আল মুসনাদুল জামি`
13603 - عَنْ أَبِي زُرْعَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم:
لَا يَتَفَرَّقُ الْمُتَبَايِعَانِ عَنْ بَيْعٍ إِلَا عنْ تَرَاضٍ.
ـ وفي رواية: كَانَ أَبُو زُرْعَةَ إِذَا بَايَعَ رَجُلاً خَيَّرَهُ، قَالَ: ثُمَّ يَقُولُ: خَيِّرْنِي، وَيَقُولُ: سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم:
لَا يَفْتَرِقَنَّ اثْنَانِ إِلَاّ عَنْ تَرَاضٍ.
أخرجه أحمد 2/ 536 (10935) قال: حدَّثنا محمد بن عبد الله بن الزبير. و`أبو داود` 3458 قال: حدَّثنا محمد بن حاتم الجرجرائي، قال مروان الفزاري: أخبرنا. و`التِّرمِذي` 1248 قال: حدَّثنا نصر بن علي، حدَّثنا أبو أحمد.
كلاهما (محمد بن عبد الله بن الزبير، أبو أحمد، ومروان) عن يحيى بن أيوب البجلي الكوفي، قال: سمعتُ أبا زرعة بن عمرو بن جرير يُحَِّث، فذكره.
ـ قال أبو عِيسَى التِّرمِذي: هذا حديثٌ غريبٌ.
- أخرجه ابن أبي شَيْبَة 7/ 83 (22412) قال: حَدَّثنا وَكِيع، عن سُفيان، عن أبي عتاب، عن أبي زرعة، أنه باع فرسًا فخير صاحبه بعد البيع، ثم قال: سمعت أبا هُرَيرة يقول: هكذا البيع عن تراض.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:
ক্রেতা-বিক্রেতা সন্তুষ্টি ব্যতীত ক্রয়-বিক্রয়ের স্থান থেকে বিচ্ছিন্ন হবে না।
— অন্য এক বর্ণনায় আছে, আবূ যুরআ যখন কোনো ব্যক্তির সাথে কেনাবেচা করতেন, তখন তাকে ইখতিয়ার (পছন্দের সুযোগ) দিতেন। তিনি বলতেন: আমাকেও ইখতিয়ার দিন। তিনি বলতেন, আমি আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে বলতে শুনেছি যে, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: দুই ব্যক্তি পারস্পরিক সন্তুষ্টি ছাড়া বিচ্ছিন্ন হবে না।
13604 - عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَانِ بْنِ يَعْقُوبَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ؛
أَنَّ رَجُلاً قَالَ: سَعِّرْ يَا رَسُولَ اللهِ، قَالَ: إِنَّمَا يَرْفَعُ اللهُ وَيَخْفِضُ، إِنِّي لأَرْجُو أَنْ أَلْقَى اللهَ، عز وجل، وَلَيْسَ لأَحَدٍ عِنْدِي مَظْلَمَةٌ، قَالَ آخَرُ: سَعِّرْ، فَقَالَ: ادْعُو اللهَ، عز وجل.
أخرجه أحمد 2/ 377 (8429) قال: حدَّثنا منصور، أخبرنا سليمان. وفي 2/ 372 (8839) قال: حدَّثنا سليمان، أخبرنا إسماعيل. و`أبو داود` 3450 قال: حدَّثنا محمد بن عثمان الدمشقي، أن سليمان بن بلال حدثهم. و`أبو يَعْلَى` 6521 قال: حدَّثنا يحيى بن أيوب، حدثنا إسماعيل.
كلاهما (سليمان بن بلال، وإسماعيل بن جعفر) عن العلاء بن عبد الرحمن، عن أبيه، فذكره.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, এক ব্যক্তি বলল, হে আল্লাহর রাসূল! মূল্য নির্ধারণ করে দিন। তিনি বললেন, নিশ্চয়ই আল্লাহই মূল্য বাড়ান এবং কমান। আমি আশা করি, মহান আল্লাহর সাথে এমন অবস্থায় সাক্ষাৎ করব যে, কারো কাছে আমার কোনো যুলুমের পাওনা থাকবে না। অন্য একজন বলল, মূল্য নির্ধারণ করে দিন। তিনি বললেন, আল্লাহর কাছে দু‘আ করো।
13605 - عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم:
لَا تَلَقَّوُا الْجَلَبَ، فَمَنْ تَلَقَّى مِنْهُ شَيْئًا، فَصَاحِبُهُ بِالْخِيَارِ إِذَا أَتَى السُّوقَ.
ـ وفي رواية: أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنْ تَلَقِّى الأَجْلَابِ، فَمَنْ تَلَقَّى وَاشْتَرَى، فَصَاحِبُهُ بِالْخِيَارِ إِذَا هَبَطَ السُّوقَ.
ـ وفي رواية: نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ يُتَلَقَّى الْجَلَبُ، فَإِنِ ابْتَاعَ مُبْتَاعٌ، فَصَاحِبُ السِّلْعَةِ بِالْخِيَارِ إِذَا وَرَدَتِ السُّوقَ.
ـ وفي رواية: لَا تَلَقَّوُا الْجَلَبَ، فَمَنْ تَلَقَّاهُ فَاشْتَرَى مِنْهُ، فَإِذَا أَتَى سَيِّدُهُ السُّوقَ فَهُوَ بِالْخِيَارِ.
ـ وفي رواية: نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ يُتَلَقَّى الْجَلَبُ.
أخرجه أحمد 2/ 284 (7812) قال: حدَّثنا إبراهيم بن خالد، حدَّثنا رباح، حدَّثنا معمر، عن أيوب. وفي 2/ 403 (9225) قال: حدَّثنا أحمد بن عبد الملك، قال: حدَّثنا عبيد الله بن عمرو، عن أيوب. وفي 2/ 487 (10329) قال: حدَّثنا إسماعيل، ويزيد، قالا: حدثنا هشام. و`الدارِمِي` 2566 قال: أخبرنا محمد بن المنهال،
حدَّثنا يزيد بن زريع، حدَّثنا هشام بن حسان. و`مسلم` 3816 قال: حدَّثنا يحيى بن يحيى، أخبرنا هشيم، عن هشام. وفي (3817) قال: حدَّثنا ابن أبي عمر، حدَّثنا هشام بن سليمان، عن ابن جُريج، أخبرني هشام القردوسي. و`أبو داود` 3437 قال: حدَّثنا الربيع بن نافع، أبو توبة، حدَّثنا عبيد الله، يعني ابن عمرو الرقي، عن أيوب. و`ابن ماجة` 2178 قال: حدَّثنا أبو بكر بن أبي شيبة، وعلي بن محمد، قالا: حدثنا أبو أسامة، عن هشام بن حسان. و`التِّرمِذي` 1221 قال: حدَّثنا سلمة بن شبيب، حدَّثنا عبد الله بن جعفر الرقي، حدَّثنا عبيد الله بن عمرو، عن أيوب. و`النَّسائي` 7/ 257، وفي `الكبرى` 6048 قال: أخبرنا إبراهيم بن الحسن، قال: حدَّثنا حجاج بن محمد، قال: أنبأنا ابن جُريج، قال: أنبأنا هشام بن حسان القردوسي. و`أبو يَعْلَى` 6073 قال: حدَّثنا زكريا، حَدَّثنا هُشَيم، عن هشام. وفي (6078) قال: حدَّثنا عيسى بن سالم، حَدَّثنا عُبَيد الله بن عَمْرو، عن أيوب.
كلاهما (أيوب، وهشام بن حسان) عن محمد بن سيرين، فذكره.
- أخرجه عبد الرَّزَّاق (14879) قال: أخبرنا معمر، عن أيوب، عن ابن سِيرِين، عن أبي هُرَيرة، قال:
نُهِيَ عَنْ تَلَقِّي الْجَلَبَ، فَمَنْ تَلَقَّى جَلَبًا فَاشْتَرَى مِنْهُ، فَالْبَائِعُ بِالْخِيَارِ إِذَا وَضَعَ السُّوقَ.
موقوفٌ.
- وأخرجه ابن أبي شَيْبَة (21443) قال: حَدَّثنا مُحمد بن أبي عَدِي، عن ابن عون، عن مُحمد، قال:
نُهِيَ عَنْ تَلَقِّي الْجَلَبَ ، فَإِنْ تَلَقَّى رَجُلٌ فَاشْتَرَاهُ، فَصَاحِبُهُ بِالْخِيَارِ إِذَا قَدِمَ الْمِصْرَ.
موقوفٌ، وليس فيه: ` أبو هريرة`.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: তোমরা আগত পণ্যবাহী কাফেলার সাথে (বাজারের বাইরে) সাক্ষাৎ করতে যেও না। যদি কেউ তাদের কাছ থেকে কিছু কিনে নেয়, তবে যখন পণ্যের মালিক বাজারে পৌঁছবে, তখন সে এখতিয়ার (ক্রয় বাতিল বা বহাল রাখার) পাবে।
—অন্য এক বর্ণনায় এসেছে: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আগত পণ্যবাহী কাফেলার সাথে সাক্ষাৎ করতে নিষেধ করেছেন। যদি কেউ সাক্ষাৎ করে ক্রয় করে, তবে যখন সে (পণ্যবাহী কাফেলার মালিক) বাজারে অবতরণ করবে, তখন তার এখতিয়ার থাকবে।
—অন্য এক বর্ণনায় এসেছে: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আগত পণ্যবাহী কাফেলার সাথে সাক্ষাৎ করা নিষেধ করেছেন। যদি কেউ কোনো কিছু ক্রয় করে নেয়, তবে যখন পণ্যটি বাজারে পৌঁছবে, তখন পণ্যের মালিকের এখতিয়ার থাকবে।
—অন্য এক বর্ণনায় এসেছে: তোমরা আগত পণ্যবাহী কাফেলার সাথে সাক্ষাৎ করতে যেও না। যদি কেউ তাদের সাথে সাক্ষাৎ করে কিছু ক্রয় করে, তবে যখন তার মালিক বাজারে আসবে, তখন সে এখতিয়ার পাবে।
—অন্য এক বর্ণনায় এসেছে: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আগত পণ্যবাহী কাফেলার সাথে সাক্ষাৎ করা নিষেধ করেছেন।
13606 - عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم:
لَا تَنَاجَشُوا، وَلَا يَبِعِ الرَّجُلُ عَلَى بَيْعِ أَخِيهِ، وَلَا يَخْطُبْ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ، وَلَا يَبِعْ حَاضِرٌ لِبَادٍ، وَلَا تَسْأَلِ الْمَرْأَةُ طَلَاقَ أُخْتِهَا لِتَكْتَفِئَ مَا فِي إِنَائِهَا.
ـ وفي رواية: أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم نَهَى أَنْ يَبِيعَ حَاضِرٌ لِبَادٍ، أَوْ يَتَنَاجَشُوا، أَوْ يَخْطُبَ الرَّجُلُ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ، أَوْ يَبِيعَ عَلَى بَيْعِ أَخِيهِ، وَلَا تَسْأَلِ الْمَرْأَةُ طَلَاقَ أُخْتِهَا لِتَكْتَفِئَ مَا فِي صَحْفَتِهَا، أَوْ إِنَائِهَا، وَلْتَنْكِحْ فَإِنَّمَا رِزْقُهَا عَلَى اللهِ.
ـ وفي رواية: لَا يَبِيعَنَّ حَاضِرٌ لِبَادٍ، وَلَا تَنَاجَشُوا، وَلَا يُسَاوِمِ الرَّجُلُ عَلَى سَوْمِ أَخِيهِ، وَلَا يَخْطُبْ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ، وَلَا تَسْأَلِ الْمَرْأَةُ طَلَاقَ أُخْتِهَا لِتَكْتَفِئَ مَا فِي إِنَائِهَا، وَلِتُنْكَحَ فَإِنَّمَا لَهَا مَا كَتَبَ اللهُ لَهَا.
ـ وفي رواية: لَا يَخْطُبْ أَحَدُكُمْ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ حَتَّى يَنْكِحَ أَوْ يَتْرُكَ.
ـ وفي رواية: لَا يَبِيعُ حَاضِرٌ لِبَادٍ، وَلَا تَنَاجَشُوا، وَلَا يَزِيدُ الرَّجُلُ عَلَى بَيْعِ أَخِيهِ، وَلَا تَسْأَلِ الْمَرْأَةُ طَلَاقَ أُخْتِهَا لِتَسْتَكْفِئَ بِهِ مَا فِي صَحْفَتِهَا.
أخرجه عبد الرَّزَّاق (14867) قال: أخبرنا معمر. و`الحميدي` 1026 قال: حدَّثنا سفيان. و`ابن أبي شَيْبَة` 4/ 403 (17634) و 6/ 571 (22035) و 14/ 278 (36510) قال: حدَّثنا عَبد الأعلى، عن معمر. وفي 6/ 238 (20892) قال: حدَّثنا ابن عيينة. و`أحمد` 2/ 238 (7247) قال: حدَّثنا سفيان. وفي 2/ 274 (7686) قال: حدَّثنا عبد الرزاق، أخبرنا معمر. وفي 2/ 487 (10321) قال: حدَّثنا إسماعيل بن إبراهيم، عن معمر. و`البُخاري` 2140 قال: حدَّثنا علي بن عبد الله، حدَّثنا سفيان. وفي (2160) قال: حدَّثنا
المكي بن إبراهيم، قال: أخبرني ابن جُريج. وفي (2723) قال: حدَّثنا مسدد، حدَّثنا يزيد بن زُرَيع، حدَّثنا معمر. و`مسلم` 3442 قال: حدثني عَمرو الناقد، وزهير بن حرب، وابن أبي عُمر، قال زهير: حدثنا سفيان بن عيينة. وفي (3443) قال: وحدثني حرملة بن يحيى، أخبرنا ابن وهب، أخبرني يونس. وفي (3444) قال: وحدثنا أبو بكر بن أبي شيبة، حدَّثنا عبد الأعلى (ح) وحدثني محمد بن رافع، حدَّثنا عبد الرزاق، جميعًا عن معمر. وفي (3818) قال: حدَّثنا أبو بكر بن أبي شيبة، وعمرو الناقد، وزهير بن حرب، قالوا: حدثنا سفيان. و`أبو داود` 2080 و 3438 قال: حدَّثنا أحمد بن عَمرو بن السرح، قال: حدَّثنا سفيان. و`ابن ماجة` 1867 و 2174 قال: حدَّثنا هشام بن عمار، وسَهْل بن أبي سَهْل، قالا: حدثنا سفيان بن عُيينة. وفي (2172) قال: حدَّثنا هشام بن عمار، حدَّثنا سفيان. وفي (2175) قال: حدَّثنا أبو بكر بن أبي شيبة، حدَّثنا سفيان بن عيينة. و`التِّرمِذي` 1134 و 1222 و 1304 قال: حدَّثنا أحمد بن منيع، وقتيبة، قالا: حدثنا سفيان بن عُيينة. وفي (1190) قال: حدَّثنا قتيبة، حدَّثنا سفيان بن عُيينة. و`النَّسائي` 6/ 71، وفي `الكبرى` 5337 قال: أخبرنا محمد بن منصور، وسعيد بن عبد الرحمن، قالا: حدثنا سفيان. وفي 6/ 73،
وفي `الكبرى` 5336 قال: أخبرني يونس بن عبد الأعلى، قال: حدَّثنا ابن وهب، قال: أخبرني يونس. وفي 7/ 258، وفي `الكبرى` 6049 قال: حدَّثنا مجاهد بن موسى، قال: حدَّثنا إسماعيل، عن مَعمر. وفي 7/ 259، وفي `الكبرى` 6053 قال: حدثني محمد بن عبد الأعلى، قال: حدَّثنا يزيد، قال: حدَّثنا معمر. و`أبو يَعْلَى` 5884 و 5887 قال: حدَّثنا عمرو الناقد، حدثنا سفيان. وفي (5970) قال: حدَّثنا أبو بكر بن أبي شيبة، حدثنا عبد الأعلى، عن معمر.
أربعتهم (سفيان، ومعمر، وابن جُريج، ويونس) عن الزهري، عن سعيد بن المسيب، فذكره.
ـ جاءت بعض الروايات مختصرة.
- أخرجه النسائي 7/ 258، وفي `الكبرى` 6052 و 9169 قال: أخبرنا محمد بن يحيى، قال: حدَّثنا بشر بن شعب، قال: حدَّثنا أبي، عن الزهري، أَخْبَرَنِي أَبُو سَلَمَةَ، وَسَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ، أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ، قَالَ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ:
لَا يَبِيعُ الرَّجُلُ عَلَى بَيْعِ أَخِيهِ، وَلَا يَبِيعُ حَاضِرٌ لِبَادٍ، وَلَا تَنَاجَشُوا، وَلَا يَزِيدُ الرَّجُلُ عَلَى بَيْعِ أَخِيهِ، وَلَا تَسْأَلِ الْمَرْأَةُ طَلَاقَ الأُخْرَى لِتَكْتَفِئَ مَا فِي إِنَائِهَا.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:
তোমরা 'নাজাশ' (কৃত্রিম দর বৃদ্ধি করে ক্রেতাকে ধোঁকা দেওয়া) করো না। কোনো ব্যক্তি যেন তার (মুসলিম) ভাইয়ের বিক্রয়চুক্তির ওপর বিক্রয়চুক্তি না করে। কোনো ব্যক্তি যেন তার ভাইয়ের বিবাহের প্রস্তাবের ওপর প্রস্তাব না দেয়। কোনো শহরবাসী যেন কোনো গ্রামীণ/মরুবাসী লোকের পক্ষে পণ্য বিক্রি না করে। আর কোনো নারী যেন তার (অন্য মুসলিম) বোনের তালাক কামনা না করে, যাতে সে তার পাত্রের সব কিছু হস্তগত করতে পারে।
(অন্য বর্ণনায় এসেছে, তিনি বলেন): কোনো ব্যক্তি যেন তার ভাইয়ের বিক্রয়ের ওপর বিক্রয় না করে। আর কোনো ব্যক্তি যেন তার ভাইয়ের বিবাহের প্রস্তাবের ওপর প্রস্তাব না দেয়। আর কোনো নারী যেন তার বোনের তালাক কামনা না করে, যাতে সে তার পাত্রের সব কিছু হস্তগত করতে পারে। বরং সে যেন (নিজেকে) বিবাহ দেয়। কেননা তার রিযিক আল্লাহর দায়িত্বে রয়েছে।
13607 - عَنْ مُسْلِمِ بْنِ أَبِي مُسْلِمٍ، قَالَ: رَأَيْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ وَنَحْنُ غِلْمَانٌ تَجِيءُ الأَعْرَابُ، يَقُولُ: يَا أَعْرَابِيُّ نَحْنُ نَبِيعُ لَكَ، قَالَ: دَعُوهُ فَلْيَبِعْ سِلْعَتَهُ، فَقَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ:
إِنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى أَنْ يَبِيعَ حَاضِرٌ لِبَادٍ.
أخرجه أحمد 2/ 254 (7449) قال: حدَّثنا ربعي بن إبراهيم، حدَّثنا عبد الرحمن بن إسحاق، عن مسلم بن أبي مسلم، فذكره.
- أخرجه ابن أبي شَيْبَة 6/ 240 (20889) قال: حدَّثنا ابن عيينة، عن مسلم الخياط، أنه سمع أبا هريرة يقول:
نَهَى أَنْ يَبِيعَ حَاضِرٌ لِبَادٍ.
وسمع عمر يقول: لَا يَبِيعُ حَاضِرٌ لِبَادٍ.
موقوفٌ.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত। মুসলিম ইবনু আবী মুসলিম বলেন: আমরা যখন বালক ছিলাম, তখন আমি আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে দেখেছিলাম। বেদুঈনরা (বাজারে) আসত। (তখন লোকজন বেদুঈনকে) বলত: হে বেদুঈন, আমরা তোমার জন্য বিক্রি করে দেব। (আবূ হুরায়রা) বললেন: তাকে ছেড়ে দাও, সে যেন তার পণ্য বিক্রি করে। অতঃপর আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: নিশ্চয়ই রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কোনো শহরবাসীকে গ্রামবাসীর পক্ষে (বা তার জন্য) পণ্য বিক্রি করতে নিষেধ করেছেন।
13608 - عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّهُ قَالَ:
نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ لِبْسَتَيْنِ، وَعَنْ بَيْعَتَيْنِ، عَنِ الْمُلَامَسَةِ، وَعَنِ الْمُنَابَذَةِ، وَعَنْ أَنْ يَحْتَبِيَ الرَّجُلُ فِي ثَوْبٍ وَاحِدٍ لَيْسَ عَلَى فَرْجِهِ مِنْهُ شَيْءٌ، وَعَنْ أَنْ يَشْتَمِلَ الرَّجُلُ بِالثَّوْبِ الْوَاحِدِ عَلَى أَحَدِ شِقَّيْهِ.
ـ وفي رواية: أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنِ الْمُلَامَسَةِ وَالْمُنَابَذَةِ.
قَالَ مَالِكٌ: وَالْمُلَامَسَةُ أَنْ يَلْمِسَ الرَّجُلُ الثَّوْبَ وَلَا يَنْشُرَهُ وَلَا يَتَبَيَّنَ مَا فِيهِ، أَوْ يَبْتَاعَهُ لَيْلاً وَلَا يَعْلَمُ مَا فِيهِ، وَالْمُنَابَذَةُ أَنْ يَنْبِذَ الرَّجُلُ إِلَى الرَّجُلِ ثَوْبَهُ، وَيَنْبِذَ الآخَرُ إِلَيْهِ ثَوْبَهُ، عَلَى غَيْرِ تَأَمُّلٍ مِنْهُمَا، وَيَقُولُ: كُلُّ وَاحِدٍ مِنْهُمَا هَذَا بِهَذَا، فَهَذَا الَّذِي نُهِيَ عَنْهُ مِنَ الْمُلَامَسَةِ وَالْمُنَابَذَةِ.
ـ وفي رواية: نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ بَيْعَتَيْنِ: النِّبَاذِ، وَاللِّمَاسِ، وَعَنْ لُبْسِ الصَّمَّاءِ، وَأَنْ يَحْتَبِيَ الرَّجُلُ فِي ثَوْبٍ وَاحِدٍ لَيْسَ بَيْنَهُ وَبَيْنَ الأَرْضِ شَيْءٌ.
ـ وفي رواية: أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنْ بَيْعَتَيْنِ، وَعَنْ لِبْسَتَيْنِ، وَعَنْ صَلَاتَيْنِ، وَعَنْ صِيَامِ يَوْمَيْنِ، وَعَنِ الْمُلَامَسَةِ، وَالْمُنَابَذَةِ، وَاشْتِمَالِ الصَّمَّاءِ، وَعَنْ الاِحْتِبَاءِ فِي ثَوْبٍ وَاحِدٍ كَاشِفًا عَنْ فَرْجِهِ.
أخرجه مالك `الموطأ` 413 عن محمد بن يحيى بن حَبَّان، وعن أبي الزناد. وفي (571) عن أبي الزناد. و`عبد الرَّزَّاق` 14989 عن الثَّوْريّ، عن ابن ذكوان. و`ابن أبي شَيْبَة` 7/ 43 (22277) قال: حَدَّثنا سُفيان، عن أبي الزِّناد. و`أحمد` 2/ 379 (8922) قال: حدَّثنا محمد بن إدريس، يعني الشافعي، قال: أخبرنا مالك، عن محمد بن يحيى بن حَبَّان، وأبي الزناد. وفي 2/ 464 (9983) قال: حدَّثنا عبد الرحمن، عن سفيان، عن أبي الزناد. وفي 2/ 476 (10172) و 2/ 480 (10233) قال: حدَّثنا وكيع، حدَّثنا سفيان، عن أبي
الزناد. وفي 2/ 529 (10858) قال: حدَّثنا عثمان بن عمر، حدَّثنا مالك، عن محمد بن يحيى بن حَبَّان. و`البُخاري` 368 قال: حدَّثنا قبيصة بن عقبة، قال: حدَّثنا سفيان، عن أبي الزناد. وفي (2146) قال: حدَّثنا إسماعيل، قال: حدثني مالك، عن محمد بن يحيى بن حَبَّان، وعن أبي الزناد. وفي (5821) قال: حدَّثنا إسماعيل، قال: حدثني مالك، عن أبي الزناد. و`مسلم` 3793 قال: حدَّثنا يحيى بن يحيى التميمي، قال: قرأتُ على مالك، عن محمد بن يحيى بن حَبَّان. وفي (3794) قال: حدثنا أبو كُريب، وابن أبي عُمر، قالا: حدثنا وكيع، عن سفيان، عن أبي الزناد. و`التِّرمِذي` 1310 قال: حدَّثنا أبو كُريب، ومحمود بن غيلان، قالا: حدثنا وكيع، عن سفيان، عن أبي الزناد. و`النَّسائي` 7/ 259، وفي `الكبرى` 6055 قال: أخبرنا محمد بن سلمة، والحارث بن مسكين، قراءة عليه، وأنا أسمع، عن ابن القاسم، قال: حدثني مالك، عن محمد بن يحيى بن حَبَّان، وأبي الزناد. و`ابن حِبَّان` 4975 قال: حدَّثنا الحسين بن إدريس الأنصاري، قال: أخبرنا أحمد بن أبي بكر، عن مالك، عن أبي الزِّناد.
كلاهما (محمد بن يحيى، وأبو الزناد، عَبْد الله بن ذكوان) عن الأعرج، فذكره.
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আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন:
রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম দুই ধরনের পরিধান এবং দুই ধরনের ক্রয়-বিক্রয় নিষিদ্ধ করেছেন। (সেগুলো হলো) আল-মুলামাসা (স্পর্শভিত্তিক ক্রয়-বিক্রয়) ও আল-মুনাবাযা (নিক্ষেপভিত্তিক ক্রয়-বিক্রয়); এবং এই যে, কোনো পুরুষ যেন একটি মাত্র কাপড়ে ইহতিবা (বসে হাঁটু তুলে কাপড় পেঁচানো) না করে, যার ফলে তার লজ্জাস্থানের উপর কাপড়ের কিছুই থাকে না; এবং এই যে, কোনো পুরুষ যেন এক কাপড়ের দ্বারা নিজের দেহের এক অংশকে আবৃত করে।
অন্য এক বর্ণনায় আছে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম মুলামাসা ও মুনাবাযা নিষিদ্ধ করেছেন। ইমাম মালিক (রহ.) বলেন: মুলামাসা হলো, কোনো ব্যক্তি কাপড় স্পর্শ করবে কিন্তু তা খুলে দেখবে না এবং ভেতরে কী আছে তা স্পষ্ট হবে না, অথবা রাতের বেলায় তা ক্রয় করবে এবং তাতে কী আছে তা জানবে না। আর মুনাবাযা হলো, এক ব্যক্তি অপর ব্যক্তির দিকে তার কাপড় নিক্ষেপ করবে এবং অন্যজনও তার দিকে তার কাপড় নিক্ষেপ করবে, তাদের উভয়ের কোনো চিন্তাভাবনা ছাড়াই, এবং তাদের প্রত্যেকে বলবে: এটা এর বিনিময়ে। মুলামাসা ও মুনাবাযা হলো এটাই, যা নিষিদ্ধ করা হয়েছে।
অন্য এক বর্ণনায় আছে: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম দুটি ক্রয়-বিক্রয় (নিবায ও লিমাছ), আস-সম্মা পরিধান এবং এই যে, কোনো পুরুষ যেন একটি মাত্র কাপড়ে ইহতিবা না করে, যার ফলে তার ও যমিনের মাঝে কিছুই থাকে না— তা থেকে নিষেধ করেছেন।
অন্য এক বর্ণনায় আছে: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম দুটি ক্রয়-বিক্রয়, দুটি পরিধান, দুটি সালাত ও দুটি সিয়াম (রোযা) পালন করা থেকে নিষেধ করেছেন। আর তা হলো: মুলামাসা (স্পর্শভিত্তিক), মুনাবাযা (নিক্ষেপভিত্তিক), ইশতিমালুস সম্মা (গা সম্পূর্ণ ঢেকে হাত বের করার পথ না রাখা) এবং এক কাপড়ে ইহতিবা করা এমনভাবে যে লজ্জাস্থান অনাবৃত থাকে।
13609 - عَنْ هَمَّامِ بْنِ مُنَبِّهٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ:
نَهَى عَنْ بَيْعَتَيْنِ، وَلِبْسَتَيْنِ، أَنْ يَحْتَبِيَ أَحَدُكُمْ فِي الثَّوْبِ الْوَاحِدِ لَيْسَ عَلَى فَرْجِهِ مِنْهُ شَيْءٍ، وَأَنْ يَشْتَمِلَ فِي إِزَارِهِ إِذَا مَا صَلَّى، إِلَاّ أَنْ يُخَالِفَ بَيْنَ طَرَفَيْهِ عَلَى عَاتِقِهِ، وَنَهَى عَنِ اللَّمْسِ وَالنَّجْشِ.
أخرجه أحمد 2/ 319 (8234) قال: حدَّثنا عبد الرزاق بن همام، حدَّثنا
معمر، عن همام، فذكره.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: [রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)] দুই প্রকারের ক্রয়-বিক্রয় এবং দুই প্রকারের পোশাক পরিধান করতে নিষেধ করেছেন। (পোশাকের নিষেধাজ্ঞা হলো) তোমাদের কেউ যেন একটি মাত্র কাপড়ে ইহতিবা (জানুদ্বয় খাড়া করে বসা) না করে, যার কোনো অংশ তার লজ্জাস্থানের উপর থাকে না; আর যখন সে সালাত আদায় করে, তখন যেন সে তার ইজারের মধ্যে নিজেকে সম্পূর্ণ আবৃত করে না ফেলে, তবে যদি সে তার দুই প্রান্ত কাঁধের উপর দিয়ে আড়াআড়িভাবে দেয় (তবে তা জায়েজ)। আর তিনি লাম্স (স্পর্শ ক্রয়-বিক্রয়) ও নাজাশ (ক্রয়ের ইচ্ছা না থাকা সত্ত্বেও দাম বাড়িয়ে বলা) থেকেও নিষেধ করেছেন।
13610 - عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ:
لَا تَلَقَّوُا الرُّكْبَانَ لِلْبَيْعِ، وَلَا يَبِعْ بَعْضُكُمْ عَلَى بَيْعِ بَعْضٍ، وَلَا تَنَاجَشُوا، وَلَا يَبِعْ حَاضِرٌ لِبَادٍ، وَلَا تُصَرُّوا الإِبِلَ وَالْغَنَمَ، فَمَنِ ابْتَاعَهَا بَعْدَ ذَلِكَ فَهُوَ بِخَيْرِ النَّظَرَيْنِ بَعْدَ أَنْ يَحْلُبَهَا إِنْ رَضِيَهَا أَمْسَكَهَا، وَإِنْ سَخِطَهَا رَدَّهَا وَصَاعًا مِنْ تَمْرٍ.
ـ وفي رواية: لَا تَلَقَّوْا الرُّكْبَانَ لِلْبَيْعِ، وَلَا تَنَاجَشُوا، وَلَا يَبِعْ حَاضِرٌ لِبَادٍ، وَلَا يَبِعِ الرَّجُلُ عَلَى بَيْعِ أَخِيهِ، وَلَا يَخْطُبْ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ.
ـ وفي رواية: لَا تُصِرُّوا الإِبِلَ وَالْغَنَمَ لِلْبَيْعِ، مَنِ اشْتَرَى مِنْكُمْ مِنْ ذَلِكَ شَيْئًا فَهُوَ بِخَيْرِ النَّظَرَيْنِ إِنْ شَاءَ أَمْسَكَهَا، وَإِنْ شَاءَ رَدَّهَا وَصَاعًا مِنْ تَمْرٍ لَا سَمْرَاءَ.
ـ وفي رواية: لَا تَلَقَّوُا الْبَيْعَ، وَلَا تُصَرُّوا الْغَنَمَ وَالإِبِلَ لِلْبَيْعِ، فَمَنِ ابْتَاعَهَا بَعْدَ ذَلِكَ فَهُوَ بِخَيْرِ النَّظَرَيْنِ إِنْ شَاءَ أَمْسَكَهَا، وَإِنْ شَاءَ رَدَّهَا بِصَاعِ تَمْرٍ لَا سَمْرَاءَ.
ـ وفي رواية: لَا يَبِيعُ حَاضِرٌ لِبَادٍ.
ـ وفي رواية: لَا يَبِعْ بَعْضُكُمْ عَلَى بَيْعِ بَعْضٍ، ولا يَبِعْ حَاضِرٌ لِبَادٍ، ولا تَنَاجَشُوا، ولا تَلَقَّوُا السِّلَعَ.
ـ وفي رواية: لَا يَبِعْ أَحَدُكُمْ عَلَى بَيْعِ أَخِيهِ، وَلَا يَخْطُبْ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ، حَتَّى يَنْكِحَ أَوْ يَتْرُكَ.
أخرجه مالك `الموطأ` 424. و`الحُمَيدي` 1027 و 1028 قال: حدَّثنا سفيان. و`أحمد` 2/ 242 (7303) و 2/ 243 (7310) قال: حدَّثنا سفيان. وفي 2/ 379 (8942) قال: حدَّثنا محمد بن إدريس، أخبرنا مالك. وفي 2/ 465 (10005) قال: حدَّثنا إسحاق، قال: أخبرنا مالك. و`البُخاري` 2148 قال: حدَّثنا ابن بكير، حدَّثنا الليث، عن جعفر بن ربيعة. وفي (2150) قال: حدَّثنا عبد الله بن يوسف، أخبرنا مالك. و`مسلم` 3809 قال: حدَّثنا يحيى بن يحيى، قال: قرأت على مالك. و`أبو داود` 3443 قال: حدَّثنا عبد الله بن مسلمة، عن مالك. و`النَّسائي` 7/ 253، وفي `الكبرى` 6035 قال: أخبرنا محمد بن منصور، قال: حدَّثنا سفيان. وفي 7/ 256، وفي `الكبرى` 6043 قال: أخبرنا قتيبة، عن مالك. و`أبو يَعْلَى` 6267 قال: حدَّثنا أبو خيثمة، حَدَّثنا سُفيان. وفي (6317 و 6321) قال: حدَّثنا وَهْب بن بَقِيَّة، أخبرنا خالد، عن عبد الرحمن. وفي (6345) قال: حدَّثنا سويد بن سَعِيد، عن مالك. و`ابن حِبَّان` 4970 قال: أخبرنا الحسين بن إدريس، قال: أخبرنا أحمد بن أبي بكر، عن مالك.
أربعتهم (مالك، وسفيان بن عُيَيْنَة، وجعفر بن ربيعة، وعبد الرحمن بن إسحاق المدنى) عن أبي الزناد، عن الأعرج، فذكره.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:
তোমরা বিক্রির উদ্দেশ্যে কাফেলা নিয়ে আসা আরোহীদের পথিমধ্যে এগিয়ে গিয়ে তাদের সাথে দেখা করো না। আর তোমাদের কেউ যেন অন্যের বেচাকেনার উপর বেচাকেনা না করে। আর তোমরা কৃত্রিমভাবে দর বাড়াবে না (তানাজুশ করো না)। আর কোনো শহরবাসী যেন কোনো গ্রামবাসীর পক্ষে (পণ্য) বিক্রি না করে। আর তোমরা বিক্রির জন্য উট ও বকরীর স্তনে দুধ জমিয়ে রাখবে না। অতএব, যে ব্যক্তি এরপর তা ক্রয় করবে, সে দুধ দোহনের পর দুটি পছন্দের মধ্যে উত্তমটির অধিকারী হবে; যদি সে তা পছন্দ করে, তবে রেখে দেবে। আর যদি অপছন্দ করে, তবে তা ফিরিয়ে দেবে এবং সাথে এক সা' খেজুর দেবে।
অন্য এক বর্ণনায় আছে: তোমরা বিক্রির উদ্দেশ্যে কাফেলা নিয়ে আসা আরোহীদের পথিমধ্যে এগিয়ে গিয়ে তাদের সাথে দেখা করো না। আর তোমরা কৃত্রিমভাবে দর বাড়াবে না। আর কোনো শহরবাসী যেন কোনো গ্রামবাসীর পক্ষে (পণ্য) বিক্রি না করে। আর কোনো ব্যক্তি যেন তার ভাইয়ের বেচাকেনার উপর বেচাকেনা না করে এবং তার ভাইয়ের বাগদানের উপর বাগদান না করে।
অন্য এক বর্ণনায় আছে: তোমরা বিক্রির জন্য উট ও বকরীর স্তনে দুধ জমিয়ে রাখবে না। তোমাদের মধ্যে কেউ যদি এমন কিছু ক্রয় করে, তবে সে দুটি পছন্দের মধ্যে উত্তমটির অধিকারী হবে। সে চাইলে তা রেখে দিতে পারে, অথবা চাইলে তা ফিরিয়ে দিতে পারে, সাথে এক সা' খেজুর দিতে হবে, তবে তা সামরা (নিকৃষ্ট মানের) খেজুর হবে না।
অন্য এক বর্ণনায় আছে: তোমরা বিক্রির জন্য এগিয়ে যেও না। আর বিক্রির জন্য বকরী ও উটের স্তনে দুধ জমিয়ে রাখবে না। অতঃপর যে ব্যক্তি তা ক্রয় করবে, সে দুটি পছন্দের মধ্যে উত্তমটির অধিকারী হবে; সে চাইলে তা রেখে দেবে, অথবা চাইলে এক সা' খেজুরের বিনিময়ে তা ফিরিয়ে দেবে, যা সামরা খেজুর হবে না।
অন্য এক বর্ণনায় আছে: কোনো শহরবাসী যেন কোনো গ্রামবাসীর পক্ষে (পণ্য) বিক্রি না করে।
অন্য এক বর্ণনায় আছে: তোমাদের কেউ যেন অন্যের বেচাকেনার উপর বেচাকেনা না করে। আর কোনো শহরবাসী যেন কোনো গ্রামবাসীর পক্ষে বিক্রি না করে। আর তোমরা কৃত্রিমভাবে দর বাড়াবে না। আর তোমরা পণ্যবাহী কাফেলার সাথে সাক্ষাতের জন্য এগিয়ে যেও না।
অন্য এক বর্ণনায় আছে: তোমাদের কেউ যেন তার ভাইয়ের বেচাকেনার উপর বেচাকেনা না করে এবং তার ভাইয়ের বাগদানের উপর বাগদান না করে, যতক্ষণ না সে বিবাহ করে অথবা (বাগদান) ছেড়ে দেয়।
13611 - عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ يَزِيدَ النَّخَعِيِّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم، أَنَّهُ قَالَ:
لَا تُصَرُّوا الإِبِلَ وَالْغَنَمَ، فَمَنِ اشْتَرَى مُصَرَّاةً فَهُوَ بِآخَرِ النَّظَرَيْنِ، إِنْ شَاءَ رَدَّهَا وَرَدَّ مَعَهَا صَاعًا مِنْ تَمْرٍ، قَالَ: وَلَا يَبِيعُ الرَّجُلُ عَلَى بَيْعِ أَخِيهِ، وَلَا تَسْأَلُ الْمَرْأَةُ طَلَاقَ أُخْتِهَا لِتَكْتَفِئَ مَا فِي صَحْفَتِهَا، فَإِنَّ مَالَهَا مَا كُتِبَ لَهَا، وَلَا تَنَاجَشُوا، وَلَا تَلَقَّوُا الأَجْلَابَ.
ـ لفظ محمد بن فضيل: لَا تُصَرُّوا الإِبِلَ وَالْغَنَمَ، فَمَنِ ابْتَاعَ مُصَرَّاةً فَهُوَ بِآخِرِ النَّظَرَيْنِ، إِنْ شَاءَ أَمْسَكَهَا، وَإِنْ شَاءَ رَدَّهَا بِصَاعٍ مِنْ تَمْرٍ، وَلَا تَسْأَلِ الْمَرْأَةُ طَلَاقَ أُخْتِهَا، وَلَا تَنَاجَشُوا، وَلَا يَبِعْ بَعْضُكُمْ عَلَى بَيْعِ بَعْضٍ، وَلَا يَبِعْ حَاضِرٌ لِبَادٍ.
أخرجه أحمد 2/ 410 (9299) قال: حدَّثنا محمد بن جعفر، قال: حدَّثنا شعبة. وفي 2/ 420 (9437) قال: حدَّثنا محمد بن فضيل.
كلاهما (شعبة، ومحمد بن فضيل) عن المغيرة بن مقسم، عن إبراهيم، فذكره.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:
তোমরা উট ও ছাগলের দুধ জমা করো না (দোহন না করে)। যে ব্যক্তি মুসাররাহ (দুধ আটকানো প্রাণী) ক্রয় করবে, সে দুটি সিদ্ধান্তের মধ্যে শেষেরটির অধিকার পাবে: যদি সে চায় তবে তা ফেরত দেবে এবং এর সাথে এক সা’ খেজুরও ফেরত দেবে।
তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আরও বলেন: কোনো ব্যক্তি যেন তার ভাইয়ের (করা) বিক্রয়ের উপর বিক্রয় না করে। কোনো নারী যেন তার (মুসলিম) বোনের তালাক দাবি না করে, যাতে সে তার পাত্রের (ভাগ্যের) সবকিছু আত্মসাৎ করতে পারে। কারণ তার জন্য ততটুকুই সম্পদ রয়েছে যা তার জন্য লিপিবদ্ধ করা হয়েছে। আর তোমরা নাজাশ (মিথ্যা দর হাঁকা) করো না, এবং তোমরা আগত কাফেলার সাথে সাক্ষাতের জন্য অগ্রসর হয়ো না (শহরে প্রবেশ করার আগেই)।
অন্য বর্ণনায় আছে: আর কোনো শহুরে লোক যেন কোনো গ্রামবাসীর পক্ষে (দালালি করে) বিক্রয় না করে।
13612 - عَنْ عَامِرٍ الشَّعْبِيِّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ:
لَا تَبَايَعُوا بِالْحَصَاةِ، وَلَا تَنَاجَشُوا، وَلَا تَبَايَعُوا بِالْمُلَامَسَةِ، وَمَنِ اشْتَرَى مِنْكُمْ مُحَفَّلَةً فَكَرِهَهَا فَلْيَرُدَّهَا وَلْيَرُدَّ مَعَهَا صَاعًا مِنْ طَعَامٍ.
أخرجه أحمد 2/ 460 (9929) قال: حدَّثنا روح بن عبادة، قال: حدَّثنا شعبة،
قال: حدَّثنا سيار، عن الشعبي، فذكره.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: তোমরা হাসাহ (পাথর নিক্ষেপ) পদ্ধতিতে বেচা-কেনা করো না, আর তোমরা নাজাশ (মিথ্যা দর হাঁকা) করো না, আর তোমরা মুলামাসা (স্পর্শ দ্বারা ক্রয় নিশ্চিত করা) পদ্ধতিতে বেচা-কেনা করো না। আর তোমাদের মধ্যে যে ব্যক্তি মুহাফফালাহ (প্রতারণামূলকভাবে দুধ জমা রাখা পশু) ক্রয় করে এবং সেটিকে অপছন্দ করে, সে যেন তা ফিরিয়ে দেয় এবং এর সাথে এক সা’ পরিমাণ খাদ্য ফিরিয়ে দেয়।
13613 - عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ:
نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم عَنِ الْمُحَاقَلَةِ وَالْمُزَابَنَةِ.
وَالْمُحَاقَلَةُ: الْبُرُّ بِالْبُرِّ.
أخرجه عبد الرَّزَّاق (14488). وابن أبي شَيْبَة 7/ 130 (22587) قال: حدَّثنا أبو داود. و`أحمد` 2/ 484 (10284) قال: حدثنا عبد الرحمن. و`النَّسائي` 7/ 39، وفي `الكبرى` 4597 قال: أخبرنا عمرو بن علي، قال: حدثنا عبد الرحمن.
ثلاثتهم (عبد الرَّزَّاق، وأبو داود الطيالسى، وعبد الرحمن بن مهدي) عن سفيان الثوري، عن سعد بن إبراهيم، عن عمر بن أبي سلمة، عن أبيه، فذكره.
ـ في رواية عبد الرَّزَّاق: وَالْمُزَابَنَةِ: التَّمْرِ بِالتَّمْرِ، وَالْمُحَاقَلَةُ: الْبُرُّ بِالْبُرِّ.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মুহাক্বালাহ ও মুযাবানাহ থেকে নিষেধ করেছেন। আর মুহাক্বালাহ হলো গম দিয়ে গম (বিনিময় করা)।
13614 - عَنْ حَفْصِ بْنِ عَاصِمٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ؛
أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنْ بَيْعَتَيْنِ، وَعَنْ لِبْسَتَيْنِ، وَعَنْ صَلَاتَيْنِ، نَهَى عَنِ الصَّلَاةِ بَعْدَ الْفَجْرِ حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ، وَبَعْدَ الْعَصْرِ حَتَّى تَغْرُبَ الشَّمْسُ، وَعَنِ اشْتِمَالِ الصَّمَّاءِ، وَعَنْ الاِحْتِبَاءِ فِي ثَوْبٍ وَاحِدٍ يُفْضِى بِفَرْجِهِ إِلَى السَّمَاءِ، وَعَنِ الْمُنَابَذَةِ وَالْمُلَامَسَةِ.
ـ وفي رواية: عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم، أَنَّهُ نَهَى عَنْ بَيْعَتَيْنِ، أَمَّا الْبَيْعَتَانِ: فَالْمُنَابَذَةُ، وَالْمُلَامَسَةُ.
وَزَعَمَ أَنَّ الْمُلَامَسَةَ أَنْ يَقُولَ الرَّجُلُ لِلرَّجُلِ أَبِيعُكَ ثَوْبِى بِثَوْبِكَ وَلَا يَنْظُرَ وَاحِدٌ مِنْهُمَا إِلَى ثَوْبِ الآخَرِ، وَلَكِنْ يَلْمِسُهُ لَمْسًا، وَأَمَّا الْمُنَابَذَةُ أَنْ يَقُولَ أَنْبُذُ مَا مَعِي وَتَنْبُذُ مَا مَعَكَ، لِيَشْتَرِيَ أَحَدُهُمَا مِنَ الآخَرِ، وَلَا يَدْرِى كُلُّ وَاحِدٍ مِنْهُمَا كَمْ مَعَ الآخَرِ، وَنَحْوًا مِنْ هَذَا الْوَصْفِ.
أخرجه ابن أبي شَيْبَة 2/ 348 (7322) و 7/ 43 (22269) و 8/ 298 (25207) قال: حَدَّثنا أبو أُسامة، وابن نُمَير. و`أحمد` 2/ 477 (10193) قال: حدَّثنا وكيع. وفي 2/ 496 (10445) قال: حدَّثنا ابن نمير، ومحمد بن عبيد. وفي 2/ 510 (10631) قال: حدَّثنا محمد بن عبيد. و`البُخاري` 584 قال: حدَّثنا عبيد بن إسماعيل، عن أبي أسامة. وفي (588) قال: حدَّثنا محمد بن سَلَام، قال: حدَّثنا عبدة. وفي (5819) قال: حدثني محمد بن بشار، حدَّثنا عبد الوهاب. و`مسلم` 3795 قال: حدَّثنا أبو بكر بن أبي شيبة، حدَّثنا ابن نمير، وأبو أسامة (ح) وحدثنا محمد بن عبد الله بن نمير،
حدَّثنا أبي (ح) وحدثنا محمد بن المثنى، حدَّثنا عبد الوهاب. و`ابن ماجة` 1248 و 2169 و 3560 قال: حدَّثنا أبو بكر بن أبي شيبة، حدَّثنا عبد الله بن نمير، وأبو أسامة. و`النَّسائي` 7/ 261، وفي `الكبرى` 6063 قال: أخبرنا محمد بن عبد الأعلى، قال: حدَّثنا المعتمر. و`ابن حِبَّان` 2290 قال: أخبرنا أبو يعلى، قال: حدَّثنا محمد بن عبد الله بن عمار، قال: حدَّثنا عبد الوهاب الثقفي.
سبعتهم (أبو أسامة، حماد بن أسامة، وعبد الله بن نمير، ووكيع بن الجراح، ومحمد بن عبيد، وعبدة بن سليمان، وعبد الوهاب الثقفي، والمعتمر بن سليمان) عن عبيد الله بن عمر العمري، عن خُبَيْب بن عبد الرحمن، عن حفص بن عاصم، فذكره.
ـ الروايات مطولة ومختصرة.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) দুই ধরনের বেচা-কেনা, দুই ধরনের পোশাক পরিধান এবং দুই সময়ে সালাত আদায় করতে নিষেধ করেছেন। তিনি ফজরের পরে সূর্য ওঠা পর্যন্ত এবং আসরের পরে সূর্য ডোবা পর্যন্ত সালাত আদায় করতে নিষেধ করেছেন। আর তিনি নিষেধ করেছেন ‘ইশতিমালুস সাম্মা’ (শরীরের উপর এমনভাবে কাপড় জড়িয়ে নেওয়া যাতে হাত বের করা না যায়) এবং এক কাপড়ে নিতম্ব গেঁড়ে বসা থেকে, যেখানে তার লজ্জাস্থান আকাশের দিকে উন্মুক্ত হয়ে যায় (বা নগ্নতা প্রকাশের সম্ভাবনা থাকে)। আর তিনি মুনাবাযাহ্ ও মুলামাসাহ্ ধরনের বেচা-কেনা থেকে নিষেধ করেছেন।
অন্য এক বর্ণনায় এসেছে: নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) দুই ধরনের বেচা-কেনা নিষেধ করেছেন। বেচা-কেনা দুটি হলো: মুনাবাযাহ্ ও মুলামাসাহ্। (বর্ণনাকারী) দাবি করেন যে, মুলামাসাহ্ হলো এই যে, এক ব্যক্তি অন্য ব্যক্তিকে বলবে, "আমি তোমার কাপড়ের বিনিময়ে আমার কাপড় বিক্রি করছি," অথচ তাদের কেউই অন্যজনের কাপড় দেখবে না, বরং শুধু স্পর্শের মাধ্যমে তা গ্রহণ করবে। আর মুনাবাযাহ্ হলো এই যে, সে বলবে, "আমার কাছে যা আছে, আমি তা নিক্ষেপ করলাম, আর তোমার কাছে যা আছে, তুমি তা নিক্ষেপ করো," যাতে তাদের একজন অন্যজনের কাছ থেকে তা ক্রয় করে, অথচ তাদের কেউই জানবে না যে অন্যজনের কাছে কতটুকু আছে, অথবা এই ধরনের কোনো বর্ণনা।
13615 - عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم، قَالَ:
نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ لِبْسَتَيْنِ، وَبَيْعَتَيْنِ، وَأَنْ يَحْتَبِيَ الرَّجُلُ فِي ثَوْبٍ وَاحِدٍ لَيْسَ عَلَى فَرْجِهِ مِنْهُ شَيْءٌ، وَأَنْ يَرْتَدِيَ فِي ثَوْبٍ يَرْفَعُ طَرَفَيْهِ عَلَى عَاتِقَيْهِ، وَأَمَّا الْبَيْعَتَانِ: فَاللَّمْسُ، وَالإِلْقَاءُ.
ـ وفي رواية: أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنْ بَيْعَتَيْنِ: اللَّمْسِ، وَالنِّبَاذِ.
ـ وفي رواية: عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، رضي الله عنه، قَالَ: نُهِيَ عَنْ لِبْسَتَيْنِ: أَنْ يَحْتَبِيَ الرَّجُلُ فِي الثَّوْبِ الْوَاحِدِ، ثُمَّ يَرْفَعَهُ عَلَى مَنْكِبِهِ، وَعَنْ بَيْعَتَيْنِ: اللِّمَاسِ، وَالنِّبَاذِ.
أخرجه أحمد 2/ 491 (10375) قال: حدَّثنا محمد بن جعفر، قال: أخبرنا هشام. وفي 2/ 521 (10760) قال: حدَّثنا عبد الصمد، حدَّثنا أبي، حدَّثنا أيوب. و`البُخاري` 2145 قال: حدَّثنا قتيبة، حدَّثنا عبد الوهاب، حدَّثنا أيوب.
كلاهما (هشام بن حسان، وأيوب) عن محمد بن سيرين، فذكره.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ইরশাদ করেছেন:
রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম দু’ধরনের পোশাক এবং দু’ধরনের ক্রয়-বিক্রয় করতে নিষেধ করেছেন। [পোশাকের ক্ষেত্রে নিষেধ হলো] এই যে, কোনো পুরুষ যেন এক কাপড়ে এমনভাবে ইখতিবা (হাঁটু গেড়ে বসা ও হাঁটু ও পিঠ একসাথে কাপড়ের মাধ্যমে বেঁধে রাখা) না করে যে তার লজ্জাস্থানের ওপর সে কাপড়ের কোনো অংশ থাকে না, এবং এই যে, সে যেন এক কাপড় পরিধান করে তার দু’প্রান্ত কাঁধের ওপর তুলে না রাখে।
আর দু’ধরনের ক্রয়-বিক্রয় হলো: আল-লামস (স্পর্শ) এবং আল-ইলকা (নিক্ষেপ)।
অন্য এক বর্ণনায় এসেছে: নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম দু’ধরনের ক্রয়-বিক্রয় করতে নিষেধ করেছেন: আল-লামস এবং আন-নিবায (নিক্ষেপ)।
অন্য আরেক বর্ণনায় আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, দু’ধরনের পোশাক থেকে নিষেধ করা হয়েছে: কোনো পুরুষ যেন এক কাপড়ে এমনভাবে ইখতিবা না করে যে তারপর সে তা তার কাঁধের ওপর তুলে রাখে, এবং দু’ধরনের ক্রয়-বিক্রয় থেকে নিষেধ করা হয়েছে: আল-লিমাস এবং আন-নিবায।
13616 - عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ:
نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ لُبْسَتَيْنِ، وَعَنْ بَيْعَتَيْنِ، فَأَمَّا اللُّبْسَتَانِ فَإِنَّهُ يَلْتَحِفُ فِي ثَوْبِهِ وَيُخْرِجُ شِقَّهُ، أَوْ يَحْتَبِي بِثَوْبٍ وَاحِدٍ فَيُفْضِى بِفَرْجِهِ إِلَى السَّمَاءِ، وَأَمَّا الْبَيْعَتَانِ: فَالْمُلَامَسَةُ أَلْقِ إِلَيَّ وَأُلْقِ إِلَيْكَ، وَإِلْقَاءِ الْحَجَرِ.
ـ وفي رواية: أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنْ لُبْسَتَيْنِ: الصَّمَّاءِ، وَأَنْ يَحْتَبِيَ الرَّجُلُ بِثَوْبِهِ لَيْسَ عَلَى فَرْجِهِ مِنْهُ شَيْءٌ، وَعَنِ الْمُلَامَسَةِ وَالْمُنَابَذَةِ، وَالْمُحَاقَلَةِ وَالْمُزَابَنَةِ.
ـ وفي رواية: عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، رَفَعَهُ، قَالَ: نَهَى عَنِ الْمُحَاقَلَةِ، وَهُوَ اشْتِرَاءُ الزَّرْعِ وَهُوَ فِي سُنْبُلِهِ بِالْحِنْطَةِ، وَنَهَى عَنِ الْمُزَابَنَةِ، وَهُوَ اشْتِرَاءُ الثِّمَارِ بِالتَّمْرِ.
ـ وفي رواية: نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم عَنِ الْمُحَاقَلَةِ وَالْمُزَابَنَةِ.
ـ وفي رواية: نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ لِبْسَتَيْنِ: أَنْ يَحْتَبِيَ الرَّجُلُ مُفْضِيًا بِفَرْجِهِ إِلَى السَّمَاءِ، وَيَلْبِسَ ثَوْبَهُ وَأَحَدُ جَانِبَيْهِ خَارِجٌ، وَيُلْقِي ثَوْبَهُ عَلَى عَاتِقِهِ.
ـ وفي رواية: أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنْ لُبْسَتَيْنِ: الصَّمَّاءِ، وَأَنْ يَحْتَبِيَ الرَّجُلُ بِثَوْبِهِ لَيْسَ عَلَى فَرْجِهِ مِنْهُ شَيْءٌ.
أخرجه أحمد 2/ 380 (8936) قال: حدَّثنا سليمان بن داود الهاشمي، قال: أنبأنا أبو زبيد، عن الأعمش. وفي 2/ 391 (9077) قال: حدَّثنا أسود، حدَّثنا شريك، عن سهيل. وفي 2/ 419 (9425) قال: حدَّثنا قتيبة بن سعيد، قال: حدَّثنا يعقوب، يعني ابن عبد الرحمن، عن سهيل بن أبي صالح. و`مسلم` 3796 و 3933 قال: حدَّثنا قتيبة بن سعيد، حدَّثنا يعقوب، يعني ابن عبد الرحمن القاري، عن سُهيل بن أبي صالح. و`أبو داود` 4080 قال: حدَّثنا عثمان بن أبي شيبة، حدَّثنا جرير، عن الأعمش. و`التِّرمِذي` 1224 و 1758 قال: حدَّثنا قتيبة، حدَّثنا يعقوب بن عبد الرحمن الإسكندراني، عن سهيل بن أبي صالح.
كلاهما (سليمان الأعمش، وسهيل) عن أبي صالح، فذكره.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন:
রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম দু'টি পোশাক এবং দু'টি বেচা-কেনা (ক্রয়-বিক্রয়) থেকে নিষেধ করেছেন।
পোশাক দু'টির মধ্যে একটি হলো: সে তার কাপড়ের মধ্যে নিজেকে আবৃত করবে এবং (শরীর থেকে) তার একপাশ বের করে রাখবে; অথবা সে একটি মাত্র কাপড় পরিধান করে ইহতাবা করবে, ফলে তার লজ্জাস্থান আকাশের দিকে উন্মুক্ত হয়ে যাবে।
আর বেচা-কেনা দু'টি হলো: আল-মুলামাসা (স্পর্শের মাধ্যমে বেচা-কেনা, যেমন: তুমি আমার দিকে (পণ্য) ছুঁড়ে দাও এবং আমি তোমার দিকে (পণ্য) ছুঁড়ে দেব) এবং আল-ইলকাউল হাজার (পাথর ছুঁড়ে দেয়ার মাধ্যমে বেচা-কেনা)।
— অন্য এক বর্ণনায় আছে: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) দু'টি পোশাক (আচরণের ধরন) থেকে নিষেধ করেছেন: 'সাম্মা' (সম্পূর্ণ আবৃত করে ফেলা) এবং একজন ব্যক্তি তার কাপড় দিয়ে ইহতাবা (বসা) করবে, অথচ তার লজ্জাস্থানের উপর কাপড়ের কোনো অংশ নেই। আর তিনি মুলামাসা, মুনাবাযা, মুহাকালা এবং মুজাবানা থেকেও নিষেধ করেছেন।
— অন্য এক বর্ণনায় আছে: তিনি মুহাকালা থেকে নিষেধ করেছেন। আর তা হলো শীষের মধ্যে থাকা ফসল গমের বিনিময়ে ক্রয় করা। আর তিনি মুজাবানা থেকে নিষেধ করেছেন। আর তা হলো খেজুরের বিনিময়ে (গাছে থাকা) ফল ক্রয় করা।
— অন্য এক বর্ণনায় আছে: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মুহাকালা ও মুজাবানা থেকে নিষেধ করেছেন।
— অন্য এক বর্ণনায় আছে: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) দু'টি পোশাক (আচরণ) থেকে নিষেধ করেছেন: একজন ব্যক্তি এমনভাবে ইহতাবা করবে যে তার লজ্জাস্থান আকাশের দিকে উন্মুক্ত হয়ে যায়; এবং সে তার কাপড় পরবে এমনভাবে যে তার এক পাশ উন্মুক্ত থাকে, আর সে তার কাপড় তার কাঁধের উপর ফেলে দেবে।
— অন্য এক বর্ণনায় আছে: নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) দু'টি পোশাক (আচরণের ধরন) থেকে নিষেধ করেছেন: 'সাম্মা' এবং একজন ব্যক্তি তার কাপড় দিয়ে ইহতাবা করবে অথচ তার লজ্জাস্থানের উপর কাপড়ের কোনো অংশ নেই।
13617 - عَنْ عَطَاءِ بْنِ مِينَاءَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّهُ قَالَ:
يُنْهَى عَنْ صِيَامِ يَوْمَيْنِ، وَعَنْ بَيْعَتَيْنِ، وَعَنْ لِبْسَتَيْنِ، فَأَمَّا الْيَوْمَانِ، فَيَوْمَ الْفِطْرِ، وَيَوْمَ الأَضْحَى، وَأَمَّا البَيْعَتَانِ، فَالْمُلَامَسَةِ وَالْمُنَابَذَةِ، فَالْمُلَامَسَةُ أَنْ يَلْمِسَ كُلُّ وَاحِدٍ مِنْهُمَا ثَوْبَ صَاحِبِهِ بِغَيْرِ تَأَمُّلٍ، وَأَمَّا الْمُنَابَذَةُ فَأَنْ يَنْبِذَ كُلُّ وَاحِدٍ مِنْهُمَا ثَوْبَهُ إِلَى الآخَرِ، وَلَمْ يَنْظُرْ كُلُّ وَاحِدٌ مِنْهُمَا إِلَى ثَوْبِ صَاحِبِهِ، وَأَمَّا اللِّبْسَتَانِ، فَأَنْ يَحْتَبِيَ الرَّجُلُ فِي الثَّوْبِ الْوَاحِدِ مُفْضِيًا، وَأَمَّا الْلِبْسَةُ الأُخْرَى فَأَنْ يُلْقِي دَاخِلَةُ إِزَارَهُ وَخَارِجَتَهُ عَلَى أَحَدِ عَاتِقَيْهِ وَيُبْرِزُ شِقَّهُ.
ـ لفظ البخاري: عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: يُنْهَى عَنْ صِيَامَيْنِ، وَبَيْعَتَيْنِ، الْفِطْرِ وَالنَّحْرِ، وَالْمُلَامَسَةِ وَالْمُنَابَذَةِ.
ـ ولفظ مُسلم: عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّهُ قَالَ: نُهِيَ عَنْ بَيْعَتَيْنِ: الْمُلَامَسَةِ وَالْمُنَابَذَةِ، أَمَّا الْمُلَامَسَةُ فَأَنْ يَلْمِسَ كُلُّ وَاحِدٍ مِنْهُمَا ثَوْبَ صَاحِبِهِ بِغَيْرِ تَأَمُّلٍ، وَالْمُنَابَذَةُ أَنْ يَنْبِذَ كُلُّ وَاحِدٍ مِنْهُمَا ثَوْبَهُ إِلَى الآخَرِ وَلَمْ يَنْظُرْ وَاحِدٌ مِنْهُمَا إِلَى ثَوْبِ صَاحِبِهِ.
أخرجه عبد الرَّزَّاق (7880). والبخاري (1993) قال: حدَّثنا إبراهيم بن موسى، أخبرنا هشام. و`مسلم` 5/ 2 قال: حدثني محمد بن رافع، حدَّثنا عبد الرزاق.
كلاهما (هشام بن يوسف، وعبد الرزاق) عن ابن جُريج، قال: أخبرني عمرو بن دينار، عن عطاء بن ميناء، قال: سمعتُهُ يُحدِّث، فذكره.
আবূ হুরাইরা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: দুই দিনের সাওম (রোযা), দুই প্রকারের ক্রয়-বিক্রয় (বাই'), এবং দুই প্রকারের পোশাক পরিধান করতে নিষেধ করা হয়েছে।
আর সেই দুই দিন হলো: ঈদুল ফিতরের দিন এবং ঈদুল আযহার দিন।
আর সেই দুই প্রকারের ক্রয়-বিক্রয় হলো: মুলামাসা (স্পর্শভিত্তিক বিক্রয়) এবং মুনাবাযা (নিক্ষেপভিত্তিক বিক্রয়)।
মুলামাসা হলো, তাদের (ক্রেতা ও বিক্রেতার) প্রত্যেকে একে অপরের কাপড় ভালোভাবে পরীক্ষা না করেই স্পর্শ করা। আর মুনাবাযা হলো, তাদের প্রত্যেকে একে অপরের দিকে নিজের কাপড় ছুঁড়ে দেওয়া, অথচ তাদের কেউই একে অপরের কাপড় ভালোভাবে দেখেনি।
আর সেই দুই প্রকারের পোশাক পরিধান হলো: (১) যখন কেউ একটি মাত্র কাপড়ে (লুঙ্গিতে) আবৃত হয়ে এমনভাবে ইহতিবা (জানুদ্বয় খাড়া করে বসা) করে যে তার লজ্জাস্থান খুলে যাওয়ার আশঙ্কা থাকে। আর অন্য পোশাক পরিধান হলো: (২) যখন কেউ তার ইজারের (লুঙ্গির) ভেতরের অংশ এবং বাইরের অংশ উভয়ই তার দুই কাঁধের এক কাঁধের ওপর নিক্ষেপ করে রাখে, ফলে তার এক পাশ অনাবৃত হয়ে যায়।
13618 - عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، قَالَ: سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُ:
نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم عَنِ الْمُلَامَسَةِ وَالْمُنَابَذَةِ.
وَالْمَلَامَسَةُ: أَنْ يَتَبَايَعَ الرَّجُلَانِ بِالثَّوْبَيْنِ تَحْتَ اللَّيْلِ يَلْمِسُ كُلُّ رَجُلٍ مِنْهُمَا ثَوْبَ صَاحِبِهِ بِيَدِهِ، وَالْمُنَابَذَةُ: أَنْ يَنْبُذَ الرَّجُلُ إِلَى الرَّجُلِ الثَّوْبَ، وَيَنْبُذَ الآخَرُ إِلَيْهِ الثَّوْبَ فَيَتَبَايَعَا عَلَى ذَلِكَ.
أخرجه النسائي 7/ 260، وفي `الكبرى` 6059 قال: أخبرنا محمد بن المُصَفَّى بن بهلول، عن محمد بن حرب، عن الزبيدي، عن الزهري، قال: سمعت سعيدًا، فذكره.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন:
রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মুলামাসা ও মুনাবাযা বিক্রি নিষিদ্ধ করেছেন। মুলামাসা হলো: রাতের অন্ধকারে দু’জন লোক তাদের নিজ নিজ কাপড় এভাবে বেচাকেনা করবে যে, তাদের প্রত্যেকেই শুধু হাত দিয়ে তার সঙ্গীর কাপড় স্পর্শ করবে (এবং স্পর্শের মাধ্যমেই বিক্রি নিশ্চিত হবে)। আর মুনাবাযা হলো: একজন লোক অন্য লোকের দিকে কাপড় নিক্ষেপ করবে এবং অন্যজনও তার দিকে কাপড় নিক্ষেপ করবে, আর এর ভিত্তিতেই তাদের বেচাকেনা সম্পন্ন হবে (নিক্ষেপের মাধ্যমেই চুক্তি সম্পন্ন হবে)।
13619 - عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ:
نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ بَيْعَتَيْنِ فِي بَيْعَةٍ، وَعَنْ لُبْسَتَيْنِ، أَنْ يَشْتَمِلَ أَحَدُكُمْ الصَّمَّاءَ فِي ثَوْبٍ وَاحِدٍ، أَوْ يَحْتَبِيَ بِثَوْبٍ لَيْسَ بَيْنَهُ وَبَيْنَ السَّمَاءِ شَيْءٌ.
ـ وفي رواية: نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ بَيْعَتَيْنِ فِي بِيعَةٍ، وَعَنْ لِبْسَتَيْنِ، وَأَنْ يَحْتَبِيَ أَحَدُكُمْ فِي ثَوْبٍ وَلَيْسَ بَيْنَ فَرْجِهِ وَبَيْنَ السَّمَاءِ شَيْءٌ، وَعَنِ الصَّمَّاءِ اشْتِمَالِ الْيَهُودِ.
وَوَصَفَ لَنَا مُحَمَّدٌ، جَعَلَهَا مِنْ أَحَدِ جَانِبَيْهِ ثُمَّ رَفَعَهَا.
ـ وفي رواية: نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ بَيْعَتَيْنِ فِي بَيْعَةٍ.
ـ وفي رواية: أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنْ بَيْعَتَيْنِ فِي بَيْعَةٍ، وَعَنْ لِبْسَتَيْنِ، وَأَنْ يَحْتَبِيَ الرَّجُلَ لَيْسَ بَيْنَهُ وَبَيْنَ السَّمَاءِ شَيْءٌ، وَأَنْ يَشْتَمِلَ أَحَدُكُمْ الصَّمَّاءَ عَلَى أَحَدِ عَاتِقَيْهِ.
أخرجه أحمد 2/ 432 (9582) و 2/ 475 (10153) قال: حدَّثنا يحيى بن سعيد القطان. وفي 2/ 503 (10542) قال: حدَّثنا يزيد. و`الدارِمِي` 1372 قال: أخبرنا يزيد بن هارون. و`التِّرمِذي` 1231 قال: حدَّثنا هناد، حدَّثنا عبدة بن سليمان. و`النَّسائي` 7/ 295، وفي `الكبرى` 6183 قال: أخبرنا عمرو بن علي، ويعقوب بن إبراهيم، ومحمد بن المثنى، قالوا: حدثنا يحيى بن سعيد. و`أبو يَعْلَى` 6124 قال: حدَّثنا أبو موسى، حَدَّثنا عَبد الوهَّاب. و`ابن حِبَّان` 4973 و 5426 قال: أخبرنا عَبد الله بن مُحمد الأزدي، قال: حَدَّثنا إسحاق بن إبراهيم، قال: أخبرنا عبدة بن سُليمان.
أربعتهم (يحيى، ويزيد، وعبدة، وعَبد الوهَّاب الثقفي) عن محمد بن عمرو، قال: حدَّثنا أبو سلمة، فذكره.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এক বিক্রিতে দুই ধরনের বিক্রি (বাই‘আতাইনি ফি বাই‘আহ) থেকে এবং দুই প্রকার পোশাক পরিধান থেকে নিষেধ করেছেন। (সেই দুই প্রকার হলো) তোমাদের কেউ যেন একটি মাত্র কাপড়ে সাম্মা (الصَّمَّاء) পদ্ধতিতে আবৃত না হয়, অথবা এমন কাপড়ে ইহতিবা (হাঁটু গেড়ে বসা) না করে, যার মাধ্যমে তার এবং আকাশের (উপরে) মাঝে কোনো কিছু আড়াল থাকে না।
অন্য এক বর্ণনায় আছে: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এক বিক্রিতে দুই ধরনের বিক্রি এবং দুই প্রকার পোশাক পরিধান থেকে নিষেধ করেছেন। আর তোমাদের কেউ যেন এমন কাপড়ে ইহতিবা না করে যার ফলে তার লজ্জাস্থান ও আকাশের (উন্মুক্ততার) মাঝে কোনো কিছু আড়াল থাকে না। আর সাম্মা হলো ইয়াহূদীদের আবৃত হওয়ার পদ্ধতি।
মুহাম্মাদ (রাবী) আমাদের জন্য এর বর্ণনা দিয়েছেন, তিনি কাপড়টিকে তাঁর দুই পার্শ্বের এক পাশ দিয়ে রাখলেন, অতঃপর তা উঠিয়ে নিলেন।
অন্য এক বর্ণনায় আছে: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এক বিক্রিতে দুই ধরনের বিক্রি থেকে নিষেধ করেছেন।
অন্য এক বর্ণনায় আছে: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এক বিক্রিতে দুই ধরনের বিক্রি এবং দুই প্রকার পোশাক পরিধান থেকে নিষেধ করেছেন। আর কেউ যেন এমনভাবে ইহতিবা না করে যে তার ও আকাশের মাঝে কোনো আড়াল না থাকে, আর তোমাদের কেউ যেন তার এক কাঁধের ওপর সাম্মা পদ্ধতিতে আবৃত না হয়।
13620 - عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم:
لَا تَنَاجَشُوا، وَلَا تَدَابَرُوا، وَلَا تَنَافَسُوا، وَلَا تَحَاسَدُوا، وَلَا تَبَاغَضُوا، وَلَا يَسْتَامُ الرَّجُلُ عَلَى سَوْمِ أَخِيهِ، وَلَا يَبِعْ حَاضِرٌ لِبَادٍ، دَعُوا النَّاسَ يَرْزُقُ اللهُ بَعْضَهُمْ مِنْ بَعْضٍ، وَلَا تَشْتَرِطِ امْرَأَةٌ طَلَاقَ أُخْتِهَا.
أخرجه أحمد 2/ 512 (10657) قال: حدَّثنا أسود بن عامر، أخبرنا أبو بكر، عن عاصم، عن أبي صالح، فذكره.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: তোমরা নাজাশ করো না, তোমরা একে অপরের থেকে মুখ ফিরিয়ে নিয়ো না, তোমরা (অন্যায়ভাবে) প্রতিদ্বন্দ্বিতা করো না, তোমরা একে অপরের প্রতি হিংসা করো না, তোমরা একে অপরের প্রতি বিদ্বেষ পোষণ করো না, কোনো ব্যক্তি যেন তার ভাইয়ের মূল্যের উপর মূল্য (অফার) না করে এবং কোনো শহুরে ব্যক্তি কোনো গ্রামবাসীর পক্ষে যেন পণ্য বিক্রি না করে। তোমরা মানুষকে তাদের অবস্থায় ছেড়ে দাও, আল্লাহ তাদের একজনকে আরেকজনের মাধ্যমে রিযিক দেন। আর কোনো নারী যেন তার (অন্য) বোনের তালাকের শর্তারোপ না করে।
13621 - عَنْ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، رضي الله عنه، قَالَ:
نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم عَنِ التَّلَقِّي، وَأَنْ يَبْتَاعَ الْمُهَاجِرُ لِلأَعْرَابِيِّ، وَأَنْ تَشْتَرِطَ الْمَرْأَةُ طَلَاقَ أُخْتِهَا، وَأَنْ يَسْتَامَ الرَّجُلُ عَلَى سَوْمِ أَخِيهِ، وَنَهَى عَنِ النَّجْشِ، وَعَنِ التَّصْرِيَةِ.
ـ وفي رواية: أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنِ التَّلَقِّى لِلرُّكْبَانِ، وَأَنْ يَبِيعَ حَاضِرٌ
لِبَادٍ، وَأَنْ تَسْأَلَ الْمَرْأَةُ طَلَاقَ أُخْتِهَا، وَعَنِ النَّجْشِ، وَالتَّصْرِيَةِ، وَأَنْ يَسْتَامَ الرَّجُلُ عَلَى سَوْمِ أَخِيهِ.
ـ وفي رواية: عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم، أَنَّهُ نَهَى عَنِ التَّلَقِّي، وَأَنْ يَبِيعَ حَاضِر الْمُهَاجِرُ لِلأَعْرَابِيِّ.
أخرجه البخاري (2727) قال: حدَّثنا محمد بن عرعرة. و`مسلم` 3808 و 3810 قال: حدَّثنا عبيد الله بن معاذ العنبري، حدَّثنا أبي. وفي (3811) قال: وحدثنيه أبو بكر بن نافع، حدَّثنا غُنْدَر (ح) وحدثناه محمد بن المثنى، حدَّثنا وهب بن جرير (ح) وحدثنا عبد الوارث بن عبد الصمد، حدَّثنا أبي. و`النَّسائي` 7/ 255، وفي `الكبرى` 6038 قال: أخبرني عبد الله بن محمد بن تميم، قال: حدَّثنا حجاج. و`ابن حِبَّان` 4961 قال: أخبرنا الفضل بن الحباب، قال: حدثنا أبو الوليد.
سبعتهم (محمد بن عرعرة، ومعاذ بن معاذ العنبري، ومحمد بن جعفر غُنْدَر، ووهب، وعبد الصمد بن عبد الوارث، وحجاج بن محمد، وأبو الوليد الطيالسي) عن شعبة، عن عدي بن ثابت، عن أبي حازم، فذكره.
ـ قال البُخاري عقب روايته: تابعهُ مُعَاذ، وَعَبْد الصَّمد، عن شُعْبة، وقال غُنْدَر، وعَبْد الرَّحْمان: نُهِيَ، وقال آدم: نُهِينَا، وقال النَّضْر، وحَجَّاج بن مِنْهال: نَهَى.
ـ وقال مُسلم: في حديث غُنْدَر، ووَهْب: نُهِيَ.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) 'তালক্বী' (পণ্যবাহী কাফেলাকে সামনে গিয়ে গ্রহণ করা) থেকে নিষেধ করেছেন, এবং কোনো মুহাজির (শহুরে) যেন কোনো বেদুঈনের (গ্রামীণ ব্যবসায়ীর) পক্ষ থেকে (পণ্য) বিক্রি না করে, এবং কোনো নারী যেন তার (মুসলিম) বোনের তালাকের শর্তারোপ না করে (যাতে সে তার স্থান দখল করতে পারে), এবং কোনো লোক যেন তার ভাইয়ের দর কষাকষির (দাম বলার) উপর দর কষাকষি না করে। তিনি 'নাজশ' (মিথ্যা দাম হাঁকা) ও 'তাসরিয়াহ' (বিক্রির উদ্দেশ্যে পশুর স্তনে দুধ জমিয়ে রাখা) থেকে নিষেধ করেছেন।
অন্য এক বর্ণনায় এসেছে: রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আরোহীদের সাথে 'তালক্বী' করতে নিষেধ করেছেন, এবং কোনো শহরবাসী যেন কোনো গ্রামবাসীর জন্য বিক্রি না করে, এবং কোনো নারী যেন তার বোনের তালাক না চায়, এবং 'নাজশ', 'তাসরিয়াহ' ও কোনো লোক যেন তার ভাইয়ের দর কষাকষির উপর দর কষাকষি না করে।
13622 - عَنْ سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيِّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ؛
عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم، أَنَّهُ نَهَى عَنِ التَّلَقِّي، وَأَنْ يَبِيعَ حَاضِرٌ لِبَادٍ.
أخرجه أحمد 2/ 402 (9211) قال: حدَّثنا علي بن إسحاق، قال: حدَّثنا عبد الله. و`البُخاري` 2162 قال: حدَّثنا محمد بن بشار، حدَّثنا عبد الوهاب.
كلاهما (عبد الله بن المبارك، وعبد الوهاب الثقفي) عن عبيد الله بن عمر العمري، عن سَعِيد بن أبي سَعِيد، فذكره.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ‘তালক্কি’ (শহরে প্রবেশ করার আগে কাফেলার সাথে দেখা করে পণ্য কিনে নেওয়া) থেকে এবং কোনো শহরবাসী যেন কোনো পল্লীবাসীর পক্ষে (দালাল হিসেবে) বিক্রি না করে তা থেকে নিষেধ করেছেন।