মালেক হতে তিনি নাফে' হতে ... বর্ণনা করেছেন।
হাদীছটি আল-খাতীব জাফারের জীবনীতে উল্লেখ করে বলেছেনঃ তিনি মাজহুল শাইখ। তিনি হাসান ইবনু আরাফাহ হতে মুনকার হাদীছ বর্ণনা করেছেন।
ইবনু আসাকির আহমাদ ইবনু আম্মার সম্পর্কে আবু বাকর আল-খতীব হতে নকল করে বলেছেনঃ তিনি মাজহুল শাইখ আর এ হাদীছটি মুনকার। অতঃপর ইবনু আসকির দারাকুতনী হতে বর্ণনা করেছেন। তিনি বলেনঃ আহমাদ ইবনু আম্মার মাতরূকুল হাদীছ।
হাফিয যাহাবী ইবনু আম্মারের জীবনীতে হাদীছটি উল্লেখ করে বলেছেনঃ এটি মুনকার। অতঃপর তিনি জাফরের জীবনীতে বলেনঃ তিনি আহমাদ ইবনু আম্মার হতে মিথ্যা হাদীস বর্ণনা করেছেন। তাকে ইবনুল জাওযী মিথ্যার দোষে দোষী করেছেন। আর হাফিয ইবনু হাজার তাকে সমর্থন করেছেন।
` الإحصان إحصانان: إحصان عفاف، وإحصان نكاح `.
موضوع.
رواه الطبراني في ` الأوسط ` (1 / 182 / 1 - 2) وابن عساكر (2 / 15 / 1 و14 / 358 / 1) عن مبشر بن عبيد قال: سمعت الزهري يحدث عن سعيد بن المسيب عن أبي هريرة مرفوعا، زاد ابن عساكر في رواية: ` فمن قرأها (والمحصنات) بكسر الصاد فهن العفائف، ومن قرأها (المحصنات) فهن المتزوجات `. وهذا مدرج في الحديث بلا شك. وقال الطبراني: ` لم يرو هـ عن الزهري إلا مبشر `.
قلت: قال الهيثمي (4 / 263) : ` وهو متروك `. وعزاه للبزار أيضا. قلت: وقد قال فيه الإمام أحمد: ` كان يضع الحديث `. قلت: ولهذا كان على السيوطي أن لا يورده في ` الجامع الصغير ` وفاء بوعده أنه صانه عما تفرد به وضاع أو كذاب.
৭৯৭। সাধ্বী দু' প্রকারঃ সচ্চরিত্রতার সাধ্বী আর বিবাহের সাধ্বী।
হাদীছটি জাল।
এটি তাবারানী “আল-আওসাত” (১/১৮২/১-২) গ্রন্থে এবং ইবনু আসকির (২/১৫/১, ১৪/৩৫৮/১) মুবাশশির ইবনু ওবায়েদ হতে তিনি যুহরী হতে তিনি সাঈদ ইবনুল মুসাইয়্যাব হতে তিনি আবু হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু হিসাবে বর্ণনা করেছেন।
তাবারানী বলেনঃ যুহরী হতে একমাত্র মুবাশশির বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ হায়ছামী (৪/২৬৩) বলেনঃ তিনি মাতরূক।
আমি (আলবানী) বলছিঃ ইমাম আহমাদ বলেনঃ তিনি হাদীছ জাল করতেন।
এ কারণেই সুয়ূতীর উচিত ছিল তার ওয়াদাহ রক্ষার্থে “আল-জামেউস সাগীর” গ্রন্থে হাদীছটি উল্লেখ না করা। কারণ তিনি বলেছেন যে, গ্রন্থটিকে তিনি জালকারী এবং মিথ্যুক বর্ণনাকারীর একক বর্ণনা হতে হেফাযাত করেছেন।
` عليكم بغسل الدبر، فإنه يذهب بالباسور `.
موضوع.
رواه ابن حبان في ` المجروحين ` (2 / 99) وابن عدي (87 / 1) وأبو نعيم في ` الطب ` (2 / 25 / 1) من طريق أبي يعلى عن عثمان بن مطر الشيباني: حدثنا الحسن بن أبي جعفر: حدثنا علي بن الحكم عن نافع عن ابن عمر مرفوعا. وقال ابن عدي: ` هذا يرويه ابن أبي جعفر عن علي بن الحكم وعن ابن أبي جعفر عثمان بن مطر، ولعل البلاء من عثمان `.
قلت: وقال ابن حبان: ` كان ممن يروي الموضوعات عن الأثبات `.
وقال البخاري: ` منكر الحديث `. وضعفه غيره. وشيخه الحسن بن أبي جعفر ضعيف، وفي ترجمته ساقه ابن عدي مع أحاديث (أخرى) ، ثم قال: ` وهو عندي ممن لا يتعمد الكذب، وهو صدوق، ولعل هذه الأحاديث التي (أنكرت) عليه توهمها توهما، أو شبه عليه فغلط `.
والحديث أورده السيوطي في ` الجامع ` من رواية ابن السني وأبي نعيم عن ابن عمر. وقال المناوي: ` ورواه عنه أيضا أبو يعلى والديلمي، وأورده في ` الميزان ` في ترجمة عثمان بن مطر الشيباني من حديثه، ونقل عن جمع تضعيفه، وأن حديثه منكر، ولا يثبت. وساقه في ` اللسان ` في ترجمة عمر بن عبد العزيز الهاشمي، وقال: شيخ مجهول، له أحاديث مناكير لا يتابع عليها `.
قلت: وهو من روايته بإسناده عن الحارث عن علي مرفوعا. والحارث وهو الأعور متهم كما تقدم مرارا.
৭৯৮। তোমাদের উচিত পশ্চাত ভাগ (পাছ) ধুয়ে ফেলা, কারণ তা অশ্ব রোগকে নিয়ে যায়।
হাদীছটি জাল।
এটি ইবনু হিব্বান `আল-মাজরূহীন` (২/৯৯) গ্রন্থে, ইবনু আদী (১/৮৭) ও আবু নোয়াইম “আত-তিব্ব” (২/২৫/১) গ্রন্থে আবু ইয়ালা সূত্রে উছমান ইবনু মাতার আশ-শায়বানী হতে তিনি আল-হাসান ইবনু আবী জাফার হতে তিনি আলী ইবনুল হাকাম হতে তিনি নাফে' হতে ... বর্ণনা করেছেন।
ইবনু আদী বলেনঃ সম্ভবত সমস্যা হচ্ছে উছমান হতে।
আমি (আলবানী) বলছিঃ ইবনু হিব্বান বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে জাল হাদীছ বর্ণনাকারীদের অন্তর্ভুক্ত। তার সম্পর্কে ইমাম বুখারী বলেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীছ। তাকে অন্য বিদ্বানগণ দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন।
তার শাইখ হাসান ইবনু আবী জাফার দুর্বল। ইবনু আদী তার জীবনীতে বলেনঃ তিনি আমার নিকট সেই পর্যায়ের যারা ইচ্ছাকৃত মিথ্যা বলতেন না। তিনি সত্যবাদী।
` ما الميت في قبره إلا كالغريق المستغيث ينتظر دعوة تلحقه من أب أو أم أو أخ أو صديق، فإذا لحقته كانت أحب أليه من الدنيا وما فيها، وإن الله عز وجل ليدخل على أهل القبور من دعاء أهل الدور أمثال الجبال، وإن هدية الأحياء إلى الأموات الاستغفار `.
منكر جدا.
رواه الضياء في ` المنتقى من حديث الأمير أبي أحمد وغيره ` (268 / 1) من طريق ابن شاذان: حدثنا محمد بن الفضل العطار قال: أخبرنا محمد بن جابر بن أبي عياش المصيصي: حدثنا عبد الله بن المبارك قال: أخبرنا يعقوب بن القعقاع عن مجاهد عن ابن عباس مرفوعا. ورواه الضياء في ` السنن ` أيضا (86 / 2) عن الفضل بن محمد الباهلي: حدثنا محمد بن جابر به. قلت: وهذا إسناد ضعيف، علته ابن أبي عياش هذا، قال الذهبي: ` لا أعرفه، وخبره منكر جدا `. ثم ساق له هذا الحديث. وقال الحافظ في ` اللسان `: ` أورده البيهقي في ` الشعب ` ونقل عن أبي علي الحافظ، أنه غريب من حديث ابن المبارك، لم يقع عند أهل خراسان، قال: ولم أكتبه إلا عن هذا الشيخ. يعني الفضل بن محمد.
قال البيهقي: وتابعه محمد بن خزيمة عن ابن أبي عياش، وابن أبي عياش تفرد به `.
৭৯৯। মৃত ব্যক্তি তার কবরে- ডুবে যাওয়া সাহায্য প্রার্থনাকারীর ন্যায়, সে পিতা বা মাতা বা ভাই কিংবা বন্ধুর পক্ষ হতে তার নিকট দোআ পৌছার অপেক্ষা করে। যদি দোআটি তার নিকট পৌঁছে তাহলে তা তার নিকট দুনিয়া এবং দুনিয়াতে যা কিছু আছে তার চেয়েও বেশী পছন্দের বস্তু। আল্লাহ তা'আলা কবরবাসীদের নিকট গ্রামবাসীদের দোআ পাহাড়ের মত করে পৌঁছে দিবেন। মৃত ব্যক্তিদের জন্য জীবিত ব্যক্তিদের হাদিয়াহ হচ্ছে ক্ষমা প্রার্থনা।
হাদীছটি নিতান্তই মুনকার।
এটি যিয়া `আল-মুনতাকা মিন হাদীছিল আমীরে আবী আহমাদ ওয়া গায়রেহী` (১/২৬৮) গ্রন্থে ইবনু যাযানের সূত্রে মুহাম্মাদ ইবনুল ফাযল আল-আত্তার হতে তিনি মুহাম্মদ ইবনু জাবের ইবনে আবী আইয়াশ হতে তিনি আবদুল্লাহ ইবনুল মুবারাক হতে ... বর্ণনা করেছেন।
যিয়া “আস-সুনান” (২/৮৬) গ্রন্থেও ফাযল ইবনু মুহাম্মাদ আল-বাহেলী হতে তিনি মুহাম্মাদ ইবনু জাবের হতে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি দুর্বল। তার কারণ মুহাম্মাদ ইবনু জাবের ইবনে আবী আইয়াশ। তার সম্পর্কে হাফিয যাহাবী বলেনঃ আমি তাকে চিনি না। তার খবর নিতান্তই দুর্বল। অতঃপর তিনি তার এ হাদীছটি উল্লেখ করেছেন। হাফিয ইবনু হাজার “আল-লিসান” গ্রন্থে বলেনঃ হাদীছটি বাইহাকী “আশ-শু'আব” গ্রন্থে উল্লেখ করে হাদীছটি গারীব হওয়ার বিষয়টি উল্লেখ করেছেন। ইবনু আবী আইয়াশ এককভাবে বর্ণনা করেছেন।
` إن الله خلق الجنة بيضاء، وإن أحب الزي إلى الله عز وجل البياض، فألبسوها أحياءكم، وكفنوها موتاكم، ثم جمع الرعاء، فقال: من كان فيكم ذا غنم سود فليخلطها ببيض `.
موضوع.
رواه أبو جعفر البختري في ` ستة مجالس ` (115 / 1 - 2) وأبو نعيم في ` صفة الجنة ` (ق 20 / 2) عن هشام بن أبي هشام قال: أخبرنا عبد الرحمن بن حبيب مولى بني
مخزوم عن عطاء بن أبي رباح عن ابن عباس مرفوعا.
قلت: وهذا إسناد ضعيف جدا عبد الرحمن بن حبيب هو ابن أدرك، قال النسائي: ` منكر الحديث، وذكره ابن حبان في ` الثقات `. وفي ` الميزان `: ` صدوق، وله ما ينكر `. وهشام بن أبي هشام هو ابن زياد متفق على تضعيفه. وقال ابن معين والنسائي: ` ليس بثقة `.
وقال ابن حبان: ` يروي الموضوعات عن الثقات `. والحديث أورده السيوطي في ` الجامع الصغير ` من رواية البزار عن ابن عباس دون قوله: ` فألبسوها إلخ ` فقال المناوي: ` قال الهيثمي عقب عزوه للبزار: ` فيه هشام بن زياد وهو متروك `. وظاهر حال المصنف أنه لم يره مخرجا لأحد من الستة وإلا لما عدل عنه، وإنه لشيء عجاب، فقد خرجه ابن ماجه عن ابن عباس المذكور بلفظ: ` إن الله خلق الجنة بيضاء، وأحب الزي إليه البياض فليلبسها أحياؤكم، وكفنوا فيها موتاكم `.
انتهى بلفظه `. قلت: وأنا في شك كبير من وجود هذا الحديث في ` سنن ابن ماجه ` فقد راجعته في مظانه: ` الجنائز `، و` اللباس ` و` صفة الجنة ` فلم أجده، ويؤيده أنه ليس في مسند ابن العباس من ` ذخائر المواريث ` للنابلسي، ولا في أصله ` تحفة الأشراف ` للحافظ المزي، ولا في فهرست ابن ماجه الذي وضعه محمد عبد الباقي في آخر ` السنن ` التي قام هو على تحقيقها. ولم يعزه لابن ماجه ابن القيم في ` حادي الأرواح ` (1 / 218 - 219) ، ولا دل على شيء منه كتاب ` المعجم المفهرس لألفاظ الحديث ` للمستشرقين. والله أعلم. ثم رأيت الحديث في ` زوائد مسند البزار ` (ص 170) من طريق هشام أبي المقدام عن حبيب بن الشهيد عن عطاء به. وقال الهيثمي عقبه: ` هشام ضعيف متروك `.
ثم أخرجه أبو نعيم عن أبي شهاب عن حمزة عن عمرو بن دينار عن ابن عباس نحوه، وحمزة هذا هو ابن أبي حمزة الجعفي النصيبي قال الحافظ: ` متروك متهم بالوضع `.
৮০০। আল্লাহ তা'আলা জান্নাতকে সাদা করে সৃষ্টি করেছেন। আর আল্লাহর নিকট সর্বোত্তম পোশাক হচ্ছে সাদা। অতএব তোমরা তোমাদের জীবিতদেরকে সাদা পোশাক পরিধান করাও আর তোমাদের মৃত ব্যক্তিদেরকে তা দ্বারা কাফন পরীও। অতঃপর রাখালদেরকে একত্রিত করে বললেনঃ তোমাদের মধ্যে যে কালো ছাগল দলের মালিক সে যেন সেগুলোকে সাদা দ্বারা মিশ্রিত করে।
হাদীছটি জাল।
এটি আবু জাফার আল-বাখতার `সিত্তাতু মাজালিস` (১১৫/১-২) গ্রন্থে এবং আবু নোয়াইম `সিফাতুল জান্নাহ` (কাফ ২/২০) গ্রন্থে হিশাম ইবনু আবী হিশাম হতে তিনি আব্দুর রহমান ইবনু হাবীব হতে তিনি আতা ইবনু আবী রাবাহ হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি নিতান্তই দুর্বল। আব্দুর রহমান ইবনু হাবীব হচ্ছেন ইবনু আদরাক। তার সম্পর্কে নাসাঈ বলেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীছ। ইবনু হিব্বান তাকে “আছ-ছিকাত” গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন। অর্থাৎ তার নিকট তিনি নির্ভরযোগ্য। “আল-মীযান” গ্রন্থে এসেছেঃ তিনি সত্যবাদী, তবে তার অস্বীকারযোগ্য হাদীছ রয়েছে। হিশাম ইবনু আবী হিশাম হচ্ছেন ইবনু যিয়াদ। সকলে তার দুর্বল হওয়ার ব্যাপারে ঐকমত্য। ইবনু মাঈন ও নাসাঈ বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্য নন। ইবনু হিব্বান বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে বানোয়াট হাদীছ বর্ণনাকারী।
তা সত্ত্বেও সুয়ূতী হাদীছটি বাযযারের বর্ণনা হতে “আল-জামেউস সাগীর” গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন।
বাযযার সূত্রে হিশাম আবূল মিকদাম রয়েছেন, তার সম্পর্কে হায়সামী বলেনঃ তিনি দুর্বল, মাতরূক।
হাদীছটি আবু নোয়াইম আবু শিহাব হতে তিনি হামযাহ হতে ... বর্ণনা করেছেন। হামযাহ হচ্ছেন ইবনু আবী হামযাহ আল-জু'ফী আন-নাসীবী। তার সম্পর্কে হাফিয ইবনু হাজার বলেনঃ তিনি জাল করার দোষে দোষী।