আল-জামি` আল-কামিল
1068 - عن عياض بن حمار، عن النّبيّ صلى الله عليه وسلم فيما يرويه عن ربِّه تبارك وتعالى أنه قال:"خلقتُ عبادي حتفاء كلّهم وإنهم أتتهم الشياطين فاجتالتهم عن دينهم، وحرّمتْ عليهم ما أحللتُ لهم، وأمرتْهم أن يشركوا بي ما لم أُنزل به سلطانًا".
صحيح: رواه مسلم في كتاب التوبة (2865) من طرق عن معاذ بن هشام، عن أبيه، عن قتادة، عن مطرِّف بن عبد اللَّه بن الشخّير، عن عياض بن حمار المجاشعيّ، فذكره في حديث طويل، سيأتي في موضعه.
ইয়াদ ইবনু হিমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর রব আল্লাহ তাবারাকা ওয়া তাআলা থেকে বর্ণনা করে বলেন: "আমি আমার সকল বানলাদাকে বিশুদ্ধ স্বভাবের (একনিষ্ঠ) করে সৃষ্টি করেছি। কিন্তু তাদের কাছে শয়তানরা আসে এবং তাদেরকে তাদের দ্বীন থেকে বিচ্যুত করে দেয়। আর আমি যা তাদের জন্য হালাল করেছিলাম, তা তারা (শয়তানরা) তাদের ওপর হারাম করে দেয় এবং তারা তাদেরকে এমন জিনিসকে আমার সাথে শরীক করতে আদেশ করে, যার জন্য আমি কোনো দলিল (বা ক্ষমতা) নাযিল করিনি।"
1069 - عن أبي هريرة، قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"ما من مولود إلّا يولد على الفطرة، فأبواه يهودانه وينصرانه، كما تُنتجون البهيمة هل تجدون فيها من جدعاء حتى تكونوا أنتم تجدعونها؟". قالوا: يا رسول اللَّه، أفرأيتَ من يموت وهو صغير؟ قال:"اللَّه أعلم بما كانوا عاملين".
متفق عليه: رواه البخاريّ في القدر (6599)، ومسلم في القدر (2658: 24) كلاهما من حديث عبد الرزاق، عن معمر، عن همّام بن مُنبِّه، قال: هذا ما حدّثنا أبو هريرة، عن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، فذكر أحاديث، منها هذا.
ومعنى الحديث كما قال حماد بن سلمة:"هذا عندنا حيث أخذ اللَّه عليهم العهد في أصلاب آبائهم حيث قال: {أَلَسْتُ بِرَبِّكُمْ قَالُوا بَلَى} [سورة الأعراف: 172]".
أخرجه أبو داود (4716) بإسناده عنه، وحسَّن هذا المعنى الخطّابي فقال:"معنى قول حمّاد في هذا حسن، وكأنه ذهب إلى أنه لا عبرة للإيمان الفطري في أحكام الدّنيا، وإنّما يعتبر الشّرعي المكتسب بالإرادة والفعل، ألا ترى أنه يقول:"فأبواه يهودانه وينصّرانه" فهو مع وجود الإيمان الفطري فيه محكوم له بحكم أبويه الكافِرَيْن". انتهى. انظر القضاء والقدر للبيهقيّ (3/ 871).
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "প্রতিটি শিশুই ফিতরাতের (সহজাত শুদ্ধ প্রকৃতি) উপর জন্মগ্রহণ করে। অতঃপর তার পিতামাতা তাকে ইয়াহুদী বানায়, অথবা খ্রিস্টান বানায়। যেমন তোমরা চতুষ্পদ জন্তুর জন্ম দিতে দেখো, তোমরা কি এর মধ্যে নাক-কান কাটা কোনো অঙ্গহানি দেখতে পাও, যতক্ষণ না তোমরা নিজেরাই তা কেটে দাও?" সাহাবীগণ বললেন, 'হে আল্লাহর রাসূল! যদি কেউ ছোট অবস্থায় মারা যায়, (তবে তার হুকুম কী হবে?)' তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, "তারা কী আমল করত, সে সম্পর্কে আল্লাহই অধিক অবগত।"
1070 - عن أبي هريرة أنه قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"ما من مولود إلّا يولد على الفطرة، فأبواه يهوّدانه وينصّرانه ويمجّسانه، كما تُنتج البهيمةُ ببهيمة جمعاء، هل تُحسُّون فيها من
جدعاء؟". ثم يقول أبو هريرة: واقرؤوا إن شئتم: {فِطْرَتَ اللَّهِ الَّتِي فَطَرَ النَّاسَ عَلَيْهَا لَا تَبْدِيلَ لِخَلْقِ اللَّهِ ذَلِكَ الدِّينُ الْقَيِّمُ} [سورة الروم: 30]".
متفق عليه: رواه البخاريّ في الجنائز (1359)، ومسلم في القدر (2658) كلاهما من حديث يونس بن يزيد، عن ابن شهاب، أنّ أبا سلمة بن عبد الرحمن أخبره، أنّ أبا هريرة، قال (فذكره).
ورواه مالك في الجنائز (53) عن أبي الزّناد، عن الأعرج، عن أبي هريرة، فذكر مثله، ولم يذكر قول أبي هريرة وهو:"واقرؤا إن شئتم. . .". ولكن زاد فيه:"قالوا: يا رسول اللَّه: أرأيتَ الذي يموت وهو صغير؟ قال: اللَّه أعلم بما كانوا عاملين".
وهذه الزّيادة ليست في رواية ابن شهاب، وقد روى هذا الحديث عبد اللَّه بن الفضل الهاشميّ شيخ مالك، عن أبي الزّناد، عن الأعرج، عن أبي هريرة، عن النّبيّ صلى الله عليه وسلم قال:"كل مولود يولد على الفطرة، فأبواه يهودانه، وينصّرانه، ويمجسانه كالبهيمة تُنتج البهيمة، هل تحسون فيها من جدعاء حتى تكونوا أنتم تجدعونها". إلى هنا انتهى حديثه، ولم يذكر ما في حديث مالك قوله:"أرأيت يموت وهو صغير" إلى آخر الحديث.
هكذا رواية ابن شهاب لهذا الحديث ليس فيها قوله:"أرأيت من يموت وهو صغير؟ قال: اللَّه أعلم بما كانوا عاملين". انتهى بما في التمهيد (18/ 58 - 59).
قلت: قوله صلى الله عليه وسلم:"اللَّه أعلم بما كانوا عاملين". وهو في حديث الزّهريّ، عن عطاء بن يزيد، عن أبي هريرة، كما سبق.
ولكن لا يبعد أن يكون أبو هريرة ذكر هذا في الحديثين كما في الحديث الآتي.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "এমন কোনো নবজাতক নেই, যে ফিতরাত (সহজাত স্বভাব)-এর ওপর জন্মগ্রহণ করে না। অতঃপর তার বাবা-মা তাকে ইহুদি বানায়, খ্রিস্টান বানায় এবং অগ্নিপূজক বানায়। যেমন চতুষ্পদ জন্তু আরেকটি নিখুঁত জন্তু জন্ম দেয়। তোমরা কি তাতে কোনো কাটা-কাটা (অঙ্গহানি) দেখতে পাও?" এরপর আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন: তোমরা চাইলে পাঠ করতে পারো: "{আল্লাহর দেওয়া প্রকৃতি, যে প্রকৃতির ওপর তিনি মানুষকে সৃষ্টি করেছেন। আল্লাহর সৃষ্টিতে কোনো পরিবর্তন নেই। এটাই সুপ্রতিষ্ঠিত দীন।}" [সূরা রূম: ৩০]।
1071 - عن أبي هريرة، قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"ما من مولود إلّا يولد على الفطرة، فأبواه يهودانه وينصرانه ويشركانه". فقال رجل: يا رسول اللَّه، أرأيتَ لو مات قبل ذلك؟ قال:"اللَّه أعلم بما كانوا عاملين".
صحيح: رواه مسلم في القدر (2658: 23) عن زهير بن حرب، حدّثنا جرير، عن الأعمش، عن أبي صالح، عن أبي هريرة، فذكره.
ورواه من وجه آخر عن ابن نمير، وأبي معاوية - كلاهما عن الأعمش بهذا الإسناد. إلّا أنّ في حديث ابن نمير:"ما من مولود يولد إلّا وهو على الملّة".
وفي حديث أبي معاوية:"إلّا على هذه الملة حتى يُبَيّن عنه لسانه".
وفي رواية عنه:"حتّى يعبّر عنه لسانه".
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "প্রত্যেক শিশুই ফিতরাতের (ইসলামের স্বভাবধর্ম) ওপর জন্মগ্রহণ করে। এরপর তার বাবা-মা তাকে ইয়াহুদী বানায়, নাসারা (খ্রিস্টান) বানায় অথবা মুশরিক (অংশীবাদী) বানায়।" তখন এক ব্যক্তি বলল: হে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম), যদি সে তার পূর্বেই মারা যায়, তাহলে আপনি কী বলেন? তিনি বললেন: "তারা কী আমলকারী ছিল, সে সম্পর্কে আল্লাহই অধিক অবগত।"
1072 - عن أبي هريرة، أنّ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"كلّ إنسان تلده أمُّه على الفطرة، وأبواه بعدُ يهوِّدانه، وينصّرانه، ويمجِّسانه، فإن كانا مسلمَيْنِ فمسلم، كلّ إنسان تلده
أمُّه يلكزه الشّيطان في حِضْنَيْه إلّا مريم وابنَها".
صحيح: رواه مسلم في القدر (2658: 25) عن قتيبة بن سعيد، حدّثنا عبد العزيز (يعني الدّراورديّ)، عن العلاء، عن أبيه، عن أبي هريرة، فذكره.
وقوله:"حِضْنَيْه" تثنية حِضن وهو الجنب، وقيل: الخاصرة.
وأمّا ما رُوي عن الأسود بن سريع:"أنّ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم بعث سريّة يوم حنين فقاتلوا المشركين، فأفضى بهم القتلُ إلى الذّريّة، فلما جاءوا قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"ما حملكم على قتل الذريّة"؟ قالوا: يا رسول اللَّه، إنّما كانوا أولاد المشركين. قال:"أَوَ هَلْ خياركم إلّا أولاد المشركين؟ والذي نفس محمّد بيده ما من نسمة تُولد إلّا على الفطرة، حتى يُعرب عنها لسانُها". فهو منقطع.
رواه الإمام أحمد (15588)، والطبرانيّ في الكبير (826، 828)، وفي الأوسط (2005)، والبيهقيّ في القضاء والقدر (3/ 863) كلّهم من طرق عن الحسن، عن الأسود بن سريع، فذكره.
والحسن هو ابن أبي الحسن البصريّ الإمام المشهور، إلّا أنّه كان يدلِّس، وقد أكَّد أهلُ العلم أنه لم يسمع من الأسود بن سريع. قال علي بن المديني:"لم يسمع من الأسود بن سريع؛ لأنّ الأسود بن سريع خرج من البصرة أيام علي رضي الله عنه، وكان الحسن بالمدينة". انظر: تحفة التحصيل (ص 71).
وقال أبو عبيد الآجريّ: سألت أبا داود: الحسن سمع من الأسود بن سريع؟ قال:"لا، قال: الأسود بن سريع لما وقعت الفتنة بالبصرة ركب البحر، فلا يدري خبره. قال أبو داود: ما أرى الحسن سمع من الأسود بن سريع. سؤالات الآجري (727).
وأمّا ما جاء التّصريح بالتحديث من الحسن في بعض الرّوايات، منها ما ذكره البخاريّ في"التاريخ الكبير" (1/ 445)، والحاكم في"المستدرك" (2/ 123)، والبيهقيّ في"القضاء والقدر" (3/ 867) فهو مؤوّل على معناه حدّث أهل البصرة، كقوله:"خطبنا ابن عباس". وهو لم يدركه، فتأولوا: أي خطب أهل البصرة؛ لأنّ الحسن لم يعرف عنه التّعمد في الكذب، وقد أكّد أيضًا البيهقيّ بأنّ الحفّاظ لا يُثْبِتون سماع الحسن من الأسود بن سريع.
وكذلك ما رُوي عن جابر، قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"كلُّ مولود يولد على الفطرة، حتى يعرب عنه لسانُه، فإذا أعربَ عنه لسانه إمّا شاكرًا وإمّا كفورًا".
رواه الإمام أحمد (14805) عن هاشم، حدثّنا أبو جعفر، عن الرّبيع بن أنس، عن الحسن، عن جابر بن عبد اللَّه، فذكره.
وأبو جعفر هو الرّازيّ المشهور بكنيته، واسمه عيسى بن أبي عيسى مختلف فيه، فوثّقه ابن معين وأبو حاتم وابن سعد، وقال أحمد: ليس بقوي، وقال النسائيّ: ليس بالقوي، وقال ابن حبان: كان ينفرد عن المشاهير بالمناكير، لا يُعجبني الاحتجاج بحديثه إلّا فيما وافق الثقات".
وفي الإسناد أيضًا الحسن وهو البصّري مدلِّس وقد عنعن.
وأورده الهيثمي في"المجمع" (7/ 218) وقال:"رواه أحمد، وفيه أبو جعفر الرّازيّ وهو ثقة، وفيه خلاف، وبقية رجاله ثقات".
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: প্রত্যেক মানুষকেই তার মা ফিতরাতের (স্বাভাবিক ইসলামী প্রকৃতির) উপর জন্ম দেয়, এরপর তার বাবা-মা তাকে ইহুদি বানায়, অথবা খ্রিস্টান বানায়, অথবা অগ্নিপূজক বানায়। আর যদি তার বাবা-মা মুসলিম হয়, তবে সে মুসলিম হয়। প্রত্যেক মানুষকেই তার মা জন্ম দেওয়ার সময় শয়তান তার দুই পাশে (পাঁজরে) খোঁচা মারে, তবে মারইয়াম ও তাঁর পুত্র (ঈসা) ছাড়া।
1073 - عن الصّعب بن جثَّامة قال: مَرَّ بي النبيُّ صلى الله عليه وسلم بالأبواء أو بودَّان، وسُئل عن أهل الدّار يُبيِّتون من المشركين، فيصاب من نسائهم وذراريهم؟ قال:"هم منهم".
متفق عليه: رواه البخاريّ في الجهاد والسير (3012)، ومسلم في الجهاد والسير (1745) كلاهما من حديث سفيان بن عيينة، عن الزّهريّ، عن عبيد اللَّه، عن ابن عباس، عن الصّعب بن جثّامة، فذكره.
ورواه مسلم من حديث عمرو بن دينار، عن ابن شهاب، بإسناده وفيه:"هم من آبائهم". فهذا يدلُّ على أنّ حكمهم في البيات حكم آبائهم، وأمّا في الآخرة فيرجع أمرهم إلى قوله:"اللَّه أعلم بما كانوا عاملين".
انظر: البيهقي: القضاء والقدر
সা'ব ইবনু জাছছামা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আল-আবওয়া অথবা ওয়াদ্দান নামক স্থানে আমার নিকট দিয়ে অতিক্রম করছিলেন। তখন তাঁকে মুশরিকদের এমন গোত্র সম্পর্কে জিজ্ঞেস করা হলো যাদের উপর রাতে আক্রমণ করা হয় এবং এর ফলে তাদের নারী ও শিশুদের আঘাত লাগে (তারা নিহত হয়)? তিনি বললেন, "তারা (নারী ও শিশুরা) তাদের (মুশরিকদের) অন্তর্ভুক্ত।"
1074 - عن أبي هريرة، قال: سئل رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن ذراري المشركين، فقال:"اللَّه أعلم بما كانوا عاملين".
وفي رواية:"من يموت منهم صغيرًا".
متفق عليه: رواه البخاريّ في القدر (6598)، ومسلم في القدر (2659) كلاهما من حديث ابن شهاب، عن عطاء بن يزيد، عن أبي هريرة، فذكره.
والرواية الثانية عند مسلم من طريق سفيان، عن أبي الزِّناد، عن الأعرج، عن أبي هريرة، قال: سئل رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن أطفال المشركين من يموت منهم صغيرًا؟ فقال:"اللَّه أعلم بما كانوا عاملين".
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে মুশরিকদের সন্তান-সন্ততি সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করা হলো। তিনি বললেন: "তারা কী আমল করত, সে সম্পর্কে আল্লাহই সবচেয়ে ভালো জানেন।"
অন্য এক বর্ণনায় (জিজ্ঞাসা করা হয়েছিল) তাদের মধ্যে যারা ছোট অবস্থায় মারা যায় (তাদের সম্পর্কে)।
অন্য বর্ণনায় এসেছে: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে মুশরিকদের সেইসব শিশু-সন্তান সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করা হলো যারা ছোট অবস্থায় মারা যায়? তিনি বললেন: "তারা কী আমল করত, সে সম্পর্কে আল্লাহই সবচেয়ে ভালো জানেন।"
1075 - عن ابن عباس، قال: سئل رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن أولاد المشركين فقال:"اللَّه أعلم بما كانوا عاملين".
وفي رواية:"اللَّه إذْ خلقهم أعلم بما كانوا عاملين".
متفق عليه: رواه البخاريّ في القدر (6597)، ومسلم في القدر (2660) كلاهما من حديث أبي بشر، عن سعيد بن جبير، عن ابن عباس، فذكره.
والرّواية الثانية عند البخاريّ أيضًا (1383).
وفي قوله:"اللَّه أعلم بما كانوا عاملين". أي إن اللَّه علم ما كان، ويعلم ما يكون، وما لا يكون.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে মুশরিকদের (অংশীবাদী বা কাফিরদের) সন্তান-সন্ততিদের (পরিণতি) সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করা হলে তিনি বললেন: "তারা কী কাজ করবে, সে সম্পর্কে আল্লাহই অধিক অবগত।"
অপর এক বর্ণনায় এসেছে: "আল্লাহ যখন তাদের সৃষ্টি করেন, তখন তারা কী কাজ করবে সে সম্পর্কে তিনি অধিক অবগত ছিলেন।"
1076 - عن ابن عباس، قال: أتي عليَّ زمانٌ، وأنا أقول: أولاد المسلمين مع المسلمين، وأولاد المشركين مع المشركين، حتّى حدّثني فلانٌ، عن فلان، أنّ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم سئل عنهم فقال:"اللَّه أعلم بما كانوا عاملين". قال: فلقيت الرّجل، فأخبرني فأمْسَكتُ عن قولي.
صحيح: رواه الإمام أحمد (20697، 23484) من وجهين عن عمّار بن أبي عمّار، عن ابن عباس، فذكره. وإسناده صحيح.
ومن هذا الوجه أخرجه أيضًا ابنُ أبي عاصم في"السنة" (214).
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: এক সময় আমার এমন ধারণা ছিল যে, মুসলিমদের সন্তানরা মুসলিমদের সাথে এবং মুশরিকদের সন্তানরা মুশরিকদের সাথে থাকবে। যতক্ষণ না অমুক ব্যক্তি, অমুক ব্যক্তির সূত্রে আমার কাছে হাদিস বর্ণনা করলো যে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে তাদের (শিশুদের) সম্পর্কে জিজ্ঞেস করা হলো। তখন তিনি বললেন: "তারা কী কাজ করত সে সম্পর্কে আল্লাহই অধিক অবগত।" ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, এরপর আমি সেই লোকটির সাথে সাক্ষাৎ করলাম এবং সে আমাকে ঘটনাটি জানালো। ফলে আমি আমার (পূর্বের) কথা বলা থেকে বিরত থাকলাম।
1077 - عن ابن عباس، قال: كان رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم في بعض مغازيه فسأله رجل، فقال: يا رسول اللَّه، ما تقول في اللاهين؟ فسكت فلم يردّ عليه، فلما فرغ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم من غزوه -أو عدوه- وظهر عليهم طاف، فإذا هو بصبي قد سقط من محفّة، فإذا هو يبحث في الأرض، فأمر مناديًا: أين السّائل عن اللاهين؟ فجاء الرّجلُ إلى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، فنهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن قتل الأولاد، فقال:"اللَّه أعلم بما كانوا عاملين".
حسن: رواه الفريابي في القدر (177)، والبزّار -كشف الأستار (2173) - كلاهما عن أبي كامل الجحدريّ، حدّثنا أبو عوانة، عن هلال بن خبّاب، عن عكرمة، عن ابن عباس، فذكره.
ورواه الطّبرانيّ في الكبير (11/ 330) من طريق أبي عوانة، به، مثله.
قال البزّار:"لا نعلمه عن ابن عباس إلّا من هذا الوجه، ولا حدّث به عن هلال إلّا أبو عوانة".
قلت: إسناده حسن من أجل هلال بن خبّاب فإنّه حسن الحديث، وقد وثّقه الإمام أحمد، وقال ابن عدي: أرجو أنه لا بأس به، وتكلّم فيه ابنُ حبان بلا حجّة.
ولذا قال الهيثميّ في"المجمع" (7/ 218):"رواه البزّار، والطبراني في"الكبير" و"الأوسط"، وفيه هلال بن خبّاب، وهو ثقة، وفيه خلاف، وبقية رجاله ثقات".
وقوله:"اللاهين" قيل: هم البله الغافلون، وقيل: الذين لم يتعمّدوا الذّنوب، وإنّما فرط منهم سهوًا ونسيانًا، وقيل: هم الأطفال الذين لم يقترفوا ذنبًا.
انظر: النهاية (4/ 1283).
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর কোনো এক সামরিক অভিযানে ছিলেন। তখন এক ব্যক্তি তাঁকে জিজ্ঞাসা করল: হে আল্লাহর রাসূল, আপনি ‘লাহিন’ (খেলায় মগ্ন ব্যক্তি বা শিশুদের) সম্পর্কে কী বলেন? তিনি চুপ থাকলেন এবং তাকে কোনো উত্তর দিলেন না। যখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর অভিযান—অথবা শত্রুদের—থেকে ফারিগ হলেন এবং তাদের উপর বিজয় লাভ করলেন, তখন তিনি চারদিকে ঘুরে দেখলেন যে, একটি শিশু পালকি (অথবা হাওদা) থেকে পড়ে গিয়ে মাটিতে হাত-পা নাড়ছে। তখন তিনি একজন ঘোষককে নির্দেশ দিলেন: ‘লাহিন’ সম্পর্কে প্রশ্নকারী কোথায়? লোকটি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে এলো। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) শিশুদের হত্যা করতে নিষেধ করলেন এবং বললেন: “আল্লাহই ভালো জানেন তারা কী কাজ করত।”
1078 - عن عائشة، قالت: قلتُ: يا رسول اللَّه، ذراري المؤمنين؟ فقال:"هم من آبائهم. فقلت: يا رسول اللَّه، بلا عمل؟ ! قال:"اللَّه أعلم بما كانوا عاملين". قلت: يا رسول اللَّه، فذراري المشركين؟ قال:"من آبائهم". قلت: بلا عمل؟ !
قال:"اللَّه أعلم بما كانوا عاملين".
صحيح: رواه أبو داود (4712) عن عبد الوهاب بن نجدة، حدّثنا بقية ح. وحدّثنا موسى بن مروان الرّقيّ وكثير بن عبيد المذحجي، قالا: حدّثنا محمد بن حرب -المعنى- عن محمد بن زياد، عن عبد اللَّه بن أبي قيس، عن عائشة، فذكرته. وإسناده صحيح.
ومحمد بن حرب هو الخولانيّ الحمصيّ الأبرش، ثقة، من رجال الجماعة.
وأمّا ما رُوي عن علي بن أبي طالب، قال: سألتْ خديجةُ النَّبيَّ صلى الله عليه وسلم عن ولَدين ماتا لها في الجاهليّة؟ فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"هما في النّار". قال: فلمّا رأى الكراهيّة في وجهها قال:"لو
رأيتِ مكانهما لأبغضتهما": قالتْ: يا رسول اللَّه، فولدي منك؟ قال:"في الجنّة". قال: ثم قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"إنّ المؤمنين أولادهم في الجنّة، وإنّ المشركين أولادهم في النّاره. ثم قرأ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم {وَالَّذِينَ آمَنُوا وَاتَّبَعَتْهُمْ ذُرِّيَّتُهُمْ بِإِيمَانٍ أَلْحَقْنَا بِهِمْ ذُرِّيَّتَهُمْ} [سورة الطور: 21]". فهو ضعيف.
رواه عبد اللَّه في مسند أبيه (1131) عن عثمان بن أبي شيبة، حدّثنا محمد بن فُضيل، عن محمد ابن عثمان، عن زاذان، عن علي بن أبي طالب، فذكره.
وفيه محمد بن عثمان مجهول. قال الذّهبيّ في"الميزان" (3/ 642):"لا يدري من هو؟ فتشتُ عنه في أماكن، وله خبر منكر". ثم ساق هذا الحديث عن عبد اللَّه بن أحمد بهذا الإسناد.
ومن هذا الوجه أخرجه ابنُ أبي عاصم في"السنة" (213)، وبه أعلّه الهيثميّ في"المجمع" (7/ 217).
والنكارة في هذا الحديث قوله بأن أولاد المشركين في النّار لمخالفته لقوله تعالى: {وَمَا كُنَّا مُعَذِّبِينَ حَتَّى نَبْعَثَ رَسُولًا} [سورة الإسراء: 15]، فإذا كان اللَّه لا يعذِّبُ العاقل لكونه لم تبلغه الدّعوة فلأن لا يعذِّب غير العاقل من الأولاد من باب أولى، ولمخالفته أيضًا العديد من الأحاديث الدّالة على أنّ أولاد المشركين في الجنّة فضلًا من اللَّه ورحمة. من إفادات الشيخ الألبانيّ رحمه اللَّه تعالى في تعليقه على"السنة" لابن أبي عاصم (1/ 95).
وأمّا ما رُوي بأنّ أطفال المشركين خدم أهل الجنّة فلم يثبت بسند يعتمد عليه، وقد رُوي من حديث أنس بن مالك، وفي إسناده مبارك بن فضالة، عن علي بن زيد، عن أنس.
ومن طريقه رواه البزّار - كشف الأستار (2170، 2171) مرفوعًا وموقوفًا.
ومبارك بن فضالة، وعلي بن زيد وهو ابن جدعان كلاهما ضعيفان.
ورواه أبو يعلى، وفيه يزيد الرَّقاشيّ، وهو ضعيف.
ورُوي أيضًا من حديث سمرة بن جندب، وفيه عباد بن منصور، ضعيف. رواه البزّار -كشف الأستار (2172) -.
قال البزّار:"ولا نعلم روى هذا الحديث عن النّبيّ صلى الله عليه وسلم إلا سمرة، ولا عنه إلّا أبو رجاء".
قلت: كذا قال! وقد أخرجه أيضًا عن أنس، كما سبق، ولكن كلّه ضعيف.
আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি বললাম, ‘হে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)! মুমিনদের শিশুরা (তাদের ভাগ্য কী হবে)?’ তিনি বললেন, ‘তারা তাদের পিতৃ-মাতাদের সাথে।’ আমি বললাম, ‘হে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম), আমল ছাড়াই?’ তিনি বললেন, ‘তারা যা আমল করত, আল্লাহ সে সম্পর্কে সর্বাধিক অবগত।’ আমি বললাম, ‘হে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম), তাহলে মুশরিকদের শিশুরা (তাদের অবস্থা কী)?’ তিনি বললেন, ‘তারাও তাদের পিতৃ-মাতাদের সাথে।’ আমি বললাম, ‘আমল ছাড়াই?’ তিনি বললেন, ‘তারা যা আমল করত, আল্লাহ সে সম্পর্কে সর্বাধিক অবগত।’
1079 - عن أبي حسّان، قال: قلت لأبي هريرة: إنّه قد مات لي ابنان، فما أنت محدثي عن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم بحديث تُطَيِّبُ أنفسنا عن موتانا؟ قال: قال: نعم:"صغارهم دَعاميص الجنّة، يتلقَّى أحدُهم أباه -أو قال: أبويه- فيأخذ بثوبه -أو قال: بيده- كما آخذ أنا بصنفة ثوبك هذا، فلا يتناهى -أو قال: فلا ينتهي- حتّى يدخله اللَّه وأباه الجنّة".
صحيح: رواه مسلم في البر والصّلة (2635) من طرف عن المعتمر، عن أبيه، عن أبي السليل، عن أبي حسان، فذكره.
وقوله:"دعاميص". جمع دُعموص -وهو من صغار أهلها- أصل الدّعموص دُويبة تكون في الماء لا تفارقه، أي أن هذا الصغير في الجنّة لا يفارقها.
وقوله:"صنفة ثوبك". أي طرف ثوبك، ويقال: صَنيفة.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আবূ হাসসান বলেন: আমি আবু হুরায়রাকে বললাম, আমার দুজন পুত্রসন্তান মারা গেছে। আপনি কি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে এমন কোনো হাদীস বলবেন, যা আমাদের মৃতদের ব্যাপারে আমাদের মনকে শান্ত করবে? তিনি বললেন: হ্যাঁ, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তাদের ছোট শিশুরা হলো জান্নাতের দা'আমীস (শিশু অধিবাসী)। তাদের মধ্যে একজন তার পিতাকে—অথবা তিনি বলেছেন: তার পিতা-মাতাকে—দেখা করবে এবং তার কাপড়—অথবা তিনি বলেছেন: তার হাত—এমনভাবে ধরবে, যেমনভাবে আমি তোমার এই কাপড়ের কিনারা ধরেছি। আর সে ততক্ষণ পর্যন্ত বিরত হবে না—অথবা তিনি বলেছেন: সে ক্ষান্ত হবে না—যতক্ষণ না আল্লাহ তাকে ও তার পিতাকে জান্নাতে প্রবেশ করান।"
1080 - عن أبي هريرة، عن النّبيّ صلى الله عليه وسلم قال:"ذراري المسلمين في الجنّة يكفلهم إبراهيم".
وفي رواية:"أولاد المسلمين في جبل في الجنّة يكفلهم إبراهيم عليه السلام وسارة، فإذا كان يوم القيامة دُفعوا إلى آبائهم".
حسن: رواه الإمام أحمد (8324) عن موسى بن داود، حدّثنا عبد الرحمن بن ثابت، عن عطاء ابن قرّة، عن عبد اللَّه بن ضَمْرة، عن أبي هريرة، عن النّبيّ صلى الله عليه وسلم فيما أعلم -شكّ موسى- قال (فذكر الحديث).
وإسناده حسن من أجل الخلاف في عبد الرحمن بن ثابت وهو ابن ثوبان العنسيّ ضعّفه النسائيّ، وقال ابن معين: لين، ووثقه أبو حاتم وابن حبان وغيرهما.
وقد صحّحه ابنُ حبان (7446)، والحاكم (2/ 370)، وروياه من هذا الوجه.
والرواية الثانية أخرجها البيهقيّ في القضاء والقدر (3/ 898) بإسناد آخر صحيح عن أبي هريرة، وأشار البيهقيّ بأنه رُوي من وجه آخر عن أبي هريرة مرفوعًا، فلعلّه أشار إلى الإسناد الأوّل.
وللحديث أسانيد أخرى، وهذه أصحّها.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "মুসলমানদের শিশুরা জান্নাতে থাকবে, ইব্রাহীম তাদের দেখাশোনা করবেন।"
অন্য এক বর্ণনায় আছে: "মুসলমানদের সন্তানরা জান্নাতের একটি পাহাড়ে থাকবে। ইব্রাহীম (আঃ) ও সারা তাদের দেখাশোনা করবেন। যখন কিয়ামতের দিন হবে, তখন তাদের তাদের পিতামাতার কাছে ফিরিয়ে দেওয়া হবে।"
1081 - عن سمرة بن جندب، قال: كان النبيّ صلى الله عليه وسلم مما يُكثر أن يقول لأصحابه:"هل رأى أحد منكم من رؤيا؟". ثم إنّه قال ذات غداةٍ: (فذكر الرّؤيا) وفيه:"وأمّا الرّجل الطّويل الذي في الرّوضة فإنّه إبراهيم عليه السلام، وأما الوِلْدان الذين حوله فكلُّ مولود مات على الفطرة". قال: فقال بعضُ المسلمين: يا رسول اللَّه، وأولاد المشركين؟ فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"وأولاد المشركين".
متفق عليه: رواه البخاريّ في التعيير (7047) مطوّلًا، ومسلم في الرؤيا (2275) مختصرًا، كلاهما من حديث أبي رجاء العُطارديّ، عن سمرة بن جندب، فذكر الحديث بطوله، وسيأتي في موضعه.
ورؤيا الأنبياء حقّ؛ ولذا ذهب جمهور المحققين إلى أنّ أولاد المؤمنين والمشركين في الجنّة، ولعلّ هذا آخر الأمرين.
وأمّا ما رُوي عن عائشة أنّها ذكرت لرسول اللَّه صلى الله عليه وسلم أطفال المشركين فقال:"إن شئتُ أسمعتُكِ تَضاغِيهم في النّار" فهو ضعيف جدًّا.
رواه الإمام أحمد (25743) عن وكيع، عن أبي عقيل يحيى بن المتوكل، عن بُهَيَّة، عن عائشة، فذكرته.
وإسناده ضعيف جدًّا، فإنّ أبا عقيل يحيى بن المتوكّل متروك. قال الإمام أحمد:"يحيى بن المتوكل يروي عن بُهيَّة أحاديث منكرة، وهو واهي الحديث".
ورواه ابن عدي في"الكامل" (7/ 2664) وقال:"هذه الأحاديث لأبي عقيل، عن بُهيّة، عن عائشة غير محفوظة، ولا يروي عن بُهيَّة غير أبي عقيل هذا". وبه أعلّه الهيثميّ في"المجمع" (7/ 217).
وبُهيّة أيضًا مجهولة، انفرد بالرّواية عنها أبو عقيل.
وقوله:"تضاغيهم". من ضغا إذا صاح.
وكذلك لا يصح ما رُوي عن سلمة بن يزيد الجعفي، قال: انطلقتُ أنا وأخي إلى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، قال: قلنا: يا رسول اللَّه، إنّ أمَّنا مُليكة كانت تصل الرّحم، وتَقْري الضّيف، وتفعل وتفعل، وهلكتْ في الجاهليّة، فهل ذلك نافعُها شيئًا؟ قال:"لا". قال: قلنا: فإنّها كانت وَأَدَتْ أُختًا لنا في الجاهليّة، فهل ذلك نافعُها شيئًا؟ قال:"الوائِدةُ والموؤودة في النّار، إلَّا أن تدرك الوائدةُ الإسلام فيعفو اللَّهُ عنها".
وفي رواية: فإنّها وَأَدَتْ أُخْتًا لنا في الجاهليّة، فهل ينفع ذلك أختنا؟ . قال:"لا، الوائدةُ والموؤودة في النّار، إلّا أن ندرك الوائدةُ الإسلامَ فتسلم". فلما رأى ما دخل عليهما، قال:"وأمّي مع أمِّكما"
رواه الإمام أحمد (15923)، والطّبراني في الكبير (6319)، والبيهقيّ في القضاء والقدر (3/
884) كلّهم من طريق داود بن أبي هند، عن الشّعبيّ، عن علقمة بن قيس، عن سلمة بن يزيد، فذكره.
وأورده الهيثميّ في"المجمع" (1/ 119) وقال:"رواه أحمد، ورجاله رجال الصّحيح، والطّبرانيّ في الكبير بنحوه".
قلت: وهو كما قال، إلّا أنّ في متنه نكارة، فإنّ الموؤدة -وهي البنت التي تُدفن حيّة- تكون غير بالغة بأيّ ذنب تدخل النّار؟ ! وقد قبَّح اللَّه هذا العمل الشّنيع، فقال: {وَإِذَا الْمَوْءُودَةُ سُئِلَتْ (8) بِأَيِّ ذَنْبٍ قُتِلَتْ (9)} [سورة التكوير: 8 - 9]. فإذا كانت الموؤدة قتلت بدون ذنب فكيف تدخل النّار؟ ! .
وقد استدلّ ابنُ عباس بهذه الآية الكريمة بأنّ اطفال المشركين في الجنّة، فقال:"من زعم أنّهم في النّار فقد كذب، يقول اللَّه عز وجل: {وَإِذَا الْمَوْءُودَةُ سُئِلَتْ (8) بِأَيِّ ذَنْبٍ قُتِلَتْ (9)} قال ابن عباس: هي المدفونة".
أخرجه ابن أبي حاتم في تفسيره.
ويشهد لذلك حديث حسناء بنت معاوية الصريمية قالت: حدّثنا عمّي، قال: قلت للنّبيّ صلى الله عليه وسلم:"من في الجنّة؟". قال:"النبيُّ في الجنّة، والشّهيد في الجنّة، والمولودة في الجنّة، والموؤدة في الجنّة". رواه أبو داود (2521) عن مسدّد، حدّثنا يزيد بن زُريع، حدّثنا عوف، حدّثتنا حسناء بنت معاوية بن سُليم، فذكرته.
وعرف هو الأعرابيّ ومن هذا الوجه رواه أيضًا الإمام أحمد (20583) إلّا أنّ حسناء، ويقال: خنساء مجهولة؛ لأنها لم يرو عنها سوى عوف الأعرابيّ، ولم يوثقها أحد. وعمَّها اسمه أسلم بن سُليم.
قال الحافظ في الإصابة (1/ 39) في ترجمة أسلم بن سليم الصريمي هو:"عمّ خنساء بنت معاوية بن سُليم، سمّاه ابنُ منده، وقال أبو نعيم: لا يصح ذلك - يعني وإنما يروي عن خنساء، عن عمّها غير مسمّى". انتهى.
قلت: حسناء أو خنساء وإن كانت مجهولة، وقال الحافظ في التقريب:"مقبولة". وحسَّن إسنادها في الفتح (3/ 246) إلّا أنّ الحديث له شواهد صحيحة تذكر في مواضعها.
وكذلك لا يصح ما رُوي عن ابن مسعود مرفوعًا:"الوائدة والموؤدة في النّار". رواه أبو داود (4717) عن إبراهيم بن موسى الرّازيّ، حدّثنا ابن أبي زائدة، حدثني أبي، عن عامر، قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم (فذكر الحديث).
قال يحيى بن زكريا: قال أبي: فحدّثني أبو إسحاق، أنّ عامرًا حدّثه بذلك عن علقمة، عن ابن مسعود، عن النّبيّ صلى الله عليه وسلم.
وأبو إسحاق هو عمرو بن عبد اللَّه السّبيعيّ كان قد اختلط بآخره، وابن أبي زائدة سمع منه بعد الاختلاط، والمتن فيه نكارة، فإنّ الموؤدة لا يقطع لها بالنّار؛ لأنّه لا تكليف قبل البلوغ.
সামুরাহ ইবনু জুনদুব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: নবী কারীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর সাহাবীগণকে প্রায়ই জিজ্ঞেস করতেন: "তোমাদের মধ্যে কি কেউ কোনো স্বপ্ন দেখেছো?" এরপর একদিন সকালে তিনি (সেই স্বপ্নের বিস্তারিত) বর্ণনা করলেন। সেই স্বপ্ন বর্ণনার মধ্যে রয়েছে: "আর বাগানে যে লম্বা ব্যক্তি রয়েছেন, তিনি হলেন ইব্রাহিম (আলাইহিস সালাম)। আর তাঁর চারপাশে যে শিশুরা রয়েছে, তারা হলো প্রত্যেক সেই শিশু, যারা ফিতরাতের (ইসলামী স্বভাবের) ওপর মৃত্যুবরণ করেছে।" সামুরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, তখন কয়েকজন মুসলিম জিজ্ঞেস করলেন: "হে আল্লাহর রাসূল, মুশরিকদের (মূর্তিপূজকদের) সন্তানরাও কি?" রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "মুশরিকদের সন্তানরাও।"
1082 - عن وعن أبي هريرة، قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"المؤمن القوي خير وأحبّ إلى اللَّه من المؤمن الضعيف. وفي كلّ خير، احْرِصْ على ما ينفعك واستعنْ باللَّه ولا تعجزْ، وإنْ أصابك شيء فلا تقلْ: لو أنّي فعلتُ كان كذا وكذا. ولكن قل: قدرُ اللَّهِ، وما شاء فعل، فإنَّ لَوْ تفتحُ عمل الشّيطان".
صحيح: رواه مسلم في القدر (6644) من طرق عن عبد اللَّه بن إدريس، عن ربيعة بن عثمان، عن محمد بن يحيى بن حَبَّان، عن الأعرج، عن أبي هريرة، فذكره.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: শক্তিশালী মুমিন দুর্বল মুমিনের চেয়ে উত্তম এবং আল্লাহর কাছে অধিক প্রিয়। আর উভয়ের মধ্যেই কল্যাণ রয়েছে। যা তোমার উপকার করে, তার প্রতি আগ্রহী হও, আল্লাহর সাহায্য চাও এবং অক্ষম হয়ো না। আর যদি তোমার কোনো ক্ষতি হয়, তাহলে বলো না, 'যদি আমি এটা করতাম, তাহলে এমন এমন হতো।' বরং বলো, 'এটা আল্লাহর নির্ধারণ (তাকদীর), আর তিনি যা চেয়েছেন, তাই করেছেন।' কেননা 'যদি' (لو) শব্দটি শয়তানের কার্যকলাপের দরজা খুলে দেয়।
1083 - عن أبي هريرة قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"إنّ الرجل لتكون له عند اللَّه المنزلة فما يبلغها بعمل، فما يزال اللَّه يبتليه بما يكره حتَّى يُبلِّغه إيِّاها".
حسن: رواه أبو يعلى (6069) عن أبي كريب، حدَّثنا يونس بن بكير، حدَّثنا يحيى بن أيوب، حدّثنا أبو زرعة، حدّثنا أبو هريرة، فذكر مثله.
وأورده الهيثمي في"المجمع" (2/ 292) وقال:"رواه أبو يعلى وفي رواية له:"يكون له عند اللَّه المنزلة الرفيعة". ورجاله ثقات".
قلت: وهو كما قال، فقد رواه ابن حبان في"الصحيح" (2908) عن محمد بن العلاء بن كريب (وهو أبو كريب الكوفي المشهور بكنيته)، والحاكم (1/ 344) من طريق أحمد بن عبد الجبار - كلاهما عن يونس بن بكير بإسناده مثله.
قال الحاكم:"هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يخرجاه". ولكن ردَّه الذهبي فقال:"يحيى وأحمد ضعيفان، وليس يونس بحجَّة".
قلت: يحيى هذا هو ابن أيوب بن أبي زرعة البجلي، وثّقه أبو داود، والبزار، وقال ابن معين:"ليس به بأس". فمثله يحسن حديثه، ولا يُضعَّف، وإن كان ابن معين قد ضعّفه في رواية عنه؛ ولذا قال فيه الحافظ:"لا بأس به".
وأحمد بن عبد الجبار (وهو العُطاردي) وإن كان ضعيفًا؛ فقد قال فيه الدارقطني:"لا بأس به". على أنّه لم ينفرد كما رأيت.
وأمّا يونس بن بكير (وهو الشيباني) فهو وإن لم يكن حجَّة، فإنّه لا ينزل عن مرتبة"صدوق"؛ وقد قال الذهبي نفسه في"الميزان" في ترجمته:"أحد أئمَّة الأثر والسير". ثمَّ قال: وقد أخرج مسلم ليونس في الشواهد، لا في الأصول، وكذلك ذكره البخاري مستشهدًا به، وهو حسن الحديث".
انظر بقية أحاديث هذا الباب في كتاب الجنائز.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: নিশ্চয়ই কোনো ব্যক্তির জন্য আল্লাহর কাছে এমন একটি মর্যাদা থাকে যা সে তার আমলের মাধ্যমে লাভ করতে পারে না। তাই আল্লাহ তাকে অপছন্দনীয় বিষয় দ্বারা পরীক্ষা করতে থাকেন, যতক্ষণ না তিনি তাকে সেই মর্যাদায় পৌঁছে দেন।
1084 - عن ابن محيريز، أنّه قال: دخلتُ المسجد، فرأيتُ أبا سعيد الخدريّ، فجلستُ إليه. فسألته عن العزْل؟ فقال: خرجنا مع رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم في غزوة بني المصطلق، فأصبنا سبيًا من سبي العرب، فاشتهينا النّساء، واشتدّ علينا العُزْبة، وأَحْبَبْنا الفداءَ، فأردنا أن نعزل، فقلنا: نعزل ورسولُ اللَّه صلى الله عليه وسلم بين أظهُرنا قبل أن نسأله، فسألناه عن ذلك، فقال:"ما عليكم أن لا تفعلوا، ما من نسمة كائنة إلى يوم القيامة إلّا وهي كائنة".
متفق عليه: رواه مالك في الطّلاق (95) عن ربيعة بن عبد الرحمن، عن محمد بن يحيى بن حبان، عن ابن محيريز، فذكره.
ورواه البخاريّ في العتق (2542) عن عبد اللَّه بن يوسف، عن مالك، بإسناده.
ورواه مسلم في النكاح (1438) من وجه آخر عن إسماعيل بن جعفر، قال: أخبرني ربيعة بإسناده مثله، وفيه كان مع ابن محيريز أبو صرمة وهو الذي سأل أبا سعيد.
وفي رواية عندهما - البخاريّ في النكاح (5210)، ومسلم عن عبد اللَّه بن محمد بن أسماء الضُّبعي، حدّثنا جويرية، عن مالك، عن الزّهريّ، عن ابن محيريز، عن أبي سعيد الخدريّ قال: أصبنا سبيًا، فكنا نعزل، فسألنا رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم فقال:"أوَ إنَّكم لتفعلون؟ أَوَ إنّكم لتفعلون؟ أَوَ إنّكم لتفعلون؟ ما من نسمةٍ كائنةٍ إلى يوم القيامة إلّا هي كائنة". ولم يذكر الجوهري في"مسند الموطأ" رواية جويرية.
وفي مسلم من وجه آخر عن أبي سعيد مرفوعا:"لا عليكم أن لا تفعلوا، فإنّما هو القَدَر".
আবু সাঈদ খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত। ইবনে মুহাইরিয বর্ণনা করেন যে, তিনি (ইবনে মুহাইরিয) বলেন: আমি মসজিদে প্রবেশ করলাম এবং আবু সাঈদ খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে দেখতে পেলাম। আমি তাঁর কাছে বসলাম এবং তাঁকে 'আযল' (সহবাসের পর বীর্যপাত বাইরে করা) সম্পর্কে জিজ্ঞেস করলাম। তিনি বললেন: আমরা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাথে বানু মুসতালিক যুদ্ধে বের হলাম। আমরা আরবের কিছু যুদ্ধবন্দী লাভ করলাম। আমরা নারীদের কামনা করলাম, অবিবাহিত জীবন আমাদের জন্য কঠিন হয়ে গিয়েছিল এবং আমরা মুক্তিপণ (ফিদায়া) পছন্দ করলাম। তাই আমরা 'আযল' করতে চাইলাম। আমরা নিজেদের মধ্যে বলাবলি করলাম: আমরা কি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাদের মাঝে উপস্থিত থাকা অবস্থায় তাঁকে জিজ্ঞেস করার আগেই 'আযল' করব? অতঃপর আমরা এ বিষয়ে তাঁকে জিজ্ঞেস করলাম। তিনি বললেন: "তোমরা যদি এটি না করো তাতে তোমাদের কোনো ক্ষতি নেই, কেননা কিয়ামত পর্যন্ত যত প্রাণ সৃষ্টি হওয়ার কথা, তা অবশ্যই সৃষ্টি হবে।"
1085 - عن جابر، أنّ رجلًا أتى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم فقال: إنّ لي جاريةً هي خادمنا وسانيتُنا، وأنا أطوف عليها، وأنا أكره أن تحمل؟ فقال:"اعزلْ عنها إن شئتَ، فإنّه سيأتيها ما قُدِّر لها". فلبث الرّجلُ، ثم أتاه، فقال: إنّ الجارية قد حَبِلتْ؟ فقال:"قد أخبرتُك أنّه سيأتيها ما قُدِّر لها".
صحيح: رواه مسلم في النكاح (1439) عن أحمد بن عبد اللَّه بن يونس، حدّثنا زهير، أخبرنا أبو الزبير، عن جابر بن عبد اللَّه، فذكره.
وفي رواية:"إنّ ذلك بن يمنع شيئًا أراده اللَّه". قال: فجاء الرّجل، فقال: يا رسول اللَّه، إنّ الجارية التي كنتُ ذكرتُها لكَ حملتْ؟ فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"أنا عبد اللَّه ورسوله".
وفي رواية عند ابن ماجه (89) من وجه آخر عن سالم بن أبي الجعد، عن جابر، وفيه:"ما قُدِّر لنفس شيء إلا هي كائنة".
وفي الصّحيحين -البخاريّ في النكاح (5209)، ومسلم- كلاهما من حديث عمرو، عن عطاء، عن جابر، قال: كنا نعزل على عهد رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم والقرآن ينزل. قال سفيان: لو كان شيئًا ينهى عنه لنهانا عنه القرآن.
وفي رواية: كنّا نعزل على عهد رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، فبلغ ذلك نبي اللَّه صلى الله عليه وسلم فلم يَنْهنا.
জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, এক ব্যক্তি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের নিকট এসে বলল, আমার একজন দাসী আছে, সে আমাদের খেদমত করে এবং সে আমাদের (জমির জন্য) পানি সেচ করে, আমি তার সাথে সহবাস করি কিন্তু আমি চাই না সে গর্ভধারণ করুক। তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "তুমি যদি চাও, তবে তার থেকে আযল (সহবাসের শেষে বীর্য বাইরে ফেলা) করো। কারণ, তার জন্য যা কিছু নির্ধারিত আছে, তা অবশ্যই তার নিকট আসবে।" এরপর লোকটি কিছুকাল পর আবার তাঁর নিকট এসে বলল: দাসীটি তো গর্ভবতী হয়ে গেছে! তিনি বললেন: "আমি তো তোমাকে আগেই বলেছিলাম যে, তার জন্য যা কিছু নির্ধারিত আছে, তা অবশ্যই তার নিকট আসবে।"
অন্য এক বর্ণনায় আছে: "নিশ্চয়ই তা (আযল) আল্লাহর ইচ্ছাকৃত কোনো কিছুকে বাধা দিতে পারে না।" বর্ণনাকারী বলেন, এরপর লোকটি এসে বলল: হে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)! আপনি যার কথা শুনেছিলেন, সেই দাসীটি তো গর্ভবতী হয়েছে? রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন: "আমি আল্লাহর বান্দা এবং তাঁর রাসূল।"
ইবনু মাজাহর (৮৯) এক বর্ণনায় জাবিরের সূত্রে এসেছে: "যার জন্য যা কিছু নির্ধারিত (তাকদীর) হয়েছে, তা অবশ্যই ঘটবে।"
সহীহাইন (বুখারী ৫২০৯ ও মুসলিম)-এর এক বর্ণনায় জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন: আমরা রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের যুগে আযল করতাম, তখন কুরআন অবতীর্ণ হচ্ছিল। সুফিয়ান (বর্ণনাকারী) বলেন: যদি এটা (আযল) নিষিদ্ধ কিছু হতো, তাহলে কুরআন অবশ্যই আমাদের তা থেকে নিষেধ করত।
অন্য এক বর্ণনায় আছে: আমরা রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের যুগে আযল করতাম। এ বিষয়টি নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট পৌঁছল, কিন্তু তিনি আমাদের নিষেধ করেননি।
1086 - عن أنس بن مالك، قال: جاء رجلٌ إلى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، وسأل عن العزْل. فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"لو أنّ الماء الذي يكون منه الولد أهرقته على صخرة لأخرج اللَّه منها -أو يخرج منها ولدًا - الشّك منه- وليخُلقنَّ اللَّه نفسًا هو خالقها".
حسن: رواه الإمام أحمد (12420) عن أبي عاصم، أخبرنا أبو عمرو مبارك الخياط -جدّ ولد عباد بن كثير-، قال: سألت ثمامة بن عبد اللَّه بن أنس، عن العزل، فقال: سمعت أنس بن مالك يقول (فذكره).
وأخرجه البزّار (2163)، وابن أبي عاصم في السنة (366)، والضّياء في المختارة (1819، 1821) كلّهم من هذا الطّريق.
قال الهيثميّ في"المجمع" (4/ 196):"رواه أحمد، والبزّار وإسنادهما حسن".
قلت: إسناده حسن من أجل أبي عمرو مبارك الخياط، وهو من رجال"التعجيل" (1003)، وذكره ابن أبي حاتم وقال:"بصري جاور مكة" -يعني أنّه عرفه-، ولم يذكر فيه جرحا، وقد روى عنه أبو عاصم والعقدي، وذكره ابن حبان في الثقات.
আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: একজন লোক রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে এসে 'আযল' সম্পর্কে জিজ্ঞেস করল। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "যদি সেই পানি, যা থেকে সন্তান হয়, তুমি কোনো পাথরের ওপরও নিক্ষেপ করো, তবুও আল্লাহ তা থেকে সন্তান বের করে আনবেন— অথবা, আল্লাহ তা থেকে সন্তান বের করে আনবেন (বর্ণনাকারীর সন্দেহ)। আর আল্লাহ অবশ্যই সেই প্রাণ সৃষ্টি করবেন, যাকে তিনি সৃষ্টি করতে চান।"
1087 - عن حذيفة بن اليمان: أنّهم كانوا يتحدّثون في العزل، فخرج عليهم رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم فقال:"إنّكم تفعلونه؟". قالوا: نعم. قال:"أوَلم تعلموا أنّ اللَّه عز وجل لم يخلق نسمة هو باريها إلّا وهي كائنة".
حسن: رواه الطّبرانيّ في الكبير (3/ 189) من طريق المثنى بن الصبّاح، عن عمرو بن شعيب، عن سعيد بن المسيب، عن حذيفة، فذكره.
قال الهيثمي في"المجمع" (4/ 297)، وفيه المثنى بن الصبّاح وهو متروك عند الجمهور، وقد وثقه ابن معين، وبقية رجاله ثقات.
قلت: وقد توبع أخرجه الفريابيّ في القدر (434) من وجه آخر عن ابن لهيعة، عن عمرو بن شعيب، بإسناده، مثله.
وابن لهيعة فيه كلام مشهور، وبهذه المتابعة يرتقي الحديث إلى درجة الحسن.
وأمّا ما روي عن جرير، قال: جاء رجلٌ إلى النّبيّ صلى الله عليه وسلم فقال: يا رسول اللَّه، ما خلصت من المشركين إلا بقينة، وأنا أعزل عنها أريد بها السوق؟ فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"جاءها ما قُدّر". فهو ضعيف.
رواه ابنُ أبي عاصم في"السنة" (363) عن أبي بكر بن أبي شيبة (وهو في مصنّفه)، ثنا الفضل ابن دكين، عن مندل، عن جعفر بن أبي المغيرة، عن عبد اللَّه بن أبي الهذيل، عن جرير، فذكره.
ومِنْدل -بكسر الميم، وسكون النّون- ابن علي العنَزِيّ، يقال: اسمه عمرو، ومِنْدل لقب، جمهور أهل العلم مطبقون على تضعيفه.
হুযাইফা ইবনুল ইয়ামান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই তারা আযল (সহবাসের সময় বীর্য বাইরে ফেলা) সম্পর্কে আলোচনা করছিলেন। তখন তাদের কাছে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বের হয়ে আসলেন এবং বললেন: "তোমরা কি তা করছ?" তারা বললেন: "হ্যাঁ।" তিনি বললেন: "তোমরা কি জানো না যে, আল্লাহ তাআলা কোনো প্রাণ সৃষ্টি করেন না, যার স্রষ্টা তিনি, অথচ তা অস্তিত্বে আসবে না?"
