হাদীস বিএন


শারহু মা’আনিল-আসার





শারহু মা’আনিল-আসার (3661)


وقد حدثنا يزيد بن سنان، وابن أبي داود قالا: ثنا عبد الله بن صالح قال: حدثني الليث قال: حدثني عُقَيل، عن ابن شهاب قال: أخبرني سالم أن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما قال: تمتع رسول الله صلى الله عليه وسلم في حجة الوداع بالعمرة إلى الحج، وأهدى وساق الهدي من ذي الحليفة، وبدأ رسول الله صلى الله عليه وسلم فأهل بالعمرة، ثم أهل بالحج، وتمتع الناس مع رسول الله صلى الله عليه وسلم بالعمرة إلى الحج . فهذا ابن عمر رضي الله عنهما، يخبر عن رسول الله صلى الله عليه وسلم أنه كان في حجة الوداع متمتعا، وأنَّه بدأ فأحرم بالعمرة.




আবদুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বিদায় হজ্জে উমরাহ থেকে হজ্জের সাথে তামাত্তু’ (সুবিধা গ্রহণ) করেছিলেন। তিনি হাদঈ (কুরবানীর পশু) পেশ করেছিলেন এবং যুল-হুলাইফা থেকে হাদঈ সঙ্গে নিয়ে গিয়েছিলেন। আর রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম শুরুতেই উমরার ইহরাম বেঁধেছিলেন, অতঃপর হজ্জের ইহরাম বেঁধেছিলেন। আর লোকেরাও রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের সাথে উমরাহ থেকে হজ্জের সাথে তামাত্তু’ করেছিলেন। আর এই ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম সম্পর্কে সংবাদ দিচ্ছেন যে তিনি বিদায় হজ্জে তামাত্তুকারী ছিলেন এবং তিনি শুরুতেই উমরার জন্য ইহরাম বেঁধেছিলেন।




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : Null









শারহু মা’আনিল-আসার (3662)


وقد حدثنا محمد بن خزيمة، قال: ثنا حجاج، قال: ثنا حماد، قال: أنا حميد، عن بكر بن عبد الله، عن ابن عمر: أن النبي صلى الله عليه وسلم وأصحابه قدموا مكة ملبين بالحج، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "من شاء أن يجعلها عمرة فليفعلها إلا من كان معه الهدي" . فأخبر ابن عمر رضي الله عنهما في حديث بكر هذا أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قدم مكة وهو ملبي بالحج. وقد أخبر في حديث سالم أن رسول الله صلى الله عليه وسلم بدأ فأحرم بالعمرة. فهذا معناه عندنا -والله أعلم-، أنه كان أحرم أولا بحجة على أنها حجة، ثم فسخها فصيرها عمرة، فلبي بالعمرة، ثم تمتع بها إلى الحج، حتى يصح حديث سالم وبكر هذين، ولا يتضادان. وفسخ رسول الله صلى الله عليه وسلم الحج الذي كان فعله وأمر به أصحابه، هو بعد طوافهم بالبيت، قد ذكرنا ذلك في باب فسخ الحج، فأغنانا ذلك عن إعادته هاهنا. فاستحال بذلك أن يكون الطواف الذي كان رسول الله صلى الله عليه وسلم فعله للعمرة التي انقلبت إليها حجته مجزيًا عنه من طواف حجته التي أحرم بها بعد ذلك. ولكن وجه ذلك، عندنا -والله أعلم-، أنه لم يطف لحجته قبل يوم النحر؛ لأن الطواف الذي يفعل قبل يوم النحر في الحجة إنما يفعل للقدوم، لا لأنَّه من صلب الحجة، فاكتفى ابن عمر رضي الله عنهما بالطواف الذي كان فعله بعد القدوم في عمرته عن إعادته في حجته. وهذا مثل ما قد روي عن ابن عمر رضي الله عنهما أيضا من فعله. 3662 م - حدثنا محمد بن خزيمة، قال: ثنا حجاج، قال: ثنا حماد، عن أيوب، عن نافع، أن ابن عمر كان إذا قدم مكة رمل بالبيت، ثم طاف بين الصفا والمروة، وإذا لبى من مكة بها لم يرمل بالبيت، وأخر الطواف بين الصفا والمروة إلى يوم النحر، وكان لا يرمل يوم النحر . فدل ما ذكرنا أن ابن عمر رضي الله عنهما كان إذا أحرم بالحجة من مكة لم يطف لها إلى يوم النحر. فكذلك ما روي عن رسول الله صلى الله عليه وسلم من إحرامه بالحجة التي أحرم بها بعد فسخ حجته الأولى لم يكن طاف لها إلى يوم النحر. فليس في حديث ابن عمر رضي الله عنهما عن النبي صلى الله عليه وسلم من حكم طواف القارن لعمرته وحجته شيء. وثبت بما ذكرنا أيضا، خطأ الدراوردي في حديث عبيد الله الذي وصفناه. واحتج أهل المقالة الأولى




ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম এবং তাঁর সাহাবীগণ হজ্জের তালবিয়া পাঠ করতে করতে মক্কায় আগমন করলেন। অতঃপর রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বললেন: "যে ব্যক্তি এটিকে উমরাহ বানাতে চায়, সে যেন তা করে নেয়, তবে যার সাথে কুরবানীর পশু রয়েছে (সে ব্যতীত)।"

সুতরাং, ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বাকর-এর এই হাদীসে বর্ণনা করেছেন যে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম হজ্জের তালবিয়া পাঠ করতে করতে মক্কায় আগমন করেছিলেন। আর তিনি (ইবনু উমর) সালিমের হাদীসে বর্ণনা করেছেন যে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম প্রথমে উমরার ইহরাম বেঁধেছিলেন।

আমাদের নিকট এর অর্থ হলো—আল্লাহই সর্বাধিক অবগত—তিনি প্রথমে হজ্জ হিসেবেই ইহরাম বেঁধেছিলেন, অতঃপর তিনি তা বাতিল (ফাসখ) করে উমরায় পরিণত করেন। ফলে তিনি উমরার তালবিয়া পাঠ করেন, এরপর তিনি হজ্জ পর্যন্ত সেটির মাধ্যমে মুতামাত্তি’ হন। এতে করে সালিম এবং বাকর-এর এই দুটি হাদীসই সহীহ প্রমাণিত হয় এবং পরস্পরবিরোধী হয় না। রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম যে হজ্জের কাজ শুরু করেছিলেন এবং তাঁর সাহাবীগণকে যে কাজের নির্দেশ দিয়েছিলেন তা বাতিল (ফাসখ) করা হয় বায়তুল্লাহ তাওয়াফ করার পরে। আমরা ’হজ্জ ফাসখ করার অধ্যায়’-এ এ বিষয়ে আলোচনা করেছি, ফলে এখানে তা পুনরাবৃত্তি করার প্রয়োজন নেই।

অতএব, এর ফলে এটা অসম্ভব যে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম যে তাওয়াফ করেছিলেন, যা তাঁর হজ্জকে উমরায় পরিবর্তিত করেছিল, তা তাঁর পরবর্তী ইহরামকৃত হজ্জের তাওয়াফের জন্য যথেষ্ট হবে। কিন্তু আমাদের নিকট এর ব্যাখ্যা হলো—আল্লাহই সর্বাধিক অবগত—তিনি তাঁর হজ্জের জন্য ইয়াওমুন নহরের (কুরবানীর দিনের) আগে তাওয়াফ করেননি। কারণ, হজ্জের মধ্যে ইয়াওমুন নহরের আগে যে তাওয়াফ করা হয়, তা কেবল আগমনের (তাওয়াফে কুদুম) জন্য করা হয়, এটি হজ্জের মূল অংশ নয়। তাই ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাঁর উমরার জন্য আগমনের পর যে তাওয়াফ করেছিলেন, তা তাঁর হজ্জের জন্য পুনরায় করার প্রয়োজন মনে করেননি।

আর এটা ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর নিজের কাজ সম্পর্কে বর্ণিত বর্ণনার মতোই। (৩৬৬২ ম) মুহাম্মদ বিন খুযায়মা (রাহিমাহুল্লাহ)... নাফি’ (রাহিমাহুল্লাহ) থেকে বর্ণনা করেন যে, ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) যখন মক্কায় আগমন করতেন, তখন তিনি বায়তুল্লাহতে রমল (দ্রুত পদক্ষেপে হাঁটা) করতেন এবং এরপর সাফা ও মারওয়ার মাঝে সাঈ করতেন। আর যখন তিনি মক্কা থেকে তার জন্য তালবিয়া পাঠ করতেন, তখন তিনি বায়তুল্লাহতে রমল করতেন না, আর সাফা ও মারওয়ার মাঝের সাঈ ইয়াওমুন নহর পর্যন্ত পিছিয়ে দিতেন এবং ইয়াওমুন নহরের দিনও তিনি রমল করতেন না।

আমরা যা উল্লেখ করলাম, তা প্রমাণ করে যে ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) যখন মক্কা থেকে হজ্জের ইহরাম বাঁধতেন, তখন ইয়াওমুন নহর পর্যন্ত তিনি তাওয়াফ করতেন না। অনুরূপভাবে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম তাঁর প্রথম হজ্জ বাতিল করার পর যে হজ্জের ইহরাম বেঁধেছিলেন, সেটির জন্যও ইয়াওমুন নহর পর্যন্ত তিনি তাওয়াফ করেননি। সুতরাং, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম থেকে ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর হাদীসে ক্বিরানকারী ব্যক্তির উমরা ও হজ্জের তাওয়াফের বিধান সম্পর্কে কোনো কিছু নেই। আর আমরা যা উল্লেখ করলাম, তার দ্বারা উবায়দুল্লাহর হাদীসে বর্ণিত দারওয়ার্দীর ভুলও প্রমাণিত হলো, যার বিবরণ আমরা দিয়েছি। আর প্রথম মতের অনুসারীরা প্রমাণ পেশ করেছেন...




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : إسناده صحيح.









শারহু মা’আনিল-আসার (3663)


بما حدثنا إبراهيم بن مرزوق، قال: ثنا بشر بن عمر، قال: ثنا مالك (ح) وحدثنا يونس، قال: أنا ابن وهب، أن مالكا حدثه، عن ابن شهاب، عن عروة، عن عائشة رضي الله عنها قالت: خرجنا مع رسول الله صلى الله عليه وسلم في حجة الوداع، فأهللنا بعمرة، ثم قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "من كان معه هدي، فليهل بالحج مع العمرة، ثم لا يحل حتى يحل منهما جميعا". فقدمت مكة وأنا حائض لم أطف بالبيت، ولا بين الصفا والمروة، فشكوت ذلك إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم، فقال: "انقضي رأسك وامتشطي، وأهلي بالحج، ودعي العمرة"، فلما قضيت الحج أرسلني رسول الله صلى الله عليه وسلم مع عبد الرحمن بن أبي بكر إلى التنعيم فاعتمرت فقال: "هذه مكان عمرتك"، قالت: فطاف الذين أهلوا بالعمرة بالبيت وبين الصفا والمروة، ثم حلوا، ثم طافوا طوافًا آخر بعد أن رجعوا من منى لحجهم. وأما الذين جمعوا بين الحج والعمرة فإنما طافوا لهما طوافا واحدا . قالوا: فهذه عائشة رضي الله عنها قد قالت: وأما الذين جمعوا بين الحج والعمرة فإنما طافوا طوافا واحدا وهم كانوا مع رسول الله صلى الله عليه وسلم، وبأمره كانوا يفعلون. ففي ذلك ما يدل على أن على القارن لحجته وعمرته طوافا واحدا، وليس عليه غير ذلك. وكان من حجتنا عليهم لمخالفيهم أنا قد روينا عن عُقَيل، عن الزهري، عن عروة، عن عائشة رضي الله عنها فيما تقدم من هذا الباب أن رسول الله صلى الله عليه وسلم في حجة الوداع تمتع وتمتع الناس معه. والمتمتع قد علمنا أنه الذي يهل بحجة بعد طوافه للعمرة. ثم قالت عائشة رضي الله عنها: في حديث مالك، عن الزهري، عن عروة، عن عائشة رضي الله عنها قالت: خرجنا مع النبي صلى الله عليه وسلم في حجة الوداع، فأهللنا بعمرة، فأخبرت أنهم دخلوا في إحرامهم كما يدخل المتمتعون. قالت: ثم قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "من كان معه هدي فليهل بالحج مع العمرة، ثم لا يحل حتى يحل منهما"، ولم يبين في هذا الحديث الموضع الذي قال لهم فيه هذا القول. فقد يجوز أن يكون قاله لهم قبل دخول مكة، أو بعد دخول مكة قبل الطواف، فيكونون قارنين بتلك الحجة للعمرة التي كانوا أحرموا بها قبلها. ويجوز أن يكون قال لهم ذلك بعد طوافهم للعمرة، فيكونون متمتعين بتلك الحجة التي أمرهم بالإحرام بها. فنظرنا في ذلك، فوجدنا جابر بن عبد الله، وأبا سعيد الخدري رضي الله عنهم قد أخبرا في حديثيهما اللذين رويناهما عنهما في باب: فسخ الحج، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ذلك القول في آخر طواف على العمرة. فعلمنا أن قول عائشة رضي الله عنها في حديث مالك. وأما الذين جمعوا بين العمرة والحج أنها تعني جمع متعة، لا جمع قرآن، قالت فإنما طافوا طوافا واحدا أي: فإنما طافوا طوافا بعد جمعهم بين الحج والعمرة، التي قد كانوا قد طافوا لها طوافا واحدا؛ لأن حجتهم تلك المضمومة مع العمرة، كانت مكية، والحجة المكية لا يطاف لها قبل عرفة، إنما يطاف لها بعد عرفة، على ما كان ابن عمر يفعل فيما قد رويناه. فقد عاد معنى ما روينا عن عائشة رضي الله عنها في هذا الباب، وما صححنا من ذلك لنفي التضاد عنه إلى معنى ما روينا عن ابن عمر رضي الله عنهما وما صححنا من ذلك. فليس شيء من هذا يدل على حكم القارن حجة كوفية مع عمرة كوفية كيف طوافه لهما، هل هو طواف واحد، أو طوافان؟ واحتج الذين ذهبوا إلى أن القارن يجزئه لعمرته وحجته طواف واحد أيضا.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমরা বিদায় হজ্জে রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের সাথে বের হলাম এবং উমরার ইহরাম বাঁধলাম। অতঃপর রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন: “যার সাথে কুরবানীর পশু রয়েছে, সে যেন উমরার সাথে হজ্জেরও ইহরাম বাঁধে। অতঃপর সে যেন সম্পূর্ণ হালাল না হওয়া পর্যন্ত হালাল না হয়।” অতঃপর আমি যখন মক্কায় পৌঁছলাম, তখন আমি ছিলাম ঋতুমতী। আমি বাইতুল্লাহর তাওয়াফ করিনি এবং সাফা-মারওয়ার মাঝে সা‘ঈও করিনি। আমি এ ব্যাপারে রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের কাছে অভিযোগ করলাম। তিনি বললেন: “তুমি তোমার মাথার খোঁপা খুলে ফেলো, চিরুনি করো এবং উমরার নিয়ত ছেড়ে দিয়ে হজ্জের ইহরাম বাঁধো।” যখন আমি হজ্জ সম্পন্ন করলাম, তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আমাকে আবদুর রহমান ইবনে আবী বকর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর সাথে তান‘ঈমে পাঠালেন এবং আমি উমরাহ করলাম। তিনি বললেন: “এটা তোমার উমরার পরিবর্তে।” আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন: যারা উমরার ইহরাম বেঁধেছিল, তারা বাইতুল্লাহ ও সাফা-মারওয়ার তাওয়াফ করল, অতঃপর হালাল হলো। এরপর মিনা থেকে ফিরে এসে তারা তাদের হজ্জের জন্য দ্বিতীয়বার তাওয়াফ করল। আর যারা হজ্জ ও উমরাকে একত্রিত করেছিল, তারা উভয়ের জন্য একটিই তাওয়াফ করেছিল।

তারা (আলিমগণ) বলেন: এই যে আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেছেন: ‘আর যারা হজ্জ ও উমরাকে একত্রিত করেছিল, তারা একটিই তাওয়াফ করেছিল।’ তারা রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের সাথে ছিলেন এবং তাঁরই আদেশে কাজ করছিলেন। এতে প্রমাণিত হয় যে কিরান হাজ্জকারীর জন্য তার হজ্জ ও উমরার জন্য একটি তাওয়াফই যথেষ্ট এবং এর বেশি কিছু তার উপর আবশ্যক নয়।

তাদের বিরোধীদের বিরুদ্ধে আমাদের দলীল হলো, আমরা উকাইল হতে, তিনি যুহরী হতে, তিনি উরওয়া হতে, তিনি আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে এই অধ্যায়ের পূর্বেই বর্ণনা করেছি যে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বিদায় হজ্জে তামাত্তু করেছিলেন এবং লোকেরাও তাঁর সাথে তামাত্তু করেছিল। আমরা জানি যে তামাত্তুকারী হলো সে, যে তার উমরার তাওয়াফের পর হজ্জের ইহরাম বাঁধে।

অতঃপর আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) মালিক হতে, তিনি যুহরী হতে, তিনি উরওয়া হতে, তিনি আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত হাদীসে বলেন: আমরা বিদায় হজ্জে নবী করীম সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের সাথে বের হলাম এবং উমরার ইহরাম বাঁধলাম। এর দ্বারা তিনি জানাতে চাইলেন যে তারা এমনভাবে ইহরামের মধ্যে প্রবেশ করেছিল যেভাবে তামাত্তুকারীগণ প্রবেশ করে। আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন: এরপর রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন: “যার সাথে কুরবানীর পশু রয়েছে, সে যেন উমরার সাথে হজ্জেরও ইহরাম বাঁধে, অতঃপর সে যেন সম্পূর্ণ হালাল না হওয়া পর্যন্ত হালাল না হয়।” এই হাদীসে তিনি কোথায় তাদের এই কথা বলেছিলেন, তা স্পষ্ট করা হয়নি। হতে পারে তিনি মক্কায় প্রবেশ করার পূর্বে অথবা মক্কায় প্রবেশ করার পর তাওয়াফের পূর্বে বলেছিলেন। সেক্ষেত্রে তারা পূর্বে যে উমরার ইহরাম বেঁধেছিল, তার সাথে এই হজ্জকে ক্বিরান (একত্রীকরণ)কারী গণ্য হবে। আবার এও হতে পারে যে, তিনি তাদের উমরার তাওয়াফের পর এই কথা বলেছিলেন, সেক্ষেত্রে তারা যে হজ্জের ইহরাম বাঁধার আদেশ পেয়েছিল, তার দ্বারা তারা মুতামাত্তি’ (তামাত্তুকারী) হবে।

আমরা এ বিষয়ে অনুসন্ধান করে দেখলাম, জাবির ইবনে আবদুল্লাহ এবং আবু সাঈদ আল-খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাঁদের দুটি হাদীসে (যা আমরা ‘হজ্জ বাতিল করা’ সংক্রান্ত অধ্যায়ে বর্ণনা করেছি) জানিয়েছেন যে রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম উমরার তাওয়াফের শেষে এই কথা বলেছিলেন।

অতএব, আমরা বুঝতে পারলাম যে মালিক কর্তৃক বর্ণিত হাদীসে আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) যখন বলেন: ‘আর যারা উমরা ও হজ্জকে একত্রিত করেছিল,’ তখন তিনি ক্বিরানকে নয়, বরং জাম‘উ মুতআহকে (তামাত্তুর সংমিশ্রণ) বুঝিয়েছেন। তিনি বলেন: ‘তারা একটিই তাওয়াফ করেছিল’ অর্থাৎ তারা হজ্জ ও উমরাকে একত্রিত করার পর একটিই তাওয়াফ করেছিল, যা তারা ইতোপূর্বে তাদের উমরার জন্য সম্পন্ন করা তাওয়াফের পর করেছিল। কারণ, উমরার সাথে যোগ হওয়া সেই হজ্জ ছিল মক্কাবাসীর হজ্জ (হজ্জে মাক্কিয়্যাহ)। আর মাক্কী হজ্জের জন্য আরাফার আগে তাওয়াফ করা হয় না, বরং আরাফার পর তাওয়াফ করা হয়, যেমন ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) করতেন যা আমরা বর্ণনা করেছি।

অতএব, আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে এই অধ্যায়ে যা বর্ণিত হয়েছে এবং যা আমরা তাঁর বক্তব্যকে পরস্পরবিরোধী হওয়া থেকে মুক্ত করতে বিশুদ্ধ বলে প্রমাণ করেছি, তার অর্থ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে যা বর্ণিত হয়েছে এবং যা আমরা বিশুদ্ধ বলে প্রমাণ করেছি, তার অর্থের দিকেই ফিরে যায়। এর কোনো কিছুই দ্বারা এই হুকুমের প্রমাণ পাওয়া যায় না যে কুফার হজ্জ ও কুফার উমরাকে একত্রিতকারী ক্বিরান হাজ্জকারীর জন্য কতটি তাওয়াফ যথেষ্ট হবে—একটি তাওয়াফ নাকি দুটি তাওয়াফ?

যারা বলেন যে ক্বিরান হাজ্জকারীর জন্য তার উমরা ও হজ্জের জন্য একটি তাওয়াফই যথেষ্ট, তারাও এই হাদীস দ্বারা দলীল পেশ করেন।




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : Null









শারহু মা’আনিল-আসার (3664)


بما حدثنا ربيع المؤذن، قال: ثنا أسد (ح) وحدثنا أحمد بن داود، قال: ثنا يعقوب بن حميد، قالا: ثنا ابن عيينة، عن عبد الله بن أبي نجيح، عن عطاء، عن عائشة: أن النبي صلى الله عليه وسلم قال لها: "إذا رجعت إلى مكة، فإن طوافك يكفيك لحجك وعمرتك" . قالوا: فقد أخبر رسول الله صلى الله عليه وسلم أن الذي عليها لحجتها وعمرتها طواف واحد. قيل لهم ليس هكذا لفظ هذا الحديث الذي رويتموه، إنما لفظه أنه قال: "طوافك لحجك يجزئك لحجك وعمرتك" فأخبر أن الطواف المفعول للحج يجزئ عن الحج والعمرة، وأنتم لا تقولون هذا، إنما تقولون: إن طواف القارن طواف لقرانه، لا لحجته دون عمرته، ولا لعمرته دون حجته، مع أن غير ابن أبي نجيح من أصحاب عطاء، قد روي هذا الحديث بعينه عن عطاء على معنى غير هذا المعنى.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাকে (আয়িশাকে) বলেছিলেন: "যখন তুমি মক্কায় ফিরে আসবে, তখন তোমার তাওয়াফ তোমার হজ ও উমরার জন্য যথেষ্ট হবে।" তারা (পর্যালোচনাকারীরা) বললেন: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তো জানিয়েছেন যে তার (আয়িশার) হজ ও উমরার জন্য একটি তাওয়াফই যথেষ্ট। তাদের বলা হলো: তোমরা এই হাদীসটির যে শব্দ বর্ণনা করেছো তা এমন নয়। বরং এর শব্দ হলো: তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তোমার হজের জন্য করা তাওয়াফ তোমার হজ ও উমরার জন্য যথেষ্ট হবে।" সুতরাং তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) জানিয়েছেন যে, হজের জন্য সম্পাদিত তাওয়াফটি হজ এবং উমরার জন্য যথেষ্ট হবে। কিন্তু তোমরা এটা বলো না। তোমরা তো বলো: কিরাণকারীর তাওয়াফ হলো তার কিরাণের (হজ ও উমরার একত্রের) জন্য, শুধু তার হজের জন্য নয়, তার উমরার জন্য নয়, বরং উভয়ের জন্য। অথচ ইবনু আবি নাজিহ ব্যতীত আতার অন্যান্য ছাত্রগণ এই একই হাদীস আতা থেকে ভিন্ন অর্থে বর্ণনা করেছেন।




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : إسناده صحيح.









শারহু মা’আনিল-আসার (3665)


حدثنا صالح بن عبد الرحمن، قال: ثنا سعيد بن منصور، قال: ثنا هشيم، قال: أنا حجاج، وأنا عبد الملك، عن عطاء، عن عائشة رضي الله عنها أنها قالت: قلت يا رسول الله! أكل أهلك يرجع بحجة وعمرة غيري؟ قال: "انفري فإنه يكفي" . قال حجاج في حديثه عن عطاء قال: ألحت على رسول الله صلى الله عليه وسلم، فأمرها أن تخرج إلى التنعيم، فتهل منه بعمرة، وبعث معها أخاها عبد الرحمن بن أبي بكر، فأهلت منه بعمرة، ثم قدمت فطافت وسعت وقصرت، وذبح عنها رسول الله صلى الله عليه وسلم قال عبد الملك، عن عطاء ذبح عنها بقرة، فأخبر عبد الملك، عن عطاء، عن عائشة رضي الله عنها بقصتها بطولها، وأنها إنما أحرمت بالعمرة في وقت ما كان لها أن تنفر بعد فراغها من الحجة، وأن الذي ذكر أنه يكفيها هو الحج من الحجة والعمرة لا الطواف. فقد بطل أن يكون في حديث عطاء هذا حجة في حكم طواف القارن كيف هو؟ واحتج من ذَهب أيضا في القارن أنه يطوف لعمرته وحجته طوافا واحدا.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি বললাম, “হে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)! আমি ছাড়া আপনার পরিবারের সবাই কি হজ ও উমরাহ করে ফিরবে?” তিনি বললেন, “তুমি বের হও (অর্থাৎ উমরাহর ইহরাম বাঁধো), কারণ এটিই যথেষ্ট হবে।” হাজ্জাজ তার হাদিসে আতা থেকে বর্ণনা করে বলেন: তিনি (আয়িশা) রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট বারবার অনুরোধ করতে থাকলেন। ফলে তিনি তাকে তানঈমের দিকে বের হতে আদেশ দিলেন, যাতে সে সেখান থেকে উমরাহর জন্য ইহরাম বাঁধে। আর তিনি তার সাথে তার ভাই আবদুর রহমান ইবনু আবী বকরকে পাঠালেন। অতঃপর তিনি সেখান থেকে উমরাহর ইহরাম বাঁধলেন, এরপর ফিরে এসে তাওয়াফ করলেন, সাঈ করলেন এবং চুল ছোট করলেন। আর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার পক্ষ থেকে কুরবানী করলেন। আবদ আল-মালিক আতা থেকে বর্ণনা করে বলেন: তার পক্ষ থেকে একটি গরু যবেহ করা হলো। আবদ আল-মালিক আতা থেকে, তিনি আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে পূর্ণ ঘটনা বর্ণনা করেন এবং বলেন: তিনি (আয়িশা) উমরাহর ইহরাম বেঁধেছিলেন এমন এক সময়ে, যখন তার জন্য হজের সমাপ্তির পর ফিরে আসা উচিত ছিল না। আর যার ব্যাপারে উল্লেখ করা হয়েছে যে, সেটিই তার জন্য যথেষ্ট, তা হলো হজ এবং উমরাহর পক্ষ থেকে হজ, কেবল তাওয়াফ নয়। সুতরাং আতা বর্ণিত এই হাদিসে ‘ক্বিরান’ হজকারীর তাওয়াফের হুকুম কেমন হবে—এই বিষয়ে কোনো প্রমাণ থাকা বাতিল হয়ে গেল। আর যারা এই মতে গেছেন যে, ক্বিরান হজকারী তার উমরাহ ও হজের জন্য একটিই তাওয়াফ করবে, তারা এর দ্বারাও প্রমাণ পেশ করেন।




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : إسناده صحيح.









শারহু মা’আনিল-আসার (3666)


بما حدثنا محمد بن خزيمة، قال: ثنا عثمان بن الهيثم، قال: ثنا ابن جريج، قال: أخبرني أبو الزبير أن جابر بن عبد الله يقول: دخل النبي صلى الله عليه وسلم على عائشة وهي تبكي، فقال: "ما لك تبكين؟ ". قالت أبكي؛ لأن الناس حلوا، ولم أحلل، وطافوا بالبيت ولم أطف، وهذا الحج قد حضر كما ترى، فقال: "هذا أمر كتبه الله على بنات آدم، فاغتسلي وأهلّي بالحج، ثم حجي، واقضي ما يقض الحاج، غير أن لا تطوفي بالبيت ولا تصلي"، قالت: ففعلت ذلك، فلما طهرت قال: "طوفي بالبيت وبين الصفا والمروة، ثم قد حللت من حجِك وعمرتِك". فقلت: يا رسول! إني أجد في نفسي من عمرتي، أني لم أكن طفت حتى حججت، فأمر عبد الرحمن، فأعمرها من التنعيم .




জাবির ইবনে আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে প্রবেশ করলেন, তখন তিনি কাঁদছিলেন। তিনি বললেন: "তুমি কাঁদছ কেন?" তিনি বললেন, আমি কাঁদছি কারণ, লোকেরা ইহরাম খুলে ফেলেছে, কিন্তু আমি খুলতে পারিনি। তারা বাইতুল্লাহ তাওয়াফ করেছে, কিন্তু আমি তাওয়াফ করিনি। আর আপনি যেমন দেখছেন, হজ সন্নিকটে। তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "এটি এমন একটি বিষয় যা আল্লাহ তাআলা আদম-কন্যাদের জন্য নির্ধারণ করে দিয়েছেন। তুমি গোসল করে হজের ইহরাম বাঁধো। এরপর হজ করো এবং হাজীরা যা যা করে তা করো, শুধু বাইতুল্লাহর তাওয়াফ করবে না এবং সালাত (নামাজ) আদায় করবে না।" তিনি (আয়েশা) বলেন: আমি তাই করলাম। যখন আমি পবিত্র হলাম, তখন তিনি বললেন: "বাইতুল্লাহ এবং সাফা ও মারওয়ার মাঝে তাওয়াফ করো। এরপর তুমি তোমার হজ ও উমরাহ্ থেকে হালাল (মুক্ত) হয়ে গেলে।" আমি বললাম: ইয়া রাসূলুল্লাহ! আমি আমার উমরাহর ব্যাপারে মনে কষ্ট পাচ্ছি, কারণ হজ করার আগে আমি তাওয়াফ করতে পারিনি। তখন তিনি আব্দুর রহমানকে নির্দেশ দিলেন এবং তিনি তাঁকে তানঈম থেকে উমরাহ করালেন।




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : إسناده صحيح.









শারহু মা’আনিল-আসার (3667)


حدثنا يونس، قال: أنا ابن وهب، قال أخبرني الليث، عن أبي الزبير، عن جابر، عن النبي صلى الله عليه وسلم … مثله . قالوا: فقد أمرها النبي صلى الله عليه وسلم وهي محرمة بالعمرة والحجة أن تطوف بالبيت وتسعى بين الصفا والمروة، ثم تحل. فدل ذلك على أن حكم القارن في طوافه لحجته وعمرته هو كذلك، وأنَّه طواف واحد ولا شيء عليه من الطواف غيره. فكان من الحجة على أهل هذه المقالة للآخرين أن حديث عائشة رضي الله عنها هذا قد روي على غير ما ذكرنا.




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত... অনুরূপ। তারা বললেন: নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে নির্দেশ দিয়েছিলেন, যখন সে ওমরাহ ও হজের ইহরাম অবস্থায় ছিল, যে সে যেন বায়তুল্লাহর তাওয়াফ করে এবং সাফা-মারওয়ার মাঝে সাঈ করে, অতঃপর হালাল (ইহরাম মুক্ত) হয়ে যায়। সুতরাং তা প্রমাণ করে যে, ক্বিরান হজকারী ব্যক্তির তার হজ ও ওমরাহর জন্য তাওয়াফের বিধানও অনুরূপ। এবং সেটি একটিই তাওয়াফ, এর অতিরিক্ত অন্য কোনো তাওয়াফ তার উপর নেই। এই মতবাদের অনুসারীদের পক্ষ থেকে অন্যদের (বিরোধীদের) বিরুদ্ধে যুক্তি হলো যে, আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর এই হাদীসটি আমরা যা উল্লেখ করেছি তার ভিন্নভাবেও বর্ণিত হয়েছে।




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : إسناده صحيح على شرط مسلم، وأبو الزبير روايته محمولة على السماع، وإن لم يصرح به فيما رواه عنه الليث بن سعد وهو عند المصنف في شرح مشكل الآثار (3841) بإسناده ومتنه.=









শারহু মা’আনিল-আসার (3668)


حدثنا أبو بكرة ومحمد بن خزيمة، قالا: ثنا عثمان بن الهيثم، قال: أخبرني ابن جريج، قال: أخبرني هشام بن عروة، عن عروة، عن عائشة رضي الله عنها أنها قالت: أمرنا النبي صلى الله عليه وسلم فقال: "من شاء أن يهل بالحج، ومن شاء فليهل بالعمرة". قالت: كنت ممن أهل بعمرة، فحضت، ودخل عليّ النبي صلى الله عليه وسلم، فأمرني أن أنقض رأسي، وأمتشط، وأدع عمرتي .




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম আমাদেরকে নির্দেশ দিলেন এবং বললেন: "যে চায় সে যেন হজ্জের ইহরাম বাঁধে, আর যে চায় সে যেন উমরার ইহরাম বাঁধে।" তিনি (আয়িশা) বলেন: আমি তাদের মধ্যে ছিলাম যারা উমরার ইহরাম বেঁধেছিলাম। অতঃপর আমি ঋতুমতী হলাম। অতঃপর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমার নিকট প্রবেশ করলেন, তিনি আমাকে নির্দেশ দিলেন যেন আমি আমার মাথার চুল খুলে দেই (বেণী ভেঙে দেই), চিরুনি করি এবং আমার উমরা ছেড়ে দেই (পরিত্যাগ করি)।




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : إسناده صحيح.









শারহু মা’আনিল-আসার (3669)


حدثنا ابن أبي داود، قال: ثنا يوسف بن عدي، قال: ثنا ابن أبي زائدة، عن إسرائيل، عن زيد بن الحسن ، عن عكرمة، عن عائشة … مثله .




আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত... অনুরূপ বর্ণনা করা হয়েছে।




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : هكذا في شرح المشكل، وفي شرح النخب 13/ 98 الحسن بن زيد بن الحسن بن علي. إسناده صحيح.









শারহু মা’আনিল-আসার (3670)


حدثنا ابن أبي داود، قال: ثنا يوسف بن عدي، قال: ثنا ابن أبي زائدة، عن نافع، عن ابن أبي مليكة، عن عائشة … مثله . ففي هذا الحديث أن رسول الله صلى الله عليه وسلم أمرها حين حاضت أن تدع عمرتها، وذلك قبل طوافها، فكيف يكون طوافها في حجتها التي أحرمت بها بعد ذلك يجزئ عنها من حجتها تلك، ومن عمرتها التي قد رفضتها؟ هذا محال. وقد روى الأسود عنها في ذلك أيضا ما




আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত... সুতরাং এই হাদীসে বর্ণিত হয়েছে যে, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যখন তিনি ঋতুমতী হলেন, তখন তাঁকে তাঁর উমরাহ ছেড়ে দিতে বললেন, আর তা ছিল তাঁর তাওয়াফ করার পূর্বের ঘটনা। তাহলে পরবর্তীতে তিনি যে হজ্বের ইহরাম বাঁধলেন, সেই হজ্বের তাওয়াফ কীভাবে তাঁর সেই হজ্ব এবং পরিত্যক্ত উমরার পক্ষ থেকে যথেষ্ট হতে পারে? এটা অসম্ভব। আর নিশ্চয়ই আসওয়াদও এ বিষয়ে তাঁর পক্ষ থেকে বর্ণনা করেছেন যা [এখানে উহ্য রয়েছে]।




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : إسناده صحيح.









শারহু মা’আনিল-আসার (3671)


حدثنا ربيع المؤذن، قال: ثنا أسد، قال: ثنا أبو عوانة، عن منصور، عن إبراهيم، عن الأسود، عن عائشة رضي الله عنها قالت: خرجنا ولا نرى إلا أنه الحج، فلما قدم مكة طاف ولم يحل، وكان معه الهدي، فطاف من معه من نسائه وأصحابه، فحل منهم من لم يكن معه الهدي، قال: وحاضت هي، قالت: فقضينا مناسكنا من حجنا، فلما كانت ليلة الحصبة ليلة النفر، قلت: يا رسول الله! أيرجع أصحابك بحج وعمرة، وأرجع أنا بحج؟ قال: "أما كنت طفت بالبيت ليالي قدمنا؟ قالت: قلت لا قال: "انطلقي مع أخيك إلى التنعيم، فأهلي بعمرة، ثم موعدك مكان كذا وكذا" . ففي هذا الحديث ما يدل أنها قد كانت خرجت من عمرتها التي صارت مكان حجتها بفسخ الحج بمضيها إلى عرفة قبل طوافها لها. لأن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال لها "أما كنت طفت ليالي قدمنا؟ " أي: لو كنت طفت كانت قد تمت لك عمرتك مع حجتك التي قد فرغت منها. فلما أخبرته أنها لم تكن طافت ليالي قدموا جعلها بما فعلت بعد ذلك لحجها من وقوفها بعرفة، أو توجهها إليها خارجة من عمرتها، فأمر لها أن تعتمر أخرى مكانها من التنعيم. فكيف يجوز لقائل أن يقول: إن طوافها بالبيت لحجة هي فيها يكون لتلك الحجة، ولعمرة أخرى قد خرجت منها قبل ذلك هذا عندنا محال. وقد روى القاسم بن محمد، عن عائشة رضي الله عنها في ذلك.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি (আয়িশা) বলেন: আমরা বের হলাম, আর আমরা মনে করেছিলাম যে এটা শুধু হজ। যখন তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মক্কায় এলেন, তিনি তাওয়াফ করলেন কিন্তু হালাল হননি, কারণ তাঁর সাথে কুরবানীর পশু (হাদি) ছিল। তাঁর সঙ্গী স্ত্রীগণ ও সাহাবীগণ তাওয়াফ করলেন। অতঃপর তাঁদের মধ্যে যার সাথে কুরবানীর পশু ছিল না, তিনি হালাল হয়ে গেলেন। তিনি (আয়িশা) বলেন: আর আমি ঋতুবতী হয়ে গেলাম।

তিনি বলেন: অতঃপর আমরা আমাদের হজের সমস্ত কাজ সম্পন্ন করলাম। যখন হাছাবার রাত এল, যা ছিল প্রত্যাবর্তন করার রাত, আমি বললাম: ইয়া রাসূলুল্লাহ! আপনার সঙ্গীরা হজ ও উমরাহ করে ফিরছেন, আর আমি শুধু হজ করে ফিরব?

তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "আমরা যখন এসেছিলাম, তখন কি তুমি বায়তুল্লাহর তাওয়াফ করোনি?" তিনি বলেন: আমি বললাম, না। তিনি বললেন: "তুমি তোমার ভাইয়ের সাথে তানঈমের দিকে যাও এবং উমরার ইহরাম বাঁধো। অতঃপর তোমার জন্য অমুক অমুক স্থানে সময় নির্ধারিত রইল।"

অতএব এই হাদীসে এমন প্রমাণ রয়েছে যে, তিনি তাঁর উমরাহ থেকে বের হয়ে গিয়েছিলেন—যা তাঁর হজের স্থানে পরিণত হয়েছিল—হজকে বাতিল করার মাধ্যমে; কারণ তিনি এর তাওয়াফ করার আগেই আরাফাতের দিকে চলে গিয়েছিলেন। কারণ রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁকে বলেছিলেন, "আমরা যখন এসেছিলাম, তখন কি তুমি তাওয়াফ করোনি?" অর্থাৎ, যদি তুমি তাওয়াফ করতে, তবে তোমার উমরাহটি তোমার হজ্বের সাথে সম্পন্ন হয়ে যেত, যা তুমি ইতিমধ্যেই শেষ করেছ। যখন তিনি (আয়িশা) রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে জানালেন যে তাঁরা আসার সময় তিনি তাওয়াফ করেননি, তখন তিনি (রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর পরবর্তী কার্যকলাপকে – আরাফাতে অবস্থান বা সেদিকে রওনা হওয়া – দ্বারা তাঁকে তাঁর উমরাহ থেকে বের হয়ে যাওয়া হিসেবে গণ্য করলেন। তাই তিনি তাঁকে তানঈম থেকে তার বদলে আরেকটি উমরাহ করার নির্দেশ দিলেন। সুতরাং, কোনো ব্যক্তি কীভাবে বলতে পারে যে, তাঁর (আয়িশার) বায়তুল্লাহর সেই তাওয়াফ, যা তিনি যে হজের মধ্যে ছিলেন তার জন্য করেছেন, তা একইসাথে সেই হজের জন্য এবং পূর্বে বাতিল হয়ে যাওয়া অন্য একটি উমরাহর জন্যও প্রযোজ্য হবে? আমাদের মতে, এটি অসম্ভব (বাতিল)। আর এই বিষয়ে কাসিম ইবনে মুহাম্মাদও আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণনা করেছেন।




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : Null









শারহু মা’আনিল-আসার (3672)


ما حدثنا فهد، قال: ثنا أبو نعيم، قال: ثنا عبد العزيز بن عبد الله بن أبي سلمة، عن عبد الرحمن بن القاسم، عن أبيه، عن عائشة قالت: خرجنا مع رسول الله صلى الله عليه وسلم ولا نذكر إلا الحج، فلما جئنا سرف طمثت، فدخل عليّ رسول الله صلى الله عليه وسلم وأنا أبكي، فقال: "ما يبكِيك؟ " فقلت: لوددت أني لم أحج العام، أو لم أخرج العام، قال: "لعلك نفستِ؟ ". قلت: نعم، قال: "فإن هذا أمر قد كتبه الله تعالى على بنات آدم، فافعلي ما يفعل، الحاج، غير أن لا تطوفي بالبيت. قالت: فلما جئنا مكة، قال رسول الله صلى الله عليه وسلم لأصحابه: اجعلوها عمرة"، فحل الناس إلا من كان معه هدي، فكان الهدي معه ومع أبي بكر، وعمر وعثمان ، وذي اليسارة، ثم أهلوا بالحج، فلما كان يوم النحر طهرت، فأرسلني رسول الله صلى الله عليه وسلم، فأفضت فأتى بلحم بقر، فقلت ما هذا؟ فقالوا: أهدى رسول الله صلى الله عليه وسلم عن نسائه البقر، حتى إذا كانت ليلة الحصبة قلت: يا رسول الله! يرجع الناس بحجة وعمرة، وأرجع بحجة؟، فأمر عبد الرحمن بن أبي بكر فأردفني خلفه، فإني لأذكر أني كنت أنعس، فتضرب وجهي مؤخرة الرحل، حتى جئنا التنعيم، فأهللت بعمرة، جزاء عمرة الناس التي اعتمروا بها . فهذا مثل الحديث الذي قبله، وقد رواه عروة، عن عائشة رضي الله عنها أبين من ذلك.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমরা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাথে বের হলাম এবং আমরা কেবল হজ্জেরই আলোচনা করছিলাম। যখন আমরা সারফ নামক স্থানে পৌঁছলাম, তখন আমি ঋতুবতী হলাম। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমার কাছে প্রবেশ করলেন যখন আমি কাঁদছিলাম। তিনি জিজ্ঞেস করলেন, "তুমি কাঁদছো কেন?" আমি বললাম: আমি কামনা করছিলাম যে আমি এই বছর হজ্জ না করতাম, অথবা (এই বছর) বের না হতাম। তিনি বললেন, "সম্ভবত তোমার মাসিক শুরু হয়েছে?" আমি বললাম: হ্যাঁ। তিনি বললেন: "এটি এমন একটি বিষয় যা আল্লাহ তাআলা আদম-কন্যাদের উপর লিখে দিয়েছেন। সুতরাং তুমি হাজীরা যা করে, তা সবই করো, কেবল বাইতুল্লাহর তাওয়াফ করো না।" তিনি বলেন: অতঃপর যখন আমরা মক্কায় পৌঁছলাম, তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর সাহাবীগণকে বললেন: "তোমরা এটাকে উমরাহ বানিয়ে নাও।" তখন যাদের সাথে কুরবানীর পশু ছিল না, তারা ছাড়া অন্যান্য সকলেই হালাল হয়ে গেলেন। (নবীজির সাথে,) আবূ বকর, উমার, উসমান ও যুল-ইয়াসারাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর সাথে কুরবানীর পশু ছিল। এরপর তাঁরা হজ্জের ইহরাম বাঁধলেন। যখন কুরবানীর দিন এলো, তখন আমি পবিত্র হলাম। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে পাঠালেন, ফলে আমি (তাওয়াফে ইফাদাহ) করলাম। এরপর গরুর গোশত আনা হলো। আমি জিজ্ঞাসা করলাম, "এটা কী?" তারা বললেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর স্ত্রীদের পক্ষ থেকে গরু কুরবানী করেছেন। অবশেষে যখন ’লায়লাতুল হাসবাহ’ (আবাসস্থল ত্যাগ করার রাত) এলো, তখন আমি বললাম: ইয়া রাসূলুল্লাহ! মানুষ হজ্জ ও উমরাহ নিয়ে ফিরে যাচ্ছে, আর আমি শুধু হজ্জ নিয়ে ফিরছি? তিনি তখন আব্দুর রহমান ইবনু আবূ বাকর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে নির্দেশ দিলেন। তিনি আমাকে তাঁর পেছনে বসিয়ে নিলেন। আমার মনে আছে, আমি তন্দ্রাচ্ছন্ন হয়ে যাচ্ছিলাম, আর হাওদার পেছনের কাঠের অংশ আমার মুখে আঘাত করছিল, যতক্ষণ না আমরা তান‘ঈমে পৌঁছালাম। সেখানে আমি উমরাহর ইহরাম বাঁধলাম, মানুষেরা যে উমরাহ করেছিল, তার প্রতিদানস্বরূপ। এই হাদীসটি তার পূর্বের হাদীসের মতোই। উরওয়াহ এটি আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে এর চেয়েও স্পষ্ট করে বর্ণনা করেছেন।




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : سقط من م ج د ن، والمثبت من س خد. إسناده صحيح.









শারহু মা’আনিল-আসার (3673)


حدثنا ربيع المؤذن، قال: ثنا أسد، قال: ثنا حماد سلمة، بن عن هشام بن عروة، عن أبيه، عن عائشة قالت: خرجنا موافين للهلال، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "من شاء أن يهل بالحج، فليهل، ومن شاء أن يهل بالعمرة فليهل، وأما أنا فإني أهل بالحج؛ لأن معي الهدي". قالت عائشة رضي الله عنها: فمنّا مَن أهلّ بالحج، ومنَا من أهل بالعمرة، وأما أنا فإني أهللت بالعمرة، فوافاني يوم عرفة وأنا حائض، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "دعي عنك عمرتك، وانقضي شعرك، وامتشطي، ثم لبّي بالحج، فلبيت بالحج". فلما كانت ليلة الحصبة وطهرت أمر رسول الله صلى الله عليه وسلم عبد الرحمن بن أبي بكر، فذهب بي إلى التنعيم، فلبيت بالعمرة . قضاء لعمرتها فبينت عائشة أن حجتها كانت مفصولة من عمرتها، وأنها قد كانت فيما بينهما نقضت شعرها وامتشطت. فكيف يجوز أن يكون طوافها لحجتها التي بينها وبين عمرتها ما ذكرنا من الإحلال يجزئ عنها لعمرتها ولحجتها؟ هذا محال، وهو أولى من حديث أبي الزبير، عن جابر رضي الله عنه؛ لأن ذلك إنما أخبر فيه جابر رضي الله عنه بقصة عائشة رضي الله عنها، وأنها لم تكن حلت بين عمرتها وحجتها، وأخبرت عائشة رضي الله عنها في هذا بأمر النبي صلى الله عليه وسلم إياها قبل دخولها في حجتها: أن تدع عمرتها، وأن تفعل ما يفعل الحلال مما ذكرت في حديثها. ودل ذلك أيضا على أن حديث عطاء عن عائشة رضي الله عنها، كما رواه عنه الحجاج، وعبد الملك، لا كما رواه عنه ابن أبي نجيح. واحتج أيضا الذين قالوا: يطوف القارن لحجته وعمرته طوافا واحدا.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমরা চাঁদ দেখে (হজ্জের) ইহরাম বাঁধার জন্য বের হলাম। তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন: "যে ব্যক্তি হজ্জের ইহরাম বাঁধতে চায়, সে যেন হজ্জের ইহরাম বাঁধে। আর যে ব্যক্তি উমরার ইহরাম বাঁধতে চায়, সে যেন উমরার ইহরাম বাঁধে। কিন্তু আমি হজ্জের ইহরাম বাঁধব, কারণ আমার সাথে কুরবানীর পশু (হাদি) রয়েছে।" আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন: আমাদের মধ্যে কেউ কেউ হজ্জের ইহরাম বাঁধল, আর কেউ কেউ উমরার ইহরাম বাঁধল। আমি নিজে উমরার ইহরাম বাঁধলাম। এরপর আরাফার দিন এলো যখন আমি ছিলাম ঋতুবতী। তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন: "তুমি তোমার উমরা ত্যাগ করো, তোমার মাথার চুল খুলে নাও, চিরুনি করো এবং এরপর হজ্জের তালবিয়া পাঠ করো।" আমি তখন হজ্জের তালবিয়া পাঠ করলাম। এরপর যখন ‘লাইলাতুল হাসাবাহ’ (মুহসাবের রাত) আসলো এবং আমি পবিত্র হলাম, তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আব্দুর রহমান ইবন আবী বকরকে আদেশ করলেন, আর তিনি আমাকে নিয়ে তান’ঈমের দিকে গেলেন। আমি তখন উমরার ইহরাম বাঁধলাম—এটি ছিল আমার উমরার কাযা হিসেবে। অতএব, আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) স্পষ্ট করে দিলেন যে তাঁর হজ্জ তাঁর উমরা থেকে পৃথক ছিল, এবং এর মাঝখানে তিনি তাঁর চুল খুলেছিলেন ও চিরুনি করেছিলেন। তাহলে কিভাবে এটা জায়েয হতে পারে যে তাঁর হজ্জের তাওয়াফ, যার মাঝে এবং তাঁর উমরার মাঝে আমরা যে হালাল হওয়ার (ইহরাম মুক্ত হওয়ার) কথা উল্লেখ করলাম, তা তাঁর উমরা ও হজ্জ উভয়ের জন্য যথেষ্ট হবে? এটা অসম্ভব। এটি (এই হাদিসটি) আবূ যুবাইর কর্তৃক জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত হাদিসের চেয়ে বেশি গ্রহণযোগ্য; কারণ সেই হাদিসে জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) কেবল আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর ঘটনা সম্পর্কে খবর দিয়েছেন এবং বলেছেন যে তিনি তাঁর উমরা ও হজ্জের মাঝে ইহরাম মুক্ত হননি। আর এই হাদিসে আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাঁর হজ্জে প্রবেশ করার আগে নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁকে উমরা ত্যাগ করতে এবং হালাল ব্যক্তিরা যা করে (যা তিনি তাঁর হাদিসে উল্লেখ করেছেন) তা করতে যে আদেশ দিয়েছিলেন, সে সম্পর্কে অবহিত করেছেন। এটি আরও প্রমাণ করে যে আতা কর্তৃক আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত হাদিসটি তেমনই, যেমনটি হাজ্জাজ এবং আবদুল মালিক তাঁর থেকে বর্ণনা করেছেন, ইবন আবি নুজাইহ তাঁর থেকে যেমন বর্ণনা করেছেন, তেমন নয়। যারা বলেন যে ক্বিরানকারী ব্যক্তি তাঁর হজ্জ ও উমরার জন্য একটিই তাওয়াফ করবে, তারাও এই হাদিস দ্বারা যুক্তি পেশ করে।




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : إسناده صحيح.









শারহু মা’আনিল-আসার (3674)


بما حدثنا أحمد بن داود، قال: ثنا يعقوب بن حميد قال: ثنا محمد بن خازم، قال: ثنا الحجاج بن أرطاة، عن أبي الزبير، عن جابر بن عبد الله، أن النبي صلى الله عليه وسلم قرن بين الحج والعمرة، فطاف لهما طوافا واحدا" . قيل لهم: ما أعجب هذا إنكم تحتجون بمثل هذا، وقد رويتم عن جعفر بن محمد، عن أبيه، عن جابر أن رسول الله صلى الله عليه وسلم أفرد الحج، وعن ابن جريج والأوزاعي، وعمرو بن دينار، وقيس بن سعد، عن عطاء، عن جابر رضي الله عنهما أنهم قدموا صبيحة رابعة مهلّين بالحج، فأمرهم رسول الله صلى الله عليه وسلم أن يجعلوها عمرة، وهو على الصفا في آخر طواف، فكيف تقبلون مثل ذلك، وتدعون مثل هذا؟ فإن احتجوا في ذلك




জাবির ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) হজ ও উমরার মধ্যে ক্বিরান (মিলিত) করেছিলেন এবং তিনি উভয়ের জন্য একটিই তাওয়াফ করেছিলেন। তাদেরকে বলা হলো: এটা কতই না আশ্চর্যের! তোমরা এ ধরনের (হাদীস) দ্বারা দলিল পেশ করছ, অথচ তোমরা জা’ফর ইবনে মুহাম্মাদ, তিনি তাঁর পিতা, তিনি জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণনা করেছ যে, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কেবল হজ্জের ইহরাম করেছিলেন (ইফ্রাদ)। এবং ইবনু জুরাইজ, আওযা’ঈ, আমর ইবনু দীনার এবং কাইস ইবনু সা’দ, তাঁরা আতা, তিনি জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণনা করেছেন যে, তাঁরা চতুর্থ দিনের ভোরে হজ্জের ইহরাম অবস্থায় আগমন করেছিলেন। অতঃপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁদেরকে নির্দেশ দিলেন যেন তারা সেটিকে উমরাতে পরিণত করে নেয়। তখন তিনি সাফা পর্বতের উপর তাঁর শেষ তাওয়াফে ছিলেন। তাহলে তোমরা কিভাবে এমন (হাদীস) গ্রহণ করো এবং এমন (অন্যান্য বর্ণনা) ত্যাগ করো? যদি তারা এক্ষেত্রে যুক্তি প্রদর্শন করে...




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : إسناده ضعيف لعنعنة حجاج بن أرطاة فإنه مدلس.









শারহু মা’আনিল-আসার (3675)


بما حدثنا يزيد بن سنان، قال: ثنا أبو عامر، قال: ثنا رباح بن أبي معروف، عن عطاء، عن جابر: أن أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم لم يزيدوا على طواف واحد . قيل لهم: إنما يعني جابر رضي الله عنه هذا الطواف بين الصفا والمروة، وقد بين ذلك عنه أبو الزبير.




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাহাবীগণ এক তাওয়াফের উপর বাড়াননি (একবারের বেশি তাওয়াফ করেননি)। তাঁদেরকে বলা হলো: জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এর দ্বারা কেবল সাফা ও মারওয়ার মধ্যবর্তী এই তাওয়াফকেই বুঝিয়েছেন। আর আবুয-যুবাইর তাঁর (জাবির) পক্ষ থেকে তা স্পষ্ট করে দিয়েছেন।




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : إسناده صحيح على شرط مسلم.









শারহু মা’আনিল-আসার (3676)


حدثنا ابن مرزوق، قال: ثنا أبو عاصم، عن ابن جريج، عن أبي الزبير، سمع جابرا يقول: لم يطف النبي صلى الله عليه وسلم ولا أصحابه بين الصفا والمروة إلا طوافا واحدا . وإنما أراد جابر بهذا أن يخبرهم أن السعي بين الصفا والمروة لا يُفعل في طواف يوم النحر، ولا في طواف الصدر كما يفعل في طواف القدوم. وليس في شيء من هذا دليل على أن ما على القارن من الطواف لعمرته وحجته طواف واحد، أو طوافان فإن قال قائل: فقد صح عن ابن عمر من قوله في القارن: أنه يطوف لعمرته وحجته طوافا واحدا، فإلى قول من تخالفون قوله في ذلك؟ قيل له: إلى قول علي، وعبد الله رضي الله عنهما.




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি (জাবির) বলতে শুনেছেন: নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এবং তাঁর সাহাবীগণ সাফা ও মারওয়ার মধ্যে এক তাওয়াফ (সাঈ) ছাড়া আর কোনো তাওয়াফ করেননি। জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এর মাধ্যমে কেবল তাদের এই খবর দিতে চেয়েছেন যে, সাফা ও মারওয়ার সাঈ কুরবানীর দিনের তাওয়াফ (তাওয়াফ আল-ইফাদাহ) এর সময় করা হয় না, এবং বিদায়ী তাওয়াফ (তাওয়াফ আল-সদর) এর সময়ও করা হয় না, যেমনটা আগমনী তাওয়াফ (তাওয়াফ আল-কুদুম) এর সময় করা হয়। এইগুলোর কোনোটির মধ্যেই এমন কোনো প্রমাণ নেই যে, ক্বিরান হাজ্জকারী ব্যক্তির উপর উমরা ও হাজ্জের জন্য একটি তাওয়াফ না দুটি তাওয়াফ ফরয। যদি কেউ প্রশ্ন করে: ক্বিরানকারী সম্পর্কে ইবনে উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে এই কথা সহীহ (প্রমাণিত) যে, তিনি উমরা ও হাজ্জের জন্য একটিই তাওয়াফ করবেন, তাহলে আপনারা এই ক্ষেত্রে কার মতের ভিত্তিতে তাঁর (ইবনে উমারের) মতের বিরোধিতা করেন? তাকে বলা হবে: আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এবং আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর মতের ভিত্তিতে।




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : إسناده صحيح على شرط مسلم.









শারহু মা’আনিল-আসার (3677)


حدثنا يونس، قال: ثنا سفيان عن منصور، عن إبراهيم، أو مالك بن الحارث، عن أبي نصر، قال: أهللت بالحج، فأدركت عليا فقلت له: إني أهللت بالحج أفأستطيع أن أضيف إليه عمرة؟ قال لا، لو كنت أهللت بالعمرة، ثم أردت أن تضم إليها الحج ضممته. قال: قلت كيف أصنع إذا أردت ذلك؟ قال: تصب عليك إداوة من ماء، ثم تحرم بهما جميعا، وتطوف لكل واحدة منهما طوافا .




আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আবু নসর বলেন: আমি হজের ইহরাম বাঁধলাম। এরপর আমি আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে পৌঁছলাম এবং তাঁকে বললাম: আমি হজের ইহরাম বেঁধেছি, আমি কি এর সাথে উমরাহ যোগ করতে পারি? তিনি বললেন: না। যদি তুমি উমরাহর ইহরাম বাঁধতে, তারপর যদি এর সাথে হজ যোগ করতে চাইতে, তাহলে তুমি তা যোগ করতে পারতে। আবু নসর বলেন: আমি বললাম: যদি আমি এটি করতে চাই, তাহলে কী করব? তিনি বললেন: তুমি তোমার উপর এক পাত্র পানি ঢালবে (অর্থাৎ গোসল করবে), এরপর উভয়ের জন্য একসাথে ইহরাম বাঁধবে এবং উভয়ের প্রত্যেকের জন্য (আলাদা আলাদা) তাওয়াফ করবে।




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : إسناده ضعيف، أبو نصر مجهول.









শারহু মা’আনিল-আসার (3678)


حدثنا أبو بكرة، قال: ثنا أبو داود، قال: ثنا شعبة، قال: أخبرني منصور، عن مالك بن الحارث، عن أبي نصر السلمي، عن علي رضي الله عنه .... . مثله . قال أبو داود، قال قيس: قال منصور: فذكرت ذلك لمجاهد، فقال: ما كنا نفتي الناس إلا بطواف واحد، فأما الآن فلا.




আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত... অনুরূপ একটি বর্ণনা রয়েছে। আবু দাউদ বলেন, কায়স বলেন, মানসূর বলেন: আমি বিষয়টি মুজাহিদের নিকট উল্লেখ করলে তিনি বললেন: আমরা লোকজনকে কেবল এক তাওয়াফ করার ফাতওয়া দিতাম। কিন্তু এখন আর (তা দেই) না।




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : إسناده ضعيف كسابقه.









শারহু মা’আনিল-আসার (3679)


حدثنا محمد بن الحجاج، قال: ثنا الخصيب، قال: ثنا يزيد بن عطاء، عن الأعمش، عن إبراهيم، ومالك بن الحارث، عن عبد الرحمن بن أذينة، قال: سألت عليا رضي الله عنه … فذكر مثله .




আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, (আব্দুর রহমান ইবনে উযাইনা বলেন:) আমি আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে জিজ্ঞাসা করেছিলাম... এরপর তিনি অনুরূপ (বিষয়) উল্লেখ করলেন।




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : إسناده حسن من أجل الخصيب بن ناصح، وعبد الرحمن بن أذينة وثقه ابن حجر في التقريب وقال الطحاوي: هو أبو نصر، ولم أو لغيره هذا الكلام.









শারহু মা’আনিল-আসার (3680)


حدثنا محمد بن خزيمة، قال ثنا حجاج، قال: ثنا أبو عوانة، عن سليمان … فذكر بإسناده مثله .




আমাদের নিকট মুহাম্মাদ ইবন খুযায়মা হাদীস বর্ণনা করেছেন। তিনি বলেন, আমাদের নিকট হাজ্জাজ হাদীস বর্ণনা করেছেন। তিনি বলেন, আমাদের নিকট আবূ ’আওয়ানাহ হাদীস বর্ণনা করেছেন, তিনি সুলাইমান থেকে বর্ণনা করেছেন... অতঃপর তিনি তাঁর সনদসহ অনুরূপ বর্ণনা করেছেন।




تحقيق الشيخ لطيف الرحمن البهرائجي القاسمي : إسناده صحيح.