হাদীস বিএন


আল মুসনাদুল জামি`





আল মুসনাদুল জামি` (13523)


13523 - عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ:
لَا تُنْكَحُ الْمَرْأَةُ عَلَى عَمَّتِهَا، وَلَا عَلَى خَالَتِهَا.
ـ وفي رواية: أَنَّ نَبِيَّ اللهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى أَنْ تَزَوَّجَ الْمَرْأَةُ عَلَى عَمَّتِهَا، أَوْ عَلَى خَالَتِهَا.
ـ وفي رواية: نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ يُجْمَعَ بَيْنَ الْمَرْأَةِ وَعَمَّتِهَا، وَبَيْنَ الْمَرْأَةِ وَخَالَتِهَا.

أخرجه عَبد الرَّزَّاق (10754) عن ابن جريج، قال: أخبرني عمرو بن دينار. وفي (10755) عن ابن عيينة، عن عمرو بن دينار. و`أحمد` 2/ 229 (7133) قال: حدَّثنا هشيم، عن عمر بن أبي سلمة. وفي
2/ 255 (7456) قال: حدَّثنا أبو عامر، حدَّثنا هشام، عن يحيى. وفي 2/ 394 (9113) قال: حدَّثنا يونس، حدَّثنا أبان، يعني العطار، عن يحيى. وفي 2/ 423 (9461) قال: حدَّثنا حسن، قال: حدَّثنا شيبان، عن يحيى. و`مسلم` 3423 قال: حدثني أبو معن الرقاشي، حدَّثنا خالد بن الحارث، حدَّثنا هشام، عن يحيى. وفي (3424) قال: وحدثني إسحاق بن منصور، حدَّثنا عبيد الله بن موسى، عن شيبان، عن يحيى. وفي (3427) قال: حدَّثنا محمد بن المثنى، وابن بشار، وأبو بكر بن نافع، قالوا: أخبرنا ابن أبي عدي، عن شعبة، عن عمرو بن دينار. وفي (3428) قال: وحدثني محمد بن حاتم، حدَّثنا شبابة، حدَّثنا ورقاء، عن عمرو بن دينار. و`النَّسائي` 6/ 97، وفي `الكبرى` 5396 قال: أخبرنا مجاهد بن موسى، قال: حدَّثنا ابن عُيينة، عن عمرو بن دينار. وفي 6/ 97، وفي `الكبرى` 5401 قال: أخبرنا يحيى بن درست، قال: حدَّثنا أبو إسماعيل، قال: حدَّثنا يحيى بن أبي كثير.
ثلاثتهم (عَمْرو بن دينار، وعُمر بن أبي سلمة، ويحيى بن أبي كثير) عن أبي سَلَمة، فذكره.
ـ صرح يحيى بن أبي كثير بالسماع، في رواية أحمد (9461)، والنَّسائي` 6/ 97.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: কোনো নারীকে তার ফুফুর ওপর (থাকাকালীন) বিবাহ করা যাবে না এবং তার খালার ওপরও (থাকাকালীন) বিবাহ করা যাবে না।

অন্য এক বর্ণনায় আছে, আল্লাহর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) নিষেধ করেছেন যে, কোনো নারীকে তার ফুফুর ওপর অথবা তার খালার ওপর (একসঙ্গে) বিবাহ করা হবে।

অন্য এক বর্ণনায় আছে, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কোনো নারী ও তার ফুফুকে এবং কোনো নারী ও তার খালাকে (বিবাহ বন্ধনে) একসঙ্গে রাখা থেকে নিষেধ করেছেন।









আল মুসনাদুল জামি` (13524)


13524 - عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ؛
أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى أَنْ تُنْكَحَ الْمَرْأَةُ عَلَى عَمَّتِهَا، وَالْعَمَّةُ عَلَى بِنْتِ أَخِيهَا، وَالْمَرْأَةُ عَلَى خَالَتِهَا، وَالْخَالَةُ عَلَى بِنْتِ أُخْتِهَا، لَا تُنْكَحُ الْكُبْرَى عَلَى الصُّغْرَى، وَلَا الصُّغْرَى عَلَى الْكُبْرَى.

أخرجه عَبد الرَّزَّاق (10758) عن معمر. و`ابن أبي شَيْبَة` 4/ 246 (16764) قال: حدَّثنا ابن فُضَيل. و`أحمد` 2/ 426 (9496) قال: حدَّثنا إسماعيل بن عُلية. و`الدارِمِي` 2178 قال: أخبرنا يزيد بن هارون. و`أبو داود` 2065 قال: حدَّثنا عبد الله بن محمد النفيلي، حدَّثنا زهير. و`التِّرمِذي` 1126 قال: حدَّثنا الحسن بن علي الخلال، حدَّثنا يزيد بن هارون.
و`النَّسائي` 6/ 98، وفي `الكبرى` 5406 قال: أخبرنا إسحاق بن إبراهيم، قال: أنبأنا المعتمر. و`أبو يَعْلَى` 6641 قال: حدَّثنا عَبد الأعلى، حَدَّثنا وُهَيْب. و`ابن حِبَّان` 4117 قال: أخبرنا مُحمد بن إسحاق بن خُزَيْمة، قال: حَدَّثنا مُحمد بن بَشَّار، وأبو موسى، قالا: حَدَّثنا عَبد الوهَّاب الثَّقَفِيّ. وفي (4118) قال: أخبرنا أبو يَعْلَى، قال: حَدَّثنا زكريا بن يَحْيَى الواسطي، قال: حَدَّثنا هُشَيم.
تسعتهم (معمر، ومحمد بن فُضَيل، وإسماعيل بن عُلية، ويزيد بن هارون، وزهير بن معاوية، والمعتمر بن سليمان، ووُهَيْب، وعَبد الوهَّاب الثَّقَفِيّ، وهُشَيم) عن داود بن أبي هِنْد، عن عامر الشعبي، فذكره.
- أخرجه النسائي وفي `الكبرى` 5407 قال: أخبرنا محمد بن عبد الأعلى الصنعاني، قال: حدَّثنا خالد، يعني ابن الحارث، قال: حدَّثنا ابن عون، عن الشَّعْبِيّ، عن أبي هُرَيرة، قال:
لا تزوج المرأة على عمتها، ولا على خالتها، قال: ولا تزوج على ابنة أخيها ولا ابنة أختها.
موقوفٌ.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কোনো মহিলাকে তার ফুপু জীবিত থাকা অবস্থায় তার সাথে বিবাহ করতে নিষেধ করেছেন; আর ফুপুকে তার ভাতিজির সাথে; এবং কোনো মহিলাকে তার খালা জীবিত থাকা অবস্থায় তার সাথে; আর খালাকে তার ভাগ্নির সাথে (একসাথে বিবাহ করতে নিষেধ করেছেন)। বড়জনকে ছোটজনের সাথে বিবাহ করা যাবে না, আর ছোটজনকে বড়জনের সাথে বিবাহ করা যাবে না।









আল মুসনাদুল জামি` (13525)


13525 - عَنْ عِرَاكِ بْنِ مَالِكٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ؛
أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنْ أَرْبَعِ نِسْوَةٍ أَنْ يُجْمَعَ بَيْنَهُنَّ: الْمَرْأَةِ وَعَمَّتِهَا، وَالْمَرْأَةِ وَخَالَتِهَا.

أخرجه مسلم (3420) قال: حدَّثنا محمد بن رمح بن المهاجر. و`النَّسائي` 6/ 97، وفي `الكبرى` 5400 قال: أخبرنا قتيبة.
كلاهما (محمد بن رمح، وقتيبة بن سعيد) عن الليث بن سعد، عن يزيد بن أبي حبيب، عن عراك بن مالك، فذكره.
- وأخرجه النسائي 6/ 97، وفي `الكبرى` 5399 قال: أخبرني إبراهيم بن يعقوب، قال: حدَّثنا ابن أبي مريم، قال: حدَّثنا يحيى بن أيوب، أن جعفر بن ربيعة حدثه، عَنْ عِرَاكِ بْنِ مَالِكٍ، وَعَبْدِ الرَّحْمَانِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنْ رَسُولِ اللهِ صلى الله عليه وسلم؛
أَنَّهُ نَهَى أَنْ تُنْكَحَ الْمَرْأَةُ عَلَى عَمَّتِهَا، أَوْ خَالَتِهَا.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) চার প্রকার নারীকে একত্রে (বিবাহবন্ধনে) রাখা থেকে নিষেধ করেছেন: (১) নারী ও তার ফুফু, এবং (২) নারী ও তার খালা।

তিনি (অন্য বর্ণনায়) নিষেধ করেছেন যে, কোনো নারীকে তার ফুফু বা তার খালার উপর বিবাহ করা হোক।









আল মুসনাদুল জামি` (13526)


13526 - عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ يَسَارٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنْ رَسُولِ اللهِ صلى الله عليه وسلم، أَنَّهُ قَالَ:
لَا تُنْكَحُ الْمَرْأَةُ عَلَى عَمَّتِهَا، وَلَا عَلَى خَالَتِهَا.

أخرجه النسائي 6/ 97، وفي `الكبرى` 5404 قال: أخبرنا عمرو بن منصور، قال: حدَّثنا عبد الله
بن يوسف، قال: حدَّثنا الليث، قال: أخبرني أيوب بن موسى، عن بكير بن عبد الله بن الأشج، عن سليمان بن يسار، عن عبد الملك بن يسار، فذكره.
- أخرجه النسائي في `الكبرى` 5405 قال: أخبرنا أحمد بن عثمان بن حكيم الكوفي، قال: حدَّثنا بكر، عن عيسى، عن محمد بن أبي ليلى، عن رباح المكي، عن بكير بن عبد الله، عن سيمان بن يسار، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنْ رَسُولِ اللهِ صلى الله عليه وسلم، قَالَ:
لَا تُنْكَحُ الْمَرْأَةُ عَلَى عَمَّتِهَا، وَلَا عَلَى خَالَتِهَا.
ليس فيه: ` عبد الملك بن يسار`.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: কোনো নারীকে তার ফুফুর উপর এবং তার খালার উপর (একই সাথে) বিবাহ করা যাবে না।









আল মুসনাদুল জামি` (13527)


13527 - عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ:
نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم عَنِ الشِّغَارِ.
وَزَادَ ابْنُ نُمَيْرٍ: الشِّغَارُ أَنْ يَقُولَ الرَّجُلُ: زَوِّجْنِي ابْنَتَكَ حَتَّى أُزَوِّجَك ابْنَتِي، أَوْ زَوِّجْنِي أُخْتَكَ حَتَّى أُزَوِّجَكَ أُخْتِي.
ـ وفي رواية: نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم عَنِ الشِّغَارِ.
قَالَ عُبَيْدُ اللهِ: وَالشِّغَارُ كَانَ الرَّجُلُ يُزَوِّجُ ابْنَتَهُ عَلَى أَنْ يُزَوِّجَهُ أُخْتَهُ.

أخرجه ابن أبي شَيْبَة 4/ 380 (17495) قال: حدَّثنا ابن نمير، وأبو أسامة. و`أحمد` 2/ 286 (7830) قال: حدَّثنا حماد بن أسامة، أبو أسامة. وفي 2/ 439 (9665) و 2/ 496 (10443) قال: حدَّثنا ابن نمير. و`مسلم` 3453 قال: حدَّثنا أبو بكر بن أبي شيبة، حدَّثنا ابن نمير، وأبو أسامة. وفي (3454) قال: وحدثناه أبو كريب، حدَّثنا عَبْدة. و`ابن ماجة` 1884 قال: حدَّثنا أبو بكر بن أبي ثسيبة، حدَّثنا يحيى بن سعيد، وأبو أسامة. و`النَّسائي` 6/ 112 قال: أخبرنا محمد بن إسماعيل بن إبراهيم، وعبد الرحمن بن محمد بن سلام، قالا: حدثنا إسحاق الأزرق. وفي `الكبرى` 5469 قال: أخبرنا محمد بن إسماعيل بن إبراهيم ابن عُلية، قال: حدثنا إسحاق، هو ابن يوسف الأزرق.
خمستهم (عبد الله بن نمير، وأبو أسامة، وعبدة بن سليمان، ويحيى بن سعيد، وإسحاق الأزرق) عن عبيد الله بن عمر، عن أبي الزناد، عن الأعرج، فذكره.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন:
রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম শিগার (বিনিময় বিবাহ) থেকে নিষেধ করেছেন।

আর ইবনু নুমাইর (রাহিমাহুল্লাহ) অতিরিক্ত বর্ণনা করেছেন: শিগার হলো এই যে, একজন লোক বলবে: তুমি আমার সাথে তোমার মেয়ের বিবাহ দাও, যেন আমি তোমার সাথে আমার মেয়ের বিবাহ দিতে পারি। অথবা, তুমি আমার সাথে তোমার বোনের বিবাহ দাও, যেন আমি তোমার সাথে আমার বোনের বিবাহ দিতে পারি।

অন্য এক বর্ণনায় আছে: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম শিগার থেকে নিষেধ করেছেন। উবাইদুল্লাহ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেছেন: শিগার হলো এই যে, একজন লোক তার মেয়ের বিবাহ এই শর্তে দিত যে, (অন্য লোকটি) তার সাথে তার বোনের বিবাহ দেবে।









আল মুসনাদুল জামি` (13528)


13528 - عَنْ أَبِي سَعِيدٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم؛
تُنْكَحُ النِّسَاءُ لأَرْبَعٍ: لِمَالِهَا، وَجَمَالِهَا، وَحَسَبِهَا، وَدِينِهَا، فَاظْفَرْ بِذَاتِ الدِّينِ تَرِبَتْ يَدَاكَ.

أخرجه أحمد 2/ 428 (9517). و`الدارِمِي` 2170 قال: حدَّثنا صدقة بن الفضل. و`البُخاري` 5090 قال: حدَّثنا مُسَدَّد. و`مسلم` 3625 قال: حدَّثنا زهير بن حرب، ومحمد بن المثنى، وعبيد الله بن سعيد. و`أبو داود` 2047 قال: حدَّثنا مُسَدَّد. و`ابن ماجة` 1858 قال: حدَّثنا يحيى بن حكيم. و`النَّسائي` 6/ 68، وفي `الكبرى` 5318 قال: أخبرنا عبيد الله بن سعيد. و`أبو يَعْلَى` 6578 قال: حدَّثنا العباس بن الوليد. و`ابن حِبَّان` 4036 قال: أخبرنا الحسين بن محمد بن أبي معشر، حدثنا محمد بن بشار.
تسعتهم (أحمد بن حنبل، وصدقة، ومسدد، وزهير، وابن المثنى، وعبيد الله، ويحيى بن حكيم، والعباس بن الوليد، ومحمد بن بشار) عن يحيى بن سعيد، عن عبيد الله بن عمر، عن سَعِيد بن أبي سَعِيد المقبري، عن أبيه، فذكره.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:
নারীদের চারটি কারণে বিবাহ করা হয়: তাদের সম্পদ, তাদের সৌন্দর্য, তাদের বংশমর্যাদা এবং তাদের দ্বীনদারীর কারণে। সুতরাং তুমি দ্বীনদার মহিলাকে লাভ করো, তোমার দু'হাত ধূলিধূসরিত হোক।









আল মুসনাদুল জামি` (13529)


13529 - عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم، قَالَ:
لَا تُنْكَحُ الأَيِّمُ حَتَّى تُسْتَأْمَرَ، وَلَا تُنْكَحُ الْبِكْرُ حَتَّى تُسْتَأْذَنَ، قِيلَ: يَا رَسُولَ اللهِ، وَكَيْفَ إِذْنُهَا؟ قَالَ: أَنْ تَسْكُتَ.
ـ وفي رواية: الْبِكْرُ تُسْتَأْمَرُ، وَالثَّيِّبُ تُشَاوَرُ، قِيلَ: يَا رَسُولَ اللهِ، إِنَّ الْبِكْرَ تَسْتَحِي، قَالَ: سُكُوتُهَا رِضَاهَا.
ـ وفي رواية: الثَّيِّبُ تُسْتَأْمَرُ فِي نَفْسِهَا، وَالْبِكْرُ تُسْتَأْذَنُ، قَالُوا: يَا رَسُولَ اللهِ، كَيْفَ إِذْنُهَا؟ قَالَ: أَنْ تَسْكُتَ.

1 ~ أخرجه عَبد الرَّزَّاق (10286) عن معمر. و`أحمد` 2/ 250 (7398) و 2/ 425 (9487) قال: حدَّثنا إسماعيل، قال:
حدَّثنا الحجاج بن أبي عثمان. وفي 2/ 279 (7745) قال: حدَّثنا عبد الرزاق، حدَّثنا معمر. وفي 2/ 434 (9603) قال: حدَّثنا عبد الملك بن عمرو، حدَّثنا هشام. و`الدارِمِي` 2186 قال: أخبرنا أبو المغيرة، حدَّثنا الأوزاعي. وفي (2187) قال: أخبرنا وهب بن جرير، حدَّثنا هشام. و`البُخاري` 5136 قال: حدَّثنا معاذ بن فضالة، حدَّثنا هشام. وفي (6968) قال: حدَّثنا مسلم بن إبراهيم، حدَّثنا هشام. وفي (6970) قال: حدَّثنا أبو نُعيم، حدَّثنا شيبان. و`مسلم` 3457 قال: حدثني عبيد الله بن عمر بن ميسرة القواريري، حدَّثنا خالد بن الحارث، حدَّثنا هشام. وفي (3458) قال: وحدثني زهير بن حرب، حدَّثنا إسماعيل بن إبراهيم، حدَّثنا الحجاج بن أبي عثمان (ح) وحدثني إبراهيم بن موسى، أخبرنا عيسى، يعني ابن يونس، عن الأوزاعي (ح) وحدثني زهير بن حرب، حدَّثنا حسين بن محمد، حدَّثنا شيبان (ح) وحدثني عمرو الناقد، ومحمد بن رافع، قالا: حدثنا عبد الرزاق، عن معمر (ح) وحدثنا عبد الله بن عبد الرحمن الدارمي، أخبرنا يحيى بن حسان، حدَّثنا معاوية. و`أبو داود` 2092 قال: حدَّثنا مسلم بن إبراهيم، حدَّثنا أبان. و`ابن ماجة` 1871 قال: حدَّثنا عبد الرحمن بن إبراهيم الدمشقي، حدَّثنا الوليد بن مسلم، حدَّثنا الأوزاعي. و`التِّرمِذي` 1107 قال: حدَّثنا إسحاق بن منصور، أخبرنا محمد بن يوسف، حدَّثنا الأوزاعي. و`النَّسائي` 6/ 86، وفي `الكبرى` 5358 قال: أخبرنا يحيى بن درست، قال: حدَّثنا أبو إسماعيل. وفي 6/ 86، وفي `الكبرى` 5357 قال: أخبرنا محمد بن عبد الأعلى، قال: حدَّثنا خالد، وهو ابن الحارث، قال: حدَّثنا هشام. و`أبو يَعْلَى` 6013 قال: حدَّثنا داود بن رشيد، حَدَّثنا إسماعيل بن عَيَّاش،

2 ~ أخرجه أحمد 2/ 229 (7131) قال: حدَّثنا هشيم، عن عمر بن أبى سلمة.
كلاهما (يحيى بن أبي كثير، وعمر بن أبي سلمة) عن أبي سَلَمة بن عبد الرحمن، فذكره.
ـ صرح يحيى بن أبي كثير بالتحديث، في رواية مسلم (3457)، النَّسائي` 6/ 86.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী কারীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:

কোনো বিবাহিতা (বিধবা বা তালাকপ্রাপ্তা) নারীকে তার আদেশ না নেওয়া পর্যন্ত বিবাহ দেওয়া যাবে না, আর কুমারী নারীকে তার সম্মতি না নেওয়া পর্যন্ত বিবাহ দেওয়া যাবে না। জিজ্ঞেস করা হলো: হে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)! তার সম্মতি কেমন হবে? তিনি বললেন: তার নীরব থাকা।

—অন্য এক বর্ণনায় আছে: কুমারী নারীর আদেশ চাওয়া হবে, আর বিবাহিতা নারীর সাথে পরামর্শ করা হবে। জিজ্ঞেস করা হলো: হে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)! কুমারী নারী তো লজ্জাবতী হয়ে থাকে। তিনি বললেন: তার নীরবতাই তার সম্মতি।

—অন্য আরেক বর্ণনায় আছে: বিবাহিতা নারীকে তার নিজের ব্যাপারে আদেশ চাওয়া হবে এবং কুমারী নারীর অনুমতি নেওয়া হবে। সাহাবীগণ বললেন: হে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)! তার অনুমতি কেমন হবে? তিনি বললেন: তার নীরব থাকা।









আল মুসনাদুল জামি` (13530)


13530 - عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم:
تُسْتَأْمَرُ الْيَتِيمَةُ فِي نَفْسِهَا، فَإِنْ سَكَتَتْ فَهُوَ إِذْنُهَا، وَإِنْ أَبَتْ فَلَا جَوَازَ عَلَيْهَا.
ـ وفي رواية: إِنْ رَضِيَتْ فَلَهَا رِضَاهَا، وَإِنْ كَرِهَتْ فلَا جَوَازَ عَلَيْهَا، يَعْنِي الْيَتِيمَةَ.
ـ وفي رواية: تُسْتَأْمَرُ الْيَتِيمَةُ فِي نَفْسِهَا، فَإِذَا أَمْسَكَتْ فَهُوَ رِضَاهَا.

أخرجه عَبد الرَّزَّاق (10297) عن الثَّوْريّ. و`ابن أبي شَيْبَة` 4/ 138 (15983) قال: حدَّثنا أبو مُعاوية. و`أحمد` 2/ 259 (7519) قال: حدَّثنا عبد الواحد. وفي 2/ 384 (8976) قال: حدَّثنا عفان، حدَّثنا حماد بن سلمة. وفي 2/ 475 (10151) قال: حدَّثنا يحيى. و`أبو داود` 2093 قال: حدَّثنا أبو كامل، حدَّثنا يزيد، يعني ابن زريع (ح) وحدثنا موسى بن إسماعيل، حدَّثنا حماد، المعنى. وفي (2094) قال: حدَّثنا محمد بن العلاء، حدَّثنا ابن إدريس. و`التِّرمِذي` 1109 قال: حدَّثنا قتيبة، حدَّثنا عبد العزيز بن محمد. و`النَّسائي` 6/ 87، وفي `الكبرى` 5360 قال: أخبرنا عمرو بن علي، قال: حدَّثنا يحيى. و`أبو يَعْلَى` 6019 قال: حدَّثنا أبو يوسف الجيزي، حَدَّثنا عَبد الله بن الوليد، عن سُفيان. و`ابن حِبَّان` 4079 قال: أخبرنا عَبد الله بن مُحمد الأزدي، حَدَّثنا إسحاق بن إبراهيم، أخبرنا مُصعب بن المقدام، حَدَّثنا زائدة. وفي (4086) قال: أخبرنا أبو يَعْلَى في عقبه، حَدَّثنا عَبد الله بن عامر، حَدَّثنا ابن أبي زائدة.
عشرتهم (سفيان الثَّوْريّ، وأبو مُعاوية، وعبد الواحد، وحماد بن سلمة، ويحيى بن سعيد القطان، ويزيد بن زريع، وعبد الله بن إدريس، وعبد العزيز بن محمد، وزائدة بن قدامة، ويحيى بن زكريا بن أبي زائدة) عن محمد بن عمرو، عن أبي سَلَمة بن عبد الرحمن، فذكره.
ـ زاد ابن إدريس في روايته: ` فَإِنْ بَكَتْ أَوْ سَكَتَتْ` زاد: ` بَكَتْ` قال أبو داود: وليس: ` بَكَتْ` بمَحْفُوظٍ، وهو وَهَمٌ في الحديثِ، الوهمُ من ابن إدريس، أو من مُحَمد بن العلاء.
ـ قال أبو داود عقب (2093): وكذلك رواه أبو خالد، سُلَيمان بن حَيَّان، ومُعَاذ، عن مُحَمد بن عَمْرو.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: ইয়াতীম (অপ্রাপ্তবয়স্কা) নারীর নিজের ব্যাপারে তার কাছ থেকে পরামর্শ চাওয়া হবে। যদি সে নীরব থাকে, তবে সেটাই তার সম্মতি। আর যদি সে অস্বীকার করে, তবে তার উপর কোনো জবরদস্তি নেই।

অন্য এক বর্ণনায় এসেছে: যদি সে রাজি হয়, তবে তার সম্মতিই গ্রহণযোগ্য হবে। আর যদি সে অপছন্দ করে, তবে তার উপর কোনো জবরদস্তি করা যাবে না—অর্থাৎ ইয়াতীম নারীর ক্ষেত্রে।

অন্য এক বর্ণনায় এসেছে: ইয়াতীম নারীর নিজের ব্যাপারে তার কাছ থেকে পরামর্শ চাওয়া হবে। আর যখন সে চুপ করে থাকবে, তখন সেটাই তার সন্তুষ্টি।









আল মুসনাদুল জামি` (13531)


13531 - عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم:
لَا تُزَوِّجُ الْمَرْأَةُ الْمَرْأَةَ، وَلَا تُزَوِّجُ الْمَرْأَةُ نَفْسَهَا، فَإِنَّ الزَّانِيَةَ
هِيَ الَّتِي تُزَوِّجُ نَفْسَهَا.

أخرجه ابن ماجة (1882) قال: حدَّثنا جميل بن الحسن العتكي، حدَّثنا محمد بن مروان العقيلي، حدَّثنا هشام بن حسان، عن محمد بن سيرين، فذكره.
- أخرجه عَبد الرَّزَّاق (10494) عن هشام بن حسان، عن مُحمد بن سِيرِين، عن أبي هُرَيرة، قال:
لَا تُنْكِحُ الْمَرْأَةُ نَفْسَهَا، فَإِنَّ الزَّانِيَةَ تُنْكِحُ نَفْسَهَا.
موقوفٌ.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "কোন নারী যেন অন্য কোনো নারীর বিবাহ না দেয়, এবং কোনো নারী যেন নিজের বিবাহ নিজে না দেয়। কারণ ব্যভিচারিণী নারীই নিজের বিবাহ নিজে দিয়ে থাকে।"









আল মুসনাদুল জামি` (13532)


13532 - عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَانِ بْنِ يَعْقُوبَ، وَأَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ:
لَا يَخْطُبْ الرَّجُلُ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ، وَلَا يَسْتَمْ عَلَى سِيْمَةِ أَخِيهِ.
ـ وفي رواية: أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم نَهَى أَنْ يَسْتَامَ الرَّجُلُ عَلَى سَوْمِ أَخِيهِ، أَوْ يَخْطُبَ عَلَى خِطْبَتِهِ.

أخرجه أحمد 2/ 462 (9960) قال: حدَّثنا عبد الرحمن بن مهدي. وفي 2/ 529 (10862) قال: حدَّثنا عبد الصمد. و`مسلم` 3446 و 3806 قال: حدثني أحمد بن إبراهيم الدورقي، حدَّثنا عبد الصمد.
كلاهما (ابن مهدي، وعبد الصمد) عن شعبة، عن العلاء، وسهيل، عن أبيهما، فذكراه.
- وأخرجه أحمد 2/ 411 (9323) قال: حدَّثنا عفان، قال: حدَّثنا عبد الرحمن بن إبراهيم. وفي 2/ 457 (9901) قال: حدَّثنا محمد بن جعفر، قال: حدَّثنا شعبة. و`مسلم` 3445 و 3805 قال: حدَّثنا يحيى بن أيوب، وقتيبة بن سعيد، وابن حُجْر، قالوا: حدثنا إسماعيل، وهو ابن جعفر. و`أبو يَعْلَى` 6514 قال: حدَّثنا يَحْيَى بن أيوب، حَدَّثنا إسماعيل.
ثلاثتهم (عبد الرحمن بن إبراهيم، وشعبة، وإسماعيل بن جعفر) عن العلاء بن عبد الرحمن، عن أبيه، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم، أَنَّهُ قَالَ:
لَا يَسْتَامُ الرَّجُلُ عَلَى سَوْمِ أَخِيهِ، وَلَا يَخْطُبُ عَلَى خِطْبَتِهِ.
ليس فيه: ` أبو صالح`.
ـ وفي رواية: لَا يَسُمِ الرَّجُلُ عَلَى سَوْمِ أَخِيهِ الْمُسْلِمِ، وَلَا يَخْطُبُ عَلَى خِطْبَتِهِ.
- وأخرجه أحمد 2/ 529 (10861) قال: حدَّثنا عبد الصمد، حدَّثنا شعبة، عن الأعمش. و`الدارِمِي` 2175 قال: أخبرنا أبو الوليد الطيالسي، حدَّثنا شعبة، عن سهيل بن أبي صالح. و`مسلم` 3447 و 3807 قال: حدَّثناه محمد
بن المثنى، حدَّثنا عبد الصمد، حدَّثنا شعبة، عن الأعمش. و`ابن حِبَّان` 4048 قال: أخبرنا الفضل بن الحباب، قال: حدثنا أبو الوليد، قال: حدثنا شعبة، عن سهيل بن أبي صالح.
كلاهما (الأعمش، وسهيل) عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالََ: قَالََ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم:
لَا يَسْتَامُ الرَّجُلُ عَلَى سَوْمِ أَخِيهِ، وَلَا يَخْطُبُ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ.
ليس فيه: ` عبد الرحمن بن يَعْقُوب`.
ـ وفي رواية: عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم، أَنَّهُ نَهَى أَنْ يَسْتَامَ الرَّجُلُ عَلَى سَوْمِ أَخِيهِ، أَوْ يَخْطُبَ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: কোনো ব্যক্তি যেন তার ভাইয়ের বিবাহের প্রস্তাবের ওপর প্রস্তাব না দেয়, এবং তার ভাইয়ের দরদামের ওপর সে যেন দরদাম না করে।

(অন্য এক বর্ণনায় এসেছে, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) নিষেধ করেছেন যে, কোনো ব্যক্তি যেন তার ভাইয়ের দরদামের ওপর দরদাম না করে, অথবা তার বিয়ের প্রস্তাবের ওপর প্রস্তাব না দেয়।)









আল মুসনাদুল জামি` (13533)


13533 - عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم، أَنَّهُ قَالَ:
لَا يَخْطُبُ أَحَدُكُمْ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ، وَلَا يَسْتَامُ عَلَى سَوْمِ أَخِيهِ، وَلَا تُنْكَحُ الْمَرْأَةُ عَلَى عَمَّتِهَا، وَلَا عَلَى خَالَتِهَا، وَلَا تَسْأَلُ طَلَاقَ أُخْتِهَا لِتَكْتَفِئَ صَحْفَتَهَا، وَلِتَنْكِحْ فَإِنَّمَا لَهَا مَا كَتَبَ اللهُ لَهَا.
ـ وفي رواية: لَا تُنْكَحُ الْمَرْأَةُ عَلَى عَمَّتِهَا، وَلَا عَلَى خَالَتِهَا.
ـ وفي رواية: نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ تُنْكَحَ الْمَرْأَةُ عَلَى عَمَّتِهَا، أَوْ خَالَتِهَا، أَوْ أَنْ تَسْأَلَ الْمَرْأَةُ طَلَاقَ أُخْتِهَا لِتَكْتَفِئَ مَا فِي صَحْفَتِهَا، فَإِنَّ اللهَ، عز وجل، رَازِقُهَا.
ـ وفي رواية: لَا يَخْطُبْ أَحَدُكُمْ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ.

أخرجه عَبد الرَّزَّاق (10753) عن هشام. و`أحمد` 2/ 432 (9584) و 2/ 474 (10144) قال: حدَّثنا يحيى، عن هشام. وفي 2/ 489 (10351) قال: حدَّثنا محمد بن جعفر، قال: حدَّثنا هشام القُرْدُوسي. وفي 2/ 508 (10613) قال: حدَّثنا يزيد، أخبرنا هشام بن حسان. وفي 2/ 516 (10700) قال: حدَّثنا روح، حدَّثنا هشام. و`مسلم` 3425 قال: حدَّثنا أبو بكر بن أبي شيبة، حدَّثنا أبو أسامة، عن هشام. وفي (3426) قال: وحدثني محرز بن عون بن أبي عون، حدَّثنا علي بن مسهر، عن داود بن أبي هند. و`ابن ماجة` 1929 قال: حدَّثنا أبو بكر بن أبي شيبة، حدَّثنا أبو أسامة، عن هشام بن حسان. و`التِّرمِذي` 1125 قال: حدَّثنا نصر بن علي، حدَّثنا عبد الأعلى، عن هشام بن حسان. و`النَّسائي` 6/ 73، وفي `الكبرى` 5339 قال: أخبرنا قتيبة، قال: حدَّثنا غُنْدَر، عن هشام. وفي 6/ 98، وفي `الكبرى` 5402 قال: أخبرنا عبيد الله بن سعيد، قال: حدَّثنا يحيى، قال: حدَّثنا هشام. و`ابن حِبَّان` 4068 قال: أخبرنا عَبد الله بن مُحمد بن سلم، قال: حَدَّثنا مُحمد بن عَبد الأعلى الصنعاني، بمَكَّةَ، قال: حَدَّثنا الطفاوي، قال: حَدَّثنا أيوب.
ثلاثتهم (هشام بن حسان، وداود بن أبي هند، وأيوب) عن محمد بن سيرين، فذكره.
- أخرجه النسائي في `الكبرى` 5338 قال: أخبرنا قتيبة بن سعيد، قال: حدَّثنا حماد، يعني ابن زيد، عن أيوب، عن محمد، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ:
لَا يَسُمِ الرَّجُلُ عَلَى سَوْمِ أَخِيهِ، وَلَا يَخْطُبْ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ.
موقوفٌ.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: তোমাদের কেউ যেন তার ভাইয়ের বিবাহের প্রস্তাবের উপর (অন্য) প্রস্তাব না দেয়, আর কেউ যেন তার ভাইয়ের দর কষাকষির উপর দর কষাকষি না করে। কোনো নারীকে তার ফুফুর সাথে (একত্রে) বিবাহ করা যাবে না, আর না তার খালার সাথে (একত্রে বিবাহ করা যাবে)। আর কোনো নারী যেন তার (মুসলিম) বোনের তালাক না চায়—তার পাত্রটি উল্টে দেওয়ার জন্য (অর্থাৎ তার প্রাপ্য জীবিকা কেড়ে নেওয়ার জন্য) এবং নিজে বিবাহ করার জন্য। কারণ আল্লাহ তার জন্য যা লিখে রেখেছেন, সে তাই পাবে।

অন্য বর্ণনায় আছে: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কোনো নারীকে তার ফুফু অথবা তার খালার সাথে একত্রে বিবাহ করতে নিষেধ করেছেন, আর কোনো নারীর জন্য তার বোনের তালাক চাইতে নিষেধ করেছেন যেন সে তার পাত্রে যা আছে তা উল্টে দিতে পারে। কেননা আল্লাহ তা‘আলা-ই তার রিযিকদাতা।









আল মুসনাদুল জামি` (13534)


13534 - عَنِ الْوَلِيدِ بْنِ رَبَاحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم:
لَا تَبَاغَضُوا، وَلَا تَحَاسَدُوا، وَلَا تَنَاجَشُوا، وَلَا تَدَابَرُوا، وَكُونُوا عِبَادَ اللهِ إِخْوانًا، لَا يَبِيعَنَّ حَاضِرٌ لِبَادٍ، وَلَا تَلَقَّوُا الرُّكْبَانَ بِبَيْعٍ، وَأَيُّمَا امْرِئٍ ابْتَاعَ شَاةً فَوَجَدَهَا مُصَرَّاةً فَلْيَرُدَّهَا، وَلْيَرُدَّ مَعَهَا صَاعًا مِنْ تَمْرٍ، وَلَا يَسُمْ أَحَدُكُمْ عَلَى سَوْمِ أَخِيهِ، وَلَا يَخْطُبْ عَلَى خِطْبَتِهِ، وَلَا تَسْأَلِ الْمَرْأَةُ طَلَاقَ أُخْتِهَا لِتَكْتَفِئَ مَا فِي إِنَائِهَا، فَإِنَّ رِزْقَهَا عَلَى اللهِ، عز وجل.

أخرجه أحمد 2/ 394 (9109) قال: حدَّثنا أبو أحمد، قال: حدَّثنا كثير بن زيد، عن الوليد بن رباح، فذكره.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: তোমরা একে অপরের প্রতি বিদ্বেষ পোষণ করো না, হিংসা করো না, (কৃত্রিম ক্রেতা সেজে) নাজাশ করো না এবং পরস্পরের প্রতি মুখ ফিরিয়ে নিও না। তোমরা আল্লাহর বান্দা হিসেবে ভাই ভাই হয়ে যাও। কোনো শহরবাসী যেন কোনো গ্রামবাসীর কাছে (বিক্রির জন্য আনা) মাল কিনে না নেয়। তোমরা কাফেলার পথ রোধ করে তাদের কাছ থেকে পণ্য কিনে নিও না। আর যে ব্যক্তি কোনো বকরী ক্রয় করলো এবং দেখলো যে তাকে 'মুসাররাহ' (স্তনে দুধ জমিয়ে রেখে ধোঁকা দেওয়া) করা হয়েছে, সে যেন তা ফেরত দেয় এবং এর সাথে এক সা' পরিমাণ খেজুরও ফেরত দেয়। তোমাদের কেউ যেন তার ভাইয়ের দরদামের ওপর দরদাম না করে, এবং তার বিবাহের প্রস্তাবের ওপর প্রস্তাব না দেয়। আর কোনো নারী যেন তার অপর (মুসলিম) বোনের তালাক কামনা না করে, যাতে সে তার পাত্রের সবটুকু (সুবিধা) নিজের জন্য ঢেলে নিতে পারে। কেননা তার রিযক্ব আল্লাহ আযযা ওয়া জাল্ল-এর দায়িত্বে।









আল মুসনাদুল জামি` (13535)


13535 - عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم، قَالَ:
لَا يَسُمِ الرَّجُلُ عَلَى سَوْمِ أَخِيهِ، وَلَا يَخْطُبْ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ.

أخرجه أحمد 2/ 427 (9514) قال: حدَّثنا إسماعيل، عن يونس بن عبيد، عن الحسن، فذكره.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: কোনো ব্যক্তি যেন তার ভাইয়ের প্রস্তাবিত দর-দামের ওপর দর-দাম না করে এবং তার ভাইয়ের বিবাহের প্রস্তাবের ওপর প্রস্তাব না দেয়।









আল মুসনাদুল জামি` (13536)


13536 - عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ:
لَا يَخْطُبُ أَحَدُكُمْ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ.

أخرجه مالك `الموطأ` 324. و`أحمد` 2/ 462 (9952) قال: قرأتُ على عبد الرحمن. و`النَّسائي` 6/ 73، وفي `الكبرى` 5335 قال: أخبرني هارون بن عبد الله، قال: حدَّثنا معن (ح) والحارث بن مسكين، قراءة عليه، وأنا أسمع، عن ابن القاسم.
ثلاثتهم (عبد الرحمن بن مهدي، ومعن، وعبد الرحمن بن القاسم) عن مالك، عن محمد بن يحيى بن حَبَّان، عن الأعرج، فذكره.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: তোমাদের কেউ যেন তার ভাইয়ের বিবাহের প্রস্তাবের ওপর প্রস্তাব না দেয়।









আল মুসনাদুল জামি` (13537)


13537 - عَنْ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم:
لَا يَبْتَاعُ الرَّجُلُ عَلَى بَيْعِ أَخِيهِ، وَلَا يَخْطُبُ عَلَى خِطْبَتِهِ، وَلَا تَشْتَرِطُ الْمَرْأَةُ طَلَاقَ أُخْتِهَا لِتَسْتَفْرِغَ صَحْفَتَهَا، فَإِنَّمَا لَهَا مَا كَتَبَ اللهُ، عز وجل، لَهَا.
ـ لفظ ابن حِبَّان (4050): لَا يَسْتَامُ الرَّجُلُ عَلَى سَوْمِ أَخِيهِ حَتَّى يَشْتَرِيَ أَوْ يَتْرُكَ، وَلَا يَخْطُبُ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ حَتَّى يَنْكِحَ أَوْ يَذَرَ.
ـ ولفظ ابن حِبَّان (4070): لَا تَسْأَلِ الْمَرْأَةُ طَلَاقَ أُخْتِهَا لِتَسْتَفْرِغَ مَا فِي صَحْفَتِهَا، فَإِنَّ الْمُسْلِمَةَ أُخْتُ الْمُسْلِمَةِ.

أخرجه أحمد 2/ 311 (8086) قال: حدَّثنا هاشم، حدَّثنا أيوب. و`ابن حِبَّان` 4050 و 4070 قال: أخبرنا عبد الله بن محمد بن سلم، قال: حدثنا عبد الرحمن بن إبراهيم، قال: حدثنا الوليد، قال: حدثنا الأوزاعي.
كلاهما (أيوب، والأوزاعي) عن أبي كثير، فذكره.
ـ قال ابن حِبَّان: أبو كثير: اسمه يزيد بن عبد الرحمن بن أذينة.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: কোনো ব্যক্তি যেন তার ভাইয়ের বেচাকেনার ওপর বেচাকেনা না করে এবং তার বিবাহের প্রস্তাবের ওপর (নতুন) প্রস্তাব না দেয়। আর কোনো নারী যেন তার বোনকে তালাক দেওয়ার শর্ত না করে, যাতে সে তার পাত্রটি খালি করে দিতে পারে। কেননা আল্লাহ তা‘আলা তার জন্য যা নির্ধারণ করেছেন, তাই কেবল সে পাবে।









আল মুসনাদুল জামি` (13538)


13538 - عَنْ يُوسُفَ بْنِ مَاهَكَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم:
ثَلَاثٌ جِدُّهُنَّ جِدٌّ، وَهَزْلُهُنَّ جِدٌّ: النِّكَاحُ، وَالطَّلَاقُ،
وَالرَّجْعَةُ.

أخرجه أبو داود (2194) قال: حدَّثنا القعنبي، حدَّثنا عبد العزيز، يعني ابن محمد. و`ابن ماجة` 2039 قال: حدَّثنا هشام بن عمار، حدَّثنا حاتم بن إسماعيل. و`التِّرمِذي` 1184 قال: حدَّثنا قتيبة، حدَّثنا حاتم بن إسماعيل.
كلاهما (عبد العزيز، وحاتم) عن عبد الرحمن بن حبيب بن أردك، عن عطاء بن أبي رباح، عن يوسف بن ماهك، فذكره.
ـ قال أبو عِيسَى التِّرمِذي: هذا حديثٌ حسنٌ غريبٌ.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: তিনটি বিষয় এমন, যার গুরুত্ব প্রদান করাও গুরুত্ব (বা কার্যকর), আর ঠাট্টা করাও গুরুত্ব (বা কার্যকর)। সেগুলো হলো: বিবাহ, তালাক এবং রুজু (তালাকের পর স্ত্রীকে ফিরিয়ে নেওয়া)।









আল মুসনাদুল জামি` (13539)


13539 - عَنِ ابْنِ وَثِيمَةَ النَّصْرِيِّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم:
إِذَا أَتَاكُمْ مَنْ تَرْضَوْنَ خُلُقَهُ وَدِينَهُ فَزَوِّجُوهُ، إِلَاّ تَفْعَلُوا تَكُنْ فِتْنَةٌ فِي الأَرْضِ وَفَسَادٌ عَرِيضٌ.
ـ لفظ التِّرمِذي: إِذَا خَطَبَ إِلَيْكُمْ مَنْ تَرْضَوْنَ دِينَهُ وَخُلُقَهُ فَزَوِّجُوهُ، إِلَاّ تَفْعَلُوا تَكُنْ فِتْنَةٌ فِي الأَرْضِ وَفَسَادٌ عَرِيضٌ.

أخرجه ابن ماجة (1967) قال: حدَّثنا محمد بن شابور الرقي. و`التِّرمِذي` 1084 قال: حدَّثنا قتيبة.
كلاهما (محمد، وقتيبة) عن عبد الحميد بن سليمان الأنصاري، عن ابن عجلان، عن ابن وثيمة النصري، فذكره.
ـ قال أبو عيسى الترمذي: حديث أبي هريرة قد خُولِفَ عبد الحميد بن سليمان في هذا الحديث، ورواه اللَّيْث بن سَعْد، عن ابن عجلان، عن أبي هُرَيْرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم مرسلاً.
قال أبو عيسى: قال محمد (يعني البخاري): وحديث الليث أشبه، ولم يَعُدَّ حديث عبد الحميد محفوظًا.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যখন তোমাদের নিকট এমন কেউ বিবাহের প্রস্তাব নিয়ে আসে যার দ্বীন ও চরিত্র তোমরা পছন্দ করো, তখন তাকে বিবাহ দাও। যদি তোমরা তা না করো, তবে পৃথিবীতে মহা ফেতনা ও ব্যাপক বিশৃঙ্খলা সৃষ্টি হবে।









আল মুসনাদুল জামি` (13540)


13540 - عَنْ عَطَاءِ بْنِ أَبِي رَبَاحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ،
قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم:
انْكِحُوا، فَإِنِّي مُكَاثِرٌ بِكُمْ.

أخرجه ابن ماجة (1863) قال: حدَّثنا يعقوب بن حميد بن كاسب، حدَّثنا عبد الله بن الحارث المخزومي، عن طلحة، عن عطاء، فذكره.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: তোমরা বিবাহ করো, কেননা আমি তোমাদের সংখ্যাধিক্য নিয়ে গর্ববোধ করব।









আল মুসনাদুল জামি` (13541)


13541 - عَنِ حَجَّاجِ بْنِ حَجَّاجِ الأَسْلَمِيِّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم:
لَا يُحَرِّمُ مِنَ الرَّضَاعِ الْمَصَّةُ وَلَا الْمَصَّتَانِ، إِنَّمَا يُحَرِّمُ مَا فَتَقَ مِنَ اللَّبَنِ.

أخرجه النسائي في `الكبرى` 5437 و 5443 قال: أخبرنا محمد بن منصور الطوسي، قال: حدَّثنا يعقوب، وهو ابن إبراهيم بن سعد، قال: حدَّثنا أبي، عن ابن إسحاق، قال: حدثني هشام بن عروة، عن أبيه، عن عبد الله بن الزبير، عن الحجاج بن الحجاج الأسلمي، فذكره.
- وأخرجه النسائي في `الكبرى` 5438 قال: أخبرنى محمد بن قدامة المصيصي، عن جرير، عن ابن إسحاق، عن إبراهيم بن عقبة، قال: كان عروة يُحَدِّثُ، عن حجاج بن حجاج، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ:
لَا يُحَرِّمُ مِنَ الرَّضَاعِ الْمَصَّةُ وَالْمَصَّتَانِ، وَلَا يُحَرِّمُ مِنْهُ إِلَاّ مَا فَتَقَ الأَمْعَاءَ مِنَ اللَّبَنِ.
ليس فيه: ` عبد الله بن الزبير.
- وأخرجه عَبد الرَّزَّاق (13910) قال: أخبرنا ابن جُرَيج، ومعمر. و`ابن أبي شَيْبَة` 4/ 291 (17058) قال: حدَّثنا أبو أُسامة. وفي (17059) قال: حدَّثنا ابن نُمَير.
أربعتهم (ابن جُرَيج، ومعمر، وأبو أُسامة، وعبد الله بن نُمَير) عن هشام بن عُرْوَة، عن عُرْوَة، عن الحجاج بن الحجاج الأَسْلَمِيّ، أنه استفتى أبا هُرَيرة، فقال:
لا يحرم إلَاّ ما فتق الأمعاء.
موقوفٌ.
- وأخرجه ابن أبي شَيْبَة 4/ 291 (17057) قال: حدَّثنا عبدة. و`النسائي` في `الكبرى` 5442 قال: أخبرنا محمد بن عبد الأعلى الصنعاني، قال: حدَّثنا المعتمر، قال: سمعت عُبيد الله، يعني ابن عُمر.
كلاهما (عبدة بن سُليمان، وعُبيد الله بن عُمر) عن هشام بن عروة، عن أبيه، أن أبا هُرَيرة سئل عن الرضاع، فقال:
لا يحرم من الرضاع إلَاّ ما فتق الأمعاء، وكان في الثدي قبل الفطام.
موقوفٌ.
ـ رواه ابن لهيعة، عن أبي الأسود، عن عروة، عن عبد الله بن الزبير، عن النبي صلى الله عليه وسلم، وسلف في مسنده، الحديث رقم (6438).




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: এক ঢোক বা দুই ঢোক স্তন্যপান দ্বারা (বিবাহের সম্পর্ক) হারাম হয় না। বরং কেবল সেই দুধই হারাম করে যা (পেটে গিয়ে) অন্ত্রকে পরিপূর্ণ করে।









আল মুসনাদুল জামি` (13542)


13542 - عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، رضي الله عنه، قَالَ:
قُلْتُ: يَا رَسُولَ اللهِ، إِنِّي رَجُلٌ شَابٌّ، وَأَنَا أَخَافُ عَلَى نَفْسِي الْعَنَتَ، وَلَا أَجِدُ مَا أَتَزَوَّجُ بِهِ النِّسَاءَ، فَسَكَتَ عَنِّي، ثُمَّ قُلْتُ مِثْلَ ذَلِكَ، فَسَكَتَ عَنِّي، ثُمَّ قُلْتُ مِثْلَ ذَلِكَ، فَسَكَتَ عَنِّي، ثُمَّ قُلْتُ مِثْلَ ذَلِكَ، فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم: يَا أَبَا هُرَيْرَةَ جَفَّ الْقَلَمُ بِمَا أَنْتَ
لَاقٍ، فَاخْتَصِ عَلَى ذَلِكَ أَوْ ذَرْ.

أخرجه البخاري (5076) قال: وقال أصبغ: أخبرني ابن وَهْب، عن يُونُس بن يزيد. و`النسائي` 6/ 59 قال: أخبرنا يحيى بن موسى، قال: حدَّثنا أنس بن عياض، قال: حدَّثنا الأوزاعي.
كلاهما (يُونُس، والأوزاعي) عن ابن شهاب، عن أبي سَلَمة، فذكره.
ـ قال أبو عَبْد الرَّحْمان النسائي: الأوزاعي لم يسمع هذا الحديث من الزهري، وهذا حديثٌ صحيحٌ قد رواه يُونُس عن الزُّهْري.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি বললাম: ইয়া রাসূলাল্লাহ! আমি একজন যুবক পুরুষ এবং আমি আমার নিজের জন্য পাপের ভয় করি, অথচ নারীদের বিবাহ করার মতো (সামর্থ্য) পাচ্ছি না। অতঃপর তিনি আমার থেকে নীরব রইলেন। এরপর আমি অনুরূপ কথা বললাম, তিনি আমার থেকে নীরব রইলেন। এরপর আমি অনুরূপ কথা বললাম, তিনি আমার থেকে নীরব রইলেন। এরপর আমি অনুরূপ কথা বললাম। অতঃপর নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: হে আবূ হুরায়রা! তুমি যা কিছু লাভ করবে (বা তোমার ভাগ্যে যা ঘটবে) সে বিষয়ে কলম শুকিয়ে গেছে (অর্থাৎ লিপিবদ্ধ হয়ে গেছে)। অতএব তুমি সেই অনুযায়ী খাসী হয়ে যাও অথবা তা ছেড়ে দাও।