হাদীস বিএন


আল-জামি` আল-কামিল





আল-জামি` আল-কামিল (5648)


5648 - عن ابن عباس، عن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"إن اللَّه حرم عليكم الخمرة، والميسرة، والكوبة". وقال:"كل مسكر حرام".

صحيح: رواه الإمام أحمد (2625)، والطحاوي في شرحه (4/ 216)، والبيهقي (10/ 221) كلهم من حديث عبد اللَّه بن عمرو، عن عبد الكريم، عن قيس بن حَبْتر، عن ابن عباس فذكره.

وإسناده صحيح، وعبد الكريم هو ابن مالك الجزري. وقيس بن حَبْتر -على وزن جعفر-، وهو التميمي الكوفي من رجال"التهذيب".
"والكوبة" هي النرد. وقيل: الطبل. وقيل: البربط. كذا في النهاية.




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "নিশ্চয় আল্লাহ তোমাদের জন্য মদ (খামর), জুয়া (মাইসির) এবং কুবাহকে হারাম করেছেন।" আর তিনি বলেছেন: "প্রত্যেক নেশাজাতীয় বস্তুই হারাম।"









আল-জামি` আল-কামিল (5649)


5649 - عن أبي هريرة أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"قاتل اللَّه يهودا، حرمت عليهم الشحوم، فباعوها، وأكلوا أثمانها".

متفق عليه: رواه البخاري في البيوع (2224)، ومسلم في المساقاة (1583) من طريق يونس (هو ابن يزيد الأيلي)، عن ابن شهاب، سمعت سعيد بن المسيب، عن أبي هريرة فذكره.

أي لا يذاب شحم الميتة، ولا يباع.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, যে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আল্লাহ ইয়াহুদিদের ধ্বংস করুন। তাদের উপর চর্বি হারাম করা হয়েছিল, কিন্তু তারা তা বিক্রি করে দিল এবং তার মূল্য ভক্ষণ করল।"









আল-জামি` আল-কামিল (5650)


5650 - عن أبي هريرة أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"إنّ اللَّه حرم الخمر وثمنها، وحرم الميتة وثمنها، وحرم الخنزير وثمنه".

حسن: رواه أبو داود (3485) عن أحمد بن صالح، حدثنا عبد اللَّه بن وهب، حدثنا معاوية بن صالح، عن عبد الوهاب بن بخت، عن أبي الزناد، عن الأعرج، عن أبي هريرة فذكره. ورواه البيهقي (6/ 12) من طريق أبي داود.

وإسناده حسن من أجل الكلام في معاوية بن صالح، وهو ابن حدير الحضرمي، غير أنه حسن الحديث.

وأما شيخه عبد الوهاب بن بخت فتكلم فيه ابن حبان بكلام شديد، فقال:"كان صدوقًا في الرواية إِلَّا أنه كان يخطئ كثيرًا، ويهم شديدًا، حتى كثر في روايته الأشياء المقلوبة، فبطل الاحتجاج به".

وكان يحيى بن معين حسن الرأي فيه، ووثّقه أبو زرعة، والنسائي، وقال أبو حاتم: لا بأس به". فأين لابن حبان يقول فيه ما قال.

ثم حديثه هذا له شواهد كثيرة، فالصحيح أنه أصاب فيه، ولم يخطئ.




আবূ হুরাইরা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "নিশ্চয় আল্লাহ মদ ও তার মূল্যকে হারাম করেছেন, মৃতদেহ (মৃত প্রাণী) ও তার মূল্যকে হারাম করেছেন এবং শূকর ও তার মূল্যকে হারাম করেছেন।"









আল-জামি` আল-কামিল (5651)


5651 - عن عون بن أبي جحيفة قال: رأيت أبي اشتري حجاما، فأمر بمحاجمه، فكسرت، فسألته عن ذلك، فقال: إن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم نهى عن ثمن الدم، وثمن الكلب، وكسب الأمة. ولعن الواشمة والمستوشمة، وآكل الربا وموكله، ولعن المصور.

صحيح: رواه البخاري في البيوع (2238) عن حجاج بن منهال، حدثنا شعبة قال: أخبرني عون أبي جحيفة فذكره.




আবী জুহাইফা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তাঁর পুত্র আওন বলেন, আমি আমার পিতাকে দেখলাম, তিনি একজন রক্তমোচনকারীকে (হাজ্জাম) ক্রয় করলেন। এরপর তিনি তার রক্তমোচনের সরঞ্জামাদি ভেঙে ফেলার আদেশ দিলেন এবং তা ভেঙে ফেলা হলো। আমি তাকে এ বিষয়ে জিজ্ঞেস করলে তিনি বললেন: নিশ্চয়ই রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) রক্তের মূল্য, কুকুরের মূল্য এবং দাসীর উপার্জন (ব্যভিচারের মাধ্যমে অর্জিত অর্থ) নিষেধ করেছেন। আর তিনি অভিশাপ দিয়েছেন যে উল্কি করে ও যে উল্কি করায়, সুদখোর ও সুদের দাতাকে এবং তিনি অভিশাপ দিয়েছেন চিত্রকরকে।









আল-জামি` আল-কামিল (5652)


5652 - عن عائشة قالت: لما نزلت الآيات من آخر سورة البقرة في الربا قالت: خرج رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم إلى المسجد فحرم التجارة في الخمر.

متفق عليه: رواه البخاري في البيوع (2226)، ومسلم في المساقاة (1580) من طريق الأعمش، عن أبي الضحي مسلم (هو ابن صَبيح)، عن مسروق، عن عائشة فذكرته. واللفظ لمسلم.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, যখন সূরা বাকারার শেষাংশের সুদ (রিবা) সম্পর্কিত আয়াতগুলো নাযিল হলো, তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মসজিদের দিকে গেলেন এবং মদ (খামর)-এর ব্যবসা হারাম ঘোষণা করলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5653)


5653 - عن أبي سعيد الخدري قال: سمعتُ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يخطب بالمدينة قال:"يا
أيها الناس، إن اللَّه تعالى يُعَرِّض بالخمر، ولعل اللَّه سينزل فيها أمرا، فمن كان عنده منها شيء فليبعه، ولينتفع به". قال: فما لبثنا إِلَّا يسيرا حتى قال النبي صلى الله عليه وسلم:"إن اللَّه تعالى حرم الخمر، فمن أدركته هذه الآية، وعنده منها شيء فلا يشرب ولا يبع". قال: فاستقبل الناس بما كان عندهم منها في طريق المدينة، فسفكوها.

صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1578) عن عبيد اللَّه بن عمر القواريري، حدثنا عبد الأعلى بن عبد الأعلى أبو همام، حدثنا سعيد الجريري، عن أبي نضرة، عن أبي سعيد الخدري قال فذكره.

قوله:"يعرض بالخمر" أي بحرمتها، والتعريض هو خلاف التصريح من القول، وهو قوله تعالى: {يَسْأَلُونَكَ عَنِ الْخَمْرِ وَالْمَيْسِرِ قُلْ فِيهِمَا إِثْمٌ كَبِيرٌ وَمَنَافِعُ لِلنَّاسِ وَإِثْمُهُمَا أَكْبَرُ مِنْ نَفْعِهِمَا} [سورة البقرة: 219].

وقوله:"فمن أدركته هذه الآية" هي قوله تعالى: {يَاأَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّمَا الْخَمْرُ وَالْمَيْسِرُ وَالْأَنْصَابُ وَالْأَزْلَامُ رِجْسٌ مِنْ عَمَلِ الشَّيْطَانِ فَاجْتَنِبُوهُ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ} [سورة المائدة: 90].




আবূ সাঈদ আল-খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে মদীনায় খুতবা দিতে শুনেছি। তিনি বললেন: "হে মানবজাতি, নিশ্চয় আল্লাহ তাআলা মদ সম্পর্কে ইঙ্গিত দিয়েছেন এবং সম্ভবত আল্লাহ এ বিষয়ে কোনো নির্দেশ নাযিল করবেন। সুতরাং যার কাছে এর কিছু আছে, সে যেন তা বিক্রি করে দেয় এবং তা দ্বারা উপকৃত হয়।" বর্ণনাকারী বলেন: আমরা অল্পকালই দেরি করলাম, এরপর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "নিশ্চয়ই আল্লাহ তাআলা মদকে হারাম করেছেন। অতএব, যার কাছে এই আয়াত পৌঁছবে এবং তার কাছে মদের কিছু থাকবে, সে যেন তা পান না করে এবং বিক্রিও না করে।" বর্ণনাকারী বলেন: তখন লোকেরা মদীনার রাস্তায় তাদের কাছে যা মদ ছিল, তা নিয়ে এলো এবং তা ঢেলে দিলো।









আল-জামি` আল-কামিল (5654)


5654 - عن عبد الرحمن بن غنم أن الداري كان يُهدي لرسول اللَّه صلى الله عليه وسلم كل عام راوية خمر، فلما كان عام حرمت جاء براوية، فلما نظر إليه نبي اللَّه صلى الله عليه وسلم ضحك، قال:"هل شعرت أنها قد حرمت بعدك؟". قال: يا رسول اللَّه، أفلا أبيعها فأنتفع بثمنها؟ فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"لعن اللَّه اليهود، انطلقوا إلى ما حرم عليهم من شحوم البقر والغنم، فأذابوه، فجعلوه ثمنا له، فباعوا به ما يأكلون، وإن الخمر حرام، وثمنها حرام، وإن الخمر حرام، وثمنها حرام، وإن الخمر حرام، وثمنها حرام".

حسن: رواه أحمد (17995) عن روح، حدثنا عبد الحميد بن بهرام قال: سمعت شهر بن حوشب قال: حدثني عبد الرحمن بن غَنْم فذكره.

وإسناده حسن من أجل الكلام في شهر بن حوشب، فقال الإمام أحمد:"ما أحسن حديثه". ووثّقه، وقال أيضًا:"ليس به بأس". وقال البخاري:"حسن الحديث"، وقوى أمره. وقال ابن معين:"ثقة". وقال أيضًا:"ثبت".

وضعفه شعبة وغيره، لكن قال ابن القطان:"لم أسمع لمن ضَعَّفَه حجة".

فمثله يحسن حديثه إذا لم يكن في حديثه ما ينكر عليه. ورواه عنه عبد الحميد بن بهرام، فإنه كان من أثبت أصحابه.

وحديثه هذا يشهد له ما سبق إِلَّا أن قوله:"أن الداري كان يهدي لرسول اللَّه صلى الله عليه وسلم كل عام راوية خمر" إنْ هو صديق رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، كما في الحديث السابق، مع أنه ليس بثقفي ولا دوسي، كان نصرانيا، فجاء إلى المدينة، فأسلم، وذكر النبي صلى الله عليه وسلم قصة الجساسة والدجال، وكل هذا يحتاج
إلى التأمل.

قال الهيثمي في"المجمع" (4/ 88):"رواه أحمد هكذا عن ابن غنم أن الداري. . . .، وفيه شهر، وحديثه حسن، وفيه كلام، ورواه الطبراني في الكبير عن عبد الرحمن بن غنم، عن تميم الداري أنه كان يهدي، فذكر نحوه باختصار، إِلَّا أنه قال:"حرام شراؤها وثمنها". وإسناده متصل حسن". انتهى.

وهذا الحديث له أسانيد أخرى غير أن الذي ذكرته هو أصحها.




তমীম আদ-দারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি (দারী) প্রতি বছর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে এক মশক মদ হাদিয়া দিতেন। যখন (মদ) হারাম হওয়ার বছর এলো, তখন তিনি এক মশক নিয়ে এলেন। আল্লাহর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সেটির দিকে তাকালেন এবং হাসলেন। তিনি বললেন: "তুমি কি জানতে পেরেছ যে, তোমার (আগমন) পর এটি হারাম করে দেওয়া হয়েছে?" তিনি বললেন: "ইয়া রাসূলাল্লাহ, আমি কি এটি বিক্রি করে এর মূল্য দ্বারা উপকৃত হতে পারি না?" তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "আল্লাহ তাআলা ইয়াহুদিদের উপর লা'নত (অভিশাপ) বর্ষণ করুন। তাদের উপর গরুর ও বকরির চর্বি হারাম করা হয়েছিল, তারা সেদিকে গেল, তারপর তা গলিয়ে তার মূল্য তৈরি করল এবং তার দ্বারা তারা এমন জিনিস বিক্রি করল যা তারা খাবে। নিশ্চয় মদ হারাম, আর এর মূল্যও হারাম। নিশ্চয় মদ হারাম, আর এর মূল্যও হারাম। নিশ্চয় মদ হারাম, আর এর মূল্যও হারাম।"









আল-জামি` আল-কামিল (5655)


5655 - عن عامر بن ربيعة أن رجلًا من ثقيف يكنى أبا تمام أهدى إلى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم راوية خمر، فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"إنها قد حرمت يا أبا تمام". فقال له: يا رسول اللَّه، فأستنفق ثمنها؟ فقال النبي صلى الله عليه وسلم:"إن الذي حرم شربها حرم ثمنها".

صحيح: رواه الطبراني في الأوسط (439) عن أحمد بن خليد، قال: حدثنا عبد اللَّه بن جعفر الرقي، قال: حدثنا عبيد اللَّه بن عمرو، عن زيد بن أبي أنيسة، عن أبي بكر بن حفص، عن عبد اللَّه ابن عامر بن ربيعة، عن أبيه، فذكره. وإسناده صحيح.

قال الهيثمي في"المجمع" (4/ 92):"رجاله رجال الصحيح".

تنبيه: وقع في نسخة الطبراني"عن ربيعة بن عامر، عن أبيه"، والصواب كما ذكرته: عن عبد اللَّه بن عامر بن ربيعة، عن أبيه، وكذلك في مجمع البحرين (1978) وكذلك في نسخة الطبراني الطارق عوض اللَّه (436)؛ أي: أن الحديث من مسند عامر بن ربيعة، وليس من مسند ربيعة.




আমির ইবনু রাবী'আ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, সাকীফ গোত্রের আবূ তাম্মাম কুনিয়াতধারী (উপনামধারী) এক ব্যক্তি রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট এক মশক মদ হাদিয়া দিল। রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "হে আবূ তাম্মাম, নিশ্চয়ই এটি হারাম করা হয়েছে।" তখন সে তাঁকে বলল: "ইয়া রাসূলাল্লাহ! আমি কি এর মূল্য খরচ করে ফেলব?" তখন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "নিশ্চয় যিনি এটি পান করা হারাম করেছেন, তিনি এর মূল্যও হারাম করেছেন।"









আল-জামি` আল-কামিল (5656)


5656 - عن عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده قال: سمعت النبي صلى الله عليه وسلم عام الفتح وهو بمكة يقول:"إن اللَّه ورسوله حرم بيع الخمر والميتة والخنزير". فقيل: يا رسول اللَّه، أرأيت شحوم الميتة فإنه يدهن بها السفن، ويدهن بها الجلود، ويستصبح بها الناس؟ فقال:"لا، هي حرام". ثم قال:"قاتل اللَّه اليهود، إن اللَّه لما حرم عليهم الشحوم جملوها، ثم باعوها، وأكلوا ثمنها".

حسن: رواه أحمد (6997)، والبيهقي (9/ 355) كلاهما من حديث أسامة بن زيد، عن عمرو بن شعيب بإسناده مثله.

وإسناده حسن من أجل عمرو بن شعيب؛ فإنه حسن الحديث. وأيضًا فيه أسامة بن زيد، وهو مختلف فيه غير أنه حسن الحديث.




আবদুল্লাহ ইবনু আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে মক্কা বিজয়ের বছর মক্কায় অবস্থানকালে বলতে শুনেছি: “নিশ্চয় আল্লাহ ও তাঁর রাসূল মদ, মৃতদেহ (মৃত জন্তু) ও শূকরের (মাংস) বিক্রয় হারাম করেছেন।” তখন বলা হলো: হে আল্লাহর রাসূল! মৃত জন্তুর চর্বি সম্পর্কে আপনার অভিমত কী? কেননা তা দিয়ে নৌকায় প্রলেপ দেওয়া হয়, চামড়ায় মালিশ করা হয় এবং লোকেরা প্রদীপ জ্বালানোর কাজে ব্যবহার করে? তিনি বললেন: “না, তা হারাম।” অতঃপর তিনি বললেন: “আল্লাহ ইয়াহুদিদের ধ্বংস করুন! আল্লাহ যখন তাদের জন্য চর্বি হারাম করলেন, তখন তারা তা গলিয়ে ফেলল, অতঃপর তা বিক্রি করল এবং তার মূল্য ভোগ করল।”









আল-জামি` আল-কামিল (5657)


5657 - عن وعن عبد الواحد البناني قال: كنت مع ابن عمر، فجاءه رجل، فقال: يا أبا عبد الرحمن، إني أشتري هذه الحيطان تكون فيها الأعناب، فلا نستطيع أن نبيعها كلها عنبا حتى نعصره. قال: فعن ثمن الخمر تسألني؟ سأحدثك حديثًا سمعته من
رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، كنا جلوسًا مع النبي صلى الله عليه وسلم إذ رفع رأسه إلى السماء، ثم أكبَّ، وَنَكَتَ في الأرض، وقال:"الويل لبني إسرائيل". فقال له عمر: يا نبي اللَّه، لقد أفزعنا قولك لبني إسرائيل، فقال:"ليس عليكم من ذلك بأس، إنهم لما حرمت عليهم الشحوم، فتواطؤوه، فيبيعونه، فيأكلون ثمنه، وكذلك ثمن الخمر عليكم حرام".

حسن: رواه أحمد (5982) عن عبد الصمد، حدثني أبي، ثنا عبد العزيز بن صهيب، عن عبد الواحد البناني قال فذكره.

وإسناده حسن من أجل عبد الواحد البناني، روى عنه عدد، وذكره ابن حبان في ثقات التابعين، وهو من رجال"التعجيل".

قال البوصيري في"إتحاف الخبرة":"رجاله ثقات".




আবদুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, [আব্দুল ওয়াহিদ আল-বুনানি বলেন:] আমি ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর সঙ্গে ছিলাম। তখন এক ব্যক্তি এসে বলল, হে আবূ আব্দুর রহমান! আমি এমন প্রাচীরবেষ্টিত বাগান কিনি যেখানে আঙ্গুর থাকে, কিন্তু আমরা তা সম্পূর্ণ আঙ্গুর হিসাবে বিক্রি করতে পারি না যতক্ষণ না আমরা তা থেকে রস বের করি। তিনি (ইবনে উমর) বললেন, তবে কি তুমি আমার কাছে মদের মূল্য সম্পর্কে জানতে চাইছো? আমি তোমাকে একটি হাদীস বলবো যা আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট শুনেছি। আমরা নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সঙ্গে বসা ছিলাম। হঠাৎ তিনি আকাশের দিকে মাথা উঠালেন, অতঃপর মাথা নত করলেন এবং মাটিতে কিছু একটা আঁকলেন (বা খুঁড়লেন), আর বললেন: "বনী ইসরাঈলের জন্য ধ্বংস (বা দুর্ভোগ)!" তখন উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাঁকে বললেন, হে আল্লাহর নবী! বনী ইসরাঈল সম্পর্কে আপনার এই কথা আমাদের আতঙ্কিত করে দিয়েছে। তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "তোমাদের জন্য এতে কোনো সমস্যা নেই। নিশ্চয় তাদের উপর যখন চর্বি হারাম করা হয়েছিল, তখন তারা একে অপরের সঙ্গে পরামর্শ করে (কৌশলে) তা বিক্রি করে দিত এবং এর মূল্য ভোগ করত। অনুরূপভাবে, মদের মূল্যও তোমাদের উপর হারাম।"









আল-জামি` আল-কামিল (5658)


5658 - عن ابن عمر قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"لعنت الخمر على عشرة أوجه: بعينها، وعاصرها، ومعتصرها، وبائعها، ومبتاعها، وحاملها، والمحمولة إليه، وآكل ثمنها، وشاربها، وساقيها".

حسن: رواه أبو داود (3674)، وابن ماجه (3380)، وأحمد (4787)، وابن أبي شيبة (6/ 447)، والبيهقي (5/ 327) كلهم من طريق عبد العزيز بن عمر بن عبد العزيز، عن عبد الرحمن بن عبد اللَّه الغافقي وأبي طعمة مولاهم أنهما سمعا ابن عمر يقول فذكر الحديث.

وإسناده حسن من أجل أبي طعمة، واسمه هلال، وقد تُكلم فيه غير أنه حسن الحديث، ثم أنه توبع في الإسناد نفسه، تابعه عبد الرحمن بن عبد اللَّه الغافقي، وهو أمير الأندلس، استشهد فيها سنة 115 هـ. وللحافظ كلام جيد في الدفاع عنه، فراجعه.

وصحّحه ابن السكن، كما في"التلخيص" (4/ 136)، وللحديث إسناد آخر، وهو الآتي.




ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "দশটি কারণে মদ অভিশপ্ত: স্বয়ং মদ, যে তা নিংড়ায়, যার জন্য তা নিংড়ানো হয়, যে তা বিক্রি করে, যে তা ক্রয় করে, যে তা বহন করে, যার কাছে তা বহন করে নিয়ে যাওয়া হয়, যে এর মূল্য ভক্ষণ করে, যে তা পান করে এবং যে তা পান করায়।"









আল-জামি` আল-কামিল (5659)


5659 - عن عبد الرحمن بن شريح الخولاني: أنه كان له عم يبيع الخمر، وكان يتصدق بثمنه، فنهيته عنها، فلم ينتهِ، فقدمت المدينة، فلقيت ابن عباس، فسألته عن الخمر وثمنها، فقال: هي حرام، وثمنها حرام. ثم قال: يا معشر أمة محمد صلى الله عليه وسلم، إنه لو كان كتاب بعد كتابكم، أو نبي بعد نبيكم لأنزل فيكم، كما أنزل فيمن كان قبلكم، ولكن أخر ذلك من أمركم إلى يوم القيامة، ولعمري لهو أشد عليكم.

قال: ثم لقيت عبد اللَّه بن عمر، فسألته عن ثمن الخمر، فقال: سأخبرك عن الخمر: أني كنت عند رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم في المسجد، فبينما هو محتب حل حبوته، ثم قال:"من كان عنده من الخمر شيء فليؤذني به". فجعل الناس يأتونه، فيقول
أحدهم: عندي راوية خمر، ويقول الآخر: عندي راوية، ويقول الآخر عندي زق، أو ما شاء اللَّه أن يكون عنده، فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"اجمعوه ببقيع كذا وكذا ثم آذنوني"، ففعلوا، ثم آذنوه. قال: فقمت، فمشيت -وهو متكئ علي-، فلحقنا أبو بكر رضي الله عنه، فأخذني رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، فجعلني عن يساره، وجعل أبا بكر مكاني، ثم لحقنا عمر، فأخذني، وجعلني عن يساره، فمشى بينهما حتى إذا وقف على الخمر قال للناس:"أتعرفون هذه؟" قالوا: نعم يا رسول اللَّه، هذه الخمر. قال:"صدقتم". ثم قال:"إنّ اللَّه تعالى لعن الخمر، وعاصرها، ومعتصرها، وشاربها، وساقيها، وحاملها، والمحمولة إليه، وبائعها، ومشتريها، وآكل ثمنها". ثم دعا بسكين، فقال:"اشحذوها". ففعلوا، ثم أخذها رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يخرق بها الزقاق. فقال الناس: إن في هذه الزقاق لمنفعة، فقال:"أجل، ولكن إنما أفعل غضبا للَّه لما فيها من سخطه". فقال عمر: أنا أكفيك يا رسول اللَّه. قال:"لا". وبعضهم يزيد على بعض في الحديث.

صحيح: رواه الحاكم (4/ 144 - 145) عن أبي العباس محمد بن يعقوب، أبا محمد بن عبد اللَّه ابن عبد الحكم، أنبأ ابن وهب، أخبرني عبد الرحمن بن شريح الخولاني فذكره. وإسناده صحيح.

قال الحاكم:"هذا حديث صحيح الإسناد".

وفي الباب أيضًا عن ابن مسعود، ذكره ابن أبي حاتم في العلل (2/ 27)، وفي معناه أحاديث أخرى، انظر كتاب الأشربة.




আব্দুর রহমান ইবনু শুরাইহ আল-খাওলানি থেকে বর্ণিত, তাঁর এক চাচা ছিলেন যিনি মদ বিক্রি করতেন এবং সেই দাম থেকে দান করতেন। আমি তাকে মদ বিক্রি করতে নিষেধ করেছিলাম, কিন্তু তিনি বিরত হননি। এরপর আমি মদিনায় এসে ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর সাথে সাক্ষাৎ করলাম এবং তাকে মদ ও এর দাম সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলাম। তিনি বললেন: মদ হারাম, আর এর দামও হারাম।

অতঃপর তিনি (ইবনু আব্বাস) বললেন: হে মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর উম্মতের দল! যদি তোমাদের কিতাবের পর অন্য কোনো কিতাব থাকত, অথবা তোমাদের নবীর পর অন্য কোনো নবী আসত, তবে তোমাদের ব্যাপারেও এমন বিধান নাযিল হতো যেমন তোমাদের পূর্ববর্তীদের ব্যাপারে নাযিল হয়েছিল। কিন্তু তোমাদের এই বিষয়টি কিয়ামত দিবস পর্যন্ত বিলম্বিত করা হয়েছে। আমার জীবনের কসম! এটি তোমাদের জন্য আরও কঠোর।

তিনি (আব্দুর রহমান) বলেন: এরপর আমি আব্দুল্লাহ ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর সাথে সাক্ষাৎ করলাম এবং তাকে মদের দাম সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলাম। তিনি বললেন: আমি তোমাকে মদ সম্পর্কে জানাব। আমি মসজিদে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট উপস্থিত ছিলাম। তিনি তখন 'ইহতিবা' (কাপড় দিয়ে হাঁটু মুড়ে বসা) ভঙ্গ করে বললেন: "যার কাছে মদ রয়েছে, সে যেন আমাকে তা জানায়।" এরপর লোকেরা তাঁর কাছে আসতে লাগল। তাদের মধ্যে একজন বলল: আমার কাছে এক 'রাবিয়া' (চামড়ার থলি বোঝাই মদ) মদ আছে। অন্যজন বলল: আমার কাছেও রাবিয়া আছে। আরেকজন বলল: আমার কাছে মশকে (ছোট চামড়ার থলে) আছে, কিংবা আল্লাহ যা ইচ্ছা করেছেন তত পরিমাণ মদ আছে। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "তা অমুক অমুক বাকী' (স্থান)-এ একত্রিত করো, এরপর আমাকে জানাও।" তারা তাই করল এবং তাঁকে জানাল।

তিনি (ইবনু উমার) বলেন: তখন আমি উঠলাম এবং হাঁটতে লাগলাম—আর তিনি (রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমার ওপর ভর দিয়েছিলেন। এরপর আবূ বাকর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আমাদের সাথে মিলিত হলেন। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে ধরলেন এবং আমাকে তাঁর বাম পাশে রাখলেন, আর আবূ বাকর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে আমার স্থানে রাখলেন। এরপর উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আমাদের সাথে মিলিত হলেন। তিনি (রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে ধরলেন এবং আমাকে তাঁর বাম পাশে রাখলেন। এরপর তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) উভয়ের মাঝে হেঁটে চললেন। যখন তিনি মদের স্তূপের কাছে থামলেন, তখন তিনি লোকদের বললেন: "তোমরা কি এটা চেন?" তারা বলল: হ্যাঁ, ইয়া রাসূলাল্লাহ! এটি মদ। তিনি বললেন: "তোমরা সত্য বলেছ।"

এরপর তিনি বললেন: "নিশ্চয়ই আল্লাহ তাআলা মদ, মদ প্রস্তুতকারী (আসিরাহা), মদ পেষণকারী (মু'তাসিরাহা), মদ্যপায়ী, পরিবেশনকারী (সাক্বীয়া), বহনকারী, যার কাছে বহন করা হয়, বিক্রেতা (বাই'ইহা), ক্রেতা (মুশতারীহা) এবং তার মূল্য ভোগকারী—সবাইকে লানত করেছেন।" এরপর তিনি একটি ছুরি চাইলেন এবং বললেন: "তা ধারালো করো।" তারা তাই করল। এরপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তা হাতে নিলেন এবং মশকগুলো তা দিয়ে ছিদ্র করতে লাগলেন। তখন লোকেরা বলল: এই মশকগুলোতে তো উপকারিতা রয়েছে! তিনি বললেন: "ঠিক বলেছ, কিন্তু আমি আল্লাহর সন্তুষ্টির জন্য এমন করছি; কারণ এর মধ্যে আল্লাহর অসন্তুষ্টি নিহিত রয়েছে।" উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: ইয়া রাসূলাল্লাহ! আমি আপনাকে যথেষ্ট করে দেব (আমি কাজটি শেষ করে দিচ্ছি)। তিনি বললেন: "না।" আর এই হাদীসে বর্ণনাকারীদের মধ্যে কেউ কেউ অন্যের চেয়ে কিছু অংশ যোগ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5660)


5660 - عن أنس بن مالك قال: لعن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم في الخمر عشرة: عاصرها، ومعتصرها، وشاربها، وحاملها، والمحمولة إليه، وساقيها وبائعها، وآكل ثمنها، والمشتري لها، والمشتراة له.

حسن: رواه الترمذي (1295)، وابن ماجه (3381) كلاهما من حديث أبي عاصم، عن شبيب ابن بشر، عن أنس بن مالك فذكره.

وقال الترمذي:"هذا حديث غريب".

قلت: إسناده حسن من أجل شبيب بن بشر البجلي الكوفي، مختلف فيه، وثّقه ابن معين، وذكره ابن حبان في الثقات، وقال الحافظ في التلخيص:"رواته ثقات".

قلت: لا يضر كلام أبي حاتم فيه أنه"لين الحديث" لما له أصول صحيحة، فهو قد حفظه وضبطه.




আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মদের (কারণে) দশজনের প্রতি অভিশাপ দিয়েছেন: যে এর নির্যাস বের করে, যে নির্যাস বের করায়, যে তা পান করে, যে তা বহন করে, যার কাছে তা বহন করে নিয়ে যাওয়া হয়, যে তা পরিবেশন করে, যে তা বিক্রি করে, যে এর মূল্য ভোগ করে, যে তা ক্রয় করে এবং যার জন্য তা ক্রয় করা হয়।









আল-জামি` আল-কামিল (5661)


5661 - عن أنس قال: لما حرمت الخمر قال: إني يومئذ لأسقيهم، لأسقي أحد عشر رجلًا، فأمروني، فكفأتها وكفأ الناس آنيتهم بما فيها حتى كادت السكك أن تمتنع من ريحها.

قال أنس: وما خمرهم يومئذ إِلَّا البسر والتمر مخلوطين.

قال: فجاء رجل إلى النبي صلى الله عليه وسلم، فقال: إنه كان عندي مال يتيم فاشتريت به خمرا، أفتأذن لي أن أبيعه، فأرد على اليتيم ماله، فقال النبي صلى الله عليه وسلم:"قاتل اللَّه اليهود، حرمت عليهم الثروب، فباعوها، وأكلوا أثمانها". ولم يأذن لهم النبي صلى الله عليه وسلم في بيع الخمر.

صحيح: رواه أحمد (13275) عن عبد الرزاق -وهو في مصنفه (16970) - قال: أخبرنا معمر، عن ثابت وقتادة، عن أنس فذكره. ومن هذا الطريق رواه أيضًا ابن حبان (4945)، وإسناده صحيح. و"الثروب" جمع ثرب، وهو شحم رقيق.




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: যখন মদ (খামর) হারাম করা হলো, তখন তিনি বললেন: সেই দিন আমি তাদের পান করাচ্ছিলাম—আমি এগারো জন লোককে পান করাচ্ছিলাম। তখন তারা আমাকে নির্দেশ দিল, ফলে আমি (পাত্র উল্টিয়ে) ফেলে দিলাম। লোকেরাও তাদের পাত্রে যা ছিল, সব উল্টিয়ে ফেলে দিল, এমনকি (মদের) গন্ধে রাস্তাগুলো প্রায় রুদ্ধ হয়ে যাওয়ার উপক্রম হয়েছিল।

আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন: সেই দিন তাদের মদ ছিল শুধু কাঁচা ও পাকা খেজুর মিশ্রিত।

তিনি বলেন: এরপর একজন লোক নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে এসে বললো: আমার কাছে এক ইয়াতীমের মাল ছিল, তা দিয়ে আমি মদ কিনেছিলাম। আপনি কি আমাকে তা বিক্রি করার অনুমতি দেবেন, যাতে আমি ইয়াতীমের মাল তাকে ফিরিয়ে দিতে পারি? তখন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: “আল্লাহ ইয়াহুদিদেরকে ধ্বংস করুন! তাদের জন্য চর্বি (থুরুব) হারাম করা হয়েছিল, কিন্তু তারা তা বিক্রি করে সেগুলোর মূল্য ভোগ করেছে।” নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে মদ বিক্রি করার অনুমতি দেননি।









আল-জামি` আল-কামিল (5662)


5662 - عن أنس بن مالك أن أبا طلحة سأل النبي صلى الله عليه وسلم عن أيتام ورثوا خمرا، فقال:"أهريقوه". قال: أفلا نجعلها خلا؟ قال:"لا".

حسن: رواه أبو داود (3675)، والترمذي (1293) معلقًا، وأحمد (12189)، والطحاوي في مشكله (3337)، والبيهقي (6/ 37) كلهم من حديث سفيان الثوري، عن السدي، عن أبي هبيرة، عن أنس بن مالك فذكره.

ورواه الترمذي أيضًا من وجه آخر عن ليث، عن يحيى بن عباد، عن أنس، عن أبي طلحة أنه قال: يا نبي اللَّه، إني اشتريت خمرا لأيتام في حجري. قال:"أهرق الخمر، واكسر الدنان".

قال الترمذي:"وحديث الثوري أصح من حديث الليث".

قال أبو داود:"أبو هبيرة هو يحيى بن عباد الأنصاري".

وإسناده حسن من أجل السدي، وهو إسماعيل بن عبد الرحمن، حسن الحديث.

وفي صحيح مسلم (1983)، والترمذي (1294) عن سفيان بإسناده: سئل النبي صلى الله عليه وسلم عن الخمر تتخذ خلا؟ فقال:"لا".




আনাস ইবনু মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আবূ তালহা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে সেই সকল ইয়াতীম সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলেন যারা মদ্য (খামর) উত্তরাধিকারসূত্রে পেয়েছিল। তখন তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "তোমরা তা ঢেলে দাও।" তিনি (আবূ তালহা) বললেন: আমরা কি এটিকে সিরকায় (ভিনেগার) রূপান্তরিত করব না? তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "না।"









আল-জামি` আল-কামিল (5663)


5663 - عن أسامة بن زيد قال: دخلنا على رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم نعوده، وهو مريض، فوجدناه نائما، قد غطى وجهه ببرد عدني، فكشف عن وجهه، ثم قال:"لعن اللَّه اليهود، يحرمون شحوم الغنم، ويأكلون أثمانها".

صحيح: رواه الحارث بن أبي أسامة -بغية الباحث (433) -، وأبو نعيم في معرفة الصحابة (2/ 183 - 184)،
والحاكم (4/ 194) كلهم من حديث الأعمش، عن جامع بن شداد، عن كلثوم الخزاعي، عن أسامة فذكره.

قال الحاكم:"صحيح الإسناد، ولم يخرجاه".

قلت: وهو كما قال؛ فإن رجاله ثقات. وكلثوم هو ابن علقمة الخزاعي، مخلف في صحبته، والصواب أنه تابعي، وروايته عن النبي صلى الله عليه وسلم مرسلة، ولذا ذكره ابن حبان في ثقات التابعين، وقال الحافظ:"ثقة".

وفي الباب ما روي عن أبي سعيد قال: كان عندنا خمر ليتيم، فلما نزلت المائدة سألت رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عنه، وقلت: إنه ليتيم. فقال"أهريقوه".

رواه الترمذي (1263)، وأحمد (11205)، والطحاوي في مشكله (3340) كلهم من طريق مجالد، عن أبي الوداك، عن أبي سعيد فذكره.

ومجالد هو ابن سعيد بن عمير الهمداني، ضعيف باتفاق أهل العلم، ولكن قال الترمذي: حديث أبي سعيد حديث حسن صحيح. وقال: وقد روي من غير وجه عن النبي صلى الله عليه وسلم نحو هذا، يعني به الشاهد.

ثم قال الترمذي:"وقال بهذا بعض أهل العلم، وكرهوا أن تتخذ الخمر خلا، وإنما كره من ذلك -واللَّه أعلم- أن يكون المسلم في بيته خمر حتى يصير خلا، ورخص بعضهم في خل الخمر إذا وجد قد صار خلا".

وفي الباب أيضًا ما روي عن عبد اللَّه بن أبي بكر أنه قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم"قاتل اللَّه اليهود، نهوا عن أكل الشحم، فباعوه، فأكلوا ثمنه". رواه مالك في صفة النبي صلى الله عليه وسلم (26) عنه مرسلًا.

وفي الباب ما روي عن المغيرة بن شعبة، عن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"من باع الخمر فليشقص الخنازير". رواه أبو داود (3489)، وأحمد (18214)، والدارمي (2147)، والبيهقي (6/ 12) كلهم من حديث طعمة بن عمرو الجعفري، عن عمر بن بيان التغلبي، عن عروة بن المغيرة الثقفي، عن أبيه فذكر الحديث.

وفيه عمر بن بيان التغلبي الكوفي يقول أحمد: لم أعرفه. ولم يوثّقه غير ابن حبان، ولذا قال الحافظ في التقريب:"مقبول". أي عند المتابعة. ولم أجد له متابعة.

وأما قوله"فليشقص" أي فليستحل أكلها، والتشقيص يكون من وجهين: أحدهما أن يذبحها بالمشقص، وهو نصل عريض. والوجه الآخر أن يجعلها أشقاصا وأعضاء بعد ذبحها كما يفصل أجزاء الشاة بعد الذبح. ومعنى الكلام إنما هو توكيد التحريم والتغليظ فيه، يقول: من استحل بيع الخمر فليستحل أكل الخنزير؛ فإنهما في الحرمة والإثم سواء. أفاده الخطابي.

وفي الباب عن عبد اللَّه بن عمرو مرفوعًا:"أن نبي اللَّه صلى الله عليه وسلم نهى عن الخمر، والميسرة،
والكوبة، والغبيراء". وقال:"كل مسكر حرام".

رواه أبو داود (3685) عن موسى بن إسماعيل قال: حدثنا حماد، عن محمد بن إسحاق، عن يزيد بن أبي حبيب، عن الوليد بن عبدة، عن عبد اللَّه بن عمرو فذكره.

ورواه أحمد (6591)، والبيهقي (10/ 221 - 222) كلاهما من وجه آخر عن عبد الحميد بن جعفر، حدثنا يزيد بن حبيب بإسناده إِلَّا أنه قال فيه:"عمرو بن الوليد".

قلت: وقد اختلف في اسم الوليد بن عبدة، فقيل هكذا، وقيل: عمرو بن الوليد. ولم يرو عنه غير يزيد بن أبي حبيب، ولم يوثّقه أحد فهو في عداد المجهولين، وقد جهله أيضًا أبو حاتم، وكذا الذهبي في الميزان (4/ 341)، وقال:"روى عن ابن عبدة يزيد بن أبي حبيب، والخبر معلول في الكوبة والغبيراء".

قال أبو داود: قال ابن سلام أبو عبيد:"الغبيراء السكركة تعمل من الذرة، شراب يعمله الحبشة". وفي الموطأ، كتاب الأشربة (10) عن زيد بن أسلم، عن عطاء بن يسار أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم سئل عن الغبيراء، فقال:"لا خير فيها"، ونهى عنها. إِلَّا أنه مرسل.

قال مالك: فسألت زيد بن أسلم: ما الغبيراء؟ فقال: هي الأسكركة.

وقد روي موقوفًا بإسناد منقطع عن ابن عباس قال:"السحت: الرشوة في الحكم، ومهر البغي، وثمن الكلب، وثمن الفرد، وثمن الخنزير، وثمن الخمر، وثمن الميتة، وثمن الدم، وعسب الفحل، وأجر النائحة، وأجر المغنية، وأجر الكاهن، وأجر الساحر، وأجر القائف، وثمن جلود السباع، وثمن جلود الميتة فإذا دبغت فلا بأس بها، وأجر صور التماثيل، وهدية الشّفاعة، وجعيلة الغزو".

رواه البيهقي (6/ 12 - 13) من طريق إسماعيل بن عياش، عن حبيب بن صالح، عن ابن عباس، وقال: هذا منقطع بين حبيب بن صالح وابن عباس، وهو موقوف.

المحرمات الواردة في أحاديث الباب هي:

الخمر، والخنزير، والميتة، والأصنام، والدم.

ولكل هذه المحرمات تفاصيل في الأكل والشرب، والبيع، والانتفاع، ذكرت ذلك بالتفصيل في"المنة الكبرى" (5/




উসামা ইবনু যায়দ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমরা অসুস্থ অবস্থায় রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর শুশ্রূষা করার জন্য তাঁর নিকট প্রবেশ করলাম, তখন আমরা তাঁকে নিদ্রিত অবস্থায় পেলাম। তিনি তাঁর মুখমণ্ডল আদনী (ইয়েমেনের আদন শহরের তৈরি) চাদর দ্বারা আবৃত করে রেখেছিলেন। তিনি তাঁর মুখমণ্ডল থেকে তা সরিয়ে দিলেন, অতঃপর বললেন: "আল্লাহ তাআলা ইহুদিদের অভিশাপ দিন! তারা মেষের চর্বি হারাম ঘোষণা করে এবং তার মূল্য ভক্ষণ করে।"









আল-জামি` আল-কামিল (5664)


5664 - عن أبي مسعود الأنصاري أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم نهى عن ثمن الكلب، ومهر البغي، وحلوان الكاهن.

متفق عليه: رواه مالك في البيوع (68) عن ابن شهاب، عن أبي بكر بن عبد الرحمن بن
الحارث بن هشام، عن أبي مسعود الأنصاري فذكره.

ورواه البخاري في البيوع (2237)، ومسلم في المساقاة (1567: 39) كلاهما من طريق مالك به.

وقوله:"حلوان الكاهن" هو ما يأخذه المتكهن على كهانته. وهو محرم، وفعله باطل.




আবূ মাসঊদ আল-আনসারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুরের মূল্য, ব্যভিচারিণীর পারিশ্রমিক এবং ভবিষ্যদ্বক্তা (কাহিন)-এর মজুরি থেকে নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5665)


5665 - عن رافع بن خديج قال: سمعت رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يقول:"شر الكسب مهر البغي، وثمن الكلب، وكسب الحجام".

صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1568) عن محمد بن حاتم، حدثنا يحيى بن سعيد القطان، عن محمد بن يوسف قال: سمعت السائب بن يزيد يحدث عن رافع بن خديج فذكره.

وفي رواية:"ثمن الكلب خبيث، ومهر البغي خبيث، وكسب الحجام خبيث".

وأما ما روي عن رافع بن خديج قال:"نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن كسب الأمة حتى يعلم من أين هو؟" فهو ضعيف.

رواه أبو داود (3427)، والحاكم (2/ 42)، والبيهقي (6/ 127) كلهم من حديث ابن أبي فديك، عن عبيد اللَّه -يعني ابن هُرير-، عن أبيه، عن جده رافع بن خديج فذكر الحديث.

وعبد اللَّه هو ابن هُرير بن عبد الرحمن بن رافع بن خديج مستور، وأبو هرير"مجهول".

ولم يحكم عليه الحاكم بالصحة، بل جعله شاهدا لحديث رافع بن رفاعة بن رافع، وجاء فيه:"نهانا رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن كسب الأمة إِلَّا ما عملت بيدها". وقال هكذا بأصابعه نحو الخبز والغزل والنفش.

رواه أحمد (18998)، والحاكم، والبيهقي (6/ 126) كلهم من حديث هاشم بن القاسم، ثنا عكرمة بن عمار، ثنا طارق بن عبد الرحمن القرشي قال: جاء رافع بن رفاعة إلى مجلس الأنصار، فقال، فذكر الحديث، وذكر فيه الأشياء الأخرى.

ورافع بن رفاعة بن رافع بن مالك بن العجلان لم تثبت له الصحبة، كما قال ابن عبد البر.

وطارق بن عبد الرحمن القرشي لم يرو عنه سوى عكرمة بن عمار، ولم يوثّقه أحد غير ابن حبان والعجلي، وكلاهما يوثقان المجاهيل، ولذا قال الذهبي في الميزان:"لا يكاد يعرف".

وكذلك لا يصح ما روي عن أبي أمامة، عن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"لا تبيعوا القينات، ولا تشتروهن، ولا تعلموهن، ولا خير في تجارة فيهن، وثمنهن حرام". في مثل هذا أنزلت هذه الآية {وَمِنَ النَّاسِ مَنْ يَشْتَرِي لَهْوَ الْحَدِيثِ لِيُضِلَّ عَنْ سَبِيلِ اللَّهِ} [سورة لقمان: 6].

رواه الترمذي (1282)، وابن ماجه (2168)، وأحمد (22169)، وعنه البيهقي (6/ 14 - 15)، والحميدي (910) كلهم من طريق عبيد اللَّه بن زحر، عن علي بن يزيد، عن القاسم بن عبد الرحمن، عن أبي أمامة فذكره.

وعبيد اللَّه بن زحر وشيخه علي بن يزيد -وهو ابن أبي زياد الألهاني- ضعيفان.
قال الترمذي: سألت محمدًا عن إسناد هذا الحديث، فقال:"عبيد اللَّه بن زحر ثقة، وعلي بن يزيد ذاهب الحديث، والقاسم أبو عبد الرحمن ثقة".

كذا قال البخاري في عبيد اللَّه بن زحر، وجمهور أهل العلم على أنه ضعيف.

تنبيه: وقع سقط في إسناد ابن ماجه بن علي بن يزيد وبين أبي أمامة، سقط فيه القاسم.




রাফে' ইবনে খাদীজ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "নিকৃষ্টতম উপার্জন হলো ব্যভিচারিণীর পারিশ্রমিক, কুকুরের মূল্য এবং শিঙ্গা লাগানো (কাপিং)-কারীর উপার্জন।"

অন্য এক বর্ণনায় আছে: "কুকুরের মূল্য নিকৃষ্ট, ব্যভিচারিণীর পারিশ্রমিক নিকৃষ্ট এবং শিঙ্গা লাগানো (কাপিং)-কারীর উপার্জন নিকৃষ্ট।"









আল-জামি` আল-কামিল (5666)


5666 - عن عبد اللَّه بن عباس قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن ثمن الكلب وإن جاء يطلب ثمن الكلب فاملأ كفه ترابا.

صحيح: رواه أبو داود (3482) عن الربيع بن نافع أبي توبة، حدثنا عبيد اللَّه -يعني ابن عمرو-، عن عبد الكريم، عن قيس بن حَبْتَر، عن عبد اللَّه بن عباس فذكره.

ورواه الإمام أحمد (2512، 2626)، والبيهقي (6/ 6) كلاهما من حديث عبيد اللَّه بن عمرو بإسناده بلفظ:"نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن ثمن الخمر، ومهر البغي، وثمن الكلب". وقال:"إذا جاء صاحبه يطلب ثمنه فاملأ كفه ترابا".

قال البيهقي:"رواه أبو داود في السنن عن أبي توبة، عن عبيد اللَّه بن عمرو مختصرًا".

ومعنى التراب: الحرمان والخيبة كما قال الخطابي في"المعالم".




আব্দুল্লাহ ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুরের মূল্য গ্রহণ করতে নিষেধ করেছেন। আর যদি কেউ (বিক্রি করা) কুকুরের মূল্য চাইতে আসে, তবে তার হাত ভর্তি করে মাটি দিয়ে দাও।









আল-জামি` আল-কামিল (5667)


5667 - عن أبي هريرة قال: نهى النبي صلى الله عليه وسلم عن كسب الإماء.

صحيح: رواه البخاري في الإجارة (2283) عن مسلم بن إبراهيم، حدثنا شعبة، عن محمد بن جحادة، عن أبي حازم، عن أبي هريرة فذكره. ورواه أيضًا ابن حبان في صحيحه (5159) من حديث شعبة بإسناده وزاد في آخره:"مخافة أن يبغين".

فإن كانت هذه الزيادة محفوظة فالمراد بالكسب هنا الزنا، لا مطلق العمل.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) দাসীদের উপার্জন থেকে নিষেধ করেছেন।