আল মুসনাদুল জামি`
7683 - عَنْ سَالِمٍ عَنْ أَبِيهِ؛
أَنَّ غَيْلَانَ بْنَ سَلَمَةَ الثَّقَفِىَّ أَسْلَمَ وَتَحْتَهُ عَشْرُ نِسْوَةٍ فَقَالَ لَهُ النَّبِىُّ صلى الله عليه وسلم اخْتَرْ مِنْهُنَّ أَرْبَعًا.
فَلَمَّا كَانَ فِى عَهْدِ عُمَرَ طَلَّقَ نِسَاءَهُ وَقَسَمَ مَالَهُ بَيْنَ بَنِيهِ فَبَلَغَ ذَلِكَ عُمَرَ فَقَالَ إِنِّى لأَظُنُّ الشَّيْطَانَ فِيمَا يَسْتَرِقُ مِنَ السَّمْعِ سَمِعَ بِمَوْتِكَ فَقَذَفَهُ فِى نَفْسِكَ وَلَعَلَّكَ أَنْ لَا تَمْكُثَ إِلَاّ قَلِيلاً وَايْمُ اللَّهِ لَتُرَاجِعَنَّ نِسَاءَكَ وَلَتَرْجِعَنَّ فِى مَالِكَ أَوْ لأُوَرِّثُهُنَّ مِنْكَ وَلآمُرَنَّ بِقَبْرِكَ فَيُرْجَمُ كَمَا رُجِمَ قَبْرُ أَبِى رِغَالٍ.
أخرجه أحمد 2/ 13 (4609) قال: حدَّثنا إسماعيل. وفي 2/ 14 (4631) قال: حدَّثنا إسماعيل، ومُحَمَّد بن جعفر. وفي 2/ 44 (5027) قال: حدَّثنا مُحَمَّد بن جعفر، وعبد الأعلى. وفي 2/ 83 (5558) قال: حدَّثنا يزيد، أخبرنا سعيد بن أبي عروبة. و`ابن ماجة` 1953 قال: حدَّثنا يحيى بن حكيم، حدثنا مُحَمَّد بن جعفر. والتِّرْمِذِيّ` 1128 قال: حدَّثنا هناد، حدثنا عبدة، عن سعيد بن أبي عروبة.
أربعتهم (إسماعيل بن إبراهيم بن علية، ومُحَمَّد بن جعفر، وعبد الأعلى، وسعيد بن أبي عروبة) عن معمر، عن الزهري، عن ثابت، فذكره.
- قال الترمذي: هَكَذَا رَوَاهُ مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِىِّ عَنْ سَالِمٍ عَنْ أَبِيهِ.
- قَالَ: وَسَمِعْتُ مُحَمَّد بْنَ إِسْمَاعِيلَ (البخاري) يَقُولُ: هَذَا حَدِيثٌ غَيْرُ مَحْفُوظٍ ، وَالصَّحِيحُ مَا رَوَى شُعَيْبُ بْنُ أَبِى حَمْزَةَ ، وَغَيْرُهُ عَنِ الزُّهْرِىِّ ، قَالَ: حُدِّثْتُ عَنْ مُحَمَّد بْنِ سُوَيْدٍ الثَّقَفِىِّ ، أَنَّ غَيْلَانَ بْنَ سَلَمَةَ أَسْلَمَ ، وَعِنْدَهُ عَشْرُ نِسْوَةٍ.
- قَالَ مُحَمَّد: وَإِنَّمَا حَدِيثُ الزُّهْرِىِّ عَنْ سَالِمٍ ، عَنْ أَبِيهِ ، أَنَّ رَجُلاً مِنْ ثَقِيفٍ طَلَّقَ نِسَاءَهُ. فَقَالَ لَهُ عُمَرُ: لَتُرَاجِعَنَّ نِسَاءَكَ ، أَوْ لأَرْجُمَنَّ قَبْرَكَ ، كَمَا رُجِمَ قَبْرُ أَبِى رِغَالٍ.
- أخرجه أبو داود (المراسيل) 234 قال: حدَّثنا ابن يحيى، حدثنا عبد الرزاق، أخبرنا معمر، عن الزهري؛ أن غيلان بن سلمة أسلم، وعنه عشر نسوة، فأمره النبي صلى الله عليه وسلم أن يأخذ منهن أربعا. مرسل.
- وأخرجه مالك `الموطأ` 363 عَنِ ابْنِ شِهَابٍ؛ أَنَّهُ قَالَ: بَلَغَنِى؛
أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ لِرَجُلٍ مِنْ ثَقِيفٍ أَسْلَمَ وَعِنْدَهُ عَشْرُ نِسْوَةٍ حِينَ أَسْلَمَ الثَّقَفِىُّ أَمْسِكْ مِنْهُنَّ أَرْبَعًا وَفَارِقْ سَائِرَهُنَّ.
আবদুল্লাহ ইবন উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত,
ঘাইলান ইবনু সালামা আস-সাকাফী ইসলাম গ্রহণ করেন। তাঁর অধীনস্থ দশজন স্ত্রী ছিলেন। তখন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁকে বললেন, "তাদের মধ্য থেকে চারজনকে নির্বাচন করে নাও।"
অতঃপর যখন উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর যুগ এলো, তখন তিনি (ঘাইলান) তাঁর স্ত্রীদেরকে তালাক দিলেন এবং তাঁর সম্পদ তাঁর পুত্রদের মধ্যে ভাগ করে দিলেন। এই সংবাদ উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে পৌঁছলে তিনি বললেন: "আমি অবশ্যই মনে করি, শয়তান (জান্নাতের খবর) চুরি করে শোনার সময় তোমার মৃত্যুর খবর শুনেছে এবং সেই ধারণা তোমার অন্তরে ঢুকিয়ে দিয়েছে। সম্ভবত তুমি আর বেশি দিন থাকবে না। আল্লাহর শপথ! তুমি অবশ্যই তোমার স্ত্রীদেরকে ফিরিয়ে নেবে এবং তোমার সম্পদে ফিরে আসবে। অন্যথায়, আমি তাদের তোমার উত্তরাধিকারী বানিয়ে দেব এবং তোমার কবরকে অবশ্যই পাথর নিক্ষেপ করার নির্দেশ দেব, যেমন আবূ রিগালের কবরে পাথর নিক্ষেপ করা হয়েছিল।"
7684 - عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ النَّبِىَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ:
إِذَا نَكَحَ الْعَبْدُ بِغَيْرِ إِذْنِ مَوْلَاهُ فَنِكَاحُهُ بَاطِلٌ.
أخرجه أبوداود (2079) قال: حدثنا عُقبة بن مًكرم، حدثنا أبو
قُتَيبة، عن عبد الله بن عُمر، عن نافع، فذكره.
- قال أبو داود: هذا الحديث ضعيف، وهو موقوف، وهو قول ابن عمر رضي الله عنهما.
ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, যে নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যখন কোনো গোলাম তার মনিবের অনুমতি ছাড়া বিবাহ করে, তবে তার বিবাহ বাতিল।
7685 - عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُحَمَّد بْنِ عَقِيلٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم:
إِذَا تَزَوَّجَ الْعَبْدُ بِغَيْرِ إِذْنِ سَيِّدِهِ كَانَ عَاهِرًا.
أخرجه ابن ماجة (1959) قال: حدثنا أزهر بن مروان، حدثنا عبد الوارث بن سعيد، حدثنا القاسم بن عبد الواحد، عن عبد الله بن مُحَمَّد بن عَقيل، فذكره.
- رواه ابن جريج ، وحسن بن صالح ، والقاسم بن عبد الواحد ، وزهير بن مُحَمَّد ، عن عبد الله بن مُحَمَّد بن عقيل ، عن جابر ، وسلف في مسنده برقم (2942.
ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যখন কোনো গোলাম তার মনিবের অনুমতি ছাড়া বিবাহ করে, তখন সে ব্যভিচারী হয়।
7686 - عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم:
أَيُّمَا عَبْدٍ تَزَوَّجَ بِغَيْرِ إِذْنِ مَوَالِيهِ فَهُوَ زَانٍ.
أخرجه الدارمي (2240. وابن ماجة 1960 قال: حدثنا مُحَمَّد بن يحيى، وصالح بن مُحَمَّد بن يحيى بن سعيد.
ثلاثتهم (الدارمي، ومُحَمَّد بن يحيى، وصالح بن مُحَمَّد) عن أبي غَسَّان، مالك بن إسماعيل، حدثنا مِنْدل، عن ابن جُريج، عن موسى بن عُقبة، عن نافع، فذكره.
ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে কোনো গোলাম তার মনিবদের অনুমতি ব্যতীত বিবাহ করবে, সে ব্যভিচারী।"
7687 - عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ؛
أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنِ الشِّغَارِ.
وَالشِّغَارُ أَنْ يُزَوِّجَ الرَّجُلُ ابْنَتَهُ عَلَى أَنْ يُزَوِّجَهُ الآخَرُ ابْنَتَهُ، لَيْسَ بَيْنَهُمَا صَدَاقٌ.
أخرجه مالك `الموطأ` 1529، و`أحمد` 2/ 7 (4526) و 2/ 62 (5289) قال: حدثنا عبد الرحمن، حدثنا مالك. وفي 2/ 19 (4692) قال: حدَّثنا يحيى، عن عبيد الله. و`الدارِمِي` 2180 قال: حدثنا خالد بن مَخْلد، حدثنا مالك. و`البُخَارِي` 7/ 15 (5112) قال: حدثنا عبد الله بن يوسف، أخبرنا مالك. وفي 9/ 30 (6960) قال: حدَّثنا مسدد، حدثنا يحيى بن سعيد، عن عبيد الله و`مسلم` 4/ 139 (3449) قال: حدثنا يحيى بن يحيى. قال: قرأت على مالك. وفي (3450) قال: وحدثني زهير بن حرب، ومُحَمَّد بن المثنى، وعبيد الله بن سعيد. قالوا: حدثنا يحيى، عن عبيد الله. وفي (3451) قال: وحدثنا يحيى بن يحيى، أخبرنا حماد بن زيد، عن عبد الرحمن السراج. و`أبو داود` 2074 قال: حدثنا القَعْنَبي، عن مالك (ح) وحدثنا مسدد بن مسهرد، حدثني يحيى، عن عبيد الله. و (اابن ماجة) 1883 قال: حدثنا سُويد بن سعيد، حدثنا مالك بن أنس. والتِّرْمِذِيّ` 1124 قال: حدثنا إسحاق بن موسى الأنصاري، حدثنا مَعْن، حدثنا مالك. و`النَّسائي` 6/ 110، وفي `الكبرى` 5470 قال: أخبرنا عبيد الله بن سعيد. قال: حدَّثنا يحيى، عن عبيد الله. وفي 6/ 112، وفي `الكبرى` 5473 قال: أخبرنا هارون بن عبد الله. قال: حدثنا مَعْن. قال: حدَّثنا مالك (ح) والحارث بن مسكين، قراءةً عليه وأنا أسمع، عن ابن القاسم. قال مالك.
ثلاثتهم (مالك بن أنس، وعبيد الله بن عُمر، وعبد الرحمن السراج) عن نافع، فذكره.
ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) শিগার (Shighar) থেকে নিষেধ করেছেন।
শিগার হলো: কোনো ব্যক্তি তার মেয়েকে অন্য ব্যক্তির সাথে এই শর্তে বিয়ে দেবে যে, অপর ব্যক্তিও তার মেয়ের সাথে তার বিয়ে দেবে, কিন্তু তাদের উভয়ের মধ্যে কোনো মোহর (সাদাক) থাকবে না।
7688 - عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ النَّبِىَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ:
لَا شِغَارَ فِى الإِسْلَامِ.
- لفظ قُرَادٌ أَبِي نُوحٍ: لَا جَلَبَ ، وَلَا جَنَبَ ، وَلَا شِغَارَ فِى الإِسْلَامِ.
أخرجه أحمد 2/ 35 (4918) قال: حدثنا عبد الرزاق، حدثنا مَعْمَر، عن أيوب. وفي 2/ 91 (5654) قال: حدثنا قُراد أبو نوح، أخبرنا عُبد الله بن عُمر. و`مسلم` 4/ 139 (3452) قال: حدثني مُحَمَّد بن رافع، حدثنا عبد الرزاق، أخبرنا معمر، عن أيوب.
كلاهما (أيوب ، وعبد الله بن عمر) عن نافع، فذكره.
ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: ইসলামে শিগার (বিনিময় বিবাহ) নেই।
কুরাদ আবূ নূহ-এর শব্দে বর্ণিত: ইসলামে জালব নেই, জানাব নেই এবং শিগার নেই।
7689 - عن عطاء عن ابن عمر قال:
جاءت امرأة إلى النبي صلى الله عليه وسلم فقالت يا رسول الله ما حق الزوج على الزوجة فقال لا تمنعه نفسها وإن كانت على ظهر قتب قالت يا رسول الله ما حق الزوج على الزوجة قال لا تصدق من بينه بشيء إلا بإذنه فإن فعلت كان له الأجر وعليها الوزر قالت يا رسول الله ما حق الزوج على الزوجة قال لا تصوم يوما
إلا بإذنه فإن فعلت أثمت ولم تؤجر قالت يا رسول الله ما حق الزوج على الزوجة قال لا تخرج من بيته إلا بإذنه فإن فعلت لعنتها ملائكة الله وملائكة الرحمة وملائكة الغضب حتى تفيء أو ترجع.
أخرجه عَبد بن حُميد (813) قال: حدثني ابن أبي شَيْبة، حدثنا أبو معاوية، عن قطبة، عن ليث، عن عطاء، فذكره.
ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত,
এক মহিলা নাবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট এসে জিজ্ঞাসা করল, হে আল্লাহর রসূল! স্ত্রীর উপর স্বামীর কী কী হক (অধিকার) রয়েছে? তিনি বললেন: সে যেন স্বামীর চাহিদার ক্ষেত্রে নিজেকে বিরত না রাখে, যদিও সে উটের হাওদার উপর থাকে। মহিলাটি বলল, হে আল্লাহর রসূল! স্ত্রীর উপর স্বামীর কী হক রয়েছে? তিনি বললেন: সে যেন স্বামীর অনুমতি ছাড়া তার (স্বামীর) সম্পদ থেকে কিছুই সদাকাহ (দান) না করে। যদি সে তা করে, তবে স্বামী সাওয়াব লাভ করবে এবং সে গুনাহগার হবে। মহিলাটি বলল, হে আল্লাহর রসূল! স্ত্রীর উপর স্বামীর কী হক রয়েছে? তিনি বললেন: সে যেন তার অনুমতি ছাড়া একদিনও (নফল) রোযা না রাখে। যদি সে তা করে, তবে সে গুনাহগার হবে এবং সাওয়াব পাবে না। মহিলাটি বলল, হে আল্লাহর রসূল! স্ত্রীর উপর স্বামীর কী হক রয়েছে? তিনি বললেন: সে যেন তার অনুমতি ছাড়া তার ঘর থেকে বের না হয়। যদি সে তা করে, তবে আল্লাহর ফেরেশতাগণ, রহমতের ফেরেশতাগণ ও গযবের ফেরেশতাগণ তাকে অভিশাপ করতে থাকে যতক্ষণ না সে ফিরে আসে।
7690 - عن زيد بن أسلم عن عبد الله بن عمر؛
أن رجلا أتى امرأته في دبرها في عهد رسول الله صلى الله عليه وسلم فوجد من ذلك وجدا شديدا فأنزل الله تعالى (نساؤكم حرث لكم فأتوا حرثكم أنى شئتم).
أخرجه النسائي في `الكبرى` 8932 قال: أخبرنا مُحَمَّد بن عبد الله بن عبد الحكم، قال: حدثنا أبو بكر بن أبي أويس، قال: حدثني سليمان بن بلال، عن زيد بن أسلم، فذكره.
- قال النسائي: خالفه هشام بن سعد ، فرواه عن زيد بن أسلم ، عن عطاء بن يسار.
আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর যুগে এক ব্যক্তি তার স্ত্রীর পেছনের পথে (মলদ্বারে) সহবাস করেছিল। অতঃপর সে এ বিষয়ে তীব্র অনুতাপ অনুভব করল। ফলে আল্লাহ তাআলা এই আয়াত নাযিল করেন: (তোমাদের স্ত্রীরা তোমাদের শস্যক্ষেত্র; সুতরাং তোমরা তোমাদের শস্যক্ষেত্রে যেভাবে ইচ্ছা আসতে পারো)। [সূরা বাকারা, ২:২২৩]
7691 - عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ؛
أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم نَزَلَ الْعَقِيقَ فَنَهَى عَنْ طُرُوقِ النِّسَاءِ فِى اللَّيْلَةِ الَّتِى يَأْتِى فِيهَا فَعَصَاهُ فَتَيَانِ فَكِلَاهُمَا رَأَى مَا يَكْرَهُ.
أخرجه أحمد 2/ 104 (5814) قال: حدثنا أبو معاوية الغلابي، حدثنا خالد بن الحارث، حدثنا مُحَمَّد بن عَجلان، عن نافع، فذكره.
আবদুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আকীক উপত্যকায় অবতরণ করলেন এবং যে রাতে মানুষ (সফর থেকে) আসে, সেই রাতে স্ত্রীদের কাছে (অকস্মাৎ) যেতে নিষেধ করলেন। কিন্তু দুজন যুবক তাঁর অবাধ্যতা করল, ফলে তারা উভয়েই এমন কিছু দেখল যা তারা অপছন্দ করত।
7692 - عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ - رضى الله عنهما - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ:
إِذَا دُعِىَ أَحَدُكُمْ إِلَى الْوَلِيمَةِ فَلْيَأْتِهَا.
- زاد في رواية عُبَيْدِ اللَّهِ بن عمر عند أبي داود: فَإِنْ كَانَ مُفْطِرًا فَلْيَطْعَمْ وَإِنْ كَانَ صَائِمًا فَلْيَدْعُ.
- وفي رواية: إِذَا دُعِىَ أَحَدُكُمْ إِلَى وَلِيمَةِ عُرْسٍ فَلْيُجِبْ.
- وفي رواية: إِذَا دَعَا أَحَدُكُمْ أَخَاهُ فَلْيُجِبْ.
عُرْسًا كَانَ أَوْ نَحْوَهُ.
أخرجه مالك `الموطأ` 1570. و`أحمد` 2/ 20 (4712) قال: حدثنا يحيى، عن مالك. وفي 2/ 22 (4730) قال: حدَّثنا ابن نُمَيْر، حدثنا عبيد الله. وفي 2/ 37 (4949) قال: حدَّثنا حماد بن أسامة، حدثنا عبيد الله.
وفي 2/ 68 (5367) و 2/ 127 (6108) قال: حدَّثنا عفان، حدثنا حماد بن زيد، عن أيوب. وفي 2/ 101 (5766) قال: حدَّثنا عفان، حدثنا وهيب، حدثنا أيوب. وفي 2/ 146 (6337) قال: حدَّثنا عبد الرزاق، حدثنا معمر، عن أيوب. و (عبد بن حميد) 777 قال: حدَّثني سليمان بن حرب، حدثنا حماد بن زيد، عن أيوب. و`الدارمي` 2082 قال: أخبرنا الحكم بن المبارك، حدثنا عبد العزيز بن مُحَمَّد، عن موسى بن عقبة. وفي (2205) قال: أخبرنا عبد الله بن سعيد، حدثنل عفقبة بن خالد، عن عبيد الله. و`البُخَارِي` 7/ 31 (5173) قال: حدثنا عبد الله بن يوسف، أخبرنا مالك. وفي (5179) قال: حدَّثنا علي بن عبد الله بن إبراهيم، حدثنا الحجاج بن مُحَمَّد. قال: قال ابن جريج، أخبرني موسى بن عقبة. و`مسلم` 4/ 152 (3498) قال: حدثنا يحيى بن يحيى. قال: قرأت على مالك. وفي (3499) قال: وحدثنا مُحَمَّد بن المثنى، حدثنا خالد بن الحارث، عن عبيد الله. وفي (3500) قال: حدَّثنا ابن نُمَيْر، حدثنا عبيد الله. وفي (3501) قال: حدَّثني أبو الربيع، وأبو كامل. قالا: حدثنا حماد، حدثنا أيوب (ح) وحدثنا قتيبة، حدثنا حماد، عن أيوب. وفي (3502) قال: وحدثني مُحَمَّد بن رافع، حدثنا عبد الرزاق، أخبرنا معمر، عن أيوب. وفي (3503) قال: وحدثني إسحاق بن إبراهيم، حدثني عيسى بن المنذر، حدثنا بقية، حدثنا الذبيدي. وفي (3504) قال: حدَّثني حميد بن مسعدة الباهلي، حدثنا بشر بن المفضل، حدثنا إسماعيل بن أمية. وفي (3505) قال: وحدثني هارون بن عبد الله، حدثنا حجاج بن مُحَمَّد، عن ابن جريج، أخبرني موسى بن عقبة. و`أبو داود` 3736 قال: حدثنا القَعْنَبِي، عن مالك.
وفي (3737) قال: حدَّثنا خالد بن مخلد، حدثنا أبو أسامة، عن عبيد الله. وفي (3738) قال: حدَّثنا الحسن بن علي، حدثنا عبد الرزاق، أخبرنا معمر، عن أيوب. وفي (3739) قال: حدَّثنا ابن المصفى، حدثنا بقية، حدثنا الذبيدي. و`ابن ماجة` 1914 قال: حدَّثنا إسحاق بن منصور، أخبرنا عبد الله بن نُمَيْر، حدثنا عبيد الله. والتِّرْمِذِيّ` 1098 قال: حدَّثنا أبو سلمة يحيى بن خلف، حدثنا بشر بن المفضل، عن إسماعيل بن أمية. و`النَّسائي` في `الكبرى` 6573 قال: أخبرنا عبيد الله بن سعيد. قال: حدَّثنا يحيى القطان، عن مالك.
ستتهم (مالك، وعبيد الله ، وأيوب، وموسى بن عقبة، ومُحَمَّد بن الوليد
الزبيدي، وإسماعيل بن أمية ، وعمر بن محمد) عن نافع، فذكره.
আব্দুল্লাহ ইবনে উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যখন তোমাদের কাউকে ওয়ালীমার (ভোজের) দাওয়াত দেওয়া হয়, তখন সে যেন সেখানে যায়।
উবাইদুল্লাহ ইবনে উমার কর্তৃক আবূ দাঊদে বর্ণিত হাদীসে অতিরিক্ত এসেছে: যদি সে রোজা না রাখে, তবে সে যেন ভোজন করে; আর যদি সে রোজা রাখে, তবে সে যেন (দাওয়াতকারীর জন্য) দোয়া করে।
অন্য এক বর্ণনায় আছে: যখন তোমাদের কাউকে বিবাহের ওয়ালিমায় দাওয়াত দেওয়া হয়, তখন সে যেন তা কবুল করে।
অন্য আরেক বর্ণনায় আছে: যখন তোমাদের কেউ তার ভাইকে দাওয়াত দেয়, তখন সে যেন তা কবুল করে, তা বিবাহের দাওয়াত হোক বা অন্য কিছুর।
7693 - عَنْ نَافِعٍ قَالَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم:
مَنْ دُعِىَ فَلَمْ يُجِبْ فَقَدْ عَصَى اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَمَنْ دَخَلَ عَلَى غَيْرِ دَعْوَةٍ دَخَلَ سَارِقًا وَخَرَجَ مُغِيرًا.
أخرجه أبو داود (3741) قال: حدثنا مُسَدد، حدثنا دُرست بن زياد، عن أبان بن طارق، عن نافع، فذكره.
- قال أبو داود: أبان بن طارق مجهول.
আব্দুল্লাহ ইবন উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যাকে দাওয়াত দেওয়া হলো, আর সে সাড়া দিল না (উপস্থিত হলো না), সে আল্লাহ ও তাঁর রাসূলের অবাধ্য হলো। আর যে ব্যক্তি দাওয়াত ছাড়া প্রবেশ করল, সে চোর হিসেবে প্রবেশ করল এবং আক্রমণকারী হিসেবে বের হলো।
7694 - عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم:
مَنْ لَمْ يُجِبِ الدَّعْوَةَ فَقَدْ عَصَى اللَّهَ وَرَسُولَهُ.
أخرجه أحمد 2/ 61 (5263) قال: حدثنا وكيع، عن العُمري، عن نافع، فذكره.
ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: যে ব্যক্তি দাওয়াত (নিমন্ত্রণ) কবুল করে না, সে অবশ্যই আল্লাহ ও তাঁর রাসূলের অবাধ্য হলো।
7695 - عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ؛
أَنَّ رَجُلاً مِنْ أَهْلِ الْبَادِيَةِ أَتَى النَّبِىَّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ
إِنَّ امْرَأَتِى وَلَدَتْ عَلَى فِرَاشِى غُلَامًا أَسْوَدَ وَإِنَّا أَهْلُ بَيْتٍ لَمْ يَكُنْ فِينَا أَسْوَدُ قَطُّ قَالَ هَلْ لَكَ مِنَ إِبِلٍ قَالَ نَعَمْ قَالَ فَمَا أَلْوَانُهَا قَالَ حُمْرٌ قَالَ هَلْ فِيهَا أَسْوَدُ قَالَ لَا قَالَ فَهَلْ فِيهَا أَوْرَقُ قَالَ نَعَمْ قَالَ فَأَنَّى كَانَ ذَلِكَ قَالَ عَسَى أَنْ يَكُونَ نَزَعَهُ عِرْقٌ قَالَ فَلَعَلَّ ابْنَكَ هَذَا نَزَعَهُ عِرْقٌ.
أخرجه ابن ماجة (2003) قال: حدثنا أبو كُرَيْب، حدثنا عَبَاءة بن كُليب الليثي أبو غَسان، عن جُوَيرية بن أسماء، عن نافع، فذكره.
ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই এক বেদুঈন (মরুচারী) ব্যক্তি নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট এসে বলল: হে আল্লাহর রাসূল! আমার স্ত্রী আমার বিছানায় একটি কালো ছেলে জন্ম দিয়েছে। আমরা এমন এক পরিবার যার মধ্যে কখনোই কোনো কালো মানুষ ছিল না। তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: তোমার কি কোনো উট আছে? সে বলল: হ্যাঁ। তিনি বললেন: সেগুলোর রং কেমন? সে বলল: লাল। তিনি বললেন: সেগুলোর মধ্যে কি কোনো কালো আছে? সে বলল: না। তিনি বললেন: সেগুলোর মধ্যে কি ধূসর (বা ছাই-রঙের) আছে? সে বলল: হ্যাঁ। তিনি বললেন: তবে সেটা কিভাবে হলো? সে বলল: সম্ভবত কোনো শিরা (বংশগত গুণ) তাকে টেনে এনেছে। তিনি বললেন: সম্ভবত তোমার এই ছেলেকেও কোনো শিরা (বংশগত গুণ) টেনে এনেছে।
7696 - عَنْ مُجَاهِدٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم:
مَنِ انْتَفَى مِنْ وَلَدِهِ لِيَفْضَحَهُ فِى الدُّنْيَا فَضَحَهُ اللَّهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ عَلَى رُءُوسِ الأَشْهَادِ قِصَاصٌ بَقِصَاصٍ.
أخرجه أحمد 2/ 26 (4795) قال: حدثنا وكيع، عن أبيه، عن عبد الله بن أبى المجالد، عن مجاهد، فذكره.
ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যে ব্যক্তি তার সন্তানকে দুনিয়াতে অপদস্থ করার জন্য তাকে অস্বীকার করে (বংশ থেকে খারিজ করে), আল্লাহ তাকে কিয়ামতের দিন সকল সাক্ষীর সামনে অপদস্থ করবেন। এটা হলো কাজের বদলা কাজ (প্রতিশোধ)।
7697 - عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ ابْنِ الْبَيْلَمَانِىِّ ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ قَالَ:
سُئِلَ النَّبِىُّ صلى الله عليه وسلم مَا يَجُوزُ فِى الرَّضَاعَةِ مِنَ الشُّهُودِ قَالَ «رَجُلٌ أَوِ امْرَأَةٌ.
أخرجه أحمد 2/ 35 (4911 و 4912) و 2/ 109 (5877) قال: حدثنا عبد الله بن مُحَمَّد (قال عبد الله بن أحمد بن حنبل: وسَمِعْتُه أنا من عبد الله بن مُحَمَّد بن أبي شَيْبة) حدثنا مُعتمر، عن مُحَمَّد بن عثيم، عن مُحَمَّد بن عبد الرحمن بن البيلماني، عن أبيه، فذكره.
- أخرجه أحمد 2/ 35 (4910) قال: حدثنا عبد الرزاق، أخبرنا شيخ من أهل نَجْرَان، حدثني مُحَمَّد بن عبد الرحمن بن البيلماني، عن أبيه، عن ابن عمر، أنه سأل النبي صلى الله عليه وسلم، أو أن رجلا سأل النبي صلى الله عليه وسلم. فقال: ما الذي يجوز في الرضاع من الشهود؟ فقال النبي صلى الله عليه وسلم: رجل وامرأته.
ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে জিজ্ঞেস করা হয়েছিল যে দুধপান (স্তন্যদান) সম্পর্কিত বিষয়ে সাক্ষ্য হিসেবে কী গ্রহণযোগ্য? তিনি বললেন, "একজন পুরুষ অথবা একজন মহিলা।"
7698 - عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ؛
أَنَّهُ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ وَهْىَ حَائِضٌ فِى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَسَأَلَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مُرْهُ فَلْيُرَاجِعْهَا ثُمَّ لْيَتْرُكْهَا حَتَّى تَطْهُرَ ثُمَّ تَحِيضَ ثُمَّ تَطْهُرَ ثُمَّ إِنْ شَاءَ أَمْسَكَ بَعْدُ وَإِنْ شَاءَ طَلَّقَ قَبْلَ أَنْ يَمَسَّ فَتِلْكَ الْعِدَّةُ الَّتِى أَمَرَ اللَّهُ عز وجل أَنْ يُطَلَّقَ لَهَا النِّسَاءُ.
أخرجه مالك `الموطأ` 1683. و`أحمد` 2/ 54 (5164) قال: حدثنا يحيى، عن عبيد الله. وفي 2/ 63 (5299) قال: حدَّثنا عبد الرحمن، عن مالك. وفي 2/ 102 (5792) قال: حدثنا مُحَمَّد بن عُبيد، حدثنا عبيد الله. و`الدارمي` 2262 قال: أخبرنا خالد بن مخلد. و`البُخَاريّ` 7/ 52 (5251) قال: حدَّثنا إسماعيل بن عبد الله. قال: حدَّثني مالك. و`مسلم` 4/ 179 (3643) قال: حدَّثنا يحيى بن يحيى التميمي. قال: قرأت على مالك بن أنس. وفي (3644) قال: حدَّثنا يحيى بن يحيى، وقتيبة، وابن رمح. قال قتيبة: حدثنا ليث. وقال الآخران: أخبرنا الليث بن سعد. وفي 4/ 180 (3645) قال: حدثنا مُحَمَّد بن عبد الله بن نُمَيْر، حدثنا أبي. وفي (3646) قال: وحدثناه أبو بكر بن أبي شَيْبة، وابن المثنى. قالا: حدثنا عبد الله بن إدريس، عن عبيد الله. و`أبو داود` 2179 قال: حدَّثنا القعنبي، عن مالك. و`ابن ماجة` 2019 قال أبو بكر بن أبي
شَيْبة، حدثنا عبد الله بن إدريس، عن عبيد الله. و`النَّسائي` 6/ 137، وفي `الكبرى` 5552 قال: أخبرنا عُبيد الله بن سعيد السَّرَخْسِيّ. قال: حدثنا يحيى بن سعيد القطان، عن عبيد الله بن عمر. وفي 6/ 138، وفي `الكبرى` 5553 قال: أخبرنا مُحَمَّد بن سلمة. قال: أنبأنا ابن القاسم، عن مالك. وفي 6/ 140، وفي `الكبرى` 5559 قال: أخبرنا مُحَمَّد بن عبد الأعلى. قال: حدثنا الُمعتمر. قال: سَمِعْتُ عبيد الله بن عمر. وفي 6/ 212، وفي `الكبرى` 5719 قال: حدَّثنا بشر بن خالد. قال: أنبأنا يحيى بن آدم، عن ابن إدريس، عن مُحَمَّد بن إسحاق، ويحيى بن سعيد، وعبيد الله بن عمر (ح) وأخبرنا زهير، عن موسى بن عقبة.
ستتهم (عبيد الله بن عمر ، ومالك، والليث بن سعد، ومُحَمَّد بن إسحاق، ويحيى بن سعيد الأنصاري، وموسى بن عقبة) عن نافع، فذكره.
- أخرجه أحمد 2/ 6 (4500) قال: حدَّثنا
إسماعيل، عن أيوب. وفي 2/ 64 (5321) قال: حدَّثنا عبد الوهاب بن عبد المجيد، عن أيوب. وفي 2/ 124 (6061) قال: حدَّثنا يونس، حدثنا ليث. و`البُخَاريّ` 7/ 75 (5332) قال: حدَّثنا قتيبة، حدثنا الليث. و`مسلم` 4/ 180 (3647) قال: حدَّثني زهير بن حرب، حدثنا إسماعيل، عن أيوب. و`أبو داود` 2180 قال: حدَّثنا قتيبة بن سعيد، حدثنا الليث. و`النَّسَائي` 6/ 213، وفي `الكبرى` 5720 قال: أخبرنا علي بن حجر. قال: أنبأنا إسماعيل، عن أيوب.
كلاهما (أيوب، وليث بن سعد) عَنْ نَافِعٍ ، أَنَّ ابْنَ عُمَرَ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ وَهْىَ حَائِضٌ فَسَأَلَ عُمَرُ النَّبِىَّ صلى الله عليه وسلم فَأَمَرَهُ أَنْ يَرْجِعَهَا ثُمَّ يُمْهِلَهَا حَتَّى تَحِيضَ حَيْضَةً أُخْرَى ثُمَّ يُمْهِلَهَا حَتَّى تَطْهُرَ ثُمَّ يُطَلِّقَهَا قَبْلَ أَنْ يَمَسَّهَا فَتِلْكَ الْعِدَّةُ الَّتِى أَمَرَ اللَّهُ أَنْ يُطَلَّقَ لَهَا النِّسَاءُ.
قَالَ: فَكَانَ ابْنُ عُمَرَ إِذَا سُئِلَ عَنِ الرَّجُلِ يُطَلِّقُ امْرَأَتَهُ وَهْىَ حَائِضٌ يَقُولُ أَمَّا أَنْتَ طَلَّقْتَهَا وَاحِدَةً أَوِ اثْنَتَيْنِ. إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَمَرَهُ أَنْ يَرْجِعَهَا ثُمَّ يُمْهِلَهَا حَتَّى تَحِيضَ حَيْضَةً أُخْرَى ثُمَّ يُمْهِلَهَا حَتَّى تَطْهُرَ ثُمَّ يُطَلِّقَهَا قَبْلَ أَنْ يَمَسَّهَا وَأَمَّا أَنْتَ طَلَّقْتَهَا ثَلَاثًا فَقَدْ عَصَيْتَ رَبَّكَ فِيمَا أَمَرَكَ بِهِ مِنْ طَلَاقِ امْرَأَتِكَ. وَبَانَتْ مِنْكَ.
- في رواية عبد الوهاب ، عن أيوب: وبانت منك ، وبنت منها.
- رواية أيوب والليث هذه ، عن نافع ، صورتها في أولها صورة المرسل ، إذا لم يقل نافع: عن ابن عمر) بل أرسله مباشرة: أن ابن عمر.
قال البخاري 7/ 56 (5264): قَالَ اللَّيْثُ ، عَنْ نَافِعٍ: كَانَ ابْنُ عُمَرَ إِذَا سُئِلَ عَمَّنْ طَلَّقَ ثَلَاثًا. قَالَ: لَوْ طَلَّقْتَ مَرَّةً ، أَوْ مَرَّتَيْنِ ، فَإِنَّ النَّبِىَّ صلى الله عليه وسلم أَمَرَنِى بِهَذَا، فَإِنْ طَلَّقْتَهَا ثَلَاثًا ، حَرُمَتْ حَتَّى تَنْكِحَ زَوْجًا غَيْرَكَ.
- وقال عقب رواية قتيبة (5332): وَزَادَ فِيهِ غَيْرُهُ عَنِ اللَّيْثِ حَدَّثَنِى نَافِعٌ قَالَ ابْنُ عُمَرَ لَوْ طَلَّقْتَ مَرَّةً أَوْ مَرَّتَيْنِ، فَإِنَّ النَّبِىَّ صلى الله عليه وسلم أَمَرَنِى بِهَذَا.
- رواية النسائي مختصرة على قول ابن عمر ، آخر الحديث.
ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত,
তিনি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর যুগে তাঁর স্ত্রীকে হায়িয অবস্থায় তালাক দিয়েছিলেন। অতঃপর উমার ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে সে সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলেন। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁকে বললেন, তুমি তাকে আদেশ দাও যেন সে তাকে ফিরিয়ে নেয় (রুযূ করে)। অতঃপর সে তাকে ছেড়ে রাখবে, যতক্ষণ না সে পবিত্র হয়, অতঃপর আবার তার হায়িয হয়, অতঃপর সে আবার পবিত্র হয়। এরপর যদি সে চায় তবে সে তাকে রেখে দেবে (তালাক দেবে না), আর যদি চায় তবে সহবাস করার পূর্বে তাকে তালাক দেবে। আর এটাই হলো সেই ইদ্দত যার ভিত্তিতে আল্লাহ তা‘আলা নারীদের তালাক দিতে নির্দেশ দিয়েছেন।
নাফি’ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে যখন কোনো ব্যক্তি তার স্ত্রীকে হায়িয অবস্থায় তালাক দেওয়া সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করত, তখন তিনি বলতেন: যদি তুমি তাকে এক বা দুই তালাক দিয়ে থাকো, তবে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে (অর্থাৎ আমাকে) নির্দেশ দিয়েছিলেন যেন সে তাকে ফিরিয়ে নেয়। অতঃপর সে তাকে সুযোগ দেবে যতক্ষণ না তার পরবর্তী হায়িয হয়, অতঃপর সে তাকে সুযোগ দেবে যতক্ষণ না সে পবিত্র হয়, অতঃপর সহবাস করার পূর্বে সে তাকে তালাক দেবে। আর যদি তুমি তাকে তিন তালাক দিয়ে থাকো, তবে তুমি তোমার রবের সেই আদেশের অবাধ্য হয়েছো যা তিনি তোমার স্ত্রীকে তালাক দেওয়ার বিষয়ে দিয়েছিলেন। আর সে তোমার থেকে বিচ্ছিন্ন হয়ে গেছে (বাইন হয়ে গেছে)।
7699 - عَنْ أَنَسِ بْنِ سِيرِينَ أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ عُمَرَ قَالَ:
طَلَّقْتُ امْرَأَتِى وَهْىَ حَائِضٌ فَأَتَى عُمَرُ النَّبِىَّ صلى الله عليه وسلم فَأَخْبَرَهُ فَقَالَ «مُرْهُ فَلْيُرَاجِعْهَا ثُمَّ إِذَا طَهَرَتْ فَلْيُطَلِّقْهَا.
قُلْتُ لاِبْنِ عُمَرَ أَفَاحْتَسَبْتَ بِتِلْكَ التَّطْلِيقَةِ قَالَ فَمَهْ؟!.
أخرجه أحمد 1/ 43 (354) قال: حدثنا يزيد، أنبأنا عبد الملك.
وفي 2/ 61 (5268) قال: حدثنا عبد الرحمن بن مَهْدي، وبهز. قالا: حدثنا شعبة. وفي 2/ 74 (5434) قال: حدثنا بهز، حدثنا شعبة. وفي 2/ 78 (5489) قال: حدثنا مُحَمَّد بن جعفر، حدثنا شعبة. وفي 2/ 128 (6119) قال: حدَّثنا مُحَمَّد بن عبيد، حدثنا عبد الملك، يعني ابن أبي سليمان. و`البُخَارِي` 7/ 52 (5252) قال: حدثنا سليمان بن حرب، حدثنا شعبة. و`مسلم` 4/ 182 (3657) قال: حدَّثنا يحيى بن يحيى، أخبرنا خالد بن عبد الله، عن عبد الملك. وفي (3658) قال: حدثنا مُحَمَّد بن المثنى، وابن بشار. قال ابن المثنى: حدثنا مُحَمَّد بن جعفر، حدثنا شعبة. وفي (3659) قال: وحدثنيه يحيى بن حَبيب، حدثنا خالد بن الحارث (ح) وحدثنيه عبد الرحمن بن بشر، حدثنا بهز. قالا: حدثنا شعبة.
كلاهما (عبد الملك، وشعبة) عن أنس بن سيرين، فذكره.
- في رواية أحمد (5434) قال شعبة: أخبرني ، إن شاء الله ، أنس بن سيرين.
ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি আমার স্ত্রীকে ঋতু অবস্থায় তালাক দিয়েছিলাম। অতঃপর উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট এসে তাঁকে এ বিষয়ে জানালেন। তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, “তাকে (ইবনু উমারকে) আদেশ দাও, সে যেন তাকে ফিরিয়ে নেয়। এরপর যখন সে পবিত্র হবে, তখন সে তাকে তালাক দেবে।” (রাবী আনাস ইবনু সীরীন বলেন) আমি ইবনু উমারকে জিজ্ঞেস করলাম, আপনি কি সেই তালাকটি গণনা করেছিলেন? তিনি বললেন, “তবে আর কী?!”
7700 - عَنْ سَالِمٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ؛
أَنَّهُ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ وَهْىَ حَائِضٌ فَذَكَرَ ذَلِكَ عُمَرُ لِلنَّبِىِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ «مُرْهُ فَلْيُرَاجِعْهَا ثُمَّ لْيُطَلِّقْهَا طَاهِرًا أَوْ حَامِلاً.
أخرجه أحمد 2/ 26 (4789) و 2/ 58 (5228) قال: حدثنا وكيع. و`الدارِمِي` 2263 قال: حدثنا عُبيد الله بن موسى. و`مسلم` 4/ 181 (3650) قال: حدثنا أبو بكر بن أبي شَيْبة، وزُهير بن حرب، وابن نُمَيْر، قالوا: حدثنا وكيع. و`أبو داود` 2181 قال: حدثنا عثمان بن أبي شَيْبة. قالا: حدثنا وكيع. و`ابن ماجة` 2023 قال: حدَّثنا أبو بكر بن أبي شيبة، وعلي بن مُحَمَّد. والتِّرْمِذِيّ` 1176 قال: حدَّثنا هناد، حدثنا وكيع. و`النَّسائي` 6/ 141، وفي `الكبرى` 5560 قال: أخبرنا محمود بن غَيْلان، قال: حدثنا وكيع.
كلاهما (وكيع، وعُبيد الله بن مُوسى) عن سُفْيان الثوري، عن مُحَمَّد بن عبد الرحمن مولى آل طلحة، عن سالم بن عبد الله، فذكره.
- قال الدارمي: رواه ابن المبارك، ووكيع: أو حامل.
- في رواية محمود بن غيلان: مُحَمَّد بن عبد الرحمن مولى طلحة.
ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, যে তিনি তাঁর স্ত্রীকে ঋতুমতী অবস্থায় তালাক দিয়েছিলেন। অতঃপর উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বিষয়টি নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে উল্লেখ করলেন। তিনি (নবী) বললেন, "তাকে নির্দেশ দাও যেন সে স্ত্রীকে ফিরিয়ে নেয় (তালাক প্রত্যাহার করে)। অতঃপর সে যেন তাকে পবিত্র অবস্থায় অথবা গর্ভবতী অবস্থায় তালাক দেয়।"
7701 - عن سَالِمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ قَالَ:
طَلَّقْتُ امْرَأَتِى فِى حَيَاةِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَهِىَ حَائِضٌ. فَذَكَرَ ذَلِكَ عُمَرُ لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَتَغَيَّظَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِى ذَلِكَ فَقَالَ «لِيُرَاجِعْهَا ثُمَّ يُمْسِكْهَا حَتَّى تَحِيضَ حَيْضَةً وَتَطْهُرَ فَإِنْ بَدَا لَهُ أَنْ يُطَلِّقَهَا طَاهِرًا قَبْلَ أَنْ يَمَسَّهَا فَذَاكَ الطَّلَاقُ لِلْعِدَّةِ كَمَا أَنْزَلَ اللَّهُ عز وجل.
قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ فَرَاجَعْتُهَا وَحَسِبْتُ لَهَا التَّطْلِيقَةَ الَّتِى طَلَّقْتُهَا.
أخرجه أحمد 2/ 61 (5270) و 2/ 81 (5525) قال: حدثنا روح، حدثنا مُحَمَّد بن أبي حفصة. وفي 2/ 130 (6141) قال: حدثنا يعقوب، أخبرني ابن أخي ابن شهاب. و`البُخَارِي` 6/ 193 (4908) قال: حدثنا يحيى بن بُكير، حدثنا الليث، حدثني عُقيل. وفي 9/ 82 (7160) قال: حدثنا مُحَمَّد بن أبي يعقوب الكِرْماني، حدثنا حَسَّان بن إبراييم، حدثنا يونس. و`مسلم` 4/ 180 (3648) قال: حدثني عَبد بن حُميد، أخبرني يعقوب بن إبراهيم، حدثنا مُحَمَّد وهو ابن أخي الزهري. وفي 4/ 181 (3649) قال: وحدثنيه إسحاق بن منصور، أخبرنا يزيد بن عبد ربه، حدثنا مُحَمَّد بن حرب، حدثني الزُّبيدي. و`أبو داود` 2182 قال: حدثنا أحمد بن صالح، حدثنا عَنْبَسَة، حدثنا يونس. و`النَّسائي` 6/ 138، وفي `الكبرى` 5554 قال: أخبرني كثير بن عُبيد، عن مُحَمَّد بن حرب، قال: حدثنا الزبيدي.
خمستهم (مُحَمَّد بن أبي حفصة، وابن أخي ابن شهاب، وعُقيل، ويونس، ومُحَمَّد بن الوليد الزبيدي) عن ابن شهاب الزهري، أخبرني سالم بن عبد الله، فذكره.
আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর জীবদ্দশায় আমার স্ত্রীকে তালাক দিয়েছিলাম যখন সে ছিল হায়েয অবস্থায়। তখন উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বিষয়টি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে উল্লেখ করলেন। এতে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) রাগান্বিত হলেন। অতঃপর তিনি বললেন, "সে যেন তাকে ফিরিয়ে নেয় (রুজু করে), তারপর তাকে যেন ধরে রাখে যতক্ষণ না সে আরও একবার হায়েয হয় এবং পবিত্র হয়। অতঃপর যদি সে (স্বামী) তাকে স্পর্শ করার পূর্বে পবিত্র অবস্থায় তালাক দিতে চায়, তবে এটাই হলো ইদ্দত অনুযায়ী তালাক, যেমন আল্লাহ আযযা ওয়া জাল নাযিল করেছেন।" আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, অতঃপর আমি তাকে ফিরিয়ে নিলাম এবং যে তালাকটি দিয়েছিলাম, সেটি তার জন্য একটি তালাক হিসেবেই গণ্য করলাম।
7702 - عَنْ سَالِمٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ؛
أَنَّهُ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ وَهِىَ حَائِضٌ فَأَمَرَهُ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَرَاجَعَهَا.
أخرجه النسائي 6/ 213، وفي `الكبرى` 5721 قال: أخبرنا يوسف بن عيسى، مروزي، قال: حدثنا الفضل بن موسى، قال: حدثنا حنظلة، عن سالم، فذكره.
- أخرجه أحمد 2/ 61 (5272) قال: حدثنا روح ، عن حَنْظَلَةُ بن أبي سُفْيان ، سَمِعْتُ سَالِمًا وَسُئِلَ عَنْ رَجُلٍ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ وَهِىَ حَائِضٌ فَقَالَ لَا يَجُوزُ طَلَّقَ ابْنُ عُمَرَ امْرَأَتَهُ وَهِىَ حَائِضٌ فَأَمَرَهُ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ يُرَاجِعَهَا فَرَاجَعَهَا. مرسل.
- ولفظ ابن داود: عن سالم أن ابْنَ عُمَرَ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ ، وَهِىَ حَائِضٌ ، فأمره رسول الله صلى الله عليه وسلم أن يراجعها. مرسل.
ইবনে উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি তাঁর স্ত্রীকে ঋতুস্রাব চলাকালীন তালাক দিয়েছিলেন। অতঃপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁকে আদেশ করলেন, ফলে তিনি তাকে ফিরিয়ে নিলেন (রাজ‘আত করলেন)।
