হাদীস বিএন


বুলূগুল মারাম





বুলূগুল মারাম (621)


وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ: مِنْ حَدِيثِ عَائِشَةَ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. رواه الحاكم (1/ 389 - 390) من طريق عبد الله بن شداد بن الهاد قال: دخلنا على عائشة زوج النبي صلى الله عليه وسلم، فقالت: دخل علي رسول الله صلى الله عليه وسلم فرأى في سخابا من ورق، فقال: «ما هذا يا عائشة؟» فقلت: صنعتهن أتزين لك فيهن يا رسول الله. فقال: «أتؤدين زكاتهن؟» فقلت: لا. أو ما شاء الله من ذلك. قال: «هي حسبك من النار». وقال الحاكم: صحيح على شرط الشيخين. قلت: والحديث أيضا رواه أبو داود (1565) فكان عزوه لأبي داود أولى من عزوه للحاكم




৬২১. এবং ‘আয়িশা কর্তৃক বর্ণিত (অনুরূপ) হাদীসটিকে হাকিম সহীহ বলেছেন।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] আবূ দাউদ ১৫৬৫, হাকিম ১/৩৮৯-৩৯০









বুলূগুল মারাম (622)


وَعَنْ أُمِّ سَلَمَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا; أَنَّهَا كَانَتْ تَلْبَسُ أَوْضَاحًا مِنْ ذَهَبٍ فَقَالَتْ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! أَكَنْزٌ هُوَ? فَقَالَ: «إِذَا أَدَّيْتِ زَكَاتَهُ, فَلَيْسَ بِكَنْزٍ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالدَّارَقُطْنِيُّ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
حديث صحيح، وإسناده ضعيف. رواه أبو داود (1564)، والدارقطني (2/ 105 / 1)، والحاكم (1/ 390)، وقد أعل هذا الحديث ابن الجوزي في «التحقيق»، والبيهقي في «الكبرى» كل واحد منهما بعلة ليست هي العلة الأصلية في الحديث، وإنما علته الانقطاع، إلا أنه صحيح بما له من شواهد، وتفصيل كل ذلك بالأصل. «تنبيه»: اللفظ الذي ساقه الحافظ هنا هو للدارقطني، والحاكم، وأما لفظ أبي داود، فهو: «ما بلغ أن تؤدي زكاته، فزكي، فليس بكنز




৬২২. উম্মু সালামাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, তিনি স্বর্ণের বালা পরতেন। তারপর তিনি বললেন, mdash;হে আল্লাহর রসূল! এগুলো কি (কুরআনে উল্লেখিত) গচ্ছিত সম্পদ (কানয) ? নবী ( বললেন, ‘যদি এর যাকাত আদায় কর তবে তা কানয হবে না। -হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] আবূ দাউদ ১৫৬৪, দারাকুতনী ২/১০৫/১, হাকিম ১/৩৯০









বুলূগুল মারাম (623)


وَعَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدُبٍ - رضي الله عنه - قَالَ: كَانَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - يَأْمُرُنَا; أَنْ نُخْرِجَ الصَّدَقَةَ مِنَ الَّذِي نَعُدُّهُ لِلْبَيْعِ. رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَإِسْنَادُهُ لَيِّنٌ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
ضعيف. رواه أبو داود (1562) بسند فيه ثلاثة مجاهيل، ولذلك كان قول الحافظ في «التلخيص» (2/ 179): «في إسناده جهالة» أدق من قوله هنا. وقال الذهبي: هذا إسناد مظلم لا ينهض بحكم




৬২৩. সামুরাহ বিন জুনদূব (রাঃ) থেকে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আমাদের নির্দেশ দিতেন ঐসকল সম্পদ হতে সদাকাহ বের করতে যেগুলো আমরা বিক্রয়ের জন্য প্ৰস্তুত করতাম। -এর সানাদে সামান্য দুর্বলতা রয়েছে।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] আবূ দাউদ হাঃ ১৫৬২। ইমাম সনআনী সুবুলুস সালাম (২/২/১৪) গ্রন্থে বলেন, এর সানাদে সুলায়মান বিন সামরাহ নামক মাজহুল রাবী রয়েছে। ইমাম শাওকানী আস-সাইলুল জাররার (২/২৭) গ্রন্থে বলেন, এর সানাদে একাধিক মাজহুল রাবী রয়েছে। ইবনুল কাত্তান আল ওয়াহম ওয়াল ইহাম (৫/১৩৯) গ্রন্থে বলেন, এর সানাদের রাবী খুবাইব বিন সুলাইমান বিন সামরাহ ও তার পিতাকে তার সমসাময়িক কেউ চিনতেন না। ইমাম যাহাবী মিযানুল ইতিদাল (১/৪০৭) গ্রন্থে বলেন, হাদীসটি অস্পষ্ট। ইমাম যাহাবী তানকীহুত তাহকীক (১/৩৪৬) গ্রন্থে এর সানাদকে লীন উল্লেখ করেছেন।









বুলূগুল মারাম (624)


وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه: أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «وَفِي الرِّكَازِ: الْخُمُسُ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. رواه البخاري (1499)، ومسلم (1710)، وهو بتمامه: «العجماء جرحها جبار، والبئر جبار، والمعدن جبار، وفي الركاز الخمس». قال ابن الأثير في «النهاية» (2/ 258): «الركاز؛ عند أهل الحجاز: كنوز الجاهلية المدفونة في الأرض. وعند أهل العراق: المعادن، والقولان تحتملهما اللغة؛ لأن كلا منهما مركوز في الأرض. أي: ثابت. يقال: ركزه يركزه ركزا إذا دفنه، وأركز الرجل إذا وجد الركاز. والحديث إنما جاء في التفسير الأول، وهو الكنز الجاهلي، وإنما كان فيه الخمس لكثرة نفعه وسهولة أخذه. وقد جاء في «مسند أحمد» في بعض طرق هذا الحديث: «وفي الركائز الخمس» كأنها جمع ركيزة أو ركازة، والركيزة والركوزة: القطعة من جواهر الأرض المركوزة فيها. وجمع الركزة ركاز




৬২৪. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত। রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন-রিকাযের (ভূগর্ভস্থ পুঁতে রাখা সম্পদের) জন্য পাঁচ ভাগের এক ভাগ যাকাত দিতে হবে।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] বুখারী ২৩৫৬, ৬৯১২, ৬৯১৩, মুসলিম ১৭১০, তিরমিযী ৬৪২, ১৩৭৭, নাসায়ী ২৪৯৫, আবূ দাউদ ২০৮৫, ৪৫৯৩, ইবনু মাজাহ ২৬৭৩, ইবনু মাজাহ ২০৮০, ৭২১৩

বুখারী এবং মুসলিমের পূর্ণাঙ্গ হাদীসটি হচ্ছে, “العجماء جرحها جبار، والبئر جبار، والمعدن جبار، وفي الركاز الخمس” চতুষ্পদ জন্তুর আঘাত দায়মুক্ত, কৃপ (খননে শ্রমিকের মৃত্যুতে মালিক) দায়মুক্ত, খণি (খননে কেউ মারা গেলে মালিক) দায়মুক্ত। রিকাযে এক-পঞ্চমাংশ ওয়াজিব।









বুলূগুল মারাম (625)


وَعَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ, عَنْ أَبِيهِ, عَنْ جَدِّهِ; أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ - فِي كَنْزٍ وَجَدَهُ رَجُلٌ فِي خَرِبَةٍ: «إِنْ وَجَدْتَهُ فِي قَرْيَةٍ مَسْكُونَةٍ, فَعَرِّفْهُ, وَإِنْ وَجَدْتَهُ فِي قَرْيَةٍ غَيْرِ مَسْكُونَةٍ, فَفِيهِ وَفِي الرِّكَازِ: الْخُمُسُ». أَخْرَجَهُ ابْنُ مَاجَهْ بِإِسْنَادٍ حَسَنٍ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
حسن. رواه الشافعي (1/ 248 - 249/ 673)، ووهم الحافظ -رحمه الله- في عزوه الحديث لابن ماجه، وقلده غير واحد منهم صاحب «توضيح الأحكام» فقال: أخرجه ابن ماجه بإسناد حسن ولا أدري أين رآه في ابن ماجه! ولقد وجدت وهما آخر للحافظ في نفس الحديث في «التلخيص» وبيان ذلك بالأصل




৬২৫. ‘আমর বিন শুআইব তাঁর পিতার মাধ্যমে তাঁর দাদা হতে বর্ণনা করেন, রাসূলুল্লাহ কোন লোক কোন বিরান জায়গায় কোন সম্পদ পেলে সে সম্বন্ধে সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যদি তা কোন লোক-বসতিস্থানে পাও তবে তা প্রচার করে লোকেদের জানিয়ে দাও আর যদি কোন বিরান জায়গায় পাও তবে তাতে ও রিকাযে পাঁচ ভাগের এক ভাগ যাকাত দিবে। ইবনু মাজাহ হাসান সানাদে।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] হাসান। শাফিয়ী ১/২৪৮/৬৭৩, ইবনু হাজার হাদীসটিকে ইবনু মাজাহর সাথে সম্পৃক্ত করে ভুল করেছেন। বরং এ হাদীসটিকে হাফেজ ইবনু হাজার আসকালানীর আত-তালখীসুল হাবীর নামক গ্রন্থে পাওয়া যায়।









বুলূগুল মারাম (626)


وَعَنْ بِلَالِ بْنِ الْحَارِثِ - رضي الله عنه: أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - أَخَذَ مِنَ الْمَعَادِنِ الْقَبَلِيَّةِ الصَّدَقَةَ. رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
ضعيف. رواه أبو داود (3061) مرسلا وبلفظ: أن رسول الله صلى الله عليه وسلم أقطع بلال بن الحارث المزني. معادن القبلية، وهي من ناحية الفرع، فتلك المعادن لا يؤخذ منها إلا الزكاة إلى اليوم




৬২৬. বিলাল বিন হারিস থেকে বর্ণিত। রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম কাবালিয়াহ অঞ্চলের খনিজ সম্পদের সদাকাহ গ্ৰহণ করেছেন।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] আবূ দাউদ ৩০৬১, মুওয়াত্তা মালেক ৫৮২

আলবানী ইরওয়াউল গালীল (৮৩০) গ্রন্থে দুর্বল বলেছেন। তিনি উক্ত গ্রন্থে (৩/৩১) বলেন। এটি রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম পর্যন্ত পৌঁছার দিক থেকে সঠিক নয়। আলবানী সহীহ ইবনু খুযাইমাহ (২৩২৩) গ্রন্থেও একে দুর্বল বলেছেন।









বুলূগুল মারাম (627)


عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ: فَرَضَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - زَكَاةَ الْفِطْرِ, صَاعًا مِنْ تَمْرٍ, أَوْ صَاعًا مِنْ شَعِيرٍ: عَلَى الْعَبْدِ وَالْحُرِّ, وَالذَّكَرِ, وَالْأُنْثَى, وَالصَّغِيرِ, وَالْكَبِيرِ, مِنَ الْمُسْلِمِينَ, وَأَمَرَ بِهَا أَنْ تُؤَدَّى قَبْلَ خُرُوجِ النَّاسِ إِلَى الصَّلَاةِ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. رواه البخاري (1503)، ومسلم (984) «تنبيه»: اللفظ المذكور إنما هو للبخاري، وأما مسلم فقد رواه إلى قوله: «من المسلمين» مع اختلاف يسير، وأما قوله: «وأمر بها أن تؤدى ..... » فقد رواها برقم (986) وأيضا فصلها البخاري في بعض المواطن من صحيحه




৬২৭. ইবনু ‘উমার (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, প্রত্যেক গোলাম, আযাদ, পুরুষ, নারী, প্রাপ্ত বয়স্ক, অপ্রাপ্ত বয়স্ক মুসলিমের উপর আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম সদাকাতুল ফিতর হিসেবে খেজুর হোক অথবা যব হোক এক সা পরিমাণ আদায় করা ফরয করেছেন এবং লোকজনের ঈদের সালাতের বের হবার পূর্বেই তা আদায় করার নির্দেশ দিয়েছেন।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] বুখারী ১৫০৩, ১৫০৪, ১৫০৭, ১৫০৯, মুসলিম ৯৮৪, তিরমিযী ৬৭৫, ৬৭৬, নাসায়ী ২৫০২, ২৫০৩, আবূ দাউদ ১৬১১, ১৬১৩, ১৬১৪, ইবনু মাজাহ ১৮২৬, আহমাদ ৪৪৭২, ৫১৫২, মুওয়াত্তা মালেক ৬২৭, দারিামী ১৬৬১, ২৫২০









বুলূগুল মারাম (628)


وَلِابْنِ عَدِيٍّ [مِنْ وَجْهٍ آخَرَ] , وَالدَّارَقُطْنِيِّ بِإِسْنَادٍ ضَعِيفٍ: «اغْنُوهُمْ عَنِ الطَّوَافِ فِي هَذَا الْيَوْمِ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
ضعيف. رواه الدارقطني في «السنن» (2/ 152 - 153/ 67)، والبيهقي (4/ 175)، والحاكم في «معرفة علوم الحديث» ص (131)، وابن عدي في «الكامل» (7/ 2519)، وحميد بن زنجويه في «الأموال» (2397)، وابن حزم في «المحلى» (6/ 121) -ضمن أخبار فاسدة لا تصح- كلهم من طريق أبي معشر، عن نافع، عن ابن عمر قال: أمرنا رسول الله صلى الله عليه وسلم أن نخرج صدقة الفطر عن كل صغير وكبير، حر أو عبد صاعا من تمر، أو صاعا من زبيب، أو صاعا من شعير، أو صاعا من قمح، وكان يأمرنا أن نخرجها قبل الصلاة، وكان رسول صلى الله عليه وسلم يقسمها قبل أن ينصرف من المصلى، ويقول: فذكره. والسياق للحاكم
قلت: وهذا سند ضعيف، أبو معشر هو: نجيح السندي المدني ضعفه غير واحد، وأما ابن حزم فقد بالغ؛ إذ قال: «أبو معشر هذا نجيح مطرح يحدث بالموضوعات، عن نافع وغيره»
وله شاهد وطريق آخر. رواه ابن سعد في «الطبقات» قال: أخبرنا محمد بن عمر الواقدي، حدثنا عبد الله بن عبد الرحمن الجمحي، عن الزهيري، عن عروة، عن عائشة، رضي الله عنها، قال: وأخبرنا عبيد الله بن عمر، عن نافع، عن ابن عمر، قال: وأخبرنا عبد العزيز بن محمد، عن ربيح بن عبد الرحمن بن أبي سعيد الخدري، عن أبيه، عن جده، قالوا: فرض صوم رمضان بعدما حولت القبلة إلى الكعبة بشهر في شعبان على رأس ثمانية عشر شهرا من مهاجر رسول صلى الله عليه وسلم، وأمر في هذه السنة بزكاة الفطر، وذلك قبل أن يفرض الزكاة في الأموال، وأن تخرج عن الصغير والكبير، والذكر والأنثى، والحر والعبد: صاعا من تمر، أو صاعا من شعير، أو صاعا من زبيب، أو مدين من بر، وأمر بإخروجها قبل الغدو إلى الصلاة، وقال: «اغنوهم -يعني المساكين- عن طواف هذا اليوم»
قلت: والواقدي كذاب متهم، فلا يفرح بما أتى به، ويبقى الحديث على ما هو عليه من الضعف
«تنبيه»: قال المعلق على «البلوغ» ص (132)، معللا تضعيف الحافظ بقوله: «لأنه من رواية محمد بن عمر الواقدي» ولم يتنبه إلى أن الواقدي لا يوجد في رواية ابن عدي والدارقطني، وعزو الحافظ لهما، وإنما هو في رواية ابن سعد في «الطبقات» فقط، ولكنها آفة التقليد إذ هو مسبوق بهذا التعليل من الصنعاني في «السبل» (2/ 279)




৬২৮. ইবনু ‘আদী ও দারাকুৎনী দুর্বল সানাদে বর্ণনা করেছেন: তাদের নিকট সদাকাতুল ফিতর পৌছে দিয়ে তাদের এ দিনে রুযীর খোজে বের হওয়ার প্রয়োজন মিটিয়ে দাও।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] ইমাম সানআনী সুবুলুস সালাম (২/২১৮) গ্রন্থে বলেন, এর সানাদে মুহাম্মাদ বিন উমার আল ওয়াকিদী রয়েছে। সে দুর্বল। ইমাম নববী আল মাজমু (৬/১২৬) গ্রন্থে এর সানাদকে দুর্বল বলেছেন, আলবানী ইরওয়াউল গালীল (৮৪৪) গ্রন্থে দুর্বল বলেছেন, উসাইমীন শারহুল মুমতে (৬/১৭১) গ্রন্থেও একে দুর্বল বলেছেন।









বুলূগুল মারাম (629)


وَعَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ - رضي الله عنه - قَالَ: كُنَّا نُعْطِيهَا فِي زَمَانِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - صَاعًا مِنْ طَعَامٍ, أَوْ صَاعًا مِنْ تَمْرٍ, أَوْ صَاعًا مِنْ شَعِيرٍ, أَوْ صَاعًا مِنْ زَبِيبٍ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ
وَفِي رِوَايَةٍ: أَوْ صَاعًا مِنْ أَقِطٍ
قَالَ أَبُو سَعِيدٍ: أَمَّا أَنَا فَلَا أَزَالُ أُخْرِجُهُ كَمَا كُنْتُ أُخْرِجُهُ فِي زَمَنِ رَسُولِ اللَّهِ
وَلِأَبِي دَاوُدَ: لَا أُخْرِجُ أَبَدًا إِلَّا صَاعًا

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. رواه البخاري (1508)، ومسلم (985)
سنن أبي داود (1618)




৬২৯. আবূ সাঈদ খুদরী (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, আমরা নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর যুগে এক সা খাদ্যদ্রব্য বা এক সা খেজুর বা এক সা যব বা এক সা কিসমিস দিয়ে সদাকাতুল ফিতর আদায় করতাম। উক্ত কেতাবদ্বয়ে আরও আছে : “অথবা এক সা পনির দিতাম।” আবূ সাঈদ বলেন, : আজও তাই বের করবো (দিব) নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর যামানায় যেমনভাবে পূর্ণ এক সা (বের) করতাম। আবূ দাউদে আবূ সাঈদের কথাটি এভাবে আছেndash; “এক সা ব্যতীত আমি বের করব। (দেবই) না।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] বুখারী ১৫০৫, ১৫০৬, ১৫০৮, ১৫১০, মুসলিম ৯৮৫, তিরমিযী ৬৭৩, নাসায়ী ২৫১১, ২৫১২, ২৫১৩, আবূ দাউদ ১৬১৬, ১৬১৮, ইবনু মাজাহ ১৮২৯, আহমাদ ১০৭৯৮, ১১৩০১, মুওয়াত্তা মালোক ৬২৮, দারেমী ১৬৬৪









বুলূগুল মারাম (630)


وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ: فَرَضَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - زَكَاةَ الْفِطْرِ; طُهْرَةً لِلصَّائِمِ مِنَ اللَّغْوِ وَالرَّفَثِ, وَطُعْمَةً لِلْمَسَاكِينِ, فَمَنْ أَدَّاهَا قَبْلَ الصَّلَاةِ فَهِيَ زَكَاةٌ مَقْبُولَةٌ, وَمَنْ أَدَّاهَا بَعْدَ الصَّلَاةِ فَهِيَ صَدَقَةٌ مِنَ الصَّدَقَاتِ. رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَابْنُ مَاجَهْ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
حسن. رواه أبو داود (1609)، وابن ماجه (1827)، والحاكم (1/ 409) وقال الحاكم: صحيح على شرط البخاري. قلت: وله في ذلك أوهام، كما وهم أيضا في بعض رجال هذا الحديث المعلق على التهذيب




৬৩০. ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত। তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম রোযাদারের অনৰ্থক কথাবার্তা ও অশালীন আচরণের কাফফারাস্বরূপ এবং গরীব-মিসকীনদের আহারের সংস্থান করার জন্য সদাকাতুল ফিতর (ফিতরা) নির্ধারণ করেছেন। যে ব্যক্তি ঈদের সালাতের পূর্বে তা পরিশোধ করে (আল্লাহর নিকট)ndash; তা গ্ৰহণীয় দান। আর যে ব্যক্তি ঈদের সালাতের পর তা পরিশোধ করে, তাও দানসমূহের অন্তর্ভুক্ত একটি দান। আবূ দাউদ, ইবনু মাজাহ আর হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] আবূ দাউদ ১৬০৯, ইবনু মাজাহ ১৮২৭









বুলূগুল মারাম (631)


عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «سَبْعَةٌ يُظِلُّهُمُ اللَّهُ فِي ظِلِّهِ يَوْمَ لَا ظِلَّ إِلَّا ظِلُّهُ ... ». فَذَكَرَ الْحَدِيثَ وَفِيهِ: «وَرَجُلٌ تَصَدَّقَ بِصَدَقَةٍ فَأَخْفَاهَا حَتَّى لَا تَعْلَمَ شِمَالُهُ مَا تُنْفِقُ يَمِينُهُ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. رواه البخاري (660)، ومسلم (1031)، وهو بتمامه: «سبعة يظلهم الله في ظله يوم لا ظل إلا ظله: الإمام العادل، وشاب نشأ في عبادة ربه، ورجل قلبه معلق في المساجد، ورجلان تحابا في الله اجتمعا عليه وتفرقا عليه، ورجل طلبته امرأة ذات منصب وجمال، فقال: إني أخاف الله، ورجل تصدق أخفى حتى لا تعلم شماله ما تنفق يمينه، ورجل ذكر الله خاليا ففاضت عيناه». والسياق للبخاري. وانقلبت جملة «حتى لا تعلم .. » عند مسلم، فوقعت هكذا: «حتى لا تعلم يمينه ما تنفق شماله




৬৩১. আবূ হুরাইরা (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, সাত ধরনের লোককে আল্লাহ তাআলা তার ছায়ায় এমন দিনে আশ্রয় দিবেন। যেদিন তার ছায়া ব্যতীত কোন ছায়াই থাকবে না। অতঃপর রাবী পূর্ণ হাদীসটি বর্ণনা করেন। তার মধ্যে আছে (ঐ ব্যক্তি) : “সে ব্যক্তি যে এমন গোপনে দান করে যে, তার ডান হাত যা খরচ করে বাম হাত তা জানে না”।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] বুখারী ১৪২৩, ৬৪৭৯, ৬৮০৬, মুসলিম ১০৩১, তিরমিযী ২২৯১, নাসায়ী ৫২৮০, আহমাদ ৯৩৭৩, মুওয়াত্তা মালেক ১৭৭৭

পূর্ণাঙ্গ হাদীসটি হচ্ছে,

سبعة يظلهم الله في ظله يوم لا ظل إلا ظله: الإمام العادل، وشاب نشأ في عبادة ربه، ورجل قلبه معلق في المساجد، ورجلان تحابا في الله اجتمعا عليه وتفرقا عليه، ورجل طلبته امرأة ذات منصب وجمال، فقال: إني أخاف الله، ورجل تصدق أخفى حتى لا تعلم شماله ما تنفق يمينه، ورجل ذكر الله خاليا ففاضت عيناه». والسياق للبخاري. وانقلبت جملة «حتى لا تعلم .. » عند مسلم، فوقعت هكذا: «حتى لا تعلم يمينه ما تنفق شماله

যে দিন আল্লাহর (রহমতের) ছায়া ছাড়া আর কোন ছায়া থাকবে না, সেদিন সাত ব্যক্তিকে আল্লাহ তা’আলা তাঁর নিজের (আরশের) ছায়ায় আশ্রয় দিবেন। ১. ন্যায়পরায়ণ শাসক, ২. সে যুবক যার জীবন গড়ে উঠেছে তার প্রতিপালকের ইবাদতের মধ্যে, ৩. সে ব্যক্তি যার অন্ত র মসজিদের সাথে সম্পৃক্ত রয়েছে, ৪. সে দু’ ব্যক্তি যারা পরস্পরকে ভালবাসে আল্লাহর ওয়াস্তে, একত্র হয় আল্লাহর জন্য এবং পৃথকও হয় আল্লাহর জন্য, ৫. সে ব্যক্তি যাকে কোনো উচ্চ বংশীয় রূপসী নারী আহবান জানায়, কিন্তু সে এ বলে প্রত্যাখ্যান করে যে, “আমি আল্লাহকে ভয় করি, ৬. সে ব্যক্তি যে এমন গোপনে দান করে যে, তার ডান হাত যা খরচ করে বাম হাত তা জানে না, ৭. সে ব্যক্তি যে নির্জনে আল্লাহর যিকর করে, ফলে তার দু চোখ দিয়ে অশ্রুধারা বইতে থাকে।









বুলূগুল মারাম (632)


وَعَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ - رضي الله عنه - قَالَ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - يَقُولُ: «كُلُّ امْرِئٍ فِي ظِلِّ صَدَقَتِهِ حَتَّى يُفْصَلَ بَيْنَ النَّاسِ». رَوَاهُ ابْنُ حِبَّانَ وَالْحَاكِمُ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. رواه ابن حبان (5/ 131 - 132)، والحاكم (1/ 416)، وعند ابن حبان: «يقضي» بدل «يفصل» وزادا معا: «أو قال: حتى يحكم بين الناس قال يزيد: فكان أبو الخير لا يخطئه يوم لا يتصدق فيه بشيء ولو كعكة، ولو بصلة». وقال الحاكم: صحيح على شرط مسلم




৬৩২. ‘উকবাহ বিন ‘আমির (রাঃ) থেকে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, আমি রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে বলতে শুনেছি: প্রতিটি মানুষ তার সদাকাহর ছায়ায় আশ্রয় পাবে যতক্ষণ না কিয়ামতে মানুষের হিসাবের নিস্পত্তি হয়। ইবনু হিব্বান ও হাকিম।












বুলূগুল মারাম (633)


وَعَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ, عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «أَيُّمَا مُسْلِمٍ كَسَا [مُسْلِمًا] ثَوْبًا عَلَى عُرْيٍ كَسَاهُ اللَّهُ مِنْ خُضْرِ الْجَنَّةِ, وَأَيُّمَا مُسْلِمٍ أَطْعَمَ مُسْلِمًا عَلَى جُوعٍ أَطْعَمَهُ اللَّهُ مِنْ ثِمَارِ الْجَنَّةِ, وَأَيُّمَا مُسْلِمٍ سَقَى مُسْلِمًا عَلَى ظَمَإٍ سَقَاهُ اللَّهُ مِنْ الرَّحِيقِ الْمَخْتُومِ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ وَفِي إِسْنَادِهِ لِينٌ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
ضعيف. رواه أبو داود (1682)، وللحديث طريق آخر ولكنه أضعف من طريق أبي داود




৬৩৩. আবূ সাঈদ খুদরী (রাঃ) থেকে বর্ণিত। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, কোন মুসলিম তার কোন বিবস্ত্র মুসলিম ভাইকে কাপড় পরিধান করালে আল্লাহ তাআলা তাকে জান্নাতের সবুজ পোষাক পরিধান করবেন। কোন মুসলিম তার ক্ষুধার্ত মুসলিম ভাই-কে খাবার খাওয়ালে আল্লাহ তাআলা তাকেও জান্নাতের ফল খাওয়াবেন। কোন মুসলিম তার কোন তৃষ্ণার্ত মুসলিম ভাইকে পানি পান করালে আল্লাহ তাআলা তাকেও মোহরাঙ্কিত স্বর্গীয় সুধা পান করবেন। আবূ দাউদ দুর্বল সানাদে।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] আবূ দাউদ ১৬৮২, তিরমিযী ২৪৪৯, আহমাদ ১০৭১৭

আলবানী তাখরাজু মিশকাতিল মাস্বাবীহ (১৮৫৫) গ্রন্থে বলেন, দুর্বল। আলবানী সিলসিলাতুয যঈফা (৪৫৫৪) গ্রন্থে বলেন, খুব দুর্বল।









বুলূগুল মারাম (634)


وَعَنْ حَكِيمِ بْنِ حِزَامٍ - رضي الله عنه - عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «الْيَدُ الْعُلْيَا خَيْرٌ مِنَ الْيَدِ السُّفْلَى, وَابْدَأْ بِمَنْ تَعُولُ, وَخَيْرُ الصَّدَقَةِ عَنْ ظَهْرِ غِنًى, وَمَنْ يَسْتَعْفِفْ يُعِفَّهُ اللَّهُ, وَمَنْ يَسْتَغْنِ يُغْنِهِ اللَّهُ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَاللَّفْظُ لِلْبُخَارِيِّ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. رواه البخاري (1427)، ومسلم (1034)




৬৩৪. হাকীম ইবনু হিযাম (রাঃ)-এর সূত্রে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, উপরের হাত (দাতার হাত) নীচের হাত (গ্রহীতার হাত) অপেক্ষা উত্তম। প্রথমে তাদেরকে দিবে যাদের ভরণ-পোষণের দায়িত্ব তুমি বহন কর। প্রয়োজনের অতিরিক্ত সম্পদ হতে সদাকাহ করা উত্তম। যে ব্যক্তি (পাপ ও ভিক্ষা করা হতে) পবিত্র থাকতে চায়, আল্লাহ তাকে পবিত্র রাখেন এবং যে পরমুখাপেক্ষিতা হতে বেঁচে থাকতে চায়, আল্লাহ তাকে স্বাবলম্বী করে দেন। শব্দ বিন্যাস বুখারীর।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] বুখারী ১৪২৭, ২৭৫১, ২১৪৩, মুসলিম ১০২৪, ১০২৫, তিরমিযী ২৪৬৩, নাসায়ী ২৫৩১, ২৫৩৪, ২৫৪৩, আবূ দাউদ ১৬৭৬, আহমাদ ৭১১৫, ৭৩০১, দারিমী ১৬৫০, ১৬৫৩।









বুলূগুল মারাম (635)


وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ: أَيُّ الصَّدَقَةِ أَفْضَلُ? قَالَ: «جُهْدُ الْمُقِلِّ, وَابْدَأْ بِمَنْ تَعُولُ». أَخْرَجَهُ أَحْمَدُ, وَأَبُو دَاوُدَ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ خُزَيْمَةَ, وَابْنُ حِبَّانَ, وَالْحَاكِمُ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. رواه أحمد (2/ 358)، وأبو داود (1677)، وابن خزيمة (2444)، وابن حبان (3335)، والحاكم (1/ 414)




৬৩৫. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত। তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে বলা হল, হে আল্লাহর রসূল! সর্বোত্তম সদাক্কাহ কোনটি? তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বললেনmdash;স্বল্প সঙ্গতিসম্পন্ন ব্যক্তির কষ্টার্জিত বস্তু হতে সদাক্কাহ (দান); আর (দানের সময়) অধীনস্থদের থেকে আরম্ভ (অগ্রাধিকার) করা। mdash;আর ইবনু খুযাইমাহ, ইবনু হিব্বান ও হাকিম। এটিকে সহীহ বলেছেন।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] আবূ দাউদ ১৬৭৬, ১৬৭৭, বুখারী ১৪২৬, ১৪২৭, ৫৩৫৫, তিরমিযী ২৪৬৩, নাসায়ী ২৫৬৪, ২৫88, আহমাদ ৭১১৫, ৭৩০১, দারেমী ১৬৫১।









বুলূগুল মারাম (636)


وَعَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «تَصَدَّقُوا»، فَقَالَ رَجُلٌ: يَا رَسُولَ اللَّهِ, عِنْدِي دِينَارٌ قَالَ: «تَصَدَّقْ بِهِ عَلَى نَفْسِكَ»، قَالَ: عِنْدِي آخَرُ, قَالَ: «تَصَدَّقْ بِهِ عَلَى وَلَدِكَ» قَالَ: عِنْدِي آخَرُ, قَالَ: «تَصَدَّقْ بِهِ عَلَى خَادِمِكَ» قَالَ: عِنْدِي آخَرُ, قَالَ: «أَنْتَ أَبْصَرُ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ وَالنَّسَائِيُّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ وَالْحَاكِمُ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
جاء في جميع المصادر زيادة وهي: قال: عندي آخر. قال: تصدق به على زوجتك

حسن. رواه أبو داود (1691)، والنسائي (5/ 62)، وابن حبان (3326)، والحاكم (1/ 415)




৬৩৬. আবূ হুরাইরা (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, তোমরা সদাকাহ প্রদান কর। জনৈক ব্যক্তি বললো: হে আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম! আমার নিকট একটি দিনার (স্বর্ণ মুদ্রা) আছে। তিনি বললেনmdash;তুমি ওটা নিজেকেই দান কর (রেখে দাও)। লোকটা বললোঃ আমার নিকট আরও একটি আছে। তিনি উত্তরে বললেন, এটা তোমার ছেলেদের (সন্তানের) জন্য খরচ কর।[1] লোকটা বললো আমার নিকট আরো একটি আছে। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন: ওটা তোমার স্ত্রীর জন্য খরচ কর। লোকটা বললো: আমার কাছে আরো একটি আছে। নবী বললেনmdash; ওটা তোমার খাদিমের জন্য খরচ কর। লোকটা বললো: আমার কাছে আরো একটি মুদ্রা আছে। নবী বললেনmdash;তুমিই ভাল জান (এটা কোথায় খরচ করবে)। আবূ দাউদ, নাসায়ী, আর ইবনু হিব্বান ও হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[2]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] প্রায় সকল হাদীস গ্রন্থে আরও রয়েছে, তিনি (সাহাবী) বলেন, আমার কাছে আরও আছে। তিনি বললেন, তুমি তা তোমার স্ত্রীকে দান করে দাও।

[2] আবূ দাউদ ১৬৯১, নাসায়ী ২৫২৫, আহমাদ ৭২৭১, ৯৭২৬









বুলূগুল মারাম (637)


وَعَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ: قَالَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم: «إِذَا أَنْفَقَتِ الْمَرْأَةُ مِنْ طَعَامِ بَيْتِهَا, غَيْرَ مُفْسِدَةٍ, كَانَ لَهَا أَجْرُهَا بِمَا أَنْفَقَتْ وَلِزَوْجِهَا أَجْرُهُ بِمَا اكْتَسَبَ، وَلِلْخَازِنِ مِثْلُ ذَلِكَ, وَلَا يَنْقُصُ بَعْضُهُمْ أَجْرَ بَعْضٍ شَيْئًا». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
في الصحيحين: كسب
صحيح. رواه البخاري (1425)، ومسلم (1024)




৬৩৭. ‘আয়িশা (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনঃ কোন স্ত্রী যদি তার ঘর হতে বিপর্যয় সৃষ্টির উদ্দেশ্য ছাড়া খাদ্যদ্রব্য সদাকাহ করে তবে এ জন্যে সে সওয়াব লাভ করবে। আর উপার্জন করার কারণে স্বামীও সওয়াব পাবে[1] এবং খাজাঞ্চীও অনুরূপ সওয়াব পাবে। তাদের একজনের কারণে অন্য জনের সওয়াবে কোন কমতি হবে না।[2]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] বুখারী এবং মুসলিমে, اكْتَسَبَ শব্দটির স্থানে كسب শব্দটি ব্যবহার করা হয়েছে।

[2] বুখারী ১৪২৫, ১৪২৭, ১৪৪০, ১৪৪১, মুসলিম ১০২৪, তিরমিযী ৬৭২, আবূ দাউদ ১৬৮৫, ইবনু মাজাহ ২২৯৪, আবূ দাউদ ১৬৯৪, ২৫৮২৮।









বুলূগুল মারাম (638)


وَعَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ - رضي الله عنه - قَالَ: جَاءَتْ زَيْنَبُ امْرَأَةُ ابْنِ مَسْعُودٍ, فَقَالَتْ: يَا رَسُولَ اللَّهِ, إِنَّكَ أَمَرْتَ الْيَوْمَ بِالصَّدَقَةِ, وَكَانَ عِنْدِي حُلِيٌّ لِي, فَأَرَدْتُ أَنْ أَتَصَدَّقَ بِهِ, فَزَعَمَ ابْنُ مَسْعُودٍ أَنَّهُ وَوَلَدُهُ أَحَقُّ مَنْ تَصَدَّقْتُ بِهِ عَلَيْهِمْ, فَقَالَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم: «صَدَقَ ابْنُ مَسْعُودٍ, زَوْجُكِ وَوَلَدُكِ أَحَقُّ مَنْ تَصَدَّقْتِ بِهِ عَلَيْهِمْ». رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. رواه البخاري (1462)، وأوله: خرج رسول الله صلى الله عليه وسلم في أضحى أو فطر إلى المصلى، ثم انصرف فوعظ الناس وأمرهم بالصدقة، فقال: «أيها الناس تصدقوا» فمر على النساء، فقال: «يا معشر النساء تصدقن، فإني رأيتكن أكثر أهل النار «فقلن: وبم ذلك يا رسول الله؟ قال: «تكثرن اللعن وتكفرن العشير. ما رأيت من ناقصات عقل ودين أذهب للب الرجل الحازم من إحداكن يا معشر النساء». ثم انصرف، فلما صار إلى منزله جاءت زينب امرأة ابن مسعود تستأذن عليه. فقيل: يا رسول الله! هذه زينب. فقال: «أي: الزيانب» فقيل: امرأة ابن مسعود. قال: «نعم. ائذنوا لها» فأذن لها. قالت: يا بني الله! إنك أمرت» الحديث




৬৩৮. আবূ সাঈদ খুদরী থেকে বর্ণিত। তিনি বলেন, ইবনু মাসউদের স্ত্রী যায়নাব (রাঃ) (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) এর নিকট) এসে বললেন, : “হে আল্লাহর রাসূল! আজ আপনি সদাকাহ করার নির্দেশ দিয়েছেন। আমার অলংকার আছে। আমি তা সদাকাহ করার ইচ্ছা করেছি। ইবনু মাসউদ (রাঃ) মনে করেন, আমার এ সদাকায় তার এবং তাঁর সন্তানদেরই হক বেশি। তখন আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, ইবনু মাসউদ (রাঃ) ঠিক বলেছে। তোমার স্বামী ও সন্তানই তোমার এ সদাকাহর অধিক হকদার।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] বুখারী ২০৪, ৯০৫৬, ১৯৫১, মুসলিম ৮০, ৮৮৯, নাসায়ী ১৫৭৬, ১৫৭৯, ইবনু মাজাহ। ১৬৮৮, আবূ দাউদ

হাদীসের প্রথমাংশ হচ্ছে,

خرج رسول الله صلى الله عليه وسلم في أضحى أو فطر إلى المصلى، ثم انصرف فوعظ الناس وأمرهم بالصدقة، فقال: «أيها الناس تصدقوا» فمر على النساء، فقال: «يا معشر النساء تصدقن، فإني رأيتكن أكثر أهل النار «فقلن: وبم ذلك يا رسول الله؟ قال: تكثرن اللعن وتكفرن العشير. ما رأيت من ناقصات عقل ودين أذهب للب الرجل الحازم من إحداكن يا معشر النساء». ثم انصرف، فلما صار إلى منزله جاءت زينب امرأة ابن مسعود تستأذن عليه. فقيل: يا رسول الله! هذه زينب. فقال: «أي: الزيانب» فقيل: امرأة ابن مسعود. قال: «نعم. ائذنوا لها» فأذن لها. قالت: يا بني الله! إنك أمرت ... الحديث

এক ঈদুল আযহা বা ঈদুল ফিতরের দিনে আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ঈদগাহে গেলেন এবং সালাত শেষ করলেন। পরে লোকেদের উপদেশ দিলেন এবং তাদের সদাকাহ দেয়ার নির্দেশ দিলেন আর বললেন, লোক সকল! তোমরা সদাকাহ দিবে। অতঃপর মহিলাগণের নিকট গিয়ে বললেন, মহিলাগণ! তোমরা সাদাকাহ দাও। আমাকে জাহান্নামে তোমাদেরকে অধিক সংখ্যক দেখানো হয়েছে। তারা বললেন, হে আল্লাহর রসূল! এর কারণ কী? তিনি বললেন: তোমরা বেশি অভিশাপ দিয়ে থাক এবং স্বামীর অকৃতজ্ঞ হয়ে থাক। হে মহিলাগণ! জ্ঞান ও দীনে অপরিপূর্ণ হওয়া সত্ত্বেও দৃঢ়চেতা পুরুষের বুদ্ধি হরণকারিণী তোমাদের মত কাউকে দেখিনি। যখন তিনি ফিরে এসে ঘরে পৌঁছলেন, তখন ইবনু মাস’উদ-এর স্ত্রী যায়নাব (রাঃ) তাঁর কাছে প্রবেশের অনুমতি চাইলেন। বলা হলো, হে আল্লাহর রসূল! যায়নাব এসেছেন। তিনি বললেন, কোন যায়নাব? বলা হলো, ইবনু মাসউদের স্ত্রী। তিনি বললেন, হাঁ, তাকে আসতে দাও। তাকে অনুমতি দেয়া হলো। তিনি বললেন, হে আল্লাহর নাবী! আজ আপনি সদাকাহ করার নির্দেশ দিয়েছেন।

শেষের অংশটুকু উপরে বর্ণিত হয়েছে।









বুলূগুল মারাম (639)


وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ: قَالَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم: «مَا يَزَالُ الرَّجُلُ يَسْأَلُ النَّاسَ حَتَّى يَأْتِيَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ لَيْسَ فِي وَجْهِهِ مُزْعَةُ لَحْمٍ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. رواه البخاري (1474)، ومسلم (1040) (104) والمزعة: القطعة




৬৩৯. ‘আবদুল্লাহ ইবনু ‘উমার (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনঃ যে ব্যক্তি সব সময় মানুষের কাছে চেয়ে থাকে, সে কিয়ামতের দিন এমনভাবে উপস্থিত হবে যে, তার চেহারায় কোন গোশত থাকবে না।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] مزعة শব্দের অর্থ قطعة অর্থাৎ টুকরা। বুখারী ৪৭১৮, মুসলিম ১০৪০, নাসায়ী ২৫-৮৫, ৪৬২৪, ৫৫৮৪









বুলূগুল মারাম (640)


وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «مَنْ سَأَلَ النَّاسَ أَمْوَالَهُمْ تَكَثُّرًا, فَإِنَّمَا يَسْأَلُ جَمْرًا, فَلْيَسْتَقِلَّ أَوْ لِيَسْتَكْثِرْ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. رواه مسلم (1041)




৬৪০. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত। তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনmdash; যে ব্যক্তি তার সম্পদ বৃদ্ধির উদ্দেশ্যে লোকেদের নিকট যাচ্ঞা করে, প্রকৃতপক্ষে সে জ্বলন্ত আগুনই যাচ্ঞা করে। কাজেই সে চাইলে জুলন্ত আগুন কমও চাইতে পারে বেশিও চাইতে পারে।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] মুসলিম ১০৪১, ইবনু মাজাহ ১৮২৮, আহমাদ ৭১২৩