দ্বইফ আত তারগীব ওয়াত তারহীব
2181 - (1) [ضعيف جداً] عن عليٍّ رضي الله عنه:
أنَّه سأَلَ رسولَ الله صلى الله عليه وسلم عنْ هذه الآية: {يَوْمَ نَحْشُرُ الْمُتَّقِينَ إِلَى الرَّحْمَنِ وَفْدًا}، قال:
قلتُ: يا رسولَ الله! ما الوفدُ إلا رَكْبٌ؟ قال النبيُّ صلى الله عليه وسلم:
`والذي نَفْسي بيَدِه؛ إنَّهُمْ إذا خَرَجُوا مِنْ قبُورِهم اسْتُقْبِلوا بنوقٍ بيضٍ، لها أجْنِحَةٌ عليها رِحالُ الذّهَبِ، شُرُكُ نِعالِهم نورٌ يتَلأْلأُ، كلُّ خُطْوَةٍ منها مثْلُ مدِّ البَصَرِ، ويَنْتهون إلى بابِ الجنَّةِ، فإذا حَلْقَةٌ من ياقوتَةٍ حمْراءُ على صفائِح الذهَب، وإذا شَجَرةٌ على بابِ الجنَّة يَنْبُع مِنْ أصْلِها عينانِ، فإذا شَرِبوا مِنْ أحَدِهما جَرَتْ في وُجوهِهمْ بِنَضْرَةِ النعيمِ، وإذا تَوَضَّؤُوا مِنَ الأُخْرى لَمْ تَشْعَثْ أشْعارُهم أبَداً، فيَضْرِبونَ الحَلْقَة بالصفيحَةِ، فلو سمعتَ طنين الحلْقَةِ يا عليّ! فيبْلُغ كلَّ حوْراءَ أنَّ زَوْجَها قد أقْبَلَ، فتَسْتَخِفُّها العَجَلة، فتَبْعَثُ قَيِّمَها فَيَفْتَحُ لهُ البَابَ، فلَوْلا أنَّ الله عز وجل عَرَّفَهُ نَفْسَه؛ لَخَرَّ له ساجِداً مِمّا يَرى مِنَ النورِ والبَهاءِ، فيقول: أنا قَيّمُك الذي وُكِّلْتُ بِأمْرِك، فيَتْبَعُه فيَقْفوا أَثَرَهُ فيأتي زوْجَتَهُ، فتَسْتَخِفُّها العَجَلَةُ، فتَخْرُجُ منَ الخَيْمَة فَتُعانِقُه، وتقول: أنْت حِبِّي وأنا حِبُّك، وأنا الراضِيَةُ فلا أسْخَطُ أبداً، وأنا الناعِمَةُ فلا أَبْؤُسُ أبداً، وأنا الخالِدَةُ فلَا أَظْعَنُ أبَداً، فيَدْخُلُ بَيْتاً مِّنْ أساسِه إلى سَقْفِه مئةُ ألفِ ذِراع، مَبْنيٌّ على جَنْدَلِ الُّلؤْلُؤِ والياقُوتِ، طرائقُ حُمْرٌ، وطرائقُ خُضْرٌ، وطرائقُ صفرٌ، ما منها طريقَةٌ تشاكِلُ صاحِبَتها، فيأتي الأريكَةَ فإذا علَيْها سريرٌ، على السريرِ سبعونَ فِراشاً، على كلِّ فِراشٍ سبعون زَوْجَةً، على كلِّ زَوْجَةٍ سبْعون حُلَّةً، يُرى مُخُّ ساقِها مِنْ باطِنِ الحُلَلِ، يُفْضي جِماعُهُنَّ في مقدارِ ليْلَةٍ، تجري مِنْ تَحْتِهِمْ أنهارٌ
مطَّرِدَةٌ، أنهارٌ من ماءٍ غيرِ آسنٍ، صاف ليسَ فيه كدَرٌ، وأنهارٌ مِنْ عَسَلٍ مُصفَّى لَمْ يَخْرُج مِنْ بُطونِ النَّحْلِ، وأنهارٌ مِنْ خَمْرٍ لذَّةٍ للِشارِبينَ لمْ تَعْصِرْه الرجالُ بأقْدامِها، وأنهارٌ منْ لَبَنٍ لمْ يتغيَّر طَعْمهُ لَمْ يَخْرُج مِنْ بُطونِ الماشيَة، فإذا اشْتَهُوا الطعامَ جاءَتْهم طَيرٌ بِيضٌ فَتَرْفَعُ أجْنِحَتَها، فيأكلونَ مِنْ جُنوبِها مِنْ أيِّ الألْوانِ شَاؤوا ثُمَّ تطيرُ فتَذْهَبُ، وفيها ثمارٌ متدلِّيَةٌ إذا اشْتَهوها انْبَعَث الغُصْنُ إليْهِمْ فَيْأكُلونَ مِنْ أيِّ الثمارِ شَاؤوا، إن شاءَ قائماً، وإنْ شاءَ متّكِئاً، وذلك قوله: {وَجَنَى الْجَنَّتَيْنِ دَانٍ}، وبين أيديهم خَدَمٌ كاللُّؤْلُؤِ`.
رواه ابن أبي الدنيا في `كتاب صفة الجنة` عن الحارث -وهو الأعور-(1) عن علي مرفوعاً هكذا.
[ضعيف] ورواه ابن أبي الدنيا أيضاً والبيهقي وغيرهما عن عاصم بن ضمرة عن علي موقوفاً عليه بنحوه، وهو أصح وأشهر، ولفظ ابن أبي الدنيا: قال:
`يساقُ الذين اتقوا ربَّهم إلى الجنةِ زُمراً، حتى إذا انتهوا إلى بابٍ من أبوابِها وجدوا عندَه شجرةً يخرج من تحتِ ساقِها عَيْنان تجريان، فعمدوا إلى أحداهما كأنما أُمِروا بها، فشربوا منها، فأَذْهَبَتْ ما في بطونِهم من أذىَ أو قذىَ أو بأسٍ، ثم عمدوا إلى الأخرى فتطهروا منها، فَجَرَتْ عليهم بنضرةِ النعيمِ، فلن تتغيّرَ أبشارُهم تغيُّراً بعدَها أبداً، ولن تَشْعَثَ أشعارُهم؛ كأنما دُهنوا بالدّهانِ، ثم انتهوا إلى خَزَنَةِ الجنةِ فقالوا: {سَلَامٌ عَلَيْكُمْ طِبْتُمْ فَادْخُلُوهَا خَالِدِينَ}. قال: ثم يلقاهم -أو تلقاهم- الوِلْدان يطيفون بهم كما يطيفُ وِلْدانُ أهلِ الدنيا بالحميم يَقْدُمُ من غيْبةٍ، فيقولون: أبشرْ بما أعدّ اللهُ لك من
الكرامةِ. قال: ثم ينطلقُ غلامٌ من أولئك الولدان إلى بعض أزواجه من الحورِ العِينِ فيقول: قد جاء فلان -باسمه الذي يدعى به في الدنيا-، فتقول: أنتَ رأيتَه؟ فيقول: أنا رأيتُه، وهو ذا بأثري، فيستخفّ إحداهن الفرحُ حتى تقومَ على أُسْكُفَّة بابِها(1)، فإذا انتهى إلى منزِلهِ نظرَ إلى أيّ شيءٍ أساسُ بنيانِهِ؟ فإذا جَنْدَلُ(2) اللؤلؤ، فوقه صَرحٌ أخضرُ وأصفرُ وأحمرُ، ومن كلّ لونٍ، ثم رفع رأسَهُ فنظَر إلى سقفِه، فإذا مثلُ البرقِ لولا أنّ اللهَ قدّرَ له لألمَّ أن يُذْهِبَ ببصرِه، ثم طأطأَ رأسَه فنظرَ إلى أزواجِهِ، وَأكوابٌ موضوعةٌ، ونمارقُ مصفوفةٌ، وزرابيُّ مبثوثةٌ، فنظروا إلى تلك النعمةِ ثم اتّكَأوا وقالوا: {الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي هَدَانَا لِهَذَا وَمَا كُنَّا لِنَهْتَدِيَ لَوْلَا أَنْ هَدَانَا اللَّهُ} الآية، ثم ينادي منادٍ: تحَيُون فلا تموتون أبداً، وتُقِيمُون فلا تَظْعَنون أبداً، وتصحُّون -أراه قال:- فلا تمرضون أبداً`.
(الجندل): الحجر.
(الآسن) بمد الهمزة وكسر السين المهملة: هو المتغير.
(الحميم): القريب.
(الأكواب): جمع (كوب): وهو كوز لا عروة له. وقيل: لا خرطوم له، فإذا كان له خرطوم فهو (إبريق).
(النمارق): الوسائد، واحدها (نمرقة).
(الزرابي): البسط الفاخرة، واحدها (زُرْبِية).
আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত,
তিনি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে এই আয়াত সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলেন: {সেদিন আমরা মুত্তাকীদেরকে দয়াময় (আল্লাহর) কাছে সম্মানিত মেহমান হিসেবে সমবেত করব}। তিনি বললেন: আমি জিজ্ঞেস করলাম, হে আল্লাহর রাসূল! 'ওয়াফদ' (সম্মানিত মেহমান) কি শুধু আরোহী দল নয়? নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: ‘যার হাতে আমার প্রাণ, তাঁর কসম! যখন তারা তাদের কবর থেকে বের হবেন, তখন তাদের সাদা উটনী দ্বারা অভ্যর্থনা জানানো হবে, যেগুলোর পাখা থাকবে এবং সেগুলোর উপর সোনার আসন (হাওদা) থাকবে। তাদের জুতার ফিতা হবে দ্যুতিময় নূর। সেগুলোর প্রতিটি পদক্ষেপ হবে দৃষ্টির সীমা পর্যন্ত।
তারা জান্নাতের দরজায় গিয়ে পৌঁছবেন, সেখানে সোনার প্লেটের উপর লাল ইয়াকুতের কড়া থাকবে। আর জান্নাতের দরজায় একটি বৃক্ষ থাকবে, যার মূল থেকে দুটি ঝর্ণা প্রবাহিত হবে। যখন তারা এর একটি থেকে পান করবেন, তখন তাদের চেহারায় নেয়ামতের উজ্জ্বলতা ফুটে উঠবে। আর যখন তারা অন্যটি থেকে ওযু করবেন, তখন তাদের চুল কখনো এলোমেলো হবে না। এরপর তারা সোনার প্লেটের উপর কড়া দিয়ে আঘাত করবেন। হে আলী! যদি তুমি সেই কড়ার রিনঝিন শব্দ শুনতে পেতে! তখন প্রত্যেক হুর তার স্বামীর আগমনের খবর পাবে, ফলে সে আনন্দে আত্মহারা হয়ে যাবে এবং তার তত্ত্বাবধায়ককে পাঠাবে দরজা খোলার জন্য। যদি আল্লাহ তাআলা তাকে (তত্ত্বাবধায়ককে) তার (জান্নাতীর) পরিচয় না দিতেন, তবে সেই নূর ও জৌলুস দেখে সে তার জন্য সিজদাবনত হয়ে যেত। তত্ত্বাবধায়ক বলবে: আমি আপনার তত্ত্বাবধায়ক, যাকে আপনার দায়িত্বে নিযুক্ত করা হয়েছে। অতঃপর সে (জান্নাতী) তাকে অনুসরণ করবে এবং তার পদচিহ্ন ধরে তার স্ত্রীর কাছে আসবে। তখন তার স্ত্রী তাড়াহুড়োয় (আনন্দে) তাঁবু থেকে বেরিয়ে এসে তাকে আলিঙ্গন করবে এবং বলবে: আপনি আমার প্রিয়, আর আমি আপনার প্রিয়। আমি সন্তুষ্ট, তাই কখনো অসন্তুষ্ট হব না; আমি নেয়ামতপূর্ণ, তাই কখনো দুর্দশাগ্রস্ত হব না; আমি চিরস্থায়ী, তাই কখনো স্থান ত্যাগ করব না।
অতঃপর তিনি এমন একটি গৃহে প্রবেশ করবেন, যার ভিত্তি থেকে ছাদ পর্যন্ত এক লক্ষ হাত উঁচু। এটি মুক্তা ও ইয়াকুতের পাথর দিয়ে নির্মিত, যার পথগুলো লাল, কিছু সবুজ এবং কিছু হলুদ—যার একটি পথও অন্যটির সাথে সাদৃশ্যপূর্ণ নয়। তিনি আভিজাত্যের আসনে আসবেন, যার উপর একটি বিছানা থাকবে। বিছানায় সত্তরটি গদি, প্রতিটি গদির উপর সত্তর জন স্ত্রী, এবং প্রত্যেক স্ত্রীর উপর সত্তরটি পোশাক থাকবে; (এতকিছুর পরও) তাদের গোড়ালির ভেতরের মজ্জা সেই পোশাকের মধ্য দিয়ে দেখা যাবে। এক রাতের মধ্যে তাদের সাথে সহবাস সম্পন্ন হবে। তাদের নিচ দিয়ে বয়ে যাবে প্রবহমান নদী: স্বচ্ছ, নির্মল, দুর্গন্ধমুক্ত পানির নদী; আর বিশুদ্ধ মধুর নদী, যা মৌমাছির পেট থেকে বের হয়নি; আর পানকারীদের জন্য সুস্বাদু মদের নদী, যা মানুষ তাদের পা দ্বারা চাপ দিয়ে বের করেনি; আর এমন দুধের নদী, যার স্বাদ পরিবর্তন হয়নি এবং যা চতুষ্পদ জন্তুর পেট থেকে আসেনি।
যখন তারা খাবারের ইচ্ছা করবেন, তখন সাদা পাখি এসে তাদের সামনে ডানা তুলে ধরবে। তারা সেই পাখির পাশ থেকে তাদের ইচ্ছামত যেকোনো রঙের খাবার খাবেন। অতঃপর সেটি উড়ে চলে যাবে। সেখানে থাকবে ফলমূল যা ঝুঁকে থাকবে। যখন তারা চাইবে, ডাল তাদের দিকে ঝুঁকে পড়বে। তারা যেকোনো ফল ইচ্ছা করবে, দাঁড়িয়ে কিংবা হেলান দিয়ে খাবে। আর এটাই আল্লাহর বাণী: {আর উভয় বাগানের ফল (জান্নাতীদের জন্য) কাছাকাছি থাকবে}। আর তাদের সামনে মুক্তোর মতো সেবকরা থাকবে।
2182 - (1) [ضعيف] ورواه [يعني حديث أبي سعيد الخدري] أحمد عن أبي سعيد وأبي هريرة؛ أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:
`آخرُ رجلين يخرجان من النارِ يقول اللهُ لأحدِهما: يا ابنَ آدمَ! ما أعددتَ لهذا اليوم؟ هل عملتَ خيراً قط؟ `، فذكر الحديث بطوله إلى أن قال في آخره:
`فيقولُ اللهُ عز وجل: سَلْ وتمنّه. فيسألُ ويتمنى ثلاثة أيامٍ من أيامِ الدنيا، ويُلَقّنه اللهُ ما لا علمَ له به، فيسألُ ويتمنى، فإذا فرغَ قال: لك ما سألت`.
قال أبو سعيد: `ومثلُه معه`. قال أبو هريرة: `وعَشَرةُ أمثاله معه`.
فقال أحدُهما لصاحبه: حدِّث بما سمعتَ، وأُحدّث بما سمعتُ.
ورواته محتج بهم في `الصحيح`؛ إلا علي بن زيد(1).
وهو في `البخاري` بنحوه؛ إلا أن أبا هريرة قال: `ومثله`، وقال أبو سعيد: `وعشرة أمثاله`، على العكس. وتقدم [في `الصحيح` 26 - البعث/ آخر 3 - فصل].
আবূ সাঈদ খুদরী ও আবূ হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন:
জাহান্নাম থেকে বের হয়ে আসা শেষ দু'জনের মধ্যে আল্লাহ একজনকে বলবেন: "হে আদমের সন্তান! তুমি আজকের দিনের জন্য কী প্রস্তুত করেছো? তুমি কি কখনো কোনো ভালো কাজ করেছিলে?"
এরপর তিনি দীর্ঘ হাদীসটি বর্ণনা করলেন। অবশেষে শেষাংশে বললেন:
তখন আল্লাহ আযযা ওয়া জাল্লা বলবেন: "চাও এবং আকাঙ্ক্ষা করো।" ফলে সে চাবে এবং আকাঙ্ক্ষা করবে— [যা হবে] দুনিয়ার তিন দিনের সমপরিমাণ। আর আল্লাহ তাকে এমন কিছুর কথা শিখিয়ে দেবেন, যা সম্পর্কে তার কোনো জ্ঞান ছিল না। সুতরাং সে চাবে এবং আকাঙ্ক্ষা করবে। যখন সে শেষ করবে, আল্লাহ বলবেন: "তুমি যা চেয়েছো, তা তোমার জন্য রইলো।"
আবূ সাঈদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: "আর তার সাথে তার সমপরিমাণ।"
আবূ হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: "আর তার সাথে এর দশগুণ।"
এরপর তাদের একজন অপরজনকে বললেন: "তুমি যা শুনেছো তা বর্ণনা করো, আর আমি যা শুনেছি তা বর্ণনা করি।"
এর বর্ণনাকারীগণ সহীহ গ্রন্থে নির্ভরযোগ্য, তবে আলী ইবনু যায়দ ব্যতীত।
এটির অনুরূপ বর্ণনা বুখারী শরীফেও আছে, তবে সেখানে আবূ হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেছেন: 'আর এর সমপরিমাণ', আর আবূ সাঈদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেছেন: 'আর এর দশগুণ'— যা এই বর্ণনার বিপরীত।
2183 - (2) [ضعيف موقوف] وعن ابن مسعودٍ رضي الله عنه قال:
إنَّ آخِرَ أهلِ الجنَّةِ دُخولاً الجنَّةَ؛ رجُلٌ مَرَّ به ربُّه عز وجل، فقال له: قُمْ فادْخُلِ الجنَّة، فأقْبَل عليه عابِساً، فقال: وهل أبْقَيْتَ لي شيْئاً؟ قال: نَعَمْ؛ لكَ مثلُ ما طَلَعتْ عليه الشَّمْسُ أَوْ غَرُبَتْ.
رواه الطبراني بإسناد جيد، وليس في أصلي رفعه، وأرى الكاتب أسقط منه ذكر
النبي صلى الله عليه وسلم(1).
ইবনু মাসঊদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: জান্নাতে সবার শেষে প্রবেশকারী ব্যক্তি হলেন একজন লোক, যার পাশ দিয়ে তাঁর মহামহিম প্রতিপালক অতিক্রম করবেন এবং তাকে বলবেন: 'উঠে দাঁড়াও এবং জান্নাতে প্রবেশ করো।' তখন সে মন খারাপ করে তাঁর দিকে ফিরে বলবে: 'আপনি কি আমার জন্য কিছু অবশিষ্ট রেখেছেন?' তিনি বলবেন: 'হ্যাঁ, তোমার জন্য রয়েছে তার সমপরিমাণ (সম্পদ), যার উপর সূর্য উদিত হয় অথবা অস্ত যায়।'
2184 - (3) [ضعيف] وعن عبدِ الله بنِ عُمَر رضي الله عنهما قال: سمعتُ رسولَ الله صلى الله عليه وسلم يقول:
`ألا أُخْبِرُكُمْ بأسْفَلِ أهْلِ الجنَّةِ دَرجَةً؟ `.
قالوا: بَلى يا رسولَ الله! قال:
`رَجُلٌ يدْخُلُ مِنْ بابِ الجَنَّةِ، فيَتَلَقَّاهُ غلْمانُه، فيقولونَ: مَرْحباً بسَيِّدِنا، قد آنَ لك أنْ تزورَنا. قال: فتمدُّ له الزرابيُّ أرْبعين سنَةً، ثُمَّ يَنْظُرُ عنْ يمينِه وشِمالِه، فيرى الجِنانَ، فيقول: لِمَنْ ما ههُنا؟ فيقالُ: لكَ. حتى إذا انتهى رُفِعَتْ له ياقوتَةٌ حمْراءُ، أو زَبرْجَدَةٌ خَضْراءُ، لها سبْعونَ شِعْباً، في كلِّ شِعْبٍ سبعونَ غُرْفَةً، في كلِّ غرفَةٍ سبْعون باباً، فيقالُ: اقْرَأْ وارْقَ، فيَرْقَى حتَّى إذا انْتَهى إلى سريرِ مُلْكِه اتَّكَأ عليهِ، سِعَتُهُ ميلٌ في ميل، له فيه قُصورٌ، فيُسْعَى إليه بسبعينَ صحْفَةً مِنْ ذهَبٍ، ليسَ فيها صحْفَةٌ فيها مِنْ لوْنِ أخْتِها، يَجِدُ لذَّةَ آخِرِها كما يجِدُ لذَّةَ أوَّلِها، ثمَّ يُسْعَى إليه بألْوانِ الأَشْرِبةِ، فيَشْرَبُ منْها ما اشْتَهى، ثُمَّ يقولُ الغِلْمانُ: اتْركوهُ وأزْواجَهُ، فينْطلِقُ الغِلْمانُ، ثُمَّ يَنْظُرُ؛ فإذا حَوْراءُ منَ الحورِ العينِ جالِسَةٌ على سرير مُلْكها، عليها سبعونَ حُلَّةً، ليسَ مِنْها حُلَّةٌ مِنْ لَوْنِ صاحِبَتِها، فيُرى مُخُّ ساقِها مِنْ وراءِ اللَّحْمِ والدمِ والعَظْمِ، والكِسْوَةُ فوقَ ذلك، فينظُرُ إليها فيقولُ: مَنْ أنْتِ؟ فتقولُ: أنا مِنَ الحورِ العينِ، مِنَ اللاتي خُبِّئْنَ لكَ، فينظُر إليها أربعينَ سنةٌ لا يصْرِفُ بَصَره عنها، ثمَّ يَرْفَعُ بصَرهُ إلى الغرفة فإذا أُخْرى أجمل منها، فتقولُ: ما آن لَك أنْ يكونَ
لَنا منكَ نصيبٌ؟ فيرتقي إليْها أربعينَ سنةً لا يَصْرِفُ بَصَرَهُ عنها، ثمَّ إذا بلَغَ النعيمُ مِنْهم كلَّ مَبْلَغٍ، وظَنُّوا أنْ لا نعيمَ أفْضَلَ منهُ تَجلَّى لهُمُ الرَّبُ تبارَك اسْمُه، فيَنْظُرونَ إلى وجهِ الرّحْمن، فيقولُ: يا أهْلَ الجنَّة! هَلِّلوني، فَيتَجاوَبونَ بِتَهْليلِ الرحمنِ، ثُمَّ يقول: يا داود قُمْ فَمَجِّدْني كما كنْتَ تُمَجِّدُني في الدنيا، -قال:- فيُمَجِّدُ داودُ ربَّه عز وجل`.
رواه ابن أبي الدنيا، وفي إسناده من لا أعرفه الآن(1).
আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লামকে বলতে শুনেছি: "আমি কি তোমাদেরকে জান্নাতের অধিবাসীদের মধ্যে নিম্নতম মর্যাদার ব্যক্তি সম্পর্কে অবহিত করব না?" তারা বলল: "অবশ্যই, হে আল্লাহর রাসূল!" তিনি বললেন: "সে এমন একজন লোক, যে জান্নাতের দরজা দিয়ে প্রবেশ করবে। তখন তার খাদেমরা (যুবক সেবকরা) তাকে অভ্যর্থনা জানাবে এবং বলবে: ‘স্বাগতম, আমাদের সর্দার! আপনি যে আমাদের দেখতে এসেছেন, এর সময় হয়েছে।’"
নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: অতঃপর তার জন্য চল্লিশ বছর ধরে (বিস্তৃত পথে) মূল্যবান গালিচা বিছানো থাকবে। এরপর সে ডান ও বাম দিকে তাকিয়ে জান্নাতসমূহ দেখতে পাবে এবং জিজ্ঞেস করবে: ‘এগুলো কার জন্য?’ তাকে বলা হবে: ‘এগুলো আপনার জন্য।’
অবশেষে যখন সে তার গন্তব্যে পৌঁছবে, তখন তার জন্য একটি লাল ইয়াকূত পাথর অথবা সবুজ পান্নার (যাব্রাজাদ) তৈরি বস্তুকে উঁচু করা হবে। সেটির সত্তরটি শাখা থাকবে; প্রতিটি শাখায় সত্তরটি কক্ষ থাকবে; প্রতিটি কক্ষে সত্তরটি দরজা থাকবে। তাকে বলা হবে: ‘(কুরআন) পড়ুন এবং উপরে উঠুন।’ সে উপরে উঠতে থাকবে। যখন সে তার রাজকীয় আসনে পৌঁছাবে, তখন সে তার ওপর হেলান দেবে। সেই আসনের প্রশস্ততা হবে এক মাইল বাই এক মাইল। তাতে তার জন্য অসংখ্য প্রাসাদ থাকবে।
তার কাছে সত্তরটি স্বর্ণের প্লেট নিয়ে যাওয়া হবে। সেগুলোর একটি প্লেটের খাদ্য অন্যটির খাদ্যের রঙের মতো হবে না। সে তার প্রথম অংশের স্বাদ যেরূপ পাবে, শেষ অংশের স্বাদও একইরকম পাবে। এরপর তার কাছে বিভিন্ন ধরনের পানীয় নিয়ে আসা হবে। সে তার পছন্দমতো পান করবে। এরপর খাদেমরা বলবে: ‘তাকে এবং তার স্ত্রীদেরকে একা ছেড়ে দাও।’ তখন খাদেমরা চলে যাবে।
এরপর সে তাকাবে, তখন দেখবে, হুরুল ‘ঈনদের মধ্য থেকে একজন হুর তার রাজকীয় আসনে উপবিষ্ট আছে। তার গায়ে সত্তরটি পোশাক থাকবে, সেগুলোর কোনোটিই অন্যটির রঙের মতো হবে না। গোশত, রক্ত ও হাড়ের বাইরে থেকেও তার পায়ের নলার মজ্জা দেখা যাবে, আর সেই পোশাকগুলো এর উপরে থাকবে। সে তার দিকে তাকিয়ে বলবে: ‘তুমি কে?’ সে বলবে: ‘আমি সেই হুরুল ‘ঈনদের একজন, যাদেরকে আপনার জন্য গোপন করে রাখা হয়েছিল।’ সে চল্লিশ বছর তার দিকে তাকিয়ে থাকবে এবং দৃষ্টি সরাবে না।
এরপর সে তার দৃষ্টিকে কক্ষটির দিকে তুলবে। তখন দেখবে, সেখানে অন্য একজন হুর আছে, যে পূর্বের জন অপেক্ষা অধিক সুন্দরী। সে বলবে: ‘এখনো কি সময় হয়নি যে, আমাদেরও আপনার পক্ষ থেকে অংশ থাকবে?’ তখন সে চল্লিশ বছর ধরে তার দিকে উঠতে থাকবে এবং দৃষ্টি সরাবে না।
অতঃপর যখন তাদের সুখ-ভোগ সর্বোচ্চ সীমায় পৌঁছবে এবং তারা মনে করবে যে, এর চেয়ে উত্তম আর কোনো নিয়ামত নেই, তখন তাদের প্রতি বরকতময় নামে নামাঙ্কিত রব (প্রভু) আত্মপ্রকাশ করবেন। ফলে তারা দয়াময় আল্লাহর চেহারার (দিদার) দিকে তাকাবে। তিনি বলবেন: ‘হে জান্নাতের অধিবাসীরা! তোমরা আমার তাসবীহ (তাহলীল) করো।’ তখন তারা দয়াময় আল্লাহর তাহলীলের দ্বারা একে অপরের সাথে উত্তর দেবে। এরপর আল্লাহ বলবেন: ‘হে দাঊদ! ওঠো, আর দুনিয়ায় তুমি যেভাবে আমার প্রশংসা করতে, সেভাবে আমার প্রশংসা করো।’ নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: তখন দাঊদ (আঃ) তাঁর রব মহান ও পরাক্রমশালী আল্লাহর প্রশংসা করবেন।"
2185 - (4) [ضعيف] ورُوي عن ابن عمر رضي الله عنهما قال: قال رسولُ الله صلى الله عليه وسلم:
`إنَّ أدْنَى أهلِ الجنَّة منْزِلةً؛ لَمَنْ ينظُر إلى جَنَّاتِهِ وأزْواجِهِ ونعيمِه وخَدَمِهِ وسرُرِه مسيرَةَ ألْفِ سنَةٍ، وَأكْرمَهُم على الله مَنْ يَنْظُر إلى وَجْهِهِ غُدْوَةً وعَشِياً`.
ثم قرأَ رسولُ الله صلى الله عليه وسلم: {وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ نَاضِرَةٌ (22) إِلَى رَبِّهَا نَاظِرَةٌ}.
رواه الترمذي وأبو يعلى والطبراني والبيهقي.
ورواه أحمد مختصراً قال:
`إنَّ أدْنى أهلِ الجَنَّةِ مَنْزِلةً؛ لَيَنْظُر في مُلْكِه أَلْفيْ سَنةٍ، يرى أقْصاهُ كما يرى أدْناهُ، يَنظُر إلى أزْواجِهِ وخَدَمِهِ`.
زاد البيهقي على هذا في لفظٍ له:
`وإنَّ أَفْضَلَهُم مَنْزِلةً؛ لَمَنْ ينظُرُ إلى الله عز وجل في وجْهِه في كلِّ يومٍ مرتين`.
ইবনে উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "জান্নাতিদের মধ্যে সর্বনিম্ন মর্যাদার অধিকারী সেই ব্যক্তি, যে তার বাগানসমূহ, তার স্ত্রীগণ, তার নেয়ামত, তার খাদেমগণ এবং তার খাটের দিকে তাকাবে এক হাজার বছরের পথের দূরত্ব পর্যন্ত। আর আল্লাহ্র কাছে তাদের মধ্যে সবচেয়ে সম্মানিত সে, যে সকাল-সন্ধ্যায় তাঁর (আল্লাহ্র) চেহারার দিকে তাকাবে।" অতঃপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এই আয়াত পাঠ করলেন: "সেদিন অনেক মুখমণ্ডল হবে সতেজ (উজ্জ্বল), তারা তাদের প্রতিপালকের দিকে তাকিয়ে থাকবে।" (সূরা কিয়ামাহ ৭৬:২২-২৩)।
ইমাম আহমদ (রঃ) এটিকে সংক্ষিপ্তাকারে বর্ণনা করেছেন, তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "নিশ্চয় জান্নাতিদের মধ্যে সর্বনিম্ন মর্যাদার অধিকারী সে, যে তার রাজত্বের দিকে তাকাবে দুই হাজার বছরের দূরত্ব পর্যন্ত। সে তার দূরতম স্থানকে এমনভাবে দেখবে, যেমনভাবে নিকটতম স্থানকে দেখে। সে তার স্ত্রীগণ এবং খাদেমদের দিকে তাকাবে।"
ইমাম বায়হাকী (রঃ) তার এক বর্ণনায় এর সাথে যোগ করেছেন: "আর তাদের মধ্যে শ্রেষ্ঠ মর্যাদার অধিকারী সে, যে প্রতিদিন দু'বার মহিমান্বিত আল্লাহ্র চেহারার দিকে তাকাবে।"
2186 - (5) [ضعيف موقوف] وروى ابن أبي الدنيا عن الأعمش عن ثوير قال: أراه عن ابن عمر قال:
إنَّ أَدْنى أهْلِ الجنَّةِ مَنْزِلَةً؛ لَرَجُلٌ له ألْفُ قَصْر، بين كلِّ قَصْرَيْنِ مسيرةُ سَنةٍ، يَرى أقْصاها كما يرى أدْناها، في كلِّ قَصْرٍ مِنَ الحورِ العينِ والرياحينِ والوِلْدانِ؛ ما يَدْعُو بشَيْءٍ إلا أُتِيَ بِهِ.
رواه هكذا موقوفاً(1).
ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: জান্নাতবাসীদের মধ্যে সর্বনিম্ন মর্যাদার অধিকারী ব্যক্তি হবে এমন একজন পুরুষ, যার জন্য থাকবে এক হাজার প্রাসাদ। প্রতিটি দুই প্রাসাদের মধ্যবর্তী দূরত্ব হবে এক বছরের পথের সমান। সে তার দূরতম প্রাসাদও এমনভাবে দেখতে পাবে যেমনটি নিকটতম প্রাসাদ দেখে। প্রতিটি প্রাসাদেই থাকবে হুর (আয়িন), সুগন্ধি পুষ্পরাজি এবং চির-কিশোররা (ওলদান)। সে যা চাইবে, তা-ই তার কাছে নিয়ে আসা হবে।
2187 - (6) [ضعيف] وعن أبي سعيدٍ الخدريِّ رضي الله عنه قال: قال رسولُ الله صلى الله عليه وسلم:
`أدْنَى أهْلِ الجنَّةِ؛ الذي ثمانون ألْفَ خادِمٍ، واثْنَتانِ وسبْعونَ زَوْجَةً، ويُنْصَبُ له قُبَّةَ مِنْ لُؤْلُؤٍ وزَبرْجَدٍ وياقوتٍ، كما بينَ (الجابِيَةِ) إلى (صَنْعَاءَ) `.
رواه الترمذي وقال: `حديث غريب لا نعرفه إلا من حديث رشدين بن سعد يعني عن عمرو بن الحارث عن دراج`.
(قال الحافظ):
`قد رواه ابن حبان في `صحيحه` من حديث ابن وهب -وهو أحد الأعلام الثقات الإثبات- عن عمرو بن الحارث عن دراج`.
আবূ সাঈদ আল-খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "জান্নাতবাসীদের মধ্যে সর্বনিম্ন স্তরের সেই ব্যক্তি যার আশি হাজার খাদেম থাকবে এবং বাহাত্তর জন স্ত্রী থাকবে। তার জন্য মুক্তা, জবরজদ ও ইয়াকুত পাথরের একটি তাঁবু (গম্বুজ) স্থাপন করা হবে, যা (শামের) জাবিয়াহ থেকে (ইয়ামানের) সান‘আ পর্যন্ত দূরত্বের সমান হবে।"
2188 - (7) [ضعيف] وعن أنسِ بْنِ مالكٍ رضي الله عنه قال: قال رسولُ الله صلى الله عليه وسلم:
`إنَّ أسْفَل أهْلِ الجنَّةِ أجْمَعين دَرجةً؛ لَمَنْ يقومُ على رأْسِهِ عَشَرَةُ آلاف خادِمٍ، بيد كلِّ واحد صحْفَتانِ، واحِدَةٌ مِنْ ذَهبٍ والأخْرى مِنْ فِضَّةٍ، في كلِّ واحِدَةٍ لَوْنٌ ليسَ في الأخرى مِثْلُه، يأكُلُ مِنْ آخِرِها مثلَ ما يأكُلُ مِنْ أوَّلها،
يَجِدُ لآخِرِها مِنَ الطيبِ واللَّذَّةِ مثلَ الذي يَجِدُ لأَوَّلِها، ثُمَّ يكونُ ذلك ريحُ المسْكِ الأذْفُر، لا يَبُولون، ولا يَتَغَّوطون، ولا يَمْتَخِطونَ، إخْواناً على سُررٍ مُتَقابِلينَ`.
رواه ابن أبي الدنيا، والطبراني واللفظ له، ورواته ثقات(1).
আনাস ইবনু মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "নিশ্চয়ই জান্নাতবাসীদের মধ্যে সর্বাপেক্ষা নিম্নস্তরের মর্যাদা যার হবে, তার মাথার কাছে দশ হাজার খাদেম দাঁড়িয়ে থাকবে, তাদের প্রত্যেকের হাতে দুটি করে থালা থাকবে, একটি স্বর্ণের এবং অন্যটি রৌপ্যের। প্রত্যেক থালায় এমন ভিন্ন ধরনের খাবার থাকবে, যা অন্য থালাতে থাকবে না। সে এর শেষ দিক থেকে এমনভাবে আহার করবে যেমন এর প্রথম দিক থেকে আহার করে। এর শেষ ভাগে সে ঐরূপ সুঘ্রাণ ও স্বাদ পাবে, যেরূপ এর প্রথম ভাগে পেয়েছিল। অতঃপর তা তীব্র সুঘ্রাণযুক্ত মিশকে পরিণত হবে। তারা পেশাব করবে না, পায়খানা করবে না এবং নাক ঝাড়বে না (বরং তারা থাকবে) মুখোমুখি খাটের উপর বসা ভাই ভাই হিসাবে।"
2189 - (8) [ضعيف موقوف] وعن أبي هريرة رضي الله عنه قال:
إنَّ أَدْنى أهْلِ الجنَّةِ منزِلةً -وليسَ فيهِم دَنِيُّ-؛ مَنْ يَغْدو عليه كلَّ يومٍ
ويَروحُ خَمْسَةَ عَشَر ألْفِ خادِمٍ، ليسَ منهم خادِمٌ إلا ومَعُه طُرفَةٌ لَيْسَتْ مَعَ
صاحِبِه.
رواه ابن أبي الدنيا موقوفاً(2).
(قال الحافظ): `ولا منافاة بين هذه الأحاديث، لأنه قال في حديث أبي سعيد:
`أَدْنى أهْلِ الجنَّة الذي لَهُ ثَمانُونَ ألْفَ خادِمٍ`. وقال في حديث أنس:
`مَنْ يقومُ على رَأْسِه عَشَرَةُ آلافِ خادِمٍ`. وفي حديث أبي هريرة:
`مَنْ يغدو عليه ويروحُ خَمْسَةَ عَشَر ألْفِ خادِمٍ`.
فيجوز أن يكون له ثمانونَ ألفَ خادِمٍ، يقومُ على رأسِه منهم عشرَةُ آلافٍ، ويغدو عليه منهم كلَّ يوْمٍ خمْسَةَ عَشَر ألْفاً`. والله سبحانه أعلم`(3).
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, জান্নাতবাসীদের মধ্যে মর্যাদার দিক থেকে যিনি সবচেয়ে নিম্নস্তরের হবেন—তবে তাদের (জান্নাতবাসীদের) মধ্যে কেউ নিম্নস্তরের নন—তাঁর কাছে প্রতিদিন সকালে ও সন্ধ্যায় পনেরো হাজার খাদেমের আগমন ঘটবে। তাদের মধ্যে এমন কোনো খাদেম থাকবে না যার সাথে এমন কোনো নতুন জিনিস বা উপহার নেই যা অন্য খাদেমের কাছে নেই।
2190 - (1) [ضعيف] وعن جابرِ بْنِ عبدِ الله رضي الله عنهما قال: قالَ لنا رسولُ الله صلى الله عليه وسلم:
`ألا أُحَدِّثكم بغُرَفِ الجنَّةِ؟ `.
قال: قلتُ: بَلى يا رسول الله! بأبينا أنْتَ وأمِّنا. قال:
`إنَّ في الجنَّةِ غُرَفاً مِنْ أصْنافِ الجَوْهرِ كلِّه، يُرى ظاهِرُها مِنْ باطِنِها، وباطِنُها مِنْ ظاهِرها، فيها مِنَ النعيمِ واللَّذَّاتِ والشَّرَفِ(1) ما لا عَيْنٌ رأَتْ، ولا أُذُنٌ سمِعَتْ`.
قال: قلتُ: لِمَنْ هذه الغُرَف؟ قال:
`لِمَنْ أفْشى السلامَ، وأطْعَم الطعامَ، وأدامَ الصِّيامَ، وصلَّى بالليلِ والناسُ نِيامٌ`، الحديث.
رواه البيهقي ثم قال:
`وهذا الإسناد غير قوي؛ إلا أنه مع الإسنادين الأوَّلَيْن يقوى بعضه ببعض. والله أعلم`.
জাবির ইবনু আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাদের বললেন, "আমি কি তোমাদের জান্নাতের কক্ষগুলো (ঘরগুলো) সম্পর্কে বলব না?"
তিনি (জাবির) বলেন, আমি বললাম, "হ্যাঁ, হে আল্লাহর রাসূল! আপনার জন্য আমাদের পিতা-মাতা উৎসর্গ হোন।"
তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, "নিশ্চয়ই জান্নাতে এমন সব কক্ষ রয়েছে যা সকল প্রকার মূল্যবান রত্ন দ্বারা তৈরি। সেগুলোর বাহির থেকে ভিতর দেখা যায় এবং ভিতর থেকে বাহির দেখা যায়। সেগুলোতে এমন সব নিয়ামত, আনন্দ ও সম্মান রয়েছে যা কোনো চোখ দেখেনি এবং কোনো কান শোনেনি।"
তিনি (জাবির) বলেন, আমি জিজ্ঞাসা করলাম, "এই কক্ষগুলো কাদের জন্য?"
তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, "যে ব্যক্তি সালামের প্রসার ঘটায়, (ক্ষুধার্তকে) খাদ্য দান করে, নিয়মিত রোযা রাখে এবং রাতে যখন মানুষ ঘুমিয়ে থাকে তখন সালাত আদায় করে।" হাদীসটি (এখানে) সমাপ্ত হলো।
2191 - (1) [ضعيف] وعنِ ابْنِ عبَّاسٍ رضي الله عنهما قال: قال رسولُ الله صلى الله عليه وسلم:
`خلَقَ الله جنَّةَ عَدْنٍ بيَدِه، ودَلَّى فيها ثِمارَها، وشقَّ فيها أنْهارَها، ثُمَّ نَظر إليها فقالَ لها: تكَلَّمي، فقالَتْ: {قَدْ أَفْلَحَ الْمُؤْمِنُونَ}، فقال: وعِزَّتي لا يُجاوِرُني فيكِ بَخيلٌ`.
رواه الطبراني في`الكبير` و`الأوسط` بإسنادين أحدهما جيد. [مضى 22 - البر /10].
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আল্লাহ তাঁর নিজ হাতে জান্নাতুল আদন সৃষ্টি করেছেন, এবং এর মধ্যে ফল ঝুলিয়ে দিয়েছেন, এবং এর মধ্যে নদীসমূহ প্রবাহিত করেছেন, এরপর তিনি তার দিকে তাকালেন এবং তাকে বললেন: কথা বলো। তখন সে (জান্নাত) বলল: "অবশ্যই মু'মিনগণ সফলকাম হয়েছে।" তখন আল্লাহ বললেন: আমার সম্মানের কসম! কোনো কৃপণ ব্যক্তি তোমার প্রতিবেশী হবে না।
2192 - (2) [ضعيف جداً] ورواه ابن أبي الدنيا من حديث أنسٍ أطول منه، ولفظُه: قال رسولُ الله صلى الله عليه وسلم:
`خلَقَ الله جَنَّةَ عَدْنٍ بيدَه، لَبِنَةٌ مِنْ دُرَّةٍ بَيْضَاءَ، ولَبِنَةٌ مِنْ ياقوتَةٍ حَمْراءَ، ولَبِنَةٌ مِنْ زَبرْجَدَةٍ خَضْراءَ، ومِلاطُها مِسْكٌ، حَشيشُها الزعْفَرانُ، حَصْباؤها الُّلؤْلُؤُ، ترابُها العَنْبَرُ. ثُمَّ قال لها: انْطُقي. قالَتْ: {قَدْ أَفْلَحَ الْمُؤْمِنُونَ}. فقال الله عز وجل: وعِزَّتي وجَلالي لا يُجاوِرُني فيكِ بخيلٌ`. ثُمَّ تلا رسولُ الله صلى الله عليه وسلم: {وَمَنْ يُوقَ شُحَّ نَفْسِهِ فَأُولَئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ}. [مضى الكلام عليه هناك].
আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আল্লাহ তাআলা জান্নাতুল আদনকে নিজ হাতে সৃষ্টি করেছেন। এর একটি ইট সাদা মুক্তার, একটি ইট লাল ইয়াকুতের এবং একটি ইট সবুজ পান্নার (যবরজদের)। আর এর মসলা হলো মিশক, এর ঘাস হলো জাফরান, এর নুড়ি পাথর হলো মুক্তা, এর মাটি হলো আম্বর। এরপর আল্লাহ তাকে বললেন: কথা বলো। সে বলল: {অবশ্যই মুমিনগণ সফলকাম হয়েছে।} তখন আল্লাহ তাআলা বললেন: আমার ইজ্জত ও সম্মানের কসম, কোনো কৃপণ ব্যক্তি তোমার প্রতিবেশী হতে পারবে না। এরপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তিলাওয়াত করলেন: {আর যারা নিজেদের মনের কার্পণ্য থেকে মুক্ত থাকে, তারাই সফলকাম।}
2193 - (3) [ضعيف جداً] ورُوِي عن أبي هريرة عنِ النبيِّ صلى الله عليه وسلم قال:
`أرْضُ الجنَّةِ بيضاءُ، عَرصَتُها صخورُ الكافور، وقد أحاطَ بها المِسْكُ مثلَ كُثْبانِ الرَمْلِ، فيها أنهارٌ مطَّرِدَةٌ، فيَجْتَمعُ فيها أهْلُ الجنَّةِ، أدنْاهُم وآخِرُهُم، فيَتَعارَفونَ، فيَبْعَثُ الله ريحَ الرحْمَةِ، فتَهيجُ علَيْهِم ريحُ المِسْكِ، فَيرْجعُ الرجُلُ إلى زَوْجَتِه وقدِ ازْدادَ حُسْناً وطِيباً، فتقولُ له: قد خرَجْتَ مِنْ عندي وأنا بِكَ
مُعْجَبةٌ، وأنا بِك الآن أشَدُّ إعْجاباً`.
رواه ابن أبي الدنيا(1).
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: জান্নাতের ভূমি হবে সাদা, তার প্রাঙ্গণ কর্পূরের শিলা দ্বারা নির্মিত। তাকে (ভূমিকে) বালির স্তূপের মতো কস্তুরী ঘিরে রাখবে। তাতে সদা প্রবহমান নহরসমূহ থাকবে। সেখানে জান্নাতবাসীরা—তাদের মধ্যে নিম্নমানের ব্যক্তি এবং শেষ ব্যক্তিও—একত্রিত হবে। অতঃপর তারা পরস্পরকে চিনতে পারবে। তখন আল্লাহ রহমতের বাতাস প্রেরণ করবেন, ফলে তাদের উপর কস্তুরীর সুগন্ধির বাতাস প্রবাহিত হবে। অতঃপর লোকটি তার স্ত্রীর কাছে এমন অবস্থায় ফিরে আসবে যে সে সৌন্দর্য ও সুগন্ধিতে বৃদ্ধি পেয়েছে। তখন স্ত্রী তাকে বলবে: আপনি আমার কাছ থেকে বেরিয়ে গিয়েছিলেন, তখনো আমি আপনাকে পছন্দ করতাম, আর এখন আমি আপনাকে আরো অধিক পছন্দ করছি।
2194 - (4) [ضعيف] وعن سهل بن سعدٍ رضي الله عنه قال: قال رسولُ الله صلى الله عليه وسلم:
`إنَّ في الجنَّةِ مَرَاغاً مِنْ مِسْكٍ؛ مثلُ مراغِ دوابِّكُم في الدنيا`.
رواه الطبراني بإسناد جيد(2).
সাহল ইবনু সা'দ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: নিশ্চয় জান্নাতে কস্তুরির তৈরি গড়াগড়ি দেওয়ার স্থান (মাটি বা ধুলা) থাকবে, যেমন তোমাদের দুনিয়ার পশুদের গড়াগড়ি দেওয়ার স্থান হয়।
2195 - (5) [ضعيف] وعن كُرَيْبٍ؛ أنَّه سمعَ أسامةَ بْنَ زَيْدٍ رضي الله عنه يقول: قال رسولُ الله صلى الله عليه وسلم:
`ألا هَلْ مُشَمِّرٌ لِلْجَنَّةِ؟ فإنَّ الجنَّةَ لا خَطَرَ لَها، هيَ وربِّ الكعبةِ نورٌ يتَلأْلأُ، ورَيْحانَةٌ تَهْتَزُّ، وقَصْرٌ مَشيدٌ، ونَهرٌ مُطَّرِدٌ، وثَمَرةٌ نَضيجَةٌ، وزَوْجَةٌ حَسْناءُ جميلَةٌ، وحُلَلٌ كَثيرَةٌ، ومَقامٌ في أبَدٍ، في دارٍ سليمَةٍ، وفاكِهَةٍ وخُضْرة، وحُبْرَةٍ ونِعْمَة، في مَحلَّةٍ عالِيَةٍ بَهِيَّة`.
قالوا: نَعَمْ يا رسولَ الله! نحنُ المشَمِّرونَ لها. قال:
`قولوا: إنْ شاءَ الله`.
فقال القومُ: إنْ شاءَ الله.
رواه ابن ماجه وابن أبي الدنيا والبزار، وابن حبان في `صحيحه`، والبيهقي؛ كلهم من رواية محمد بن مهاجر عن الضحاك المعافري عن سليمان بن موسى عنه.
ورواه ابن أبي الدنيا أيضاً مختصراً قال: عن محمد بن مهاجر الأنصاري: حدثني سليمان بن موسى. كذا في أصول معتمدة؛ لم يذكر فيه الضحاك. وقال البزار:
`لا نعلم رواه عن النبي صلى الله عليه وسلم إلا أسامة، ولا نعلم له طريقاً عن أسامة إلا هذا الطريق، ولا نعلم رواه عن الضحاك إلا هذا الرجل محمد بن مهاجر`.
(قال الحافظ عبد العظيم):
`محمد بن مهاجر -وهو الأنصاري- ثقة احتج به مسلم وغيره، والضحاك لمْ يُخرِّجْ له من أصحاب الكتب الستة أحد غير ابن ماجه، ولم أقف فيه على جرح ولا تعديل لغير ابن حبان، بل هو في عداد المجهولين، وسليمان بن موسى هو الأشدق؛ يأتي ذكره(1) `.
উসামা ইবনু যায়িদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "সাবধান! জান্নাতের জন্য কোমর বাঁধতে কি কেউ প্রস্তুত আছে? কেননা জান্নাতের কোনো মূল্য নেই। কাবার রবের শপথ! তা হলো ঝলমলে আলো, দোদুল্যমান সুগন্ধি ফুল, সুউচ্চ প্রাসাদ, প্রবহমান নদী, পাকা ফল, অত্যন্ত রূপসী ও সুন্দরী স্ত্রী, বহু পোশাক, এবং এক নিরাপদ আবাসে স্থায়ীভাবে অবস্থান, ফলমূল ও সবুজ শস্য, আনন্দ ও নেয়ামতে, এক সুউচ্চ ও মনোমুগ্ধকর স্থানে।" সাহাবীগণ বললেন, হ্যাঁ, হে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)! আমরাই তার জন্য কোমর বাঁধছি। তিনি বললেন, "তোমরা বলো, ‘ইনশাআল্লাহ’ (আল্লাহ যদি চান)।" তখন লোকেরা বলল, ইনশাআল্লাহ।
2196 - (1) [ضعيف موقوف] وعن عبد الله بنِ مسعودٍ رضي الله عنه قال:
إنَّ لِكُلِّ مسلم خَيْرَة(1)، ولكل خيْرةٍ خَيْمَةٌ، ولكلِّ خَيْمَةٍ أرْبعةُ أبْوابٍ، يدخلُ عليها مِنْ كلِّ بابٍ تُحْفَةٌ وهَدِيَّةٌ وكرَامَةٌ؛ لَمْ تكُنْ قبْلَ ذلك، ولا مَرحاتٍ ولا دَفْراتٍ(2) ولا سُخْراتٍ ولا طمَّاحاتٍ {حُورٌ عِينٌ}، {كَأَنَّهُنَّ بَيْضٌ مَكْنُونٌ}.
رواه ابن أبي الدنيا من رواية جابر الجعفي موقوفاً.
আব্দুল্লাহ ইবনে মাসঊদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: নিশ্চয় প্রত্যেক মুসলমানের জন্য রয়েছে একটি 'খায়রা' (বিশেষ স্থান)। আর প্রত্যেক 'খায়রার' জন্য রয়েছে একটি তাঁবু (খাইমাহ)। আর প্রত্যেক তাঁবুর রয়েছে চারটি দরজা। প্রতিটি দরজা দিয়ে তার (তাঁবুর) কাছে প্রবেশ করবে বিশেষ উপহার, হাদিয়া ও সম্মান, যা এর আগে সেখানে ছিল না। আর সেখানে থাকবে না কোনো প্রকারের উচ্ছ্বাসপূর্ণ অহংকার, না কোনো প্রকারের বাধা বা উত্ত্যক্ততা, না কোনো ধরনের দাসত্ব বা অত্যাচার, আর না কোনো ধরনের লোভ বা অবাধ্যতা। (সেখানে রয়েছে) ডাগর চোখবিশিষ্ট হূরগণ, যেন তারা সুরক্ষিত ডিমের (মত শুভ্র ও কোমল)।
2197 - (2) [ضعيف موقوف] وعنِ ابْنِ عبَّاسٍ رضي الله عنهما:
{حُورٌ مَقْصُورَاتٌ فِي الْخِيَامِ}، قال:
الخيْمَةُ مِنْ دُرَّةٍ مجَوَّفَةٍ، طولُها فرسَخٌ، وعَرْضُها فرسَخٌ، ولها ألْفُ بابٍ مِنْ ذَهبٍ، حولَها سُرادَقٌ، في دَوْرِهِ خمسونَ فَرْسَخاً، يدخلُ عليهِ مِنْ كلِّ بابٍ منها مَلَكٌ بِهدِيَّة مِنْ عندِ الله عز وجل.
رواه ابن أبي الدنيا موقوفاً(3).
আব্দুল্লাহ ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, {হূরুন মাকসূরাতুন ফিল খিয়াম} (তাঁবুতে সংরক্ষিত হূরগণ)—এই আয়াতের ব্যাখ্যায় তিনি বলেন: সেই তাঁবুটি হলো ফোকলা মুক্তা দিয়ে তৈরি, যার দৈর্ঘ্য এক ফরসাখ এবং প্রস্থ এক ফরসাখ। আর তাতে রয়েছে সোনার তৈরি এক হাজার দরজা। সেটির চারপাশে একটি সুরাদাফ (পর্দা) রয়েছে, যার পরিধি হলো পঞ্চাশ ফরসাখ। এর প্রত্যেক দরজা দিয়ে আল্লাহ আযযা ওয়া জাল্লার পক্ষ থেকে হাদিয়া নিয়ে একজন ফেরেশতা তার নিকট প্রবেশ করে।
2198 - (3) [موضوع] ورُوي عن عِمرانَ بْنِ حُصَيْن وأبي هريرة رضي الله عنهما قالا:
سُئلَ رسولُ الله صلى الله عليه وسلم عن قولِه: {وَمَسَاكِنَ طَيِّبَةً فِي جَنَّاتِ عَدْنٍ}؟ قال:
`قَصْرٌ في الجنَّةِ مِنْ لُؤْلُؤةٍ، فيها سَبْعون داراً مِنْ ياقوتَةٍ حمْراءَ، في كلِّ دارٍ سبعونَ بَيْتاً مِنْ زُمُرُّدَةٍ خَضْراءَ، في كلِّ بَيْتٍ سبعونَ سَريراً، على كلِّ سريرٍ سبْعونَ فِراشاً مِنْ كلِّ لَوْنٍ، على كل فِراش امْرَأَةٌ، في كلِّ بَيْتٍ سبعون مائدَةً، على كلِّ مائدة سبعون لَوْناً مِنَ طعامٍ، في كلِّ بَيْتٍ سبعونَ وَصِيفًا ووَصِيفَةً، يُعْطَى المؤمِنُ من القوة(1) ما يَأتي على ذلك كلِّه في غَداةٍ واحِدَةٍ`.
رواه الطبراني، والبيهقي بنحوه.
ইমরান ইবনে হুসাইন ও আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তাঁরা বলেন, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে আল্লাহর বাণী: {আর উত্তম বাসস্থান রয়েছে চিরস্থায়ী জান্নাতে} সম্পর্কে জিজ্ঞেস করা হয়েছিল। তিনি বললেন, (তা হলো) জান্নাতে একটি মুক্তা দ্বারা তৈরি প্রাসাদ থাকবে, তাতে সত্তরটি ঘর থাকবে যা লাল ইয়াকুত পাথরের তৈরি, প্রত্যেক ঘরে সবুজ পান্নার তৈরি সত্তরটি কক্ষ থাকবে, প্রত্যেক কক্ষে সত্তরটি খাট থাকবে, প্রত্যেক খাটে সব রঙের সত্তরটি করে বিছানা থাকবে, প্রত্যেক বিছানায় একজন স্ত্রী (হুর) থাকবে। প্রত্যেক কক্ষে সত্তরটি করে খাবার টেবিল থাকবে, প্রত্যেক টেবিলে সত্তর প্রকারের খাবার থাকবে, প্রত্যেক ঘরে সত্তর জন করে সেবক ও সেবিকা থাকবে। মু'মিনকে এত পরিমাণ শক্তি প্রদান করা হবে যে, সে এক সকালের মধ্যে এসব কিছুর উপর দিয়ে যেতে পারবে।
2199 - (1) [منكر جداً موقوف] ورُوريَ عنِ ابْنِ عبَّاسٍ رضي الله عنهما؛ في قولهِ عز وجل: {إِنَّا أَعْطَيْنَاكَ الْكَوْثَرَ}، قال:
هو نَهْرٌ في الجَنَّةِ، عُمْقُه في الأرضِ سبعونَ ألْفَ فرسخٍ، ماؤه أشدُّ بَياضاً مِنَ اللَّبنِ، وأحْلى مِنَ العَسَلِ، شاطِئاه اللُّؤْلُؤ والزَّبَرْجَدُ والياقوتُ، خَصَّ الله بِه نَبِيَّهُ صلى الله عليه وسلم قَبْلَ الأنْبِياءِ.
رواه ابن أبي الدنيا موقوفاً(1).
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহ্ তা‘আলার বাণী: {إِنَّا أَعْطَيْنَاكَ الْكَوْثَرَ} (নিশ্চয় আমি আপনাকে কাউসার দান করেছি) প্রসঙ্গে তিনি বলেন:
এটি জান্নাতের একটি নহর (নদী), যার গভীরতা মাটির মধ্যে সত্তর হাজার ফারসাখ। এর পানি দুধের চেয়েও অধিক সাদা এবং মধুর চেয়েও অধিক মিষ্টি। এর দুই তীর মুক্তা, জাবরজদ এবং ইয়াকুত দ্বারা তৈরি। আল্লাহ্ তা‘আলা সকল নবীর পূর্বে এটি দ্বারা তাঁর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বিশেষভাবে সম্মানিত করেছেন।
2200 - (2) [ضعيف موقوف] وعن سماك:
أنَّه لقِيَ عبدَ الله بْنَ عبَّاسٍ بالمدينَة بعدَما كُفَّ بَصَرُه، فقال:
يا ابْنَ عبَّاسٍ! ما أرضُ الجنَّةِ؟ قال:
مَرْمَرَةٌ بَيْضاء، مِنْ فِضَّةٍ كأنَّها مِرْآةٌ.
قلتُ: ما نورُها؟ قال:
ما رأيْتَ الساعةَ التي يكون فيها طُلوُع الشمْسِ؟ فذلِكَ نورُها؛ إلا أنَّه ليسَ فيها شَمْسٌ ولا زَمْهَريرٌ.
قال: قلتُ: فما أنهارُها؟ أفي أخْدودٍ؟ قال: لا؛ ولكنَّها تَجْري على أرضِ الجنَّة مُسْتَكِفَّةً؛ لا تَفيضُ ههُنا ولا ههُنا، قال الله لها: كوني فكانَتْ.
قلتُ: فما حُلَلُ الجَنَّةِ؟ قال: فيها شَجَرةٌ فيها ثَمَرٌ كأنَّه الرمّانُ، فإذا أرادَ وليُّ الله مِنْها كِسْوَةً انْحدَرَتْ إليه مِنْ غُصْنِها، فانْفَلَقَتْ لهُ عن سبعينَ حُلَّةً
ألواناً بعْدَ ألوانٍ، ثمَّ تَنْطَبِقُ، فَتْرجعُ كما كانَتْ.
رواه ابن أبي الدنيا موقوفاً بإسناد حسن(1).
আব্দুল্লাহ ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত। সিমাক বর্ণনা করেছেন যে, তিনি মদীনায় তাঁর (ইবনে আব্বাস) সাথে সাক্ষাত করেন যখন তিনি দৃষ্টিশক্তি হারিয়ে ফেলেছিলেন। সিমাক বললেন: "হে ইবনে আব্বাস! জান্নাতের ভূমি কেমন?" তিনি বললেন: "তা সাদা মর্মর পাথরের মতো, রূপার তৈরি যা দেখতে আয়নার মতো।" আমি বললাম: "এর আলো কেমন?" তিনি বললেন: "তুমি কি সেই মুহূর্তটি দেখনি যখন সূর্য উদিত হয়? সেইরকমই হবে তার আলো; তবে সেখানে কোনো সূর্য থাকবে না, আর থাকবে না তীব্র শীত।" আমি বললাম: "তবে এর নদীগুলো কেমন? এগুলি কি খাদ বা নালা দিয়ে প্রবাহিত হবে?" তিনি বললেন: "না; বরং তা জান্নাতের মাটির উপর দিয়ে এমনভাবে প্রবাহিত হবে যে তা উপচে পড়বে না—না এদিক দিয়ে, না ওদিক দিয়ে। আল্লাহ তাআলা তাকে বলেন: 'হয়ে যাও,' আর তা হয়ে যায়।" আমি বললাম: "তবে জান্নাতের পোশাক কেমন?" তিনি বললেন: "সেখানে এমন একটি গাছ আছে যাতে ডালিমের মতো ফল ধরে। আল্লাহর কোনো প্রিয় বান্দা যদি তার থেকে পোশাক চান, তখন তা তার ডাল থেকে তাঁর দিকে নেমে আসে, তখন তা তার জন্য খুলে যায় এবং সত্তরটি পোশাকের সেট (হুল্লা) বের করে দেয়, যা একটির পর একটি ভিন্ন ভিন্ন রঙের হয়। এরপর তা আবার বন্ধ হয়ে যায় এবং আগের মতো অবস্থায় ফিরে যায়।"