হাদীস বিএন


আল-জামি` আল-কামিল





আল-জামি` আল-কামিল (7308)


7308 - عن أبي الدرداء قال: أوصاني خليلي:"لا تشرب الخمر، فإنها مفتاح كل شرٍّ".

حسن: رواه ابن ماجه (3371) من طريق راشد أبي محمد الحماني، عن شهر بن حوشب، عن أم الدرداء، عن أبي الدرداء قال .. فذكره.

ورواه البخاري في الأدب المفرد (18) من هذا الوجه بتمامه قال:"أوصاني رسول الله صلى الله عليه وسلم بتسع … فذكرها كلها.

رواه أيضا ابن ماجه في موضع آخر (404)، والبزار (4148) بهذا الإسناد ببعضه.

قال البزار: وهذا الحديث لا نعلمه يُروى عن رسول الله صلى الله عليه وسلم بهذا اللفظ إلا من هذا الوجه بهذا الإسناد، وراشد أبو محمد بصري ليس به بأس، قد حدث عنه غير واحد، وشهر بن حوشب قد روى عنه الناس وتكلموا فيه واحتملوا حديثه.

فالإسناد حسن من أجل الخلاف في شهر فإنه حسن الحديث ما لم يخالف، وكذا الراوي عنه.

وقد حسّن إسناده الحافظ في الأمالي المطلقة (ص 76).




আবুদ্ দারদা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমার অন্তরঙ্গ বন্ধু (রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে উপদেশ দিয়েছেন: "তুমি মদ পান করো না, কারণ এটি সকল মন্দের চাবি।"









আল-জামি` আল-কামিল (7309)


7309 - عن ابن عباس قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"اجتنبوا الخمر فإنها مفتاح كل شرٍّ".

حسن: رواه الحاكم (4/ 145) وعنه البيهقي في شعب الإيمان (5199) من طريق نعيم بن حماد، ثنا عبد العزيز بن محمد الدراوردي، عن عمرو بن أبي عمرو، عن عكرمة، عن ابن عباس قال .. فذكره.

وإسناده حسن من أجل الخلاف في نعيم بن حماد وهو حسن الحديث ما لم يخالف، وكذا شيخه الدراوردي فإنه صدوق.

وقال الحاكم:"صحيح الإسناد".

وأما ما روي عن عثمان بن عفان قال: سمعت النبي صلى الله عليه وسلم يقول:"اجتنبوا أم الخبائث؛ فإنه كان رجل ممن قبلكم يتعبد، ويعتزل الناس، فعلقته امرأة، فأرسلت إليه خادما فقالت: إنا ندعوك الشهادة، فدخل، فطفقت كلما بدخل بابا أغلقته دونه، حتى أفضى إلى امرأة وضيئة جالسة، وعندها غلامٌ وباطيةٌ فيها خمر، فقالت: إنا لم ندعك لشهادة، ولكن دعوتك لتقتل هذا الغلام، أو
تقع عليَّ، أو تشرب كأسا من هذا الخمر، فإن أبيت صحتُ بكَ وفضحتُكَ قال: فلما رأى أنه لا بد له من ذلك قال: اسقيني كأسا من هذا الخمر، فسقته كأسا من الخمر فقال: زيديني، فلم يزل حتى وقع عليها، وقتل النفس، فاجتبوا الخمر فإنه والله لا يجتمع الإيمان وإدمان الخمر في صدر رجل أبدا، ليوشكن أحدهما يخرج صاحبه". فهو ضعيف.

رواه ابن حبان (5348)، وابن أبي الدنيا في ذم المسكر (1) - ومن طريقه الضياء المقدسي في المختارة (371) - من طريق محمد بن عبد الله بن بزيع، ثنا فضيل بن سليمان النميري، ثنا عمر بن سعيد، عن الزهري، أخبرني أبو بكر بن عبد الرحمن بن الحارث بن هشام، عن أبيه عبد الرحمن بن الحارث قال: سمعت عثمان بن عفان خطيبا فقال فذكره.

وعمر بن سعيد وإن كان ثقة إلا أنه غير مستقيم في حديثه عن الزهري كما قال ابن عدي في الكامل، وكذلك ضعفه أيضا الدارقطني. انظر: اللسان (4/ 309).

ومع ضعفه في الزهري، قد خالفه جمعٌ من الثقات عن الزهري فرووه عنه موقوفا على عثمان بن عفان كما ذكره الدارقطني في العلل (3/ 41)، وهذا الموقوف رواه النسائي (5666، 5667).




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তোমরা মদ পরিহার করো, কারণ এটি সকল অনিষ্টের চাবিকাঠি।"

আর উসমান ইবনু আফফান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত হয়েছে, তিনি বলেন, আমি নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "তোমরা সকল নোংরামির জননী (অর্থাৎ, মদ) পরিহার করো। কারণ তোমাদের পূর্ববর্তীদের মধ্যে একজন লোক ছিল, যে ইবাদত করত এবং মানুষের কাছ থেকে দূরে থাকত। তাকে এক নারী মোহগ্রস্ত করল। সে তার কাছে একজন সেবককে পাঠাল এবং বলল: আমরা তোমাকে সাক্ষ্য দেওয়ার জন্য ডাকছি। অতঃপর সে প্রবেশ করল। সে যখনই কোনো দরজা দিয়ে প্রবেশ করতে লাগল, মহিলাটি তার পেছনে তা বন্ধ করতে লাগল। অবশেষে সে এক সুন্দরী মহিলার কাছে পৌঁছল, যে বসে ছিল। তার কাছে একটি ছেলে এবং মদের পাত্র ছিল। মহিলাটি বলল: আমরা তোমাকে সাক্ষ্য দেওয়ার জন্য ডাকিনি, বরং তোমাকে ডেকেছি হয় এই ছেলেটিকে হত্যা করার জন্য, অথবা আমার সাথে ব্যভিচার করার জন্য, অথবা এই মদ থেকে এক পেয়ালা পান করার জন্য। তুমি যদি অস্বীকার করো, তবে আমি চিৎকার করে তোমাকে লাঞ্ছিত করব। রাবী বলেন: যখন সে দেখল যে এর থেকে তার কোনো নিস্তার নেই, তখন সে বলল: আমাকে এই মদের এক পেয়ালা পান করাও। তখন সে তাকে এক পেয়ালা মদ পান করাল। সে বলল: আমাকে আরও দাও। এরপর সে তার সাথে ব্যভিচার করল এবং ছেলেটিকেও হত্যা করল। অতএব তোমরা মদ পরিহার করো। কেননা আল্লাহর কসম! ঈমান এবং মদের প্রতি আসক্তি কোনো ব্যক্তির হৃদয়ে কখনোই একত্রে থাকতে পারে না। শীঘ্রই তাদের একজন তার সঙ্গীকে বের করে দেবে।"









আল-জামি` আল-কামিল (7310)


7310 - عن أبي عامر - أو أبي مالك - أنه سمع النبي صلى الله عليه وسلم يقول:"ليكونن من أمتي أقوام يستحلون الحر والحرير والخمر والمعازف، ولينزلن أقوام على جنب علم يروح عليهم بسارحة لهم، يأتيهم - يعني الفقير - لحاجة فيقولوا: ارجع إلينا غدًا فيبيّتهم الله، ويضع العلم، ويمسخ آخرين قردة وخنازير إلى يوم القيامة".

صحيح: رواه البخاري في الأشربة (5590) قال: وقال هشام بن عمار، حدثنا صدقة بن خالد، حدثنا عبد الرحمن بن يزيد بن جابر، حدثنا عطية بن قيس الكلأبي، حدثنا عبد الرحمن بن غنم الأشعري قال: حدثني أبو عامر - أو أبو مالك الأشعري والله ما كذبني سمع النبي صلى الله عليه وسلم يقول فذكره.

هكذا رواه البخاري بقوله: قال: وهشام بن عمار من شيوخ البخاري، وقد احتج به البخاري في غير ما حديث كما بيّنه الحافظ ابن حجر في ترجمته في مقدمة الفتح، ولذا قال غير واحد من أهل العلم أن قول البخاري:"قال" يُحمل على"حدثني" أو"أخبرني" أو"عن" يعني به الاتصال. وهو الذي رجّحه ابن الصلاح.

ورواه ابن حبان (6754) عن الحسين بن عبد الله القطان، قال: حدثنا هشام بن عمار بإسناده.




আবূ মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী করীম সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে বলতে শুনেছেন: "অবশ্যই আমার উম্মতের মধ্যে এমন কিছু লোক আসবে যারা অবৈধ যৌনতা, রেশম, মদ এবং বাদ্যযন্ত্রকে হালাল মনে করবে। আর অবশ্যই কিছু লোক একটি পর্বতের পাদদেশে অবস্থান করবে, তাদের চারণকারী পশু নিয়ে তারা সকালে যাবে এবং সন্ধ্যায় ফিরবে। তাদের কাছে কোনো অভাবী লোক প্রয়োজনে এলে তারা বলবে, 'আগামীকাল আমাদের কাছে ফিরে এসো।' তখন আল্লাহ তাদের রাতারাতি ধ্বংস করে দেবেন, পর্বতটি তাদের উপর চাপিয়ে দেবেন এবং অন্য কিছু লোককে কিয়ামত পর্যন্ত বানর ও শূকরে রূপান্তরিত করবেন।"









আল-জামি` আল-কামিল (7311)


7311 - عن رجل من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"يشرب ناسٌ من أمتي الخمر يسمونها بغير اسمها".

صحيح: رواه النسائي (5158)، وأحمد (18073) من طريق شعبة، عن أبي بكر بن حفص،
قال: سمعت ابن محيريز يحدث عن رجل من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم فذكره. وإسناده صحيح، وابن محيريز هو: عبد الله بن محيريز بن جنادة.




রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর একজন সাহাবী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন: "আমার উম্মতের কিছু লোক মদ পান করবে, তারা এটিকে অন্য নামে আখ্যায়িত করবে।"









আল-জামি` আল-কামিল (7312)


7312 - عن عائشة قالت: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"إن أول ما يُكفأ - يعني في الإسلام - كما يكفأ الإناء يعني الخمر، فقيل: كيف يا رسول الله وقد بيّن الله فيها ما بيّن؟ قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: يسمونها بغير اسمها فيستحلونها".

حسن: رواه الدارمي (2145) عن زيد بن يحيى، ثنا محمد بن راشد، عن أبي وهب الكلاعي، عن القاسم بن محمد، عن عائشة فذكرته.

وإسناده حسن من أجل أبي وهب الكلاعي واسمه: عبيد الله بن عبيد، فإنه حسن الحديث.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "নিশ্চয়ই প্রথম জিনিস যা (ইসলামে) উপুড় করে ফেলা হবে—যেমন পাত্র উপুড় করে ফেলা হয়—তা হলো মদ।" তখন জিজ্ঞাসা করা হলো: হে আল্লাহর রাসূল, এটি কীভাবে হবে? অথচ আল্লাহ তো এ বিষয়ে যা বলার তা স্পষ্টভাবে বলে দিয়েছেন? রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "তারা এটিকে অন্য নামে ডাকবে এবং (এভাবে) এটিকে বৈধ মনে করবে।"









আল-জামি` আল-কামিল (7313)


7313 - عن ابن عباس أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"إن أمتي يشربون الخمر في آخر الزمان يسمونها بغير اسمها".

حسن: رواه الطبراني في الكبير (11/ 118) عن الحسن بن العباس الرازي، ثنا إسماعيل بن توبة القزويني، ثنا عفان بن سيار، ثنا أبو عامر الخزّاز، عن ابن أبي مليكة، عن ابن عباس قال فذكره.

وإسناده حسن من أجل أبي عامر الخزّاز واسمه صالح بن رُستم فإنه مختلف فيه، غير أنه حسن الحديث، وقد قال ابن عدي:"عزيز الحديث، ولعل جميع ما أسنده خمسون حديثا، وقد روي عنه يحيى القطان مع شدة استقصائه. وهو عندي لا بأس به، ولم أر له حديثا منكرًا جدًّا.

وفي الباب عن عبادة بن الصامت قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: يشرب ناس من أمتي الخمر باسم يسمونها إياه".

رواه ابن ماجه (3385)، وأحمد (22709) من طريق سعد بن أوس الكاتب، عن بلال بن يحيى العبسي، عن أبي بكر بن حفص، عن ابن محيريز، عن ثابت بن السمط، عن عبادة بن الصامت .. فذكره.

وفي إسناده ثابت بن السمط مجهول تفرد عنه ابن محيريز، ولم يوثقه سوي ابن حبان، وأما قول الحافظ فيه:"صدوق" ففيه نظر، بل الأولى أن يكون على مذهبه"مقبولا" يعني حيث يتابع وهو لم يتابع على هذا الإسناد، وإن كان للحديث شواهد صحيحة. وبقية رجاله ثقات.

وفي الباب أيضا ما رواه أبو داود (3688)، وابن ماجه (4020)، وأحمد (22900)، وصحّحه ابن حبان (6758) كلهم من طريق معاوية بن صالح، حدثني حاتم بن حريث، عن مالك ابن أبي مريم قال: دخل علينا عبد الرحمن بن غنم، فتذاكرنا الطلاء فقال: حدثني أبو مالك الأشعري أنه سمع رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"ليشربنّ ناسٌ من أمتي الخمر يسمونها بغير اسمها".

واللفظ لأبي داود، وعند أحمد في أوله قصة، وزاد ابن ماجه وابن حبان:"يعزف على رؤوسهم بالمعازف والمغنيات، يخسف الله بهم الأرض، ويجعل منهم القردة والخنازير".
وفي إسناده مالك بن أبي مريم لم يوثقه غير ابن حبان، وهو معروف بتساهله في توثيق المجاهيل؛ لذا ذكره الذهبي في الميزان، وقال: لا يعرف، وقال ابن حجر في التهذيب"لا يدري من هو؟ وقال في التقريب:"مقبول" يعني حيث يتابع وإلا فلين الحديث، ولم أجد من تابعه عليه.

وبمعناه ما روي عن أبي أمامة الباهلي قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"لا تذهب الليالي والأيام حتى تشرب فيها طائفةٌ من أمتي الخمر يسمونها بغير اسمها.

رواه ابن ماجه (3384) عن العباس بن الوليد الدمشقي، ثنا عبد السلام بن عبد القدوس، ثنا ثور بن يزيد، عن خالد بن معدان، عن أبي أمامة الباهلي .. فذكره.

وفي إسناده عبد السلام بن عبد القدوس هو الكلاعي الدمشقي، ضعفه أبو حاتم وابن حبان وغيرهما. وفي الباب ما رواه الحاكم (4/ 174)، والبيهقي (8/ 194) كلاهما من طريق سعيد بن أبي هلال، عن محمد بن عبد الله أن أبا مسلم الخولاني حجّ فدخل على عائشة زوج النبي صلى الله عليه وسلم فجعلت تسأله عن الشام وعن بردها، فجعل يخبرها فقالت: كيف يصبرون على بردها؟ قال يا أم المؤمنين إنهم يشربون شرابا لهم يقال: له الطلاء، قالت: صدق الله وبلّغ حبي صلى الله عليه وسلم سمعته يقول:"إن ناسا من أمتي يشربون الخمر يسمونها بغير اسمها".

ورواه أبو يعلى (4390) من هذا الوجه بمثله وزاد قصة دخول النساء الحمامات. وصحّحه الحاكم على شرط الشيخين، فتعقبه الذهبي بقوله:"كذا قال:"محمد" فمحمد مجهول، وإن كان ابن أخي الزهري فالسند منقطع".




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: 'আমার উম্মত শেষ যুগে মদ্যপান করবে এবং তারা সেটির নাম বদলে অন্য নামে ডাকবে।'









আল-জামি` আল-কামিল (7314)


7314 - عن أبي هريرة أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"الخمر من هاتين الشجرتين: النخلة، والعنبة".

صحيح: رواه مسلم في الأشربة (1985: 13) عن زهير بن حرب، ثنا إسماعيل بن إبراهيم، أخبرنا الحجاج بن أبي عثمان، حدثني يحيى بن أبي كثير، أن أبا كثير حدثه، عن أبي هريرة .. فذكره.

قال البيهقي: إنما خرج هذا مخرج التأكيد لا تخصيص كما يقال: الشبع من اللحم، والدفء من الوبر، وليس فيه نفي الشبع من غير اللحم، ولا نفي الدفء من غير الوبر، وقد ذكر النبي صلى الله عليه وسلم تحريم سائر الأشربة المسكرة في أخبار صحيحة. انظر: المنة الكبرى (7/ 348).

وقوله:"النخلة والعنبة"، فيه حجة لأهل الكوفة بأن الخمر من هاتين الشجرتين وتحليل ما سواهما ما لم يقع الإسكار.

وذهب جمهور أهل العلم إلى تحريم كل ما يسمى خمرا، سواء في ذلك الفضيخ وهو البسر، ونبيذ التمر، والرطب، والزبيب، والشعير، والذرة، والعسل، وغيرها كما سيأتي ذكر بعضها.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "খামর (মদ) এই দুটি গাছ থেকে হয়: খেজুর গাছ এবং আঙুর গাছ।"









আল-জামি` আল-কামিল (7315)


7315 - عن أنس قال: كنت قائما على الحي أسقيهم - عمومتي وأنا أصغرهم الفضيخَ، فقيل: حرمت الخمر، فقالوا: أكفئْها فكفأتُها، قلت لأنس: ما شرابهم؟ قال: رُطب وبُسر.

فقال أبو بكر بن أنس: وكانت خمرهم، فلم ينكر أنس.

وحدثني بعض أصحابي: أنه سمع أنس بن مالك يقول: كانت خمرهم يومئذ".

متفق عليه: رواه البخاري في الأشربة (5583)، ومسلم في الأشربة (1980: 6) كلاهما من طريق المعتمر بن سليمان، عن أبيه، قال: سمعت أنسا قال .. فذكره.




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি গোত্রের লোকদের—আমার চাচাদের—ফাদীখ (নামক পানীয়) পান করাচ্ছিলাম, আর আমি ছিলাম তাদের মধ্যে সবচেয়ে ছোট। তখন বলা হলো: মদ হারাম করা হয়েছে। তারা (চাচারা) বললেন: এটি উপুড় করে দাও! ফলে আমি তা উপুড় করে দিলাম। (বর্ণনাকারী বলেন,) আমি আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে জিজ্ঞেস করলাম: তাদের পানীয় কী ছিল? তিনি বললেন: তাজা পাকা ও কাঁচা খেজুর। এরপর আবূ বকর ইবনু আনাস বললেন: আর এটিই ছিল তাদের মদ, কিন্তু আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তা অস্বীকার করেননি। আর আমার কিছু সঙ্গী আমার কাছে বর্ণনা করেছেন যে, তারা আনাস ইবনু মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে বলতে শুনেছেন: ঐ দিন সেটিই ছিল তাদের মদ।









আল-জামি` আল-কামিল (7316)


7316 - عن أنس قال: حرمت علينا الخمر حين حرمت، وما نجد - يعني بالمدينة - خمر الأعناب إلا قليلا، وعامة خمرنا البسر والتمر.

متفق عليه: رواه البخاري في الأشربة (5580) من طريق يونس، عن ثابت البناني، عن أنس .. فذكره.

ورواه مسلم في الأشربة (1980: 3) من طريق حماد بن زيد، أخبرنا ثابت به، وفيه قصة تحريم الخمر، لكن جاء بلفظ:"وما شرابهم إلا الفضيخ: البسر والتمر"، ولم يذكر العنب.

وفي مسند أبي يعلى (4157) من وجه آخر بسند صحيح عن أنس في قصة تحريم الخمر وقال في آخره:"وشرابهم يومئذ البسر والتمر".




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: যখন আমাদের উপর মদ (খমর) হারাম করা হয়েছিল, তখন আমরা—অর্থাৎ মদীনায়—আঙ্গুরের মদ খুব কমই পেতাম। আর আমাদের অধিকাংশ মদ তৈরি হতো কাঁচা খেজুর (বুসর) ও (পাকা) খেজুর দিয়ে।









আল-জামি` আল-কামিল (7317)


7317 - عن أنس بن مالك قال: لقد أنزل الله الآية التي حرم الله فيها الخمر، وما بالمدينة شراب يشرب إلا من تمر.

صحيح: رواه مسلم في الأشربة (1982) عن محمد بن المثنى، ثنا أبو بكر الحنفي، ثنا عبد الحميد بن جعفر، حدثني أبي أنه سمع أنس بن مالك يقول .. فذكره.




আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আল্লাহ যখন সেই আয়াত নাযিল করলেন যাতে আল্লাহ মদকে হারাম করেছেন, তখন মদীনায় খেজুরের তৈরি পানীয় ছাড়া আর কোনো পানীয় পান করা হতো না।









আল-জামি` আল-কামিল (7318)


7318 - عن ابن عمر قال: لقد حُرّمت الخمر وما بالمدينة منها شيء.

صحيح: رواه البخاري في الأشربة (5579) عن الحسن بن صباح، حدثنا محمد بن سابق، حدثنا مالك بن مغول، عن نافع، عن ابن عمر .. فذكره.

وقوله:"وما بالمدينة منها شيء" يعني العنب.

ورواه أيضا (4616) من وجه آخر عن عبد العزيز بن عمر بن عبد العزيز، قال: حدثني نافع، عن ابن عمر قال:"نزل تحريم الخمر، وإن في المدينة يومئذ لخمسة أشربة، ما فيها شراب العنب".




ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: যখন মদ হারাম হওয়ার নির্দেশ নাযিল হয়, তখন মদীনায় পাঁচ ধরনের পানীয় প্রচলিত ছিল, যার মধ্যে আঙ্গুরের কোনো শরবত ছিল না।









আল-জামি` আল-কামিল (7319)


7319 - عن ابن عمر قال: خطب عمر على منبر رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال: إنه قد نزل تحريم الخمر، وهي من خمسة أشياء، العنب، والتمر، والحنطة، والشعير، والعسل، والخمر ما خامر العقل.
وثلاثٌ وددتُ أن رسول الله صلى الله عليه وسلم لم يفارقنا حتى يعهد إلينا عهدا: الجدُّ، والكلالةُ، وأبواب من أبواب الربا.

قال: قلتُ: يا أبا عمرو، فشيء يُصنع بالسّند من الأرز؟ قال: ذاك لم يكن على عهد النبي صلى الله عليه وسلم، أو قال: على عهد عمر.

وفي رواية:"الزبيب" مكان"العنب".

متفق عليه: رواه البخاري في الأشربة (5588)، ومسلم في التفسير (3032: 32) كلاهما من طريق أبي حيان التيمي، عن الشعبي، عن ابن عمر قال فذكره. والرواية الأخرى لهما أيضا.




ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর মিম্বরের উপর দাঁড়িয়ে খুতবা দিলেন এবং বললেন: নিশ্চয়ই মদের নিষেধাজ্ঞা (আয়াত) অবতীর্ণ হয়েছে। আর মদ আসে পাঁচটি বস্তু থেকে: আঙুর, খেজুর, গম, যব এবং মধু। মদ হলো তাই যা বুদ্ধিকে আচ্ছন্ন করে দেয় (বা ঢেকে ফেলে)। আর তিনটি বিষয় রয়েছে, যা সম্পর্কে আমি কামনা করেছিলাম যে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যেন আমাদের থেকে বিচ্ছিন্ন না হন যতক্ষণ না তিনি এ বিষয়ে আমাদের জন্য চূড়ান্ত বিধান দিয়ে যান: দাদা (দাদার উত্তরাধিকার), কালালাহ (পিতৃহীন ও সন্তানহীন মৃত ব্যক্তির উত্তরাধিকার), এবং সুদের কিছু অংশ (বা কিছু মাসআলা)। (বর্ণনাকারী) বলেন, আমি জিজ্ঞাসা করলাম: হে আবূ আমর, চাল থেকে সিন্ধুদেশে যা প্রস্তুত করা হয় (তা কি মদের অন্তর্ভুক্ত)? তিনি বললেন: তা নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর যুগে ছিল না, অথবা তিনি বললেন: উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর যুগেও ছিল না। অন্য বর্ণনায় ‘আঙুর’-এর স্থলে ‘কিশমিশ’ উল্লেখ আছে।









আল-জামি` আল-কামিল (7320)


7320 - عن النعمان بن بشير قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"إن من العنب خمرًا، وإن من التمر خمرًا، وإن من العسل خمرًا، وإن من البر خمرًا، وإن من الشعير خمرًا".

حسن: رواه أبو داود (3676)، والترمذي (1872، 1873)، وأحمد (18350) كلهم من طرق عن إسرائيل، عن إبراهيم بن المهاجر، عن عامر الشعبي، عن النعمان بن بشير قال: فذكره.

وفيه إبراهيم بن مهاجر بن جابر البجلي مختلف فيه غير أنه حسن الحديث وقد توبع أيضا.

فرواه أبو داود (3677)، وابن حبان (5398) كلاهما من طريق أبي حريز، أن عامرًا حدثه أن النعمان بن بشير خطب الناس بالكوفة فقال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"إن الخمر من العصير، والزبيب، والتمر، والحنطة، والذرة، وإني أنهاكم عن كل مسكر".

وأبو حريز اسمه عبد الله بن الحسين الأزدي أيضا مختلف فيه، وتابعهما أيضا السري بن إسماعيل الهمداني ابن عم الشعبي روى حديثه ابن ماجه (3379)، وأحمد (18407) والحاكم (4/ 148)، ولكن السري متروك.

ولذلك لما صحّحه الحاكم تعقبه الذهبي بقوله:"السري تركوه".

والحاصل أن الحديث بمجموع هذه الطرق يكون حسنا.

ويُجمع بين حديث عمر بن الخطاب الموقوف عليه، وبين حديث النعمان بن بشير بأن الشعبي سمع هكذا عن عمر، كما سمع عن النعمان بن بشير، فروي على الوجهين، ولا يحتاج إلى تخطئة أحد الحديثين.

وأما معنى الحديث فإن الخمر لا يكون إلا من هذه الأشياء الخمسة بأعيانها فقط، وإنما جرى ذكرها خصوصا لكونها معهودة في ذلك الزمان، فكل ما كان في معناه من ذرة، وسلت، وثمرة، وعصارة فحكمه حكمها، أفاده الخطابي.




নু'মান ইবনু বাশীর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “নিশ্চয় আঙ্গুর থেকেও মদ হয়, আর নিশ্চয় খেজুর থেকেও মদ হয়, আর নিশ্চয় মধু থেকেও মদ হয়, আর নিশ্চয় গম থেকেও মদ হয়, আর নিশ্চয় যব থেকেও মদ হয়।”









আল-জামি` আল-কামিল (7321)


7321 - عن علي بن أبي طالب قال: نهى رسول الله صلى الله عليه وسلم عن خاتم الذهب، وعن القَسيّ، وعن الميثرة، وعن الجعة.
حسن: رواه الترمذي (2808)، وأبو داود (4051)، والنسائي (8/ 165)، وابن ماجه (3654)، وابن أبي شيبة (8/ 110)، وأحمد (1102) كلهم من حديث أبي الأحوص، عن أبي إسحاق، عن هبيرة، عن علي قال .. فذكره.

واللفظ للترمذي واختصر بعضهم.

وإسناده حسن من أحل هبيرة وهو ابن يريم مختلف فيه غير أنه حسن الحديث.

وقال الترمذي: هذا حديث حسن صحيح.

وأبو إسحاق هو السبيعي مدلس، ولكن رواه أيضا شعبة عند أبي داود وهو القائل: كفيتُكم تدليس أبي إسحاق.

وقوله:"الميثرة" - بكسر الميم وفتح المثلثة - وهو وطاء محشو يجعل فوق رحل البعير تحت الراكب، وهو دأب المتكبرين، ولكن إن قصد به استراحة الضعفاء فلا حرج في ذلك.

وقوله:"الجعة" بكسر الجيم وسكون العين هي النبيذ المتخذ من الشعير.




আলী ইবনু আবী তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম সোনার আংটি, কাসি (নামক রেশমী বস্ত্র), মাইসারা (উট বা ঘোড়ার পিঠে ব্যবহৃত নরম গদি), এবং জি‘আহ (যবের তৈরি মদ) ব্যবহার করতে নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (7322)


7322 - عن معقل بن يسار قال: حرمت الخمر ونحن نشرب الفضيخ، فجعلتُ أهريقُها وأقول هذا آخر العهد بالخمر.

حسن: رواه أحمد في الأشربة (184) والطبراني في الكبير (20/ 218) كلاهما من طريق جامع بن مطر الحبطي، ثنا معاوية بن قرة، قال: قال معقل بن يسار .. فذكره. واللفظ للطبراني.

ولفظ أحمد:"فجعلنا نشربها ونقول: هذا آخر العهد بالخمر".

وإسناده حسن من أجل جامع بن مطر الحبطي البصري فإنه حسن الحديث.

وقوله:"الفضيخ" هو شراب يتخذ من البسر من غير أن تمسه النار.




মা'কিল ইবনে ইয়াসার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বললেন, যখন মদ হারাম করা হলো, তখন আমরা 'ফাদীখ' পান করছিলাম। তখন আমি তা ঢেলে দিতে লাগলাম এবং বলতে লাগলাম: মদের সাথে এটাই শেষ অঙ্গীকার (বা সম্পর্ক)।









আল-জামি` আল-কামিল (7323)


7323 - عن أبي عبد الله الجسري قال: سألت معقل بن يسار عن الشراب فقال: كنا بالمدينة، وكانت كثيرة التمر، فحرّم علينا رسول الله صلى الله عليه وسلم الفضيخ.

وأتاه رجلٌ فسأله عن أم له عجوز كبيرة: أيسقيها النبيذ، فإنها لا تأكل الطعام؟ فنهاه معقل.

صحيح: رواه أحمد (20299)، والطبراني في الكبير (20/ 217، 224) كلاهما من طريق المثنى بن عوف، ثنا أبو عبد الله الجسري به .. فذكره. وليس عند الطبراني قصة الرجل مع أمه العجوز.

وإسناده صحيح، وأبو عبد الله الجسري اسمه حميري - بلفظ النسب - بن بشير، مشهور بكنيته.




মা'কিল ইবন ইয়াসার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বললেন: আমরা মদীনায় ছিলাম। সেখানে প্রচুর খেজুর ছিল। অতঃপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাদের উপর ফাদীখ (খেজুর থেকে তৈরি এক ধরনের পানীয়) হারাম করে দিলেন।
আর (একবার) তাঁর কাছে একজন লোক এসে তার অতি বৃদ্ধা মায়ের ব্যাপারে জিজ্ঞেস করল: সে কি তাকে নাবীয (খেজুর ভিজিয়ে তৈরি পানীয়) পান করাতে পারবে? কারণ তিনি (মা) খাবার গ্রহণ করতে পারেন না। তখন মা'কিল তাকে নিষেধ করলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (7324)


7324 - عن أم حبيبة زوج النبي صلى الله عليه وسلم: أن ناسا من أهل اليمن قدموا على رسول الله صلى الله عليه وسلم، فعلمهم الصلاة والسنن والفرائض قالوا: يا رسول الله إن لنا شرابا نصنعه من القمح والشعير فقال:"الغبيراء؟" قالوا: نعم قال:"لا تطعموه" فلما كان بعد يومين
ذكروهما له أيضا فقال:"الغبيراء؟" قالوا: نعم قال:"لا تطعموه" فلما أرادوا أن ينطلقوا سألوه عنه فقال:"الغبيراء؟" قالوا: نعم قال:"فلا تطعموه".

حسن: رواه ابن حبان (5367) عن ابن قتيبة، ثنا يزيد بن مَوْهب، ثنا ابن وهب، أخبرني عمرو بن الحارث، أن أبا السمح حدثه، أن عمر بن الحكم حدثه، عن أم حبيبة .. فذكرته.

وإسناده حسن من أجل الكلام في أبي السمح واسمه دراج بن سمعان المصري، وهو مختلف فيه غير أنه يُضعّف في أبي الهيثم ويحسّن في غيره.

وابن قتيبة: هو محمد بن الحسن بن قتيبة العسقلاني.

ويزيد بن موهب نُسب إلى جده الأعلى وهو يزيد بن خالد بن يزيد بن عبد الله بن موهب الهمداني الزاهد.

ورواه البيهقي (8/ 292) من وجه آخر عن ابن وهب، به مثله.

ورواه أحمد (27407)، وأبو يعلى (7147) والطبراني في الكبير (23/ 242، 246) من طريق ابن لهيعة، ثنا درّاج به بمثله، وزاد في آخره:"قالوا: فإنهم لا يدعونها" قال:"من لم يتركها، فاضربوا عنقه".

وهذه الزيادة شاذة أو منكرة تفرد بها ابن لهيعة وهو سيء الحفظ.

وقوله:"الغُبيراء": بضم الغين - وهو نوع من الخمر يتخذ من الذرة، وهي من خمر الحبشة.

قال مالك: سألت زيد بن أسلم عنه فقال: أسكركة، وفي لفظ هي: السكركة. الأشربة (10).




উম্মে হাবীবা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, ইয়েমেনের কিছু লোক রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট আগমন করল। তখন তিনি তাদেরকে সালাত, সুন্নাত ও ফরযসমূহ শিক্ষা দিলেন। তারা বলল, 'ইয়া রাসূলুল্লাহ! আমরা গম ও যব দিয়ে তৈরি এক প্রকার পানীয় পান করি।' তিনি জিজ্ঞাসা করলেন, 'আল-গুবায়রাহ (Ghubayra)?' তারা বলল, 'হ্যাঁ।' তিনি বললেন, 'তোমরা তা পান করবে না।' দুই দিন পর যখন তারা আবার তাঁর কাছে এটি উল্লেখ করল, তখন তিনি জিজ্ঞাসা করলেন, 'আল-গুবায়রাহ?' তারা বলল, 'হ্যাঁ।' তিনি বললেন, 'তোমরা তা পান করবে না।' যখন তারা চলে যেতে চাইল, তখন তারা আবার এ সম্পর্কে তাঁকে জিজ্ঞাসা করল। তিনি জিজ্ঞাসা করলেন, 'আল-গুবায়রাহ?' তারা বলল, 'হ্যাঁ।' তিনি বললেন, 'তোমরা তা পান করবে না।'









আল-জামি` আল-কামিল (7325)


7325 - عن ابن عباس قال: كانت خمرتنا يومئذ الفضيخ، وحُرمت يوم حُرمت وما هي إلا فضيخكم.

حسن: رواه الطبراني في الكير (11/ 351) عن موسى بن هارون، ثنا أحمد بن حنبل، ثنا يحيى بن سعيد، عن عثمان الشحّام، عن عكرمة، عن ابن عباس، فذكره.

وإسناده حسن من أجل عثمان الشحّام هو العدوي أبو سلمة البصري، فإنه لا بأس به كما في التقريب.




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: যেদিন মদ হারাম করা হয়েছিল, সেদিন আমাদের মদ ছিল আল-ফাযীখ (Fadikh)। যেদিন তা হারাম হয়, সেদিনই তা হারাম হয়ে গিয়েছিল। আর তা ছিল তোমাদের ফাযীখের মতোই।









আল-জামি` আল-কামিল (7326)


7326 - عن عبد الله بن أبي الهذيل قال: كان عبد الله يحلف بالله إن التي أمر بها رسول الله صلى الله عليه وسلم حين حُرمت الخمر أن تُكسر دنانُه، وأن تكفأ: لِمن التمر والزبيب.

صحيح: رواه الدارقطني (4652)، وأحمد بن منيع في مسنده - كما في المطالب العالية (1825) - من طريق حسين بن محمد، ثنا شيبان، عن أشعث بن أبي الشعثاء، عن عبد الله بن أبي الهذيل .. فذكره.

وإسناده صحيح. عبد الله هو ابن مسعود رضي الله عنه. وشيبان هو ابن عبد الرحمن النحوي البصري.
وحسين بن محمد هو المروزي.

وقوله:"دِنانه" جمع الدن وهو وعاء كبير.

قال أبو عبيد:"جاءت في الأشربة آثار كثيرة بأسماء مختلفة عن النبي صلى الله عليه وسلم وأصحابه، وكلٌّ له تفسير.

فأولها: الخمر وهي ما غلي من عصير العنب واشتد، فهذا ما لا خلاف في تحريمه بين المسلمين، وإنما الاختلاف في غيره.

ومنها: السكر وهو نقيع التمر الذي لم تمسه النار، أو هو النيئ من ماء الرطب إذا غلى واشتد، وقذف بالزبد. وفيه يروي عن عبد الله بن مسعود رضي الله عنه أنه قال:"السكر خمر".

ومنها: البتع وهو نبيذ العسل.

ومنها: الجعة وهو نبيذ الشعير.

ومنها: المزر وهو من الذرة.

ومنها: الفضيخ وهو ما افتضخ من البسر من غير أن تمسه النار.

وقال: فإن كان مع البسر تمر، فهو الذي يسمى الخليطين، وكذلك إن كان زبيبا وتمرا فهو مثله.

ومن الأشربة: المنصف وهو أن يطبخ عصير العنب قبل أن يغلي حتى يذهب نصفه وقد بلغني أنه يسكر، فإن كان يسكر فهو حرام، وإن طبخ حتى يذهب ثلثاه ويبقى ثلثه فهو الطلاء، وإنما سمي بذلك؛ لأنه شبه بطلاء الإبل في ثخنه وسواده، وبعض العرب يجعل الطلاء الخمر بعينها، يروى أن عبيد بن الأبرص قال في مثل له:

هي الخمر تكنى الطلاء كما الذئب يكنى أبا جعدة.

قال: وكذلك الباذق، وقد يسمى به الخمر، والمطبوخ، وهو الذي يروى فيه الحديث عن ابن عباس أنه سئل عن الباذق فقال:"سبق محمد الباذق وما أسكر فهو حرام". وإنما قال ابن عباس ذلك؛ لأن الباذق كلمة فارسية عربي فلم يعرفها. ثم قال: وهذه الأشربة المسماة عندي كلها كناية عن اسم الخمر، ولا أحسبها إلا داخلة في حديث النبي صلى الله عليه وسلم:"إن ناسا من أمتي يشربون الخمر باسم يسمونها به". قال: ومما يبينه قول عمر بن الخطاب رضي الله عنه:"الخمر ما خامر العقل". انظر: السنن الكبرى (8/ 295).

ومن الأشربة: نقيع الزبيب وهو اسم للنيئ من ماء الزبيب المنقوع في الماء حتى خرجت حلاوته من غير طبخ واشتد وقذف بالزبد.

ومنها: الجهوري وهو الطلاء الذي يلقى فيه الماء حتى يرق ويعود إلى المقدار الذي كان في الأصل، ثم طبخ بأدنى طبخة وصار مسكرا.

فالمسكر كله حرام من أي نوع كان، فإنه هو الخمر المحرمة في القرآن والسنة والإجماع، وهو
مذهب أهل الحجاز من الصحابة التابعين، وذهب إليه من الفقهاء أئمة الفتوى بالأمصار: مالك والليث والشافعي وأحمد والأوزاعي وأبو ثور وإسحاق وداود وغيرهم. وهو الذي تشهد به الآثار الثابتة عن النبي صلى الله عليه وسلم وتشهد به اللغة في معنى الخمر، وهو الذي لم يعرف الصحابة غيره حين نزول القرآن بتحريمها. انظر للمزيد: المنة الكبرى (7/ 355 - 356).




আব্দুল্লাহ ইবনু মাসউদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি আল্লাহর নামে শপথ করে বলতেন যে, যখন মদ হারাম করা হয়েছিল, তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম যা নির্দেশ দিয়েছিলেন, তা হলো মদের মটকাগুলো ভেঙে ফেলা এবং খেজুর ও কিশমিশের (তৈরি পানীয়ের) পাত্রগুলি উপুড় করে দেওয়া।









আল-জামি` আল-কামিল (7327)


7327 - عن عائشة قالت: سئل رسول الله صلى الله عليه وسلم عن البتْع؟ فقال:"كل شراب أسكر فهو حرام".

متفق عليه: رواه مالك في الأشربة (9) عن ابن شهاب، عن أبي سلمة بن عبد الرحمن، عن عائشة فذكرته.

ورواه البخاري في الأشربة (5585)، ومسلم في الأشربة (2001: 67) كلاهما من طريق مالك به مثله.

ورواه البخاري (5586) من طريق شعيب، عن الزهري به، وفيه: سئل رسول الله عن البتْع - وهو نبيذ العسل، وكان أهل اليمن يشربونه - فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"كل شراب أسكر فهو حرام".




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে আল-বিত’ (al-Bit’) সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করা হয়েছিল। অতঃপর তিনি বললেন: "প্রত্যেক পানীয় যা নেশা সৃষ্টি করে (বা, মাতাল করে), তা হারাম।"