আল-জামি` আল-কামিল
7288 - عن قال: فدُعِيَ عمرُ، فقرئت عليه قال: اللَّهم بيِّنْ لنا في الخمر بيانا شفاء فنزلت الآية التي في النساء: {ياأَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَقْرَبُوا الصَّلَاةَ وَأَنْتُمْ سُكَارَى} فكان منادي رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا أقيمت الصلاة، ينادي: ألا لا يقربن الصلاة سكران، فُدعيَ عمر فقرئت عليه، فقال: اللَّهم بيّنْ لنا في الخمر بيانا شفاء، فنزلت هذه الآية {فَهَلْ أَنْتُمْ مُنْتَهُونَ} [سورة المائدة: 41] قال عمر: انتهينا.
صحيح: رواه أبو داود (3670)، والترمذي (3049)، والنسائي (5540)، وأحمد (378)، والحاكم (4/ 143)، والضياء المقدسي في المختارة (256) كلهم من طرق عن إسرائيل بن يونس بن أبي إسحاق السبيعي، عن أبي إسحاق، عن أبي مرة عمرو بن شرحبيل، عن عمر فذكره.
قال الحاكم:"صحيح الإسناد" وهو كما قال غير أنه اختلف في سماع أبي ميسرة من عمر، فأثبته البخاري وأبو حاتم ومسلم، وقال أبو زرعة: حديثه عن عمر مرسل. المراسيل لابن أبي حاتم (516).
والمثبت مقدم على النافي كما هو متقرر عند أهل العلم.
كما أعلّه بالإرسال أيضا الترمذي فقال عقب الحديث:"وقد روي عن إسرائيل هذا الحديث مرسلا"، ثم رواه من طريق وكيع، عن إسرائيل، عن أبي إسحاق، عن أبي ميسرة عمرو بن شرحبيل، أن عمر بن الخطاب قال:"اللَّهم بيّن لنا في الخمر بيان شفاء" فذكره بنحوه.
قال:"وهذا أصح من حديث محمد بن يوسف" يعني قوله: عن"عمر بن الخطاب"وفيما قاله نظر؛ وذلك أن محمد بن يوسف لم يتفرد بقوله ذلك، بل تابعه عليه غير واحد، منهم: إسماعيل بن جعفر عند أبي داود، وعبيد الله بن موسى عند النسائي، وخلف بن الوليد عند أحمد، ويحيى بن أبي بكير عند الضياء وغيرهم.
ثم قد توبع إسرائيل أيضا عن قوله"عن عمر" فتابعه زكريا بن أبي زائدة، وسفيان الثوري فيما
ذكره الدارقطني في العلل سؤال (207) وأشار إلى بعض الخلاف فيه على أبي إسحاق، ثم قال:"والصواب قول من قال: عن أبي إسحاق، عن أبي ميسرة، عن عمر".
উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তাঁকে ডাকা হলো এবং তাঁর কাছে এটি পাঠ করা হলো। তিনি বললেন: "হে আল্লাহ! মদ সম্পর্কে আমাদের জন্য এমন নিরাময়মূলক সুস্পষ্ট বিধান দিন।" অতঃপর সূরা নিসার এই আয়াতটি নাযিল হলো: {হে ঈমানদারগণ! নেশাগ্রস্ত অবস্থায় তোমরা সালাতের নিকটবর্তী হয়ো না...}। এরপর যখন সালাতের ইকামত হতো, তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর ঘোষণাকারী ঘোষণা করতেন: সাবধান! নেশাগ্রস্ত অবস্থায় কেউ যেন সালাতের নিকটবর্তী না হয়। এরপর উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে আবার ডাকা হলো এবং তাঁর কাছে (আয়াতটি) পাঠ করা হলো। তিনি বললেন: "হে আল্লাহ! মদ সম্পর্কে আমাদের জন্য এমন নিরাময়মূলক সুস্পষ্ট বিধান দিন।" অতঃপর এই আয়াতটি নাযিল হলো: {অতএব তোমরা কি নিবৃত্ত হবে?} [সূরা আল-মায়েদা: ৪১]। উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: "আমরা নিবৃত্ত হলাম।"
7289 - عن علي بن أبي طالب أن رجلا من الأنصار دعاه، وعبد الرحمن بن عوف فسقاهما قبل أن تحرَّم الخمر، فأمهم عليٌّ في المغرب، وقرأ {قُلْ يَاأَيُّهَا الْكَافِرُونَ (1)} فخلط فيهما، فنزلت: {لَا تَقْرَبُوا الصَّلَاةَ وَأَنْتُمْ سُكَارَى حَتَّى تَعْلَمُوا مَا تَقُولُونَ}.
صحيح: رواه أبو داود (3671)، والترمذي (3026)، والحاكم (2/ 207) كلهم من طريق عطاء بن السائب، عن أبي عبد الرحمن السلمي، عن علي بن أبي طالب فذكره.
وإسناده صحيح، أبو عبد الرحمن السلمي مشهور بكنيته واسمه عبد الله بن حبيب بن رُبيّعة ثقة ثبت، وعطاء بن السائب وإن كان قد اختلط فيرويه عنه سفيان الثوري، وسماعه منه قديما قبل اختلاطه، وقد صحّح يحيى القطان، وأحمد وغيرهما رواية عطاء بن السائب إذا روى عنه سفيان وشعبة، ولذلك صحّحه الترمذي والحاكم.
وأما ما روي عن أبي هريرة، قال: حرمت الخمر ثلاث مرات، قدم رسول الله صلى الله عليه وسلم المدينة وهم يشربون الخمر، ويأكلون الميسر، فسألوا رسول الله عنهما، فأنزل الله على نبيه صلى الله عليه وسلم: {يَسْأَلُونَكَ عَنِ الْخَمْرِ وَالْمَيْسِرِ قُلْ فِيهِمَا إِثْمٌ كَبِيرٌ وَمَنَافِعُ لِلنَّاسِ} [البقرة: 219] إلى آخر الآية، فقال الناس: ما حرم علينا، إنما قال: {فِيهِمَا إِثْمٌ كَبِيرٌ} وكانوا يشربون الخمر.
حتى إذا كان يوم من الأيام، صلى رجل من المهاجرين، أم أصحابه في المغرب، خلط في قراءته، فأنزل الله فيها آية أغلظ منها: {يَاأَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَقْرَبُوا الصَّلَاةَ وَأَنْتُمْ سُكَارَى حَتَّى تَعْلَمُوا مَا تَقُولُونَ} [النساء: 43]، وكان الناس يشربون حتى يأتي أحدهم الصلاة وهو مفيق.
ثم نزلت آية أغلظ من ذلك: {يَاأَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّمَا الْخَمْرُ وَالْمَيْسِرُ وَالْأَنْصَابُ وَالْأَزْلَامُ رِجْسٌ مِنْ عَمَلِ الشَّيْطَانِ فَاجْتَنِبُوهُ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ} [المائدة: 90]، فقالوا: انتهينا ربنا، فقال الناس: يا رسول الله، ناس قتلوا في سبيل الله، وماتوا على فرشهم كانوا يشربون الخمر، ويأكلون الميسر، وقد جعله الله رجسا من عمل الشيطان؟ ! فأنزل الله: {لَيْسَ عَلَى الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جُنَاحٌ فِيمَا طَعِمُوا إِذَا مَا اتَّقَوْا وَآمَنُوا} [المائدة: 93] إلى آخر الآية.
فقال النبي صلى الله عليه وسلم:"لو حرمت عليهم لتركوها كما تركتم". فهو ضعيف.
رواه أحمد (8620) عن سُريج - يعني ابن النعمان - حدثنا أبو معشر، عن أبي وهب مولى أبي هريرة، عن أبي هريرة فذكره.
وإسناده ضعيف من أجل أبي معشر وهو نجيح السندي فإنه ضعيف باتفاق أهل العلم، ومن أجل شيخه أبي وهب فإنه مجهول لا يعرف كما في"التعجيل".
আলী ইবনু আবি তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আনসারদের (সাহাবীদের) মধ্যে থেকে এক ব্যক্তি তাঁকে এবং আবদুর রহমান ইবনু আউফকে (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) দাওয়াত দিলেন এবং মদ হারাম হওয়ার পূর্বে তাদেরকে পান করালেন। এরপর আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) মাগরিবের সালাতে তাদের ইমামতি করলেন এবং {قُلْ يَاأَيُّهَا الْكَافِرُونَ} (সূরা কাফিরুন)-এর কিরাআত পড়লেন। তিনি তাতে ভুল করে ফেললেন (আয়াতগুলো তালগোল পাকিয়ে ফেললেন)। তখন এই আয়াত নাযিল হয়: {لَا تَقْرَبُوا الصَّلَاةَ وَأَنْتُمْ سُكَارَى حَتَّى تَعْلَمُوا مَا تَقُولُونَ} (তোমরা নেশাগ্রস্ত অবস্থায় সালাতের কাছে যেও না, যতক্ষণ না তোমরা কী বলছ, তা বুঝতে পারো)।
7290 - عن أنس بن مالك قال: كنت أسقي أبا عبيدة بن الجراح، وأبا طلحة الأنصاري، وأبي بن كعب شرابا من فضيخ وتمر، قال: فجاءهم آتٍ فقال: إن الخمر قد حرمت، فقال أبو طلحة: يا أنس! قمْ إلى هذه الجرار فاكسرها، قال: فقمتُ إلى مهراسٍ لنا فضربتها بأسفله حتى تكسرت.
متفق عليه: رواه مالك في الأشربة (13) عن إسحاق بن عبد الله بن أبي طلحة، عن أنس بن مالك فذكره. ورواه البخاري في الأشربة (5582)، ومسلم في الأشربة (1980: 9) كلاهما من طريق مالك به.
আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি আবূ উবাইদাহ ইবনুল জাররাহ, আবূ তালহা আনসারী এবং উবাই ইবনে কা'বকে কাঁচা ও পাকা খেজুর মিশ্রিত পানীয় পান করাচ্ছিলাম। তিনি বলেন, তখন একজন লোক এসে তাদের বলল: নিশ্চয়ই মদ হারাম করা হয়েছে। তখন আবূ তালহা বললেন: হে আনাস! তুমি উঠে এই কলসগুলো ভেঙে ফেলো। তিনি (আনাস) বলেন, আমি আমাদের একটি হামামদিস্তা নিয়ে সেগুলোর নিচের অংশ দিয়ে আঘাত করলাম, যতক্ষণ না সেগুলো ভেঙে গেল।
7291 - عن عبد الرحمن بن وعلة - رجل من أهل مصر - أنه سأل عبد الله بن عباس عما يعصر من العنب؟ فقال ابن عباس: إن رجلا أهدى لرسول الله صلى الله عليه وسلم راوية خمر، فقال له رسول الله صلى الله عليه وسلم:"هل علمت أن الله قد حرمها؟" قال: لا، فسارَّ إنسانا، فقال له رسول الله صلى الله عليه وسلم:"بم ساررتَه؟" فقال: أمرته ببيعها، فقال:"إن الذي حرّم شربها حرم بيعها"، قال: ففتح المزاد حتى ذهب ما فيها.
صحيح: رواه مسلم في المساقاة والمزارعة (1579: 68) عن سويد بن سعيد، حدثنا حفص بن ميسرة، عن زيد بن أسلم، عن عبد الرحمن بن وعلة فذكره.
আব্দুল্লাহ ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আব্দুর রহমান ইবনে ওয়া'লাহ—যিনি মিসরের অধিবাসী—তিনি আব্দুল্লাহ ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে আঙ্গুর নিংড়িয়ে তৈরি পানীয় সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলেন। তখন ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: একবার এক ব্যক্তি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে এক মশক ভর্তি মদ হাদিয়া দিল। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে বললেন, "তুমি কি জানো না যে আল্লাহ তা হারাম করে দিয়েছেন?" সে বলল, না। এরপর সে নীরবে আরেকজনের সাথে কানাকানি করল। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে জিজ্ঞাসা করলেন, "তুমি কী নিয়ে তার সাথে কানাকানি করলে?" সে বলল, আমি তাকে এটি বিক্রি করার নির্দেশ দিয়েছি। তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, "নিশ্চয় যিনি এটি পান করাকে হারাম করেছেন, তিনি এটিকে বিক্রি করাকেও হারাম করেছেন।" বর্ণনাকারী বলেন, এরপর সে মশকটির মুখ খুলে দিল এবং ভেতরের সবটুকু (মদ) ফেলে দিল।
7292 - عن سعد بن أبي وقاص قال:" … أتيتُ على نفر من الأنصار والمهاجرين، فقالوا: تعال نطعمك ونسقيك خمرًا وذلك قبل أن تحرم الخمر، قال: فأتيتهم في حش - والحش: البستان - فإذا رأس جزور مشوي عندهم، وزق من خمر، قال: فأكلت وشربت معهم، قال: فذكرت الأنصار والمهاجرين عندهم، فقلت: المهاجرون خيرٌ من الأنصار، قال: فأخذ رجل أحد لحيي الرأس، فضربني به فجرح بأنفي، فأتيت رسول الله صلى الله عليه وسلم فأخبرته، فأنزل الله عز وجل فيّ - يعني نفسه - شأن الخمر: {إِنَّمَا الْخَمْرُ وَالْمَيْسِرُ وَالْأَنْصَابُ وَالْأَزْلَامُ رِجْسٌ مِنْ عَمَلِ الشَّيْطَانِ}".
صحيح: رواه مسلم في فضائل الصحابة (1748) من طريق الحسن بن موسى، ثنا زهير، ثنا سماك بن حرب، ثنا مصعب بن سعد، عن أبيه فذكره في حديث طويل.
সা'দ ইবনু আবী ওয়াক্কাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আমি আনসার ও মুহাজিরদের একটি দলের কাছে গেলাম। তারা বলল: আসো, আমরা তোমাকে খাওয়াব এবং মদ পান করাব। এটা ছিল মদ হারাম হওয়ার আগের ঘটনা। তিনি বলেন: আমি তাদের কাছে একটি বাগানে (হাশশ) গেলাম। সেখানে দেখলাম তাদের কাছে একটি উটের ভাজা মাথা এবং মদের একটি মশক রয়েছে। তিনি বলেন: আমি তাদের সাথে খেলাম এবং পান করলাম। তিনি বলেন: এরপর আমি তাদের সামনে আনসার ও মুহাজিরদের কথা উল্লেখ করলাম এবং বললাম: মুহাজিরগণ আনসারদের চেয়ে শ্রেষ্ঠ। তিনি বলেন: তখন এক ব্যক্তি উটের মাথার চোয়ালের একটি অংশ নিয়ে আমাকে আঘাত করল, ফলে আমার নাকে ক্ষত সৃষ্টি হলো। এরপর আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে এসে তাঁকে বিষয়টি জানালাম। তখন আল্লাহ তাআলা আমার বিষয়ে—অর্থাৎ মদের ঘটনায়—এই আয়াত নাযিল করলেন: "নিশ্চয়ই মদ, জুয়া, পূজার বেদি এবং ভাগ্য নির্ধারক শরসমূহ হচ্ছে অপবিত্র ও শয়তানের কাজ।" (সূরা আল-মা'ইদাহ ৫:৯০)।
7293 - عن ابن عباس قال: {يَاأَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَقْرَبُوا الصَّلَاةَ وَأَنْتُمْ سُكَارَى} و {يَسْأَلُونَكَ عَنِ الْخَمْرِ وَالْمَيْسِرِ قُلْ فِيهِمَا إِثْمٌ كَبِيرٌ وَمَنَافِعُ لِلنَّاسِ} نسختهما التي في المائدة {إِنَّمَا الْخَمْرُ وَالْمَيْسِرُ وَالْأَنْصَابُ}".
حسن: رواه أبو داود (36672) عن أحمد بن محمد المروزي، ثنا علي بن حسين، عن أبيه، عن يزيد النحوي، عن عكرمة، عن ابن عباس فذكره.
وإسناده حسن من أجل علي بن الحسين بن واقد فهو مختلف فيه إلا أنه حسن الحديث ما لم يخالف.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: "হে মুমিনগণ, যখন তোমরা নেশাগ্রস্ত থাকো, তখন নামাযের কাছে যেও না" এবং "তারা আপনাকে মদ ও জুয়া সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করে। বলুন, এ দু'য়ের মধ্যে রয়েছে মহাপাপ এবং মানুষের জন্য কিছু উপকারও"—এই দুটি আয়াতকে সূরা আল-মায়িদাহ-এর এই আয়াতটি রহিত (নাসখ) করে দিয়েছে: "নিশ্চয়ই মদ, জুয়া এবং পূজার বেদীসমূহ..."।
7294 - عن ابن عباس قال: لما حرمت الخمر مشى أصحاب رسول الله صلى الله عليه وسلم بعضهم إلى بعض وقالوا: حُرمت الخمر وجُعلت عدلًا للشرك.
حسن: رواه الطبراني في الكبير (12399)، والحاكم (1444) كلاهما من طريق أبي شهاب الحناط، ثنا الحسن بن عمرو الفقيمي، عن طلحة بن مصرّف، عن سعيد بن جبير، عن ابن عباس فذكره. وإسناده حسن، من أجل أبي شهاب الحناط واسمه عبد ربه بن نافع الكناني فإنه حسن الحديث.
وقال الحاكم:"صحيح على شرط الشيخين".
كذا قال، مع أن الحسن بن عمرو الفقيمي ليس من رجال مسلم.
وقولهم:"وجعلت عدلا للشرك" يعنون قوله تعالى: {يَاأَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّمَا الْخَمْرُ وَالْمَيْسِرُ وَالْأَنْصَابُ وَالْأَزْلَامُ رِجْسٌ مِنْ عَمَلِ الشَّيْطَانِ} [المائدة: 90].
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, যখন মদ (খামর) হারাম করা হলো, তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাহাবীগণ একে অপরের কাছে গেলেন এবং বললেন: মদকে হারাম করা হয়েছে এবং একে শিরকের সমতুল্য করা হয়েছে।
7295 - عن جابر بن عبد الله أنه سمع رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول عام الفتح وهو بمكة: إن الله ورسوله حرم بيع الخمر، والميتة، والخنزير، والأصنام.
متفق عليه: رواه البخاري في البيوع (2236)، ومسلم في المساقاة (1581) كلاهما عن قتيبة بن سعيد، حدثنا ليث، عن يزيد بن أبي حبيب، عن عطاء بن أبي رباح، عن جابر بن عبد الله فذكره مطولا.
وأما ما روي عن جابر بن عبد الله قال: لما كان يوم فتح مكة أهراق رسول الله صلى الله عليه وسلم الخمرَ، وكسرَ جراره، ونهى عن بيعه، وبيع الأصنام فهو ضعيف.
رواه أحمد (14656) عن يحيى بن إسحاق، أخبرنا ابن لهيعة، عن جعفر بن ربيعة، عن عطاء، عن جابر فذكره. وإسناده ضعيف لسوء حفظ ابن لهيعة، وإنه تفرد بقول إهراق الخمر وكسر الجرار يوم الفتح، والصحيح أن الإهراق وقع في المدينة عندما نزل تحريم الخمر كما مضى.
জাবের ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই তিনি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে মক্কা বিজয়ের বছর মক্কাতে থাকাবস্থায় বলতে শুনেছিলেন: "নিশ্চয়ই আল্লাহ এবং তাঁর রাসূল মদ, মৃত প্রাণী, শূকর ও মূর্তি বিক্রি করা হারাম করেছেন।"
হাদীসটি মুত্তাফাকুন আলাইহি। এটি ইমাম বুখারী 'কিতাবুল বুয়ূ' (২২৩৬) এবং ইমাম মুসলিম 'কিতাবুল মুসাকাত' (১৫৮১)-এ উভয়েই কুতাইবা ইবনে সাঈদ থেকে, তিনি লাইস থেকে, তিনি ইয়াযীদ ইবনে আবী হাবীব থেকে, তিনি আতা ইবনে আবী রাবাহ থেকে, তিনি জাবের ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে দীর্ঘ আকারে বর্ণনা করেছেন।
কিন্তু জাবের ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে যা বর্ণিত হয়েছে যে, তিনি বলেছেন: যখন মক্কা বিজয়ের দিন হলো, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মদ ঢেলে ফেলে দেন, এর পাত্রসমূহ ভেঙে দেন এবং এর বিক্রি ও মূর্তি বিক্রি করতে নিষেধ করেন—তা দুর্বল।
এটি ইমাম আহমাদ (১৪৬৫৬) ইয়াহইয়া ইবনে ইসহাক থেকে, তিনি ইবনে লাহীআহ থেকে, তিনি জাফর ইবনে রাবী'আহ থেকে, তিনি আতা থেকে, তিনি জাবের (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণনা করেছেন। এর সনদ দুর্বল কারণ ইবনে লাহীআহর দুর্বল স্মৃতিশক্তির কারণে। আর তিনিই মক্কা বিজয়ের দিন মদ ঢেলে দেওয়া ও পাত্র ভাঙার বিষয়টি এককভাবে বর্ণনা করেছেন। বিশুদ্ধ তথ্য হলো, মদ হারাম হওয়ার বিধান যখন নাযিল হয় তখন মদীনাতেই ঢেলে দেওয়ার ঘটনা ঘটেছিল, যেমনটি পূর্বে উল্লেখ করা হয়েছে।
7296 - عن أنس قال: كنت ساقي القوم في منزل أبي طلحة، وكان خمرهم يومئذ الفضيخ، فأمر رسول الله صلى الله عليه وسلم مناديا ينادي:"ألا إن الخمر قد حرمت" قال: فقال لي أبو طلحة: اخرجْ فأهرِقْها، فخرجتُ فهرقتُها، فجرت في سكك المدينة، فقال بعض القوم: قد قتل قوم، وهي في بطونهم، فأنزل الله {لَيْسَ عَلَى الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جُنَاحٌ فِيمَا طَعِمُوا}. [المائدة: 43].
متفق عليه: رواه البخاري في المظالم (1414)، ومسلم في الأشربة (1980: 3) كلاهما من طريق حماد بن زيد، عن ثابت، عن أنس فذكره.
আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি আবূ তালহা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর ঘরে লোকদের পানীয় পরিবেশন করছিলাম। আর সেদিন তাদের মদ ছিল ফাদীখ (খেজুরের তৈরি)। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) একজন ঘোষককে ঘোষণা দেওয়ার আদেশ করলেন: "সাবধান! নিশ্চয় মদ হারাম করা হয়েছে।" আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন: তখন আবূ তালহা আমাকে বললেন: তুমি বের হয়ে যাও এবং তা ঢেলে দাও। আমি বের হলাম এবং তা ঢেলে দিলাম। ফলে তা মদীনার পথগুলোতে প্রবাহিত হলো। তখন কতক লোক বলল: (মদ হারাম হওয়ার আগে) কিছু লোক তো নিহত হয়েছে আর তা তাদের পেটে ছিল (তখন তাদের কী হবে?)। তখন আল্লাহ তাআলা নাযিল করলেন: "যারা ঈমান এনেছে এবং সৎকর্ম করেছে, তারা পূর্বে যা আহার করেছে, সে ব্যাপারে তাদের কোনো পাপ নেই।" [সূরা আল-মায়েদা: ৪৩]।
7297 - عن جابر بن عبد الله قال: اصطبح ناسٌ الخمر من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم ثم قتلوا شهداء يوم أحد، فقالت اليهود: فقد مات بعض الذين قُتلوا وهي في بطونهم فأنزل الله تعالى: {لَيْسَ عَلَى الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جُنَاحٌ فِيمَا طَعِمُوا}.
صحيح: رواه البزار - كما في تفسير ابن كثير (3/ 186) - عن أحمد بن عبيدة، ثنا سفيان، عن عمرو بن دينار، سمع جابرًا فذكره.
قال البزار عقبه:"وهذا إسناد صحيح".
وقال ابن كثير بعد أن نقل تصحيحه:"ولكن في سياقته غرابة".
بشير بذلك إلى الزيادة التي في آخره وهي قوله:"فقالت اليهود … الخ".
لأنه ساقه عن البخاري بدون الزيادة المذكورة، فقد رواه البخاري (2815) عن علي بن عبد الله (هو ابن المديني)، ثنا سفيان (هو ابن عيينة)، به.
والزيادة من الثقة مقبولة كما هو معلوم
জাবির ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের সাহাবীদের মধ্যে কিছু লোক মদ পান করেছিল, এরপর তারা উহুদ যুদ্ধের দিন শহীদ হিসেবে নিহত হন। তখন ইয়াহুদিরা বলল: "নিহতদের মধ্যে কিছু লোক মারা গেল যখন মদ তাদের পেটে ছিল।" তখন আল্লাহ তাআলা নাযিল করলেন: {যারা ঈমান এনেছে এবং নেক কাজ করেছে, তারা অতীতে যা কিছু পানাহার করেছে, সে বিষয়ে তাদের কোনো পাপ নেই}।
7298 - عن ابن عباس قال: نزل تحريم الخمر في قبيلتين من قبائل الأنصار شربوا حتى إذا نهلوا، عبث بعضهم ببعض، فلما صحوا جعل الرجل يرى الأثر بوجهه وبرأسه وبلحيته، فيقول: قد فعل بي هذا أخي وكانوا إخوة ليس في قلوبهم ضغائن، والله لو ك كان بي رؤوفا رحيما، ما فعل بي هذا، فوقعت في قلوبهم الضغائن، فأنزل الله عز وجل {إِنَّمَا الْخَمْرُ وَالْمَيْسِرُ} إلى قوله {فَهَلْ أَنْتُمْ مُنْتَهُونَ}.
فقال ناس: هي رجس وهي في بطن فلان قتل يوم بدر، وفلان قتل يوم أحد، فأنزل الله عز وجل.
حسن: رواه النسائي في السنن الكبرى (11151)، والحاكم (2/ 141 - 142)، والطبراني في
الكبير (12/ 56)، والضياء في المختارة (10/ 341) كلهم من طريق ربيعة بن كلثوم بن جبير، عن أبيه عن سعيد بن جبير، عن عبد الله بن عباس فذكره.
وإسناده حسن من أجل ربيعة بن كلثوم وأبيه ففيهما كلام يسير غير أنهما حسنا الحديث، وهما من رجال مسلم.
وقال الهيثمي في المجمع (7/ 18):"رواه الطبراني ورجاله رجال الصحيح".
وصححه الحافظ في الفتح (10/ 31).
تنبيه: سقط من مطبوعة الطبراني"عن أبيه" من أثناء الإسناد.
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, মদ হারাম হওয়ার বিধান আনসারের দুটি গোত্রের ব্যাপারে নাযিল হয়েছিল। তারা মদ্যপান করেছিল, যখন তারা পূর্ণ মাত্রায় পান করে নেশাগ্রস্ত হলো, তখন তাদের কেউ কেউ অন্যজনের সাথে খেল-তামাশা করল (বা খারাপ আচরণ করল)। যখন তারা সুস্থ হলো, তখন একজন লোক তার চেহারা, মাথা ও দাড়িতে তার (আচরণের) চিহ্ন দেখতে পেল। সে বলল: "আমার ভাই আমার সাথে এটি করেছে।" অথচ তারা ছিল ভাই, তাদের অন্তরে কোনো বিদ্বেষ ছিল না। সে তখন বলল: "আল্লাহর কসম! যদি সে আমার প্রতি দয়ালু ও স্নেহপরায়ণ হতো, তবে সে আমার সাথে এমন কাজ করত না।" ফলে তাদের অন্তরে বিদ্বেষ সৃষ্টি হলো। এরপর আল্লাহ তাআলা নাযিল করলেন: {নিশ্চয়ই মদ ও জুয়া...} থেকে শুরু করে তাঁর বাণী {অতএব তোমরা কি নিবৃত্ত হবে না?} পর্যন্ত।
তখন কিছু লোক বলল: "এটি (মদ) তো নাপাক বস্তু। অথচ অমুক ব্যক্তির পেটে এই মদ ছিল, যে বদরের দিন নিহত হয়েছে, এবং অমুক ব্যক্তিও, যে উহুদের দিন নিহত হয়েছে।" তখন আল্লাহ আযযা ওয়া জাল (এ বিষয়েও বিধান) নাযিল করলেন।
7299 - عن عبد الله بن عمر أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: من شرب الخمر في الدنيا ثم لم يتُبْ منها حُرمها في الآخرة".
متفق عليه: رواه مالك في الأشربة (11) عن نافع، عن عبد الله بن عمر فذكره. ورواه البخاري في الأشربة (5575)، ومسلم في الأشربة (2003: 76) كلاهما من طريق مالك به مثله.
আবদুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যে ব্যক্তি দুনিয়াতে মদ পান করবে, অতঃপর তা থেকে তওবা করবে না, আখেরাতে সে তা থেকে বঞ্চিত হবে।
7300 - عن جابر بن عبد الله: أن رجلا قدم من جيشان - وجيشان من اليمن - فسأل النبي صلى الله عليه وسلم عن شراب، يشربونه بأرضهم من الذرة يقال له: المزر، فقال النبي صلى الله عليه وسلم:"أو مسكر هو؟" قال: نعم. قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"كل مسكر حرام، إن على الله عز وجل عهدًا لمن يشرب المسكر أن يسقيه من طينة الخبال". قالوا: يا رسول الله، وما طينة الخبال؟ قال:"عرق أهل النار، أو عصارة أهل النار".
صحيح: رواه مسلم في الأشربة (2002) عن قتيبة بن سعيد، حدثنا عبد العزيز الدراوردي، عن عمارة بن غزية، عن أبي الزبير، عن جابر فذكره.
জাবির ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, জাইশান (Jayshan) নামক স্থান থেকে এক ব্যক্তি আসলো— আর জাইশান হলো ইয়ামানের একটি স্থান— সে নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে তাদের দেশে পান করা একটি পানীয় সম্পর্কে জিজ্ঞেস করল, যা যব থেকে তৈরি করা হয় এবং যাকে ‘আল-মিযর’ বলা হয়। তখন নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "এটা কি নেশা সৃষ্টিকারী?" সে বলল: "হ্যাঁ।" রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "প্রত্যেক নেশাদ্রব্য হারাম। নিশ্চয়ই মহান আল্লাহর একটি অঙ্গীকার রয়েছে সেই ব্যক্তির উপর যে নেশাদ্রব্য পান করে যে, তিনি তাকে ত্বীনাতুল খাবাল (Tinatul Khabal) পান করাবেন।" সাহাবাগণ বললেন: হে আল্লাহর রাসূল! ত্বীনাতুল খাবাল কী? তিনি বললেন: "জাহান্নামীদের ঘাম, অথবা জাহান্নামীদের পূঁজ।"
7301 - عن عبد الله بن عمرو قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"من شرب الخمر وسكر لم تقبل له صلاة أربعين صباحا، وإن مات دخل النار. فإن تاب تاب الله عليه. وإن عاد فشرب فسكر لم تقبل له صلاة أربعين صباحا. فإن مات دخل النار. فإن تاب تاب الله عليه. وإن عاد فشرب فسكر لم تقبل له صلاة أربعين صباحا. فإن مات دخل النار. فإن تاب تاب الله عليه. وإن عاد كان حقا على الله أن يسقيه من ردغة الخبال يوم القيامة" قالوا: يا رسول الله، وما ردغة الخبال؟ قال:"عصارة أهل النار".
صحيح: رواه ابن ماجه (4377)، وصححه ابن حبان (5357) كلاهما من طريق الوليد بن مسلم، ثنا الأوزاعي، عن ربيعة بن يزيد، عن عبد الله بن الديلمي، عن عبد الله بن عمرو فذكره.
ورواه النسائي (5670) من طريق بقية، وأبي إسحاق الفزاري، وأحمد (1644) من طريق أبي إسحاق كلاهما عن الأوزاعي به، وفي أوله قصة وزاد أحمد في سياقه أحاديث أخرى.
وإسناده صحيح، وعبد الله بن الديلمي هو ابن فيروز من ثقات كبار التابعين.
وله طريق أخرى رواها النسائي (5664)، وأحمد (1854) وصححه ابن خزيمة (939)، والحاكم (1/ 257) من طريق عروة بن رُويم، عن ابن الديلمي الذي كان يسكن ببيت المقدس أنه مكث في طلب عبد الله بن عمرو بن العاص بالمدينة فسأل عنه. قالوا: قد سار إلى مكة فأتبعه، فوجده قد سار إلى الطائف، فأتبعه فوجده في زرعه يمشي مخاصرا رجلا من قريش، والقريشي يُزنُّ بالخمر، فلما لقيته سلّمتُ عليه وسلّم عليَّ، قال: ما عدا بك اليوم ومن أين أقبلت؟ فأخبرته، ثم سألته هل سمعت يا عبد الله بن عمرو رسول الله صلى الله عليه وسلم ذكر شراب الخمر بشيء؟ قال: نعم فانتزع القرشي يده ثم ذهب فقال: سمعت النبي صلى الله عليه وسلم يقول:"لا يشرب الخمر رجل من أمتي فيقبل له صلاة أربعين صباح". وإسناده صحيح.
আব্দুল্লাহ ইবনু 'আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “যে ব্যক্তি মদ পান করে এবং নেশাগ্রস্ত হয়, চল্লিশ দিন সকাল পর্যন্ত তার সালাত (নামাজ) কবুল করা হয় না। আর যদি সে এ অবস্থায় মারা যায়, তবে সে জাহান্নামে প্রবেশ করবে। যদি সে তওবা করে, তবে আল্লাহ তার তওবা কবুল করেন। যদি সে আবার ফিরে আসে (পুনরায় পান করে) এবং নেশাগ্রস্ত হয়, তবে চল্লিশ দিন সকাল পর্যন্ত তার সালাত কবুল করা হয় না। যদি সে এ অবস্থায় মারা যায়, তবে সে জাহান্নামে প্রবেশ করবে। যদি সে তওবা করে, তবে আল্লাহ তার তওবা কবুল করেন। যদি সে আবার ফিরে আসে (তৃতীয়বার পান করে) এবং নেশাগ্রস্ত হয়, তবে চল্লিশ দিন সকাল পর্যন্ত তার সালাত কবুল করা হয় না। যদি সে এ অবস্থায় মারা যায়, তবে সে জাহান্নামে প্রবেশ করবে। যদি সে তওবা করে, তবে আল্লাহ তার তওবা কবুল করেন। আর যদি সে চতুর্থবার ফিরে আসে (চতুর্থবার পান করে), তবে কিয়ামতের দিন আল্লাহ তাআলার কাছে এটা ন্যায্য যে তিনি তাকে 'রাদগাতুল খাবাল' থেকে পান করাবেন।” সাহাবায়ে কিরাম জিজ্ঞেস করলেন, হে আল্লাহর রাসূল! 'রাদগাতুল খাবাল' কী? তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: “এটা হচ্ছে জাহান্নামীদের রক্ত-পুঁজ/নিঃসৃত রস।”
7302 - عن عبد الله بن عمرو قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"من مات من أمتي وهو يشرب الخمر، حرّمها الله عليه في الآخرة، ومن مات من أمتي وهو يلبس الحرير حرّم الله عليه لُبْسَه في الآخرة".
صحيح: رواه أبو يعلى الموصلي - كما في إتحاف الخيرة المهرة للبوصيري (5480) من طريق عبد الأعلى بن عبد الأعلى، عن سعيد الجريري، عن ميمون بن أستاذ، عن عبد الله بن عمرو فذكره.
وهذا إسناد صحيح، وسعيد الجريري وإن كان اختلط غير أن سماع عبد الأعلى منه صحيح، قال العجلي في ثقاته:"سعيد بن إياس الجريري بصري ثقة واختلط بآخره". وذكر من روى عنه بعد الاختلاط ثم قال:"إنما الصحيح عنه: حماد بن سلمة، وإسماعيل ابن علية، وعبد الأعلى من أصحهم سماعا، سمع منه قبل أن يختلط بثمان سنين، وسفيان الثوري وشعبة صحيح".
وأما شيخه ميمون بن أستاذ فثقة أيضا، فقد وثقه ابن معين - كما في الجرح والتعديل (8/ 233)، وذكره ابن حبان في الثقات (5/ 418).
وقد رواه أحمد (6948) عن يزيد بن هارون وأبو يعلى الموصلي - كما في الإتحاف (5479) - من طريق بشر بن المفضل - كلاهما عن الجريري، عن ميمون بن أستاذ، عن الصدفي، عن عبد الله بن عمرو بنحوه. فزاد في إسناده رجلا وهو خطأ.
قال عبد الله بن أحمد:"ضرب أبي على هذا الحديث، فظننتُ أنه ضرب عليه لأنه خطأ، وإنما هو ميمون بن أستاذ عن عبد الله بن عمرو"ليس فيه" عن الصدفي"ويقال: إن ميمون هذا هو الصدفي؛ لأن سماع يزيد بن هارون عن الجريري آخر عمره".
قلت: ولعل بشر بن المفضل كذلك فإني لم أجد من نصَّ على سماعه من الجريري قبل
الاختلاط. إلا أن متابعة هولاء لعبد الأعلى بن عبد الأعلى تؤكد أن سعيد الجريري لم يختلط في هذا الحديث.
আব্দুল্লাহ ইবনে আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "আমার উম্মতের মধ্য থেকে যে ব্যক্তি মদ পান করা অবস্থায় মারা যাবে, আল্লাহ্ তা‘আলা আখিরাতে তার জন্য তা হারাম করে দেবেন। আর আমার উম্মতের মধ্য থেকে যে ব্যক্তি রেশম পরিধান করা অবস্থায় মারা যাবে, আল্লাহ্ তা‘আলা আখিরাতে তার জন্য তা পরিধান করা হারাম করে দেবেন।"
7303 - عن عبد الله بن عمرو عن رسول الله صلى الله عليه وسلم أنه قال:"من ترك الصلاة سكرا مرة واحدة، فكأنما كانت له الدنيا وما عليها فسلبها، ومن ترك الصلاة سكرًا أربع مرات، كان حقا على الله عز وجل أن يسقيه من طينة الخيال"، قيل: وما طينة الخبال يا رسول الله؟ قال: عصارة أهل جهنم".
حسن: رواه أحمد (6659) والحاكم (4/ 146)، والبيهقي في السنن (1/ 389، 287)، وفي شعب الإيمان (5193) كلهم من طريق ابن وهب، حدثني عمرو بن الحارث، عن عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن عبد الله بن عمرو فذكره.
وهذا إسناد حسن من أجل الكلام في عمرو بن شعيب غير أنه حسن الحديث.
وقال الحاكم:"صحيح الإسناد،" وتعقبه الذهبي فقال:"سمعه ابن وهب عنه وهو غريب جدًّا.
قلت: ولكن له طرق أخرى عن عمرو بن الحارث عند الطبراني في الأوسط (6371) وعند المروزي في تعظيم قدر الصلاة (922).
আব্দুল্লাহ ইবন আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “যে ব্যক্তি একবারও নেশাগ্রস্ত অবস্থায় সালাত ছেড়ে দিলো, সে যেন তার সবকিছুসহ দুনিয়া পেয়েছিল, অতঃপর তা ছিনিয়ে নেওয়া হলো। আর যে ব্যক্তি চারবার নেশাগ্রস্ত অবস্থায় সালাত ছেড়ে দিলো, আল্লাহ আযযা ওয়া জাল্লার জন্য এটা অপরিহার্য হয়ে যায় যে তিনি তাকে ‘ত্বীনাতুল খাবার’ পান করাবেন।” বলা হলো: হে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম), ‘ত্বীনাতুল খাবার’ কী? তিনি বললেন: “তা হলো জাহান্নামবাসীদের পুঁজ।”
7304 - عن طلق بن علي أنه كان عند رسول الله صلى الله عليه وسلم جالسا، فجاء صحار عبد القيس، فقال: يا رسول الله، ما ترى في شراب نصنعه بأرضنا من ثمارنا؟ فأعرض عنه نبي الله صلى الله عليه وسلم، حتى سأله ثلاث مرات، حتى قام فصلى، فلما قضى صلاته، قال النبي صلى الله عليه وسلم:"من السائل عن المسكر؟ لا تشربه، ولا تسقيه أخاك المسلم، فوالذي نفسي بيده، أو فوالذي يحلف به - لا يشربه رجلٌ ابتغاء لذة سكره، فيسقيه الله الخمر يوم القيامة".
حسن: رواه أحمد في مسنده - الملحق المستدرك - (24009: 32)، وابن أبي شيبة في المصنف (7/ 460)، والطبراني في الكبير (8259) كلهم من طريق ملازم بن عمرو، ثنا سراج بن عقبة، عن عمته خلدة بنت طلق، عن أبيها طلق بن علي فذكره.
وإسناده حسن من أجل خلدة بنت طلق، ذكرها ابن حبان، وابن خلفون في الثقات ووثقها العجلي.
وأما ابن أخيها سراج بن عقبة فوثقه ابن معين كما في الجرح والتعديل (4/ 316) ووثقه أيضا العجلي. انظر: تعجيل المنفعة (326).
তলক ইবনে আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত যে তিনি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের নিকট উপবিষ্ট ছিলেন। তখন আবদ আল-কায়েস গোত্রের সাহহার আসলেন এবং বললেন, ‘হে আল্লাহর রাসূল! আমাদের জমিতে আমাদের ফল থেকে তৈরি পানীয় সম্পর্কে আপনার কী মত?’ আল্লাহর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার থেকে মুখ ফিরিয়ে নিলেন। এমনকি তিনি (সাহহার) তিনবার জিজ্ঞেস করলেন। অতঃপর তিনি (নবী) উঠে সালাত আদায় করলেন। যখন তিনি সালাত শেষ করলেন, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, ‘মাদকদ্রব্য (মুসকির) সম্পর্কে প্রশ্নকারী কে?’ ‘তা তুমি নিজে পান করবে না এবং তোমার মুসলিম ভাইকে পান করাবেও না। সেই সত্তার কসম, যার হাতে আমার প্রাণ, অথবা (রাবী বলেন) সেই সত্তার কসম, যার নামে কসম করা হয়— যে ব্যক্তি এর মাদকতার স্বাদ গ্রহণের উদ্দেশ্যে তা পান করবে, আল্লাহ তাকে কিয়ামতের দিন (জাহান্নামের) শরাব পান করাবেন।’
7305 - عن عبد الله بن عمر أن أبا بكر الصديق وعمر بن الخطاب وناسا من أصحاب رسول الله صلى الله عليه وسلم جلسوا بعد وفاة رسول الله صلى الله عليه وسلم، فذكروا أعظم الكبائر، فلم يكن عندهم فيها علمٌ، فأرسلوني إلى عبد الله بن عمرو بن العاص أسأله عن ذلك، فأخبرني: أن
أعظم الكبائر شرب الخمر، فأتيتُهم فأخبرتُهم، فأنكروا ذلك، ووثبوا إليه جميعا، فأخبرهم أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"إن ملكا من بني إسرائيل أجبر رجلا، فخيّره بين أن يشرب الخمر، أو يقتل صبيا، أو يزني، أو يأكل لحم الخنزير، أو يقتلوه إن أبى، فاختار أنه يشرب الخمر، وأنه لما شرب لم يمتنع من شيء أرادوه منه"، وأن رسول الله قال لنا حينئذ:"ما من أحد يشربها فتقبل له صلاة أربعين ليلة ولا يموت وفي مثانته منها شيء إلا حرمت عليه الجنة، وإن مات في الأربعين مات ميتة جاهلية".
حسن: رواه الطبراني في الأوسط (363) عن أحمد بن رشدين، ثنا سعيد بن أبي مريم، أخبرنا عبد العزيز بن محمد الدراوردي، ثنا داود بن صالح، عن سالم بن عبد الله بن عمر .. فذكره.
وإسناده حسن من أجل الدراوردي، وشيخه داود بن صالح هو التمار المدني، ذكره ابن حبان في الثقات، وقال الإمام أحمد:"لا أعلم به بأسا" ولذلك قال الذهبي وابن حجر:"صدوق".
ورواه الحاكم (4/ 174) من طريق أبي مريم به مثله. وقال:"صحيح على شرط مسلم". كذا قال! وداود بن صالح ليس من رجال مسلم.
আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয় রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর ইন্তিকালের পর আবূ বকর আস-সিদ্দিক, উমর ইবনুল খাত্তাব এবং রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর একদল সাহাবী একত্রে বসেছিলেন। তারা সর্ববৃহৎ কবিরা গুনাহসমূহ (মহাপাপ) নিয়ে আলোচনা করলেন, কিন্তু এ বিষয়ে তাদের কাছে কোনো সঠিক জ্ঞান ছিল না। অতঃপর তারা আমাকে আব্দুল্লাহ ইবনে আমর ইবনুল আসের (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) কাছে পাঠালেন যেন আমি তাকে এ বিষয়ে জিজ্ঞাসা করি।
তিনি আমাকে জানালেন যে, সর্ববৃহৎ কবিরা গুনাহ হলো মদ পান করা। আমি তাদের কাছে ফিরে এসে তাদের জানালাম। তারা তা অস্বীকার করলেন এবং সবাই মিলে তাঁর (আব্দুল্লাহ ইবনে আমর) কাছে গেলেন। অতঃপর তিনি তাদের জানালেন যে, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:
"বনী ইসরাঈলের এক বাদশাহ একজন লোককে বাধ্য করে তাকে চারটি কাজের মধ্যে যেকোনো একটি বেছে নিতে বললেন—হয় সে মদ পান করবে, অথবা একটি শিশুকে হত্যা করবে, অথবা ব্যভিচার করবে, অথবা শূকরের মাংস খাবে। যদি সে এসব অস্বীকার করে, তবে তাকে হত্যা করা হবে। তখন লোকটি মদ পান করা বেছে নিল। আর সে যখন মদ পান করল, তখন তারা তার কাছ থেকে যা চাইল, তা থেকে সে বিরত থাকল না।"
এবং রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তখন আমাদের বলেছেন: "যে ব্যক্তি তা (মদ) পান করবে, তার চল্লিশ রাতের সালাত কবুল করা হবে না। আর যদি সে এমন অবস্থায় মারা যায় যে, তার মূত্রাশয়ে এর (মদের) কিছু অংশ অবশিষ্ট থাকে, তবে তার উপর জান্নাত হারাম হয়ে যাবে। আর যদি সে ঐ চল্লিশ দিনের মধ্যে মারা যায়, তবে সে জাহেলিয়াতের মৃত্যু বরণ করবে।"
7306 - عن ابن عمر قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"من شرب الخمر لم تقبل له صلاة أربعين ليلة، فإن تاب، تاب الله عليه، وإن شربها الثانية لم تقبل له صلاة أربعين ليلة، فإن تاب، تاب الله عليه، فإن شربها الثالثة لم تقبل له صلاة أربعين ليلة، فإن تاب، تاب الله عليه، فإن شربها الرابعة لم تقبل له صلاة أربعين ليلة فإن تاب لم يتب الله عليه، وكان حقا على الله أن يسقيه من طينة الخبال". قيل: وما طينة الخبال؟ قال:"صديد أهل النار".
صحيح: رواه البيهقي في الشعب (5191) واللفظ له، والطبراني في الكبير (12/ 392) كلاهما من طريق حماد بن زيد، حدثنا عطاء بن السائب، عن عبد الله بن عبيد بن عمير، أن ابن عمر قال. فذكره.
وإسناده صحيح، عطاء بن السائب ثقة اختلط في آخر عمره، ولكن حماد بن زيد ممن سمع منه قديما قبل الاختلاط، وقد تابعه عدد من الرواة، ومن طريقهم رواه الترمذي (1862)، وعبد الرزاق (10758)، وأحمد (4917)، وأبو يعلى (5686) والطبراني (12/ 390) كلهم عن طريق عطاء بن السائب، به نحوه، وبعضهم ذكره مختصرًا، وهذا يؤكد أنه لم يخطئ في هذا الحديث:
قال الترمذي:"هذا حديث حسن".
وفي معناه ما روي عن ابن عباس عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"كل مخمِّر خمر، وكل مسكر حرام، ومن شرب مسكرا بُخستْ صلاتُه أربعين صباحا، فإن تاب تاب الله عليه، فإن عاد الرابعة كان حقا على الله أن يسقيه من طينة الخبال"، قيل: وما طينة الخبال يا رسول الله؟ قال:"صديد أهل النار، ومن
سقاء صغيرا لا يعرف حلاله من حرامه كان حقا على الله أن يسقيه من طينة الخبال".
رواه أبو داود (3680) عن محمد بن رافع النيسابوري، ثنا إبراهيم بن عمر الصنعاني، قال: سمعت النعمان بن أبي شيبة - وفي المطبوع"ابن بشير" وهو خطأ - عن طاوس، عن ابن عباس فذكره. ورواه البيهقي (8/ 288) من أبي داود به.
وفيه إبراهيم بن عمر الصنعاني لم يوثقه أحد؛ ولذا قال الحافظ:"مستور".
وسئل عنه أبو زرعة فقال:"هذا حديث منكر". علل ابن أبي حاتم (2/ 3
ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "যে ব্যক্তি মদ পান করবে, তার চল্লিশ রাতের সালাত কবুল করা হবে না। এরপর যদি সে তাওবা করে, আল্লাহ তার তাওবা কবুল করেন। যদি সে দ্বিতীয়বার পান করে, তার চল্লিশ রাতের সালাত কবুল করা হবে না। এরপর যদি সে তাওবা করে, আল্লাহ তার তাওবা কবুল করেন। যদি সে তৃতীয়বার পান করে, তার চল্লিশ রাতের সালাত কবুল করা হবে না। এরপর যদি সে তাওবা করে, আল্লাহ তার তাওবা কবুল করেন। আর যদি সে চতুর্থবার পান করে, তার চল্লিশ রাতের সালাত কবুল করা হবে না। এরপর যদি সে তাওবা করে, আল্লাহ তার তাওবা কবুল করেন না, এবং আল্লাহর জন্য এটা আবশ্যক যে তিনি তাকে 'তীনাতুল খাবাল' থেকে পান করাবেন।" জিজ্ঞাসা করা হলো: 'তীনাতুল খাবাল' কী? তিনি বললেন: "জাহান্নামবাসীদের পূঁজ।"
7307 - عن أبي الدرداء عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"لا يدخل الجنة مدمن خمر".
حسن: رواه ابن ماجه (2276) عن هشام بن عمار، ثنا سليمان بن عتبة، قال: حدثني يونس بن ميسرة بن حلبس، عن أبي إدريس، عن أبي الدرداء فذكره.
ورواه أحمد (27484)، والبزار (2182 - كشف الأستار) من وجه آخر عن سليمان بن عتبة به وزادا:"عاق، ولا مكذب بالقدر".
وإسناده حسن من أجل سليمان بن عتبة الداراني الدمشقي فقد وثّقه دُحيم وقال: روي عنه المشائخ"، وقال أبو حاتم: ليس به بأس، وهو محمود عند الدمشقيين. وبقية رجاله ثقات شاميون، وأبو إدريس هو عائذ الله الخولاني.
وفي الباب عن أبي موسى الأشعري، أن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"ثلاثة لا يدخلون الجنة مدمن خمر، وقاطع رحم، ومصدق بالسحر، ومن مات مدمنا للخمر، سقاه الله عز وجل من نهر الغوطة، قيل: وما نهر الغوطة؟ قال: نهر يجري من فروج المومسات، يؤذي أهل النار ريح فروجهم".
رواه أحمد (19569)، وابن حبان (5346)، والحاكم (4/ 141) كلهم من حديث المعتمر بن سليمان قال: قرأت على الفضيل بن ميسرة، عن حديث أبي حريز، أن أبا بردة حدّثه عن حديث أبي موسى فذكره.
قال الحاكم: صحيح الإسناد.
وليس كما قال؛ لأن في إسناده أبا حريز، واسمه عبد الله بن حسين الأزدي، وهو مختلف فيه، فقال أحمد: منكر الحديث، ووثقه ابن معين في رواية، وضعفه في رواية أخرى، ووثقه أبو زرعة، وقال أبو حاتم: حسن الحديث ليس بمنكر الحديث، يكتب حديثه، وقال أبو داود: ليس حديثه بشيء، وقال النسائي: ضعيف، وقال ابن عدي: عامة ما يرويه لا يتابعه عليه أحد".
ولعل قوله:"ومن مات مدمنا للخمر … الخ" مما لم يتابعه عليه أحد، وفي متنه نكارة واضحة.
وفي الباب أيضا عن أبي سعيد الخدري قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"لا يدخل الجنة صاحب
خمس: مدمن خمر، ولا مؤمن بسحر، ولا قاطع رحم، ولا كاهن، ولا منان". رواه أحمد (11107) عن معاوية بن عمرو، ثنا أبو إسحاق، عن الأعمش، عن سعد الطائي، عن عطية بن سعد، عن أبي سعيد الخدري فذكره.
وإسناده ضعيف من أجل عطية بن سعد هو العوفي.
وبه أعله الهيثمي في المجمع (5/ 74).
ورواه أيضا أحمد (11222، 11389) من وجهين آخرين عن يزيد بن أبي حبيب، عن مجاهد، عن أبي سعيد الخدري، عن رسول الله صلى الله عليه وسلم، وقال مرة أخرى: أحسبه عن أبي سعيد أنه قال:"لا يدخل الجنة منان، ولا عاقّ، ولا مدمن".
وفيه يزيد بن أبي حبيب القرشي ضعيف، كما أن مجاهدا لم يسمع من أبي سعيد الخدري، والعلة الأخرى أنه وقفه على أبي سعيد.
وأما ما روي عن ابن عباس قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"من لقي الله مدمنَ خمر، لقيه كعابد وثن". فمنكر.
رواه ابن حبان (5347) عن الحسن بن سفيان، ثنا أحمد بن المقدام العجلي، ثنا عبد الله بن خراش بن حوشب، ثنا العوام بن حوشب، عن سعيد بن جبير، عن ابن عباس فذكره.
وهذا إسناد ضعيف جدا، علنه عبد الله بن خراش، قال البخاري وأبو حاتم:"منكر الحديث" وزاد أبو حاتم:"ذاهب الحديث، ضعيف الحديث"، وقال أبو زرعة:"ليس بشيء، ضعيف الحديث".
وأورد له ابن عدي في الكامل (4/ 1525) هذا الحديث وأحاديث أخرى ثم قال في آخر الترجمة:"وعامة ما يرويه غير محفوظ".
ثم خولف في إسناده فقد رواه أحمد (2453) عن أسود بن عامر، ثنا الحسن بن صالح، عن محمد بن المنكدر، قال: حدثتُ عن ابن عباس فذكره.
ورجاله ثقات إلا أن في إسناده جهالة.
وكذلك لا يصح ما روي عن أبي هريرة قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"مدمن الخمر كعابد وثن".
رواه ابن ماجه (3375) من طريق محمد بن سليمان بن الأصبهاني، عن سهيل، عن أبيه، عن أبي هريرة فذكره.
وفيه محمد بن سليمان الأصبهاني ضعفه النسائي، وقال أبو حاتم: لا بأس به يكتب حديثه ولا يحتج به"، وقال ابن عدي:"هو قليل الحديث أخطأ في غير شيء ثم قد خالف الثقة قال الدارقطني في العلل (10/ 115):"وخالفه سليمان بن بلال رواه عن سهيل، عن محمد بن عبيد الله، عن أبيه، عن النبي صلى الله عليه وسلم قاله ابن أبي مريم عنه".
ومن هذا الوجه رواه البيهقي في الشعب (5208) ثم قال:"كذا في كتابي (محمد بن عبد الله)،
وذكره البخاري في التاريخ (1/ 129) عن إسماعيل بن أبي أويس، عن أخيه، عن سهيل بن أبي صالح، عن محمد بن عبد الله، عن أبيه به فذكره.
فتبين بهذا أن محمد بن سليمان بن الأصبهاني قد سلك فيه الجادة، وأن المحفوظ رواية سليمان بن بلال التيمي وغيره. وهو من الوجه المحفوظ، فيه محمد بن عبد الله وأبوه لا يعرفان؛ لذا قال البخاري عقب الحديث:"ولا يصح حديث أبي هريرة في هذا".
আবু দারদা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "মদপানে আসক্ত ব্যক্তি জান্নাতে প্রবেশ করবে না।"