হাদীস বিএন


হিলইয়াতুল আওলিয়া





হিলইয়াতুল আওলিয়া (221)


• حدثنا سليمان بن أحمد ثنا إسحاق بن إبراهيم أخبرنا عبد الرزاق أخبرنا معمر عن ابن طاوس عن عكرمة بن خالد. قال قال علي بن أبي طالب. وثنا عبد الله بن محمد قال ثنا عبد الله بن محمد بن سوار ثنا عون بن سلام ثنا عيسى بن مسلم الطهوي عن ثابت بن أبي صفية عن أبي الزغل. قال قال علي بن أبي طالب: احفظوا عني
خمسا فلو ركبتم الإبل في طلبهن لأنضيتموهن قبل أن تدركوهن؛ لا يرجو عبد إلا ربه، ولا يخاف إلا ذنبه، ولا يستحي جاهل أن يسأل عما لا يعلم، ولا يستحي عالم إذا سئل عما لا يعلم أن يقول الله أعلم. والصبر من الإيمان بمنزلة الرأس من الجسد، ولا إيمان لمن لا صبر له.




আলী ইবনু আবী তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বললেন: তোমরা আমার কাছ থেকে পাঁচটি জিনিস মুখস্থ রাখো। যদি তোমরা এগুলোর সন্ধানে উটের পিঠে আরোহণ করো, তবে এগুলো পাওয়ার আগেই উটগুলো পরিশ্রান্ত হয়ে যাবে। কোনো বান্দা যেন তার প্রতিপালক ব্যতীত অন্য কারও কাছে আশা না করে, এবং সে যেন তার নিজের পাপ ব্যতীত অন্য কিছুকে ভয় না করে। আর যে ব্যক্তি অজ্ঞ, সে যেন যা জানে না, তা জিজ্ঞেস করতে লজ্জাবোধ না করে। আর কোনো জ্ঞানী ব্যক্তি যখন তাকে এমন কিছু জিজ্ঞাসা করা হয় যা সে জানে না, তখন 'আল্লাহই সর্বাধিক অবগত' (আল্লাহু আ'লাম) বলতে যেন লজ্জাবোধ না করে। আর ধৈর্য হলো ঈমানের এমন, যেমন দেহের মধ্যে মাথা; যার ধৈর্য নেই তার ঈমান নেই।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (222)


• حدثنا أبو بكر الطلحي ثنا محمد بن عبد الله الحضرمي ثنا عون بن سلام ثنا أبو مريم عن زبيد عن مهاجرين عمير. قال قال علي بن أبي طالب: إن أخوف ما أخاف اتباع الهوى وطول الأمل. فأما اتباع الهوى فيصد عن الحق، وأما طول الأمل فينسي الآخرة. ألا وإن الدنيا قد ترحلت مدبرة، ألا وإن الآخرة قد ترحلت مقبلة، ولكل واحد منهما بنون. فكونوا من أبناء الآخرة ولا تكونوا من أبناء الدنيا، فإن اليوم عمل ولا حساب، وغدا حساب ولا عمل. رواه الثوري وجماعة عن زبيد مثله عن علي مرسلا. ولم يذكروا مهاجر ابن عمير.

قال أبو نعيم: أفادني هذا الحديث الدارقطني عن شيخي، لم أكتبه إلا من هذا الوجه




আলী ইবনু আবী তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি তোমাদের জন্য যে দুটি বিষয়কে সবচেয়ে বেশি ভয় করি, তা হলো প্রবৃত্তির অনুসরণ এবং দীর্ঘ আশা। প্রবৃত্তির অনুসরণ তো সত্য থেকে বিরত রাখে, আর দীর্ঘ আশা আখিরাতকে ভুলিয়ে দেয়। সাবধান! নিশ্চয়ই দুনিয়া পিঠ দেখিয়ে চলে যাচ্ছে (পশ্চাদপসরণ করছে), আর আখিরাত সম্মুখপানে এগিয়ে আসছে। আর উভয়েরই সন্তান-সন্ততি রয়েছে। সুতরাং তোমরা আখিরাতের সন্তান হও, দুনিয়ার সন্তান হয়ো না। কারণ, আজ হলো আমলের দিন, কোনো হিসাব নেই; আর আগামীকাল হলো হিসাবের দিন, কোনো আমল নেই।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (223)


• حدثنا محمد بن جعفر وعلي بن أحمد. قالا: ثنا إسحاق ابن إبراهيم ثنا محمد بن يزيد أبو هشام ثنا المحاربي عن مالك بن مغول عن رجل من جعفي عن السدي عن أبي أراكة. قال: صلي علي الغداة ثم لبث في مجلسه حتى ارتفعت الشمس قيد رمح كأن عليه كآبة، ثم قال لقد رأيت أثرا من أصحاب رسول الله صلى الله عليه وسلم فما أرى أحدا يشبههم، والله إن كانوا ليصبحون شعثا غبرا صفرا بين أعينهم مثل ركب المعزى، قد باتوا يتلون كتاب الله يراوحون بين أقدامهم وجباههم، إذا ذكر الله مادوا كما تميد الشجرة في يوم ريح، فانهملت أعينهم حتى تبل والله ثيابهم، والله لكأن القوم باتوا غافلين.




আবূ আরাকাহ থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, তিনি ফজরের সালাত আদায় করলেন এবং সূর্য এক বল্লম পরিমাণ উঁচু না হওয়া পর্যন্ত আপন মজলিসে বসে থাকলেন। যেন তার ওপর বিষণ্নতা ছেয়ে ছিল। এরপর তিনি বললেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাহাবীগণের এমন এক অবস্থা দেখেছি, যার সঙ্গে সাদৃশ্যপূর্ণ কাউকে আমি এখন দেখতে পাই না। আল্লাহর কসম, তারা এমন অবস্থায় সকাল শুরু করতেন যে, তাদের চুল হতো এলোমেলো, দেহ হতো ধূলাযুক্ত, চেহারা হতো ফ্যাকাশে। তাদের চোখসমূহের মাঝে (কপালে) ছাগলের হাঁটুর মতো (দাগ) ছিল। তারা রাত অতিবাহিত করতেন আল্লাহর কিতাব তিলাওয়াত করে, কখনও তাদের পা ও কখনও কপাল পরিবর্তন করতেন (অর্থাৎ দীর্ঘ সময় দাঁড়িয়ে ও সিজদায় ইবাদত করতেন)। যখন আল্লাহকে স্মরণ করা হতো, তখন তারা এমনভাবে দুলতে থাকতেন, যেমন ঝোড়ো হাওয়ার দিনে গাছ নুয়ে যায়। আল্লাহর কসম! তাদের চোখ থেকে অশ্রু ঝরত, যা তাদের কাপড় ভিজিয়ে দিত। আল্লাহর কসম! আমার মনে হয়, (আজকের) লোকেরা যেন রাত কাটিয়েছে গাফিলতিতে (উদাসীন্যে)।'









হিলইয়াতুল আওলিয়া (224)


• حدثنا عبد الله بن محمد ثنا أبو يحيى الرازي ثنا هناد ثنا ابن فضيل عن ليث عن الحسن عن على. قال: طوبى لكل عبد نؤمة، عرف الناس ولم يعرفه الناس، عرفه الله برضوان. أولئك مصابيح الهدى يكشف الله عنهم كل فتنة مظلمة، سيدخلهم الله في رحمة منه، ليس أولئك بالمذاييع
البذر(1) ولا الجفاة المرائين.




আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, "সেই প্রতিটি নুম্মাহ (নিভৃতচারী) বান্দার জন্য রয়েছে সুসংবাদ (তূবা), যে মানুষকে চেনে কিন্তু মানুষ তাকে চেনে না। আল্লাহ তাকে তাঁর সন্তুষ্টির মাধ্যমে চেনেন। এরাই হলো হিদায়াতের প্রদীপ। আল্লাহ তাদের থেকে প্রতিটি অন্ধকার ফিতনা দূর করে দেন। আল্লাহ শীঘ্রই তাদের তাঁর রহমতের মধ্যে প্রবেশ করাবেন। তারা এমন ব্যক্তি নয় যারা রটনাকারী, গোপন কথা ফাঁসকারী (আল-বুযর) অথবা কঠোর হৃদয়ের লোক দেখানো ব্যক্তি।"









হিলইয়াতুল আওলিয়া (225)


• حدثنا أبي ثنا أبو جعفر محمد بن إبراهيم بن الحكم ثنا يعقوب بن إبراهيم الدورقي ثنا شجاع بن الوليد عن زياد بن خيثمة عن أبي إسحاق عن عاصم بن ضمرة عن علي. قال: ألا إن الفقيه كل الفقيه الذى لا يقنط الناس من رحمة الله، ولا يؤمنهم من عذاب الله، ولا يرخص لهم في معاصى الله، ولا يدع القرآن رغبة عنه إلى غيره ولا خير في عبادة لا علم فيها، ولا خير في علم لا فهم فيه، ولا خير في قراءة لا تدبر فيها.




আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: জেনে রাখো, নিঃসন্দেহে পূর্ণ ফকীহ (দ্বীন বিশেষজ্ঞ) সে-ই— যে মানুষকে আল্লাহর রহমত থেকে নিরাশ করে না, তাদের আল্লাহর শাস্তি থেকে নির্ভয়ও করে না, তাদের আল্লাহর নাফরমানিতে (পাপকাজে) ছাড়পত্র দেয় না এবং অন্য কিছুর জন্য আগ্রহের কারণে কুরআনকে ত্যাগ করে না। আর সেই ইবাদতে কোনো কল্যাণ নেই, যাতে জ্ঞান (ইলম) নেই। সেই জ্ঞানে কোনো কল্যাণ নেই, যাতে গভীর উপলব্ধি (ফাহম) নেই। আর সেই তিলাওয়াতে কোনো কল্যাণ নেই, যাতে গভীরভাবে চিন্তা-ভাবনা (তাদাব্বুর) নেই।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (226)


• حدثنا محمد بن علي بن حش(2) ثنا عمى أحمد بن حش ثنا المخزومي ثنا محمد بن كثير عن عمرو بن قيس عن عمرو بن مرة عن علي. قال: كونوا ينابيع العلم، مصابيح الليل، خلق الثياب، جدد القلوب، تعرفوا به في السماء، وتذكروا به في الأرض.




আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত: তোমরা জ্ঞানের ঝর্ণাধারা হও, রাত্রির প্রদীপ হও, পুরনো কাপড়ের (ব্যবহারকারী) এবং নতুন হৃদয়ের অধিকারী হও। এর মাধ্যমে তোমরা আসমানে পরিচিত হবে এবং পৃথিবীতে তোমরা স্মরণীয় হবে।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (227)


• حدثنا أبو محمد بن حبان ثنا عبد الله بن محمد بن زكريا ثنا سلمة بن شبيب ثنا سهل بن عاصم ثنا عبدة ثنا إبراهيم بن مجاشع عن عمرو بن عبد الله عن أبي محمد اليماني عن بكر بن خليفة قال قال علي بن أبي طالب: أيها الناس إنكم والله لو حننتم حنين الوله العجال، ودعوتم دعاء الحمام، وجأرتم جؤار متبتلي الرهبان، ثم خرجتم إلى الله من الأموال والأولاد التماس القربة إليه في ارتفاع درجة عنده، أو غفران سيئة أحصاها كتبته، لكان قليلا فيما أرجو لكم من جزيل ثوابه، وأتخوف عليكم من أليم عقابه، فبالله بالله بالله لو سالت عيونكم رهبة منه، ورغبة إليه، ثم عمرتم في الدنيا - ما الدنيا باقية ولو لم تبقوا شيئا من جهدكم لأنعمه العظام عليكم، بهدايته إياكم للإسلام؛ ما كنتم تستحقون به - الدهر ما الدهر قائم بأعمالكم - جنته، ولكن برحمته ترحمون، وإلى جنته يصير منكم المقسطون، جعلنا الله وإياكم من التائبين العابدين.




আলী ইবনে আবী তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত,

হে লোকসকল! আল্লাহর কসম, তোমরা যদি দ্রুতগামী ব্যাকুলদের মতো কান্নাকাটি করো, কবুতরের মতো ডাকো (আহাজারি করো), এবং সংসারত্যাগী পাদ্রীদের মতো আর্তনাদ করো, অতঃপর যদি তোমরা আল্লাহর নৈকট্য লাভের সন্ধানে—যেন তাঁর কাছে তোমাদের মর্যাদা বৃদ্ধি পায় অথবা তোমাদের আমল লেখকগণ যে গুনাহগুলো গণনা করেছেন তা ক্ষমা করা হয়—তোমাদের ধন-সম্পদ ও সন্তানদের থেকে বেরিয়ে আসো (আল্লাহর পথে ব্যয় করো বা ত্যাগ করো), তবুও তা সামান্যই হবে তাঁর বিপুল প্রতিদানের তুলনায় যা আমি তোমাদের জন্য আশা করি, এবং তাঁর কঠোর শাস্তির তুলনায় যা আমি তোমাদের জন্য ভয় করি।

সুতরাং আল্লাহর কসম, আল্লাহর কসম, আল্লাহর কসম! যদি তোমাদের চোখ তাঁর ভয়ে এবং তাঁর প্রতি আগ্রহে অশ্রু ঝরায়, অতঃপর তোমরা দুনিয়াতে যতদিন দুনিয়া অবশিষ্ট থাকে ততদিন বেঁচে থাকো—যদি তোমরা তোমাদের সব প্রচেষ্টা তাঁর মহান নিয়ামতগুলোর জন্য ব্যয় না করো (যা তিনি তোমাদের ওপর করেছেন), বিশেষত তোমাদেরকে ইসলামের পথে পরিচালিত করার মাধ্যমে; (তবে তোমাদের কর্মের দ্বারা) তোমরা কখনও তাঁর জান্নাতের যোগ্য হতে পারবে না—যতদিন যুগ টিকে থাকে ততদিন পর্যন্ত, বরং তাঁর রহমতের মাধ্যমেই তোমাদের প্রতি দয়া করা হবে। আর তোমাদের মধ্যে ন্যায়পরায়ণরাই তাঁর জান্নাতে প্রবেশ করবে। আল্লাহ আমাদেরকে এবং তোমাদেরকে তওবাকারী ও ইবাদতকারীদের অন্তর্ভুক্ত করুন।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (228)


• حدثنا إبراهيم بن محمد بن الحسن قال كتب إلي أحمد بن إبراهيم بن هشام الدمشقي ثنا أبو صفوان القاسم بن يزيد بن عوانة عن ابن حرث عن ابن عجلان عن جعفر بن محمد عن أبيه عن جده: أن عليا شيع جنازة
فلما وضعت فى لحدها عج أهلها وبكوا. فقال: ما تبكون؟ أما والله لو عاينوا ما عاين ميتهم، لأذهلتهم معاينتهم عن ميتهم. وإن له فيهم لعودة ثم عودة حتى لا يبقي منهم أحدا. ثم قام فقال: أوصيكم عباد الله بتقوى الله الذي ضرب لكم الأمثال، ووقت لكم الآجال، وجعل لكم أسماعا تعى ما عناها، وأبصارا لتجلوا عن غشاها، وأفئدة تفهم ما دهاها، في تركيب صورها وما أعمرها فإن الله لم يخلقكم عبثا، ولم يضرب عنكم الذكر صفحا، بل أكرمكم بالنعم السوابغ، وأرفدكم بأوفر الروافد، وأحاط بكم الإحصاء، وأرصد لكم الجزاء في السراء والضراء. فاتقوا الله عباد الله وجدوا في الطلب، وبادروا بالعمل مقطع النهمات، وهادم اللذات. فإن الدنيا لا يدوم نعيمها، ولا تؤمن فجائعها. غرور حائل، وشبح فائل، وسناد مائل يمضى مستطرفا ويردى مستردفا، بانعاب شهواتها، وختل تراضعها. اتعظوا عباد الله بالعبر، واعتبروا بالآيات والأثر، وازدجروا بالنذر، وانتفعوا بالمواعظ. فكأن قد علقتكم مخالب المنية، وضمكم بيت التراب، ودهمتكم مقطعات الأمور بنفخة الصور، وبعثرة القبور، وسياقة المحشر، وموقف الحساب، بإحاطة قدرة الجبار. كل نفس معها سائق يسوقها لمحشرها، وشاهد يشهد عليها بعملها. {(وأشرقت الأرض بنور ربها، ووضع الكتاب وجيء بالنبيين والشهداء وقضي بينهم بالحق وهم لا يظلمون)} فارتجت لذلك اليوم البلاد، ونادى المناد، وكان يوم التلاق، وكشف عن ساق، وكسفت الشمس، وحشرت الوحوش، مكان مواطن الحشر، وبدت الأسرار، وهلكت الأشرار، وارتجت الأفئدة. فنزلت بأهل النار من الله سطوة مجيحة، وعقوبة منيحة، وبرزت الجحيم لها كلب ولجب، وقصيف رعد، وتغيظ ووعيد تأجج جحيمها، وغلا حميمها. وتوقد سمومها. فلا ينفس خالدها، ولا تنقطع حسراتها، ولا يقصم كبولها. معهم ملائكة يبشرونهم بنزل من حميم، وتصلية جحيم، عن الله محجوبون، ولأوليائه مفارقون، وإلى النار منطلقون. عباد الله اتقوا الله تقية من كنع فخنع، ووجل فرحل، وحذر
فأبصر فازدجر. فاحتث طلبا، ونجا هربا، وقدم للمعاد، واستظهر بالزاد، وكفى بالله منتقما وبصيرا، وكفى بالكتاب خصما وحجيجا، وكفى بالجنة ثوابا وكفى بالنار وبالا وعقابا، وأستغفر الله لي ولكم.




আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি একটি জানাযায় শরিক হয়েছিলেন। যখন মৃতদেহ কবরে রাখা হলো, তখন মৃতের পরিবার চিৎকার করে কাঁদতে শুরু করলো। তিনি বললেন: তোমরা কাঁদছো কেন? আল্লাহর শপথ, এই মৃত ব্যক্তি যা দেখেছে, যদি তোমরা তা দেখতে পেতে, তাহলে সেই দৃশ্য তোমাদেরকে তোমাদের এই মৃত ব্যক্তির চিন্তা থেকে বিমুখ করে দিতো। আর নিশ্চয়ই তার (মৃত্যুর) তাদের মাঝে প্রত্যাবর্তন আছে, তারপর আবার প্রত্যাবর্তন, যতক্ষণ না তাদের কাউকেই বাকি রাখা হয়।

অতঃপর তিনি দাঁড়ালেন এবং বললেন: হে আল্লাহর বান্দাগণ! আমি তোমাদেরকে আল্লাহ্‌ভীতির (তাকওয়ার) উপদেশ দিচ্ছি, যিনি তোমাদের জন্য দৃষ্টান্ত স্থাপন করেছেন, তোমাদের জন্য সময়সীমা নির্ধারণ করেছেন এবং তোমাদের জন্য কান দিয়েছেন যাতে তা বোঝে যা তাকে শোনানো হয়েছে, চোখ দিয়েছেন যাতে তা তার আবরণ দূর করতে পারে, এবং অন্তর দিয়েছেন যাতে তা বুঝতে পারে কী তাদের ওপর চেপে বসেছে—তাদের দেহের গঠনে এবং তিনি তাদেরকে যে জীবন দান করেছেন, তাতে।

নিশ্চয় আল্লাহ তোমাদেরকে অনর্থক সৃষ্টি করেননি এবং তোমাদের ওপর থেকে স্মরণ (উপদেশ) সরিয়ে নেননি। বরং তিনি তোমাদেরকে পর্যাপ্ত অনুগ্রহের মাধ্যমে সম্মানিত করেছেন, উত্তম সাহায্য দিয়ে তোমাদেরকে শক্তিশালী করেছেন, সংখ্যায় তোমাদেরকে পরিবেষ্টন করেছেন এবং সুখে-দুঃখে তোমাদের জন্য প্রতিদান প্রস্তুত রেখেছেন।

সুতরাং হে আল্লাহর বান্দাগণ! তোমরা আল্লাহকে ভয় করো এবং তাঁর অনুগ্রহ কামাই করার জন্য সচেষ্ট হও। আকাঙ্ক্ষা ছেদকারী এবং ভোগ-বিলাস ধ্বংসকারী জিনিসের (মৃত্যুর) আগে কাজ করতে দ্রুত অগ্রসর হও। কেননা দুনিয়ার সুখ স্থায়ী নয়, আর এর বিপদাপদ থেকে নিরাপদ থাকা যায় না। এটি হলো পরিবর্তনশীল প্রতারণা, বিলীয়মান ছায়া এবং হেলানশীল অবলম্বন (খুঁটি)। এটি নতুনত্ব প্রদর্শন করতে করতে এগিয়ে যায় এবং পিছিয়ে আসতে আসতে ধ্বংস করে দেয়—এর কামনা-বাসনার দ্বারা বিভ্রান্ত করে এবং মিথ্যা সান্ত্বনার মাধ্যমে প্রতারিত করে।

হে আল্লাহর বান্দাগণ! উপদেশসমূহ দ্বারা শিক্ষা নাও এবং নিদর্শন ও ঐতিহাসিক ঘটনা দ্বারা বিবেচনা করো। সতর্ককারী বিষয়সমূহ দ্বারা বিরত থাকো এবং উপদেশ দ্বারা উপকৃত হও।

যেন (মনে করো), মৃত্যুর নখর তোমাদেরকে আঁকড়ে ধরেছে, মাটির ঘর তোমাদেরকে আলিঙ্গন করেছে, আর শিঙ্গায় ফুঁক দেওয়ার মাধ্যমে কঠিন বিষয়াবলী তোমাদেরকে গ্রাস করেছে; কবরসমূহ ছিন্নভিন্ন করা হয়েছে, হাশরের ময়দানের দিকে হাঁকিয়ে নেওয়া হচ্ছে এবং হিসাব-নিকাশের অবস্থান শুরু হয়েছে—সর্বশক্তিমান জাব্বার আল্লাহর ক্ষমতার বেষ্টনীতে।

প্রত্যেক আত্মার সাথে একজন চালক থাকবে যে তাকে হাশরের দিকে হাঁকিয়ে নিয়ে যাবে এবং একজন সাক্ষী থাকবে যে তার কৃতকর্মের সাক্ষী দেবে। (আল্লাহ তাআলা বলেন): "আর জমিন তার রবের নূরে উদ্ভাসিত হবে, আমলনামা রাখা হবে, নবী ও শহীদগণকে আনা হবে, আর তাদের মাঝে ন্যায়সঙ্গতভাবে ফায়সালা করা হবে এবং তাদের প্রতি কোনো জুলুম করা হবে না।" (সূরা যুমার ৩৯:৬৯)

সেই দিনের জন্য জনপদসমূহ কেঁপে উঠবে, আহ্বানকারী ডাক দেবে, আর তা হবে সাক্ষাতের দিন (ইয়াওমুত তালাক)। কঠিন অবস্থা প্রকাশিত হবে, সূর্য আলোহীন হবে, বন্য পশুদের একত্রিত করা হবে—হাশরের ময়দানসমূহের অবস্থানে। গোপন বিষয়াবলী প্রকাশিত হবে, দুষ্টরা ধ্বংস হবে এবং অন্তরসমূহ ভীতসন্ত্রস্ত হবে।

অতঃপর জাহান্নামের অধিবাসীদের উপর আল্লাহর পক্ষ থেকে ধ্বংসকারী আঘাত এবং কঠোর শাস্তি নেমে আসবে। জাহান্নাম প্রকাশ পাবে—তার থাকবে গর্জন ও আওয়াজ, বজ্রের মতো শব্দ, ক্রোধ ও হুমকি। তার আগুন জ্বলে উঠবে, তার ফুটন্ত পানি উত্তপ্ত হতে থাকবে এবং তার বিষাক্ত বাতাস প্রদীপ্ত হবে।

তার অধিবাসীর মুক্তি মিলবে না, তাদের দুঃখ-আক্ষেপ শেষ হবে না, আর তাদের হাতকড়া ভাঙবে না। তাদের সাথে ফেরেশতারা থাকবে যারা তাদেরকে ফুটন্ত পানীয় এবং জাহান্নামের আগুনে প্রবেশ করার সুসংবাদ দেবে। তারা আল্লাহর থেকে আড়ালকৃত, আর তাঁর বন্ধুদের থেকে বিচ্ছিন্ন, জাহান্নামের দিকে ধাবমান।

হে আল্লাহর বান্দাগণ! তোমরা আল্লাহকে এমনভাবে ভয় করো, যেমন ভয় করা উচিত সেই ব্যক্তির, যে নত হয়ে বিনয়ী হয়েছে, ভীত হয়ে যাত্রা করেছে, আর সতর্ক হয়ে দেখে শিক্ষা নিয়েছে এবং বিরত হয়েছে। তাই সে (কল্যাণ) লাভে সচেষ্ট হয়েছে, পলায়ন করে মুক্তি লাভ করেছে, আখিরাতের জন্য সঞ্চয় করেছে এবং পাথেয় দ্বারা সাহায্য চেয়েছে।

শাস্তিদাতা এবং দ্রষ্টা হিসেবে আল্লাহই যথেষ্ট। আর প্রতিপক্ষ ও প্রমাণস্বরূপ কিতাবই যথেষ্ট। আর পুরস্কারস্বরূপ জান্নাতই যথেষ্ট এবং দুর্ভোগ ও শাস্তি হিসেবে জাহান্নামই যথেষ্ট। আর আমি আমার ও তোমাদের জন্য আল্লাহর কাছে ক্ষমা প্রার্থনা করছি।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (229)


• حدثنا سليمان بن أحمد ثنا أبو مسلم الكشي ثنا عبد العزيز بن الخطاب ثنا سهل بن شعيب عن أبي علي الصيقل عن عبد الأعلى عن نوف البكالي. قال: رأيت علي بن أبي طالب خرج فنظر إلى النجوم فقال: يا نوف أراقد أنت أم رامق؟ قلت بل رامق يا أمير المؤمنين. فقال: يا نوف طوبى للزاهدين في الدنيا، الراغبين في الآخرة أولئك قوم اتخذوا الأرض بساطا، وترابها فراشا، وماءها طيبا، والقرآن والدعاء دثارا وشعارا. قرضوا الدنيا على منهاج المسيح عليه السلام. يا نوف إن الله تعالى أوحى إلى عيسى أن مر بني إسرائيل أن لا يدخلوا بيتا من بيوتي إلا بقلوب طاهرة، وأبصار خاشعة، وأيد نقية، فإني لا أستجيب لأحد منهم ولأحد من خلقي عنده مظلمة يا نوف لا تكن شاعرا، ولا عريفا، ولا شرطيا، ولا جابيا، ولا عشارا. فإن دواد عليه السلام قام في ساعة من الليل. فقال: إنها ساعة لا يدعو عبد إلا أستجيب له فيها، إلا أن يكون عريفا أو شرطيا أو جابيا أو عشارا أو صاحب عرطبة - وهو الطنبور - أو صاحب كوبة - وهو الطبل.



‌‌(وصيته لكميل بن زياد)




নওফ আল-বাকালী থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি আলী ইবনে আবি তালিবকে (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) দেখলাম, তিনি বের হলেন এবং আকাশের তারকারাজির দিকে তাকিয়ে বললেন: হে নওফ! তুমি কি ঘুমন্ত নাকি জাগ্রত? আমি বললাম: বরং আমি জাগ্রত, হে আমীরুল মুমিনীন। তিনি বললেন: হে নওফ! দুনিয়াবিমুখ এবং আখিরাতের প্রতি আগ্রহী লোকদের জন্য সুসংবাদ। এরাই সেই সম্প্রদায় যারা মাটিকে করেছে বিছানা, এর ধূলাবালিকে বালিশ, এর পানিকে সুগন্ধি (বা পবিত্র), আর কুরআন ও দোয়াকে করেছে বহিরাবরণ ও অন্তরাবরণ (তাদের প্রতীক)। তারা মাসীহ (ঈসা) (আঃ)-এর পন্থায় দুনিয়াকে বিদায় জানিয়েছে। হে নওফ! নিশ্চয় আল্লাহ তা'আলা ঈসা (আঃ)-এর নিকট ওহী প্রেরণ করেছেন যে, আপনি বনী ইসরাঈলকে আদেশ করুন, তারা যেন আমার কোনো ঘরে (ইবাদতখানায়) প্রবেশ না করে পবিত্র অন্তর, বিনয়ী দৃষ্টি ও পরিচ্ছন্ন হাত ছাড়া। কারণ, তাদের মধ্যে কারও (দোয়া) আমি কবুল করি না, এবং আমার সৃষ্টির মধ্যে এমন কোনো ব্যক্তিরও (দোয়া) কবুল করি না যার কাছে (অন্যের) কোনো মজলুমের অধিকার রয়েছে। হে নওফ! তুমি কবি, কিংবা প্রধান (আরিফ), কিংবা পুলিশ, কিংবা কর আদায়কারী (জাবিয়া), কিংবা শুল্ক আদায়কারী (আশশার) হয়ো না। কেননা দাউদ (আঃ) রাতের এক প্রহরে উঠে বললেন: এটি এমন একটি সময় যখন কোনো বান্দা দোয়া করলে তা কবুল করা হয়, তবে যদি সে প্রধান (আরিফ), কিংবা পুলিশ, কিংবা কর আদায়কারী, কিংবা শুল্ক আদায়কারী হয়, অথবা সে 'উরতুবা'র অধিকারী হয়—যা হলো তানবুর (বাদ্যযন্ত্র বিশেষ), কিংবা 'কূবা'র অধিকারী হয়—যা হলো তবলা (বাদ্যযন্ত্র বিশেষ)।

(এটি কুমায়েল ইবনে যিয়াদের প্রতি তাঁর (আলী রাঃ এর) উপদেশ।)









হিলইয়াতুল আওলিয়া (230)


• حدثنا حبيب بن الحسن ثنا موسى بن إسحاق. وثنا سليمان بن أحمد ثنا محمد بن عثمان بن أبي شيبة. قالا: ثنا أبو نعيم ضرار بن صرد. وثنا أبو أحمد محمد بن محمد بن أحمد الحافظ ثنا محمد بن الحسين الخثعمي ثنا إسماعيل بن موسى الفزاري. قالا: ثنا عاصم بن حميد الخياط ثنا ثابت بن أبي صفية أبو حمزة الثمالي عن عبد الرحمن بن جندب عن كميل بن زياد قال: أخذ علي بن أبي طالب بيدي فأخرجني إلى ناحية الجبان، فلما أصحرنا جلس ثم تنفس ثم قال:

يا كميل بن زياد القلوب أوعية فخيرها أوعاها، احفظ ما أقول لك: الناس
ثلاثة؛ فعالم رباني، ومتعلم على سبيل نجاة، وهمج رعاع أتباع كل ناعق، يميلون مع كل ريح، لم يستضيئوا بنور العلم، ولم يلجئوا إلى ركن وثيق.

العلم خير من المال، العلم يحرسك وأنت تحرس المال. العلم يزكو على العمل والمال تنقصه النفقة. ومحبة العالم دين يدان بها. العلم يكسب العالم الطاعة في حياته، وجميل الأحدوثة بعد موته، وصنيعة المال تزول بزواله. مات خزان الأموال وهم أحياء، والعلماء باقون ما بقي الدهر. أعيانهم مفقودة، وأمثالهم في القلوب موجودة، هاه؛ إن هاهنا - وأشار بيده إلى صدره - علما لو أصبت له حملة، بلى أصبته لقنا غير مأمون عليه. يستعمل آلة الدين للدنيا، يستظهر بحجج الله على كتابه، وبنعمه على عباده. أو منقادا لأهل الحق لا بصيرة له في إحيائه، يقتدح الشك في قلبه بأول عارض من شبهة، لا ذا ولا ذاك. أو منهوم باللذات، سلس القياد للشهوات. أو مغرى بجمع الأموال والادخار؛ وليسا من دعاة الدين. أقرب شبها بهما الأنعام السائمة. كذلك يموت العلم بموت حامليه. اللهم بلى لا تخلو الأرض من قائم لله بحجة، لئلا تبطل حجج الله وبيناته، أولئك هم الأفلون عددا، الأعظمون عند الله قدرا بهم يدفع الله عن حججه حتى يؤدوها إلى نظرائهم، ويزرعوها في قلوب أشباههم هجم بهم العلم على حقيقة الأمر فاسلانوا ما استوعر منه المترفون وأنسوا بما استوحش منه الجاهلون. صحبوا الدنيا بأبدان أرواحها معلقة بالمنظر الأعلى، أولئك خلفاء الله في بلاده، ودعاته إلى دينه. هاه هاه شوقا إلى رؤيتهم، وأستغفر الله لي ولك إذا شئت فقم.



‌‌(زهده وتعبده)

قال الشيخ رحمه الله: ذكر بعض ما نقل عنه من التقلل والتزهد، واشتهر به من الترهب والتعبد.

وقيل: إن التصوف السلو عن الأعراض، بالسمو إلى الأغراض.




আলী ইবনু আবী তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত। কুমাইল ইবনু যিয়াদ বলেন: আলী ইবনু আবী তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আমার হাত ধরে জাব্বান (কবরস্থান সংলগ্ন এলাকা)-এর দিকে নিয়ে গেলেন। যখন আমরা খোলা ময়দানে পৌঁছলাম, তিনি বসলেন, এরপর দীর্ঘ নিঃশ্বাস নিলেন এবং বললেন:

"হে কুমাইল ইবনু যিয়াদ! অন্তরসমূহ হলো পাত্র, আর এর মধ্যে উত্তম হলো সেই পাত্র যা অধিক ধারণ করে। আমি তোমাকে যা বলি, তা মুখস্থ রেখো: মানুষ তিন প্রকার: ১. রাব্বানী (আল্লাহ্‌ওয়ালা) আলেম; ২. মুক্তির পথে থাকা শিক্ষার্থী; ৩. আর সাধারণ নির্বোধ জনসাধারণ, যারা প্রত্যেক আওয়াজকারীর অনুগামী, যারা প্রতিটি বাতাসের সাথে ঝুঁকে পড়ে। তারা জ্ঞানের আলো দ্বারা আলোকিত হয়নি এবং তারা কোনো মজবুত ভিত্তিকে আশ্রয় করেনি।

জ্ঞান সম্পদের চেয়ে উত্তম। জ্ঞান তোমাকে রক্ষা করে, আর তুমি সম্পদকে রক্ষা করো। জ্ঞান আমলের (কাজের) মাধ্যমে বৃদ্ধি পায়, আর সম্পদ খরচের মাধ্যমে হ্রাস পায়। আলেমের প্রতি ভালোবাসা এমন এক ধর্ম, যার মাধ্যমে প্রতিদান দেওয়া হয়। জ্ঞান আলেমকে তার জীবদ্দশায় আনুগত্য এনে দেয় এবং তার মৃত্যুর পরও উত্তম খ্যাতি এনে দেয়। আর সম্পদের কৃত্রিমতা (বা উপকারিতা) সম্পদ চলে যাওয়ার সাথে সাথে বিলীন হয়ে যায়। সম্পদ জমা কারীরা জীবিত থাকা সত্ত্বেও মৃত। আর আলেমগণ ততদিন বেঁচে থাকেন, যতদিন যুগ অবশিষ্ট থাকে। যদিও তাদের দেহ বিলীন হয়ে যায়, কিন্তু তাদের জ্ঞান ও আদর্শ মানুষের হৃদয়ে বিদ্যমান থাকে।

শোনো! এখানে— এই বলে তিনি নিজের বুকের দিকে ইঙ্গিত করলেন— এমন জ্ঞান রয়েছে, যদি আমি এর উপযুক্ত ধারক পেতাম! অবশ্যই, আমি এর ধারক পেয়েছি, কিন্তু সে এমন মুখস্থকারী, যে অবিশ্বস্ত। যে দ্বীনের উপকরণকে দুনিয়ার জন্য ব্যবহার করে। সে আল্লাহর কিতাবের বিরুদ্ধে আল্লাহর প্রমাণাদিকে ও তাঁর বান্দাদের ওপর আল্লাহর অনুগ্রহসমূহকে ব্যবহার করে। অথবা সে এমন ব্যক্তি, যে হকপন্থীদের অনুগত, কিন্তু তার অন্তরে তা সজীব রাখার মতো দূরদর্শিতা নেই। কোনো সন্দেহ সামনে আসার সাথে সাথেই তার অন্তরে সন্দেহের স্ফুলিঙ্গ জ্বলে ওঠে। সে ঐ শ্রেণীরও নয়, এই শ্রেণীরও নয়। অথবা এমন ব্যক্তি যে ভোগ-বিলাসে মগ্ন, যার লাগাম সহজে কামনার দিকে ধাবিত হয়। অথবা এমন ব্যক্তি যে সম্পদ জমা ও সঞ্চয় করতে আগ্রহী; কিন্তু তারা উভয়ে দ্বীনের আহ্বানকারীদের অন্তর্ভুক্ত নয়। তাদের সাথে চতুষ্পদ জন্তুদের সাদৃশ্যই বেশি, যারা কেবল চরে বেড়ায়।

এভাবেই জ্ঞান তার ধারকদের মৃত্যুতে মরে যায়। ওহ আল্লাহ! হ্যাঁ, ভূমি কখনো এমন ব্যক্তি থেকে খালি থাকবে না, যে আল্লাহর পক্ষ থেকে প্রমাণ সহকারে (জ্ঞান নিয়ে) দাঁড়িয়ে থাকবে, যাতে আল্লাহর প্রমাণাদি ও সুস্পষ্ট নিদর্শনসমূহ বাতিল না হয়ে যায়। তারা সংখ্যায় স্বল্প, কিন্তু আল্লাহর নিকট মর্যাদায় মহান। তাদের মাধ্যমেই আল্লাহ তাঁর প্রমাণাদিকে সংরক্ষণ করেন, যতক্ষণ না তারা সেগুলোকে তাদের সমকক্ষদের কাছে পৌঁছে দেন এবং তাদের অনুরূপ হৃদয়ে তা বপন করেন। জ্ঞান তাদের ওপর এমনভাবে সত্য বিষয়কে উন্মোচন করে দিয়েছে যে, ভোগ-বিলাসী লোকেরা যা কঠিন মনে করে, তারা তা সহজ করে নিয়েছে, আর অজ্ঞ লোকেরা যা থেকে ভীত হয়, তারা তাতে অভ্যস্ত হয়ে পড়েছে। তারা দেহ দ্বারা দুনিয়ার সাথে থাকে, কিন্তু তাদের রূহসমূহ সুমহান দৃশ্যে (আল্লাহর দিকে) ঝুলন্ত থাকে। তারাই আল্লাহর জমিনে তাঁর খলীফা এবং তাঁর দ্বীনের দিকে আহ্বানকারী।

আ-হ! আ-হ! তাদের দেখতে (আমার) কী প্রবল আকাঙ্ক্ষা! আমি আল্লাহ্‌র কাছে আমার ও তোমার জন্য ক্ষমা চাই। যদি তুমি চাও, তবে এবার ওঠো।"

(তাঁর যুহদ ও ইবাদত) শায়খ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন: তাঁর সম্পর্কে যা কিছু স্বল্পতা ও যুহদ (দুনিয়াত্যাগ)-এর বিষয়ে বর্ণিত হয়েছে, এবং যা কিছু তিনি ইবাদত ও বৈরাগ্যের জন্য প্রসিদ্ধ ছিলেন, তার কিছু বর্ণনা করা হলো। আরো বলা হয়েছে: নিশ্চয়ই তাসাওউফ (আধ্যাত্মিকতা) হলো লক্ষ্য অর্জনের উচ্চাকাঙ্ক্ষার মাধ্যমে অনাকাঙ্ক্ষিত বিষয়াদি থেকে বিমুখ হওয়া।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (231)


• حدثنا أبو بكر بن مالك ثنا عبد الله بن أحمد بن حنبل حدثني أبي ثنا
وهب بن إسماعيل ثنا محمد بن قيس عن علي بن ربيعة الوالبي عن علي بن أبي طالب. قال: جاءه ابن النباج فقال يا أمير المؤمنين امتلأ بيت مال المسلمين من صفراء وبيضاء فقال: الله أكبر! فقام متوكئا على ابن النباج حتى قام على بيت مال المسلمين. فقال:

هذا حناى وخياره فيه … وكل جان يده إلى فيه

يا ابن النباج: على بأشياع الكوفة، قال فنودي في الناس فأعطى جميع ما في بيت مال المسلمين وهو يقول: يا صفراء ويا بيضاء غرى غيرى. ها، وها. حتى ما بقي منه دينار ولا درهم، ثم أمره بنضحه وصلي فيه ركعتين.




আলী ইবনু আবী তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: ইবনুন্নাব্বাজ তাঁর কাছে এলেন এবং বললেন, হে আমীরুল মুমিনীন! বাইতুল মাল (মুসলিমদের কোষাগার) সোনা ও রুপা (স্বর্ণমুদ্রা ও রৌপ্যমুদ্রা) দ্বারা ভরে গেছে।

তিনি (আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)) বললেন, আল্লাহু আকবার! অতঃপর তিনি ইবনুন্নাব্বাজের উপর ভর করে উঠে দাঁড়ালেন এবং বাইতুল মালের উপরে গিয়ে দাঁড়ালেন। অতঃপর তিনি বললেন:

"এগুলো আমার ফসল, আর এর সেরা অংশ এর মধ্যেই আছে
এবং প্রত্যেক ফসল কাটার লোক (সংগ্রহকারী) তার হাত মুখের দিকে বাড়ায় (খাওয়ার জন্য)।"

(এরপর বললেন,) হে ইবনুন্নাব্বাজ! কূফার সকল অনুসারীকে (বা উপস্থিতদের) আমার কাছে নিয়ে এসো। তিনি (বর্ণনাকারী) বলেন: অতঃপর লোকজনের মধ্যে ঘোষণা দেওয়া হলো এবং তিনি বাইতুল মালের সমস্ত সম্পদ দান করে দিলেন। আর তিনি বলছিলেন, হে সোনা! হে রূপা! তুমি অন্য কাউকে ধোঁকা দাও। নাও, নাও (এগুলো নিয়ে যাও)। শেষ পর্যন্ত বাইতুল মালে একটিও দিনার বা দিরহাম অবশিষ্ট রইল না। এরপর তিনি (আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)) বাইতুল মালকে পানি দ্বারা ধুয়ে পরিষ্কার করার নির্দেশ দিলেন এবং সেখানে দুই রাকাত সালাত আদায় করলেন।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (232)


• حدثنا أبو حامد بن جبلة ثنا محمد بن إسحاق ثنا عبد الله بن عمر ثنا ابن نمير ثنا أبو حيان التيمي عن مجمع التيمي. قال: كان علي يكنس بيت المال ويصلي فيه، يتخذه مسجدا رجاء أن يشهد له يوم القيامة.




মুজাম্মা' আত-তাইমী থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বাইতুল মাল (রাষ্ট্রীয় কোষাগার) ঝাড়ু দিতেন এবং তাতে সালাত আদায় করতেন। তিনি সেটিকে মসজিদ হিসেবে গ্রহণ করতেন, এই আশায় যে কিয়ামতের দিন যেন তা তাঁর পক্ষে সাক্ষ্য দেয়।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (233)


• حدثنا أبو بكر بن خلاد ثنا إسحاق بن الحسن الحربي ثنا مسدد. وثنا إبراهيم بن عبد الله ثنا محمد بن إسحاق ثنا قتيبة. قالا: ثنا عبد الوارث بن سعيد عن أبي عمرو بن العلاء عن أبيه: أن علي بن أبي طالب خطب الناس فقال: والله الذي لا إله إلا هو ما رزأت من فيئكم إلا هذه. وأخرج قارورة من كم قميصه. فقال: أهداها إلي مولاي دهقان.




আলী ইবনু আবি তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি লোকদের উদ্দেশ্যে ভাষণ দিলেন এবং বললেন: সেই আল্লাহর শপথ, যিনি ব্যতীত আর কোনো ইলাহ নেই, আমি তোমাদের ফাই' (রাষ্ট্রীয় সম্পদ) থেকে এই বস্তুটি ছাড়া আর কিছুই গ্রহণ করিনি। অতঃপর তিনি তাঁর জামার আস্তিন থেকে একটি শিশি বের করলেন। তিনি বললেন: এটা আমার মাওলা দিহকান আমাকে উপহার হিসেবে দিয়েছে।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (234)


• حدثنا أحمد بن جعفر بن حمدان ثنا عبد الله بن أحمد بن حنبل حدثني أبي حدثني سفيان بن وكيع ثنا أبو غسان عن أبي داود المكفوف عن عبد الله بن شريك عن جده عن علي بن أبي طالب: أنه أتي بفالوذج فوضع قدامه بين يديه. فقال: إنك طيب الريح، حسن اللون، طيب الطعم، لكن أكره أن أعوذ نفسي ما لم تعتده.




আলী ইবনে আবী তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয় তাঁর নিকট ফালূদা (এক প্রকার মিষ্টান্ন) আনা হয়েছিল এবং তা তাঁর সামনে রাখা হয়েছিল। তখন তিনি বললেন, নিশ্চয় তুমি সুগন্ধযুক্ত, সুন্দর বর্ণ এবং সুস্বাদু; কিন্তু আমি আমার নফসকে (মনকে) এমন বিষয়ে অভ্যস্ত করাতে অপছন্দ করি যা তার অভ্যাস নয়।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (235)


• حدثنا عبد الله بن محمد بن جعفر ثنا عبد الرحمن بن محمد بن سلم ثنا هناد ثنا وكيع عن سفيان عن عمرو ابن قيس الملائى عن عدى بن ثابت: أن عليا أتي بفالوذج فلم يأكل.




আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তাঁর কাছে ফালুযাজ (এক প্রকার মিষ্টি খাবার) আনা হয়েছিল, কিন্তু তিনি তা খেলেন না।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (236)


• حدثنا أبو بكر بن مالك ثنا عبد الله بن أحمد بن حنبل حدثني أحمد بن إبراهيم ثنا عبد الصمد ثنا عمران - وهو القطان - عن زياد بن مليح: أن عليا أتي بشيء من خبيص فوضعه بين أيديهم فجعلوا يأكلون. فقال علي: إن الإسلام ليس
ببكر ضال ولكن قريش رأت هذا فتناجزت عليه(1).




আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তাঁর নিকট কিছু 'খাবিস' (এক প্রকার মিষ্টি খাবার) আনা হলো। তিনি তা তাদের সামনে রাখলেন এবং তারা তা খেতে শুরু করলেন। অতঃপর আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: নিশ্চয় ইসলাম দিগ্ভ্রান্ত পথিকের মতো নয় (যে পথ হারিয়ে ফেলেছে), বরং কুরাইশরা যখন এটি দেখল, তখন তারা এর উপর বিজয় অর্জনের জন্য প্রতিযোগিতায় লিপ্ত হয়েছিল।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (237)


• حدثنا الحسن بن علي الوراق ثنا محمد بن أحمد بن عيسى ثنا عمرو بن تميم ثنا أبو نعيم ثنا إسماعيل ابن إبراهيم بن مهاجر. قال سمعت عبد الملك بن عمير يقول حدثني رجل من ثقيف: أن عليا استعمله على عكبرا قال ولم يكن السواد يسكنه المصلون.

وقال لي: إذا كان عند الظهر فرح إلي، فرحت إليه فلم أجد عنده حاجبا يحبسني عنه دونه - فوجدته جالسا وعنده قدح وكوز من ماء فدعا بطينة(2)

فقلت في نفسي: لقد أمنني حتى يخرج إلي جوهرا - ولا أدري ما فيها - فإذا عليها خاتم فكسر الخاتم فإذا فيها سويق فأخرج منها فصب في القدح فصب عليه ماء فشرب وسقاني فلم أصبر. فقلت: يا أمير المؤمنين أتصنع هذا بالعراق وطعام العراق أكثر من ذلك. قال: أما والله! ما أختم عليه بخلا عليه ولكني أبتاع قدر ما يكفيني فأخاف أن يفنى فيصنع من غيره، وإنما حفظي لذلك، وأكره أن أدخل بطني إلا طيبا.




আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, সালাফ গোত্রের এক ব্যক্তি বর্ণনা করেছেন যে, আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাকে আকবারার শাসনকর্তা নিযুক্ত করেছিলেন। সে বলল: সেই সময় সাওয়াদ অঞ্চলের অধিবাসীরা ইবাদতকারী (মুসাল্লী) ছিল না।

তিনি (আলী) আমাকে বললেন: যখন যোহরের সময় হবে, তখন তুমি আমার কাছে চলে আসবে। সুতরাং আমি তাঁর কাছে গেলাম। আমি তাঁর কাছে কোনো দ্বাররক্ষক পেলাম না যে আমাকে তাঁর কাছ থেকে আটকে রাখবে। আমি তাঁকে উপবিষ্ট অবস্থায় পেলাম, এবং তাঁর পাশে একটি পেয়ালা ও এক পাত্র পানি ছিল। তিনি সীলমোহরযুক্ত একটি মাটির বস্তুর কথা বললেন।

আমি মনে মনে বললাম: তিনি আমাকে এত বিশ্বাস করেছেন যে হয়তো তিনি আমার জন্য কোনো রত্নভাণ্ডার বের করবেন—আর আমি জানতাম না যে এর ভেতরে কী আছে—কিন্তু এর উপর একটি সীলমোহর লাগানো ছিল। অতঃপর তিনি সেই সীলমোহর ভাঙলেন। দেখা গেল এর ভেতরে ছাতু (সাওয়ীক) আছে। তিনি তা থেকে ছাতু বের করে পেয়ালায় ঢাললেন এবং তাতে পানি মিশিয়ে পান করলেন এবং আমাকেও পান করালেন। আমি ধৈর্য ধারণ করতে পারলাম না (জিজ্ঞাসা না করে থাকতে পারলাম না)।

আমি বললাম: হে আমীরুল মুমিনীন! আপনি ইরাকে এমনটা করছেন, অথচ ইরাকের খাদ্য (খাবার সামগ্রী) এর চেয়ে অনেক বেশি? তিনি বললেন: আল্লাহর শপথ! আমি এটা কৃপণতাবশত সীলমোহর মেরে রাখি না। বরং আমি কেবল ততটুকুই কিনি যা আমার জন্য যথেষ্ট। আমার আশঙ্কা হয় যে (যদি সীলমোহর না করি) তবে তা শেষ হয়ে গেলে এর সাথে অন্য কোনো কিছু মিশিয়ে ফেলা হতে পারে। আমি কেবল সে জন্যই এটি সংরক্ষণ করি, আর আমি আমার পেটে পবিত্র ও হালাল জিনিস ছাড়া অন্য কিছু প্রবেশ করানো অপছন্দ করি।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (238)


• حدثنا أبو بكر بن مالك ثنا عبد الله بن أحمد بن حنبل حدثني أبو معمر ثنا أبو أسامة عن سفيان عن الأعمش قال: كان علي يغدي ويعشي ويأكل هو من شيء يجيئه من المدينة.




আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি লোকজনকে দুপুরের ও রাতের খাবার খাওয়াতেন এবং তিনি নিজে মদীনা থেকে আসা কোনো জিনিস থেকে খেতেন।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (239)


• حدثنا أحمد بن جعفر بن سلم ثنا أحمد بن أبي الحسن الصوفي ثنا يحيى بن يوسف الرقي ثنا عباد بن العوام عن هارون بن عنترة عن أبيه. قال: دخلت على علي بن أبي طالب بالخورنق وهو يرعد تحت سمل قطيفة. فقلت: يا أمير المؤمنين إن الله قد جعل لك ولأهل بيتك في هذا المال وأنت تصنع بنفسك ما تصنع. فقال: والله ما أرزأكم من مالكم شيئا وإنها لقطيفتى التي خرجت بها من منزلي - أو قال من المدينة.




আলী ইবনে আবী তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, [রাবী] বলেন, আমি আল-খাওয়ারনাক নামক স্থানে আলী ইবনে আবী তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে প্রবেশ করলাম। তখন তিনি একটি পুরোনো কাপড়ের চাদরের নিচে কাঁপছিলেন। আমি বললাম, হে আমীরুল মুমিনীন! নিশ্চয় আল্লাহ আপনার জন্য এবং আপনার আহলে বাইতের (পরিবারের) জন্য এই সম্পদের মধ্যে অংশ রেখেছেন, অথচ আপনি নিজের সাথে এমন ব্যবহার করছেন (কষ্ট দিচ্ছেন)। তখন তিনি বললেন: আল্লাহর শপথ! আমি তোমাদের সম্পদ থেকে কিছুই নেই না। নিশ্চয়ই এটা আমার সেই চাদর, যা নিয়ে আমি আমার ঘর থেকে বের হয়েছিলাম—অথবা তিনি বললেন, মদীনা থেকে বের হয়েছিলাম।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (240)


• حدثنا محمد بن أحمد بن الحسن ثنا عبد الله ابن أحمد بن حنبل ثنا علي بن حكيم. وثنا محمد بن علي ثنا أبو القاسم البغوي ثنا علي بن الجعد. قالا: ثنا شريك عن عثمان بن أبي زرعة عن زيد بن وهب. قال:

قدم على علي وفد من أهل البصرة فيهم رجل من أهل الخوارج يقال له الجعد
ابن نعجة فعاتب عليا في لبوسه. فقال علي: ما لك وللبوسى إن لبوسى أبعد من الكبر، وأجدر أن يقتدي بي المسلم.




যায়দ ইবন ওয়াহব থেকে বর্ণিত, বসরাবাসীদের একটি প্রতিনিধিদল আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে এলো। তাদের মধ্যে আল-খারেজী সম্প্রদায়ের একজন লোক ছিল, যার নাম ছিল জা’দ ইবন না’জাহ। সে আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর পোশাক পরিচ্ছদ নিয়ে তাঁর সমালোচনা করল। তখন আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: আমার পোশাক নিয়ে তোমার কী বলার আছে? নিশ্চয়ই আমার এই পোশাক অহংকার থেকে অনেক দূরে এবং এটিই একজন মুসলিমের জন্য আমার অনুসরণ করার অধিক উপযোগী।