হাদীস বিএন


আল-জামি` আল-কামিল





আল-জামি` আল-কামিল (5668)


5668 - عن أبي هريرة قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"لا يحل ثمن الكلب، ولا حلوان الكاهن، ولا مهر البغي".

صحيح: رواه أبو داود (3484)، والنسائي (4293)، والبيهقي (6/ 6) كلهم من حديث ابن وهب قال: أنبأنا معروف بن سويد الجذامي أن علي بن رباح اللخمي حدثه، أنه سمع أبا هريرة يقول فذكره.

وصحّحه الحاكم (2/ 33) على شرط مسلم إِلَّا أنه رواه من وجه آخر عن أبي هريرة.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "কুকুরের মূল্য, গণকের পারিশ্রমিক এবং ব্যভিচারিণীর উপার্জন হালাল নয়।"









আল-জামি` আল-কামিল (5669)


5669 - عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم أنه نهى عن ثمن الكلب، ومهر البغي، وعسب الفحل.

صحيح: رواه أحمد (10489، 10490)، وابن حبان (4941) كلاهما من طرق عن عطاء بن أبي رباح، عن أبي هريرة فذكره.

وفي رواية زيادة"ثمن السنور". وفي رواية أخرى زيادة"كسب الحجام".
وإسناده صحيح، وبعض الرواة عن عطاء فيهم كلام إِلَّا أنه يجبره الآخرون.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুরের মূল্য, ব্যভিচারিণীর পারিশ্রমিক এবং পুরুষ পশুর প্রজনন ভাড়াকে (গ্রহণ করতে) নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5670)


5670 - عن وعن أبي هريرة قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن ثمن الكلب، وعسب الفحل.

صحيح: رواه ابن ماجه (2160)، والنسائي (4675) كلاهما من حديث محمد بن فضيل، حدثنا الأعمش، عن أبي حازم، عن أبي هريرة فذكره.

وقد سقط ذكر أبي هريرة في نسخة النسائي، ونبه عليه المزي في التحفة.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুরের মূল্য এবং (পশুদের) পাঁঠার (বা পুরুষ পশুর প্রজনন সেবার জন্য নেওয়া) পারিশ্রমিক নিতে নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5671)


5671 - عن أبي هريرة أن النبي صلى الله عليه وسلم نهى عن ثمن الكلب، وكسب الزمَّارة.

صحيح: رواه البغوي في شرح السنة (2038)، والبيهقي (6/ 126) كلاهما من حديث هشام ابن حسان، عن ابن سيرين، عن أبي هريرة فذكره.

وقوله:"نهى عن كسب الزمارة" هو مهر البغي، وهي المرأة الزانية، وقيل معناه المغنية بالمزمار.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুরের মূল্য এবং 'আল-যাম্মারা'র (অর্থাৎ ব্যভিচারিণীর) উপার্জন থেকে নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5672)


5672 - عن أبي هريرة قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن كسب الأمة إِلَّا أن يكون لها عمل حسن، أو كسب يعرف.

حسن: رواه الطحاوي في شرحه (1/ 256)، والبيهقي (8/ 8) كلاهما من حديث ابن وهب، أخبرني مسلم بن خالد، عن العلاء بن عبد الرحمن، عن أبيه، عن أبي هريرة فذكره.

وإسناده حسن من أجل الكلام في مسلم بن خالد، وهو الزنجي، غير أنه حسن الحديث. وقد يشهد له الأحاديث التالية.

ويفهم من هذا الحديث أن المراد بكسب الأمة المنهي عنه هو الاتجار بالفرج فقط، وأما إن كانت تشتغل بالعمل المباح مثل الغزل والخياطة وغيرها فلا حرج في كسبها.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ক্রীতদাসীর উপার্জন নিষিদ্ধ করেছেন, তবে যদি তার কোনো ভালো কাজ বা পরিচিত উপার্জন থাকে (তবে তা বৈধ)।









আল-জামি` আল-কামিল (5673)


5673 - عن عبد اللَّه بن عمرو قال: نهى عن ثمن الكلب، ومهر البغي، وأجر الكاهن، وكسب الحجام.

صحيح: رواه الحاكم (2/ 33)، وعنه البيهقي (6/ 6) من حديث هشيم، ثنا حصين، عن مجاهد، عن عبد اللَّه بن عمرو فذكره.

وقد تكلم في سماع مجاهد عن عبد اللَّه بن عمرو، فأثبته البخاري، ورواه في صحيحه، وكذلك قال علي بن المديني في العلل: إنه سمع عبد اللَّه بن عمرو وعددا من الصحابة الآخرين.

وكسب الحجام ليس بحرام، وإنما يحمل على كراهة التنزيه، لما سيأتي.




আব্দুল্লাহ ইবনে আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুরের মূল্য, ব্যভিচারিণীর মোহর, ভবিষ্যদ্বক্তার মজুরি এবং রক্তমোক্ষণকারীর (হাজ্জামের) উপার্জন নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5674)


5674 - عن ابن عمر أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"خمس من الدواب ليس على المحرم في قتلهن جناح: الغراب، والحِدأة، والعقرب، والفأرة، والكلب العقور".
متفق عليه: رواه مالك في الحج (88) عن نافع، عن ابن عمر فذكره.

ورواه البخاري في جزاء الصيد (1826)، ومسلم في الحج (1199: 76) كلاهما من طريق مالك، به مثله.




ইবনে উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: “পাঁচটি প্রাণী এমন, যা ইহরামকারীর জন্য হত্যা করা দূষণীয় নয়: কাক, চিল, বিচ্ছু, ইঁদুর এবং হিংস্র কুকুর।” (মুত্তাফাকুন আলাইহি)









আল-জামি` আল-কামিল (5675)


5675 - عن عبد اللَّه بن عمر أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم أمر بقتل الكلاب.

متفق عليه: رواه مالك في الاستئذان (14) عن نافع، عن ابن عمر فذكره.

ورواه البخاري في بدء الخلق (3323)، ومسلم في المساقاة (1570: 43) كلاهما من طريق مالك، به مثله.

ورواه مسلم من وجه آخر عن نافع به قال:"كان رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يأمر بقتل الكلاب، فتنبعث في المدينة وأطرافها، فلا ندع كلبا إِلَّا قتلناه، حتى إنا لنقتل كلب المرية من أهل البادية يتبعها".

والمرية: تصغير المرأة.




আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুর হত্যা করার নির্দেশ দিয়েছেন।

অন্য এক বর্ণনায় এসেছে, তিনি (রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুর হত্যা করার নির্দেশ দিতেন। ফলে মদীনা ও তার আশেপাশে (হত্যার জন্য) তৎপরতা শুরু হতো। আমরা এমন কোনো কুকুর ছাড়তাম না যাকে হত্যা করিনি, এমনকি আমরা রাখাল নারীর (অর্থাৎ রাখালের) কুকুরকেও হত্যা করতাম যা তার পিছনে পিছনে চলত।









আল-জামি` আল-কামিল (5676)


5676 - عن ابن عمر قال: مر رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم بقتل الكلاب، فأرسل في أقطار المدينة أن تُقتل.

صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1570: 44) عن أبي بكر بن أبي شيبة، حدثنا أبو أسامة، عن عبيد اللَّه، عن نافع، عن ابن عمر فذكره.




ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুর হত্যা করার নির্দেশ দিলেন। অতঃপর তিনি মদীনার চর্তুদিকে (বিভিন্ন অঞ্চলে) লোক পাঠালেন এই মর্মে যে, সেগুলোকে যেন হত্যা করা হয়।









আল-জামি` আল-কামিল (5677)


5677 - عن ابن عمر أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم أمر بقتل الكلاب إِلَّا كلب صيد، أو كلب غنم، أو ماشية.

فقيل لابن عمر: إن أبا هريرة يقول:"أو كلب زرع".

فقال ابن عمر:"إن لأبي هريرة زرعا".

صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1571) عن يحيى بن يحيى (هو النيسابوري)، أخبرنا حماد ابن زيد، عن عمرو بن دينار، عن ابن عمر فذكره.




ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুর হত্যা করার নির্দেশ দিয়েছেন, তবে শিকারের কুকুর, অথবা ছাগল বা গবাদি পশুর রক্ষণাবেক্ষণের জন্য রাখা কুকুর ছাড়া।

(একবার) ইবনু উমারকে (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলা হলো: আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, 'অথবা শস্যক্ষেতের কুকুরও (হত্যা থেকে বাদ যাবে)।'
তখন ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, 'নিশ্চয়ই আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর ক্ষেত রয়েছে।'









আল-জামি` আল-কামিল (5678)


5678 - عن جابر قال: أمرنا رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم بقتل الكلاب، حتى إن المرأة تقدم من البادية بكلبها، فنقتله، ثم نهى النبي صلى الله عليه وسلم عن قتلها، وقال:"عليكم بالأسود البهيم ذي النقطتين؛ فإنه شيطان".

صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1572) من طريق روح بن عبادة، حدثنا ابن جريج، أخبرني أبو الزبير، أنه سمع جابر بن عبد اللَّه يقول فذكره.

قوله:"ذي النقطتين" وفي نسخة الجمع بين الصحيحين (1644) للحميدي بلفظ:"ذي الطفيتين". والطفيتان الخطان على ظهره.




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম আমাদেরকে কুকুর হত্যা করার নির্দেশ দিয়েছিলেন। এমনকি কোনো মহিলা তার কুকুর নিয়ে গ্রাম থেকে (শহরে) এলে আমরা তা হত্যা করতাম। এরপর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সেগুলোকে হত্যা করতে নিষেধ করলেন এবং বললেন: "তোমরা অবশ্যই সম্পূর্ণ কালো, দুটি বিন্দুযুক্ত কুকুরগুলো (হত্যা করা) আবশ্যক মনে করবে; কেননা তা শয়তান।"









আল-জামি` আল-কামিল (5679)


5679 - عن ابن المغفل قال: أمر رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم بقتل الكلاب، ثم قال:"ما بالهم،
وبال الكلاب؟". ثم رخص في كلب الصيد والغنم.

صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1573) عن عبيد اللَّه بن معاذ، حدثنا أبي، حدثنا شعبة، عن أبي التياح، سمع مطرف بن عبد اللَّه، عن ابن المغفل فذكره.




ইবনে মুগাফ্ফাল (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুর হত্যা করার নির্দেশ দিয়েছিলেন। এরপর তিনি বললেন: "তাদের (মানুষের) এবং কুকুরদের কী হয়েছে?" অতঃপর তিনি শিকারী কুকুর ও পশুপালের রক্ষক কুকুরের ক্ষেত্রে অনুমতি দেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5680)


5680 - عن أبي هريرة قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"من اتخذ كلبا إلا كلب ماشية، أو صيد، أو زرع، انتقص من أجره كل يوم قيراط".

صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1575: 58) عن عبد بن حميد، حدثنا عبد الرزاق، أخبرنا معمر، عن الزهري، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة فذكره.

قال الزهري: فذكر لابن عمر قول أبي هريرة، فقال:"يرحم اللَّه أبا هريرة، كان صاحب زرع".

ومعناه أنه اعتنى بهذا الحديث، وحفظه، وإتقانه؛ لأنه صاحب الشأن.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "যে ব্যক্তি পশুপালনের কুকুর, শিকারের কুকুর অথবা শস্যক্ষেত্রের পাহারাদার কুকুর ছাড়া অন্য কোনো কুকুর পালন করে, তার নেকি থেকে প্রতিদিন এক ক্বীরাত পরিমাণ কমিয়ে দেওয়া হয়।"

সহীহ: এটি মুসলিম মাসাক্বাত অধ্যায়ে (১৫৭৫: ৫৮) আব্দুল ইবনু হুমাইদ হতে, তিনি আব্দুর রাজ্জাক হতে, তিনি মা'মার হতে, তিনি যুহরী হতে, তিনি আবূ সালামা হতে, তিনি আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন।

যুহরী (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন: আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর এই কথাটি ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে উল্লেখ করা হলে তিনি বললেন: "আল্লাহ আবূ হুরায়রাকে রহম করুন, তিনি ছিলেন কৃষিভূমির মালিক (সাহিবু যার')।" এর অর্থ হলো, যেহেতু তিনি এই বিষয়ের সঙ্গে সংশ্লিষ্ট (সাহিবুশ শান) ছিলেন, তাই তিনি এই হাদীসের প্রতি বিশেষ যত্নবান ছিলেন, তা মুখস্থ করেছেন এবং এর বিশুদ্ধতা নিশ্চিত করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5681)


5681 - عن أبي هريرة قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"من أمسك كلبا فإنه ينقص كل يوم من عمله قيراط إِلَّا كلب حرث أو ماشية".

قال ابن سيرين وأبو صالح، عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم:"إِلا كلب غنم، أو حرث، أو صيد".

وقال أبو حازم، عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم:"كلب صيد أو ماشية".

متفق عليه: رواه البخاري في الحرث والمزارعة (2322)، ومسلم في المساقاة (1575: 59) كلاهما من حديث هشام الدستوائي، حدثنا يحيى بن أبي كثير، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة فذكره. واللفظ للبخاري.

والمتابعات التي ذكرها البخاري لم يذكرها مسلم إلا أنه ذكر متابعات أخرى.

منها ما رواه عن أبي الطاهر وحرملة قالا: أخبرنا ابن وهب، أخبرني يونس، عن ابن شهاب، عن سعيد بن المسيب، عن أبي هريرة، عن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"من اقتنى كلبا ليس بكلب صيد، ولا ماشية، ولا أرض، فإنه ينقص من أجره قيراطان كل يوم".

قال مسلم: وليس في حديث أبي الطاهر:"ولا أرض".




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি কুকুর রাখে, তার আমল থেকে প্রতিদিন এক কীরাত পরিমাণ নেকী হ্রাস পেতে থাকে। তবে চাষাবাদের জন্য রাখা কুকুর অথবা গৃহপালিত পশুর পাহারার জন্য রাখা কুকুরের ক্ষেত্রে এই বিধান প্রযোজ্য নয়।"









আল-জামি` আল-কামিল (5682)


5682 - عن ابن عمر أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"من اقتنى كلبا إلا كلبا ضاريا، أو كلب ماشية، نقص من عمله كل يوم قيراطان".

متفق عليه: رواه مالك في الاستئذان (13) عن نافع، عن عبد اللَّه بن عمر فذكره. ورواه البخاري في الذبائح (5482)، ومسلم في المساقاة (1574) كلاهما من طريق مالك به مثله.




ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: “যে ব্যক্তি শিকারী কুকুর অথবা পশুপালের পাহারাদার কুকুর ছাড়া অন্য কোনো কুকুর পালন করে, তার আমল থেকে প্রতিদিন দুই ক্বীরাত পরিমাণ নেকি কমে যায়।”









আল-জামি` আল-কামিল (5683)


5683 - عن ابن عمر، عن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"من اقتنى كلبا إلا كلب ضار، أو ماشية، نقص من عمله كل يوم قيراطان".

صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1574: 24) عن إسحاق بن إبراهيم، أخبرنا وكيع، حدثنا حنظلة بن أبي سفيان، عن سالم، عن أبيه فذكره.

ورواه أيضًا من وجه آخر عن ابن أبي حرملة، عن أبيه فذكر الحديث.

وقال فيه: قال عبد اللَّه: وقال أبو هريرة:"أو كلب حرث".

"والكلب الضاري" هو الكلب المعلم للصيد.




ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: ‘যে ব্যক্তি শিকারী কুকুর অথবা (পশু) পালের রক্ষণাবেক্ষণের কুকুর ছাড়া অন্য কোনো কুকুর পুষবে, প্রতিদিন তার আমল থেকে দুই কীরাত পরিমাণ নেকী হ্রাস করা হবে।’









আল-জামি` আল-কামিল (5684)


5684 - عن وعن ابن عمر يحدث عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"من اتخذ كلبا إلا كلب زرع، أو غنم، أو صيد ينتقص من أجره كل يوم قيراط".

صحيح: رواه مسلم في المستقاة (1574: 56) من طرق عن محمد بن جعفر، حدثنا شعبة، عن قتادة، عن أبي الحكم قال: سمعت ابن عمر يحدث فذكره.

وفيه أنه زاد بعد ذلك:"إلا كلب زرع" بعد ما سمع ذلك من أبي هريرة.

ودليل على صحة حفظ أبي هريرة الأحاديث الآتية:




ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “যে ব্যক্তি কোনো কুকুর পালন করে—কৃষি কাজের, বা ছাগল-ভেড়া (পাহারা), অথবা শিকারের জন্য ব্যবহৃত কুকুর ছাড়া—তার নেক আমল থেকে প্রতিদিন এক কিরাত পরিমাণ হ্রাস করা হয়।”









আল-জামি` আল-কামিল (5685)


5685 - عن سفيان بن أبي زهير -وهو رجل من أزد شنوءة من أصحاب رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم وهو يحدث ناسا معه عند باب المسجد، فقال: سمعت رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يقول:"من اقتنى كلبا لا يغني عنه زرعا، ولا ضرعا، نقص من عمله كل يوم قيراط".

قال: أنت سمعت هذا من رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم؟ فقال: إي ورب هذا المسجد.

متفق عليه: رواه مالك في الاستئذان (12) عن يزيد بن خصيفة، أن السائب بن يزيد أخبره، أنه سمع سفيان بن أبي زهير فذكره.

ورواه البخاري في المزارعة (2323)، ومسلم في المساقاة (1576) كلاهما من حديث مالك به مثله.




সুফিয়ান ইবনে আবি যুহায়র (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত। তিনি (যিনি আযদ শানুআহ গোত্রের এবং রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাহাবীদের একজন) মসজিদের দরজার কাছে কিছু লোকের সাথে কথা বলছিলেন। তখন তিনি বললেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "যে ব্যক্তি এমন কোনো কুকুর লালন-পালন করে যা তার ক্ষেত-খামারের (শস্যের) বা পশুপালের (দুগ্ধজাতীয় গৃহপালিত পশুর) কোনো উপকারে আসে না, তার আমল থেকে প্রতিদিন এক কিরাত পরিমাণ হ্রাস করা হয়।" (উপস্থিত লোকেরা) জিজ্ঞাসা করল: আপনি কি সত্যিই এটি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছ থেকে শুনেছেন? তিনি বললেন: হ্যাঁ, এই মসজিদের রবের কসম! (অর্থাৎ, আল্লাহর কসম!)









আল-জামি` আল-কামিল (5686)


5686 - عن عبد اللَّه بن مغفل قال: إني لممن يرفع أغصان الشجرة عن وجه رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم وهو يخطب، فقال:"لولا أن الكلاب أمة من الأمم لأمرت بقتلها، فاقتلوا منها كل أسود بهيم، وما من أهل بيت يرتبطون كلبا إلا نقص من عملهم كل يوم قيراط، إلا كلب صيد أو كلب حرث أو كلب غنم".

صحيح: رواه أبو داود (2845)، والترمذي (1486)، والنسائي (4280)، وابن ماجه (3205)، وصححه ابن حبان (5657) كلهم من حديث يونس بن عبيد، عن الحسن، عن عبد اللَّه
ابن المغفل قال فذكر الحديث، إلا أن البعض اختصره.

وإسناده صحيح، وقد صرح الحسن بأنه سمع هذا الحديث من عبد اللَّه بن المغفل، لما رواه الإمام أحمد (20548) عن وكيع، عن أبي سفيان بن العلاء قال: سمعت الحسن يحدث أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"لولا أن الكلاب أمة من الأمم لأمرت بقتلها فاقتلوا منها كل أسود بهيم". قال: فقال له رجل: يا أبا سعيد، ممن سمعت هذا؟ قال: فقال: حدثنيه -وحلف- عبد اللَّه بن مغفل عن النبي صلى الله عليه وسلم منذ كذا وكذا، ولقد حدثنا في ذلك المجلس". انتهى.

ونحوه ذكره أيضًا ابن حبان (5656)، وكذلك عند الإمام أحمد (20564) عن عبد الصمد: سألت الحسن عن الرجل يتخذ الكلب في داره قال: حدثني عبد اللَّه بن مغفل أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"من اتخذ كلبا نقص من أجره كل يوم قيراط".

وأما زعم ابن حبان:"ليس لأبي سفيان بن العلاء في الدنيا حديث مسند غير هذا" فليس كما قال: فإن له حديثًا آخر، وهو:"إذا حضرت الصلاة وأنتم في مرابض الغنم فصلوا، وإذا حضرت وأنتم في أعطان الأبل فلا تصلوا؛ فإنها خلقت من الشياطين". رواه الإمام أحمد (20541) عن وكيع، عن أبي سفيان بن العلاء، عن الحسن، عن ابن المغفل فذكره.

والحسن مدلس، ولم يصرح بالسماع، وإن كان صرح بالسماع عنه في حديث قتل الكلاب، ولكن لا يلزم من هذا سماع جميع ما روى عنه.

فقه هذا الباب:

يستفاد من أحاديث هذا الباب أن بيع الكلب وثمنه حرام، وبه قال جمهور أهل العلم، منهم الشافعي، وأحمد، والأوزاعي، وإسحاق، وغيرهم، سواء كان معلَّمًا أو غير معلَّم، ولا قيمة على متلفه.

ورواية عن مالك: لا يجوز بيعه، وعلى متلفه القيمة، كأم الولد، لا يجوز بيعها، وتجب القيمة على متلفها.

وذهب جماعة من أهل العلم إلى أن ما أبيح اقتناؤه جاز بيعه، وما يحرم اقتناؤه يحرم بيعه.

وهو مذهب وسط، ولا بأس بالعمل على هذا لشدة الحاجة إليه، ولا سيما في بعض القطاعات كالجمارك والمطارات والشرطة وغيرها.

وقد ذهب أبو حنيفة وأصحابه إلى جواز بيع الكلاب التي فيها نفع، كما في العمدة (11/ 203) بلفظ:"وأما بيع ذي ناب من السباع سوى الخنزير كالكلب والفهد والأسد والنمر والذب والدب والهر ونحوها فجائز عند أصحابنا".

وقد جعل الطحاوي أن الأمر بقتل الكلاب ثم نسخَه، هو العامل في اختلاف الحكم. فلما أمر بقتل الكلاب حرم ثمنها، ثم أبيح الانتفاع للاصطياد وغيره، ونهي عن قتله، فنسخ ما كان من النهي عن بيعها، وتناول ثمنها.
انظر للمزيد"المنة الكبرى" (5/ 215 - 219)، فإني فصلت فيه قول أهل العلم، وذكرت أدلتهم. وباللَّه التوفيق.




আব্দুল্লাহ ইবনে মুগাফফাল (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি সেই ব্যক্তিদের মধ্যে ছিলাম যারা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) খুতবা দেওয়ার সময় তাঁর মুখ থেকে গাছের ডালপালা সরিয়ে দিচ্ছিল। অতঃপর তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "যদি কুকুররা অন্যান্য জাতিসমূহের মধ্যে একটি জাতি না হতো, তবে আমি তাদের হত্যার নির্দেশ দিতাম। অতএব, তোমরা তাদের মধ্যে প্রতিটি কালো কুচকুচে কুকুরকে হত্যা করো। আর এমন কোনো পরিবার নেই যারা কুকুর রাখে, অথচ প্রতিদিন তাদের আমল থেকে এক কীরাত পরিমাণ নেকি হ্রাস না হয়—শিকারের কুকুর, শস্যক্ষেতের কুকুর অথবা পশুপালের কুকুর ছাড়া।"









আল-জামি` আল-কামিল (5687)


5687 - عن أبي الزبير قال: سألت جابرا عن ثمن الكلب والسنور قال: زجر النبي صلى الله عليه وسلم عن ذلك.

صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1569) عن سلمة بن شبيب، حدثنا الحسن بن أعين، حدثنا معقل، عن أبي الزبير فذكره.

وروي بمعناه أيضًا عن جابر، عن النبي صلى الله عليه وسلم أنه نهى عن ثمن الكلب، وقال:"طعمة جاهلية".

رواه أحمد (14802) عن حسين بن محمد، حدثنا أبو أويس، حدثنا شرحبيل، عن جابر، فذكره.

وأبو أويس هو عبد اللَّه بن عبد اللَّه بن أوس الأصبحي المدني، قريب مالك وصهره، مختلف فيه غير أنه حسن الحديث إذا لم يخالف، ولم يأت ما ينكر عليه.

وكذلك فيه أيضًا شرحبيل وهو ابن سعد أبو سعيد المدني مولى الأنصار، وهو أيضًا مختلف فيه غير أنه حسن الحديث إذا لم يخالف.

وقد زادا في الحديث:"طعمة جاهلية". وهو شاذ، والمحفوظ هو النهي عن ثمن الكلب كما في رواية مسلم.

وأما ما روي عنه"نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن ثمن الكلب والهر إلا الكلب المعلم أو كلب صيد" فهو ضعيف.

رواه أحمد (14411)، وأبو يعلى (1919)، والدارقطني (3/ 73) كلهم من حديث عباد بن العوام، عن الحسن بن أبي جعفر، عن أبي الزبير، عن جابر بن عبد اللَّه فذكره.

قال الدارقطني:"الحسن بن أبي جعفر ضعيف".

ورواه النسائي (4169) من طريق حجاج بن محمد، عن حماد بن سلمة، عن أبي الزبير، عن جابر بن عبد اللَّه فذكره. قال النسائي:"هذا منكر".

وقال في موضع آخر (4295):"حديث حجاج، عن حماد بن سلمة ليس هو بصحيح".

وقال البيهقي (6/ 7):"والأحاديث الصحاح عن النبي صلى الله عليه وسلم في النهي عن ثمن الكلب خالية عن هذا الاستثناء، وإنما الاستثناء في الأحاديث الصحاح في النهي عن الاقتناء، ولعله شبه على من ذكر في حديث النهي عن ثمنه من هؤلاء الرواة الذين هم دون الصحابة والتابعين".

وقد كره من الصحابة جابر ومن التابعين طاوس ومجاهد بيع السنور، ولكن ذهب جمهور أهل
العلم -منهم مالك والشافعي وأحمد وغيرهم- إلى جواز بيعها، وحملوا النهي على إن كانت وحشية يتعذر تسليمها، كما أن في بعض طرقها كلام من أهل العلم، كما قال الترمذي (1279) بعد أن رواه من طريق عيسى بن يونس، عن الأعمش، عن أبي سفيان، عن جابر"نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن ثمن الكلب والسنور". وهو عند أبي داود (3479) من طريق إبراهيم، عن الأعمش.

قال الترمذي:"هذا حديث في إسناده اضطراب، ولا يصح في ثمن السنور. وقد روي هذا الحديث عن الأعمش، عن بعض أصحابه، عن جابر، واضطربوا على الأعمش في رواية هذا الحديث".

"وقد كره قوم من أهل العلم ثمن الهر، ورخص فيه بعضهم، وهو قول أحمد وإسحاق. وروى ابن فضيل، عن الأعمش، عن أبي حازم، عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم من غير هذا الوجه". انتهى.

قلت: أعل كثير من أهل العلم حديث جابر هذا الاختلاف الرواة على الأعمش، ولزيادة بعض الرواة في بعض طرقه:"إلا كلب صيد"، كما رواه النسائي (4295، 4668) من طريق حجاج بن محمد، عن حماد بن سلمة، عن أبي الزبير، عن جابر فذكره.

قال النسائي:"حديث حجاج عن حماد بن سلمة ليس هو بصحيح". وقال مرة:"منكر".

إلا أن الطريق الذي ساقه مسلم طريق سليم لا مطعن فيه، أخرجه البيهقي (6/ 10) من طريق سلمة بن شبيب، ولم يتكلم فيه بشيء، إنما تكلم على الطرق التي رويت عن الأعمش، وبعد أن نقل قول عطاء:"لا بأس بثمن الهرة" قال:"إذا ثبت الحديث، ولم يثبت نسخه لم يدخل عليه قول عطاء".

وقال أيضًا:"وقد حمله بعض أهل العلم على الهر إذا توحش، فلم يقدر على تسليمه. ومنهم من زعم أن ذلك كان في ابتداء الإسلام حين كان محكوما بنجاسته، ثم حين صار محكوما بطهارة سؤره حل ثمنه، وليس على واحد من هذين القولين دلالة بينة". انتهى.

وقال في السنن الصغرى (5/ 214) بتحقيقي باسم"المنة الكبرى":"ولو سمع الشافعي بالخبر الوارد فيه لقال به إن شاء اللَّه، وإنما لا يقول به من توقف في تثبيت روايات أبي الزبير، وقد تابعه أبو سفيان، عن جابر على هذه الرواية من جهة عيسى بن يونس وحفص بن غياث، عن الأعمش، عن أبي سفيان". انتهى.




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আবূ যুবাইর বলেন: আমি তাঁকে কুকুর ও বিড়ালের মূল্য সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলাম। তিনি বললেন: নাবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তা কঠোরভাবে নিষেধ করেছেন।