আল মুসনাদুল জামি`
6541 - عَنْ عِكْرِمَةَ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ:
أَصَابَ نَبِىَّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم خَصَاصَةٌ فَبَلَغَ ذَلِكَ عَلِيًّا فَخَرَجَ يَلْتَمِسُ عَمَلاً يُصِيبُ فِيهِ شَيْئًا لِيُغِيثَ بِهِ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَأَتَى بُسْتَانًا لِرَجُلٍ مِنَ الْيَهُودِ فَاسْتَقَى لَهُ سَبْعَةَ عَشَرَ دَلْوًا كُلُّ دَلْوٍ بِتَمْرَةٍ فَخَيَّرَهُ الْيَهُودِىُّ مِنْ تَمْرِهِ سَبْعَ عَشَرَةَ عَجْوَةً فَجَاءَ بِهَا إِلَى نَبِىِّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم.
أخرجه ابن ماجة (2446) قال: حدثنا محمد بن عبد الأعلى الصنعاني، حدثنا المُعتمر بن سليمان، عن أبيه، عن حنش، عن عكرمة، فذكره.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আল্লাহর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) অভাবগ্রস্ত হলেন। এই খবর আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে পৌঁছাল। ফলে তিনি এমন কাজের সন্ধানে বের হলেন, যার মাধ্যমে তিনি কিছু উপার্জন করতে পারেন এবং তা দ্বারা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে সাহায্য করতে পারেন। অতঃপর তিনি জনৈক ইহুদীর একটি বাগানে এলেন এবং তার জন্য সতেরো বালতি পানি তুললেন। (শর্ত ছিল) প্রতি বালতির বিনিময়ে একটি করে খেজুর। তখন সেই ইহুদী তাকে তার খেজুরগুলো থেকে সতেরোটি আজওয়া খেজুর বেছে নিতে দিল। অতঃপর তিনি সেই খেজুরগুলো নিয়ে আল্লাহর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে এলেন।
6542 - عَنْ عِكْرِمَةَ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنِ النَّبِىِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ:
مَنْ كَانَتْ لَهُ أَرْضٌ فَأَرَادَ بَيْعَهَا فَلْيَعْرِضْهَا عَلَى جَارِهِ.
أخرجه ابن ماجة (2493) قال: حدثنا أحمد بن سِنان، والعلاء بن سالم، قالا: حدثنا يزيد بن هارون، أنبأنا شرَيك، عن سِمَاك، عن عكرمة، فذكره.
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নাবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যার কোনো জমি আছে এবং সে তা বিক্রি করতে চায়, সে যেন তা তার প্রতিবেশীর কাছে পেশ করে।
6543 - عَنِ ابْنِ أَبِى مُلَيْكَةَ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم:
الشَّرِيكُ شَفِيعٌ وَالشُّفْعَةُ فِى كُلِّ شَىْءٍ.
أخرجه الترمذي (1371) قال: حدثنا يوسف بن عيسى. و`النَّسائي` في `الكبرى` عن إسحاق بن إبراهيم.
كلاهما (يوسف، وإسحاق) عن الفضل بن موسى، عن أبي حمزة السكري، عن عبد العزيز بن رُفَيْع، عن ابن أبي مُليكة، فذكره.
- قال الترمذي: هذا حديث لا نعرفه ، مثل هذا ، إلا من حديث أبي حمزة السكري ، وقد روى غير واحد ، عن عبد العزيز بن رفيع ، عن ابن أبي مليكة ، عن النبي صلى الله عليه وسلم ، مرسلا ، وهذا أصح.
- أخرجه الترمذي 1371 قال حدثنا هناد، حدثنا أبو بكر بن عياش (ح) وحدثنا هناد، حدثنا أبو الأحوص و`النَّسَائي` في `الكبرى` `تحفة الأشراف` 5795 عن محمد بن علي بن ميمون الرقي، عن محمد بن يوسف الفريابي، عن إسرائيل.
ثلاثتهم (أبو بكر بن عياش، وأبو الأحوص، وإسرائيل) عن عبد العزيز بن رُفيْع، عن ابن أبي مليكة قال:
قضى النبي صلى الله عليه وسلم بالشفعة في كل شيء. ليس فيه: (عن ابن عباس.
لفظ أبي الأحوص عند ابن أبي شيبة: قضى رسول الله صلى الله عليه وسلم بالشفعة في كل شيء ، الأرض ، والدار ، والجارية ، والخادم.
قال: فقال عطاء: إنما الشفعة في الأرض ، والدار. قال: فقال له ابن أبي مليكة: تسمعني لا أم لك؟! أقول: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم ، ثم تقول مثل هذا؟.
- قال الترمذي: هذا أصح من حديث أبي حمزة ، وأبو حمزة ثقة ، يمكن أن يكون الخطأ من غير أبي حمزة.
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: শরীক (অংশীদার) হলো শুফ‘আহর হকদার (শাফী‘), আর শুফ‘আহ (অগ্রক্রয়াধিকার) সকল বস্তুর ক্ষেত্রেই প্রযোজ্য।
6544 - عَنْ عِكْرِمَةَ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رضى الله عنهما قَالَ:
نَهَى النَّبِىُّ صلى الله عليه وسلم عَنِ الْمُحَاقَلَةِ وَالْمُزَابَنَةِ.
أخرجه أحمد 1/ 224 (1960. و`البُخَارِي` 3/ 99 (2187) قال: حدثنا مُسَدد.
كلاهما (أحمد بن حنبل، ومسدد) قالوا: حدثنا أبو معاوية، حدثنا الشيباني، عن عكرمة، فذكره.
- زاد في رواية أحمد: وكان عكرمة يكره بيع القصيل.
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নাবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মুহাক্বালাহ ও মুযাবানাহ থেকে নিষেধ করেছেন।
6545 - عن طَاوُوسٍ ، قَالَ حَدَّثَنِى مَنْ هُوَ أَعْلَمُ بِهِ مِنْهُمْ يَعْنِى عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَبَّاسٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ:
لأَنْ يَمْنَحَ الرَّجُلُ أَخَاهُ أَرْضَهُ خَيْرٌ لَهُ مِنْ أَنْ يَأْخُذَ عَلَيْهَا خَرْجًا مَعْلُومًا.
- وفي رواية: قَالَ عَمْرٌو قُلْتُ لِطَاوُسٍ لَوْ تَرَكْتَ الْمُخَابَرَةَ فَإِنَّهُمْ يَزْعُمُونَ أَنَّ النَّبِىَّ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنْهُ. قَالَ أَىْ عَمْرُو، إِنِّى أُعْطِيهِمْ وَأُغْنِيهِمْ، وَإِنَّ أَعْلَمَهُمْ أَخْبَرَنِى - يَعْنِى ابْنَ عَبَّاسٍ - رضى الله عنهما - أَنَّ النَّبِىَّ صلى الله عليه وسلم لَمْ يَنْهَ عَنْهُ، وَلَكِنْ قَالَ أَنْ يَمْنَحَ أَحَدُكُمْ أَخَاهُ خَيْرٌ لَهُ مِنْ أَنْ يَأْخُذَ عَلَيْهِ خَرْجًا مَعْلُومًا.
- وفي رواية: أَنَّ النَّبِىَّ صلى الله عليه وسلم خَرَجَ إِلَى أَرْضٍ تَهْتَزُّ زَرْعًا فَقَالَ لِمَنْ هَذِهِ فَقَالُوا اكْتَرَاهَا فُلَانٌ. فَقَالَ أَمَا إِنَّهُ لَوْ مَنَحَهَا إِيَّاهُ كَانَ خَيْرًا لَهُ مِنْ أَنْ يَأْخُذَ عَلَيْهَا أَجْرًا مَعْلُومًا.
- وفي رواية: لأَنْ يَمْنَحَ أَحَدُكُمْ أَخَاهُ أَرْضَهُ خَيْرٌ لَهُ مِنْ أَنْ يَأْخُذَ عَلَيْهَا كَذَا وَكَذَا لِشَىْءٍ مَعْلُومٍ.
قَالَ وَقَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ هُوَ الْحَقْلُ وَهُوَ بِلِسَانِ الأَنْصَارِ الْمُحَاقَلَةُ.
أخرجه الحميدي 509 قال: حدثنا سفيان. قال: حدثنا عمرو. و`أحمد` 1/ 281 (2541) قال: حدثنا عفان. قال: حدثنا حماد بن زيد، أخبرنا عمرو بن دينار. وفي 1/ 349 (3263) قال: حدثنا سفيان عن عمرو. و`البُخَارِي` 3/ 138 (2330) قال: حدثنا علي ابن عبد الله، حدثنا سفيان. قال: عمرو. وفي 3/ 141 (2342) قال: حدثنا قَبيصة، حدثنا سفيان عن عمرو. وفي 3/ 218 قال: حدثنا محمد بن بشار، حدثنا عبد الوهاب، حدثنا أيوب عن عمرو. و`مسلم` 5/ 25 (3957) قال: حدثنا يحيى بن يحيى، أخبرنا حماد بن زيد عن عمرو. وفي (3958) قال: وحدثنا ابن أبي عمر، حدثنا سفيان عن عمرو، وابن طاووس. وفي (3959) قال: حدثنا ابن أبي عمر، حدثنا الثقفي، عن أيوب (ح) وحدثنا أبو بكر بن أبي شَيبة، وإسحاق بن إبراهيم، جميعًا عن وكيع، عن سفيان (ح) وحدثنا محمد بن رُمح، أخبرنا الليث، عنِ ابن جُريج، كلاهما عن عمرو بن دينار. وفي (3960) قال: وحدثني عبد ابن حميد ومحمد بن رافع. قال عبد: أخبرنا وقال: ابن رافع حدثنا عبد الرزاق، أخبرنا معمر، عن ابن طاووس، و (اابن ماجة) 2456 قال: حدثنا محمد ابن رمح، أخبرنا الليث بن سعد، عن عبد الملك بن عبد العزيز بن جريج، عن عمرو بن دينار. وفي (2457) قال: حدثنا العباس بن عبد العظيم العنبري، حدثنا عبد الرزاق، أخبرنا معمر، عن ابن طاووس. وفي (2462) قال: حدثنا محمد بن الصباح، أنبأنا سفيان بن عُيينة عن عمرو بن دينار. وفي (2464) قال: حدثنا أبو بكر بن خلاد الباهلي، ومحمد بن إسماعيل، قالا: حدثنا وكيع، عن سفيان، عن عمرو بن دينار.
و`النَّسائي` 7/ 36 وفي `الكبرى` 4586 قال: أخبرني محمد بن عبد الله بن المبارك، قال: حدثنا زكريا ابن عَدي، قال: حدثنا حماد بن زيد، عن عمرو بن دينار.
كلاهما (عمرو بن دينار، وعبد الله بن طاووس) عن طاووس، فذكره.
- أخرجه أحمد 1/ 313 (2864) قال: حدثنا عبد الرزاق، أخبرنا مَعْمر، عن ابن طاووس، عن أبيه، عن ابن عباس. قال: لأن يمنح أحدكم أخاه أرضه خير له من أن يأخذ عليها كذا وكذا لشيء معلوم. قال: قال ابن عباس: وهو الحقل، وهو بلسان الأنصار: المحاقلة. (موقوف.
وله طرق من رواية عبد الملك بن ميسرة ، عن طاووس ، عن ابن عباس ، وسلف في مسند رافع بن خديج ، برقم (4294.
- ومن رواية عمرو بن دينار ، عن ابن عمر ، قال: كنا نخابر ، ولا نرى بذلك بأسا ، حتى زعم رافع بن خديج أن رسول الله صلى الله عليه وسلم نهى عنه. قال عمرو: فذكرته لطاووس. فقال طاووس: قال ابن عباس: إنما قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: يمنح أحدكم أخاه الأرض ، خير له من أن يأخذ لها خراجا معلوما. وسلف برقم (4288.
আব্দুল্লাহ ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: কোনো ব্যক্তির জন্য তার ভাইকে তার জমি দান করে দেওয়া তার জন্য উত্তম, এর বিনিময়ে নির্ধারিত কোনো খাজনা বা ভাড়া নেওয়ার চেয়ে।
অন্য এক বর্ণনায় আছে, আমর (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, আমি তাঊসকে বললাম, আপনি যদি মু'খাবারাহ (জমির উৎপাদিত ফসলের অংশবিশেষের বিনিময়ে ভাড়া দেওয়া) ত্যাগ করতেন, কারণ লোকেরা মনে করে যে নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তা নিষেধ করেছেন। তাঊস বললেন: হে আমর! আমি তাদের দেই এবং তাদের অভাবমুক্ত করি। আর তাদের মধ্যে যিনি সবচেয়ে জ্ঞানী, তিনি আমাকে জানিয়েছেন—তিনি ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর দিকে ইশারা করলেন—যে নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এটি নিষেধ করেননি, বরং বলেছেন, তোমাদের কেউ যদি তার ভাইকে জমি দান করে দেয়, তবে তার জন্য তা উত্তম এর বিনিময়ে নির্ধারিত খাজনা নেওয়ার চেয়ে।
অন্য এক বর্ণনায় আছে, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এমন এক জমির পাশ দিয়ে যাচ্ছিলেন যেখানে শস্য দুলছিল। তিনি জিজ্ঞাসা করলেন, এই জমি কার? তারা বলল, অমুক ব্যক্তি এটি ভাড়া নিয়েছে। তিনি বললেন: শোনো! সে যদি এটি তাকে দান করে দিত, তবে এর বিনিময়ে নির্ধারিত পারিশ্রমিক নেওয়ার চেয়ে তা তার জন্য উত্তম হতো।
অন্য এক বর্ণনায় আছে: তোমাদের কেউ যদি তার ভাইকে তার জমি দান করে দেয়, তবে এর বিনিময়ে নির্ধারিত কোনো বস্তুর জন্য এত এত (অংশ) নেওয়ার চেয়ে তা তার জন্য উত্তম।
তাঊস বলেন, ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেছেন: এটিই হলো 'আল-হাক্বল' (জমি ভাগাভাগি) এবং আনসারদের ভাষায় এটি 'আল-মুহাক্বালাহ' (ফসলের বিনিময়ে জমি ভাড়া)।
6546 - عن مقسم ، عن ابن عباس؛
قَالَ افْتَتَحَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم خَيْبَرَ وَاشْتَرَطَ أَنَّ لَهُ الأَرْضَ وَكُلَّ صَفْرَاءَ وَبَيْضَاءَ. قَالَ أَهْلُ خَيْبَرَ نَحْنُ أَعْلَمُ بِالأَرْضِ مِنْكُمْ فَأَعْطِنَاهَا عَلَى أَنَّ لَكُمْ نِصْفَ الثَّمَرَةِ وَلَنَا نِصْفٌ. فَزَعَمَ أَنَّهُ أَعْطَاهُمْ عَلَى ذَلِكَ فَلَمَّا كَانَ حِينَ يُصْرَمُ
النَّخْلُ بَعَثَ إِلَيْهِمْ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ رَوَاحَةَ فَحَزَرَ عَلَيْهِمُ النَّخْلَ وَهُوَ الَّذِى يُسَمِّيهِ أَهْلُ الْمَدِينَةِ الْخَرْصَ فَقَالَ فِى ذِهْ كَذَا وَكَذَا قَالُوا أَكْثَرْتَ عَلَيْنَا يَا ابْنَ رَوَاحَةَ. فَقَالَ فَأَنَا أَلِى حَزْرَ النَّخْلِ وَأُعْطِيكُمْ نِصْفَ الَّذِى قُلْتُ. قَالُوا هَذَا الْحَقُّ وَبِهِ تَقُومُ السَّمَاءُ وَالأَرْضُ قَدْ رَضِينَا أَنْ نَأْخُذَهُ بِالَّذِى قُلْتَ.
أخرجه أحمد 1/ 250 (2255) قال: حدثنا سريج بن النعمان. و`ابن ماجة` 2468 قال: حدثنا إسماعيل بن توبة.
كلاهما (سريج، وإسماعيل) قالوا: حدثنا هشيم، عن ابن أبي ليلى عن الحكم بن عتيبة، عن مقسم، فذكره.
- أخرجه أبو داود (3410) قال: حدثنا أيوب بن محمد الرقي، حدثنا عمر بن أيوب. وفي (3411) قال: حدثنا علي بن سهل الرملي، قال: حدثنا زيد بن أبي الزرقاء. و (اابن ماجة) 1820 قال: حدثنا موسى بن مروان الرقي، حدثنا عمر بن أيوب.
كلاهما (عمر بن أيوب، وزيد بن أبي الزرقاء) عن جعفر بن برقان، عن ميمون بن مِهْران، عن مقسم، فذكره.
- أخرجه أبو داود (3412) قال: حدثنا محمد بن سليمان الأنباري، حدثنا كثير، يعني بن هشام، عن جعفر بن بُرقان، حدثنا ميمون، عن مقسم، أنَّ النَبِي صلى الله عليه وسلم، حِينَ آفْتَتَحَ خَيْبَر، فذكر نحو حديث زيد. قال: فحزر النخل وقال: فأنا ألي جذاذ النخل وأعطيكم نصف الذي قلت. مرسل.
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) খায়বার জয় করেন এবং এই শর্ত আরোপ করেন যে, জমি এবং এর সকল হলুদ ও সাদা বস্তু (স্বর্ণ ও রৌপ্য) তাঁর হবে। খায়বারের অধিবাসীরা বলল, আমরা আপনাদের চেয়ে জমি সম্পর্কে বেশি অবগত। সুতরাং আপনারা আমাদের তা দিন এই শর্তে যে, উৎপাদিত ফলের অর্ধেক আপনাদের এবং অর্ধেক আমাদের হবে। (বর্ণনাকারী) দাবি করেন যে, তিনি (রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এই শর্তে তাদের তা দিয়েছিলেন। অতঃপর যখন খেজুর কাটার সময় হলো, তখন তিনি তাদের কাছে আব্দুল্লাহ ইবনু রাওয়াহাকে (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) প্রেরণ করলেন। তিনি তাদের উপর খেজুরের হিসাব করলেন (উৎপাদনের আন্দাজ করলেন), যাকে মদীনার অধিবাসীরা 'আল-খারস' বলে। তিনি বললেন, এতে এত এত পরিমাণ ফল হবে। তারা বলল, হে ইবনু রাওয়াহা! আপনি আমাদের ওপর বেশি চাপিয়ে দিয়েছেন। তখন তিনি বললেন, তাহলে আমিই খেজুর কাটার দায়িত্ব নিচ্ছি এবং আমি যা বলেছি, তার অর্ধেক তোমাদের দিচ্ছি। তারা বলল, এটিই সত্য এবং এর দ্বারাই আসমান ও যমীন প্রতিষ্ঠিত আছে। আপনি যা বলেছেন, সে অনুযায়ী নিতে আমরা সন্তুষ্ট।
6547 - عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ:
لَمَّا نَزَلَتْ هَذِهِ الآيَةُ (وَلَا تَقْرَبُوا مَالَ الْيَتِيمِ إِلَاّ بِالَّتِى هِىَ أَحْسَنُ) وَ (إِنَّ الَّذِينَ يَأْكُلُونَ أَمْوَالَ الْيَتَامَى ظُلْمًا) قَالَ اجْتَنَبَ النَّاسُ مَالَ الْيَتِيمِ وَطَعَامَهُ فَشَقَّ ذَلِكَ عَلَى الْمُسْلِمِينَ فَشَكَوْا ذَلِكَ إِلَى النَّبِىِّ صلى الله عليه وسلم فَأَنْزَلَ اللَّهُ (وَيَسْأَلُونَكَ عَنِ الْيَتَامَى قُلْ إِصْلَاحٌ لَهُمْ خَيْرٌ) إِلَى قَوْلِهِ (لأَعْنَتَكُمْ).
أخرجه أحمد 1/ 325 (3002) قال: حدثنا يحيى بن آدم، حدثنا إسرائيل. و (أبوداود) 2871 قال: حدثنا عثمان بن أبي شَيبة، حدثنا جَرير. و`النَّسائي` 6/ 256 وفي `الكبرى`6463 قال: أخبرنا أحمد بن عثمان بن حكيم. قال: حدثنا محمد بن الصلت. قال: حدثنا أبو كُدَينة. وفي 6/ 256، وفي `الكبرى` 6464 قال: أخبرنا عَمرو بن علي. قال: حدثنا عمران بن عيينة.
أربعتهم (إسرائيل، وجرير، وأبو كُدينة يحيى بن المهلب، وعمران بن عُيينة) عن عطاء بن السائب، عن سعيد بن جبير، فذكره.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: যখন এই আয়াত নাযিল হল— "(তোমরা উত্তম পন্থা ব্যতীত ইয়াতীমের সম্পদের নিকটবর্তী হয়ো না)" এবং "(নিশ্চয় যারা ইয়াতীমদের সম্পদ অন্যায়ভাবে ভোগ করে,)" তখন লোকেরা ইয়াতীমের সম্পদ ও তার খাবার থেকে বিরত থাকল। এতে মুসলিমদের জন্য কষ্টকর হল। ফলে তারা এ বিষয়ে নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে অভিযোগ করল। অতঃপর আল্লাহ তা'আলা নাযিল করলেন— "(আর তারা তোমাকে ইয়াতীমদের সম্পর্কে জিজ্ঞেস করে। বল, তাদের জন্য সংশোধনের (উত্তম ব্যবস্থা) উদ্যোগ গ্রহণ করা উত্তম।)" আল্লাহর বাণী "(তিনি তোমাদেরকে কষ্টে ফেলতেন)" পর্যন্ত।
6548 - عَنْ عِكْرِمَة، عَنِ ابن عَبَّاسٍ؛ (إِنْ تَرَكَ خَيْرًا الْوَصِةُ لِلْوَالِدَيْنِ وَالأقْرَبِينَ)، فَكَانَتِ الْوَصِيةُ كَذلِكَ، حَتَّى نَسَخَتْهَا آيَةُ الْمِيرَاثِ.
أخرجه أبو داود (2869) قال: حدثنا أحمد بن محمد المروزي، حدثني علي بن حسين بن واقد، عن أبيه، عن يزيد النحوي، عن عكرمة، فذكره.
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, "(যদি সে কোনো সম্পদ রেখে যায়, তবে) পিতা-মাতা ও নিকটাত্মীয়দের জন্য ওসিয়ত।" ওসিয়তের বিধান এভাবেই বহাল ছিল, যতক্ষণ না মীরাসের (উত্তরাধিকারের) আয়াত এটি রহিত করে দেয়।
6549 - عَنْ عُرَوَة، عَنِ ابن عَبَّاسٍ، قَالَ:
لَوْ غَضَّ النَّاسُ إلَى الرُّبُعِ لأِنَّ رَسُولَ الله، صلى الله عليه وسلم، قَالَ: الثُّلُثُ، وَالثُّلُثُ كَثِيرٌ، أَوْ كَبِيرٌ.
أخرجه الحميدي (521) قال: حدثنا سفيان. و`أحمد` 1/ 230 (2034) قال: حدثني ابن نُمير. وفي 1/ 233 (2076) قال: حدثنا وكيع. و`البُخَارِي` 4/ 3 (2743) قال: حدثنا قُتيبة بن سعيد، حدثنا سفيان. و`مسلم` 5/ 72 و 73 (4227) قال: حدثني إبراهيم بن موسى الرازي، أخبرنا عيسى، يعني ابن يونس (ح) وحدثنا أبو بكر بن أبي شَيبة، وأبو كريب. قالا: حدثنا وكيع (ح) وحدثنا أبو كُريب، حدثنا ابن نمير. و (اابن ماجة) 2711 قال: حدثنا علي بن محمد، حدثنا وكيع. و`النَّسائي` 6/ 244، وفي `الكبرى` 6428 قال: أخبرنا قتيبة بن سعيد. قال: حدثنا سفيان.
أربعتهم (سفيان بن عُيينة، وعبد الله بن نمير، ووكيع، وعيسى بن يونس) عن هشام بن عروة، عن أبيه، فذكره.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, যদি মানুষ এক-চতুর্থাংশে সীমিত করত, কারণ রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: ‘এক-তৃতীয়াংশ, আর এক-তৃতীয়াংশও তো অনেক (বা বড়)।’
6550 - عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رضى الله عنهما قَالَ إِنَّ نَاسًا يَزْعُمُونَ أَنَّ هَذِهِ الآيَةَ نُسِخَتْ، وَلَا وَاللَّهِ مَا نُسِخَتْ، وَلَكِنَّهَا مِمَّا تَهَاوَنَ النَّاسُ، هُمَا وَالِيَانِ وَالٍ يَرِثُ، وَذَاكَ الَّذِى يَرْزُقُ، وَوَالٍ لَا يَرِثُ، فَذَاكَ الَّذِى يَقُولُ بِالْمَعْرُوفِ، يَقُولُ لَا أَمْلِكُ لَكَ أَنْ أُعْطِيَكَ.
أخرجه البخاري 4/ 10 قال: حدثنا محمد بن الفضل أبو النعمان ، قال: حدثنا أبو عوانة ، عن أبي بشر ، عن سعيد بن جبير ، فذكره.
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, কিছু লোক ধারণা করে যে এই আয়াতটি মানসুখ (রহিত) হয়ে গেছে। আল্লাহর কসম! এটি মানসুখ হয়নি। বরং মানুষ এতে শিথিলতা দেখিয়েছে। তারা দু’ধরনের অভিভাবক: এক অভিভাবক যিনি উত্তরাধিকারী হন, আর তিনিই হলেন সেই ব্যক্তি, যিনি (তাদের) ভরণপোষণ দেন। এবং (দ্বিতীয়) এক অভিভাবক যিনি উত্তরাধিকারী হন না, তিনিই হলেন সেই ব্যক্তি, যিনি (সদ্ভাব ও) ন্যায়সঙ্গতভাবে কথা বলেন। তিনি বলেন, (আমার সম্পদ থেকে) তোমাকে কিছু দেওয়ার ক্ষমতা আমার নেই।
6551 - عَنْ عَوْسَجَة، عَنِ ابن عَبَّاسٍ،
أَنَّ رَجُلاً مَاتَ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ الله، صلى الله عليه وسلم، وَلَمْ يَدَعْ وَارِثًا إلَاّ عَبْدًا، هُوَ أَعْتَقَهُ، فَأَعْطَاهُ النَّبِيُّ، صلى الله عليه وسلم، مِيرَاثَهُ.
أخرجه الحميدي 523 قال: حدثنا سفيان. و`أحمد` 1/ 221 (1930) قال: حدثنا سفيان. وفي 1/ 358 (3369) قال: حدثنا رَوْح، حدثنا ابن جُريج. و`أبو داود` 2905 قال: حدثنا موسى بن إسماعيل، قال: حدثنا حماد. و (اابن ماجة) 2741 قال: حدثنا إسماعيل بن موسى، حدثنا سُفيان بن عيينة. والتِّرْمِذِيّ` 2106 قال: حدثنا ابن أبي عمر، حدثنا سفيان. و`النَّسائي` في `الكبرى` 6376 قال: أخبرنا قتيبة بن سعيد بن جميل بن طريف البلخي. قال: حدثنا سفيان بن عيينة. وفي (6377) قال: أخبرنا أبو داود، واسمه سليمان بن سيف الحراني. قال: حدثنا أبو عاصم، واسمه الضحاك بن مخلد، عن ابن جريج.
ثلاثتهم (سفيان بن عُيينة، وابن جُريج، وحماد بن سلمة) عن عَمرو بن دينار، عن عَوْسَجَة مولى ابن عباس، فذكره.
- قال النسائي: عوسجة ليس بالمشهور ، ولا نعلم أن أحدا يروي عنه غير عمرو بن دينار ، ولم نجد هذا الحديث إلا عند عوسجة.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর যুগে এক ব্যক্তি মারা গিয়েছিল। সে এমন কোনো উত্তরাধিকারী রেখে যায়নি, কেবল একজন গোলাম ছাড়া, যাকে সে মুক্ত করে দিয়েছিল। অতঃপর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সেই মুক্ত গোলামকে তার উত্তরাধিকার (মীরাস) প্রদান করলেন।
6552 - عن طَاوُوسٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم:
أَلْحِقُوا الْفَرَائِضَ بِأَهْلِهَا فَمَا بَقِىَ فَهْوَ لأَوْلَى رَجُلٍ ذَكَرٍ.
- وفي رواية: اقْسِمُوا الْمَالَ بَيْنَ أَهْلِ الْفَرَائِضِ عَلَى كِتَابِ اللَّهِ فَمَا تَرَكَتِ الْفَرَائِضُ فَلأَوْلَى رَجُلٍ ذَكَرٍ.
أخرجه أحمد 1/ 292 (2657) قال: حدثنا عفان، حدثنا وهيب بن خالد. وفي 1/ 313 (2862) قال: حدثنا عبد الرزاق، حدثنا معمر. وفي 1/ 325 (2994) قال: حدثنا يحيى بن آدم، حدثنا وهيب بن خالد. و`الدارمي` 2987 قال: حدثنا مسلم بن إبراهيم، حدثنا وهيب. و`البُخَارِي` 8/ 187 (6732) قال: حدثنا موسى بن إسماعيل، حدثنا وهيب. وفي 8/ 188 (6735) قال: حدثنا مسلم بن إبراهيم ، حدثنا وهيب. وفي 8/ 189 (6737) قال: حدثنا سليمان بن حرب ، حدثنا وهيب. وفي 8/ 190 (6746) قال: حدثنا أُمية بنِ بِسطام، حدثنا يزيد بن زُريع، عن روح. و`مسلم` 5/ 59 (4148) قال: حدثنا عبد الأعلى بن حماد، وهو النَرْسي، حدثنا وهيب. وفي (4149) قال: حدثنا أمية بن بسطام العيشي، حدثنا يزيد بن زريع، حدثنا روح بن القاسم. وفي (4150) قال: حدثنا إسحاق بن إبراهيم، ومحمد بن رافع، وعبد بن حُميد. قال: إسحاق: حدثنا. وقال الآخران: أخبرنا عبد الرزاق، أخبرنا معمر. وفي 5/ 60 (4151) قال: وحدثنيه محمد بن العلاء أبو كريب الهمداني، حدثنا زيد بن حباب، عن يحيى بن أيوب. و`أبو داود` 2898 قال: حدثنا أحمد بن صالح، ومخلد بن خالد. قال: حدثنا عبد الرزاق، حدثنا معمر. و (اابن ماجة) 2740 قال: حدثنا العباس بن عبد العظيم العنبري، حدثنا عبد الرزاق، أنبأنا معمر. والتِّرْمِذِيّ` 2098 قال: حدثنا عبد الله بن عبد الرحمن، أخبرنا مُسلم بن إبراهيم، حدثنا وهيب (ح) وحدثنا عبد بن حميد، أخبرنا عبد الرزاق، عن معمر. و`النَّسائي` في `الكبرى` 6297 قال: أخبرنا محمد بن معمر
البحراني. قال: حدثنا حبان، يعني ابن هلال. قال: حدثنا وهيب، يعني ابن خالد.
أربعتهم (وهيب، ومعمر، وروح بن القاسم، ويحيى بن أيوب) عن عبد الله بن طاووس، عن أبيه، فذكره.
- أخرجه النسائي في `الكبرى` 6298 قال: أخبرنا أحمد بن سليمان الرهاوي. قال: حدثنا أبو داود، يعني عمر بن سعد الحَفَريّ، عن سفيان، يعني الثوري، عن ابن طاووس، عن طاووس. قال: قالرسول الله صلى الله عليه وسلم: ألحقوا المال بالفرائض، فما تركت الفرائض فأولى رجل ذكر. ليس فيه (ابن عباس) مرسل.
- قال النسائي: سفيان الثوري أحفظ من وهيب ، ووهيب ثقة مأمون ، وكأن حديث الثوري أشبه بالصواب.
- وقال الترمذي: هذا حديث حسن. وقد روى بعضهم عن ابن طاووس ، عن أبيه ، عن النبي صلى الله عليه وسلم ، مرسلا.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: তোমরা ফরয অংশগুলো তার হকদারদের কাছে পৌঁছে দাও। এরপর যা অবশিষ্ট থাকে, তা নিকটতম পুরুষ আত্মীয়ের জন্য।
অপর এক বর্ণনায় আছে: তোমরা আল্লাহর কিতাব অনুযায়ী ফরয অংশীদারদের মধ্যে সম্পদ বণ্টন করো। ফরয অংশীদারদের (বণ্টনের) পর যা বাকি থাকবে, তা নিকটতম পুরুষ আত্মীয়ের জন্য।
6553 - عَنْ طَاوُوسٍ، عَنِ ابن عَبَّاسٍ
أَنَّ رَسُولَ الله، صلى الله عليه وسلم، وَرَّثَ جَدَّةً سُدُسًا.
أخرجه ابن ماجة 2725 قال: حدثنا عبد الرحمن بن عبد الوهاب، حدثنا سَلْم بن قتيبة ، عن شريك، عن لَيث بن أبي سليم، عن طاووس، فذكره.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) একজন দাদীকে (উত্তরাধিকার হিসেবে) এক-ষষ্ঠাংশ দিয়েছেন।
6554 - عَنْ أَبِى الشَّعْثَاءِ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم:
كُلُّ قَسْمٍ قُسِمَ فِى الْجَاهِلِيَّةِ فَهُوَ عَلَى مَا قُسِمَ وَكُلُّ قَسْمٍ أَدْرَكَهُ الإِسْلَامُ فَهُوَ عَلَى قَسْمِ الإِسْلَامِ.
أخرجه أبوداود (2914) قال: حدثنا حجاج بن أبي يعقوب، و (اابن ماجة) 2485 قال: حدثنا العباس بن جعفر.
كلاهما (حجاج، والعباس) قالوا: حدثنا موسى بن داود، حدثنا محمد بن مسلم الطائفي، عن عمرو بن دينار، عن أبي الشغثاء، فذكره.
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: জাহিলিয়্যাতের যুগে যে বণ্টন সম্পন্ন হয়েছে, তা সেভাবেই বহাল থাকবে যেভাবে তা বণ্টন করা হয়েছিল। আর যে কোনো বণ্টনকে ইসলাম পেয়েছে, তা ইসলামের বিধান অনুযায়ী বণ্টন হবে।
6555 - عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابن عَبَّاسٍ، رضى الله عنهما؛
(وَلِكُلٍّ جَعَلْنَا مَوَالِىَ) قَال وَرَثَةً (وَالَّذِينَ عَاقَدَتْ
أَيْمَانُكُمْ) قَالَ: كَانَ الْمُهَاجِرُون لَمَّا قَدِمُوا الْمَدِينَةَ يَرِثُ الْمُهَاجِرُ الأَنْصَارِىَّ دُونَ ذَوِى رَحِمِهِ لِلأُخُوَّةِ الَّتِى آخَى النَّبِىُّ صلى الله عليه وسلم بَيْنَهُمْ، فَلَمَّا نَزَلَتْ (وَلِكُلٍّ جَعَلْنَا مَوَالِىَ) نَسَخَتْ، ثُمَّ قَالَ (وَالَّذِينَ عَاقَدَتْ أَيْمَانُكُمْ) إِلَاّ النَّصْرَ وَالرِّفَادَةَ وَالنَّصِيحَةَ، وَقَدْ ذَهَبَ الْمِيرَاثُ وَيُوصِى لَهُ.
أخرجه البخاري 3/ 125 (2292) و 6/ 55 (4580) قال: حدثنا الصلت بن محمد. وفي 8/ 190 (6747) قال: حدثني إسحاق بن إبراهيم. و`أبو داود` 2922 قال: حدثنا هارون بن عبد الله. و`النَّسائي` في `الكبرى` 6384 و 11037 قال: أخبرنا هارون ابن عبد الله الحمال.
ثلاثتهم (الصلت، وإسحاق، وهارون) قالوا: حدثنا أبو أُسامة، حدثني إدريس بن يزيد، حدثنا طلحة بن مُصَرِّف، عن سعيد بن جُبير، فذكره.
- في رواية إسحاق بن إبراهيم. قال: قلت لأبي أسامة: حدثكم إدريس.
- قال البخاري (4580): سمع أبو أسامة إدريس ، وسمع إدريس طلحة.
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহ তাআলার বাণী: "(وَلِكُلٍّ جَعَلْنَا مَوَالِىَ) আর প্রত্যেকের জন্যই আমরা উত্তরাধিকারী বানিয়েছি" (সূরা নিসা ৪:৩৩) সম্পর্কে তিনি বলেন, এর অর্থ হচ্ছে ওয়ারিসগণ। আর আল্লাহ তাআলার বাণী: "(وَالَّذِينَ عَاقَدَتْ أَيْمَانُكُمْ) আর যাদের সাথে তোমাদের ডান হাত অঙ্গীকারাবদ্ধ হয়েছে" সম্পর্কে তিনি বলেন: মুহাজিরগণ যখন মদিনায় আগমন করলেন, তখন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাদের মধ্যে যে ভ্রাতৃত্বের বন্ধন স্থাপন করে দিয়েছিলেন, তার কারণে মুহাজির ব্যক্তি তার (রক্তের) আত্মীয়দের বাদ দিয়ে আনসারী ব্যক্তির উত্তরাধিকারী হতো। অতঃপর যখন এ আয়াতটি নাযিল হলো: "আর প্রত্যেকের জন্যই আমরা ওয়ারিস/উত্তরাধিকারী বানিয়েছি," তখন তা (পূর্বের নিয়মটি) রহিত করে দিল। এরপর তিনি বলেন, "(وَالَّذِينَ عَاقَدَتْ أَيْمَانُكُمْ)" (এই অঙ্গীকারের মাধ্যমে এখন শুধু) সাহায্য, সহযোগিতা ও নসিহত (উপদেশ) করার অধিকার রইল। কিন্তু এখন মীরাস (উত্তরাধিকার) রহিত হয়ে গেছে। তবে তার জন্য ওসিয়ত করা যাবে।
6556 - عَنْ عِكْرِمَة، عَنِ ابن عَبَّاسٍ، قَالَ: (والذين عاقَدْتَ أَيْمَانُكُمْ فَآتُوهُمْ نَصِيبَهُمْ) كَانَ الرَّجُلُ يُحَالِفُ الرَّجُلَ لَيْسَ بَيْنَهُمَا نَسَبٌ، فَيَرِثُ أَحَدُهُمَا الآخَر، فَتَسَخَ ذَلِكَ الأَنْفَالُ، فَقَالَ: (وَأُولُوا الأرْحَامِ بَعْضُهُمْ أَوْلَى بِبَعْضٍ).
أخرجه أبو داود (2921 و 2924) قال: حدثنا أحمد بن محمد بن ثابت، قال: حدثني علي بن حسين، عن أبيه، عن يزيد النحوي، عن عكرمة، فذكره.
في (2924) ((والذين آمنوا وهاجروا.).
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, (আল্লাহর বাণী:) "আর যাদের সাথে তোমরা অঙ্গীকারবদ্ধ হয়েছ, তাদের অংশ তাদেরকে দাও।" (সূরা নিসা ৪:৩৩)। (পূর্বে) কোনো ব্যক্তি অন্য এমন ব্যক্তির সাথে মৈত্রী চুক্তি করত যার সাথে তার কোনো বংশের সম্পর্ক ছিল না। ফলে তাদের একজন অন্যজনের উত্তরাধিকারী হতো। অতঃপর এই বিধানটি আনফাল (বা আল-আহযাব) দ্বারা রহিত করা হয়। আল্লাহ তা'আলা বলেন: "আর রক্ত সম্পর্কীয় আত্মীয়রা একে অপরের চেয়ে বেশি হকদার।" (সূরা আহযাব ৩৩:৬)।
6557 - عن عكرمة عن ابن عباس قال:
جاء رجل إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم ومعه ولد له فقال له يا رسول الله إني أريد أن تشهد بصدقة أتصدق بها على ابني هذا فقال له رسول الله صلى الله عليه وسلم ألك ولد غيره قال نعم قال فأعطيته مثل ما أعطيت هذا قال فلا أشهد.
أخرجه عبد بن حميد (606) قال: حدثنا إبراهيم بن الحكم ، حدثني أبي ، عن عكرمة ، فذكره.
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত,
একজন লোক তার এক সন্তানকে সাথে নিয়ে রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর কাছে এলেন। অতঃপর তিনি তাঁকে বললেন, হে আল্লাহর রাসূল! আমি চাই আপনি আমার এই ছেলের জন্য করা সাদাকাহর সাক্ষী হোন। রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁকে বললেন, তোমার কি এ ছাড়া অন্য সন্তান আছে? লোকটি বলল, হ্যাঁ। তিনি বললেন, তুমি কি তাদেরকেও এর মতো (সমপরিমাণ) দান করেছ? তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, তাহলে আমি (এর) সাক্ষী হব না।
6558 - عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابن عَبَّاسٍ، أَنَّهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ الله، صلى الله عليه وسلم:
لا مُسَاعَاةَ فِي الإسْلامِ، مَنْ سَاعَى فِي الْجَاهِلِيَّة، فَقَدْ لَحِقَ بِعَصَبَتِهِ، وَمَنِ ادَّعَى وَلَدًا مِنْ غَيْرِرِشْدَةٍ فَلا يَرِثُ وَلا يُورَثُ.
أخرجه أحمد 1/ 362 (3416. وأبو داود (2264) قال: حدثنا يعقوب ابن إبراهيم.
كلاهما (أحمد، ويعقوب) قالا: حدثنا مُعتمر، عن سلم ابن أبي الذيال، قال: حدثني بعض أصحابنا، عن سعيد بن جُبير، فذكره.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: ইসলামে অবৈধ যৌন মিলনের মাধ্যমে (সন্তানের দাবির) কোনো সুযোগ নেই। যে ব্যক্তি জাহিলিয়্যাতে (অবৈধ সম্পর্কের মাধ্যমে সন্তানের দাবি) করেছিল, সে তার আসাবার (পুরুষ আত্মীয়দের) সাথে যুক্ত থাকবে। আর যে ব্যক্তি সঠিক বৈধতা ব্যতীত সন্তানের দাবি করে, সে উত্তরাধিকারী হবে না এবং উত্তরাধিকার সূত্রে তার (সম্পত্তি) নেওয়াও হবে না।
6559 - عَنْ طَاوُوسٍ، عَنِ ابن عَبَّاسٍ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ الله، صلى الله عليه وسلم:
مَنْ أَعْمَرَ عُمْرَى، فَهِىَ لِمَنْ أُعْمِرَهَا جَائِزَةٌ، وَمَنْ أَرْقَبَ رُقْبَى فَهِيَ لِمَنْ أُرْقِبَهَا جَائِزَةٌ، وَمَنْ وَهَبَ هِبَة، ثُمَّ عَادَ فِيهَا، فَهُوَ كَالْعَائِدِ فِي قَيْئِهِ.
- وفي رواية: العمرى لمن أعمرها ، والرقبى لمن أرقبها ، والعائد في هبته ، كالعائد في قيئه.
- وفي رواية: العمرى جائزة لمن أعمرها.
أخرجه أحمد 1/ 250 (2250) قال: حدثنا أبو معاوية. وفي (2251) قال: حدثنا ابن نمير. و`النَّسَائي` 6/ 267 و 269، وفي `الكبرى` 6497 و 6505 قال: أخبرنا أحمد بن حرب. قال: حدثنا أبو معاوية.
كلاهما (أبو معاوية، وعبد الله بن نمير) عن حجاج بن أرطاه، عن أبي الزبير، عن طاووس، فذكره.
- أخرجه النسائي 6/ 270، وفي `الكبرى` 6506 قال: أخبرنا محمد بن بشار ، عن يحيى بن سعيد. قال: حدثنا سفيان، عن أبي الزبير، عن طاووس، عن ابن عباس قال: العمرى والرقى سواء. موقوفا.
- وأخرجه النسائى 6/ 270 وفي `الكبرى` 6507 قال: أخبرنا أحمد بن سليمان. قال: حدثنا يعلى. قال: حدثنا سفيان في 6/ 270 وفي `الكبرى` 6508 قال: أخبرنا أحمد بن سليمان، قال: حدثنا محمد بن بشر، قال: حدثنا حجاج.
كلاهما (سفيان، وحجاج) عن أبي الزبير، عنِ طاووس، عن ابن عباسِ، قال: لا تَحِلُ الرُّقْبَى، وَلا الْعُمْرَى، فَمَنْ أُعْمِرَ شَيْئاَ فَهُوَ لَهُ، وَمَنْ أُرْقِبَ شَيْئاَ فَهُوَ لَهُ (موقوفًا.
- لفظ حجاج: لا تصلح العمرى ، ولا الرقبى ، فمن أعمر شيئا ، أو أرقبه ، فإنه لمن أعمره وأرقبه حياته وموته.
- وأخرجه النَّسائي 6/ 270 وفي `الكبرى` 6509 قال: أخبرنا محمد بن حاتم، قال: أنبأنا حِبَّان،
قال: حدثنا عبد الله، عن حنظلة، أنه سمع طاووسًا يقول: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: لا تَحِلُّ الرُّقْبَى، فَمَنْ أًرْقِبَ رُقْبَى، فَهُوَ سَبِيلُ اْلمِيرَاثِ. مرسلا (ليس فيه ابن عباس.
- وأخرجه النسائي 6/ 269 وفي `الكبرى` 6503 قال: أخبرنا زكريا بن يحيى، قال: حدثنا عبد الجبار بن العلاء. قال: حدثنا سفيان، عن ابن أبي نجيح، عن طاووس لعله، عن ابن عباس، قال: لا رقبى فمن ارقب شيئا فهو سبيل الميراث) موقوف.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যে ব্যক্তি ‘উমরা’ (আজীবন ভোগের অধিকার) দান করে, তা যার জন্য দান করা হয়েছে, তার জন্য তা বৈধ। আর যে ব্যক্তি ‘রুকবা’ (উত্তরাধিকারের শর্তাধীন দান) প্রদান করে, তা যার জন্য প্রদান করা হয়েছে, তার জন্য তা বৈধ। আর যে ব্যক্তি কোনো দান করার পর তা ফিরিয়ে নেয়, সে তার বমি ফিরিয়ে খাওয়া ব্যক্তির মতো।
6560 - عَنْ الْحَجُورِيِّ، عَنْ عبد الله بْنِ عَبَّاسٍ، عن النَّبِيِّ، صلى الله عليه وسلم، قَالَ:
الْعُمْرَى جَائِزَةٌ.
أخرجه النسائي 6/ 272 وفي `الكبرى` 6520 قال: أخبرنا زكريا بن يحيى، قال: حدثنا زيد ابن أخزم، قال: أنبأنا معاذ بن هشام، قال: حدثني أبي، عن قتادة، قال: حدثنا عَمرو بن دينار، عن طاووس، عن الحَجُوري، فذكره.
- أخرجه النسائي 6/ 272 وفي `الكبرى` 6521 قال: أخبرنا هارون بن محمد بن بكار بن بلال. قال: حدثنا أبي. قال: حدثنا سعيد، هو بن بشير، عن عمرو بن دينار، عن طاووس، عن ابن عباس، عن النبي صلى الله عليه وسلم. قال:
إن العمرى جائزة.
ليس فيه: (الحجوري.
- رواه معمر ، عن عبد الله بن طاووس ، عن أبيه ، عن حجر المدري الحجوري ، عن زيد بن ثابت ، عن النبي صلى الله عليه وسلم ، وسلف في مسنده ، برقم (4489.
- وأخرجه النسائي 6/ 272 وفي `الكبرى` 6522 قال أخبرنا محمد بن حاتم، قال: حدثنا حبان، قال: أنبأنا عبد الله، عن محمد بن إسحاق، قال: حدثنا مكحول، عن طاووس (بتل رسول الله صلى الله عليه وسلم العمرى والرقبى. مرسل ليس فيه: (ابن عباس.
আব্দুল্লাহ ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আল-উমরাহ (জীবনস্বত্ব দান) বৈধ।